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UPI Payment का नया तरीका: बिना इंटरनेट और बिना ऐप ऐसे करें भुगतान

नई दिल्ली देश के मेट्रो शहर हों या छोटे कस्बे, आज खरीदारी, मोबाइल रिचार्ज या बिल भुगतान तक में ऑनलाइन पेमेंट हमारे लिए सबसे आसान और भरोसेमंद तरीका बन गया है। Google Pay, Paytm, BHIM जैसे ऐप्स ने लेन-देन को बेहद सहज बना दिया है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि इंटरनेट काम नहीं करता और कोई जरूरी पेमेंट करना पड़ता है। ऐसे समय में कैश के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता, और अगर पास में कैश भी नहीं है तो मुश्किल बढ़ जाती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए National Payments Corporation of India (NPCI) ने साल 2022 में ऑफलाइन पेमेंट सर्विस शुरू की। यह सेवा उन लोगों के लिए बेहद मददगार है जो इंटरनेट कनेक्शन कमजोर या उपलब्ध न होने वाले क्षेत्रों में रहते हैं। ऑफलाइन पेमेंट कैसे करें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड स्टेप 1: अपने मोबाइल फोन से *USSD कोड 99# डायल करें। स्टेप 2: स्क्रीन पर “OK” और “Welcome to *99#” दिखाई देगा। OK पर क्लिक करें। स्टेप 3: अब कई विकल्प दिखाई देंगे। यहां “Send Money” चुनें। स्टेप 4: मोबाइल नंबर का ऑप्शन चुनें। स्टेप 5: उस व्यक्ति का मोबाइल नंबर दर्ज करें जिसे आप पैसे भेजना चाहते हैं। स्टेप 6: स्क्रीन पर उस व्यक्ति का नाम दिखाई देगा। स्टेप 7: राशि दर्ज करें और अपना UPI पिन डालें। स्टेप 8: पैसा आपके खाते से कट जाएगा और सीधे प्राप्तकर्ता के पास पहुंच जाएगा। ध्यान रखने वाली बातें ऑफलाइन पेमेंट के लिए जरूरी है कि आपका मोबाइल नंबर और आधार नंबर आपके बैंक खाते से लिंक हो। यह सुविधा इंटरनेट के बिना भी सुरक्षित लेन-देन करने में मदद करती है। खासकर ग्रामीण या नेटवर्क कमजोर क्षेत्रों में यह सेवा बहुत लाभकारी साबित हो रही है। NPCI की इस ऑफलाइन पेमेंट सर्विस के जरिए अब लोग कहीं भी, किसी भी समय आसानी से पैसे भेज सकते हैं, बिना इंटरनेट की चिंता किए। यह डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सभी के लिए वित्तीय लेन-देन को सरल और भरोसेमंद बनाता है।

जीवन की उलझनों से मुक्ति: नीम करौली बाबा के 10 विचार जो दिखाते हैं सही दिशा

भारत की पवित्र भूमि पर कई साधु संत हुए, जिन्होंने आध्यात्म के साथ साथ मानवता का भी पाठ पढ़ाया। दया, भक्ति, धर्म, गुण, चरित्र, प्रेम और ईश्वर जैसे सभी विषयों पर खुलकर बात की। नीम करौली बाबा भी उन्हीं संतों से से एक हुए। अपने सादगी भरे जीवन से उन्होंने लोगों को प्रेरित तो किया ही, साथ ही जीवन की उलझनों से निपटने के लिए भी जरूरी सलाह दीं। आज भी उत्तराखंड के नीम करौली धाम में सैकड़ों भक्त रोज दर्शन के लिए आते हैं और बाबा के विचार ही उनका मार्गदर्शन करते हैं। जीवन में कोई भी उलझन हो, समझ ना आ रहा हो क्या करना है, लगातार परेशानी बनी रहती हो, बाबा के ये विचार आपको सही मार्ग दिखाने में मदद करेंगे। अंत में सब अच्छा ही होता है जो भी होता है, वह ईश्वर की मर्जी से होता है और अंत में अच्छा ही होता है। इसलिए हमें हर परिस्थित में धैर्य और भरोसा बनाए रखना चाहिए। जीवन को सही दिशा देने के लिए जरूरी हैं प्रेम और विश्वास जीवन को सही दिशा देने के लिए प्रेम और विश्वास दोनों ही बहुत जरूरी हैं। इन्हीं से इंसान सही फैसले ले पाता है और आगे बढ़ता है। हर मुश्किल को आसान बनाता है प्रेम जिसके दिल में प्रेम होता है, उसके जीवन की राह खुद ब खुद उजली हो जाती है। प्रेम से भरा इंसान हर मुश्किल को आसान बना लेता है। अगले पल की भी खबर नहीं आप सौ साल की योजना तो बना सकते हैं लेकिन आप नहीं जानते हैं कि अगले पल क्या होगा। एक जगह रुकना है परेशानी की जड़ चलता हुआ योगी और बहती हुई नदी, वहां कभी गंदगी, मैल या अशुद्धि नहीं टिकती। इसलिए जीवन में हमेशा आगे बढ़ते रहना जरूरी है। सब कुछ अपने समय पर होता है यह मत सोचो कि तुम्हें जीवन में देर हो गई है, हर फूल अपने समय पर खिलता है। चिंता व्यर्थ है सब कुछ आपके नियंत्रण में नहीं है, इसलिए चिंता करना छोड़ दें। जो आपके हाथ में नहीं है, उसे उसके हाथ में सौंप दें जो पूरे संसार को चला रहा है। सत्य की हार कभी नहीं होती सत्य कभी नहीं हारता। हो सकता है कि कुछ देर के लिए झूठ हावी हो जाए, लेकिन अंत में जीत हमेशा सत्य की ही होती है। इसलिए हर हाल में ईमानदारी और सच्चाई पर टिके रहें। यह आपको समाज में सम्मान और मानसिक शांति दोनों देगा। सोच समझकर बोलें शब्द मन खराब हो तो भी खराब शब्द ना बोलें। बाद में मन सही हो सकता है लेकिन बोले गए शब्द नहीं। बहुत सीधा है कर्मों का गणित कर्मों का गणित बहुत ही सीधा है, कर भला तो हो भला।

रेज़र से शेविंग से पहले हो जाएँ सतर्क: चेहरे की ये 5 गलतियाँ बिगाड़ सकती हैं आपकी स्किन

आजकल चेहरे के अनचाहे बालों को हटाने के लिए फेस शेविंग महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है। यह न केवल बालों को हटाती है, बल्कि त्वचा को एक्सफोलिएट कर डेड स्किन सेल्स को भी निकाल देती है, जिससे मेकअप और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स त्वचा में बेहतर तरीके से समा जाते हैं। हालांकि, चेहरे की त्वचा बहुत सेंसिटिव होती है। इसलिए अगर आप फेस रेजर का इस्तेमाल करती हैं, तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है ताकि कटने, छिलने या पिंपल्स की समस्या न हो। सही रेजर का चुनें चेहरे के लिए कभी भी अपने बॉडी रेजर का इस्तेमाल न करें। चेहरे के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए फेशियल रेजर का ही इस्तेमाल करें, जिनमें एक छोटा और बारीक ब्लेड होता है। हमेशा चेक करें कि रेजर का ब्लेड तेज हो। पुराने ब्लेड से त्वचा छिल सकती है। साथ ही, इस्तेमाल से पहले और बाद में रेजर को सैनिटाइजर या अल्कोहल से साफ जरूर करें ताकि बैक्टीरिया न पनपें। त्वचा को तैयार करना सूखी त्वचा पर कभी भी रेजर न चलाएं। इससे जलन और रेजर बर्न हो सकता है। सबसे पहले चेहरे को माइल्ड फेस वॉश से साफ करें। शेविंग को आसान बनाने के लिए चेहरे पर एलोवेरा जेल, फेशियल ऑयल या एक अच्छा मॉइस्चराइजर लगाएं। यह रेजर और त्वचा के बीच एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। शेविंग की सही तकनीक चेहरे को शेव करने का भी एक खास तरीका होता है, जिसे फॉलो करना जरूरी है।     रेजर को त्वचा पर हमेशा 45 डिग्री के एंगल पर रखें।     रेजर को बहुत जोर से न दबाएं। हल्के हाथों से छोटे-छोटे स्ट्रोक्स लें।     हमेशा बालों के उगने की दिशा में ही शेव करें। उल्टी दिशा में शेव करने से इनग्रोन हेयर की समस्या हो सकती है।     शेव करते समय दूसरे हाथ से त्वचा को थोड़ा ऊपर की ओर खींचकर टाइट रखें, ताकि ब्लेड आसानी से फिसल सके। शेविंग के बाद की देखभाल शेविंग के बाद त्वचा के पोर्स खुल जाते हैं, इसलिए सही देखभाल जरूरी है-     शेविंग के बाद चेहरे को ठंडे पानी से धोएं ताकि त्वचा शांत हो जाए।     शेविंग वाले दिन विटामिन-सी, किसी भी तरह के केमिकल एक्सफोलिएंट, जैसे- AHA/BHA या रेटिनॉल का इस्तेमाल न करें। ये त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं।     एक अच्छे हाइड्रेटिंग मॉइस्चराइजर या एलोवेरा जेल से चेहरे को अच्छी तरह हाइड्रेट करें। कब शेविंग से बचें? अगर आपके चेहरे पर मुंहासे, कट्स या कोई स्किन इन्फेक्शन है, तो उस समय शेविंग बिल्कुल न करें। रेजर के इस्तेमाल से बैक्टीरिया पूरे चेहरे पर फैल सकते हैं और आपकी समस्या बढ़ सकती है।  

फ्लाइट के बाद नहीं टूटेगा शरीर, रिसर्च में सामने आया थकान मिटाने का नया वैज्ञानिक मंत्र

लंबी हवाई यात्रा के बाद होने वाली थकान या अलग-अलग शिफ्ट में काम करने की वजह से बिगड़ी हुई नींद अब बीते दिनों की बात हो सकती है। जापान के वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी दवा ‘मिक 628’ की खोज की है, जो शरीर की ‘इंटरनल क्लॉक’ को तेजी से आगे खिसकाने में मदद करती है। इस दवा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह अनिद्रा और थकान से राहत दिलाने में बेहद असरदार साबित हो रही है। चूहों पर सफल रहा प्रयोग वैज्ञानिकों ने इस दवा का परीक्षण चूहों पर किया, जिसके नतीजे चौंकाने वाले रहे। शोध के दौरान चूहों के लिए दिन और रात के समय को 6 घंटे आगे बढ़ाकर ‘जेट लैग’ जैसी स्थिति पैदा की गई। जिन चूहों को ‘मिक 628’ की एक खुराक दी गई, वे सामान्य चूहों की तुलना में 3 दिन पहले ही नए समय के अनुसार ढल गए। इस प्रयोग से यह साफ हुआ कि यह दवा जेट लैग से उबरने के समय को लगभग आधा कर देती है। कैसे काम करती है यह दवा? यह महत्वपूर्ण शोध अमेरिका की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों ने सबसे पहले शरीर की अंदरूनी घड़ी को नियंत्रित करने वाले एक खास जीन की पहचान की। ‘मिक 628’ दवा इसी जीन को सक्रिय करती है, जिससे शरीर का चक्र तेजी से बदल जाता है। इस दवा की एक और खास बात यह है कि इसे लेने के समय का इसके असर पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, जो इसे अन्य दवाओं से अलग बनाता है। भारतीयों के लिए क्यों है खास? आज के दौर में भारतीयों का विदेश दौरा काफी बढ़ गया है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2024-25 में करीब 3.17 करोड़ भारतीयों ने लंबी हवाई यात्राएं कीं। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों को अक्सर समय के अंतर के कारण नींद न आने और थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगर यह दवा बाजार में आती है, तो इन करोड़ों यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। अब इंसानों पर होगा परीक्षण चूहों पर मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब वैज्ञानिक इस दवा को इंसानों पर परखने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले समय में इसके सुरक्षा मानकों और प्रभाव का गहराई से अध्ययन किया जाएगा। अगर इंसानों पर होने वाले परीक्षण सकारात्मक रहते हैं, तो यह दवा न केवल यात्रियों के लिए, बल्कि शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी एक बड़ी राहत लेकर आएगी।  

सही सनस्क्रीन कैसे चुनें? त्वचा को पूरी सुरक्षा देने वाली ये 3 बातें ज़रूर जानें

आप कितना भी महंगा स्किन केयर प्रोडक्ट इस्तेमाल करें, लेकिन अगर आपका सनस्क्रीन अच्छा नहीं है, तो आपके पैसे बर्बाद हो रहे हैं। सूरज से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणें त्वचा के लिए हानिकारक होती हैं। इनके कारण समय से पहले झुर्रियां, सनबर्न और स्किन कैंसर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इन खतरों से बचने के लिए सनस्क्रीन बेहद जरूरी है, लेकिन बाजार में मौजूद ढेरों ऑप्शन्स में से अपने लिए सही सनस्क्रीन चुनना अक्सर कन्फ्यूजिंग हो जाता है। हालांकि, अगर सनस्क्रीन खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो आपको यूवी किरणों से पूरा बचाव मिल सकता है। सनस्क्रीन खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान? जब भी आप सनस्क्रीन खरीदें, उसके लेबल पर इन तीन चीजों को जरूर देखें- SPF (सन प्रोटेक्शन फैक्टर) SPF यह बताता है कि सनस्क्रीन आपको यूवी-बी किरणों से कितनी सुरक्षा देगी। हमेशा सनस्क्रीन 30 या उससे ज्यादा SPF का खरीदें। इससे आपकी त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से 97-98% सुरक्षा मिल सकती है। ब्रॉड स्पेक्ट्रम केवल SPF काफी नहीं है। आपकी सनस्क्रीन पर ब्रॉड स्पेक्ट्रम लिखा होना जरूरी है। इसका मतलब है कि यह यूवी-ए और यूवी-बी दोनों से रक्षा करेगी। PA रेटिंग अक्सर आप लेबल पर PA+, PA++ या PA+++ देखते होंगे। यह UVA किरणों से सुरक्षा के स्तर के बारे में बताता है। जितने ज्यादा ‘+’ के निशान होंगे, सुरक्षा उतनी ही बेहतर होगी। कोशिश करें कि कम से कम PA+++ वाली सनस्क्रीन चुनें। अपनी स्किन टाइप के अनुसार कैसे चुनें सनस्क्रीन? हर किसी की त्वचा अलग होती है, इसलिए सनस्क्रीन भी अलग होनी चाहिए-     ऑयली या एक्ने-प्रोन स्किन- इनके लिए जेल-बेस्ड या मैट फिनिश सनस्क्रीन सबसे अच्छी होती है। लेबल पर Non-comedogenic जरूर देखें, जिसका मतलब है कि यह पोर्स को बंद नहीं करेगी।     ड्राई स्किन- आपको क्रीम-बेस्ड सनस्क्रीन चुननी चाहिए जिसमें हयालूरोनिक एसिड या सेरामाइड्स जैसे मॉइस्चराइजिंग तत्व हों।     सेंसिटिव स्किन- ऐसी त्वचा के लिए फिजिकल या मिनरल सनस्क्रीन, जिसमें जिंक ऑक्साइड या टाइटेनियम डाइऑक्साइड हो बेहतर होती है, क्योंकि यह त्वचा में समाने के बजाय ऊपर एक सुरक्षा परत बनाती है। सनस्क्रीन लगाने का सही तरीका सही सनस्क्रीन खरीदना केवल आधा काम है, उसे सही से लगाना भी उतना ही जरूरी है-     दो उंगलियों का नियम- चेहरे और गर्दन के लिए अपनी पहली और दूसरी उंगली की लंबाई के बराबर सनस्क्रीन लें। इससे कम सनस्क्रीन आपको पूरी सुरक्षा नहीं देगा।     20 मिनट पहले लगाएं- घर से निकलने से कम से कम 15-20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाएं, ताकि वह त्वचा में सेट हो सके।     दोबारा लगाएं- अगर आप लंबे समय तक बाहर हैं या पसीना आ रहा है, तो हर 2-3 घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाएं।  

घर बैठे पुराने चालान का निपटारा कैसे करें? डिजिटल लोक अदालत की पूरी स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

नई दिल्ली अगर आपके पुराने चालान बकाया हैं, तो अब डिजिटल ट्रैफिक लोक अदालत पोर्टल के जरिए आप घर बैठे उनका निपटारा कर सकेंगे। यह पोर्टल लोगों को अपनी गाड़ी का नंबर और ओटीपी दर्ज करके चालान देखने की सुविधा देता है। इस पोर्टल के जरिए लोग लोक अदालत के लिए तारीख और कोर्ट चुन सकेंगे। इसके बाद चुनी हुई तारीख को कोर्ट में जाकर पोर्टल पर मिलने वाले बारकोड को स्कैन करवाना होगा। इसके बाद जुर्माने की राशि को भरते ही रियल टाइम में चालान का निपटारा अपडेट हो जाएगा। डिजिटल ट्रैफिक लोक अदालत पोर्टल से क्या फायदा डिजिटल ट्रैफिक लोक अदालत पोर्टल का फायदा लोगों को प्रशासन दोनों को मिलेगा। इसके जरिए ट्रैफिक चालानों के निपटारे की रफ्तार तेज हो जाएगी। इसके अलावा पहले चालान का स्टेटस अपडेट होने में लंबा समय लग जाता था, जो कि अब रियल टाइम में तुरंत हो जाएगा। इसके अलावा इस पोर्टल की वजह से लोगों को बार-बार कोर्ट का चक्कर नहीं मारना पड़ेगा और वह अपने अनुसार घर या दफ्तर के पास की कोर्ट और टाइम स्लॉट चुनकर सभी चालान का निपटारा करा पाएंगे। समझें इस्तेमाल का पूरा प्रोसेस डिजिटल ट्रैफिक लोक अदालत पोर्टल का इस्तेमाल करना काफी आसान हैं। इसके लिए आपको:     सबसे पहले ऑफिशियल पोर्टल यानी कि     traffic.delhipolice.gov.in/lokadalat/ पर जाना होगा।     यहां होम पेज पर अपनी गाड़ी का नंबर और वेरिफिकेशन कोड डालकर सर्च बटन पर क्लिक करें।     इसके बाद आपको रजिस्टर्ड नंबर पर एक OTP मिलेगा। OTP को दर्ज करके वेरिफाई करें।     वेरिफिकेशन होने के बाद आपको स्क्रीन पर गाड़ी के सभी पेंडिंग नोटिस और चालान दिखने लगेंगे। आपको जिस किसी भी चालान का निपटारा करना है, उसे चुन लें।     अब अपनी सुविधा के अनुसार नजदीकी कोर्ट को चुनें और टाइप स्लॉट चुनें।     इसके बाद अंडरटेकिंग पर क्लिक करके सबमिट कर दें और चालान की रसीद का फ्रिंट लेकर उसे सेव कर लें। इसके बाद क्या करें?     इसके बाद तय तारीख और समय पर संबंधित कोर्ट में पहुंचें।     कोर्ट में मौजूद लोक अदालत की बेंच के सामने अपनी चालान की रसीद दिखाएं।     कोर्ट का स्टाफ रसीद का बारकोड स्कैन करेगा और आपको जुर्माने की रकम भरनी होगी।     इसके साथ ही मौके पर चालान का निपटारा कर दिया जाएगा।

Apple का सबसे ताकतवर फोन! iPhone 18 Pro सीरीज के फीचर्स आए सामने

नई दिल्ली Apple इस साल सितंबर में iPhone 18 लाइनअप को लॉन्च कर सकता है. कयास हैं कि कंपनी इस साल सिर्फ प्रो वेरिएंट को ही लॉन्च करेगी. लेटेस्ट लीक रिपोर्ट्स की मानें, तो ब्रांड Pro मॉडल्स में कई बड़े अपग्रेड करेगा. ऐपल दो स्मार्टफोन्स- iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च कर सकता है. दोनों ही स्मार्टफोन्स में A20 Pro प्रोसेसर दिया जाएगा. कंपनी इन फोन्स में C2 मॉडम दे सकती है, जो ब्रांड का इन-हाउस चिप होगा. दोनों ही फोन्स में छोटा डायनैमिक आईलैंड मिलेगा. आइए जानते हैं इन फोन्स में क्या कुछ खास हो सकता है. मिलेंगे मैक्स अपग्रेड Macrumors की रिपोर्ट के मुताबिक, iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max में बड़ा अपग्रेड मिलेगा. दोनों ही फोन्स में डायनैमिक आईलैंड का साइज छोटा किया जा सकता है. स्मार्टफोन से कुछ फेस आईडी टेक्नोलॉजी को हटाया जा सकता है. दोनों ही स्मार्टफोन्स में A20 Pro प्रोसेसर मिलेगा. ये चिप 2nm प्रॉसेस पर तैयार किया जाएगा. प्रोसेसर नए आर्किटेक्चर और पैकेजिंग डिजाइन पर बेस्ड होगा. इसकी वजह से परफॉर्मेंस के साथ ही पावर एफिशिएंसी भी बेहतर होगी. इसके अलावा सेल्यूलर और नेटवर्किंग फीचर के मामले में भी कंपनी अपग्रेड्स करेगी. अपकमिंग स्मार्टफोन सीरीज में N2 चिप मिलेगा. कंपनी इन दोनों ही फोन्स में 48MP का प्राइमरी फ्यूजन कैमरा दे सकती है. नए अपग्रेड के बाद iPhone में लाइट को कंट्रोल करना आसान होगा. नॉन प्रो मॉडल्स नहीं होंगे लॉन्च रिपोर्ट्स की मानें, तो कंपनी इस साल iPhone 18 को लॉन्च नहीं करेगी. इस फोन को कंपनी अगले साल यानी 2027 में लॉन्च कर सकती है. वहीं iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को कंपनी इस साल यानी 2026 सितंबर में लॉन्च कर सकती है. प्रो सीरीज के डिजाइन में इस बार कुछ नया देखने को संभवतः नहीं मिलेगा.

सुनने की क्षमता पर बड़ा संकट, 2050 तक हर चौथा शख्स प्रभावित—WHO रिपोर्ट में खुलासा

नई दिल्ली दुनिया भर में सुनने से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही है. वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन की पहली वर्ल्ड रिपोर्ट ऑन हियरिंग के अनुसार साल 2050 तक दुनिया की करीब 2.5 अरब आबादी यानी हर चार में से एक व्यक्ति किसी न किसी स्तर की सुनने की समस्या से जूझ रहा होगा. इनमें से लगभग 70 करोड़ लोगों को कान और सुनने से जुड़ी विशेष हॉस्पिटैलिटी और पुनर्वास सेवाओं की जरूरत पड़ेगी. ‌ ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि 2050 तक हर चार में से एक शख्स को कान की दिक्कतें क्यों होगी और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में और क्या-क्या आया सामने आया. अभी क्या है स्थिति? डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति को सुनने में किसी न किसी तरह की दिक्कत है. समय पर इलाज और देखभाल न मिल पाना मामलों के बढ़ने के बड़ी वजह है. डब्ल्यूएचओ का कहना है की कम आय वाले देशों में ऐसे 80 प्रतिशत मामले सामने आते हैं, जहां एक्सपर्ट्स और संसाधनों की भारी कमी है. इसके अलावा संक्रमण, जन्मजात बीमारियां, ध्वनि प्रदूषण, तेज आवाज में लंबे समय तक रहना और अनहेल्दी लाइफस्टाइल सुनने की क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं. वहीं बच्चों में करीब 60 फीसदी मामलों को टीकाकरण, बेहतर मातृत्व, शिशु देखभाल और कान के संक्रमण के समय पर इलाज से रोका जा सकता है. वहीं युवाओं में तेज आवाज में संगीत सुनना बड़ा खतरा बनता जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार 12 से 35 वर्ष के एक अरब से ज्यादा लोग स्मार्टफोन और हेडफोन के जरिए तेज आवाज में गाने सुनने के कारण खतरे में है. हेल्थ व्यवस्था में बड़ी कमी भी वजह डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि कई देशों में कान, नाक और गला एक्सपर्ट्स, ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच थेरेपिस्ट की भारी कमी है. वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में कान और सुनने से जुड़ी देखभाल को अभी भी पर्याप्त जगह नहीं मिल पाई. इसके चलते शुरुआती पहचान और समय पर इलाज नहीं हो पाता है. इसके अलावा एक्सपर्ट का कहना है कि सुनने की समस्या की शुरुआती जांच बहुत जरूरी है. वहीं नई तकनीकों की मदद से अब कम संसाधनों में भी जांच संभव है. कई कान की बीमारियों का इलाज दवा या सर्जरी से हो सकता है. जहां सुनने की क्षमता वापस नहीं लाई जा सकती, वहां हियरिंग एड, कॉक्लियर इम्प्लांट और स्पीच थेरेपी जैसे ऑप्शन मददगार साबित होते हैं. डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि कान और सुनने से जुड़ी सेवाओं में निवेश करने पर सरकार को हर एक डॉलर के बदले करीब 16 डॉलर का सामाजिक और आर्थिक लाभ मिल सकता है. वहीं सुनने की समस्या का असर सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रहता. यह पढ़ाई, रोजगार और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है. इसके अलावा डब्ल्यूएचओ के अनुसार इससे सामाजिक अलगाव और अवसाद का खतरा भी बढ़ सकता है.

भारत के लिए गेम-चेंजर डील: Jio ने Google और Microsoft संग लॉन्च किया Trusted Tech Alliance, जानिए फायदे

नई दिल्ली अफ्रीका, एशिया, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका की 15 बड़ी कंपनियों ने ‘ट्रस्टेड टेक एलायंस’ (TTA) के गठन की घोषणा की है। यह एक जैसी सोच वाली इंटरनेशनल टेक कंपनियों का एक समूह है, जो कनेक्टिविटी, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर, सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए ऐसी तकनीक बनाने के लिए साथ आए हैं जिस पर दुनिया यकीन कर सके और जिसे परखा जा सके। इस एलायंस में भारत की ओर से Jio Platforms शामिल है। जर्मनी में आयोजित म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान इस एलायंस का ऐलान किया गया। ये दिग्गज कंपनियां हैं इस एलायंस का हिस्सा एलायंस के संस्थापक सदस्यों में अमेजन, वेब सर्विसेज, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल क्लाउड, एरिक्सन, नोकिया, एसएपी और एनटीटी जैसी कुल 15 ग्लोबल टेक कंपनियां शामिल हैं। एलायंस का कहना है कि आगे और कंपनियों को इससे जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही, देश और दुनिया के लेवल पर अपनी तकनीक को और बेहतर बनाने, दूसरी कंपनियों के साथ मुकाबले में बने रहने और एक मजबूत डिजिटल सिस्टम तैयार करने पर काम जारी रहेगा। जियो का बड़ा संकल्प लॉन्च के मौके पर जियो प्लेटफॉर्म्स के सीईओ किरण थॉमस ने कहा कि विश्व स्तर पर डिजिटल विकास को गति देने के लिए भरोसेमंद, सुरक्षित और पारदर्शी टेक्नोलॉजी जरूरी है। जियो प्लेटफॉर्म्स को गर्व है कि वह ‘ट्रस्टेड टेक एलायंस’ का हिस्सा बना है, ताकि टेक्नोलॉजी की दुनिया में मिलकर ऐसे नियम और तरीके बनाए जा सकें जो सुरक्षित हों और जिन पर सब भरोसा कर सकें। उन्होंने आगे बताया कि हम इस कोशिश के जरिए दुनिया भर के पार्टनर्स के साथ मिलकर आने वाले समय की इंटरनेट कनेक्टिविटी, क्लाउड और AI सिस्टम को इतना बेहतर बनाना चाहते हैं कि लोग लंबे समय तक उन पर भरोसा कर सकें। माइक्रोसॉफ्ट के वाइस चेयर और प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ ने इस मौक पर कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल में समान सोच वाली कंपनियों का साथ आना जरूरी है, ताकि सीमाओं के पार तकनीक में भरोसा और उच्च मानक कायम किए जा सकें। वहीं एरिक्सन के सीईओ बोर्ये एकहोम ने कहा कि कोई एक कंपनी या देश अकेले सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल ढांचा नहीं बना सकता, इसके लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है। ग्लोबल मंच पर बढ़ेगी भारत की धाक इस एलायंस के तहत सदस्य कंपनियों ने पांच प्रमुख सिद्धांतों पर सहमति जताई है। इसमें कंपनियों को चलाने के ईमानदार तरीके, सुरक्षा की समय-समय पर जांच, सामान और सेवाओं की सप्लाई का मजबूत नेटवर्क, एक ऐसा सिस्टम जहां सब मिलकर काम कर सकें और कानून के हिसाब से लोगों के डेटा को सुरक्षित रखना शामिल है। इन नियमों के जरिए कंपनियां यह सुनिश्चित करेंगी कि टेक्नोलॉजी सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदारी के साथ संचालित हो, चाहे उसका विकास या इस्तेमाल कहीं भी हो। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जियो की भागीदारी से भारत को वैश्विक डिजिटल मानकों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका मिलेगा। इससे देश में क्लाउड, 5G और AI आधारित सर्विसेज को ग्लोबल स्तर की विश्वसनीयता मिल सकती है और डेटा सुरक्षा को लेकर ग्राहकों का भरोसा और मजबूत होगा।

बिना पार्लर जाए पाएं परफेक्ट आइब्रो! ये जेल देगा नेचुरल लुक मिनटों में

सही आई मेकअप के बाद भी आइब्रोज के सही सेटिंग ना होने से लुक अधूरा नजर आता है। ऐसे में आइब्रो जैल कमाल कर सकता है। खासकर जिनके आइब्रोज के बाल छितरे हुए या एकसमान रूप से सेट नहीं होते। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि इस जैल की मदद से कैसे आप अपने आइब्रोज को भी स्टाइल कर सकते हैं। सबसे पहले करें क्लीन भौंहों पर किसी भी प्रकार का प्रोडक्ट लगाने से पहले उसे क्लीन करना जरूरी होता है। उन पर ऑयल या मेकअप नहीं होना चाहिए। इससे जैल ज्यादा अच्छी तरह काम करेगा और लंबे समय तक टिका रहेगा। भौंहों को ऊपर की तरफ ब्रश करें आइब्रो ब्रश की मदद से भौंहों को ऊपर की तरफ ले जाएं। इससे एक फुलर और डिफाइन लुक आएगा। अब आपको आइब्रो जैल लगाने का एक अच्छा आधार मिल चुका है। इससे भौंहें ज्यादा नेचुरल नजर आएंगी। बस थोड़ा ही लें भौंहों को सेट करने के लिए जैल की ज्यादा मात्रा लेने की जरूरत नहीं। इसे लगाने की शुरुआत नाक के पास कॉर्नर से करें। ऊपर की तरफ स्ट्रोक करते हुए जैल लगाना है, इससे भौंहें नेचुरल तरीके से सेट नजर आएंगी। इस तरह शेप दें और सेट करें जैल लगाने के बाद उसे मनचाहा शेप देने के लिए स्पूली की मदद से लगातार ब्रश करते रहें। लेमिनेटेड लुक के लिए आप ऐसे ही अपवर्ड डायरेक्शन मे छोड़ सकते हैं या फिर आप अपने भौंहों के शेप के साथ-साथ उसे सेट कर सकते हैं। यदि किसी हिस्से में आइब्रोज की ग्रोथ कम है तो जैल लगाने से पहले उन हिस्सों में आइब्रो पेंसिल का इस्तेमाल करें। जब तक ड्राई न हो जाए वैसे तो जैल सूखने में ज्यादा वक्त नहीं लगता, लेकिन उसके सूख जाने तक भौंहों को हाथ ना लगाएं। इससे पूरे दिन आपके आइब्रोज सेट रहेंगे और उनका शेप भी नहीं बिगड़ेगा। इस तरह के जैल होते हैं ज्यादा फायदेमंद ऐसा जैल लें, जो आपके आइब्रोज को सेट करने के साथ-साथ उनकी ग्रोथ में भी मदद करे। इन तत्वों से युक्त जैल उन्हें फिनिशिंग भी देते हैं और पोषण भी:     कैस्टर ऑयल: भौंहों की ग्रोथ और थिकनेस को बढ़ाने के लिए जाना जाता है।     विटामिन ई: भौंहों को पोषण देता है और उनकी कंडिशनिंग करता है।     जोजोबा ऑयल: आइब्रोज के बालों को मजबूती देता और झड़ने से बचाता है।  

दिल की बीमारियों से बचाव का आसान तरीका: गेहूं नहीं, इस अनाज की रोटी खाएं

चाहे घर में दाल बनी हो या कोई मसालेदार सब्जी, गेहूं की रोटी के बिना हमारी थाली अधूरी होती है। यह हमारे भोजन का अहम हिस्सा है, पर अब समय बदल रहा है। आजकल बदलती लाइफस्टाइल और फिटनेस के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण लोग अपनी डाइट में बदलाव कर रहे हैं। इसलिए, अब क्विनोआ रोटी लोगों की थाली में जगह बना रही है। क्विनोआ कैलोरी, प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक और अन्य जरूरी विटामिन से भरपूर होती है। यही वजह है कि इसे आज सुपरफूड कहा जाता है। बता दें कि अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में क्विनोआ रोटी की मांग बढ़ी है, लेकिन सच यह है कि दक्षिण अमेरिका में इसे हजारों सालों से उगाया और खाया जाता रहा है। चलिए जानते हैं इसे डाइट में शामिल करने के कुछ फायदों के बारे में। दिल की सेहत के लिए अच्छा दिल के मरीजों के लिए क्विनोआ रोटी को डाइट में शामिल करना काफी फायदेमंद माना गया है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि क्विनोआ खाने से मेटाबॉलिज्म बेहतर और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है। यह बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मददगार है। डायबिटीज के लिए फायदेमंद क्विनोआ की रोटी खाना डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होती है। अगर आप रोजाना इसे डाइट में शामिल करते हैं, तो यह ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल रखने में मदद करती है।   वजन घटाने में मददगार वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए क्विनोआ की रोटी किसी वरदान से कम नहीं है। एक स्टडी में पाया गया है कि क्विनोआ मोटापे को भी कम करने का एक बेहतरीन सुपरफूड है। अगर आप भी बढ़ते वजन को लेकर परेशान हैं, तो क्विनोआ की रोटी को डाइट में जरूर शामिल करें। ग्लूटेन-फ्री रोटी का बेस्ट ऑप्शन जिन लोगों को ग्लूटेन से एलर्जी है या सीलिएक डिजीज है, तो उनके लिए गेंहू की रोटी की जगह क्विनोआ की रोटी एक सुरक्षित और पौष्टिक ऑप्शन माना जाता है। क्विनोआ को खरीदने से पहले मिलावट या गंदगी की जांच के लिए पैकेट पर लगे लेबल को ध्यान से जरूर पढ़ें। पाचन को बनाए हेल्दी क्विनोआ में कई अनाजों से ज्यादा फाइबर होता है, जो पेट से जुड़ी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और कब्ज की समस्या कम करता है। साथ ही, क्विनोआ की रोटी खाने से पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है।  

23 लाख लोगों पर हुई स्टडी: डायबिटीज के साथ हार्ट फेलियर का खतरा क्यों बढ़ाता है कम फिजिकल एक्टिविटी

क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज के मरीजों में हार्ट फेलियर और दिल की अन्य बीमारियों का एक बहुत बड़ा कारण केवल ‘शारीरिक निष्क्रियता’ है? हाल ही में हुए एक शोध ने इस बात की पुष्टि की है कि अगर डायबिटीज के मरीज फिजिकली एक्टिव नहीं रहते हैं, तो उनके लिए जानलेवा जोखिम काफी बढ़ जाते हैं। भारत के लिए चिंताजनक आंकड़े ‘जर्नल ऑफ स्पोर्ट एंड हेल्थ साइंस’ में प्रकाशित एक नए शोध के अनुसार, भारत में डायबिटीज के मरीजों में हार्ट फेलियर के 13 प्रतिशत से भी ज्यादा मामलों के पीछे मुख्य वजह शारीरिक गतिविधि की कमी है। यह शोध बताता है कि भारत में डायबिटीज पीड़ितों में: कोरोनरी हृदय रोग के 9.6 प्रतिशत मामले, और हृदय संबंधी अन्य जटिलताओं के 9.4 प्रतिशत मामले केवल इसलिए होते हैं क्योंकि मरीज पर्याप्त शारीरिक व्यायाम या गतिविधि नहीं करते। विशेषज्ञों की क्या है राय? ब्राजील के रियो ग्रांडे डो सुल संघीय विश्वविद्यालय की शोधकर्ता जेन फेटर ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि डायबिटीज होने के बाद अन्य जटिल बीमारियां होना तय है, लेकिन यह सच नहीं है। जेन फेटर के अनुसार, “हमारे निष्कर्ष इस पुरानी धारणा को चुनौती देते हैं। यह साफ है कि अगर डायबिटीज के मरीज अपनी शारीरिक गतिविधि को उचित तरीके से बढ़ा लें, तो इन गंभीर बीमारियों के एक बड़े हिस्से को रोका जा सकता है।” 23 लाख लोगों पर हुआ शोध शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए दक्षिण एशिया सहित दुनिया भर के अलग-अलग क्षेत्रों से 23 लाख से अधिक वयस्क डायबिटीज मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि वैश्विक स्तर पर भी बड़ी रक्त वाहिकाओं की समस्याओं और आंखों की बीमारी के दस में से एक मामले का कारण निष्क्रियता ही है। बीमारियों का खतरा कितना ज्यादा? विश्लेषण में यह बात सामने आई कि शारीरिक निष्क्रियता के कारण डायबिटीज मरीजों में कई गंभीर रोगों का खतरा बढ़ जाता है:     स्ट्रोक: 10 प्रतिशत से अधिक मामले     डायबिटिक रेटिनोपैथी : 9.7 प्रतिशत     हार्ट फेलियर: 7.3 प्रतिशत     कोरोनरी हार्ट डिजीज: लगभग 5 से 7 प्रतिशत क्या है बचाव का रास्ता? इस खतरे को कम करने का उपाय बहुत ही सरल है- व्यायाम। विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह है कि हर व्यक्ति को प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि जरूर करनी चाहिए। थोड़ी-सी सक्रियता डायबिटीज के मरीजों को हार्ट फेलियर और स्ट्रोक जैसे बड़े खतरों से बचा सकती है।  

मोबाइल प्रेमियों के लिए खुशखबरी: मोटोरोला का धांसू 5G फोन कम दाम में उपलब्ध

मुंबई  मोटोरोला के फोन पर कमाल की डील मिल रही है। हम कंपनी के इस धांसू फोन की बात कर रहे हैं, उसका नाम Motorola G35 5G है। अमेजन की डील में आप 24जीबी तक की रैम (रैम बूस्ट फीचर के साथ) वाले इस फोन को 12500 रुपये से कम में खरीद सकते हैं। 8जीबी रैम और 128जीबी के इंटरनल स्टोरेज वाले इस फोन की कीमत अमेजन इंडिया पर 13225 रुपये है। फोन पर 1 हजार रुपये तक का बैंक डिस्काउंट दिया जा रहा है। इस डिस्काउंट के साथ यह फोन 12500 रुपये से कम में आपका हो सकता है। फोन पर 661 रुपये तक का कैशबैक भी दिया जा रहा है। आप इस डिवाइस को एक्सचेंज बोनस के साथ भी खरीद सकते हैं। ध्यान रहे कि एक्सचेंज ऑफर में मिलने वाला डिस्काउंट आपके पुराने फोन की कंडीशन, ब्रैंड और कंपनी की एक्सचेंज पॉलिसी पर निर्भर करेगा। फोन में कंपनी 50MP का कैमरा, 5000mAh की बैटरी और डॉल्बी साउंड जैसे धांसू फीचर दिए गए है। मोटोरोला G35 5G के फीचर और स्पेसिफिकेशन मोटोरोला के इस फोन में 2400 x 1080 पिक्सल रेजॉलूशन के साथ 6.72 इंच का फुल एचडी+ LCD पैनल दिया गया है। फोन में ऑफर किया जा रहा यह डिस्प्ले 120Hz के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इसका पीक ब्राइटनेस लेवल 1000 निट्स का है। डिस्प्ले प्रोटेक्शन के लिए फोन में गोरिल्ला ग्लास 3 दिया गया है। फोन 4जीबी LPDDR4x रैम और 128जीबी के UFS 2.2 स्टोरेज से लैस है। फोन रैम बूस्ट फीचर के साथ आता है। इससे इसकी रैम 24जीबी तक की हो जाती है। प्रोसेसर के तौर पर फोन में कंपनी Unisoc T760 दे रही है। फोटोग्राफी के लिए फोन में एलईडी फ्लैश के साथ दो कैमरे दिए गए हैं। इनमें 50 मेगापिक्सल के मेन लेंस के साथ एक 8 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड ऐंगल कैमरा शामिल है। मोटोरोला के इस फोन में सेल्फी के लिए 16 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। फोन में दी गई बैटरी 5000mAh की है, जो 18 वॉट की चार्जिंग को सपोर्ट करती है। ओएस की बात करें, तो फोन ऐंड्रॉयड 15 पर काम करता है। फोन के ओएस को कंपनी दो साल तक सिक्योरिटी पैच ऑफर कर रही है। बायोमेट्रिक सिक्योरिटी के लिए आपको इस फोन में साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर देखने को मिलेगा। दमदार साउंड के लिए फोन में कंपनी डॉल्बी ऐटमॉस ऑफर कर रही है। यह फोन IP52 डस्ट और वॉटर रेजिस्टेंट रेटिंग के साथ आता है।

जीवन की कड़वी सच्चाई: नित्यानंद चरण दास के अनुसार इन 6 लोगों से हमेशा दूरी रखें

जीवन में सही लोगों की संगति आपको आगे बढ़ाती है, जबकि गलत संगति भीतर से कमजोर कर देती है। नित्यानंद चरण दास बताते हैं कि किन 6 तरह के लोगों से दूरी बनाकर रखना ही आत्मरक्षा है। जीवन हो या अध्यात्म- संगति का प्रभाव सबसे गहरा होता है। जिन लोगों के साथ हम रोज उठते-बैठते हैं, उनकी सोच, आदतें और ऊर्जा धीरे-धीरे हमारी अपनी बन जाती हैं। अगर आपकी संगति आपको प्रेरित करने के बजाय थका रही है, आत्मविश्वास कम कर रही है या मानसिक शांति छीन रही है, तो यह एक बड़ी चेतावनी हो सकती है। प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता और इस्कॉन साउथ मुंबई के संयोजक Nityanand Charan Das कहते हैं कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ सही रास्ता नहीं, बल्कि सही लोग भी जरूरी होते हैं। उनके अनुसार, कुछ लोगों से दूरी बनाना नकारात्मकता नहीं, बल्कि स्वयं की रक्षा करना है। उनके अनुसार, इन 6 तरह के लोगों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए- जो दूसरों की चुगली करता है जो व्यक्ति आपकी मौजूदगी में किसी तीसरे की बुराई करता है, वह भरोसे के काबिल नहीं होता। चुगली करने वाला इंसान रिश्तों को सच नहीं, मसाले से चलाता है। ऐसे लोग ना तो सच्चे दोस्त होते हैं और ना ही वफादार साथी। आज आप उनके सामने हैं, इसलिए आप सुरक्षित हैं- लेकिन जैसे ही आप पीछे मुड़ेंगे, वही बातें आपके बारे में कही जाएंगी। यह आदत व्यक्ति की सोच और नैतिकता को दर्शाती है। जो जरूरत से ज्यादा मीठा बोलता है अत्यधिक तारीफ, बनावटी अपनापन और हर बात में “आप ही सबसे अच्छे हैं” कहना अक्सर किसी स्वार्थ का संकेत होता है। सच्चे रिश्तों में ईमानदारी होती है, चापलूसी नहीं। ऐसे लोग तब तक मीठे रहते हैं, जब तक उन्हें आपसे कुछ चाहिए। काम निकलते ही उनका व्यवहार बदल जाता है। जो कभी अपनी गलती नहीं मानता जो इंसान हर परिस्थिति में खुद को सही साबित करता है और दोष हमेशा दूसरों पर डालता है, वह रिश्तों में जिम्मेदारी नहीं निभा सकता। ऐसे लोगों के साथ विवाद कभी सुलझते नहीं, क्योंकि वे आत्ममंथन करना ही नहीं जानते। जहां गलती मानने की क्षमता नहीं, वहां सुधार और भरोसे की भी कोई जगह नहीं। जो ताकतवर लोगों के सामने व्यवहार बदल ले जो व्यक्ति पद, पैसे या पावर देखकर झुक जाता है और आम लोगों को नजरंदाज करता है, वह स्थिर चरित्र वाला नहीं होता। ऐसे लोग रिश्तों को इंसान से नहीं, फायदे से जोड़कर देखते हैं। आज आप उपयोगी हैं, इसलिए आप महत्वपूर्ण हैं- कल कोई और ज्यादा प्रभावशाली मिला, तो आप पीछे छूट जाएंगे। जो किसी के दर्द पर हंसता है जिस इंसान में करुणा और संवेदना नहीं होती, वह कभी सच्चा सहारा नहीं बन सकता। किसी के दुख में मजाक उड़ाना या उसे कमजोरी समझना दर्शाता है कि उस व्यक्ति में समानुभूति की कमी है। नित्यानंद चरण दास के अनुसार, जहां एक बार संवेदना नहीं दिखी, वहां आगे भी उम्मीद रखना व्यर्थ है। जो राज नहीं रख सकता जो व्यक्ति दूसरों की निजी बातें, रहस्य या विश्वास को हल्के में लेता है, वह भरोसे के लायक नहीं होता। अगर कोई किसी तीसरे का राज आपके साथ शेयर कर रहा है, तो याद रखें- आपका नंबर भी आएगा। विश्वास एक बार टूटा तो रिश्ते हमेशा के लिए कमजोर हो जाते हैं।  

आधार कार्ड दिखाने की झंझट खत्म? फोटो और QR कोड पर चलेगा काम, नया ऐप बना कारण?

नई दिल्ली आने वाले समय में हो सकता है कि आपके आधार कार्ड पर सिर्फ आपकी फोटो और QR कोड ही दिखाई दें। इसे लेकर खबरें आ रही हैं और कुछ टिप्सटर ने भी इस बारे में X पर पोस्ट किया है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में UIDAI फिजिकल आधार कार्ड के डिजाइन में बड़ा बदलाव कर सकता है। ऐसे में आज जिस तरह से आधार कार्ड पर धारक की सारी जानकारी उपलब्ध रहती है, वैसे आगे शायद न हो। इसकी एक बड़ी वजह नई आधार ऐप को बताया जा रहा है, जिसे लाने का मकसद लोगों को उनके आधार कार्ड से जु़ड़ी जानकारी पर ज्यादा कंट्रोल देना और फिजिकल कार्ड की जरूरत को खत्म करना है। ऐसे में मौजूदा फिजिकल आधार कार्ड्स इस मकसद में बाधा बन सकते हैं क्योंकि उन पर सारी डिटेल्स मौजूद होती है। क्या बदलेगा आधार पर? अगर टिप्सटर और बाकी सूत्रों से आ रही खबरें सही साबित होती हैं, तो UIDAI आधार के फिजिकल कार्ड से सभी डिटेल्स को हटा कर, सिर्फ धारक की फोटो और एक QR कोड ही दिखाएगा। ऐसा धारक की प्राइवेसी की रक्षा के लिए और नए आधार ऐप के इस्तेमाल को बढ़ावा देनेे के लिए किया जा सकता है। सिर्फ फोटो-QR कोड से क्या फायदा होगा? आधार के फिजिकल कार्ड पर फोटो और QR कोड होने से आधार धारक की जानकारी लीक होने का खतरा खत्म हो जाएगा। दरअसल UIDAI ने नए आधार ऐप के जरिए आधार के इस्तेमाल को डिजिटल बना दिया है। हालांकि इसके पूरी तरह चलन में आने में समय लग सकता है और कई जगहों पर लोगों से उनका फिजिकल आधार कार्ड ही जमा करना पड़ सकता है। ऐसे में अगर कार्ड पर सिर्फ फोटो और QR कोड होगा, तो न ही धारक की गैर-जरूरी डिटेल्स लीक होंगी और कार्ड की फिजिकल कॉपी मांगने वालों को भी डिटेल्स वेरिफाई करने के लिए नए आधार ऐप पर शिफ्ट होना होगा। इस तरह से कह सकते हैं कि नए तरह के फिजिकल आधार कार्ड बनाकर UIDAI आधार ऐप के इस्तेमाल को पुश कर सकता है। नए आधार ऐप से क्या है लिंक? आधार के फिजिकल कार्ड पर सिर्फ फोटो और QR कोड देना, कहीं न कहीं नए आधार ऐप से लिंक हो सकता है। UIDAI ने नए आधार ऐप को भी इसी तरह बनाया है कि यूजर को अपनी सारी आधार डिटेल्स किसी के साथ शेयर न करनी पड़े। नए ऐप में यूजर आधार का QR कोड शेयर करके अपने आधार से जुड़े काम कर सकता है। सामने वाला भी उस ऐप के जरिए किसी का भी आधार वेरिफाई कर सकता है। ऐसे में आधार के फिजिकल कार्ड को शेयर करने की जरूरत खत्म हो जाती है। सरकार ने ऐसा इसलिए भी किया है क्योंकि नॉर्मल आधार कार्ड पर मौजूद ज्यादा डिटेल्स का साइबर फ्रॉड जैसे कामों में गलत इस्तेमाल होता था। नया कार्ड बनवाना जरूरी होगा? फिलहाल क्योंकि नए डिजाइन वाले आधार कार्ड को लेकर सरकार की ओर से पुख्ता जानकारी नहीं आई है। ऐसे में सिर्फ खबरों के आधार पर कुछ भी कह पाना संभव नहीं है। हालांकि अगर आप UIDAI का नया आधार ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको शायद नया कार्ड न बनवाना पड़े। ऐसा इसलिए क्योंकि इस ऐप के जरिए आप डिजिटल आधार को किसी के साथ भी शेयर कर सकते हैं। इसके साथ ही आधार में किसी तरह के बदलाव या फिर शेयर की जाने वाली जानकारी पर कंट्रोल भी नए UIDAI ऐप के जरिए रखा जा सकता है। ऐसे में हो सकता है कि नए डिजाइन वाला आधार कार्ड सिर्फ उनके लिए हो, जो कि ऐप का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं हैं।

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