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महाकुंभ से पहले प्रयागराज एयरपोर्ट पर दीप्तिमान 84 स्तंभों की स्थापना होगी

प्रयागराज महाकुंभ को दिव्य स्वरूप देने के लिए कुंभ नगरी के कोने-कोने में धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों की स्थापना की जा रही है । शहर की सड़क, चौराहे और शहर की प्रमुख दीवारें सज संवर रही हैं। प्रयागराज का सिविल एयरपोर्ट भी इससे अछूता नहीं है। यहां दीप्तिमान 84 स्तंभों की स्थापना इसी का हिस्सा है। सृष्टि जीवन का क्रमिक विकास है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह 84 लाख योनियों से होकर गुजरता है। प्रयागराज के सिविल एयरपोर्ट में सृष्टि के इसी विकास क्रम को 84 आलोकित स्तंभों के माध्यम से दर्शाया जा रहा है। जल निगम की कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन डिवीजन इसकी कार्यदाई संस्था है। सीएनडीएस के प्रोजेक्ट मैनेजर रोहित कुमार राना का कहना है कि एयरपोर्ट के बाहर सड़क के दोनो तरफ इन स्तंभों की स्थापना की जा रही है। 21 करोड़ 30 लाख के बजट से ये विशेष आलोकित स्तंभ तैयार हो रहे हैं। इसके लिए 10 करोड़ की पहली किश्त जारी की जा चुकी है। नवंबर तक इसका निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। देश विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को ये स्तंभ आकर्षित करेंगे। एयरपोर्ट टर्मिनल के सामने से जाने वाली सड़क में ये 84 स्तंभ स्थापित किए जाएंगे। ह स्तंभ की लंबाई 6 मीटर होगी और यह खास स्टोन से बनाया जा रहा है । प्रोजेक्ट मैनेजर के मुताबिक लगभग 525 मीटर की लंबाई में सीधी रेखा में स्थापित होने वाले इन 84 स्तंभों में जीव 84 लाख योनियों का संकेत होगा, जिससे सृष्टि का सार होगा। एक स्तंभ से दूसरे स्तंभ की दूरी 12 मीटर रखी गई है। हर स्तंभ में भगवान शिव के सहस्त्र नाम भी लिखे जाएंगे। रात के समय इन स्तंभों में स्पेशल लाइटिंग का इंतजाम किया है ताकि अंधेरे में भी ये उतनी ही चमक के साथ आलोकित होते रहें। स्तंभ के पास फूलदार सजावटी पौधे भी रोपित किए जाएंगे। नजदीक बैठने के लिए विशिष्ट बेंच का भी निर्माण किया जायेगा।    

महाकुंभ 2025 : श्रद्धालुओं को कुंभ नगरी की भव्यता का दिव्य दर्शन करवाने सरकार ने भारी भरकम बजट का ऐलान किया

प्रयागराज  महाकुंभ-2025 को लेकर योगी सरकार प्रयागराज के तीर्थों का कायाकल्प करने में युद्धस्तर पर जुटी है। श्रद्धालुओं को कुंभ नगरी की भव्यता और नव्यता का दिव्य दर्शन करवाने के लिए प्रदेश सरकार ने भारी भरकम बजट का ऐलान किया है। अक्षयवट का बड़ा पौराणिक महत्व है। मान्यता के अनुसार, संगम स्नान के पश्चात 300 वर्ष पुराने इस वृक्ष के दर्शन करने के बाद ही स्नान का फल मिलता है। इसलिए तीर्थराज आने वाले श्रद्धालु एवं साधु संत संगम में स्नान करने के बाद इस अक्षयवट के दर्शन करने जाते हैं। जिसके बाद ही उनकी मान्यताएं पूरी होती हैं। सरकार की महत्वाकांक्षी अक्षयवट कॉरिडोर सौंदर्यीकरण योजना का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। महाकुंभ के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान आस्था का प्रमुख केंद्र होगा। प्रभु श्रीराम वन जाते समय संगम नगरी में भारद्वाज मुनि के आश्रम में जैसे ही पहुंचे उन्हें, मुनि ने वटवृक्ष का महत्व बताया था। मान्यता के अनुसार माता सीता ने वटवृक्ष को आशीर्वाद दिया था। तभी प्रलय के समय जब पृथ्वी डूब गई तो वट का एक वृक्ष बच गया, जिसे हम अक्षयवट के नाम से जानते हैं। महाकवि कालिदास के रघुवंश और चीनी यात्री ह्वेन त्सांग के यात्रा वृत्तांत में भी अक्षय वट का जिक्र किया गया है। कहा जाता है कि अक्षयवट के दर्शन मात्र से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। भारत में चार प्राचीन वट वृक्ष माने जाते हैं। अक्षयवट- प्रयागराज, गृद्धवट-सोरों ‘शूकरक्षेत्र’, सिद्धवट- उज्जैन एवं वंशीवट-वृंदावन शामिल हैं। यमुना तट पर अकबर के किले में अक्षयवट स्थित है। मुगलकाल में इसके दर्शन पर प्रतिबंध था। ब्रिटिश काल और आजाद भारत में भी किला सेना के आधिपत्य में रहने के कारण वृक्ष का दर्शन दुर्लभ था। योगी सरकार ने विगत 2018 में अक्षयवट का दर्शन व पूजन करने के लिए इसे आम लोगों के लिए खोल दिया था। पौराणिक महत्व के तीर्थों के लिए योगी सरकार की ओर से कई विकास परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। यहां कॉरिडोर का भी कार्य चल रहा है। अयोध्या से प्रयागराज पहुंचे प्रसिद्ध संत और श्रीराम जानकी महल के प्रमुख स्वामी दिलीप दास त्यागी ने बताया कि अक्षयवट का अस्तित्व समाप्त करने के लिए मुगल काल में तमाम तरीके अपनाए गए। उसे काटकर दर्जनों बार जलाया गया, लेकिन ऐसा करने वाले असफल रहे। काटने और जलाने के कुछ माह बाद अक्षयवट पुन: अपने स्वरूप में आ जाता था। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने अक्षय वट को लेकर जो सौंदर्यीकरण और विकास कार्य शुरू किए हैं वो स्वागत योग्य हैं। महाकुंभ में संगम स्नान के बाद इसके दर्शन से श्रद्धालुओं को पुण्य प्राप्त होगा। रामायण, रघुवंश और ह्वेनत्सांग के यात्रा वृत्तांत में भी अक्षय वट का जिक्र प्रभु श्रीराम वन जाते समय संगमनगरी में भरद्वाज मुनि के आश्रम में जैसे ही पहुंचे उन्हें, मुनि ने वटवृक्ष का महत्व बताया था। मान्यता के अनुसार माता सीता ने वटवृक्ष को आशीर्वाद दिया था। तभी प्रलय के समय जब पृथ्वी डूब गई तो वट का एक वृक्ष बच गया, जिसे हम अक्षयवट के नाम से जानते हैं। महाकवि कालिदास के रघुवंश और चीनी यात्री ह्वेनत्सांग के यात्रा वृत्तांत में भी अक्षय वट का जिक्र किया गया है। कहा जाता है कि अक्षयवट के दर्शन मात्र से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। भारत मेें चार प्राचीन वट वृक्ष माने जाते हैं। अक्षयवट- प्रयागराज, गृद्धवट-सोरों ‘शूकरक्षेत्र’, सिद्धवट- उज्जैन एवं वंशीवट- वृंदावन शामिल हैं। मुगलकाल में रहा प्रतिबंध यमुना तट पर अकबर के किले में अक्षयवट स्थित है। मुगलकाल में इसके दर्शन पर प्रतिबंध था। ब्रिटिश काल और आजाद भारत में भी किला सेना के आधिपत्य में रहने के कारण वृक्ष का दर्शन दुर्लभ था। योगी सरकार ने आम लोगों के लिए खोला था दर्शन का रास्ता योगी सरकार ने विगत 2018 में अक्षयवट का दर्शन व पूजन करने के लिए इसे आम लोगों के लिए खोल दिया था। पौराणिक महत्व के तीर्थों के लिए योगी सरकार की ओर से कई विकास परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। यहां कॉरिडोर का भी कार्य चल रहा है। काटने और जलाने के बाद भी पुन: अपने स्वरूप में आ जाता था वट वृक्ष अयोध्या से प्रयागराज पहुंचे प्रसिद्ध संत और श्री राम जानकी महल के प्रमुख स्वामी दिलीप दास त्यागी ने बताया कि अक्षय वट का अस्तित्व समाप्त करने के लिए मुगल काल में तमाम तरीके अपनाए गए। उसे काटकर दर्जनों बार जलाया गया, लेकिन ऐसा करने वाले असफल रहे। काटने व जलाने के कुछ माह बाद अक्षयवट पुन: अपने स्वरूप में आ जाता था। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने अक्षय वट को लेकर जो सौंदर्यीकरण और विकास कार्य शुरू किए हैं वो स्वागतयोग्य हैं। महाकुंभ में संगम स्नान के बाद इसके दर्शन से श्रद्धालुओं को पुण्य प्राप्त होगा।    

वक्फ बोर्ड को खत्म करने पर बोले इमरान मसूद- ‘कब्रिस्तानों, ईदगाहों को अपने नियंत्रण में लेगी सरकार’

मुरादाबाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया है कि सरकार की योजना वक्फ बोर्ड को खत्म करने तथा कब्रिस्तानों, मस्जिदों और ईदगाहों को अपने नियंत्रण में लेने की है। कांग्रेस के ‘‘संविधान बचाओ संकल्प” सम्मेलन को संबोधित करते हुए मसूद ने सरकार की कथित योजना पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी।” सहारनपुर के सांसद मसूद ने बृहस्पतिवार को सम्मेलन में दावा किया कि वक्फ बोर्ड को खत्म करने का सरकार का कथित कदम उसके इस्तेमाल के लिए निर्धारित भूमि को जब्त करने का सीधा प्रयास है। उन्होंने जोर दिया कि कांग्रेस इन इरादों के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहेगी। मसूद ने बहराइच में हाल ही में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए सवाल किया कि महाराजगंज की घटना के पीड़ितों को न्याय कब मिलेगा जहां घरों और दुकानों को नष्ट कर दिया गया और लोगों पर हमला किया गया। उन्होंने पूछा, “हिंसा और तोड़फोड़ के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अधिकारी कब कार्रवाई करेंगे?” कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने मजबूत लोकतंत्र के महत्व को दोहराते हुए कहा, “हमारी सुरक्षा एक मजबूत संविधान में निहित है। हमें इसकी रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए।” सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे और कई अन्य पार्टी पदाधिकारियों ने भी भाग लिया और लोकतांत्रिक मूल्यों तथा संवैधानिक अखंडता की रक्षा के लिए पार्टी की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।  

Ujjwala Scheme योगी सरकार का दि‍वाली तोहफा! मुफ्त गैस स‍िलेंडर का एलान

लखनऊ  दीपावली का त्योहार बेहद पास आ गया है और इस मौके पर घरों में पकवान बनाने में किसी तरह की दिक्कत ना आए इसके लिए सरकार ने मुफ्त रसोई गैस सिलेंडर का डिस्ट्रीब्यूशन शुरू कर दिया है. दिवाली से पहले करवा चौथ, अहोई अष्टमी जैसे त्योहार आने हैं तो इन सब में वंचितों और गरीब परिवारों को खाना बनाने के लिए परेशान ना होना पड़े, इसका इंतजाम सरकार ने कर दिया है. इस राज्य के बेनेफिशयरीज को बड़ा तोहफा उत्तर प्रदेश सरकार ने दीपावली के मौके पर राज्य के 1.86 करोड़ परिवारों के लिए वादों को पूरा कर दिया है. इस तोहफे के लिए 1,890 करोड़ रुपये एलोकेट किए गए हैं. राज्य सरकार ने आज एक बयान जारी करके ये बताया कि इस पहल के तहत ‘डबल इंजन सरकार’ ने मुफ्त सिलेंडर देने का वादा किया था, इसे पूरा करने के लिए काम चालू कर दिया गया है. बता दें कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत होली और दीपावली के त्योहारों के दौरान राज्य में दो साल से मुफ्त रसोई गैस सिलेंडर का डिस्ट्रीब्यूशन किया जा रहा है. खाद्य और रसद विभाग ने इसके लिए जारी शासन के आदेश के मुताबिक डिस्ट्रीब्यूशन को जल्द से जल्द पूरा करने का जिम्मा उठाया है. मुफ्त सिलेंडर के लिए क्या करना होगा? ये मुफ्त सिलेंडर लेने के लिए महिलाओं को खास तौर पर इंतजार है और अब ये प्रतीक्षा खत्म होने वाली है. इस योजना के तहत आधार सर्टिफिकेशन का प्रोसेस चल रहा है और जिनका आधार प्रमाणीकरण हो गया है, उन्हें दिवाली से पहले फ्री सिलेंडर मिलने की राह खुली है. ये फ्री सिलेंडर उन्हीं बेनेफिशयरीज को मिलेगा जिनके बैंक अकाउंट आधार से लिंक होंगे और वैलिड होंगे. बीते साल भी सरकार ने बांटे थे मुफ्त सिलेंडर यहां की सरकार ने पिछले साल 85 लाख से ज्यादा महिलाओं सहित 1.85 करोड़ परिवारों को मुफ्त रसोई गैस सिलेंडर का डिस्ट्रीब्यूशन किया था. यहां 14.2 किलो के एलपीजी सिलेंडर की कीमत 842.42 रुपये पर है और ये सिलेंडर के दाम सितंबर के मुताबिक हैं. केंद्र सरकार उज्ज्वला योजना के तहत हर बेनेफिशयरी को 300 रुपये की सब्सिडी देती है जबकि राज्य सरकार बाकी छूट को खुद वहन करती है. दीपावली से पहले कर्मचारियों के लिए भी खुशखबरी: बता दें कि इसके साथ ही योगी सरकार प्रदेश के करीब 12 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बहुत जल्द महंगाई भत्ते भी का एलान करने वाली है. दीपावली से पहले बोनस की घोषणा की भी उम्मीद है. इससे पहले बुधवार को केंद्र की भाजपा सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए तीन माह के एरियर के साथ तीन प्रतिशत डीए देने की घोषणा की है. इस घोषणा के साथ ही राज्य कर्मचारियों में भी उम्मीद बढ़ गई है कि उन्हें भी महंगाई भत्ता और बोनस दिया जाएगा. उम्मीद है कि दीपावली से पूर्व सरकार इसे जारी कर देगी.

बसपा इस उपचुनाव में दलित वोटों के बीच अपनी पैठ को एक बार फिर से साबित करे

लखनऊ लोकसभा चुनाव में जीरो पर आउट हो चुकी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सामने उपचुनाव में अपना कुनबा बढ़ाने की एक बड़ी चुनौती आ गई है। पार्टी को प्रतिदिन घटते जनाधार का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बसपा के लिए अपने प्रभाव को बचाने के लिए जरूरी हो गया है कि इस उपचुनाव में दलित वोटों के बीच अपनी पैठ को एक बार फिर से साबित करे। राजनीतिक जानकारों की मानें तो जिन नौ सीटों पर अभी उपचुनाव होने जा रहे हैं, उनमें से एक भी सीट पर बसपा का खाता नहीं खुला था। बसपा ने महज बलिया की रसड़ा सीट पर जीत दर्ज की थी। अब अगर 2022 के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो बसपा आंबेडकर नगर की कटेहरी सीट पर तीसरे नंबर पर आई थी। यहां उनके प्रत्याशी प्रतीक पांडेय को 58,186 वोट मिले। इस सीट पर सपा के लालजी वर्मा ने जीत दर्ज की थी। मीरापुर विधानसभा में बसपा तीसरे स्थान पर रही थी। उसके उम्मीदवार को 23,733 वोट मिले थे। इस सीट पर रालोद के उम्मीदवार चंदन चौहान ने जीत दर्ज की थी। गाजियाबाद में भी बसपा तीसरे नंबर पर थी। यहां उसके उम्मीदवार को 32,554 वोट मिले थे। यहां पर भाजपा के उम्मीदवार अतुल गर्ग को जीत मिली थी। कुंदरकी विधानसभा में भी बसपा तीसरे स्थान पर रही। उसके उम्मीदवार को 42,645 वोट मिले थे। कानपुर के सीसामऊ सीट पर बसपा चौथे नंबर पर थी। इस सीट से पार्टी के उम्मीदवार को महज 2,891 वोट मिले थे। जबकि यहां से सपा के हाजी इरफान सोलंकी ने जीत दर्ज की थी। मैनपुरी की करहल सीट पर बसपा प्रत्याशी 15,643 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर था। यहां से सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जीत दर्ज की थी। उनके सांसद चुने जाने बाद इस सीट पर चुनाव हो रहा है। इसी तरह मिर्जापुर की मझवां सीट पर भी बहुजन समाज पार्टी तीसरे नंबर पर आई थी। उसके उम्मीदवार को 52,825 वोट मिले थे। यहां से निषाद पार्टी के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी। खैर सीट पर बसपा दूसरे नंबर पर थी। पार्टी के उम्मीदवार को 64,996 वोट मिले थे। इस सीट पर भाजपा के उम्मीदवार अनूप प्रधान ने जीत दर्ज की थी। फूलपुर में 32,869 वोटों के साथ बसपा तीसरे स्थान पर रही थी। यह सीट भाजपा ने जीती थी। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत का कहना है कि उपचुनाव बसपा के सामने बड़ा मौका लेकर आया है। अकेले दम पर मैदान में उतरकर अपने कुछ सीटों पर उम्मीदवार भी उतारे हैं। उनके जो भी उम्मीदवार हैं वो जातीय समीकरण के सटीक हैं। नौ में से कुछ सीटें ऐसी हैं जहां पर बसपा का जनाधार ठीक रहा है। मझवां सीट पर बसपा कई बार जीत दर्ज कर चुकी है। इसी तरह मीरापुर और कटेहरी सीट बसपा के लिए ज्यादा मुफीद रही है। लेकिन वर्तमान समय में चुनाव दर चुनाव में मिली हार की वजह से उसकी हालत पतली है। बसपा को इस चुनाव में सिद्ध करना होगा। मत प्रतिशत बढ़ाकर जनाधार साबित करना होगा। इस चुनाव के जरिए ही बसपा दलित मतदाताओं का सही आकलन भी कर सकेगी। हालांकि, बसपा पहले उपचुनाव से दूरी बनाती थी। लेकिन इस बार बहुत पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने आगे कहा कि बिना किसी दल के साथ गठबंधन किए ही पार्टी अकेले दम पर मैदान में है। हालांकि, पार्टी के पास लीडरशिप का भी संकट है। इस कारण यह चुनाव उसके लिए बड़ी चुनौती है। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल कहते हैं कि उपचुनाव में हमारी पार्टी अकेले दम पर मैदान में है। हमारी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा सीट जीतकर बहन जी के हाथों को मजबूत करें। चुनाव को लेकर लगातार नेताओं की छोटी बड़ी जनसभाएं चल रही हैं। हमने कटेहरी से अमित वर्मा मझवां से दीपू तिवारी, फूलपुर में शिव बरन पासी को उम्मीदवार बनाया गया है। बचे हुए नाम एक दो दिन में आ जाएंगे। जहां-जहां चुनाव है वहां चौपाल और जनसभाएं चल रही हैं। बसपा सुप्रीमो ने कोऑर्डिनेटरों से अपने-अपने क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर कैंप करने का निर्देश दिया है। बसपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा मीडिया हमको लड़ाई में नहीं दिखाती है। जबकि हमारी तैयारी सभी दलों से बहुत पहले से है। कार्यकर्ता पूरी दम से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर का मीडिया हौव्वा खड़ा कर रही है। ज्ञात हो कि यूपी में निर्वाचन आयोग द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार 18 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नामांकन की अंतिम तिथि 25 अक्टूबर होगी। 28 अक्टूबर को नामांकन की जांच के बाद नाम वापसी की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर होगी। मतदान 13 नवंबर और मतगणना 23 नवंबर को होगी।  

बहराइच में जुमे पर हेलीकॉप्टर से निगरानी, मस्जिदों के आस पास भारी पुलिस बल तैनात, सूनी है सड़कें

बहराइच बहराइच में बवाल के बाद जुमे की नमाज को लेकर शहर जिले भर में कड़ी सतर्कता बरती जा रही है। सड़कें सूनी हैं। मस्जिदों के आस पास भारी पुलिस बल तैनात है। डीआईजी व एसपी स्वयं पूरे लाव लश्कर के साथ भ्रमण कर रहे हैं। संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है। अभी तक सब कुछ शांति पूर्वक चल रहा है। महसी के महराजगंज में शुक्रवार दोपहर नमाज के समय हेलीकाप्टर से निगरानी हो रही है। महसी के महराजगंज में हुई हिंसा के पांच आरोपितों के गुरुवार को गिरफ्तार होने व पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दो लोगों के होने के बाद से बने दहशत और तमाम आशंकाओं के मद्देनजर शुक्रवार को पुलिस की ओर से जुर्म के नमाज के दौरान सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। सुबह से ही देवी पाटन रेंज के डीआईजी व एसपी पूरे लाव लश्कर के साथ विभिन्न इलाकों व संवेदनशील क्षेत्रों में भ्रमण कर रहे हैं। अभी तक सब कुछ शांति पूर्ण तरीके से चल रहा है। कहीं किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। नमाजी मस्जिदों को प्रस्थान कर रहे हैं।   गोंडा पुलिस भी अलर्ट, इलाकों में पुलिस के जवानों की गश्त जारी उधर, पड़ोसी जिला गोंडा में भी पुलिस भी अलर्ट मोड में आ गई है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है। सिपाही से लेकर थानेदार तक क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं। जुमे की नमाज को लेकर को गुरुवार रात को एसपी ने पुलिस बल के साथ शहर में गश्त कर पुलिस कर्मियों को आवश्यक निर्देश भी दिए है। जुमे में खासतौर पर अलग-अलग हिस्से में अफसरों ने फोर्स तैनाती करवाई है। लोकल इंटेलीजेंस इकाई को भी रात से सक्रिय कर दिया गया है। जुमे की नमाज के दौरान शुक्रवार को सुबह से पुलिस जिलेभर में अलर्ट मोड में रही। पुलिस अधिकारियों के निर्देशन पर सभी पुलिसकर्मी सतर्क रहे। नमाज को देखते हुए मस्जिदों के अलावा विभिन्न स्थानों पर पुलिस चप्पे-चप्पे पर तैनात रही। एसपी विनीत जायसवाल ने स्वयं मोर्चा संभाल रखा था। उन्होंने कोतवाली नगर क्षेत्र के कस्बे का भ्रमण किया। भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश संवेदनशील इलाके में गश्त बढ़ाने के साथ ही सोशल मीडिया पर भी चौकसी शुरू हो गई है। भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। माहौल बिगाड़ने का प्रयास करने वालों को चिन्हित कर निरोधात्मक कार्रवाई करने का अफसरों ने निर्देश दिया है।

व्यक्ति ने 112 पर फोन करके बताया मेरा घरवालों से झगड़ा हुआ है में फांसी लगाने जा रहा हु, मात्र 6 मिनट में पुलिस ने बचा ली जान

मेरठ उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने 112 पर फोन करके बताया कि उसका अपने परिवार के साथ झगड़ा हुआ है और वह तंग आकर फांसी लगाने जा रहा है। इस सूचना के तुरंत बाद, पुलिस ने अपनी सुझबूझ का इस्तेमाल करते हुए मात्र 6 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंच गई। पुलिस ने युवक को आत्महत्या करने से बचाने के लिए तुरंत कार्रवाई की। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि संकट के समय में पुलिस की तत्परता कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। युवक की जान बचाने के लिए पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की सभी ने सराहना की।   दरअसल, मामला यह है कि युवक का संपत्ति को लेकर अपने परिवार से विवाद चल रहा था। जिसके बाद उसने गुस्से में आकर आत्महत्या करने का फैसला लिया। शख्स ने फांसी लगाने से पहले 112 पर फोन कर बताया कि उसका अपने परिवार के साथ संपत्ति को लेकर झगड़ा हुआ है। अब वह फांसी लगाने जा रहा है। यह कहकर उसने फोन काट दिया। उसने फोन पर ना ही अपने गांव का नाम बताया और ना ही घटनास्थल का नाम बताया। जिसके बाद पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने फोन कॉल करने वाली की लोकेशन के हिसाब से तत्काल कार्रवाई करते हुए इस घटना को पीआरवी 0584 को दे दिया।  मेरठ में एक परिवार में संपत्ति बंटवारे को लेकर झगड़ा हुआ। एक बेटा नाराज था जिसने UP 112 को कॉल किया और कहा कि परिजनों से झगड़ा हुआ है, मैं फाँ~सी लगाकर मर रहा हूँ। ना जनपद का नाम बताया और ना ही घटनास्थल, और कॉल काट दिया।     इस घटना को देखते हुए पीआरवी कर्मी लोकेशन और घटनास्थल की जांच में जुटाने में लग गए। पीआरवी कर्मी ने बिना देर लगाए मात्र 6 मिनट के अंदर ही घटनास्थल का पता लगा कर पहुंच गए। जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने घर के अंदर झांककर देखा तो युवक लिंटर में रस्सी बांधकर फंदे पर लटका हुआ था। जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने बिना देर किए कमरे का दरवाजा तोड़ दिया। हालंकि इस दौरान युवक जीवित था। इसके बाद युवक को दो पुलिसकर्मियों ने अपने ऊपर उठा लिया, इसके बाद परिजनों की मदद से हंसिए से रस्सी को काटकर उसे सुरक्षित नीचे उतारा गया। इस तरह से पुलिस की सुझबूझ से शख्स की जांन बच गई। SP का बयान मेरठ के एसपी सिटी, आयुष विक्रम सिंह, ने कहा कि घटना की सूचना मिलने पर तुरंत अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। इसके बाद उन्होंने युवक की जान बचा ली और उसे थाने लाया गया। युवक को पूछताछ के बाद डॉक्टर के पास भेजा गया है। पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि मात्र 6 मिनट के भीतर पीआरवी की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई, जो उनकी तत्परता का प्रमाण है।  

यूपी में बीजेपी ने 13 नवंबर की जगह 20 नवंबर को वोटिंग कराने की मांग की, चुनाव आयोग पहुंची भाजपा

लखनऊ यूपी में नौ सीटों पर होने वाले उपचुनाव को एक हफ्ते टालने के लिए बीजेपी चुनाव आयोग पहुंची है। बीजेपी ने 13 नवंबर की जगह 20 नवंबर को वोटिंग कराने की मांग की है। बीजेपी ने यूपी के मुख्य निर्वाचल अधिकारी इस बाबत पत्र लिखा है। पत्र में कई जिलों का जिक्र करते हुए बताया है कि 15 नवंबर को कार्तिक पूर्णिया का स्नान पर्व होने के कारण लोग दो तीन दिन पहले ही इसमें भागीदारी करने चले जाएंगे। ऐसे में बहुसंख्यक मतदाता वोट देने से वंचित रह जाएंगे। गौरतलब है कि दो दिन पहले ही चुनाव आयोग ने यूपी की दस में से नौ सीटों पर चुनाव की घोषणा की थी। आयोग के अनुसार 18 नवंबर को नामांकन के साथ चुनावी प्रक्रिया शुरू होगी। 13 नवंबर को वोटिंग और 23 नवंबर को मतगणना होगी। यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखे पत्र में बीजेपी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कार्तिक पूर्णिमा के स्नान पर्व और पूजन का धार्मिक महत्व है। 15 नवम्बर 2024 को कार्तिक पूर्णिमा का स्नान पर्व है और बड़ी संख्या में लोग कार्तिक पूर्णिमा के स्नान एवं पूजन करने के लिए जाते हैं। 13 नवंबर को चुनाव होने से उन्हें जाने में परेशानी हो सकती है। बीजेपी ने यह भी कहा कि इसके साथ कुन्दरकी, मीरापुर, गाजियाबाद और प्रयागराज में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मेला में प्रतिभाग एवं पूजन के लिए लोग 3-4 दिन पहले ही चले जाते है। कार्तिक पूर्णिमा के कारण बहुसंख्यक मतदाता मतदान से वंचित हो जाएंगे। आयोग का भी मानना है कि प्रत्येक मतदाता का शत-प्रतिशत मतदान कराया जाये। ऐसी स्थिति में शत-प्रतिशत मतदान सम्भव नहीं है इसीलिए उपचुनाव की तारीख 13 नवम्बर 2024 के स्थान 20 नवम्बर 2024 करना बेहतर होगा। ऐसा करने से प्रत्येक मतदाता का मतदान सुनिश्चित हो सकेगा। गौरतलब है कि यूपी में की इस समय दस विधानसभा सीटें खाली हैं। इनमें से नौ सीटों मैनपुरी की करहल, अलीगढ़ की खैर, बिजनौर की मीरापुर, प्रयागराज की फूलपुर, गाजियाबाद की गाजियाबाद, मिर्जापुर की मझवां, अम्बेडकरनगर की कटेहरी, संभल की कुंदरकी और कानपुर की सीसामऊ पर चुनाव का एलान हो गया है। अयोध्या की मिल्कीपुर सीट का मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण चुनाव नहीं हो रहा है।

युवती को दुल्हन की साज-सज्जा में फोटो शूट कराने का ऐसा जुनून चढ़ा कि उसने शादी को खेल समझ लिया, दूल्हे के अरमान हुए तार-तार

अमरोहा आए दिन शादी-बारात के अलग-अलग तरह के मामले आते रहते हैं। शादी के बाद कभी प्रेम-प्रसंग के केस देखे जाते हैं तो कभी लुटेरी दुल्हन का। लेकिन यूपी के अमरोहा से शादी से जुड़ा एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां एक लड़की की महज 12 दिन के अंदर शादी हो गई। लड़की ने भी खुशी-खुशी शादी कर ली, लेकिन सुहागरात पर दूल्हे ने जब लड़की का घूंघट उठाया तो दुल्हन ने दूल्हे के अरमानों पर पानी फेर दिया। दुल्हन ने दूल्हे को जो बातें बताईं उसे सुनकर मानो दूल्हे के पैरों तले से जमीन ही खिसक गई हो। दुल्हन ने केवल अपने परिवार की इज्जत को दांव पर लगाया बल्कि दुल्हे के परिवार की इज्जत भी तार-तार कर दी। दरअसल शहर की ही रहने वाली एक युवती को दुल्हन की साज-सज्जा में फोटो शूट कराने का ऐसा जुनून चढ़ा कि उसने शादी को खेल समझ लिया। युवती के कहने पर परिवार ने अच्छा वर तलाशा और अपनी क्षमता भर अच्छी से अच्छी शादी करा दी। युवती भी खुशी-खुशी निकाह से लेकर विदाई तक की ढेरों तस्वीरें कराती रही लेकिन सुहागरात पर यह कहकर उसने शौहर के अरमानों पर पानी फेर दिया कि उसने शादी केवल खुद को दुल्हन के तौर पर देखने के लिए की थी। बताया जा रहा है कि लड़की को फोटो खिंचवाने का ऐसा जुनून चढ़ा कि उसके घर वाले भी लड़की के मंसूबों को भांप न पाए और उसकी जिद करने पर आनन-फानन में बेटी की शादी करीब 12 दिन पूर्व शहर के ही रहने वाले एक युवक के साथ की थी। लड़की वालों ने बतौर दहेज सारा सामान दिया था, साथ ही एक बैंक्वेट हॉल में रिश्तेदारों और परिचितों की बड़ी दावत भी की थी। लेकिन बेटी के दिल-ओ-दिमाग में जो खुराफात चल रही थी, उससे पिता और पूरा परिवार अनजान था। लड़की के सिर पर खुद को दुल्हन के जोड़े में सजा-धजा देखने और विदाई विदाई का फोटो शूट कराने का जुनून सवार था। अपने इसी शौक को पूरा करने के लिए उसने पिता से शादी कराने की जिद की थी। घूंघट उठाते ही दुल्हन ने दूल्हे का पकड़ा हाथ विदाई के बाद सुर्ख जोड़े में जेवरों से लदी दुल्हन जब ससुराल पहुंची तो उसका ये शौक भी पूरा हो चुका था। शादी के बाद पहली ही रात में शौहर ने जब कमरे में आकर घूंघट उठाने की कोशिश की तो दुल्हन ने साफ कह दिया कि उसका प्यार कोई और है। उसने तो शादी तो सिर्फ खुद को दुल्हन के तौर देखने और फोटो शूट कराने के लिए की थी। सुहागरात में दुल्हन के मुंह से यह बात सुनकर दूल्हें के पांव की जमीन खिसक गई। मियां-बीवी के बीच चल रहा विवाद बढ़ा तो परिजन भी कमरे में पहुंच गए। दुल्हन ने साफ कहा कि उसे फौरन तलाक चाहिए। खुद के साथ हुए इस फरेब पर दूल्हे के होश फना हो गए। किसी भी तरह दुल्हन के न मानने पर आखिरकार पंचायत बुलानी पड़ी। 48 घंटे में हो गया तलाक पंचायत का नजीता ये निकला कि धूमधाम से हुई शादी 48 घंटे के भीतर टूट गई। दहेज का सामान साथ दुल्हन को उसके घर भेज दिया गया। बाद में काजी से राय-मशवरे के बाद दोनों का तलाक भी हो गया। मामले में किसी भी पक्ष ने पुलिस स्तर अपनी शिकायत दर्ज नहीं कराई है। वहीं, शरीयत के मुताबिक मेहर अदा करने के बाद बदनामी और रिश्तेदारों के सवालों से आजिज दूल्हा शहर छोड़कर दिल्ली अपने किसी रिश्तेदार के घर चला गया।

मिल्कीपुर में चुनाव: इंटरनल सर्वे में बीजेपी हार रही है, इसीलिए टाला इलेक्शन: अखिलेश यादव

लखनऊ सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में मिल्कीपुर को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यहां कहा कि मिल्कीपुर का उप चुनाव उनके अपने सर्वे में बीजेपी के लोग हार रहे थे। बीजेपी के इंटरनल सर्वे में बीजेपी को पता चल गया था कि वह मिल्कीपुर में चुनाव हार रहे हैं इसलिए वहां चुनाव टाल दिया। वहा पीड़ीए से जुड़े बीएलओ हटा दिए गए । मुख्यमंत्री खुद कई बार वहां गए प्रशासन के लोगों से रिपोर्ट ली तो उनको पता चला कि वह मिल्कीपुर में चुनाव हार रहे हैं। अब अपनी बदनामी बचाने के लिए कोर्ट और इलेक्शन कमीशन का चक्कर लगा रहे हैं। जिससे वहां चुनाव हो जाए। अगर दो दिनों में वहां काम नहीं कर पाए तो वहां चुनाव नहीं हो पाएगा। बाल्मीकि जयंती पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यह बाते मीडिया से कही। उन्होंने कहा कि बाल्मीकि जी रामायण के रचयिता हैं उनका समाज में पूज्यनीय और भगवान का दर्जा है। जो रामायण उन्होंने लिखी मैं आज उनकी जयंती के दिन उनसे प्रेरणा लेते हुए संकल्प लेते हैं कि समाज में भेदभाव खत्म हो। सामाजिक न्याय के रास्ते पर हम चल करके उन्हें याद करते हैं। बहराइच हिंसा पर अखिलेश ने उठाया सवाल बहराइच हिंसा पर अखिलेश यादव ने सवाल उठाया। बीजेपी पर निशाना साधा। बहराइच मामले पर उन्होंने कहा कि क्या प्रशासन को जानकारी नहीं थी वहां क्या-क्या हो रहा है ? अब प्रशासन और शासन मिलकर के अन्याय कर रहा है। जिस तरह नेताजी ने और समाजवादी पार्टी ने बाल्मीकि जयंती पर छुट्टी की थी वाल्मीकि समाज को जो सुविधा जो सम्मान मिलना चाहिए। जब समाजवादी लोग सरकार में आएंगे तो उन्हें सम्मान देने का काम हम करेंगे। यूपी में कांग्रेसों की सीटों पर फैसला जल्द महाराष्ट्र मैं कल जा रहा हूं और इंडिया गठबंधन वहां जीते इस पर ज़ोर है। हमारी कोशिश होगी कि हम इंडिया गठबंधन के साथ चुनाव लड़ें। हमने सीटें मांगी हैं और हमको उम्मीद है कि जहां हमारे दो विधायक थे वह हमें ज्यादा सीटें देंगे। हम वहां पर मजबूती से चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस के साथ उत्तर प्रदेश में गठबंधन को लेकर जल्दी तय हो जाएगा कि हम कितनी सीटों पर चुनाव लड़ना है। राजनीति में साथ आना साथ काम करना यह बहुत अच्छी परंपरा है। जम्मू में लोकतंत्र की पहली जीत हुई है। जम्मू कश्मीर को अब पूरे राज्य का दर्जा मिल जाना चाहिए। जो लोग डिवाइड एंड रूल करना चाहते हैं वह सोच समझी साजिश के तहत समाज को बांटने का काम कर रहे हैं। जिन्होंने अंग्रेजों से सीखा हो डिवाइड एंड रूल उनसे आप क्या उम्मीद कर सकते हैं।

आज मथुरा में दर्दनांक सड़क हादसा, चार मजदूरों की मौत, पांच लोग घायल, सीएम योगी ने तुरंत लिया संज्ञान

लखनऊ यूपी के मथुरा में गुरुवार को एक भीषण सड़क हादसा हुआ। हादसे में चार लोगों की मौत हो गई और पांच लोग घायल हो गए। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे का संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर जिला प्रशासन के अधिकारियों को उनके समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की है। सीएम योगी ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। बता दें कि मथुरा में गुरुवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में चार मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई और 5 लोग घायल हुए। मृतकों में दो महिला और दो बच्चे भी शामिल हैं। सभी मृतक और घायल बिहार के गया जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार ये मजदूर अलीगढ़ से कोसी होकर मजदूरी करने पिकअप में सवार होकर हरियाणा को जा रहे थे। बताया जा रहा है कि सुबह करीब पांच बजे वाहन चालक को नींद की झपकी लगी और पिकअप बिजली के खंभे से जा टकराई और यह हादसा हुआ। खंभे में टकराते ही गाड़ी में करंट दौड़ गया, इसके बाद लोग डरकर लोग इधर-उधर कूदने लगे। इसी बीच, करंट से बचने के लिए पिकअप चालक ने गाड़ी बैक किया और सड़क पर गिरे लोगों को कुचल दिया। हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। वहीं, घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।  

बहराइच हिंसा के 2 आरोपियों का एनकाउंटर, आरोपी बहराच हिंसा में मारे गए रामगोपाल मिश्रा की हत्या में शामिल थे

बहराइच उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में हुई हिंसा के 2 आरोपियों का एनकाउंटर हो गया है. दोनों आरोपी नेपाल भागने की फिराक में थे. घटना वाले दिन से पुलिस इनके पीछे लगी हुई थी. आज पुलिस को इनकी लोकेशन लगी, जिसके बाद इनको ट्रैक किया गया. आरोपियों के नाम सरफराज और तालिब है. दावा किया जा रहा है कि दोनों आरोपी बहराच हिंसा में मारे गए रामगोपाल मिश्रा की हत्या में शामिल थे. इन्होंने ही साथियों संग मिलकर रामगोपाल पर गोली चलाई थी. घटना के वक्त के कुछ वीडियोज सामने आए हैं, जिनमें अब्दुल हामिद की छत पर चार से पांच लोग नजर आ रहे हैं.   बहराइच में ऐसे भड़की थी हिंसा आपको बता दें कि बहराइच के थाना हरदी क्षेत्र के रेहुआ मंसूर गांव निवासी रामगोपाल मिश्रा बीते रविवार की शाम करीब 6 बजे दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए निकले जुलूस में शामिल था. ये जुलूस जब महराजगंज बाजार में समुदाय विशेष के मोहल्ले से गुजर रहा था तो दो पक्षों में कहासुनी हो गई. आरोप है कि इस दौरान छतों से पत्थर फेंके जाने लगे, जिससे विसर्जन में भगदड़ मच गई. इस बीच रामगोपाल को एक घर की छत पर गोली मार दी गई, जिससे उसकी मौत हो गई. रामगोपाल की मौत की खबर के बाद महराजगंज कस्बे में बवाल शुरू हो गया. आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने आरोपी के घर समेत कई वाहनों में तोड़फोड़ की और उसमें आग लगा दी. हिंसा के दौर अगले दिन भी जारी रहा. जिसके चलते जिले में भारी पुलिस फोर्स बुलानी पड़ी. खुद सीएम योगी ने मामले का संज्ञान लिया. फिलहाल, हालात सामान्य हैं.

पूर्व केंद्रीय मंत्री की बेटी से कारोबारी ने साढ़े तीन करोड़ हड़पे, FIR दर्ज

गाजियाबाद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पूर्व केंद्रीय मंत्री सेवानिवृत्त जनरल वीके सिंह की बेटी से 3.5 करोड़ का फ्रॉड हुआ. लोहा कारोबारी आनंद प्रकाश के खिलाफ उन्होंने मामला दर्ज करवाया है. कविनगर थाना पुलिस ने इसकी जांच शुरू कर दी है. वीके सिंह की बेटी का आरोप है कि आनंद प्रकाश ने उनसे मकान बेचने के नाम पर 3.5 करोड़ रुपये ऐंठ लिए. कुछ दिन पहले ही वीके सिंह ने आनंद प्रकाश और एक मीडियाकर्मी पर गलत तथ्यों के आधार पर खबर चलाने का मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस ने बतया- वीके सिंह की बेटी योगजा सिंह ने लोहा कारोबारी आनंद प्रकाश पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है. आरोप है कि लोहा कारोबारी ने मकान बेचने के नाम पर पूर्व मंत्री की पुत्री से साढ़े तीन करोड़ रुपए हड़प लिए. थाना कविनगर पुलिस ने बुधवार को इस केस में FIR दर्ज करके जांच शुरू कर दी है. 2014 को हुआ था मकान का सौदा योगजा सिंह के मुताबिक- 14 जून 2014 को उनका सौदा राजनगर स्ठित मकान को लेकर आनंद प्रकाश से साढ़े पांच करोड़ रुपए में हुआ. 10 लाख रुपए बतौर बयाना दिए गए थे. 15 जुलाई 2014 को फिर उन्हें इस मकान पर कब्जा मिल गया. योजना ने कहा कि इस मकान पर मुझे लोन कराना था. इसलिए मैंने साढ़े 33 लाख रुपए आनंद प्रकाश के खाते में ट्रांसफर किए. मैं उनसे मकान के कागजात मांगती रही, लेकिन नहीं मिले. कागज देने की एवज में मुझसे और रुपए मांगे जाते रहे. इसलिए साल-2018 में एक करोड़ रुपए, 15 नवंबर 2019 को एक करोड़ रुपए और 12 अक्टूबर 2023 को एक करोड़ रुपए मैंने दे दिए. इस तरह कुल राशि 3 करोड़ 48 लाख रुपए आनंद प्रकाश पर पहुंच गई. कब्जा करने का था इरादा वीके सिंह की बेटी ने आरोप लगाया- 21 अक्टूबर 2023 को मेरा दो करोड़ रुपए का लोन बैंक से स्वीकृत हो गया. इसके बाद मैंने आनंद प्रकाश से मकान की रजिस्ट्री कराने के लिए कहा. मेरे बार-बार कहने के बावजूद दूसरे पक्ष ने मकान का बैनामा नहीं कराया. उनकी मंशा मुझे इस मकान से बेदखल करके अपना कब्जा करने की थी. अब मुझे पता चला है कि आनंद प्रकाश से पहले से ही इस मकान पर लोन लिया हुआ है.  

लेफ्टिनेंट की आत्महत्या के बाद कैप्टन पत्नी ने की आत्महत्या, लिखा- पति के साथ करना अंतिम संस्कार

आगरा आर्मी कैप्टन ने एक मिलिट्री कपल ने मंगलवार को एक-दूसरे से 250 किलोमीटर दूर रहते हुए कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। पति भारतीय वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट थे, जबकि प‍त्नी सेना में कैप्टन। कुछ ही घंटों के भीतर दोनों के शव बरामद किए गए। पत्नी का शव दिल्ली कैंट की ऑफिसर्स मेस में मिला, जबकि पति की लाश आगरा के क्वार्टर्स में मिली है। फ्लाइट लेफ्टिनेंट दीन दयाल दीप (32) आगरा के खेरिया वायुसेना स्टेशन पर तैनात थे और उनकी पत्नी कैप्टन रेणु तंवर उसी शहर के सैन्य अस्पताल में तैनात थीं। पति के साथ ही करना अंतिम संस्कार… दिल्ली में पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है जिसमें महिला अधिकारी ने लिखा है कि वह चाहती हैं कि उनका अंतिम संस्कार पति के साथ ही किया जाए। IAF अधिकारी के कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। पति-पत्नी ने ऐसा कदम क्यों उठाया, यह अभी तक पता नहीं चल सका है। परिजनों के मुताबिक, दोनों ने लव मैरिज की थी। मां के इलाज के लिए आईं हुईं थी दिल्ली फ्लाइट लेफ्टिनेंट दीन दयाल दीप (32) की पोस्टिंग आगरा के खेरिया एयरफोर्स स्टेशन पर थी। उनकी पत्नी, कैप्टन रेनू तंवर यहीं के मिलिट्री अस्पताल में तैनात थीं। रेनू अपनी बीमार मां के इलाज के लिए दिल्ली आई हुई थीं। चिंता या तनाव में नहीं दीप आगरा के डिप्टी डीसीपी (सिटी) सूरज कुमार राय ने कहा कि उन्हें एयरफोर्स स्टेशन के अधिकारियों से घटना की जानकारी मिली। दीप मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले हैं। राय के मुताबिक, सोमवार रात डिनर के दौरान वह अपने सहकर्मियों संग हंसी-मजाक कर रहे थे। स्टेशन के स्टाफ ने बताया कि अपने क्वार्टर्स के लिए विदा लेते हुए दीप के चेहरे पर चिंता या तनाव में नहीं थे। दरवाजा तोड़ा फंदे से लटके मिले जब मंगलवार देर तक दीप की नींद नहीं खुली तो स्टाफ ने दरवाजा तोड़ दिया। पुलिस के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम में मौत की वजह दम घुटना सामने आई। दीप का परिवार आगरा पहुंच रहा है और शायद तब इस भयावह कदम के पीछे की वजह का पता चले। दोनों ने की लव-मैरिज की थी वहीं, दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, कैप्टन तंवर अपने भाई सुमित और मां कौशल्या के साथ 14 अक्टूबर को रात 8 बजे गेस्टहाउस पहुंची थीं। वह राजस्थान की रहने वाली थीं। गरुड़ शरत ऑफिसर्स मेस में तैनात हवलदार दिनेश कुमार ने पुलिस को कैप्टर तंवर की आत्महत्या के बारे में जानकारी दी।दिल्ली के एक पुलिसकर्मी ने बताया, ‘जब उसने आत्महत्या की, तब उसकी मां और भाई एम्स में थे। हमें उसके पति के बारे में बाद में पता चला। उन्होंने 2 साल पहले प्रेम विवाह किया था।’

संभल में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रंगदारी मांगने के आरोप में अरेस्ट

 संभल यूपी के संभल जिले में पुलिस ने 5 लाख रुपए की रंगदारी मांगने और धमकी देने के आरोप में कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने कांग्रेस जिला अध्यक्ष को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जिसके बाद अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद उनको जेल भेज दिया. कांग्रेस जिलाध्यक्ष और उनके भाई सहित तीन लोगों पर उनके ही गांव के रहने वाले शख्स ने फैक्ट्री लगाने के नाम 5 लाख रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था, जिसके बाद से कोतवाली पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही थी. दरअसल, सदर कोतवाली इलाके के मोहम्मदपुर टांडा गांव के निवासी देशराज ने चार दिन पहले 11 अक्टूबर को कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर गांव के ही रहने वाले कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष विजय शर्मा, जिलाध्यक्ष के भाई सुभाष शर्मा और सुधीर शर्मा के द्वारा प्लॉट निर्माण करने के नाम पर 5 लाख रुपए की रंगदारी मांगने का आरोप लगाते हुए बीएनएस की धारा 308(5) ,351(3) के तहत मुकदमा दर्ज कराया था.   मुकदमा दर्ज होने के बाद कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने मुकदमे को फर्जी बताते हुए धरना देकर विरोध भी जताया था. उधर, मुकदमा दर्ज होने के बाद संभल कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और चौकी प्रभारी आशीष तोमर मामले की जांच पड़ताल में लगे हुए थे. जिसके बाद सदर कोतवाली प्रभारी और चौकी प्रभारी ने कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय शर्मा को 5 लाख रुपए की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने कांग्रेस जिला अध्यक्ष आरोपी विजय शर्मा को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया, जहां दोनों पक्षों की तरफ से अपनी-अपनी दलीलें पेश की गईं. जिसके बाद सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय शर्मा को जेल भेज दिया. मामले में एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि संभल कोतवाली पुलिस को 11 अक्टूबर को सूचना मिली थी कि कोतवाली इलाके के मोहम्मदपुर टांडा गांव के निवासी देशराज नामक व्यक्ति के पास अपनी जमीन का बैनामा होने के बावजूद विजय शर्मा और उसके साथी देशराज को इंटरलॉकिंग की फैक्ट्री नहीं लगने दे रहे हैं. इस मामले की जांच पड़ताल की गई तो जानकारी मिली कि वास्तव में 5 लाख रुपए की डिमांड की गई थी. इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश करने पर एक आरोपी विजय शर्मा को गिरफ्तार किया गया है और उसके अन्य साथियों की तलाश की जा रही है. इसके खिलाफ पहले से ही एससी एसटी एक्ट, धमकियां देने और मारपीट करने के पांच मुकदमे दर्ज है. कांग्रेस जिला अध्यक्ष पर दर्ज हैं कई मुकदमे संभल कोतवाली पुलिस ने कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष विजय शर्मा को 5 लाख रुपए की रंगदारी मांगने की आरोप में भले ही अब गिरफ्तार किया है लेकिन पुलिस अधिकारियों की माने तो कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय शर्मा के खिलाफ एससी एसटी एक्ट, धमकियां देने और मारपीट करने की पांच मुकदमे पहले से भी दर्ज हैं. जिसमें कई मुकदमों का ट्रायल अभी भी कोर्ट में चल रहा है. वहीं, जिला अध्यक्ष विजय शर्मा का कहना है कि मुकदमा दर्ज करा कर मेरे ऊपर रंगदारी मांगने के जो आरोप लगाए गए हैं वह आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है. पुलिस प्रशासन केवल सरकार की दबाव में ही काम कर रहा है और वैसे भी बीजेपी सरकार में ब्राह्मण समाज की हमेशा से ही अनदेखी होती रही है.  

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