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जेसी जॉर्ज मोदी ने कहा कि वो चुनाव लड़ सकती हैं, इस खुले इजहार से राजनीतिक गलियारों में मची खलबली

पटना बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दिवंगत दिग्गज नेता सुशील कुमार मोदी की पत्नी जेसी जॉर्ज मोदी ने चुनाव लड़ने की इच्छा जता दी है। बिहार में पार्टी के संघर्ष से अच्छे दिनों तक अगुआ रहे सुशील मोदी की पत्नी के चुनाव लड़ने की ख्वाहिश के खुले इजहार से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। सुशील मोदी का पिछले साल 13 मई को निधन हो गया था। उनकी पहली पुण्यतिथि पर पटना में आयोजित समारोह के बाद पत्रकारों से जेसी जॉर्ज मोदी ने कहा कि वो चुनाव लड़ सकती हैं। पत्रकारों ने जब जेसी जॉर्ज मोदी से पूछा कि क्या वो राजनीति में आ सकती हैं, क्या वो चुनाव लड़ सकती हैं तो उन्होंने जवाब दिया- “मेरा भाषण नहीं सुने क्या स्टेज पर, बहुत गलत बात।” मीडिया ने फिर से पूछा कि क्या आप लड़ सकती हैं तो उन्होंने कहा- “हां लड़ सकती हूं।” फिर जेसी जॉर्ज मोदी ने कार में बैठते हुए कहा- “इतना अच्छा भाषण हमने दिया, भाषण नहीं सुने क्या।” समारोह में जेसी जॉर्ज मोदी ने नीतीश के साथ सुशील मोदी के रिश्तों को बहुत स्पेशल बताते हुए कहा कि जब दोनों अलग हो गए थे तो उनके पूछने पर मोदी ने रोते हुए कहा था कि नीतीश मेरे दोस्त हैं। सुशील मोदी देश के उन गिने-चुने राजनेताओं में शामिल हैं, जो संसद और विधानमंडल के दोनों सदनों में रहे। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से राजनीति में आए सुशील मोदी चुनावी राजनीति में बिहार विधानसभा से आए। पटना सेंट्रल विधानसभा सीट से लगातार तीन बार जीतकर विपक्ष के नेता के पद तक पहुंचे सुशील मोदी 2004 में भागलपुर लोकसभा सीट से संसद पहुंचे। 2005 में जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में दूसरी बार सरकार बनी तो वो पटना लौटे और एनडीए सरकार के उपमुख्यमंत्री बने। तब से वो विधान परिषद सदस्य बनते रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा से अलग हो गए नीतीश कुमार के 2015 में लालू यादव से हाथ मिलाने के बाद बनी महागठबंधन सरकार को दो साल के अंदर गिराकर नीतीश को वापस एनडीए के साथ लाने का श्रेय सुशील मोदी को ही जाता है। 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद भी उन्हें फिर डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया और राज्यसभा सांसद बनाकर दिल्ली भेज दिया गया। नीतीश को मोदी की कमी लगातार खलती रही, जिसके कारण वो बीच में एक बार फिर अगस्त 2022 से जनवरी 2024 तक महागठबंधन के साथ चले गए थे।

सोफिया कुरैशी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी पर भड़के अजय राय, कहा- ऐसा बयान उनके घिनौने सोच को बताता है

भोपाल कर्नल सोफिया कुरैशी पर पूरे देश को गर्व है। लेकिन मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने उनको लेकर ‘गंदी बात’ कर दी। इतनी गंदी कि नवभारत टाइम्स डॉट कॉम उसे बता भी नहीं सकता। बयान के वायरल होते ही हल्ला मच गया। सीधे शाह को भाजपा कार्यालय तलब कर लिया गया, जहां जाकर उन्होंने माफी मांग ली। आलाकमान के तेवर को देखते हुए मंत्री विजय शाह हवाई चप्पल में ही भागते हुए पार्टी ऑफिस पहुंचे। हवाई चप्पल में ही आए पार्टी दफ्तर पार्टी ने इस तरह फटकार लगाई कि वे हवाई चप्पल पहनकर भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे और मीडिया से बचने के लिए दौड़ते हुए कार्यालय में दाखिल हो गए। भाजपा राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा ने इस मामले पर एमपी संगठन से रिपोर्ट मांगी। इसके बाद प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने मंत्री शाह को मिलने बुलाया तो उनके होश फाक्ता हो गए। वे हवाई चप्पल में ही पार्टी कार्यालय पहुंच गए। पार्टी नेतृत्व से मांगी माफी उन्होंने पार्टी के नेतृत्व से माफी मांगी और मीडिया में कहा कि मैं बहन सोफिया से हजार बार माफी मांग सकता हूं। आपको बता दें कि जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह सोमवार को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर बेहद घटिया बयान दे दिया। लेकिन घटना का वीडियो मंगलवार को वायरल हुआ। वीडियो में उन्होंने इतनी गंदी बात कही है कि हमारे लिये यहां लिखना भी कर्नल सोफिया की बेकद्री हो सकती है। यहां पर हम इसलिए बयान नहीं लिख रहे। दस बार माफी मांग लूंगा मीडिया से चर्चा में विजय शाह ने कहा कि जो घटना हुई उस पर भी आप जाओ। सबसे पहले मैं ये बता दूं कि मेरा पूरा परिवार, खानदान मिलिट्री बेस्ड रहा है। कारगिल से लेकर और तमाम जगहों पर मेरे परिवार में कई लोग शहीद हुए। मैं उस बात से मैं न सिर्फ विचलित था बल्कि बहुत दुखी था। हम सपने में भी उनके अपमान का सोच भी नहीं सकते। फिर भी किसी को ऐसा लगा हो, किसी समाज को या किसी व्यक्ति को तो मैं दस बार माफी मांगने को तैयार हूं। शाह ने कहा कि मैंने कहा न कि दुखी मन से और इतनी विपरीत परिस्थितियों में अगर मेरे मुंह से कुछ गलत निकल गया है। पार्टी ने दूसरे मैटर के लिए बुलाया था हालांकि विजय शाह ने इस बात से मुकर गए कि पार्टी संगठन ने उन्हें बयानबाजी के लिए बुलाया था। शाह ने कहा है कि महामंत्री जी से दूसरे मैटर पर बात करने के लिए बुलाया था। बीजेपी नेताओं ने परिवार से की मुलाकात वहीं, मंत्री विजय शाह के बयान से पार्टी को नुकसान हुआ है। मध्य प्रदेश बीजेपी अब डैमेज कंट्रोल में जुटी है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का संदेश लेकर बीजेपी नेताओं ने कर्नल सोफिया कुरैशी के परिवार से नौगांव जाकर मुलाकात की है। सोफिया कुरैशी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी पर भड़के अजय राय  मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान ने अब तूल पकड़ लिया है। विपक्षी दल लगातार विजय शाह को घेर रहे हैं। इतना ही नहीं, भाजपा संगठन ने भी विजय शाह को तलब कर लिया है। इसी बीच यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय का बयान सामने आया है। जिममें उन्होंने केन्द्र सरकार को मंत्री का इस्तीफा लेने की बात कही है। कर्नल सोफिया कुरैशी का अपमान अजय राय ने कहा कि मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने अपने बयान से देश की वीरांगना बिटिया कर्नल सोफिया कुरैशी का अपमान करके नारीशक्ति, देश की सेना के साथ-साथ हमारी एकता पर भी चोट किया है। उनका बयान उनके छोटे और घिनौने सोच को बताता है। किसी जिम्मेदारी पर बैठा आदमी ऐसा अनैतिक और नफरती बयान कैसे दे सकता है। अजय राय ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मंत्री से तुरंत इस्तीफा लेना चाहिए या बर्खास्त कर देना चाहिए अन्यथा यही माना जाएगा कि इस ओछी बयानबाजी में उनकी भी मूक सहमति है। हालांकि अगर ऐसा हुआ भी तो कोई ताज्जुब की बात नहीं होगी। क्योंकि, भाजपा और संघ का इतिहास ही महिला विरोध के साथ-साथ नफरत फैलाने वाला रहा है।

बीजेपी ने नागपुर महानगर की जिम्मेदारी दयाशंकर तिवारी को सौंपी, कौन बनेगा मुंबई बीजेपी चीफ?

मुंबई महाराष्ट्र बीजेपी संगठन चुनावों को गति देते हुए मुंबई समेत 58 जिला अध्यक्षों का ऐलान कर दिया है। बीजेपी ने नागपुर महानगर की जिम्मेदारी दयाशंकर तिवारी को सौंपी है। इसी प्रकार पार्टी ने मीरा भाईंदर में दिलीप जैन को पार्टी की कमान दी है। पार्टी ने कल्याण में नंदु परब और उल्लासनगर में राजेश वधारिया को अध्यक्ष बनाया है। पुणे शहर में जिला अध्यक्ष का पद धिरज घाटे को दिया है। महाराष्ट्र में प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी अभी राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के पास है। पार्टी ने पूर्व मंत्री रवींद्र चव्हाण को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। उन्हें ही बावनकुले के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। महाराष्ट्र बीजेपी के 58 जिला अध्यक्षों की लिस्ट देखें। कौन बनेगा मुंबई बीजेपी चीफ? जिला अध्यक्षों के ऐलान के बाद अब मुंबई अध्यक्ष को लेकर चर्चा शुरू हो गई है क्यों प्रदेश प्रमुख बावनकुले की तरह ही आशीष शेलार अब मंत्री है। ऐसे में एक व्यक्ति-एक पद के हिसाब से किसी नए व्यक्ति को कमान सौंपेगी। ऐसे में जब आगे बीएमसी के चुनाव होने हैं तब मुंबई प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक और क्रिकेट प्रशासक के तौर पर सक्रिय आशीष शेलार अगस्त, 2022 में मुंबई बीजेपी के अध्यक्ष बने थे। आशीष शेलार ने तब मंगल प्रभात लोढ़ा को रिप्लेस किया था। मंगल प्रभात लोढ़ा भी महायुति 2.0 सरकार में मंत्री हैं। क्या संजय उपाध्याय बनेंगे चीफ? कांग्रेस में मुंबई प्रदेश अध्यक्ष की कमान डॉ. वर्षा गायकवाड़ के हाथों में है। पार्टी ने अभी तक वर्षा गायकवाड़ को हटाने के संकेत नहीं दिए हैं। अब देखना यह है कि बीजेपी बीएमसी चुनावों से पहले कौन सा दांव खेलती है? राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि संजय उपाध्याय को भी फडणवीस अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे सकते हैं। संजय उपाध्याय पूर्व में मुंबई बीजेपी से महासचिव भी रह चुके हैं। इसके अलावा अमित साटम, अतुल भातखलकर और पराग अलवानी के नाम चर्चा में हैं। देवेंद्र फडणवीस के सीएम बनने के बाद बीजेपी की नजर मुंबई में अपना मेयर बनाने पर है। बीजेपी ने विधानसभा चुनावों में 132 सीटें जीती थीं।

कांग्रेस शहर अध्यक्ष के लिए कई नए नाम सामने आने से समीकरण भी बदल रहे, दीपू यादव और चिंटू चौकसे पर चर्चा

इंदौर  एमपी के इंदौर शहर में कांग्रेस के जिला-शहर अध्यक्ष के बदलाव को लेकर चल रही कवायद फिर से तेज हो गई है। माना जा रहा था कि गुजरात अधिवेशन के बाद इंदौर के जिला और शहर कांग्रेस अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। इसके बाद पिछले दिनों भोपाल के अलावा प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली में नामों को लेकर बड़े नेताओं से चर्चा की थी। शहर अध्यक्ष के लिए कई नए नाम सामने आने से समीकरण भी बदल रहे हैं। हटाने की कवायद तेज मालूम हो कि लंबे समय तक शहर अध्यक्ष पद खाली रहने के बाद सुरजीत सिंह चड्ढा को कुर्सी मिली थी। वे कमलनाथ के प्रदेश अध्यक्ष होने के समय बनाए गए थे। विधानसभा की सभी सीटें हारने के बाद चड्ढा और जिला अध्यक्ष सदाशिव यादव को हटाने की कवायद चल रही है। गांधी भवन में कैलाश विजयवर्गीय की आवभगत करने के बाद अध्यक्ष बड़े नेताओं के निशाने पर हैं। चड्ढा को जब अध्यक्ष बनाया था तब अरविंद बागड़ी और अमन बजाज ही दावेदार थे। इन नामों पर चर्चा अब नए समीकरण के तहत नए नाम सामने आए हैं। इनमें दीपू यादव और चिंटू चौकसे का नाम सामने आया है। बताया जाता है कि चिंटू राजी नहीं है। ऐसे में यादव के नाम पर विचार चल रहा है। जिला अध्यक्ष के लिए राधेश्याम पटेल दावेदार है। बताया जा रहा है कि दावेदारों ने अपने नेताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।

AICC ट्रेनिंग डिपार्टमेंट के चीफ सचिन राव और एमपी कांग्रेस के प्रशिक्षण विभाग द्वारा ये ट्रेनिंग कैम्प आयोजित किया जाएगा

भोपाल चुनावों में हार और दलबदल के बाद अब कांग्रेस अपने कैडर मैनेजमेंट पर फोकस कर रही है। अपने सभी विधायकों, जिला अध्यक्षों, जिला प्रभारियों, विधानसभा प्रभारियों को अब कांग्रेस आवासीय प्रशिक्षण देगी। ट्रेनिंग कैम्प में प्रशिक्षण लेने वाले विधायकों, जिला अध्यक्षों सहित सभी नेताओं को एक निश्चित राशि बतौर पार्टी के पास जमा करनी होगी। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी(AICC) ट्रेनिंग डिपार्टमेंट के चीफ सचिन राव और एमपी कांग्रेस के प्रशिक्षण विभाग द्वारा ये ट्रेनिंग कैम्प आयोजित किया जाएगा। पार्टी के इतिहास से लेकर एआई को समझाएंगे बीते 7 मई को भोपाल में एमपी कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के साथ हुई बैठक में ये तय हुआ है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को आइडियोलॉजी के आधार पर जोड़ने के लिए विधायकों, जिलाध्यक्षों, प्रदेश पदाधिकारियों से लेकर ब्लॉक, मंडलम, सेक्टर और बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिए जाएं। सबसे पहले होने वाली ट्रेनिंग में कांग्रेस पार्टी के इतिहास, राजनीतिक सफरनामे से लेकर वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में बताया जाएगा। फेक और फैक्ट को कैसे पहचानें कांग्रेस ने ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार किया है। इसमें प्रशिक्षणार्थियों को ये बताया जाएगा कि वर्तमान में एआई के युग में फेक न्यूज और कंटेंट और फैक्ट को कैसे पहचानें। विरोधी दल द्वारा सोशल मीडिया पर किए जाने वाले दुष्प्रचार को रोकने के तौर तरीके भी बताए जाएंगे। मोबाइल मैनेजमेंट से लेकर चुनाव प्रबंधन सिखाएंगे कांग्रेस का मानना है कि सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति के व्यवहार और काम करने के तौर तरीके का कार्यकर्ताओं और आम जनता पर बड़ा असर पड़ता है। ट्रेनिंग में मोबाइल मैनेजमेंट, मीडिया और सोशल मीडिया मैनेजमेंट भी सिखाया जाएगा। प्रशिक्षण विभाग से जुडे़ एक सदस्य ने बताया कि कई नेता अपने वॉट्सऐप पर रीड रिसिप्ट ऑन किए रहते हैं। ऐसे में जब कोई वॉट्सऐप पर मैसेज भेजता है तो यह पता नहीं चलता कि मैसेज देखा या नहीं? नेताओं के वॉट्सऐप पर प्रोफाइल फोटो, बायो पब्लिक होना चाहिए। एक्सपर्ट्स देंगे ट्रेनिंग कांग्रेस विधायकों, जिला अध्यक्षों, जिला प्रभारियों और विधानसभा प्रभारियों को ट्रेनिंग देने के लिए देश भर के अलग-अलग सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स बुलाए जाएंगे। दो दिनों में करीब सात-आठ सत्रों में अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

गांधी परिवार पर आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए दिग्विजय सिंह के भाई को मिला नोटिस

भोपाल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद 25 अप्रैल को कांग्रेस नेता लक्ष्मण सिंह ने पार्टी नेतृत्व पर हमला बोला था। लक्ष्मण सिंह मध्य प्रदेश के राजगढ़ से सांसद रह चुके हैं। इसके अलावा इनकी एक और पहचान है, लक्ष्मण सिंह कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के छोटे भाई हैं। कांग्रेस ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा है कि राहुल गांधी सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाकर की गई उनकी अपमानजनक टिप्पणी ने सारी हदें पार कर दी हैं। राहुल गांधी पर की थी टिप्पणी 25 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित एक शोक सभा के दौरान लक्ष्मण सिंह ने कहा था कि “राहुल गांधी और रॉबर्ट वाद्रा बहुत नादान हैं। देश उनकी अपरिपक्वता के परिणामों को भुगत रहा है।” सिंह को पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति (DAC) के सदस्य सचिव तारिक अनवर ने नौ मई को नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया, “आपके द्वारा बार-बार सार्वजनिक रूप से दिए गए बयानों के संबंध में कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रभारी महासचिव हरीश चौधरी की ओर से एक शिकायत मिली है…सार्वजनिक बयानबाजी से पार्टी की छवि और गरिमा को गंभीर नुकसान पहुंचा है।” मांगा गया है स्पष्टीकरण नोटिस में ये भी कहा गया है, “आपके हालिया बयान, खासकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी ने सारे हदें पार कर दी हैं…आपको कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है और नोटिस मिलने की तारीख से 10 दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया जाता है।” उमर अब्दुल्ला पर भी साधा था निशाना पूर्व लोकसभा सदस्य एवं पूर्व विधायक लक्ष्मण सिंह भारतीय जनता पार्टी में भी रह चुके हैं। उन्होंने 25 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर भी निशाना साधते हुए कहा था कि उनकी आतंकवादियों के साथ मिलीभगत हो सकती है। पार्टी से निकाले जा सकते हैं सिंह रॉबर्ट वाड्रा पर सिंह ने यह कहा था कि “रॉबर्ट वाड्रा का यह बयान कि मुस्लिमों को सड़क पर नमाज अदा नहीं करने देने के कारण आतंकवादियों ने हमला किया, न सिर्फ गैर जिम्मेदाराना है बल्कि ऐसा बयान भी है जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है। मैं यह सब कैमरे के सामने कह रहा हूं, ताकि कोई भी भ्रमित न हो। कांग्रेस बोलने से पहले 10 बार सोचे, नहीं तो चुनाव में जनता जवाब दे देगी।” संपर्क किए जाने पर राज्य में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न उजागर करने की शर्त पर कहा कि पार्टी में लक्ष्मण सिंह के गिनती के दिन बचे हैं।

विपक्ष की ओर से संसद का विशेष सत्र बुलाने को लेकर राहुल गांधी ने पीएम मोदी को एक चिट्ठी लिखी

नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए 10 मई की शाम सीजफायर की घोषणा की गई. इसके बाद भी बॉर्डर से सटे कई इलाकों में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन हमला किया जा रहा है. इसी बीच विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी से संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है. विपक्ष की ओर से संसद का विशेष सत्र बुलाने को लेकर राहुल गांधी ने पीएम मोदी को एक चिट्ठी लिखी है. उन्होंने लिखा है कि भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी, मैं विपक्ष के सर्वसम्मति से किए गए अनुरोध को दोहराता हूं कि संसद का विशेष सत्र तुरंत बुलाया जाए.   पिछले सारे घटनाक्रम पर सामूहिक चर्चा जरूरी चिट्ठी में राहुल ने आगे लिखा है कि लोगों और उनके प्रतिनिधियों के लिए पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर और आज के युद्ध विराम पर चर्चा करना बहुत जरूरी है, जिसकी घोषणा सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने की थी. यह आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए हमारे सामूहिक संकल्प को प्रदर्शित करने का भी एक अवसर होगा. मुझे विश्वास है कि आप इस मांग पर गंभीरता से और तेज़ी से विचार करेंगे. सीजफायर के बाद ही विपक्ष ने की थी विशेष सत्र की मांग सीजफायर के बाद से ही विपक्ष के नेता संसद के विशेष सत्र की मांग कर रहे हैं. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इसको लेकर पीएम मोदी को एक चिट्ठी लिखी थी. विपक्ष का कहना है कि सीजफायर की घोषणा होने के बाद इस पर सामूहिक रूप से चर्चा होना बहुत जरूरी है.  

चीन और तुर्किए ने पाकिस्तान का समर्थन करने के सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया इस बात को देख रही

भोपाल पहलगाम हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को तबाह करने के भारतीय सेना के पराक्रम की हर कोई तारीफ कर रहा है. इस बीच मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का भी बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने भारतीय सेना की तारीफ करते हुए ये भी कहा कि अब ये साबित हो गया है कि पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन करता है. एएनआई से बातचीत करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा, “पहलगाम में जो हमला हुआ उसमें जांच की जा रही है कि क्या कारण रहे कि वहां सुरक्षा नहीं थी, लेकिन अब भारतीय सेना ने चिन्हित करके बिना नागरिकों को निशाना बनाए जो आतंकी ठिकानों पर हमला किया है उसके लिए हम सेना को बधाई देते हैं. हमें हमारी सेना पर गर्व है.” ‘पाकिस्तान का आतंकवाद को समर्थन’ उन्होंने आगे कहा, “आतंकवादियों के जो अड्डे थे वहां आतंकी अजहर मसूद के परिवार के लोग मारे गए और उनके जनाजे में सेना और पुलिस के शामिल थे, इससे ये साबित होता है कि आतंकवादियों के समर्थन में वो लोग खड़े हुए थे.” चीन और तुर्किए द्वारा पाकिस्तान का समर्थन करने के सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया इस बात को देख रही है. दिग्विजय सिंह के अलावा मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख जीतू पटवारी ने कहा, “सीमा पर हमारे जवान पाकिस्तान को जवाब दे रहे हैं. पहलगाम में जो हमला किया गया देश का एक-एक नागरिक उसके खिलाफ है. इसके बाद पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया को ये समझ आ गया कि हिंदुस्तान की जो हिंदु, मुस्लिम, सिख, इसाई की जो मूल भावना है वो इस घटना से पूरी दुनिया ने देखी है.” ‘देश का हर नागरिक सेना के साथ’ उन्होंने कहा, देश का हर एक नागरिक वो किसी भी धर्म, जाति और संप्रदाय का हो वो सेना के साथ खड़ा है इससे यही मैसेज गया है कि यही भारत की विशेषता और प्राचीन सभ्यता है. कांग्रेस पूरी तरह से सरकार और सेना के साथ खड़ी है. हमारी तिरंगा यात्रा सेना की हौसला अफजाई के लिए है.

पाकिस्तान से जंग ना करने की ‘इल्तिजा’, मुफ्ती ने PM मोदी से की अपील, विनाश के कगार पर…

श्रीनगर जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच अघोषित युद्ध जैसे हालात हैं. भारत ने पहलगाम हमले में 27 पर्यटकों की मौत का बदला पाकिस्तान में नौ आतंकी ठिकानों पर हमला कर लिया. भारत की इस सैन्य कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने पिछले दो रात में दो दर्जन से अधिक शहरों पर मिसाइल, ड्रोन अटैक की नाकाम कोशिश की है. भारतीय सेना ने पाकिस्तान के हर हमले को नाकाम किया है, मुंहतोड़ जवाब दिया है. उधर पाकिस्तान जंग पर उतारू है, इधर महबूबा मुफ्ती शांति का राग अलापने लगी हैं. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया को कहते हैं कि युद्ध मत करो. यूक्रेन युद्ध को लेकर पीएम मोदी ने कहा था कि यह युग युद्ध का नहीं, डायलॉग का है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने तब कहा था कि पॉलिटिकल डायलॉग की जरूरत है. पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी को फोन उठाकर शहबाज शरीफ (पाकिस्तान के प्रधानमंत्री) से बात करनी चाहिए. उन्होंने दोनों देशों की लीडरशिप की शांति और बातचीत की अपील की और कहा कि खून बहना बंद होना चाहिए. जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम ने आम नागरिकों के मारे जाने का जिक्र किया और कहा कि इन हालात में महिलाओं और बच्चों का क्या कसूर है. महिलाओं और मासूम बच्चों को क्यों टार्गेट किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि मिलिट्री एक्शन कभी बीमारी की जड़ तक नहीं पहुंच पाता है. पाकिस्तान के हालात भी ठीक नहीं है. इस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप होना चाहिए. महबूबा मुफ्ती ने युद्ध तुरंत रोकने की अपील करते हुए कहा कि पुलवामा हमले के बाद बालाकोट हुआ था. उससे क्या हुआ? उन्होंने कहा कि भारत ने कहा है कि हमने नौ आतंकी अड्डों को तबाह कर दिया है, मकसद पूरा हुआ. पाकिस्तान भी भारत के फाइटर जेट मार गिराने, पूंछ में सेना के मुख्यालय को तबाह करने के दावे कर रहा है. महबूबा ने कहा कि दोनों ही देशों के नेतृत्व से अपील करना चाहता हूं कि आपका मकसद जब पूरा हो चुका है, तो फिर हमारा खून क्यों बहाया जा रहा है. यह लड़ाई बंद होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान, दोनों ही देश परमाणु संपन्न देश हैं. खुदा न खास्ता परमाणु हथियारों का उपयोग हुआ तो इस रीजन में कोई नहीं बचेगा. भारत-PAK टेंशन पर महबूबा मुफ्ती की PM मोदी से खास अपील पाकिस्तान के खिलाफ भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दोनों देशों में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. भारत-पाकिस्तान के बीच इस टेंशन को लेकर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने गहरी चिंता जताते हुए दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है. महबूबा मुफ्ती ने पीएम मोदी से की अपील न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि शांति और संवाद के जरिए मामले को सुलझाएं ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके. महबूबा मुफ्ती ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, ’22 अप्रैल को पहलगाम में हुए भीषण हमले ने भारत-पाक संबंधों को ‘विनाश के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है.’ उन्होंने कहा, ‘महिलाओं और बच्चों सहित निर्दोष लोगों की दुखद मौतें और मानवीय कीमत दिल तोड़ देने वाली है. हर पल बढ़ते तनाव के साथ और अधिक जानें खतरे में पड़ती जा रही हैं.’ उन्होंने दो टूक कहा कि इस संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता और इससे केवल और अधिक पीड़ा ही बढ़ेगी. महबूबा मुफ्ती ने भारत और पाकिस्तान के नेतृत्व से शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को अपनाने की अपील की. उन्होंने लिखा, ‘मैं विशेष रूप से भारत के प्रधानमंत्री से आग्रह करती हूं कि वो बातचीत का रास्ता अपनाएं और इस टेंशन को समाप्त करें. आज, पहले से कहीं अधिक, शांति और बातचीत ही हमारा एकमात्र उपाय होना चाहिए.’ भारत के ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए पाकिस्तानी आतंकी उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल ‘ईमानदार और निरंतर प्रयासों से ही हम तनाव कम कर सकते हैं और शांति बहाल करने के कठिन कार्य की शुरुआत कर सकते हैं.’ बता दें कि पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत का बदला लेने के लिए भारत ने बुधवार की रात को ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था. इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर स्ट्राइक की है. यह कार्रवाई रात डेढ़ बजे के आसपास की गई थी जिसमें कई आतंकी मारे गए हैं.    

रिटायर्ड आईएफएस डबास ने आप के संयोजक केजरीवाल पर कई गंभीर आरोप लगाए, पार्टी से दिया इस्तीफा

भोपाल रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी आजाद सिंह डबास ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दिया है। तीन पेज के इस्तीफे में डबास ने दिल्ली के पूर्व सीएम और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। डबास ने लिखा– मैं 1985 बैच का आईएफएस(भारतीय वन सेवा) का एमपी कैडर का अधिकारी रहा हूं। 21 साल की नौकरी के बाद जनवरी 2017 में APCCF के पद से रिटायरमेंट के बाद मप्र में दो सालों तक क्षेत्रीय दलों को मिलाकर तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। मैं दो सालों तक कांग्रेस में 2020 तक कांग्रेस में पिछड़ा वर्ग विभाग का प्रदेश संयोजक रहा। लेकिन कुछ मुद्दों पर मतभेद के चलते कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। कांग्रेस से अलग होने के बाद 21 मई 2022 को आम आदमी पार्टी के मप्र में प्रभारी गोपाल राय के समक्ष आम आदमी पार्टी की सदस्यता ली थी। 2022 के नगरीय निकाय चुनाव में आप पार्टी का मेनिफेस्टो बनाया थाा। मैं वर्तमान में आप का प्रदेश सचिव (प्रशासनिक मामले) का दायित्व निभा रहा हूं। केजरीवाल को चेताया था प्रवेश वर्मा लड़ेंगे चुनाव डबास ने इस्तीफे में लिखा मैं मूलत: दिल्ली की मुंडका विधानसभा के लाड़पुर(कंझावला) गांव का रहने वाला हूं। मेरा परिवार बिजवासन विधानसभा में रहता है। दिल्ली वासी होने के नाते वहां की राजनीति की मुझे अच्छी समझ रही है। मैंने विधानसभा चुनाव के पहले दिसंबर 2024 में आपको पत्र लिखकर बताया था कि वर्तमान परिस्थिति में अकेले दिल्ली में चुनाव लड़ना ठीक नहीं हैं। बीजेपी किसी भी हद तक जाकर आप को दिल्ली में हराना चाहती थी। मुझे जानकारी मिली थी और मैंने आपको सूचित किया था कि आपके खिलाफ प्रवेश वर्मा को बीजेपी चुनाव लड़ा सकती है। इसी तरह हरीश खुराना को मोदीनगर से, मीनाक्षी लेखी या रमेश बिधूडी को अतिशी मार्लेना के खिलाफ कालकाजी से लड़ा सकती है। मेरा ये सब लिखने का मतलब ये था कि हर सीट पर कांटे की टक्कर होने वाली थी। टिकट बांटने में गलती की डबास ने लिखा- मैंने अपने पत्र में यह लिखा था कि आम आदमी पार्टी को टिकट वितरण में सावधानी बरतनी चाहिए थी। उस समय पार्टी ने जो 11 टिकट दिए थे उनमें 6 टिकट कांग्रेस और बीजेपी से आए नेताओं को दिए गए थे। इससे मूल कैडर में असंतोष था। ऐसी विषम परिस्थिति में बीजेपी के दुष्प्रचार के चलते जब दिल्ली में मध्यम और बुद्धिजीवी वर्ग का आम आदमी पार्टी से काफी हद तक मोहभंग हो चुका है। ऐसे में एक-एक वोट बेहद कीमती है। कांग्रेस से गठबंधन कर चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था डबास ने लिखा- मैंने इस बात पर विशेष जोर दिया था कि वर्तमान में आप पार्टी का दिल्ली में चुनाव जीतना बहुत जरुरी है। दिल्ली में जीतने के बाद मप्र छत्तीसगढ़ राजस्थान जैसे राज्यों में अपनी पैठ बढ़ा सकती है। आप ने भले ही राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पा लिया हो लेकिन, वास्तव में राष्ट्रीय पार्टी का स्वरूप तभी लेगी जब मप्र, छत्तीसगढ़ राजस्थान यूपी जैसे बडे़ प्रदेश में जीतेगी। हरियाणा के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का कांग्रेस से गठबंधन हो गया होता तो आज वहां निश्चित रूप से कांग्रेस और आप पार्टी की साझा सरकार होती। इसका असर महाराष्ट्र के चुनाव पर भी पड़ता। लेकिन आपने मेरे सुझावों को कोई तवज्जो नहीं दी। “मैं दिल्ली का राजा हूं” ये घमंड की बानगी थी डबास ने लिखा- दिल्ली के विधानसभा चुनाव का नतीजा सबके सामने हैं। दिल्ली के चुनाव में आपका यह कहना कि मैं दिल्ली का राजा हूं ये आपके घमंड की एक बानगी मात्र है। देश के प्रधानमंत्री को सरेआम चुनौती देते हुए कहना कि वे इस जन्म में तो मुझे नहीं हरा सकते। इसके लिए उन्हें पुर्नजन्म लेना होगा। यह वाक्य आपके घमंड की पराकाष्ठा को ही दिखाता है। शराब घोटाले में जेल गए, मजबूरी में इस्तीफा दिया डबास ने इस्तीफे में आगे लिखा- ये सर्वविदित है कि दिल्ली में आपकी सरकार में हुए शराब घोटाले के बाद आप खुद लगभग 6 महीने तत्कालीन आबकारी मंत्री मनीष सिसौदिया लगभग डेढ़ साल, राज्यसभा सांसद संजय सिंह लगभग 6 महीने और आपके नजदीकी सलाहकार विजय नायर सहित तमाम नेता जेल गए। जेल से बाहर आने के बाद आपने मजबूरीवश दिल्ली के मुख्यमंत्री का पद छोड़ दिया और ऐलान किया कि आप इस मामले को जनता की अदालत में लेकर जाएगें और जनता ही तय करेगी कि आपके द्वारा भ्रष्टाचार किया गया है या नही। 8 फरवरी 2025 को जनता की अदालत का फैसला आया। चुनाव परिणामों से यह ध्वनि निकली कि आप शराब घोटाले में लिप्त हैं। अगले कुछ सालों में न्यायालय का भी फैसला इस मामले में आ जायेगा और उसमें भी जनता की अदालत जैसा फैसला ही आने की पूरी संभावना है। दिल्ली सरकार के हर विभाग में भ्रष्टाचार हुआ डबास ने लिखा- अक्टूबर-नवम्बर 2024 में दिल्ली विधानसभा के चुनावों के प्रचार-प्रसार के दौरान मुझे आम आदमी पार्टी द्वारा दिल्ली में की गई अवैध गतिविधियों के बारे में ऐसी-ऐसी जानकारियां मिलीं। जो हैरान करने वाली थी। आपकी सरकार के दौरान शायद ही दिल्ली प्रदेश में कोई ऐसा विभाग होगा जिसमें घोटाला न हुआ हो। आपके द्वारा कुछ महीनों से लेकर 6 साल की अवधि तक कैग की 14 ऑडिट रिपोर्ट्स इसलिए विधानसभा में टेबल नहीं की गई। ताकि, आपकी सरकार में हुए कई बड़े-बड़े घोटालों की जानकारी आम जनता तक न पहुंचे। पहले की तरह एक बार फिर आप दिल्ली की जनता की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब हो सकें। बीते दिनों दिल्ली प्रदेश की विधानसभा में कैग की 14 ऑडिट रिपोर्ट्स में से 4 रिपोर्ट हाउस में टेबल की गई जिनमें कैग द्वारा भारी मात्रा में अनियमितता पाई गई हैं। 11 साल के केजरीवाल शासन पर कई किताबें लिखी जा सकती हैं डबास ने लिखा दिल्ली में आप ने जिस तरह का शासन किया वो एक शोध का विषय है दिल्ली यूनिवर्सिटी, जेएनयू के छात्र उसपर पीएचडी कर सकते हैं। मैं तीन साल आम आदमी पार्टी में रहा। दावे के साथ कह सकता हूं मप्र में आप पार्टी का कोई भविष्य नहीं हैं। जो पार्टी खुद भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हो वह भ्रष्टाचार के खिलाफ कैसे आवाज उठा सकती है। सारी स्थितियों … Read more

देश की सेफ्टी और आतंकवाद के खिलाफ कोई भी कड़ी कार्रवाई उचित है, पार्टी सरकार के हर कदम में साथ खड़ी: खड़गे

नई दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ऑपरेशन सिंदूर पर बयान देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी पाकिस्तान के खिलाफ सरकार के इस कदम का पूरी तरह से समर्थन करती है। खड़गे ने कहा कि देश की सेफ्टी और आतंकवाद के खिलाफ कोई भी कड़ी कार्रवाई उचित है। पार्टी सरकार के इस दिशा में उठाए गए हर कदम में साथ खड़ी है।   खड़गे का बयान- खड़गे ने कहा, “हमारी प्राथमिकता हमेशा देश की सुरक्षा रही है। यदि सरकार आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है, तो कांग्रेस इसका समर्थन करती है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी देश की सीमा की रक्षा के लिए किसी भी कदम का समर्थन करेगी, बशर्ते वह राष्ट्रीय हित में हो। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह बयान उस समय दिया जब भारत की वायुसेना ने PoK में एयरस्ट्राइक करके आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाया था। भारतीय वायुसेना का बड़ा हमला- भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बहावलपुर में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकाने पर सटीक हमला किया, जिससे पूरी इमारत ध्वस्त हो गई। यह वही स्थान था जहां 2019 के पुलवामा हमले की योजना बनाई गई थी। इस हमले को पुलवामा, उरी और 26/11 हमलों का बदला माना जा रहा है। भारत का बड़ा ऑपरेशन- भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर ऑपरेशन किया है। इस ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य मारे गए हैं। इस पर मसूद अजहर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अगर मैं भी मर जाता तो अच्छा था।” यह घटना पाकिस्तान में खलबली मचा रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान पर दबाव बना सकता है। वहीं, भारत ने किसी भी जवाबी कार्रवाई के लिए अपनी तैयारियों को मजबूत किया है।  

जाति जनगणना के संबंध में विचार करने के लिए तीन बिंदु सुझाए हैं, जनगणना से पहले ही PM मोदी से कांग्रेस की तीन मांगें

नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने जाति जनगणना के संबंध में विचार करने के लिए तीन बिंदु सुझाए हैं। इनमें एक प्रमुख मांग यह है कि आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा को खत्म किया जाए। खरगे ने लिखा, ‘मैंने 16 अप्रैल 2023 को आपको चिट्ठी लिखी थी और जाति जनगणना कराने की कांग्रेस की मांग आपके सामने रखी थी। दुर्भाग्य से, मुझे उसका कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद, आपकी पार्टी के नेताओं और आपने खुद इस जायज मांग को उठाने के लिए लगातार कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। मगर, अब आप खुद स्वीकार कर रहे हैं कि यह मांग सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के हित में है।’ मल्लिकार्जुन खरगे ने अपील की है कि जातिगत जनगणना के विषय पर सभी राजनीतिक दलों से जल्द बातचीत की जाए और इस मामले में तेलंगाना मॉडल का उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्यों की ओर से पारित आरक्षण को तमिलनाडु की तर्ज पर संविधान की 9वीं अनुसूची में डाला जाए, आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा को खत्म किया जाए और निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की व्यवस्था लागू हो। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने खरगे का प5 मई की तिथि वाला यह पत्र अपने एक्स हैंडल पर साझा किया। रमेश ने कहा, ‘कांग्रेस कार्यसमिति की 2 मई को हुई बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने सोमवार रात प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। देश पहलगाम में हुए बर्बर आतंकी हमले को लेकर आक्रोश और पीड़ा से गुजर रहा था। इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी ने जातिगत जनगणना पर अचानक और हताशाजनक यूटर्न लिया। खरगे जी ने अपने पत्र में तीन बेहद महत्वपूर्ण और स्पष्ट सुझाव दिए हैं।’ तेलंगाना मॉडल को अपनाए जाने की मांग पत्र में खरगे ने कहा, ‘केंद्र सरकार ने बिना किसी स्पष्ट विवरण के यह घोषणा की है कि अगली जनगणना (जो वास्तव में 2021 में होनी थी) में जाति को भी एक अलग श्रेणी के रूप में शामिल किया जाएगा।’ खरगे ने कांग्रेस शासित तेलंगाना में हुए जातिगत सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा, ‘जनगणना से सम्बंधित प्रश्नावली का डिजाइन अत्यंत महत्वपूर्ण है। जाति संबंधी जानकारी केवल गिनती के लिए नहीं बल्कि व्यापक सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एकत्र की जानी चाहिए। गृह मंत्रालय को जनगणना में पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए तेलंगाना मॉडल का उपयोग करना चाहिए। प्रक्रिया के अंत में होने वाली रिपोर्ट में कुछ भी छिपाया नहीं जाना चाहिए ताकि प्रत्येक जाति के पूर्ण सामाजिक-आर्थिक आंकडे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हों, जिससे एक जनगणना से दूसरी जनगणना तक उनकी सामाजिक-आर्थिक प्रगति को मापा जा सके और उन्हें संवैधानिक अधिकार दिए जा सकें।’ कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है, ‘जाति जनगणना के जो भी नतीजे आएं, यह स्पष्ट है कि अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गो के लिए आरक्षण पर मनमाने ढंग से लगाई गई 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा को संविधान संशोधन के माध्यम से हटाना होगा।’ पत्र में खरगे ने कहा, ‘अनुच्छेद 15(5) को भारतीय संविधान में 20 जनवरी 2006 से लागू किया गया था। इसके बाद इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई। लंबे विचार-विमर्श के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2014 को इसे बरकरार रखा। यह फैसला 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले आया।’ उनके मुताबिक, यह निजी शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रावधान करता है। खरगे ने कहा कि संसद की एक स्थायी समिति ने गत 25 मार्च को उच्च शिक्षा विभाग के लिए अनुदान की मांग पर अपनी 364वीं रिपोर्ट में भी अनुच्छेद 15 (5) को लागू करने के लिए नया कानून बनाने की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा, ‘जाति जनगणना जैसी किसी भी प्रक्रिया को किसी भी रूप में विभाजनकारी नहीं माना जाना चाहिए। सामाजिक और आर्थिक न्याय तथा स्थिति और अवसर की समानता सुनिश्चित करने के लिए इसे उपरोक्त सुझाए गए समग्र तरीके से कराना अत्यंत आवश्यक है।’

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सवाल उठा दिया है कि वह पानी के बदले राज्य को क्या मिल रहा है?

शिमला पानी के बंटवारे को लेकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के बीच मचे घमासान के बाद हिमाचल प्रदेश भी विवाद में कूद पड़ा है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सवाल उठा दिया है कि वह पानी के बदले राज्य को क्या मिल रहा है? सुक्खु ने कहा कि पानी के लिए पंजाब और हरियाणा लड़ रहे हैं, लेकिन यह उन्हें हिमाचल से मिल रहा है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कार्यक्रम के दौरान राज्यों के बीच पानी के बंटवारे का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोगों को पानी का अधिकारपूर्ण हिस्सा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘पानी हिमाचल प्रदेश का सबसे कीमती पाकृतिक संसधान है। राज्य 12000 मेगावाट बिजली पैदा करता है, फिर भी हिमाचल को इसमें क्या मिला है? एसजेवीएनएल 6700 करोड़ की कंपनी बन चुकी है, लेकिन हमें यह पूछने की जरूरत है कि हिमाचल को क्या मिला? पंजाब और हरियाणा पानी पर लड़ रहे हैं, लेकिन यह हिमाचल से बह रहा है। हमें बदले में क्या मिल रहा है?’ मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सरकार के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों का भी जिक्र किया और कहा कि पुरानी सरकार से उन्हें यह विरासत में मिली है। उन्होंने कहा, ‘जब हमने राज्य में सरकार बनाई तो विरासत में 75 हजार करोड़ का कर्ज और कर्मचारियों के 10 हजार करोड़ बकाया था। अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए हमने मजबूत फैसले लिए। ईमानदार और पारदर्शी शासन से हमने पिछले ढाई साल में 2500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व हासिल किया। हमारी सरकार पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा है।’ पानी विवाद तब शुरू हुआ, जब ‘आप’ शासित पंजाब ने भाजपा शासित हरियाणा को और अधिक पानी देने से इनकार कर दिया और दावा किया कि हरियाणा ने ‘मार्च तक अपने आवंटित हिस्से का 103 प्रतिशत पानी पहले ही इस्तेमाल कर लिया है।’ इसके बाद दिल्ली की भाजपा सरकार ने भी अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी को निशाने पर लिया। भाजपा सरकार ने कहा कि दिल्ली में हार का बदला लिया जा रहा है। हाल ही में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने हाल में हरियाणा को अतिरिक्त 4,500 क्यूसेक पानी आवंटित करने का निर्णय किया था।

जाति-जनगणना को लेकर भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने राहुल गांधी पर निशाना, कहा- बताना पड़ेगा वह किस जाति से हैं

नई दिल्ली जाति-जनगणना को लेकर भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर जोरदार निशाना साधा। बुराड़ी में रविवार को उन्होंने कहा कि जाति-जनगणना होने दीजिए, राहुल गांधी को भी अपनी जाति के बारे में बताना होगा। इसके बाद सारा भेद ही खुल जाएगा। दिल्ली के साथ पूरी दुनिया को पता चल जाएगा कि वो किस जाति से हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान मनोज तिवारी ने कहा कि राहुल गांधी सनातन और हिंदू विरोधी हैं, इसलिए वह हिन्दुओं के विरोध में बयान देते हैं। उनकी सनातन में आस्था नहीं है, वह सिर्फ ढोंग करते हैं। इतना ही नहीं, अब तो जातिगत जनगणना भी होनी है और राहुल गांधी की जाति भी सामने आ जाएगी कि वह कौन सी जाति से हैं। अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी में राहुल गांधी की ओर से श्रीराम को काल्पनिक कहने पर मनोज तिवारी ने कहा कि राहुल गांधी को उनकी हिन्दू विरोधी सोच मुबारक। वह सनातन विरोधी हैं और उन्हें हिन्दुओं से जलन होती है। हम जिस रास्ते पर चले हैं, उस रास्ते पर हम घर-घर तक रामचरितमानस पहुंचाएंगे। मनोज तिवारी ने कहा कि हम लोग बुराड़ी क्षेत्र में मानव सेवा शिक्षा संस्थान की ओर से हस्तिनापुर शिव महापुराण कथा कर रहे हैं। शिव और राम की भावना घर-घर पहुंचे, हर घर तक रामचरितमानस पहुंचाने का संकल्प लिया है। उन्होंने आगे कहा कि हम लोगों से अपील कर रहे हैं कि 21 मई से 27 मई तक बुराड़ी आएं और शिव महापुराण कार्यक्रम में शामिल होकर धन्य हो जाएं। बता दें कि जाति-जनगणना को लेकर हाल ही में केंद्र सरकार ने फैसला लिया कि देश में जाति-जनगणना कराई जाएगी। केंद्र सरकार के इस फैसले से देशभर में खुशी की लहर है। लेकिन, इंडी अलायंस में शामिल कांग्रेस-समाजवादी पार्टी सहित अन्य क्षेत्रीय पार्टियां इसे अपनी जीत बता रही हैं। क्रेडिट लेने की होड़ के बीच भाजपा के नेताओं का कहना है कि जब कांग्रेस का शासन देश में था, तब उन्हें जाति-जनगणना कराने की याद क्यों नहीं आई। जब विपक्ष में रहते हैं, तो जाति-जनगणना की बात करते हैं।

कांग्रेस पार्टी से बहुत सी गलतियां तब हुईं जब मैं राजनीति में नहीं था, लेकिन मैं हर गलती की जिम्मेदारी लेने को तैयार हूं: राहुल गांधी

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 1984 के सिख विरोधी दंगों पर अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम में कांग्रेस की गलतियों को स्वीकारते हुए कहा कि वे पार्टी के इतिहास में हुई हर गलती की जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं, भले ही यह घटना उनके राजनीति में आने से पहले की हो। यह बयान उन्होंने वॉटसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स में आयोजित एक सत्र के दौरान दिया, जब एक सिख युवक ने उनसे तीखे सवाल किए। सिख युवक ने राहुल गांधी से पूछा, “आपने कहा था कि बीजेपी राज में सिखों को कड़ा पहनने और पगड़ी बांधने से रोका जा सकता है, लेकिन कांग्रेस ने खुद भी सिखों को अभिव्यक्ति की आजादी नहीं दी। क्या आप 1984 के दंगों सज्जन कुमार जैसे नेताओं को बचाने की पार्टी की भूमिका की जिम्मेदारी लेंगे?” राहुल गांधी का जवाब- गलतियां हुई हैं, जिम्मेदारी मेरी है राहुल गांधी ने सिख युवक के सवाल के जवाब में कहा, “बहुत सी गलतियां तब हुईं जब मैं राजनीति में नहीं था, लेकिन मैं कांग्रेस पार्टी द्वारा की गई हर गलती की जिम्मेदारी लेने को तैयार हूं। मैंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि 1984 में जो हुआ वह गलत था। मैं कई बार स्वर्ण मंदिर जा चुका हूं और सिख समुदाय के साथ मेरे अच्छे संबंध हैं।” उन्होंने कहा कि बीजेपी के शासनकाल में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर जो डर है, वह वास्तविक है। बीजेपी का तीखा हमला राहुल गांधी के इस बयान पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा, “राहुल गांधी अब न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में मजाक का पात्र बन चुके हैं।” दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, “यह सिखों के दर्द और गुस्से की अभिव्यक्ति थी। राहुल गांधी का बयान कोई माफी नहीं, बल्कि एक राजनीतिक ड्रामा था।” बीजेपी प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा, “अगर राहुल गांधी वाकई जिम्मेदारी लेना चाहते हैं, तो उन्हें तत्काल सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर और कमलनाथ को पार्टी से बाहर करना चाहिए।” आपको बता दें कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद पूरे देश, विशेषकर दिल्ली में सिख समुदाय के खिलाफ भीषण हिंसा हुई थी। हजारों सिखों की हत्या कर दी गई थी। 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में सिख समुदाय से माफी मांगी थी। इसके बाद सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने भी खेद जताया था।

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