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प्रदेश को गर्व का पल: मुंगेली की होनहार सुप्रिया बनीं भारतीय सेना की लेफ्टिनेंट

बिलासपुर मुंगेली जिले के ग्राम टेढ़ाधौरा की रहने वाली सुप्रिया ठाकुर का चयन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद के लिए हुआ है. सुप्रिया का चयन SSC (W) Tech-66 Entry के माध्यम से हुआ है. उन्हें 17 एसएसबी बोर्ड, बेंगलुरु से रिकमेंडेशन मिला है. खास बात यह है कि सुप्रिया ने इलेक्ट्रॉनिक्स वैकेंसी में ऑल इंडिया रैंक-4 हासिल कर देशभर में शानदार प्रदर्शन किया है. सुप्रिया ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जोसेफ कॉन्वेंट हायर सेकेंड्री स्कूल, तारबहार, बिलासपुर से पूरी की. इसके बाद उन्होंने चौकसे इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की. सुप्रिया एनसीसी ‘C’ सर्टिफिकेट भी प्राप्त कर चुकी हैं, और इसी दौरान उन्हें भारतीय सेना का एक्सपोजर मिला, जिससे उनके भीतर देशसेवा का सपना और मजबूत हुआ. सुप्रिया ने बताया कि बचपन से ही उनके मन में सेना में ऑफिसर बनकर देश की सेवा करने की इच्छा थी. इस सफलता में उनके माता-पिता और भाई का बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया. सुप्रिया के पिता वैदेही शरण सिंह श्रीनेत और माता संतोषी सिंह श्रीनेत हैं. परिवार मूल रूप से मुंगेली जिले के ग्राम टेढ़ाधौरा का निवासी है, जबकि सुप्रिया की पढ़ाई बिलासपुर में हुई. सुप्रिया की इस उपलब्धि पर पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है. वहीं उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भी सुप्रिया ठाकुर को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद पर चयनित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं. मुंगेली की यह बेटी अब ट्रेनिंग एकेडमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में देशसेवा का संकल्प पूरा करेंगी. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, लगन और सपने बड़े हों, तो गांव से निकलकर भी देश की शान बना जा सकता है.

हाईकोर्ट ने रद्द की पति की चार साल की सजा, ‘पति-पत्नी का विवाद आत्महत्या का उकसावा नहीं’

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने (धारा 306 आईपीसी) के एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 4 साल की सजा को निरस्त कर दिया है. न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकलपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आत्महत्या के लिए उकसावे के आवश्यक तत्व साबित करने में असफल रहा है. यह मामला जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा थाना क्षेत्र का है. आरोपी बसंत कुमार सतनामी के खिलाफ आरोप था कि उसकी पत्नी टिकैतिन बाई ने विवाह के करीब चार वर्ष बाद कथित प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली. ट्रायल कोर्ट (द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, एफटीसी जांजगीर) ने 31 जुलाई 2007 को आरोपी को धारा 306 आईपीसी के तहत दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष का सश्रम कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण अज्ञात बताया गया. डॉक्टर ने जिरह में स्वीकार किया कि मृत्यु का कारण उल्टी-दस्त से हुई एस्फिक्सिया भी हो सकता है. एफएसएल रिपोर्ट पेश नहीं की गई. गवाहों के बयानों में विरोधाभास रहे. कुछ ने जहर, कुछ ने शराब सेवन और कुछ ने उल्टी-दस्त से मौत की बात कही. अदालत ने कहा कि केवल पति-पत्नी के बीच विवाद या सामान्य कलह को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता, जब तक कि स्पष्ट रूप से उकसावे या साजिश का प्रमाण न हो. सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि धारा 306 के तहत दोषसिद्धि के लिए स्पष्ट आपराधिक मंशा और प्रत्यक्ष उकसावे का प्रमाण आवश्यक है. मात्र प्रताड़ना या पारिवारिक विवाद पर्याप्त नहीं हैं. हाई कोर्ट ने कहा कि, अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि मृतका की मौत आत्महत्या थी या आरोपी ने उसे आत्महत्या के लिए उकसाया. ऐसे में ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई दोषसिद्धि टिकाऊ नहीं है. अदालत ने आरोपी को बरी करते हुए उसकी सजा रद्द कर दी.

सिरीमकेला में सामुदायिक भवन बनाने की घोषणा, CM साय हुए प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल

जशपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दुलदुला विकासखंड में ग्राम सिरीमकेला में नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए. मुख्यमंत्री ने सिरीमकेला में सामुदायिक भवन बनाने की घोषणा की. मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कल हम सब महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाएंगे. इस अवसर पर आज नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होना मेरे लिए परम सौभाग्य की बात है. यहाँ आकर मुझे आध्यात्मिक अनुभूति हो रही है. इस दौरान मुख्यमंत्री ने श्री राम लला दर्शन योजना के तहत प्रदेश के 42000 से ज्यादा तीर्थ यात्रियों को अयोध्या धाम के दर्शन करवाने के बाद भी कहीं. सभी श्रद्धालुओं को उन्होंने महाशिवरात्रि पर्व की बधाई भी 

महाशिवरात्रि पर दी 1.20 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात, CM साय ने की श्री सत्यनारायण बाबा की पूजा

रायगढ़/रायपुर. महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ रायगढ़ प्रवास के दौरान देर रात एक बजे ग्राम कोसमनारा स्थित श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा धाम पहुंचे. उन्होंने भगवान भोलेनाथ एवं श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूरे प्रदेश वासियों को महाशिवरात्रि पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी. इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने जिला खनिज न्यास मद के अंतर्गत 1 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत से विभिन्न विकास कार्यों का विधिवत शिलान्यास किया. प्रस्तावित कार्यों में मुख्य भवन के सामने ग्रेनाइट फर्श सहित शेड निर्माण, आगंतुकों के विश्राम एवं भोजन के लिए शेड निर्माण, शौचालय परिसर भवन का निर्माण तथा पार्किंग क्षेत्र के लिए सीमेंट कांक्रीट सड़क निर्माण शामिल हैं. उन्होंने इन कार्यों के लिए क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि कोसमनारा स्थित यह धाम श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा समाज को सकारात्मक दिशा और आत्मबल प्रदान करती है. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गुरुजनों के आशीर्वाद और जनता के विश्वास के साथ जनकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ रही है. उल्लेखनीय है कि रायगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित यह धाम वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा एवं भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा वर्ष 1998 से कठोर तपस्या में लीन हैं. वर्ष 2003 में उन्हें ‘श्री श्री 108’ की उपाधि प्राप्त हुई, जिसके बाद धाम की ख्याति और अधिक बढ़ी. बताया जाता है कि बाबा ने पत्थरों को एकत्र कर शिवलिंग का स्वरूप निर्मित किया और उसी स्थान को अपनी तपोभूमि बनाया. वर्षा, ग्रीष्म और शीत—तीनों ऋतुओं में खुले स्थान पर रहकर भगवान भोलेनाथ की साधना करना उनकी तपस्या की विशेष पहचान बन चुकी है. इस अवसर पर महापौर जीवर्धन चौहान, नगर निगम सभापति डिग्रीलाल साहू, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, सरपंच, गणमान्य नागरिक, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे.

82 लाख परिवारों के लिए खुशखबरी, छत्तीसगढ़ में एक साथ दो महीने का राशन वितरण

रायपुर  छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने राज्य के राशन कार्ड धारकों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत प्रदेश के लगभग 82 लाख परिवारों को फरवरी 2026 में ही दो महीने (फरवरी और मार्च) का चावल एकमुश्त प्रदान किया जाएगा। खाद्य विभाग (CG News) द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य वितरण प्रणाली को सुचारू बनाना और कार्ड धारकों को अग्रिम राहत पहुँचाना है। सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों और राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को समय पर भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए हैं। किसे मिलेगा कौन सा राशन? इस विशेष वितरण योजना (CG News) के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत आने वाले अंत्योदय और प्राथमिकता राशन कार्ड धारकों को उनकी निर्धारित पात्रता के अनुसार फोर्टिफाइड चावल (पोषण युक्त चावल) दिया जाएगा। वहीं, राज्य योजना के सामान्य एपीएल कार्ड धारकों को उनकी मासिक पात्रता के अनुसार चावल का वितरण होगा। चावल के अतिरिक्त, फरवरी माह के लिए नमक, शक्कर और गुड़ का आबंटन भी जारी किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं को सभी आवश्यक सामग्री एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें। अंत्योदय और प्राथमिकता कार्ड वालों को प्राथमिकता राज्य योजना के दायरे में आने वाले अंत्योदय, प्राथमिकता, एकल निराश्रित और दिव्यांग राशनकार्ड धारकों को फरवरी में ही दो माह की पात्रता का चावल मिलेगा। इन कार्ड धारकों को उनकी निर्धारित मात्रा के अनुसार सामान्य (नॉन-फोर्टिफाइड) चावल का वितरण किया जाएगा। सरकार ने इस आबंटन को एकमुश्त जारी किया है और राशन दुकानों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने गोदामों में पर्याप्त स्टॉक जमा कर लें ताकि किसी भी कार्ड धारक को खाली हाथ न लौटना पड़े। फोर्टिफाइड राइस का भी होगा वितरण राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत आने वाले अंत्योदय और प्राथमिकता कार्ड धारकों को उनकी नियमित पात्रता के अनुसार फोर्टिफाइड चावल दिया जाएगा। खाद्य विभाग के मुताबिक, इन परिवारों के लिए फरवरी का नियमित कोटा जारी कर दिया गया है। फोर्टिफाइड चावल पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जिसे सरकार कुपोषण से लड़ने के लिए वितरित कर रही है। वितरण की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए स्थानीय स्तर पर टीमें भी गठित की गई हैं। चावल के साथ नमक और शक्कर की भी व्यवस्था केवल चावल ही नहीं, बल्कि अन्य जरूरी खाद्य सामग्री का आबंटन भी जारी कर दिया गया है। सामान्य एपीएल (APL) कार्ड धारकों के लिए फरवरी का मासिक कोटा दुकानों तक भेज दिया गया है। इसके अलावा फरवरी महीने के लिए नमक, शक्कर और गुड़ की मात्रा भी तय कर दी गई है। उचित मूल्य की दुकानों को साफ तौर पर कहा गया है कि वे आबंटन के अनुसार ही सामग्रियों का वितरण करें और पारदर्शिता बनाए रखें। ई-पॉस मशीन से होगा सत्यापन राशन लेने के लिए हितग्राहियों को बायोमेट्रिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। चूंकि इस बार दो महीने का चावल एक साथ मिल रहा है, इसलिए ई-पॉस मशीन में फरवरी और मार्च के लिए अलग-अलग अंगूठा लगाना (बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण) अनिवार्य होगा। खाद्य विभाग के सॉफ्टवेयर में इसके लिए जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं। दुकानदारों को सलाह दी गई है कि वे उपभोक्ताओं को पहले से इसकी जानकारी दे दें ताकि सत्यापन के दौरान समय कम लगे। भंडारण और स्टॉक की स्थिति मजबूत खाद्य विभाग ने आश्वस्त किया है कि नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) के गोदामों और उचित मूल्य की दुकानों में अनाज का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सरकार ने वितरण की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए विशेष टीम तैनात की है जो रोजाना स्टॉक और वितरण की रिपोर्ट चेक करेगी। यदि किसी दुकान पर राशन की कमी पाई जाती है, तो वहां तुरंत अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इस फैसले से गरीब परिवारों को अग्रिम राशन मिलने से काफी मदद मिलेगी। बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य राशन वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ई-पास (e-PoS) मशीन के माध्यम से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य रखा है। चूंकि इस बार दो महीने का राशन एक साथ दिया जा रहा है, इसलिए हितग्राहियों को मशीन पर दो बार (पृथक-पृथक) अंगूठा लगाकर प्रमाणीकरण करना होगा। एईपीडीएस (AePDS) सॉफ्टवेयर में इसके लिए आवश्यक तकनीकी बदलाव किए गए हैं। दुकानदारों को भी निर्देशित किया गया है कि वे उपभोक्ताओं को इस प्रक्रिया के बारे में पहले से जानकारी दें ताकि दुकानों पर अनावश्यक भीड़ न लगे। भंडारण और निगरानी के कड़े निर्देश सरकार ने स्पष्ट किया है कि दो महीने का राशन एकमुश्त (CG News) देने के कारण उचित मूल्य की दुकानों में पर्याप्त स्टॉक होना अनिवार्य है। खाद्य विभाग के नियंत्रकों ने पुष्टि की है कि गोदामों से चावल का उठाव तेजी से किया जा रहा है और वितरण की निगरानी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। हालांकि, मिलिंग की धीमी गति के कारण कुछ क्षेत्रों में स्टॉक की चुनौतियों की चर्चा थी, लेकिन विभाग ने दावा किया है कि वितरण में कोई बाधा नहीं आएगी और प्रत्येक पात्र परिवार को उनका हक समय पर मिलेगा।

8 लाख की धोखाधड़ी मामले में VIP ट्रेड कंपनी के चार आरोपी पकड़े गए, छत्तीसगढ़ में खुलासा

लौदाबाजार  थाना सिटी कोतवाली पुलिस ने ज्यादा रिटर्न का लालच देकर लोगों से ठगी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। ये आरोपी राजस्थान के किशनगढ़ और आसपास के इलाकों से जुड़े थे और उन्होंने वीआईपी ट्रेड नाम की फर्जी कंपनी बनाकर पूरे देश में ठगी का जाल फैलाया था। इस मामले में एक शिकायतकर्ता से ही 8 लाख 6 हजार 640 रुपये की ठगी हुई है। लेकिन, पुलिस को संदेह है कि इससे कहीं ज्यादा लोग प्रभावित हो सकते हैं। श्याम कॉलोनी बलौदाबाजार के निवासी रामचंद्र वस्त्रकर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि जुलाई 2025 के अंत से अक्टूबर 2025 के मध्य तक आरोपियों ने संपर्क किया और वीआईपी ट्रेड कंपनी में निवेश करने पर हर महीने 10 से 12 प्रतिशत की गारंटी के साथ मुनाफा मिलने का वादा किया। कहा गया कि पैसों में रोजाना ग्रोथ होगी और जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सकता है। इस झांसे में आकर रामचंद्र ने कुल 8 लाख 6 हजार 640 रुपये कंपनी में जमा कर दिए। जब उन्होंने पैसा वापस मांगा तो आरोपियों ने कोई जवाब नहीं दिया और बाद में अपने मोबाइल नंबर बंद कर लिए। इससे उन्हें ठगी का पता चला। इस शिकायत पर 13 फरवरी 2026 को थाना सिटी कोतवाली में अपराध क्रमांक 307/2025 दर्ज किया गया। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(2) और 3(5) के तहत मामला बनाया गया है। पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने थाना प्रभारी और साइबर सेल को सख्त निर्देश दिए। टीम ने तकनीकी जांच और विश्लेषण से पता लगाया कि ठगी का पूरा नेटवर्क राजस्थान से संचालित हो रहा था। एक मुख्य आरोपी अजमेर के केंद्रीय कारागार में पहले से बंद था। न्यायालय से प्रोडक्शन वारंट लेकर पुलिस टीम ने राजस्थान जाकर चारों आरोपियों को हिरासत में लिया। पूछताछ में सभी ने वीआईपी ट्रेड कंपनी बनाकर ज्यादा रिटर्न का झांसा देकर लोगों से ठगी करने की बात कबूल की। 13 फरवरी 2026 को इन आरोपियों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया पूरी की गई। मामला अभी जांच के दौर में है। पुलिस ने अपील की है कि यदि किसी अन्य व्यक्ति के साथ भी वीआईपी ट्रेड कंपनी ने ठगी की हो या निवेश के नाम पर पैसे मांगे गए हों, तो वह तुरंत थाना सिटी कोतवाली या स्थानीय साइबर सेल में संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज कराए। गिरफ्तार आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं: अब्दुल समद (60 वर्ष), निवासी भिश्ती मोहल्ला, गांधीनगर, किशनगढ़, राजस्थान; लोकेश चौधरी (26 वर्ष), निवासी रामदेव कॉलोनी, किशनगढ़, राजस्थान; कैलाश चौधरी (26 वर्ष), निवासी जाटो का मोहल्ला, थाना नारायणा, जयपुर ग्रामीण, राजस्थान; धीरज गट्टानी (25 वर्ष), निवासी न्यू कॉलोनी, कुचामन सिटी, राजस्थान। पुलिस का कहना है कि ऐसी फर्जी निवेश योजनाओं से बचें और किसी भी अनजान कंपनी में पैसे लगाने से पहले पूरी जांच करें।

सुरक्षा के साथ संवेदनशीलता का संदेश: CRPF 65वीं बटालियन के जनविश्वास अभियान ने ग्रामीणों का जीता भरोसा

गरियाबंद नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ विकास और विश्वास की मजबूत नींव रखने की दिशा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 65वीं बटालियन लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही है। इसी कड़ी में ग्राम छिंदोला स्थित डी/65 बीएन सीआरपीएफ कैंप में सिविक एक्शन कार्यक्रम का प्रभावशाली आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी ने इसे जनविश्वास अभियान का स्वरूप दे दिया। बता दें कि यह आयोजन बटालियन कमांडेंट राधे श्याम सिंह के मार्गदर्शन में तथा उप कमांडेंट सुधेंद्र सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत दवनई सहित आसपास के गांवों से करीब 250 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे स्कूल बैग, कॉपी, पेन, पेंसिल बॉक्स और ज्योमेट्री बॉक्स वितरित किए गए। वहीं युवाओं को खेल गतिविधियों के लिए क्रिकेट किट, वॉलीबॉल, फुटबॉल और बैडमिंटन रैकेट प्रदान किए गए, ताकि वे खेलों के माध्यम से सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकें। ग्रामीण परिवारों को साड़ी, कंबल, मच्छरदानी, सोलर लैंप, कृषि उपकरण तथा दैनिक उपयोग की सामग्री देकर उनकी जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया गया। उप कमांडेंट सुधेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में ग्रामीणों से अपील की कि वे नक्सलियों की भ्रामक और विध्वंसक गतिविधियों से सावधान रहें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत सुरक्षा बलों को दें। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास और शांति स्थापना के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि सिविक एक्शन कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सामग्री वितरण नहीं, बल्कि सुरक्षा बल और स्थानीय जनता के बीच विश्वास, सहयोग और संवाद की मजबूत कड़ी बनाना है। ऐसे कार्यक्रमों से ग्रामीणों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित होते हैं। कार्यक्रम में सहायक कमांडेंट रामानंद प्रसाद, निरीक्षक पीयूष कुमार सिंह, निरीक्षक हरेंद्र कुमार सिंह, सरपंच रश्मिला बाई सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल उनकी जरूरतों को पूरा करते हैं, बल्कि उन्हें यह भरोसा भी दिलाते हैं कि सुरक्षा बल उनके साथ खड़े हैं। क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में सीआरपीएफ की यह पहल एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखी जा रही है।

सर्च ऑपरेशन में सुरक्षा बलों को सफलता, नक्सलियों के छिपाए गए हथियार व IED बरामद

कांकेर कांकेर जिले में सुरक्षा बल के जवानों को बड़ी सफलता हाथ लगी है. सर्चिंग में निकले जवानों को कांकेर नारायण सीमावर्ती क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा डंप किया गया बड़ी मात्रा में हथियार और आईईडी बरामद हुआ है. सुरक्षा बलों की कार्यवाही से नक्सलियों द्वारा भविष्य में घटित की जा सकने वाली बड़ी नक्सली घटना टल गई है. बस्तर रेंज में नक्सलियों को समाप्त करने के लिए सुरक्षाबलों का अभियान लगातार जारी है. आईजी पी सुन्दराज के निर्देशन और एसपी कांकेर निखिल राखेचा के मार्गदर्शन में पुलिस बल के द्वारा नक्सल उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है. अभियान में बीएसएफ डीआईजी ओम प्रकाश प्रभारी राघवेंद्र सिंह सेनानी 94 वीं वाहिनीं बीएसएफ का भी सहयोग मिल रहा है. नक्सल विरोधी अभियान के तहत डीआरजी/ बीएसएफ की संयुक्त टीम सर्चिंग में निकली थी. 13 फरवरी को कांकेर– नारायणपुर सीमावर्ती क्षेत्र में थाना छोटेबेठिया क्षेत्रांतर्गत ग्राम बीनागुंडा के पास नक्सलियों के द्वारा डंप किया गया हथियार, विस्फोटक,नक्सल साहित्य और अन्य सामग्री मिली. सामग्रियों को जब्त करने के साथ थाना छोटेबेठिया में वैधानिक कार्यवाही की जा रही है. जब्त सामग्री बीजीएल लांचर-2, 12 बोर- 2, एयरगन- 1, डायरेक्शन आईईडी-3, टिफिन आईईडी लगभग 5 किग्रा-1, बीजीएल बम-30, 12 बोर राउण्ड -26, बारुद प्लास्टिक पैकेट मे लगभग 2 किग्रा, मल्टी मीटर-1, पटाखा-12 पैकेट, बिजली वायर-2 बंडल, पोच-2, स्पिलंटर – 1 पैकेट

घरेलू विवाद ने लिया हिंसक रूप, पति का पत्नी पर जानलेवा हमला

कोरबा. शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित सीतामणी वैष्णो दरबार बस्ती में घरेलू विवाद ने शनिवार को भयावह रूप ले लिया। एक युवक ने अपनी पत्नी को कमरे में बंद कर धारदार चापड़ से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। पत्नी को बचाने पहुंची उसकी मां और बहन पर भी आरोपित ने वार कर दिया। तीनों महिलाएं गंभीर रूप से घायल हैं, जिनमें पत्नी की हालत नाजुक बताई जा रही है। घटना वैष्णो देवी मंदिर के पास स्थित बस्ती की है। पुलिस के अनुसार आरोपित रामेश्वर साहू का अपनी पत्नी सुकृता साहू से लंबे समय से विवाद चल रहा था। शनिवार को विवाद बढ़ने पर उसने पत्नी को कमरे के भीतर बंद कर दिया और दौड़ा-दौड़ाकर चापड़ से हमला करने लगा। घर से चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग सतर्क हो गए। इसी दौरान आरोपित की मां सावन साहू और बहन निर्मला साहू मौके पर पहुंचीं। दरवाजा नहीं खुलने पर खिड़की तोड़कर अंदर घुसीं, लेकिन आरोपित ने उन पर भी हमला कर दिया। हमले से घर में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल डायल 112 और कोतवाली पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा। चिकित्सकों ने सुकृता साहू की स्थिति गंभीर बताई है। अन्य दोनों महिलाओं का भी इलाज जारी है। निर्मला साहू ने बताया कि वह घर के पास दुकान पर थी। शोर सुनकर पहुंची तो देखा कि उसका बड़ा भाई कमरे में बंद कर भाभी पर वार कर रहा था। काफी कोशिश के बाद भी दरवाजा नहीं खुला, तब खिड़की तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया। बीच-बचाव के दौरान आरोपी ने उन पर भी चापड़ से हमला कर दिया। पहले भी जेल जा चुका है आरोपी पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपित पहले भी पत्नी से मारपीट के मामले में जेल जा चुका है। उस पर पत्नी के चरित्र पर संदेह करने और पैसों की मांग को लेकर विवाद करने के आरोप हैं। कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।  

सड़कों ने घटाई दूरियां, पुलों ने जोड़े सपने—विकास की राह पर गांव

रायपुर. बढ़ी विकास की रफ्तार, दूरवर्ती क्षेत्रों में पहुंच रही विकास की रोशनी सड़कों और पुलों के निर्माण के बाद विकास व समृद्धि के रास्ते अब साफ नजर आने लगे हैं। सरकार ने अंदरूनी और दूरस्थ इलाकों को मुख्य मार्गों से जोड़ने को प्राथमिकता देते हुए बड़े पैमाने पर सड़क और पुल-पुलियों के निर्माण को मंजूरी दी है। इससे जिन इलाकों में पहले आवागमन कठिन था, वहां अब सालभर संपर्क बना हुआ है। लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान हुई है और विकास कार्यों को नई गति मिली है। पिछले दो वर्षों में कांकेर जिले में 61 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से 15 पुलों के काम पूर्ण किए गए हैं। इन पुलों के बनने से जिले के लगभग 100 गांवों और करीब 80 हजार आबादी का सीधा और बारहमासी संपर्क ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय से हो गया है। अब ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और पर्यटन जैसी सुविधाओं तक पहुंचने में पहले जैसी परेशानी नहीं होती। सरकारी योजनाएं भी तेजी से गांवों तक पहुंच रही हैं। आतुरबेड़ा–भैसगांव–निन्ना मार्ग पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मेंढ़की नदी पर बना उच्च स्तरीय पुल इस बदलाव का बड़ा उदाहरण है। इस पुल के कारण सुदूरांचल के लोगों का आवागमन सुगम हुआ है और प्रशासनिक गतिविधियों को भी मजबूती मिली है। सड़क और पुल नेटवर्क के विस्तार से न सिर्फ विकास कार्य तेज हुए हैं, बल्कि माओवाद प्रभावित रहे इलाकों में शासन की पकड़ भी मजबूत हुई है। सड़कों और पुलों के नेटवर्क लगातार मजबूत किए जा रहे हैं। कांकेर जिले के कोने-कोने को राज्य मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग, ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय से जोड़ने पिछले दो वर्षों में 85 करोड़ रुपये की लागत से 9 नए वृहद पुलों को स्वीकृति दी गई है। लोक निर्माण विभाग के सेतु निर्माण संभाग के कार्यपालन अभियंता श्री राजेंद्र सोनकर ने बताया कि बासनवाही–टांहकापार मार्ग पर महानदी पर 28 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत पुल हजारों ग्रामीणों की सुविधा और पर्यटन विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा। सोनपुर–मरोड़ा मार्ग पर बेचाघाट में कोटरी नदी पर 15 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से पुल निर्माण का कार्य प्रगति पर है। इसके पूरा होने से माओवाद प्रभावित माड़ क्षेत्र का सीधा संपर्क स्थापित हो जाएगा। राज्य शासन दूरस्थ अंचलों तक मजबूत सड़कों और पुलों के माध्यम से लोगों की सहूलियतें बढ़ाने तथा दुर्गम एवं सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुंचाने प्रतिबद्धता से काम कर रही है। कांकेर में बन रहे ये पुल सिर्फ कांक्रीट की संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा की ओर बढ़ते कदम हैं। इनके पूरा होते ही जिले के सुदूरवर्ती गांवों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से लाभ मिलेगा। इससे विकास की रफ्तार और तेज होगी।

दुर्घटना में कोबरा बटालियन के जवानों का निधन, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शोकाकुल

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज धमतरी में हुए सड़क हादसे में कोबरा बटालियन के जवानों के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा में समर्पित हमारे जांबाज जवानों का निधन अत्यंत हृदयविदारक है. यह अपूरणीय क्षति है. मुख्यमंत्री साय ने दिवंगत जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने में कोबरा बटालियन के जवानों की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है. मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है. मुख्यमंत्री साय ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति तथा घायल जवान के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को घायल जवान के समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.

महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा संबल, आधुनिक डेयरियों के भ्रमण पर पहुंचे डिप्टी सीएम

रायपुर. गुजरात के बनासकांठा की डेयरी क्रांति से सीख लेने पहुँचा छत्तीसगढ़ का दल छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा एवं वन एवं पर्यावरण मंत्री  केदार कश्यप ने गुजरात के मेहसाणा जिले के बनासकांठा स्थित प्रसिद्ध दूधसागर डेयरी, बनास डेयरी एवं अमूल डेयरी का पशुपालकों एवं बिहान दीदियों के साथ शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान दोनों मंत्रियों ने डेयरी की आधुनिक कार्यप्रणाली, तकनीकी नवाचारों और सहकारी मॉडल का विस्तृत अवलोकन किया।        इस दौरान प्रतिनिधिमंडल को डेयरी के अधिकारियों द्वारा संपूर्ण उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी दी गई। उपमुख्यमंत्री एवं वन मंत्री ने डेयरी प्लांट, बायो-सीएनजी प्लांट, खाद्य तेल इकाई, आटा प्लांट तथा शेरपुरा डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटी का निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं को करीब से समझा।     इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि यह भ्रमण केवल अवलोकन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सीखकर छत्तीसगढ़ में लागू करने का अवसर है। उन्होंने प्रतिभागियों से सफल डेयरी मॉडल, दुग्ध संकलन प्रणाली, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रसंस्करण तकनीक और विपणन व्यवस्था का गहन अध्ययन करने को कहा।         उन्होंने बताया कि इस शैक्षणिक भ्रमण से प्रतिभागियों को संतुलित चारा विकास, उन्नत पशुपालन तकनीक, दुग्ध प्रसंस्करण, डेयरी उत्पाद निर्माण तथा विपणन की व्यवहारिक जानकारी प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सतत प्रयासरत है। बिहान समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, वहीं पशुपालन विभाग द्वारा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और आय संवर्धन के लिए विभिन्न योजनाएँ संचालित की जा रही हैं।        वन, पर्यावरण एवं सहकारिता मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि डेयरी सहकारी मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का सशक्त माध्यम है। यदि इस मॉडल को छत्तीसगढ़ में प्रभावी ढंग से अपनाया जाए तो पशुपालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।    उल्लेखनीय है कि इस शैक्षणिक भ्रमण में 50 सदस्यीय दल ने उन्नत पशुपालन एवं डेयरी प्रबंधन सीखने के लिए भाग लिया है। जिसमें 25 पशुपालक एवं 25 बिहान (एनआरएलएम) समूह की दीदियाँ शामिल है। उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा एवं वन एवं पर्यावरण मंत्री  केदार कश्यप भी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करने के साथ पूरे शैक्षणिक भ्रमण में उनके साथ शामिल हो रहे हैं।

पंचायतों में चलाया विशेष क्रियान्वयन महाअभियान, PM आवास में बिलासपुर जिला बना नंबर वन

बिलासपुर. प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के प्रभावी क्रियान्वयन में जिले ने राज्य स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है. कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देशन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत संदीप अग्रवाल के मार्गदर्शन में जिले ने 40 हजार से अधिक आवास पूर्ण कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है. 12,337 तथा तखतपुर में 7,930 आवास पूर्ण हुए हैं. वतर्मान में 30,983 आवास निर्माणाधीन हैं, जिन्हें समय-सीमा में पूर्ण कराने हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे हैं. अपूर्ण आवासों को शीघ्र पूर्ण कराने के उद्देश्य से 12 फरवरी 2026 को जिले की समस्त ग्राम पंचायतों में विशेष महाअभियान चलाया गया. बिहान केडर की दीदियों सहित एफएलसीआरपी /आरसी, सक्रिय महिला, पशु सखी, कृषि सखी, स्व-सहायता समूह की महिलाओं, आवास मित्र एवं पंचायत सचिवों द्वारा घर-घर संपर्क कर हितग्राहियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने हेतु प्रेरित किया गया. इस अभियान में नारी शक्ति की सक्रिय भागीदारी ने निर्माण कार्य को नई गति प्रदान की है. जिला प्रशासन द्वारा सभी अपूर्ण आवासों को 30 जून 2026 तक पूर्ण कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

पोषण से प्री-स्कूल तक बदलाव, आंगनबाड़ी केंद्रों से सशक्त भारत की नई नींव

रायपुर. भारत का भविष्य जिन नन्हे कदमों पर आगे बढ़ता है, वे आज देशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों में आत्मविश्वास, जिज्ञासा और मुस्कान के साथ नई दिशा पा रहे हैं। कभी केवल पोषण और देखभाल तक सीमित माने जाने वाले आंगनबाड़ी केंद्र आज प्रारंभिक बाल शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक चेतना और ग्रामीण रोजगार के बहुआयामी केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के महासमुंद, धमतरी, मुंगेली और नारायणपुर जैसे जिलों में दिखाई दे रहा यह परिवर्तन अब राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रेरक मॉडल के रूप में स्थापित हो रहा है। नन्हे कदम, सशक्त भारत आंगनबाड़ी केंद्रों का राष्ट्रीय रूपांतरण: शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और रोजगार का समन्वित मॉडल भवन ही शिक्षक: ‘बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड’ की जीवंत अवधारणा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और महिला एवं बाल विकास विभाग के अभिशरण से निर्मित नवीन आंगनबाड़ी भवनों ने Building as Learning Aid (BALA) की अवधारणा को जमीनी स्तर पर साकार कर दिया है।11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित प्रत्येक भवन में दीवारों, फर्श, सीढ़ियों, दरवाजों और खुली जगहों को शिक्षण माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, अंक, आकृतियाँ, दिशाएँ, जीव-जंतु, स्थानीय परिवेश और सामान्य ज्ञान से जुड़ी चित्रकारी बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर प्रदान कर रही है।अब आंगनबाड़ी भवन स्वयं एक शिक्षक बन चुके हैं जहाँ हर दीवार एक पाठशाला है। नन्हे कदम, सशक्त भारत आंगनबाड़ी केंद्रों का राष्ट्रीय रूपांतरण: शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और रोजगार का समन्वित मॉडल धमतरी का बाला मॉडल  प्रारंभिक बाल शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने की दिशा में धमतरी जिले का बाला मॉडल एक उल्लेखनीय उदाहरण बनकर उभरा है। मनरेगा, महिला एवं बाल विकास विभाग (ICDS) और 15वें वित्त आयोग के सहयोग से जिले में 81 बाला आधारित आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण प्रारंभ किया गया है, जिनमें से 51 केंद्र पूर्ण हो चुके हैं।विकासखंड धमतरी के ग्राम उड़ेंना में निर्मित आंगनबाड़ी केंद्र इसका सशक्त उदाहरण है, जहाँ दृश्य-आधारित शिक्षण से विशेष पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग के बच्चे सहज रूप से ज्ञान अर्जित कर रहे हैं। दीवारों पर स्थानीय संस्कृति, गणितीय अवधारणाएँ, भाषा चार्ट, फर्श पर रंग-आकार और सीढ़ियों पर गिनतीकृहर संरचना बच्चों में जिज्ञासा, स्मरण शक्ति और सीखने की रुचि बढ़ा रही है। नन्हे कदम, सशक्त भारत आंगनबाड़ी केंद्रों का राष्ट्रीय रूपांतरण: शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और रोजगार का समन्वित मॉडल शिक्षा के साथ रोजगार का सृजन इन आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण मनरेगा के अंतर्गत होने से एक ओर गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना का विकास हुआ है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण श्रमिकों को स्थायी रोजगार मिला है। मजदूरी से ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और पलायन पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। इस प्रकार आंगनबाड़ी निर्माण केवल बाल विकास का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण का भी सशक्त मॉडल बन गया है। खेल-खेल में शिक्षा से खिलखिलाता बचपन महासमुंद के शहरी सक्षम केंद्रों से लेकर नारायणपुर के सुदूर वनांचल के ग्राम कुंदला तक, आंगनबाड़ी केंद्रों में आया यह बदलाव स्पष्ट दिखाई देता है। रंग-बिरंगी दीवारें, शैक्षणिक चार्ट, कविताएँ, खेल सामग्री और बच्चों की खिलखिलाती हँसी ने आंगनबाड़ी को आधुनिक प्ले-स्कूल जैसा वातावरण प्रदान किया है। बच्चे भाषा, गणित और व्यवहारिक ज्ञान को आनंदपूर्वक सीख रहे हैं और स्वयं उत्साह के साथ केंद्र आ रहे हैं। पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक चेतना का केंद्र आंगनबाड़ी केंद्र आज बच्चों तक सीमित न रहकर गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए भी पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श का प्रमुख केंद्र बन गए हैं।दीवारों पर अंकित संदेश “जितनी अच्छी वजन की रेखा, उतना स्वस्थ बच्चा” और“लड़का-लड़की एक समान”आंगनबाड़ी को सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी मंच भी बना रहे हैं। कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, नोनी सुरक्षा योजना और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रभावी रूप से हो रहा है। इससे माताओं और बालिकाओं के अधिकारों को संस्थागत मजबूती मिल रही है। स्वच्छता, सुरक्षा और सामुदायिक सहभागिता आरओ जल व्यवस्था, स्वच्छ रसोई, खेलघर, पर्याप्त खेल सामग्री और नियमित साफ-सफाई ने आंगनबाड़ी केंद्रों को सुरक्षित और बाल-अनुकूल बनाया है। महतारी समितियों की सक्रिय सहभागिता से बच्चों की उपस्थिति और सीखने की निरंतरता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर सशक्त कदम आंगनबाड़ी केंद्रों का यह रूपांतरण राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर साकार कर रहा है।11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित प्रत्येक आंगनबाड़ी भवन आज बच्चों के सर्वांगीण विकास, महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण रोजगार सृजन का समन्वित मॉडल बन चुका है।आज आंगनबाड़ी केंद्र वास्तव में “बच्चों की पहली पाठशाला” बन गए हैं जहाँ शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और रोजगार एक साथ मिलकर सशक्त, समावेशी और विकसित भारत की मजबूत नींव रख रहे हैं।

ग्राम पंचायत बिलासपुर में सीएससी अटल ई सेवा केन्द्र का शुभारंभ

बिलासपुर टेली लॉ के विशेष कैंप लगाकर ग्रामीणों को किया जागरूक कार्यक्रम की शुरुआत श्री ध्यानचंद सोनी सरपंच ग्राम पंचायत बिलासपुर में फीता काट कर  अटल ई-सेवा केंद्र का शुभारंभ किया गया। सीएससी जिला प्रबंधक श्री राजकुमार कुशवाहा ने बताया कि सीएससी संचालक (विएलई) राजेश कुमार सोनी माध्यम से अब ग्राम पंचायत में बैठकर लोगों को केन्द्र एवं राज्य सरकार की सरकारी सेवाएं सीएससी द्वारा प्रदान की जाएगी। इस अवसर पर सीएससी बैंकिंग टीम से अशीष सिंह, एवं पंचायत रोजगार सहायक, ग्राम पंचायत के पंचगण उपस्थित रहे अतिथियों द्वारा ग्रामीणों को टेली लॉ सेवा के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों को घर बैठे नि:शुल्क कानूनी सलाह सीएससी से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। सीएससी अटल ई-सेवा केंद्र के माध्यम से शासन की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी अब सेवाएं सीधे ग्राम वासियों तक पहुंचाई जाएंगी जैसे आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री मानधन योजना, फार्मर रजिस्ट्री श्रम कार्ड, उज्ज्वला योजना, गैस बुकिंग, रेलवे टिकट, पेंशन योजना, विजली बिल भुगतान, पैन कार्ड,आय, निवास प्रमाण पत्र आदि शासकीय योजनाओं का लाभ भी सीएससी केंद्र के माध्यम से प्रदान किया जाएगा। इस पहल से ग्रामीणों को समय पर गांव में सुविधा और मार्गदर्शन मिल सकेगा। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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