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हैदराबाद अग्निकांड पर मुख्यमंत्री साय ने व्यक्त किया गहरा दुख

रायपुर हैदराबाद के चारमीनार के पास स्थित गुलजार हौज इलाके में रविवार सुबह हुए भीषण अग्निकांड को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मृतकों के प्रति संवेदना और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की है। सीएम विष्णुदेव साय ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, हैदराबाद के चारमीनार के निकट हुए भीषण अग्निकांड में 17 लोगों की असमायिक मृत्यु और कई लोगों के घायल होने का हृदयविदारक समाचार प्राप्त हुआ है। मैं उन सभी दिवंगत आत्माओं के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें। साथ ही इस हादसे में घायल हुए सभी लोगों के शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। बता दें कि यह हादसा गुलजार हौज इलाके में एक रिहायशी और व्यावसायिक उपयोग वाली इमारत में हुआ, जहां आग लगने से 17 लोगों की मौत हो गई और 10 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मृतकों में आठ बच्चे और पांच महिलाएं भी शामिल हैं। यह हादसा हाल के वर्षों में हैदराबाद की सबसे बड़ी त्रासदियों में गिना जा रहा है।

तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर 20 नक्सली गिरफ्तार, भारी मात्रा में हथियार बरामद

सुकमा छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर सुरक्षा बलों के अभियान के बाद भागे 20 हथियारबंद माओवादियों को तेलंगाना पुलिस ने शुक्रवार और शनिवार को मुलुगु जिले से गिरफ्तार किया है। उनके पास से तीन इंसास राइफल, चार एसएलआर, एक 303 राइफल समेत 28 हथियार, दो जिंदा ग्रेनेड, 58 हजार रुपये नकद और अन्य सामान बरामद हुए हैं। गिरफ्तार माओवादियों में पीएलजीए बटालियन-1 के डिप्टी कमांडर कुंजाम लक्खा और पांच एरिया कमेटी सदस्य मरीगला सुमती, मड़कम कोसी, पोड़ियम जोगी, माड़वी सीमा, मुचाकी रंजू सहित 14 अन्य पार्टी सदस्य शामिल हैं। तेलंगाना पुलिस के अनुसार कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर चले अभियान के बाद तलाशी अभियान जारी था। इस दौरान शुक्रवार और शनिवार सुबह वेंकटपुरम थाना क्षेत्र के पालेम परियोजना से छह और वाजेडु व कन्नाईगुड़ेम थाना क्षेत्र से सात-सात माओवादियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि पकड़े गए माओवादी बुर्कापाल (2017), किस्टाराम (2018), मिनपा (2020) और टेकलगुड़ेम (2022) जैसे कई बड़े हमलों में शामिल थे।

आज महाराष्ट्र मंडल में रंगकर्मियों से मुलाकात करेंगे पद्मश्री मनोज जोशी

रायपुर राजधानी रायपुर में मराठी और गुजराती फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने अभिनेता पद्मश्री मनोज जोशी आज महाराष्ट्र मंडल में रंगकर्मियों से मुलाकात करेंगे. इस मौके पर धरसींवा विधायक और छत्तीसगढ़ी फिल्मों के सुपरस्टार अनुज शर्मा और अभिनेता व समाजसेवी योगेश अग्रवाल भी मौजूद रहेंगे. महाराष्ट्र मंडल के वरिष्ठ रंगकर्मी रंजन मोडक ने बताया कि रंग संस्कार महोत्सव के समापन समारोह में मनोज जोशी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं. उन्हें मंडल के 65 साल के इतिहास और गतिविधियों की जानकारी दी गई, जिसके बाद उन्होंने रंगकर्मियों से मिलने की सहमति दी. कार्यक्रम में वे रंगमंच से जुड़े कलाकारों को मार्गदर्शन देंगे और फिल्मों में करियर बनाने की दिशा में जरूरी तैयारियों के बारे में भी बताएंगे. 14 दिसंबर 1965 को जन्मे मनोज जोशी गुजराती, मराठी और हिंदी रंगमंच के जाने-माने और प्रतिष्ठित अभिनेता माने जाते हैं. उन्होंने बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत 1998 में आमिर खान की फिल्म सरफरोश से की, जिसमें उन्होंने बाला ठाकुर की भूमिका निभाई थी. इसके बाद उन्होंने हंगामा, हलचल, दे दनादन, क्योंकि, खट्टा मीठा, भागमभाग, चुप चुप के, फुटपाथ, आन और पेज-3, भूल भुलैया, फिर हेरा फेरी जैसी कई फिल्मों में शानदार अभिनय किया. मनोज जोशी को दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है और 2018 में उन्हें क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के साथ पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया. आज भी वे हंगामा के इंस्पेक्टर वाघमारे, फिर हेराफेरी के कचरा सेठ और भागमभाग के मनुभाई गांधी जैसे किरदारों के लिए दर्शकों के बीच खास पहचान रखते हैं.

गृहमंत्री विजय शर्मा बोले – राहुल गांधी की भूमिका संदिग्ध, मेरे पास है प्रमाण

जगदलपुर छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई जारी है. नक्सलियों की मांद माने जाने वाले कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर सुरक्षा बल एक बड़ा अभियान छेड़े हुए हैं. ऐसे समय में छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पीठ पीछे गड़बड़ी करने का गंभीर आरोप लगाया है. इस अभियान में तेलंगाना सरकार से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के सवाल पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें शक है कि राहुल गांधी “पीठ पीछे गड़बड़” कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि नक्सलवाद देश के सबसे बड़े संकटों में से एक है, और इसमें भी राहुल गांधी की भूमिका संदिग्ध लगती है. मेरे पास इसके प्रमाण मौजूद हैं, जिनके आधार पर मैं यह बात कह रहा हूं. बता दें कि बीजापुर और तेलंगाना सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में 21 दिनों तक चले ऑपरेशन ब्लैक फारेस्ट में 31 वर्दीधारी माओवादी मारे गए. मुठभेड़ों के दौरान 35 हथियार, 450 IED, सैकड़ों बंकर और माओवादियों की तकनीकी इकाइयां भी नष्ट की गई है. 21 अप्रैल से 11 मई के दौरान कुल 21 मुठभेड़ों में 16 वर्दीधारी महिला माओवादी समेत कुल 31 वर्दीधारी माओवादियों के शव और 35 हथियार बरामद किए गए हैं. प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि मुठभेड़ स्थल से बरामद शव प्रतिबंधित और अवैध सीपीआई माओवादी संगठन अंतर्गत पीएलजीए बटालियन नंबर 01, तेलंगाना राज्य समिति, दंडकारण्य विशेष जोनल समिति के माओवादी कैडर्स हैं. इस अभियान में अब तक कुल 216 माओवादी ठिकाने और बंकर नष्ट किए गए. उपरोक्त माओवादी ठिकाने और बंकर से तलाशी अभियानों के दौरान कुल 450 नग आईईडी, 818 नग बीजीएल शेल, 899 बंडल कार्डेक्स, डेटोनेटर और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद किए गए.

घर के सामने से ट्रांसफार्मर हटवाने दी अर्जी, बिजली कंपनी थमा रही डेढ़ लाख तक का बिल

रायपुर गर्मी के दिनों में लोड बढ़ने पर ट्रांसफार्मर में आग लगने का खतरा बना रहता है, और अगर यह ट्रांसफार्मर घर के सामने लगा हो तो घर-परिवार के लिए खतरा बन जाता है. लेकिन ट्रांसफॉर्मर को हटवाना आम लोगों के बस की बात नहीं, क्योंकि बिजली कंपनी हटाने का पूरा खर्चा मांगती है, जबकि मुख्यमंत्री विद्युतीकरण योजना के तहत ऐसे ट्रांसफार्मर निशुल्क शिफ्ट करने का प्रावधान है. पिछले दो साल में निगम में 50 से ज्यादा आवेदन किए गए. लेकिन इनमें से केवल 15 ही आवेदन समिति को भेजे गए. लोगों ने मुख्यमंत्री विद्युतीकरण के तहत शिफ्ट करने की मांग की, लेकिन ट्रांसफार्मर नहीं हटाए गए. उल्टे लोगों को डेढ़-डेढ़ लाख के खर्च का बिल थमा दिया गया. आवेदन देने के बाद लगाते हैं चक्कर ऐसे ट्रांसफार्मर पुराने मोहल्लों और बस्तियों में हैं. ऐसे में अर्जी देने वाले भी आर्थिक तौर पर इतने सक्षम नहीं हैं कि वे इतनी बड़ी रकम केवल ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने के लिए अदा कर सके. ऐसे ही एक मामले में पीड़ित ने बताया कि ट्रांसफार्मर हटाने के लिए निगम में आवेदन दे चुका है. बिजली कंपनी वालों ने सर्वे किया और डेढ़ लाख का बिल दे दिया. ऐसे पीड़ित एक-दो नहीं बल्कि कई हैं, जो अपने घर के आस-पास लगा ट्रांसफार्मर को हटाने के लिए अर्जी देकर भटक रहे हैं. राजधानी के इन इलाकों में ज्यादा समस्या इस तरह की समस्या रायपुर के कुशालपुर, प्रोफेसर कालोनी, पुरानी बस्ती, खोखोपारा, गुढ़ियारी, बजरंग नगर, लाखेनगर, आमापारा व कुकरीपारा बांसटाल शास्त्रीबाजार व बैजनाथपारा सहित कुछ इलाकों मैं ज्यादा है. एक साल में भेजे केवल 15 प्रस्ताव पिछले एक साल में जिला स्तरीय समिति की 15 प्रस्ताव भेजे हैं. इनमें से अधिकांश प्रस्ताव विधायकों, मंत्रियों और सांसद की ओर से भेजे गए हैं. कुछ प्रस्ताव बिजली कंपनी और पूर्व मंडल अध्यक्ष तथा पूर्व पार्षदों के सिफारिशी पत्रों पर तैयार किए गए हैं. फ्री शिफ्टिंग का प्रावधान राज्य में मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना पर अमल करने कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति बनी है. इसमें निगम कमिश्नर, टाउन प्लानिंग विभाग और पीडब्ल्यूडी के अफसर तथा कलेक्टोरेट के अधिकारी व बिजली कंपनी के अफसर सदस्य हैं. निगम के माध्यम से आवेदन समिति में पेश होते हैं. समिति की हर महीने बैठक होती है, और आवेदनों का परीक्षण करने के बाद काम शुरू होता है. आमतौर पर समिति ऐसे मामलों की स्वीकृति देती है, जिससे बहुत से लोग प्रभावित होते हैं. एक-दो लोगों या व्यक्तिगत आवेदनों पर विचार नहीं किया जाता.

पेट्रोल पंप के सामने दो गुटों के बीच हुआ मामूली विवाद में चाकूबाजी

जगदलपुर शहर में अपराध की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. शनिवार देर रात कृष्णा पेट्रोल पंप के सामने दो गुटों के बीच हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते उग्र हो गया. कहासुनी के बाद एक युवक ने चाकू निकालकर सामने खड़े युवक पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया. मौके पर युवकों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई. इस वारदात को पास से गुजर रहे एक कार सवार व्यक्ति ने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया. यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. हमले के दौरान चाकू से बचने के लिए दो युवक किसी तरह भागकर जान बचाने में सफल रहे. गौरतलब है कि 12 अप्रैल को भी दलपतसागर क्षेत्र में इसी तरह की एक और चाकूबाजी की घटना सामने आई थी, जिसमें दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए थे. लगातार हो रही इन घटनाओं ने शहर में बढ़ते असामाजिक तत्वों और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर में पुलिस की गश्त और निगरानी बढ़ाने की जरूरत है, ताकि ऐसे आपराधिक घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके.

हार्वेस्टर से टकराई बाइक, बाइक सवार युवकों की मौत, कटे अंग

सक्ती सक्ती जिले के मालखरौदा थाना क्षेत्र अंतर्गत मिशन चौक-पिहरीद मुख्य मार्ग पर एक दिल दहला देने वाली सड़क दुर्घटना में तीन युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा एक तेज रफ्तार हार्वेस्टर के सामने से बाइक के टकरा जाने के कारण हुआ। जानकारी के अनुसार, धान कटाई के बाद हार्वेस्टर में लगे कटर को नहीं हटाया गया था और वह भारी वाहन रिहायशी इलाके से गुजर रहा था। इसी दौरान मिशन चौक से पिहरीद की ओर जा रहे तीन बाइक सवार युवक हार्वेस्टर की चपेट में आ गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवकों के अंग अलग हो गए और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। मृतकों की पहचान नागेश्वर पिता दाऊलाल एवं शेर सिंह पिता परदेशी (ग्राम सतगढ़ निवासी) के रूप में हुई है, जबकि तीसरे युवक की पहचान की प्रक्रिया जारी है। घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मिशन चौक पर चक्का जाम कर दिया और हार्वेस्टर मालिक से मुआवजे की मांग करने लगे। इसके साथ ही पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के बाद शव को सीधे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, अस्पताल नहीं लाया गया। इससे आक्रोश और भी बढ़ गया। छपोरा, जैजैपुर और सक्ती मुख्य मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है। मौके पर मालखरौदा पुलिस पहुंचकर स्थिति को संभाला।

तिरंगा यात्रा के अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने शहीदों के परिजनों को शाल और श्रीफल भेंटकर किया सम्मानित

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जशपुर जिले के दुलदुला तहसील के चराईडाड़ गांव में तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने गांव के शिव मंदिर के प्रांगण में शहीदों के परिजनों को शाल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने आपरेशन सिंदूर की सफलता पर भारतीय सेना के प्रति सम्मान और राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए एकजुटता प्रकट करने के उद्देश्य से हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर बगीचा विकासखंड के शहीद जवान  एल. के. तिर्की की पत्नी  रोजालिया तिर्की, शहीद जवान एमानुएल केरकेट्टा की पत्नी  निर्मला केरकेट्टा, शहीद जवान अलेक्जेंडर लकडा की पत्नी अल्मा लकड़ा, शहीद जवान प्रभु प्रकाश की पत्नी  ईमालिया एक्का, शहीद जवान  सुनीत लकड़ा के परिजनऐलिन लकड़ा, शहीद जवानएच. सी. इलिसियुस लकड़ा के परिजन कान्ति लकड़ा और जशपुर विकास खंड के भूतपूर्व सैनिक नायक राजू राम, कांसाबेल विकास खंड के भूतपूर्व सैनिक स्वर्गीय रजनीश बड़ा के परिजन मनोभा केरकेट्टा, कुनकुरी विकास खंड के भूतपूर्व सैनिक स्वर्गीय फबीयानोस लकड़ा की पत्नी सुशन लकड़ा और शहीद जवान  सिमोन केरकेट्टा की बहु  माटिल्डा केरकेट्टा को सम्मानित किया। विधायक जशपुर रायमुनी भगत, नगर पालिका अध्यक्ष अरविन्द भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, पद्मश्री जगेश्वर यादव, विक्रमादित्य सिंह जूदेव, भरत साय, सुनील गुप्ता, कृष्णा राय, सरगुजा कमिश्नर नरेन्द्र कुमार दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, एसएसपी शशि मोहन सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, जनप्रतिनिधिगण, आम नागरिक तिरंगा यात्रा में शामिल हुए।

भारत माता की जय और तिरंगे झंडे की जयकार से गूंज उठा पूरा वातावरण

रायपुर  “ऑपरेशन सिंदूर” की सफलता पर  जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के चराईडांड में देशभक्ति से ओत-प्रोत तिरंगा यात्रा निकली गई। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने गांव के शिव मंदिर से आम बगीचा तक निकली गई इस भव्य यात्रा का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री के साथ हाथों में तिरंगा लिए जशपुर विधायक  रायमुनि भगत , नगर पालिका अध्यक्ष  अरविन्द भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष   सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, भरत सिंह, विक्रमादित्य सिंह जूदेव, सुनील गुप्ता,  कृष्णा राय, सरगुजा कमिश्नर   नरेन्द्र कुमार दुग्गा, आईजी   दीपक झा, कलेक्टर  रोहित व्यास, एसएसपी  शशि मोहन सिंह, जिला पंचायत सीईओ  अभिषेक कुमार, जनप्रतिनिधिगण, पंचायत एवं नगरीय निकायों के प्रतिनिधि, अधिकारी, आम नागरिक, बच्चे एवं जवान तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। लोग हाथ में तिरंगा लेकर उत्साहपूर्वक यात्रा में शामिल हुए। यात्रा के दौरान ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘जय हिंद’ के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि “यह यात्रा न केवल तिरंगे के प्रति सम्मान है, बल्कि यह हमारे शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि भी है। यह अभियान देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को सशक्त बनाने का प्रतीक है।”ऑपरेशन सिंदूर’ के अंतर्गत पूरे जिले में एक साथ तिरंगा यात्रा आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य युवाओं में देशभक्ति की भावना का संचार करना,  जनसहभागिता के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बड़ी संख्या में उपस्थित युवाओं, मातृशक्ति एवं नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि कम समय में इतनी बड़ी भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि देश की जनता एकजुट होकर राष्ट्र के लिए खड़ी है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार प्रकट किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सेना ने अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है। यह अभियान उन शहीद जवानों को समर्पित है जिन्होंने अपनी शहादत से राष्ट्र का मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि उरी हमले के बाद जिस प्रकार से सेना ने जवाब दिया, उसी प्रकार हाल ही में 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों द्वारा की गई कायरतापूर्ण घटना का करारा जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने पहलगाम की घटना में छत्तीसगढ़ के सपूत सहित अनेक लोगों की निर्ममहत्या का उल्लेख करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री एवं रक्षामंत्री के कुशल नेतृत्व में सीमापार आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई कर उन्हें ध्वस्त किया गया। इस तिरंगा यात्रा में समाज के सभी वर्गों की सहभागिता यह संदेश देती है कि भारत एक है, और राष्ट्रहित में सभी नागरिक एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिदूंर की सराहना हर देशवासी कर रहा है। भारतीय सेना द्वारा देश की रक्षा हेतु अदम्य साहस का परिचय देते हुऐ देश की सीमाओं की रक्षा अत्यन्त वीरता के साथ की जा रही है। भारतीय सेना के प्रति सम्मान प्रकट करने और देश की एकता अखंडता के लिए जिले के सभी नगरीय निकायों एवं ग्राम पंचायतों में तिरंगा यात्रा निकाली गई। यात्रा में जनप्रतिनिधि, पंचायत एवं नगरीय निकायों के प्रतिनिधि, अधिकारी, आम नागरिक, बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग, युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए और देश के प्रति अपनी एकजुटता एवं सम्मान प्रकट किया।

शासकीय क्षेत्रीय मुद्रणालय के नवीन भवन का मुख्यमंत्री साय ने किया लोकार्पण

   रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजनांदगांव जिले के चिखली में 9 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित शासकीय क्षेत्रीय मुद्रणालय के नवीन भवन का लोकार्पण किया। यहां शासकीय विभागों के महत्वपूर्ण दस्तावेजों का प्रकाशन होता है। मुख्यमंत्री ने शासकीय मुद्रणालय के नवनिर्मित भवन और वहां की प्रकाशन तथा अन्य व्यवस्था का भी अवलोकन किया।     राजनांदगांव स्थित शासकीय क्षेत्रीय मुद्रणालय भवन छत्तीसगढ़ में एक मात्र शासकीय मुद्रणालय है जहां महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेजों का प्रकाशन किया जाता है। मुद्रणालय का पुराना भवन अत्याधिक पुराना होने के कारण नये भवन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।     शासकीय मुद्रणालय के नवीन भवन में पेपर गोडाउन, प्रिटिंग मटेरियल स्टोर, बाइडिंग एवं पेपर स्टोर, मेकेनिकल स्टोर, काम्पोजिंग एवं रीडिंग रूम, टाइप स्टोर, कैमरा रूम, असिस्टेंट सुपरिटेंडेन्ट कक्ष, डायरेक्टर रूम, कॉन्फ्रेंस रूम एवं अन्य आवश्यक व्यस्थाएं रखी गई है। यहां 4 बड़े हाल एवं 12 कमरे हैं।     इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री विजय शर्मा, सांसद श्री संतोष पांडेय, महापौर श्री मधुसूदन यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं शासकीय मुद्रणालय के अधिकारी-कर्मचारी  उपस्थित थे।

समर सीजन में यात्रियों की संख्या बढ़ी, फिर 16 कोच के साथ चलेगी बिलासपुर-नागपुर वंदेभारत

बिलासपुर बिलासपुर-नागपुर के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन में यात्री कम होने पर 16 कोच को घटाकर 8 कर दी गई थी, लेकिन समर सीजन में यात्रियों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में अब फिर से 8 की जगह 16 कोच के साथ चलाई जाएगी। यह सुविधा जून से शुरू होगी।बिलासपुर से नागपुर के लिए एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया 2240 रुपए है, जबकि चेयर कार का किराया 1240 रुपए तय किया गया है। दरअसल, वंदेभारत एक्सप्रेस की शुरुआत छत्तीसगढ़ में 11 दिसंबर 2022 को हुई थी। शुरुआत में इस ट्रेन के परिचालन को लेकर रेल प्रशासन के साथ-साथ लोगों में भी भारी उत्सुकता थी। स्वदेश में निर्मित सेमी हाई स्पीड सेल्फ प्रोपेल्ड ट्रेन में कई तरह की विशेषताएं हैं। महंगी टिकट के चलते यात्रियों की संख्या कम थी इसे जानने और देखने के उद्देश्य से ही बड़ी संख्या में यात्रियों ने बिलासपुर-नागपुर के बीच यात्रा की, लेकिन ट्रेन में महंगी टिकट के चलते कुछ समय बाद ही यात्रियों की संख्या कम होने लगी। इसके चलते रेलवे इसे बंद करने की तैयारी में थी। हालांकि, रेलवे ने ट्रेन को बंद करने के बजाय अप्रैल 2023 में 16 कोच को घटाकर 8 कर दी। तब यह ट्रेन 8 कोचों के साथ ही चल रही है। बढ़ी यात्रियों की डिमांड रेलवे सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में वंदे भारत ट्रेन में यात्रियों की डिमांड बढ़ गई है। विशेष कर समर सीजन में ट्रेन पैक चल रही है। टिकटों की डिमांड बढ़ने पर सीटों की उपलब्धता कम हो गई है। ऐसे में रेलवे इसे फिर से 16 कोचों के साथ चलाने की तैयारी कर रही है। 4 कोच में रिपेयरिंग का काम बताया जा रहा है कि मुंबई डिवीजन से बिलासपुर भेजे जा रहे 8 में से 4 कोच खराब है। इनकी मरम्मत बिलासपुर में की जाएगी। मरम्मत का काम पूरा होने के तत्काल बाद इसकी सुविधा रूट के यात्रियों को मिल सकेगी। कहा जा रहा है कि कोच आते ही रेलवे पहले उसकी मरम्मत का काम प्राथमिकता से कराएगा। कोच बढ़ने पर 1128 यात्री कर सकेंगे सफर दावा किया जा रहा है कि जून से वंदे भारत ट्रेन में कोच की संख्या पहले की तरह यानी 16 कोच हो जाएगी। जिसके बाद इसमें कुल सीटों की संख्या बढ़कर 1128 हो जाएगी। वर्तमान में केवल 50% सीटों के साथ कुल 564 यात्री ही वंदे भारत में यात्रा कर पा रहे हैं। कोच बढ़ने से सीटों की संख्या भी दोगुनी हो जाएगी, जो सुविधा सीधे यात्रियों को मिलेगी। जानिए वंदे भारत ट्रेन की खासियत इस ट्रेन में सिटिंग चेयर अरेंजमेंट से लेकर सीसीटीवी, फायर सेफ्टी डिवाइस, फर्स्ट-एड बॉक्स, स्मार्ट टॉयलेट, ग्लास विंडो, ऑटोमैटिक डोर, डिस्प्ले बोर्ड, एयर कंडीशनर, डीप फ्रीजर जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं यात्रियों के लिए उपलब्ध है। मुंबई से बिलासपुर पहुंचे कोच वंदे भारत के कोच मुंबई से शुक्रवार को बिलासपुर पहुंच गए है। दिन भर यार्ड में इसे रखा गया और फिर बाद में कोचिंग डिपो लाया गया। डिपो में इस रैक के सभी कोचों का परीक्षण शुरू हो गया है। बताया गया कि परीक्षण के दौरान अधिकारी भी मौजूद रहे। उन्होंने रैक के साथ में विस्तृत जानकारी ली और यह जानने का प्रयास किया कि डिपो से इस रैक को कब फिट किया जाएगा। फिट होने के साथ कुछ अहम तैयारियां और करनी होंगी, जिनमें सबसे प्रमुख रिजर्वेशन सिस्टम में 16 कोच की जानकारी अपडेट करना शामिल है।  

साय सरकार ने दी सहमति- झारखंड में शराब नीति घोटाले की आंच छत्तीसगढ़ तक, मामले की जांच अब CBI करेगी

रायपुर झारखंड में शराब नीति में बदलाव कर करोड़ों रुपये के घोटाले को अंजाम देने के मामले की जांच अब CBI करेगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसके लिए अधिसूचना जारी करते हुए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा 6 के तहत CBI को छत्तीसगढ़ में जांच के लिए सहमति दी है। यह मामला रायपुर स्थित आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) द्वारा दर्ज अपराध से जुड़ा है। बता दें कि यह घोटाला झारखंड की आबकारी नीति में बदलाव के जरिए रचा गया था, जिसकी योजना छत्तीसगढ़ में बनी। आरोप है कि रायपुर से डुप्लिकेट होलोग्राम लगाकर शराब की आपूर्ति झारखंड में की गई, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ। EOW ने पिछले साल इस मामले में FIR दर्ज की थी, लेकिन जब उनके अधिकारी जांच के लिए झारखंड पहुंचे, तो वहां के अधिकारियों ने सहयोग नहीं किया। इसके बाद जांच को केंद्रीय एजेंसी CBI को सौंपने का निर्णय लिया गया। घोटालेबाजों की बढ़ी मुश्किलें बता दें कि इस जांच के दायरे में छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के आरोपी पूर्व IAS अफसर अनिल टुटेजा, सलाहकार अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर, झारखंड के आबकारी सचिव विनय कुमार चौबे और संयुक्त आबकारी आयुक्त गजेन्द्र सिंह, सिद्धार्थ सिंघानिया, विधु गुप्ता, निरंजन दास और अन्य की मुसीबतें अब और बढ़ने वाली हैं। सिंडिकेट और शराब दुकानों में घोटाले का तरीका गौरतलब है कि झारखंड में FL-10A लाइसेंस मॉडल पर आधारित नई शराब नीति बनाई गई, जो पूरी तरह छत्तीसगढ़ की तर्ज पर थी। इसके तहत पुरानी ठेका प्रणाली को खत्म कर एक चहेती एजेंसी को आपूर्ति का ठेका दिया गया। आरोप है कि सिंडिकेट ने नकली होलोग्राम का उपयोग कर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की। अब क्या होगा आगे? CBI की टीम अब FIR की कॉपी के आधार पर झारखंड में नए सिरे से जांच करेगी और जिन लोगों के नाम EOW की चार्जशीट में हैं, उनसे पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है। इस जांच से झारखंड-छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला? यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच राज्य की सरकारी शराब दुकानों से अवैध तरीके से शराब बेचने का था, जिससे सरकार को करोड़ों का नुकसान होने का आरोप है। इस घोटाले में लगभग दो हजार करोड़ रुपये के नुकसान का खुलासा हुआ है। ED की जांच में यह सामने आया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के शासनकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी ए.पी. त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के गठजोड़ ने यह घोटाला किया। ED ने इस मामले में 28 दिसंबर 2024 को कवासी लखमा और उनके परिवार के सदस्यों के घरों पर छापे मारे थे और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज व डिजिटल डिवाइस जब्त किए थे, जिनमें अपराध से अर्जित आय के सबूत मिले थे।

UPSC ने DGP के चयन के लिए तीन IPS के नामों का किया चयन, अरुण देव सहित तीनों के नाम शामिल…

रायपुर छत्तीसगढ़ में अब जल्द ही पूर्णकालिक डीजीपी (Director General of Police) की नियुक्ति होने वाली है। इसको लेकर आज यूपीएससी (UPSC) की सलेक्शन कमेटी की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने भाग लिया।छत्तीसगढ़ के नए डीजीपी के लिए UPSC से 3 अधिकारियों के नाम काे क्लीयरेंस मिल गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार छत्तीसगढ़ के स्थायी डीजीपी बनने की रेस में IPS अरुण देव गौतम के अलावा, IPS पवन देव और IPS जीपी सिंह का नाम शामिल है। वर्तमान में DGP की जिम्मेदारी IPS अरुण देव गौतम के पास है। सरकार ने गौतम को डीजीपी पद की अस्थायी जिम्मेदारी दी है। बताया जा रहा है कि IPS अरुण देव गौतम के लिए प्रदेश के नेताओं की लॉबी लगी हुई है। वहीं IPS पवन देव के लिए बिहार के राजनेता लॉबी कर रहे हैं। इसी तरह से IPS जीपी सिंह के लिए प्रदेश के राजनेताओं के अलावा दिल्ली के राजनेता और अफसर लॉबी कर रहे हैं। इन तीनों में से कोई एक छत्तीसगढ़ पुलिस का स्थायी मुखिया होगा। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अरुण देव का नाम सबसे टॉप पर है। UPSC से छत्तीसगढ़ वापस आ गई फाइल गृह विभाग के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, यूपीएससी से सीएम सचिवालय फाइल और लेटर आ चुका है। राज्य सरकार के जिम्मेदारों ने यूपीएससी से आए पत्र पर अंतिम निर्णय लेने की कवायद शुरू कर दी है।जून माह तक नए डीजीपी का नाम सार्वजनिक किया जाएगा। 4 फरवरी को IPS गौतम को मिली थी डीजीपी की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने 4 फरवरी को आईपीएस अरुण देव गौतम को डीजीपी की अस्थायी जिम्मेदारी दी थी। इस संबंध में गृह विभाग के विशेष सचिव ने निर्देश जारी किया था। जिस समय आईपीएस गौतम को डीजीपी बनाया गया था, उस समय उनके पास नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा नवा रायपुर के महानिदेशक, लोक अभियोजन नवा रायपुर के संचालक की भी जिम्मेदारी थी। स्थायी DGP की रेस में शामिल IPS वर्तमान में यहां हैं पदस्थ     IPS अरुण देव गौतम: अस्थायी डीजीपी, नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा नवा रायपुर के महानिदेशक, लोक अभियोजन नवा रायपुर के संचालक     IPS पवन देव: चेयरमेन पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन     IPS जीपी सिंह: डीजी पीएचक्यू पहले मुख्यमंत्री सीधे करते थे डीजीपी की नियुक्ति छत्तीसगढ़ में पहले मुख्यमंत्री खुद ही डीजीपी की नियुक्ति करते थे। इस प्रक्रिया को लेकर कोई निर्धारित नियम नहीं था। 2011 में एएन उपध्याय की नियुक्ति के बाद तक यूपीएससी को नाम भेजने का नियम लागू नहीं हुआ था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा गाइडलाइन जारी की गई, जिसमें कहा गया था कि डीजीपी की नियुक्ति कम से कम दो साल के लिए की जानी चाहिए। साथ ही अगर नियुक्ति के बाद छह महीने से कम समय में रिटायरमेंट का समय बचा हो, तो भी उन्हें दो साल का कार्यकाल पूरा करना होगा। छत्तीसगढ़ में इस गाइडलाइन का पालन करते हुए, अशोक जुनेजा को इसका लाभ मिला था। अब इस नियम के तहत छत्तीसगढ़ को जल्द ही अपना नया और पूर्णकालिक डीजीपी मिलेगा, जो राज्य की कानून व्यवस्था को मजबूती से संभालेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय को तीन नामों का पैनल: यूपीएससी सलेक्शन कमेटी केंद्रीय गृह मंत्रालय को तीन नामों का पैनल तैयार कर भेजेगा। वहां से छत्तीसगढ़ सरकार को फिर पेनल आएगा। जिस पर मुख्यमंत्री को अधिकार होगा कि वह इन तीन नामों के पेनल में से किसी एक नाम पर वे टिक लाएंगे, हालांकि, पहले डीजीपी की नियुक्ति मुख्यमंत्री सीधे करते थे। और एएन उपध्याय की नियुक्ति होने तक यूपीएससी को नाम भेजने का कोई नियम नहीं बना था। मुख्यमंत्री उस समय सीधे डीजीपी अपाइंट करते थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट इसके बाद गाइडलाइन आ गया, जिसके अब कम-से-कम दो साल के लिए डीजीपी की नियुक्ति होगी। अशोक जुनेजा को इसका लाभ : इसके साथ ही अगर उनकी नियुक्ति के बाद रिटायरमेंट में छह महीने भी टाईम बचा हो तो भी उन्हें दो साल का नियुक्ति के बाद अवसर दिया जाएगा। इसका लाभ छत्तीसगढ़ में अशोक जुनेजा को मिला है।छह महीने से छत्तीसगढ़ के डीजीपी के लिए मामला यूपीएससी में लटका था। वहीं इससे पहले डीपीसी हुई भी मगर जीपी सिंह की इंट्री के बाद एक बार फिर से कई तरह की जानकारियां राज्य सरकार से  यूपीएससी ने मंगवाई थी। ज्ञात हो कि डीजीपी सलेक्शन के लिए  सरकार ने दिसंबर 2024 में प्रस्ताव भेज दिया था। लेकिन अब यह समझा जाता है कि भारत सरकार को यूपीएससी जल्द अब पेनल बनाकर भेज सकती है।

विस्फोटकों का पता लगाने और गश्त करने में माहिर, सीआरपीएफ के डॉग की शहादत

बीजापुर  छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर नक्सलियों के खिलाफ एक बड़े अभियान में सीआरपीएफ का एक वीर डॉग शहीद हो गया। के9 रोलो नाम का यह डॉग जो विस्फोटक ढूंढने और हमले करने में माहिर था 200 मधुमक्खियों के हमले में मारा गया। यह घटना कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में हुई। रोलो सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस के 21 दिन के ऑपरेशन का हिस्सा था। उसे मरणोपरांत सम्मान मिलेगा। यह दुखद घटना तब हुई जब सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस की टीम कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में तलाशी अभियान चला रही थी। के9 रोलो भी इस टीम का हिस्सा था। अचानक, मधुमक्खियों के एक झुंड ने रोलो पर हमला कर दिया। मधुमक्खियों ने उसके शरीर पर कई डंक मारे। रोलो को बचाने के लिए उसके हैंडलर ने तुरंत उसे एक प्लास्टिक शीट से ढक दिया। लेकिन मधुमक्खियां शीट के अंदर घुस गईं और उसे और भी ज्यादा काटने लगीं। दर्द और जलन से परेशान होकर रोलो बेकाबू हो गया। उसने शीट को हटा दिया, जिससे वह और भी ज्यादा मधुमक्खियों के हमले का शिकार हो गया। बेहोश हो गया था रोलो अंत में रोलो को लगभग 200 मधुमक्खियों ने काटा था। वह बेहोश हो गया। उसके साथियों ने उसे तुरंत मेडिकल सहायता देने की कोशिश की। लेकिन, रोलो ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। वेटरनरी डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। मरणोपरांत मिलेगा सम्मान के9 रोलो एक वफादार सिपाही था। उसने नक्सलियों के ठिकानों और विस्फोटक सामग्री को ढूंढने में सीआरपीएफ की मदद की। उसकी शहादत को सम्मान देने के लिए उसे गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल उसे मरणोपरांत कमेंडेशन डिस्क से सम्मानित करेंगे। पिछले साल मनाया था दूसरा जन्मदिन रोलो एक खूबसूरत बेल्जियन मेलिनोइस था। उसने पिछले महीने ही अपना दूसरा जन्मदिन मनाया था। उसे सीआरपीएफ के डॉग ब्रीडिंग एंड ट्रेनिंग स्कूल डीबीटीएस बेंगलुरु में प्रशिक्षित किया गया था। अप्रैल 2024 में उसे सीआरपीएफ की 228वीं बटालियन में नक्सल विरोधी ड्यूटी के लिए भेजा गया था। सीआरपीएफ के जवान रोलो को बहुत प्यार करते थे। वे उसे अपना साथी मानते थे।

वैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी दंपत्ति गिरफ्तार, भिलाई में ज्योति बनकर रह रही थी बांग्लादेश की शाहिदा

भिलाई छत्तीसगढ़ के दुर्ग में शुक्रवार को एक बांग्लादेशी दंपति को अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान मोहम्मद रसैल शेख (36) और उसकी पत्नी शाहिदा खातून (35) के रूप में हुई है. न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस दंपति को साल 2020 में भी इसी आरोप में गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वो जमानत पर बाहर थे. जिला पुलिस की विशेष कार्यबल (STF), जिसे छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की पहचान के लिए गठित किया गया है, उसने शुक्रवार को भिलाई के सुपेला स्थित कॉन्ट्रेक्टर कॉलोनी में किराए के मकान से दोनों को हिरासत में लिया. एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि पूछताछ के दौरान शुरुआत में महिला ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और खुद का नाम ज्योति रसैल शेख और पति का नाम रसैल शेख बताया. उन्होंने दावा किया कि वो मूल रूप से पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के मोमिनपुर गांव के निवासी हैं और साल 2009 से 2017 तक मुंबई-ठाणे में केटरिंग का काम करते थे. 2017 में वो भिलाई आ गए और वहीं काम करने लगे. हालांकि, जब दोनों के आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई, तो वो फर्जी पाए गए. सख्ती से पूछताछ करने पर दंपति ने स्वीकार किया कि वो बांग्लादेश के जेसोर जिले के निवासी हैं. पुलिस के अनुसार, शाहिदा खातून साल 2009 में अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थी और मुंबई में एक केटरिंग यूनिट में काम करते हुए रसैल शेख से मिली. दोनों कुछ समय के लिए बांग्लादेश लौटे, शादी की और फिर 2017 में वीजा और पासपोर्ट के जरिए भारत लौट आए. बाद में उन्होंने मुंबई में फर्जी दस्तावेजों के जरिए आधार और पैन कार्ड बनवाए. 2017 में दोनों भिलाई में बस गए और यहां भी केटरिंग का काम करने लगे. खातून का वीजा सितंबर 2018 में और शेख का अप्रैल 2020 में समाप्त हो गया. 2020 में उनके खिलाफ अवैध रूप से रहने का मामला दर्ज हुआ था, जिसमें वो जमानत पर थे. शेख के खिलाफ दुर्ग में लूट का एक अन्य मामला भी दर्ज है. पुलिस ने बताया कि दंपति ने मुंबई के पते की जगह सुपेला का पता दिखाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते भी खुलवा लिए थे. अब उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, विदेशी नागरिक अधिनियम 1946 और पासपोर्ट अधिनियम 1920 की धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है.  

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