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दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने केजरीवाल पर बड़े घोटाले का आरोप लगाया, कहा-‘दो दिन बाद खोलूंगा पोल’

नई दिल्ली दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की बेटी हर्षिता केजरीवाल ने 18 अप्रैल को अपने कॉलेज के दोस्त संभव जैन से शादी कर ली। यह शादी दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में सादगी के साथ और काफी गुपचुप तरीके से हुई। शादी में सिर्फ परिवार के करीबी लोग शामिल हुए। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया भी इस मौके पर मौजूद थे। वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली की सियासत में गर्मी बढ़ गई है। दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने अरविंद केजरीवाल पर बड़े घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि केजरीवाल सरकार के पर्यावरण और अन्य विभागों में गंभीर घोटाले हुए हैं। सिरसा का कहना है कि वो एक-दो दिन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस घोटाले के सबूत सार्वजनिक करेंगे। सिरसा ने दावा किया कि ये खुलासा इतना बड़ा होगा कि इससे केजरीवाल की राजनीति की नींव हिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि केजरीवाल केवल घोटाले करने में माहिर हैं और अब दिल्ली की जनता भी उनकी सच्चाई समझ चुकी है। सिरसा ने केजरीवाल द्वारा भाजपा पर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अब लोग खुद ही “केजरीवाल बेईमान है” के नारे लगा रहे हैं और यह किसी पार्टी का नहीं, जनता का गुस्सा है। इसके अलावा सिरसा ने प्रदूषण फैलाने वाले अवैध कारोबारों पर सख्त कार्रवाई की बात भी कही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जो दुकानें और कारखाने नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उन्हें 24 घंटे के भीतर बंद करने का आदेश दिया गया है। कानून सबके लिए एक जैसा है, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो।  

अप्रैल के अंत तक बीजेपी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है, मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर बड़ा ऐलान

नई दिल्ली भारतीय राजनीति में एक बड़ा संगठनात्मक फेरबदल जल्द देखने को मिल सकता है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस वीकेंड तक पांच राज्यों के लिए नए प्रदेश अध्यक्षों के नाम का ऐलान कर सकती है। इसके तुरंत बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अप्रैल के अंत तक बीजेपी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है, जो 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी की नई दिशा और रणनीति तय करेगा। क्या है पूरी प्रक्रिया? BJP के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले कम से कम 50 प्रतिशत राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति होनी जरूरी है। अब तक 14 राज्यों में नए अध्यक्ष चुने जा चुके हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में यह पद अभी खाली है। इस हफ्ते इन राज्यों के लिए नामों का ऐलान हो सकता है। बड़े नेताओं के बीच अहम बैठकें इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, संगठन महामंत्री बीएल संतोष और मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। यह मंथन अगले अध्यक्ष के चयन और संगठनात्मक बदलावों की ओर इशारा करता है। किसके नाम की हो रही है चर्चा? सूत्रों के मुताबिक, अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा इसको लेकर मनोहर लाल खट्टर, धर्मेंद्र प्रधान, और भूपेंद्र यादव जैसे दिग्गज नेताओं के नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इन नामों पर जल्द ही RSS से भी फीडबैक लिया जाएगा।  कैबिनेट में भी हो सकता है फेरबदल बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव के बाद मोदी कैबिनेट में भी विस्तार और फेरबदल की संभावनाएं जताई जा रही हैं। माना जा रहा है कि इसमें NDA सहयोगी दलों जैसे NCP, शिवसेना और बिहार के नेताओं को भी जगह मिल सकती है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अध्यक्ष पद का कार्यकाल और देरी की वजह जेपी नड्डा जनवरी 2020 में अध्यक्ष बने थे। आम तौर पर बीजेपी अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है, लेकिन चुनाव टलते रहे और नड्डा का कार्यकाल बढ़ा दिया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी अब सोच-समझकर अगला चेहरा चुनना चाहती है, ताकि आगामी राज्य चुनावों और 2029 की तैयारियों के लिए रणनीति पक्की की जा सके।  

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा-अगर कानून बनाना सुप्रीम कोर्ट का ही काम है, तो फिर संसद भवन को बंद कर देना चाहिए

नई दिल्ली वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने शनिवार को तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर कानून बनाना सुप्रीम कोर्ट का ही काम है, तो फिर संसद भवन को बंद कर देना चाहिए। दुबे का यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में वक्फ एक्ट में हुए संशोधनों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस संशोधित कानून के तहत ‘वक्फ बाय यूजर’ जैसी धाराएं और गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्डों में शामिल करने का प्रावधान संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से स्पष्ट आश्वासन मांगा। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि अगली सुनवाई तक वक्फ बोर्ड या परिषद में किसी गैर-मुस्लिम की नियुक्ति नहीं होगी और पहले से नोटिफाइड वक्फ संपत्तियों को डिनोटिफाई नहीं किया जाएगा। साथ ही जिलाधिकारियों को भी आदेश दिया गया है कि वे इन संपत्तियों की स्थिति में कोई बदलाव न करें। इस पर कोर्ट ने सरकार से एक सप्ताह के भीतर प्रारंभिक जवाब और संबंधित दस्तावेज दाखिल करने को कहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 मई को होगी। गौरतलब है कि यह सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच कर रही है। बुधवार और गुरुवार को लगातार दो दिन चली सुनवाई में शीर्ष अदालत ने वक्फ एक्ट की कुछ धाराओं पर गहरी चिंता जताई। अदालत ने यह भी संकेत दिया है कि वह संशोधित कानून की कुछ धाराओं पर अंतरिम रोक लगाने पर विचार कर सकती है।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर का नाम भी अध्यक्ष की रेस में, बिनेट में इनकी होगी एंट्री

नई दिल्ली भाजपा के नए अध्यक्ष का ऐलान कभी भी हो सकता है। चर्चा है कि अप्रैल के आखिर तक भाजपा की ओर से जेपी नड्डा के विकल्प के तौर पर किसी नए नेता के नाम का ऐलान हो सकता है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर का नाम भी अध्यक्ष की रेस में है। इसके अलावा मोदी सरकार में ही मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव के नामों की भी चर्चा जोरों पर है। कहा जा रहा है कि इन तीन नेताओं में से किसी एक को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जा सकती है। अध्यक्ष पर फैसला लेने से पहले आरएसएस की सलाह भी ली जाएगी। वहीं उससे पहले यूपी, बंगाल, आंध्र प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में अध्यक्ष का फैसला भी लिया जाएगा। तभी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा 25 अप्रैल तक यूपी समेत कई राज्यों में अध्यक्षों का ऐलान कर सकती है। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नामांकन दाखिल किया जाएगा और किसी एक नेता का नाम सर्वसम्मति से तय किया जाएगा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मनोहर लाल खट्टर को लेकर सहमति बनने की संभावना अधिक है। इसकी वजह है कि वह पीएम नरेंद्र मोदी के करीबी हैं और उनकी पहली पसंद भी हैं। लंबे समय तक आरएसएस प्रचारक के तौर पर काम करने वाले मनोहर लाल खट्टर को संगठन की अच्छी समझ है। इसके अलावा आरएसएस को भी उनके नाम पर आपत्ति नहीं होगी, जो मानता है उसकी वैचारिक पृष्ठभूमि के नेता के हाथ में ही पार्टी की कमान होनी चाहिए। इसके अलावा धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि मनोहर लाल खट्टर सबसे आगे माने जा रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी और मनोहर लाल खट्टर के दशकों पुराने रिश्ते हैं। ऐसे में संगठन की कमान भी उनके भरोसेमंद व्यक्ति के पास होगी और आरएसएस भी इसे लेकर सहमत होगा। यही नहीं भाजपा में महासचिव के तौर पर भी राज्यों से कई नेताओं को शामिल किया जा सकता है। ये वे नेता होंगे, जो पूर्व मंत्री या सीएम जैसे पदों पर रह चुके हैं, लेकिन इन दिनों उनके पास कोई बड़ा दायित्व नहीं है। वहीं अभी संगठन में काम करने वाले कुछ लोगों को कैबिनेट में भी एंट्री दी जा सकती है। दरअसल एनडीए सरकार में सहयोगी दलों की डिमांड है कि कैबिनेट का विस्तार किया जाए और उनके नेताओं को एंट्री मिले। इस बीच बिहार में चुनाव है और उससे पहले उपेंद्र कुशवाहा को मंत्री पद दिया जा सकता है। वहीं एकनाथ शिंदे की पार्टी को भी मौका मिल सकता है, जो डिप्टी सीएम तो हैं, लेकिन बीच-बीच में उनकी नाराजगी की खबरें आती रहती हैं। चर्चाएं यह भी हैं कि मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का एक साल पूरा होने के मौके पर भी कैबिनेट विस्तार हो सकता है।

गुजरात उपचुनाव: कांग्रेस ने AAP से गठबंधन से किया इनकार, अकेले लड़ेगी इलेक्शन

 विसावदर गुजरात की राजनीति में उपचुनावों के मद्देनजर हलचल तेज है. एक ओर देशभर में INDIA गठबंधन की बात हो रही है, वहीं गुजरात में कांग्रेस ने अलग राह चुन ली है. अब न कोई गठबंधन, न साझा रणनीति — कांग्रेस ने तय कर लिया है कि वह विसावदर (Visavadar) और कड़ी (Kadi) विधानसभा उपचुनावों में अकेले ही मैदान में उतरेगी. गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शक्तिसिंह गोहिल (Shaktisinh Gohil) ने शुक्रवार (18 अप्रैल) को यह ऐलान किया. न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार उन्होंने बात करते हुए साफ किया कि यह निर्णय पार्टी ने सर्वसम्मति से लिया है. उन्होंने कहा, “गुजरात की जनता ने कभी तीसरे मोर्चे को समर्थन नहीं दिया. यहां लड़ाई हमेशा कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही रही है.” AAP के साथ चुनाव लड़ने से नुकसान- गोहिल गोहिल ने आप पर निशाना साधते हुए कहा, “पिछले चुनावों में आम आदमी पार्टी ने पूरी ताकत लगाई, बड़े नेता प्रचार में आए, लेकिन उन्हें महज 10 से 11 प्रतिशत वोट ही मिले. इससे कांग्रेस को नुकसान पहुंचा, और बीजेपी को फायदा हुआ.” उन्होंने आगे कहा, “अगर बीजेपी को हराना है तो कांग्रेस ही मुख्य विपक्ष है. हम AAP से अपील करते हैं कि वे विसावदर और कड़ी सीटों पर अपने उम्मीदवार वापस लें. कांग्रेस इन दोनों सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी.” राज्य स्तर पर अगल, लेकिन राष्ट्र स्तर पर एक है INDIA- गोहिल हालांकि, गोहिल ने यह भी कहा कि यह निर्णय केवल राज्य स्तर तक सीमित है. “राष्ट्रीय स्तर पर हम INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं और एकजुट हैं,” उन्होंने कहा. गुजरात की ये दोनों सीटें- विसावदर (जिला जूनागढ़) और कड़ी (जिला मेहसाणा, अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित)- विभिन्न कारणों से रिक्त हुई हैं. विसावदर सीट दिसंबर 2023 में आम आदमी पार्टी के विधायक भूपेंद्र भयानी के इस्तीफे और बीजेपी में शामिल होने के कारण खाली हुई, जबकि कड़ी सीट फरवरी 2024 में बीजेपी विधायक कर्सन सोलंकी के निधन से खाली हो गई थी. उपचुनाव की तिथियों की घोषणा अभी चुनाव आयोग ने नहीं की है, लेकिन कांग्रेस ने पहले ही अपने इरादे साफ कर दिए हैं. यह घटनाक्रम 8-9 अप्रैल को गुजरात में हुए कांग्रेस के AICC सत्र के बाद सामने आया है, जहां पार्टी ने आगामी चुनावों में जीत का संकल्प लिया था और सरदार पटेल व महात्मा गांधी की विरासत पर अपनी दावेदारी दोहराई थी.

कपिल सिब्बल ने कहा- राज्यपाल द्वारा विधेयकों को रोकना वास्तव में विधानमंडल की सर्वोच्चता में दखलंदाजी है

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर आपत्ति जताए जाने वाले उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बयान पर वरिष्ठ वकील व राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने नाराजगी जाहिर की है। सिब्बल ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति पर निशाना साधते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति और राज्यपाल के बारे में पता होना चाहिए, जिन्हें मंत्रियों की सहायता और सलाह पर काम करना होता है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सिब्बल ने कहा कि राज्यपाल द्वारा विधेयकों को रोकना वास्तव में विधानमंडल की सर्वोच्चता में दखलंदाजी है। यह धनखड़ जी (उपराष्ट्रपति) को पता होना चाहिए, वे पूछते हैं कि राष्ट्रपति की शक्तियों को कैसे कम किया जा सकता है, लेकिन शक्तियों को कौन कम कर रहा है? कपिल सिब्बल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ”आज सुबह कई अखबारों में जब मैंने धनखड़ साहब का भाषण पढ़ा तो दुख और आश्चर्य हुआ, क्योंकि ज्यूडिशियल इंस्टीट्यूशन फिर चाहे सुप्रीम कोर्ट हो या हाई कोर्ट हो, इन पर ही विश्वास है। मुझे लगता है कि जब सरकार के लोगों को ज्यूडिशियरी के फैसले पसंद नहीं आते हैं तो वे आरोप लगाना शुरू कर देते हैं कि ये हद से बाहर हैं। जब पसंद आते हैं तो विपक्ष को कहते हैं कि यह तो सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया था। फिर चाहे 370 हो या राम मंदिर का फैसला हो, इस पर कहते हैं कि यह तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला था। जो आपको जजमेंट सही नहीं लगे, सोच के हिसाब से नहीं हो वह गलत है और जो सोच के हिसाब से है, वह ठीक है।” उन्होंने आगे कहा, ”मैं उनका बड़ा आदर करता हूं, लेकिन आपने कह दिया कि आर्टिकल 142 न्यूक्लियर मिसाइल है, यह कैसे कह सकते हैं? आपको पता है कि आर्टिकल-142 द्वारा सुप्रीम कोर्ट को संविधान ने हक दिया है ना कि किसी सरकार ने, ताकि न्याय हो। जब राष्ट्रपति अपना फैसला करती हैं तो वह कैबिनेट के सुझाव से करती हैं। इसी तरह जब कोई विधेयक पारित होता है तो राज्यपाल के पास जाता है। संविधान ने हक दिया है कि राज्यपाल कमेंट करके विधेयक को वापस भेज सकता है। जब दोबारा विधानसभा पारित कर दे तो राज्यपाल को साइन करना पड़ता है। यह संविधान कहता है। राज्यपाल यह भी कर सकता है कि वह किसी विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेज सकता है। राष्ट्रपति व्यक्तिगत तौर पर कुछ नहीं करतीं, वह केंद्र सरकार के कैबिनेट पर जाती हैं और वो एडवाइस करते हैं कि क्या करना है। धनखड़ जी को यह पता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की पावर को कम कैसे कर सकते हैं, आखिर कौन कम कर रहा है उनकी ताकत कम।” साइन करने से मना नहीं कर सकते राष्ट्रपति राज्यसभा सांसद ने आगे कहा कि संसद अगर बिल पास करे तो क्या राष्ट्रपति उसे लेकर बैठ सकते हैं कि हम साइन नहीं करेंगे और यदि ऐसा नहीं करें तो किसी को अधिकार है या नहीं कि यह अहम बिल है। वह यह नहीं कह सकते कि वह साइन नहीं करेंगे। वह कमेंट करके वापस भेज सकते हैं, फिर दोबारा पास हो। यह संविधान की परंपरा है। अदालतों ने फैसला पहले ही कर दिया है। मुझे इस बात का आश्चर्य है कि कभी मेघवाल जी कहते हैं कि हद में रहना चाहिए। कभी रिजिजू कहते हैं कि यह क्या हो रहा है? वहीं, धनखड़ जी कहते हैं कि पुराने समय में जब सुप्रीम कोर्ट में आठ जज थे तो पांच जज फैसला करते थे, अब तो इतने जज हो गए हैं। दो ही जज फैसला करेंगे, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट बेंच पर ही बैठेगा। ऐसे ही सुप्रीम कोर्ट फैसला करता है। सुपर संसद की तरह काम कर रहे जज: धनखड़ धनखड़ ने 17 अप्रैल को एक कार्यक्रम के दौरान राज्यसभा के प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की थी। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे न्यायाधीश हैं जो कानून बना रहे हैं, कार्यकारी कार्य कर रहे हैं और सुपर संसद के रूप में काम कर रहे हैं। धनखड़ ने अपने संबोधन के दौरान कहा, “राष्ट्रपति को समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने के लिए कहा जाता है, और यदि ऐसा नहीं होता है, तो यह कानून बन जाता है। इसलिए हमारे पास ऐसे न्यायाधीश हैं जो कानून बनाएंगे, जो सुपर संसद के रूप में काम करेंगे और उनकी कोई जवाबदेही नहीं होगी क्योंकि देश का कानून उन पर लागू नहीं होता है।” धनखड़ ने कहा, “हाल ही में आए एक फैसले में राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है। हम कहां जा रहे हैं? देश में क्या हो रहा है? हमें बेहद संवेदनशील होना चाहिए। यह सवाल नहीं है कि कोई समीक्षा दायर करता है या नहीं। हमने इस दिन के लिए लोकतंत्र की कभी उम्मीद नहीं की थी।”

अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस की हिमाचल प्रदेश में सरकार नहीं चल पा रही, नेशनल हेराल्ड अखबार के लिए विज्ञापन दे रही

नई दिल्ली नेशनल हेराल्ड का मुद्दा एक बार फिर विवादों में है. ईडी ने इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. ईडी ने सोनिया और राहुल से जुड़ी कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की 700 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने की कार्यवाही भी शुरू की है. लेकिन इस बीच हिमाचल प्रदेश और झारखंड की सरकारों की ओर से नेशनल हेराल्ड को विज्ञापन दिए जाने पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने जमकर निशाना साधा. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि मैं आज नेशनल हेराल्ड की बात करूंगा. नेशनल हेराल्ड का नाम सुनते ही पूरी कांग्रेस पार्टी के ईकोसिस्टम में सेंसेशन होने लगते हैं, सेंसेशन जैसे छटपटाहट, कपकपाहट, थरथराहट, फड़फड़ाहट, डगमगाहट, लड़खड़ाहट और ऐसे सेंसेशन होने लाजिमी भी है क्योंकि चोरी करते हुए पकड़े गए हैं. आजादी के बाद से कांग्रेस को देखेंगे तो इनका एक नहीं अनेक घोटाले सामने आए हैं. लेकिन ये अपने आप में एक ऐसा मॉडल है, जो किसी के गले नहीं उतर रहा. ठाकुर ने कहा कि नेहरू जी ने 1938 में नेशनल हेराल्ड को शुरू किया था लेकिन वो चल नहीं पाया. फिर 2008 में ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि उसे बचाने के लिए यंग इंडिया के नाम से एक नई कंपनी बनाई गई. यंग इंडिया बनने के बाद 50 लाख रुपये देकर 2000 करोड़ की संपत्ति कांग्रेस के पास चली जाती है. इस कंपनी में गांधी परिवार की 76 फीसदी की हिस्सेदारी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों हिमाचल प्रदेश और झारखंड की ओर से नेशनल हेराल्ड को दिए जाने वाले विज्ञापनों पर सवाल उठाया. ठाकुर ने कहा कि नेशनल हेराल्ड एक समय पर दैनिक अखबार था लेकिन अब यह नियमित रूप से नहीं छपता. वीकली अखबार है. फिर भी कांग्रेस की सराकरें इसे जमकर विज्ञापन दे रही है. अखबार वैसे तो कागज पर छपता है लेकिन कुछ कागजी अखबार होते हैं. कांग्रेस सरकार कौन-कौन से राज्यों से विज्ञापन ले रही है. ये साफ सामने आना चाहिए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की हिमाचल प्रदेश में सरकार नहीं चल पा रही है लेकिन इस अखबार के लिए विज्ञापन दे रही है. हिमाचल की कांग्रेस सरकार जब से बनी है, नेशनल हेराल्ड को करोड़ों रुपये दिए गए हैं. नेशनल हेराल्ड को कोई पढ़ता है क्या? सरकार अपनी जेब से पैसा दे, टैक्सपेयर्स का पैसा क्यों दे रही है? उस राज्य का चुना हुआ मुख्यमंत्री ऐसा कैसे कर सकता है? एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी. यह कांग्रेस के करप्शन का मॉडल है. कांग्रेस के दो बड़े नेता जमानत पर बाहर है. उनके खिलाफ ईडी की कार्रवाई सही है. ठाकुर ने कहा कि इनके लिए फैमिली फर्स्ट, पार्टी सेकंड और देश आखिरी में है. हिमाचल और झारखंड की कांग्रेस सरकारों पर क्या आरोप है? हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार और झारखंड की कांग्रेस सरकार पर नेशनल हेराल्ड को करोड़ों रुपयों के विज्ञापन देकर अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप बीजेपी ने लगाया है. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड की हेमंत सोरेन की अगुवआई वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार ने नेशनल हेराल्ड और उससे जुड़े प्रकाशनों को करोड़ों रुपये के विज्ञापन देकर अनुचित लाभ पहुंचाया. वहीं, अनुराग ठाकुर ने हिमाचल के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू पर हमला बोलते हुए कहा कि सुक्खू सरकार ने नेशनल हेराल्ड को झोली भरकर विज्ञापन दिए हैं. हिमाचल के कितने घरों में नेशनल हेराल्ड साप्ताहिक अखबार आती है? उन्होंने कहा कि इस पर भी एक सर्वे होना चाहिए, क्या किसी मीडियाकर्मी के घर में नेशनल हेराल्ड आता है? लेकिन इसके बावजूद प्रदेश सरकार के द्वारा अखबार को करोड़ों रुपये के विज्ञापन दिए गए हैं. हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में दो करोड़ से ऊपर का विज्ञापन दिया गया. इसकी एक कॉपी आती नहीं है और सीएम कह रहे हैं कि मेरी मर्जी जो करूं. हमारी सरकार है, हमारा अखबार है. दान देने का अधिकार आपको नहीं है. ये हिमाचल के खून-पसीने के मेहनत की कमाई है. आप इसे इस तरह एक परिवार को लुटाने के लिए नहीं दे सकते हैं.  

एमपी में यूथ कांग्रेस चुनावों का ऐलान कर दिया गया, प्रदेश अध्यक्ष से लेकर विधानसभा अध्यक्ष तक का चुनाव होगा

भोपाल मध्यप्रदेश में यूथ कांग्रेस चुनावों का ऐलान कर दिया गया है। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष से लेकर विधानसभा अध्यक्ष तक का चुनाव होगा। साथ ही स्टेट प्रेसिडेंट, स्टेट कमेटी, डिस्ट्रिक्ट कमेटी के सदस्य भी चुने जाएंगे। पीसीसी में शुक्रवार को युवा कांग्रेस संगठन (आईएनएस) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान आईएनएस ने मध्यप्रदेश में पहली बार ब्लॉक, विधानसभा, जिला और राज्य स्तर पर पार्टी के चुनाव और मेंबरशिप का ऐलान किया है।आईएनएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि अब ऐसा दौर शुरू हो रहा है, जब पार्टी के युवा नेता सीधे चुनाव के माध्यम से चुने जाएंगे, न कि उन्हें नामांकित किया जाएगा। यह बदलाव भारतीय राजनीति के लिए ऐतिहासिक है और यह सच्चे लोकतंत्र की पहचान है। इससे पहले भी आईएनएस आंतरिक चुनाव कर चुका है। निष्पक्षता के लिए राज्य स्तर पर टीम बनाई गई राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि यह कदम राहुल गांधी के विजन का हिस्सा है, जब वे साल 2008 में IYC और NSUI के प्रभारी थे। इस प्रक्रिया से हर क्षेत्र के युवकों को राजनीति में उतरने का मौका मिलेगा। वहीं, चुनावों में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जोनल और राज्य स्तर पर रिटर्निंग ऑफिसर्स की टीम तैनात की गई है। 27 अप्रैल से 6 मई तक नामांकन इसके लिए एक डिजिटल ऐप लॉन्च किया गया है। जिसमें 27 अप्रैल 2025 से 6 मई 2025 तक नामांकन चलेगा। 7 से लेकर 9 मई तक स्क्रूटनी का काम किया जाएगा। उसी के आधार फाइनल कैंडिडेट की लिस्ट 11 मई तक प्रकाशित होगी। उसके बाद सदस्यता और चुनाव की तारीखों की जानकारी वेबसाइट www.ycea.in पर मिलेगी।

दिग्विजय ने कहा 1992 में भोपाल दंगों के दौरान दंगा-फसाद होने में हमने पूरी की कोशिश ….

शाजापुर शाजापुर में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह के एक विवादित बयान ने मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है. हिंदू-मुस्लिम सद्भावना सम्मेलन में भाषण के दौरान दिग्विजय की जुबान फिसल गई और उन्होंने कह दिया, “1992 में भोपाल दंगों के दौरान दंगा-फसाद होने में हमने पूरी कोशिश की.” इस बयान से सभागार में मौजूद लोग स्तब्ध रह गए. हालांकि, दिग्विजय सिंह ने इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया, लेकिन उनका यह बयान चर्चा का केंद्र बन गया है. इस बयान पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तीखा पलटवार कर  ‘X’ पर लिखा, “काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती… देश विरोधी कांग्रेस पार्टी के नेता चाहे कितने भी मुखौटे पहन लें, सच सामने आ ही जाता है.” सिंधिया ने दिग्विजय सिंह के बयान को कांग्रेस की मानसिकता का प्रतीक बताते हुए इसे देश के खिलाफ बताया. दरअसल, शाजापुर के चौबदार वाडी में मुस्लिम समाज की ओर से आयोजित सद्भावना सम्मेलन में दिग्विजय सिंह ने 1992 के भोपाल दंगों का जिक्र किया. वे बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हुए दंगों के दौरान अपनी भूमिका बताते हुए कहा, “जब बाबरी मस्जिद शहीद हुई थी, मैं कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष था. मैंने दो हफ्ते तक प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में रातें बिताईं.” लेकिन इसके बाद उनकी जुबान फिसल गई और वे बोल गए, “हिंदू-मुस्लिम को जोड़कर हमने दंगा-फसाद होने में पूरी कोशिश की.” इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद बीजेपी ने इसे कांग्रेस की सांप्रदायिक राजनीति का सबूत बताया. सिंधिया और दिग्विजय का पुराना सियासी बैर ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह लंबे समय से मध्य प्रदेश की राजनीति में एक-दूसरे के विरोधी रहे हैं. पहले कांग्रेस में साथ रहते हुए भी दोनों के बीच तनातनी की खबरें आती थीं. 2020 में सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद यह टकराव और तेज हो गया. हाल के वर्षों में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर कई बार निशाना साधा है. दिग्विजय सिंह ने जहां सिंधिया को ‘बच्चा’ कहकर तंज कसा, वहीं सिंधिया ने दिग्विजय को ‘राष्ट्रविरोधी मानसिकता’ वाला नेता करार दिया.

MLA उषा ठाकुर ने कहा, भगवान देख रहे हैं, अपना वोट देते समय अपनी ईमानदारी न खोएं

इंदौर मध्य प्रदेश की बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने पैसे, शराब और तोहफों के बदले वोट देने वालों को जमकर सुनाई. कहा कि लोकतंत्र को बेचने वाले ऐसे लोग ऊंट, भेड़, बकरी, कुत्ते और बिल्ली के रूप में पुनर्जन्म लेंगे. इंदौर की महू विधानसभा क्षेत्र के हसलपुर गांव में एक बैठक में की गई महिला विधायक की टिप्पणी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद विपक्षी कांग्रेस ने विधायक की ‘रूढ़िवादी सोच’ के लिए आलोचना की. बीजेपी विधायक ने लोगों से लोकतंत्र की रक्षा करने का आग्रह करते हुए कहा, “भाजपा सरकार की लाड़ली बहना योजना और किसान सम्मान निधि जैसी कई योजनाओं के माध्यम से प्रत्येक लाभार्थी के खाते में हजारों रुपए आते हैं. इसके बाद भी अगर वोट 1,000-500 (रुपए) में बिकते हैं, तो यह इंसानों के लिए शर्म की बात है.” मतदान की गोपनीयता का जिक्र करते हुए MLA ठाकुर ने कहा, भगवान देख रहे हैं, अपना वोट देते समय अपनी ईमानदारी न खोएं. जो लोग पैसा, साड़ी, गिलास और शराब लेकर तटस्थ हो गए हैं, वे अपनी डायरी में लिख लें कि वे अगले जन्म में ऊंट, भेड़, बकरी, कुत्ते और बिल्ली जरूर बनेंगे. जो लोग लोकतंत्र को बेचेंगे, वे यही बनेंगे. यह लिख लें. मेरी भगवान से सीधी बातचीत है, यकीन मानिए.” उन्होंने आगे कहा कि किसी को भी भाजपा को ही वोट देना चाहिए, जो राष्ट्र, धर्म और संस्कृति की सेवा करती है. इन टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर ठाकुर ने एक न्यूज से कहा कि वह ग्रामीण मतदाताओं के बीच जागरूकता फैलाने की कोशिश कर रही थीं. विधायक ने कहा, “लोकतंत्र हमारा जीवन है. सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं चलाती है. वह साल के 12 महीने जनता की सेवा करती है. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति चुनाव के दौरान किसी भी स्थिति में पैसे, शराब या अन्य सामग्री के लिए अपना वोट बेचता है, तो यह अक्षम्य अपराध है.” उन्होंने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा, “हमें अपने कर्मों के आधार पर अगला जन्म मिलता है. अगर हमारे कर्म बुरे हैं, तो हमें मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म नहीं मिलेगा.” मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मृणाल पंत ने कहा कि ठाकुर का बयान न केवल उनकी “रूढ़िवादी सोच” को दर्शाता है, बल्कि महू में भाजपा नेताओं के बीच अंदरूनी खींचतान की ओर भी इशारा करता है.  

मंच टूटने के बाद एमपी कांग्रेस ने कार्यक्रमों को लेकर जो गाइडलाइन बनाई

भोपाल भोपाल में पिछले महीने यानि 10 मार्च को रंगमहल चौराहे पर किसान कांग्रेस द्वारा आयोजित विधानसभा घेराव के कार्यक्रम का मंच टूट गया था। इस घटना में कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव सिंह, महेन्द्र सिंह चौहान, महेन्द्र जोशी सहित आधा दर्जन नेता गंभीर घायल हुए थे। कांग्रेस ने पार्टी के सभी विधायकों, सांसदों, जिला अध्यक्षों, प्रदेश पदाधिकारियों, जिला प्रभारी, सह प्रभारी, संगठन मंत्रियों और ब्लॉक अध्यक्षों के साथ पूर्व सांसद, पूर्व विधायकों को पार्टी के कार्यक्रमों की मंच व्यवस्था, स्वागत, भाषण, वाहन व्यवस्था और बैकड्रॉप की गाइडलाइन भेजी है। जिला प्रभारियों और सह प्रभारियों पर इसे पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है। दिल्ली से मंजूरी मिली, भोपाल में चर्चा बाकी एमपी कांग्रेस ने कार्यक्रमों को लेकर जो गाइडलाइन बनाई है, उसकी दिल्ली में ऑल इंडिया कांग्रेस कमीटी (एआईसीसी) से सैद्धांतिक सहमति मिल गई है। प्रदेश स्तर पर 20 अप्रैल को होने वाली बैठक में सहमति के बाद इसे जारी कर दिया जाएगा। प्रदेश के जिन नेताओं पदाधिकारियों को यह गाइडलाइन भेजी गई है, उनसे यह कहा गया है कि यदि कोई सुझाव हो तो 19 अप्रैल तक भेज दें ताकि जरूरी सुझावों को शामिल करते हुए इसे फाइनल मंजूरी मिल सके। कार्यक्रमों के पहले की तैयारियां     कार्यक्रमों में महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर की फोटो अनिवार्यतः: रखवाई जाएं। और अतिथियों द्वारा सूत की माला से माल्यार्पण किया जाए।     कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् के गायन से किया जाए।     कार्यक्रम के समापन में जन-गण-मन अनिवार्य रूप से कराया जाए।     मंच संचालक द्वारा सभी को इस संबंध में कार्यक्रम के दौरान इन बातों को बार-बार दोहराया जाए। ताकि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के दौरान अनुशासन का पालन हो। जिला स्तर के कार्यक्रम के लिए प्रोटोकॉल जिला स्तरीय मंच- जिला स्तर के संगठन के ऐसे कार्यक्रम जिसमें बडे़ नेताओं, प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, प्रदेश प्रभारी शामिल हों। उस कार्यक्रम में सिर्फ 12 बाय 12 फीट और 3 फीट ऊंचाई का मंच वक्ताओं के लिए बनाया जाएगा, जिसमें बोलने के लिए बीचों बीच डायस रखी जाएगी। इस मंच पर बैकड्रॉप में 16 बाय 16 फीट का होर्डिंग लगाया जाएगा। यानि मंच पर कोई नेता नहीं बैठेगा। नाम बुलाने पर नेता डायस पर जाकर स्पीच देंगे और नीचे कार्यकर्ताओं के साथ बैठेंगे।

भाजपा में जल्द ही बड़े बदलाव, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव प्रक्रिया 20 अप्रैल के बाद शुरू, प्रह्लाद जोशी इस दौड़ में सबसे आगे

नई दिल्ली  बीजेपी जल्द ही बड़े बदलाव के लिए तैयार है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 20 अप्रैल के बाद शुरू हो सकती है। इसको लेकर पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में भाजपा के शीर्ष स्तर पर काफी गहमागहमी देखी गई है। बुधवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर एक बड़ी बैठक हुई, जिसमें अमित शाह, राजनाथ सिंह और बी एल संतोष जैसे पार्टी और आरएसएस के बड़े नेता शामिल हुए। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में पार्टी के संगठन में बदलाव और नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर भी मंथन हुआ। पार्टी के भरोसेमंद सूत्र ने बताया है कि अभी मुख्य रूप से पांच नामों पर चर्चा चल रही है और हो सकता है कि इस बार कर्नाटक के किसी नेता को पार्टी की कमान सौंप दी जाए। लेकिन, इस सूत्र ने एक छठा नाम भी बताया है। बीजेपी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन? बीजेपी के एक विश्वस्त सूत्र ने  बताया है कि अभी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की रेस में सबसे आगे केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का नाम चल रहा है। इनके अलावा भी उन्होंने 4 और नाम बताए हैं। लेकिन, सबसे चौंकाने वाला नाम छठे नेता का है, जो अबतक इस चर्चा में पूरी तरह से गायब रहे हैं। यहां पर बीजेपी के सभी संभावित राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम और उन्हें यह जिम्मेदारी दिए जाने की संभावित वजह भी बताई जा रही है। 1) प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय मंत्री बीजेपी सूत्र का कहना है कि प्रह्लाद जोशी को पार्टी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है। कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद जोशी अभी मोदी सरकार में कंज्यूमर अफेयर्स, फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन और रिन्यूएबल एनर्जी मंत्री हैं। प्रह्लाद जोशी आरएसएस से होते हुए भाजपा सरकार में इतने बड़े पद तक पहुंचे हैं। 2) बीएल संतोष, बीजेपी महासचिव (संगठन) बीएल संतोष भी कर्नाटक से आते हैं और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रचारक हैं। भारतीय जनता पार्टी में यह पद पार्टी संगठन और संघ के बीच कड़ी का काम करता है। बीएल संतोष 1993 से आरएसएस के प्रचारक हैं और पूरी तरह से संघ के कार्यों से जुड़े रहे हैं। जब हमने बीजेपी सूत्र से सवाल किया कि क्या पार्टी इस तरह से एक प्रचारक को सीधे अपने संगठन का जिम्मा सौंप सकती है? तो उन्होंने बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे के नाम का जिक्र किया, जिन्होंने आरएसएस से सीधे पार्टी संगठन का उत्तरदायित्व संभाला था। बीजेपी सूत्र ने यह भी दावा किया है कि अगर संतोष के नाम पर मुहर लगती है तो सुनील बंसल उनकी जगह महासचिव (संगठन) का जिम्मा संभाल सकते हैं। 3) सीटी रवि, बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी के एक बड़े नेता हैं। वे चिकमगलूर विधानसभा क्षेत्र से चार बार MLA रह चुके हैं। रवि अपनी आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाते हैं। वे कर्नाटक में भाजपा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। वह शुरुआत से ही आरएसएस से जुड़े रहे हैं और अभी कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य हैं। उनकी आक्रामक राजनीति की वजह से उनका भी नाम जेपी नड्डा की जगह भाजपा के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में लिया जा रहा है। 4) धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर काफी पहले से लिया जा रहा है। इसकी वजह है उनका आरएसएस वाला बैकग्राउंड और उनकी जबरदस्त संगठन क्षमता। वह पार्टी के बैकग्राउंड रणनीतिकारों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं और चुनावी समीकरण बिठाने में भी इनके कौशल की पार्टी में खूब सराहना होती है। अभी प्रधान ओडिशा के संबलपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 5) भूपेंद्र यादव, केंद्रीय मंत्री राजस्थान की अलवर लोकसभा सीट से संसद भूपेंद्र यादव अभी केंद्र में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय संभाल रहे हैं। भूपेंद्र यादव की तरह ही ये भी बीजेपी के धुरंधर रणनीतिकारों में शामिल रहे हैं और पार्टी के लिए चुनाव जितवाने वाली मशीन की तरह काम आते रहे हैं। संघ का बैकग्राउंड और बेहतरीन संगठन क्षमता की वजह से बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर इनका नाम भी काफी चर्चा में रहा है। मनोज सिन्हा का भी आ रहा है नाम भाजपा सूत्र ने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर जो सबसे चौंकाने वाला संभावित नाम बताया है, वह है जम्मू और कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा का। सूत्र ने दलील दी है कि प्रधानमंत्री मोदी की वजह से पार्टी चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जानी जाती है, ऐसे में मनोज सिन्हा भी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर सामने आ जाएं तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। पार्टी सूत्र का यह भी कहना है कि जो भी अध्यक्ष होंगे, वे अपेक्षाकृत युवा चेहरा होंगे। 2020 से ही राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं नड्डा जेपी नड्डा जनवरी 2020 से ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनका कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ाया गया था, ताकि वे लोकसभा चुनाव तक काम कर सकें। बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव फरवरी 2025 तक ही हो जाना था, लेकिन हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली के चुनावों के कारण यह टल गया। फिर देशभर में संगठन चुनाव शुरू हो गए। बीजेपी में दो कार्यकाल से ज्यादा अध्यक्ष बनने की परंपरा नहीं है। लेकिन, नड्डा का एक ही कार्यकाल पूरा हुआ है, बाकि वह अतिरिक्त या कार्यकारी प्रभार संभालते रहे हैं।

किरेन रिजिजू ने राजनीतिक दलों को चेताया भी, 10,000 तीर्थयात्रियों के लिए सऊदी अरब ने फिर खोला पोर्टल

नई दिल्ली केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को सभी राजनीतिक दलों से हज तीर्थयात्रा पर राजनीति नहीं करने का आग्रह किया है और ऐलान किया है कि 10,000 तीर्थयात्रियों के लिए सऊदी अरब ने फिर से पोर्टल खोल दिया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के हस्तक्षेप के बाद 10,000 भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए सऊदी अरब ने अपने नुसुक पोर्टल को फिर से खोलने का फैसला किया है। उन्होंने इस मुद्दे पर राजनीति करने के लिए सियासी दलों को चेतावनी भी दी। रिजिजू ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया, “कृपया धार्मिक हज मुद्दे के साथ राजनीति न करें।” उन्होंने कहा कि भारतीय हज समिति और भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने 1,22,000 हज तीर्थयात्रियों के लिए समय पर सभी जरूरी काम पूरे कर लिए थे लेकिन निजी ऑपरेटर इस साल सऊदी अरब की अग्रिम समयसीमा के तहत अनुबंधों और भुगतानों को अंतिम रूप देने में विफल रहे, जिसके कारण उन्हें कोई टाइम एक्सटेंशन नहीं मिल सका। बेहतर संबंधों की बदौलत मिला कोटा मंत्री ने कहा कि भारत ने सऊदी अरब के साथ बेहतर संबंधों की बदौलत अतिरिक्त कोटा प्राप्त किया है। उन्होंने कहा, “सऊदी हज मंत्रालय ने मीना में मौजूदा जगह की उपलब्धता के आधार पर निजी ऑपरेटरों को अपना काम पूरा करने के लिए फिर से नुसुक पोर्टल खोल दिया है।” अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने कहा कि 26 संयुक्त हज समूह संचालक (CHGO) बार-बार याद दिलाने के बावजूद मीना शिविरों, आवास और परिवहन से संबंधित अनुबंधों को अंतिम रूप देने की समय सीमा से चूक गए। समय पर अपलोड करें सभी दस्तावेज: रिजिजू हालांकि, भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयास के बाद, सऊदी अधिकारियों ने CHGO के लिए “विस्तारित समय अवधि” में दस्तावेज़ अपलोड करने के लिए पोर्टल को फिर से खोल दिया है। इस मामले में सभी निजी ऑपरेटरों से जल्द से जल्द कार्रवाई का आग्रह करते हुए रिजिजू ने कहा, “हम सभी निजी संचालकों (CGHO) से अपने अनुबंधों को अंतिम रूप देने और अनुमत विस्तारित समय अवधि में सऊदी नुसुक पोर्टल पर सभी दस्तावेज़ अपलोड करने का आग्रह करते हैं।” कई नेताओं ने की दी दखल देने की अपील यह घटनाक्रम एक मीडिया रिपोर्ट के बाद हुआ है, जिसमें सऊदी अरब द्वारा निजी संचालकों के लिए मीना ज़ोन रद्द करने के बाद 52,000 तीर्थयात्रियों के हज यात्रा पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे थे। इस खबर के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती समेत कई अल्पसंख्यक नेताओं ने केंद्र सरकार के दखल देने की मांग की थी। 2025 के लिए भारत का कुल हज कोटा 1,75,025 तीर्थयात्रियों का है, जिसमें से 70% HCOI द्वारा और 30% निजी संचालकों द्वारा रेग्यूलेट किया जाएगा। पिछले हफ़्ते अल्पसंख्यक मामलों के सचिव चंद्र शेखर कुमार ने 2025 हज द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करने सहित तैयारियों की समीक्षा के लिए सऊदी अरब का दौरा किया था। रिजिजू ने इससे पहले जनवरी में तीर्थयात्रा व्यवस्थाओं पर बातचीत के लिए सऊदी अरब की यात्रा की थी। 2025 का हज संभवतः 4-9 जून के बीच निर्धारित है।

महागठबंधन की बैठक पर तंज कसते हुए कहा कि वे कितनी बार भी मिल लें, जीतेगा एनडीए ही: सम्राट चौधरी

पटना बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना में महागठबंधन की बैठक पर तंज कसते हुए कहा कि वे कितनी बार भी मिल लें, जीतेगा एनडीए ही। सम्राट चौधरी ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तीन चुनावों से चाहे वह 2019 का लोकसभा चुनाव हो, 2020 का विधानसभा चुनाव हो या 2024 का लोकसभा चुनाव हो, बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में और देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए ने महागठबंधन को हराने का काम किया है और आगे भी हारते ही रहेंगे। अगले चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व पर उठाए जा रहे सवालों पर उपमुख्यमंत्री ने कहा, “एनडीए में कोई कंफ्यूजन नहीं है, हम नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही रहेंगे।” इससे पहले पटना के विद्यापति भवन में वक्फ संशोधन कानून के समर्थन में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि इस कानून के बाद मुस्लिम समाज ने प्रधानमंत्री का दिल खोलकर धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन कानून गरीब और पसमांदा मुसलमानों के लिए एक क्रांतिकारी प्रगतिशील कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की विकास योजनाएं हों या बिहार सरकार की योजनाएं, कभी भी किसी खास धर्म को देखकर नहीं बनाई गईं, विकास योजनाओं का लाभ सभी धर्मों और जातियों के लोगों को मिल रहा है। आज बिहार बदल रहा है। बिहार आगे बढ़ रहा है और समृद्धि की ओर बढ़ रहा है। इस दौरान उन्होंने भागलपुर दंगे का जिक्र करते हुए कहा कि जब बिहार में एनडीए की सरकार बनी, तभी इस मामले में पीड़ितों को न्याय मिला। बिहार के कब्रिस्तानों की घेराबंदी की गई, अल्पसंख्यक छात्रों को भी वजीफा देने का काम किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने सभी वर्गों के लिए काम किया है।

हमारी 13,371 ग्राम पंचायतें पीएम मोदी के विकसित भारत के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभाएंगी: पवन कल्याण

आंध्र प्रदेश आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य की 13,000 से अधिक ग्राम पंचायतें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047′ के दृष्टिकोण को साकार करने में अहम भूमिका निभाएंगी। पवन कल्याण ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि राज्य सरकार ने 16वें वित्त आयोग के सामने बुधवार को शासन को मजबूत करने और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए व्यापक सिफारिशें की हैं। उन्होंने कहा, “हमारी 13,371 ग्राम पंचायतें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभाएंगी। आंध्र प्रदेश अपने गांवों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।” पवन कल्याण ने कहा कि ग्राम पंचायतें ‘स्वर्ण आंध्र प्रदेश’ के निर्माण की दिशा में भी कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा, “हम अपने गांवों को विकास के इंजन के रूप में बदल रहे हैं।” उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने के लिए आर्थिक सुधार, पारदर्शिता और आत्मनिर्भर ग्राम मॉडल को अपनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। बुधवार को सचिवालय में नौ बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया, जिसमें आंध्र प्रदेश की 13,371 ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास, वित्तीय आवश्यकताओं और एकीकृत शासन व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया गया है।  

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