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रूस के कलाकारों को अयोध्या दीपोत्सव में मंच उपलब्ध करा चुकी है योगी सरकार

एवगेनी बनेंगे राम, दारिया निभाएंगी सीता का किरदार, मुरात लक्ष्मण और दिमित्री बनेंगे हनुमान दोनों देशों के बीच संबंधों को मिलेगी नई गति, 20 फरवरी को रामलीला में पहुंचकर मॉस्को और आसपास के लोग होंगे भाव विभोर लखनऊ, अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राममंदिर से जुड़े विकास कार्यों और दीपोत्सव समेत किए जा रहे अभूतपूर्व आयोजनों की ख्याति अब सात समंदर पार तक पहुंच रही है। योगी सरकार के सांस्कृतिक विजन और अयोध्या में हुए आध्यात्मिक नवजागरण से प्रेरित होकर रूस की राजधानी मॉस्को में 20 फरवरी को भव्य रामलीला का आयोजन होगा। यह रामलीला अयोध्या में विगत दिनों हुए दीपोत्सव से प्रेरणा लेकर दिव्य और भव्य रूप में आयोजित की जा रही है। इसे भारत-रूस सांस्कृतिक संबंधों के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। रूस में भारत के दूतावास और जवाहरलाल नेहरू सांस्कृतिक केंद्र (JNCC) के सहयोग से होने वाली इस रामलीला में रूस के कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। राम की भूमिका में एवगेनी, सीता के रूप में दारिया, लक्ष्मण के रूप में मुरात और हनुमान के रूप में दिमित्री मंच पर भारतीय आस्था की सजीव प्रस्तुति देंगे। रूसी दर्शकों में विशेष उत्सुकता रूसी-भारतीय मैत्री संस्था ‘दिशा’ इस आयोजन की मुख्य संचालक है। डॉ. रामेश्वर सिंह के नेतृत्व में यह संस्था वर्षों से नाट्य प्रस्तुतियों, सांस्कृतिक उत्सवों और शैक्षिक पहल के जरिए भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक सेतु का निर्माण कर रही है। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सत्य, मर्यादा और आदर्श जीवन का सार्वभौमिक संदेश है। यही वजह है कि रूसी दर्शकों में भी इसके प्रति विशेष उत्सुकता देखी जा रही है। अयोध्या में दीपोत्सव की भव्यता से मिली प्रेरणा उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से अयोध्या का दीपोत्सव वैश्विक पहचान बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लाखों दीपों से जगमगाती अयोध्या की तस्वीरों ने दुनिया भर के सांस्कृतिक संगठनों और कलाकारों को प्रभावित किया है। योगी सरकार ने रूस के कलाकारों की टीम को अयोध्या दीपोत्सव में मंच प्रदान किया। यह टीम रामलीला प्रस्तुत कर पहले ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी है। अयोध्या की आध्यात्मिक आभा और आयोजन की भव्यता देखकर रूस से यहां आए आयोजक और कलाकार इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मॉस्को में भी उसी भाव को साकार करने का निर्णय लिया। दोनों देशों के बीच भावनात्मक जुड़ाव भारत-रूस सांस्कृतिक संबंधों में रामलीला की परंपरा का इतिहास भी उल्लेखनीय रहा है। 1960 के दशक में सोवियत अभिनेता पद्मश्री गेनादी मिखाइलोविच पेचनिकोव ने मॉस्को में रामलीला का मंचन कर दोनों देशों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को नई ऊंचाई दी थी। यह पहल दोनों देशों के लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अयोध्या की प्रेरणा से मॉस्को की रामलीला आयोजन का नेतृत्व कर रहे रामेश्वर सिंह ने बताया कि रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार के विशेष सहयोग से यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू किया गया दीपोत्सव और सांस्कृतिक नवजागरण अब वैश्विक प्रभाव दिखा रहा है। मॉस्को की रामलीला अयोध्या की प्रेरणा से आयोजित की जा रही है। 20 फरवरी को भाव-विभोर होगा रूस 20 फरवरी को मॉस्को में होने वाली रामलीला के लिए भव्य मंच सज्जा, पारंपरिक वेशभूषा और संगीत की विशेष तैयारी की जा रही है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रूसी नागरिक, भारतीय समुदाय और सांस्कृतिक जगत की हस्तियां शामिल होंगी। जब मंच पर श्रीराम की लीला सजीव होगी तो पूरा वातावरण भारतीय संस्कृति की भक्ति, मर्यादा और आदर्शों से सराबोर नजर आएगा। यह आयोजन नाट्य प्रस्तुतियों, उत्सवों और शैक्षिक पहल के माध्यम से दोनों देशों की एकता की सशक्त मिसाल पेश करेगा।

लोगों से बोले सीएम योगी – चिंता मत करें, हर समस्या का होगा समाधान, सबकी होगी भरपूर मदद

  मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश- निष्पक्षता, संवेदनशीलता और तत्परता से करें जन समस्याओं का निराकरण गोरखपुर, गोरखपुर प्रवास के दौरान लगातार दूसरे दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन का आयोजन कर लोगों से मुलाकात की और समस्याएं सुनकर अधिकारियों को निस्तारण के निर्देश दिए। रविवार को देवाधिदेव महादेव की आराधना के विशेष पर्व महाशिवरात्रि पर आनुष्ठानिक व्यस्तता में भी उन्होंने जनसेवा का अनुष्ठान जारी रखा। जनता दर्शन में आए लोगों से मुख्यमंत्री ने कहा, ‘चिंता मत करें, हर समस्या का समाधान होगा, सबकी भरपूर मदद की जाएगी।’ जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और तत्परता से उसका निष्पक्ष और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित कराएं। रविवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 150 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने के निर्देश दिए। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे। एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। उन्हें आश्वस्त किया कि वह सभी की समस्याओं का समाधान कराएंगे। किसी को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। प्रार्थना पत्रों को उन्होंने अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण त्वरित, गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिप्रद होना चाहिए। जनता दर्शन में कुछ लोग इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि इलाज में धन की कमी बाधक नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी। इस दौरान सीएम ने अधिकारियों से कहा कि जो लोग पात्र हैं और किसी कारण से उनका आयुष्मान कार्ड नहीं बन पाया है, उनके आयुष्मान कार्ड बनवाए जाएं ताकि उन्हें इलाज के लिए परेशान न होना पड़े। सीएम ने पुकारा, ‘ओ भोलू’ और भाव विह्वल हो दौड़ आया गोवंश दृढ़ संकल्पों वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक सुपरिचित पहचान गोसेवक की भी है। जब भी वह गोरखनाथ मंदिर प्रवास पर होते हैं गोशाला में जाकर गोसेवा उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा रहती है। रविवार सुबह भी मंदिर की गोशाला में जाकर उन्होंने गोसेवा की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गायों और गोवंश को अपने हाथों से रोटी-गुड़ खिलाया। सीएम योगी यहां कई गोवंश को उनके लिए रखे नामों से बुलाते हैं। रविवार सुबह उन्होंने एक गोवंश को जब यह कहकर पुकारा, ‘ओ भोलू’ तो श्याम रंग का यह बछड़ा भाव विह्वल होकर सीएम योगी की तरफ दौड़ पड़ा। मुख्यमंत्री ने भोलू को खूब दुलारा और उसे अपने हाथों से रोटी-गुड़ खिलाया। मंदिर की गोशाला में जब भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुंचते हैं तो प्रायः एक मोर भी उनके इर्द-गिर्द आ जाता है। मुख्यमंत्री ने मोर को भी दुलारा और अपने हाथों से रोटी के टुकड़े करके उसे खिलाया। मंदिर परिसर में सीएम ने बच्चों पर लुटाया प्यार, कराया अन्नप्राशन रविवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर के भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नजर परिजनों के साथ मंदिर आए बच्चों पर पड़ी तो उन्होंने बच्चों को अपने पास बुला लिया, उन पर खूब प्यार लुटाया। उन्होंने बच्चों से उनका नाम और पढ़ाई के बारे में पूछा। उनसे ठिठोली भी की और फिर स्नेहाशीष से खूब पढ़ने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने इन सभी बच्चों को अपने हाथ से चॉकलेट भी दी। इस अवसर पर उन्होंने एक बच्चे को गोद में लेकर अन्नप्राशन भी कराया।

महाशिवरात्रि पर आध्यात्मिक एकता का संदेश विश्व पटल पर हुआ प्रसारित

ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ और सिद्धपीठों से प्रसाद अर्पण की परंपरा हुई प्रारंभ ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम वाराणसी,  महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास, वाराणसी द्वारा एक अद्वितीय और अभिनव आध्यात्मिक पहल का शुभारंभ किया गया है। इस पहल के अंतर्गत भगवान श्री विश्वेश्वर महादेव के श्रीचरणों में देश-विदेश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों, सिद्धपीठों, शक्तिपीठों और प्राचीन तीर्थस्थलों से पावन प्रसाद, पूजित वस्त्र, रज, पवित्र जल तथा श्रद्धा उपहार अर्पित किए जाने की परंपरा प्रारंभ की गई है। इस आध्यात्मिक समन्वय का उद्देश्य संपूर्ण सनातन समाज को एक सूत्र में पिरोते हुए वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को मूर्त रूप प्रदान करना और वैश्विक आध्यात्मिक एकात्मता को सुदृढ़ करना है। 62 मंदिरों से अब तक पहुंची पावन भेंट इस क्रम में, शनिवार तक श्री काशी विश्वनाथ धाम में देश-विदेश के कुल 62 मंदिरों से पावन भेंट और प्रसाद प्राप्त हो चुके हैं। इन मंदिरों में तमिलनाडु से भक्त मंडली, श्री रत्नगिरिस्वरर मंदिर चेन्नई, श्री अनंता पद्मनाभा स्वामी मंदिर चेन्नई, तेन सबनायाकर मंदिर कोविलूर, अरुल्मिगु वामनपुरफेश्वरर तिरुमणिकुझी, अरुल्मिगु द्रौपथी अम्मन मंदिर, अरुल्मिगु रीना विमोशनर तिरुकांडीश्वरम्, अरुल्मिगु तिरु सनगरी काली अम्मन वझापेट, अरुल्मिगु भूलोगा नाथर नेल्लिकुप्पम, अरुल्मिगु भूमिनाथ ईश्वरर वैटिपक्कम, श्री मदुरै वीरन मंदिर, अरुल्मिगु कुमारा गुरु परमस्वामी एस कुमारापुरम, अरुल्मिगु वेधा अरुल्पुरीश्वर कंदरकोट्टई, अरुल्मिगु सबनायगर कीरापालयम, अरुल्मिगु काशी विश्वनाथर गेडिलम नदी, सीयूओ, अरुल्मिगु विरुथा गिरिश्वरर तिरुकांडीश्वरम्, अरुल्मिगु अमृत लिंगेश्वर पेरिया, अरुल्मिगु मार्गबंधु तिरुकांडीश्वरम्, अरुल्मिगु नादन पाथेश्वरर तिरुकांडीश्वरम्, अरुल्मिगु सिंगारणाथर कोंगरायनूर शामिल हैं। श्री कृष्ण जन्मस्थान, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड समेत कई मंदिरों से आए उपहार इसी प्रकार, मथुरा से श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान, जम्मू कश्मीर से श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड जम्मू, मलेसिया से श्री महा मरिअम्मन मंदिर, अरुल्मिगु श्री राजाकलियम्मन ग्लास मंदिर, श्री कंदस्वामी कोविल, श्री वीरा मुनिस्वरर मंदिर, श्री नगराथर शिवन मंदिर, अरुल्मिगु बालथंडायुथपानी मंदिर, श्री कुंज बिहार मंदिर भी इस आध्यात्मिक अभियान में सहभागी बने हैं। काशी के प्रमुख मंदिरों से भी सहभागिता वाराणसी से सप्तमात्रिका सिद्धपीठ श्री बड़ी शीतलाधाम शीतलाघाट, काशी त्रिलोचन महादेव मंदिर, सिद्ध पीठ बड़ी काली जी मंदिर कालिका गली, श्री बड़ा गणेश मंदिर लोहटिया, श्री केदारेश्वर मंदिर केदार घाट, श्री ओम कालेश्वर मंदिर कोयला बाजार, श्री कालभैरव मंदिर भैरोनाथ, विन्ध्यवासिनी, दशाश्वमेध, तुलजा देवी, दशाश्धमध्येश्वर, जमेश्वर, प्राचीन रुद्रसरोवर, श्री श्रीयन्त्रराज, श्री दक्षिणी आदि शीतला बुढ़ीय माई, कपिलधारा पंचकोशी, शूलटंकेश्वर, प्रयागघाट, रामेश्वर पंचकोशी, महिषासुर मां मंदिर, लोलार्क कुंड, बैजनाथ मंदिर बैजनत्था, श्री चन्द्रेश्वर मंदिर केदारघाट, श्री लोलार्क कुंड मंदिर भदैनी, श्री अन्नपूर्णा मंदिर विश्वनाथ गली, श्री महालक्ष्मी मंदिर लक्सा, श्री बटुक भैरव मंदिर कमच्छा, श्री कामख्या मंदिर कमच्छा, अन्य प्रमुख मंदिर काशी और विशालाक्षी मंदिर काशी से भी पावन भेंट प्राप्त हुई है। देश-विदेश के अन्य तीर्थस्थलों की सहभागिता उत्तराखंड से श्री केदारनाथ, मुंबई से लाल बाग के राजा और श्री सिद्धिविनायक मंदिर, गुजरात से द्वारकाधीश मंदिर, श्रीलंका से श्री ऐश्वर्या लक्ष्मी मंदिर कोलंबो तथा राजस्थान से नाथद्वारा मंदिर उदयपुर से भी पावन प्रसाद और भेंट काशी विश्वनाथ धाम पहुंच चुकी है। पवित्र सामग्री में जल, रज, वस्त्र और पुष्प शामिल इन भेंटों में विभिन्न तीर्थस्थलों का पवित्र जल, मंदिरों में पूजित पुष्पमालाएं, रज, चंदन, वस्त्र तथा अन्य पूजनीय सामग्री सम्मिलित है। यह संपूर्ण प्रक्रिया सनातन परंपरा की आध्यात्मिक एकता का सजीव प्रतीक बनकर सामने आई है। कूरियर और प्रतिनिधियों के माध्यम से जारी है क्रम इसके अतिरिक्त, अनेक मंदिरों से प्रसाद कूरियर माध्यम से प्रेषित किया जा रहा है, जबकि कुछ प्रतिष्ठित मंदिरों के प्रतिनिधि स्वयं पावन भेंट लेकर धाम में पधारने वाले हैं। इस प्रकार, यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान न होकर संपूर्ण राष्ट्र और विश्व के विविध तीर्थों के मध्य भावनात्मक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सेतु के रूप में स्थापित हो रहा है। आध्यात्मिक एकात्मता का वैश्विक संदेश मंदिर न्यास की यह अभिनव पहल सनातन संस्कृति में निहित पारिवारिक समरसता, आध्यात्मिक बंधुत्व और सांस्कृतिक अखंडता के संदेश को व्यापक रूप से प्रसारित कर रही है। महाशिवरात्रि के दिव्य अवसर पर प्रारंभ की गई यह परंपरा न केवल काशी की आध्यात्मिक गरिमा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करती है, बल्कि समस्त सनातन आस्थाओं को एकात्म भाव से जोड़ते हुए धार्मिक सद्भाव और आध्यात्मिक समन्वय के नए अध्याय का उद्घाटन कर रही है। निश्चय ही, यह पहल राष्ट्र और विश्व के विविध तीर्थस्थलों को एक आध्यात्मिक सूत्र में संगठित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी कदम सिद्ध हो रही है।

आगरा में बनेगा हाई-टेक स्पोर्ट्स कॉलेज, अब मंडल में ही निखरेंगी खेल प्रतिभाएं

– योगी सरकार ने मंडल स्तर पर स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए मंजूर किए 80 करोड़ रुपये   – पढ़ाई के साथ मिलेगी आधुनिक ट्रेनिंग, 2036 के ओलंपिक के लिए तैयार होंगे खिलाड़ी   आगरा, उत्तर प्रदेश को खेलों की दुनिया में ‘नंबर वन’ बनाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के युवाओं को एक बड़ी सौगात दी है। बजट 2026-27 में सरकार ने खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को निखारने का पूरा रोडमैप तैयार कर लिया है। इसी कड़ी में आगरा समेत प्रदेश के 10 मंडलों में नए स्पोर्ट्स कॉलेज बनाए जाएंगे। इसके निर्माण के लिए सरकार ने 80 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। अब ताजनगरी और आसपास के खिलाड़ियों को आधुनिक ट्रेनिंग के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। एत्मादपुर में 50 हेक्टेयर जमीन, आठ करोड़ का प्रावधान योगी सरकार की ‘एक मंडल- एक स्पोर्ट्स कॉलेज’ नीति के तहत आगरा में बनने वाले स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। एत्मादपुर क्षेत्र में लगभग 50 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद जल्द ही इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। बजट में इस कॉलेज के निर्माण के लिए शुरुआती तौर पर करीब आठ करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित स्पोर्ट्स कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खेल मैदान, प्रशासनिक भवन, आवासीय सुविधाएं (हॉस्टल) और शिक्षा व्यवस्था एक ही परिसर में विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को खेल के साथ-साथ पढ़ाई की सुविधा देना है, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके। ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में होगा विकसित यह संस्थान केवल एक कॉलेज नहीं बल्कि ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 के ओलंपिक में भारत की भागीदारी और पदक संभावनाओं को मजबूत करना है। आगरा का यह कॉलेज भविष्य के ओलंपियन तैयार करने की नर्सरी बनेगा। खेल दिग्गजों ने सराहा योगी सरकार के फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला ऐतिहासिक है। आगरा में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। कमी थी तो बस उच्च स्तरीय संसाधनों की। स्पोर्ट्स कॉलेज बनने से यहाँ की बेटियों और युवाओं को अब अपने घर में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग मिल सकेगी। यह कदम आगरा से नए स्टार खिलाड़ी निकालने में मदद करेगा।   – हेमलता काला, पूर्व अध्यक्ष, चयन समिति, भारतीय महिला क्रिकेट टीम/ पूर्व क्रिकेटर, भारतीय महिला क्रिकेट टीम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने खेलों को जो प्राथमिकता दी है, वह अभूतपूर्व है। मंडल स्तर पर स्पोर्ट्स कॉलेज खुलने से ग्रामीण क्षेत्रों की छिपी हुई प्रतिभाओं को मंच मिलेगा। यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि भविष्य के ओलंपियंस तैयार करने की फैक्ट्री साबित होगी। – संजय गौतम, उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश हॉकी संघ आगरा में स्पोर्ट्स कॉलेज का सपना अब साकार होने जा रहा है। एक ही परिसर में पढ़ाई और खेल की व्यवस्था होने से अभिभावक भी बच्चों को खेल में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेंगे। यह आगरा के खेल जगत के लिए संजीवनी समान है। – कमल चौधरी, अध्यक्ष, आगरा हॉकी संघ

ताल रिंग रोड पर कोई भी स्थान न रहे संकरा : सीएम योगी

निर्माण की प्रगति का जायजा लेने पहुंचे मुख्यमंत्री गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से स्पष्ट कहाकि ताल रिंग रोड के किसी भी स्थान पर संकुचन (कंजेशन) नहीं दिखना चाहिए। इसे लेकर अगर कहीं भी दिक्कत या अवरोध है तो उसे समय रहते दूर कर लिया जाना चाहिए। सड़क पर पानी न जमा न होने पाए, इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए। सीएम योगी शनिवार शाम मोहद्दीपुर से सहारा इस्टेट तक रामगढ़ताल के किनारे 28.60 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन 4.20 किलोमीटर लंबे ताल रिंग रोड का निरीक्षण कर रहे थे। इसका निर्माण गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की ओर से कराया जा रहा है। शनिवार को निर्माण की प्रगति का जायजा लेने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी ने ले-आउट,  ड्राइंग मैप और वीडियो का अवलोकन कर सड़क के बारे में पूरी जानकारी ली। उन्होंने निर्माण के शुरुआती ठिकाने पर कंजेशन दूर करने के निर्देश दिए। सड़क के किनारे नाले को ढकने और ड्रेनेज सिस्टम को ठीक करने की भी हिदायत दी। अफसरों ने मुख्यमंत्री को बताया कि रिंग रोड का निर्माण कार्य मई 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। रिंग रोड से कनेक्ट सहारा इस्टेट के पास एक नई जेटी भी बनाई जाएगी। रिंग रोड पर 13.33 करोड़ रुपये की लागत से सड़क किनारे रिटेनिंग वाल, ड्रेन, एयरवाल्व चैंबर और मेनहोल की ऊंचाई बढ़ाने का कार्य भी कराया जा रहा है।

धार्मिक पर्यटन के विकास को मिलेगी गति, तीर्थ स्थलों के विकास के लिए बजट में विशेष प्रावधान

काशी, अयोध्या, मथुरा और प्रयागराज की तर्ज पर विकसित किए जा रहे हैं यूपी के सभी बड़े तीर्थ स्थल   चित्रकूट, नैमिषारण्य, देवीपाटन, विन्ध्यवासिनी धाम और शुकतीर्थ की विकास परियोजनाओं के लिए धनराशि स्वीकृत लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार के धार्मिक पर्यटन स्थलों की विकास परियोजनाओं के लिए बजट 2026-27 में विशेष प्रावधान किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य काशी, अयोध्या, प्रयागराज की तर्ज पर नैमिषारण्य, चित्रकूट, देवीपाटन, विन्ध्यवासिनी धाम और शुकतीर्थ जैसे तीर्थस्थलों के विकास कार्यों को गति प्रदान करना है। प्रदेश के तीर्थ स्थलों में पहले से ही विभिन्न विकास परियोजनाएं चल रही हैं, इस राशि के उपयोग से विकास कार्य को गति मिलेगी, साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं प्राप्त होंगी। प्रदेश सरकार के इस कदम के बारे में मोतिहारी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शिरीष मिश्रा का कहना है कि “धार्मिक स्थलों के विकास के लिए बजट में मिली राशि योगी सरकार की धार्मिक विरासत के संरक्षण के साथ आर्थिक विकास की नीति का हिस्सा है। इस धनराशि के उपयोग से एक ओर यूपी में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधाओं में वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।” नैमिषारण्य तीर्थ स्थल के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान सीतापुर जनपद में स्थित नैमिषारण्य तीर्थ स्थल में पर्यटन अवस्थापना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। 88 हजार ऋषि-मुनियों की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध नैमिषारण्य तीर्थस्थल में पहले से ही 38 परियोजनाएं चल रही हैं। जिनमें से नौ का काम लगभग पूरा हो चुका है। बजट में स्वीकृत धनराशि से शेष परियोजनाओं का निर्माण तेज गति से पूरा किया जा सकेगा। इस क्रम में नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र में घाटों का सुंदरीकरण, मार्गों का चौड़ीकरण, प्रकाश व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। यह तीर्थ क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोगों एवं तीर्थ स्थल में रहने वाले साधु- संतों को भी सुविधा प्रदान करेगा। काशी और अयोध्या की तर्ज पर विकसित हो रहा है चित्रकूट धाम योगी सरकार की मंशा चित्रकूट धाम को भी काशी और अयोध्या की तर्ज पर प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने की है। इस दिशा में चित्रकूट धाम तीर्थ विकास परिषद के लिए बजट में 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे धाम क्षेत्र में कामदगिरि परिक्रमा मार्ग का सौंदर्यीकरण, देवांगना एयरपोर्ट के पास पर्यटन सुविधा केंद्र का निर्माण, राम वनगमन मार्ग के पड़ाव स्थलों पर सुविधाओं का विकास किया जाएगा। साथ ही मंदाकिनी नदी के रामघाट, तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर और महर्षि वाल्मीकि आश्रम के सौंदर्यीकरण का कार्य भी शामिल है। विंध्यवासिनी धाम में बनेगा त्रिकोणीय परिक्रमा मार्ग मिर्जापुर जनपद के विंध्यवासिनी धाम में विकास कार्यों के लिए 100 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। जिससे तीर्थ क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों में मार्गों के चौड़ीकरण, लाइट, पार्किंग व्यवस्था के साथ आश्रय स्थल का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही गंगा जी के पास पक्के घाटों का निर्माण किया जाएगा। वहीं विन्ध्यक्षेत्र में स्थित मां अष्टभुजा देवी मंदिर, कालीखोह और विंध्यवासिनी मंदिर के त्रिकोणीय परिक्रमा मार्ग के निर्माण के लिए धर्मार्थ कार्य विभाग की ओर से 200 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। देवीपाटन, शुकतीर्थ और गढ़मुक्तेश्वर में मिलेगी विकास कार्यों को गति बलरामपुर जिले में स्थित देवीपाटन धर्मस्थल में भी विकास कार्यों को गति प्रदान करने के उद्देश्य से 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस राशि के माध्यम से मां पाटेश्वरी देवी के मंदिर का सौंदर्यीकरण के साथ मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इसी क्रम में हापुड़ जिले में स्थित गढ़मुक्तेश्वर तीर्थ के समेकित विकास की परियोजनाओं के लिए 25 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इससे तीर्थक्षेत्र के प्राचीन मंदिरों और गंगा जी के घाटों के सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। वहीं मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ के लिए स्वीकृत 15 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग शुकदेव आश्रम, गणेश धाम के पुनर्निमाण में किया जाएगा। साथ ही प्रदेश के अन्य प्राचीन संरक्षित मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए 100 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। योगी सरकार की इस पहल से न केवल प्रदेश के प्राचीन तीर्थ स्थलों का कायकल्प हो रहा है बल्कि पर्यटन गतिविधियों के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था का भी विकास होगा।

केंद्र और प्रदेश सरकार के बजट में समाज के प्रत्येक तबके के लिए ढेर सारी स्कीम: सीएम योगी

पीएम मोदी के मार्गदर्शन में विकास के पथ पर तेजी से बढ़ रहा उत्तर प्रदेश: सीएम योगी राप्तीनगर विस्तार स्पोर्ट्स सिटी योजना के एलआईजी व ईडब्ल्यूएस आवंटियों को सीएम के हाथों मिला आवंटन पत्र गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकास कैसे होता है, आज गोरखपुर उसका मॉडल बन चुका है। विकास कैसे होना चाहिए, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश यह साबित कर रहा है। आज गोरखपुर में सब कुछ है और उत्तर प्रदेश में भी। सीएम योगी शनिवार को वार्ड नंबर-22 जंगल तुलसीराम के बिछिया कॉलोनी में बने शहर के पांचवें कल्याण मंडपम का लोकार्पण करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। यह कल्याण मंडपम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विधायक निधि से गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा 2.47 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। कल्याण मंडपम के लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री ने सभी लोगों को देवाधिदेव महादेव की उपासना के महापर्व महाशिवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज विकास के कार्य हर स्तर पर किए जा रहे हैं। अभी केंद्र और प्रदेश सरकार के बजट में युवाओं, महिलाओं सहित समाज के प्रत्येक तबके के लिए ढेर सारी स्कीम आई हैं। ये ढेर सारी स्कीम समय-समय पर प्रारंभ होगी तो उसका लाभ प्रदेशवासियों के साथ गोरखपुरवासियों को भी प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री ने कल्याण मंडपम की आवश्यकता और इसके महत्व को समझाते हुए कहा कि आज से 15-20 साल पहले तक लोग शादी-विवाह के लिए सड़क पर टेंट लगाकर आयोजन करते थे। तब आबादी कम थी, यातायात के साधन कम थे तो कोई समस्या नहीं होती थी। लेकिन, अब घराती हो या बराती, सबको ऐसा स्थान चाहिए, जिससे किसी को असुविधा न हो। हर व्यक्ति महंगे होटल या मैरिज हाउस का खर्च नहीं उठा सकता। अब होटल और मैरिज हाउस जैसी अत्याधुनिक सुविधा कल्याण मंडपम में मिनिमम यूजर चार्ज पर उपलब्ध हो रही है। इतना ही नहीं, कई बार एक ही दिन में हजारों शादियां होने से भी कल्याण मंडपम की उपयोगिता बढ़ रही है। सीएम योगी ने बताया कि गोरखपुर महानगर में पांच कल्याण मंडपम बन गए हैं। इसके अलावा पांच अन्य मंडपम जंगल बेनी माधव,  बशारतपुर, नकहा नम्बर दो, महादेव झारखंडी और सेमरा में बन रहे हैं। अधिकतर में उन्होंने अपनी विधायक निधि से धनराशि दी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि आज लोकार्पित बिछिया के कल्याण मंडपम के लिए उन्होंने दो करोड़ रुपये अपनी विधायक निधि से दिए हैं। उन्होंने कहा कि नागरिक कार्यों के लिए नगर निगम, विकास प्राधिकरण की निधि के साथ ही पार्षद, महापौर, विधायक और सांसद निधि का भी इस्तेमाल हो रहा है। कल्याण मंडपमों से वास्तविकता में गरीबों का कल्याण होगा और रोजगार का सृजन भी होगा। नया मॉडल बन रहा बिछिया सीएम योगी ने कहा कि पहले बिछिया की क्या स्थिति थी, सभी जानते हैं। सड़कों की समस्या थी तो जलभराव की भी। अब यहां की सड़कें ऐसी हैं कि जाम लगेगा ही नहीं। यहां से गुजरने वाला जो गोड़धोइया नाला पहले आम दिनों में कीचड़ से पटा रहता था और बरसात में जलभराव का कारण बनता था, वह जलनिकासी का मॉडल बनेगा। नाला बन जाने, एसटीपी चालू हो जाने के बाद लोग उसे देखने आएंगे। बिछिया अच्छी सड़कों और जलनिकासी का नया मॉडल बन रहा है। हर तबके को मिल रही आवास की सुविधा अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हर तबके को आवास की सुविधा मिल रही है। राप्तीनगर विस्तार में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी बन रहा है और हर तबके के लिए आवास की सुविधा भी दी जा रही है। ऐसे ही आवास की सुविधा अन्य जगहों पर भी उपलब्ध करवाई जा रही है। मानीराम के पास भी बहुत बड़ी हाउसिंग स्कीम आ रही है। आज सबकुछ है गोरखपुर में सीएम योगी ने कहा कि आज गोरखपुर में सबकुछ है। यहां एम्स आ गया है, मेडिकल कॉलेज सुदृढ़ हो गया है। फर्टिलाइजर कारखाना चल गया है। यहां हर तरफ अच्छी सड़कें और फोरलेन की कनेक्टिविटी है। गोरखपुर से लखनऊ, वाराणसी, नेपाल, देवरिया, कुशीनगर के लिए फोरलेन सड़कें हैं। यहां बाईपास भी बन रहे हैं। अब जाम नहीं लगने पाएगा। जाम से जड़ता आती है, इसलिए गोरखपुर को जाम से मुक्त बनाना है। इसके लिए गोरखपुर के लोग लगातार सहयोग कर अपना योगदान देते हैं। इसके चलते ही विकास के अच्छे परिणाम सामने आते हैं। अब गोरखपुर में उद्योग भी लग रहे हैं। पिछली सरकारें बेईमानी करती थीं, बीमारी लाती थीं अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जैसा कि हमारे प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि पिछली सरकारें बेईमानी करती थीं और बीमारी लाती थीं। हम लोगों ने बेईमानी को रोका है और बीमारी को पूरी तरह से समाप्त कर दिया। आज इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी नहीं है। लेकिन, यह हम सबका दायित्व है कि शुद्धता और स्वच्छता पर ध्यान दें। गंदगी न होने दें, कूड़ा सड़क या नाली में न फेकें। सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें। पर्यावरण बचाएंगे तभी आपको पर्यावरण बचाएगा मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण की सीख देते हुए कहा कि आप पर्यावरण को बचाएंगे तभी पर्यावरण आपको बचाएगा। दिल्ली की हालत देखिए, वहां घुटन भरी जिंदगी हो गई है। ऐसा लगता है कि जैसे गैस चैंबर में हों। एयर क्वालिटी इंडेक्स काफी खराब स्थिति में है। आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होती है। डॉक्टर बुजुर्गों, बीमार लोगों और बच्चों को घर से बाहर जाने से मना करते हैं, जबकि गोरखपुर में कितना शानदार माहौल है। कहीं कोई दिक्कत नहीं, कहीं कोई दमघोंटू माहौल नहीं। जब हम धरती माता के प्रति अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करेंगे तो धरती माता भी उसी प्रकार का आशीर्वाद देकर कल्याण करेंगी। हम सबको योगदान देना होगा, गंदगी न करनी है और न ही करने देनी है। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं होने देना है। जो न माने, उसके बारे में प्रशासन को बताएं सीएम योगी ने कहा कि रामगढ़ताल इतना अच्छा बन गया है, लेकिन कुछ लोग आज भी वहां झूठे पत्तल, डिब्बे आदि डाल देते हैं। इससे गंदगी होगी, मच्छर पनपेंगे, बीमारी होगी। इन सबसे बचना चाहिए और कोई गलत कर रहा तो उसको रोकना भी चाहिए। अगर वह … Read more

आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण को गति देगी एआई कौशल क्रांति

    प्रदेश सरकार लाखों युवाओं के लिए शुरू करेगी एआई और इमर्सिव तकनीकों का व्यापक प्रशिक्षण अभियान डिजिटल अवसंरचना से डिजिटल दक्षता तक, टैबलेट बने कौशल विकास का माध्यम, निवेश और उद्योगों के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने की रणनीति भविष्य के रोजगारों की ठोस रणनीति और तैयारी के साथ आगे बढ़ने को तैयार उत्तर प्रदेश लखनऊ,  योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीते कुछ वर्षों में विकास की जिस नई कार्यसंस्कृति को स्थापित किया है, उसका केंद्र बिंदु केवल आधारभूत संरचना का निर्माण नहीं, बल्कि ह्यूमन कैपिटल (मानव पूंजी) का सशक्तीकरण भी है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश सरकार द्वारा ‘टेक युवा-समर्थ युवा’ योजना की शुरुआत की गई है। यह योजना प्रदेश में 25 लाख युवा शक्ति को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसी आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित कर उत्तर प्रदेश को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने का व्यापक अभियान है। योगी सरकार का स्पष्ट मत है कि 21वीं सदी की प्रतिस्पर्धा केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि कौशल की है। प्रदेश में पहले चरण में डिजिटल अवसंरचना को मजबूत किया गया। बड़ी संख्या में युवाओं को टैबलेट उपलब्ध कराए गए, ताकि डिजिटल पहुंच सुनिश्चित हो सके। अब उसी आधार को मजबूत करते हुए सरकार इन उपकरणों को कौशल विकास के प्रभावी माध्यम में बदल रही है। एप्लिकेशन आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से युवाओं को व्यावहारिक और उद्योगोन्मुख शिक्षा दी जाएगी, जिससे वे सीधे रोजगार या कारोबार से जुड़ सकें। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान केवल बजट का आंकड़ा नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत है। योगी सरकार युवाओं को केवल डिग्रीधारी नहीं, दक्ष और आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में एआई और उन्नत तकनीकों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश अपने युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बना रहा है। सरकार का यह प्रयास व्यापक आर्थिक रणनीति से जुड़ा हुआ है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश तेजी से बढ़ रहा है। डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर पार्क और विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं के साथ अब आवश्यकता कुशल मानव संसाधन की है। ‘टेक युवा-समर्थ युवा’ योजना इसी आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जब स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवा उपलब्ध होंगे तो उद्योगों को भी गति मिलेगी और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। इस योजना की विशेषता यह है कि इसका लाभ केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के युवा भी डिजिटल माध्यम से उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। इससे क्षेत्रीय असमानता कम करने में मदद मिलेगी और प्रदेश के हर हिस्से में समान अवसर उपलब्ध होंगे। योगी सरकार की सबका साथ सबका विकास की अवधारणा इसी प्रकार की योजनाओं के माध्यम से साकार हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रोजगार का स्वरूप तकनीक आधारित होगा। ऐसे में यदि राज्य स्तर पर बड़े पैमाने पर कौशल उन्नयन किया जाता है तो यह बेरोजगारी की चुनौती को काफी हद तक कम कर सकता है। योगी सरकार का यह कदम युवाओं में आत्मविश्वास पैदा करेगा और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा। भविष्य में इसके लाभ -युवाओं की तकनीकी दक्षता बढ़ेगी, जिससे वे उभरते एआई आधारित उद्योगों में सीधे रोजगार पा सकेंगे -प्रदेश में निवेश करने वाली कंपनियों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा, जिससे औद्योगिक विकास को गति मिलेगी -स्वरोजगार और स्टार्टअप की संभावनाएं बढ़ेंगी, क्योंकि तकनीकी रूप से दक्ष युवा नवाचार की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे -ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के युवाओं को भी समान अवसर मिलेंगे, जिससे क्षेत्रीय असमानता कम होगी एआई और उन्नत डिजिटल तकनीकों में 25 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करना केवल कौशल विकास कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक बदलाव की शुरुआत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार का ये कदम प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अगले दशक के लिए रीडिफाइन करने वाला है।  इससे प्रदेश की युवा शक्ति नौकरी तलाशने वाली भीड़ नहीं, बल्कि इनोवेशन और निवेश को आकर्षित करने वाली दक्ष कार्यशक्ति में बदलेगी। मनिन्द्र अग्रवाल, डायरेक्टर, आईआईटी, कानपुर

नोएडा मेट्रो एक्सटेंशन कॉरिडोर को केंद्र की मंजूरी

सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक 11.56 किमी विस्तार को हरी झंडी परी चौक से बॉटनिकल गार्डन का सफर भी होगा आसान, यात्रा समय घटेगा योगी सरकार की शहरी कनेक्टिविटी रणनीति को मिलेगा बल, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सक्रिय मेट्रो नेटवर्क 61.62 किमी तक पहुंचेगा लखनऊ,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नोएडा मेट्रो रेल परियोजना के सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक 11.56 किलोमीटर लंबे एक्सटेंशन कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। इस नए एलिवेटेड कॉरिडोर में कुल 8 स्टेशन होंगे। इसके संचालन में आने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई बढ़कर 61.62 किलोमीटर हो जाएगी। यह कॉरिडोर नोएडा से ग्रेटर नोएडा की यात्रा भी सुगम बनाएगा। इस फैसले को उत्तर प्रदेश में शहरीकरण और औद्योगिक विकास के अनुरूप सार्वजनिक परिवहन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार के शहरी विकास और निवेश प्रोत्साहन मॉडल में मजबूत कनेक्टिविटी को आधार स्तंभ माना गया है और यह परियोजना उसी रणनीति का विस्तार मानी जा रही है। यह नया कॉरिडोर नोएडा के सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक जाएगा, जहां दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन और मैजेंटा लाइन से इंटरचेंज की सुविधा मिलेगी। इससे नोएडा व ग्रेटर नोएडा के निवासियों को सीधे दिल्ली और अन्य प्रमुख ट्रांजिट हब से जुड़ने का लाभ मिलेगा। इससे दिल्ली एयरपोर्ट, प्रमुख रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों तक पहुंच और सुगम होगी। एक्सटेंशन कॉरिडोर से नोएडा के कई प्रमुख व्यावसायिक, औद्योगिक और शैक्षणिक क्षेत्रों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। सेक्टर-142 स्थित एडवांट बिजनेस पार्क, सेक्टर-98 का स्काईमार्क वन मॉल, सेक्टर-93 का मॉल ऑफ नोएडा, सेक्टर-145 में माइक्रोसॉफ्ट, सेक्टर-157 में टीसीएस, सेक्टर-126 में हैवेल्स, सेक्टर-132 में इंफोसिस और एडोबी, सेक्टर-135 में कॉग्निजेंट तथा सेक्टर-127 में ओरेकल जैसे बड़े संस्थानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र भी इस विस्तार से जुड़ेंगे। सेक्टर-125 स्थित एमिटी विश्वविद्यालय, सेक्टर-91 का पंचशील बालक इंटर कॉलेज, सेक्टर-44 का महामाया बालिका इंटर कॉलेज और सेक्टर-128 का मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल अब मेट्रो नेटवर्क से बेहतर तरीके से कनेक्ट होंगे। इसके अलावा बॉटनिकल गार्डन और सेक्टर-93 पार्क जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इस विस्तार से सड़क यातायात का दबाव कम होगा और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। मेट्रो को सड़क परिवहन का प्रभावी विकल्प बताते हुए अधिकारियों का कहना है कि इससे ट्रैफिक जाम में कमी, सड़क सुरक्षा में सुधार और ईंधन की बचत होगी। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से जीवाश्म ईंधन आधारित परिवहन पर निर्भरता घटेगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। “बुनियादी ढांचे के विकास में बेहतर कनेक्टिविटी की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। जिस तरह से नोएडा व ग्रेटर नोएडा विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों का हब बन रहे हैं, यह नया मेट्रो रूट दिल्ली व नोएडा/ग्रेटर नोएडा के बीच कनेक्टिविटी को सुगम कर नए निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ मेट्रो स्टेशनों के आसपास व्यावसायिक गतिविधियों को भी बल देगा। योगी सरकार का लक्ष्य नोएडा और ग्रेटर नोएडा को राष्ट्रीय और वैश्विक निवेश मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिलाना है। यह परियोजना उसी व्यापक दृष्टि का हिस्सा है, जो उत्तर प्रदेश को आधुनिक, सुव्यवस्थित और सतत शहरी विकास की दिशा में आगे बढ़ा रही है।” –    शरद कोहली, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ

श्रमजीवी महिला छात्रावासों के निर्माण कार्य में तेजी

₹382 करोड़ की योजना में ₹251.82 करोड़ की पहली किस्त जारी  लखनऊ में तीन, गौतमबुद्धनगर में चार और गाजियाबाद में एक का किया जा रहा निर्माण प्रत्येक छात्रावास की क्षमता 500 की होगी, कुल 4,000 महिलाओं को मिलेगा लाभ लखनऊ  शहरी क्षेत्रों में रोजगार की तलाश में आने वाली कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योगी सरकार ने आठ श्रमजीवी महिला छात्रावासों के निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी है। कुल स्वीकृत धनराशि का 66 प्रतिशत प्रथम किस्त के रूप में जारी किया जा चुका है। इससे निर्माण कार्य को गति मिली है। भारत सरकार की एसएएससीआई योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में यह परियोजना संचालित की जा रही है, जिसके लिए कुल ₹382 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सीएंडडीएस को दी गई जिम्मेदारी प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2025 में सीएंडडीएस को इस परियोजना का कार्यदायी संस्थान नामित किया है। विभागीय स्तर पर भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया पूरी कर संबंधित विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है। लखनऊ में तीन, गौतमबुद्धनगर में चार और गाजियाबाद में एक समेत कुल आठ छात्रावासों का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है। प्रत्येक छात्रावास की क्षमता 500 महिलाओं की होगी। इस प्रकार कुल 4,000 कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित आवास सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी। सुरक्षा और स्वच्छता पर जोर इन छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ शौचालय, भोजनालय, सामान्य बैठक कक्ष तथा अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उद्देश्य यह है कि रोजगार के लिए शहरों में आने वाली महिलाओं को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण मिल सके। महिला सशक्तीकरण की दिशा में ठोस कदम गाजियाबाद के सूर्यनगर क्षेत्र में प्रस्तावित छात्रावास के लिए आवश्यक अनुमति के लिए प्रक्रिया जारी है। संबंधित प्राधिकरणों से स्वीकृति प्राप्त होते ही वहां भी निर्माण कार्य पूर्ण गति से शुरू किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं विभिन्न उद्योगों, सेवा क्षेत्रों, निजी संस्थानों और असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं। आवास की कमी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां उनके सामने बड़ी समस्या बनती हैं। इस परियोजना के माध्यम से सरकार न केवल सुरक्षित आश्रय उपलब्ध करा रही है, बल्कि महिला सशक्तीकरण की दिशा में ठोस कदम भी उठा रही है। महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर यह योजना केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। योगी सरकार का फोकस स्पष्ट है कि आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़े और उन्हें कार्यस्थल के साथ-साथ आवासीय सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से समयसीमा के अंदर पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि गुणवत्ता और तय समयसीमा का पालन सुनिश्चित हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से प्रदेश के शहरी श्रमबल को मजबूती मिलेगी और कामकाजी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी। सुरक्षित और किफायती छात्रावास व्यवस्था महिलाओं को रोजगार के अवसरों से जुड़ने में सहायक सिद्ध होगी।

जीएसडीपी 13 लाख करोड़ से बढ़कर 2026-27 में 36 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की ओर अग्रसर

लखनऊ, उत्तर प्रदेश की तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था के पीछे महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते नौ वर्षों में राज्य में महिला श्रम बल भागीदारी दर 13 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है। जिससे उत्तर प्रदेश के विकास को नई गति मिल रही है। इसी अवधि में प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2017 में करीब 13 लाख करोड़ रुपये तक सीमित रही  जीएसडीपी  2026-27 में बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये की ओर अग्रसर है। महिला श्रम बल भागीदारी दर में हर 1 प्रतिशत की वृद्धि से सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 0.5 से 1 प्रतिशत तक अतिरिक्त उछाल आता है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में  अर्थशास्त्र का यह सिद्धांत व्यवहार में साबित होता दिख रहा है। यही नहीं, महिला कार्यबल बढ़ने से उत्पादन क्षमता, श्रम उत्पादकता और राज्य के टैक्स बेस तीनों में समानांतर विस्तार हुआ है। महिलाएं बनीं ‘ग्रोथ मल्टीप्लायर’ महिलाओं की आय बढ़ने से घरेलू उपभोग में वृद्धि हुई है, जिससे एमएसएमई गतिविधियों और सेवा क्षेत्र को लगातार गति मिल रही है। ग्रामीण स्वयं सहायता समूह,  डेयरी और कृषि आधारित उद्योगों से लेकर शहरी सेवा क्षेत्र तक महिलाएं अब ‘ग्रोथ मल्टीप्लायर’ की भूमिका निभा रही हैं। ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की राह आसान करेंगी महिलाएं नीतिगत स्तर पर महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और स्वरोजगार से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए उत्तर प्रदेश में आर्थिक भागीदारी का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो उत्तर प्रदेश की ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की राह में महिलाओं की भूमिका निर्णायक रहेगी।

प्रयागराज में गरजे डिप्टी CM: ‘नसीमुद्दीन का जाना बेअसर, 2027 में BJP फिर बनेगी पूर्ण बहुमत की सरकार’

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक प्रयागराज पहुंचे। जहां उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जमकर निशाना साधा। वहीं कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में जाने की अटकलों पर यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में जाने से बीजेपी पर कोई असर नहीं होगा। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दावा किया है कि 2027 में बीजेपी फिर से प्रचंड बहुमत से सत्ता में आएगी। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने वंदे मातरम् गीत पर आपत्ति जताने वालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् गीत को आजादी के दीवानों ने हंसते हुए गाया था, आजादी के दीवानों ने हंसते हुए वंदे मातरम् गीत गाकर फांसी के फंदे को चूम लिया था। ब्रजेश पाठक ने कहा आपत्ति करने वाले तुष्टिकरण की राजनीति कर रहें हैं, जबकि सच्चाई ये है कि हर भारतवासी वंदे मातरम् गीत को गाना चाहता है।  

शंकराचार्य विवाद गरमाया: अविमुक्तेश्वरानंद बोले—योगी होकर मुख्यमंत्री रहना कैसे संभव?

वाराणसी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि शंकराचार्य की पहचान राजनीतिक प्रमाणपत्र से नहीं होती। सवाल यह है कि अगर आप योगी हैं, तो मुख्यमंत्री  कैसे रह सकते हैं? शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच बयानबाजी को लेकर सियासी और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हर व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं कह सकता और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। इस बयान के बाद शंकराचार्य ने पलटवार करते हुए कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य की पहचान किसी राजनीतिक प्रमाणपत्र या सरकारी मान्यता से तय नहीं होती। उन्होने कहा कि जो योगी बन गया, उसे राजपाट से दूर रहना चाहिए। राजा योगी बन सकता है, लेकिन योगी फिर से राजा नहीं बनता। तो सवाल यह है कि अगर आप योगी हैं, विरक्त हैं, तो मुख्यमंत्री सत्ता स्वीकार कैसे कर रहे हैं? ‘कोई सीएम शंकराचार्य नियुक्त नहीं करेगा’ एक मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सपा ने शंकराचार्य को मारा था। आप भी मार चुके हो। मतलब सपा ने जिसे मारा, उसे हम भी मार सकते हैं। अगर यही परिभाषा है, तो सपा से अलग कैसे हो सकते हो? जो अहंकार 2015 में अखिलेश के माथे पर चढ़ा था, वही अहंकार चढ़ गया है। अखिलेश तो बर्बाद हो गए। अब इनका देखिएगा। सनातन में ऐसी कोई परंपरा नहीं कि कोई मुख्यमंत्री या सरकार प्रमाणपत्र देकर शंकराचार्य नियुक्त करे। उन्होने कहा कि सनातन धर्म की परंपराएं सदियों पुरानी हैं और इनमें धार्मिक पदों का निर्धारण आध्यात्मिक परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर होता है। उन्होंने कहा कि सरकार या कोई राजनीतिक दल यह तय नहीं कर सकता कि कौन शंकराचार्य होगा या नहीं। सीएम योगी ने क्या कहा था? शंकराचार्य विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता और कानून से ऊपर कोई नहीं है, यहां तक कि मुख्यमंत्री भी नहीं। योगी ने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र माना जाता है और इसकी अपनी परंपराएं व नियम हैं, जिनका पालन जरूरी है। उन्होने आरोप लगाया कि माघ मेले में जिस मुद्दे को लेकर विवाद बनाया गया, वह वास्तविक नहीं था बल्कि जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या पर साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था बनाई थी और किसी को भी नियम तोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए पूछा कि अगर संबंधित व्यक्ति शंकराचार्य थे तो पूर्व में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई। ‘गेरुआ वस्त्र पहनने से कोई योगी नहीं बन जाता’ वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि केवल गेरुआ वस्त्र पहनने या कान छिदवाने से कोई योगी नहीं बन जाता और संतों का सम्मान होना चाहिए। इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।  

नकल माफिया पर STF का शिकंजा: SSC MTS परीक्षा घोटाले में दो गिरफ्तार

मेरठ आज के समय में सरकारी नौकरी ज्यादातर युवाओं का सपना होता है. इसके लिए वह बहुत तैयारी भी करते हैं लेकिन कई बार कुछ लोगों के कारण परीक्षाएं रद्द कर दी जाती है. उत्तर प्रदेश के मेरठ और उत्तराखंड STF ने SSC MTS भर्ती में नकल कर रहे गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है. इस गिरोह के दो सदस्यों की गिरफ्तारी की गई है. ये उत्तर प्रदेश की मेरठ STF और उत्तराखंड STF ने साझा कार्रवाई के तहत एक्शन लिया है. दोनों आरोपी देहरादून और उत्तर प्रदेश के निवासी हैं.  हुई आरोपियों की पहचान  गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नीतीश कुमार के रूप में हुई है जो, देवरिया का रहने वाला है. वहीं, दूसरे आरोपी की पहचान भास्कर नैथानी के रूप में हुई है जो, देहरादून का रहने वाला है. जानकारी की माने तो दोनों आरोपी परीक्षा केंद्र में “मास्टर कंप्यूटर” लगाकर सिस्टम से छेड़छाड़ कर लोकल नेटवर्किंग के जरिए प्रॉक्सी सर्वर सेटअप कर रिमोट एक्सेस से पेपर सॉल्व कर रहे थे.  ऐसा किया आरोपियों को गिरफ्तार  एसटीएफ के मुताबिक, 4 फरवरी से कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की एमटीएस परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है. इस परीक्षा में देहरादून के महादेव डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र पर तकनीकी तरीके से नकल कराए जाने की सूचना मिलने के बाद STF ने ये कार्रवाई की है और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.  आरोपियों के पास से मिले ये सामना  वहीं, STF की टीम ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और एक इंटरनेट राउटर बरामद किए गए हैं. शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये उपकरण परीक्षा के दौरान बाहरी मदद उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे. फिलहाल इस मामले में दोनों आरोपियों से पूछताछ के बाद अन्य लोगों की होने की जानकारी मिली है. हालांकि, जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिससे पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकें. 

कृतज्ञता ज्ञापित करना भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग: सीएम योगी

नौकरी की गारंटी होगी प्रदेश के वानिकी विश्वविद्यालय की डिग्री: मुख्यमंत्री जंगल कौड़िया ब्लॉक में पुनर्निर्मित बीडीओ कार्यालय का सीएम योगी ने किया उद्घाटन कृतज्ञता ज्ञापित करना भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग: सीएम योगी यूपी में विकास के साथ दमघोंटू वातावरण से मुक्ति: सीएम योगी गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कैम्पियरगंज में बनने जा रहे प्रदेश के पहले वानिकी एवं उद्यान विज्ञान विश्वविद्यालय (फॉरेस्ट्री एंड हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी) की डिग्री नौजवानों के लिए नौकरी की गारंटी होगी। इस विश्वविद्यालय से डिग्री और डिप्लोमा लेकर निकलने वाले युवाओं के लिए देश और दुनिया में रोजगार के व्यापक अवसर होंगे। साथ ही यह विश्वविद्यालय अन्नदाता किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सीएम योगी शनिवार को जंगल कौड़िया ब्लॉक में पुनर्निर्मित बीडीओ कार्यालय का उद्घाटन करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कैम्पियरगंज में बने गिद्धराज जटायु संरक्षण केंद्र का उल्लेख करते हुए कहा कि कृतज्ञता ज्ञापित करना हमारी भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। हमारे लिए किसी ने कुछ किया तो उसके प्रति कृतज्ञ होना हमारी जीवनशैली का हिस्सा है। गिद्धराज जटायु की मानव जाति पर बड़ी कृपा रही। माता सीता का हरण कर ले जा रहे रावण का पहला प्रतिकार गिद्धराज जटायु ने किया था। वह सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु की सवारी भी हैं। आज केमिकल और पेस्टिसाइड्स के इस्तेमाल के चलते गिद्धराज की संख्या कम होती जा रही, वे मर रहे हैं। ऐसे में गिद्धराज के प्रति कृतज्ञता जताने और उनको संरक्षण देने के लिए कैम्पियरगंज में संरक्षण केंद्र बनाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब कैम्पियरगंज में प्रदेश का पहला वानिकी एवं उद्यान विज्ञान विश्वविद्यालय बनाया जाएगा। यहां युवाओं को जो डिप्लोमा व डिग्री मिलेगी, वह देश-दुनिया में नौकरी की गारंटी वाली होगी। आज दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्यावरण प्रदूषण की है। वायु प्रदूषण से फेफड़े खराब होंगे और धीरे-धीरे पूरा शरीर खराब हो जाएगा। जब प्रदूषण नहीं होगा तो बीमारी भी नहीं होगी। उन्होंने वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली की चर्चा करते हुए कहा कि वहां डॉक्टर दमा रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों को घर से बाहर न निकलने की सलाह देते हैं। यह स्थिति पर्यावरण के साथ खिलवाड़ से बनती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास भी है और दमघोंटू वातावरण से मुक्ति भी। इसी क्रम में कैम्पियरगंज में बनने जा रहा वानिकी विश्वविद्यालय पर्यावरण की चुनौतियों से निपटने में और कारगर सिद्ध होगा। यह वनाच्छादन बढ़ाने और किसानों की आमदनी में वृद्धि का भी नया प्रयास होगा।  नीयत साफ हो तो परिणाम अपने आप आ जाते हैं मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 के बाद प्रदेश और गोरखपुर के विकास की चर्चा करते हुए कहा कि जब नीयत साफ हो तो परिणाम अपने आप आ जाते हैं। अच्छी दिशा में किए गए प्रयास से आज गोरखपुर में खाद कारखाना चालू हो चुका है। गोरखपुर में एम्स सेवाएं दे रहा है, बीआरडी मेडिकल कॉलेज चिकित्सा का उत्कृष्ट केंद्र बन चुका है। पिपराइच में चीनी मिल दोबारा चालू हो गई है। धुरियापार में कम्प्रेस्ड बायो गैस का प्लांट लग चुका है। गीडा में उद्योग ही उद्योग नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर और प्रदेश में विकास के बहुत बड़े-बड़े कार्य हो रहे हैं। विकास की सोच ही वर्तमान और भावी पीढ़ी के भविष्य को उज्ज्वल बनाने में सहायक होगी।  जंगल कौड़िया के हर गांव से जुड़ाव अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जंगल कौड़िया ब्लॉक के हर गांव से जुड़ाव का जिक्र किया। कहा कि वह यहां एक-एक गांव गए हैं। हर गांव की समस्या जानते हैं, समस्या समाधान के लिए संघर्ष किया है। बाढ़ की स्थिति में पानी में घुसकर लोगों तक पहुंचे हैं। समस्याओं की तस्वीर पहले से सामने थी तो लखनऊ से उन सभी समस्याओं का समाधान भी करा दिया है।  जंगल कौड़िया, कैम्पियरगंज का विकास कल्पनाओं से भी परे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जंगल कौड़िया ब्लॉक व कैम्पियरगंज विधानसभा क्षेत्र में आज विकास की जो स्थिति है, वह लोगों की कल्पनाओं से भी परे है। यहां कालेसर-जंगल कौड़िया बाईपास बन जाने से लोग सीधे लखनऊ पहुंच जाते हैं, वह भी सिर्फ तीन-साढ़े तीन घंटे में। चिउटहा से कुशीनगर जाने में सिर्फ आधा घंटा लगता है। क्षेत्र की हर प्रमुख सड़क फोरलेन हो गई है। बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान हो रहा है। जंगल कौड़िया में पूज्य ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की स्मृति में डिग्री कॉलेज बन गया है। यहां 2 हजार से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षा मिल रही है। स्टेडियम बन गया है। कुश्ती के प्रशिक्षण और अभ्यास की सुविधा से क्षेत्र के पहलवानों को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। विकास के साथ ही गरीबों के कल्याण के कार्य हुए हैं। आवास, शौचालय, राशन, आयुष्मान भारत, पेंशन का लाभ हर पात्र को उपलब्ध हुआ है। यह सब विकास के प्रति भाव रखने का ही परिणाम है।  पूर्व प्रमुख रामपति यादव को याद किया सीएम ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जंगल कौड़िया के पूर्व ब्लॉक प्रमुख स्वर्गीय रामपति यादव को भी श्रद्धापूर्वक याद किया। कहा कि 1952 से आजीवन गोरक्षपीठ से जुड़े रहे रामपति यादव 1962 में जंगल कौड़िया के प्रमुख बने और तभी इस ब्लॉक मुख्यालय की स्थापना हुई थी। उन्होंने शालीनता और सहजता के साथ लंबे समय तक लोगों की सेवा की।  वर्तमान प्रमुख के कार्यों की सराहना की मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री ने जंगल कौड़िया के वर्तमान ब्लॉक प्रमुख बृजेश यादव के कार्यों की सराहना की। कहा कि उन्होंने सवा करोड़ रुपये की ब्लॉक निधि और विकसित भारत जीरामजी योजना का बेहतर उपयोग किया है। ब्लॉक भवन में वातानुकूलित सभागार बनवाया है, साथ में सोलर पैनल की भी व्यवस्था की है। विकास के पैसे का ऐसा ही इस्तेमाल हो तो हर ब्लॉक चमकता दिखेगा। सीएम योगी ने भरोहिया ब्लॉक के विकास की तारीफ की। उन्होंने कहा कि जंगल कौड़िया के लोगों के साथ वह हमेशा खड़े हैं। विकास की हर मांग को वह पूरा करने के लिए तैयार हैं। सीएम योगी ने सभी लोगों को महाशिवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह पर्व शुभता का प्रतीक है।  सीएम की प्रेरणा से कैम्पियरगंज में बनेगी एशिया की सबसे बड़ी फॉरेस्ट्री यूनिवर्सिटी : फतेह बहादुर सिंह … Read more

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