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India जल्द बनने वाला है दुनिया की तीसरी बड़ी इकॉनमी, जापान की इकनॉमी की ग्रोथ रेट अभी शून्‍य से भी नीचे

नई दिल्‍ली भारत ने हाल में ही जर्मनी को पीछे छोड़कर चौथी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था का खिताब हासिल कर लिया है और अब उसकी निगाह तीसरी बड़ी अव्‍यवस्‍था बनने पर है. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था से आगे फिलहाल जापान, चीन और अमेरिका ही बचे हैं. इसमें भी जापान की हालत लगातार खराब होती जा रही है. जापान सरकार ने  एक रिपोर्ट जारी कर बताया कि उसकी सालाना ग्रोथ रेट 2025 की पहली तिमाही में गिरकर 0.7 फीसदी पर आ गई है, जबकि भारत अभी 6 फीसदी से ज्‍यादा की दर से आगे बढ़ रहा है. जापान सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, जापान का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (या किसी देश की वस्तुओं व सेवाओं का माप) जनवरी-मार्च में अक्टूबर-दिसंबर 2024 (पिछली तिमाही) की तुलना में अनुमान से भी ज्‍यादा 0.2 फीसदी सिकुड़ गया है. पिछले एक साल में पहली बार इसमें संकुचन दर्ज किया गया. संकुचन का मतलब है कि जापान की ग्रोथ रेट शून्‍य से भी नीचे चली गई है और यह अर्थव्‍यवस्‍था का आकार बढ़ने के बजाय घटने लगा है. कहां से कहां पहुंच गया जापान रिपोर्ट के अनुसार, जापान की अर्थव्यवस्था 2024 की अंतिम तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 2.4 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ रही थी. निर्यात में 2.3 फीसदी की दर से गिरावट दिख रही, जबकि उपभोक्ता खर्च स्थिर रहा और पूंजी निवेश में 5.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इससे पहले जनवरी-मार्च, 2024 की तिमाही में भी जापान की इकनॉमी शून्‍य से नीचे जाकर माइनस 0.4 फीसदी रही थी. इस तरह, सालाना आधार पर देखा जाए तो अभी जापान की अर्थव्‍यवस्‍था माइनस 0.7 फीसदी की दर से घट रही है. मंदी की तरफ जा रहा जापान जापान की मुश्किलें अभी खत्‍म नहीं हुई हैं, बल्कि आगे और चुनौतियां आ रही हैं. दरअसल, अमेरिकी शुल्क से जापान के बड़े निर्यातकों, खासतौर पर मोटर वाहन विनिर्माताओं को नुकसान होने की आशंका है. न केवल जापान से भेजे जाने वाले उत्पादों के लिए, बल्कि मैक्सिको और कनाडा जैसे अन्य देशों से भी. जापान के अधिकारियों ने माना कि प्रतिक्रिया की योजना बनाना भी एक चुनौती है, क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना रुख बदलते रहते हैं. ऐसे में जापान की तरफ से कोई प्रस्‍ताव देना भी बड़ा मुश्किल काम है. अगर टैरिफ का असर दिखा तो 2025 की दूसरी तिमाही में भी जापान की ग्रोथ रेट शून्‍य से नीचे रहने की आशंका है, जिससे यह तकनीकी रूप से मंदी में चला जाएगा. अभी कहां खड़ा है जापान साल 2025 में जापान की जीडीपी 4.39 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है. इस दौरान जापान की पर्चेजिंग पॉवर 6.77 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है. इस लिहाज से देखा जाए तो जापान अभी तीसरी अर्थव्‍यवस्‍था बना हुआ है. साल 2024 में जापान की पर्चेजिंग पॉवर 6.31 ट्रिलियन डॉलर रही थी. अब जबकि जापान की इकनॉमी ग्रोथ शून्‍य से भी नीचे चली गई है तो उसकी अर्थव्‍यवस्‍था का आकार भी कम हो सकता है. कहां खड़ा है भारत अगर भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की बात करें तो अभी इसका आकार 4.3 ट्रिलियन डॉलर है. तमाम रेटिंग एजेंसियों ने अनुमान लगाया है कि भारत हर डेढ़ साल में अपनी इकनॉमी में 1 ट्रिलियन डॉलर जोड़ सकता है. इस तरह, देखा जाए तो अगले 2 से 3 महीने में ही भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था जापान को पीछे छोड़ देगी. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की ग्रोथ रेट अभी 6.5 फीसदी के आसपास चल रही है, जबकि जापान शून्‍य से भी नीचे चला गया है. लिहाजा जल्‍द ही भारत इसे पीछे छोड़ते हुए तीसरी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बन जाएगा. भारत की तेज गति भारत को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था तक पहुंचने में 60 साल का समय लगा, जबकि 1 से 2 ट्रिलियन डॉलर का सफर महज 7 साल में पूरा किया. इसके बाद 3 और 4 ट्रिलियन डॉलर की इकनॉमी बनने में भी सिर्फ 4 साल का समय लगा. अब तो ग्रोथ इतनी तेज हो गई है कि भारत हर डेढ़ साल में अपनी इकनॉमी को 1 ट्रिलियन डॉलर बढ़ाने की क्षमता रखता है. आईएमएफ ने क्‍या लगाया अनुमान आईएमएफ ने साल 2025 में दुनिया की टॉप-5 इकनॉमी के साइज का अनुमान जारी किया है. इसमें सबसे ऊपर 30.5 ट्रिलियन डॉलर के साथ अमेरिका है. दूसरे पायदान पर 19.2 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन के रहने का अनुमान है. जर्मनी की इकनॉमी 5 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे पायदान पर और भारत की इकनॉमी 4.34 ट्रिलियन डॉलर के साथ चौथे तो जापान की इकनॉमी 4.38 ट्रिलियन डॉलर के साथ पांचवें पायदान पर रहने का अनुमान है.  

भारत की तरफ से चिनाब नदी पर बनी रणबीर नहर की लंबाई को दोगुना किया जा सकता है, पाकिस्तान में मची दहशत

इस्लामाबाद पहलगाम आतंकी हमले के अगले ही दिन से भारत ने पाकिस्तान के साथ 6 दशकों से चले आ रहे सिंधु जल समझौते को रोकने का ऐलान किया था। अब तक इस समझौते का कोई खास असर पाकिस्तान पर नहीं दिखा है क्योंकि सिंधु समेत सभी नदियों के पानी के बहाव को मोड़ने कोई नई व्यवस्था नहीं की गई है। लेकिन भारत जिस तरह से नई परियोजनाओं पर काम कर रहा है, उससे पाकिस्तान में खौफ की स्थिति है। इस बीच पाकिस्तानी अखबार ने चिंता जताई है कि भारत की तरफ से चिनाब नदी पर बनी रणबीर नहर की लंबाई को दोगुना किया जा सकता है। फिलहाल इस नहर की लंबाई 120 किलोमीटर है। पाकिस्तान को डर सता रहा है कि यदि इस परियोजना को पूरा कर लिया गया तो फिर उसके यहां पानी की किल्लत हो जाएगी। डॉन ने रॉयटर्स के हवाले से जो खबर प्रकाशित की है, उसका शीर्षक ही है- नए सिंधु नदी प्रोजेक्ट के माध्यम से पाकिस्तान की वाटर सप्लाई कम करने का प्लान। इस खबर में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यदि चिनाब नदी पर यह नहर बढ़ा दी गई तो फिर भारत हर सेकेंड 150 क्यूबिक मीटर पानी को डायवर्ट कर सकेगा। फिलहाल 40 क्यूबिक मीटर ही पानी ही डायवर्ट होता है। चिनाब नदी के जल का पाकिस्तान के पंजाब में बड़े पैमाने पर खेती की सिंचाई और पानी के पानी के तौर पर इस्तेमाल होता है। पाकिस्तानी सूत्रों का कहना है कि भारत में सीजफायर के बाद भी इस पर मंथन चल रहा है। डॉन की खबर से समझा जा सकता है कि पाकिस्तान में इस नहर के विस्तार के प्रोजेक्ट से कैसे चिंताजनक स्थिति है। बता दें कि अब तक भारत ने इस नहर के विस्तार को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन रॉयटर्स के खबर के आधार पर ही पाकिस्तान में खौफ की स्थिति है। बता दें कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को भी कहा था कि जब तक पाकिस्तान की आतंकवाद की नीति जारी रहेगी, तब तक सिंधु जल समझौते पर रोक रहेगी। बता दें कि पाकिस्तान इस समझौते को रोकने से बौखलाया हुआ है। उसका कहना है कि यदि पानी को डायवर्ट किया गया तो फिर यह युद्ध जैसी हरकत होगी। बता दें कि सिंधु एवं उसकी सहायक नदियों के जल से ही पाकिस्तान की 80 फीसदी खेतों की सिंचाई निर्भर करती है। जानकारों का कहना है कि भारत की ओर से डैम, नहर आदि बनाने में समय लगेगा। ऐसे में सिंधु जल समझौते का असर भी पाकिस्तान को सालों बाद नजर आएगा।  

पश्चिमी देश एशिया में आसियान की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश कर रहा, बोले रूसी विदेश मंत्री

मॉस्को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देश भारत और पाकिस्तान को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं। सरकारी समाचार एजेंसी की खबर के मुताबिक, लावरोव ने मॉस्को में सीमाओं के बिना संस्कृति : सांस्कृतिक कूटनीति की भूमिका और विकास विषय पर आयोजित डिप्लोमैटिक क्लब की बैठक में यह टिप्पणी की। रूसी विदेश मंत्री ने कहा, ”एशिया-प्रशांत क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों पर गौर करें, जिसे पश्चिम ने अपनी नीति को स्पष्ट रूप से चीन विरोधी रुझान देने के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र कहना शुरू कर दिया है-इस उम्मीद के साथ भी कि इससे हमारे महान मित्रों और पड़ोसी देशों भारत व चीन के बीच टकराव पैदा किया जा सकेगा।” चीन के बढ़ते प्रभाव से निपटने के लिए स्थापित चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद (क्वाड) के मुखर आलोचक लावरोव ने ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका के सैन्य गठबंधन एयूकेयूएस के गठन के बाद इसकी आलोचना कम कर दी है। क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और अमेरिका शामिल हैं। लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देश एशिया में आसियान (दक्षिण-पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन) की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, ”पश्चिमी सहयोगी दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह यहां भी प्रभावशाली भूमिका में आना चाहते हैं। वे आसियान की केंद्रीय भूमिका को कमजोर करना चाहते हैं, जो कई दशकों से सभी के लिए अनुकूल थी और जो आसियान देशों और उनके सहयोगियों की ओर से राजनीति के क्षेत्र में, सैन्य सहयोग के क्षेत्र में और रक्षा के क्षेत्र में बातचीत में कायम एकमत पर आधारित थी।” आसियान दक्षिण-पूर्वी एशिया के 10 देशों का एक क्षेत्रीय समूह है, जिसका उद्देश्य अपने सदस्यों के बीच आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है। इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपीन, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, म्यांमा, कंबोडिया, लाओस और वियतनाम इसके सदस्य देश हैं। रूसी विदेश मंत्री ने कहा, ”आम सहमति के नियम, साझा आधार की तलाश-इन सभी को हमारे पश्चिमी सहयोगी धीरे-धीरे दरकिनार करना शुरू कर रहे हैं और कुछ आसियान देशों को एकीकृत मंचों के बजाय खुले तौर पर प्रतिरोधी मंचों से जुड़ने के लिए प्रलोभन दे रहे हैं।” उन्होंने यूरेशिया में सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का भी आह्वान किया। लावरोव ने कहा, ”यूरेशिया जैसा कोई दूसरा महाद्वीप नहीं है, जहां इतनी सारी सभ्यताएं एक साथ रहती हैं और जिन्होंने आधुनिक युग में भी अपनी पहचान एवं प्रासंगिकता बनाए रखी है। हालांकि, यूरेशिया एकमात्र ऐसा महाद्वीप भी है, जहां कोई महाद्वीप-व्यापी मंच नहीं है। यूरेशिया में इस तरह के एकीकृत मंच की जरूरत है, ताकि कई बड़ी, वास्तव में महान शक्तियों और सभ्यताओं के हितों में सामंजस्य स्थापित किया जा सके।” उन्होंने याद दिलाया कि अफ्रीका में जहां उप-क्षेत्रीय मंचों के अलावा अफ्रीकी संघ मौजूद है, वहीं लातिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में लातिन अमेरिकी और कैरीबियाई राज्यों का समुदाय (सीईएलएसी) है, जबकि यूरेशिया में अभी तक ऐसा कोई मंच नहीं बनाया जा सका है।  

भारत सरकार ने तुर्की के साथ सभी तरह के समझौते की समीक्षा शुरू कर दी, तुर्की पर पहली बार प्राइवेट यूनिवर्सिटी की मार

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के मददगार तुर्की की अब खटिया खड़ी होने लगी है। भारतीयों ने तुर्की बहिष्कार का ऐलान किया है। इसके अलावा भारत सरकार ने तुर्की के साथ सभी तरह के समझौते की समीक्षा शुरू कर दी है। कुछ समझौते तो रद्द भी होने शुरू हो गए हैं। इस बीच, पहली बार एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तुर्की के साथ हुए अपने सभी समझौतों को रद्द कर दिया है। पंजाब के फगवाड़ा में स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने ऐसा कर दिखाया है। इस यूनिवर्सिटी ने तुर्की और अजरबैजान के साथ सभी समझौता ज्ञापनों को रद्द कर दिया है। इस यूनिवर्सिटी ने हाल की भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए तुर्की और अजरबैजान के संस्थानों के साथ छह शैक्षणिक साझेदारियों को औपचारिक रूप से तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। एलपीयू के संस्थापक चांसलर और राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने कहा, “जब हमारे बहादुर सशस्त्र बल अपने जीवन को जोखिम में डाल रहे हैं – चाहे गुप्त ऑपरेशन हो, हवाई रक्षा हो, या हमारी सीमाओं पर गश्त करना हो, तो हम, एक संस्थान के रूप में कैसे उदासीन बने रह सकते हैं।”  बता दें कि सुरक्षा और विमानन से लेकर शिक्षा और व्यापार तक भारत तुर्की के साथ कई क्षेत्रों में संबंध खत्म कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्लामाबाद का समर्थन करने के बाद नई दिल्ली ने अंकारा को सबक सिखाने का प्रण किया है। एक दिन पहले ही नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो ने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में’ तुर्की की कंपनी सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लि. की सुरक्षा मंजूरी रद्द कर दी। यह कंपनी देशभर के नौ हवाई अड्डों – मुंबई, दिल्ली, कोचीन, कन्नूर, बेंगलुरु, हैदराबाद, गोवा (जीओएक्स), अहमदाबाद और चेन्नई में सेवाएं प्रदान करती थी। इसके बाद इस सभी हवाई अड्डों ने सेलेबी के साथ समझौता रद्द कर दिया है। AIU ने देशभर के कुलपतियों को पत्र लिखा गुरुवार को ही एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने देशभर के कुलपतियों को पत्र लिखा है। AIU ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कुलपतियों से तुर्की, पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ शैक्षणिक संबंध निलंबित करने का आग्रह किया है। इसके अगले ही दिन लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ऐसा कदम उठाकर देश की पहली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बन गई है। अब तक इन विश्वविद्यालयों ने लिया ऐक्शन अब तक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), जामिया मिलिया इस्लामिया और कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) सहित कई शैक्षणिक संस्थान ऐसा ही कदम उठा चुके हैं। दिल्ली में जामिया मिलिया विश्वविद्यालय ने तुर्की के शैक्षणिक संस्थानों के साथ अपने एमओयू को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है, जबकि जेएनयू ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए ऐसा किया है। जेएनयू ने तुर्की के इनोनू विश्वविद्यालय के साथ एमओयू को निलंबित कर दिया है। तुर्की के पर्यटन स्थलों के बहिष्कार का ऐलान गुरुवार को ही मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) ने तुर्की के यूनुस एमरे इंस्टीट्यूट के साथ अपने संबंधों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। MANUU के एक बयान में कहा, “यह निर्णय भारत-पाक तनाव की पृष्ठभूमि में पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों के लिए तुर्की के समर्थन के विरोध में लिया गया है।” फिलहाल दिल्ली विश्वविद्यालय तुर्की के कॉलेजों के साथ अपने संबंधों की समीक्षा कर रहा है। लोगों ने तुर्की के विमानों और तुर्की के पर्यटन स्थलों का बहिष्कार करने का भी आह्वान किया है। तुर्की एयरलाइन्स के विमान देशभर के 10 हवाई अड्डों से सप्ताह में 56 उड़ान भरते हैं। ये उड़ानें भारतीय यात्रियों को 131 देशों के 352 शहरों तक सेवा पहुंचाती हैं।  

पाक का कंट्रोल बस क्वेटा तक, बलूचिस्तानियों के तेवर अब पूरी तरह सामने आने लगे, भारत हमारा साथ दे: बलोच नेता

बलूचिस्तान बलोच अमेरिकन कांग्रेस के सेक्रेटरी जनरल रज्जाक बलोच ने पाकिस्तान की पोल खोलते हुए कहा है कि बलोचिस्तान का बड़ा हिस्सा अब फौज के कंट्रोल में नहीं रहा। साथ ही उन्होंने भारत और अमेरिका से खुला समर्थन मांगा है। पाकिस्तान में काफी वक्त से सताए बलूचिस्तानियों के तेवर अब पूरी तरह सामने आने लगे हैं। इस बात से पूरी दुनिया वाकिफ है कि पाकिस्तान अपने ही राज्य बलूचिस्तान से सौतेला व्यवहार करता आया है। वहां के लोग अब पाकिस्तान के रवैये से उक्ता गए हैं, और निरंतर अपना विरोध जता रहे हैं, ये विरोध कभी हिंसक होते हैं तो कभी जुबानी तौर पर होते हैं। हाल ही में दिए इंटरव्यू में बलोच अमेरिकन कांग्रेस के सेक्रेटरी जनरल रज्जाक बलोच ने पाकिस्तान की हुकूमत और फौज पर जमकर हमला बोला। उन्होंने बलूचिस्तान की आजादी के भारत और अमेरिका से मदद मांगी। बलूचिस्तान के अंदर खौफ में पाक फौज: रज्जाक बलोच रज्जाक बलोच ने दावा किया कि बलोचिस्तान का 70 से 80 फीसद हिस्सा अब नो-गो जोन बन चुका है, जहां पाकिस्तानी फौज जाने से डरती है। उनका दावा है कि क्वेटा जैसे शहर में भी सूरज ढलते ही फौज घरों में दुबक जाती है, बाहर निकलने की हिम्मत नहीं करती। रज्जाक बलोच ने कहा कि पाकिस्तान की फौज ने पूरे बलोचिस्तान को एक मिलिट्री छावनी बना दिया है, लेकिन अब जनता उठ खड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि मरंग बलोच जैसे नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद जिले-जिले में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। उन्होंने सरदार अख्तर मेंगल की कोशिशों की सराहना करते हुए ये भी साफ किया कि सिर्फ अंदरूनी कोशिशों से अब काम नहीं चलेगा बल्कि अब अंतरराष्ट्रीय मदद जरूरी है। भारत-अमेरिका से भी मांगी मदद उन्होंने सीधे भारत और अमेरिका से अपील की कि बलोचिस्तान की आजादी की लड़ाई में साथ दें। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत में निर्वासित बलोच सरकार बन सकती है, तो उन्होंने कहा, “हम पाकिस्तानी नहीं जो भीख मांगें, हम मर्द हैं, मर्दों की तरह बात करते हैं। लेकिन अगर भारत बलोचिस्तान की मदद करेगा, तो बलोचिस्तान के दरवाजे उस पर हमेशा खुले रहेंगे।” रज्जाक बलोच ने पाकिस्तान की फौज को बरबर आर्मी कहते हुए चेताया कि अगर दुनिया ने आज बलोचिस्तान की आवाज नहीं सुनी, तो कल ये फौज पूरे दक्षिण एशिया में तबाही मचा देगी। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश की तरह अगर ये फौज बूट छोड़कर भागे उससे पहले, बेहतर है कि इज्जत से वापसी करे।” उन्होंने लोकतांत्रिक मुल्कों से अपील की कि बलोच प्रतिनिधियों को मंच दें, उनकी आवाज को दुनिया तक पहुंचाएं और पाकिस्तान के जुल्म के खिलाफ इंसाफ की लड़ाई में साथ खड़े हों।  

बीएसएफ जवान ने अपनी पत्नी को बताया कि पाकिस्तान में कैद के दौरान उन्हें रात को सोने तक नहीं दिया गया

कोलकता पाकिस्तान से 21 दिनों के बाद रिहा होकर भारत लौटे बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार शॉ ने अपनी पत्नी रजनी से फोन पर बातचीत में कैद के दौरान के अपने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने अपनी पत्नी को बताया कि पाकिस्तान में कैद के दौरान उन्हें रात को सोने तक नहीं दिया गया। लगातार पूछताछ की जाती थी। पाकिस्तानी ऐसी हरकत करते थे कि जैसे पीके शॉ कोई जासूस हों। 23 अप्रैल को पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में ड्यूटी के दौरान पूर्णम कुमार शॉ गलती से पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए थे। कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के अगले ही दिन यह घटना घटी। पाकिस्तान की सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया और उसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया था। भारत सरकार ने कूटनीतिक चैनल के जरिए दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिसके बाद पाकिस्तान से उसकी रिहाई हुई। बुधवार को पति से बात करने के बाद रजनी शॉ ने से बात करते हुए कहा, “उन्होंने बताया कि उन्हें शारीरिक यातना नहीं दी गई, लेकिन मानसिक रूप से वे पूरी तरह थक चुके हैं। उन्हें हर रात पूछताछ के लिए उठाया जाता था। वह बोले कि उन्हें खाना तो मिलता था, लेकिन दांत साफ करने की अनुमति भी नहीं दी गई। उनकी आवाज में थकावट साफ झलक रही थी।” तीन अलग-अलग जगहों पर रखा गया रजनी ने यह भी बताया कि पूर्णम शॉ को तीन अलग-अलग जगहों पर ले जाया गया। उनमें से एक जगह संभवतः किसी एयरबेस के पास की जगह थी, क्योंकि वहां हवाई जहाजों की आवाजें आती थीं। यह सब उनके मानसिक तनाव को और बढ़ाने वाला अनुभव था। रजनी शॉ ने गर्व के साथ कहा, “वह पिछले 17 वर्षों से देश की सेवा कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। हम सभी को उन पर गर्व है। वह फिर से ड्यूटी पर लौटेंगे।” अगर शॉ को जल्दी छुट्टी नहीं मिली, तो रजनी स्वयं पठानकोट जाकर उनसे मिलने की योजना बना रही हैं। आपको बता दें कि बुधवार शाम को पूर्णम कुमार शॉ को अटारी-वाघा सीमा के जरिए भारत लाया गया, जहां उनका मेडिकल परीक्षण और डिब्रीफिंग की गई।  

चीफ जस्टिस बोले- सम्मान से विदाई की हकदार हैं, जस्टिस बेला त्रिवेदी को वकीलों ने नहीं दिया फेयरवेल

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट की महिला जस्टिस बेला त्रिवेदी शुक्रवार को चुपचाप ही रिटायर हो गईं। उनके रिटायरमेंट के मौके पर बार काउंसिल की ओर से कोई औपचारिक फेयरवेल आयोजित नहीं किया गया। इसे लेकर चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह ने आपत्ति जताई। आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन की ओर से जजों के रिटायरमेंट पर फेयरवेल आयोजित किए जाते हैं। लेकिन जस्टिस बेला त्रिवेदी के आखिरी कार्यदिवस के मौके पर ऐसा कोई प्रोग्राम नहीं हुआ। इस पर जजों ने आपत्ति जताई और कहा कि ऐसा कोई आयोजन न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। रिटायरमेंट के मौके पर सेरेमोनियल बेंच भी बैठी। इस बेंच के सामने कपिल सिब्बल और रचना श्रीवास्तव मौजूद रहे। कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और रचना श्रीवास्तव उपाध्यक्ष हैं। बेंच में शामिल रहे जस्टिस गवई ने कहा, ‘मैं कपिल सिब्बल और रचना श्रीवास्तव की यहां मौजूदगी की सराहना करता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जो स्टैंड लिया है, वह सही नहीं है। मैं खुलकर बात करने वाला व्यक्ति हूं, इसलिए स्पष्ट कह रहा हूं कि यह गलत है। उन्होंने कहा कि बेंच के सामने फुल हाउस की मौजूदगी बताती है कि फैसला सही है। जस्टिस बेला त्रिवेदी एक शानदार जज रही हैं।’ जस्टिस गवई ने कहा कि अलग-अलग तरह के जज होते हैं। लेकिन जस्टिस त्रिवेदी ने अपने पूरे जज के करियर में स्पष्टता के साथ बात रखी। बिना किसी भय के फैसले दिए और खूब मेहनत की। वह सुप्रीम कोर्ट की एकता और अखंडता में यकीन रखने वाली जज रही हैं। वहीं जस्टिस मसीह ने अपनी स्पीच में कहा कि जस्टिस त्रिवेदी को बार एसोसिएशन द्वारा विदाई दी जानी चाहिए थी। उन्होंने जस्टिस त्रिवेदी द्वारा जज के रूप में दिखाए गए स्नेह की भी सराहना की। उन्होंने कहा, ‘अजीब बात है और इस बारे में चीफ जस्टिस पहले ही कह चुके हैं। मुझे खेद है, मुझे यह नहीं कहना चाहिए, लेकिन परंपराओं का पालन किया जाना चाहिए और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। मुझे यकीन है कि अच्छी परंपराएं हमेशा जारी रहनी चाहिए। मैं बहन (जस्टिस त्रिवेदी) को जीवन में सफलता की शुभकामनाएं देता हूं। मुझे यकीन है कि वह कई लोगों के लिए मार्गदर्शक बनेंगी।’  

बीएसएफ जवान ने अपनी पत्नी को बताया कि पाकिस्तान में कैद के दौरान उन्हें रात को सोने तक नहीं दिया गया

कोलकता पाकिस्तान से 21 दिनों के बाद रिहा होकर भारत लौटे बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार शॉ ने अपनी पत्नी रजनी से फोन पर बातचीत में कैद के दौरान के अपने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने अपनी पत्नी को बताया कि पाकिस्तान में कैद के दौरान उन्हें रात को सोने तक नहीं दिया गया। लगातार पूछताछ की जाती थी। पाकिस्तानी ऐसी हरकत करते थे कि जैसे पीके शॉ कोई जासूस हों। 23 अप्रैल को पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में ड्यूटी के दौरान पूर्णम कुमार शॉ गलती से पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए थे। कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के अगले ही दिन यह घटना घटी। पाकिस्तान की सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया और उसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया था। भारत सरकार ने कूटनीतिक चैनल के जरिए दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिसके बाद पाकिस्तान से उसकी रिहाई हुई। बुधवार को पति से बात करने के बाद रजनी शॉ ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “उन्होंने बताया कि उन्हें शारीरिक यातना नहीं दी गई, लेकिन मानसिक रूप से वे पूरी तरह थक चुके हैं। उन्हें हर रात पूछताछ के लिए उठाया जाता था। वह बोले कि उन्हें खाना तो मिलता था, लेकिन दांत साफ करने की अनुमति भी नहीं दी गई। उनकी आवाज में थकावट साफ झलक रही थी।” तीन अलग-अलग जगहों पर रखा गया रजनी ने यह भी बताया कि पूर्णम शॉ को तीन अलग-अलग जगहों पर ले जाया गया। उनमें से एक जगह संभवतः किसी एयरबेस के पास की जगह थी, क्योंकि वहां हवाई जहाजों की आवाजें आती थीं। यह सब उनके मानसिक तनाव को और बढ़ाने वाला अनुभव था। रजनी शॉ ने गर्व के साथ कहा, “वह पिछले 17 वर्षों से देश की सेवा कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। हम सभी को उन पर गर्व है। वह फिर से ड्यूटी पर लौटेंगे।” अगर शॉ को जल्दी छुट्टी नहीं मिली, तो रजनी स्वयं पठानकोट जाकर उनसे मिलने की योजना बना रही हैं। आपको बता दें कि बुधवार शाम को पूर्णम कुमार शॉ को अटारी-वाघा सीमा के जरिए भारत लाया गया, जहां उनका मेडिकल परीक्षण और डिब्रीफिंग की गई।  

आवारा कुत्तों ने दौड़ाया, बचने के लिए इमारत की तीसरी मंजिल पर चढ़ गई गाय, क्रेन और सुरक्षा बेल्ट से उतारा

पुणे महाराष्ट्र में पुणे की पारंपरिक इमारत ‘वाड़ा’ के लोगों की नींद शुक्रवार सुबह उस समय शोरगुल से खुल गई, जब आवारा कुत्तों से बचने के लिए एक गाय इमारत की तीसरी मंजिल पर चढ़ गई। दमकल विभाग के अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह घटना रविवार पेठ इलाके के परदेसी वाड़ा में सुबह करीब 6 बजे की है। दमकल विभाग के अधिकारी ने कहा, ‘आवारा कुत्तों के पीछा किए जाने पर एक जर्सी गाय इमारत के परिसर में घुस गई। वह एक संकरी लकड़ी की सीढ़ी से तीसरी मंजिल पर चढ़ गई।’ दमकल विभाग के अधिकारी ने बताया कि जब स्थानीय लोग गाय को नीचे नहीं उतार सके तो उन्होंने दमकल विभाग को फोन किया। उन्होंने कहा, ‘गाय को सीढ़ियों से नीचे नहीं लाया जा सका। अंतिम उपाय के रूप में, हमने उसे सुरक्षित बाहर निकालने के लिए क्रेन और सुरक्षा बेल्ट का इस्तेमाल किया।’ इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा रही है और यूजर्स तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं। लोगों ने आवारा कुत्तों से निजात पाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने की मांग रखी है। उनका कहना है कि इस दिशा में लल्द से जल्द कदम उठाया जाना चाहिए। आवारा कुत्तों ने 7 साल की बच्ची को मार डाला इसी महीने, महाराष्ट्र के जालना शहर में आवारा कुत्तों के झुंड ने 7 साल की बच्ची पर हमला कर दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई। गांधी नगर इलाके में घटित इस घटना के बाद जालना महानगर पालिका आयुक्त ने कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में स्वच्छता निरीक्षक को निलंबित कर दिया। मृतक संध्या पटोले अपने घर के पास आंगन में खेल रही थी और तभी कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। घटना के बारे में बात करते हुए उसके चाचा राम पटोले ने कहा, ‘परिवार पहले से ही एक रिश्तेदार की मौत हो जाने के कारण शोक मना रहा था और अपने घर पर इकट्ठा हुआ था। इस सब के बीच, संध्या बाहर निकल गई और एक खुले भूखंड के पास खेलने लगी, तभी कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। उसे कुछ दूर तक घसीटते हुए ले गए। उसके गले और पेट पर बेरहमी से हमला किया गया।’  

मुंबई क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई जोगेश्वरी इलाके में 4 करोड़ की ड्रग्स बरामद, दो ड्रग्स सप्लायरों को किया गिरफ्तार

मुंबई मुंबई क्राइम ब्रांच ने नशे के सौदागरों के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। क्राइम ब्रांच की यूनिट 5 ने जोगेश्वरी इलाके में दो ड्रग्स सप्लायरों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से 2 किलोग्राम एमडी ड्रग्स बरामद किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस ड्रग्स की कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये आंकी गई है। जानकारी के अनुसार, क्राइम ब्रांच की टीम को जोगेश्वरी बस डिपो के पास दो संदिग्ध व्यक्तियों पर शक हुआ। तलाशी लेने पर उनके पास से भारी मात्रा में एमडी ड्रग्स मिला। दोनों आरोपियों के खिलाफ अंबोली पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया। मुंबई क्राइम ब्रांच अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि यह ड्रग्स कहां से लाया गया था और इसे किन-किन लोगों तक पहुंचाने की योजना थी। पुलिस को शक है कि यह एक बड़े ड्रग्स रैकेट का हिस्सा हो सकता है। बता दें कि पिछले माह अप्रैल में भी क्राइम ब्रांच को मुंबई से सटे मीरा-भायंदर इलाके में एक बड़ी सफलता हाथ लगी थी। तब ‘ड्रग्स क्वीन’ के नाम से कुख्यात सबीना शेख को भारी मात्रा में कोकीन और नकदी के साथ गिरफ्तार किया गया। मीरा-भायंदर-वसई विरार पुलिस आयुक्तालय की क्राइम ब्रांच यूनिट-1 (काशीमीरा) की इस कार्रवाई में कुल 14.868 किलोग्राम कोकीन बरामद की गई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 22.33 करोड़ रुपए आंकी गई थी। सबीना की गिरफ्तारी के बाद मामले की छानबीन आगे बढ़ाई गई, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए थे। सबीना की निशानदेही पर क्राइम ब्रांच ने नाइजीरियाई नागरिक एंडी उबाबुदिके ओनींसे को गिरफ्तार किया, जिसके घर से 2.604 किलोग्राम कोकीन (कीमत 3.90 करोड़ रुपए) और बड़ी मात्रा में नकदी जब्त की गई थी। इसके बाद पुलिस ने वसई के एवरशाइन नगर से एक विदेशी महिला क्रिस्टाबेल एनजेई को भी गिरफ्तार किया था। उसके पास से 64.98 लाख रुपए की कोकीन, भारतीय मुद्रा और विदेशी करेंसी (अमेरिकन डॉलर समेत) बरामद की गई थी। क्रिस्टाबेल एनजेई के बारे में पता चला कि वह कैमरून की नागरिक है। सबीना का नेटवर्क मुंबई, नवी मुंबई, पालघर, पुणे और नासिक तक फैला हुआ है। वह भारतीय नागरिक होने के कारण बिना शक के बड़े नेटवर्क को संभालती थी और विदेशी सप्लायर्स के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर काम करती थी।

माउंट एवरेस्ट पर भारतीय पर्वतारोही की मौत, ‘नीचे ही नहीं उतर रहे थे’, इस सीजन पहली बार हुआ ऐसा

काठममांडु दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर मौजूदा मार्च-मई पर्वतारोहण सीजन के दौरान दो पर्वतारोहियों की मौत की पुष्टि हुई है। इन मृतकों में एक भारत से और दूसरा फिलीपींस से था। यह जानकारी शुक्रवार को नेपाल के पर्वतारोहण अधिकारियों ने दी।45 वर्षीय भारतीय पर्वतारोही सुब्रत घोष ने एवरेस्ट के 8,849 मीटर (29,032 फीट) ऊंचे शिखर को सफलतापूर्वक फतह तो किया, लेकिन गुरुवार को हिलेरी स्टेप के नीचे लौटते समय उनकी मौत हो गई। नेपाल के स्नोई होराइजन ट्रेक्स एंड एक्सपेडिशन कंपनी के आयोजक बोधराज भंडारी ने बताया, “वह हिलेरी स्टेप से नीचे आने के लिए तैयार नहीं थे। वहीं उनकी मौत हो गई। उनके शव को बेस कैंप तक लाने का प्रयास किया जा रहा है। मौत का कारण पोस्टमॉर्टम के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।” हिलेरी स्टेप को ‘डेथ जोन’ भी कहा जाता है। यह 8,000 मीटर (26,250 फीट) से ऊपर का इलाका है। यहां प्राकृतिक ऑक्सीजन का स्तर इंसान के जीवित रहने के लिए पर्याप्त नहीं होता। दूसरी ओर, फिलीपींस के 45 वर्षीय पर्वतारोही फिलीप II सैंटियागो की मौत बुधवार देर रात साउथ कोल में हुई। नेपाल पर्यटन विभाग के अधिकारी हिमाल गौतम ने बताया कि “वह चौथे उच्च शिविर (हाई कैंप) तक पहुंचे, लेकिन अत्यधिक थकान के कारण जब वह अपने टेंट में आराम कर रहे थे, तभी उनकी मृत्यु हो गई।” दोनों पर्वतारोही एक ही अंतरराष्ट्रीय अभियान दल का हिस्सा थे, जिसका आयोजन बोधराज भंडारी द्वारा किया गया था। नेपाल ने इस सीजन के लिए 459 पर्वतारोहण परमिट जारी किए हैं। इस हफ्ते लगभग 100 पर्वतारोही और उनके गाइड पहले ही शिखर तक पहुंच चुके हैं। गौरतलब है कि पर्वतारोहण, ट्रेकिंग और पर्यटन नेपाल के लिए प्रमुख आय और रोजगार के स्रोत हैं। यह देश आर्थिक रूप से अभी भी दुनिया के सबसे गरीब देशों में शामिल है। हिमालयन डाटाबेस और पर्वतारोहण अधिकारियों के अनुसार, पिछले 100 वर्षों में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान अब तक कम से कम 345 लोगों की जान जा चुकी है। खराब मौसम, ऑक्सीजन की कमी, और अत्यधिक थकान इस पर्वत पर सबसे बड़े खतरे हैं। गुरुवार को अचानक मौसम खराब होने की वजह से कई पर्वतारोहियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।  

अब पाकिस्तान के अखबार ने ही खोल दी PAK PM के झूठ की पोल, AI जेनरेटेड अखबार के जरिेए झूठा दावा

नई दिल्ली भारत के ऑपरेशन सिंदूर से मुंह की खाए पाकिस्तान अब नए-नए दावे करने में जुटा है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से लेकर रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और विदेश मंत्री इशाक डार तक लगातार फर्जी दावे कर रहे हैं. इस बीच उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने संसद में कहा कि टेलीग्राफ अखबार ने पाकिस्तानी एयरफोर्स का लोहा माना है और उसे आसमान का Undisputed King बताया है. इशाक डार ने पाकिस्तानी संसद को संबोधित करते हुए कहा कि ये हम नहीं कह रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मीडिया कह रहा है. टेलीग्राफ ने लिखा है कि PAF आसमान का बेताज बादशाह है. लेकिन डार के इस झूठ की पोल खुद पाकिस्तानी अखबार डॉन ने खोल दी. दरअसल डार ने ब्रिटेन के अखबार टेलीग्राफ की एक फेक AI तस्वीर का हवाला देकर पाकिस्तानी एयरफोर्स की तारीफ के पुलिंदे बांधे थे. लेकिन द डॉन ने उनके इस दावे का फैक्ट चेक कर इसे सरासर फर्जी बताया. सोशल मीडिया पर भी लोगों ने टेलीग्राफ की इस फेक तस्वीर को शेयर किया. टेलीग्राफ अखबार के इस पेज को एआई का इस्तेमाल कर तैयार किया गया है. ब्रिटेन के अखबार के डिजाइन और शैली में ही इस फेक पेज को तैयार किया गया था. लेकिन डॉन ने भी अपने फैक्ट चेक में अखबार के इस फेक पेज की कई अशुद्धियों को उजागर किया. इशाक डार ने इस झूठे दावे से यह साबित करने की कोशिश की कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया PAF की ताकत का लोहा मानता है. हालांकि, संसद में खड़े होकर इस तरह के झूठे दावे करने की बात उजागर होने के बाद डार ने अब तक इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है. पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय भी इस पर चुप्पी साधे हुआ है. बता दें कि यह पहली बार नहीं हुआ है, जब पाकिस्तान की सरकार ने इस तरह के झूठे और बेतुके दावे किए हैं. बता दें कि पहलगाम हमले के बाद जवाबी कार्रवाई में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत 7-8 मई की दरम्यानी रात पाकिस्तान और पीओके के आतंकी ठिकानों पर हमला किया. पाकिस्तान के इन आतंकी ठिकानों पर भारत ने ब्रह्मोस मिसाइल से हमला किया था.  

लंदन की जेल में ही रहेगा नीरव मोदी, हाईकोर्ट ने 10वीं बार खारिज की जमानत याचिका

लंदन पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव दीपक मोदी को ब्रिटेन की अदालत से बड़ा झटका लगा है। लंदन हाईकोर्ट ने उसकी हालिया जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी सीबआई (CBI) ने गुरुवार को यह जानकारी दी। नीरव मोदी अपनी प्रत्यर्पण से जुड़ी कानूनी लड़ाई हारने के बाद लगभग छह सालों से लंदन की जेल में बंद हैं। भारत में वह मनी लॉन्ड्रिंग और फ्रॉड के केस का सामना कर रहा है। CBI ने बताया कि यह उनकी 10वीं जमानत याचिका थी, जिसे लंदन की हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस, किंग्स बेंच डिवीजन ने खारिज कर दिया। CBI के मुताबिक, “नीरव दीपक मोदी की ओर दाखिल की गई नई जमानत याचिका को ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) के वकील ने कड़े तर्कों के साथ चुनौती दी, जिसमें CBI की टीम ने भी सहयोग दिया। इस टीम में जांच अधिकारी और कानूनी अधिकारी शामिल थे, जो खासतौर से इसके लिए लंदन गए थे। यह उसकी 10वीं जमानत याचिका थी।” भारत को मंजूरी मिल चुकी है प्रत्यर्पण की लंदन की हाईकोर्ट पहले ही नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण की मंजूरी दे चुकी है, जिससे वो भारतीय कानून का सामना कर सकें। नीरव मोदी के खिलाफ CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से जांच की जा रही है। PNB घोटाले में ‘वांटेड’ घोषित नीरव मोदी को 6,498.20 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में ‘वांटेड’ घोषित किया गया है। उसने जनवरी 2018 में यह घोटाला सामने आने से ठीक पहले देश छोड़ दिया था। मार्च 2019 से वह ब्रिटेन की जेल में बंद हैं। आरोप क्या हैं? CBI के अनुसार, नीरव मोदी और उसेके मामा मेहुल चोकसी पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoUs) और फॉरेन लेटर्स ऑफ क्रेडिट (FLCs) के जरिए पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के साथ 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की। मुंबई के PNB की ब्रैडी हाउस शाखा के अधिकारियों ने उनकी कंपनियों को बिना किसी अधिकृत सीमा या कैश मार्जिन के ये LoUs और FLCs जारी किए, साथ ही बैंक के केंद्रीय सिस्टम में कोई एंट्री दर्ज नहीं की, ताकि किसी जांच से बचा जा सके। इन फर्जी LoUs के आधार पर SBI (मॉरीशस), इलाहाबाद बैंक (हांगकांग), एक्सिस बैंक (हांगकांग), बैंक ऑफ इंडिया (एंटवर्प), केनरा बैंक (मामाना) और SBI (फ्रैंकफर्ट) जैसी विदेशी शाखाओं ने नीरव मोदी की कंपनियों को कर्ज दिया। जब नीरव मोदी की कंपनियों ने वह कर्ज नहीं चुकाया, तो PNB को ब्याज सहित वह रकम विदेशी बैंकों को चुकानी पड़ी। भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित नीरव मोदी को 2020 में मुंबई की एक अदालत ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था और अदालत ने उसकी संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया था। सितंबर 2024 में, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 29.75 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों और बैंक बैलेंस को “अपराध की आय” के रूप में जब्त किया था। CBI ने बताया कि नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को जल्द से जल्द लागू करवाने की दिशा में काम जारी है। मेहुल चोकसी बेल्जियम में गिरफ्तार इस घोटाले के एक अन्य मुख्य आरोपी और नीरव मोदी के मामा मेहुल चोकसी को हाल ही में बेल्जियम में गिरफ्तार किया गया था, जहां वे इलाज के लिए गए थे।

सेना ने 48 घंटे में छह आतंकी किये ढेर, त्राल-शोपियां में कैसे रडार पर आए दहशतगर्द?

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद से ही सेना पूरे कश्मीर में आतंकियों का खात्मा करने में लगी हुई है. यहां सेना सर्च ऑपरेशन के साथ ही कई अन्य ऑपरेशन चला रही है. इसी के तहत सेना ने 48 घंटों के अंदर 6 आतंकियों ढेर कर दिया है. इसके अलावा कई आतंकियों तलाश की जा रही है. गुरुवार को सेना की पुलवामा जिले में आतंकियों के साथ मुठभेड़ हुई, इसमें मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के तीन आतंकवादी मारे गए. इनकी पहचान आसिफ अहमद शेख, आमिर नजीर वानी और यावर अहमद भट के रूप में हुई है. इसके पहले मंगलवार को लश्कर के मॉड्यूल के आतंकवादियों को ढेर किया गया था. 6 आतंकी ढेर 8 की तलाश श्रीनगर में आज की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में IGP कश्मीर वी.के. बिरदी ने आतंकियों के खात्मे के बारे में बताया है. उन्होंने कहा कि पिछले 48 घंटों में हमने दो बहुत सफल ऑपरेशन किए हैं. ये दो ऑपरेशन शोपियां और त्राल में किए गए. कुल 6 आतंकवादियों को मार गिराया गया. उन्होंने बताया कि 4 आतंकियों की लिस्ट में से 6 को ढेर कर दिया गया है इसके अलावा बचे हुए अन्य 8 आतंकियों की तलाश की जा रही है. कैसे ऑपरेशन हुआ सफल? प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना के अधिकारियों ने बताया कि पिछले कई दिनों से इन आतंकियों के मूवमेंट की खबर मिल रही थी. इसी को देखते हुए हम लोग सर्च ऑपरेशन चला रहे थे. उसी दौरान हमें आतंकियों के बारे में जानकारी मिली. सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने घेराबंदी कर तलाश अभियान शुरू किया था. सर्च ऑपरेशन के दौरान ही आतंकियों ने जैसे ही सेना के जवानों को देखा तो तुरंत ही फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में 3 आतंकी मारे गए. इनकी पहचान आसिफ अहमद शेख, आमिर नजीर वानी और यावर अहमद भट के रूप में हुई है. मारे गए आतंकियों के पास से हथियार और गोला बारूद भी जब्त किया गया है. मंगलवार को शोपियां में मुठभेड़ में लश्कर के तीन आतंकियों को मार गिराया गया था। आईजीपी कश्मीर वीके बिरदी ने कहा कि तीनों आतंकियों को जिंदा पकड़ने का प्रयास किया गया था, लेकिन उन्होंने हथियार नहीं डाले। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि जैश कमांडर आसिफ अहमद शेख और उसके दो साथियों आमिर नजीर वानी व यावर अहमद बट के त्राल के नादिर में एक जगह छिपे होने की सूचना मिली थी। आतंकियों पर था पांच-पांच लाख का इनाम इसके आधार पर पुलिस ने सेना और सीआरपीएफ के जवानों के साथ मिलकर अभियान शुरू किया। आतंकियों ने मकान के साथ सटे शेड में भी शरण लेने का प्रयास किया और एक आतंकी वहीं शेड में मारा गया। आसिफ जैश का जिला कमांडर था। सात लाख का इनामी आसिफ 2022 को आतंकी बना था। आमिर और यावर अहमद बट दोनों ही पांच-पांच लाख के इनामी थे और 2024 को आतंकी बने थे। स्थानीय लोगों ने की ऑपरेशन में मदद मेजर जनरल धनंजय जोशी ने बताया कि 12 मई को हमें आतंकियों के बारे में इनपुट मिला था. हालांकि वे बहुत ऊंचाई पर थे. हमने जानकारी मिलने के बाद ही सर्च ऑपरेशन शुरू किया और उनकी पहचान पता की. सर्च ऑपरेशन के दौरान उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी. एक-एक घर में जाकर तलाशी ली गई. इस दौरान, हमारे सामने चुनौती नागरिक ग्रामीणों को बचाने की थी. इसके बाद, तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया. मारे गए 6 आतंकवादियों में से एक, शाहिद कुट्टे, दो बड़े हमलों में शामिल था, जिसमें एक जर्मन पर्यटक पर हमला भी शामिल था. पूरे सर्च ऑपरेशन के दौरान अच्छा लोकल सपोर्ट भी मिला था.  

सरकार ने सेना के लिए खोल दिया खजाना, अनुपूरक बजट में 50 हजार करोड़ का प्रस्ताव

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच जंग जैसे हालात देखने को मिले. इस दौरान भारत ने पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया. सूत्रों ने बताया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद रक्षा बजट में और बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिसमें नए हथियार और गोला-बारूद के साथ-साथ तकनीक की खरीद पर खर्च किया जाएगा. अनुपूरक बजट के जरिए ₹50 हजार करोड़ के अतिरिक्त प्रावधान का प्रस्ताव रखा गया है. संसद के शीतकालीन सत्र में इसे मंजूरी मिल सकती है. अतिरिक्त आवंटन से सशस्त्र बलों की जरूरतों, जरूरी खरीद और अनुसंधान एवं विकास के लिए प्रावधान किए जाने की उम्मीद है. इस साल, डिफेंस के लिए केंद्रीय बजट में रिकॉर्ड 6.81 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो पिछले वित्तीय वर्ष से 9.53 फीसदी ज्यादा है. एनडीए सरकार के सत्ता में आने के बाद से पिछले 10 साल में रक्षा बजट में करीब तीन गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है. भारत का मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम 2014-15 में डिफेंस बजट 2.29 लाख करोड़ रुपये था. इस साल 6.81 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो कुल बजट का 13.45% है. ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान पर भारत की रक्षा क्षमताओं की श्रेष्ठता को प्रदर्शित किया. पाकिस्तान के साथ तनातनी के दौरान, भारत के मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम ने करीब हर आने वाली मिसाइल और ड्रोन को बेअसर कर दिया. लंबी दूरी की रूसी एस-400 ‘ट्रायम्फ’ सिस्टम के अलावा, भारत ने पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइलों को फेल करने के लिए बराक-8 मध्यम दूरी की एसएएम सिस्टम और स्वदेशी आकाश प्रणाली को तैनात किया. पिकोरा, ओएसए-एके और एलएलएडी गन (लो-लेवल एयर डिफेंस गन) जैसी युद्ध-सिद्ध वायु रक्षा प्रणालियों का भी इस्तेमाल किया गया. ’21वीं सदी की जंग में…’ ऑपरेशन सिंदूर में भारत के एडवांस हथियारों की क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने 12 मई को अपने संबोधन में इस उपलब्धि की प्रशंसा की. नरेंद्र मोदी ने कहा, “इस ऑपरेशन के दौरान, हमारे मेड-इन-इंडिया हथियारों की विश्वसनीयता मजबूती से स्थापित हुई. दुनिया अब मानती है कि 21वीं सदी की जंग में मेड-इन-इंडिया डिफेंस इक्विपमेंट का वक्त आ गया है.” पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन सिंदूर 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने पर्यटकों और नागरिकों पर हमला किया, जिसे 26/11 मुंबई हमलों के बाद भारत में सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक माना गया. इस हमले ने भारत की शून्य सहिष्णुता की नीति को और मजबूत किया. जवाब में, भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें भारतीय वायु सेना, थल सेना और नौसेना ने समन्वित रूप से पाकिस्तान और PoK में आतंकी शिविरों को नष्ट किया. इस ऑपरेशन ने न केवल आतंकी बुनियादी ढांचे को ध्वस्त किया, बल्कि पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत किसी भी आतंकी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा. पाकिस्तान ने इस ऑपरेशन के बाद 7-8 मई की रात को भारत के 15 सैन्य ठिकानों जैसे श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट और अमृतसर पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए. हालांकि, भारतीय नौसेना, वायु सेना और थल सेना के एकीकृत प्रयासों ने इन हमलों को पूरी तरह विफल कर दिया. भारतीय नौसेना ने अपनी वाहक युद्ध समूह (Carrier Battle Group) और उन्नत वायु रक्षा तंत्र का उपयोग कर पाकिस्तानी वायु तत्वों को समुद्री क्षेत्र में निष्क्रिय कर दिया.  

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