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कालिंजर महोत्सव 2026:तृप्ति शाक्या एंड ग्रुप, साधो द बैंड और ममता शर्मा सजाएंगी सुरमयी शाम

कालिंजर महोत्सव 2026:तृप्ति शाक्या एंड ग्रुप, साधो द बैंड और ममता शर्मा सजाएंगी सुरमयी शाम   ‘इतिहास की गूंज, संस्कृति की आत्मा’ थीम के साथ होगा सांस्कृतिक महासंगम 15 से 17 फरवरी तक होंगी रंगारंग प्रस्तुतियां, ‘आज की शाम कालिंजर के नाम’ और ‘बांदा गॉट टैलेंट’ होंगे मुख्य आकर्षण  खेल महोत्सव में होगा खो-खो, कबड्डी एवं दंगल  लखनऊ बुंदेलखंड के बांदा जनपद की ऐतिहासिक धरती पर 15 से 17 फरवरी तक तीन दिवसीय कालिंजर महोत्सव 2026 का आयोजन होगा। ‘इतिहास की गूंज, संस्कृति की आत्मा’ थीम पर आधारित यह महोत्सव उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और कलात्मक उत्कृष्टता का अद्भुत उत्सव होगा। महोत्सव का आयोजन जिला पर्यटन-संस्कृति परिषद तथा जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से कटरा कालिंजर मेला ग्राउंड में किया जाएगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि कालिंजर महोत्सव में बुंदेली लोकनृत्य, आल्हा गायन, भजन और लोकगीतों सहित विविध प्रस्तुतियां होंगी, जो क्षेत्र की समृद्ध परंपराओं को मंच प्रदान करेंगी।  हर विधा के कलाकार संग परंपरा और नवाचार  तीन दिवसीय महोत्सव में जहां एक ओर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छटा बिखरेगी, वहीं खेल महोत्सव से युवाओं की ऊर्जा और प्रतिस्पर्धात्मक भावना को मंच मिलेगा। ‘बांदा गॉट टैलेंट’ के जरिए स्थानीय प्रतिभाओं को कला प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर मिलेगा, तो ‘आज की शाम कालिंजर के नाम’ के अंतर्गत विभिन्न विधाओं के खिलाड़ी, कलाकार, गायक अपनी प्रतिभा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। महोत्सव स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर की झलक के साथ परंपरा और नवाचार का उत्सव बनकर उभरेगा। महोत्सव के तहत मंडलीय सरस मेले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की प्रदर्शनी व विभागीय स्टॉल लगाए जाएंगे। मेले में सम्मेलन एवं गोष्ठी भी होगी।  खेल महोत्सव और ‘बांदा गॉट टैलेंट’ खेल महोत्सव प्रतिदिन प्रातः आठ से अपराह्न चार बजे तक होगा, इसमें 15 फरवरी को खो-खो, 16 फरवरी को कबड्डी तथा 17 फरवरी को दंगल होगा। ‘बांदा गॉट टैलेंट’ प्रतिदिन अपराह्न एक बजे से तीन बजे तक किया जाएगा। इसके अंतर्गत 15 फरवरी को विद्यालय स्तरीय, 16 फरवरी को महाविद्यालय स्तरीय तथा 17 फरवरी को सांस्कृतिक उत्सव 2025-26 के जनपद स्तरीय विजेता विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे।  ‘आज की शाम कालिंजर के नाम’ से सजेगा मंच  कालिंजर महोत्सव में 15, 16 व 17 फरवरी को अपराह्न चार बजे से सायं छह बजे तक ‘स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर’ के अंतर्गत बुंदेली लोक संस्कृति की प्रस्तुतियां होंगी। इनमें  बुंदेली लोकनृत्य,  बुंदेली लोक गायन, वीर रस से ओत-प्रोत आल्हा गायन, भजन एवं लोक गीतों के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध परंपरा की झलक देखने को मिलेगी। ‘आज की शाम कालिंजर के नाम’ के अंतर्गत महोत्सव में प्रतिदिन शाम छह बजे से रात्रि 10 बजे तक सांस्कृतिक संध्या होगी। 15 फरवरी को तृप्ति शाक्या एंड ग्रुप अपनी प्रस्तुति से माहौल को सुरमयी बनाएगा। 16 फरवरी को साधो द बैंड एंड ग्रुप तथा राधा श्रीवास्तव एंड ग्रुप दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। 17 फरवरी को ममता शर्मा एवं राजा रेन्चो अपनी प्रस्तुति से शाम को यादगार बनाएंगे। अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि ‘कालिंजर महोत्सव-2026 बुंदेलखंड की ऐतिहासिक चेतना और जनभागीदारी का सशक्त उत्सव है। प्रदेश सरकार ने गणतंत्र दिवस की झांकी में भी कालिंजर किला को प्रमुखता से प्रदर्शित कर उसकी वैश्विक पहचान को नई ऊंचाई दी थी। पर्यटन विभाग का प्रयास है कि बुंदेलखंड के चर्चित एवं विरासत स्थलों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर सशक्त रूप से स्थापित किया जाय। यह आयोजन पर्यटन संवर्धन, स्थानीय अर्थव्यवस्था के सशक्तीकरण और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।’

जीरो पॉवर्टी की दिशा में हुआ वृहद कार्य, 60 लाख गरीबों को आवास दिये गये, 6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर हुए

तुष्टीकरण से संतुष्टीकरण की ओर बढ़ा प्रदेश, निराश्रितों और श्रमिकों के लिए नई योजना की तैयारीः  सीएम योगी  मुख्यमंत्री बोले, सरकार का उद्देश्य हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना  जीरो पॉवर्टी की दिशा में हुआ वृहद कार्य, 60 लाख गरीबों को आवास दिये गये, 6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर हुए लखनऊ  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार जीरो पॉवर्टी के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में गरीबों, निराश्रित महिलाओं, श्रमिकों और वंचित वर्गों के लिए चलाई गई योजनाओं ने उत्तर प्रदेश की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर बदली है। सरकार ने तुष्टीकरण की राजनीति से ऊपर उठकर “संतुष्टीकरण” के मॉडल पर कार्य किया है, जिसका उद्देश्य हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि निराश्रित महिलाओं को पेंशन, जरूरतमंदों को जॉब कार्ड और राशन कार्ड, जिनके पास आवास नहीं था उन्हें आवास तथा जिनके पास भूमि का स्वामित्व नहीं था उन्हें आवासीय पट्टा देने की कार्रवाई व्यापक स्तर पर की गई है। उन्होंने कहा कि अब तक 60 लाख गरीब परिवारों को एक-एक आवास उपलब्ध कराया गया है। पूर्ववर्ती योजनाओं पर उठाए सवाल मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले गरीबों को इंदिरा आवास योजना के तहत मात्र ₹20,000 दिए जाते थे, जो पर्याप्त नहीं थे और न ही आवास समय पर पूरे हो पाते थे। उस दौरान योजनाओं का लाभ सीमित वर्ग तक ही पहुंचता था। इसके विपरीत वर्तमान डबल इंजन सरकार नगरीय क्षेत्रों में ₹2.5 लाख और ग्रामीण क्षेत्रों में ₹1.20 लाख आवास निर्माण के लिए उपलब्ध करा रही है। इसके अतिरिक्त शौचालय निर्माण के लिए ₹12 से 15 हजार की अतिरिक्त सहायता दी जाती है। साथ ही मनरेगा के तहत 90 दिनों की मजदूरी के बराबर मानदेय भी लाभार्थी को प्रदान किया जाता है, जिससे घर निर्माण में आर्थिक सहयोग सुनिश्चित हो सके। बहुआयामी गरीबी में आई उल्लेखनीय कमी मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं और समग्र विकास के प्रयासों के परिणामस्वरूप 6 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने इसे सरकार की परिणाम-आधारित कार्यशैली का प्रमाण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सफाई कर्मियों और निर्माण श्रमिकों जैसे शेष जरूरतमंद वर्गों के लिए आवास के लिए एक नई योजना लाई जा रही है। इसकी घोषणा आगामी बजट भाषण में की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी सहायता से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास केवल आवास या आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के समन्वित विस्तार के माध्यम से समग्र विकास सुनिश्चित करना है। “हर गरीब को छत, हर निराश्रित को सम्मान और हर जरूरतमंद को अधिकार” इसी भावना के साथ प्रदेश जीरो पॉवर्टी की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दोहराया कि यह धन जनता का है और उसका उपयोग जनता के हित में ही किया जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ बिना भेदभाव हर वर्ग तक पहुंचे और उत्तर प्रदेश गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित करे।

CM योगी बोले- गलत जांच रिपोर्ट लगाने वालों पर कार्रवाई, पीड़ितों की सहायता में शिथिलता अक्षम्य

गलत जांच रिपोर्ट लगाने वालों पर दर्ज हो एफआईआर : मुख्यमंत्री पीड़ितों की सहायता में लापरवाही या शिथिलता अक्षम्य : सीएम योगी जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुनीं 150 लोगों की समस्याएं, समयबद्ध व निष्पक्ष निस्तारण के दिए निर्देश गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी मामले में जांच के दौरान यदि गलत रिपोर्ट लगाई जाती है तो संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। हर मामले की निष्पक्ष जांच करके ही उसका निस्तारण होना चाहिए। किसी भी प्रकरण में लापरवाही या शिथिलता अक्षम्य होगी।  सीएम योगी ने शनिवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन के दौरान लोगों की समस्याएं सुनते हुए ये निर्देश प्रशासन व पुलिस के अफसरों को दिए। मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 150 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने सभी को आश्वस्त किया कि किसी को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। हर समस्या का वह प्रभावी निस्तारण कराएंगे। उन्होंने प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश दिए कि जनता की समस्याओं का समयबद्ध, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करें। जनता दर्शन में कुछ मामले ऐसे भी आए थे, जिनमें यह शिकायत की गई कि प्रकरण में गलत रिपोर्ट लगा दी गई है। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पता लगाकर गलत रिपोर्ट लगाने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की मदद में शिथिलता या लापरवाही कतई नहीं होनी चाहिए। जनता की समस्याओं के समाधान में किसी तरह की हीलाहवाली हुई तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी तय है। किसी पीड़ित की समस्या के समाधान में अगर कहीं भी कोई दिक्कत आ रही है तो उसका पता लगाकर निराकरण कराया जाए और किसी स्तर पर जानबूझ कर प्रकरण को लंबित रखा गया है तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने जमीन कब्जाने की शिकायतों पर विधिसम्मत कठोर कदम उठाने का निर्देश दिया।  इस बार भी जनता दर्शन में कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। इस पर सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा कि जल्द से जल्द अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया पूर्ण कराकर शासन को उपलब्ध करा दें। इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पर्याप्त मदद की जाएगी। जनता दर्शन में परिजनों के साथ आए बच्चों पर सीएम योगी ने अपना स्नेह बरसाया। मुख्यमंत्री ने बच्चों को दुलारा, उन्हें चॉकलेट दी और खूब पढ़ने के लिए प्रेरित किया।  मंदिर की गोशाला में सीएम ने की गोसेवा गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान शनिवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। मंदिर की गोशाला में पहुंचकर उन्होंने गोसेवा की। गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से अपने हाथों से गुड़ खिलाया।

यूपी बजट विश्लेषण: पारदर्शी नीतियां और आशावादी दृष्टिकोण का संदेश

उत्तर प्रदेश के बजट पर विशेषज्ञों की राय  ——————————————— स्पष्ट नीतियों से सकारात्मक सोच योगी सरकार ने प्रदेश के विकास को लेकर अपनी समग्र दृष्टि पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं को एकीकृत रूप से देखें तो सरकार का मंतव्य भी सामने आ जाएगा। पहला तो राज्य सरकार की ओर से पहली बार प्रस्तुत किया गया आर्थिक सर्वेक्षण, दूसरा सदन में रख गए बजट के बिंदु और तीसरा राज्यपाल के अभिभाषण पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से की गई चर्चा। इन तीनों का ही सार यह है कि प्रदेश सरकार के एजेंडे में लोक लुभावन बजट नहीं, प्रदेश को अब क्षमता वृद्धि की राह पर ले जाना है और इसीलिए दीर्घकालिक सोच को प्रधानता दी गई है। चूंकि यूपी की अर्थव्यवस्था मजबूत है इसलिए पूंजीगत व्यय पर अधिक जोर दिया जाना अब स्वाभाविक है और अच्छी बात यह है कि इसके लिए नीतियां बिलकुल स्पष्ट हैं। राज्य की आर्थिक स्थिरता ने ही निवेशकों को आकर्षित किया है। इसमें उस बुनियादी ढांचे का विशेष स्थान है, जो सहज साधन के रूप में विकसित हुआ। एक्सप्रेसवे का नेटवर्क, नए हवाई अड्डे, लाजिस्टिक पार्क और औद्योगिक कारिडोर की वजह से निवेशक आने वाले दिनों में और आकर्षित होंगे। मेरी दृष्टि में यह बजट सकारात्मक सोच वाला है जिसमें विकास का एक बड़ा आधार दिखाई देता है।  डा. शरद कोहली, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ बिजनेस स्टेबिलिटी को बढ़ावा आर्थिक सर्वेक्षण और 2026-27 के बजट दोनों को देखें तो यह स्पष्ट है कि सरकार राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास दर को स्थिर बनाए रखना चाहती है। यह दृष्टिकोण इस बात का परिचायक है कि सामाजिक क्षेत्र को भी उत्पादकता से जोड़ा जा रहा है। पूंजीगत व्यय पर स्पष्ट फोकस की सोच भी स्पष्ट है कि संरचनात्मक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ा जाए। यह एक तरह से संदेश है कि सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर का अपना एजेंडा बरकरार रखा है जिससे आगे चलकर प्रदेश में स्थायी विकास होता दिखाई देगा। सड़क, एक्सप्रेस-वे, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक कॉरिडोर, सिंचाई और ऊर्जा पर बड़े आवंटन यह दर्शाते हैं कि सरकार निजी निवेश को लेकर आधारभूत ढांचा मजबूत करना चाहती है। इससे राज्य में आर्थिक स्थिरता आएगी और निवेशक ऐसा ही माहौल चाहते हैं। आधारभूत ढांचा मजबूत होने से औद्योगिक गतिविधि को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। फियरलेस गवर्नेंस और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस स्टेबिलिटी को बढ़ावा देती हैं। मेरे विचार में यूपी सरकार ने एक ऐसा बजट प्रस्तुत किया है, जिसमें राज्य की आर्थिक स्थिरता के साथ ही निवेश संकेतकों को लेकर भी सकारात्मक संदेश उभरता है।  इस बात का प्रयास दिखाई देता है कि वेलफेयर की आधारशिला पर क्षमता निर्माण और पूंजी निवेश की इमारत खड़ी की जाए।  प्रो. मेनका सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय   उत्तर प्रदेश का 2026-2027 का बजट सकारात्मक संदेशों से भरा हुआ है। यह साफ करता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार लोक लुभावन राजनीति के बजाय प्रदेश की लॉन्ग टर्म आर्थिक मजबूती पर काम कर रही है। इस बजट की सबसे बड़ी खासियत है इंफ्रास्ट्रक्चर और पूंजीगत निवेश पर स्पष्ट फोकस। प्रदेश की जीएसडीपी 30.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचना और 13.4 प्रतिशत की वृद्धि दर दिखाती है कि विकास केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर उतर रहा है। प्रति व्यक्ति आय 1,09,844 रुपये तक पहुंचना और आगे 1,20,000 रुपये का अनुमान इस दिशा को और मजबूत करता है। लगभग 06 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना और बेरोजगारी दर का 2.24 प्रतिशत तक आना यह बताता है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर स्थित हर व्यक्ति तक पहुंच रहा है। साथ ही, 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का क्रियान्वयन यह संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश अब निवेश आधारित, स्थिर और भविष्य उन्मुख अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। प्रो. हिमांशु, अर्थ शास्त्री, जेएनयू मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है। यूपी का बजट 2026-27 यह स्पष्ट करता है कि योगी सरकार तात्कालिक लाभ से आगे बढ़कर प्रदेश की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है। 9,12,696.35 करोड़ रुपये के इस बजट में 19.5 प्रतिशत पूंजीगत व्यय रखा जाना इस बात का संकेत है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थायी विकास सरकार के एजेंडे के केंद्र में हैं। राजकोषीय घाटे को 3 प्रतिशत की सीमा में रखना और ऋण-जीएसडीपी अनुपात को 23.1 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य यह दर्शाता है कि आर्थिक अनुशासन और वित्तीय प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का इसे चरणबद्ध तरीके से 20 प्रतिशत से नीचे लाने का संकल्प भविष्य की आर्थिक मजबूती तो सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्धता का संकेत है। शिक्षा, चिकित्सा और कृषि जैसे बुनियादी क्षेत्रों में संतुलित आवंटन यह दिखाता है कि विकास केवल ढांचागत ही नहीं, बल्कि समावेशी भी है। यह बजट स्पष्ट संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश अब मजबूत, स्थिर और दीर्घकालिक विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है। प्रो. शिरीष मिश्र, केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी

काशी में भव्य उत्सव: बाबा विश्वनाथ दूल्हा बनेंगे, शिव विवाह की रस्मों ने जगाया उत्साह

काशी  महाशिवरात्रि से पहले काशी में शिव विवाह की पावन रस्मों का शुभारंभ शुक्रवार को बाबा विश्वनाथ की सगुन हल्दी के साथ होगा। सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार बाबा को विवाह से पूर्व हल्दी अर्पित की जाएगी और उन्हें दूल्हा रूप में सजाया जाएगा। बांसफाटक से निकलेगी हल्दी की पारंपरिक यात्रा बांसफाटक स्थित श्रीमहंत लिंगिया महाराज (शिव प्रसाद पांडेय) के आवास, श्रीयंत्र पीठम “श्री धर्म निवास” से हल्दी की पारंपरिक यात्रा टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास के लिए रवाना होगी। यहां बाबा की पंचबदन चल प्रतिमा पर विधि-विधान से हल्दी अर्पित की जाएगी। बड़ी शीतला माता मंदिर के उपमहंत अवशेष पांडेय (कल्लू महाराज) ने बताया कि काशी की लोकपरंपरा में शिव विवाह से पूर्व सगुन की हल्दी चढ़ाने की विशेष मान्यता है। इस वर्ष विशेष रूप से नासिक से मंगाई गई हल्दी बाबा को अर्पित की जाएगी। सारंगनाथ से आएंगे ससुरालीजन शिव विवाह की इस रस्म में बाबा के ‘ससुराल’ सारंगनाथ मंदिर से भी ससुरालीजन शामिल होंगे। सामूहिक रुद्राभिषेक पीठ के पदाधिकारियों के अनुसार, सारंगनाथ से हल्दी लेकर श्रद्धालु बांसफाटक पहुंचेंगे और वहां से शोभायात्रा के साथ टेढ़ीनीम महंत आवास जाएंगे। डमरू, शंखनाद और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के बीच बाबा को सगुन की हल्दी अर्पित की जाएगी। विशेष पूजन और भव्य श्रृंगार हल्दी चढ़ाने से पहले महंत परिवार की संरक्षिका मोहिनी देवी के सानिध्य में 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा पंचबदन प्रतिमा का विशेष पूजन कराया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा का पारंपरिक और भव्य श्रृंगार होगा। दूल्हे के रूप में सजे श्रीविश्वनाथ की झलक पाने को भक्त उत्साहित हैं। नृत्यांजलि और स्वरांजलि से भक्तिमय माहौल हल्दी अनुष्ठान के उपरांत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। नृत्यांजलि और स्वरांजलि के माध्यम से शिव भक्ति का रस बिखरेगा और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठेगा। काशी में शिव विवाह की इन रस्मों के साथ महाशिवरात्रि महापर्व की तैयारियां भी चरम पर पहुंच गई हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन आस्था, परंपरा और उत्सव का अद्भुत संगम बनकर सामने आएगा।

आजमगढ़ शिया-सुन्नी दंगा केस अपडेट: 12 आरोपियों पर गिरे दोषी ठप्पे

आजमगढ़  यूपी के आजमगढ़ के मुबारकपुर कस्बे में 27 साल पूर्व शिया-सुन्नी दंगे के दौरान हुई युवक की हत्या के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद कोर्ट ने 12 लोगों को दोषी करार दिया है। उनकी सजा 17 फरवरी को सुनाई जाएगी। यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयप्रकाश पांडेय ने शुक्रवार को सुनाया। मामले में कुल 16 आरोपी थी। सुनवाई की अवधि के बीच चार की मौत हो गई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी मुकदमा नासिर हुसैन ने मुबारकपुर थाने में 30 अप्रैल 1999 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तहरीर में नासिर हुसैन ने बताया कि उसके चाचा अली अकबर निवासी पूराख्वाजा 27 अप्रैल 1999 से लापता थे। अली अकबर के लड़के जैगम ने 28 अप्रैल को गुमशुदगी की सूचना थाने में दी थी। 30 अप्रैल को अली की सिर कटी लाश राजा भाट के पोखरे से बरामद की गई। पुलिस की विवेचना के दौरान यह पता चला कि मोहर्रम के जुलूस से लौटते समय अली अकबर की सुन्नी समुदाय के लोगों ने मारपीट कर हत्या कर दी थी। अभियोजन पक्ष की तरफ से डीजीसी फौजदारी प्रियदर्शी पीयूष त्रिपाठी और एडीजीसी दीपक कुमार मिश्रा ने कुल नौ गवाहों को कोर्ट में परीक्षित कराया। चार लोगों की मुकदमे के दौरान हो गई थी मौत दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने 12 लोगों को हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने सजा पर सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तिथि निर्धारित की है। बता दें कि पुलिस ने कुल 14 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। बाद में दो और लोगों को न्यायालय ने बतौर मुलजिम तलब किया। इस तरह कुल 16 आरोपी हो गए थे। 16 आरोपियों में से हाजी मोहम्मद सुलेमान निवासी दुल्हनपुरा, नजीबुल्लाह निवासी पूरासोफी, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक निवासी हैदराबाद और हाजी अब्दुल खालिक निवासी हैदराबाद की मुकदमे के दौरान मौत हो गई। सिर कटी लाश मिलने से भड़की थी हिंसा मुबारकपुर कस्बे में 30 अप्रैल 1999 को पूराख्वाजा निवासी अली अकबर की पोखरे में सिरकटी लाश मिलने के बाद शिया और सुन्नी समुदाय के बीच हिंसा भड़क गई थी। रुक-रुककर करीब 19 महीने तक मुबारकपुर सुलगता रहा। दोनों समुदायों के बीच विवाद की शुरुआत मोहर्रम के दिन हुई थी। मुबारकपुर कस्बे में मोहर्रम की नौवीं की रात जुलूस निकाला जा रहा था। कस्बे के पुरासोफी टुन्न स्थित शिया समुदाय के इमामबाड़ा के बगल में महिलाओं के बैठने के लिए पर्दा लगाया गया था। दसवीं के दिन सुबह किसी ने पर्दे में आग लगा दी। सुबह 11 बजे शिया समुदाय की तरफ से जुलूस निकाला जाना था। पर्दा जलाने की बात थोड़ी देर में ही कस्बे में फैल गई। जिसके बाद शिया समुदाय के लोगों ने जुलूस निकालने से मना कर दिया। 19 महीने तक सुलगता रहा मुबारकपुर, 17 ने गंवाई जान मामले की जानकारी होने के बाद प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। अफसरों ने शिया समुदाय के लोगों को समझाकर जुलूस निकलवाना शुरू किया। दोपहर में कस्बे के भुतही पक्कड़ के पास जुलूस पर कुछ लोगों ने पत्थर और गर्म पानी फेंक दिया। जिसके बाद विवाद बढ़ता चला गया। पुलिस के रिकार्ड के मुताबिक, पूराख्वाजा निवासी अली अकबर की कर्बला जाते समय सुन्नी समुदाय के लोगों ने पीटने के साथ ही चाकू मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद दोनों तरफ से लोग बवाल पर आमादा थे। प्रशासन की सख्ती और पुलिस की सूझबूझ के बाद किसी तरह बवाल टला, लेकिन दोनों समुदायों में अंदर ही अंदर चिंगारी भड़कती रही। जनवरी 2000 में यह चिंगारी फिर शोला बन गई। सुन्नी समुदाय के तीन लोग साड़ी का कारोबार कर वाराणसी से मुबारकपुर लौट रहे थे, तभी कस्बे के शाह मोहम्मदपुर मोहल्ले में तीनों लोगों की हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद बवाल बढ़ने लगा। दोनों पक्षों के लोग एक बार फिर आमने-सामने आ गए थे, लेकिन प्रशासन की सख्ती के कारण बड़ी घटना टल गई। पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी। जिसके बाद करीब नौ महीने तक कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। हालांकि दोनों पक्षों के लोग ताक में बैठे थे। नवंबर 2000 में आखिर उन्हें मौका मिल ही गया। कस्बे में करीब दर्जनभर जगहों पर एक साथ सुनियोजित तरीके से बम ब्लास्ट हुए। जिसमें दोनों पक्षों से तेरह लोगों की मौत हो गई। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में कई लोगों को कर दिया था बरी सुन्नी समुदाय के बीच हुए दंगे में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अगस्त 2023 में पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। मुकदमे के अनुसार, पांच नवंबर 2000 को मुबारकपुर कस्बे में वादी मुकदमा अजादर हुसैन शाम सात बजे अपनी दुकान में बैठा था। इस दौरान सुन्नी समुदाय के कई लोग धारदार हथियार लेकर पहुंचे। शिया समुदाय के खिलाफ नारा लगाते हुए व जान से मारने की धमकी देते हुए अजादार हुसैन की दुकान पर लूटपाट की। इस घटना में मुख्तार व मोहम्मद हुसैन घायल हो गए। पुलिस ने इस मामले में कुल 26 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। आरोपी खलीलुर्रहमान, फुरतुल ऐम, एहकसामुर्रहमान, नौशाद की मौत हो गई। कुल सात गवाहों को अदालत ने पेश किया गया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद 22 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। पुलिस जांच में थे 14 आरोपी, बाद में हो गए 16 शिया-सुन्नी बवाल के दौरान युवक की हत्या के मुकदमे में तेरह आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट 22 जुलाई 1999 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में भेजी गई। जबकि एक आरोपी हुसैन अहमद के विरुद्ध 21 नवंबर 1999 को चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित की गई। मुकदमे की फाइल 5 फरवरी 2002 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सत्र न्यायालय में भेज दी। सत्र न्यायालय ने सुनवाई करते हुए 24 जुलाई 2002 को मुकदमे में 14 आरोपियों पर आरोप तय किया। प्रारंभिक गवाहों के बयान के आधार पर 18 जनवरी 2005 को मुकदमे में दिलशाद तथा वसीम अहमद को धारा 319 सीआरपीसी के तहत आरोपी के तौर पर कोर्ट ने तलब किया। इन दोनों आरोपियों के विरुद्ध 31 जनवरी 2005 को आरोप तय किया गया। अदालत ने इन 12 लोगों को माना हिंसा का दोषी 1. हुसैन अहमद, हैदराबाद 2. मोहम्मद अयूब … Read more

आज की आवश्यकता है कि अधिक से अधिक युवाओं को भविष्य उन्मुख तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसरः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीएम योगी ने स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप, डेटा सेंटर और रोजगार सृजन पर विस्तार से रखा पक्ष एआई, डिजिटल टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए सेंटर स्थापित किएः मुख्यमंत्री  आज की आवश्यकता है कि अधिक से अधिक युवाओं को भविष्य उन्मुख तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को कौशल, तकनीक और उद्यमिता से जोड़कर उत्तर प्रदेश को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर कर रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्किल डेवलपमेंट और आईटीआई व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत आते हैं। सरकार ने व्यावसायिक शिक्षा के ढांचे को आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए सेंटर स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि टाटा टेक्नोलॉजी के सहयोग से प्रत्येक जनपद के दो आईटीआई को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी से जोड़ा जा रहा है। इन संस्थानों को ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ पर विकसित किया जा रहा है, ताकि एक केंद्रीय संस्थान से जुड़े अन्य संस्थानों को तकनीकी संसाधन और प्रशिक्षण सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि आज की आवश्यकता है कि अधिक से अधिक युवाओं को भविष्य उन्मुख तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाए। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी आधारित कोर्स से युवाओं को जोड़ा गया मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से स्किल डेवलपमेंट और तकनीकी उन्नयन को नई दिशा मिली है। तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए पाठ्यक्रमों को आधुनिक बनाया है। माध्यमिक शिक्षा के तहत प्रत्येक जनपद के राजकीय कॉलेजों को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी आधारित कोर्स से जोड़ा जा रहा है। विद्यार्थियों को डेटा उपयोग, इंटरनेट सुविधा और डिजिटल संसाधनों से सशक्त करने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने सीएम युवा उद्यमी योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि अब तक 1,10,000 युवाओं को 10 प्रतिशत मार्जिन मनी के साथ ब्याज-मुक्त और गारंटी-मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि योजना में चयन और प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि युवा सफल उद्यमी बन सकें। उन्होंने महिला उद्यमियों के लिए भी विशेष योजना लागू करने की बात कही गई। साथ ही स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के माध्यम से युवाओं के डिजिटल सशक्तिकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। स्टार्टअप और निवेश में वृद्धि मुख्यमंत्री ने कहा कि स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया जैसी पहलों को प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किया गया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 20,000 से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं। 76 इनक्यूबेटर, 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 8 यूनिकॉर्न राज्य में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश से पलायन रोजगार के अभाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण होता था। अब कानून-व्यवस्था में सुधार और निवेश अनुकूल वातावरण के चलते रोजगार के अवसर बढ़े हैं और निवेश में वृद्धि हुई है। डेटा सेंटर और एआई पर फोकस मुख्यमंत्री ने बजट में घोषित यूपी डेटा अथॉरिटी और डेटा सेंटर क्लस्टर की स्थापना को भविष्य की जरूरत बताया। उनका कहना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए डेटा सेंटर बुनियादी ढांचा आवश्यक है और उत्तर प्रदेश इस दिशा में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की फैब यूनिट स्थापना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के औद्योगिक विकास की नई दिशा का संकेत है। बेरोजगारी दर 19 से 2.24 प्रतिशत पर आई मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछली सरकार के समय लगभग 19 प्रतिशत रही बेरोजगारी दर अब घटकर 2.24 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने इसे नीतिगत सुधार, निवेश वृद्धि और कानून-व्यवस्था में सुधार का परिणाम बताया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विकास कार्यों को लेकर अविश्वास की स्थिति उसी मानसिकता को दर्शाती है, जो सीमित दृष्टिकोण से बाहर नहीं निकल पाती। उन्होंने कहा कि प्रदेश ने पिछले वर्षों में व्यापक परिवर्तन देखा है और सरकार विकास, निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को तकनीक, नवाचार और युवा शक्ति के माध्यम से देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य लेकर सरकार आगे बढ़ रही है।

सीएम योगी ने कहा, उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश है

उत्तर प्रदेश ने तय की है अपराध व अव्यवस्था से अनुशासन और कर्फ्यू से कानून के राज की यात्राः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों, नीतिगत बदलावों और भविष्य की दिशा का व्यापक खाका प्रस्तुत किया सीएम योगी ने कहा, उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश है अपराध व अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि मानसिकता और नीतिगत प्रतिबद्धता का परिणामः मुख्यमंत्री राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारीः सीएम योगी लखनऊ  राज्यपाल के अभिभाषण पर शुक्रवार को विधानसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों की यात्रा अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा है। कर्फ्यू से कानून के राज की यात्रा है। उपद्रव से उत्सव की यात्रा है। समस्या से समाधान की यात्रा है और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों, नीतिगत बदलावों और भविष्य की दिशा का व्यापक खाका प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश है। अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि मानसिकता और नीतिगत प्रतिबद्धता का परिणाम है। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।  विपक्ष का आचरण संवैधानिक प्रमुख और मातृशक्ति का अपमान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष की शुरुआत में राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का आधिकारिक दस्तावेज होता है। इस दौरान विपक्षी दलों के सदस्यों का सदन में आचरण अनुचित था। नेता प्रतिपक्ष पर सवाल खड़े हुए करते हुए सीएम ने कहा कि संभवतः इसीलिए आप सदन में उपस्थित नहीं हुए, क्योंकि समाजवादी पार्टी के सदस्य आपके नियंत्रण से बाहर रहे होंगे। यही वह आचरण था, जिससे बिटिया घबराती थी और व्यापारी कारोबार समेटता था। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए गालिब का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गालिब ने कहा था ‘उम्र भर मैं ये भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी और आईना साफ करता रहा।’ समाजवादी पार्टी के और मुख्य विपक्षी दलों के इस आचरण के कारण पूरा सदन अपने आप को आहत महसूस कर रहा था।  ‘परसेप्शन’ और कानून-व्यवस्था पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की छवि अचानक खराब नहीं हुई थी, बल्कि वर्षों तक चले अव्यवस्थित आचरण और अपराध के वातावरण ने उसे प्रभावित किया था। बेटियां भयभीत थीं, व्यापारी अपना कारोबार समेटने को मजबूर थे और दंगे-कर्फ्यू आम बात थे। 2017 के बाद से प्रदेश में “जीरो टॉलरेंस” नीति लागू की गई है। 2017 से पहले नीतिगत उदासीनता और प्रशासनिक शिथिलता का माहौल था, जबकि अब कानून का राज स्थापित हुआ है। 2017 के बाद से कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है और प्रदेश में भयमुक्त वातावरण बना है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा विकास का लाभ राज्यपाल के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “डबल इंजन सरकार” के प्रयासों से 6 करोड़ से अधिक लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला गया है। यह आंकड़ा नीति आयोग के अनुसार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गरीबी से बाहर आने का अर्थ यह नहीं कि लाभार्थियों को अन्य योजनाओं से वंचित किया जाएगा। राशन, स्वास्थ्य, आवास, पेंशन और अन्य सुविधाएं जारी रहेंगी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर गरीब को पक्का घर उपलब्ध कराया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा दिया जा रहा है। निःशुल्क राशन की व्यवस्था जारी है। वृद्ध, निराश्रित और दिव्यांगजन को 12,000 रुपये वार्षिक पेंशन दी जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। पुलिस सुधार और आधुनिक सुरक्षा तंत्र मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पुलिस बल में बड़े पैमाने पर भर्ती की गई है। पुलिस बल में महिलाओं की संख्या 10,000 से बढ़कर आज 44,000 हो गई है। 2017 से पहले हमारी प्रशिक्षण क्षमता 3,000 भी नहीं थी। आज यह स्थिति है कि हाल में 60,200 से अधिक पुलिस भर्ती की गईं, जिसके सभी चयनितों को प्रदेश में ही ट्रेनिंग दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध से निपटने के लिए सभी 75 जिलों में साइबर थाने की स्थापना के साथ-साथ प्रदेश के हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। फॉरेंसिक साइंस इकोसिस्टम को मजबूत किया गया है, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी हुई है। बीमारू से विकास की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब “बीमारू राज्य” की छवि से बाहर निकल चुका है। पहली बार आर्थिक सर्वेक्षण को सदन में व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया, जो “विचार से व्यवस्था और व्यवस्था से विकास” की यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने इसे अविश्वास से आत्मविश्वास की ओर बढ़ता प्रदेश बताया, जहां पहले उपद्रव की खबरें सुर्खियां बनती थीं, अब निवेश, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक कल्याण की खबरें प्रमुखता पा रही हैं।  उत्तर प्रदेश आज ट्रिपल-टी की त्रिवेणी बनकर उभरा मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 9 वर्ष की जो यात्रा है, ये अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा है, कर्फ्यू से कानून के राज की यात्रा है, उपद्रव से उत्सव की यात्रा है, समस्या से समाधान की यात्रा है और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। यानी ये यात्रा केवल एक सत्ता प्राप्त करने की होड़ नहीं है, इसको प्राप्त करने के लिए सरकार की स्पष्ट नीति थी, साफ नीयत थी, दृढ़ इच्छाशक्ति थी और सुशासन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हम लोगों ने जब सामूहिक रूप से प्रयास किया, हर व्यक्ति के मन में विश्वास भरा,  हां यूपी भी कर सकता है, यूपी से भी परिणाम दिए जा सकते हैं और वही आज उत्तर प्रदेश के अंदर देखने को मिल रहा है। आज उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं है, आज यह ट्रिपल-टी का एक प्रतीक बना है। ट्रिपल टी मतलब टेक्नोलॉजी, ट्र्स्ट और ट्रांसफॉर्मेशन। यानी एक त्रिवेणी बनकर के उभरा है।  2017 के पहले केंद्र सरकार की योजनाओं का बॉटलनेक था उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री … Read more

एराज मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में पेशेंट सेफ्टी को लेकर जागरूकता कार्यक्रम संपन्न

एराज मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल में हुआ पेशेंट सेफ्टी  कॉन्क्लेव-2026 । विशेषज्ञों ने कहा कि “एआई हर मर्ज की दवा नहीं हो सकता”  लखनऊ   एराज मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल में संपन्न हो रहे पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव-2026 में विशेषज्ञों ने एक मत से माना कि “एआई हर मर्ज की दवा नहीं हो सकता” दो दिनों तक चलने वाले पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव-2026 में उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के कुलपति प्रो. अजय सिंह ने बताया कि मरीज की सुरक्षा (पेशेंट सेफ्टी) किसी एक चिकित्सक या स्टाफ की जिम्मेदारी नहीं यह एक टीम वर्क है। चिकित्सीय पेशे में त्रुटि (कॉम्लीकेशन) और गलती (एरर) में अंतर होता है। उन्होंने कहा कि मरीज की सुरक्षा में होने वाली 50 फीसद से ज्यादा गलतियों को रोका जा सकता है साथ ही एआई (आर्टिफिशियन इंटेलिजेंस) हर मर्ज की दवा नहीं हो सकती हालांकि पेशेंट सेफ्टी में एआई मददगार बन सकता है इलाज के दौरान होने वाली गलतियों को AI पूरी तरह से रोक नहीं सकता इसके लिए लगातार सीखने की जरूरत है। मुख्य अतिथि प्रो. अजय एराज लखनऊ मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल में आयोजित पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव-2026 में  उन्होंने बताया कि जब भी बात होती है तो बड़े अस्पतालों या चिकित्सा संस्थानों को लेकर ही योजनाएं बनाई जाती हैं। पीएचसी और सीएचसी पर भी ध्यान देने की जरूरत है। वहां गलतियों की संभावना अधिक है जो मरीज के लिए साबित होती हैं। प्रो. अजय ने बताया कि अगर किसी प्रोसीजर में डाक्टर से गलती हो जाए तो उसे सुधारे न कि गलती करने वाले का नाम सार्वजनिक करें। ऐसा करना डाक्टर के प्रति मरीज के मन में विश्वास को कम करता है। उन्होंने सलाह दी कि मरीज की सुरक्षा के प्रति बने मानकों के बारे में युवा डाक्टरों को लगातार प्रशिक्षित करें। उन्हें उन बिन्दुओं पर सीखाएं जहां चूक की संभावना अधिक होती है। कार्यक्रम में आए इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ क्वालिटी मैनेजमेंट के निदेशक डॉक्टर गिरधन ज्ञानी ने बताया कि आज कई चिकित्सा संस्थानों और अस्पतालों में पेशेंट सेफ्टी पर कोई बात ही नहीं करता। इसी का कारण है कि गड़बडिय़ों की संभावना लगातार बनी रहती है। करीब 60 प्रतिशत गलतियों मानवीय चूक के कारण होती हैं। इनको रोकने के लिए सबसे बेहतर तरीका मॉनीटरिंग बढ़ाना है। चाहे आईसीयू हो, ओटी हो, ओपीडी या वार्ड निगरनी तंत्र मजबूत होने से गलतियां कम होंगी। इस अवसर पर एराज मेडिकल कालेज के लिए तैयार पेशेंट सेफ्टी सिवोनियर और पेशेंट सेफ्टी फ्लायर का लोकार्पण भी किया गया।  काम में गलती हो तो सुधारें जरूर: वीसी एरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अब्बास अली महदी ने बताया कि काम करने पर गलतियां होने की संभावना हमेशा बनी रहती है। अगर गलती हो तो उसे समझें। गलती से सीखें और उसे सुधारें जरूर तभी मरीज की जान बचाना आसान होगी। उन्होंने युवा चिकित्सकों और स्टाफ को सलाह दी कि गलती हो जाए तो उसे स्वीकार करें और सुधारने की कोशिश करें। गलती को अनदेखा न करें क्योंकि चिकित्सीय पेशे में एक ही गलती को बार बार दोहराना उचित नहीं है। कार्यक्रम में एरा यूनिवर्सिटी की प्रो-वीसी प्रोफेसर फरजाना महदी ने कहा कि गलतियों को कम करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करें। तकनीक का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है और इसका लाभ मरीजों को मिले इसके लिए जरूरी है कि डाक्टर नई तकनीक को हमेशा सीखते रहें।  पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने दी सलाह  – डॉ. नीलिमा क्षीरसागर ने कहा कि ‘उचित दवा लेखन कौशल ही रोगी सुरक्षा की नींव है।’ दवा देने के साथ ही मरीज की शंकाओं का समाधान जरूरी करें।  – डॉ. बिकाश मेधी ने कहा कि कम्युनिकेशन स्किल पर ध्यान दें। भाषा सबंधी गलतियों से भी मेडिकेशन एरर हो सकती है जिसका खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ता है।  – डॉ. बनानी पोद्दार ने कहा कि मरीज के अनुसार मानक बदल जाते हैं। गर्भवती महिला और साठ साल के बुजुर्ग को एक ही बीमारी में समान दवा नहीं दी जा सकती। उनकी दवाएं अलग-अलग होंगी।

इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट दृष्टिकोण से यूपी आज वैश्विक निवेशकों का आकर्षक गंतव्य

प्रदेश अब ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्मेशन और टाइमली डिलीवरी का मॉडल, यही नए यूपी की पहचानः योगी सरकार ने ट्रिपल एस, यानी सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड की गारंटी दी हैः सीएम इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट दृष्टिकोण से यूपी आज वैश्विक निवेशकों का आकर्षक गंतव्य     लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि उत्तर प्रदेश अब ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्मेशन और टाइमली डिलीवरी का मॉडल है, यही नए यूपी की पहचान है। प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर की प्रगति बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई यूनिटें संचालित हो रही हैं। इन यूनिटों में 3 करोड़ 11 लाख से अधिक लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि के बाद एमएसएमई क्षेत्र ही प्रदेश में सबसे अधिक रोजगार प्रदान करने वाला सेक्टर है। हालांकि, समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकार के दौरान यह क्षेत्र लगभग मृतप्राय हो चुका था। उस समय सरकार के पास न कोई स्पष्ट विजन था, न ही टेक्नोलॉजी की समझ और न ही मजबूत इच्छाशक्ति। उद्यमियों को सरकारी सहयोग के बजाय इंस्पेक्टर राज का सामना करना पड़ता था। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड या अन्य विभागों के अधिकारी अक्सर उन्हें परेशान करते थे।  योगी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने इन समस्याओं को जड़ से समाप्त कर दिया। उद्यमियों को 1000 दिनों तक किसी भी एमएसएमई यूनिट स्थापित करने के लिए कोई एनओसी की आवश्यकता नहीं है। इस छूट नीति के परिणामस्वरूप आज प्रदेश में 96 लाख यूनिटें सक्रिय हैं और करोड़ों लोग रोजगार पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का जीता-जागता उदाहरण बताया, जिसने उत्तर प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित कर दिया है। नागरिकों को सुरक्षा देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में आज रूल ऑफ लॉ ही सुरक्षा और विकास की सबसे बड़ी गारंटी है। हर नागरिक को सुरक्षा प्रदान करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। प्रदेश के 25 करोड़ लोगों के भविष्य के साथ किसी को भी छेड़छाड़ की इजाजत नहीं दी जाएगी। सीएम ने कहा कि मजबूत कानून-व्यवस्था के कारण ही आज प्रदेश में उत्कृष्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा है। एक्सप्रेसवे का जाल बिछ चुका है, एयर कनेक्टिविटी में तेजी आई है।  उन्होंने बताया कि 22 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरठ-दिल्ली रैपिड रेल का उद्घाटन करेंगे। पहले मेरठ से दिल्ली जाने में 3-4 घंटे लगते थे, लेकिन अब 12 लेन हाईवे और रैपिड रेल से यह दूरी मात्र 45 मिनट में तय हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि पूर्व सरकारें दूरी बढ़ाने में माहिर थीं, न केवल भौगोलिक दूरी, बल्कि जाति-जाति और भाई-भाई के बीच खाई को चौड़ा करने का काम भी किया गया। पॉलिसी पैरालिसिस से निकलकर पॉलिसी स्टेबिलिटी की राह पर उन्होंने कहा कि असीम संभावनाओं के बावजूद उत्तर प्रदेश पहले निवेश से वंचित रहता था। आज फियरलेस गवर्नेंस और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस इसकी नई पहचान है। सरकार ने ट्रिपल एस, यानी सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड की गारंटी दी है। सुरक्षा का माहौल, शासन में स्थिरता और विकास में गति, ये तीनों आज उत्तर प्रदेश की ताकत हैं। प्रदेश पॉलिसी पैरालिसिस से निकलकर पॉलिसी स्टेबिलिटी की राह पर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 34 से अधिक सेक्टोरल पॉलिसी लागू हैं। निवेश मित्र, निवेश सारथी और उद्यमी मित्र जैसे प्लेटफॉर्म निवेशकों को सुगम, पारदर्शी और विश्वसनीय वातावरण प्रदान कर रहे हैं। पहले ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में यूपी 14वें स्थान पर था, लेकिन आज यह टॉप अचीवर राज्यों में शामिल है। उत्तर प्रदेश ने सभी व्यापार सुधार मानकों को 100% लागू कर देश का पहला राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया। डीरिग्युलेशन में नंबर-वन और 23 प्रमुख सुधारों को पूर्ण रूप से लागू किया गया। डिक्रिमिनलाइजेशन के तहत 13 राज्य कानूनों और 99% आपराधिक प्रावधानों को हटाया गया। इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट मुख्यमंत्री ने बताया कि 1947 से 2017 तक प्रदेश में मात्र 14 हजार कारखाने थे, जबकि पिछले साढ़े आठ वर्षों में यह संख्या 31 हजार से अधिक हो गई है। इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट दृष्टिकोण के कारण यूपी आज वैश्विक निवेशकों के लिए सुरक्षित और आकर्षक गंतव्य है। एमओयू अब कागजी नहीं, बल्कि ग्राउंड ब्रेकिंग, उत्पादन और रोजगार सृजन तक ठोस परिणाम दे रहे हैं। पिछले साढ़े आठ वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए, जिससे 60 लाख से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मिला। पहले यूपी के युवा अन्य राज्यों में पलायन करते थे, लेकिन अब प्रदेश में ही अवसर उपलब्ध हैं। बजट में ‘लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट जोन’ योजना प्रस्तावित है, जो हर जिले में स्किल डेवलपमेंट से रोजगार तक की गारंटी देगी।  उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग में शोषण रोकने के लिए विशेष कॉर्पोरेशन गठित किया गया है। इससे युवाओं को 16-20 हजार रुपये का मानदेय मिलेगा। कंपनियों को केवल सेवा शुल्क दिया जाएगा। शोषण करने वाली कंपनियों को ब्लैकलिस्ट और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। आज उत्तर प्रदेश एमएसएमई और स्टार्टअप का प्रमुख हब है। यह वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी केंद्र के रूप में उभर रहा है। देश के 65% मोबाइल और 55-60% इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट यहीं बन रहे हैं। उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब यूनिट का शिलान्यास प्रधानमंत्री जल्द करेंगे। 1962 से देश इस दिशा में प्रयासरत था, अब यूपी इसका केंद्र बनेगा।

आज सुरक्षा से समृद्धि और एम्प्लॉयमेंट से एक्सीलेंस तक आत्मनिर्भर हुईं महिलाएं: मुख्यमंत्री

प्रदेश में तीन गुना बढ़ी महिला वर्कफोर्स, 44 हजार महिला पुलिसकर्मी: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने किया एलान, बढ़ाई जाएगी निराश्रित महिला, वृद्धजन और दिव्यांगजन की पेंशन राशि आज सुरक्षा से समृद्धि और एम्प्लॉयमेंट से एक्सीलेंस तक आत्मनिर्भर हुईं महिलाएं: मुख्यमंत्री उद्यमी और नेतृत्वकारी नारीशक्ति प्रदेश के भीतर प्रदान कर रही है नेतृत्व नौ लाख सरकारी नौकरियों में से 1,75,000 नौकरियां केवल महिलाओं के लिए  लखनऊ महिला सशक्तीकरण को लेकर विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान महिलाओं की भागीदारी, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन हुआ है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में महिला वर्कफोर्स की भागीदारी 12 से 13 प्रतिशत के बीच थी, जो अब बढ़कर 36 से 37 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसे तीन गुना से अधिक वृद्धि बताते हुए कहा कि यह बदलाव केवल आंकड़ों में नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक जीवन में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। एक करोड़ छह लाख निराश्रित महिलाएं, वृद्धजन और दिव्यांगजन इस समय 12,000 रुपये सालाना पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। सरकार इस राशि को बहुत जल्द बढ़ाने जा रही है। हमने बजट दे दिया है।  सुरक्षा से समृद्धि और एंप्लायमेंट से एक्सीलेंस तक नेतृत्व कर रहीं प्रदेश की महिलाएं  मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि नौ वर्षों में महिला सशक्तीकरण का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि  2017 के पहले प्रदेश में वूमेन वर्कफोर्स कुल 12 से 13 फीसदी थी। आज यह 36 से 37 फीसदी है। यानी कामकाजी महिलाओं की संख्या पहले की तुलना में तीन गुना से अधिक बढ़ी है। उत्तर प्रदेश पुलिस की ही बात करूं तो महिलाओं की संख्या मात्र 10,000 थी, आज यह संख्या 44,000 पहुंच चुकी है।  उन्होंने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से कहा कि आपके समय में तो एक कहावत प्रचलित थी, “देख सपाई, बिटिया घबराई।” अब ऐसे में महिला सशक्तीकरण पर आपसे क्या चर्चा की जाए? आज सुरक्षा से समृद्धि और एम्प्लॉयमेंट से एक्सीलेंस तक आत्मनिर्भर, उद्यमी और नेतृत्वकारी नारी शक्ति उत्तर प्रदेश के भीतर नेतृत्व प्रदान कर रही है। अब तक नौ लाख सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इनमें से 1,75,000 नौकरियां केवल महिलाओं के लिए समर्पित हैं। अब नाइट शिफ्ट में भी काम कर रहीं महिलाएं  मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ‘ड्रोन दीदी’, सेल्फ हेल्प ग्रुप और ‘लखपति दीदी’ को एक मजबूत इकोसिस्टम प्रदान किया गया है। बीसी सखी योजना के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक बीसी सखी बैंकिंग कार्यों को आगे बढ़ा रही है। आप कह रहे थे कि क्या महिला गहने पहनकर बाहर निकल सकती है? आपके समय में तो महिलाएं दिन में भी नहीं निकल पाती थीं। अब तो महिलाएं नाइट शिफ्ट में भी उद्योगों और कार्यालयों में कार्य कर रही हैं। इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है? विपक्ष के लोगों को भी कन्यादान में सहभागिता करनी चाहिए  मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, इन सभी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सशक्त किया जा रहा है। सामूहिक विवाह योजना में बेटी की शादी के लिए सरकार एक लाख की सहायता दे रही है। आपको भी उन शादियों में जाना चाहिए, कन्यादान में सहभागिता करनी चाहिए, क्योंकि कन्यादान को बहुत बड़ा दान माना गया है। बुलाने की आवश्यकता क्या है? पात्रता के आधार पर नाम चयनित करिए और बताइए कि हम इनका विवाह कराना चाहते हैं। किसी के लिए भी मना नहीं है। कोई भी पात्र व्यक्ति आवेदन कर सकता है। आप 100 लोगों का चयन करिए, प्रशासन को बताइए, अधिकारी धनराशि उपलब्ध करवाएंगे। वे भी उसमें सहभागी बनेंगे। यह हर व्यक्ति का अधिकार है। हर व्यक्ति को उसमें जाने का अधिकार है। हर जनप्रतिनिधि को उसमें सहभागी बनने का अधिकार है। दिव्यांगजनों को डीबीटी से मिल रहा योजना का लाभ  दिव्यांगजनों का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि आपके समय मात्र 300 रुपये पेंशन मिलती थी, आज हम 12,000 रुपये सालाना पेंशन दे रहे हैं। यही नहीं, मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल भी दे रहे हैं और इस बार तो हमने बेटियों के लिए ई-ट्राईसाइकिल की भी घोषणा कर दी है। इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल की भी घोषणा की है। ये पैसा डीबीटी के माध्यम से हम उनके खातों में भेज रहे हैं। आपके समय में वह 300 रुपये जाता था, वह भी छह महीने में एक बार जाता था। उसमें भी आधा ही लाभार्थी को मिल पाता था। आज डीबीटी के माध्यम से पूरा पैसा लाभार्थी के खाते में जाता है। प्रत्येक जरूरतमंद को उसके हिसाब से सुविधा का लाभ दिया है।

धार्मिक स्थल सर्वसमाज की आत्मनिर्भरता का आधारः योगी

दुर्योधन की प्रतिमा लगाने की वकालत, बाबर की कब्र में सजदा का समर्थन, लेकिन वंदे मातरम का विरोध करते हैं सपा नेताः मुख्यमंत्री सदन में बोले योगी- सनातन आस्था को कोई कैद नहीं कर सकता  दुनिया में जब भी मर्यादा पर चर्चा होगी तो अयोध्या, शाश्वत चेतना पर चर्चा होगी तो काशी, भक्ति पर मथुरा और समरसता पर होगी प्रयागराज की चर्चाः मुख्यमंत्री   धार्मिक स्थल सर्वसमाज की आत्मनिर्भरता का आधारः योगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा में समाजवादी पार्टी के नेताओं को जमकर आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि सपा के नेता दुर्योधन की प्रतिमा लगाने की वकालत करते हैं। वे बाबर की कब्र में सजदा का समर्थन, लेकिन वंदे मातरम का विरोध करते हैं। सीएम ने संसद में कांग्रेस व सपा के सांसदों की बातों का जिक्र किया और कहा कि हिंदुस्तान का खाएंगे, लेकिन वंदे मातरम नहीं गाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा में कोई वंदे मातरम का कोई अपमान नहीं कर सकता। कांग्रेस व सपा को वंदे मातरम का विरोध करने वालों को डंके की चोट पर कान पकड़ कर, धक्का देकर बाहर करना चाहिए। राष्ट्रगीत का विरोध करने वाले को हिंदुस्तान की धऱा पर रहने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।  लोकमाता की चर्चा करने का अधिकार समाजवादी पार्टी को नहीं  सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम में लोकमाता की भव्य प्रतिमा लगवाई। भाजपा की डबल इंजन सरकार ने लोकमाता की 300वीं जयंती पर औरैया गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज का नामकरण उनके नाम पर किया। लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के नाम पर बने मणिकर्णिका व श्मशान घाट के पुनरुद्धार कार्यक्रम को बढ़ाया जाता है तो सपा व कांग्रेस विरोध करती हैं। लोकमाता को अपमानित करती हैं। सपा को लोकमाता की चर्चा करने का अधिकार नहीं है। सपा लोकमाता के नाम पर गुमराह कर रही है। सपाइयों को डालनी चाहिए सच बोलने और स्वीकारने की आदत  सीएम योगी ने सदन में राजू पाल व उमेश पाल का नाम लेकर कहा कि उनकी हत्या हुई। सपा इनके हत्यारों और माफिया को गले का हार बनाकर चलती थी। आज अनावश्यक रूप से मुद्दा बनाकर सपा समाज में विद्वेष फैलाना चाहती है। सीएम ने सपाइयों से कहा कि सच बोलने-स्वीकारने की आदत डालनी चाहिए। सपा राष्ट्रद्रोहियों का महिमा मंडन, राष्ट्र नायकों का अपमान और गाजी मेले का समर्थन करती है। उन्होंने सपाइयों से कहा कि गाजी के पाप का बदला कैसे लिया जाना चाहिए, यह महाराज सुहेलदेव के शौर्य से सीखिए। हमारी सरकार ने बहराइच में महाराज सुहेलदेव का विराट स्मारक और आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनवाया।  तुष्टिकरण की पराकाष्ठा की गई  सीएम योगी ने सपा नेताओं पर कटाक्ष किया कि वे माफिया की कब्र पर फातिहा पढ़ने जाते हैं, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन धाम के विकास का विरोध करते हैं। सपा शासन में तुष्टिकरण की पराकाष्ठा की गई। सपा ने कांवड़ यात्रा, जन्माष्टमी पर्व को थाने-जेल में मनाने और अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा को रोक दिया था। दीपोत्सव का विरोध किया। कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय में एफिडेविट दिया कि श्रीराम-श्रीकृष्ण मिथक थे। सपा रामभक्तों पर गोलियां चलवाती है। मंदिर निर्माण को रोकने के लिए कोर्ट में वकील खड़ा करती है। सीएम ने सपाइयों को चेताते हुए कहा कि सनातन आस्था को कोई कैद नहीं कर सकता है। आज अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बन गया है। पुनर्जागरण के इस मॉडल में विरासत भी है और विकास भी।  भारत की आस्था की आत्मा है यूपी सीएम योगी ने कहा कि आस्था का पुनर्जागरण उत्तर प्रदेश से प्रारंभ हुआ है। यूपी भारत की आस्था की आत्मा है। अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज, चित्रकूट, नैमिषारण्य, शुकतीर्थ केवल आस्था के ही नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना के भी केंद्र हैं। जब भी दुनिया में मर्यादा की चर्चा होगी तो अयोध्या, शाश्वत चेतना की चर्चा होगी तो काशी, भक्ति में मथुरा और समरसता में प्रयागराज की चर्चा होगी। यह चारों उत्तर प्रदेश में हैं। यूपी फिर से पुनर्जागरण का केंद्र बिंदु बना है। सीएम ने कहा कि गुलामी की मानसिकता से मुक्त करने की दिशा में हम मजबूती से बढ़े हैं। प्रयाग, काशी, मथुरा-वृंदावन, विंध्याचल, चित्रकूट, शुकतीर्थ, संभल, बरेली, नैमिषारण्य समेत बौद्ध, जैन, सिख व पौराणिक-ऐतिहासिक महत्व से जुड़े तीर्थस्थलों को आस्था और राष्ट्रीय चेतना के साथ जोड़ने का कार्य किया गया है। जिसका परिणाम है कि वहां करोड़ों श्रद्धालु आते हैं और आस्था के साथ अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर के जाते हैं।  आत्मगौरव के महापर्व बन गए हैं दीपोत्सव, देव दीपावली व रंगोत्सव सीएम योगी ने प्रयागराज महाकुम्भ की चर्चा करते हुए काशी समेत अन्य स्थलों का जिक्र किया। बोले कि मंदिर का पुजारी ब्राह्मण होगा, लेकिन वहां फूल बेचने वाले, नाव या टैक्सी चलाने वाले व्यक्ति सर्वसमाज से होते हैं। धार्मिक स्थल इन सबकी आत्मनिर्भरता का आधार बना हुआ है। डबल इंजन सरकार उसे पुनर्जीवित कर रही है। दीपोत्सव, देव दीपावली और रंगोत्सव केवल आयोजन नहीं, बल्कि आत्मगौरव के महापर्व बन गए हैं। सीएम ने अपने मन की पीड़ा व्यक्त करते हुए सदन को बताया कि 2017 में जब हमारी सरकार ने पहले दीपोत्सव और देवदीपावली-रंगोत्सव के आयोजन के बारे में सोचा तो आशंका हुई कि क्या होगा और कैसे होगा, लेकिन हमें सफलता मिली। आज करोड़ों लोग उस आस्था से फिजिकली व वर्चुअली जुड़कर आस्था को सम्मान देते हैं, लेकिन इस ताकत को पहले कभी समझने का प्रयास नहीं किया गया। आस्था को सम्मान देने का परिणाम है कि यूपी की जीडीपी बढ़ी है। यूपी ने लंबी छलांग लगाई है। सुरक्षा के साथ ही यूपी के प्रति धारणा भी बदली है।  तमिलनाडु के श्रद्धालुओं ने सोशल मीडिया पर लिखकर की यूपी की प्रशंसा  सीएम योगी ने सदन में एक वाकया भी सुनाया। महाकुम्भ के दौरान तमिलनाडु से भी कुछ श्रद्धालु आए थे। चित्रकूट में एक गांव के पास उनकी बस खराब हो गई। वे हिंदी और स्थानीय लोग तमिल नहीं जानते थे। तमिलनाडु वाले भटक रहे थे, अंधेरा होने को था। गांव वालों को पता चला तो वे वहां पहुंचे। इशारों में उन्हें तमिलनाडु वालों की परेशानी पता चली। फिर गांव के लोग इन अतिथियों को साथ लेकर गांव आए। गांव के एक परिवार में शादी … Read more

सुदृढ़ कानून व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को फियर जोन से फेथ जोन में बदला: सीएम

अब उपद्रव नहीं उत्तर प्रदेश है उत्सव का प्रदेशः मुख्यमंत्री 2017 के पहले सत्ता के संरक्षण में पले गुंडे और माफिया समानांतर सरकार चला रहे थेः योगी आदित्यनाथ   सुदृढ़ कानून व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को फियर जोन से फेथ जोन में बदला: सीएम   अब उत्तर प्रदेश में भय का वातावरण नहीं, अब लोगों के मन में आस्था हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  लखनऊ,  राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में चर्चा में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष पर कई गंभीर सवाल भी खड़े किए। उन्होंने कहा कि 2017 के पहले उत्तर प्रदेश में गुंडे व माफिया सत्ता के संरक्षण में पल रहे थे। नेता प्रतिपक्ष ने स्वयं ऐसे कुछ नाम लिए हैं, जबकि कई नाम लेने में वह संकोच कर गए। हमारी सरकार ने पहले दिन जीरो टॉलरेंस की नीति की बात कही थी और सरकार आज भी अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत ही चल रही है। अपराध कोई भी करेगा तो कानून उसको अपनी गिरफ्त में लेगा। 2017 के पहले सत्ता के संरक्षण में पले गुंडे और माफिया समानांतर सरकार चला रहे थे। गुंडा टैक्स, अवैध वसूली, वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया की प्रवृत्ति को आगे बढ़ा रहे थे। कानून चंद हाथों की जागीर बन चुका था। कर्फ्यू और दंगा आम बात थी। पर्व और त्योहार आस्था के नहीं, आशंका के पर्याय बन गए थे। पुलिस का मनोबल टूटा हुआ था। न बेटी सुरक्षित थी और न व्यापारी ही सुरक्षित था। प्रदेश की छवि अराजकता और अस्थिरता का पर्याय थी और आज उपद्रव नहीं, उत्सव प्रदेश है उत्तर प्रदेश।  यूपी अब फियर जोन से फेथ जोन बना  मुख्यमंत्री ने कहा कि रिकॉर्ड पुलिस भर्तियां, महिला सशक्तिकरण की एक नई पारी, मॉडर्न पुलिसिंग, सुदृढ़ साइबर एवं फॉरेंसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर आज उत्तर प्रदेश की पहचान हैं। साइबर क्राइम हो, त्वरित और आपातकालीन सेवाएं हों, अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस, आज रूल ऑफ लॉ यूपी के अंदर देखने को मिलता है। सुदृढ़ कानून व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को फियर जोन से फेथ जोन में बदला है। अब भय का वातावरण नहीं है, अब लोगों के मन में आस्था है। हर जनपद में उत्तर प्रदेश का वासी जाता है, बिना भय के जाता है। कर्फ्यू कल्चर की जगह जीरो टॉलरेंस कल्चर ने ली है। अब दंगों की जगह फेस्टिव और टेंपल इकोनॉमी ग्रो कर रही है। कोई सोचता था अयोध्या में करोड़ों लोग आएंगे? प्रयागराज में 2013 के कुंभ में कुल 12 करोड़ श्रद्धालु आए थे और इस बार माघ मेला में ही 21 करोड़ श्रद्धालु आए हैं। ये है परिवर्तन। ये माघ मेला कल्पवासियों का होता था, लेकिन इस माघ मेले में बना रिकॉर्ड लोगों के विश्वास का प्रतीक है। अब यहां न कर्फ्यू है न दंगा है, यूपी में सब चंगा है।  आज उत्तर प्रदेश में मॉडर्न पुलिसिंग पर जोर  मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में महिलाओं को सुरक्षा है, व्यापारियों को भयमुक्त वातावरण है। इन आठ वर्षों में 2,19,000 से अधिक पुलिस की भर्ती हुई हैं। इसमें 20 फीसदी महिलाओं को अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया गया है। पुलिस की ट्रेनिंग क्षमता को कई गुना बढ़ाया गया है। पुलिस भर्ती में हर जनपद के नौजवानों को अवसर मिला है, बिना भेदभाव। पुलिस अवस्थापना सुविधाओं में अभूतपूर्व विकास किया गया। पहले पुलिस के नौजवान खपरैल के बैरक में रहते थे। आज जिलों में आप जाएंगे तो हाई राइज बिल्डिंग पुलिस की अवस्थापना सुविधा के लिए होगी। मॉडर्न पुलिसिंग की बात आती है तो सात पुलिस कमिश्नरेट स्थापित किए गए, जिनके लिए आपकी सरकार कभी निर्णय ही नहीं ले पाई। फॉरेंसिक साइंस इकोसिस्टम को हम लोगों ने प्रदेश के अंदर लागू किया। आज तीन नए कानून लागू हो चुके हैं और लखनऊ में स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई। डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सेज प्रारंभ हो चुके हैं।  हर जनपद में साइबर क्रॉइम थाना स्थापित  मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले साइबर क्राइम के केवल दो थाने थे, आज सभी 75 जनपदों में साइबर क्राइम थाने हैं। इसके अलावा राज्य के हर थाने में एक साइबर हेल्प डेस्क भी है। अब तक हजारों करोड़ रुपये, जो साइबर अपराधियों द्वारा ऐंठे जाते थे, उनको वापस कराने और बचाने में भी इस तंत्र ने योगदान दिया है। तीन नए कानून लागू होने के बाद हर उस अपराध में, जिसमें सात वर्ष से अधिक की सजा है,  उसमें फॉरेंसिक एविडेंस आवश्यक है। पहले यूपी के अंदर दो या तीन लैब्स काम करती थीं, आज हम लोगों ने 12 ए-ग्रेड की लैब बनाई हैं और छह निर्माणाधीन हैं। हर जनपद में दो-दो फॉरेंसिक वैन उपलब्ध करवाई गई हैं, ताकि एविडेंस प्राप्त हो, अपराधी को सजा दी जा सके। ये एक नई दिशा में किए गए प्रयास हैं। दंगाइयों का काल है पीएसी, हमारी सरकार ने किया पुनर्जीवित  मुख्यमंत्री ने सेफ सिटी का जिक्र करते हुए कहा कि मुंबई हो या गुजरात या फिर यूपी, सभी जगह भाजपा ही सुरक्षा दे सकती है। उत्तर प्रदेश में सेफ सिटी के लक्ष्य को 17 नगर निगम समेत गौतम बुद्ध नगर जनपद में हम लोगों ने लागू किया है। हर जिला मुख्यालय में सीसीटीवी कैमरे की कवरेज, इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से उसकी मॉनिटरिंग की जा रही है। उत्तर प्रदेश स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स का गठन भी उत्तर प्रदेश में हुआ है। इसके साथ ही पीएसी की 34 कंपनियों को पुनर्गठित करके उसको जीवित किया है, क्योंकि ये दंगाइयों की काल है। दंगा समर्थक कोई भी पार्टी पीएसी का समर्थन नहीं करती। समाजवादी पार्टी के कालखंड में इसे एक प्रकार से समाप्त करने की साजिश की गई थी। अब उसका पुनर्गठन करने के साथ ही तीन कंपनी महिला पीएसी का गठन किया जा चुका है और साथ ही तीन और कंपनियां हम बनाने जा रहे हैं। जिन तीन महिला पीएसी कंपनियों का गठन किया गया है, वो वीरांगना उदा देवी के नाम पर लखनऊ में,  वीरांगना झलकारी देवी के नाम पर गोरखपुर में और वीरांगना अवंती बाई लोधी के नाम पर बदायूं में गठित हो चुकी हैं। तीन नई वाहिनियों का गठन हम लोग करने जा रहे हैं।

देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क, पांचवां इंटरनेशनल एयरपोर्ट और छह मेट्रो सिटीज के साथ यूपी आर्थिक विकास की राह पर तेजी से अग्रसर

उत्तर प्रदेश बन रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का हब: मुख्यमंत्री  विधानसभा में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहाः एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, मेट्रो और वाटरवे में अग्रणी राज्य है उत्तर प्रदेश  देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क, पांचवां इंटरनेशनल एयरपोर्ट और छह मेट्रो सिटीज के साथ यूपी आर्थिक विकास की राह पर तेजी से अग्रसर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अग्रणी बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश के कुल एक्सप्रेसवे का 55 प्रतिशत हिस्सा रखने वाला प्रदेश बन चुका है। राज्य में देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है और एयर कनेक्टिविटी के लिए भी यूपी अग्रणी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की पहली रैपिड रेल और पहली इनलैंड वाटरवे यूपी में ही स्थापित की गई है। इसके अलावा देश का पहला रोपवे, जो शहरों को जोड़ रहा है, वह भी उत्तर प्रदेश के पास है। सबसे अधिक सिटीज में मेट्रो संचालन में यूपी है। बजट भाषण में चार मेट्रो का उल्लेख हुआ था, लेकिन वर्तमान में छह सिटी मेट्रो पूरी तरह चालू हैं और सातवां-मेरठ, प्रधानमंत्री के लोकार्पण के बाद जुड़ जाएगा। फ्रेट कॉरिडोर और मल्टीमॉडल टर्मिनल मुख्यमंत्री ने कहा कि ईस्टर्न और वेस्टर्न रोपवे चलाया जा रहा है। ईस्टर्न और वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन भी उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा है, जो लॉजिस्टिक का बड़ा केंद्र बनेगा। इनलैंड वाटरवे में मल्टीमॉडल टर्मिनल स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों की सब्जियां और खाद्यान्न वैश्विक बाजार तक पहुंच सकें। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश का पांचवां और भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने जा रहा है। यह 12,000 एकड़ भूमि में विकसित हो रहा है। इसमें पांच रनवे होंगे। इसके आसपास एमआरओ, एक्सप्रेसवे के किनारे एविएशन आधारित इंडस्ट्रियल क्लस्टर और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां संचालित होंगी। प्रदेश में तेजी से बढ़ रही कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 16 एयरपोर्ट संचालित हैं और पांच एयरपोर्ट पर निर्माण कार्य प्रगति पर है। राज्य में मेट्रो, एक्सप्रेसवे, रोपवे, रैपिड रेल और इनलैंड वाटरवे जैसे विकासात्मक कार्य तेजी से बढ़ रहे हैं। ये सभी परियोजनाएं न केवल कनेक्टिविटी बढ़ा रही हैं, बल्कि निवेश और रोजगार के अवसर भी उत्पन्न कर रही हैं। उत्तर प्रदेश का यह विकास मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करता है। इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में हो रहे सुधार प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास का केंद्र बना रहे हैं।

तुष्टिकरण के नाम पर आक्रांताओं का महिमामंडन समाजवादी आंदोलन का मुख्य धंधा बन गया हैः योगी

गिरगिट भी पश्चाताप करेगा कि ये समाजवादी मुझसे भी आगे निकल गएः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कार्यों को गिनाया तो समाजवादी पार्टी को आईना भी दिखाया तुष्टिकरण के नाम पर आक्रांताओं का महिमामंडन समाजवादी आंदोलन का मुख्य धंधा बन गया हैः योगी  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सदस्यों से कहा कि मैंने राजू पाल और उमेश पाल की हत्या का मुद्दा इसलिए उठाया, क्योंकि आप लोगों ने माफिया को गले लगाया था। उन माफिया ने हमें आंखें दिखाने का प्रयास किया, तो दुष्परिणाम भी भुगता। हर गरीब को जीने का अधिकार, बिना भेदभाव के उनका हक मिलना चाहिए। जातीय वैमनस्यता समाज, देश हित में नहीं है। देश गुलाम भी जातीय वैमनस्यता के कारण हुआ। तुष्टिकरण के नाम पर आक्रांताओं को महिमामंडन करना समाजवादी आंदोलन का मुख्य धंधा बन गया है। यह कब रंग बदल दें, कोई भरोसा नहीं। सीएम ने तंज कसा कि गिरगिट भी आज पश्चाताप करेगा कि ये समाजवादी मुझसे भी आगे निकल गए हैं। संपत्ति और संतति का प्रतीक बन गया है समाजवादी सीएम ने कहा कि समाजवाद के आदर्श जेपी-लोहिया ने देश में बराबरी और सामाजिक न्याय की वकालत की थी, लेकिन आज संपत्ति और संतति समाजवादी के प्रतीक बन गए हैं। जो समाजवाद त्याग, संघर्ष, नैतिक आदर्शों का आह्वान करता था, आज वह इन लोगों के लिए वंशवाद, सुविधावाद और निजी साम्राज्य खड़ा करने की सीढ़ी बन गई है। लोहिया और जेपी की परंपरा ने कभी शोषण के विरुद्ध संघर्ष का उद्घोष किया था, लेकिन आज वही समाजवाद जातीय वैमनस्यता पैदा करने का माध्यम बन गया है। प्रयास होना चाहिए कि किसी वर्ग विशेष या जाति विशेष को जातीय संबोधन करने से बचें।  सीएम का कटाक्ष- समाजवादी पार्टी और विकास सीएम ने समाजवादी पार्टी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह लोग विकास के बारे में क्या बात करेंगे। सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी के गोमती रिवर फ्रंट, जेपीएनआईसी व पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के भ्रष्टाचार को भी गिनाया। बोले कि सरकार आने के बाद बैठक में हमने 110 मीटर चौड़े एक्सप्रेसवे को 120 मीटर चौड़ा करने का प्रस्ताव रखा। सीएम ने यह भी कहा कि प्रस्तावित सेमी बुलेट ट्रेन हम वहीं से चलाएंगे। देश के अंदर जो नए कॉरिडोर बनने जा रहे हैं, उनके लिए हमारी तैयारी उस दृष्टि से चल रही है। वाराणसी से इसे जोड़ने के लिए लैंड राज्य उपलब्ध कराएगा।  चार बार में सपा उतना नहीं कर पाई, जितना खेल मंत्री गिरीश यादव ने आधे समय में कर दिया  सीएम ने कहा कि प्रदेश में डबल इंजन सरकार शहर से गांव तक खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रही है। हमारे खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव ही हैं। समाजवादी पार्टी चार बार में जितना नहीं कर पाई, उन्होंने आधे समय में इतना कर दिया कि पूरी सपा उसमें डूब जाएगी। सरकार ने तय किया है कि 2030 के कॉमनवेल्थ और 2036 में भारत के ओलंपिक की दावेदारी को ध्यान में रखकर हर मंडल मुख्यालय पर एक स्पोट्रस कॉलेज होगा। हर कॉलेज के पास किसी एक खेल में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस होगा।  खेल के लिए पर्याप्त बजट, पैसे की कमी नहीं   सीएम ने कहा कि वाराणसी- गाजीपुर के नौजवान हॉकी में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। ललित उपाध्याय और राजकुमार पाल इसकी देन है। बीच में विपक्षी सदस्य ने टोका कि गाजीपुर का स्टेडियम सपा ने दिया है तो सीएम ने इस पर कहा कि पैसा गिरीश यादव (हमारी सरकार) ने दिया है। हमने प्राइवेट एकेडमी को भी धनराशि देनी प्रारंभ की है। पश्चिम यूपी में प्राइवेट एकेडमी अच्छा काम कर रही है। वहां से अच्छे खिलाड़ी निकलकर ओलंपिक में मेडल जीते हैं। ओलंपिक, कॉमनवेल्थ व एशियाड में मेडल जीतने वाले यूपी के खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता के साथ डिप्टी एसपी, तहसीलदार व अन्य महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती दी गई। खेल के लिए पर्याप्त बजट है।  इलेक्ट्रिक व्हीकल में भी यूपी ने दमदारी से उपस्थिति दर्ज की सीएम ने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल में भी यूपी ने दमदारी से उपस्थिति दर्ज की है। देश की पहली इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफेक्चरिंग की यूनिट यूपी में प्रारंभ हो चुकी है, यहां बस निर्माण की कार्रवाई चल रही है। राष्ट्रीय बाजार में यूपी की उपस्थिति 19 फीसदी है। तिपहिया ईवी में 40 प्रतिशत भागीदारी यूपी की है। एक्सप्रेसवे कॉरिडोर पर चार्जिंग स्टेशन व प्रदेश में 700 ईवी बसों का संचालन हो रहा है।

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