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कांग्रेस नेता उदित राज ने सरकार के इस कदम का विरोध किया है, भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने कांग्रेस की आलोचना की

अहमदाबाद जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों और आतंक के लिए इस्तेमाल हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़ा नुकसान पहुंचाया। पाकिस्तान भी इस बात को धीरे-धीरे स्वीकार करने लगा है। केंद्र सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत हुई कार्रवाई से दुनिया के अन्य देशों को अवगत कराने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल बनाया है। कांग्रेस नेता उदित राज ने सरकार के इस कदम का विरोध किया है। इस पर भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने कांग्रेस की आलोचना की। रोहन गुप्ता ने मिडिया से कहा, “पाकिस्तान अपनी हार को छुपाने के लिए हथकंडे अपना रहा था, मीडिया का दुरुपयोग कर रहा था, लेकिन झूठ लंबे समय तक नहीं चल सकता है। पाकिस्तान को भारत का खौफ हो गया था, लेकिन भारत ने जिम्मेदार देश होने का फिर से परिचय दिया है। हमें कब अटैक करना है और कब रुकना है, यह पता है। हमने अपने टारगेट पर अटैक भी किया, अपनी जमीन का संरक्षण भी किया और सही समय पर रुकने का साहस भी दिखाया। मुझे लगता है कि यही परिपक्व और अपरिपक्व राष्ट्र के बीच का अंतर है। हमारी सेना और सरकार ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि आतंकी घटना को अंजाम देकर आप पाकिस्तान के किसी भी कोने में सुरक्षित नहीं हैं।” कांग्रेस नेता उदित राज के बयान पर रोहन गुप्ता ने कहा, “कांग्रेस पार्टी दरबारी मानसिकता से पीड़ित है। जब शशि थरूर ने देश की कार्रवाई की तारीफ कर दी तो कांग्रेस ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया। लेकिन तुर्की के विरोध में एक भी शब्द कांग्रेस के मुंह से नहीं निकला। इसी मानसिकता की वजह से कांग्रेस की स्थिति खराब है। दरबारियों ने कांग्रेस को बर्बाद कर दिया है। कांग्रेस ने शुरुआत में देश और सेना के साथ खड़े होने की बात कही, लेकिन इसके बाद एक-एक कर कांग्रेस नेताओं ने सेना और कार्रवाई का विरोध किया। पाकिस्तान पर हुई कार्रवाई ने कांग्रेस को एक्सपोज कर दिया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान पर हुई कार्रवाई को विदेशों में बताने के लिए गठित कमेटी के नेतृत्वकर्ता के रूप में शशि थरूर का नाम आने पर कांग्रेस का चौंकना इसका सबूत है।” ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के तहत हुई कार्रवाई को बताने के लिए गठित प्रतिनिधिमंडल के विरोध में उदित राज ने बयान दिया है। उन्होंने कहा, “जब दुनिया में कोई भी भारत का समर्थन नहीं कर रहा है, तब 40 सांसदों को विदेश भेजने से क्या होगा।” कांग्रेस ने उदित राज के बयान से खुद को अलग कर लिया है और कहा है कि पार्टी देश के लिए उठाए जा रहे हर कदम के साथ खड़ी है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने प्रतिनिधिमंडल के गठन से पहले मल्लिकार्जुन खड़गे से बातचीत की थी।

उषा ठाकुर ने कहा कांग्रेस अपना काम करें इससे साफ तौर पर समझा जा सकता है

इंदौर  मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह के विवादित बयान के दौरान महू से विधायक और पूर्व मंत्री उषा ठाकुर मंच पर मौजूद थीं और मुस्कुराती हुई नजर आईं। उक्त बयान को लेकर जब उषा ठाकुर से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि “जो होना था, वह हो चुका है। सभी लोग भली-भांति जानते हैं कि मंशा किसी की इस प्रकार की नहीं हो सकती। कई बार जुबान फिसल जाती है, जिससे भ्रांतियां पैदा हो जाती हैं।” उषा ठाकुर ने स्पष्ट किया कि ऐसे विषयों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। भाजपा संगठन के निर्णयों को लेकर कहा कि अच्छा वक्त बना है, ट्रेनिंग होनी चाहिए। हर साल एक ऐसी ट्रेनिंग आयोजित की जानी चाहिए, ताकि सभी नेता और कार्यकर्ता सही मार्गदर्शन पा सकें। जब इस पूरे मामले में उषा ठाकुर से पूछा गया कि कांग्रेस कैबिनेट मंत्री विजय शाह के इस्तीफा की मांग कर रही है तो उषा ठाकुर ने कहा कांग्रेस अपना काम करें इससे साफ तौर पर समझा जा सकता है कि पूर्व कैबिनेट मंत्री उषा ठाकुर कैबिनेट मंत्री विजय शाह के पक्ष में ही बयान देती नजर आ रही है।

सेना किसी नेता के चरणों में नतमस्तक नहीं होती, बल्कि वह सिर्फ भारत माता के प्रति समर्पित रहती है – कांग्रेस सैनिक प्रकोष्ठ

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के बयान को लेकर कांग्रेस लगातार विरोध दर्ज कर रही है। इसी कड़ी में अब भूतपूर्व सैनिक भी उतर आए हैं। पीसीसी में शनिवार को कांग्रेस सैनिक प्रकोष्ठ ने मंत्री विजय शाह और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के बयानों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय सेना किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति की नहीं, बल्कि संविधान और राष्ट्र की सेवा करती है। सेना किसी नेता के चरणों में नतमस्तक नहीं होती, बल्कि वह सिर्फ भारत माता के प्रति समर्पित रहती है। बतौर पूर्व सैनिक हमें सेना के अपमान ने बहुत आघात पहुंचाया है। अगर नेताओं के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं होगी, तो देशभर के पूर्व सैनिक सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा की तोड़ मरोड़कर बयान पेश करने की दलील गलत है। सरकार ने नहीं की कोई ठोस कार्रवाई मेजर श्याम सुंदर ने कहा कि इस विवादित बयान पर अभी तक सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि जब हमारी सेना देश की रक्षा में जान तक देने को तैयार है, तो फिर उसके सम्मान पर चोट करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? अगर सरकार ने समय पर कार्रवाई की होती, तो सैनिकों का मनोबल बना रहता। लेकिन इस चुप्पी से जवानों में दुख और आक्रोश है। वोट बैंक की राजनीति में अब सेना को खींचा जा रहा मेजर श्याम सुंदर ने कहा कि यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं रहा, बल्कि यह साफ दर्शाता है कि वोट बैंक की राजनीति में अब सेना को भी खींचा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सेना देश के लिए नतमस्तक होती है, न कि किसी पार्टी के लिए। राजनीति में सीमा का ध्यान रखना चाहिए। जो देश के जवान के मनोबल को तोड़ने का काम करेगा, वह देशद्रोही के समान होगा। सैनिकों को पहले दिन से सिखाया जाता है देश सबसे ऊपर समाजवादी पार्टी द्वारा दिए गए बयान पर भी उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि सेना के पहले दिन से ही सैनिकों को सिखाया जाता है कि देश सबसे ऊपर है। ऐसे में कोई भी नेता या दल यदि व्यक्तिगत या सांप्रदायिक टिप्पणी करता है, तो वह भारत के सशस्त्र बलों का अपमान करता है। सरकार को खुल कर देनी चाहिए प्रतिक्रिया उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर कोर्ट ने संज्ञान लिया है, लेकिन यह विषय इतना गंभीर है कि सरकार को भी खुलकर प्रतिक्रिया देनी चाहिए। हमें सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार जरूर है, लेकिन सरकार की चुप्पी बहुत खलती है। यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता और सैनिकों का आक्रोश सड़कों पर दिखेगा।मेजर श्याम सुंदर ने कहा कि ट्रुप्स का धर्म ही अफसर का धर्म होता है। मैं एक ऐसे अफसर को जानता हूं, जो अपने जवानों के रोजा रखने पर स्वयं भी रोजा रखते थे। यही समर्पण हमारी सेना को दुनिया में सबसे अलग बनाता है। हमारी सेना अनुशासन में विश्वास रखती है, और नेतृत्व की भावना उसमें बचपन से ही सिखाई जाती है। अगर करनाल सोफिया कुरैशी का चयन हुआ है, तो वह निश्चित रूप से एक उत्कृष्ट अधिकारी रही होंगी। उनके खिलाफ आपत्तिजनक बयान देना सेना का अपमान है और इससे गलत संदेश फैलता है।

शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर साधा निशाना, कहा- हिंदुत्व छोडकर नरक में गिरे

मुंबई महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत की लिखी पुस्तक के विमोचन से पहले पार्टी पर निशाना साधते हुए सत्ता के लिए दिवंगत बाल ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा को त्यागने का आरोप लगाया है। राउत की किताब “नरकतला स्वर्ग” (नरक में स्वर्ग) का शनिवार शाम को मुंबई में विमोचन किया जाएगा। शिंदे ने रात ठाणे में संवाददाताओं से कहा, “अगर वे बालासाहेब ठाकरे के आदर्शों के प्रति वफादार रहे होते, तो वे नरक में नहीं गिरते और आज ऐसी स्थिति में नहीं पहुंचते जहां वे अब स्वर्ग की तलाश कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे हिंदुत्व की विचारधारा में पूरी तरह से निहित थे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे नेताओं के प्रति उनके मन में अपार सम्मान था। उन्होंने कहा, “बालासाहेब ने गुजरात और देश के लिए उनकी प्रतिबद्धता और काम को पहचाना था। ठाकरे की दूरदर्शिता ने मोदी-शाह को हिंदुत्व के सही पथप्रदर्शक के रूप में पहचाना।” उद्धव ठाकरे का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि जो लोग अब कांग्रेस के साथ जुड़ गए हैं और बालासाहेब के आदर्शों को त्याग दिया है, वे उनके फैसलों के पीछे के कारणों को कभी नहीं समझ पाएंगे। उन्होंने कहा, “वे उनकी विरासत से बहुत दूर चले गए हैं।” साल 2022 में शिंदे के विद्रोह से शिवसेना विभाजित हो गई थी, जिसके बाद ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।  

हिमंत सरमा कांग्रेस की लिस्ट में गौरव गोगोई का नाम देख भड़के, बोले- इनका पाकिस्तान से कनेक्शन

नई दिल्ली कांग्रेस ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखने के लिए विदेश भेजे जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल करने के लिए अपने चार सांसदों के नाम सरकार को भेज दिए हैं। इनमें असम से आने वाले गौरव गोगोई का भी नाम शामिल है। उनका नाम कांग्रेस की लिस्ट में देखकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सराम ने पलटवार किया है। सरमा ने ट्वीट कर कहा, “लिस्ट में शामिल सांसदों में से एक ने पाकिस्तान में अपने लंबे समय तक रहने से इनकार नहीं किया है। कथित तौर पर वह दो सप्ताह तक पाकिस्तान में रहे हैं। विश्वसनीय दस्तावेजों से पता चलता है कि उनकी पत्नी भारत में काम करते हुए पाकिस्तान स्थित एक NGO से वेतन ले रही थी।” सरमा ने आगे कहा, ”राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में और दलगत राजनीति से परे, मैं लोकसभा के नेता राहुल गांधी से आग्रह करता हूं कि इस व्यक्ति को ऐसे संवेदनशील और रणनीतिक काम में शामिल न करें।” इससे पहले कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने यह जानकारी देते हुए बताया की पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा से दो-दो सदस्यों के नाम इस प्रतिनिधिमंडल मैं शामिल होने के लिए भेजें हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने जिन सांसदों के नाम प्रतिनिधिमंडल के लिए भेजे हैं उनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, राज्यसभा सांसद डॉ. सैयद नसीर हुसैन तथा राजा बरार शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कल सुबह संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बात कर कांग्रेस से पाकिस्तान से आतंकवाद पर भारत के रुख को स्पष्ट करने के लिए विदेश भेजे जाने वाले प्रतिनिधिमंडलों के लिए पार्टी के चार सांसदों के नाम देने का आग्रह किया था। पार्टी ने कल दोपहर तक कांग्रेस की ओर से सरकार को नाम भेज दिए थे। सरकार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों समेत प्रमुख साझेदार देशों में इस महीने के अंत में सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजेगी जो पहलगाम आतंकवादी हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के मद्देनजर आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने के भारत के संदेश को उन तक पहुंचाएंगे। संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी एक बयान में कहा गया है, ‘‘सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल हर तरह के आतंकवाद का मुकाबला करने की भारत की राष्ट्रीय सहमति और दृढ़ दृष्टिकोण को सामने रखेंगे। वे आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने के देश के मजबूत संदेश को दुनिया के सामने लेकर जाएंगे।” सरकार ने प्रतिनिधिमंडल के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के ऐसे नेताओं का सोच समझ कर चयन किया है, जिन्हें मुखर माना जाता है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद रविशंकर प्रसाद और बैजयंत पांडा, कांग्रेस सांसद शशि थरूर, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के सांसद संजय झा, द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) की कनिमोई, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले और शिवसेना के श्रीकांत शिंदे सात अलग-अलग प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करेंगे। इनमें से चार नेता सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से हैं, जबकि तीन विपक्षी ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) गठबंधन से हैं। सूत्रों ने बताया कि प्रत्येक प्रतिनिधिमंडल के करीब पांच देशों का दौरा करने की संभावना है। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि प्रत्येक प्रतिनिधिमंडल में प्रतिष्ठित राजनयिक शामिल होंगे। बयान में कहा गया है, “ऑपरेशन सिंदूर और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की निरंतर लड़ाई के संदर्भ में, सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल इस महीने के अंत में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों समेत प्रमुख साझेदार देशों का दौरा करेंगे।”

सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते की फिसली जुबान, आतंकियों को बोल गए ‘हमारे’, एक और बवाल

डिंडोरी  मंत्री विजय शाह का कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिया बयान का मामला थमा भी नहीं है कि मंडला के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते विवादित बयान दे दिया. पाकिस्तान आतंकवादियों को लेकर उनकी जुबान फिसल गई और उन्होंने आतंकवादियों को अपना कह डाला. उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के जो हमारे आतंकवादी लोग हैं उनको सेना ने मुंह तोड़ जवाब दिया है.” सांसद का पूरा बयान सुनेंगे तो आप भी हैरत में पड़ जाएंगे, कि आखिर सांसद देश के दुश्मन पाकिस्तान के आतंकवादियों को हमारे आतंकवादी जैसे शब्दों से क्यों संबोधित कर रहे हैं. सांसद ने आतंकियों को कहा अपना दरअसल, फग्गन सिंह कुलस्ते एक दिन पहले डिंडोरी के अमरपुर ब्लॉक में सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे. जहां उन्होंने मीडिया को बयान देते हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना के पराक्रम की सराहना करते हुए कहा कि, ”भारत की सेना ने पाकिस्तान के हमारे आतंकवादियों लोगों को मुंह तोड़ जवाब दिया है.” सांसद के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. नेताओं के बयानों से राजनीति में भूचाल इसके पहले मंत्री विजय शाह का कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिया बयान काफी सुर्खियों में बना ही हुआ है. फिर डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा का ताजे बयान ने राजनीति में भूचाल मचा दिया है. उन्होंने कहा था कि “पूरा देश, सेना और सैनिक पीएम मोदी के चरणों में नतमस्तक हैं.” हालांकि दोनों मंत्रियों ने अपने बयान को लेकर सफाई भले ही दे दी हो, लेकिन कांग्रेस दोनों मंत्रियों के बयान को लेकर हमलावर मोड़ में आ चुकी है. वहीं, अब मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का यह बयान जिसमें “हमारे आतंकवादियों” शब्द का उपयोग किया गया है, इस पर कुलस्ते सफाई देते हैं या कांग्रेस उन्हें आड़े हाथों लेती है. यह देखने लायक होगा.

बिहार सरकार के मंत्रियों ने राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा और इसे उनकी नौटंकी करार दिया

पटना कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दरभंगा दौरे के दौरान दलित छात्रावास में कार्यक्रम आयोजित करने को लेकर दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। इस घटना ने बिहार की सियासत का तापमान बढ़ा दिया है। बिहार सरकार के मंत्रियों ने राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा और इसे उनकी नौटंकी करार दिया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि वह अराजकता की मानसिकता वाले व्यक्ति हैं। परिवारवाद और जमींदारी के अहंकार में ये लोग कानून की धज्जियां उड़ाते हैं। ये संविधान का मजाक बनाते हैं और लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखते। जनता के बीच घड़ियाली आंसू बहाकर ये सिर्फ वोट बैंक की राजनीति करते हैं। ये नेता नहीं, अभिनेता की भूमिका निभाना चाहते हैं। लेकिन, बिहार की धरती पर जनता को नेतृत्व चाहिए, नौटंकी नहीं। उनका यह कदम लोकतंत्र के खिलाफ है और जनता ऐसी हरकतों को बेहतर तरीके से समझ रही है। वहीं, बिहार सरकार के नगर विकास मंत्री जीवेश मिश्रा ने भी राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी बिहार में ड्रामा करने आए थे। अगर उन्हें दलितों से मिलना था तो अब तक क्या कर रहे थे? 55 साल की उम्र में भी वे बच्चों वाली हरकत कर रहे हैं। अगर उन्हें दलितों की चिंता होती तो उनकी सरकार के समय दलितों की स्थिति इतनी खराब नहीं होती। राहुल गांधी जहां जाते हैं, केवल हंगामा करते हैं। यह उनका मकसद है। बिहार और भारत की जनता इसे अच्छे से समझती है।” एफआईआर के सवाल पर जीवेश मिश्रा ने कहा, “एफआईआर क्यों न दर्ज हो? उनके खिलाफ सबूत हैं। कानून तोड़ना, संविधान की अवहेलना करना और इसे जेब में रखने की मानसिकता गांधी परिवार की पुरानी आदत है। राहुल गांधी की चर्चा करना समय की बर्बादी है। कानून के उल्लंघन को लेकर अगर कार्रवाई की गई है तो यह न्यायसंगत है।” वहीं बिहार भाजपा की प्रवक्ता संगीता कुमारी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बिहार दौरे को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनके बिहार आने-जाने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, क्योंकि बिहार की जनता ने अपना मूड बना लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार ने बिहार में विकास की गंगा बहाई है। विशेष रूप से महिलाओं के उत्थान और समग्र विकास के लिए किए गए कार्यों ने जनता का दिल जीत लिया है। बिहार की जनता पूरी तरह से एनडीए के साथ है और यहां राहुल गांधी का कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है।

केरल भाजपा के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने किया कटाक्ष, जनता पहले ही नकार चुकी, चिदंबरम जैसे नेता अब समझ रहे

नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि इंडिया ब्लॉक बिखर रहा है। उनके इस बयान पर भाजपा की केरल इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कटाक्ष किया। कांग्रेस की हार का इतिहास याद दिलाते हुए कहा कि उन्हें बहुत देर से गठबंधन की सच्चाई समझ आई। राजीव चंद्रशेखर ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “भारत की जनता बहुत पहले यह निर्णय ले चुकी है। जनता ने 2019 में निर्णय लिया, 2024 में निर्णय लिया। कांग्रेस के कुछ नेता भी अब इसे स्वीकार कर रहे हैं।” भाजपा नेता ने आगे कहा, “कोई भी राजनीतिक गठबंधन जिसका आधार अवसरवादिता है, भ्रष्टाचार है, जो वंशवाद को बढ़ावा देती है, और जो सिर्फ प्रधानमंत्री के विरोध के नाम पर बनी है, क्या उसे कभी भी भारत के लोगों का समर्थन मिल पाएगा? भारत की जनता ने भाजपा और नरेंद्र मोदी को एक भरोसेमंद ताकत के रूप में स्वीकार किया है। भाजपा एकमात्र ऐसी पार्टी है जो देश के मूल्यों में विश्वास करती है और राजनीति को लोगों के जीवन को विकसित करने का जरिया मानती है। प्रधानमंत्री देश के विकास के लिए सातों दिन और चौबीस घंटे काम करते हैं। देश को समृद्ध बनाना, ताकतवर बनाना, उनकी राजनीति का आदर्श है। यही वजह है भाजपा और नरेंद्र मोदी को लगातार जनता का समर्थन मिल रहा है।” इंडिया ब्लॉक अपने भ्रष्टाचार को छुपाने और नरेंद्र मोदी का विरोध करने के नाम पर बना गठबंधन है। ऐसे गठबंधन को जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। पूर्व केंद्रीय गृह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने गुरुवार को कहा था, “इंडिया ब्लॉक का भविष्य उज्जवल नहीं है, मुझे नहीं लगता कि गठबंधन में शामिल दल और नेता एकजुट हैं। यह एक कमजोर गठबंधन लगता है। अगर यह बरकरार रहा तो मुझे बेहद खुशी होगी। मौजूदा समय में देश में बीजेपी से सशक्त कोई दूसरा राजनीतिक दल नहीं है।” चिदंबरम के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी हमलावर हो गई है। भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आईएनएस से बात करते हुए कहा, “पी चिदंबरम ने कांग्रेस पार्टी को आईना दिखाया है। इंडिया ब्लॉक बिना किसी मिशन, नीति और नेता का गठबंधन है। गठबंधन के सभी दल अपने भ्रष्टाचार को छुपाने और मोदी विरोध के नाम पर एक साथ हैं, लेकिन इनमें एकजुटता नहीं है। दिल्ली में आप और कांग्रेस साथ हैं, पंजाब में अलग, बंगाल में तृणमूल और कांग्रेस अलग हैं और दिल्ली में एक साथ। ऐसे गठबंधन का भविष्य अंधकारमय है।”

केंद्र की मोदी सरकार थरूर को अहम जिम्मेदारी देने जा रही, कांग्रेस ने दिलाई थी ‘लक्ष्मण रेखा’ की याद

नई दिल्ली केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर पार्टी लाइन के खिलाफ दिए गए बयानों के चलते कांग्रेस में निशाने पर हैं। इस बीच, केंद्र की मोदी सरकार थरूर को अहम जिम्मेदारी देने जा रही है। दरअसल, सरकार ने आतंकवाद पर पाकिस्तान की सच्चाई से दुनियाभर को रूबरू करवाने की योजना बनाई है। इसके लिए वह थरूर को अहम भूमिका देने की तैयारी में है। पिछले दिनों कांग्रेस की बैठक के बाद सूत्रों ने बताया था कि भारत और पाकिस्तान के मुद्दे पर अपने बयानों से शशि थरूर ने लक्ष्मण रेखा लांघ दी है। सूत्रों के अनुसार, विदेश मामलों पर संसदीय पैनल के प्रमुख शशि थरूर को बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी देने जा रही है। इसके लिए सरकार ने थरूर से संपर्क भी किया है। सूत्रों ने बताया कि थरूर भी चाहते हैं कि वे इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करें और खासतौर पर अमेरिका में तो जरूर करें। वह विदेश मामलों की स्थायी कमेटी के अध्यक्ष हैं। हालांकि, उन्होंने सरकार से कहा है कि इसके लिए सरकार को पहले कांग्रेस पार्टी से संपर्क करके इसपर में सलाह लेनी होगी। इसमें कई प्रतिनिधिमंडल बनाए जाएंगे, जो विदेश का दौरा करके आतंकवाद पर दूसरे देशों के सामने पाकिस्तान की पोल खोलेंगे। हर एक प्रतिनिधिमंडल में पांच से छह सांसद हो सकते हैं। इसमें एक विदेश मंत्रालय का भी एक प्रतिनिधि और एक सरकारी अफसर होगा। सरकार ने सांसदों से बता भी दिया है कि वह यह देख लें कि उनके पास पासपोर्ट और विदेश की यात्रा करने के लिए जरूरी कागजात पहले से उपलब्ध हों। इस यात्रा का समन्वय विदेश मंत्रालय करने जा रहा है। यह प्रतिनिधिमंडल 22 मई के आसपास रवाना हो सकता है और फिर अगले महीने तीन-चार जून तक वापस आएगा। सरकार ने इसमें विभिन्न दलों के सांसदों को भेजने जा रही है। कांग्रेस के मनीष तिवारी, अमर सिंह, शिवसेना यूबीटी की प्रियंका चतुर्वेदी, बीजेपी के समिक भट्टाचार्य, बीजेडी के सस्मित पात्रा, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, एनसीपी-शरद पवार गुट की सुप्रिया सुले समेत कई अन्य सांसदों के नाम शामिल हैं। ‘थरूर ने लांघ दी लक्ष्मण रेखा’ कांग्रेस सांसद शशि थरूर पिछले कुछ समय से विभिन्न मुद्दों पर सरकार की नीतियों का समर्थन कर चुके हैं। इसकी वजह से कांग्रेस सूत्रों ने बुधवार को कहा कि पार्टी में सबको अपनी राय रखने की आजादी है, लेकिन थरूर ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव से जुड़े मुद्दे पर अपने हालिया बयानों से लक्ष्मण रेखा लांघ दी है। सूत्रों ने यह भी कहा कि आलाकमान ने नेताओं को हिदायत दी है कि वे इस मुद्दे पर अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त करने के बजाय पार्टी का पक्ष रखें। हालांकि, थरूर ने अगले दिन इन अटकलों को खारिज कर दिया। थरूर ने कहा कि उन्हें इस बारे में मीडिया के माध्यम से ही जानकारी मिली है और यह बिना किसी आधार पर मीडिया द्वारा गढ़ी गई है।  

मंत्री विजय शाह के विवादित बयान पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कर्नल सोफिया कुरैशी से मांगी माफी

भोपाल मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह के विवादित बयान को लेकर मध्य प्रदेश में सियासी घमासान मचा हुआ है. शाह के इस्तीफे की मांग पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि वह पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से इस्तीफा मांग ले. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल में तिरंगा यात्रा के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा, “न्यायपालिका ने जो आदेश दिया है, हमारी सरकार ने उसका यथायोग्य तरीके से पालन किया है और न्यायालय जो कहेगा, हम उसके हिसाब से चलते जाएंगे.” उन्होंने विजय शाह के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के स्वत: संज्ञान लेने और एफआईआर दर्ज करने के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने कोर्ट के निर्देशों का पालन किया है. उधर, कांग्रेस धरना प्रदर्शन कर मंत्री विजय शाह के इस्तीफे की मांग पर अड़ी है. इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सीएम यादव ने कहा, “कांग्रेस तो करती रहेगी, कांग्रेस सिद्धारमैया से इस्तीफा मांग ले. कांग्रेस के सभी मंत्रियों पर केस चल रहे हैं. कांग्रेस का आचरण देखा था जब चुनाव में केजरीवाल के साथ कदम से कदम मिलाकर चले थे, वो तो मुख्यमंत्री रहते जेल गए थे. कांग्रेस उस समय कहां थी? कांग्रेस को तो बोलने का अधिकार ही नहीं है. कांग्रेस ने जितनी बेशर्मी की हदें पार कीं, आज तक किसी ने नहीं की.” दरअसल, विजय शाह ने इंदौर जिले के महू में एक कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी इस बयान के बाद कांग्रेस ने शाह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और उनके इस्तीफे की मांग तेज कर दी. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था, जिसके बाद इंदौर में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया. वहीं, विजय शाह ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि अगर उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है, तो वह दस बार माफी मांगने को तैयार हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वह कर्नल सोफिया कुरैशी का अपनी बहन से भी अधिक सम्मान करते हैं.    राजभवन के बाहर प्रदर्शन, इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के लिए अपमानजनक टिप्पणियां करने वाले मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह के खिलाफ कांग्रेस विधायकों ने भोपाल में राजभवन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया. काले कपड़े पहने कांग्रेस विधायकों ने मंत्री विजय शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की और राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला. प्रदर्शन से पहले कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल से मुलाकात की और विजय शाह के इस्तीफे की मांग वाला एक ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन सौंपने के बाद राजभवन के गेट पर विधायकों ने प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने ‘विजय शाह इस्तीफा दो’ और ‘बीजेपी सरकार शर्म करो’ जैसे नारे लगाए. नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव विजय शाह का इस्तीफा क्यों नहीं ले रहे हैं? विजय शाह ने हमारी वीर बेटी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ अपमानजनक और अभद्र टिप्पणी की है, जो न केवल सेना का अपमान है, बल्कि देश की बेटियों का भी अपमान है. मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह और उनकी पूरी कैबिनेट शाह के बयान का समर्थन करती है. यदि नहीं, तो तत्काल उनका इस्तीफा लिया जाए.” बता दें कि विजय शाह ने इंदौर जिले के महू में एक कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इस बयान के बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए शाह के खिलाफ इंदौर के मनपुर थाने में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था. इसके बावजूद बीजेपी ने शाह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे कांग्रेस और आक्रामक हो गई है. विधायक आरिफ मसूद ने कर्नल सोफिया कुरैशी से मांगी माफी मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह के विवादित बयान पर सियासी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस बीच, भोपाल मध्य के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कर्नल सोफिया कुरैशी को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश की जनता की ओर से माफी मांगी है. विधायक आरिफ मसूद ने अपने पत्र में लिखा, “आदरणीया कर्नल सोफिया कुरैशी जी, जैसा कि आपको विदित होगा, मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में आपके प्रति अभद्र टिप्पणी की थी. यह टिप्पणी न केवल एक व्यक्ति विशेष के लिए थी, बल्कि संपूर्ण भारत में सेवारत सेना के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए थी. उनके इस शर्मनाक कृत्य से न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरा भारत शर्मिंदगी महसूस कर रहा है.” पत्र में आगे कहा गया, “प्रतिक्रिया स्वरूप संपूर्ण भारत में भाजपा सरकार के मंत्री के खिलाफ धरना, प्रदर्शन और आंदोलन हो रहे हैं. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी स्वत: संज्ञान लेते हुए मुकदमा दर्ज करवाया है. मुझे इस बात का दुख है कि जिस परिवार के पूर्वजों ने सेना में रहकर देश की सेवा की और देश की आजादी में अहम भूमिका निभाई, उस परिवार की बेटी पर अभद्र भाषा का उपयोग करने वाले बेशर्म मंत्री से भले ही भाजपा सरकार ने त्यागपत्र नहीं लिया हो, परंतु मैं मध्य प्रदेश की देशभक्त जनता की तरफ से आपसे माफी मांगता हूँ.” पत्र के अंत में उन्होंने लिखा, “जय हिंद, जय भारत.” बता दें कि विजय शाह ने इंदौर जिले के महू में एक कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इस बयान के बाद कांग्रेस ने शाह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और उनके इस्तीफे की मांग तेज कर दी. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था, जिसके बाद इंदौर में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया. वहीं, विजय शाह ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि अगर उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है, तो वह दस बार माफी मांगने को तैयार हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वह कर्नल सोफिया कुरैशी का अपनी बहन से भी अधिक सम्मान करते हैं.      

शशि थरूर बन रहे चिदंबरम? मोदी सरकार की कर डाली तारीफ, इंडिया गठबंधन पर कहा कुछ ऐसा, चढ़ा सियासी पारा

  नई दिल्ली कांग्रेस के कद्दावर नेता शशि थरूर इन दिनों नरेंद्र मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कई मौकों पर दिखे हैं। इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने भी कुछ ऐसा ही रुख अपनाया था। चिदंबरम ने हाल ही में एक अंग्रेजी अखबार में लेख लिखकर ऑपरेशन सिंदूर और भारत-पाकिस्तान सीजफायर को लेकर केंद्र सरकार के फैसलों की सराहना की है। इससे एक कदम और आगे बढ़ते हुए उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ तैयार विपक्षी एकजुटता (INDIA गठबंधन) के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर दिया। उनके इस कदम के बाद सियासी गलियारे में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। चिदंबरम ने गुरुवार को INDIA गठबंधन की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि यह गठबंधन अभी भी बरकरार है। उन्होंने यह टिप्पणी दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में एक पुस्तक ‘Contesting Democratic Deficit’ के विमोचन कार्यक्रम में की। चिदंबरम ने कहा, “इस किताब के लेखर मृत्युंजय सिंह यादव का मानना है कि INDIA गठबंधन अब भी कायम है। इस बात पर मुझे यकीन नहीं है। शायद सलमान खुर्शीद इसका जवाब दे सकते हैं, क्योंकि वह INDIA गठबंधन की बातचीत टीम का हिस्सा थे। अगर गठबंधन पूरी तरह कायम है तो मुझे बहुत खुशी है, लेकिन यह बहुत मजबूत नहीं लगता। हालांकि इसे अभी भी जोड़ा जा सकता है, समय है, घटनाएं अभी और घटेंगी।” अपने लंबे राजनीतिक अनुभव को साझा करते हुए चिदंबरम ने कहा कि गठबंधन केवल चुनावी वक्त पर नहीं बनाए जा सकते। उन्होंने कहा, “मेरा गठबंधनों को लेकर नजरिया अलग है। तमिलनाडु में लंबे अनुभव से मैंने सीखा है कि गठबंधन चुनाव के समय नहीं बनते, उन्हें पांच साल तक पोषित करना पड़ता है। देश में केवल दो राज्य हैं जहां यह मॉडल सफल रहा है वे हैं केरल और तमिलनाडु। वहां गठबंधन हार और जीत दोनों में एक साथ रहे हैं।” हालांकि इस दौरान उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भाजपा जैसा संगठित राजनीतिक दल देश के इतिहास में नहीं रहा। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक पार्टी नहीं है, यह एक मशीन है। इसके पीछे एक और मशीन है। ये दोनों मिलकर देश की संस्थाओं पर नियंत्रण रखते हैं। चुनाव आयोग से लेकर थाने तक। यह जितना संभव हो, एक लोकतंत्र में उतना ही ताकतवर संगठन है। यह किसी एकदलीय शासन जैसे ढांचे की तरह कार्य करता है, हालांकि मैं यह नहीं कह रहा कि हम एकदलीय शासन में हैं।” सलमान खुर्शीद ने भी जताई चिंता पुस्तक के सह-लेखक और पूर्व मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि INDIA गठबंधन को बरकरार रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “अगर आप किसी पार्टी के साथ गठबंधन करना चाहते हैं, तो उसे बार-बार अपमानित या दबाव में नहीं डाल सकते। किताब में कई उदाहरण दिए गए हैं, जहां हमारी संवेदनाओं को नजरअंदाज किया गया।”

काफिला रोके जाने के बाद राहुल गांधी पैदल ही दलित छात्रों से संवाद के लिए निकल पड़े, भड़की कांग्रेस

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बिहार दौरे को लेकर गुरुवार को हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। दरअसल, राहुल गांधी को दरभंगा प्रशासन ने अंबेडकर छात्रावास में कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं दी। हालांकि, काफिला रोके जाने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पैदल ही दलित छात्रों से संवाद के लिए निकल पड़े। इस दौरान पुलिस के साथ धक्कामुक्की भी देखने को मिली। वहीं, राहुल गांधी के दरभंगा में कार्यक्रम रोकने पर कांग्रेस ने बिहार की एनडीए सरकार को निशाने पर लिया। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि बिहार में दरभंगा के अंबेडकर हॉस्टल में ‘शिक्षा न्याय संवाद’ कार्यक्रम में राहुल गांधी को शामिल होने से रोकना तानाशाही की पराकाष्ठा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “अब क्या दलित, वंचित, पिछड़े वर्ग के छात्रों से संवाद करना संविधान के खिलाफ है? क्या उनकी शिक्षा, उनकी भर्ती परीक्षा और नौकरियों के बारे में उनसे बातचीत करना कोई पाप है? जेडीयू-भाजपा सरकार के बिहार में दरभंगा के अंबेडकर हॉस्टल में ‘शिक्षा न्याय संवाद’ कार्यक्रम में राहुल गांधी को शामिल होने से रोकना तानाशाही की पराकाष्ठा है। लोकतंत्र की जन्मस्थली, बिहार इस अन्याय को याद रखेगी और समय आने पर जेडीयू-भाजपा को इसका उचित जवाब भी देगी।” कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक्स पोस्ट में लिखा, “दरभंगा के अंबेडकर हॉस्टल में ‘शिक्षा न्याय संवाद’ कार्यक्रम के तहत छात्रों से संवाद करने जा रहे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को रोकना अत्यंत शर्मनाक, निंदनीय एवं कायराना कृत्य है। तानाशाही पर उतारू जेडीयू-भाजपा गठबंधन की सरकार को यह बताना चाहिए कि क्या बिहार में नेता प्रतिपक्ष का जाना अपराध है या दलितों, पिछड़ों, वंचितों और गरीबों की आवाज उठाना अपराध है? न्याय और क्रांति की धरती बिहार की जनता यह तानाशाही बर्दाश्त नहीं करेगी।” इससे पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “बिहार में एनडीए की ‘डबल इंजन धोखेबाज सरकार’ मुझे अंबेडकर हॉस्टल में दलित और पिछड़े छात्रों से बातचीत करने से रोक रही है। संवाद कब से अपराध हो गया? नीतीश जी, आप किस बात से डर रहे हैं? क्या बिहार में शिक्षा और सामाजिक न्याय की स्थिति छुपाना चाहते हैं?”

कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान के बाद मंत्री विजय शाह की मुश्किलें लगातार बढ़ रही, इस्तीफे का दबाव

भोपाल महिला सैन्य अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर मंत्री विजय शाह के विवादित बयान पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि आप संवैधानिक पद पर हैं और आपको अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। एक मंत्री होकर आप किसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने मंत्री विजय शाह के लिखाफ लिखी गई FIR की कॉपी पर भी सवाल उठाए हैं। इधर सियासी उथलपुथल भी तेज हो गई है। उमा भारती भी इस मामले में लगातार मंत्री शाह के इस्तीफे की मांग कर रही हैं। बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेत्री उमा भारती ने विजय शाह को घेरते हुए गुरुवार को फिर से ट्वीट किया। उसमें लिखा कि कांग्रेस के कहने सुनने से हमें क्या मतलब, नैतिकता और देशभक्ति पर कांग्रेस खरी उतर ही नहीं पाई किंतु हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दी गई नसीहतों का तो हम ध्यान रखें।’ पहले हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार गुरुवार को युगलपीठ ने हाईकोर्ट के आदेशानुसार मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की है। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान अपने आदेश में कहा है कि एफआईआर ऐसे कंटेंट के साथ लिखी गयी है,जो चुनौती देने पर निरस्त हो जाये। युगलपीठ ने आदेश में उल्लेखित कंटेंट के बारे बताते हुए  एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा है। इसके अलावा एफआईआर में पुलिस विवेचना की मॉनिटरिंग हाईकोर्ट द्वारा की जाएगी।  पुलिस को जमकर लगाई फटकार, पूछे तीखे सवाल गुरुवार को विजय शाह सुप्रीम कोर्ट की शरण पहुंचे और एफआईआर पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन यहां भी शाह को राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि आप संवैधानिक पद हैं और आपको अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। एक मंत्री होकर आप किसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके पहले इसी कोर्ट ने बुधवार को विजय शाह के बयान पर नाराजगी जताई थी। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे कैंसर जैसा घातक बताया। हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने संज्ञान याचिका की सुनवाई करते हुए डीजीपी को विजय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने कहा कि मंत्री शाह ने गटरछाप भाषा का इस्तेमाल किया है, जो अस्वीकार्य है। इसके बाद बुधवार देर रात महू पुलिस ने विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली थी। दिल्ली में भाजपा की अहम बैठक शाह का मामला दिल्ली के गलियारों तक भी पहुंच गया है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी नाराजगी जता चुके हैं। गुरुवार को BJP में मंथन की बात सामने आ रही है। मंत्री विजय शाह को लेकर पार्टी महासचिव बीएल संतोष से मध्यप्रदेश भाजपा प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने मुलाकात की है। वहीं विजय शाह भी अमित शाह से मुलाकात के बाद इस्तीफे पर विचार करने का कह चुके हैं। हालांकि इसकी विस्तृत जानकारी फिलहान सामने नहीं आ सकी है। विजय शाह पर पहले दिन क्यों नहीं हुई कार्रवाई –   पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा  कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक बयान देने के मामले में मंत्री विजय शाह पर बीजेपी की ओर से अब तक कोई कार्रवाई ना होने को लेकर वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने दुख जताया है. पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने कहा कि “इस पर तो पहले दिन ही कार्रवाई हो जाना चाहिए थी. मैं हैरान हूं कि पार्टी या सरकार ने अब तक कोई निर्णय क्यों नहीं लिया. उन्होंने कहा कि सारा फजीता करवाने के बाद अब अगर निर्णय लेंगे भी तो उसका क्या औचित्य रहेगा. ईटीवी भारत से खास बातचीत में शर्मा ने कहा कि ऐसे में पार्टी का उपहास होता है, उसकी तपस्या, त्याग, राष्ट्रभक्ति और विचार पर सवालिया निशान लगता है.” शाह पर पार्टी ने क्यों निर्णय नहीं लिया, मुझे हैरानी बीजेपी नेता रघुनंदन शर्मा ने कहा कि “मंत्री रहते हुए अपनी वाणी भाषा संयम रहना आवश्यक है, क्योंकि मंत्री सरकार का प्रतिनिधित्व करता है. हमारे यहां विधान ज्वाइंट रिस्पांसिबिलिटी का है. एक व्यक्ति की त्रुटि सबकी त्रुटि मानी जाती है और एक व्यक्ति का त्याग सबका त्याग, या फिर उसका जनहित का काम पूरी सरकार का जनहित का लोकहित का काम माना जाता है. कहावत है जिएंगे भी साथ मरेंगे भी साथ. शर्मा ने कहा कि मुझे लगता है कि इसके उपर तत्परता से पहले दिन ही कार्रवाई हो जाना चाहिए थी. पार्टी ने या सरकार ने अभी तक क्यों निर्णय नहीं लिया, मुझे तो बड़ा दुख हो रहा है. इतनी फजीती करवाने के बाद निर्णय लेंगे, तो उसका क्या औचित्य रहेगा. उन्होंने कहा कि देश में एक जांबाज सैनिक के प्रति जो युद्ध के समय सम्मान का जो ज्वार उठा था, ऐसे समय में उसके बारे में बोलना और बहुत ही सम्मान प्रगट ना करते हुए अपमानित भाषा का उपयोग करना, चाहे वो कितने ही जोश में रहे हों, लेकिन जोश में होश नहीं खोना चाहिए. हमारे मंत्री ने जोश में होश खो दिया. उसका परिणाम उनको भी भुगतना पड़ रहा है और सारी पार्टी को भुगतना पड़ रहा है.” ऐसे लोग पार्टी की त्याग तपस्या पर सवालिया निशान रघुनंदन शर्मा ने कहा कि “मेरी पार्टी को तो मैं क्या सलाह दूंगा. वहां अब सलाह का अर्थ भी नहीं है. ये तो स्वयं निर्णय लेने का मामला था. कोर्ट निर्णय ले और कोर्ट तक बात जाए, ऐसी परिस्थिति उपन्न ही नहीं होना देनी थी, लेकिन प्रत्युन्नमति का अभाव होने के कारण ये सब खेल खड़ा होता है. उन्होंने कहा कि ऐसे में पार्टी का उपहास होता है. पार्टी का त्याग पार्टी की तपस्या पार्टी की राष्ट्रभक्ति पार्टी का विचार सारा इस सबके ऊपर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर देते हैं. ऐसे लोग जिसमें निर्णय ना लेने लोग भी शामिल हैं. मैं सोचता हूं कि इस बारे में बात साफ कर लेना चाहिए. दूध का दूध का पानी का पानी पहले ही हो जाना चाहिए था. क्यों नहीं हो रहा है मैं खुद हैरान हूं.” राज्यपाल से मिलेंगे कांग्रेस विधायक FIR के बाद भी मंत्री का इस्तीफा नहीं होने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कड़ा रुख अपनाया … Read more

कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को बूथ मैनेजमेंट से लेकर आभासी दुनिया में मज़बूत करेगी, लगेगा स्पेशल ट्रेनिंग कैंप

भोपाल मध्य प्रदेश की सत्ता से करीब 2 दशक से बाहर कांग्रेस पार्टी अब आगामी 2028 विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को नए सिरे से तैयार करने में जुट गयी है. यह तैयारी ज़मीन पर बूथ मैनेजमेंट से लेकर आभासी दुनिया यानि वर्चुअल वर्ल्ड में कांग्रेस को कैसे मज़बूत करना है, उसकी होगी. जिसमें नेताओं और कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गुर सिखाये जायेंगे. सबसे खास बात यह है कि इसका खर्चा नेता और कार्यकर्ता खुद उठाएंगे. इसके लिए AICC ट्रेनिंग डिपार्टमेंट के प्रमुख सचिन राव अपनी टीम के साथ 9 जून से 15 जून तक मध्यप्रदेश में रहेंगे और सर्वोदय मेथोडोलॉजी को अपनाते हुए किसी शांत जगह पर यह ट्रेनिंग कैंप लगाया जायेगा. सबसे बड़ी बात है कि कांग्रेस के सभी विधायकों और जिला अध्यक्षों समेत सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस प्रशिक्षिण शिविर में आना अनिवार्य होगा, जिसके लिए एक निश्चित शुल्क उनसे लिया जायेगा. एमपी कांग्रेस के अभिनव बरोलिया ने बताया कि सर्वोदय कैंप पहले भी आयोजित होते रहे हैं लेकिन अब नए ज़माने की नई तकनीक को भी इस बार शामिल किया जायेगा. प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी चाहते हैं कि कार्यकर्ताओं को बीजेपी के संगठन से मुकाबले के लिए हर मोर्चे पर तैयार करना पड़ेगा इसलिए इस कैंप का आयोजन किया जा रहा है. बीजेपी जिस तरह से सोशल मीडिया में नैरेटिव बनाती है और फेक न्यूज़ फैलाती है उसे कैसे पहचानें और कांग्रेस के खिलाफ होने वाले दुष्प्रचार को कैसे रोका जाये, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस पार्टी का देश की आज़ादी और विकास में क्या योगदान रहा इसे जनता तक पहुंचाने की ट्रेनिंग दी जाएगी. इसके अलावा नेताओं और कार्यकर्ताओं को बताया जायेगा कि वो कैसे प्रवास पर रहें, प्रवास के दौरान लोगों से मिले, कार्यकर्ताओं के घर खाना खाएं या जिस इलाके में प्रवास पर हों वहां के लोगों के साथ समय बिताएं यह सारी बातें इस सर्वोदय कैंप में बताई जाएगी.

असम पंचायत चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत, हिमंत बिस्व सरमा ने ठोंका 105 सीटों पर दावा, कांग्रेस को करारी शिकस्त दी

गुवाहाटी असम के पंचायत चुनावों में बीजेपी और उसके सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) ने कांग्रेस को करारी शिकस्त दी है। दोनों दलों ने असम के ग्रामीण इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है, जहां कभी कांग्रेस का सिक्का चलता था। बीजेपी और एजीपी ने 397 जिला परिषदों में से 300 पर कब्जा कर लिया है। दोनों दलों की जोड़ी ने 2,192 आंचलिक पंचायतों में से 1,436 जीत ली हैं। वोटिंग पैटर्न में इस बदलाव का असर विधानसभा में दिखा तो कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो जाएगा। 2018 के मुकाबले इस बार एनडीए का वोट शेयर 26 फीसदी बढ़ा है। इन आंकड़ों के आधार पर सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 126 में से 104 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। कई जिलों में कांग्रेस का खाता नहीं खुला असम में एनडीए ने 2 मई और 7 मई को हुए पंचायत चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है। विधानसभा चुनाव से एक साल पहले हुए इस चुनाव परिणाम से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा उत्साहित है। बीजेपी ने जिला परिषद में 274 और असम गण परिषद ने 26 सीटें जीती हैं। 2,192 आंचलिक पंचायतों में बीजेपी ने 1,265 और असम गण परिषद ने 171 सीटें जीती हैं। कांग्रेस को 72 जिला परिषदों में जीत मिली है। सीएम सरमा ने बताया कि राज्य की 76.27 फीसदी जिला परिषद सीटें एनडीए के पास हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने डिब्रूगढ़, धेमाजी, सोनितपुर, तिनसुकिया, गोलाघाट, जोरहाट जैसे कई जिलों में लगभग पूरी तरह से जीत हासिल की है। बीजेपी ने कई जिलों में 100 प्रतिशत परिषद सीटें जीती हैं। एनडीए के वोट में 26 प्रतिशत का इजाफा 126 सदस्यों वाली असम विधानसभा में अभी बीजेपी के 64 विधायक हैं। उसके सहयोगी असम गण परिषद के नौ और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल के सात विधायक हैं। अगले साल 2026 में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। जिला परिषद में मिले वोट का आकलन किया जाए तो एनडीए 105 विधानसभा में जीत मिल सकती है। असम के सीएम ने दावा किया कि बीजेपी ने मुस्लिम बहुल सीटों पर भी जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस पूरे असम में एक भी हिंदू-बहुल सीट नहीं जीत पाई। स्वदेशी मुसलमानों में बीजेपी का वोट प्रतिशत 60-70 प्रतिशत तक बढ़ गया है। ओवरऑल एनडीए का वोट प्रतिशत भी 26 प्रतिशत बढ़ गया। पंचायत सम्मेलन करेगी बीजेपी, शाह होंगे चीफ गेस्ट मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि बीजेपी गुवाहाटी में एक पंचायत सम्मेलन करेगी, जिसमें पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को आमंत्रित किया जाएगा। पंचायत चुनाव में बड़ी जीत पर अमित शाह ने X पर कहा कि असम के लोगों को पंचायत चुनाव 2025 में एनडीए को ऐतिहासिक जीत दिलाने के लिए धन्यवाद। यह जीत पीएम नरेंद्र मोदी की जन-केंद्रित नीतियों का समर्थन है, जिन्होंने असम में शांति और समृद्धि का एक नया युग लाए हैं।

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