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मुख्यमंत्री साय से नक्सल हिंसा पीड़ितों के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री निवास में बस्तर अंचल से आए नक्सल हिंसा पीड़ितों के  प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल में सुकमा, बीजापुर, कांकेर सहित बस्तर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों के वे नक्सल हिंसा पीड़ित शामिल थे, जिन्होंने विगत वर्षों में नक्सली हिंसा के कारण अपनों को खोया है, शारीरिक यातनाएँ झेली हैं अथवा विस्थापन का दंश सहा है। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री साय को ज्ञापन सौंपते हुए कुर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान को निर्णायक मोड़ तक पहुँचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बस्तर के हजारों परिवार चार दशकों से माओवादी आतंक की विभीषिका का सामना कर रहे हैं, जिसने क्षेत्र की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक बुनियाद को गहरा नुकसान पहुँचाया है। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई और सरकार की समावेशी विकास की नीति से बस्तर में शांति और विकास की आशा फिर से जगी है। ग्रामीणों ने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों को इस नई जागरूकता और विश्वास का प्रतीक बताया।

राज्यपाल डेका ने नक्सल प्रभावितों को हर संभव मदद् देने की बात कही

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका से आज राजभवन में बस्तर क्षेत्र के कांकेर, नारायणपुर और सुकमा जिले के नक्सल हिंसा से पीड़ित ग्रामीणों ने मुलाकात की और अपनी समस्याओं से अवगत कराया। डेका ने नक्सल प्रभावितों को हर संभव मदद् देने की बात कही। राज्यपाल डेका ने सभी पीड़ितों से बात चीत की। शासन की ओर से नक्सल हिंसा से प्रभावित ग्रामीणों को जो सहायता राशि उपलब्ध कराई गई है उस राशि का सदुपयोग करने कहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की विशेष पहल पर केंद्र शासन द्वारा बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए सतत् कार्रवाई की जा रही है तथा वर्ष 2026 तक इस क्षेत्र को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा इन क्षेत्रों के विकास के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल टावर लगाये जा रहे हैं, जिससे इन क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क से जुड़ सके। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संपदा से भरपूर बस्तर क्षेत्र में विकास एवं पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राज्यपाल डेका ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित जो दिव्यांग हुए हैं उनको आत्म निर्भर बनाने के लिए प्राथमिकता से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने नक्सल हिंसा से दिव्यांग हुए सुकमा जिले के ग्राम चिंता गुफा निवासी राहुल सोढ़ी का इलाज एम्स रायपुर में कराने के निर्देश दिये। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, गृह मंत्री के ओएसडी अमर सिदार सहित पीड़ित ग्रामीण भी उपस्थित थे।

नकली सोना थमाकर असली ले उड़ीं महिलाएं, तीन महिला समेत पांच पकड़े गए

बिलासपुर बिलासपुर में खरीदार बनकर नकली सोना थमाकर असली सोना और नगद रकम ठगकर फरार होने वाले आरोपियों को पुलिस ने महाराष्ट्र भंडारा से घेराबंदी कर पकड़ा है। एडिशनल एसपी राजेंद्र कुमार जायसवाल ने बताया कि 28 अप्रैल दो महिलाएं खरीदारी करने सदर बाजार के हिम्मतलाल ज्वेलर्स में आई थीं। उन्होंने सर्राफा व्यापारी को नकली सोना थमाकर उसकी एवज में 42.3 ग्राम असली सोने के जेवर 13572 रुपये ठगी कर फरार हो गए थे। इसकी सूचना पर कोतवाली पुलिस ने सराफा दुकान की सीसीटीवी फुटेज को खंगाला। जिसमें दो महिलाएं खरीदारी करते नजर आ रही थीं। बड़े अधिकारियों के निर्देश के बाद शहर व आउटर में सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की। जिसमे रायपुर रोड में महिलाएं कार से भागते हुए नजर आईं। फुटेज में आरोपी महाराष्ट्र भंडारा की तरफ भागने की पुष्टि हुई। इसपर बिलासपुर पुलिस ने घेराबंदी का गाड़ी नंबर के आधार पर कार सवार तीन महिलाओं और दो पुरुषों को पकड़ लिया। और गाड़ी की तलाशी ली तो 14 लाख का सोना और 3 किलो चांदी के जेवर 94 हजार रुपये नगद मिले। पूछताछ करने पर पांचों ने बिलासपुर रायपुर राजनांदगांव के सराफा दुकान में नकली सोना थमाकर असली सोने की ठगी करने की बात स्वीकार की है। बिलासपुर की कोतवाली पुलिस ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे नगद रकम जेवर और कार को जब्त किया है। यह सभी आरोपी प्रयागराज के हैं। पकड़े गए आरोपियों का नाम मालती सोनी पति कन्हैया लाल सोनी नैनी प्रयागराज, पूनम सोनी पिता भारत लाल सोनी 36 वर्ष प्रयागराज, प्रदीप सोनी पिता विनोद सोनी 21 साल सुल्तानपुर प्रयागराज, राहुल सोनी उर्फ मनीष पिता भारत लाल सोनी 22 वर्ष सेक्टर शांतिपुरम प्रयागराज, श्यामा सोनी पिता बबलू सोनी प्रयागराज है।

शिक्षकों ने कहा – मुख्यमंत्री ने निभाई मुखिया की भूमिका: सुशासन और संवेदनशीलता का दिया उदाहरण

 हर युवा के चेहरे की चिंता हमने पढ़ी, हर परिवार की पीड़ा हमने समझी और उसका समाधान करने का किया प्रयास : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री साय की पहल से छत्तीसगढ़ के बर्खास्त बीएड शिक्षकों के जीवन में लौटी खुशियाँ: 26 सौ से अधिक युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने का ऐतिहासिक निर्णय शिक्षकों ने कहा – मुख्यमंत्री ने निभाई मुखिया की भूमिका: सुशासन और संवेदनशीलता का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का सहायक शिक्षकों ने जताया आभार रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से छत्तीसगढ़ के 26 सौ से अधिक बीएड अर्हताधारी बर्खास्त सहायक शिक्षकों के जीवन में खुशियां लौट आई है। प्रदेश सरकार ने बर्खास्त शिक्षकों को सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के पद पर समायोजन करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस फैसले से राज्य के 2600 से अधिक युवाओं का भविष्य एक बार फिर संवर गया है।       मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री निवास में बर्खास्त सहायक शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर उनका आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को ग़जमाला पहनाकर उनके प्रति कृतज्ञता जताई।        मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस मौके पर सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं और उनसे अपने दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों का और देश का भविष्य गढ़ना शिक्षकों का सबसे बड़ा कर्तव्य है। आप सभी अपने दायित्व के प्रति सचेत हों और इस भूमिका में सर्वोच्च योगदान दें।       मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार ने शिक्षकों की चिंता पहले दिन से की थी। आप हमारे प्रदेश के बच्चें है और आपके भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प हमने पहले से ले लिया था। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह कदम छत्तीसगढ़ के भविष्य निर्माताओं को नया संबल देगा और शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ये युवा शिक्षक आने वाले वर्षों में प्रदेश की नई पीढ़ी को दिशा देंगे और छत्तीसगढ़ को विकास के पथ पर अग्रसर करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह निर्णय शिक्षकों के   उज्जवल, सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की एक नई शुरुआत है।      उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के साथ आपके नौकरी के संबंध में लगातार चर्चा होती थी। हमारे मुखिया इतने संवेदनशील है कि उन्होंने पहले ही दिन कहा था कि जितना भी आर्थिक बोझ पड़े राज्य सरकार अपने युवाओं के भविष्य को खतरे में नहीं डालेगी। उन्होंने कहा कि आपके परिजन भी लगातार हमसे संपर्क कर अपनी चिंता व्यक्त करते थे और आज मुख्यमंत्री ने उन सभी की चिंता को दूर करते हुए अपना वादा निभाया। मुख्यमंत्री जी ने न केवल अपना वादा निभाया है बल्कि अपनी इच्छा शक्ति से सुशासन को स्थापित करने का कार्य किया है। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री साय के इस ऐतिहासिक निर्णय ने पूरे देश में मिसाल कायम की है।        इस अवसर पर युवाओं ने कहा कि नौकरी जाने के बाद वे अपने भविष्य को लेकर गहरी आशंका में थे और लगातार मानसिक पीड़ा झेल रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री साय की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता ने उन्हें संबल दिया। शिक्षकों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने हर बार उनकी बात सुनी और भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने हमसे वादा किया था कि हमारे बेटे-बेटियों का भविष्य सुरक्षित किया जाएगा और आज उन्होंने अपना वादा निभाकर एक अभिभावक की जिम्मेदारी पूरी की है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल युवा शिक्षकों ने कहा कि मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में सरकार ने वास्तव में सुशासन और संवेदनशीलता का परिचय दिया है। हमें गर्व है कि आज हमारे प्रदेश में ऐसी सरकार है जो हमारी पीड़ा को समझती है और संवेदनशीलता के साथ हमारी समस्याओं का समाधान करती है।

घटिया निर्माण सामग्री से निर्माणाधीन श्मशान घाट का शेड हुआ धराशायी

गौरेला पेंड्रा मरवाही गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में निर्माणकार्यो में भ्रष्टाचार थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। ताजा मामला मुक्तिधाम के निर्माणकार्य में भ्रष्टाचार का है। जिसमें अधिकारी और ठेकेदारो ने श्मशान घाट को भी नहीं छोड़ा। निर्माणाधीन श्मशान घाट का शेड भरभराकर गिर गया। मामले में अधिकारी जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की बात कह रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, जीपीएम जिले में ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माणकार्यों में जमकर अनियमितता और भ्रष्टाचार बरती जा रही है। जिसके चलते निर्माणकार्य पूरा होने से पहले ही उसकी गुणवत्ता की पोल खुल जा रही है। ताजा मामला जिला कलेक्टर कार्यालय से महज 2 किलोमीटर दूर जनपद पंचायत गौरेला के ग्राम पंचायत भदौरा में सामने आया है। जहां पर शमशान घाट में चल रहे मुर्दो को जलाने के लिए पक्के सेड निर्माणकार्य किया जा रहा था, जिसकी लागत लगभग 5 लाख रुपये है। जिसका निर्माणकार्य मनरेगा मद से किया जा रहा था और निर्माणकार्य चल रहा था। पर गुणवत्ताहीन निर्माणकार्य की पोल उस समय खुल गई पूरा स्ट्रक्चर अचानक धरासाई हो गया। राहत की बात तो यह रही कि ये हादसा दोपहर में उस समय हुआ। जब वहां पर न कोई मजदूर था और न ही कोई ग्रामीण। इसलिए कोई अप्रिय घटना घटित नहीं हुई। अब मामले का खुलासा होने के बाद जनपद पंचायत गौरेला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का कहना है कि मामले की जानकारी उन्हें भी हुई है और जांच के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। निर्माणकार्य को लेकर जवाबदार इंजीनियर एसडीओ अब मामले से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे है। निर्माणकार्य में घटिया सामग्री उपयोग किये जाने की बात कही जा रही है।  

पटना में बारिश , सारण और सीवान में बारिश का रेड अलर्ट जारी

पटना बिहार के कई जिलों में तेज हवा के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पटना मौसम विज्ञान केंद्र ने पटना, सीवान, सारण, नालंदा, नवादा, समस्तीपुर, वैशाली, भोजपुर, गया, शेखपुरा, जमुई, लखीसराय बारिश का अलर्ट जारी किया है। पटना, जहानाबाद, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, जमुई, बेगूसराय, भोजपुर, औरंगाबाद सीवान और सारण के कुछ भागों में तीव्र दर्जे की मेघ गर्जन, वज्रपात, ओलावृष्टि और तेज हवा के साथ बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। इधर, पटना समेत कुछ जिलों में अहले सुबह से ही बारिश हो रही है। पटना और गोपालगंज के कई इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई। तेज हवा के साथ बारिश ने तापमान में गिरावट ला दी है। दो मई को पूरे बिहार में बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, एक मई को बिहार के सुपौल, अरिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, बक्सर, भोजपुर, रोहतास, भभुआ, औरंगाबाद, अरवल, पटना, गया, नालंदा, शेखपुरा, नवादा, बेगूसराय, लखीसराय, जहानाबाद, भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर में एक या दो स्थानों पर बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं दो मई को बिहार के सभी 38 जिलों के कुछ स्थानों पर बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।   मेघगर्जन के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें पटना मौसम विज्ञान केंद्र ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि बारिश और वज्रापत को लेकर मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि सभी लोग खराब मौसम में पूरी सतर्कता बरतें। खराब मौसम होने पर वज्रपात से बचाव के लिये आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किये गये सुझावों का अनुपालन करें। खराब मौसम में घरों में रहें और सुरक्षित रहें। वहीं मौसम विभाग ने लोगों से अपील कि है कि खराब मौसम के दौरान अपने पशुधन और खुद को बाहर निकलने से बचें। मेघगर्जन के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें। बारिश के समय सुरक्षित स्थान पर जाकर बैठ जाएं।  

मुख्यमंत्री साय बोले- हर युवा के चेहरे की चिंता हमने पढ़ी, हर परिवार की पीड़ा हमने समझी और उसका समाधान करने का किया प्रयास

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से छत्तीसगढ़ के 26 सौ से अधिक बीएड अर्हताधारी बर्खास्त सहायक शिक्षकों के जीवन में खुशियां लौट आई है। प्रदेश सरकार ने बर्खास्त शिक्षकों को सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के पद पर समायोजन करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस फैसले से राज्य के 2600 से अधिक युवाओं का भविष्य एक बार फिर संवर गया है।       मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री निवास में बर्खास्त सहायक शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर उनका आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को ग़जमाला पहनाकर उनके प्रति कृतज्ञता जताई।        मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस मौके पर सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं और उनसे अपने दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों का और देश का भविष्य गढ़ना शिक्षकों का सबसे बड़ा कर्तव्य है। आप सभी अपने दायित्व के प्रति सचेत हों और इस भूमिका में सर्वोच्च योगदान दें।       मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार ने शिक्षकों की चिंता पहले दिन से की थी। आप हमारे प्रदेश के बच्चें है और आपके भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प हमने पहले से ले लिया था। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह कदम छत्तीसगढ़ के भविष्य निर्माताओं को नया संबल देगा और शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ये युवा शिक्षक आने वाले वर्षों में प्रदेश की नई पीढ़ी को दिशा देंगे और छत्तीसगढ़ को विकास के पथ पर अग्रसर करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह निर्णय शिक्षकों के   उज्जवल, सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की एक नई शुरुआत है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के साथ आपके नौकरी के संबंध में लगातार चर्चा होती थी। हमारे मुखिया इतने संवेदनशील है कि उन्होंने पहले ही दिन कहा था कि जितना भी आर्थिक बोझ पड़े राज्य सरकार अपने युवाओं के भविष्य को खतरे में नहीं डालेगी। उन्होंने कहा कि आपके परिजन भी लगातार हमसे संपर्क कर अपनी चिंता व्यक्त करते थे और आज मुख्यमंत्री ने उन सभी की चिंता को दूर करते हुए अपना वादा निभाया। मुख्यमंत्री जी ने न केवल अपना वादा निभाया है बल्कि अपनी इच्छा शक्ति से सुशासन को स्थापित करने का कार्य किया है। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के इस ऐतिहासिक निर्णय ने पूरे देश में मिसाल कायम की है।   इस अवसर पर युवाओं ने कहा कि नौकरी जाने के बाद वे अपने भविष्य को लेकर गहरी आशंका में थे और लगातार मानसिक पीड़ा झेल रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता ने उन्हें संबल दिया। शिक्षकों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने हर बार उनकी बात सुनी और भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने हमसे वादा किया था कि हमारे बेटे-बेटियों का भविष्य सुरक्षित किया जाएगा और आज उन्होंने अपना वादा निभाकर एक अभिभावक की जिम्मेदारी पूरी की है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल युवा शिक्षकों ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में सरकार ने वास्तव में सुशासन और संवेदनशीलता का परिचय दिया है। हमें गर्व है कि आज हमारे प्रदेश में ऐसी सरकार है जो हमारी पीड़ा को समझती है और संवेदनशीलता के साथ हमारी समस्याओं का समाधान करती है।

बिलासपुर:योग के बहाने नमाज, रात तीन बजे GGU सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को घर से उठा लाई…

 बिलासपुर  कोटा क्षेत्र के शिवतराई में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के एनएसएस कैंप के दौरान छात्रों को योग के बहाने नमाज पढ़ाने के मामले में कोटा पुलिस की टीम रात तीन बजे केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर को घर से उठा लाई है। प्राेफेसर से घटना के संबंध में पूछताछ की जा रही है। कोटा क्षेत्र के शिवतराई में एनएसएस कैंप के दौरान विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र देने का प्रलाेभन देकर नमाज पढ़वाने के मामले में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर दिलीप झा, डा मधुलिका सिंह, डा ज्योति वर्मा, डा नीरज कुमारी, डा प्रशांत वैष्णव, डा सूर्यभान सिंह, डा बसंत कुमार और टीम कोर लीडर आयुष्मान चौधरी आरोपित हैं। मामले की जांच के दौरान कोटा पुलिस ने प्रोफेसर दिलीप झा को गुरुवार की तड़के तीन बजे उनके घर से हिरासत में लिया है। पुलिस की टीम मामले में शामिल अन्य आरोपित की तलाश कर रही है। क्या है मामला गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के एनएसएस विंग का कोटा के शिवतराई में सात दिवसीय शिवर 26 मार्च से एक अप्रैल तक लगाया गया था। आरोप है कि 31 मार्च की सुबह कैंप में मौजूद प्रोफेसरों और टीम लीडर ने सभी छात्र-छात्राओं को एकत्र कर नमाज पढ़वाई। साथ ही छात्रों को प्रमाण पत्र देने का प्रलोभन दिया गया। कैंप से लौटकर कुछ छात्रों ने इसकी शिकायत विश्वविद्यालय प्रबंधन से की। इधर कैंप में नमाज पढ़वाने की जानकारी लगते ही हिंदू संगठन के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद कोनी पुलिस ने शुन्य में मामला दर्ज कर केस डायरी कोटा पुलिस को सौंप दी। मामले की जांच अब कोटा पुलिस कर रही है। DSP रश्मीत कौर चावला ने बताया कि कथित घटना को लेकर आठ लोगों के खिलाफ 26 अप्रैल को दर्ज FIR के सिलसिले में प्रोफेसर दिलीप झा को गुरुवार सुबह हिरासत में लिया गया. उन्होंने बताया कि झा और बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के 6 फैकल्टी मेंबर्स और टीम के एक मुख्य नेता पर धर्म के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने समेत अन्य अपराधों के लिए भारतीय न्याय संहिता व छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने 26 मार्च से 1 अप्रैल के बीच जिले के कोटा थाना इलाके के शिवतराई गांव में आयोजित एनएसएस शिविर के दौरान 31 मार्च को 159 छात्रों को नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया, हालांकि उनमें से केवल चार ही मुस्लिम थे. छात्रों के वापस लौटने पर विरोध प्रदर्शन के बाद जांच शुरू की गई, जिसके बाद दक्षिणपंथी संगठनों ने भी आंदोलन किया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. बिलासपुर के एसएसपी रजनेश सिंह ने मामले की जांच के लिए सिटी पुलिस अधीक्षक (कोतवाली) अक्षय सबदरा की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम गठित की थी. समिति की रिपोर्ट के आधार पर झा और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. चावला ने कहा कि मामले की आगे की जांच जारी है. छात्रों ने कार्रवाई की मांग की थी छात्रों के मुताबिक, विरोध करने पर उन्हें धमकी और सर्टिफिकेट नहीं देने की चेतावनी भी दी गई। छात्रों ने कोनी थाना पुलिस से शिकायत करके प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. बसंत कुमार, कोआर्डिनेटर दिलीप झा सहित अन्य स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। शिविर में शामिल नहीं हुए थे प्रोफेसर इधर, प्रोफेसर दिलीप झा का कहना था कि यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित NSS कैंप में वो शामिल ही नहीं हुए थे। ऐसे में उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कैंप में नमाज पढ़ाने की उन्हें जानकारी ही नहीं है। न ही कैंप में शामिल को आर्डिनेटर ने उन्हें इसकी जानकारी दी थी। ऐसे में बेवजह केस में आरोपी बनाया गया है। पुलिस बोली- साक्ष्यों को किया प्रभावित, जांच में सहयोग नहीं वहीं, सीएसपी व मीडिया प्रभारी रश्मित कौर चावला का कहना है कि इस मामले की जांच के बाद प्रो.दिलीप झा, डॉ. मधुलिका सिंह, डॉ. ज्योति वर्मा, डॉ. नीरज कुमारी, डॉ. प्रशांत वैष्णव, डॉ. सुर्यभान सिंह, डॉ. बसंत कुमार और टीम कोर लीडर छात्र आयुष्मान चौधरी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जांच में अपराध सबूत पाए जाने के साथ ही साक्ष्य को प्रभावित करने और विवेचना में सहयोग नहीं करने के कारण आरोपी प्रोफेसर दिलीप झा को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है।

नक्सल पीड़ितों ने नक्सल उन्मूलन अभियान को मजबूती से आगे बढ़ाने का किया अनुरोध

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री निवास में बस्तर अंचल से आए नक्सल हिंसा पीड़ितों के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल में सुकमा, बीजापुर, कांकेर सहित बस्तर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों के वे नक्सल हिंसा पीड़ित शामिल थे, जिन्होंने विगत वर्षों में नक्सली हिंसा के कारण अपनों को खोया है, शारीरिक यातनाएँ झेली हैं अथवा विस्थापन का दंश सहा है। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री साय को ज्ञापन सौंपते हुए कुर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान को निर्णायक मोड़ तक पहुँचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बस्तर के हजारों परिवार चार दशकों से माओवादी आतंक की विभीषिका का सामना कर रहे हैं, जिसने क्षेत्र की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक बुनियाद को गहरा नुकसान पहुँचाया है। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई और सरकार की समावेशी विकास की नीति से बस्तर में शांति और विकास की आशा फिर से जगी है। ग्रामीणों ने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों को इस नई जागरूकता और विश्वास का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कुर्रेगुट्टा में चलाया जा रहा सुरक्षा अभियान निर्णायक चरण में है। सरकार किसी भी कीमत पर नक्सल उन्मूलन अभियान को पूर्ण करेगी ताकि बस्तर के विकास को गति मिले। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद सिर्फ एक हिंसक आंदोलन नहीं, बल्कि हमारी सह-अस्तित्व पर आधारित संस्कृति पर खतरा भी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हर नक्सल पीड़ित परिवार के साथ सरकार खड़ी है और सुरक्षा बलों के मनोबल को तोड़ने या अभियान में बाधा डालने वाले किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बस्तर में स्थायी शांति और समावेशी विकास ही सरकार का लक्ष्य है, और यह तभी संभव है जब क्षेत्र को हिंसा और भय के साये से पूरी तरह मुक्त किया जाए। मुख्यमंत्री साय ने आशा व्यक्त की कि नक्सल विरोधी संघर्ष में जन-भागीदारी और विश्वास की शक्ति से हम निस्संदेह सफलता प्राप्त करेंगे और बस्तर को स्थायी शांति और विकास की दिशा में अग्रसर करेंगे।

महासमुंद : सुशासन तिहार : राजस्व प्रकरणों का त्वरित समाधान और जमीन स्तर पर बदलाव की नई शुरुआत

महासमुंद   जिले में ‘सुशासन तिहार’ अंतर्गत राजस्व विभाग द्वारा  त्वरित समाधान हेतु किए जा रहे पहल प्रशासनिक दक्षता का प्रतीक हैं, बल्कि आम जनता को राहत देने वाले ठोस प्रयास भी हैं। कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के सतत मार्गदर्शन में राजस्व विभाग की टीम द्वारा जिस तत्परता से प्रकरणों का समाधान किया जा रहा है, वह सराहनीय है। सीमांकन प्रकरणों का त्वरित निराकरण सुशासन तिहार के इतर सामान्य दिनों में राजस्व विभाग के समक्ष आने वाले सबसे सामान्य लेकिन जटिल प्रकरणों में सीमांकन की समस्या प्रमुख है। पहले इन प्रकरणों के निराकरण में समय लग जाते थे, जिससे आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। लेकिन सुशासन तिहार के दौरान, इन प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर समाधान गया। उदाहरणस्वरूप, ग्राम चौकबेड़ा के किसान श्री ब्रज प्रसाद की भूमि का सीमांकन वर्षों से लंबित था, जिससे खेती करना मुश्किल हो गया था। अभियान के दौरान राजस्व विभाग ने दो दिनों के भीतर सीमांकन कर रिपोर्ट प्रदान की, जिससे किसान परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। इसी तरह उपतहसील पटेवा अंतर्गत किसान पंचराम और झाखरमुडा में ग्रामीणों सीमांकन की कारवाई की गई । छोटी-छोटी लेकिन महत्वपूर्ण समस्याओं का समाधान इस अभियान में केवल बड़े प्रकरणों पर ही नहीं, बल्कि आम जनजीवन से जुड़ी छोटी-छोटी समस्याओं पर भी ध्यान दिया गया। भू-अभिलेख की प्रतिलिपि, सीमांकन रिपोर्ट की प्रति,  किसान किताब ,भूमि स्वामित्व की त्रुटियों का संशोधन, खातों की अद्यतन जानकारी जैसी मामूली लेकिन समय-संवेदनशील समस्याओं का तत्काल समाधान किया गया जा रहा है। किसान किताब और दस्तावेजों का वितरण अभियान के दौरान राजस्व विभाग द्वारा बसना तहसील अंतर्गत ग्राम डूमरपाली के किसान महेशराम, ग्राम जगत के मीन केतन और राजकुमार को तहसीलदार ममता ठाकुर द्वारा किसान किताब वितरण किया गया। इसके अलावा  बागबाहरा के ग्राम तेंदुलोथा के श्रीमती पुरी हरपाल को भी किसान किताब एक सप्ताह के भीतर मिल गया। इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आम जनता में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है। लोग अब यह महसूस कर रहे हैं कि उनका शासन उनके द्वार पर है। बसना के किसान पंचराम ने कहा, “अब हमें तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ते, अफसर खुद गांव आकर समाधान कर रहे हैं।” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी सरकार की यह पहल वास्तव में समाधान कारक है।‘सुशासन तिहार’ केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि जनता से जुड़ने और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुलझाने की एक सशक्त पहल है। महासमुंद जिले में इस अभियान ने प्रशासन की संवेदनशीलता और जवाबदेही को जमीन स्तर पर सिद्ध करने का प्रयास किया है। यदि इसी गति और भावना से कार्य होते रहे, तो सुशासन की यह अवधारणा एक स्थायी बदलाव का माध्यम बन सकती है।`

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आत्मसमर्पित माओवादियों को मिल रहा रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण

रायपुर, राज्य शासन द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना एवं समावेशी विकास को दृष्टिगत रखते हुए छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण राहत एवं पुनर्वास नीति 2025 लागू की गई है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने युवाओं को समाज की मुख्यधारा में लाने हेतु व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं। सुकमा जिले में कलेक्टर श्री देवेश कुमार धु्रव के मार्गदर्शन में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) के माध्यम से 20 आत्मसमर्पित युवाओं को कृषि विज्ञान केंद्र, सुकमा में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण तीन माह की अवधि का है जिसमें उन्हें ड्रिप इरिगेशन, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण, जैविक खेती, सब्जी उत्पादन, डेयरी, मुर्गी और मत्स्य पालन जैसी आजीविका आधारित तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में उद्यमिता विकास को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय साक्षरता तथा लघु उद्यम स्थापित करने की विधियों पर भी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात इन युवाओं को सिलाई तथा मोटर ड्राइविंग जैसे अन्य रोजगारमूलक विषयों में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल राहत एवं पुनर्वास नीति 2025 केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन युवाओं को नवजीवन देने का प्रयास है, जो कभी भटकाव के रास्ते पर चले गए थे। हमारा उद्देश्य है कि वे आत्मनिर्भर बनें, सम्मानजनक जीवन जिएं और समाज के लिए प्रेरणा बनें। कलेक्टर श्री देवेश कुमार धु्रव ने बताया कि यह केवल पुनर्वास नहीं, बल्कि मुख्यधारा में लौटे युवाओं के लिए स्थायी आजीविका की दिशा में एक ठोस कदम है। लाइवलीहुड कॉलेज की नोडल अधिकारी सुश्री मधु तेता ने जानकारी दी कि प्रशिक्षण के बाद इन युवाओं को स्वरोजगार हेतु शासन से आवश्यक सहायता भी प्रदान की जाएगी। राज्य शासन की यह पहल न केवल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित कर रही है, बल्कि युवाओं को एक सकारात्मक भविष्य की ओर अग्रसर कर रही है।

छत्तीसगढ़ नक्सली ऑपरेशन में जवानों को बड़ी सफलता, करेगुट्टा पहाड़ी पर फहराया गया तिरंगा

कर्रेगुट्टा   छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा पहाड़ी, लंबे समय से नक्सलियों का अभेद्य गढ़ मानी जाती थी। लेकिन अब ये पहाड़ी भारतीय सुरक्षाबलों के नियंत्रण में है। ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत 9 दिनों की कठिन चढ़ाई और रणनीतिक अभियान के बाद सुरक्षाबलों ने इस पहाड़ी पर कब्जा कर लिया और वहां तिरंगा झंडा फहरा दिया है। इस ऐतिहासिक जीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें जवान गर्व से तिरंगा लहराते नजर आ रहे हैं। ऑपरेशन संकल्प: नक्सलियों के खिलाफ सबसे बड़ा अभियान कर्रेगुट्टा पहाड़ी समुद्र तल से लगभग 5,000 फीट की ऊंचाई पर है। बताया जाता है कि ये पहाड़ी लंबे समय से नक्सलियों के पीपुल्स लिबरेशन गेरिला आर्मी (PLGA) के बटालियन नंबर 1 का मुख्य ठिकाना थी। इस क्षेत्र में करीब 500-1,000 नक्सली छिपे हुए थे। यह क्षेत्र हिड़मा, देवा, दामोदर, आजाद और सुजाता जैसे शीर्ष नक्सली कमांडरों का केंद्र रहा है। 21 अप्रैल से शुरू हुए ‘ऑपरेशन संकल्प’ में करीब 10,000 सुरक्षाकर्मियों ने हिस्सा लिया, जिसमें छत्तीसगढ़ पुलिस, तेलंगाना पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन, एसटीएफ, डीआरजी और बस्तर फाइटर्स शामिल थे। अभियान के दौरान 500 विशेष रूप से प्रशिक्षित जवानों को हेलिकॉप्टरों के जरिए पहाड़ी पर उतारा गया। 40-45 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी, दुर्गम रास्तों और नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की चुनौतियों के बावजूद जवानों ने नक्सलियों को खदेड़कर पहाड़ी के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। इस दौरान दो जवान आईईडी विस्फोट में घायल हुए, और कई जवान डिहाइड्रेशन का शिकार हुए। नक्सलियों का गढ़ अब जवानों के कब्जे में कर्रेगुट्टा पहाड़ी को नक्सलियों का ‘ब्लैक फॉरेस्ट’ या ‘ब्लैक हिल्स’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह क्षेत्र इतना घना और दुर्गम है कि शाम 4 बजे के बाद अंधेरा छा जाता है। स्थानीय लोग इस इलाके में जाने से डरते थे। सुरक्षाबलों ने न केवल पहाड़ी पर कब्जा किया, बल्कि वहां एक अस्थायी कैंप भी स्थापित किया, जिससे निगरानी और अभियान को और मजबूती मिलेगी। रिपोर्टों के अनुसार, इस अभियान में नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 को चारों ओर से घेर लिया गया है। करीब 2,000 नक्सलियों को घेरने की खबर है, जबकि कुछ शीर्ष नक्सली नेता, जैसे हिड़मा, तेलंगाना की ओर भाग गए हैं। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नक्सलियों की गुफा का खुलासा अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर एक विशाल गुफा मिली, जो इतनी बड़ी थी कि इसमें 1,000 नक्सली छिप सकते थे। इस गुफा में हथियार, गोला-बारूद और अन्य सामग्री रखने की व्यवस्था थी। गुफा के अंदर एक प्राकृतिक सुरंग भी मिली, जो नक्सलियों के लिए भागने का रास्ता थी। जवानों ने इस गुफा पर भी कब्जा कर लिया। नक्सलियों का शांति प्रस्ताव, सरकार का इनकार नक्सलियों ने ऑपरेशन के दबाव में शांति वार्ता और युद्धविराम का प्रस्ताव दिया। सीपीआई (माओवादी) के केंद्रीय प्रवक्ता अभय और तेलंगाना कैडर के नक्सली शांता ने इसके लिए बयान और प्रेस नोट जारी किए। हालांकि, छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए नक्सलियों से आत्मसमर्पण करने को कहा। स्थानीय लोगों में राहत, विकास की उम्मीद कर्रेगुट्टा पर सुरक्षाबलों के कब्जे के बाद आसपास के गांवों में रहने वाले ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। उन्होंने इस अभियान का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि अब क्षेत्र में शांति और विकास के रास्ते खुलेंगे। सुरक्षाबलों की योजना इस क्षेत्र में एक स्थायी चौकी (फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस) स्थापित करने की है, ताकि नक्सली गतिविधियों पर स्थायी रूप से रोक लगाई जा सके। वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर उत्साह सुरक्षाबलों द्वारा जारी किए गए वीडियो और तस्वीरों में जवान कर्रेगुट्टा पहाड़ी की चोटी पर तिरंगा फहराते दिख रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक्स पर कई यूजर्स ने इसे ‘नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक जीत’ करार दिया। एक यूजर ने लिखा, “छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर लाल आतंक का पर्याय रही कर्रेगुट्टा पहाड़ी अब तिरंगे की शान के साथ जवानों के कब्जे में है।” सरेंडर और नक्सलियों पर बढ़ता दबाव अभियान के दौरान बीजापुर में 28.50 लाख रुपये के इनामी 14 नक्सलियों समेत कुल 24 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 11 महिलाएं शामिल थीं। इससे नक्सलियों पर बढ़ते दबाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री साय ने भर्ती मरीजों से मिलकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी भी ली

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  राजधानी रायपुर के कमल विहार में अत्याधुनिक न्यूरो स्पाइन रिहैबिलिटेशन सेंटर का विधिवत उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री साय ने अस्पताल परिसर का भ्रमण कर उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने भर्ती मरीजों से मिलकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी भी ली। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। राज्य की रजत जयंती वर्ष में हम यह गर्व से कह सकते हैं कि आज छत्तीसगढ़ चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई पहचान बना रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चल रही आयुष्मान भारत योजना की सराहना करते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक पहल ने देशभर के लाखों जरूरतमंदों को सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा दी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार नवा रायपुर, अटल नगर में ‘मेडिसिटी’ विकसित कर रही है, जिससे छत्तीसगढ़ न केवल देश के स्वास्थ्य मानचित्र पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करेगा, बल्कि मेडिकल टूरिज्म को भी नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रायपुर आज देश के नए मेडिकल हब के रूप में उभर रहा है। अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त संस्थानों की स्थापना से आम लोगों को घर के पास ही विश्वस्तरीय इलाज की सुविधा मिल रही है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री साय ने “न्यूरो स्पाइन रिहैबिलिटेशन सेंटर” के प्रबंधन और समस्त चिकित्सकीय स्टाफ को बधाई देते हुए कहा कि यह संस्थान न्यूरो और स्पाइन से जुड़ी बीमारियों के इलाज में विशेष योगदान देगा तथा जनसेवा के क्षेत्र में एक नया उदाहरण बनेगा।

महासमुंद : प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत ‘आवास+ 2024’ सर्वेक्षण की समय-सीमा 15 मई, 2025 तक बढ़ाई गई

महासमुंद, भारत सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत अतिरिक्त पात्र ग्रामीण परिवारों की पहचान हेतु चल रहे ‘आवास+ 2024’ सर्वेक्षण की समय-सीमा को बढ़ा दिया है। अब यह सर्वेक्षण 15 मई, 2025 तक पूरा किया जा सकेगा। इससे पहले यह समय-सीमा 30 अप्रैल, 2025 निर्धारित की गई थी।   इस विस्तार का उद्देश्य सर्वेक्षण प्रक्रिया को पूरी गंभीरता से संपन्न करने तथा प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार की पहचान सुनिश्चित करने का अवसर देना है।  जिला प्रशासन ने ग्रामीणों से आग्रह किया गया है कि वे इस विस्तारित समय-सीमा का पूरा लाभ उठाएं और ‘आवास+ 2024’ मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से सर्वेक्षण प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करें। साथ ही, स्व-सर्वेक्षण के तहत प्राप्त सूचनाओं की सत्यता की पुष्टि भी सर्वेक्षणकर्ताओं के माध्यम से की जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का उद्देश्य वर्ष 2024-25 तक “सभी के लिए आवास” सुनिश्चित करना है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवारों को पक्के मकान प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

रायपुर : बीजापुर की बेटी ने राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप राज्य में चहुँओर विकास के साथ-साथ युवाओं के लिए अनेक आयाम खुल रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा संचालित बीजापुर स्पोर्ट्स एकेडमी की एथलेटिक्स खिलाड़ी संतोषी भण्डारी का चयन भारतीय खेल प्राधिकरण के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भोपाल के लिए किया गया है। यह चयन भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा 24 अप्रैल 2025 को जारी की गई चयन सूची के आधार पर हुआ है। जिसमें देशभर की 10 बालिका एथलीट्स को उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर चुना गया है। संतोषी भण्डारी सूची में सबसे कम उम्र की खिलाड़ी हैं, जो बीजापुर स्पोर्ट्स एकेडमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय बीजापुर की छात्रा संतोषी भंडारी ने हाल ही में स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा 11 से 14 जनवरी 2025 तक रांची झारखंड में आयोजित 68 वीं नेशनल स्कूल गेम्स में 400 मीटर और 600 मीटर दौड़ में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 400 मीटर में 1:02 मिनट और 600 मीटर में 1:41 मिनट का शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया स्तर पर 8 वां स्थान प्राप्त किया। इसके पूर्व, एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित 35 वीं वेस्ट जोन जूनियर एथलेटिक्स चौंपियनशिप जो 4 से 6 अक्टूबर 2024 को नागपुर महाराष्ट्र में आयोजित हुई थी उसमें उन्होंने 4 था स्थान प्राप्त किया था। भारतीय खेल प्राधिकरण हर वर्ष देशभर से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों का चयन कर उन्हें नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और डाइट की सुविधा प्रदान करता है।छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के लिए यह गौरव की बात है कि यहां की एक बेटी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

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