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कृषि, कौशल विकास, पर्यटन और उद्योग के विकास की नई रणनीति पर काम प्रारंभ: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर : बस्तर संभावनाओं की धरती : सब मिलकर लिखेंगे बस्तर के विकास की नई ईबारत: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय किसान, महिला समूह, युवा उद्यमी और आदिवासी समुदाय मिलकर बनाएंगे बस्तर को आत्मनिर्भर और समृद्ध कृषि, कौशल विकास, पर्यटन और उद्योग के विकास की नई रणनीति पर काम प्रारंभ रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष मौजूदगी में आज जगदलपुर में आयोजित “विकसित बस्तर की ओर” परिचर्चा में बस्तर के समग्र विकास के लिए एक व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में कृषि, कौशल विकास, पर्यटन और उद्योग जैसे क्षेत्रों में बस्तर की संभावनाओं को उजागर करने और विकास की नई दिशा तय करने पर गहन और सार्थक चर्चा हुई। संबंधित विभागों के अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और स्टेकहोल्डर्स के साथ विचार-विमर्श कर मुख्यमंत्री ने बस्तर को नक्सलवाद के अंधेरे से निकालकर विकास के प्रकाश की ओर ले जाने का संकल्प दोहराया। यहां यह उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय दो दिवसीय प्रवास पर जगदलपुर गए हुए हैं। अपने प्रवास के पहले दिन विकसित बस्तर की ओर परिचर्चा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ने दशकों तक नक्सलवाद का दंश झेला है, लेकिन अब यह क्षेत्र अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, नैसर्गिक सुन्दरता, कृषि विकास, कौशल उन्नयन, उद्योग और खनिज संसाधनों के साथ विकास की नई राह पर अग्रसर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “विकसित छत्तीसगढ़ @2047” का संकल्प “नवा अंजोर” विजन के माध्यम से साकार होगा, और इसकी शुरुआत बस्तर से हो रही है। बस्तर के किसान, महिला समूह, युवा उद्यमी, और आदिवासी समुदाय छत्तीसगढ़ की प्रगति की नई इबारत लिखने को तैयार हैं। परिचर्चा के पहले सत्र में बस्तर के किसानों की आय को दोगुना करने के लिए कृषि, उद्यानिकी, मछली पालन, पशुपालन, और जैविक खेती पर विस्तार चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के स्वदेशी और जैविक उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने के लिए प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, और मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना और उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा, “बस्तर के उत्पाद न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान बनेंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी जगह बनाएंगे। बस्तर संभाग में लगभग 9 लाख हेक्टेयर में खरीफ तथा पौने तीन लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की खेती होती है। खरीफ की मुख्य फसल धान एवं मक्का है। बस्तर संभाग में 1.85 हेक्टेयर में मक्का की खेती होती है, जिसे आगमी तीन वर्षों में बढ़ाकर 3 लाख हेक्टेयर किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। मक्का उत्पादक कृषकों के साथ जैव ईंधन, बायोफार्मास्युटिकल, स्टार्च एवं पोल्ट्री फीड उद्योगों के साथ मार्केट लिंकेज कराने पर जोर दिया गया, ताकि कृषकों को उनकी उपज का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके। इसी तरह आगामी तीन वर्ष में मिलेट्स की खेती को 52 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर 75 हजार हेक्टेयर करने तथा स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाई की स्थापना और स्कूलों, आंगनबाड़ियों तथा छात्रावास के बच्चों के खाद्यान्न में मिलेट्स को शामिल करने पर जोर दिया गया है। बस्तर में जैविक खेती को प्रोत्साहन देने तथा प्राइवेट कंपनियों की सहभागिता से बाजार एकीकरण, सिंचाई क्षेत्र में विस्तार के लिए तीन वर्षों में 27 हजार 600 सोलर पंप तथा नदी-नालों के किनारे सोलर लिफ्ट सिंचाई पंप की स्थापना की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। कृषि यांत्रिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष 30 से 40 नए कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया गया। बस्तर में वर्तमान में 1010 कृषि यंत्र केन्द्र संचालित है। बस्तर में काजू, कोंडागांव में आचार, मसाला एवं कोकोनट आयल, कांकेर में सीताफल पल्प, दंतेवाड़ा में शहद एवं हल्दी पाउडर, सुकमा, नारायणपुर एवं बीजापुर में मसाला प्रसंस्करण की स्थापना को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही। परिचर्चा के दौरान यह जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना, प्रधानमंत्री कौशल योजना, और नियद नेल्ला नार योजनाओं के तहत अब तक 90 हजार युवाओं को प्रशिक्षित और 40 हजार युवाओं को नियोजित किया गया है। इसके अलावा, बस्तर में 32 नए कौशल विकास केंद्र और सातों जिलों में आवासीय प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाने की योजना है। इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को बाजार और उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जाएगा। नक्सल पीड़ित परिवारों, आत्मसमर्पित नक्सलियों और महिलाओं को इन योजनाओं में विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। कौशल प्रशिक्षण के लिए महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, नंदी, एनएसडीसी एवं नीति आयोग से अनुबंध किया गया है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत बस्तर संभाग के सातों जिलों में 6123 लोगों को विभिन्न ट्रेड का प्रशिक्षण दिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने बस्तर दशहरा, जो 75 दिनों तक चलता है, को देशभर में और विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री आगामी पर्यटन सीजन के बीच आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी योजनाओं की रूपरेखा बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि निजी क्षेत्र को पर्यटन में भागीदार बनाना जरूरी है। उन्होंने पर्यटन सर्किट विकसित करने गाइड प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाए, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान और प्राचीन गुफाओं जैसे आकर्षणों के लिए प्रसिद्ध यह क्षेत्र अद्भुत परिदृश्य और समृद्ध जैव विविधता प्रदान करता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर दशहरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने के लिए अभी से तैयारी के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि पर्यटक जीवंत जनजातीय गांवों का भ्रमण कर बस्तर दशहरा जैसे पारंपरिक त्योहारों का अनुभव कर सकते हैं और स्थानीय शिल्प तथा व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं। पर्यटन स्थलों की दृश्यता और सटीकता को बेहतर बनाने के लिए निजी एजेंसियों के सहयोग से गूगल मैपिंग सेवाओं में सुधार किया जाएगा। बैठक में जानकारी दी गई कि नई छत्तीसगढ़ पर्यटन नीति 2025, शीघ्र प्रकाशित की जाएगी। मौजूदा पर्यटन संपत्तियों को निजी होटल व्यवसायियों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत लीज पर देने की योजना बनाई जाएगी। तीरथगढ़ जलप्रपात के पास कांच के पुल के निर्माण हेतु … Read more

बस्तर अंचल के सिंचाई के कार्यों में आएगी तेजी: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर संभाग को बड़ी सौगात दी है। उन्होंने जगदलपुर में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय का शुभारंभ किया। इस कार्यालय के प्रारंभ होने से बस्तर संभाग के सभी सातों जिलों के विभागीय कामकाज में काफी सुविधा होगी। जल संसाधन से संबंधित निर्माण कार्यों के सर्वेक्षण, डीपीआर निर्माण और तकनीकी स्वीकृति में तेजी आएगी। पहले इन कार्यों की स्वीकृति के लिए रायपुर जाना पड़ता था। अब ये काम संभागीय मुख्यालय बस्तर में ही हो सकेंगे। जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप के विशेष पहल से शुरू हुए जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता नवीन कार्यालय में विभिन्न स्तरों पर अधिकारी और कर्मचारी की नियुक्ति के लिए भी बजट में स्वीकृति दी गई है। वर्तमान में यह कार्यालय जगदलपुर के अधीक्षण अभियंता कार्यालय इंद्रावती परियोजना मंडल भवन के ऊपरी तल में संचालित हो रहा है। मुख्य अभियंता जल संसाधन कार्यालय के शुभारंभ अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप, सांसद बस्तर महेश कश्यप, विधायक जगदलपुर किरण सिंह देव, विधायक चित्रकोट विनायक गोयल, नगर निगम महापौर संजय पांडेय एवं जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदमती कश्यप, वित्त आयोग के अध्यक्ष निवास राव मद्दी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, जल संसाधन विभाग के प्रभारी मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के. एस. भंडारी और जल संसाधन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।

मक्के की खेती के लिए बस्तर में असीम संभावनाएं- मुख्यमंत्री साय

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में ‘विकसित बस्तर की ओर’ विषय पर परिचर्चा का हुआ आयोजन बस्तर को विकास की दिशा में आगे ले जाने के लिए कृषि पर देना होगा जोर-मुख्यमंत्री साय मक्के की खेती के लिए बस्तर में असीम संभावनाएं- मुख्यमंत्री साय मत्स्य पालन, बकरी पालन एवं शूकर पालन के लिए बजट में किया गया है अतिरिक्त प्रावधान- मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया बस्तर के विकास का संकल्प व्यक्त मुख्यमंत्री साय ने कलेक्टरों और अधिकारियों को कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन करने किया निर्देशित रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज जगदलपुर में “विकसित बस्तर की ओर” विषय पर एक महत्वपूर्ण परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा बस्तर क्षेत्र के समग्र विकास हेतु विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया गया। जगदलपुर में आयोजित बस्तर की ओर परिचर्चा में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, विधायक किरण सिंह देव, विनायक गोयल, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, संबंधित विभागों के सचिव, बस्तर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर समेत बस्तर संभाग के किसान,  कृषि उद्योग से जुड़े गणमान्य स्थानीय उपस्थित थे। इस अवसर पर किसानों, व्यापरियों कृषि से सम्बंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किये। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा की बस्तर को विकास की मुख्य धारा में शामिल करना है। बस्तर को विकास की दिशा में आगे ले जाने के लिए हमे खेती पर ज्यादा जोर देना है , विशेषकर यहां के सीमांत किसानों पर ध्यान देना है।  साय ने कहा कि बस्तर के लिए कृषि सबसे बेहतर विकल्प है, इससे स्थानीय जनजातियां जुड़ी हुयी है और लोग अपनी रुचि के अनुसार काम करेंगे तो उसमे सफल भी होंगे। कृषि के विकास के लिए हमने बजट में अतिरिक्त प्रावधान भी किया है। मुख्यमंत्री  साय ने विशेष जोर देते हुए कहा कि हमें मक्के की खेती को बढ़ाना पड़ेगा । ये कम लागत में तैयार होने वाली और ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल है। मक्का के लिए बस्तर की जलवायु काफी अनुकूल है। इसके साथ ही यहां मिलेट्स उत्पादन का काफी ज्यादा स्कोप है, इसकी खेती पर हमे विशेष काम करना होगा। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि बस्तर केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, यह संस्कृति, परंपरा, संघर्ष और संभावनाओं का संगम है। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें सशक्त नीति, पारदर्शी प्रशासन और जनभागीदारी से साकार किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि बस्तर को हर दृष्टि से आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाया जाए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नक्सलवाद हमारे प्रदेश के लिए एक कलंक की तरह रहा है, केन्द्र सरकार के सहयोग से इसे समाप्त करने की दिशा में निर्णायक लड़ाई लड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी का संकल्प है कि 31 मार्च, 2026 तक देश से नक्सलवाद का समूल नाश किया जाए और छत्तीसगढ़ इस लक्ष्य की प्राप्ति में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि नक्सलवाद केवल सुरक्षा की चुनौती नहीं है, बल्कि यह विकास की कमी का परिणाम है। इसलिए आवश्यक है कि हम बस्तर के हर गांव और हर व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ें और उन्हें पर्याप्त अवसर प्रदान करें। परिचर्चा में कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार ने कृषि क्षेत्र के विकास संबंधी रोडमैप प्रस्तुत करते हुए कहा कि बस्तर की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने हेतु फसल विविधीकरण, जैविक खेती, सिंचाई सुविधा का विस्तार, कृषि यंत्रीकरण, फसल ऋण की सुलभता और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर विशेष बल दिया जा रहा है। बस्तर संभाग में इस समय 2.98 लाख सक्रिय किसान परिवार हैं, जिनमें से 2.75 लाख को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिल चुका है। योजना की 19वीं किस्त के रूप में 64.77 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। शेष पात्र परिवारों का सत्यापन कर उन्हें भी योजना से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि बस्तर में 7 कृषि विज्ञान केंद्र, 4 कृषि महाविद्यालय, 2 उद्यानिकी महाविद्यालय, 1 वेटरनरी पॉलीटेक्निक कॉलेज और 1 कृषक प्रशिक्षण केंद्र संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा 29 उद्यान रोपणियाँ, 9 शासकीय मत्स्य प्रक्षेत्र, एक पोल्ट्री प्रक्षेत्र तथा एक शासकीय सुअर पालन केंद्र भी कार्यरत हैं। केसीसी कवरेज वर्तमान में 86 प्रतिशत तक पहुंच चुका है और आगामी तीन वर्षों में 1.25 लाख नए केसीसी जारी करने का लक्ष्य है।

आगंतुकों को स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की दी जाएगी जानकारी: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने बस्तर दशहरा, जो 75 दिनों तक चलता है, को देशभर में और विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने पर बल दिया। उनका कहना था कि इस प्रसिद्ध सांस्कृतिक उत्सव को वैश्विक पहचान मिलनी चाहिए और आने वाले दशहरे की तैयारी इस दृष्टिकोण से की जाए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आगामी पर्यटन सीजन के बीच आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी योजनाओं की रूपरेखा बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि निजी क्षेत्र को पर्यटन में भागीदार बनाना जरूरी है। उन्होंने पर्यटन सर्किट विकसित करने की बात कही ताकि पर्यटकों को एक बेहतर यात्रा अनुभव मिल सके। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही, गाइड प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से होमस्टे के प्रचार-प्रसार के लिए नए कदम उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि विदेशी पर्यटक होमस्टे में रुचि रखते हैं और यह आदिवासी समाज के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के सदस्यों को पर्यटन से होने वाले लाभों पर भी चर्चा की और कहा कि यह क्षेत्र विकास के नए अवसरों से लाभान्वित होगा। उन्होंने कहा कि बस्तर का पर्यटन केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रमुख आकर्षण बनेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय धरोहर और सांस्कृतिक जीवंतता का खजाना है, जो इसे पर्यटन के लिए एक अनोखा और विशिष्ट क्षेत्र बनाता है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान और प्राचीन गुफाओं जैसे आकर्षणों के लिए प्रसिद्ध यह क्षेत्र अद्भुत परिदृश्य और समृद्ध जैव विविधता प्रदान करता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  बस्तर संभाग में पर्यटन के विकास और वृहद रोडमैप बनाने हेतु गहन मंथन के दौरान यह बात कही। जगदलपुर में आयोजित विकसित बस्तर की ओर परिचर्चा में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, विधायक किरण सिंह देव, विनायक गोयल, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, पर्यटन विभाग के सचिव अलबनगन पी., पर्यटन विभाग के एमडी विवेक आचार्य, बस्तर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर,  पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित थे।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर दशहरा को  अंतरराष्ट्रीय  स्तर पर प्रचार प्रसार किया जाएगा।  इसकी अभी से तैयारी के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि इससे बस्तर की पहचान बनेगी। सितम्बर से मार्च का मौसम बेहतर होता है।इसे पर्यटन के लिए विशेष रूप से फोकस किया जाए। उन्होंने कहा कि अब पर्यटन क्षेत्र में ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि  निजी क्षेत्र और समुदाय की भागीदारी बढ़ाए। गाइड प्रशिक्षण की व्यवस्था हो। होम स्टे को प्रचार प्रसार हो।इसका लाभ उठाएं स्थानीय लोगों  को इसका लाभ मिलता है। सभी के बेहतर सुझाव से  पर्यटन के क्षेत्र में बस्तर को आगे बढ़ाएंगे। परिचर्चा में पर्यटन स्थलों के जुड़ाव, ब्रांडिंग और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया गया। बैठक में बताया गया कि पर्यटक जीवंत जनजातीय गांवों का भ्रमण कर सकते हैं, बस्तर दशहरा जैसे पारंपरिक त्योहारों का अनुभव कर सकते हैं और स्थानीय शिल्प तथा व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं। इको-पर्यटन, जनजातीय पर्यटन और दंतेश्वरी मंदिर जैसे आध्यात्मिक स्थलों के समन्वय के साथ बस्तर एक अनोखा और गहन यात्रा अनुभव प्रदान करता है। ब्रांडिंग और प्रचार के तहत ट्रैवल ट्रेड फेयर (TTF) के माध्यम से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के पर्यटकों को आकर्षित करने की योजना बनाई जाएगी। पर्यटन सूचना केंद्र (TIC) पश्चिम बंगाल, हैदराबाद, जगदलपुर, अरकू सिटी और भुवनेश्वर के हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर रणनीतिक स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे ताकि पर्यटकों को आवश्यक जानकारी मिल सके। आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना जैसे पड़ोसी राज्यों के यात्रा और पर्यटन ऑपरेटरों तथा होटल व्यवसायियों के साथ साझेदारी को मजबूत किया जाएगा। पर्यटन स्थलों की दृश्यता और सटीकता को बेहतर बनाने के लिए निजी एजेंसियों के सहयोग से गूगल मैपिंग सेवाओं में सुधार किया जाएगा। साथ ही जगदलपुर के दलपत सागर में वार्षिक नाव दौड़ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें पर्यटन विशेषज्ञों और प्रमोटरों को आमंत्रित किया जाएगा ताकि दृश्यता और जुड़ाव को बढ़ाया जा सके। विश्वभर के टूर और ट्रैवल ऑपरेटरों के बीच क्षेत्र की पर्यटन समृद्धि के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसे प्रदर्शित करने के लिए परिचयात्मक (FAM) यात्राएँ और रोड शो आयोजित किए जाएंगे। ये यात्राएँ टूर ऑपरेटरों और होटल व्यवसायियों को क्षेत्र का अन्वेषण करने के लिए आमंत्रित करेंगी, जबकि स्थानीय टूर ऑपरेटरों को भी वैश्विक रोड शो में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य इनबाउंड पर्यटन को बढ़ावा देना है। साथ ही कुटुमसर गुफाएँ और चित्रकोट जलप्रपात जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर स्वच्छ शौचालय और पीने के पानी जैसी आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएंगी। पर्यटकों की सुविधा के लिए केशलूर के आगे की सड़कों के सुधार की आवश्यकता चिन्हित की गई है। बस्तर को हैदराबाद, रायपुर, भुवनेश्वर, विशाखापत्तनम और अरकू जैसे प्रमुख शहरों से जोड़ने वाली ट्रेन सेवाओं के सुधार पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रमुख पर्यटक स्थलों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली की आपूर्ति जैसी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। चित्रकोट में पैराग्लाइडिंग, रैपेलिंग और ज़िपलाइनिंग जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स की गतिविधियों को और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा ताकि रोमांच प्रेमियों को आकर्षित किया जा सके। बैठक में बताया गया कि टैक्सी ड्राइवरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाएंगे ताकि उनकी कौशल और स्थानीय पर्यटन स्थलों की जानकारी में सुधार हो सके। साथ ही, पर्यटन गाइडों के लिए अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ताकि बहुभाषी पर्यटन गाइड विकसित किए जा सकें। पर्यटक स्थलों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा ताकि आगंतुकों को स्थानीय संस्कृति और परंपराओं में शामिल किया जा सके। पर्यटन सूचना केंद्रों के कर्मचारियों के सॉफ्ट स्किल्स में सुधार के लिए विभाग द्वारा एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को ग्राहक सेवा, संवाद कौशल और समस्या समाधान क्षमताओं में दक्ष बनाना है ताकि वे पर्यटकों को बेहतर सेवा प्रदान कर सकें। पर्यटकों के लिए जनजातीय संस्कृति और … Read more

कौशल विकास को लेकर विकसित बस्तर की ओर अग्रसर है छत्तीसगढ:बस्तर संभाग में मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत 85 कोर्स पंजीकृत

रायपुर : कौशल विकास ही स्थायी रोजगार का आधार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बस्तर अब शांति की ओर बढ़ चुका है, अब हमारा लक्ष्य है – लोगों को सम्मानजनक आजीविका देना : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कौशल विकास को लेकर विकसित बस्तर की ओर अग्रसर है छत्तीसगढ:बस्तर संभाग में मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत 85 कोर्स पंजीकृत नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत बस्तर संभाग के 24 कैंप के 95 चिन्हित ग्रामों के 457 युवाओं को दिया जा चुका है कौशल प्रशिक्षण आत्मसमर्पित माआवादियों में से 222 को रोजगार के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है , 62 अन्य है प्रशिक्षणरत रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  जगदलपुर में आयोजित विकसित बस्तर की ओर कार्यक्रम में बस्तर में कौशल विकास और रोजगार को लेकर सरकार की दूरदृष्टि साझा की। उन्होंने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि जब हम सांसद थे, तब देश में कौशल विकास मंत्रालय का गठन हुआ – और आज यह विभाग देश के युवाओं के भविष्य निर्माण में क्रांतिकारी भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने बस्तर में चल रहे कौशल विकास प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्किलिंग केवल एक सेक्टर तक सीमित नहीं है — भाषा प्रशिक्षण, विदेशी रोजगार, हस्तशिल्प, कृषि, फूड प्रोसेसिंग, पर्यटन, कंस्ट्रक्शन, टेक्नोलॉजी जैसे अनेक क्षेत्रों में कौशल विकास संभव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब शांति की ओर अग्रसर है। शांति के बाद सबसे बड़ी चुनौती है – यहां के युवाओं को रोजगार देना। और यह कार्य हम पूर्ण निष्ठा से करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार न केवल कौशल विकास पर ध्यान देगी, बल्कि स्थानीय लोगों को स्थानीय संसाधनों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी कार्य करेगी। इससे बस्तर का युवा न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि पूरे देश और दुनिया में अपने हुनर की पहचान बना सकेगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकसित बस्तर की ओर बढ़ते हुए संभाग में युवाओं के कौशल उन्नयन और रोजगार प्रशिक्षण के लिए कौशल विभाग द्वारा मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना, पीएम कौशल विकास योजना , पीएम विश्वकर्मा योजना और नियद नेल्लानार योजना का संचालन किया जा रहा है। इन रोजगार प्रशिक्षण में विशेषकर नक्सल प्रभावित युवाओं को प्राथमिकता दिए जाने का प्रस्ताव शामिल है। बस्तर संभाग में मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत 85 कोर्स पंजीकृत है। पोर्टल के माध्यम से इनका पूर्णता आनलाइन क्रियान्वयन किया जाता है। सभी जिलों में आवासीय प्रशिक्षण की सुविधा है। वर्तमान में 64 व्यवसायिक प्रशिक्षण प्रदाता (VTP) है । योजना के अंतर्गत अब तक 90, 273 युवा प्रशिक्षित हो चुके है। प्रशिक्षित युवाओं में से 39,137 युवा नियोजित है।  32 कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना की जा चुकी है जिसमे आगामी समय में 4,915 युवाओं को प्रशिक्षण एवं रोजगार हेतु कार्ययोजना शामिल है। वर्ष 2025-26 के प्रस्तावित लक्ष्य के अनुसार 456 नियोक्ताओं के माध्यम से 4 हजार 915 युवाओं को प्रशिक्षण,  5 हजार 875 रोजगार के अवसर प्रदान किया जाना है। इसके लिए महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, नंदी फाउंडेशन, MSDC इंटरनेशनल  और नीति आयोग जैसी संस्थाओं से अनुबंध किया गया है। बस्तर संभाग में पीएम कौशल विकास योजना के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में 64% लक्ष्य पूर्ण किया गया तथा पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत अब तक 6 हजार 123 लोगों को प्रशिक्षित किया गया है। विकसित बस्तर की ओर बढ़ते हुए नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत बस्तर संभाग के 24 कैंप  के 95 चिन्हित ग्रामों के 457 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके साथ ही इन ग्रामों में 5 हजार 598 युवाओं का रोजगार प्रशिक्षण के लिए सर्वे किया जा चुका है। योजना के अंतर्गत आत्मसमर्पित माआवादियों में से 222 को रोजगार के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है जबकि  62 प्रशिक्षणरत है। जगदलपुर में आयोजित विकसित बस्तर की ओर परिचर्चा में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, विधायक किरण सिंह देव, विनायक गोयल, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कौशल विकास विभाग के सचिव भारती दासन, कौशल विकास विभाग के संचालक विजय दयाराम के., बस्तर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, कौशल विकास से जुड़ी संस्थाओं के लोग उपस्थित थे।

पात्र परिवारों को पक्का मकान दिलाना हमारी जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जगदलपुर के गांव से किया मोर दुआर-साय सरकार महाअभियान का शुभारंभ मोर दुआर-साय सरकार महाअभियान का शुभारंभ आवासहीन एवं कच्चे मकान वाले परिवारों के सर्वेक्षण का विशेष अभियान   पात्र परिवारों को पक्का मकान दिलाना हमारी जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री साय स्वयं हितग्राहियों के घर पहुंचकर किया सर्वे राज्य में 15 से 30 अप्रैल तक चलेगा मोर दुआर-साय सरकार महाभियान रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बस्तर जिले के ग्राम घाटपदमपुर से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण अंतर्गत आवास प्लस 2.0 सर्वेक्षण के लिए प्रदेशव्यापी मोर दुआर-साय सरकार महाभियान का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री इस दौरान उन्होंने घाटपदमपुर के कई हितग्राहियों के घर पहुंचकर स्वयं सर्वेक्षण किया। मुख्यमंत्री के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों में भारी उत्साह दिखाई दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को पक्का और सुरक्षित घर प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण कार्य समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पूरा किया जाएगा, ताकि हर जरूरतमंद को योजना का लाभ मिले। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण आवास प्लस 2.0 के तहत सर्वेक्षण के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विशेष पहल पर 15 दिवसीय मोर दुआर-साय सरकार महाभियान शुरू किया गया है। यह अभियान 30 अप्रैल तक चलेगा। मोर दुआर-साय सरकार महाभियान का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के ऐसे ग्रामीण परिवारों की पहचान करना है, जिन्हें अब तक किसी भी आवासीय योजना के तहत पक्का आवास नहीं मिल सका है। उन्हें पक्के आवास की सुविधा उपलब्ध कराना है। इस महाभियान में राज्य के प्रत्येक गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना प्लस 2.0 के हितग्राहियों के सर्वेक्षण का कार्य पूरा किया जाएगा, ताकि योजनांतर्गत आवास की स्वीकृति एवं निर्माण कार्य कराया जा सके। यह महाभियान तीन चरणों में संचालित होगा। पहले चरण में 15 से 19 अप्रैल के बीच जिला और ब्लॉक स्तर पर आयोजित किए जा रहे हैं। दूसरे चरण में 20 से 28 अप्रैल तक सभी ग्रामों में ग्राम सभाएं आयोजित कर घर-घर जाकर पात्र परिवारों का सर्वेक्षण किया जाएगा। तीसरे चरण में 29 और 30 अप्रैल को सभी सर्वेक्षणों की पुष्टि, ग्राम सभा की स्वीकृति और सत्यापन कर अंतिम रिपोर्ट तैयार कर राज्य कार्यालय को भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने ग्राम घाटपदमपुर आयोजित कार्यक्रम में स्वयं लाभार्थियों से चर्चा करते हुए उनके मकान की स्थिति जानी और नवनिर्मित घरों को देखकर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने ग्रामवासियों से सीधा संवाद करते हुए यह भी कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि कोई भी परिवार बिना पक्के मकान के न रहे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वेक्षण के माध्यम से जो भी पात्र परिवार सामने आएंगे, उन्हें शीघ्रातिशीघ्र योजना में सम्मिलित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने किया पात्र परिवारों का सर्वे मुख्यमंत्री साय जब हितग्राही श्रीमती शिलोमणि कश्यप एवं श्रीमती करुणा कश्यप के घर पहुंचे तब परिवारजनों ने उनका परंपरागत रूप से आत्मीय स्वागत किया। शिलोमणि कश्यप ने बताया कि उनके परिवार में कुल पाँच सदस्य हैं पति हरिसिंह, बेटा अभिनव जो 9वीं कक्षा में पढ़ता है, बेटी अनुप्रिया (8वीं कक्षा) और छोटा बेटा अभिषेक जो तीसरी कक्षा में है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार वर्षों से पक्के मकान का सपना देख रहा था, जो अब इस योजना के तहत पूरा होता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री साय ने गांव की एक अन्य हितग्राही श्रीमती लूदरी कश्यप के घर का भी सर्वेक्षण किया। उन्होंने स्वयं ‘आवास प्लस 2024 (2.0)’ मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से सर्वे किया। इस दौरान लूदरी कश्यप ने भावुक होकर कहा कि बरसों से पक्के मकान का सपना देखा था, आज वह साकार होता दिख रहा है। यह मेरे लिए बेहद भावुक क्षण है। लूदरी कश्यप ने यह भी साझा किया कि बरसात के दिनों में कच्चे घर में सांप का डर और घर की मरम्मत पर होने वाले खर्च से वे परेशान रहती थीं। उन्होंने कहा कि अब इस योजना से उन्हें इन सभी समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। श्रीमती लूदरी कश्यप ने बताया कि उनके साथ पति मनबोध कश्यप, बहू श्रीमती करुणा कश्यप, पुत्र ईश्वर कश्यप और पोता रहते हैं। लूदरी कश्यप ने कहा कि उनका पूरा परिवार मजदूरी पर निर्भर है और सीमित आय के चलते पक्के मकान का निर्माण संभव नहीं हो पा रहा था। उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि अब उनका एक सुरक्षित और स्थायी पक्का मकान का सपना जल्द ही पूरा होगा। ग्राम पंचायत घाटपदमपुर की कुल जनसंख्या 2,078 है, जिसमें वर्तमान में 583 परिवार निवासरत हैं। इस पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पूर्व में स्थायी प्रतीक्षा सूची के आधार पर 11 परिवारों को आवास की स्वीकृति दी गई थी, जिनके मकानों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। महतारी वंदन योजना बनी सहारा मुख्यमंत्री साय को ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि उन्हें राज्य सरकार की महतारी वंदन योजना का भी लाभ मिल रहा है। इस योजना से उन्हें आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है, जिससे वे अपने दैनिक खर्चों के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा और भविष्य के लिए भी कुछ बचत कर पा रहे हैं। हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार : उपमुख्यमंत्री शर्मा उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट लक्ष्य है कि देश के हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिले, जिसमें पक्का मकान एक बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस संकल्प के साथ कार्य कर रही है कि कोई भी पात्र नागरिक सरकार की योजनाओं से वंचित न रहे। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में 2024-25 के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत कुल 11,50,315 मकानों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 9,41,595 मकानों की पहले ही स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनमें से 1,78,476 मकान पूर्ण रूप से निर्मित हो चुके हैं और शेष निर्माणाधीन हैं। अब तक कुल 3,59,037 लाभार्थियों को आवास मिल चुका है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हुए लाभार्थी स्वयं भी मोबाइल ऐप के जरिए अपनी जानकारी अपलोड कर सकेंगे। इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा GRIH पोर्टल भी विकसित किया गया है। इस अवसर पर वनमंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, विधायक जगदलपुर किरण देव, विधायक चित्रकोट विनायक गोयल, नगर निगम जगदलपुर के महापौर संजय पाण्डे … Read more

संपत्ति कर जमा करने दी 30 दिनों की विशेष छूट, 30 अप्रैल तक कर सकते हैं जमा

सभी कलेक्टरों, नगर निगमों के आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को विभाग ने जारी किया परिपत्र रायपुर राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नगरीय निकायों में वित्तीय वर्ष 2024-25 के संपत्ति कर और विवरणी जमा करने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट प्रदान की है। अब ये 30 अप्रैल 2025 तक जमा किए जा सकते हैं। राज्य शासन ने सभी कलेक्टरों, नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को इस संबंध में परिपत्र जारी किया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने परिपत्र में कहा है कि नगरीय निकायों में संपत्तिकर तथा विवरणी जमा करने के लिए निर्धारित अंतिम तिथि 31 मार्च 2025 निर्धारित है। इस वर्ष भी संपत्ति कर तथा विवरणी जमा करने के लिए अंतिम तिथि 31 मार्च 2025 निर्धारित है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में लोकसभा निर्वाचन कार्य, निकायों का परिसीमन कार्य, मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य तथा स्थानीय निकायों के निर्वाचन आदि में आचार संहिता भी प्रभावी रही। इन कार्यों में निकायों के अधिकारी-कर्मचारी भी संलग्न रहे। फलस्वरूप राजस्व आय संग्रहण की कार्यवाही प्रभावित हुई है। विभाग ने राजस्व संग्रहण के कार्यों के प्रभावित होने के मद्देनजर वर्ष 2024-25 के संपत्ति कर तथा विवरणी जमा करने के लिए अंतिम तिथि में 30 दिनों की विशेष छूट प्रदान करते हुए इसके लिए 30 अप्रैल 2025 की अंतिम तिथि निर्धारित की है। नगरीय प्रशासन विभाग ने परिपत्र के माध्यम से निकाय के कर्मचारियों द्वारा घर-घर जाकर संपत्ति कर संग्रहण करने एवं नागरिकों को ऑनलाइन (Online) भुगतान के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने सभी नगरीय निकायों में इनका अनुपालन सुनिश्चित करते हुए कर संग्रहण के लिए किए गए कार्यों से शासन को अवगत कराने के भी निर्देश दिए हैं।

रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर समेत कई जिलों में प्लाट, मकान, दुकान खरीदना हो जाएगा महंगा, कलेक्टर गाइडलाइन में होगी बढ़ोतरी

रायपुर नया वित्तीय वर्ष शुरू हो गया है, लेकिन जमीन खरीदने के लिए नया कलेक्टर दर अभी लागू नहीं किया गया है. जिलों से कलेक्टर गाइडलाइन तय करने के रिपोर्ट मंगाई गई है. इसमें रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर समेत कई जिलों में 100% तक रेट बढ़ाने की बात सामने आ रही है. इसके लागू होने पर आम आदमी के लिए प्लाट के साथ मकान-दुकान खरीदना महंगा हो जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, जिलों से आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2018-19 से जमीन की सरकारी कीमत नहीं बढ़ी है. इसमें 5 साल में रेट 30% तक कम भी रहे. इस वजह से सरकारी रेट और बाजार भाव में बड़ा अंतर आ गया है. हर शहर में जमीन की कीमत बेतहाशा बढ़ गई. लेकिन शासकीय दस्तावेजों में कीमत अब तक कम है. इस अंतर को खत्म करने के लिए ही नई गाइडलाइन जारी करने की तैयारी है. सालों से सरकारी कीमत नहीं बढ़ने की वजह से इस बार गाइडलाइन तय करने के लिए खासी मशक्कत की जा रही है. जिलों से प्राप्त रिपोर्ट को मूल्यांकन समिति परखेगी और अपनी सिफारिशें देगी. यही वजह है कि 2025- 26 के लिए नई गाइडलाइन इस बार 1 अप्रैल के बजाय थोड़ी देरी से जारी होगी. रायपुर के आउटर में बढ़ सकते हैं रेट कलेक्टर गाइडलाइन में रायपुर में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर आउटर एरिया में देखने को मिल सकता है. इसके बाद सेजबहार, सड्डू, कचना, संतोषीनगर, पचपेड़ीनाका, रिंग रोड, मठपुरैना, भाठागांव, कुम्हारपारा, शीतलापारा, ट्रांसपोर्ट नगर, सरोना, बीरगांव, चंदनीडीह, तरुण नगर, बोरियाकला, बोरियाखुर्द समेत कई इलाकों में भी जमीन मकान खरीदना महंगा हो जाएगा. रजिस्ट्री खर्च में भी होगी बढ़ोतरी कलेक्टर दर में बढ़ोतरी का सीधा असर रजिस्ट्री पर पड़ेगा. किसी भी जमीन की रजिस्ट्री पर स्टांप ड्यूटी 5.5 फीसदी अदा करनी पड़ती है. महिलाओं को इसमें आधा फीसदी की छूट है. रजिस्ट्री के दौरान एक प्रतिशत पंचायत उपकर और एक प्रतिशत निगम ड्यूटी भी अदा करनी होती है. माना जाता है कि जमीन की खरीदी पर खरीदने वाले को -स्टॉप, रजिस्ट्री शुल्क और उपकर पर लगभग 10 फीसदी खर्च करना पड़ता है. इस हिसाब से जमीन की दर बढ़ने के इन पर खर्च बढ़ेगा. अपना रहे मध्यप्रदेश और तेलंगाना का मॉडल पंजीयन विभाग की टीम ने हाल ही में मध्यप्रदेश और तेलंगाना के रजिस्ट्री मॉडल का अध्ययन किया है. मध्यप्रदेश में भी बाजार और सरकारी भाव में अंतर आने की वजह से 150% तक रेट बढ़ाए गए हैं. तेलंगाना के हर जिले में कलेक्टर गाइडलाइन औसतन 50% तक बढ़ाई गई है. जमीन की सरकारी कीमत बढ़ने के बाद भी रियल एस्टेट के कारोबार में उछाल आया. इस रिपोर्ट के आधार पर भी अफसरों ने जमीन की कीमत बढ़ाने की अनुशंसा की है.

बस्तर अंचल के सिंचाई के कार्यों में आएगी तेजी : मुख्यमंत्री साय

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर संभाग को बड़ी सौगात दी है। उन्होंने जगदलपुर में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय का शुभारंभ किया। इस कार्यालय के प्रारंभ होने से बस्तर संभाग के सभी सातों जिलों के विभागीय कामकाज में काफी सुविधा होगी। जल संसाधन से संबंधित निर्माण कार्यों के सर्वेक्षण, डीपीआर निर्माण और तकनीकी स्वीकृति में तेजी आएगी। पहले इन कार्यों की स्वीकृति के लिए रायपुर जाना पड़ता था। अब ये काम संभागीय मुख्यालय बस्तर में ही हो सकेंगे। जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप के विशेष पहल से शुरू हुए जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता नवीन कार्यालय में विभिन्न स्तरों पर अधिकारी और कर्मचारी की नियुक्ति के लिए भी बजट में स्वीकृति दी गई है। वर्तमान में यह कार्यालय जगदलपुर के अधीक्षण अभियंता कार्यालय इंद्रावती परियोजना मंडल भवन के ऊपरी तल में संचालित हो रहा है। मुख्य अभियंता जल संसाधन कार्यालय के शुभारंभ अवसर पर उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, जल संसाधन मंत्री  केदार कश्यप, सांसद बस्तर  महेश कश्यप, विधायक जगदलपुर  किरण सिंह देव, विधायक चित्रकोट विनायक गोयल, नगर निगम महापौर संजय पांडेय एवं जिला पंचायत अध्यक्ष वेदमती कश्यप, वित्त आयोग के अध्यक्ष निवास राव मद्दी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, जल संसाधन विभाग के प्रभारी मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के. एस. भंडारी और जल संसाधन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।

घर के बाहर बैठे 6 लोगों को ट्रैक्टर ने कुचला, 2 की मौत, 4 की हालत गंभीर

दुर्ग छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. जेवरा सिरसा चौकी क्षेत्र के ग्राम बेलौदी में एक ट्रैक्टर चालक ने घर के बाहर बैठे 6 लोगों को कुचल दिया. इस हादसे में 1 बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि अस्पताल ले जाते समय 1 महिला ने भी दम तोड़ दिया. वहीं परिवार 4 घायल सदस्यों का उपचार जिला अस्पताल में जारी है. इस घटना के बाद ग्रामीणों में काफी आक्रोश है. उनका कहना है कि अगर समय पर सहायता मिलती, तो उनकी जान बचाई जा सकती थी. पुलिस के अनुसार, गर्मी के चलते पीड़ित परिवार की महिलाएं और बच्चे रात में खाना खाने के बाद घर के बाहर बैठे हुए थे. इसी दौरान एक ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर सड़क से उतर आई और उन्हें कुचल दिया. इस हादसे 8 वर्षीय बच्ची संतोषी निषाद की मौत हो गई जबकि 55 वर्षीय सरस्वती देशमुख ने अस्पताल ले जाते रास्ते में दम तोड़ दिया. वहीं 4 लोग घायल हो गए. घटना के बाद ग्रामीणों ने तुरंत ट्रैक्टर चालक को पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया. बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर चालक नशे में धुत था, इसके चलते वह वाहन को नियंत्रित नहीं कर सका. वहीं इस हादसे के बाद गुस्साये लोगों ने रास्ता जमकर विरोध प्रकट किया. पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है. इस घटना लोग को लेकर अभी भी गांव में तनाव का माहौल है.

बाबा साहब का जीवन पूरे समाज के लिए जन जागरण का इतिहास रहा है..जिला पंचायत अध्यक्ष

एमसीबी आज डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती एवं सामाजिक समरसता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के आदेशानुसार जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डी. राहुल वेंकट निर्देशानुसार और प्रभारी जिला पंचायत सीईओ  नितेश उपाध्यक्ष के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई, जिसमें जनपद सदस्य, सरपंच गण और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्य समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती यशवंती सिंह मुख्य अतिथि थीं, जबकि जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजेश साहू विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस दौरान विभिन्न समाजों के प्रमुखों को मंच पर सम्मानित किया गया। जनपद सदस्य रामजीत लकड़ा ने डॉ. अंबेडकर की जयंती पर सामाजिक समरसता और न्याय की भावना को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने ‘मोर दुवार साय सरकार’ जैसे अभियानों को ग्राम विकास के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया। जनपद सदस्य अनीता चौधरी ने बाबा साहब के संघर्ष और उनके द्वारा दिए गए समानता, शिक्षा और अधिकार के सिद्धांतों को याद किया। जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजेश साहू ने कहा कि बाबा साहब ने अपने जीवन में भेदभाव और अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया, और उनका यह संघर्ष आज भी समाज को प्रेरणा देता है। वही जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती यशवंती सिंह ने भी इस अवसर पर बाबा साहब के योगदान की सराहना की और उनके विचारों को समाज के जागरण के रूप में बताया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत कार्यरत पंचायत एंबेसडरों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया और जिन पंचायतों में एंबेसडर नियुक्त नहीं थे, वहां उपयुक्त प्रतिनिधियों की नियुक्ति की गई। कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि अटल पंचायत डिजिटल सुविधा केंद्र की स्थापना थी, जिसमें जिले के तीनों विकासखंडों में से 19 ग्राम पंचायतों के सरपंचों और CSC सेवा प्रदाताओं के बीच एमओयू हस्ताक्षर किए गए जिसमें सभी जो काम तहसील में होता था वह काम अब ग्राम पंचायत  में  ही होगा। इसमें महतारी वंदन योजना की पैसा भी ग्राम पंचायत स्तर में मिलेगा । इन डिजिटल केंद्रों का औपचारिक शुभारंभ 24 अप्रैल को पंचायती राज दिवस पर किया जाएगा। इसके साथ ही “मोर दुवार साय सरकार” महाअभियान की घोषणा की गई, जो 15 से 30 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण पर विशेष पखवाड़ा आयोजित किया जाएगा, जिसमें हितग्राहियों को योजना की प्रक्रिया से अवगत कराकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र परिवार लाभ से वंचित न रह जाए। जल संरक्षण के महत्व पर भी चर्चा की गई और उपस्थित जनों को जल संवर्धन के प्रति जागरूक किया गया। वही कार्यक्रम छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से सामाजिक समरसता, ग्राम विकास और जल संरक्षण जैसे विषयों पर प्रदेशवासियों को प्रेरित किया। उन्होंने वर्षा जल संचयन, नल का उपयोग बंद करने और पानी की बर्बादी को रोकने के उपायों पर जोर दिया। इस अवसर पर राष्ट्रीय जल मिशन के तहत सभी उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को जल शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम में अन्य प्रमुख अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रही। इस बैठक में जनपद सदस्य अनिता सिंह, प्रिया, उजीत नारायण सिंह, रामजीत लकड़ा, सरपंच सोनू किन्नर, NRLM अधिकारी सिमेंद्र सिंह, जिला समन्वयक  राजेश कुमार जैन, ई डिस्टिक मैनेजर नारायण सिंह पोर्ते, अभीषेक गुप्ता, तीनों विकासखण्ड के सरपंच और जनप्रतिनिधी  सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे ।  

जनदर्शन में आए 26 आवेदन, कलेक्टर ने विभागों को त्वरित निराकरण करने के दिए निर्देश

एमसीबी कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने आज कलेक्ट्रेट कार्यालय में जनदर्शन के माध्यम से आम नागरिकों की समस्याओं को सुना। जिले के ग्रामीण जन और नागरिकों ने जनदर्शन में अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं को सीधे कलेक्टर के समक्ष रखा। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को प्राप्त सभी आवेदनों को प्राथमिकता के साथ शीघ्रता से समय-सीमा में निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। आज की जनदर्शन में कुल 26 आवेदन प्राप्त हुए। इस जनदर्शन में आवेदक देवीदीन निवासी सेमरा भूमि के संबंध में, सुशीला कोठारी निवासी रापाखेरवा मोहल्ले से निकल रहे नालियों के गंदे पानी के संबंध में, रामअवतार निवासी झगराखण्ड नक्शा सुधारे जाने के संबंध में, सूरज कुमार साहू रोजगार दिलाये जाने के संबंध में, राजरूप निवासी कुवाँरी नियम एवं शासन द्वारा असाहय किया गया के संबंध में, बृजमोहन सिंह निवासी चनवारीडांड अधिकारी द्वारा पूर्वाग्रह होने के कारण आवश्यक कार्यवाही नही किये जाने के संबंध में, रामनाथ निवासी लरकोड़ा पट्टा निरस्त कराने के संबंध में, जगई निवासी लरकोड़ा पट्टा निरस्त करने के संबंध में, रेणु यादव निवासी मनेन्द्रगढ़ अतिक्रमण हटाने के संबंध में, धन सिंह निवासी चनवारीडांड भूमि के संबंध में, बसती बाई निवासी चंदेला भूमि के संबंध में, जागेश्वर निवासी ठिसकोली भूमि के संबंध में, पन्नेलाल सिंह निवासी लवाहोरी भूमि के संबंध में, रमाशंकर गुप्ता निवासी मनेन्द्रगढ़ भूमि के संबंध में, अनिल साहू निवासी बरमपुर गिरफ्तार किये जाने के संबंध में, विरेन्द्र कुमार निवासी मनेन्द्रगढ़ भूमि के संबंध में, रामनारायण निवासी दर्रीटोला दोषियों के ऊपर अपराधिक मामला  कायम करने के संबंध में, सविता साहू निवासी लोहारी नामांतरण प्रक्रिया पर रोक लगाने के संबंध में, रामनारायण निवासी दर्रीटोला भूमि के संबंध में, रामचरण निवासी मनेन्द्रगढ़ भूमि हड़पने के संबंध में, मधु बर्मन निवासी आमाखेरवा कुछ निवासियों द्वारा झूठी शिकायत करने के संबंध में,गणेश प्रसाद निवासी मनेन्द्रगढ़ भू-मुआवजा राशि न मिलने के संबंध में, अनिरूद्ध साहू निवासी सेंधा भूमि के संबंध में, मधु बर्मन निवासी मनेन्द्रगढ़ बेसहारा पशुओं को रखे जाने के संबंध में, सीमा तिवारी निवासी चिरमिरी योजना के तहत लोन देने से मना कर दिये जाने के संबंध में, लिबिन कूजूर निवासी केवटी भूमि के संबंध में, अपनी शिकायत लेकर उपस्थित हुए थे। कलेक्टर ने प्राप्त सभी आवेदनों को पूरी गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को उचित कार्यवाही करते हुए त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय दो दिवसीय बस्तर प्रवास पर पहुंचे जगदलपुर

जगदलपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के जगदलपुर पहुंचने पर मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने आत्मीय स्वागत किया। साय दो दिवसीय बस्तर प्रवास पर जगदलपुर पहुंचे। उनके साथ उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी पहुंचे। मुख्यमंत्री साय बस्तर के विकास के लिए रोडमैप तैयार करने हेतु वहां के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ विचार मंथन करेंगे। बस्तर में कृषि पशुपालन, मछली पालन को बढ़ावा देने के साथ ही बस्तर में औद्योगिकीकरण और रोजगार के अवसरों के निर्माण और पर्यटन विकास की संभावनाओं के साथ ही युवाओं के रोजगार से जोड़ने के लिए कौशल विकास से संबंधित कार्ययोजना पर चर्चा करेंगे। अगले दिन मुख्यमंत्री साय बस्तर संभाग में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की समीक्षा भी करेंगे।   मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री साय का वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद बस्तर  महेश कश्यप, विधायक जगदलपुर किरण देव, विधायक चित्रकोट विनायक गोयल, छत्तीसगढ़ राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, महापौर संजय पाण्डे सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वागत किया।

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल पंप के लिए लाइसेंस की जरूरत खत्म

रायपुर,  छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोलियम रिटेल आउटलेट्स यानी पेट्रोल पंप के लिए राज्य स्तर पर लाइसेंस की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। यह बदलाव 14 नवंबर 2024 को खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से जारी एक अधिसूचना के जरिए लागू किया गया है। अब पेट्रोल पंप खोलने के लिए व्यवसायियों को सिर्फ केंद्रीय पेट्रोलियम अधिनियम के नियमों का पालन करना होगा। पहले की दोहरी अनुमति की प्रक्रिया को हटाकर इसे आसान बना दिया गया है। क्या बदला और क्यों है यह अहम पहले पेट्रोल पंप शुरू करने के लिए व्यवसायियों को कलेक्टर के माध्यम से खाद्य विभाग से क्रय विक्रय का लाइसेंस प्राप्त करना होता था। प्रत्येक वर्ष अथवा तीन वर्ष में एक बार लाइसेंस का रिन्यूवल कराना होता था। राज्य शासन और केंद्र, दोनों जगह से अनुमति लेने की दोहरी प्रक्रिया से समय और पैसा दोनों खर्च होते थे, साथ ही कागजी कार्रवाई भी बढ़ जाती थी। अब केवल केंद्र के नियमों का पालन करना काफी होगा। इससे व्यवसायियों को राहत मिलेगी और पेट्रोल पंप खोलने की प्रक्रिया तेज और सस्ती हो जाएगी। यह कदम छत्तीसगढ़ में व्यवसाय को बढ़ावा देने और नियमों को सरल बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव है। व्यवसायियों को कैसे होगा फायदा अब कम कागजी कार्रवाई और एक ही स्तर की अनुमति से पेट्रोल पंप जल्दी शुरू हो सकेंगे। नए व्यवसायी, खासकर छोटे उद्यमी और तेल कंपनियां, बिना ज्यादा परेशानी के अपना काम शुरू कर सकेंगे। यह सुधार ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में पेट्रोल पंप खोलने को बढ़ावा देगा, जहां अभी ईंधन की पहुंच कम है। राज्य और जनता को क्या लाभ इस बदलाव से छत्तीसगढ़ में ईंधन की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे लोगों को पेट्रोल-डीजल आसानी से मिल सकेगा। खासकर उन इलाकों में, जहां अभी पेट्रोल पंप कम हैं, वहां सुविधा बेहतर होगी। साथ ही, नए पेट्रोल पंप खुलने से राज्य में निवेश बढ़ेगा और बुनियादी ढांचे का विकास होगा। यह सरकार के उस लक्ष्य को भी पूरा करता है, जिसमें व्यवसाय करने में आसानी और आर्थिक विकास पर जोर दिया गया है। छत्तीसगढ़ बन रहा व्यवसाय के लिए आकर्षक मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में व्यवसायों के लिए अनुकूल माहौल बनाने को लेकर गंभीर है। नियमों को सरल करके और अनावश्यक बाधाओं को हटाकर राज्य उद्योग, व्यवसाय को सहूलियत और निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है। इससे न सिर्फ व्यवसायियों को फायदा होगा, बल्कि राज्य की जनता को भी बेहतर सेवाएं मिलेंगी। छत्तीसगढ़ सरकार के इस निर्णय से पेट्रोल पंप खोलना आसान हो गया है। यह कदम न केवल सभी क्षेत्रों में ईंधन की पहुंच बढ़ाएगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा।

अपर आयुक्त मनरेगा ने की ग्राम लाई के स्वच्छाग्राहियों के कार्य की सराहना

यूजर चार्ज एवं प्रोत्साहन राशि से ग्रामीण महिलाएं बढ़ रही है आत्मनिर्भरता की ओर एमसीबी स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत महात्मा गांधी नरेगा योजना से समन्वित होकर चल रहे स्वच्छता प्रयासों का निरीक्षण मनरेगा के अपर आयुक्त श्री अशोक चौबे के द्वारा किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ग्राम पंचायत सेमरा अंतर्गत नागपुर थाना क्षेत्र में मनरेगा अभिसरण से निर्मित सामुदायिक शौचालय का अवलोकन किया। इसके साथ ही उन्होंने ग्राम पंचायत लाई में निर्मित सेग्रीगेशन शेड का भी जायजा लिया, जहां स्वच्छाग्राही समूह द्वारा किए जा रहे डोर टू डोर अपशिष्ट संग्रहण और पृथक्करण कार्य की उन्होंने सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान के तहत यह कार्य न केवल ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना रहा है, बल्कि महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक मजबूत कदम है। स्वच्छाग्राही समूह की महिलाओं ने बताया कि वे सप्ताह में दो दिन नियमित रूप से प्रत्येक घर से कचरा संग्रहण का कार्य करती हैं। इसके लिए प्रति परिवार 20 रुपये यूजर चार्ज के रूप में प्राप्त होता है, साथ ही ग्राम पंचायत के माध्यम से उन्हें 2900 रुपये प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। इसके अतिरिक्त वे एकत्र किए गए सूखे कचरे का विक्रय कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रही हैं। एक स्वच्छाग्राही महिला ने बताया कि इस कार्य के माध्यम से ग्राम पंचायत की छह महिलाओं को स्थायी स्वरोजगार प्राप्त हुआ है, जिससे उन्हें अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सुविधा हो रही है। अब वे आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार की आर्थिक सहायता कर पा रही हैं। अपर आयुक्त श्री चौबे ने कहा कि इस प्रकार के प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने के साथ ही स्वच्छता को जन आंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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