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अमनराथ यात्रा और मेला खीर भवानी को लेकर सरकार कर रही सुरक्षित और सुचारू संचालन के उपाय, सख्त दिखे उमर अब्दुल्ला

गांदरबल मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का श्री अमनराथ यात्रा और मेला खीर भवानी को लेकर सख्त नजर आ रहे है। उन्होंने आज मंगलवार को कहा कि सरकार अमरनाथ यात्रा और मेला खीर भवानी के सुरक्षित और सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त उपाय कर रही है। गंदरबल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीएम उमर ने कहा कि प्रशासन पर्याप्त व्यवस्था कर रहा है, जबकि मेला खीर भवानी और अमरनाथ यात्रा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा संबंधी इंतजाम भी किए जा रहे हैं। सीएम उमर ने कहा कि पर्यटन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, लेकिन वर्तमान में स्थिति ऐसी नहीं है कि इस क्षेत्र को फिर से पुनर्जीवित किया जा सके। वहीं कुछ ग्रुप आने भी शुरू हो गए हैं। उन्होंने कहा अमरनाथ यात्रा समाप्त होने के बाद सरकार हितधारकों के साथ बैठकर पर्यटन को फिर से पुनर्जीवित करने का इंतजाम करेगी। सीएम उमर ने कहा कि बाहर से आने वाले टूर ऑपरेटर भी चाहते हैं कि यहां फिर से पर्यटन फले-फूले। यात्रा समाप्त होने के बाद पुनरुद्धार के उपाय किए जाएंगे।” मुख्यमंत्री ने गांदेरबल में अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा किया, जहां उन्होंने पांडच में वृद्धाश्रम का उद्घाटन किया और पशु चिकित्सालय की आधारशिला भी रखी। उन्होंने आगामी मेले की व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए खीर भवानी मंदिर का भी दौरा किया। बता दें कि, खीर भवानी मंदिर श्रीनगर से 20 किलोमीटर दूर गंदेरबल जिले में स्थित है। इस मंदिर से हजारों कश्मीरी पंडितों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। अगले महीने मनाए जाने वाले खीर भवानी मेले में हजारों कश्मीरी पंडित भाग लेते हैं। खीर भवानी मेले के लिए किए गए प्रबंधों का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने खीर भवानी मंदिर का दौरा किया और वहां पूजा की। उनके साथ अधिकारी भी थे और जिले में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी।

जापान-फ्रांस को क्यों चाहिए PL-15E का अवशेष, कई देशों में क्यों मची होड़, भारत से की मलबे की मांग

नई दिल्ली पिछले महीने 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आंतकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) से आतंकियों का खात्मा करने और उनके ठिकानों को ध्वस्त करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। इससे बौखलाए पाकिस्तान ने भारत पर हमला बोल दिया था। चार दिनों के सैन्य संघर्ष में पाकिस्तान की तरफ से करीब 800 से 1000 ड्रोन और मिसाइल दागे गए थे, जिसे भारतीय सशस्त्र बलों ने मार गिराया था। पाकिस्तान ने ये ड्रोन और मिसाइल भारत के 30 शहरों में आम नागरिकों और सैन्य बेस को निशाना बनाकर दागे थे लेकिन सभी हमलों को नाकाम कर दिया गया। इन हमलों में भारत में कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। पिछले दिनों जब सेना के तीनों सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMOs) ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स की थी और दुश्मन देश द्वारा हमले में इस्तेमाल किए गए ड्रोन्स और मिसाइलों के मलबों की तस्वीरों का सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शन किया था, तब बताया गया था कि पाकिस्तान ने तुर्की के ड्रोन समेत चीन के PL-15E मिसाइलों का भी इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया था, जिसे हमारी एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया था। PL-15E हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल PL-15E चीन निर्मित हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसे सीमावर्ती इलाकों में मार गिराया गया था। इस मिसाइल के टुकड़े पंजाब के खेतों में मिले थे। पंजाब के होशियारपुर में एक जगह तो यह मिसाइल बिना ऐक्टिव हुए ही खेतों में गिरा मिला, जिसकी सुरक्षा बलों ने जांच की तो पाया कि यह चीन की उन्नत मिसाइल PL-15E है। मीडिया रिपोर्ट्स में इस मिसाइल की अनुमानित कीमत करीब 10 करोड़ रुपये प्रति यूनिट बताई जा रही है। इसे हवा से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की एडवांस मिसाइलों में गिना जाता है। जापान-फ्रांस को क्यों चाहिए PL-15E का अवशेष अब नए घटनाक्रम में जापान, फ्रांस और फाइव आइज के कई देशों की खुफिया एजेसियों ने भारत से इस मिसाइल के मलबे की मांग की है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन निर्मित मिसाइल की बरामदगी एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह अपनी मारक क्षमताओं और रेंज के बारे में बहुमूल्य जानकारी देने में सक्षम होगी, जिसका उपयोग उसकी काट तैयार करने और उससे निपटने की रणनीति तैयार करने समेत चीनी मिसाइल निर्माण की तकनीक हासिल करने में किया जा सकता है। दरअसल, फ्रांस और जापान, जो हाई टेक एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणालियों में भारी निवेश कर रहे हैं, उन्हें चीन के इस गुप्त PL-15E मिसाइल के मलबे से न सिर्फ उसकी संरचना और तकनीकी पहलुओं से नई जानकारी प्राप्त होगी बल्कि विदेशी मिसाइल के रडार सिग्नेचर, मोटर संरचना, मार्गदर्शन तकनीक और संभवतः इसके एईएसए (एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे) रडार की मायावी वास्तुकला का पता लगाने में भी बड़ी मदद मिल सकेगी। फ्रांस के मेटियोर मिसाइल के लिए सीधा खतरा फ्रांस, इसलिए भी इस मिसाइल की स्टडी करने को उत्सुक है क्योंकि इस चीनी मिसाइल को मेटियोर मिसाइल के लिए सीधा खतरा माना जाता है। रैमजेट प्रणोदन प्रणाली और एक महत्वपूर्ण “नो-एस्केप ज़ोन” के साथ, मेटियोर लंबे समय से हवाई प्रभुत्व के लिए बेंचमार्क रहा है। हालांकि, PL-15E ने लंबी दूरी और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल के रूप में एक दुर्जेय प्रतिद्वंद्वी के रूप मेंअपनी पहचान स्थापित की है। पाकिस्तान द्वारा युद्ध में पहली बार इस मिसाइल का इस्तेमाल करना भी सैन्य आपूर्तिकर्ता के रूप में चीन की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। फाइव आईज देश और जापान एशिया में खासकर इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे में बीजिंग के बढ़ते प्रभाव को एक रणनीतिक चुनौती के रूप में देख रहे हैं। इसलिए उसकी मिसाइल टेकनोलॉजी का गहराई से अध्ययन करना चाहते हैं और इस दिशा में पंजाब के खेतों में मिला चीनी मिसाइल का मलबा एक अहम कड़ी साबित हो सकता है।

ऐसा तो पाकिस्तान में ही मुमकिन है! भारत से बुरी तरह पिटे, फिर भी मुनीर का प्रमोशन

करांची  पाकिस्तान की शहबाज शरीफ ने मंगलवार को बड़ा फैसला करते हुए आसिम मुनीर को बड़ी उपलब्धि से नवाज दिया है. शहबाज शरीफ कैबिनेट ने आर्मी चीफ आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर प्रमोट किया है. आसिम मुनीर पाकिस्तान के दूसरे फील्ड मार्शल होंगे, इससे पहले जनरल अय्यूब खान फील्ड मार्शल के पद तक पहुंचे थे. पाकिस्तान की कैबिनेट ने मंगलवार को बड़ा फैसला लिया है. कैबिनेट ने जनरल असीम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.पाकिस्तान में फील्ड मार्शल का पद पाकिस्तानी सशस्त्र बलों में सर्वोच्च पद है. जनरल असीम मुनीर देश के इतिहास में दूसरे फील्ड मार्शल बन गए हैं, इससे पहले अयूब खान 1959-1967 के बीच इस पद के कार्यरत थे. असीम मुनीर ने पाकिस्तान में रखी आतंकवाद 2.0 की बुनियाद, तीसरी नस्ल भी बर्बाद!  पाकिस्तान एक ऐसा अभागा देश है जहां के बच्चों को पढ़ने लिखने की नहीं, बल्कि भारत के खिलाफ जिहाद का जहर चटाकर जवान किया जाता है। यही वजह है कि आम पाकिस्तानियों में भारत के खिलाफ इतनी नफरत भरी हुई है। पाकिस्तान की सेना देश की युवा पीढ़ी को आतंक की नई नस्ल बनाने के लिए काफी तेजी से काम कर रही है और असीम मुनीर की नियुक्ति का मतलब भी यही करना था। भारत के शीर्ष खुफिया सूत्रों का मानना है कि जनरल असीन मुनीर को पाकिस्तानी सेना का प्रमुख बनाना सिर्फ एक आम नियुक्ति नहीं है, पाकिस्तान की तीसरी पीढ़ी को भी कट्टरपंथी जिहादी राजनीति में शामिल करने के एक और खतरनाक दौर की शुरूआत है। पाकिस्तान में ऐसा सालों से होता आया है और पाकिस्तान की सेना के जनरल देश की अवाम को भारत के खिलाफ जिहाद शुरू करने के लिए हमेशा से भड़काते रहे हैं।  ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल आसिम मुनीर मजहब को हथियार बनाकर एक ऐसे “जिहाद” को आगे बढ़ा रहा है, जो न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी है।  रिपोर्ट में भारत के शीर्ष खुफिया सूत्रों ने पाकिस्तान में जिहाद के खतरनाक डेवलपमेंट को लेकर चेतावनी दी है। जनरल असीम मुनीर के जहरीले भाषण के बाद ही आतंकवादियों ने पहलगाम में आतंकी हमला किया था और लोगों से धर्म पूछकर उन्हें गोली मारी थी। भारत के शीर्ष खुफिया सूत्रों का मानना है कि जनरल असीम मुनीर का भाषण सिर्फ बयानबाजी नहीं था, बल्कि इसे हत्या करने का आदेश के रूप में देखना चाहिए। पाकिस्तान के सैन्य अधिकारी ऐसा करते रहे हैं और मजहब को हथियार बनाकर भारत के खिलाफ जिहाद लड़ने के लिए अपने देश के लोगों को जमा करते रहे हैं। देश की तीसरी पीढ़ी को भी जहरीला बना रहे असीम मुनीर सूत्रों का कहना है कि असीम मुनीर पाकिस्तान की तीसरी पीढ़ी को भी उसी रास्ते पर ले जा रहा हैं, जिस रास्ते पर भारत के खिलाफ नफरत सिखाया जाता है। असीम मुनीक की स्ट्रैटजी हाफिज सईद और मौलाना मसूद अजहर के कश्मीर को आजाद कराने के लक्ष्यों के मुताबिक ही है। हालांकि हााफिज सईद और मसूद अजहर आतंकवादी हैं और उन्हें सरकारी संसाधन नहीं मिले हैं, लेकिन असीम मुनीर सेना का कमान संभाले हुए इन्हीं आतंकवादियों वाले काम कर रहा है। यानि पाकिस्तान की सेना ने भारत के खिलाफ जिहाद को अपना मुख्य मकसद बना लिया है। असीम मुनीर पाकिस्तान के ऐसे पहले सेनाध्यक्ष हैं, जिसे पूरा कुरान याद है और देश की सेना में उसे मौलाना के तौर पर पहचान हासिल है। वो अपने हर भाषण में कुरान की आयतों का हवाला देता है और ‘पवित्र युद्ध’ की बात करता है। असीम मुनीर पाकिस्तान के नागरिक समाज और सेना में धार्मिक भावना का इस्तेमाल कर रहा है ताकि ‘जिहाद’ को एक स्टेट पॉलिसी की तरह अपनाया जा सके।  सूत्रों के हवाले से बताया है कि असीम मुनीर ने पाकिस्तान की सेना के ट्रेनिंग कार्यक्रमों में भड़काऊ भाषण करने वाले मौलानाओं को बुलाना शुरू कर दिया है और उसने जवानों को कहना शुरू कर दिया है कि ‘कश्मीर को आजाद करवाना ऊपरवाले का आदेश है।’ यही सब बातें हाफिज सईद और मसूद अजहर भी करते हैं। लिहाजा धीरे धीरे फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है कि पाकिस्तान की सेना कहीं आतंकवादी संगठन में तो तब्दील नहीं होने लगी है। सूत्रों का कहना है कि असीम मुनीर अक्सर कुरान की आयतें पढ़ता रहता है और बैठकों के दौरान कुरान की आयतों को ही अपने तर्ज पर व्याख्या करते हुए भाषण देता रहता है। सूत्रों ने कहा है कि छद्म युद्ध के लिए मुनीर बार बार कुरान का हवाला देता है और हाफिज सईद या मसूद अजहर की तरह ही भारत के खिलाफ लड़ाई को अल्लाह के लिए लड़ाई बताता है। असीम मुनीर के आने के बाद लश्कर-ए-तैयबा (LeT) की शाखा द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) जैसे समूहों के लिए पाकिस्तान में भारी समर्थन हो गया है। उन्हें ड्रोन, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराए गए हैं। सूत्रों से पता चलता है कि मुनीर ने ISI सहित पाकिस्तान की सैन्य-खुफिया मशीनरी का इस्तेमाल करते हुए हिंदुओं को निशाना बनाकर 2025 के पहलगाम नरसंहार जैसे हमलों को अंजाम दिया है। पाकिस्तान सेना का मकसद अब कश्मीरी मुस्लिम समाज में धार्मिक चरमपंथ को दोबारा पनपाना है। इसके अलावा कट्टरपंथी मौलवियों के जरिए भारत के अंदर भी कट्टरपंथी विचारधारा को भड़काने की कोशिश किया जाना है और पहलगाम आतंकी हमले से पहले टू नेशन थ्योरी और मुसलमानों को हिंदुओं से अलग बताना उसकी इसी कोशिश को दिखाता है।

पवन कल्याण की चेतावनी, स्थानीय लोगों की रोजगार से बेदखली, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बताया

विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने मंगलवार को राज्य में रोहिंग्या घुसपैठियों को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने इसे न केवल स्थानीय लोगों की रोजगार से बेदखली, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे लोग आधार कार्ड और राशन कार्ड कैसे पा रहे हैं? पवन कल्याण ने कहा, “2017-18 के बीच मुझे खासकर सुनार समुदाय से कई शिकायतें मिलीं कि बंगाल से लोग आंध्र आकर काम करने लगे हैं। शक है कि इनमें से कई म्यांमार से आए रोहिंग्या हैं। इसके पीछे स्थानीय स्तर पर कोई नेटवर्क काम कर रहा है, जिसकी जांच बेहद जरूरी है। मैंने इस विषय को संबंधित अधिकारियों के साथ साझा किया है।” लोकल के हक पर कब्जा कर रहे घुसपैठिए पवन कल्याण ने स्थानीय युवाओं के रोजगार पर चिंता जताते हुए कहा, “तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में नौकरियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। जब अपने ही लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार नहीं हैं, तब हम अवैध घुसपैठियों को ये अवसर नहीं दे सकते।” दक्षिण भारत बना सॉफ्ट टारगेट उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत पहले से सॉफ्ट टारगेट रहा है। “कोयंबटूर और हैदराबाद जैसे शहरों में हम पहले ही धमाके देख चुके हैं। काकीनाडा पोर्ट पर संभावित खतरे की जानकारी मैंने डीजीपी को दी थी। बाद में तेलंगाना और आंध्र पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में एक संदिग्ध को पकड़ा भी।” पवन कल्याण ने सरकार और प्रशासन से अपील की कि “स्थानीयों की रोजगार प्राथमिकता और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। अवैध घुसपैठ को लेकर निर्णायक और सतर्क रवैया अपनाना जरूरी है।”

‘हमने पहलगाम के बाद भी कई लोग खोए हैं, हमारे मकान तबाह हो गए, अरबों रुपयों की संपत्ति बर्बाद हो गई: महबूबा मुफ्ती

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर 6-7 मई को भारतीय सशस्त्र बलों की ओर से शुरू किया गया सैन्य अभियान था, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों को नष्ट करना था। यह पहलगाम आतंकी हमले का जवाब था। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले में शामिल आतंकी अभी तक पकड़े नहीं गए हैं तो इस सबसे क्या हासिल हुआ? मीडिया से बातचीत में महबूबा ने कहा, ‘हमने पहलगाम के बाद भी कई लोग खोए हैं। हमारे मकान तबाह हो गए, अरबों रुपयों की संपत्ति बर्बाद हो गई। पहलगाम हमले में शामिल आतंकी अभी तक पकड़े नहीं गए हैं तो इस सबसे क्या हासिल हुआ?’ भारत की ओर से प्रतिनिधिमंडल भेजे जाने पर महबूबा मुफ्ती ने कहा, ‘सरकार आज जो कर रही है, विभिन्न देशों में प्रतिनिधिमंडल भेजना; यह पहले करना चाहिए था। जब आप एक परमाणु शक्ति हैं, तो युद्ध कोई विकल्प नहीं है।’ उन्होंने कहा कि सरकार को कई चीजें करने की जरूरत है, क्योंकि यह हमारा युद्ध नहीं है। यह दो देशों के बीच का मामला है, जिसे राजनीतिक हस्तक्षेप और कूटनीति से सुलझाया जा सकता था। जहां चाकू की जरूरत थी, वहां आपने तलवार निकाल दी। मारे गए लोगों को शहीद का दर्जा देने की मांग महबूबा मुफ्ती ने कहा, ‘पूंछ और उरी जैसे इलाकों में काफी नुकसान पहुंचा है। बहुत से लोग ऐसे हैं जिनका कोई नहीं है। कई सारे मकान बर्बाद हो गए, उन्हें टेंट तक नहीं मिले हैं। कहीं-कहीं मकान का ढांचा खड़ा है मगर अंदर में से बिल्कुल तबाह हो गए हैं। स्थानीय लोगों की यह मांग है कि जो लोग मारे गए उन्हें शहीद का दर्जा मिलना चाहिए। लोगों ने दुकानें खोलने के लिए लोन लिया था जिसे माफ किया जाना चाहिए। बैंक अब इंश्योरेंस नहीं दे रहे हैं क्योंकि वो इसे युद्ध बता रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि जिनके घरों के लोग शहीद हुए हैं उनके परिवार को नौकरी मिलनी चाहिए। सरकार को बहुत सारा काम करने की जरूरत है।’ प्रोफेसर अली खान की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की गिरफ्तारी पर भी पीडीपी चीफ ने सवाल उठाए। महबूबा मुफ्ती ने कहा, ‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रोफेसर खान ने क्या कहा, उन्होंने सही तो बोला कि कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे भाजपा के मंत्री ने जो बयान दिया वो गलत है। आप बहुत शोर मचा रहे हैं, मगर आप जिन मुसलमानों की मॉब लिंचिंग करते हैं, जिन मुसलमानों के घर तोड़ते हैं और जिनकी मस्जिदें तोड़ते हैं उनके बारे में भी तो सोचिए। यह कहने में कौन सा गुनाह हो गया कि उसे जेल में डाल दिया गया।’

स्वर्ण मंदिर पर आर्मी अफसर के दावे को SGPC और मुख्य ग्रंथी ने बताया झूठ, बोले- जांच कराएंगे

अमृतसर सिखों के पवित्र स्थल स्वर्ण मंदिर के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह ने लेफ्टिनेंट जनरल सुमेर इवान डी कुन्हा के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि गोल्डन टेंपल के ऊपर एयर डिफेंस गन्स तैनात की गई थीं। उनका कहना था कि इन गन्स को तैनात करने के लिए मंजूरी मुख्य ग्रंथी और मैनेजमेंट से ली गई थी। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की ओर से स्वर्ण मंदिर को टारगेट किया गया था। उसके ड्रोन और मिसाइल हमलों से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया था और फिर उसके हमलों को आसमान में ही नाकाम कर दिया गया। अब स्वर्ण मंदिर के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह ने इस दावे को ही खारिज कर दिया है। ज्ञानी रघबीर सिंह का कहना है कि जिस दौरान परमिशन लेने की बात कही जा रही है, उस समय वह देश में ही नहीं थे। उन्होंने सेना अधिकारी पर ही आरोप लगा दिया कि वह झूठ बोल रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने एसपीजीसी से डिमांड की है कि इस मामले में जांच कराई जाए। उनके अलावा अकाल तख्त के कार्य़वाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गारगज का भी कहना है कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है, जैसा दावा सेना के अधिकारी ने किया है। इसके अलावा एसजीपीसी चीफ का कहना है कि ऐसी कोई परमिशन नहीं ली गई और ना ही ऐसा कोई वाकया हुआ है। इससे पहले सोमवार को भी एसजीपीसी ने कहा था कि पाकिस्तान या फिर भारत की सेना गोल्डन टेंपल पर अटैक के बारे में सोच भी नहीं सकते। संस्था का कहना था कि स्वर्ण मंदिर तो जीवन बख्शने वाली जगह है। वहां पर कोई सेना हमला करने के बारे में सोच भी नहीं सकती। बता दें कि सुमेर इवान डी कुन्हा भारतीय सेना के वायुरक्षा महानिदेशक हैं। उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि पूरा पाकिस्तान ही भारत की रेंज में है और भले ही पाकिस्तानी सेना अपना मुख्यालय कहीं भी स्थानांतरित कर ले। यदि भारत ने आक्रमण करना चाहा तो वह बच नहीं सकेंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सेना को ‘गहरा गड्ढा’ खोजना होगा, जिसमें छिपा जा सके।

चीफ जस्टिस बीआर गवई ने कहा- ऐसा नहीं है कि सरकारी नियंत्रण में जाने से उपासना का अधिकार प्रभावित होगा

नई दिल्ली वक्फ संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज से फिर सुनवाई शुरू हुई है। इस मामले की सुनवाई पूर्व चीफ जस्टिस संजीव खन्ना कर रहे थे, जिन्होंने अपने रिटायरमेंट से पहले मौजूदा सीजेआई बीआर गवई की बेंच को केस सौंप दिया। याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार इस ऐक्ट के माध्यम से वक्फ की संपत्तियां ही कब्जा कराना चाहती है। उन्होंने कहा कि वक्फ का अर्थ अल्लाह के लिए समर्पण से है। यदि कोई वक्फ में अपनी संपत्ति देता है तो वह एक तरह से अल्लाह के लिए दान है और उसका इस्तेमाल नहीं बदला जा सकता। वक्फ की संपत्ति को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। एक बार जो संपत्ति वक्फ रहती है, वह हमेशा वक्फ ही कहलाती है। उसमें बदलाव संभव नहीं है। कपिल सिब्बल ने वक्फ ऐक्ट को गलत ठहराते हुए कहा, ‘इसे यह कहते हुए लाया गया है कि वक्फ का इससे संरक्षण होगा, लेकिन उससे तो कब्जा होगा। इस कानून को ऐसे बनाया गया है कि बिना किसी प्रक्रिया के ही वक्फ की संपत्ति को लिया जा सके। कोई संपत्ति वक्फ है या नहीं। यह तय करने वाला एक सरकारी अधिकारी होगा। यदि वह कोई फैसला इधर-उधर कर दे तो वक्फ संपत्ति पर विवाद हो सकता है। आइए अब बात करें कि आखिर वक्फ क्या है। वक्फ तो अल्लाह के प्रति एक समर्पण है। इसे किसी और को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।’ खजुराहो मंदिर का चीफ जस्टिस गवई ने क्यों किया जिक्र केस की सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने एक दलील प्राचीन स्थलों को लेकर भी दी। उन्होंने कहा कि कुछ ऐतिहासिक स्मारक हैं, उन्हें पहले जब सरकार के नियंत्रण में लिया जाता था, तब भी उनका वक्फ का दर्जा खत्म नहीं होता था। अब यदि किसी वक्फ संपत्ति को स्मारक का दर्जा मिलेगा तो फिर उसे वक्फ नहीं माना जाएगा। फिर एक बार जब वक्फ का दर्जा समाप्त हो जाएगा तो लोगों को प्रार्थना करने से रोक दिया जाएगा। इस तरह स्वतंत्रता के साथ उपासना करने का अधिकार प्रभावित होगा। इस पर चीफ जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सरकारी नियंत्रण में जाने से उपासना का अधिकार प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि खजुराहो फिलहाल संरक्षित स्मारक है। इसके बाद भी वहां के मंदिर में आम लोग जाकर पूजा कर सकते हैं।

मुंबई में कोरोना के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी के मिले संकेत, खबरों के बीच इन शेयर पर टूटे निवेशक, खरीदने की लूट

मुंबई बीएमसी के अफसरों ने कहा है कि सिंगापुर, हांगकांग, पूर्वी एशिया और अन्य देशों में कोरोना मामलों में बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। बीएमसी का स्वास्थ्य विभाग इस पर नियंत्रण रखने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है।  देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक बार फिर कोरोना के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। मुंबई महानगरपालिका क्षेत्र में कुछ 53 कोरोना के पॉजिटिव मरीज सामने आए हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए बीएमसी ने कोरोना मरीजों के लिए गाइडलाइन जारी की है।  बीएमसी ने नई गाइडलाइन में लोगों को बताया है कि नगरपालिका अस्पतालों में कोविड-19 रोगियों के उपचार एवं मार्गदर्शन की सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। मुंबई महानगरपालिका के अस्पतालों में मरीजों के लिए विशेष बिस्तर और विशेष कमरों की व्यवस्था भी की गई है। कोरोना को लेकर बीएमसी कर्मचारी फिर अलर्ट बीएमसी की ओर से जारी बयान के अनुसार पिछले कुछ दिनों में सिंगापुर, हांगकांग, पूर्वी एशिया और अन्य देशों में COVID मामलों की संख्या बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। बृहन्मुंबई नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग COVID-19 के प्रसार पर नियंत्रण रखने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है। जनवरी 2025 से अप्रैल 2025 तक कोविड मरीजों की संख्या बहुत कम आई थी। हालांकि, मई से अब तक कुछ मरीज देखे गए हैं, लेकिन बृहन्मुंबई नगर निगम प्रशासन नागरिकों से न घबराने की अपील कर रहा है। बीएमसी के अस्पताल में अलग से बेड की व्यवस्था बृहन्मुंबई नगर निगम के अस्पतालों में कोरोना मरीजों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए गए हैं. कोरोना मरीजों के लिए सेवन हिल्स अस्पताल में 20 बिस्तर (एमआईसीयू), 20 बिस्तर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए और 60 सामान्य बिस्तर हैं. इसके अलावा, कस्तूरबा अस्पताल में 2 गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) बेड और 10 बेड का वार्ड है. यदि आवश्यक हुआ तो यह क्षमता बढ़ाई जा सकती है. कोविड-19 के लक्षण COVID-19 के सामान्य लक्षणों में मुख्य रूप से बुखार, खांसी (सूखी या कफ के साथ), गले में खराश या दर्द, थकान महसूस होना, शरीर में दर्द और सिरदर्द शामिल हैं। इसके साथ ही कभी-कभी सर्दी, नाक बहना, स्वाद या गंध का एहसास न होने जैसे लक्षण भी शामिल हो सकते हैं। ये लक्षण प्रायः सामान्य सर्दी-जुकाम के समान हो सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति में भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। गंभीर मामलों में सांस लेने में कठिनाई एक बड़ा खतरे का संकेत है। कोविड से बचने के उपाय अगर आपको कोई भी लक्षण महसूस हो तो आपको तुरंत किसी नगरपालिका क्लिनिक, अस्पताल या पारिवारिक चिकित्सक से परामर्श जरूर लें। ताकि कोरोना को फैलने से समय पर रोका जा सके। इस बीच, कोविड वैक्सीन बनाने वाली कंपनी के शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखी जा रही है। साथ ही अन्य फार्मा सेक्टर के शेयरों में भी खरीदारी बढ़ी है। आज मंगलवार को ग्लोबल वैक्सीन निर्माता फाइजर इंक की भारतीय यूनिट फाइजर लिमिटेड के शेयर एनएसई पर 13% तक चढ़ गए और 5,009 रुपये के पार पहुंच गए थे। इन शेयरों में भी तेजी अजंता फार्मा के शेयर में आज तेजी है। इसके अलावा, एबॉट इंडिया लिमिटेड, डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड में तेजी है। डिवीज़ लैबोरेटरीज लिमिटेड, सनफार्मा, सिप्ला समेत के शेयर फोकस में हैं। बता दें कि पिछली बार कोविड के समय शेयर बाजार पस्त पड़ गया था, बावजूद फार्मा कंपनी के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखी गई थी। ऐसे में निवेशकों में फार्मा कंपनी के शेयरों को लेकर एक बार फिर उत्साह नजर आ रहा है और वे खरीदारी को लेकर अलर्ट हो गए हैं। बता दें कि ग्लोबल मार्केट में बीते सोमवार को साउथ कोरियाई डायग्नोस्टिक किट निर्माता सुगेंटेक इंक. सोमवार को 29% तक उछल गया था। जापान में, कोविड वैक्सीन निर्माता दाइची सैंक्यो के शेयरों में 7.4% तक की बढ़ोतरी हुई थी, जब यूबीएस द्वारा इसके टारगेट प्राइस को भी बढ़ा दिया गया। हांगकांग में, शंघाई जुंशी बायोसाइंसेज कंपनी, जो कोविड टीके भी बनाती है, के शेयरों में 4.3% तक की बढ़ोतरी हुई थी। भारत में स्थिति कंट्रोल बता दें कि देश के विभिन्न राज्यों में कुल 257 सक्रिय COVID मामले दर्ज हैं। इनमें से ज्यादातर मामले केरल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से सामने आए हैं। सरकार के मुताबिक, स्थिति कंट्रोल में और लगातार निगरानी में है। इस बार संक्रमण के लिए ओमिक्रोन के नए वेरिएंट JN.1 और इसके सब-वेरिएंट्स LF.7 और NB.1.8 को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। हालांकि, यह खतरनाक है भी नहीं। अभी इस तरह का कोई प्रमाण नहीं मिला है।  

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका, पहलगाम आतंकी घटना का नाम ‘शहीद हिंदू घाटी टूरिस्ट प्लेस’ रखा जाए

चंडीगढ़ जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में जिस स्थान पर 26 पर्यटकों को धर्म पूछकर मार डाला गया था, उसके नामकरण को लेकर एक अर्जी मंगलवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पहुंची। इस जनहित याचिका में मांग की गई कि जिस स्थान पर इन लोगों को आतंकियों ने बेरहमी से मार डाला था, उसका नाम- ‘शहीद हिंदू घाटी टूरिस्ट प्लेस’ रखा जाए। इसके अलावा हमले में मारे गए लोगों को शहीद का दर्जा दिया जाए। इस अर्जी को चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुमीत गोयल की बेंच ने खारिज कर दिया। बेंच ने कहा कि ऐसी मांग पर फैसला सरकार या फिर संबंधित अथॉरिटीज की ओर से ही किया जा सकता है। इसमें अदालत की कोई भूमिका नहीं हो सकती। अदालत ने कहा, ‘किसी स्थान को कुछ घोषित करना अथवा स्मारक तय करना या फिर नाम में बदलाव करना यह सरकार का काम है। इसके अलावा किसी दिवंगत व्यक्ति को बलिदानी का दर्जा देना भी हमारे हाथ में नहीं है। यह पूरी तरह से सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।’ बेंच ने कहा कि अदालत पॉलिसी मेकिंग का काम नहीं कर सकती। हम इससे खुद को दूर ही रखते हैं क्योंकि यह पूरी तरह से संसद या फिर विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को यह सुझाव भी दिया कि वह सरकार के समक्ष ज्ञापन दे सकते हैं। उसकी तरफ से ही इस पर कानून के दायरे में विचार किया जा सकता है। इस पर हम विचार नहीं कर सकते।  

ऑपरेशन सिंदूर में सिर्फ आतंकियों बल्कि पाकिस्तानी सेना को भी इतने जख्म दिए कि उसे भरने में लंबा वक्त लगेगा: सेना

नई दिल्ली सेना ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में चिनार कोर ने पीओके की लीपा घाटी में स्थित सैन्य ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। इसे फिर खड़ा करने में 8 से 12 महीने का वक्त लग जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर में सेना ने न सिर्फ आतंकियों बल्कि पाकिस्तानी सेना को भी इतने जख्म दिए कि उसे भरने में लंबा वक्त लगेगा। भारतीय सेना की चिनार कोर ने पीओके की लीपा घाटी में स्थित सैन्य ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। सेना अधिकारियों का कहना है कि इस बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने में पाकिस्तान को 8 से 12 महीने का समय लग सकता है। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले के अग्रिम क्षेत्र तंगधार स्थित नियंत्रण रेखा (LoC) का दौरा करने पर देखा गया कि मई के दूसरे सप्ताह में ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय जवाबी कार्रवाई के बाद पीओके में पाकिस्तानी सैन्य ढांचा तबाह हो चुका है। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमने कम से कम तीन पोस्ट, एक गोला-बारूद डिपो, ईंधन भंडारण सुविधा और तोपखाने जैसे कई ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। हमारी जवाबी कार्रवाई इतनी प्रभावशाली थी कि पाकिस्तान को इन सबको दोबारा तैयार करने में लंबा वक्त लगेगा।” पाक के हर हमले का सटीक जवाब एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान सेना ने भारी हथियारों के साथ-साथ हवाई साधनों का भी इस्तेमाल किया, लेकिन भारतीय एयर डिफेंस और ‘आकाशदीप’ रडार प्रणाली की वजह से वह कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा पाए। भारतीय सेना ने केवल उन्हीं पाक ठिकानों को निशाना बनाया जहां ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सकता था। अधिकारियों के अनुसार, इस जवाबी कार्रवाई में कम से कम 64 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और 96 घायल हुए। हर सीजफायर का तीन गुना जवाब चिनार कोर के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, “हमारा संदेश साफ था—हम हर सीज़फायर उल्लंघन का तीन गुना जवाब देंगे।” 7 मई को मुज़फ्फराबाद के पास 25 मिनट तक चले सटीक हमले में भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। यह हमला 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में किया गया था। सेना अधिकारियों ने बताया कि हमले के दौरान एक पाकिस्तानी ब्रिगेड कमांडर ने मस्जिद में छिपते हुए सैनिकों को संदेश भेजा—”पहले जानें बचाओ, दफ्तर बाद में खुल जाएंगे।” पाकिस्तान ने 8, 9 और 10 मई को भारतीय सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने हर प्रयास को नाकाम किया। अंततः दोनों देशों ने 10 मई को संघर्ष विराम पर सहमति जताई।

अहमदाबाद नगर निगम ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ दूसरे चरण का अभियान शुरू किया, 8 हजार अवैध निर्माण होंगे ध्वस्त

अहमदाबाद  गुजरात के अहमदाबाद शहर में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का एक्शन जारी है। अहमदाबाद नगर निगम ने अवैध अधिक्रमण हटाने के लिए दूसरे चरण का अभियान शुरू कर दिया है। इसके तहत 2.5 लाख वर्ग मीटर की भूमि से अतिक्रमण हटाया जाना है। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, चंदोला क्षेत्र में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का काम शुरू भी कर दिया है। मौके पर भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है। बता दें कि पहले चरण के अभियान में 1.5 लाख वर्ग मीटर की जमीन से अतिक्रमण हटाया गया था। बांग्लादेशी नागरिकों का ठिकाना बन चुका है चंडोला तालाब पुलिस कमिश्नर जीएस मलिक ने कहा कि ये अवैध निर्माण अवैध बांग्लादेशी नागरिकों का ठिकाना बन चुके थे. पिछले महीने शहर में 250 अवैध बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए थे, जिनमें से 207 चंडोला तालाब के अवैध निर्माणों में रहते थे और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े थे. इससे पहले साल 2009 में 95 अवैध बांग्लादेशी पकड़े गए थे, तब भी यहां डिमोलिशन किया गया था. डिमोलिशन के दूसरे चरण के दौरान एक जेसीपी, एक एडीसीपी, 6 डीसीपी, एसीपी, और पीआई सहित कुल 3 हजार से ज्यादा पुलिस कर्मी तैनात रहेंगे. 25 एसआरपी कंपनियां भी मौजूद रहेंगी. पहले चरण के दौरान स्थानीय लोगों ने गुजरात हाईकोर्ट में जाकर डिमोलिशन रोकने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने तालाब पर बने सभी निर्माणों को अवैध बताते हुए  डिमोलिशन पर रोक नहीं लगाई थी. इसके बाद प्रशासन ने 4 हजार अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिए थे. अब दूसरे चरण में बाकी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करके तालाब का हिस्सा खाली करवाया जाएगा. प्रशासन यह भी सुनिश्चित करेगा कि इस खाली जगह पर दोबारा कोई अवैध निर्माण न हो.     शहर के पुलिस कमिश्नर जीएस मलिक ने बताया कि दो शिफ्ट में पुलिस के करीब 3000 कर्मियों और एसआरपी की 25 कंपनियों को तैनात किया गया है। अतिक्रमण हटाए जाने की प्रक्रिया अगले 3-4 दिनों तक चल सकती है।     प्रभावित क्षेत्रों में दो दिन से लाउडस्पीकर से घोषणा कर लोगों से घर खाली करने की अपील की गई थी। चंदोला क्षेत्र में बिना कानूनी दस्तावेज के काफी अवैध बांग्लादशी रहते थे। इसमें से अधिकतर को अब डिपोर्ट किया जा चुका है।     दावा था कि क्षेत्र के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल अवैध गतिविधियां संचालित करने के लिए भी किया जा रहा था। 2010 से पहले क्षेत्र में रहने वाले लोगों को ईडब्ल्यूएस आवास के लिए वार्ड कार्यालय से फॉर्म लेने को कह दिया गया है। सुरक्षाबल इलाके में गश्त कर रहे हैं। अधिकारियों ने दी जानकारी अहमदाबाद के डीसीपी रवि मोहन सैनी ने कहा, ‘ये पूरा तालाब का एरिया है। इसमें जो भी निर्माण किया गया है, वो अवैध है। इसलिए आज इसे हटाया जा रहा है। पहले चरण में हमने जब अतिक्रमण हटाया था, तब कई अवैध बांग्लादेशी प्रवासी पकड़े गए थे। उनके खिलाफ डिपोर्टेशन की कार्रवाई शुरू की गई थी। ज्यादातर मकान अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के बता दें कि इससे पहले 29 और 30 अप्रैल को अभियान के पहले चरण में लगभग 3 हजार अवैध मकानों को ध्वस्त किया गया था, जिनमें ज्यादातर अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के थे। दूसरे चरण में भी प्रशासन ढाई हजार से ज्यादा अवैध निर्माणों को निशाना बना रहा है। बता दें कि गुजरात पुलिस ने पिछले कुछ हफ्तों में हजारों अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है, जिनमें से बड़ी संख्या में अहमदाबाद में रह रहे बांग्लादेशी भी शामिल हैं। चंदोला लेक इलाके में चल रही इस कार्रवाई का मकसद अवैध कब्जों को हटाना और घुसपैठियों पर नकेल कसना है। अवैध कब्जे की शुरुआत 1970-80 के दशक में हुई चंदोला लेक का इलाका लंबे समय से अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों का गढ़ बना हुआ था, जहां मानव तस्करी और जाली दस्तावेजों का जाल फैला हुआ था। इस इलाके में अवैध कब्जे की शुरुआत 1970-80 के दशक में हुई, जब यहां बड़ी संख्या में प्रवासी बस्तियां बसाई गईं। 2002 में एक NGO ने इस क्षेत्र में सियासत नगर नाम से बस्ती बसाई थी। इसके बाद 2010 से 2024 के बीच चंदोला झील की जमीन पर अवैध कब्जों में तेजी आई। प्रशासन के अनुसार, इस इलाके में लोगों ने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण किए, जिनमें कई अवैध बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल थे। अवैध कब्जे की शुरुआत कब हुई? लंबे समय से चंदोला लेक का इलाका अवैध बांग्लादेशियों का गढ़ बना हुआ था, जहां ह्यूमन ट्रैफिकिंग और फेक डॉक्यूमेंट्स का जाल फैला था। अवैध कब्जे की शुरुआत 1970 में हुई, जब यहां बड़ी संख्या में माइग्रेंट के लिए बस्तियां बसाई गईं। 2002 में एक NGO ने इस एरिया में सियासत नगर नाम से एक बस्ती बसाई थी। इसके बाद 2010 से लेकर 2024 के बीच चंदोला झील की जमीन पर अवैध कब्जे बढ़ोतरी होने लगी। प्रशासन के मुताबिक, इस इलाके में लोगों ने कई बड़े अवैध निर्माण किए, जिनमें कई बांग्लादेशी नागरिक भी मौजूद थे। स्थानीय लोगों ने की थी ये मांग गुजरात हाईकोर्ट में पहली स्टेज के दौरान लोकल लोगों ने जाकर डिमोलिशन रोकने को लेकर मांग की थी, लेकिन गुजरात कोर्ट ने तालाब पर बने सभी निर्माणों को अवैध करार देते हुए डिमोलिशन पर रोक नहीं लगाई थी। इसके बाद प्रशासन ने 4 हजार अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिए थे। अब दूसरी स्टेज में बाकी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करके तालाब का हिस्सा खाली करवाया जाएगा। प्रशासन यह भी नजर रखेगा कि खाली जगह पर फिर दोबारा कोई अवैध निर्माण न हो।

‘सिलिकॉन सिटी’ के घर-दफ्तरों में पानी, साल की सबसे अधिक बारिश, 6 घंटे बरसते रहे मेघ

बेंगलुरु बेंगलुरु में साल की सबसे भारी बारिश ने सोमवार को तीन लोगों की जान ले ली। छह घंटे की मूसलाधार वर्षा ने बारिश के कई रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। सबसे दुखद हादसा BTM लेआउट में हुआ, जहां एक अपार्टमेंट परिसर में जमा पानी निकालते समय 63 वर्षीय एक बुजुर्ग और 12 साल के लड़के की करंट लगने से मौत हो गई। इससे पहले वाइटफ़ील्ड में भारी बारिश के चलते एक मकान की दीवार गिर गई, जिसमें 35 वर्षीय महिला हाउसकीपर की मौत हो गई। रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात शहर में छह घंटे से अधिक समय तक भारी बारिश हुई, जिससे कई इलाकों में सड़कों, बेसमेंट और निचले इलाकों में जलभराव हो गया। जानकारी के अनुसार, हादसा सोमवार शाम करीब 6 बजे हुआ। मृतकों की पहचान मन्मोहन कामत (63) और दिनेश (12) के रूप में हुई है। दिनेश नेपाली मूल के एक कर्मचारी का बेटा था, जो उसी अपार्टमेंट में कार्यरत है। DCP साउथ ईस्ट डिवीजन सारा फातिमा ने बताया, “कामत ने बाहर से मोटर मंगवाई थी और उसे बिजली से जोड़कर बेसमेंट में जमा पानी निकालने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान शॉर्ट सर्किट से उन्हें करंट लग गया। दिनेश जो उनकी मदद कर रहा था, उसे भी करंट लग गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।” दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सेंट जॉन्स अस्पताल भेजा गया है। वाइटफ़ील्ड में महिला की मौत बारिश के कारण वाइटफ़ील्ड में एक कंपाउंड वॉल गिर गई, जिसकी चपेट में आकर 35 वर्षीय महिला हाउसकीपर की मौत हो गई। उधर मामले में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि बेंगलुरु में 210 बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिनमें से 166 में समस्या का समाधान हो चुका है। 24 स्थानों पर काम जारी है और शेष 20 पर जल्द काम शुरू होगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने 197 किमी लंबी स्टॉर्म वॉटर ड्रेन बनाई है और इसके लिए ₹2000 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। ट्रैफिक पुलिस ने 132 जलभराव वाले स्थानों की सूची दी है, जिनमें से 82 ठीक किए जा चुके हैं, जबकि 41 पर कार्य प्रगति पर है। शिवकुमार ने कहा, “बारिश हमारे नियंत्रण में नहीं है, लेकिन हम बाढ़ वाले इलाकों की पहचान कर समाधान कर रहे हैं और लोगों को राहत पहुंचाने पर ध्यान दे रहे हैं।”  

पाकिस्तान हाफिज सईद को भारत के हवाले नहीं करेगा, तब तक जारी रहेगा ऑपरेशन सिंदूर

 येरूशलम  पहलगाम आतंकी हमले के बाद आतंकियों के खात्में के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया। भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर के बाद सरकार और सेना कई बार साफ कर चुके हैं कि ऑपरेशन सिंदूर जारी रहेगा। वहीं, अब इजराइल में भारत के राजदूत ने एक बार फिर ऑपरेशन सिंदूर पर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर को कुछ समय के लिए रोका गया है, यह ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है। इजराइल में भारतीय राजदूत जेपी सिंह का कहना है कि जब तक पाकिस्तान हाफिज सईद, साजिद मीर, जाकिउर्र रहमान लखवी समेत सभी खूंखार आतंकियों को भारत को नहीं सौंप देता, तब तक ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं होगा। आतंकियों ने धर्म पूछकर गोली मारी: जेपी सिंह इजराइली टीवी i24 को दिए एक साक्षात्कार में जेपी सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ चलाया गया था। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादियों ने लोगों को धर्म के आधार पर गोली मारी। उन्होंने गोली मारने से पहले पर्यटकों का धर्म पूछा और 26 मासूमों की जान ले ली। ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ: जेपी सिंह सीजफायर पर बात करते हुए जेपी सिंह ने कहा कि, “सीजफायर अभी भी लागू है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर पर हम पहले ही साफ कर चुके हैं कि इसे रोका गया है, खत्म नहीं किया गया है। आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी। हमने एक न्यू नॉर्मल सेट करते हुए आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। आतंकवादी चाहे जहां भी हों हम उन्हें मारेंगे और उनकी इमारतों को भी तबाह कर देंगे। तो अभी सब खत्म नहीं हुआ है। ” “आतंकवाद रुकना चाहिए”, भारतीय राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की संधि लागू होनी चाहिए और पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद रोकना चाहिए. भारत में पाकिस्तान से शुरू हुए आतंकी हमलों की एक लंबी लिस्ट का हवाला देते हुए जेपी सिंह ने कहा कि “मूल कारण ये दो समूह हैं – जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा”. उन्होंने कहा कि मुंबई हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा के नेता खुलेआम घूम रहे हैं, जिसमें कई यहूदी भी मारे गए थे. राजदूत जेपी सिंह ने जोर देकर कहा, “उन्हें एक बहुत ही सरल चीज करने की जरूरत है – जब प्रस्तावना में सद्भावना और दोस्ती शामिल है, तो उन्हें बस इन आतंकवादियों को हमें सौंपने की जरूरत है.” उन्होंने कहा कि हाल ही में अमेरिका ने मुंबई हमले में शामिल तहव्वुर हुसैन राणा को प्रत्यर्पित किया था. इसी से सीखकर इस्लामाबाद भी ऐसा कर सकता है. उन्होंने जोर देकर कहा, “जब अमेरिका इन दोषियों को सौंप सकता है, तो पाकिस्तान क्यों नहीं सौंप सकता? उन्हें बस हफीज सईद, लखवी, साजिद मीर को सौंपना होगा और चीजें खत्म हो जाएंगी.” यह तर्क देते हुए कि आतंकवाद एक वैश्विक खतरा है, भारतीय दूत ने चुनौती का सामना कर रहे देशों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया. पाकिस्तान में मचा हड़कंप नूर खान एअरबेस की बात करते हुए जेपी सिंह ने कहा कि 10 मई की सुबह पाकिस्तान में हड़कंप मच गया था। उनके DGMO ने भारत में फोन करके सीजफायर करने की मांग रखी। पानी के बदले पाक ने आतंकवाद दिया: जेपी सिंह सिंधु जल समझौते पर बात करते हुए जेपी सिंह कहते हैं, “सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) 1960 में साइन की गई थी। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच दोस्ती बरकरार रखा था। मगर पिछले कई सालों से देखा गया है कि हम पाकिस्तान को पानी देते हैं और बदले में पाकिस्तान हमारे देश में आतंकी हमले करवाता है। इसे लेकर लोगों में बेहद गुस्सा था। हमारे प्रधानमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि अब पानी और खून एकसाथ नहीं बहेगा।” आतंक के खिलाफ भारत का युद्ध है ऑपरेशन सिंदूर जेपी सिंह ने पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान चाहता है कि सिंधु जल समझौता कायम रहे तो उसे आतंकवाद खत्म करना होगा। ऑपरेशन सिंदूर भारत का आतंकवाद के खिलाफ युद्ध है। पाकिस्तान में आतंकवाद के लिए दो अहम संगठन जिम्मेदार हैं – जैश-ए-मोहम्म और लश्कर-ए-तैयबा।

महाराष्ट्र सरकार में फिर से मंत्री बने NCP नेता छगन भुजबल, सूबे में हैं OBC का बड़ा चेहरा

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पांच महीने पुराने राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार किया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता छगन भुजबल की मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. उन्होंने आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और अजित पवार की उपस्थिति में शपथ ली. शपथ के दौरान मजेदार वाकया हुआ. शपथ से पहले सभी ने उनको गुलदस्ता दे कर अभिनंदन किया, मगर जैसे ही उनके पास अजित पवार पहुंचे तो सभी लोग हंसने लगे. बता दें कि सीएम फडणवीस ने अपने 5 महीने पुराने कैबिनेट का विस्तार किया है. पिछले साल दिसंबर में उनको मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी. मगर, सोमवार को विस्तार के दौरान उनको शामिल किया गया. सोमवार रात को ही भुजबल ने जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार, 20 मई को फडणवीस सरकार की कैबिनेट की शपथ लेंगे. आज सुबह उन्होंने राजभवन में राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन की मौजूदगी में उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली.     भुजबल ने पहले ही बता दिया था सोमवार को देर जानकारी देते हुए भुजबल ने कहा था, ‘उन्हें मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाले महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा. मुझे सूचित किया गया है कि मुझे राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा. शपथ ग्रहण समारोह मंगलवार सुबह 10 बजे होगा.’ भाजपा ने पुष्टि कर दी थी वहीं, राज्य में सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन का नेतृत्व कर रही भाजपा के सूत्रों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की थी. राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रमुख चेहरे भुजबल (77) को पिछले साल दिसंबर में मुख्यमंत्री फडणवीस के मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया था. राकांपा के एक वरिष्ठ नेता धनंजय मुंडे ने मार्च में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद संभावित रूप से भुजबल को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा रहा है. ताकतवर ओबीसी नेता छगन भुजबल का राजनीतिक कद महाराष्ट्र में किसी से छिपा नहीं है. वे न केवल येवला से विधायक हैं, बल्कि ओबीसी समुदाय के बीच उनकी मजबूत पकड़ है. उनके समर्थक लंबे समय से मांग कर रहे थे कि उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए. सूत्रों का कहना है कि गठबंधन सरकार ने उनकी नाराजगी को दूर करने और ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया है. निकाय चुनावों से पहले की चाल राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भुजबल का मंत्रिमंडल में शामिल होना एनसीपी और गठबंधन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है. खासकर, आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए ओबीसी समुदाय को साधने की कोशिश साफ नजर आ रही है. भुजबल के अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण विभाग मिलने की भी संभावना जताई जा रही है. काम आई भुजबल की पॉलिटिक्स? राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि शरद पवार को मेंटर मानने वाले छगन भुजबल समता परिषद के जरिए यह संदेश देने में सफल रहे कि उनकी नाराजगी से एनसीपी को नुकसान हो सकता है, अजित पवार के साथ उनके पिछले छह महीने में संबंध सामान्य ही रहे, हालांकि दूसरी ओर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ नजदीकी बढ़ाते रहे। एक्सपर्ट कहते हैं कि यह प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा था। इसी बीच जब बीड के सरंपच की हत्या में धनंजय मुंडे का इस्तीफा हुआ तो भुजबल के लिए मंत्रीमंडल में लौटने की उम्मीद बढ़ गई क्योंकि फडणवीस सरकार में एनसीपी के कोटे की एक बर्थ खाली हो गई। भुजबल की क्यों हुई वापसी? राजनीतिक हलकों में अटकलें हैं कि स्थानीय निकाय चुनाव को देखते हुए अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी ने छगन भुजबल को मंत्री बनाकर खुश करने की कोशिश की है। छगन भुजबल की अगुवाई वाली समता परिषद की ओबीसी वर्ग में अच्छी पैठ है। भुजबल के मंत्री बनने से अच्छा संदेश जाएगा। एक्सपर्ट कहते हैं कि अजित पवार ने भुजबल की वापसी कराकर जहां ओबीसी वर्ग को खुश करने की कोशिश की है तो वहीं उन्होंने भुजबल को भी यह संदेश दे दिया है कि वह चाहे तो किसी को भी बाहर बैठा सकते हैं। उन्होंने ऐसा करके अपनी पावर दिखा दी है। ऐसा कहा जा रहा है कि जब केंद्र सरकार देश में जाति जनगणना के लिए आगे बढ़ रह है तब अजित पवार पार्टी के सबसे बड़े ओबीसी चेहरे को और नाराज नहीं रख सकते थे। तब अजित के साथ ली थी शपथ भुजबल महाराष्ट्र के उन कुछ नेताओं में शामिल हैं जो 75 पार होने के बाद भी राजनीतिक में खुद को प्रासंगिक बनाए हुए हैं। पिछले साल दिसंबर में जब फडणवीस ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था तब भुजबल के साथ एनसीपी के ही दिलीप वाल्से पाटिल तथा बीजेपी के मुनगंटीवार और विजयकुमार गावित को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी। इसके बाद सिर्फ भुजबल ही मंत्रिमंडल में लौटे हैं। भुजबल ने राजनीति की शुरुआत शिवसेना से की थी। 1991 से 1999 तक शिवसेना में रहने के बाद वह 1999 में एनसीपी में आए थे। इसके बाद से वह एनसीपी में हैं। अजित पवार ने जब चाचा शरद पवार का साथा छोड़ा था। तब भुजबल भी अजित के साथ चले गए थे और फिर शिंदे सरकार में मंत्री बने थे। भुजबल की अहमियत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उन्होंने अजित पवार के साथ शपथ ली थी। भुजबल दो बार राज्य के डिप्टी सीएम भी रह चुके हैं। वह राज्य के गृह विभाग के साथ पीडब्ल्यूडी विभाग को संभाल चुके हैं।

छगन भुजबल ने महाराष्ट्र मंत्री पद की शपथ ली, सीएम फडणवीस, डिप्टी सीएम शिंदे और अजित पवार उपस्थित थे

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पांच महीने पुराने राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार किया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता छगन भुजबल की मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. उन्होंने आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और अजित पवार की उपस्थिति में शपथ ली. शपथ के दौरान मजेदार वाकया हुआ. शपथ से पहले सभी ने उनको गुलदस्ता दे कर अभिनंदन किया, मगर जैसे ही उनके पास अजित पवार पहुंचे तो सभी लोग हंसने लगे. बता दें कि सीएम फडणवीस ने अपने 5 महीने पुराने कैबिनेट का विस्तार किया है. पिछले साल दिसंबर में उनको मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी. मगर, सोमवार को विस्तार के दौरान उनको शामिल किया गया. सोमवार रात को ही भुजबल ने जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार, 20 मई को फडणवीस सरकार की कैबिनेट की शपथ लेंगे. आज सुबह उन्होंने राजभवन में राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन की मौजूदगी में उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली.    भुजबल ने पहले ही बता दिया था सोमवार को देर जानकारी देते हुए भुजबल ने कहा था, ‘उन्हें मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाले महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा. मुझे सूचित किया गया है कि मुझे राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा. शपथ ग्रहण समारोह मंगलवार सुबह 10 बजे होगा.’ भाजपा ने पुष्टि कर दी थी वहीं, राज्य में सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन का नेतृत्व कर रही भाजपा के सूत्रों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की थी. राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रमुख चेहरे भुजबल (77) को पिछले साल दिसंबर में मुख्यमंत्री फडणवीस के मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया था. राकांपा के एक वरिष्ठ नेता धनंजय मुंडे ने मार्च में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद संभावित रूप से भुजबल को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा रहा है. ताकतवर ओबीसी नेता छगन भुजबल का राजनीतिक कद महाराष्ट्र में किसी से छिपा नहीं है. वे न केवल येवला से विधायक हैं, बल्कि ओबीसी समुदाय के बीच उनकी मजबूत पकड़ है. उनके समर्थक लंबे समय से मांग कर रहे थे कि उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए. सूत्रों का कहना है कि गठबंधन सरकार ने उनकी नाराजगी को दूर करने और ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया है. निकाय चुनावों से पहले की चाल राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भुजबल का मंत्रिमंडल में शामिल होना एनसीपी और गठबंधन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है. खासकर, आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए ओबीसी समुदाय को साधने की कोशिश साफ नजर आ रही है. भुजबल के अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण विभाग मिलने की भी संभावना जताई जा रही है.

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