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नलखेड़ा में वकीलों का बड़ा ऐलान एसडीएम सर्वेश यादव के कोर्ट का बहिष्कार, सुसनेर में पहले से हड़ताल; दो तहसीलों में थमा न्यायिक काम

Lawyers in Nalkheda make a major announcement, boycotting SDM Sarvesh Yadav’s court; Susner already on strike; judicial work halted in two tehsils. संवाददाता चंदा कुशवाह  नलखेड़ा ! न्यायालयीन माहौल को लेकर बढ़ते विवाद के बीच नलखेड़ा अधिवक्ता संघ ने बड़ा फैसला लिया है। शुक्रवार को हुई बैठक में संघ ने सर्वसम्मति से सर्वेश यादव के न्यायालय के बहिष्कार का प्रस्ताव पारित कर दिया। वकीलों का आरोप है कि एसडीएम का व्यवहार न्यायालय में संतोषजनक नहीं है, जिससे अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।बैठक के बाद संघ पदाधिकारियों ने कहा कि न्यायालय का वातावरण गरिमामय होना चाहिए। यदि अधिवक्ताओं को सम्मानजनक माहौल नहीं मिलता, तो सामूहिक निर्णय लेना मजबूरी बन जाता है। सुसनेर में 13 फरवरी से हड़तालइसी मुद्दे को लेकर सुसनेर में 13 फरवरी से वकीलों की हड़ताल जारी है। अब नलखेड़ा में भी बहिष्कार का प्रस्ताव पारित होने के बाद आंदोलन दो तहसीलों तक पहुंच गया है। इससे राजस्व और न्यायालयीन कार्य प्रभावित होने लगे हैं।काम करने पर कार्रवाई की चेतावनीअधिवक्ता संघ ने स्पष्ट किया है कि बहिष्कार के दौरान यदि कोई वकील एसडीएम कोर्ट में पेश होता है या कार्य करता है, तो उसके खिलाफ संघ के नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसे संगठनात्मक एकता का विषय बताया गया है। प्रशासन से दखल की मांगसंघ ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की है। वकीलों का कहना है कि जब तक उचित कार्रवाई नहीं होती, बहिष्कार जारी रहेगा।अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस विवाद को कैसे सुलझाता है और न्यायालयीन कार्य को सामान्य बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

एसडीएम के कथित व्यवहार के खिलाफ वकीलों का खुला मोर्चा, सुसनेर में बहिष्कार और हड़ताल

Lawyers open front against alleged behaviour of SDM, boycott and strike in Susner  संवाददाता चंदा कुशवाह सुसनेर। सुसनेर अधिवक्ता संघ ने एसडीएम सर्वेश यादव के खिलाफ सर्वसम्मति से बहिष्कार प्रस्ताव पारित करते हुए उनकी अदालत में लंबित किसी भी प्रकरण में पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद अधिवक्ता हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे न्यायालयीन कार्य प्रभावित हो रहा है। अधिवक्ता संघ का कहना है कि यह कदम सम्मानजनक कार्य वातावरण और न्यायिक गरिमा की रक्षा के उद्देश्य से उठाया गया है। संघ पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि एसडीएम का व्यवहार लंबे समय से वकीलों के प्रति अनुचित रहा है तथा कई अवसरों पर विवाद की स्थिति बनी। अधिवक्ताओं का कहना है कि बार-बार ध्यान आकर्षित करने के बावजूद संतोषजनक समाधान नहीं निकल पाया, जिसके चलते सामूहिक बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा एवं  एसडीएम स्वयं को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताते हैं, जिससे अधिवक्ताओं के बीच प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर असंतोष पैदा हुआ। अधिवक्ता संघ के अनुसार, इस निर्णय को नलखेड़ा, सोयत, आगर मालवा और बड़ौद के अधिवक्ता संगठनों का भी समर्थन प्राप्त है। संघ का कहना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है। अधिवक्ता प्रतिनिधियों ने इस अवसर पर समाज और न्याय व्यवस्था में वकीलों की भूमिका को भी रेखांकित किया। उनका कहना है कि अधिवक्ता केवल मुकदमों की पैरवी करने वाले पेशेवर नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों की रक्षा, विधिक जागरूकता और न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। न्यायालय और जनता के बीच सेतु के रूप में अधिवक्ता व्यवस्था की पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं के सम्मान और स्वतंत्र कार्य वातावरण को बनाए रखना पूरे न्याय तंत्र के हित में बताया गया। इस पूरे घटनाक्रम पर एसडीएम या प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। फिलहाल यह मुद्दा स्थानीय न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

नलखेड़ा में धूमधाम से शिव विवाह की तैयारियां तेज, हल्दी रस्म श्रद्धा के साथ संपन्न

Preparations for Shiva Vivah in full swing in Nalkheda, Haldi ceremony completed with devotion संवाददाता: चंदा कुशवाह नलखेड़ा। नगर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला भगवान शिव का पारंपरिक विवाह महोत्सव इस वर्ष भी भक्ति और उत्साह के वातावरण में प्रारंभ हो गया है। आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर होने वाले शिव विवाह से पूर्व आज गुप्तेश्वर महादेव मंदिर परिसर में हल्दी की रस्म विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न की गई। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। हल्दी कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाए और भगवान शिव को हल्दी अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा नगर की खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर को फूलों और रंगोली से सजाया गया था, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर आगामी शिव विवाह महोत्सव के सफल आयोजन की प्रार्थना की। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि शिव विवाह को लेकर नगर में व्यापक तैयारियां चल रही हैं। विवाह शोभायात्रा, भजन संध्या और धार्मिक अनुष्ठानों सहित कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। स्थानीय युवाओं और सामाजिक संगठनों द्वारा व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग दिया जा रहा है, जिससे आयोजन को भव्य स्वरूप दिया जा सके। नगरवासियों में शिव विवाह को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा को मजबूत करने का भी अवसर है।

देवी लोक की उड़ान, पार्किंग में दलदल का पड़ाव: नलखेड़ा में विकास बनाम कीचड़

Flight to the Divine, Parking Lot to the Swamp: Development vs. Mud in Nalkheda संवाददाता चंदा कुशवाहनलखेड़ा । इन दिनों “देवी लोक” निर्माण की चर्चाएं आसमान छू रही हैं। योजनाओं की फाइलें इतनी ऊंची उड़ान भर रही हैं कि लगता है जल्द ही शहर अंतरिक्ष पर्यटन की सूची में शामिल हो जाएगा। लेकिन ज़मीन पर उतरते ही हकीकत ऐसी फिसलन भरी है कि हर बारिश के बाद पार्किंग स्थल कुश्ती का अखाड़ा बन जाता है, जहां गाड़ियां नहीं, संतुलन गिरता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश होते ही पार्किंग क्षेत्र का रंग “मिट्टी ब्राउन” हो जाता है और जूते-चप्पल “कीचड़ संस्करण 2.0” में अपग्रेड हो जाते हैं। श्रद्धालु और आम नागरिक दोनों ही मजबूरन इस दलदली रास्ते से गुजरते हैं, मानो देवी लोक से पहले “कीचड़ लोक” की परीक्षा देनी अनिवार्य हो।नगर के एक दुकानदार ने व्यंग्य करते हुए कहा,“देवी लोक बने या न बने, पार्किंग में कीचड़ का स्थायी स्मारक पहले तैयार हो गया है।”वहीं एक राहगीर का कहना है कि विकास की बातें सुनकर उम्मीद जगती है, लेकिन हर बारिश के बाद वही पुराना दृश्य देखकर लगता है कि योजनाएं शायद बादलों के साथ उड़ जाती हैंऔर ज़मीन तक पहुंचते-पहुंचते गल जाती हैं।नगरवासियों की मांग है कि देवी लोक जैसी बड़ी परियोजना से पहले बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए। कम से कम इतना तो हो कि बारिश में पार्किंग तालाब न बने और शहरवासियों को कीचड़ में “आस्था के साथ स्लिप टेस्ट” न देना पड़े।अब देखना यह है कि प्रशासन पहले देवी लोक की तस्वीर बनाएगा या पार्किंग से कीचड़ की तस्वीर हटाएगा। फिलहाल नलखेड़ा में विकास की चर्चा और कीचड़ की मौजूदगी साथ-साथ चल रही है, बिल्कुल वैसे ही जैसे पोस्टर में चमक और ज़मीन पर फिसलन।

लोकायुक्त जांच के दायरे में आ सकते हैं पूर्व कलेक्टर IAS राघवेंद्र सिंह व ADM आर.पी. वर्मा, जिला प्रशासन की चुप्पी से बढ़े सवाल

Former Collector IAS Raghavendra Singh and ADM R.P. Verma may be subject to Lokayukta scrutiny; the district administration’s silence raises questions. संवाददाता चंदा कुशवाहनलखेड़ा (आगर मालवा)। विश्वविख्यात मां बगलामुखी मंदिर के कोष में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित करोड़ों रुपये की राशि से जुड़े एक गंभीर प्रकरण ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इस मामले में लोकायुक्त पुलिस द्वारा मांगी गई बिंदुवार रिपोर्ट अब तक जिला प्रशासन की ओर से प्रस्तुत नहीं की गई है, जिससे जांच की प्रक्रिया और प्रशासनिक भूमिका को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।इस पूरे प्रकरण को लेकर पुलिस लोकायुक्त उज्जैन द्वारा पत्र क्रमांक /2209/पुअ/विपुस्थ/2025 के माध्यम से कलेक्टर, जिला आगर मालवा को पत्र भेजा गया था। लोकायुक्त पुलिस ने दिनांक 25 अप्रैल 2025 को संबंधित सभी दस्तावेज एवं जानकारी निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन आज दिनांक तक जिला मुख्यालय से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। क्या है पूरा मामलालोकायुक्त कार्यालय में प्रस्तुत की गई शिकायत के अनुसार, निजी भूमि स्वामियों से संबंधित भूमि अधिग्रहण के प्रस्ताव प्रशासनिक स्तर पर तैयार किए गए। शिकायतकर्ता का कहना है कि मां बगलामुखी मंदिर के समीप लगभग 20 हेक्टेयर शासकीय भूमि उपलब्ध होने के बावजूद भूमि अधिग्रहण की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं थी।इसके बावजूद निजी भूमि को अधिग्रहण योग्य दर्शाने से संबंधित दस्तावेज तैयार किए गए, जिससे मंदिर कोष से धनराशि व्यय होने की संभावना बनी। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होती है, तो कई प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा आवश्यक हो सकती है। पूर्व कलेक्टर IAS राघवेंद्र सिंह और ADM आर.पी. वर्मा की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की संभावनासूत्रों के अनुसार, लोकायुक्त द्वारा जिन पत्रों, आदेशों एवं अनुमोदनों से संबंधित जानकारी मांगी गई है, वे सभी जिला स्तर से जुड़े हुए हैं। ऐसे में आगर मालवा के पूर्व कलेक्टर IAS राघवेंद्र सिंह तथा वर्तमान अपर कलेक्टर (ADM) आर.पी. वर्मा की भूमिका भी लोकायुक्त जांच के दायरे में आने की संभावना जताई जा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी प्रशासनिक निर्णय में अनुमोदन की प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि लोकायुक्त जांच में संबंधित दस्तावेजों की बिंदुवार समीक्षा की जाती है, तो उस अवधि में पदस्थ अधिकारियों की भूमिका का परीक्षण स्वाभाविक रूप से किया जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया जा रहा है कि फिलहाल यह पूरा मामला जांचाधीन है और किसी भी अधिकारी के विरुद्ध कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।लोकायुक्त का पक्षउप पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन संभाग राजेश पाठक ने बताया कि संबंधित शिकायत जिला मुख्यालय को भेज दी गई थी, लेकिन अब तक वहां से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। जांच नियमानुसार जारी है।

नलखेड़ा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 20 हजार की चाइनीज डोर जप्त

Nalkheda police take major action, seize Chinese rope worth Rs 20,000 संवाददाता चंदा कुशवाह नलखेड़ा । नगर में चाइनीज डोर से होने वाली दुर्घटनाओं और बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। संक्रांति पर्व के दौरान जिला दंडाधिकारी महोदय द्वारा जारी आदेशों के पालन में नलखेड़ा पुलिस ने प्रतिबंधित चायनीज माझा के विरुद्ध विशेष कार्रवाई की। थाना प्रभारी नलखेड़ा के निर्देशन में गठित पुलिस टीम ने नगर में जांच अभियान चलाया। इसी क्रम में नलखेड़ा निवासी मुकेश पिता रमेश चंद्र जैन, उम्र 42 वर्ष, निवासी महावीर मार्ग, नलखेड़ा की बगलामुखी मंदिर रोड स्थित बेकरी की दुकान पर दबिश दी गई। जांच के दौरान दुकान की आड़ में छुपाकर रखा गया प्रतिबंधित चायनीज माझा बरामद किया गया। पुलिस ने मौके से चायनीज माझा के 13 छोटे-बड़े चकरे, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 20,000 रुपये है, जप्त किए। जप्ती के पश्चात नलखेड़ा पुलिस द्वारा संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की गई। पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे प्रतिबंधित चायनीज डोर का उपयोग, विक्रय या भंडारण न करें। यह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि आमजन, पशु-पक्षियों और राहगीरों की जान के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की अवैध गतिविधियों के विरुद्ध आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

मां बगलामुखी मंदिर के कोष में जमा करोड़ों की राशि हड़पने की साजिश की शिकायत, जिला मुख्यालय से आज तक नहीं दी गई रिपोर्ट

A complaint has been filed alleging a conspiracy to embezzle crores of rupees deposited in the treasury of the Maa Baglamukhi Temple, but the district headquarters has not yet submitted a report. संवाददाता चंदा कुशवाहनलखेड़ा /आगर मालवा। पूरे विश्व में प्रख्यात मां बगलामुखी मंदिर में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दान स्वरूप चढ़ाई जाने वाली करोड़ों रुपये की राशि पर कुछ लोगों की गिद्ध दृष्टि लगी होने का गंभीर आरोप सामने आया है। इस संबंध में पूर्व में एक विस्तृत शिकायत की गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज दिनांक तक जिला मुख्यालय स्तर से कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पूरे मामले को लेकर पुलिस लोकायुक्त उज्जैन द्वारा पत्र क्रमांक /2209/पुअ/विपुस्थ/2025 के माध्यम से कलेक्टर, जिला आगर मालवा को पत्र भेजा गया था। लोकायुक्त पुलिस उज्जैन द्वारा दिनांक 25 अप्रैल 2025 को पत्र जारी कर निश्चित समयावधि में बिंदुवार जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे,परंतु आज तक कलेक्टर जिला आगर मालवा द्वारा इस संदर्भ में कोई जानकारी लोकायुक्त पुलिस को उपलब्ध नहीं कराई गई। इस स्थिति को लेकर यह प्रश्न खड़े हो रहे हैं कि कहीं जानकारी जानबूझकर रोकी तो नहीं जा रही और क्या वास्तविक तथ्यों को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायत सही पाए जाने पर अधिकारियों पर गिर सकती है गाज कार्यालय पुलिस अधीक्षक, विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त उज्जैन को की गई शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार निजी भूमि स्वामियों एवं तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आपसी साठगांठ कर फर्जी भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव तैयार किया गया। इस प्रस्ताव के तहत मंदिर से लगी निजी भूमि को अधिग्रहित दर्शाकर भूमि स्वामियों को करोड़ों रुपये की मुआवजा राशि दिए जाने की योजना बनाई गई, जिसमें तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों की संलिप्तता बताई गई है। शिकायतकर्ता द्वारा लोकायुक्त कार्यालय में साक्ष्यों सहित शिकायत प्रस्तुत की गई, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर के समीप लगभग 20 हेक्टेयर शासकीय भूमि उपलब्ध होने के बावजूद किसी भी प्रकार के भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं थी। इसके बावजूद मंदिर के कोष में जमा करोड़ों रुपये की धनराशि को निकालने के उद्देश्य से षड्यंत्रपूर्वक दस्तावेज तैयार किए गए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाती है, तो परत-दर-परत चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं। लोकायुक्त द्वारा जिन बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई लोकायुक्त पुलिस उज्जैन द्वारा निम्नलिखित पत्रों एवं आदेशों से संबंधित जानकारी एवं प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे— पत्र क्रमांक /अक/स्टेनो/2023/455 दिनांक 06.12.2023, अपर कलेक्टर द्वारा तहसीलदार से जानकारी प्राप्त करने हेतु पत्र क्रमांक री/12023/1292 दिनांक 20.12.2023, तत्कालीन तहसीलदार द्वारा पालन में भेजा गया पत्र क्रमांक री/2024/04 सुसनेर, दिनांक 01.01.2024, एसडीओ सुसनेर द्वारा अपर कलेक्टर को पत्र क्रमांक /492/अक/स्टेनो/2024 दिनांक 09.09.2024, कलेक्टर के अनुमोदन पश्चात निजी भूमि से प्रतिबंध हटाने संबंधी आदेश पत्र क्रमांक /671/अक/स्टेनो/2024 दिनांक 28.11.2024, संभावित अधिग्रहण बताकर निजी भूमि पर प्रतिबंध पत्र क्रमांक आ/का/देव/2024/641 दिनांक 09.10.2024, तहसीलदार नलखेड़ा द्वारा पत्र क्रमांक रि/2024/1929 दिनांक 10.10.2024 पत्र क्रमांक भू-अर्जन/2024/646 दिनांक 25.11.2024, अपर कलेक्टर द्वारा आयुक्त उज्जैन को पत्र क्रमांक 6496/देव/भू-अर्जन/2024 दिनांक 17.12.2024, आयुक्त उज्जैन पत्र क्रमांक 04/भू-अर्जन/2024 दिनांक 02.01.2025, धर्मस्व विभाग को पत्र क्रमांक एफ/आरटीई/2049/2025 दिनांक 13.09.2025, धर्मस्व विभाग भोपाल द्वारा की गई जांच इसके अतिरिक्त यह भी निर्देश दिए गए थे कि यदि इस शिकायत से संबंधित कोई अन्य दस्तावेज या पूर्व जांच उपलब्ध हो, तो उसकी प्रमाणित प्रति भी दिनांक 25.04.2025 को कार्यालयीन समय में विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त कार्यालय, बृहस्पति भवन, कोठी पैलेस के सामने, उज्जैन संभाग में उपलब्ध कराई जाए। लोकायुक्त का बयान इस संबंध में उप पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन संभाग राजेश पाठक ने बताया कि उक्त शिकायत जिला मुख्यालय को भेज दी गई थी, लेकिन वहां से अब तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कब तक रिपोर्ट प्रस्तुत करता है और लोकायुक्त जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है। यह मामला न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता, बल्कि मां बगलामुखी मंदिर जैसे पवित्र स्थल के कोष की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

नलखेड़ा में प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल: विवादों में घिरे एसडीएम सर्वेश यादव, मिलिंद ढोके का कार्यकाल बना मिसाल

Questions on administrative working style in Nalkheda: SDM Sarvesh Yadav surrounded by controversies, tenure of Milind Dhoke became an example संवाददाता चंदा कुशवाह  नलखेड़ा । नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद एसडीएम सर्वेश यादव की कार्यशैली को लेकर तीखी नाराजगी सामने आ रही है। मंदिर के पंडितों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्तमान एसडीएम ने धार्मिक मामलों में अनावश्यक दखल दिया, बिना संवाद के फैसले थोपे और मर्यादित भाषा व व्यवहार का पालन नहीं किया। लोगों का कहना है कि ऐसे रवैये के कारण ही मंदिर में हवन-अनुष्ठान तक रोकने जैसी स्थिति बनी और माहौल तनावपूर्ण हो गया। पंडितों की चेतावनी और बढ़ते आक्रोश के बाद प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और अंततः एसडीएम को मंदिर कार्यों से हटाने का निर्णय लिया गया, जिसे कई लोग देर से लिया गया कदम बता रहे हैं। इसी बीच नलखेड़ा में पूर्व एसडीएम मिलिंद ढोके के कार्यकाल की खुलकर सराहना होने लगी है। स्थानीय नागरिकों और मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि ढोके के समय प्रशासनिक कामकाज संतुलित, संवेदनशील और संवाद आधारित रहा। उनके कार्यकाल में मंदिर में चांदी से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य कराए गए, व्यवस्थाएं बेहतर हुईं और किसी भी प्रकार का विवाद सामने नहीं आया। पंडित समाज और श्रद्धालु उस दौर को शांति और सहयोग का उदाहरण बताते हैं। लोगों का मानना है कि मिलिंद ढोके की कार्यप्रणाली अलग थी, जहां आदेश से पहले संवाद और शक्ति से पहले समझदारी को प्राथमिकता दी जाती थी। इसी तुलना के बीच अब क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि नलखेड़ा जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल के लिए विवाद पैदा करने वाली नहीं, बल्कि भरोसा बनाने वाली प्रशासनिक शैली की जरूरत है, जैसी पूर्व में देखने को मिली थी।

मां बगलामुखी मंदिर विवाद: एसडीएम की तानाशाही से भड़के पंडित, हवन बंद कर प्रशासन को झुकाया

Maa Baglamukhi Temple Dispute: Pandits enraged by SDM’s dictatorship, stopped havan and forced the administration to bow down संवाददाता चंदा कुशवाह  नलखेड़ा । नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में उत्पन्न विवाद ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदिर के पंडितों का आरोप है कि सुसनेर के एसडीएम ने लगातार मंदिर के धार्मिक कार्यों में अनावश्यक दखल दिया, बिना किसी समन्वय के आदेश थोपे और पूजा-पद्धति को बाधित किया। पंडितों का कहना है कि एसडीएम का व्यवहार तानाशाहीपूर्ण रहा और उन्होंने बातचीत के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इतना ही नहीं, आरोप है कि एसडीएम स्वयं को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताकर पंडितों और मंदिर प्रबंधन पर दबाव बनाते रहे, जिससे भय और असंतोष का माहौल बना। इस रवैये से आक्रोशित होकर पंडितों ने हवन-अनुष्ठान बंद कर दिया और खुली चेतावनी दी कि यदि एसडीएम को तत्काल नहीं हटाया गया तो उन्हें जूतों की माला पहनाकर मंदिर परिसर से बाहर छोड़ा जाएगा। स्थिति के बिगड़ते ही प्रशासन पर दबाव बढ़ा, जिसके बाद एडीएम ने सख्ती दिखाते हुए एसडीएम को तत्काल प्रभाव से मंदिर से जुड़े सभी कार्यों से मुक्त कर दिया। इस कार्रवाई को पंडितों ने प्रशासन की मजबूरी में उठाया गया कदम बताया और कहा कि यदि समय रहते एसडीएम को नहीं रोका जाता तो मंदिर की गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता को गहरा नुकसान पहुंचता।

घरौला रोड पर नलखेड़ा पुलिस का जागरूकता अभियान, नागरिकों ने हेलमेट पहनने का लिया संकल्प।

Awareness campaign of Nalkheda Police on Gharaula Road, citizens took a pledge to wear helmets. चंदा कुशवाह (सहारा समाचार) नलखेड़ा। आज घरौला रोड पर नलखेड़ा पुलिस द्वारा यातायात सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। पुलिस टीम ने लोगों को सड़क सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी देते हुए हेलमेट पहनने की आवश्यकता और महत्व पर विशेष रूप से जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान पुलिस द्वारा हादसों से संबंधित जागरूकता वीडियो भी प्रदर्शित किए गए, जिनमें यह दिखाया गया कि हेलमेट न पहनने की छोटी सी गलती किस तरह बड़े हादसे और नुकसान का कारण बन सकती है। वीडियो देखने के बाद उपस्थित नागरिकों ने विषय को गंभीरता से समझा। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से बताया कि हेलमेट केवल कानूनी नियम नहीं, बल्कि जीवन सुरक्षा का महत्वपूर्ण कवच है। अभियान के अंत में सभी नागरिकों ने नियमित रूप से हेलमेट पहनने का संकल्प लिया और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने का भरोसा भी दिलाया।

नलखेड़ा में प्रशासनिक कार्रवाई के बाद दुकानदार की मौत

Shopkeeper dies after administrative action in Nalkheda चंदा कुशवाह संवाददातानलखेड़ा। बगलामुखी मंदिर के पास स्थित राम मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के अगले ही दिन स्थानीय दुकानदार ललित चौहान की मौत ने पूरे कस्बे में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।परिजनों का सीधा आरोप है कि SDM, तहसीलदार, SDOP और TI की मौजूदगी में बिना किसी पूर्व सूचना उनकी दुकान गिरा दी गई, जिसके सदमे में ललित चौहान गंभीर मानसिक तनाव में चले गए और आज सुबह 4 बजे हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।बिना बताए तोड़ी दुकान… रातभर सो नहीं पाए”—परिवार का आरोप परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार: परिवार का कहना है—“ललित जी रातभर यही बोलते रहे—मेरी रोज़ी-रोटी खत्म हो गई… और सुबह उनकी सांस ही रुक गई।”कस्बे में प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल—‘क्या यह मौत टाली जा सकती थी?’ स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि: प्रशासन ने राम मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में अत्यधिक तेजी और सख्ती दिखाई। मौके पर SDM सर्वेश यादव, तहसीलदार प्रियांक श्रीवास्तव, SDOP, TI, व राजस्व अमला मौजूद था,पर दुकानदारों को सामान निकालने या तैयारी करने का मौका नहीं दिया गया। लोग सवाल उठा रहे हैं कि:“धार्मिक भूमि खाली कराना सही है, लेकिन बिना नोटिस लोगों की रोज़ी-रोटी तोड़ देना क्या उचित है?”कस्बे में यह चर्चा तेज है कि प्रशासन की जल्दबाजी और संवेदनहीनता ने यह त्रासदी पैदा की।कुछ जगह विरोध, कई दुकानें गिरीं—ललित पर सबसे ज्यादा असर प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार: कई लोगों ने विरोध किया, लेकिन प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी।कई दुकानों पर JCB चली। परिजनों का दावा है कि दुकान टूटते ही ललित चौहान मानसिक रूप से टूट गए,क्योंकि उनकी पूरी आजीविका उसी दुकान पर निर्भर थी।परिजनों ने SDM–तहसीलदार–SDOP–TI पर गंभीर आरोप लगाए, जांच की मांग मृतक के परिवार ने कहा: “अगर प्रशासन थोड़ी संवेदनशीलता दिखाता… नोटिस देता… तैयारी का समय देता… तो यह मौत नहीं होती।” परिवार ने संबंधित अधिकारियों पर मानवीय लापरवाही का आरोप लगाते हुएउच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है। कस्बे में व्यापारियों के बीच भी यह मांग उठ रही है किअतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया कानूनन सही लेकिन मानवता के साथ होनी चाहिए।

नलखेड़ा: हाईकोर्ट के आदेश पर राम मंदिर की भूमि से हटाया गया अतिक्रमण

Nalkheda: Encroachment removed from Ram Temple land on High Court orders नलखेड़ा। बगलामुखी मंदिर के पास स्थित राम मंदिर की भूमि पर वर्षों पुराने विवाद का अध्याय आखिरकार शनिवार को बंद हो गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने विवादित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के दौरान राजस्व और पुलिस अमले की भारी संख्या में मौजूदगी रही। मौके पर पहुंचे अधिकारी, विरोध के बीच शुरू हुई कार्रवाई सुबह होते ही SDM सर्वेश यादव, तहसीलदार प्रियांक श्रीवास्तव मौके पर पहुँचे। उनके साथ पटवारी पंकज वर्मा,पटवारी चिराग शर्मा,पटवारी राजेश घावरी, पटवारी रामपाल सिंह तोमर, अन्य पटवारी, राजस्व अमला तथा पुलिस टीम तैनात की गई। कार्रवाई शुरू होते ही कुछ लोगों ने विरोध जताया, जिस कारण थोड़ी देर के लिए विवाद की स्थिति बनी। पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद माहौल नियंत्रित किया गया। कई लोगों ने समझाइश के बाद खुद ही हटाया अतिक्रमण हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देने पर कई दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें, शेड और सामान हटाना शुरू कर दिया। प्रशासन ने इसे सकारात्मक माना और कहा कि स्वेच्छा से हटाया गया अतिक्रमण प्रक्रिया को काफी आसान बना देता है। कुछ जगह नहीं माने लोग, SDM के निर्देश पर चलाई गई JCB जहाँ लोगों ने अतिक्रमण हटाने में सहयोग नहीं किया, वहाँ SDM सर्वेश यादव के निर्देश पर JCB लगाई गई। सीमांकन के आधार पर अतिक्रमण हटवाया गया और विवादित भूमि को पूरी तरह साफ करवाया गया। पुलिस बल पूरे समय मौजूद रहा जिससे किसी तरह की अव्यवस्था नहीं हुई। भूस्वामी क्षेत्र को किया गया अतिक्रमण मुक्त, प्रशासन की सख्त चेतावनी कार्रवाई पूरी होने के बाद प्रशासन की ओर से स्पष्ट कहा गया कि धार्मिक एवं सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। हाईकोर्ट के आदेश का पालन सर्वोपरि है और भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

संगठन को नई दिशा: रोहित सकलेचा ने संभाली नलखेड़ा मंडल अध्यक्ष की कमान

New direction to the organization: Rohit Saklecha took over as Nalkheda Mandal President चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। भारतीय जनता पार्टी संगठन में नलखेड़ा मंडल को नई ऊर्जा और दिशा देते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल ने सुसनेर विधानसभा के नलखेड़ा मंडल के नए मंडल अध्यक्ष के रूप में रोहित सकलेचा की नियुक्ति की है। यह निर्णय सामने आते ही पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने ढोल-ढमाकों और फूल मालाओं के साथ उनका जोरदार स्वागत किया। रोहित सकलेचा अपने सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और संगठन के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं। लंबे समय से वे पार्टी की विचारधारा को घर–घर तक पहुंचाने और युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ने में सक्रिय रहे हैं। उनकी नियुक्ति को संगठन में नई ऊर्जा के रूप में देखा जा रहा है। मंडल अध्यक्ष बनने के बाद रोहित सकलेचा ने सबसे पहले मां बगलामुखी मंदिर में जाकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। वहां उन्होंने नलखेड़ा के विकास और पार्टी की मजबूती के लिए संकल्प लिया। इसके पश्चात उन्होंने अपने गुरुदेव महामंडलेश्वर संदीपेंद्र जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। रोहित सकलेचा ने कहा— “यह पद मेरे लिए सम्मान के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। मैं संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और नलखेड़ा के विकास कार्यों को गति देने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करूंगा।” कार्यकर्ताओं ने इसे संगठन की नई दिशा बताते हुए कहा कि सकलेचा के नेतृत्व में पार्टी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। स्थानीय नागरिकों ने भी उनके चयन को सराहनीय बताते हुए कहा कि वे हर वर्ग के लोगों से जुड़े हुए हैं और हमेशा सेवा भाव के साथ उपलब्ध रहते हैं। नगर व क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों, युवा कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और समाजसेवियों ने भी रोहित सकलेचा को शुभकामनाएं प्रेषित की।

नलखेड़ा आए मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल: जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान ने किया सम्मान, विकास पर हुई अहम बैठक

Minister Prahlad Singh Patel came to Nalkheda: District President representative Mukesh Chauhan honored him, an important meeting was held on development संवाददाता चंदा कुशवाह नलखेड़ा /आगर मालवा। मंगलवार को नलखेड़ा में पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का आगमन हुआ। जनपद पंचायत नलखेड़ा के जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान ने मंत्री का भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौरे और जनपद उपाध्यक्ष ईश्वर साई ने भी मंत्री का सम्मान किया और उन्हें नलखेड़ा आने के लिए आमंत्रित करने की पहल की। तीनों जनप्रतिनिधियों की संयुक्त उपस्थिति ने कार्यक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया। स्वागत के बाद मंत्री पटेल और जनप्रतिनिधियों की बैठक में नलखेड़ा जनपद के विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें ग्रामीण सड़कों के पक्के निर्माण, नल-जल योजनाओं को गति, पंचायत भवनों का नवीनीकरण, मनरेगा कार्य, आवास योजना के लंबित प्रकरणों का समाधान, श्रमिक पंजीयन, नाली निर्माण, सफाई व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष रूप से बात हुई। जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान ने गांवों की वास्तविक समस्याएँ सामने रखते हुए मंत्री को महत्वपूर्ण प्रस्ताव सौंपे। बैठक में पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौरे ने नगर क्षेत्र की समस्याओं का विस्तृत विवरण रखा। उन्होंने विशेष रूप से माँ बगलामुखी मंदिर क्षेत्र के विकास पर जोर दिया। राठौरे ने कहा कि मंदिर परिसर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं, इसलिए सड़क सुधार, पार्किंग, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और पेयजल जैसी सुविधाओं को मजबूत किया जाना आवश्यक है। मंत्री पटेल ने इस पर गंभीरता से प्रतिक्रिया देते हुए मंदिर क्षेत्र के लिए अलग से कार्ययोजना तैयार करने का आश्वासन दिया। वहीं जनपद उपाध्यक्ष ईश्वर साई ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की धीमी प्रगति पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि कई पंचायतों में आवास, नालियों, मनरेगा कार्यों और पेयजल से जुड़े कार्य समय पर पूरे नहीं हो रहे हैं। उन्होंने इन कार्यों को तेजी से पूर्ण कराने की मांग रखते हुए मंत्री के सामने जनपद की प्राथमिक आवश्यकताओं को स्पष्ट किया। मंत्री ने इस पर विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि नलखेड़ा क्षेत्र के लंबित कार्यों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नलखेड़ा जैसे उभरते जनपद में विकास कार्यों को गति देना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “गांवों में सड़क, पानी, स्वच्छता और रोजगार से जुड़े कार्यों को तेजी से पूरा कराया जाएगा। विभागीय योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुँचना चाहिए।” कार्यक्रम के दौरान कई सरपंचों और ग्रामीणों ने भी अपने-अपने गाँवों की समस्याओं से जुड़े ज्ञापन मंत्री को सौंपे। मंत्री ने सभी ज्ञापनों का संज्ञान लिया और जल्द समाधान का आश्वासन दिया। समापन पर जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान, पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौरे और जनपद उपाध्यक्ष ईश्वर साई ने मंत्री का आभार व्यक्त किया। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि मंत्री का यह दौरा नलखेड़ा में विकास कार्यों की रफ्तार को और तेज करेगा।

नलखेड़ा को बड़ी सौगात: हेलीकॉप्टर सेवा के सेक्टर-1 में शामिल हुआ नलखेड़ा, पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर की मेहनत से खुला रास्ता; किराया और शुरू होने की तारीख जल्द घोषित होगी

Nalkheda gets a big gift: Nalkheda joins Sector-1 of helicopter service चंदा कुशवाह संवाददाता नलखेड़ा । मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आरंभ की गई नई हवाई पर्यटन सेवा में अब नलखेड़ा का नाम भी शामिल कर लिया गया है। इस निर्णय के बाद नलखेड़ा को आधिकारिक रूप से प्रथम सेक्टर की सूची में स्थान मिल गया है। यह कदम नलखेड़ा के विकास और धार्मिक पर्यटन के विस्तार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पूरे प्रयास का सबसे बड़ा श्रेय पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर को दिया जा रहा है, जिन्होंने लगातार प्रयास करते हुए नलखेड़ा को इस हवाई मार्ग में जोड़ने की माँग को मजबूती से उठाया। विभागीय अधिकारियों से मुलाकातें, लिखित प्रस्ताव और लगातार आग्रह—इन सभी प्रयासों के कारण अंततः नलखेड़ा को इस सेवा से जोड़ने की मंजूरी मिल पाई। नलखेड़ा माँ बगलामुखी धाम के कारण देशभर के श्रद्धालुओं का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं, ऐसे में हवाई सेवा शुरू होने से श्रद्धालुओं को भारी सुविधा मिलेगी और यात्रा का समय भी कम होगा। पर्यटन विभाग का मानना है कि इस सेवा से क्षेत्र में व्यापार, आवागमन, होटल व्यवसाय और स्थानीय रोजगार को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे नलखेड़ा का नाम धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और अधिक प्रमुखता से उभरेगा। विभाग ने अभी उड़ानों के मार्ग, समय और किराये की अंतिम घोषणा नहीं की है, परंतु संकेत मिले हैं कि अन्य धार्मिक स्थलों की तरह नलखेड़ा का किराया भी पाँच से सात हजार रुपये के बीच रह सकता है। अधिकारियों के अनुसार, नलखेड़ा के हेलीपैड का निरीक्षण अगले सप्ताह किया जाएगा, जिसके बाद परीक्षण उड़ान कराई जाएगी। परीक्षण पूरा होते ही सेवा के शुरू होने की तारीख सार्वजनिक कर दी जाएगी। अनुमान है कि यह सेवा अगले तीन से चार सप्ताह में प्रारंभ हो सकती है, यदि सभी तकनीकी औपचारिकताएँ समय पर पूरी हो जाएँ। सेवा को लेकर नलखेड़ा में भारी उत्साह देखा जा रहा है। मंदिर क्षेत्र, दुकानदारों और स्थानीय जनता का कहना है कि यह कदम नलखेड़ा को नई पहचान देगा और श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर ने इसे नलखेड़ा के विकास की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय बताया और कहा कि यह सफलता जनता के सहयोग और निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

कलेक्टर की फटकार भी बेअसर! महीनों पुराना ड्यूटी चार्ट आज भी टंगा — कौन संभाल रहा अस्पताल?

Even the Collector’s reprimand is ineffective! Months-old duty charts still hang—who’s managing the hospital? चंदा कुशवाहनलखेड़ा ! सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नलखेड़ा की अव्यवस्थाएँ अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही हैं। आलम यह है कि कुछ माह पूर्व कलेक्टर के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान डॉक्टरों का जो ड्यूटी चार्ट लगाया गया था, वह आज भी 24/09/25 की उसी तारीख के साथ जस का तस टंगा हुआ है। न तारीख बदली गई, न नई सूची जारी हुई। यह देखकर साफ होता है कि अस्पताल प्रबंधन के लिए मरीजों की सुविधा किसी मजाक से कम नहीं है। ड्यूटी चार्ट न होने के कारण रोजाना सैकड़ों मरीज अस्पताल में भटकते रहते हैं। कौन-सा डॉक्टर कब उपलब्ध होगा—इसकी जानकारी तक उन्हें नहीं मिलती। इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है कि सरकारी अस्पताल में लोगों को घंटों इंतज़ार करना पड़ता है, जबकि कई डॉक्टर अपने सरकारी समय में खुलेआम निजी क्लीनिकों पर बैठकर कमाई में लगे रहते हैं। अस्पताल में मरीज तड़पते रहें, यह उनकी प्राथमिकता में ही नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अव्यवस्था कोई नई नहीं है। अस्पताल में अनुशासन नाम की चीज़ बची ही नहीं है। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. विजय यादव तो मानो पूरे मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ चुके हैं। उनकी उदासीनता और कुप्रबंधन ने अस्पताल की प्रणाली को लगभग ठप कर दिया है। डॉक्टरों और कर्मचारियों पर किसी प्रकार की अनुशासनात्मक पकड़ नहीं रह गई है — जो चाहे जब चाहे मनमानी कर रहा है। नागरिकों का आरोप है कि डॉ. यादव की लापरवाही अब सीधे मरीजों की जान पर बन आई है। करोड़ों रुपये खर्च कर सरकार अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था करती है, लेकिन यहां डॉक्टर सरकारी अस्पताल में उपलब्ध ना होकर मरीजों को उनके निजी क्लीनिकों पर बुला रहे हैं। इस तरह की हरकतें न सिर्फ सेवा शर्तों का खुला उल्लंघन हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर सीधी लूट है। मरीजों और उनके परिजनों ने मीडिया के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि नलखेड़ा अस्पताल की अव्यवस्थाओं और बीएमओ डॉ. विजय यादव की लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही तत्काल अपडेटेड ड्यूटी चार्ट जारी किया जाए, ताकि मरीजों को इस जानलेवा अव्यवस्था से राहत मिल सके।

नलखेड़ा में बाल दिवस पर पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर ने बच्चों संग बिताया समय, दिए संस्कार और प्रेरणा से भरे संदेश

Former city president Prem Rathore spent time with children on Children’s Day in Nalkheda, imparting values and inspirational messages. चंदा कुशवाह नलखेड़ा । बाल दिवस के अवसर पर आज नलखेड़ा में एक स्नेहपूर्ण और प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर ने स्थानीय बच्चों को आमंत्रित कर उनके साथ समय बिताया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को अच्छे संस्कार, आत्मविश्वास और जीवन में सही दिशा देने का था। प्रेम राठौर ने बच्चों से सरल और प्रेरक शब्दों में कहा कि— “जीवन में इंसान की असली पहचान उसके व्यवहार और कर्मों से होती है। हमेशा सच बोलें, अच्छे कर्म करें और कभी भी गलत रास्ते पर न चलें। वही बच्चा भविष्य में सफल होता है जो ईमानदारी और मेहनत को अपना साथी बनाता है।” उन्होंने बच्चों को शिक्षा का महत्व समझाया और बताया कि पढ़ाई सिर्फ नौकरी के लिए नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान बनने की समझ देती है। कार्यक्रम के दौरान प्रेम राठौर ने बच्चों के साथ हँसी-खुशी समय बिताया, उनके साथ खेल-कूद भी किए और बाल दिवस की शुभकामनाएँ दीं। माहौल पूर्णतः पारिवारिक और सौहार्दपूर्ण रहा। बच्चों को दिए उपहार: इस अवसर पर प्रेम राठौर ने बच्चों को टॉफ़ी, टिफिन बॉक्स, कॉपी-पेंसिल, स्टोरी बुक्स और चॉकलेट्स भेंट किए। उपहार पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। स्थानीय लोगों ने पूर्व नगर अध्यक्ष की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि “बच्चों के बीच जाकर समय बिताना ही असली बाल दिवस है। इससे बच्चों में सामाजिक मूल्यों और संस्कारों को बढ़ावा मिलता है।” नलखेड़ा में बाल दिवस का यह आयोजन बच्चों के लिए यादगार रहा और समाज में सकारात्मक संदेश छोड़ गया।

शासकीय अधिवक्ता किशोर सिंह राजपूत ने किया पत्रकार राजेश शर्मा का सम्मान, विभागीय तालमेल का उत्कृष्ट उदाहरण

Government Advocate Kishore Singh Rajput honored journalist Rajesh Sharma, an excellent example of departmental coordination. नलखेड़ा । प्रशासन और मीडिया के बीच बेहतर तालमेल और आपसी सहयोग की मिसाल शुक्रवार को तब देखने को मिली, जब शासकीय अधिवक्ता (Govt. Lawyer) किशोर सिंह राजपूत ने अपनी ओर से पत्रकार राजेश शर्मा का सम्मान किया। यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत सौहार्द का प्रतीक है, बल्कि विभागीय समन्वय और जनहित के प्रति साझा जिम्मेदारी को भी प्रदर्शित करता है। सम्मान समारोह के दौरान अधिवक्ता किशोर सिंह राजपूत ने कहा कि “पत्रकार समाज की सशक्त आवाज़ होते हैं। जनहित, समस्याओं और स्थानीय मुद्दों को ईमानदारी से सामने लाने वाला पत्रकार प्रशासन की बड़ी ताकत होता है। राजेश शर्मा जैसे जिम्मेदार पत्रकारों का सम्मान करना वास्तव में गर्व की बात है।” पत्रकार राजेश शर्मा ने भी सम्मान के लिए धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि “नलखेड़ा में प्रशासन, न्यायिक विभाग और मीडिया हमेशा एक-दूसरे के सहयोगी रहे हैं। शासकीय अधिवक्ता किशोर सिंह राजपूत जैसे अनुभवी और विनम्र अधिकारी हमें सत्य और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए प्रेरित करते हैं।” स्थानीय स्तर पर शासकीय अधिवक्ता और पत्रकार के बीच इस सौहार्दपूर्ण रिश्ते को लोगों ने “सकारात्मक संवाद और मजबूत विभागीय तालमेल” की अनूठी मिसाल बताया। नलखेड़ा क्षेत्र में यह पहल मीडिया और प्रशासन के बीच भरोसे और सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

नलखेड़ा के जंगलों में वन विभाग की लापरवाही: रात में हो रही अवैध पेड़ कटाई और लकड़ी तस्करी बेखौफ जारी

Forest department negligence in Nalkheda forests: Illegal tree felling and timber smuggling continue unabated at night चंदा कुशवाह  नलखेड़ा । क्षेत्र के जंगलों में इन दिनों अवैध पेड़ कटाई और लकड़ी तस्करी के मामले गंभीर रूप ले चुके हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, वन विभाग के नाक के नीचे लगातार पेड़ों पर कुल्हाड़ी चल रही है, लेकिन विभाग की ओर से न तो किसी तरह की निगरानी बढ़ाई गई है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई है। ग्रामीण बताते हैं कि रात के समय जंगलों में ट्रैक्टर, पिकअप और ट्रॉलियां घूमती दिखाई देती हैं, जिनमें सागौन, बबूल और अन्य मूल्यवान लकड़ी को भरकर बाहर ले जाया जाता है। कई लोगों ने रात में चेनसॉ से पेड़ काटने की आवाजें भी सुनी हैं, जिससे साफ होता है कि यह पूरा काम संगठित तरीके से चल रहा है। एक समय घने पेड़ों से आच्छादित यह क्षेत्र अब धीरे-धीरे उजाड़ होता जा रहा है। कई जगहों पर कटे हुए ठूंठ साफ दिखाई देते हैं, जिससे पता चलता है कि यहां बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सब बिना किसी आंतरिक सहयोग के संभव नहीं है। उनका आरोप है कि कुछ वनकर्मी तस्करों से मिलकर काम कर रहे हैं, जिसकी वजह से तस्करी रात में बेरोक-टोक जारी रहती है और दिन में इस पूरे मुद्दे पर सन्नाटा पसरा रहता है। लोगों में यह भी चर्चा है कि केवल लकड़ी ही नहीं, बल्कि अन्य जंगली उत्पादों और संसाधनों की भी तस्करी की आशंका है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। ग्रामीणों के मुताबिक, उन्होंने कई बार विभाग और प्रशासन को इस बारे में सूचित किया, परंतु अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर यह पूरा अवैध नेटवर्क किसकी शह पर चल रहा है। क्या वन विभाग को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है या यह जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है। यदि नहीं, तो इतने समय से हो रही पेड़ कटाई और तस्करी पर कार्रवाई अभी तक क्यों नहीं हुई। ग्रामीणों ने मांग की है कि जंगलों में रात के गश्त को बढ़ाया जाए, संदिग्ध वाहनों की जांच की जाए, वन विभाग के कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्यवाही की जाए और जंगलों में सुरक्षा के उपायों को मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि यदि इस अवैध कटाई पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले वर्षों में नलखेड़ा का पर्यावरण गंभीर संकट का सामना करेगा और क्षेत्र की हरियाली हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।

नलखेड़ा – निजी स्कूल बस संचालकों की मनमानी से बढ़ रहा है खतरा, प्रशासन मौन!

Nalkheda – The danger is increasing due to the arbitrariness of private school bus operators, the administration is silent! चंदा कुशवाह  नलखेड़ा। नगर में निजी स्कूल बस संचालकों द्वारा परिवहन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। न तो वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र जांचा जा रहा है, न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। इन बस संचालकों ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी से बसें चलाना आम बात बना ली है। हर सुबह और दोपहर के समय इन बसों के कारण नगर की सड़कों पर भारी जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि बसें अब गलियों और मोहल्लों तक ले जाई जा रही हैं, जिससे आम नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बसें ऐसी हैं जिनका फिटनेस, परमिट और बीमा तक संदिग्ध है, पर फिर भी वे रोजाना बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। फिर सवाल उठता है — आखिर प्रशासन कहाँ है? क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार में हैं? जब तक कोई अप्रिय घटना नहीं होगी, क्या तब तक यह अनदेखी जारी रहेगी? जनता ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल इस पर सख्त कार्रवाई करे, बसों का फिटनेस व परमिट जांच अभियान चलाए, और नलखेड़ा में नियम विरुद्ध बस संचालन पर रोक लगाए — ताकि बच्चों की सुरक्षा और आम जनता की सुविधा सुनिश्चित की जा सके।

नलखेड़ा में विकास के नाम पर विनाश! देवीलोक के पास ब्लास्टिंग से हिली मंदिर की नींव – प्रशासन खामोश क्यों?

Destruction in the name of development in Nalkheda! Blasting near Devilok shakes the foundation of a temple – why is the administration silent? चंदा कुशवाह संवाददाता नलखेड़ा। एक ओर अधिकारी कागज़ों पर “विकास” के दावे कर रहे हैं, वहीं जमीन पर विनाश की तस्वीर साफ दिखाई दे रही है। नलखेड़ा में विश्वप्रसिद्ध माँ बगलामुखी देवी मंदिर के पीछे बनाए जा रहे पुल निर्माण में खुलेआम ब्लास्टिंग की जा रही है — और यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार द्वारा लगातार पत्थर तोड़ने के लिए विस्फोटक (ब्लास्टिंग) का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे इतना कंपन होता है कि मंदिर की दीवारें तक हिल जाती हैं। यह वही मंदिर है, जहाँ लाखों श्रद्धालु हर साल अपनी आस्था लेकर पहुँचते हैं। पर अब सवाल ये है — टेंडर किसने जारी किया? ब्लास्टिंग की अनुमति किस आधार पर दी गई? और सबसे बड़ा सवाल — इतिहासिक मंदिर की सुरक्षा का सर्वे कराया भी गया या नहीं? इन सवालों का जवाब न तो निर्माण एजेंसी दे रही है, न ही प्रशासन के पास कोई स्पष्ट बयान है। स्थानीय लोग गुस्से में हैं। उनका कहना है कि अगर यही “विकास” है, तो फिर यह मंदिर की नींव हिला देने वाला विकास है, न कि नलखेड़ा का गौरव बढ़ाने वाला। लोगों ने आरोप लगाया है कि “यह पूरा खेल भ्रष्टाचार की ब्लास्ट के नीचे दबा हुआ है — जहाँ पैसे की चमक ने श्रद्धा की दीवारें तक हिला दी हैं।” अब वक्त आ गया है कि अगर यही विकास की परिभाषा है, तो जनता पूछेगी — “देवीलोक में विकास नहीं, विनाश हो रहा है — और प्रशासन तमाशा देख रहा है।”

नशे की गिरफ्त में नलखेड़ा नगर, बढ़ रहा बच्चों में लत का खतरा

Nalkheda town in the grip of drug addiction, increasing risk of addiction among children चंदा कुशवाहनलखेड़ा । जिले में हाल ही में 253 किलो गांजे की बड़ी खेप जब्त करने के दावे के बावजूद नलखेड़ा क्षेत्र में खुलेआम गांजा विक्रय जारी है। इसके पीछे पुलिस प्रशासन की भारी लापरवाही और संभवतः मिलीभगत की कड़ियों से इंकार करना मुश्किल है। क्या नलखेड़ा की पुलिस इस गंभीर अपराध से बेदखल हो गई है या जान-बूझकर आंखें बंद किए बैठी है? स्थानीय लोगों की शिकायत है कि पुलिस सिर्फ दिखावे की पकड़ में लगी है, जबकि असल गिरोह खुली हवा में कारोबार कर रहा है। यह स्थिति पुलिस की जिम्मेदारी और ईमानदारी पर सवाल खड़े करती है। जहां जिले के बड़े स्तर पर नशा तस्करों को दबोचने की खबरें आ रही हैं, वहीं नलखेड़ा में पुलिस की सक्रियता नाममात्र की प्रतीत होती है।पुलिस को चाहिए कि इस गंभीर स्थिति से आंखें न मूंदे और अपने दायित्वों का निर्वहन करे। सार्वजनिक जगहों पर खुलेआम मादक पदार्थ बिक रहे हों और पुलिस मूकदर्शक बनी रहे, इससे समाज और खासकर युवाओं का भविष्य गंभीर खतरे में पड़ता है। गांजा जैसे नशे की लत मानसिक, शारीरिक और सामाजिक नुकसान पहुंचाती है, खासकर किशोरों और बच्चों के लिए इसका प्रभाव विनाशकारी होता है। सवाल उठता है कि जब इतने बड़े नेटवर्क पर पुलिस कार्रवाई कर रही है, तो स्थानीय स्तर पर खुलेआम नशा बिकने से अवगत होकर भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?यह स्थिति सिर्फ पुलिस की नाकामी नहीं, बल्कि गांजा तस्करों को संरक्षण देने वाली सांठगांठ की भी ओर इशारा करती है। यह दीगर है कि कई बार बड़े नशा सिंडिकेट में परस्पर जुड़े रसूखदारों और पुलिस अधिकारियों का नेटवर्क भी सामने आता रहा है। ऐसे में नलखेड़ा में भी पुलिस प्रशासन की मिलीभगत की अटकलें लगना स्वाभाविक है। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल सख्त कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा यह पूरी व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास घटना शुरू हो जाएगा। एक तरफ तस्करों की गिरफ्तारी की रिपोर्ट आयें, तो दूसरी ओर खुले बाजार में नशा बिके—यह विपत्ति की घड़ी है।समाज और प्रशासन के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि अब और कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। नलखेड़ा की पुलिस को चाहिए कि वह जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभाए, तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करे और युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। यह लड़ाई सिर्फ कानून का अभाव नहीं, ईमानदारी और तत्परता की लड़ाई भी है, जिसमें पुलिस को अब कमजोरी दिखाने का कोई रास्ता नहीं है। ऐसा न होने पर नशे के व्यापार को बढ़ावा देने वाले अधिकारी खुद सवालों के घेरे में आ सकते हैं, और समाज का आक्रोश गहराता जाएगा।

स्कूल छोड़ने के बहाने अतिथि शिक्षक ने नाबालिग के साथ किया दुष्कर्म, पुलिस ने आरोपी को लिया रिमांड पर

Guest teacher rapes minor on pretext of dropping her off at school, police remands accused चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। नलखेड़ा नगर की एक शर्मनाक घटना में एक अतिथि शिक्षक द्वारा नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और शिक्षा संस्थानों की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। शुक्रवार सुबह 9 बजे नलखेड़ा नगर की 15 वर्षीय छात्रा स्कूल जाने के लिए घर से निकली थी। रास्ते में उसे उसके पूर्व शिक्षक कृष्ण प्रजापति उर्फ कन्हैयालाल मिला, जो ग्राम धरोला तहसील नलखेड़ा का निवासी है। उसने छात्रा को स्कूल छोड़ने की बात कहकर अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा लिया। लेकिन, स्कूल ले जाने की बजाय वह छात्रा को अपने गांव, घर ले गया। वहां कमरे में ले जाकर दरवाजा बंद कर दिया और छात्रा के साथ बलात्कार किया। इस घिनौनी हरकत के बाद आरोपी ने छात्रा को धमका कर स्कूल की छुट्टी के समय उसके घर से कुछ दूर छोड़ दिया और किसी को घटना की जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी दी।छात्रा ने अपने परिजनों को सारा वाकया बताया। परिजनों ने उस दिन ही थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी अतिथि शिक्षक कृष्ण प्रजापति को गिरफ्तार किया। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 64, 65(1), 87, 127(2), 351(3), लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 5, 6 और एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत मामला दर्ज हुआ है। पुलिस द्वारा आरोपी को शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ रिमांड पर भेज दिया गया।आरोपी का स्कूल एवं पदप्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी पहले नगर के एक निजी स्कूल में शिक्षक था। वर्तमान में वह आगर तहसील के ग्राम मथुराखेड़ी में अतिथि शिक्षक के पद पर कार्यरत है। अभिभावकों एवं समाज से सहारा समाचार की मार्मिक अपील— अपने बच्चों से हमेशा खुलकर बातें करें, उनकी गतिविधियों पर रोज ध्यान दें। बच्चों को यह विश्वास दिलाएं कि किसी भी असामान्य घटना, डर या धमकी की तुरंत जानकारी अपने परिवारवालों या विश्वसनीय व्यक्तियों को दें। ऐसी जागरूकता बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। समाज की सुरक्षा बच्चों की सुरक्षा से ही संभव है। आइए, मिलकर ऐसे अपराधों के खिलाफ शिक्षा संस्थानों को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएं.यदि आपके बच्चे को कोई परेशानी या डर महसूस हो तो तुरंत कार्रवाई करें। सहारा समाचार आपसे आग्रह करता है— बच्चों को हमेशा सुरक्षित रखिए और समाज में सकारात्मक जागरूकता फैलाइए।

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर जब उठे सवाल — तो बौखलाए बीएमओ ने मीडिया से तोड़ा रिश्ता!

When questions were raised about the negligence of the health department, the distraught BMO broke ties with the media! नलखेड़ा। जनता के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभालने वाले ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. विजय यादव शायद भूल गए हैं कि सरकारी कुर्सी जवाबदेही के लिए होती है, अहंकार के लिए नहीं।स्वास्थ्य विभाग की अव्यवस्थाओं पर जब मीडिया ने आईना दिखाया, तो बीएमओ ने उस आईने को ही तोड़ देने का रास्ता चुन लिया।मीडिया और प्रशासनिक अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप से खुद को अलग कर लेना, क्या इस बात का प्रमाण नहीं कि अधिकारी आलोचना से भाग रहे हैं? नलखेड़ा में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है।अस्पतालों में गंदगी, झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला, पीने के पानी की दुर्दशा और जांच केंद्रों की मनमानी – इन सब पर जब पत्रकारों ने बार-बार लिखा, तो विभाग की नींद टूटने के बजाय बेबसी और दबाव की बदबू आने लगी।जिम्मेदार अधिकारी ने सुधार की दिशा में कदम उठाने के बजाय पत्रकारिता पर ही दूरी बनाकर यह साबित कर दिया कि अब सिस्टम की पारदर्शिता उन्हें खटकने लगी है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि डॉ. यादव पिछले 23 सालों से नलखेड़ा में ही क्यों टिके हुए हैं?क्या स्वास्थ्य विभाग में कोई और अधिकारी नहीं जो इस जिम्मेदारी को संभाल सके?या फिर स्थानीय राजनीतिक संरक्षण और रसूख ने नियमों को ताक पर रख दिया है? इतने लंबे समय से एक ही जगह जमे रहना, खुद में एक बड़ा सवाल है —क्योंकि विभागीय नियम साफ कहते हैं कि हर अधिकारी का तबादला निश्चित अवधि में होना चाहिए ताकि निष्पक्षता बनी रहे।लेकिन जब अधिकारी खुद को पद से बड़ा समझने लगे, तो ऐसी ही नौबत आती है — जहां जनता बीमार है, और जिम्मेदार मौन। वंदे मातरम कार्यक्रम जैसे सरकारी आयोजनों से दूरी बनाना,मीडिया संवाद से पलायन करना,और ग्रुप छोड़ देना —ये सब वही संकेत हैं जो यह बताते हैं कि नलखेड़ा का स्वास्थ्य तंत्र बीमार है और इलाज करने वाला खुद इलाज से भाग रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा किक्या डॉ. विजय यादव इस आलोचना को आत्ममंथन का अवसर बनाएंगे,या फिर आलोचना से चिढ़कर नलखेड़ा को लाचारियों की नई दवा लिख देंगे।

मां बगलामुखी मंदिर में गैर पंडा-पुजारियों का बढ़ता अवैध दखल — प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल, SDM की भूमिका पर चर्चा तेज

The growing illegal interference of non-priests at the Maa Baglamukhi Temple—questions raised about administrative negligence, and the SDM’s role is being debated. चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा ! विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में शासन द्वारा नियुक्त पंडा-पुजारियों के बावजूद गैर अधिकृत व्यक्तियों का मंदिर परिसर और गर्भगृह में लगातार दखल बढ़ता जा रहा है।श्रद्धालुओं का कहना है कि कुछ लोग बिना किसी अधिकार के गर्भगृह व पांडाल में रुककर पूजा-पाठ की परंपराओं में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिससे मंदिर की मर्यादा और अनुशासन पर असर पड़ रहा है। मंदिर में व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी मां बगलामुखी मंदिर प्रबंधन समिति की है, जिसके पदेन अध्यक्ष SDM नलखेड़ा हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब मंदिर का संचालन सीधे SDM के अधीन है, तो इस प्रकार की अव्यवस्था पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? “SDM मंदिर के अध्यक्ष हैं, सभी गतिविधियाँ उनके संज्ञान में रहती हैं” मंदिर से जुड़े एक प्रमुख पुजारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि — “मां बगलामुखी मंदिर का संचालन मंदिर प्रबंधन समिति के माध्यम से होता है, जिसके अध्यक्ष SDM हैं। मंदिर में जो भी गतिविधियाँ होती हैं, वे सामान्यतः प्रशासन के ज्ञान में रहती हैं। हम सिर्फ अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करते हैं, बाकी प्रशासनिक व्यवस्था उन्हीं के अधिकार क्षेत्र में आती है।” इस बयान से यह साफ झलकता है कि मंदिर परिसर की प्रशासनिक जिम्मेदारी पूरी तरह SDM और प्रबंधन समिति पर है। जनचर्चा में प्रशासन की निष्क्रियता स्थानीय श्रद्धालु और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि गैर पंडा-पुजारियों का प्रवेश और गतिविधियाँ प्रशासन की अनदेखी का परिणाम हैं।नवरात्रि से पूर्व हुई मंदिर समिति की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि मां बगलामुखी मंदिर, जो नलखेड़ा की पहचान और श्रद्धा का प्रतीक है, उसकी मर्यादा की रक्षा के लिए प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। श्रद्धालुओं की मांग श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने शासन-प्रशासन से यह प्रमुख मांगें रखी हैं —

ठा. धीरेंद्र सिंह सिसोदिया ‘पिलवास’ को मिली बड़ी जिम्मेदारी, करणी सेना परिवार आगर के जिला महामंत्री पद से नवाज़े गए

Awarded the post of District General Secretary of Karni Sena Parivar Agar चंदा कुशवाह ( संवाददाता ) नलखेड़ा। दृढ़ नेतृत्व और समाजसेवा के प्रति अटूट समर्पण के लिए पहचान बनाने वाले ठा. धीरेंद्र सिंह सिसोदिया ‘पिलवास’ को करणी सेना परिवार, आगर का जिला महामंत्री नियुक्त किया गया है। संगठन ने उनके व्यक्तित्व, कार्यकुशलता और संगठनात्मक दक्षता को देखते हुए यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है। नियुक्ति की घोषणा के बाद करणी सेना के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों में हर्ष की लहर दौड़ गई। सभी ने सिसोदिया को बधाई देते हुए क्षेत्र और समाज की प्रगति हेतु उनके उत्कृष्ट नेतृत्व की उम्मीद जताई। संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि सिसोदिया का सक्रिय एवं परिश्रमी स्वभाव, समाजहित के प्रति सजग दृष्टिकोण और संघर्षशील कार्यशैली हमेशा प्रेरणादायक रही है। उनकी नियुक्ति से करणी सेना को नई दिशा और संगठनात्मक मजबूती मिलेगी। सिसोदिया ने दायित्व के लिए धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि वे संगठन की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने, सामाजिक सरोकारों को सशक्त करने और युवाओं को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ज्ञात हो कि सिसोदिया लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में अग्रणी रहे हैं और जनसेवा में भी उनकी छवि ईमानदार एवं जनप्रिय नेतृत्वकर्ता की है।

श्याम के भजनों से गूंज उठा पांडाल, चढ़ोकार परिवार ने किया खाटु श्याम भजन संध्या का आयोजन आयोजन ।

The pandal echoed with the hymns of Shyam, Chadhokar family organised Khatu Shyam Bhajan Sandhya. स्थानीय सहित छिंदवाड़ा के कलाकारों ने दी भजन संध्या की प्रस्तुति। हरिप्रसाद गोहे  आमला। रविवार, रात गोविंद कालोनी क्षेत्र में स्थित चढ़ोकार निवास पर चढ़ोकार परिवार द्वारा बाबा खाटू श्याम भजन संध्या का आयोजन आयोजित किया गया। जिसमे स्थानीय कलाकार महेन्द्र मानकर, एवं छिंदवाड़ा की मशहूर भजन गायिका अनुराधा ने एक से बढ़कर एक बाबा खाटू श्याम भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्याम भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उक्त आयोजन  नगर में भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का अनूठा संगम बन गया। कार्यक्रम में नगर सहित आसपास क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वरविहार ग्रुप के संचालक सुरेंद्र मानकर द्वारा किया गया। उन्होंने श्री श्याम बाबा का मनमोहक दरबार सजाया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। बाबा के दरबार को फूलों, दीपों और रंगीन रोशनी से सजाया गया था।  आरती के पश्चात छप्पन भोग अर्पित किया गया, जिससे वातावरण में सुगंध और भक्ति दोनों का अद्भुत समावेश हुआ। इसके बाद आमला शहर के प्रसिद्ध गायक महेंद्र मानकर ने कीर्तन की शुरुआत की। उनके द्वारा गाए गए भजनों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। महेंद्र मानकर ने एक के बाद एक कई लोकप्रिय और भक्तिमय भजन प्रस्तुत किए, जिनमें “श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम”, “तेरे दर पे आया हूँ श्याम”, “श्याम तेरा दीवाना” जैसे गीतों ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति का भाव जगा दिया। उनकी मधुर आवाज़ और भावपूर्ण प्रस्तुति से पूरा पंडाल श्याम नाम के जयकारों से गूंज उठा। भजन संध्या की शोभा तब और बढ़ गई जब छिंदवाड़ा की प्रसिद्ध भजन गायिका अनुराधा मंच पर पहुंचीं।  उन्होंने अपनी भक्ति और संगीत से वातावरण को और अधिक ऊर्जावान बना दिया। अनुराधा ने “तीन बार के धारी तीनों बाण चलाओ ना”, “मेरी गाड़ी मेरा बंगला मेरा पैसा सब कुछ तेरा सरकार”, “जरीब की पगड़ी बांधे सुंदर आंखों वाला”, “करके इशारे बुलाई गई रे बरसाने की छोरी”, “बांके बिहारी तेरे कजरारे नैन”, “तु कृपा कर बाबा कीर्तन करवाऊंगी”, “श्याम बाबा तेरे पास आए हैं चरणों में तेरे अरदास लाया हूं”, “सुन लो कन्हैया अर्जी हमारी”, “सियाराम जी के चरणों के दास बालाजी” जैसे एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत किए।उनकी हर प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूम उठे। महिलाएं, पुरुष, बच्चे और युवा सभी भक्ति के इस माहौल में भावविभोर होकर नृत्य करते नजर आए। देर रात तक कीर्तन चलता रहा और पंडाल में “जय श्री श्याम”, “श्याम बाबा की जय” के जयकारे गूंजते रहे। भजन संध्या का यह आयोजन न केवल भक्तिभाव से ओत-प्रोत रहा, बल्कि इसने समाज में एकता, प्रेम और भक्ति का संदेश भी दिया। कार्यक्रम में गौशाला परिवार, व्यापारी संघ, नगर के समाजसेवी, महिला मंडल और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।  रात लगभग 12 बजे कार्यक्रम का समापन छप्पन भोग के प्रसाद वितरण के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम के चरणों में प्रसाद ग्रहण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम की सफलता पर आयोजन समिति और यशवंत चढ़ोकार परिवार का नगरवासियों ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर भक्तों ने कहा कि इस तरह के आयोजन से समाज में भक्ति और सद्भाव का वातावरण बनता है और नई पीढ़ी में भी भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था जाग्रत होती है।

नलखेड़ा नगर में देवउठनी ग्यारस पर किया तुलसी विवाह कार्यक्रम

Tulsi marriage ceremony was organised on Devuthani Gyaras in Nalkheda town. संवाददाता: चंदा कुशवाह नलखेड़ा । नगर में देवउठनी ग्यारस के उपलक्ष में नगर की महिला और पुरुषों द्वारा तुलसी विवाह का कार्यक्रम रखा गया जिसमें सप्तमी के दिन माता पूजन धोली कलश  कार्यक्रम रखा गया, ग्यारस के दिन श्री राम मंदिर से भगवान शालिग्राम की बारात बैंड बाजे के साथ निकली जो नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए बारात निकली जहां रास्ते में नगर की जनता द्वारा जगह जगह पुष्पों से बारात का स्वागत किया गया व फलाहार मिठाई से स्वागत किया जिसमें बाराती नाचते गाते हुए भारत में चल रहे थे, ,उसके पश्चात  बारात गणपति मंदिर पहुंची जहां पर तुलसी माता और भगवान शालिग्राम का विधि विधान के साथ विवाह संपन्न कराया गया साथ ही तुलसी माता के  मामा पवन कुशवाहा द्वारा शादी विवाह का हथेला छुड़वाया गया,  उसके पश्चात नगर के भक्तगणों   द्वारा भोजन प्रसादी का आयोजन रखा गया था जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने भोजन प्रसादी का लाभ उठाया !

मां बगलामुखी मंदिर में बच्चे कर रहे छीना-झपटी, भिक्षावृत्ति का वीडियो वायरल; भोपाल मॉडल जैसी कार्रवाई की मांग — SDM व मंदिर प्रशासन पर सवाल

Video of children engaging in physical assault and begging at the Maa Baglamukhi Temple goes viral; demands for action similar to the Bhopal model—SDM and temple administration questioned. संवाददाता: चंदा कुशवाह नलखेड़ा। विश्वप्रसिद्ध माँ बगलामुखी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से जबरदस्ती भिक्षा मांगने और सामान छीनने की कोशिश का वीडियो वायरल हो गया है। वीडियो में कुछ बच्चे पर्यटकों और भक्तों के पीछे भागते, सामान पकड़ते और छीना-झपटी की कोशिश करते दिख रहे हैं। इस घटना ने मंदिर प्रबंधन और प्रशासन की चौकसी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था का दावा सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है। धार्मिक पर्यटन स्थल होने के बावजूद सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने में प्रशासन नाकाम नजर आ रहा है। भोपाल में भिक्षावृत्ति अपराध, नलखेड़ा में क्यों ढील? भोपाल में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा-163 के तहत भीख मांगना और देना, दोनों को दंडनीय अपराध घोषित किया है। साथ ही भिक्षुकों के पुनर्वास की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्थानीय लोगों का सवाल है — “जब यह सख्त कदम राजधानी में उठाया जा सकता है, तो नलखेड़ा जैसे भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थल पर क्यों नहीं?” SDM सर्वेश यादव की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल मंदिर परिसर में 24 घंटे पुलिसकर्मी और CCTV कैमरे मौजूद हैं। इसके बावजूद भिक्षावृत्ति और श्रद्धालुओं के साथ असुविधा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि SDM नलखेड़ा सर्वेश यादव द्वारा प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है और मंदिर क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिखते। स्थानीय नागरिकों की प्रमुख मांगें भिक्षावृत्ति में शामिल बच्चों की पहचान कर पुनर्वास कराया जाए बच्चों को भिक्षा दिलाने वाले परिजनों/गिरोहों पर FIR मंदिर परिसर में सुरक्षा एवं चेकिंग सिस्टम मजबूत किया जाए बाल संरक्षण विभाग द्वारा नियमित अभियान चलाया जाए त्वरित शिकायत और कार्रवाई के लिए हेल्पलाइन स्थापित हो “नलखेड़ा अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्थल, व्यवस्था पर समझौता नहीं” भक्तों ने कहा कि माँ बगलामुखी धाम की प्रतिष्ठा विश्वस्तरीय है। ऐसे में प्रशासन को भोपाल मॉडल लागू कर मंदिर क्षेत्र को भिक्षावृत्ति-मुक्त बनाना चाहिए। “भोपाल में नियम लागू हो सकते हैं, तो नलखेड़ा में क्यों नहीं?” यह सवाल अब स्थानीय समाज और श्रद्धालुओं का है।

प्रेस क्लब नलखेड़ा ने झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ की बड़ी पहल

Press Club Nalkheda took a big initiative against quack doctors. चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा ! क्षेत्र में बढ़ते झोलाछाप डॉक्टरों के आतंक और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ को लेकर अब प्रेस क्लब नलखेड़ा ने निर्णायक कदम उठाया है। बीते मंगलवार को प्रेस क्लब प्रतिनिधिमंडल ने जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचएमओ) को एक शिकायती आवेदन सौंपा, जिसमें झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। आवेदन में उल्लेख किया गया कि नलखेड़ा नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कई झोलाछाप डॉक्टर बिना किसी चिकित्सकीय योग्यता के लोगों का इलाज कर रहे हैं। इससे न केवल मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है, बल्कि शासन के स्वास्थ्य नियमों का भी खुला उल्लंघन हो रहा है। प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं राज्य में झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्त अभियान चलाने के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन नलखेड़ा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। आवेदन में इस बात पर नाराजगी जताई गई कि पूर्व में जिन झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग ने सील लगाई थी, उन्होंने सील तोड़कर पुनः अपने क्लीनिक चालू कर लिए, जो सीधा-सीधा कानूनी अपराध है। प्रेस क्लब अध्यक्ष राजेश कश्यप ने कहा कि प्रेस क्लब ने यह शिकायत जनता की सुरक्षा और जनहित में दी है। जब प्रशासन कार्रवाई नहीं करता, तब मीडिया को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। अब स्वास्थ्य विभाग को यह साबित करना होगा कि मुख्यमंत्री के निर्देश सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर भी लागू होते हैं। आवेदन में यह भी मांग की गई है कि जिन झोलाछाप डॉक्टरों ने सील तोड़ी है, उनके खिलाफ तत्काल कार्यवाही की जाकर उनके क्लीनिकों को स्थायी रूप से बंद कराया जाए। प्रेस क्लब ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में यह लापरवाही किसी बड़ी जनस्वास्थ्य त्रासदी का कारण बन सकती है। छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में जिस तरह जहरीली दवा से मासूम बच्चों की मौत हुई थी, उसी तरह झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा गलत दवा या इलाज नलखेड़ा क्षेत्र में भी किसी गंभीर हादसे का रूप ले सकता है। इसलिए इस खतरे को देखते हुए तत्काल और ठोस कार्रवाई आवश्यक है। जनता और मीडिया की बढ़ती जागरूकता के बीच अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या स्वास्थ्य विभाग वास्तव में इन झोलाछाप डॉक्टरों पर शिकंजा कस पाएगा या मामला फिर से फाइलों में दबकर रह जाएगा। इस संबंध में जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश देहलकर ने कहा कि, झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ जांच कराई जाएगी। यदि किसी ने सील तोड़ी है या अवैध रूप से इलाज किया जा रहा है, तो उसके विरुद्ध पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

नलखेड़ा में सरदार पटेल जयंती पर भव्य रैली

Grand rally on Sardar Patel Jayanti in Nalkheda चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर आज नलखेड़ा में समस्त पाटीदार समाज नलखेड़ा द्वारा भव्य शोभायात्रा एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। नगर में सुबह से ही उत्साहपूर्ण माहौल रहा और लोगों में विशेष जोश देखा गया। नगर के प्रमुख मार्गों को आकर्षक पुष्प सजावट, रंग-बिरंगे झंडों एवं स्वागत द्वारों से सजाया गया था। बच्चों व युवाओं की टोलियों द्वारा देशभक्ति गीतों, ढोल-ढाकों और बैंड-बाजों के साथ रैली निकाली गई। महिलाओं ने परंपरागत परिधानों में भाग लेकर समाज की एकता और सांस्कृतिक गौरव को प्रकट किया। रैली नगर के मुख्य मार्गों से होकर सरदार पटेल की प्रतिमा स्थल पर पहुंची, जहाँ उपस्थित जनसमूह द्वारा पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। समाजजनों द्वारा राष्ट्रीय एकता और भाईचारे के नारों से शहर गुंजायमान होता रहा। इस अवसर पर श्री गोविंद पाटीदार (निवासी टोलक्याखेड़ी) ने कहा कि लौह पुरुष सरदार पटेल ने अपने लोहे जैसे संकल्प, अदम्य साहस और दूरदर्शिता के बल पर देश को एक सूत्र में बांधकर इतिहास रचा। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम उनके आदर्शों का अनुसरण करते हुए राष्ट्रहित, समाज उत्थान और एकजुटता की भावना को निरंतर मजबूत करें। वक्ताओं ने कहा कि पाटीदार समाज सदैव राष्ट्र सेवा, कृषि उन्नति, सामाजिक सद्भाव और जनकल्याण में अग्रणी रहा है, और आगे भी यही परंपरा जारी रहेगी। समाज द्वारा भविष्य में शैक्षणिक एवं सामाजिक गतिविधियों को और मजबूत करने का संकल्प भी लिया गया। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजनों, युवा वर्ग, महिला शक्ति सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। शोभायात्रा एवं श्रद्धांजलि समारोह उत्साह और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष प्रेम राठौर ने उठाई आवाज — वर्षों से बंद मट पंप से नागरिकों को नहीं मिल रही सुविधा, ओडीएफ श्रेणी पर भी उठे सवाल

Former Nagar Panchayat President Prem Rathore raised his voice – the water pump, which has been out of service for years, has been depriving citizens of its services, and questions have also been raised about the ODF category. चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। नलखेड़ा नगर पंचायत क्षेत्र में वर्षों से बंद पड़ा मट पंप अब नगरवासियों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। इस संबंध में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष प्रेम राठौर ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि नगर पंचायत की पूर्व परिषद द्वारा नागरिकों की सुविधा के लिए यह मट पंप खरीदा गया था, ताकि घर-घर बने सेफ्टिक टैंकों की सफाई आसानी से की जा सके। लेकिन यह मट पंप लंबे समय से खराब होकर बेकार पड़ा है, जिससे नगर के लोगों को इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है। राठौर ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शासन द्वारा घर-घर शौचालय और सेफ्टिक टैंक बनवाए गए थे। इन टैंकों की समय-समय पर सफाई आवश्यक होती है, जिसके लिए नगर पंचायत ने मट पंप खरीदा था। नागरिक एक निश्चित शुल्क देकर इसकी सेवा लेते थे, जिससे नगर पंचायत को राजस्व भी प्राप्त होता था और नागरिकों को सुविधा भी मिलती थी। पूर्व अध्यक्ष राठौर के अनुसार, प्रशासक काल के दौरान से यह मट पंप खराब पड़ा हुआ है। कुछ माह पूर्व इसे दुरुस्त करवाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन सफल नहीं हो सके। इसके चलते नागरिकों को मजबूरी में अन्य नगरों जैसे सारंगपुर से मट पंप मंगवाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है। हाल ही में एक स्थानीय नागरिक ने सारंगपुर से मट पंप बुलाकर अपने टैंक की सफाई करवाई। उन्होंने बताया कि नया मट पंप खरीदने पर लगभग 3 से 4 लाख रुपये का खर्च आएगा, जबकि पुराने पंप को कुछ हजार रुपये में ही ठीक किया जा सकता है। लेकिन नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान नागरिकों की इस मूलभूत सुविधा की ओर नहीं जा रहा है। ओडीएफ डबल प्लस श्रेणी पर उठे सवाल पूर्व अध्यक्ष प्रेम राठौर ने यह भी बताया कि नलखेड़ा नगर पंचायत ओडीएफ डबल प्लस श्रेणी में शामिल है, जिसमें मट पंप की उपलब्धता अनिवार्य शर्तों में शामिल है। ऐसे में वर्षों से बंद पड़े मट पंप के कारण नलखेड़ा की ओडीएफ श्रेणी पर भी सवाल उठ रहे हैं। राठौर ने जिला प्रशासन एवं नगर पंचायत से आग्रह किया है कि नागरिकों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए मट पंप को शीघ्र दुरुस्त करवाया जाए, ताकि नगरवासियों को इस आवश्यक सेवा से फिर से जोड़ा जा सके।

अभी गुर्जर बने पुनः अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नगर मंत्री

Now Gurjar has again become the city minister of Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad. चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की नगर इकाई में संगठन पुनर्गठन के दौरान अभी गुर्जर को पुनः नगर मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके पिछले कार्यकाल में उत्कृष्ट संगठनात्मक कार्य, विद्यार्थियों के हित में सक्रिय भूमिका और बेहतर व्यवहार को देखते हुए परिषद पदाधिकारियों ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है। अभी गुर्जर अपने मिलनसार स्वभाव और नेतृत्व क्षमता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल में नगर में विद्यार्थी परिषद की गतिविधियों को नई दिशा दी थी। परिषद द्वारा आयोजित अनेक शैक्षणिक और सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। संगठन के प्रति उनका समर्पण और अनुशासन उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाता है।नवनियुक्त नगर मंत्री अभी गुर्जर ने कहा कि संगठन ने जो विश्वास उन पर जताया है, वह उसे पूरी निष्ठा, अनुशासन और परिश्रम से निभाएँगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद सदैव विद्यार्थियों की आवाज़ रही है और आगे भी समाज व शिक्षा के क्षेत्र में रचनात्मक कार्य जारी रखेगी।इस अवसर पर परिषद के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने उन्हें बधाई दी और विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में संगठन और भी सशक्त और सक्रिय बनेगा।

नलखेड़ा के साईं श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय कुश्ती में जीता स्वर्ण पदक, प्रदेश का नाम किया रोशन

Sai Srivastava of Nalkheda won the gold medal in the national wrestling competition, bringing glory to the state. चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा । नगर के होनहार खिलाड़ी साईं श्रीवास्तव ने विद्या भारती द्वारा भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में अपने दमदार प्रदर्शन से 86 किलोग्राम फ्री स्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। मूल रूप से नलखेड़ा निवासी साईं श्रीवास्तव, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल श्रीवास्तव के पुत्र हैं। साईं वर्तमान में सरस्वती विद्या मंदिर, मारूतीगंज (उज्जैन) में अध्ययनरत हैं, जहां वे शिक्षा के साथ खेल में भी लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रतियोगिता में देशभर से आए नामी पहलवानों के बीच साईं ने अपने मजबूत इरादों और शानदार दांव-पेच से सभी को मात दी। फाइनल मुकाबले में भी उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को परास्त कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। साईं की इस उपलब्धि से नलखेड़ा नगर में खुशी की लहर दौड़ गई। नगरवासियों, विद्यालय परिवार और खेल प्रेमियों ने साईं को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने छोटे से कस्बे से निकलकर यह सिद्ध किया है कि मेहनत और लगन से किसी भी मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है। साईं श्रीवास्तव की यह जीत न केवल उज्जैन संभाग बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय बनी है।

नलखेड़ा में बैलों की भव्य शोभायात्रा निकली, नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी ने किया किसानों का उत्साहवर्धन

नलखेड़ा में बैलों की भव्य शोभायात्रा निकली, नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी ने किया किसानों का उत्साहवर्धन Municipal Council President representative Vijay Soni encouraged the farmers. चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। परंपरा और संस्कृति का संगम देखने को मिला जब दीपावली के बाद पड़वा पर नलखेड़ा नगर में हर वर्ष की तरह इस बार भी बैलों के जोड़े का पारंपरिक पथ संचलन धूमधाम से निकाला गया। कार्यक्रम की शुरुआत सांवलिया नाथ मंदिर से हुई, जहां विभिन्न गांवों से आए कुल 13 जोड़े बैलों के एकत्र हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में आधे रहे। बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच बैलों का यह संचलन नगर के मुख्य मार्ग, चौक बाजार होते हुए गणपति चौराहे तक पहुंचा। रास्तेभर युवाओं ने नाचते-गाते हुए परंपरा का उल्लास मनाया। कार्यक्रम का समापन बड़ा गणपति मंदिर के सामने हुआ, जहां गौ सेवा समिति नलखेड़ा द्वारा बैलों के पालन-पोषण करने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण इस प्रकार रहा: प्रथम पुरस्कार ₹11,000 — धरोला के दुर्गेश पिता पन्नालाल द्वितीय पुरस्कार ₹5,100 — ढंडेडा के प्रेम नारायण तृतीय पुरस्कार ₹3,100 — तराना के बाबूलाल.     चतुर्थ पुरस्कार ₹1,100 — नंदू सिंह पिता पर्वत सिंह इस अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी नगर के पार्षदों के साथ उपस्थित रहे और किसानों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि “नलखेड़ा की पहचान उसकी परंपराओं से है, और बैलों के जोड़े का यह संचलन हमारी कृषि संस्कृति का प्रतीक है। इसे जीवित रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।” समिति सदस्य सोनू जायसवाल ने बताया कि इस बार बैलों के जोड़ों की संख्या में कमी आई है, जिससे यह स्पष्ट है कि किसानों में पारंपरिक पशुपालन की प्रवृत्ति घट रही है। इस अवसर पर थाना प्रभारी नागेश यादव भी पुलिस बल के साथ मौजूद रहे और प्रथम पुरस्कार विजेता किसान का सम्मान किया। गोवर्धन पूजा से खिला नगर नगर में जगह-जगह गोवर्धन पूजा का आयोजन हुआ। गोबर से बनाए गए गोवर्धन पर्वत की पूजा में श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए। गवली मोहल्ला की परंपरा इस बार भी आकर्षण का केंद्र रही, जहां बच्चों को गोवर्धन पर्वत पर लिटाकर पूजा की गई — यह अनोखी परंपरा पीढ़ियों से यहां निभाई जा रही है। नलखेड़ा की सड़कों पर इस दिन परंपरा, श्रद्धा और संस्कृति ने मिलकर एक अद्भुत दृश्य रचा, जहां नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी ने परंपरा को नई ऊर्जा और सम्मान दिया।

नलखेड़ा : SDM ने अब तक नहीं किया स्थान निर्धारित, लाइसेंस के लिए ₹1500 की मांग का आरोप — नगर पालिका प्रतिनिधि विजय सोनी ने जताई नाराज़गी

Nalkheda: SDM has not yet determined the location, and is demanding ₹1,500 for the license. Municipal representative Vijay Soni expressed his displeasure. चंदा कुशवाहनलखेड़ा। दिवाली में अब केवल दो दिन शेष हैं, लेकिन नगर में इस बार अब तक पटाखों की दुकानें नहीं लग सकी हैं। इसका कारण है — SDM कार्यालय द्वारा पटाखा बाजार के लिए स्थान निर्धारित न किया जाना। व्यापारी तैयार बैठे हैं, लेकिन अनुमति और स्थान न मिलने से वे दुकानें नहीं सजा पा रहे हैं। इधर, कई व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि SDM कार्यालय द्वारा पटाखा दुकान के लाइसेंस के लिए ₹1500 की मांग की जा रही है। एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “हम पिछले कई सालों से पटाखे बेचते आ रहे हैं, लेकिन इस बार लाइसेंस जारी करने में देरी की जा रही है और ₹1500 की मांग की जा रही है। अगर जल्द अनुमति नहीं मिली, तो दिवाली का पूरा व्यापार ठप हो जाएगा।” नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी ने इस पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि “नलखेड़ा में हर साल सभी धर्मों के लोग मिलजुलकर दिवाली का पर्व मनाते हैं। यह हमारे सनातन धर्म का सबसे बड़ा त्योहार है, लेकिन इस बार बच्चों के चेहरे पर खुशी की जगह मायूसी है क्योंकि पटाखों की दुकानें ही नहीं लगीं।” उन्होंने प्रशासन से तुरंत स्थान तय कर व्यापारियों को राहत देने की मांग की है।व्यापारी भी कहते हैं कि तैयारी पूरी है — स्टॉक आ चुका है, पर बेचने की अनुमति नहीं मिली। दिवाली तक अगर जगह तय नहीं हुई तो उनका माल बेकार हो जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की देरी से हर साल की तरह इस बार भी अंतिम समय पर हड़बड़ी मचेगी। लोग चाहते हैं कि त्योहार की खुशियों में रुकावट न आए और बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लौटे।

नलखेड़ा तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव ने थामी कमान, देर रात तक चल रहा मुआवज़ा तैयार करने का काम

Farmers may receive a bell of relief on Dhanteras! Nalkheda Tehsildar Priyank Srivastava is in charge, and the work of preparing compensation continues late into the night. चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा ! आगर मालवा ज़िले के नलखेड़ा से राहत भरी खबर लंबे इंतज़ार के बाद किसानों को इस धनतेरस पर मुआवज़े की सौगात मिल सकती है। जब ज़िले को मुआवज़े की सूची से वंचित रखा गया और किसानों में नाराज़गी बढ़ी, तब नलखेड़ा तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव ने खुद मोर्चा संभाला। सूत्रों के अनुसार, तहसील कार्यालय में बीते कई दिनों से तहसीलदार श्रीवास्तव, नायब तहसीलदार अरुण चंद्रवंशी और राजस्व निरीक्षक डिंपल उइके लगातार काम में जुटे हुए हैं। तीनों अधिकारी देर रात तक दफ़्तर में रहकर मुआवज़ा सूची की जांच, सत्यापन और बिल तैयार कराने का काम कर रहे हैं, ताकि हर पात्र किसान तक राहत राशि समय पर पहुंच सके। राजस्व निरीक्षक डिंपल उइके द्वारा एक-एक गांव के प्रकरण की बारीकी से जांच की जा रही है, जिससे कोई भी पात्र किसान मुआवज़े से वंचित न रह जाए।एक पटवारी ने बताया कि “तहसीलदार साहब हर सूची खुद देख रहे हैं, कहीं कोई गलती न रह जाए इसके लिए रोज़ मॉनिटरिंग हो रही है। उनका लक्ष्य साफ़ है — धनतेरस पर किसानों के खातों में मुआवज़ा पहुंचना चाहिए।” कर्मचारियों का कहना है कि “अगर यह काम पहले शुरू होता तो हम भी परिवार के साथ दीवाली मना पाते, लेकिन अब किसानों की मुस्कान ही हमारी दीवाली है।” नलखेड़ा तहसील प्रशासन की यह कार्यशैली पूरे जिले के लिए मिसाल बन गई है — जब बाकी जगह फाइलें अटकी रहीं, नलखेड़ा में अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात डटे हुए हैं।

नलखेड़ा मंडी में नहीं बिक रही सोयाबीन… बिक रही है किसानों की मजबूरी!

Soybean is not being sold in Nalkheda Mandi… Farmers’ helplessness is being sold! चंदा कुशवाह नलखेड़ा । नलखेड़ा कृषि उपज मंडी में इस बार किसान भारी परेशानी झेल रहे हैं। सोयाबीन की खरीदी न शुरू होने से लेकर अव्यवस्था तक, हर मोर्चे पर किसानों का सब्र टूटता दिख रहा है। मंडी में न बैठने की जगह है, न पीने के पानी की व्यवस्था और न ही शौचालय। किसान खुले आसमान के नीचे अपनी बोरियां लिए मंडी प्रांगण में बैठे हैं — उम्मीद बस यही कि कोई व्यापारी आए और दाम थोड़ा ठीक मिल जाए।  “ना दाम मिल रहा, ना व्यवस्था… मजबूरी में बेच रहे हैं” ग्राम नालखेड़ा  के किसान चिन्तामन विश्वकर्मा  ने बताया — “सुबह से मंडी में बैठे हैं, लेकिन कोई भाव ही नहीं लगाता। जो आ भी रहे हैं वो ₹3500 से ऊपर देने को तैयार नहीं। MSP जो कि ₹5300 रुपए का तो नाम तक नहीं ले रहे।” एक अन्य किसान बोले — “बैठने की जगह तक नहीं है। मंडी में पानी नहीं, टॉयलेट नहीं, अधिकारी दिखते तक नहीं।” पंजीयन पोर्टल पर फसल नहीं दिख रही, किसान हैरान कई किसानों ने शिकायत की कि पंजीयन के समय पोर्टल पर उनकी सोयाबीन की एंट्री दिख ही नहीं रही। इससे वे खरीदी प्रक्रिया से वंचित रह गए हैं। इस बारे में जब तहसील  नलखेड़ा के एक पटवारी से बात की गई तो उन्होंने कहा — “गिरदावरी का काम शासन द्वारा नियुक्त स्थानीय युवाओं द्वारा समय पर किया गया था। सभी रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड भी किए गए हैं। यह समस्या संभवतः तकनीकी गड़बड़ी के कारण है।” SDM सुसनेर की लापरवाही पर उठे सवाल किसानों ने आरोप लगाया कि मंडी की बदहाल व्यवस्था पर SDM सुसनेर का ध्यान नहीं है। ना तो उन्होंने मौके का निरीक्षण किया, और ना ही मंडी प्रशासन को कोई सख्त निर्देश दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन इस बार हालत और खराब हैं। मंडी में व्यवस्था सुधारना SDM की जिम्मेदारी है, लेकिन उन्होंने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

नलखेड़ा: मां बगलामुखी मंदिर के बाहर खुलेआम बिक रहा नशा, SDM सर्वेश यादव की भूमिका पर उठे सवाल

Nalkheda: Drugs being sold openly outside the Maa Baglamukhi temple, questions raised about the role of SDM Sarvesh Yadav. चंदा कुशवाह ( विशेष संवाददाता )  नलखेड़ा । मां बगलामुखी मंदिर  आस्था और साधना का केंद्र, जहां रोज़ सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन इस पवित्र स्थल के बाहर अब नशे का कारोबार पांव पसार चुका है। मंदिर के आस-पास की दुकानों पर गुटखा, सिगरेट, भांग, गांजा और अन्य मादक पदार्थों की खुलेआम बिक्री हो रही है, और प्रशासन चुप है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस मंदिर के अध्यक्ष स्वयं उपखंड अधिकारी (SDM) सर्वेश यादव हैं। मंदिर व्यवस्था और वीआईपी प्रोटोकॉल की समीक्षा के लिए वे अक्सर यहां आते-जाते रहते हैं, फिर भी मंदिर के बाहर यह अवैध गतिविधि कैसे चल रही है? क्या इन दुकानों को SDM की मौखिक मंजूरी मिली है, या फिर इनके पास कोई लिखित अनुमति पत्र मौजूद है? यदि नहीं, तो प्रशासन की चुप्पी आखिर क्यों? स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर के बाहर इस तरह का वातावरण श्रद्धा के माहौल को कलंकित कर रहा है। “जहां देवी की उपासना होती है, वहां नशे का कारोबार चलता देखना दुखद है, एक भक्त ने नाराज़गी जताते हुए कहा। मंदिर के चारों ओर फैले मादक पदार्थों की बिक्री न केवल धार्मिक गरिमा पर धब्बा है, बल्कि यह प्रशासनिक निष्क्रियता और लापरवाही का भी प्रतीक बन चुकी है। अब श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक मांग कर रहे हैं कि मंदिर क्षेत्र में नशे के इस कारोबार पर तत्काल रोक लगाई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया जाए।

राहत वितरण में देरी पर किसानों का रोष, किसान संघ ने की त्वरित कार्रवाई की माँग।

Farmers angry over delay in relief distribution, farmers union demands immediate action. चंदा कुशवाह ( विशेष संवाददाता )नलखेड़ा ! जिले में सोयाबीन फसल के भारी नुकसान के बावजूद किसानों को अब तक राहत राशि नहीं मिल पाने से किसानों में गहरा असंतोष व्याप्त है। इस मुद्दे को लेकर भारतीय किसान संघ, जिला इकाई आगर मालवा ने बुधवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की माँग की।संघ ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि मौसमी बीमारियों पीलामोजक और असमय वर्षा के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। शासन के आरबी-6 (4) के प्रावधानों के तहत सर्वे कर राहत राशि का वितरण किया जाना था, लेकिन सर्वे कार्य नियमानुसार और उदारतापूर्वक नहीं किया गया, जिससे जिले के किसान राहत से वंचित रह गए।भारतीय किसान संघ ने प्रशासन से माँग की है कि— सर्वे पत्रक, अनावरी रिपोर्ट और नेत्रांकन सर्वे के पंचनामों की प्रति प्रत्येक पटवारी हल्केवार किसान संघ को उपलब्ध कराई जाए।पूर्व में बनी रिपोर्टों का पुनः परीक्षण कर संशोधित रिपोर्ट राज्य शासन को भेजी जाए, ताकि वास्तविक प्रभावित किसानों को राहत मिल सके।संघ ने कहा कि किसानों को नुकसान की भरपाई न मिलने से ग्रामीण अंचलों में निराशा और रोष बढ़ रहा है। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो भारतीय किसान संघ जिला इकाई आगर मालवा किसानों के हितों की रक्षा हेतु धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होगा।संघ ने आशा जताई कि प्रशासन इस विषय की गंभीरता को समझते हुए जल्द से जल्द उचित कदम उठाएगा, ताकि किसानों को न्याय और राहत दोनों मिल सकें। ज्ञापन देने वाले प्रमुख पदाधिकारी: रामनारायण तेजरा, जिला अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ जिला आगर मालवा जगदीश पाटीदार, जिला कार्यालय मंत्री, भारतीय किसान संघ, जिला आगर मालवा प्रमोद जोशी, जिला कोषाध्यक्ष, भारतीय किसान संघ, जिला आगर मालवा राघुसिंह चौहान, जिला मंत्री, भारतीय किसान संघ, जिला आगर मालवा

कम नुकसान प्रतिशत की रिपोर्ट—SLR के सख़्त आदेश का कमाल! ”

Low loss percentage reported—the magic of SLR’s strict order!” चंदा कुशवाह (संवाददाता)अगर मालवा ! ज़िले में किसानों के लिए राहत अब बस एक छलावा बनकर रह गई है। प्राकृतिक आपदा से फसलें चौपट हो गईं, किसान मुआवज़े की उम्मीद में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन राहत मिलने के बजाय उन्हें सिर्फ़ बहलाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस पूरी स्थिति के पीछे ज़िला अधीक्षक भू-अभिलेख (SLR) प्रीति चौहान का ही दबाव है। जानकारी के मुताबिक, विभाग द्वारा शासन को भेजी गई कम नुकसान प्रतिशत वाली रिपोर्ट भी SLR मैडम के सख़्त निर्देशों पर ही तैयार की गई थी। यानी आंकड़ों में ‘कटौती’ कर्मचारियों ने अपनी मर्ज़ी से नहीं, बल्कि दबाव में की। कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि असली समस्या उनकी नहीं, बल्कि ऊपर से आने वाले आदेशों की है। “हम किसानों को सही नुकसान दिखाना चाहते हैं, लेकिन हमें निर्देश मिलता है कि नुकसान कम बताओ और किसानों को सिर्फ़ चक्कर कटवाओ। फिर जब हंगामा होता है तो दोष हम पर डाल दिया जाता है।” व्यंग्य की बात यह है कि जिस अधिकारी को जनता की शिकायतें सुननी चाहिए, दुख समझना चाहिए और किसानों की समस्या शासन तक साफ़ तौर पर पहुँचानी चाहिए, उनकी मंशा उलटी है—न शिकायत सुनने का इरादा, न दुख समझने का और न ही समस्या शासन तक पहुँचाने का। सूत्र बताते हैं कि SLR मैडम अपने कैबिन में कर्मचारियों को आने तक नहीं देतीं और दिनभर मोबाइल पर रील्स देखने में व्यस्त रहती हैं। किसानों की समस्याएँ फाइलों में धूल खाती रहती हैं और अधिकारी रीलों में ‘टारगेट’ अचीव करती रहती हैं। अब किसानों की नाराज़गी बढ़ने लगी है। कुछ किसान संघ प्रतिनिधियों ने SLR की वह रिपोर्ट मांगी है, जिसमें नुकसान का प्रतिशत घटाकर भेजा गया है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि आखिर किस दबाव में और किस मंशा से किसानों के साथ ऐसा अन्याय किया गया। किसानों का साफ कहना है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। आखिर सवाल यही है—क्या प्रशासन जनता के लिए है या जनता को गुमराह करने के लिए?

किसानों की चिंता या राजनीति की फसल? सत्ता और विपक्ष में ‘समानता’ का दुर्लभ संगम!

किसानों की चिंता या राजनीति की फसल? सत्ता और विपक्ष में ‘समानता’ का दुर्लभ संगम! Concern for farmers or a political harvest? A rare confluence of “equality” between the ruling party and the opposition! चंदा कुशवाह (संवाददाता) आगर-मालवा। मालवा की धरती पर इस बार सिर्फ सोयाबीन ही नहीं, बल्कि नेताओं का “किसान प्रेम” भी खूब फल-फूल रहा है। असमय वर्षा और येलो मोज़ेक वायरस से बर्बाद हुई फसल ने जहाँ किसानों की कमर तोड़ दी है, वहीं राजनीति के गलियारों में अचानक एक जैसी चिंता उभर आई है — और वो भी दोनों खेमों में एक साथ! 3 अक्टूबर को भाजपा जिलाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि “किसानों की फसलें भारी नुकसान में हैं, सरकार तुरंत राहत राशि दे।” यानी अपनी ही पार्टी की सरकार को अब अपनी पार्टी के नेता ही “स्मरण पत्र” भेजकर याद दिला रहे हैं कि खेत में दर्द है, ध्यान दीजिए साहब। लेकिन अगले ही दिन 4 अक्टूबर को कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजयलक्ष्मी तंवर ने भी वही मुद्दा उठाया — बस अंदाज़ थोड़ा बदल गया। उन्होंने ज्ञापन देकर मुख्यमंत्री से मांग की कि “किसानों को तत्काल मुआवजा दिया जाए और नुकसान का सर्वे कराया जाए।” अब जनता के बीच चर्चा गर्म है — “भाई, अगर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों एक ही बात कह रहे हैं, तो फर्क आखिर बचा कहाँ है?” लोगों का कहना है कि यह पहली बार है जब दोनों दलों के सुर इतने मधुर सुनाई दिए — मुद्दा किसान का था, तो सुर अपने आप मिल गए। गाँव के एक बुजुर्ग किसान ने हँसते हुए कहा — “जिस खेत की मिट्टी में किसान का पसीना है, वहीं नेताओं का बयान भी अंकुरित हो जाता है।”  कुल मिलाकर मालवा में किसान दुखी हैं, लेकिन नेताओं के बयान खिल-खिला रहे हैं — फसल चौपट सही, पर राजनीति की खेती खूब लहलहा रही है!

आगर-मालवा में सोयाबीन की चौपट फसल : भावांतर योजना बेअसर, MSP व मुआवजा बने जरूरी

Soybean crop failure in Agar-Malwa: Bhavantar Yojana ineffective, MSP and compensation essential आगर-मालवा । मुख्य फसल सोयाबीन पर येलो मोज़ेक वायरस और अन्य रोगों के असर से खेतों में पौधे पीले पड़ गए, फलियाँ अधूरी रह गईं और उत्पादन बुरी तरह घट गया। कई खेतों में उपज शून्य रही, जिससे किसानों की लागत और मेहनत डूब गई। भावांतर योजना पंजीयन जिले में 3 अक्टूबर से भावांतर भुगतान योजना का पंजीयन शुरू हुआ है। कलेक्टर प्रीति यादव ने विभिन्न पंजीयन केन्द्रों का निरीक्षण कर निर्देश दिए कि कोई भी किसान वंचित न रहे और पंजीयन प्रक्रिया पारदर्शी व तेज़ हो। किसानों की हकीकत किसानों का कहना है कि जब फसल ही चौपट हो गई तो भावांतर योजना से क्या फायदा? नलखेड़ा के किसान कैलाश चौधरी बोले – “मंडी में ले जाने को कुछ बचा ही नहीं।” ग्राम गोयल के हीरालाल यादव ने कहा – “बीज-खाद पर कर्ज चढ़ गया, अब हमें सीधे मुआवजा चाहिए।” विशेषज्ञों की राय कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार वायरस और रोगों से उत्पादन में 30–70% तक गिरावट आई है। उनका मानना है कि सरकार को मालवा को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित कर किसानों को तत्काल मुआवजा देना चाहिए। कलेक्टर ने पंजीयन को प्राथमिकता दी है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर किसानों की असली मांग है – MSP पर खरीदी और फसल नुकसान का मुआवजा। यही कदम उन्हें राहत और अगली फसल के लिए सहारा दे सकते हैं।

खाटू श्याम से इंदौर जा रही बस सुसनेर में पलटी, 17 यात्री हुए घायल… नीचे दबे पिता और बेटे को बचाया

आगर-मालवा (Bus Accident in Susner)। रविवार सुबह 6:30 बजे सुसनेर थाना इलाके के गणेशपुरा जोड़ गांव के पास सड़क हादसा हो गया। घने कोहरे की वजह से अज्ञात वाहन से टकराकर स्लीपर कोच बस पलट गई। हादसे में 17 यात्री घायल हो गए। इसमें एक डेढ़ साल का बच्चा और उसके पिता भी बस के नीचे फंस गए थे। बस देव नामक एक प्राइवेट कंपनी की बताई जा रही है। सूचना मिलने पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की क्रेन मौके पर पहुंची व बच्चे और पिता को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बता दें की बस खाटूश्याम से इंदौर जा रही थी। 2 गंभीर घायलों को इंदौर रेफर किया गयासूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सिंह भी मौके पर पहुंचे। सभी घायलों को उपचार के लिए 108 एंबुलेंस डॉ शहजाद खान की मदद से सुसनेर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनका उपचार जारी है। 2 गंभीर घायल को उपचार के लिए इंदौर रेफर किया गया है। इधर… दो बाइक की टक्कर में चार लोग घायल, तीन आगर रैफरशनिवार की शाम को 4 बजे के लगभग उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित खजूरी जोड के पास 2 बाइक की भिड़ंत हो गई, जिसमें चार लोग घायल हो गए। सभी घायलों को पुराना बस स्टैंड स्थित शासकीय सिविल अस्पताल लाया गया। डॉ. भारद्वाज व स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा चार चारों घायलों भंवरलाल और उनके पिता धन्ना निवासी लखोनी, नारायण पिता शंकर, रेखा बाई पति नारायण का प्राथमिक इलाज किया। इसके बाद उचित इलाज के लिए भंवरलाल, नारायण और रेखाबाई को आगर जिला अस्पताल रैफर किया गया है। शाजापुर में पहिया निकलने से शिक्षिकाओं से भरा ऑटो खाई में गिरा, पांच घायलशाजापुर शहर में दुपाड़ा रोड पर शिक्षिकाओं से भरा एक ऑटो रिक्शा अनियंत्रित होकर शनिवार सुबह खाई में गिर गया। हादसा तब हुआ जब शिक्षिकाएं शाजापुर से ग्राम जादमी स्थित एक स्कूल में पढ़ाने जा रही थीं। दुर्घटना का कारण ऑटो का पहिया अचानक निकल जाना बताया जा रहा है। ऑटो में सवार पांच शिक्षिकाओं की पहचान कविता, माया, छाया, सविता और ललिता सिसौदिया के रूप में हुई। सभी को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया। इनमें ललिता सिसौदिया की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है, जबकि अन्य चार शिक्षिकाओं को मामूली चोटें आई हैं और प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।

आगर-मालवा में तेज रफ्तार बस अनयंत्रित होकर पलटी, बच्ची की मौत; 20 लोग घायल

A speeding bus lost control and overturned in Agar-Malwa, girl died; 20 people injured आगर मालवा। मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले के सुसनेर से एक दुर्घटना का मामला सामने आया है। आगर-मालवा जिले के सुसनेर में बुधवार सुबह इंदौर कोटा हाईवे पर एक तेज रफ्तार बस पलट गई। घटना में एक 6 साल की बच्ची की मौत हो गई और 20 लोग घायल हो गए। हादसे में आठ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है।मिली जानकारी के मुताबिक, बस दिल्ली से इंदौर जा रही थी, तभी सुबह करीब 6 बजे ड्राइवर को नींद का झोका आने से बस सड़क से उतरकर नीचे पलट गई। इसमें करीब 30 लोग सवार थे, जिसमें मौके पर ही एक बच्ची की मौत हो गई। जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर और एसपी तुरंत सुसनेर अस्पताल पहुंचे और जानकारी ली। क्यों होते हैं हादसे? उज्जैन- झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग शहरी क्षेत्र में बन तो गया कि मगर अब यह भी धीरे-धीरे अतिक्रमण की जद में समाने लगा है। गाड़ी चालक इतने लापरवाह बने हुए हैं कि हाईवे के किनारे बेतरतीब तरीके से वाहन खड़े कर रहे हैं। इसके कारण सड़क संकरी हो जाती है। इस वजह से हर समय हादसे का डर लगा रहता है। वाहन चालकों की लापरवाही के कारण बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन फिर भी जिम्मेदार इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है। इधर, नगरीय क्षेत्र में बनाई गई सर्विस रोड पर दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है। ऐसे में दो पहिया से लेकर चार पहिया वाहनों के साथ ही बड़े-बड़े भारी वाहन भी हाईवे किनारे ही खड़े हो रहे हैं। जो हादसों को न्योता दे रहे हैं। ऐसी ही स्थिति पुराने पेट्रोल पंप से लेकर मोड़ी चौराहे तक बनी हुई है। सड़क किनारे वाहन खड़ा करने पर मिलती ये सजासड़क किनारे खड़े वाहनों की वजह से पीछे से आने वाले वाहन चालकों को आगे नहीं दिख पाता और दुर्घटना हो जाती है। सड़क किनारे खड़े वाहनों की वजह से रास्ता आधा घिर जाता है। सड़क किनारे वाहन खड़े करने पर जुर्माना लगाया जाता है। अगर कोई वाहन सड़क किनारे खड़ा किया जाता है तो ट्रैफिक पुलिस और निगम क्रेन से उसे उठाकर थाने ले जाता है, वहां जुर्माना भरने के बाद ही वाहन छोड़ा जाता है, लेकिन नगर में ट्रैफिक पुलिस का अभाव होने के कारण यह कार्रवाई कभी भी शहर में नहीं हो पाई है।

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