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आज भारत न केवल एक जिम्मेदार परमाणु राष्ट्र बनकर उभरा है, बल्कि सैन्य शक्ति, से दुनिया को अपना लोहा भी मनवाया

नई दिल्ली 51 साल पहले आज ही के दिन भारत ने ‘स्माइलिंग बुद्धा’ मिशन को अंजाम दिया था और दुनिया को अपनी ताकत का परिचय दिया। 18 मई 1974 में पोखरण-I के उस धमाके ने न सिर्फ भारत को दुनिया की छठी परमाणु शक्ति बनाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि विज्ञान और सुरक्षा के मामले में भारत किसी से पीछे नहीं रहने वाला। आज भारत न केवल एक जिम्मेदार परमाणु राष्ट्र बनकर उभरा है, बल्कि उसने सैन्य शक्ति, तकनीकी कौशल और रणनीतिक दूरदर्शिता से दुनिया को अपना लोहा भी मनवाया है। ‘स्माइलिंग बुद्धा’ पोखरण परीक्षण के लिए एक कोड नेम था। यह मिशन भारत के इतिहास का वह मोड़ था जब देश ने दुनिया को दिखा दिया कि हम न केवल सभ्यता और शांति के प्रतीक हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर सैन्य और तकनीकी ताकत भी रखते हैं। अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन के बाद भारत छठा ऐसा देश बना जिसके पास परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता थी। प्रतिबंधों के बावजूद परमाणु शक्ति के विकास की दास्तान पोखरण-1 के बाद भारत पर अमेरिका समेत कई देशों ने प्रतिबंध लगाए, लेकिन DRDO, BARC और ISRO जैसे संस्थानों ने मिलकर देश को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर किया। 11 और 13 मई 1998 को तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने पांच और परमाणु परीक्षण किए, जिनके साथ भारत ने खुद को एक “परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र” घोषित कर दिया। इसके साथ ही भारत ने दो प्रमुख सिद्धांत अपनाए। पहला- भारत पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। दूसरा- भारत केवल न्यूनतम लेकिन विश्वसनीय शक्ति रखेगा। अब कहां खड़ा है भारत? स्वीडिश संस्थान SIPRI के अनुसार भारत के पास 2024 तक लगभग 160–170 परमाणु हथियार मौजूद हैं। इतना ही नहीं भारत अब थल, जल और नभ – तीनों माध्यमों से परमाणु हमले करने की पूर्ण क्षमता रखता है। थल में अग्नि-1 से लेकर अग्नि-5 तक लंबी दूरी की मिसाइलें हैं। जल में INS Arihant जैसी परमाणु-सक्षम सबमरीन और नभ में Mirage-2000 और Su-30MKI जैसे लड़ाकू विमान हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रभाव भारत की परमाणु नीति अब भी ‘नो फर्स्ट यूज’ पर आधारित है, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इसके पुनर्मूल्यांकन की आवाजें उठी हैं। भारत की रणनीतिक ताकत ने उसे चीन और पाकिस्तान के विरुद्ध संतुलन देने वाली शक्ति बना दिया है। 51 वर्षों के पांच निर्णायक मोड़ 1974 में पोखरण-1 ने भारत की परमाणु शक्ति में पहली एंट्री दी। 1998 में पोखरण-2 टेस्टिंग से आधिकारिक रूप से परमाणु राष्ट्र की मान्यता मिली। 2003 में न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन की नीति तय की गई। 2016 में परमाणु-सक्षम सबमरीन INS Arihant भारतीय सेना में शामिल हुआ। 2020 के बाद MIRV टेक्नोलॉजी और अग्नि-5 जैसी अत्याधुनिक मिसाइल तकनीक सेना के बेड़े में शामिल हुए।

ऑपरेशन सिंदूर का नया वीडियो जारी, सेना का जवाब देते हुए बताया सबक ऐसा सिखाया गया है जिसे पीढ़ियां याद रखेंगी

नई दिल्ली पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने जिस तरह से पराक्रम दिखाते हुए पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया, उससे पाकिस्तान के भी हौसले पस्त हो गए। वहीं जब पाकिस्तान ने बौखलाकर भारत पर हमला शुरू किया तो भारतीय सेना ने ऐसा मुंहतोड़ जवाब दिया कि वह सीजफायर के लिए मिन्नतें करता नजर आया। भारतीय सेना ने रविवार को ऑपरेशन सिंदूर का एक और वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में सेना का जवाब आतंकियों को चुनौती देते हुए कहता है कि सबक ऐसा सिखाया गया है जिसे पीढ़ियां याद रखेंगी। भारतीय सेना के वेस्टर्न कमांड के इस वीडियो में कहा गया, यह बदले की भावना नहीं न्याय था। सबक ऐसा सिखाएंगे कि इनकी पीढ़ियां याद रखेंगी। रात के करीब 9 बजे दुश्मन ने जिस पोस्ट से हमला किया सेना ने उसे मिट्टी में मिला दिया। सिंदूर पाकिस्तान के लिए वह सबक था जो उसने दशकों से नहीं सीखा। वीडियो में देखा जा सकता है कि सेना कैसे आतंकियों के लॉन्चिंग पैड्स और पाकिस्तानी सेना की पोस्ट को तबाह कर रही है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने राजनीतिक और कूटनीतिक, दोनों तरह से भारत की सोच बदल दी है और पूरी दुनिया इसकी गवाह है। जम्मू कश्मीर के उधमपुर से लोकसभा सदस्य एवं केंद्रीय मंत्री सिंह ने यह भी कहा कि सिंधु जल संधि जल्दबाजी में की गई थी, क्योंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पाकिस्तान को खुश करना चाहते थे। कार्मिक राज्य मंत्री सिंह ने विजय के. सजावल द्वारा लिखी पुस्तक “कश्मीर क्रॉनिकल्स” का यहां कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में विमोचन करने के बाद कहा कि यह संधि दोनों देशों के लिए न्याय करने में असफल रही।उन्होंने कहा कि 2019 के पुलवामा हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक के पश्चात, भारत ने अपनी रक्षा रणनीतियों में बदलाव की शुरुआत की थी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बलों को परिस्थितियों के अनुसार तथा पेशेवर ज्ञान एवं विवेक के आधार पर कार्य करने की पूरी स्वतंत्रता दी थी। उन्होंने कहा कि यह 2014 से पहले की प्रथा के बिल्कुल विपरीत है, जब सेनाओं को केवल सीमित स्वतंत्रता थी और बड़े हमले के लिए उन्हें नयी दिल्ली से राजनीतिक मंजूरी का इंतजार करना पड़ता था। मंत्री ने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर, अब तक की प्रचलित पद्धति में बदलाव का परिणाम है।

यूक्रेन में खूनी खेल बंद करने व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे डोनाल्ड ट्रंप

वॉशिंगटन रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता बेनतीजा रहने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि युद्धविराम के लिए वह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे। उन्होंने कहा, हम राष्ट्रपति पुतिन से यह ‘खूनी खेल’ बंद करने के लिए बात करेंगे। ट्रंप ने शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि विषय होगा “रक्तपात रोकना।” अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह इसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और नाटो के सदस्यों से भी बात करने की योजना बना रहे हैं। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, ‘उम्मीद है कि यह एक उपयोगी दिन होगा।’ एक दिन पहले रूस ने कहा कि तुर्की में यूक्रेन के साथ हुई वार्ता के सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। रूस ने कहा कि हो सकता है दोनों देशों के बीच कोई समझौते की स्थिति बने। तुर्किए में हुई वार्ता में दोनों देशों के बीच केवल 1000 बंदियों की रिहाई पर ही समझौता हो पाया था। शांति वार्ता के तुरंत बाद ही रूस ने यूक्रने की एक यात्री बस पर ड्रोन अटैक कर दिया जिसमें कम से कम 9लोगों की मौत हो गई। वहीं पांच से ज्यादा घायल हो गए। इसके बाद भड़के जेलेंस्की ने कहा कि यूरोप के देशों को रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा देने चाहिए जिससे उसे सीजफायर के लिए तैयार होना पड़े। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को फोन कर शुक्रवार को तुर्किये के शहर इस्तांबुल में यूक्रेन और रूस के प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुई सीधी वार्ता के नतीजों पर चर्चा की। रूस के विदेश मंत्रालय के वेब पोर्टल पर जारी बयान में कहा गया है, ‘मार्को रुबियो ने युद्धबंदियों की अदला-बदली पर हुए समझौतों और युद्धविराम के लिए आवश्यक शर्तों को रेखांकित करते हुए प्रत्येक पक्ष के अपने स्वयं के प्रस्ताव तैयार करने के इरादे का स्वागत किया।’ बयान में कहा गया है, ‘उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में प्रयासों का समर्थन जारी रखने के लिए अमेरिका की तत्परता की पुष्टि की।’ विदेश मंत्री लावरोव ने इस्तांबुल में वार्ता फिर से शुरू करने के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रस्ताव को अंततः स्वीकार करने के लिए यूक्रेन को प्रोत्साहित करने में अमेरिका द्वारा निभाई गई रचनात्मक भूमिका को स्वीकार किया।

Massive fire near Charminar in Hyderabad, eight people including children die

हैदराबाद तेलंगाना में ऐतिहासिक चारमीनार के पास गुलजार हाउस की एक इमारत में रविवार को भीषण आग लग गई। हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई। यहां एक निजी अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आठ लोगों को मृत अवस्था में लाया गया था। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने घटना पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को इमारत में फंसे लोगों को बचाने के लिए सभी आवश्यक उपाय करने का निर्देश दिया। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी भी मौके पर पहुंचे अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, उन्हें सुबह करीब 6.30 बजे एक फोन आया। इसके बाद वे घटनास्थल पर पहुंचे। इस दौरान कई लोग बेहोश पाए गए। उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया। घटनास्थल का दौरा करने के बाद केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने मीडिया से कहा कि पुलिस ने बताया कि आग दुर्घटना में आठ लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में कुछ बच्चे भी शामिल हैं। तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष जी किशन रेड्डी ने कहा, ‘आज चारमीनार के पास गुलजार हाउस की एक इमारत में शॉर्ट सर्किट की वजह से हुए हादसे में कुछ लोगों की मौत हो गई है और कुछ घायल हैं। यह घटना सुबह 6 बजे के आसपास हुई। ऐसी घटनाएं बहुत दुखद होती हैं। यहां के लोगों ने बताया कि दमकल विभाग के पास पूरे उपकरण नहीं थे। मैं केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री से बात करूंगा और इस घटना में जिन लोगों की मृत्यु हुई है उनके परिवारों को आर्थिक सहायता दिलाने की कोशिश करूंगा।’ करीब 20 लोगों को अस्पताल ले जाया गया घटनास्थल पर मौजूद एआईएमआईएम के एक विधायक ने मीडिया को बताया कि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार करीब 20 लोगों को अस्पताल ले जाया गया है। सीएमओ की ओर से जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि घायलों को तुरंत अस्पतालों में भेजने और उचित चिकित्सा सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

ब्रुकलिन ब्रिज से टकराया मैक्सिकन नौसेना का जहाज, 19 लोग घायल, 4 की हालत गंभीर

न्यूयॉर्क अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में शनिवार शाम को एक बड़ा हादसा हुआ जब मैक्सिकन नौसेना का जहाज ‘Cuauhtémoc’ ब्रुकलिन ब्रिज से टकरा गया। इस हादसे में जहाज पर सवार कम से कम 19 लोग घायल हो गए हैं, जिनमें से 4 की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे की पुष्टि न्यूयॉर्क सिटी के मेयर एरिक एडम्स ने एक प्रेस ब्रीफिंग में की है। यह दुर्घटना स्थानीय समयानुसार रात 8:26 बजे हुई, जब जहाज ब्रुकलिन ब्रिज के नीचे से गुजरने का प्रयास कर रहा था। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में हादसे के ठीक पहले के क्षण कैद हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि जहाज ब्रिज के काफी नजदीक पहुंच जाता है और उसके 147 फीट ऊंचे दो मस्तूल पुल से टकरा जाते हैं। जहाज रोशनी से सजा हुआ था और उसपर अधिकतर कैडेट सवार थे। टक्कर के समय जहाज के ऊपरी हिस्से पर कई सफेद ड्रेस में नाविक मौजूद थे, जो टक्कर लगते ही नीचे गिरने लगे। कुछ ने मस्तूल को पकड़कर गिरने से बचने की कोशिश की। घटनास्थल पर मौजूद लोग भी डर के मारे इधर-उधर भागते नजर आए। न्यूयॉर्क फायर डिपार्टमेंट (FDNY) के मुताबिक, दुर्घटना के तुरंत बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। अभी तक सभी घायलों की पहचान उजागर नहीं की गई है, लेकिन सभी चोटें जहाज पर सवार लोगों को ही आई हैं। हादसे की वास्तविक वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। आपको बता दें कि ‘Cuauhtémoc’ मैक्सिकन नौसेना का एक प्रतिष्ठित प्रशिक्षण पोत है, जो अक्सर अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों का दौरा करता है और नौसैनिक कैडेटों को प्रशिक्षण देने के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसमें कुल 277 लोग सवार थे, जिनमें नाविक, अधिकारी और कैडेट शामिल थे।

भारत ने बांग्लादेश पर आर्थिक की स्ट्राइक, आने वाले सामान पर लगाया प्रतिबंध

नई दिल्ली पाकिस्तान की लंका लगाने के बाद अब भारत सरकार ने बांग्लादेश का बैंड बजाने की पूरी तैयारी कर ली है। भारत ने बांग्लादेश पर आर्थिक स्ट्राइक करते हुए आने वाले सामान पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं। पाकिस्तान और चीन परस्त मोहम्मद यूनुस सरकार के खिलाफ भारत ने कड़ा एक्शन लेते हुए  जमीनी रास्तों से रेडिमेड कपड़ों, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे कुछ सामानों के आयात पर शनिवार को प्रतिबंध लगा दिए। सिर्फ न्हावा शेवा (जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, नवी मुंबई) और कोलकाता समुद्री बंदरगाहों के माध्यम से आयात की अनुमति होगी। भारत सरकार के इस फैसले से आने वाले दिनों में बांग्लादेश की युनूस सरकार (Muhammad Yunus) को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वाणिज्य मंत्रालय के तहत कार्यरत विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। हालांकि, यह प्रतिबंध उन बांग्लादेशी सामानों पर लागू नहीं होगा जो भारत के रास्ते नेपाल और भूटान भेजे जाएंगे। इन परिवर्तनों के लिए देश की आयात नीति में एक नया पैराग्राफ जोड़ा गया है, जो बांग्लादेश से भारत में इन वस्तुओं के आयात को तत्काल प्रभाव से विनियमित करेगा। इससे पहले भारत ने बांग्लादेश को दी गई ट्रांसशिपमेंट सुविधा नौ अप्रैल को वापस ले ली थी। अधिसूचना के अनुसार, बांग्लादेश से तैयार कपड़ों का इंपोर्ट अब केवल न्हावा शेवा और कोलकाता बंदरगाहों के माध्यम से ही किया जा सकेगा, न कि किसी भूमि बंदरगाह के माध्यम से। इसके अतिरिक्त, प्रोसेस्ड फूड, फल और फलों के स्वाद वाले या कार्बोनेटेड पेय, कपास और सूती धागे का वेस्ट, प्लास्टिक और PVC तैयार माल (पिगमेंट, डाई, प्लास्टिसाइज़र जैसे कच्चे इनपुट को छोड़कर) और लकड़ी के फर्नीचर सहित अन्य श्रेणियों के सामानों को भी विशिष्ट बंदरगाह प्रतिबंधों के अंतर्गत लाया गया है। इन वस्तुओं को असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम में स्थित लैंड कस्टम्स स्टेशंस (LCS) या इंटीग्रेटिड चेक पोस्ट (ICP) के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में चंग्रबांधा और फुलबारी लैंड कस्टम्स स्टेशंस के माध्यम से इंपोर्ट नहीं किया जा सकता है। हालांकि, डीजीएफटी ने स्पष्ट किया कि ये बंदरगाह प्रतिबंध भारत से होकर नेपाल और भूटान जाने वाले बांग्लादेशी माल पर लागू नहीं होंगे। इसके अलावा, बांग्लादेश से मछली, एलपीजी, खाद्य तेल और कुचल पत्थर का आयात इन प्रतिबंधों से मुक्त रहेगा। यह घटनाक्रम पिछले महीने सरकार द्वारा ट्रांसशिपमेंट सुविधा को समाप्त करने के कदम के बाद हुआ है, जिसके तहत बांग्लादेश को बंदरगाहों और हवाई अड्डों तक पहुंच के लिए इंडियन लैंड पोर्ट का उपयोग करके तीसरे देशों को माल निर्यात करने की अनुमति दी गई थी। नेपाल तथा भूटान को छोड़कर अन्य देशों को बांग्लादेश भारत के रास्ते सामानों का निर्यात नहीं कर सकता। बताया जा रहा है कि यह निर्णय बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस द्वारा हाल ही में चीन में दिए गए विवादास्पद बयान के संदर्भ में लिया गया है। चीन में युनूस ने कहा था कि भारत के सात पूर्वोत्तर राज्य, जो बांग्लादेश के साथ लगभग 1,600 किमी की सीमा साझा करते हैं के पास समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। समुद्री रास्ते के लिए भारत के ये राज्य बांग्लादेश पर निर्भर हैं। युनूस ने यह भी कहा था कि बांग्लादेश इस क्षेत्र में हिंद महासागर का एकमात्र संरक्षक है। यूनुस ने चीन को बांग्लादेश के माध्यम से दुनियाभर में माल भेजने के लिए भी आमंत्रित किया था। युनूस के इस बड़बोलेपन को भारत ने बेहद गंभीरता से लिया। बांग्लादेश के इस दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप भारत के भीतरी इलाकों से पूर्वोत्तर तक पहुंच बंद हो गई। बांग्लादेश के भूमि-बंदरगाह प्रतिबंधों के कारण, पूर्वोत्तर राज्यों को स्थानीय रूप से निर्मित वस्तुओं को बेचने के लिए बांग्लादेश के बाजार तक पहुंच की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे बाजार तक पहुंच केवल प्राथमिक कृषि वस्तुओं तक ही सीमित हो गई है। वहीं दूसरी ओर, बांग्लादेश को पूरे पूर्वोत्तर बाजार तक खुली पहुंच हासिल है। इससे अस्वस्थ निर्भरता पैदा हो रही है तथा पूर्वोत्तर राज्यों में विनिर्माण क्षेत्र का विकास अवरुद्ध हो रहा है। दरअसल भारतीय परिधान क्षेत्र ने पहले भी चिंता जताई थी और सरकार से व्यापार असंतुलन का हवाला देते हुए बांग्लादेश को दिए गए ऐसे ट्रांजिट विशेषाधिकारों को वापस लेने का आग्रह किया था। यह निर्णय बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस द्वारा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर हाल ही में की गई टिप्पणियों का नतीजा बताया जा रहा है। यूनुस ने चीन में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कथित तौर पर कहा था कि भारत के पूर्वी हिस्से में सात भू-आबद्ध राज्य हैं, जिन्हें सात बहनें कहा जाता है और उनके पास समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। हम समुद्र (बंगाल की खाड़ी) के संरक्षक हैं। उन्होंने चीन को दुनिया भर में इसके माध्यम से माल भेजने के लिए आमंत्रित भी किया था।

भारत के सैटेलाइट्स ने सेना को हवा में आ रहे हथियारों की सटीक दिशा-ट्रैजेक्टरी की जानकारी देकर अहम भूमिका निभाई: वी. नारायणन

नई दिल्ली पाकिस्तान की ओर से हाल ही में हुए सैन्य संघर्ष के दौरान ड्रोन और मिसाइलों की बौछार के बीच भारत का एयर डिफेंस सिस्टम पूरी मजबूती से खड़ा रहा और एक प्रभावी ढाल का काम किया. भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो (ISRO) ने बताया कि भारत के सैटेलाइट्स ने सशस्त्र बलों को हवा में आ रहे हथियारों की सटीक दिशा-ट्रैजेक्टरी की जानकारी देकर अहम भूमिका निभाई. 9 और 10 मई की रात को भारत के एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम ‘आकाशतीर’ और रूस से मंगाए गए S-400 सिस्टम ने मिलकर एक अदृश्य कवच का निर्माण किया, जिसने पाकिस्तानी हमलों को भारतीय नागरिक और सैन्य ठिकानों तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया और उन्हें नष्ट कर दिया. ISRO के पास 72 सेमी रेजोल्यूशन वाले कैमरे की नजर ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने बताया कि कैसे भारत की सैटेलाइट्स ने कठिन परिस्थितियों में सशस्त्र बलों की मदद की और तत्काल खतरे को टालने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने कहा, ‘हमारे सभी सैटेलाइट्स ने पूरी सटीकता के साथ काम किया. जब हमने शुरुआत की थी, तब हमारे कैमरों की रेजोल्यूशन 36 से 72 सेंटीमीटर के बीच थी. लेकिन अब हमारे पास चंद्रमा पर ‘ऑन-ऑर्बिटर हाई रेजोलूशन कैमरा’ है, जो दुनिया का सबसे बेहतरीन रेजोलूशन कैमरा है. इसके अलावा हमारे पास ऐसे कैमरे भी हैं जो 26 सेंटीमीटर रेजोलूशन तक की स्पष्ट तस्वीरें दिखा सकते हैं.’ रणनीतिक उद्देश्यों से काम कर रहे इसरो के सैटेलाइट्स 11 मई को इम्फाल में सेंट्रल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (CAU) के 5वें दीक्षांत समारोह के दौरान नारायणन ने कहा कि कम से कम 10 सैटेलाइट्स लगातार रणनीतिक उद्देश्यों के लिए काम कर रहे हैं, ताकि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. नारायणन की यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई, के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. फिलहाल एक्टिव हैं 50 सैटेलाइट्ल   उन्होंने यह भी कहा, ‘हम जो भी सैटेलाइट्स भेजते हैं, उनका मकसद लोगों की भलाई होता है, जिसमें सुरक्षा भी शामिल है. फिलहाल कम से कम 50 सैटेलाइट्ल टीवी ब्रॉडकास्टिंग, टेलीकम्यूनिकेशन और सुरक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं.’ नारायणन ने बताया कि मंगलयान ऑर्बिटर मिशन के बाद इसरो अब एक लैंडिंग मिशन पर भी काम कर रहा है, जिसे लगभग 30 महीनों में लॉन्च किए जाने की योजना है. इसरो प्रमुख नारायणन गुरुवार को चेन्नई पहुंचे, जहां PSLV-C61 रॉकेट लॉन्च की अंतिम तैयारियां चल रही हैं. यह इसरो का 101वां मिशन होगा.  

पुरी से हटिया आ रही तपस्विनी एक्सप्रेस पर हुआ पथराव, यात्रियों में दहशत

राउरकेला अज्ञात बदमाशों ने झारसुगुड़ा जिले के लपंगा स्टेशन के पास पुरी से हटिया आ रही तपस्विनी एक्सप्रेस पर सुबह 5:45 बजे कथित तौर पर पथराव किया। आरपीएफ से मिली जानकारी के अनुसार बदमाशों द्वारा पथराव किए जाने के कारण पत्थर उक्त ट्रेन के एसी कोच संख्या-बी-7 की सीट संख्या-15 की अगली खिड़की पर लगा। जिससे एसी बोगी का शीशा टूट गया और कोच के अंदर कांच के टुकड़े बिखर गए। घटना के बाद रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवान झारसुगुड़ा में घटनास्थल पर पहुंचे और जांच शुरू की। आरपीएफ ने पुष्टि की है कि किसी यात्री को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। पथराव के पीछे का मकसद अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। इसमें शामिल लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में पुरी-हटिया तपस्विनी एक्सप्रेस के कोच अटेंडेंट केसी नायक ने बताया कि वे गेट की ओर जा रहे थे। तभी कुछ यात्री उनके पास आए और बताया कि वे अपनी सीट पर बैठे थे, तभी यह घटना घटी। जिससे वे डर गए। शीशा टूटने के साथ ही शीशे का टुकड़ा भी सीट पर गिर गया। कोच अटेंडेंट ने घटना की जानकारी उक्त एसी कोच के टीटीई को दी। टीटीई उक्त कोच में पहुंचे और टूटे हुक को देखकर झारसुगुड़ा स्टेशन प्रबंधक को घटना की जानकारी दी। लेकिन राजगांगपुर और राउरकेला में भी उक्त ट्रेन के एसी बोगी का शीशा नहीं बदला गया। हटिया पहुंचने के बाद शीशा बदलने की जानकारी कोच अटेंडेंट ने दी है। यह कोई नई घटना नहीं है। इसके पहले भी 26 मार्च 2025 को उपद्रवियों ने पानपोष-कलुंगा स्टेशन के बीच राउरकेला-पुरी वंदे-भारत एक्सप्रेस ट्रेन में पथराव कर बोगी का शीशा तोड़ दिया था। लेकिन अब तक राउरकेला आरपीएफ उक्त आरोपियों को पकड़ नहीं पाई है। एक बार फिर इसी रूट की तपस्विनी एक्सप्रेस में उपद्रवियों ने पथराव कर शीशे तोड़ दिए, जिससे ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

समारोह भारत में विविधता की सच्ची तस्वीर है, हमारा संविधान हमारे देश की विविधता के लिए बहुत उपयुक्त है: CJI BR गवई

नई दिल्ली चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बीआर गवई के सम्मान में बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से शनिवार को अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। इस सम्मान समारोह में बीआर गवई ने अपने 40 साल के वकालत के करियर के बारे में कहा कि मैं वे वकील नहीं बनना चाहते थे। उनका सपना आर्किटेक्ट बनने का था। अभिनंदन समारोह में उन्होंने ‘बार काउंसिल’ का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह समारोह भारत में विविधता की सच्ची तस्वीर है। हमारा संविधान हमारे देश की विविधता के लिए बहुत उपयुक्त है। हमारे देश में क्षेत्रीय, भौगोलिक, आर्थिक विविधता है। जब मैं अपनी 40 साल की यात्रा पर विचार करता हूं, तो पाता हूं कि मैं अपनी इच्छा से वकील नहीं बना। मैं पहले आर्किटेक्ट बनना चाहता था। मैं आज भी अपने उस पैशन को फॉलो करता हूं क्योंकि मैं बॉम्बे हाई कोर्ट की इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी का अध्यक्ष था। उन्होंने कहा कि मेरे पिता ने सामाजिक क्रांति के लिए बीआर अंबेडकर के आंदोलन में भाग लिया। स्नातक होने के बाद, वह वकील बनना चाहते थे, लेकिन जेल में रहने के कारण वह एलएलबी की परीक्षा नहीं दे सके। इसलिए, वह चाहते थे कि उनका एक बेटा वकील बने। मैंने उनके सपने को पूरा किया। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश गवई ने हाल ही में कहा कि सीजेआई की भूमिका संस्था के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण की मांग करती है। सीजेआई के कर्तव्य केवल सर्वोच्च न्यायालय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे देश में संपूर्ण न्यायिक प्रणाली तक फैले हुए हैं। पूरे कानूनी समुदाय की ओर से, मैं उन्हें दूरदर्शी लक्ष्यों की पूर्ति के लिए पूर्ण सहयोग और प्रतिबद्धता का आश्वासन देता हूं। मैं राष्ट्र और हमारी न्यायिक प्रणाली के लिए न्यायमूर्ति गवई की सेवा के लिए उनके प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। बता दें कि 14 मई को जस्टिस बीआर गवई ने भारत के 52वें सीजीआई के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शपथ दिलाई। सीजीआई संजीव खन्ना का कार्यकाल 13 मई को खत्म हो गया था। उनका कार्यकाल सिर्फ सात महीने का है।

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा- अब वह समय नहीं रहा जब हम अपने हितों के विरोधी देशों को सशक्त करते रहें

नई दिल्ली भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रहित, सुरक्षा और शिक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित छात्रों, शिक्षकों और गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित करते हुए कहा कि अब वह समय नहीं रहा जब हम अपने हितों के विरोधी देशों को यात्रा या आयात के माध्यम से सशक्त करते रहें। जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “अब समय आ गया है जब हममें से प्रत्येक को आर्थिक राष्ट्रवाद के बारे में गहराई से सोचना चाहिए। हम अब उन देशों की अर्थव्यवस्थाओं को सुधारने के लिए यात्रा या आयात के माध्यम से अपनी भागीदारी के कारण खर्च नहीं कर सकते जो संकट के समय हमारे खिलाफ खड़े हो जाते हैं। हर व्यक्ति राष्ट्र की सुरक्षा में मदद करने के लिए सशक्त है और हम व्यापार, व्यवसाय, वाणिज्य, विशेष रूप से सुरक्षा के मुद्दों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए मेरा दृढ़ विश्वास है कि हमें हमेशा एक बात ध्यान में रखनी चाहिए, और वह है: ‘राष्ट्र प्रथम’। हर चीज को राष्ट्रवाद के प्रति समर्पण के आधार पर देखा जाना चाहिए।” भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर की सराहना करते हुए धनखड़ ने भारत के सशस्त्र बलों की सराहनी की। उन्होंने कहा कि मैं ऑपरेशन सिंदूर की उल्लेखनीय सफलता के लिए सभी सशस्त्र बलों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व को अपना सलाम करता हूं। यह पहलगाम में हुई बर्बरता के खिलाफ एक उल्लेखनीय जवाब था। 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद हमारे नागरिकों पर यह सबसे घातक हमला था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के हृदय स्थल बिहार से पूरे विश्व बिरादरी को संदेश भेजा। वे खोखले शब्द नहीं थे। दुनिया को अब एहसास हो गया है कि जो कहा जाता है वह हकीकत है। अब कोई सबूत नहीं मांग रहा है। दुनिया ने देखा और स्वीकार किया है। हमने यह गाथा देखी है जब सशस्त्र बलों और सैन्य शक्ति और राजनीतिक शक्ति के साथ भारत द्वारा सिंदूर को उत्कृष्टता से न्याय दिलाया जाता है।” धनखड़ ने कहा कि भारत के आतंकवाद विरोधी प्रयासों में एक नया मानक स्थापित हुआ है। युद्ध की कार्यप्रणाली और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक नया मानक स्थापित हुआ है। भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान की सीमा के अंदर बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद को निशाना बनाया। अंतरराष्ट्रीय सीमा से परे आतंकियों के अड्डों को निशाना बनाया गया। इसे दुनिया ने देखा और स्वीकार किया है। यह सीमापार की गई भारत की अब तक की सबसे बड़ी स्ट्राइक है। यह स्ट्राइक सावधानीपूर्वक और सटीक तरीके से की गई थी, ताकि आतंकवादियों को छोड़कर किसी को कोई नुकसान न पहुंचे। धनखड़ ने 2 मई 2011 को अमेरिकी ऑपरेशन का जिक्र करते हुए कहा कि जब एक वैश्विक आतंकवादी ने 2001 में अमेरिका के अंदर 11 सितंबर के हमले को अंजाम दिया, तब अमेरिका ने उसके साथ भी ऐसा ही किया। अब भारत ने भी वैश्विक समुदाय की जानकारी में ऐसा किया है। उन्होंने आगे कहा कि हम एक राष्ट्र के रूप में अद्वितीय हैं। दुनिया का कोई भी राष्ट्र 5,000 साल पुरानी परंपराओं पर गर्व नहीं कर सकता। हमें पूर्व और पश्चिम के बीच की खाई को पाटने की जरूरत है, न कि उसे तोड़ने की। धनखड़ ने आगे कहा कि हम राष्ट्र-विरोधी आख्यानों को कैसे स्वीकार या अनदेखा कर सकते हैं? विदेशी विश्वविद्यालयों का हमारे देश में आना ऐसी चीज है जिसे छानने की जरूरत है। इसके लिए गहन चिंतन की जरूरत है। यह ऐसी चीज है जिसके बारे में हमें बेहद सावधान रहना होगा। शिक्षा और शोध के व्यावसायीकरण के खिलाफ भी उपराष्ट्रपति ने चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह देश शिक्षा के व्यावसायीकरण और वस्तुकरण को बर्दाश्त नहीं कर सकता। हमारी सभ्यता के अनुसार शिक्षा और स्वास्थ्य पैसा कमाने के क्षेत्र नहीं हैं। ये समाज को वापस देने के क्षेत्र हैं। हमें समाज के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करना होगा। उन्होंने शोध के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को पूरी तरह से कॉरपोरेट द्वारा वित्त पोषित किया जाना चाहिए। सीएसआर फंड को प्राथमिकता दी जानी चाहिए क्योंकि शोध में निवेश मौलिक है।

2024 में खाद्य असुरक्षा और कुपोषण की स्थिति और खराब, 53 देशों में 29.5 करोड़ लोग भूख से प्रभावित: संयुक्त राष्ट्र

रोम संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (फाओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में खाद्य असुरक्षा और कुपोषण की स्थिति और खराब हुई, जिससे 53 देशों में 29.5 करोड़ लोग भूख से प्रभावित रहे। साल 2023 की तुलना में पूरी दुनिया में भूख से प्रभावित लोगों की संख्या में 1.37 करोड़ की वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा दुनिया के सबसे कमजोर क्षेत्रों में तीव्र खाद्य असुरक्षा में लगातार छठी वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है। खाद्य संकटों पर साल 2025 में वैश्विक नेटवर्क में यह रिपोर्ट छपी थी। यह एक अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन है जिसमें खाद्य और कृषि संस्थान, संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम और विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संगठन शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इन आंकड़ों को दुनिया के लिए बेहद खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में भूख और कुपोषण के फैलने की दर हमारी नियंत्रण क्षमता से कहीं अधिक है। हालांकि वैश्विक स्तर पर उत्पादित अन्न का एक-तिहाई बर्बाद हो जाता है। एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए फंड में कमी होना लगातार भूखमरी जैसी वैश्विक समस्या को और जटिल बना रहा है। तीव्र खाद्य असुरक्षा आम तौर पर कई कारकों के संयोजन से उत्पन्न होती है। इसमें गरीबी, आर्थिक झटके और मौसम में असंतुलन अहम हैं। आबादी के कुछ हिस्से को भूख के अलावा कुछ दूसरी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। साल 2024 में सूडान के कुछ हिस्सों में अकाल की पुष्टि हुई थी। गाजा पट्टी, दक्षिण सूडान, हैती और माली में खाद्य असुरक्षा भयावह स्तर पर दर्ज की गई थी। गाजा पट्टी में, मानवीय सहायता में वृद्धि की वजह से अकाल की स्थिति नहीं बनी। रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान और नाकाबंदी जारी रही तो मई और सितंबर 2025 में जोखिम बढ़ सकता है। समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में जबरन विस्थापित किए गए 12.8 करोड़ लोगों में से लगभग 9.5 करोड़ – जिसमें आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्ति, शरण चाहने वाले और शरणार्थी शामिल हैं – पहले से ही खाद्य संकट से जूझ रहे देशों में रह रहे थे। इसके अलावा, आर्थिक झटकों ने 15 देशों में खाद्य असुरक्षा को जन्म दिया, जिससे 5.94 करोड़ लोग प्रभावित हुए, मौसम में बदलाव की घटनाओं ने भी 18 देशों को संकट में डाल दिया, जिससे 9.6 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हुए, विशेष रूप से दक्षिण एशिया, अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में लोग प्रभावित हुए। फाओ के महानिदेशक क्वो डोंग्यू ने चेतावनी दी कि तीव्र खाद्य असुरक्षा एक सतत वास्तविकता बन रही है, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में। उन्होंने कहा, “आगे का रास्ता स्पष्ट है: आपातकालीन कृषि में निवेश बहुत अहम है। कृषि में निवेश से दीर्घकालिक समाधान निकाला जा सकता है।

आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों का नया ऑपरेशन: सुरक्षा बलों ने 11 आतंकियों को टारगेट पर रखा, जानें कौन-कौन है शामिल

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने  11 आतंकियों को टारगेट पर रखा है। इन 11 आतंकियों में से 9 स्थानीय (कश्मीर के) हैं और 2 विदेशी आतंकवादी हैं। रोपोर्ट के अनुसार इन आतंकियों में से 3 वही हैं जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में शामिल थे। ये आतंकी लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसे खतरनाक आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं। सुरक्षा बलों ने बीते 48 घंटों में इस ऑपरेशन के दौरान 6 आतंकियों को मार गिराया है। यह ऑपरेशन अब भी जारी है और बाकी बचे आतंकियों की तलाश की जा रही है। सेना, पुलिस और अन्य एजेंसियां मिलकर इस मिशन को अंजाम दे रही हैं। इन 11 आतंकियों के नाम इस प्रकार है: 1.  आदिल रहमान सोपोर का रहने वाला है ये लश्कर का कमांडर है। 2. अहसान अहमद शेख पुलवामा का रहने वाला है, लश्कर ए तैयबा से संबंधित है। 3. हाजिर नसीर पुलावामा का रहने वाला हैं लश्कर से तार जुड़े हैं। 4. आफिर अहमद खांडे शोपियां का रहने वाला है। 5. नसीर अहमद वादी शोपियां का रहने वाला, लश्कर का आदमी। 6. जुबैर अहमद बानी, अनंतनाग 7. हारूल राशिद गनई, अनंतनाग 8. जाकिर अहमद गनई कुलगाम का रहने वाला है, लश्कर से जुड़ा। 9. आदिल हुसैन थोकर पहलाम हमले में शामिल, लश्कर से संबंधित। 10. हासिम मूसा पहलगाम हमले में शामिल, पाकिस्तान का रहने वाला। 11. अली भाई उर्फ तल्हा भाई पहलगाम हमले में शामिल पाकिस्तान का रहने वाला है।

गाजा में युद्ध, बगदाद में रणनीति: ट्रंप की छाया में अरब देशों की कूटनीतिक चाल तेज

बगदाद इराक की राजधानी बगदाद में शनिवार को अरब लीग का वार्षिक शिखर सम्मेलन आरंभ हो गया, जिसमें क्षेत्र के कई राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए हैं। सम्मेलन का केंद्रबिंदु एक बार फिर  गाजा में जारी युद्ध और उससे उत्पन्न मानवीय संकट है। इससे पहले मार्च में काहिरा में हुए  आपातकालीन शिखर सम्मेलन में भी अरब देशों ने गाजा के पुनर्निर्माण की योजना पर चर्चा की थी, जिसमें यह सुनिश्चित करने की बात कही गई थी कि लगभग 20 लाख गाजा निवासियों को फिर से विस्थापित न किया जाए। जनवरी में इजराइल द्वारा हमास के साथ संघर्षविराम समाप्त किए जाने  के दो महीने बाद यह सम्मेलन हो रहा है। तब से अब तक गाजा में इजरायली सेना ने कई बड़े सैन्य अभियान चलाए हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमास को पूरी तरह समाप्त करने की कसम खाई है और बल प्रयोग को तेज कर दिया है।इस सम्मेलन से पहले इस सप्ताह की शुरुआत में  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  ने क्षेत्र का दौरा किया, जिसने सम्मेलन की राजनीति पर असर डाला। ट्रंप की यात्रा से पहले उम्मीद थी कि वे  गाजा में नए युद्धविराम की दिशा में कोई पहल करेंगे, लेकिन ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ। हालांकि, ट्रंप ने सीरिया के नए राष्ट्रपति अहमद अल-शरा  से मुलाकात कर चर्चा में जरूर रहे। उन्होंने शरा को आश्वासन दिया कि अमेरिका जल्द ही सीरिया पर लगे प्रतिबंधों की समीक्षा करेगा। अहमद अल-शरा वही व्यक्ति हैं जिन्हें पहले अबू मोहम्मद अल-गोलानी  के नाम से जाना जाता था  जो कि कभी अल-कायदा से जुड़े एक कट्टरपंथी नेता रहे हैं और 2003 में अमेरिकी हमले के दौरान इराक में अमेरिकी सेना के खिलाफ सक्रिय थे। अब भी उन पर इराक में आतंकवाद से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी वारंट जारी है।  

इसरो कल पीएसएलवी-सी61के माध्यम से खास ईओएस-09 (RISAT-1B) सैटेलाइट को प्रक्षेपित करने जा रहा

नई दिल्ली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एक बार फिर अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए तैयार है। इसरो 18 मई यानी कल अपने विश्वसनीय पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी-सी61) के माध्यम से खास ईओएस-09 (RISAT-1B) सैटेलाइट को प्रक्षेपित करने जा रहा है। यह प्रक्षेपण सुबह 5:59 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होगा। इस सैटेलाइट के साथ भारत की रात के समय और हर मौसम में निगरानी की क्षमता को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बादलों के आर-पार देखने की क्षमता यह उपग्रह न केवल बादलों के आर-पार देख सकता है, बल्कि रात के अंधेरे में भी हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें ले सकता है। इसके जरिए भारत की अंतरिक्ष से निगरानी क्षमता को और अधिक मजबूती मिली है, खासतौर पर उस समय जब पाकिस्तान के साथ सीमा पर भले ही अभी शांति हो, लेकिन भारत हर स्थिति को लेकर सतर्क बना हुआ है। यह सैटेलाइट आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसरो के भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी (PSLV) के जरिए छोड़ी जाएगी। यह इसरो की अब तक की 101वीं बड़ी रॉकेट लॉन्चिंग है। EOS-9 का वजन 1,696 किलोग्राम है और इसे पृथ्वी की सतह से करीब 500 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। कम रोशनी में भी जमीन की सटीक तस्वीरें इस सैटेलाइट को इसरो के यू आर राव सैटेलाइट सेंटर, बेंगलुरु में पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है। इसमें C-बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो हर मौसम में और कम रोशनी में भी जमीन की सटीक तस्वीरें लेने में सक्षम है। यह “जासूसी सैटेलाइट” भारत के उस सैटेलाइट सिस्टम का हिस्सा बनेगी, जिसमें पहले से ही 50 से अधिक सैटेलाइट अंतरिक्ष में तैनात हैं। इनमें से सात रडार सैटेलाइट्स विशेष रूप से सीमा क्षेत्रों की निगरानी में सक्रिय हैं, जो अप्रैल 22 को हुए पहगाम हमले और उसके बाद दोनों देशों के बीच हुई सैन्य गतिविधियों के दौरान अहम भूमिका में रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों को काफी मदद मिलेगी EOS-9 से पहले भारत के पास जो प्रमुख इमेजिंग सैटेलाइट Cartosat-3 थी, वह रात में तस्वीरें नहीं ले पाती थी। EOS-9 इस कमजोरी को दूर करेगी और इससे मिली तस्वीरें पहले से ज्यादा स्पष्ट और सटीक होंगी, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को काफी मदद मिलेगी। हाल ही में इसरो अध्यक्ष डॉ वी. नारायणन ने इस मौके पर कहा, “कम से कम 10 सैटेलाइट चौबीसों घंटे देश की सुरक्षा में लगे हैं। भारत को अपनी 7,000 किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा और पूरे उत्तरी क्षेत्र की निगरानी करनी होती है। यह सैटेलाइट और ड्रोन तकनीक के बिना संभव नहीं है।” वहीं, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने इस लॉन्च पर कहा, “सटीकता, टीमवर्क और इंजीनियरिंग भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को शक्ति देती हैं।” इस ऐतिहासिक लॉन्च को देखने के लिए कई सांसद और वैज्ञानिक श्रीहरिकोटा में मौजूद रहे। मुख्य बातें:     अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का यह 101वां मिशन है।     शनिवार सुबह सात बजकर 59 मिनट पर उलटी गिनती शुरू हो गई। कुल 22 घंटे की उलटी गिनती है।     सैटेलाइट का नाम: EOS-9     वजन: 1,696 किलोग्राम     लॉन्च व्हीकल: PSLV     स्थान: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा     खासियत: बादलों के आर-पार और रात में भी हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग     तकनीक: C-बैंड Synthetic Aperture Radar (SAR)     निर्माण: यू आर राव सैटेलाइट सेंटर, बेंगलुरु राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में योगदान यह लॉन्च भारत की सुरक्षा और अंतरिक्ष तकनीक दोनों के लिए मील का पत्थर है। ईओएस-09 की उन्नत रडार इमेजिंग क्षमता इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बनाती है। यह सैटेलाइट भारत की सीमाओं और तटीय क्षेत्रों की 24×7 निगरानी करने में सक्षम होगी, जिससे सैन्य और रक्षा तैयारियों को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, यह सैटेलाइट कृषि, वानिकी, बाढ़ निगरानी, मृदा नमी मूल्यांकन, भूविज्ञान, समुद्री बर्फ और तटीय निगरानी जैसे नागरिक अनुप्रयोगों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कुल मिलाकर इस मिशन का उद्देश्य देश भर में विस्तारित तात्कालिक समय पर होने वाली घटनाओं की जानकारी जुटाने की आवश्यकता को पूरा करना है। पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट-09 वर्ष 2022 में प्रक्षेपित किए गए ईओएस-04 जैसा ही एक सैटेलाइट है। पीएसएलवी-सी61 रॉकेट 17 मिनट की यात्रा के बाद ईओएस-09 उपग्रह को सूर्य तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा (एसएसपीओ) में स्थापित कर सकता है। सैटेलाइट के वांछित कक्षा में अलग होने के बाद वैज्ञानिक बाद में कक्षा की ऊंचाई कम करने के लिए वाहन पर ‘ऑर्बिट चेंज थ्रस्टर्स’ (ओसीटी) का उपयोग करेंगे। इसरो ने बताया कि ईओएस-09 की मिशन अवधि पांच वर्ष है। वैज्ञानिकों के अनुसार, सैटेलाइट को उसकी प्रभावी मिशन अवधि के बाद कक्षा से बाहर निकालने के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन आरक्षित कर लिया गया है ताकि इसे दो वर्षों के भीतर कक्षा में नीचे उतारा जा सके, जिससे मलबा-मुक्त मिशन सुनिश्चित हो सके।

‘मेड इन चाइना’ पर छाया संकट, भारत से भिड़ने की कीमत चुका रहीं चीन की हथियार कंपनियां, भारत की ताकत चीन की कमजोरी

नई दिल्ली 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने करारा जवाब दिया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाकर उन्हें तबाह कर दिया। इस जवाबी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने चीन और तुर्की से मिले हथियारों का इस्तेमाल कर भारत पर पलटवार करने की कोशिश की। लेकिन भारतीय डिफेंस सिस्टम के आगे उसकी ये सारी चालें नाकाम हो गईं। भारत की ताकत बनी चीन की कमजोरी पाकिस्तान ने भारत पर हमला करने के लिए जिन चीनी फाइटर जेट्स, मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया, वे भारतीय रक्षा प्रणाली के सामने फेल हो गए। एयर ऑपरेशन के डायरेक्टर जनरल, एयर मार्शल ए के भारती के मुताबिक, भारत का एयर डिफेंस सिस्टम आज इतना मजबूत है कि उसे भेदना किसी के बस की बात नहीं। उन्होंने कहा कि चाहे तुर्की के ड्रोन हों या चीन के फाइटर जेट, सब भारतीय टेक्नोलॉजी के सामने टिक नहीं पाए। शेयर बाजार में गिर गए चीन की हथियार कंपनियों के शेयर भारत के इस ताकतवर जवाब का असर सीधे चीन की हथियार कंपनियों पर पड़ा है। खासकर उन कंपनियों पर, जिनके बनाए हथियार पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ इस्तेमाल किए थे। एविक चेंगदू एयरक्राफ्ट : इस कंपनी के बनाए जे-10सी फाइटर जेट का पाकिस्तान ने इस्तेमाल किया। इसके बाद कंपनी के शेयरों में लगातार तीन कारोबारी दिनों तक करीब 9% की गिरावट दर्ज की गई। झूझोउ होंगडा इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्प : इस कंपनी ने हवा से हवा में मार करने वाली PL-15 मिसाइल बनाई थी, जिसे पाकिस्तान ने भारतीय सेना को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया। इसके शेयरों में 10% तक की गिरावट आई। चाइना एयरोस्पेस टाइम्स इलेक्ट्रॉनिक्स: दो दिन के भीतर इसके शेयरों में 7% की गिरावट हुई। इसके अलावा, ब्राइट लेजर टेक्नोलॉजीज, नॉर्थ इंडस्ट्रीज ग्रुप, चाइना स्पेससैट और AVIC एयरक्राफ्ट जैसी कई अन्य चीनी कंपनियों के शेयर भी 5-10% तक टूट गए। निवेशकों का डगमगाया भरोसा अब निवेशकों को लगने लगा है कि चीनी हथियारों की गुणवत्ता उतनी भरोसेमंद नहीं जितनी दिखाई जाती है। यही वजह है कि ‘मेड इन चाइना’ टैग को लेकर दुनियाभर में सवाल खड़े हो रहे हैं, खासकर तब जब उन हथियारों का प्रदर्शन युद्ध के मैदान में कमजोर साबित हो। भारत की डिफेंस कंपनियों का जलवा जहां एक ओर चीन की हथियार कंपनियों को झटका लगा, वहीं भारत की डिफेंस कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखी गई। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स ने महज तीन कारोबारी दिनों में ही 10% की बढ़त दर्ज की। आइडियाफोर्ज, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स (GRSE), कोचीन शिपयार्ड और भारत डायनेमिक्स जैसी कंपनियों के शेयरों में एक हफ्ते के भीतर 38% तक का उछाल आया। ‘मेड इन इंडिया’ बन रहा भरोसे का नाम भारत के मजबूत डिफेंस सिस्टम और तकनीकी आत्मनिर्भरता ने ‘मेड इन इंडिया’ को एक नई पहचान दी है। अब निवेशक और अंतरराष्ट्रीय ग्राहक भारतीय रक्षा कंपनियों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। घरेलू हथियार निर्माण और टेक्नोलॉजी को लेकर भारत का रुख पहले से कहीं अधिक मज़बूत हो गया है।  

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