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पहलगाम आतंकी हमले पर यशवंत सिन्हा का बयान, अब तिरंगा यात्रा आदि निकालकर भाजपा खुद क्रेडिट लेना चाहती है

नई दिल्ली पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पैदा हुई स्थिति का फायदा उठाने का आरोप भाजपा पर लगाया है। उन्होंने कहा कि बिहार का चुनाव आ रहा है। पुलवामा हुआ तो चुनाव आ रहा था। पुरी में अटैक में हुआ तो उसके बाद सर्जिकल स्ट्राइक हुआ और पूरी तरह फायदा उठाया गया। पुलवामा अटैक के नाम पर पीएम मोदी ने वोट मांगा था। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पुलवामा के शहीदों के नाम पर वोट करें। इसलिए जो कुछ हुआ है, उसको लेकर मैं मानता हूं कि बिहार चुनाव को लेकर किया जा रहा है। अब तिरंगा यात्रा आदि निकालकर भाजपा खुद क्रेडिट लेना चाहती है। राष्ट्रपति का चुनाव लड़ चुके यशवंत सिन्हा ने कपिल सिब्बल के साथ पॉडकास्ट में कहा कि भाजपा के लोग अब यह कहना शुरू कर चुके हैं कि नरेंद्र मोदी ने कमाल कर दिया है। वहीं कपिल सिब्बल ने कहा कि आखिर यह क्यों नहीं पूछा जा रहा है कि 26 नागरिकों की हत्या का जिम्मेदार कौन है। इस पर यशवंत सिन्हा ने कहा कि पुलवामा का खुलासा आज तक नहीं हुआ। इसी तरह पहलगाम आतंकी हमले का भी खुलासा कभी नहीं होगा। यशवंत सिन्हा ने कहा कि आखिर पहलगाम में एक भी सिपाही सुरक्षा के लिए क्यों नहीं था। वे लोग भाग गए और उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी। आखिर वे कहां चले गए। उन्हें जमीन खा गई या फिर आसमान। कपिल सिब्बल ने कहा कि भारत सरकार का कहना है कि पाकिस्तान के साथ पीओके और आतंकवाद पर ही बात हो सकती है। इस तरह रहा तो फिर पाकिस्तान के साथ बात नहीं हो सकेगी। कपिल सिब्बल के इसी सवाल के जवाब में यशवंत सिन्हा ने यह टिप्पणी की और सोशल मीडिया पर उनका बयान ट्रेंड हो रहा है। कई यूजर्स ने यशवंत सिन्हा के बयान की निंदा की है। सीजफायर के फैसले पर भी यशवंत सिन्हा का सवाल सीजफायर के फैसले पर भी यशवंत सिन्हा ने भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कहा जा रहा है कि डीजीएमओ से पाक के उनके समकक्ष ने बात की थी। इस दौरान पाकिस्तान ने सीजफायर की गुहार लगाई थी। लेकिन ऐलान डोनाल्ड ट्रंप की ओर से क्यों हुआ। आखिर ट्रंप के बयान से पहले भारत ने कुछ क्यों नहीं कहा। अब तक इस मामले में नरेंद्र मोदी खामोश हैं।

मंत्री छगन भुजबल ने कहा- मुझे जो भी विभाग कार्य करने के लिए दिया जाएगा, मुझे वह स्वीकार होगा

मुंबई महाराष्ट्र सरकार में मंगलवार को मंत्री पद की शपथ लेने के बाद एनसीपी के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने कहा कि मंत्री पद की शपथ ली है। मुझे कौन सा विभाग मिलेगा, इसके बारे में मैं कैसे कह सकता हूं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तय करेंगे कि मुझे कौन सा विभाग मिलेगा। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि मुख्यमंत्री की ओर से मुझे जो भी विभाग कार्य करने के लिए दिया जाएगा, मुझे वह स्वीकार होगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज के लिए मैं बीते 25 वर्षों से कार्य कर रहा हूं। पूर्व में मैंने जातिगत जनगणना की मांग को लेकर कई रैलियां की। मुझे खुशी इस बात की है कि केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना के लिए स्वीकृति दे दी है। देवेंद्र फडणवीस के मंत्रिमंडल का हिस्सा बनने के बाद भुजबल ने कहा, “मैं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, दोनों उपमुख्यमंत्रियों के साथ-साथ प्रफुल्ल पटेल का भी आभार व्यक्त करता हूं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भी आभार व्यक्त करता हूं। इसके साथ ही मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र के सभी लोगों, कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों, समता परिषद के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का भी आभार व्यक्त करता हूं। मैं उन सभी का भी आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने अब तक मुझे प्यार और स्नेह दिया है।” भुजबल को खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग मिलने की उम्मीद है, उन्होंने इससे पहले इस विभाग की जिम्मेदारी उद्धव ठाकरे और फिर एकनाथ शिंदे (2019-24) के नेतृत्व वाली पिछली सरकारों में संभाली थी। बता दें कि 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था, लेकिन भुजबल को मंत्री पद नहीं दिया था। इससे आहत भुजबल ने पार्टी नेतृत्व के समक्ष अपनी नाराजगी खुले तौर पर जाहिर की थी और कहा था कि पिछले साल विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के ओबीसी मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने के बावजूद उनके बारे में विचार नहीं किया गया।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर राहुल गांधी के सरकार से सवाल पूछने पर रामदास आठवले ने कहा- पाकिस्तान की भाषा बोल रहे

दमन केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले मंगलवार को केंद्र शासित प्रदेश दादर एवं नागर हवेली और दमन एवं दीव के दौरे पर पहुंचे। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सरकार से सवाल पूछने पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं। आठवले ने कहा कि ऐसी ही भाषा का इस्तेमाल करके राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी का नुकसान किया है। ऐसे समय में सबको पीएम मोदी के साथ खड़ा रहना चाहिए, चाहे पक्ष हो या विपक्ष। लेकिन विपक्षी दल कभी कहता है कि हम सब साथ हैं और अगले ही क्षण वह सबूत मांगने लगता है। अगर वह इसी तरह से पाकिस्तान के सपोर्ट में रहेंगे, तो पाकिस्तान उनको अवॉर्ड दे सकता है। उल्लेखनीय है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता को लेकर विपक्ष संसद का विशेष सत्र बुलाने और इस ऑपरेशन के बारे में विस्तार से चर्चा की मांग कर रहा है। पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में पकड़ी गई हरियाणा की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि देश में कुछ जासूस मिले हैं जो पाकिस्तान के लिए काम कर रहे थे। हरियाणा की ज्योति मल्होत्रा जैसे गद्दार हैं जो देशहित में काम नहीं करते। देश में रहकर भी पाकिस्तान के लिए जासूसी करते हैं। ये सब आईएसआई के एजेंट हैं। उन पर सरकार को शिकंजा कसना जरूरी है। उन्होंने दादरा एवं नागर हवेली और दमन एवं दीव को राज्य का दर्जा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस मांग को लेकर वह जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। यहां की जनसंख्या को देखते हुए राज्य बनाना कुछ कठिन जरूर होगा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित राज्य में गुजरात के वलसाड जिले को भी शामिल किया जाना चाहिए।

कुछ लोग पाकिस्तान के पाखंडी प्रोपेगेंडा के प्रॉक्सी प्रमोटर्स की भूमिका निभा रहे हैं, जो ठीक नहीं है: मुख्तार अब्बास नकवी

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ‘भारत के विमानों के लापता होने’ को लेकर सवाल उठाया। एक्सपर्ट्स ने उनके प्रश्न पर हैरानी जताई तो भाजपा नेता उनकी समझ पर अफसोस कर रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मुख्तार अब्बास नकवी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे अब हमारी सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी सवाल उठा रहे हैं। भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “कुछ लोग पाकिस्तान के पाखंडी प्रोपेगेंडा के प्रॉक्सी प्रमोटर्स की भूमिका निभा रहे हैं, जो ठीक नहीं है। यह वही लोग हैं, जो कभी देश के संविधान पर, तो कभी संसद पर, तो कभी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करते हैं। अब वे सेना और हमारी सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। वे बुरी स्थिति में हैं। अब जो प्रतिनिधिमंडल विदेश जा रहा है, वह किसी पार्टी का नहीं, बल्कि देश का प्रतिनिधिमंडल है। जो देश की बात रखने जा रहा है, न कि किसी राजनीतिक पार्टी की बात रखेगा। अक्ल के दुश्मनों को समझ नहीं आ रहा है और वे सिर्फ सवाल करने की प्रतिस्पर्धा में लगे हुए हैं। यह उनकी सियासत के लिए हानिकारक है।” पाकिस्तान द्वारा भारत की नकल करते हुए विदेश में प्रतिनिधिमंडल भेजने पर मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, “पाकिस्तान विदेश क्यों जा रहा है? क्या यह बताने जा रहा है कि उसके आतंकी कारखाने शांति के प्रतीक बन रहे हैं? क्या वे यह कहने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके आतंकवाद के कारखाने अब सद्भाव की खाद पैदा कर रहे हैं?” उन्होंने आगे कहा, “क्या वे यह स्वीकार करेंगे कि उन्होंने आतंकवाद को बढ़ावा दिया और उसे संरक्षण दिया और अब उसे सुधार रहे हैं? नकल करने के लिए भी बुद्धि की आवश्यकता होती है। दुनिया में कौन उन पर विश्वास करेगा? पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर केवल शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा।” सुप्रीम कोर्ट में वक्फ मामले की सुनवाई पर भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, “वक्फ संशोधन को इसके तार्किक अंत तक पहुंचना चाहिए, यह जरूरी है क्योंकि वक्फ व्यवस्था में मौजूद असंवैधानिक अराजकता और मनमानी को संवैधानिक प्रतिबद्धता के दायरे में लाना आवश्यक है। इस अराजकता को संवैधानिक व्यवस्था से बदलना महत्वपूर्ण है। कुछ लोग इस मामले को लेकर कोर्ट गए हैं और मुझे विश्वास है कि जो भी फैसला होगा, वह राष्ट्रीय हित में होगा।”

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा- सत्ता पक्ष गंभीर मुद्दों पर भी ‘कार्टूनगिरी’ करता है

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने 6-7 मई की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान और POK में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस ऑपरेशन की सफलता को लेकर देशभर में सरकार की तारीफ हो रही है, लेकिन इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। राहुल गांधी के सवालों से शुरू हुआ विवाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से सवाल किए। राहुल ने कहा कि अगर पाकिस्तान को पहले से हमले की जानकारी दी गई थी, तो कितने एयरक्राफ्ट नुकसान में गए? उन्होंने इसे ‘सिर्फ चूक नहीं बल्कि एक अपराध’ करार दिया और पूछा कि इस हमले की जानकारी पाकिस्तान को देने की मंजूरी किसने दी? राहुल गांधी ने विदेश मंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि देश को सच्चाई जानने का हक है। बीजेपी का पलटवार – अमित मालवीय ने किया तंज बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक कार्टून शेयर करते हुए लिखा कि राहुल गांधी पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं। अमित ने कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री या सेना को ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर बधाई तक नहीं दी, बल्कि लगातार यह पूछते रहे कि हमने कितने एयरक्राफ्ट गंवाए। मालवीय ने सवाल किया, ‘राहुल गांधी को क्या अगला ”निशान-ए-पाकिस्तान” सम्मान मिलने वाला है?’ कांग्रेस का जवाब – पवन खेड़ा का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पलटवार करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष गंभीर मुद्दों पर भी ‘कार्टूनगिरी’ करता है। उन्होंने कहा, ‘हम सेना के साथ हैं, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व पर भरोसा नहीं है। पहलगाम हमले के दोषी आतंकी भाग गए, उनका क्या हुआ?’ खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि ‘निशान-ए-पाकिस्तान’ तो उन्हें मिलना चाहिए जो नवाज शरीफ की बिरयानी खाकर लौटे थे। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें पाकिस्तान ने यह सम्मान दिया था। साथ ही उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी और उस व्यक्ति की भी बात की, जो बिना बुलाए पाकिस्तान पहुंचा था। खेड़ा ने विदेश मंत्री जयशंकर पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने खुद कहा था कि पाकिस्तान को बताया गया था कि हम सिर्फ आतंकी ठिकानों पर हमला कर रहे हैं। तो सवाल उठता है कि यह जानकारी क्यों दी गई और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है? सेना की प्रतिक्रिया – सभी पायलट सुरक्षित 11 मई को एयर मार्शल एके भारती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि भारत युद्ध जैसी स्थिति में है और नुकसान इस प्रक्रिया का हिस्सा होता है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का लक्ष्य पूरी तरह से सफल रहा है। हालांकि, उन्होंने नुकसान या रणनीतिक जानकारी साझा करने से इनकार किया ताकि कोई भी संवेदनशील जानकारी दुश्मन के हाथ न लगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के सभी पायलट सुरक्षित लौट आए हैं।

केंद्र सरकार से सीजफायर के पीछे की परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय भूमिका को लेकर जवाबदेही की मांग की: सचिन पायलट

जयपुर राजस्थान के टोंक से विधायक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से भारत-पाकिस्तान सीजफायर के पीछे की परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय भूमिका को लेकर जवाबदेही की मांग की। जयपुर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने अमेरिका, IMF और पाकिस्तान के बीच हुए हालिया घटनाक्रमों पर गंभीर सवाल उठाए। सीजफायर के ऐलान के तुरंत बाद उल्लंघन पर जताई नाराजगी सचिन पायलट ने कहा कि जैसे ही अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम की घोषणा की, पाकिस्तान ने उस समझौते का तुरंत उल्लंघन कर दिया। उन्होंने कहा, “ऐसे में भारत को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस समझौते के बदले क्या रणनीतिक या राजनीतिक आश्वासन मिले हैं। केवल अमेरिका के भरोसे भारत की सुरक्षा रणनीति नहीं चल सकती।” IMF से पाकिस्तान को मिले कर्ज पर जताई चिंता उन्होंने यह भी चिंता जताई कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान को बड़ी वित्तीय सहायता प्रदान की है, और अमेरिका द्वारा व्यापारिक संबंधों के विस्तार की बातें की जा रही हैं। “क्या कोई ठोस गारंटी है कि यह पैसा आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं होगा? सरकार को जनता को बताना चाहिए कि उसे किन शर्तों के साथ यह समझौता करना पड़ा,” पायलट ने सवाल किया। ‘कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाना दुर्भाग्यपूर्ण’   कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका की टिप्पणी की आलोचना करते हुए पायलट ने कहा कि आतंकवाद और कश्मीर के मुद्दों को एक ही तराजू में तौलना गलत है। उन्होंने कहा, “कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है। इसे भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मसले के रूप में ही देखा जाना चाहिए। दुर्भाग्य से, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे नया रंग देने की कोशिश की जा रही है, जो अस्वीकार्य है।” अमेरिकी बयानों को हल्के में न लेने की चेतावनी पायलट ने अमेरिका द्वारा हाल ही में दिए गए बयानों को नजरअंदाज करने के खिलाफ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी समझौता किसी दबाव, डर या आर्थिक मजबूरी में न किया गया हो। राष्ट्रपति ट्रंप तीन बार कह चुके हैं कि इस समझौते के पीछे व्यापारिक हित थे। ऐसे बयानों को नकारना सही नहीं होगा।” भारत-पाकिस्तान की तुलना पर जताई आपत्ति अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत और पाकिस्तान की तुलना किए जाने पर सचिन पायलट ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “भारत और पाकिस्तान की तुलना करना मूर्खता है। भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान की तुलना में 11 गुना बड़ी है। पाकिस्तान एक अस्थिर देश है, जहां प्रधानमंत्री जेल में हैं, निर्वाचित प्रतिनिधियों को बंद किया जा रहा है और सेना व ISI ही देश चला रहे हैं। ऐसे में भारत को उनके साथ समान स्तर पर रखना पूरी तरह अनुचित है।”  

राहुल गांधी नए युग के मीर जाफर हैं, आसिम मुनीर संग हाफ फोटो शेयर कर अमित मालवीय ने साधा निशाना

नई दिल्ली पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया. इस ऑपरेशन की सफलता को लेकर एक तरफ जहां सरकार देश-विदेश में अभियान चला रही है. वहीं राहुल गांधी इस ऑपरेशन का हिसाब-किताब मांगने में जुटे हैं. ऐसे में अब बीजेपी नेता ने राहुल गांधी की तुलना मीर जाफर से कर दी है. बीजेपी आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने कहा कि यह चौंकाने वाला नहीं है कि राहुल गांधी पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को लेकर प्रधानमंत्री को बधाई भी नहीं दी. इसके बजाए वह बार-बार पूछ रहे हैं कि हमने कितने एयरक्राफ्ट गंवा दिए जबकि इस सवाल का जवाब डीजीएमओ की ब्रीफिंग में पहले से दिया जा चुका है. मालवीय ने कहा कि राहुल ने हालांकि एक बार भी ये जानने की कोशिश नहीं की कि इस संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के कितने जेट मार गिराए गए या फिर कितनों को नष्ट किया गया. राहुल गांधी को आगे क्या मिलेगा? निशान-ए-पाकिस्तान? क्या है पूरा मामला? बता दें कि इस पोस्ट के साथ अमित मालवीय ने एक तस्वीर भी पोस्ट की है, जिसमें आधा चेहरा पाकिस्तानी सेना के चीफ आसिम मुनीर का और आधा चेहरा राहुल गांधी का नजर आ रहा है. वह एक और पोस्ट कर कहते हैं कि राहुल गांधी नए युग के मीर जाफर हैं. पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया. इस पूरे ऑपेरशन को लेकर राहुल गांधी बार-बार पूछ रहे हैं कि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान भारत के कितने एयरक्राफ्ट को नुकसान पहुंचा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विदेश मंत्री जयशंकर से सवाल करते हुए कहा था कि विदेश मंत्री जयशंकर चुप है. उनकी यह चुप्पी बहुत कुछ कह रही है. ये निंदनीय है. इसलिए मैं दोबारा पूछूंगा कि पाकिस्तान को हमले का पता होने की वजह से हमने कितने एयरक्राफ्ट खो दिए? यह सिर्फ चूक नहीं थी. यह अपराध था और देश को सच्चाई जानने का हक है. इससे पहले भी राहुल गांधी ने जयशंकर पर निशाना साधते हुए कहा था कि हमला करने से पहले पाकिस्तान को बताना एक अपराध है. विदेश मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर इसे स्वीकार किया है. इसकी मंजूरी किसने दी? हमने कितने एयरक्राफ्ट खोए? इससे पहले 11 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एयर मार्शल एके भारती ने कहा था कि हम युद्ध की स्थिति में है और नुकसान इसका एक हिस्सा है. सवाल ये है कि क्या हमने अपना उद्देश्य हासिल कर लिया है? इसक जवाब है हां. उन्होंने कहा कि इससे जुड़ी डिटेल पर वह फिलहाल टिप्पणी नहीं कर सकते क्योंकि हम अभी भी युद्ध की स्थिति में है और ऐसी कोई भी जानकारी दुश्मनों के हाथ लगाना सही नहीं है. एयर मार्शल ने कहा कि भारत के सभी पायलट सुरक्षित लौट आए हैं. विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था कि हमने ऑपरेशन की शुरुआत में पाकिस्तान सरकार को मैसेज भेजा था कि हम आतंकी ठिकानों को निशाना बना रहे थे लेकिन हम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा. ऐसे में सेना के पास पीछे हटने और हस्तक्षेप नहीं करने का विकल्प है. पाकिस्तान ने इस सलाह को नहीं सुनने में ही अपनी भलाई समझी. बता दें कि मीर जाफर बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला का सेनापति था, जिसने प्लासी के युद्ध में सिराजुद्दौला के खिलाफ ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का साथ देकर विश्वासघात किया था.  

ऑपरेशन सिंदूर वाली टीम के लिए ममता बनर्जी ने दी सहमति, विदेश दौरे में TMC से अभिषेक होंगे शामिल

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर का सच दुनिया के सामने रखने और पाकिस्तान को बेनकाब करने के लिए विदेश दौरा करने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में टीएमसी से अभिषेक बनर्जी शामिल होंगे। सूत्रों का कहना है कि टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी अभिषेक बनर्जी को भेजने पर सहमत हो गई हैं। इससे पहले ममता बनर्जी ने इस प्रतिनिधिमंडल से दूरी बना ली थी। खबर यह भी थी कि उन्होंने यूसुफ पठान को भी जाने से रोक दिया था। मोदी सरकार की इस टीम में यूसुफ पठान का नाम शामिल किया गया था। जानकारी के मुताबिक केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने खुद इस मामले में ममता बनर्जी से बात की थी। उन्होंने टीएमसी की तरफ से प्रतिनिधि को लेकर फैसला लेने की अपील की थी। ममता बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से निपटने के भारत के रुख को सामने रखने के लिए गठित केंद्र के बहुदलीय राजनयिक मिशन का बहिष्कार नहीं कर रही हैं और केंद्र से औपचारिक अनुरोध प्राप्त होने पर अपने प्रतिनिधि भेजेंगी। टीएमसी ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रतिनिधिमंडलों में पार्टी के उम्मीदवार का फैसला केंद्र को नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘अगर अनुरोध हमारे पास आता है, तो निश्चित रूप से हम इस पर विचार कर सकते हैं। हम हमेशा केंद्र सरकार की नीति (विदेश मामलों पर) का समर्थन करते हैं। अगर कुछ खास होगा, तो हम इस पर विचार करेंगे, लेकिन अभी नहीं। फिलहाल, हम केंद्र सरकार के विचारों और उनके द्वारा उठाए गए कदमों का समर्थन कर रहे हैं।’ बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार को किसी पार्टी के प्रतिनिधियों को चुनने का कोई अधिकार नहीं है। इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ देश की कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति के रुख को सभी के सामने रखने के लिए पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के परिजनों या ऑपरेशन सिंदूर का नेतृत्व करने वाले सशस्त्र बलों के अधिकारियों को विदेश भेजना चाहिए। तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव ने संवाददाताओं के सामने दोहराया कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय हित, सीमा पार आतंकवाद का मुकाबला करने और संप्रभुता की रक्षा के मामलों में सरकार के साथ खड़ी है। अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘हालांकि, जहां तक संसदीय प्रतिनिधिमंडलों का सवाल है केंद्र एकतरफा फैसला नहीं कर सकता कि किस पार्टी से किसे चुना जाएगा। उन्हें नाम मांगने होंगे और सभी राजनीतिक दलों, खासकर विपक्षी खेमे के साथ व्यापक विचार-विमर्श की व्यवस्था करनी होगी।’ डायमंड हार्बर के सांसद ने कहा था कि अगर पार्टी से संपर्क किया जाता है, तो तृणमूल ‘‘निश्चित रूप से’’ अपने सदस्यों को प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में भेजेगी। बता दें कि केंद्र जो टीम बनाई है उसमें कांग्रेस से शशि थरूर, जेडीयू से संजय झा, बीजेपी से रविशंकर प्रसाद, डीएमके से कनिमोझी और एनसीपी-एसपी से सुप्रिया सुले का नाम शामिल है। 

सरकार ने बनाई मंत्री विजय शाह से दूरी, तबादला फाइलों पर लगाया ब्रेक

इंदौर  मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट मीटिंग इंदौर में हो रही है। माता अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती पर इंदौर के राजवाड़ा में मोहन कैबिनेट की मीटिंग हो रही है। कैबिनेट की मीटिंग से पहले राजवाड़ा में सीएम मोहन यादव ने मंत्रियों के साथ ग्रुप फोटो खींचवाई है। इस ग्रुप फोटो पर सबकी निगाहें टिकी थी कि विवादित मंत्री विजय शाह इसमें दिखेंगे या नहीं। सरकार की तरफ से जारी तस्वीरों में विजय शाह कही नहीं दिख रहे हैं। वह मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री हैं। कैबिनेट मीटिंग में नहीं पहुंचे विजय शाह इंदौर के राजवाड़ा में मोहन सरकार की ऐतिहासिक कैबिनेट मीटिंग हो रही है। तमाम मंत्री और सीएम मोहन यादव एक दिन पहले ही इंदौर पहुंच गए हैं। वहीं, मालवा क्षेत्र से आने वाले विजय शाह कैबिनेट की मीटिंग में नहीं पहुंचे हैं। उन पर इसलिए सबकी निगाहें टिकी है कि उन्होंने हाल ही में कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर केस दर्ज हुआ है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी है। सरकार ने बनाई दूरी या खुद नहीं आए मंत्री विजय शाह के कैबिनेट मीटिंग में नहीं पहुंचने को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। क्या विजय शाह खुद ही कैबिनेट की मीटिंग में नहीं आए या फिर सरकार उनसे खुद ही दूरी बना ली। क्योंकि इंदौर में अगर कैबिनेट की मीटिंग में पहुंचते तो सारा ध्यान उन्हीं की ओर चला जाता था। साथ ही मामला और तूल पकड़ सकता था। ऐसे में अटकले हैं कि विजय शाह को इस मीटिंग से दूर रखकर सुरक्षित रास्ता निकाला गया है। ग्रुप फोटो में नहीं दिखे राजवाड़ा में हो रही कैबिनेट मीटिंग को मोहन सरकार ऐतिहासिक बनाने में जुटी है। कैबिनेट मीटिंग से पहले राजवाड़ा के बाहर सीएम मोहन यादव ने अपने सभी मंत्रियों के साथ तस्वीर खींचवाई है। इस तस्वीर में भी विजय शाह नहीं दिखे हैं। इसके बाद ही साफ हो गया कि विजय शाह कैबिनेट की मीटिंग में नहीं आएंगे। दो जिलों के कर्मचारी परेशान मंत्री शाह के कार्यालय में फाइलें शासकीय सेवकों के तबादलों से जुड़ी है, जिन पर मंत्री को अनुशंसा करनी है। मोहन सरकार ने इस तरह से फाइलें रोकने का कोई अभी तक लिखित कारण नहीं बताया है।  जहां सरकार ने मंत्री शाह के विवादों में गिरने के बाद कन्नी काटी है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हुई सुनवाई में स्पेशल जांच टीम बनाकर जांच कराने के आदेश दिए है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद असर सूत्रों के मुताबिक आवेदनों के आधार पर कई नस्तियां जिलों व विभाग में तैयार भी हो गई, लेकिन मंत्री की अनुशंसा से पहले अटक गई। हालांकि मंत्री को फाइलें करने में फिलहाल कोई कानूनी अड़चन नहीं है, लेकिन नैतिकता के तौर पर उनके कामकाज करने को लेकर गलत ठहराया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अब मंत्री की फाइलों को आगे बढ़ाने से पहले सामान्य प्रशासन विभाग से राय लेंगे। दोनों जिलों को मिलाकर 1 हजार आवेदन प्रक्रिया में हैं, जिस पर मंत्री की अनुशंसा लग रही है। तबादले की प्रक्रिया 30 मई तक पूरी होनी है । कोर्ट ने मंत्री की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए,  दर्ज FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि शाह को इस मामले में माफी नहीं मिलेगी। बल्कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्टे ने निर्देश देते हुए कहा कि, इस टीम में तीन IPS अधिकारी होंगे, इनमें एक IG और बाकी दो SP लेवल के अफसर शामिल होंगे। इनमें से एक अधिकारी अनिवार्य रूप से महिला होगी। कोर्ट ने कहा कि ये सभी अफसर मध्य प्रदेश कैडर के हो सकते हैं, लेकिन मूल रूप से मध्य प्रदेश के निवासी नहीं होने चाहिएं। वहीं कोर्ट ने SIT को 28 मई तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। बता दें कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 14 मई को शाह के बयान पर नोटिस लेते हुए FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश पर उनके खिलाफ इंदौर के महू थाने में FIR दर्ज की गई थी। इसके खिलाफ शाह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। अब अगली सुनवाई 28 मई को होगी। अंडरग्राउंड हैं विजय शाह गौरतलब है कि कर्नल सोफिया कुरैशी का मामला जैसे ही तूल पकड़ा है, उसके बाद से मंत्री विजय शाह अंडरग्राउंड हैं। उनकी कोई गतिविधि सोशल मीडिया पर नहीं दिख रही है। साथ ही मीडिया में भी उनका कोई बयान नहीं आया है। न ही, पार्टी के किसी नेता से सार्वजनिक रूप से उनकी कोई मुलाकात हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने बना दी है एसआईटी वहीं, विजय शाह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी गठित कर दी है। एसआईटी में तीन आईपीएस अधिकारी हैं। इसका गठन एमपी के डीजीपी ने किया है। एसआईटी अपनी पहली रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को 28 मई को सौंपेगी। इसके बाद कोर्ट आगे का फैसला लेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में विजय शाह की मुश्किलें और बढ़ सकती है। अभी पार्टी और सरकार वेट एंड वॉच की स्थिति में है।

मप्र कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष अब दिल्ली से तय होंगे,ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी इस बारे में फैसला लेगी

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष अब दिल्ली से तय होंगे। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी इस बारे में फैसला लेगी। इसके लिए AICC और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी मिलकर जिलों में ऑब्जर्वर भेजेंगे। ये ऑब्जर्वर जिला अध्यक्ष पद के लिए नामों का पैनल बनाएंगे। दिल्ली में हर दावेदार से बात करके नाम फाइनल किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग दो महीने का समय लगेगा। ऑब्जर्वर की टीम जिलों में जाएगी मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति अब दिल्ली से होगी। प्रदेश के पांच खाली जिलों के साथ-साथ बाकी जिलों के अध्यक्ष भी AICC द्वारा तय किए जाएंगे। जिला अध्यक्षों का पैनल बनाने के लिए केंद्र और राज्य दोनों तरफ से दो-दो ऑब्जर्वर की टीम जिलों में भेजी जाएगी। AICC ने 68 ऑब्जर्वर के नाम तय किए हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी 68 ऑब्जर्वर के नाम तय किए हैं। अगले एक सप्ताह में शुरू होगी प्रक्रिया प्रदेश की ऑब्जर्वर टीम में सभी विधायक और पीसीसी के पदाधिकारी शामिल हैं। यह प्रक्रिया अगले एक सप्ताह में शुरू हो जाएगी। यह टीम सभी जिलों में जाकर नामों का पैनल तैयार करेगी। दिल्ली में जिला अध्यक्ष पद के हर दावेदार से अलग-अलग बात की जाएगी। इसके बाद नाम फाइनल किया जाएगा। पदाधिकारियों को दी जाएगी बोलने की ट्रेनिंग कांग्रेस पार्टी अपने पदाधिकारियों को ट्रेनिंग भी देगी। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि वे विवादित बयान न दें। कांग्रेस नेताओं को लग रहा है कि भाजपा के नेता लगातार गलत बयान दे रहे हैं। इसलिए वे खुद कोई गलती नहीं करना चाहते हैं। जानकारी मिली है कि कांग्रेस अपने प्रमुख पदाधिकारियों की भोपाल में एक दिन की ट्रेनिंग कराने वाली है। इस ट्रेनिंग में उन्हें बताया जाएगा कि कैसे सोच-समझकर बोलना है।

डेलिगेशन पर सांसदों की बारात भेजने की क्या जरूरत कहने वाले संजय राउत को शरद पवार की नसीहत

मुंबई ऑपरेशन सिंदूर की सफलता की कहानी बताने और पाकिस्तान की पोल खोलने के लिए केंद्र सरकार 32 देशों में अलग-अलग सर्वदलीय डेलिगेशन भेज रही है. इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद, पूर्व मंत्री और राजदूत शामिल हैं. एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है और संजय राउत को निशाने पर लिया है, जिन्होंने फैसले की आलोचना करते हुए बीते दिन डेलिगेशन की तुलना ‘बारात’ से की थी. पार्टी से ऊपर उठकर लें फैसले शरद पवार ने संजय राउत पर निशाना साधते हुए कहा कि स्थानीय राजनीति को अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से नहीं जोड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पार्टी के आधार पर फैसले नहीं लिए जाते. जब पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे, तब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र गया था और तब मैं भी उस डेलिगेशन का सदस्य था. एनसीपी प्रमुख पवार ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय मुद्दे सबसे आगे हों, तो किसी को पार्टी लाइन पर स्टैंड नहीं लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्र ने कुछ आठ या 9 डेलिगेशन बनाए हैं और कुछ देशों को चयनित किया गया है. पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान जो कर रहा है, उस पर भारत का रुख क्या है, यह बताने के लिए डेलिगेशन को विदेश दौरे पर भेजा जा रहा है. उन्होंने कहा कि संजय राउत जो भी कहना चाहते हैं, उन्हें कहने का अधिकार है. लेकिन शायद उनकी पार्टी की एक सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी भी इस डेलिगेशन में शामिल हैं. शरद पवार ने कहा कि स्थानीय राजनीति को अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से नहीं जोड़ना चाहिए. श्रीकांत शिंदे को भेजने पर सवाल शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत ने रविवार को डेलिगेशन भेजने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस ‘बारात’ को भेजने की क्या जरूरत थी. उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे का बेटा विदेश में भारत का क्या प्रतिनिधित्व करेगा. राउत ने केंद्र सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए INDIA ब्लॉक के नेताओं से इस डेलिगेशन का बहिष्कार करने की अपील की है. हालांकि शिवसेना (UBT), कांग्रेस, एनसीपी (SP) और टीएमसी जैसे तमाम विपक्षी दलों के सांसद इस डेलिगेशन में शामिल हैं. दरअसल एकनाथ शिंदे के बेटे और तीन बार के सांसद श्रीकांत शिंदे की अगुवाई में सात में एक डेलिगेशन यूएई, लाइबेरिया, कांगो और सिएरा लियोन की यात्रा करेगा. उनके साथ बांसुरी स्वराज (भाजपा), ई.टी मोहम्मद बशीर (IUML), अतुल गर्ग (भाजपा), सस्मित पात्रा (बीजेडी), मनन कुमार मिश्रा (भाजपा), पूर्व मंत्री एसएस अहलूवालिया और पूर्व राजनयिक सुजान चिनॉय भी इस दौरे पर होंगे. इसी तरह सुप्रिया सुले, बैजयंत पांडा, रविशंकर प्रसाद और शशि थरूर की अगुवाई वाले चार अलग-अलग डेलिगेश 23 से 25 मई के बीच विदेश दौरा करेंगे. वहीं, श्रीकांत शिंदे, कनिमोझी और संजय झा की अगुवाई वाले तीन अलग-अलग डेलिगेशन 21 से 23 मई के बीच विदेश दौरा करेंगे.  

‘ऑपरेशन सिंदूर’ वाली टीम से ममता बनर्जी ने बनाई, संसदीय टीम के साथ विदेश नहीं जाएंगे यूसुफ पठान

कलकत्ता भारत ने आतंकी देश पाकिस्तान के खिलाफ मिसाइल स्ट्राइक के बाद अब पॉलिटिकल डिप्लोमेटिक स्ट्राइक का ऐलान कर दिया है. सरकार की ओर से पाकिस्तान की पोल खोलने के लिए अलग-अलग देशों में संसदीय दल भेजने का ऐलान किया है. इस संसदीय दल में पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर यूसुफ पठान का भी नाम था. यूसुफ पठान ने भारत सरकार को यह जानकारी दे दी है कि वह इस दौरे के लिए उपलब्ध नहीं होंगे. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक युसूफ पठान पाकिस्तान की पोल खोलने विदेश दौरे पर जा रहे सांसदों के दल में शामिल नहीं होंगे. सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार ने सांसद युसूफ पठान से सीधे संपर्क किया था. सांसदों के प्रतिनिधिमंडल में यूसुफ पठान का नाम शामिल करने से पहले टीएमसी के साथ कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया था. भारत सरकार ने सीधे युसूफ पठान से संपर्क किया था और अब पठान ने भारत सरकार को यह जानकारी दे दी है कि वह डेलिगेशन के साथ विदेश जाने के लिए उपलब्ध नहीं होंगे. इधर, टीएमसी ने विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है. यूसुफ पठान के विदेश जाने वाले सांसदों के डेलिगेशन से नाम वापस लेने के बाद टीएमसी ने कहा है कि विदेश नीति भारत सरकार का विषय है. इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार को लेनी चाहिए. गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च कर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पंजाब प्रांत स्थित नौ आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था.  

आसा पार्टी का विलय हुआ जन सुराज पार्टी में, साथ ही आरसीपी सिंह ने प्रशांत किशोर की जन सुराज का दामन थामा

पटना नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और आप सबकी आवाज (आसा) के अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने रविवार को प्रशांत किशोर की जन सुराज का दामन थाम लिया। साथ ही आसा का विलय भी जन सुराज में करा दिया। जिस पर केंद्रीय मंत्री और हम के संरक्षक जीतनराम मांझी ने हमला बोला है। उन्होने प्रशांत किशोर और आरसीपी सिंह को कीटाणु और विषाणु बताया है। मांझी ने कहा कि बिहार को विषाक्त करने के लिए दोनों एक साथ आए हैं। लेकिन उन्हें नहीं मालूम कि जनता के पास एक एंटीवायरस है, जिसका नाम एनडीए है। जीतनराम मांझी ने कहा कि बिहार को विषाक्त करने के मकसद से कीटाणु और विषाणु एक साथ आए हैं। पीके और आरसीपी जैसे नेता आपस में मिलकर ये सोच रहे हैं कि वो जनता को बर्बाद कर देंगे, लेकिन शायद उन्हें नहीं मालूम कि बिहार की जनता के पास एक ऐसा एंटीवायरस है, जिसका नाम एनडीए है। मांझी ने कहा कि पीके और आरसीपी की जोड़ी को ये समझना चाहिए कि एनडीए का एंटीवायरस किसी भी वायरस से निपटने में कारगर है। उन्होने कहा कि कि प्रशांत किशोर हों या आरसीपी सिंह ये दोनों राजनीतिक तौर पर असफल लोग हैं। वहीं प्रशांत किशोर और आरसीपी सिंह के साथ आने को बड़े सियासी परिवर्तन के तौर पर देखा जा रहा है। इस मौके पर आरसीपी ने कहा कि मैंने और प्रशांत किशोर ने पहले भी काफी काम किया और आगे भी काम करके दिखाएंगे। अभी हम लोगों को तीसरे नंबर पर बताया जा रहा है। परीक्षा में भले ही थर्ड पोजीशन पर रहें, लेकिन जब रिजल्ट निकलेगा तो फर्स्ट पोजिशन हमारा होगा। वहीं पीके ने कहा कि बिहार की व्यवस्था बदलाव की मुहिम में आरसीपी सिंह साथ आये हैं, उनका हम पार्टी में स्वागत करते हैं।

बीजेपी अब जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं को सार्वजनिक जीवन में मंचों से बोलने का प्रशिक्षण देने की करेगा शुरुआत

भोपाल  भाजपा के दिग्गज नेताओं, मंत्रियों, विधायकों की सार्वजनिक बयानबाजी से पार्टी की धूमिल होती छवि के चलते अगले महीने से भाजपा का स्पीकिंग कोर्स शुरू हो सकता है। मध्य प्रदेश भाजपा में जिस तरीके से पार्टी के दिग्गज नेताओं, मंत्रियों के विवादास्पद बयान सामने आ रहे हैं, उसके चलते न केवल पार्टी बल्कि सरकार की भी छवि धूमिल होती जा रही है। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी अब जिम्मेदार पदों पर बैठे अपने तमाम नेताओं को सार्वजनिक जीवन में मंचों से बोलने का प्रशिक्षण देने की शुरुआत करने जा रही है। माना जा रहा है कि बीजेपी जून से यह प्रशिक्षण शिविर मध्य प्रदेश में शुरू कर सकती है। माना जा रहा है कि जिस तरह विधानसभा सत्र से पहले भाजपा अपने विधायक दल की बैठक में तय कर लेती है कि किस तरीके से विधानसभा में सरकार का पक्ष रखना है, कैसे विपक्ष को घेरना है, ऐसी बयानबाजी से बचाना है जिसके चलते विधानसभा सत्र के दौरान सरकार पर सवाल ना उठे। इसके साथ ही जैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण वर्ग आयोजित कर उन्हें हर मुद्दे पर बोलने से सार्वजनिक बयान बाजी से, रोकने के गुण सिखाता है उसी तर्ज पर भाजपा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन करने की शुरुआत करेगी। इसमें बाकायदा भाजपा मीडिया प्रबंधन के प्रोफेशनल एक्सपर्ट के जरिए सार्वजनिक मंचों पर कैसे बोला जाए, विवादित मुद्दों से कैसे बचा जाए, सरकार पर विपक्ष के हमले का कैसे जवाब दिया जाए, इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। दरअसल बीते दिनों जिस तरीके से मंत्री विजय शाह की ऑपरेशन सिंदूर की आइकॉन बनी कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए बयान के चलते भाजपा की और सरकार की अंतरराष्ट्रीय किरकिरी हुई, उसके बाद डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के सेना पर दिए गए अपमानजनक बयान के बाद भाजपा और सरकार हाशिये पर आई भाजपा ने तय कर लिया है कि मंत्री, सांसदों, विधायक जैसे तमाम दिग्गज नेताओं को सार्वजनिक जीवन में बोलने का प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है। किन बयानों के चलते हुई सरकार और पार्टी की किरकिरी?     मंत्री विजय शाह के ऑपरेशन सिंदूर की आइकॉन कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई बदजुबानी     डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा का बयान     मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल द्वारा 2024 में अपने बेटे के मारपीट के मामले में भोपाल के थाने में हंगामा किए जाने के मामले के बाद ग्वालियर के होटल में छापामार कार्रवाई से हुआ विवाद     मंत्री प्रहलाद पटेल द्वारा सार्वजनिक कार्यक्रम में आवेदन लेकर आने वाली जनता को भिखारी बताना     विधायक भूपेंद्र सिंह और मंत्री गोविंद सिंह के बीच सार्वजनिक बयानबाजी के चलते पार्टी की छवि धूमिल होना     मंत्री नगर सिंह द्वारा अपना वन विभाग का मंत्री पद छिनने के बाद सरकार और पार्टी के खिलाफ बयानबाजी  

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव में कमल खिलेगा और जनता आप पार्टी सरकार को सत्ता से बेदखल करेगी: नायब सैनी

लाडवा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने शनिवार को पानी के मुद्दे पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर जोरदार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव में कमल खिलेगा और जनता आम आदमी पार्टी की सरकार को सत्ता से बेदखल करेगी। सैनी ने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद पंजाब में किसानों, युवाओं, महिलाओं को सम्मान दिया जाएगा जो मान की सरकार में अब तक नहीं मिला। लाडवा पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सैनी ने मीडिया से पानी के मुद्दे पर कहा कि हमें संदेश मिला है कि यह (पंजाब) सरकार गुरुओं की शिक्षाओं के खिलाफ जा रही है। यहां तक कि जब कोई अजनबी घर आता है, तो हम उसे पीने का पानी देते हैं। मैंने पंजाब के मुख्यमंत्री से कहा कि पानी प्रकृति का उपहार है, और किसी को भी पीने के पानी से वंचित नहीं किया जा सकता। यह मानवता का मामला है कि हर घर में पानी की पहुंच होनी चाहिए। मानसून के दौरान, हरियाणा को अधिक पानी की आवश्यकता होती है, और हमें हमेशा पर्याप्त आपूर्ति मिलती है। लेकिन इस बार, पंजाब के सीएम ने प्रवाह को रोक दिया है और गुरुओं की पवित्र परंपराओं पर सवाल उठाया है, सब तुच्छ राजनीति के लिए किया है। हम सभी तो गुरुओं के संदेश पर चलने वाले लोग हैं, लेकिन, पंजाब के सीएम ने पानी रोक लिया है। ‘तिरंगा यात्रा’ पर हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने कहा कि हरियाणा से सबसे ज्यादा युवा देश सेवा और सेना में लगे हुए हैं। हमारे गांव के युवा, माताएं-बहनें, बुजुर्ग, इन सभी का आशीर्वाद और समर्थन देश के प्रति अगाध प्रेम का माहौल बनाता है। हमारा हर बच्चा, हर महिला और हर युवा साथी इस यात्रा में शामिल हुआ। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि देशभक्ति और बलिदान की भावना को सच्ची श्रद्धांजलि देने का एक तरीका है। हम यहां तिरंगा यात्रा के लिए और ऑपरेशन सिंदूर के जरिए हमारे देश की रक्षा करने वाले हमारे सैनिकों को सम्मान देने के लिए एकत्र हुए हैं। हमारी सेना ने सिर्फ चार दिनों में पाकिस्तान को घुटनों के बल पर ला दिया। मैं हरियाणा की धरती को नमन करता हूं जहां के लोग हमेशा भारत माता की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि पहलगाम में आतंकी घटना के बाद देश में रोष था। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। पाकिस्तान और पीओके में जाकर हमारी सेना ने आतंकवाद को मिट्टी में मिलाने का काम किया। मैं सेना के वीर सैनिकों के जज्बे को सलाम करता हूं। सोफिया कुरैशी, व्योमिका सिंह दोनों ने ऑपरेशन सिंदूर की ब्रीफिंग पूरे देश को दी। यह हमारे लिए गर्व की बात है। हमारी सुरक्षा के लिए हमारी बेटियां भी आतंकवाद के खिलाफ खड़ी हैं। उनके खिलाफ जिनकी ओर से बयान आए वो ठीक नहीं हैं।

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