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मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों से वर्चुअली जुड़े हितग्राहियों से बात भी की, आवास निर्माण के लिए पहली किस्त मिलने पर दी बधाई

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से पीड़ितों को जारी की प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त छत्तीसगढ़ के विशेष आग्रह पर केंद्र सरकार ने ऐसे परिवारों के लिए स्वीकृत किए हैं 15 हजार आवास कुल दस करोड़ रुपए आज हितग्राहियों के खातों में अंतरित, प्रथम किस्त के रूप में 2500 परिवारों को जारी किए गए 40-40 हजार रुपए मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों से वर्चुअली जुड़े हितग्राहियों से बात भी की, आवास निर्माण के लिए पहली किस्त मिलने पर दी बधाई रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित 2500 परिवारों के बैंक खातों में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की पहली किस्त की राशि अंतरित की। उन्होंने मंत्रालय में वर्चुअली आयोजित कार्यक्रम में आवास निर्माण की पहली किस्त प्रति परिवार 40-40 हजार रुपए के मान से कुल दस करोड़ रुपए हितग्राहियों के खातों में अंतरित किए। छत्तीसगढ़ के विशेष आग्रह पर केंद्र सरकार द्वारा राज्य के आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा भी कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न जिलों से मंत्रालय से वर्चुअली बड़ी संख्या में जुड़े हितग्राहियों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य शासन ने केंद्र सरकार से विशेष आग्रह कर आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए जो प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता की शर्तों में नहीं आ पा रहे थे, उनके लिए 15 हजार आवास स्वीकृत कराया है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने संवेदनशीलता और गंभीरता से हमारे निवेदन को मंजूरी दी और वंचित परिवारों के लिए भी आवास की व्यवस्था की। साय ने नक्सल प्रभावित दूरस्थ वनांचलों के लिए स्वीकृत इस विशेष परियोजना के हितग्राहियों की हौसला अफजाई करते हुए अच्छा मकान बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इसमें सरकार हर तरह की मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने नक्सली हिंसा के शिकार परिवारों से आत्मीयता से बातकर उनका हाल-चाल पूछा। उन्होंने घर-परिवार और उनके व्यवसाय की जानकारी ली। बातचीत के दौरान विभिन्न जिला मुख्यालयों से जुड़े हितग्राहियों ने पक्का आवास मिलने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया।    उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने भी हितग्राहियों को ऑनलाइन संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। आज 2500 ऐसे परिवारों को जो नक्सलवाद छोड़कर मुख्य धारा में लौट आए हैं या नक्सल हिंसा से पीड़ित हैं, उनके पक्के आवासों के निर्माण के लिए 40-40 हजार रुपए की पहली किस्त जारी की गई है। ये ऐसे परिवार हैं जो प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता में नहीं आ पा रहे थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में विभाग ने विशेष प्रयास कर भारत सरकार से ये आवास मंजूर कराए हैं। शर्मा ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद को समाप्त करने का अभियान अब अंतिम चरण में है। बस्तर के लोगों के मन से अब आतंक का डर हट जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मुख्य धारा में आएं। बस्तर की शांति और विकास के लिए यह जरूरी है। उन्होंने विशेष परियोजना के तहत हितग्राहियों के चिन्हांकन और इसे अमलीजामा पहनाने के लिए विभागीय अधिकारियों की पीठ थपथपाई और उन्हें धन्यवाद दिया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह ने कार्यक्रम में राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आवास निर्माण के लक्ष्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। योजना के अगले चरण के लिए हितग्राहियों के सर्वेक्षण का काम भी तेजी से चल रहा है। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सचिव पी. दयानंद, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक तारन प्रकाश सिन्हा सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारी भी राशि अंतरण कार्यक्रम में मौजूद थे। सुकमा के सर्वाधिक 809 आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों को मिली आवास की पहली किस्त, बीजापुर के 594 और नारायणपुर के 316 परिवार शामिल प्रधानमंत्री आवास योजना में विशेष परियोजना के तहत आज जिन 2500 आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों के खातों में आवास निर्माण के लिए राशि अंतरित की गई, उनमें सर्वाधिक 809 परिवार सुकमा जिले के हैं। बीजापुर जिले के ऐसे 594, नारायणपुर के 316, बस्तर के 202, दंतेवाड़ा के 180, कोंडागांव के 166 और कांकेर के 138 परिवारों को आवास निर्माण के लिए राशि जारी की गई है।

मुख्यमंत्री ने कौशल, रोजगार और आजीविका पर नीति-आयोग की कार्यशाला का किया शुभारंभ

रायपुर : युवा शक्ति से होगा ‘विकसित भारत’ का निर्माण: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ सरकार ने युवाओं के कौशल विकास को लेकर किए 4 महत्वपूर्ण एमओयू, खुलेंगे रोज़गार के नए द्वार मुख्यमंत्री ने कौशल, रोजगार और आजीविका पर नीति-आयोग की कार्यशाला का किया शुभारंभ युवाओं को रोजगार दिलाने राज्य समर्थन मिशन का हो रहा संचालन रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में नीति-राज्य कार्यशाला श्रृंखला के राज्य समर्थन मिशन के तहत छत्तीसगढ़ में युवाओं, महिलाओं और जनजातीय समुदायों के लिए कौशल विकास, रोजगार और आजीविका के अवसरों को विस्तार देने विषय पर आधारित कार्यशाला का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह कार्यशाला बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप बेहद प्रासंगिक है। भारत एक युवा देश है और यदि युवाओं को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार कौशल प्रशिक्षण मिले, तो हम ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को तेजी से हासिल कर सकते हैं। इस मौके पर राज्य के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आज चार महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एम.ओ.यू.) पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि 2047 तक छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के लिए युवाओं, महिलाओं और जनजातीय वर्ग को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने नीति आयोग की आकांक्षी जिलों की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे जनजातीय क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिला है।  उन्होंने कहा कि राज्य समर्थन मिशन के बेहतर क्रियान्वयन से प्रदेश के युवाओं, महिलाओं और जनजातिय समुदाय के आजीविका के लिए प्रशिक्षण से रोजगार के नये अवसर शुलभ होंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं को कौशल से जोड़कर उन्हें रोजगार के योग्य बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री नेे बताया कि सरकार वर्ष 2013 से कौशल विकास को तीव्रता से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार लाइवलीहुड कॉलेज, आईटीआई और महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त बनाने पर काम कर रही है। उन्होंने महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी के साथ समझौते की जानकारी देते हुए कहा कि इसके तहत राज्य के युवाओं को ट्रैक्टर निर्माण की आधुनिक तकनीक सिखाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस पहल से बस्तर और सरगुजा अंचल के ग्रामीण युवाओं तथा उनके परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आयेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, मैकेनिक जैसे कौशलों की भारी मांग है, लेकिन कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता कम है। सरकार इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने के लिए व्यापक योजना तैयार कर रही है। साथ ही उन्होंने महुआ, इमली, साल जैसे वन उत्पादों से मूल्यवर्धन कर स्थानीय लोगों की आजीविका को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि आगामी योजनाओं में बस्तर और सरगुजा अंचल के आदिवासी युवाओं को विशेष कोर्स और प्रशिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही महिलाओं के लिए स्वरोजगार एवं उद्यमिता प्रशिक्षण केंद्र खोलने की भी तैयारी है। उन्होंने बताया कि विभिन्न बड़ी कंपनियों से एमओयू कर निवेश और रोजगार के अवसर लाने की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि स्किल और इंडस्ट्री को जोड़ना जरूरी है। जब दोनों साथ होंगे तब रोजगार की संभावना अधिक रहेगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग (जैसे कृषि, फल-फलियाँ, हस्तशिल्प) में युवाओं को प्रशिक्षित कर नए रोजगार सृजन पर बल दिया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि बस्तर में अब माओवाद का प्रभाव घट रहा है और हम युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जल्द ही ई-हब की शुरुआत करेगी, जहां नवाचार करने वाले युवाओं को प्रोटोटाइप, फंडिंग और मार्केटिंग की सुविधा मिलेगी। कार्यशाला को कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा सचिव एस. भारती दासन ने कहा कि छत्तीसगढ़ में युवाओं के लिए मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 4.83 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 2.66 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार भी मिला है। नीति आयोग की प्रोग्राम निदेशक डॉ. सोनिया पंत ने कहा कि नीति आयोग का ‘राज्य समर्थन मिशन’ राज्यों को उनकी आर्थिक व सामाजिक विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तकनीकी सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में वन-आधारित आजीविका कार्यक्रमों को मजबूत करने पर ज़ोर दिया और कहा कि इससे आदिवासी समुदाय की आय में वृद्धि होगी। डॉ. पंत ने बताया कि राज्य-स्तरीय योजनाओं में जनजातीय युवाओं की भागीदारी बढ़ाने एवं उन्हें नई तकनीक और कौशल से जोड़ने पर नीति आयोग हर सम्भव मदद करेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कौशल विकास तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार के सीईओ विजय दयाराम के. सहित विभागीय अधिकारी तथा बड़ी संख्या में युवा, महिला और जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधि उपस्थित थे। कौशल विकास के लिए 4 महत्वपूर्ण एमओयू राज्य के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आज चार महत्वपूर्ण एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को रोजगारोन्मुख कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। पहला एमओयू तकनीकी शिक्षा छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण एवं नन्दी फाउंडेशन के बीच हुआ। इस एम.ओ.यू. का मुख्य उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित युवाओं की रोज़गार योग्यताओं को बढ़ाना है। यह कार्यक्रम उन्हें आवश्यक कौशल प्रदान करके उनके आजीविका के साधनों और आर्थिक सुरक्षा में सुधार लाने का प्रयास करता है। इसी तरह दूसरा एमओयू कौशल विकास प्राधिकरण एवं महेन्द्रा एंड महेन्द्रा के बीच हुआ, इस एम.ओ.यू. के अंतर्गत दंतेवाड़ा, बलरामपुर और कोंडागांव जिलों में स्थित लाइवलीहुड कॉलेजों में ट्रैक्टर मैकेनिक पाठ्यक्रम में अल्पकालिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का संचालन रायपुर स्थित स्टेट प्रोजेक्ट लाइवलीहुड कॉलेज सोसायटी द्वारा किया जाएगा। तीसरा एमओयू उच्च शिक्षा विभाग और नैसकॉम के बीच हुआ, इस समझौते का उद्देश्य कॉलेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी देकर उन्हें जॉब सीकर से जॉब प्रोवाइडर के रूप में विकसित करना है। यह कार्यक्रम युवाओं को इंडस्ट्री रेडी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसी प्रकार उच्च शिक्षा विभाग और नन्दी फांउडेशन हैदराबाद के बीच चौथा समझौता हुआ, इस एम.ओ.यू. के तहत महाविद्यालयों के छात्रों को रोजगार परक प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें कुशल और आत्मनिर्भर युवा के रूप में तैयार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के डंगनिया में भगवान श्री परशुराम जन्मोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के डंगनिया में भगवान श्री परशुराम जन्मोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने भगवान परशुराम मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ब्राम्हण समाज ने सदैव समाज को ज्ञान और संस्कार देने का कार्य किया है। उन्होंने भगवान परशुराम जन्मोत्सव की सभी को शुभकामनाएं दीं और कहा कि भगवान परशुराम विष्णु के छठवें अवतार हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल है और प्रभु श्रीराम हमारे भाँचा हैं। रामलला मंदिर निर्माण छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए गौरव और आस्था का विषय है। ‘श्रीरामलला दर्शन योजना’ के अंतर्गत अब तक 22,000 श्रद्धालु अयोध्या में रामलला के दर्शन कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना भी प्रारंभ की गई है, जिसमें श्रद्धालु सरकारी व्यय पर विभिन्न तीर्थ स्थलों की यात्रा कर सकेंगे। मुख्यमंत्री श्री साय ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है, जिसे धान का कटोरा कहा जाता है और 44 प्रतिशत भूभाग वनों से आच्छादित है। नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जा रही है। हमारी सरकार ने 31 मार्च 2026 तक राज्य को नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त कराने का संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने विकास के लिए एक सशक्त ‘विजन डॉक्यूमेंट’ तैयार किया है और नई औद्योगिक नीति लागू की गई है। डिजिटलीकरण के माध्यम से भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण किया जा रहा है, और दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘2047 तक विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, हम ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस दिशा में ब्राम्हण समाज की भागीदारी भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने डेढ़ वर्ष के अल्पकाल में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को धरातल पर उतारा है। चाहे वह प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत घर देने की बात हो या किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान का मूल्य दिलाना—हमने हर वर्ग की भलाई के लिए काम किया है। बस्तर और सरगुजा में जनजातीय समाज के लिए 5500 रुपये प्रति मानक बोरा तेंदूपत्ता की खरीदी कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में प्रक्रियाओं, संस्थाओं और क्रियाओं के शुद्धिकरण का कार्य जारी है। राज्य निवेश के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में उभर रहा है। कौशल उन्नयन, पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पीएससी में भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच चल रही है, और कई दोषी जेल की सलाखों के पीछे हैं। उन्होंने कहा कि ब्राम्हण समाज एक प्रगतिशील समाज है, जिसने हमेशा विमर्श और विचारों का स्वागत किया है। इस अवसर पर महंत श्री वेदप्रकाशाचार्य, विधायक श्री मोतीलाल साहू, श्री अनुज शर्मा, श्री सुशांत शुक्ला, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, साहित्य अकादमी अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा, श्रीमती सुमन अशोक पांडेय, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील ब्राम्हण समाज अध्यक्ष श्री शिवांजल शिव गोविंद शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

जिला पंचायत के वर्ष 2025- 26 और लेबर बजट का अनुमोदन

जिला पंचायत की बैठक में लिए गए कई निर्णय एक देश, एक चुनाव का प्रस्ताव बहुमत से पारित जिला पंचायत के वर्ष 2025- 26 और लेबर बजट का अनुमोदन बिलासपुर जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक अध्यक्ष जिला पंचायत श्री राजेश सूर्यवंशी  की अध्यक्षता में सभी सभापति एवं जिला पंचायत सदस्य एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संदीप कुमार अग्रवाल एवं जिला स्तर के सभी अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुई। सर्व प्रथम सभी सदस्यों का स्वागत किया गया। बैठक में सर्व प्रथम एक राष्ट्र एक चुनाव भारत देश में लोक सभा एवं राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ आयोजित करने के लिए बहुमत से प्रस्ताव पारित कर शासन को प्रस्ताव भेजे जाने का निर्णय लिया गया।       लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के समीक्षा में सभी सदस्यों के द्वारा वर्तमान में चल रही पानी की समस्या को देखते हुए अपने अपने क्षेत्र में हैण्ड पंप खोदने एवं बंद पंप का तत्काल मरम्मत कराये जाने को कहा गया तथा शासन स्तर से जारी 100 पंप के लक्ष्य को बढ़ाने के लिए पत्र भेजे जाने का प्रस्ताव पारित किया गया। विद्युत व्यवस्था हेतु नए ट्रासफार्मर एवं बंद एवं मरम्मत योग्य को तत्काल सुधार कराए जाने हेतु निर्देश दिए गए । स्वास्थ्य विभाग में चल रहे स्वास्थ्य केन्द्रों में रिक्त पदों को तत्काल प्रतिपूर्ति किए जाने हेतु मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देशित किया गया। श्रीमती ललिता संतोष कश्यप उपाध्यक्ष के द्वारा तखतपुर में शिशुरोग विशेषज्ञ एवं अन्य पदों को तत्काल भरे जाने की मांग रखी गई। आरटीई के तहत् कुछ अशासकीय शालाओं द्वारा विद्यार्थियों को प्रवेश न दिए जाने का मुद्दा भी सदस्यों द्वारा उठाया गया है जिस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने उन शालाओं के प्रमुखों को निर्देशित करने की बात कही गई। आंगनबाड़ी भवन विहिन गांवों में तत्काल भवन स्वीकृत करने का प्रस्ताव पारित किया गया।        खरीफ सीजन की तैयारी को देखते हुए कृषि बीज भंडारण की जानकारी ली गई सभी सदस्यों के द्वारा पर्याप्त मात्रा में बीज भंडारण किए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया एवं साथ ही साथ जिला पंचायत के लिए वर्ष 2025-26 का बजट एवं महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत् लेबर बजट का भी अनुमोदन किया गया। बैठक में जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती ललिता संतोष कश्यप सहित श्रीमती अनुसुईया जागेन्द्र कश्यप सभापति, श्री गोविन्दराम यादव सभापति, श्रीमती भारती नीरज माली सभापति, श्रीमती अंबिका विनोद साहू सभापति,श्रीमती चन्द्र प्रकाश सूर्या सभापति,श्रीमती स्मृति त्रिलोक श्रीवास श्रीमती अनिता राजेन्द्र शुक्ला श्री शिवेन्द्र प्रताप कौशिक श्री राजेन्द्र धीवर श्री दामोदर कांत श्रीमती सतकली बावरे श्री रामखिलावन पटेल, श्री निरंजन सिंह पैकरा श्रीमती रजनी पिंटू मरकाम श्रीमती जयकुमारी प्रभु जगत सदस्यगण, श्रीमती वंदना गवेल परियोजना अधिकारी एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज मेसर्स रैक बैंक द्वारा प्रस्तावित अत्याधुनिक एआई डाटा सेंटर का शिलान्यास भी करेंगे

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 3 मई को नवा रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में पंजीयन (रजिस्ट्री) विभाग की नवाचार आधारित 10 नवीन सुविधाओं का शुभारंभ और मेसर्स रैक बैंक द्वारा प्रस्तावित अत्याधुनिक एआई डाटा सेंटर का शिलान्यास भी करेंगे। यह कार्यक्रम राज्य के डिजिटल बुनियादी ढ़ांचे को सुदृढ़ बनाने और आम नागरिकों को पारदर्शी, सरल तथा तकनीकी सुलभ सेवाएं प्रदान करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम होगा।   पंजीयन विभाग द्वारा आम नागरिकों की सुविधा, पारदर्शिता और दस्तावेजों की सुरक्षा के उद्देश्य से पंजीयन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और सरल बनाया गया है। इन सुविधाओं में आधार आधारित प्रमाणीकरण, ऑनलाइन सर्च एवं डाउनलोड, कैशलेस भुगतान, डिजीलॉकर, व्हाट्सएप नोटिफिकेशन, घर बैठे रजिस्ट्री, डिजीडॉक्यूमेंट, स्वतः नामांतरण जैसी तकनीकी सेवाएं शामिल हैं। इन सुविधाओं से रजिस्ट्री प्रक्रिया, पेपरलेस सुरक्षित और नागरिकों के लिए सहज हो सकेगी। अब आम नागरिक रजिस्ट्री से जुड़ी सेवाएं घर बैठे प्राप्त कर सकेंगे, जिससे समय, श्रम और धन की बचत होगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय द्वारा जिस एआई डाटा सेंटर का शिलान्यास किया जाएगा, वह नवा रायपुर के सेक्टर 22 में विशेष आर्थिक क्षेत्र के रूप में स्थापित किया जा रहा है। प्रथम चरण में 5 मेगावॉट क्षमता का यह केंद्र पर्यावरण संरक्षण मानकों का पालन करते हुए सौर ऊर्जा आधारित होगा तथा भविष्य में इसकी क्षमता 150 मेगावॉट तक विस्तार की जा सकेगी। लगभग 1000 करोड़ के निवेश वाली इस परियोजना से 500 से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह इकाई राज्य की औद्योगिक नीति वर्ष 2024-30 के तहत एंकर यूनिट के रूप में विकसित होगी। इसके साथ ही राज्य में आईटी, आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स और डेटा सेवाओं से जुड़े एक नए इको-सिस्टम के विकास की नींव रखी जाएगी।

रायपुर : वनमंत्री कश्यप राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की 59वीं जनरल काउंसिल की बैठक में हुए शामिल

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की 59वीं जनरल काउंसिल की बैठक में शामिल हुए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में शिक्षा को बेहतर बनाने से संबंधित कई अहम मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय नवा रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में पंजीयन (रजिस्ट्री) विभाग की 10 नवीन सुविधाओं का शुभारंभ

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 3 मई को नवा रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में पंजीयन (रजिस्ट्री) विभाग की नवाचार आधारित 10 नवीन सुविधाओं का शुभारंभ और मेसर्स रैक बैंक द्वारा प्रस्तावित अत्याधुनिक एआई डाटा सेंटर का शिलान्यास भी करेंगे। यह कार्यक्रम राज्य के डिजिटल बुनियादी ढ़ांचे को सुदृढ़ बनाने और आम नागरिकों को पारदर्शी, सरल तथा तकनीकी सुलभ सेवाएं प्रदान करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम होगा।   पंजीयन विभाग द्वारा आम नागरिकों की सुविधा, पारदर्शिता और दस्तावेजों की सुरक्षा के उद्देश्य से पंजीयन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और सरल बनाया गया है। इन सुविधाओं में आधार आधारित प्रमाणीकरण, ऑनलाइन सर्च एवं डाउनलोड, कैशलेस भुगतान, डिजीलॉकर, व्हाट्सएप नोटिफिकेशन, घर बैठे रजिस्ट्री, डिजीडॉक्यूमेंट, स्वतः नामांतरण जैसी तकनीकी सेवाएं शामिल हैं। इन सुविधाओं से रजिस्ट्री प्रक्रिया, पेपरलेस सुरक्षित और नागरिकों के लिए सहज हो सकेगी। अब आम नागरिक रजिस्ट्री से जुड़ी सेवाएं घर बैठे प्राप्त कर सकेंगे, जिससे समय, श्रम और धन की बचत होगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय द्वारा जिस एआई डाटा सेंटर का शिलान्यास किया जाएगा, वह नवा रायपुर के सेक्टर 22 में विशेष आर्थिक क्षेत्र के रूप में स्थापित किया जा रहा है। प्रथम चरण में 5 मेगावॉट क्षमता का यह केंद्र पर्यावरण संरक्षण मानकों का पालन करते हुए सौर ऊर्जा आधारित होगा तथा भविष्य में इसकी क्षमता 150 मेगावॉट तक विस्तार की जा सकेगी। लगभग 1000 करोड़ के निवेश वाली इस परियोजना से 500 से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह इकाई राज्य की औद्योगिक नीति वर्ष 2024-30 के तहत एंकर यूनिट के रूप में विकसित होगी। इसके साथ ही राज्य में आईटी, आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स और डेटा सेवाओं से जुड़े एक नए इको-सिस्टम के विकास की नींव रखी जाएगी।

शासकीय स्कूल परिसर में एक युवक का लहूलुहान मिला शव

डोंगरगढ़ राजनांदगांव जिले के अछोली गांव में शनिवार सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब गांव के शासकीय स्कूल परिसर में एक युवक का लहूलुहान शव मिला। मृतक की पहचान 28 वर्षीय भीम नेताम के रूप में हुई है, जो एक पैर से दिव्यांग था और गांव की एक किराना दुकान में काम करता था। मामला डोंगरगढ़ थाना क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक, जिस स्थान पर भीम नेताम का शव मिला, वहीं बीती रात एक शादी समारोह आयोजित किया गया था। ग्रामीणों के अनुसार शादी समारोह में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे, लेकिन किसी ने भी रातभर स्कूल परिसर में पड़े शव की ओर ध्यान नहीं दिया। शुक्रवार सुबह एक ग्रामीण की नजर जब शव पर पड़ी तो उसने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही डोंगरगढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। प्रारंभिक जांच में मृतक के शरीर पर चाकू से गोदने के कई निशान पाए गए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि उसकी बेरहमी से हत्या की गई है। मौके की परिस्थितियों के आधार पर पुलिस को आशंका है कि युवक की हत्या किसी अन्य स्थान पर की गई और फिर शव को स्कूल परिसर में लाकर फेंका गया। स्कूल परिसर में संघर्ष या खून के कोई निशान नहीं मिले हैं, जो इस संभावना को मजबूत करते हैं। हालांकि, अंतिम पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही सामने आएगा। पुलिस की जांच शुरू पुलिस ने हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए सभी संभावित पहलुओं पर जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल पर एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की टीम और डॉग स्क्वॉड को भी बुलाया गया है, जो सबूतों की गहन जांच कर रहे हैं। घटना के बाद गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल है। लोग हत्या के कारणों को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगा रहे हैं। जल्द होगा हत्या का खुलासा : टीआई जितेंद्र वर्मा डोंगरगढ़ थाना प्रभारी जितेन्द्र वर्मा ने बताया कि पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही मामले का खुलासा कर दिया जाएगा। गांव के कई लोगों से पूछताछ की जा रही है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हत्या की वजह क्या थी, आपसी रंजिश, निजी विवाद या कोई अन्य कारण। परिजनों और परिचितों से भी जानकारी ली जा रही है, ताकि मृतक की दिनचर्या और अंतिम समय में किन लोगों के संपर्क में था, इसका पता लगाया जा सके।

मछली पकड़ने गया मछुआरा हुआ लापता, तलाश में जुटी गोताखोरों की टीम

बालोद तांदुला डेम में मछली पकड़ने गया मछुआरा तेज आंधी-तूफान के बीच लापता हो गया। घटना शुक्रवार शाम की है, जब 48 वर्षीय सोमन निसाद मछली पकड़ते वक्त अचानक गायब हो गया। किनारे पर उसकी नाव और जाल लावारिस मिले, जिससे डेम में हादसे की आशंका गहरा गई है। लापता सोमन निसाद बोरिद गांव का निवासी बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, सोमन रोज की तरह मछली पकड़ने डेम में गया था, लेकिन तेज हवाओं और मौसम की खराबी के बाद वह लौटकर नहीं आया। जबकि अन्य मछुवारे वापस घर आ गए। स्थानीय ग्रामीणों को जब उसकी नाव और मछली पकड़ने का जाल किनारे पर लावारिस हालत में मिले, तो उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और गोताखोरों की संयुक्त टीम को तैनात किया गया है। डेम में खोजबीन जारी है, लेकिन अब तक मछुआरे का कोई पता नहीं चला है। बताया जा रहा है कि नाव (डोंगा) डूबी थी। इस घटना ने क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। बता दें कि प्रदेश के अन्य इलाकों के साथ-साथ शाम को बालोद में भी मौसम का मिजाज बदला। जिले के कई इलाकों में बारिश हुई और तेज आंधी-तूफान के कारण कहीं पेड़ गिरे तो कहीं टिन शेड उड़ गए। बिजली खंबों को भी नुकसान पहुंचा। डेम में मछली पकड़ने गया मछुआरा, आंधी-तूफान की चपेट में आकर पानी में डूबने की आशंका जताई जा रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कौशल, रोजगार और आजीविका पर नीति-आयोग की कार्यशाला का किया शुभारंभ

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में नीति-राज्य कार्यशाला श्रृंखला के राज्य समर्थन मिशन के तहत छत्तीसगढ़ में युवाओं, महिलाओं और जनजातीय समुदायों के लिए कौशल विकास, रोजगार और आजीविका के अवसरों को विस्तार देने विषय पर आधारित कार्यशाला का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह कार्यशाला बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप बेहद प्रासंगिक है। भारत एक युवा देश है और यदि युवाओं को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार कौशल प्रशिक्षण मिले, तो हम ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को तेजी से हासिल कर सकते हैं। इस मौके पर राज्य के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आज चार महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एम.ओ.यू.) पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री श्री साय ने आगे कहा कि 2047 तक छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के लिए युवाओं, महिलाओं और जनजातीय वर्ग को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने नीति आयोग की आकांक्षी जिलों की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे जनजातीय क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिला है।  उन्होंने कहा कि राज्य समर्थन मिशन के बेहतर क्रियान्वयन से प्रदेश के युवाओं, महिलाओं और जनजातिय समुदाय के आजीविका के लिए प्रशिक्षण से रोजगार के नये अवसर शुलभ होंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं को कौशल से जोड़कर उन्हें रोजगार के योग्य बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री नेे बताया कि सरकार वर्ष 2013 से कौशल विकास को तीव्रता से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार लाइवलीहुड कॉलेज, आईटीआई और महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त बनाने पर काम कर रही है। उन्होंने महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी के साथ समझौते की जानकारी देते हुए कहा कि इसके तहत राज्य के युवाओं को ट्रैक्टर निर्माण की आधुनिक तकनीक सिखाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस पहल से बस्तर और सरगुजा अंचल के ग्रामीण युवाओं तथा उनके परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आयेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, मैकेनिक जैसे कौशलों की भारी मांग है, लेकिन कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता कम है। सरकार इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने के लिए व्यापक योजना तैयार कर रही है। साथ ही उन्होंने महुआ, इमली, साल जैसे वन उत्पादों से मूल्यवर्धन कर स्थानीय लोगों की आजीविका को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि आगामी योजनाओं में बस्तर और सरगुजा अंचल के आदिवासी युवाओं को विशेष कोर्स और प्रशिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही महिलाओं के लिए स्वरोजगार एवं उद्यमिता प्रशिक्षण केंद्र खोलने की भी तैयारी है। उन्होंने बताया कि विभिन्न बड़ी कंपनियों से एमओयू कर निवेश और रोजगार के अवसर लाने की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि स्किल और इंडस्ट्री को जोड़ना जरूरी है। जब दोनों साथ होंगे तब रोजगार की संभावना अधिक रहेगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग (जैसे कृषि, फल-फलियाँ, हस्तशिल्प) में युवाओं को प्रशिक्षित कर नए रोजगार सृजन पर बल दिया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि बस्तर में अब माओवाद का प्रभाव घट रहा है और हम युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जल्द ही ई-हब की शुरुआत करेगी, जहां नवाचार करने वाले युवाओं को प्रोटोटाइप, फंडिंग और मार्केटिंग की सुविधा मिलेगी। कार्यशाला को कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा सचिव श्री एस. भारती दासन ने कहा कि छत्तीसगढ़ में युवाओं के लिए मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 4.83 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 2.66 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार भी मिला है। नीति आयोग की प्रोग्राम निदेशक डॉ. सोनिया पंत ने कहा कि नीति आयोग का ‘राज्य समर्थन मिशन’ राज्यों को उनकी आर्थिक व सामाजिक विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तकनीकी सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में वन-आधारित आजीविका कार्यक्रमों को मजबूत करने पर ज़ोर दिया और कहा कि इससे आदिवासी समुदाय की आय में वृद्धि होगी। डॉ. पंत ने बताया कि राज्य-स्तरीय योजनाओं में जनजातीय युवाओं की भागीदारी बढ़ाने एवं उन्हें नई तकनीक और कौशल से जोड़ने पर नीति आयोग हर सम्भव मदद करेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कौशल विकास तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार के सीईओ विजय दयाराम के. सहित विभागीय अधिकारी तथा बड़ी संख्या में युवा, महिला और जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधि उपस्थित थे। कौशल विकास के लिए 4 महत्वपूर्ण एमओयू   राज्य के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आज चार महत्वपूर्ण एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को रोजगारोन्मुख कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। पहला एमओयू तकनीकी शिक्षा छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण एवं नन्दी फाउंडेशन के बीच हुआ। इस एम.ओ.यू. का मुख्य उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित युवाओं की रोज़गार योग्यताओं को बढ़ाना है। यह कार्यक्रम उन्हें आवश्यक कौशल प्रदान करके उनके आजीविका के साधनों और आर्थिक सुरक्षा में सुधार लाने का प्रयास करता है। इसी तरह दूसरा एमओयू कौशल विकास प्राधिकरण एवं महेन्द्रा एंड महेन्द्रा के बीच हुआ, इस एम.ओ.यू. के अंतर्गत दंतेवाड़ा, बलरामपुर और कोंडागांव जिलों में स्थित लाइवलीहुड कॉलेजों में ट्रैक्टर मैकेनिक पाठ्यक्रम में अल्पकालिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का संचालन रायपुर स्थित स्टेट प्रोजेक्ट लाइवलीहुड कॉलेज सोसायटी द्वारा किया जाएगा। तीसरा एमओयू उच्च शिक्षा विभाग और नैसकॉम के बीच हुआ, इस समझौते का उद्देश्य कॉलेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी देकर उन्हें जॉब सीकर से जॉब प्रोवाइडर के रूप में विकसित करना है। यह कार्यक्रम युवाओं को इंडस्ट्री रेडी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसी प्रकार उच्च शिक्षा विभाग और नन्दी फांउडेशन हैदराबाद के बीच चौथा समझौता हुआ, इस एम.ओ.यू. के तहत महाविद्यालयों के छात्रों को रोजगार परक प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें कुशल और आत्मनिर्भर युवा के रूप में तैयार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किए गए सुधारों का असर, छत्तीसगढ़ बना जीएसटी संग्रह में अग्रणी राज्य

रायपुर अप्रैल 2025 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रहण  में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि  हासिल  की है। छत्तीसगढ़ ने  4,135 करोड़ का जीएसटी संग्रहण कर देश के शीर्ष 15 राज्यों की सूची में अपनी जगह बनाई है। जीएसटी संग्रहण के मामले में छत्तीसगढ़ ने केरल, पंजाब, बिहार और खनिज संसाधनों से भरपूर झारखंड जैसे राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है। राज्य में इस आर्थिक प्रगति को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा व्यापार और उद्योग क्षेत्र में किए गए सशक्त सुधारों का प्रतिफल है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बीते 15 महीनों में राज्य सरकार ने ऐसे कई निर्णय लिए हैं, जिनसे निवेश और व्यापार को बढ़ावा मिला है । सरकार द्वारा किए गए प्रमुख सुधारों में उद्योग एवं व्यापार नियमों का सरलीकरण, गैर-जरूरी और बाधक कानूनों की समाप्ति,सभी जरूरी सेवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता,पेट्रोल पंप खोलने के लिए लाइसेंस की बाध्यता को समाप्त करना और उद्योगों की स्थापना के लिए प्रक्रिया को सरल बनाना शामिल है। इन सभी पहल से राज्य में उद्योग और व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिला है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और राजस्व संग्रह में निरंतर वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  कहा है छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाना हमारा लक्ष्य है। राज्य की आर्थिक स्थिति में यह वृद्धि जनता और उद्योग जगत के सहयोग से संभव हुई है।” यह प्रदर्शन छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है और यह दिखाता है कि राज्य संसाधन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर अब एक सशक्त औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।

सरगुजा में कार ने बाइक को मारी टक्कर, तीन महीने का मासूम सहित 3 लोगों की मौत

सरगुजा  छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में तेज रफ्तार का कहर नहीं थम रहा है। सीतापुर-अंबिकापुर मुख्य मार्ग पर दर्दनाक हादसा हुआ है। तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार युवकों को जोरदार टक्कर मार दी। भीषण हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई। सभी मृतक एक ही परिवार के सदस्य हैं। पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई में जुट गई है। हादसा सीतापुर थाना क्षेत्र का है। दरअसल तीन महीने के मासूम की तबियत बिगड़ने से माता-पिता परेशान थे। वे मासूम बच्चे का इलाज कराने के लिए ग्राम दमगड़ा से निकले थे। इसी बीच सीतापुर-अंबिकापुर मुख्य मार्ग NH43 में बिशुनपुर के पास तेज रफ्तार कार (क्रमांक CG 15 EC 0892) ने बाइक सवारों को जोरदार ठोकर मार दी। हादसे में मासूम समेत तीन लोगों की मौत हो गई। बाइक को ठोकर मारते हुए कार सड़क किनारे बाउंड्री वॉल से जा टकराई कार। इस हादसे में चालक को भी चोटें आई है।पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए कार चालक को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की कार्रवाई में पुलिस जुट गई है।

कलेक्टर ने शिविरों के आयोजन के लिए जिला अधिकारियों को दिए जरूरी दिशा-निर्देश

अमृत धारा डीपीआरसी भवन में समय सीमा की बैठक सम्पन्न कलेक्टर ने शिविरों के आयोजन के लिए जिला अधिकारियों को दिए जरूरी दिशा-निर्देश एमसीबी  एमसीबी जिले के कलेक्टर डी. राहुल वेंकट की अध्यक्षता में जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल अमृतधारा जलप्रपात के पास स्थित डीपीआरसी( जिला पंचायत संसाधन केन्द्र) भवन में समय-सीमा की बैठक का आयोजन किया गया। पर्यटन स्थल को विकसित करने के उद्देश्य से यहा बैठक का आयोजन किया गया था। कलेक्टर ने बैठक में सुशासन तिहार के माध्यम से प्राप्त आवेदनों की समीक्षा करते हुये मनेन्द्रगढ़, भरतपुर और खड़गवां के एसडीएम एवं अनुविभागीय अधिकारी पुलिस विभाग को संयुक्त दौरा कर सभी हेलीपैड और ग्राउंड की जानकारी एकत्रित करने के निर्देश दिये। संबंधित जनपद के सीईओ वहां के नोडल अधिकारी होंगे। इसके साथ ही हेलीपैड और ग्राउंड के आसपास की पांच-छह पंचायतों की जानकारी प्रस्तुत करने को कहा। कलेक्टर ने सुशासन तिहार के तीसरे चरण के लिए जिले में की जा रही तैयारियों की भी समीक्षा की। सुशासन तिहार के तीसरे चरण में पांच मई से जिले में समाधान शिविरों का आयोजन शुरू हो जाएगा। जिले में इसके लिए ग्राम पंचायतों का क्लस्टर बनाकर समाधान शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में उपस्थित लोगों को उनके आवेदनों पर की गई कार्रवाई, मांगों की पूर्ति और समस्याओं पर किए गए निराकरण की जानकारी विभागवार, ग्राम पंचायतवार दी जाएगी। कलेक्टर ने इन शिविरों के आयोजन के लिए अधिकारियों को जरूरी निर्देश भी आज की समय सीमा की बैठक में दिए। कलेक्टर जिले के छः राजस्व निरीक्षक मण्डल भरतपुर एवं कुवांरपुर, कोटाडोल एवं घाघरा, केल्हारी एवं पेण्ड्री, नागपुर, मनेंद्रगढ़ ग्रामीण एवं मनेंद्रगढ़ शहरी, चिरमिरी एवं उधनापुर तथा खड़गवां, रतनपुर व देवडांड के लंबित प्रकरणों को जल्द से जल्द निराकरण करने के निर्देश दिये। इसके साथ ही उन्होंने राजस्व निरीक्षक मण्डलों में नामांतरण, बटंवारा, किसान किताब (ऋण पुस्तिका) हेतु आवश्यकता अनुसार आबंटन मंगाने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने राजस्व सर्कलों में पटवारी कार्यालय सह आवास हेतु सूची बनाने के निर्देश दिये है। कलेक्टर ऑफिस, आयुष, वीआईपी क्वार्टर, एसडीएम बिल्डिंग केल्हारी, कोटाडोल तहसील कार्यालय में नए शौचालय निर्माण, खड़गवां में आयुष के लिए एक हेक्टेयर भूमि आवंटन और आमाखेरवा में 220 बेड के हॉस्पिटल निर्माण को लेकर चर्चा की गई। सीएससी खड़गवां, भूमि पूजन, डंगौरा मेंटल हॉस्पिटल, शिक्षा विभाग के अतिरिक्त कक्षों, कृषि, क्रेड़ा और स्वास्थ्य विभाग के लिए भूमि आवंटन पर भी चर्चा हुई। सर्किट हाउस, रिकॉर्ड रूम और जिला पंचायत भवन के लिए भूमि आवंटन पर भी चर्चा की गई। गर्ल्स कॉलेज, नवोदय विद्यालय और खेल मैदान को लेकर विचार-विमर्श किया गया। मनेन्द्रगढ़ में मंगल सामुदायिक भवन और पार्किंग के लिए भूमि चिन्हांकन करने के निर्देश दिए गए। लाईवलीहुड कॉलेज, नागपुर-चिरमिरी रेलवे लाइन, जिला पंचायत कार्यालय, वन विभाग, कोटाडोल हाउसिंग बोर्ड और सड़क निर्माण से संबंधित लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने जिले में पीडीएस भवन हेतु आवश्यकतानुसार विधानवार सूची बनाने के निर्देश खाद्य विभाग को दिये हैं।   अमृतधारा के बारे में           भारत में छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में अमृत धारा झरना है। जिसे अमृृतधारा जलप्रपात भी कहा जाता है, छत्तीसगढ़ राज्य के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में स्थित है. यह हसदेव नदी पर है, और मनेन्द्रगढ़ से लगभग 26 किलोमीटर और चिरमिरी से लगभग 50 किलोमीटर दूर है. यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। 90.0 फीट (27.4 मीटर) की ऊंचाई से गिरता है। झरना लगभग 10.0-15.0 फीट (3.0-4.6 मीटर) चौड़ा है। यह हसदेव नदी एक जल प्रपात है। निकटतम शहर- मनेन्द्रगढ़ (लगभग 26 किलोमीटर) और चिरमिरी (लगभग 50 किलोमीटर) यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र में कई प्रकार के वन्यजीव पाए जाते हैं, जैसे कि पक्षी, हिरण, और बंदर। यह क्षेत्र पांचवी अनुसूची के अंतर्गत है, जहाँ पंडो, गोंड़, बैगा, चेरवा आदि जनजातियां निवासरत हैं। अमृतधारा महोत्सवः-       प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर अमृतधारा महोत्सव का आयोजन जिला प्रशासन के द्वारा किया जाता है जिसमें लगभग 10,000 की संख्या में लोग शामिल होते हैं। इस अवसर पर भव्य एवं गौरवशाली कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है जिसमे विभिन्न मनोरंजक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ साथ पारंपरिक खेलकूद एवं अन्य गतिविधियां आयोजित की जाती है। इस महोत्सव में जिले के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ सम्माननीय जनप्रतिनिधिगण, स्थानीय व् राष्ट्रिय कलाकार आदि शामिल होते हैं। उद्देश्यः-      आदिवासी कला एवं संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धन,स्थानीय लोक-कला को राज्य एवं राष्ट्रीय पटल पर लाना, पारंपरिक खेलकूद जैसे कबड्डी, फुगड़ी, गेड़ी इत्यादि को बढ़ावा देना, जिससे स्थानीय निवासियों को स्व-रोजगार के अवसर मिलेंगे और उनके आय में वृद्धि होगी तथा ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।        इस बैठक में जिला पंचायत सीईओ अंकिता सोम शर्मा, अपर कलेक्टर अनिल कुमार सिदार, संयुक्त कलेक्टर सी.एस.पैकरा, एसडीएम लिंगराज सिदार, विजयेन्द्र सारथी, प्रितेश राजपूत, सर्व तहसीलदार, जनपद सीईओ, नगर पंचायत सीएमओ, जिले के अधिकारी एवं कर्मचारी बैठक में उपस्थित रहे।

सूकर पालन और बाड़ी विकास एक साथ-नरेगा योजना का अभिनव पहल

सफलता की कहानी सूकर पालन और बाड़ी विकास एक साथ-नरेगा योजना का अभिनव पहल नरेगा योजना की लाभ से इमलीवती बनी आत्मनिर्भर एमसीबी/बरबसपुर महात्मा गाँधी नरेगा योजना ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए नई दिशा दी है। इस योजना ने ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में न केवल आर्थिक स्थिरता लाई है, बल्कि उन्हें अपनी क्षमता पहचानने का अवसर भी दिया है । मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेन्द्रगढ़ ब्लॉक के ग्राम महराजपुर  की निवासी इमलीवती ने इस योजना का लाभ उठाकर न केवल अपनी आजीविका सुदृढ़ की है, बल्कि अपने गांव की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन गई हैं। उनकी सफलता की कहानी सूकर पालन और बाड़ी विकास के साथ एक अभिनव मॉडल प्रस्तुत करती है। नरेगा योजना से मिली इमलीवती को नई दिशा        इमलीवती को नरेगा योजना के अंतर्गत उन्हें 1.20 लाख हजार रुपये का राशि प्राप्त हुआ। इस राशि का उपयोग उन्होंने सूकर फार्म शुरू करने के लिए किया। यह निर्णय लेना उनके लिए आसान नहीं था। महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत सूकर पालन फार्म निर्माण हो जाने से हितग्राही के जीवन में बदलाव आया है, मनरेगा के साथ-साथ सूकर पालन में वृद्धि हुई। अब पशुओं को बीमारी का डर नहीं है और साथ ही पक्का कोटर बन जाने से खिलाने वाला चारा का नुकसान नहीं होता। जिससे पशु चारे में लगने वाली लागत काफी कम हुई है। सूकर के बीमारी का खतरा कम हुआ है। अपने परिवार से सलाह-मशवरा कर उन्होंने ठोस योजना बनाई और इसे अमल में लाया। उनकी देखभाल में हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखा गया। सूकर को समय पर भोजन, पानी और उचित देखभाल मिलती थी, जिससे उनकी वृद्धि सुचारू रूप से हुई। आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सफलता की सफर पर पहुंची इमलीवती        1.20 लाख हजार रुपये की लागत से शुरू किए गये इस व्यवसाय ने महज 6 महीनों में 5-6 सूकर रेडी हो जाते है। जिसकी कीमत लगभग 3000 से 4000 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। इमलीवती ने बताया कि अब मजदूरी करने की ज्यादा चिंता नहीं रहती है। घर की खेती के आलावा बचे हुए समय में सूकर पालन करने से अतिरिक्त आमदनी का साधन बन गया है। इससे घर के खर्चे आसानी से चल जाते है। अपनी पहली सफलता के बाद  इमलीवती ने उसको धीरे-धीरे उनकी आय में वृद्धि हुई और वह अपने व्यवसाय को और अधिक विस्तृत करने लगी। इमलीवती बनी गांव के लिए प्रेरणा      इमलीवती मेहनत और सूझबूझ ने उन्हें गांव की महिलाओं के लिए एक मिसाल बना दिया। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इच्छा शक्ति मजबूत हो और सही दिशा में कदम बढ़ाए जाएं, तो किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। नरेगा योजना से महिलाओं के सशक्तिकरण की नई कहानी ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का जो मंच प्रदान किया है, वह अद्वितीय है। इमलीवती की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलने पर महिलाएं न केवल अपने परिवार, बल्कि समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। इमलीवती यह कहानी हमें यह सिखाती है कि हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है, बस हमें अपने भीतर की शक्ति को पहचानना होगा। सूकर पालन और बाड़ी विकास का यह अनूठा मॉडल न केवल ग्रामीण नरेगा का एक सफल उदाहरण है, बल्कि यह साबित करता है कि स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। आज इमलीवती की मेहनत और उनकी कहानी छत्तीसगढ़ के हर कोने में गूंज रही है। उनकी यह सफलता “जहां चाह वहां राह“ की सच्ची मिसाल है।

जिला स्तरीय पदोन्नति समिति की बैठक 5 मई को

एमसीबी/मनेंद्रगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग(टी-संवर्ग) अंतर्गत सहायक ग्रेड-03 से सहायक ग्रेड-02 के पद पर पदोन्नति की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। उक्त प्रक्रिया को पूर्ण करने हेतु 05 मई 2025 दिन सोमवार को समय सायं 4ः00 बजे कलेक्टर कार्यालय के अपर कलेक्टर कक्ष में बैठक आयोजित की गयी है। सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, प्राचार्य शा.उ.मा. वि. कोथरी तथा संबंधित अधिकारियों को निर्धारित तिथि एवं समय में जिला स्तरीय पदोन्नति समिति की बैठक में उपस्थित होने कहा गया है।

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