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बलूचिस्तान में BLA ने पाक आर्मी के ट्रक को IED ब्‍लास्‍ट कर उड़ाया, 6 जवानों की मौत, आसिम मुनीर रह गए शॉक्‍ड

बलूचिस्तान अशांत बलूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी सेना के वाहन पर बड़ा हमला हुआ है। इस हमले में पाकिस्तानी सेना की फ्रंटियर कोर (एफसी) के छह जवान मारे गए हैं। जबकि पांच अन्य घायल हुए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। किस इलाके में हुआ वाहन में विस्फोट जानकारी के मुताबिक, आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विस्फोट प्रांत के बोलान इलाके में आमिर पोस्ट और अली खान बेस के बीच हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, यह धमाका आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) के जरिए किया गया है, जिसमें फ्रंटियर कोर के काफिले को निशाना गया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब बलूचिस्तान में हिंसा का ग्राफ फिर से तेजी से ऊपर जा रहा है। पिछले हफ्ते ही 30 से 40 हथियारबंद हमलावरों ने बलूचिस्तान से गुजरने वाले एक अहम हाईवे को जाम कर दिया था और एक पुलिस की वैन को निशाना बनाते हुए उसमें सवार 5 पुलिसकर्मियों को अगवा कर लिया था। इन घटनाओं ने पूरे सूबे में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बलूचिस्तान लंबे समय से अलगाववादी विद्रोह की चपेट में है। यहां सक्रिय उग्रवादी गुट लगातार सुरक्षा बलों पर हमले करते रहते हैं। उनका आरोप है कि पाकिस्तान सरकार बलूच जनता को उनके ही जमीनी और प्राकृतिक संसाधनों से दूर कर रही है और उनके अधिकारों को कुचल रही है। गौरतलब है कि बलूच लिबरेशन आर्मी बलूचिस्तान में सबसे सक्रिय और संगठित विद्रोही संगठन माना जाता है। हमले में कौन-कौन मारे गए स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हमले में पाकिस्तानी सेना के मेजर (स्पेशल ऑपरेशंस कमांड) तारिक इमरान, नायक आसिफ, सुबेदार फारूक, नायक मशकूर, सिपाही वाजिद, सिपाही काशिफ की मौत हुई है। वहीं, सिपाही जीशान, सिपाही शादमान, नायक ओवैस, सिपाही जैनुल्लाह, सिपाही तय्यब घायल हुए हैं।   सुरक्षा बलों ने तलाशी अभियान शुरू किया सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। 

ऑपरेशन सिंदूर की आग में जला पाकिस्तान, शुभम की पत्नी बोलीं- पति की मौत का बदला लेने के लिए पीएम मोदी का शुक्रिया

नई दिल्ली 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने अपनी सैन्य रणनीति को और आक्रामक बनाया. भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए. इन हमलों की तुलना इजरायल की सैन्य रणनीति से की जा रही है, जिसमें पहले टारगेट को लॉक किया जाता है, फिर अचूक मिसाइलों से तबाही मचाई जाती है. पहलगाम हमले और भारत का जवाब पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने भारत को कड़ा जवाब देने के लिए मजबूर किया. भारत ने 7 मई 2025 को पाकिस्तान के अंदर 9 ठिकानों पर मिसाइल हमले किए. इन ठिकानों में बहावलपुर, मुरीदके, गुलपुर, कोटली, मुजफ्फराबाद और अन्य शामिल थे. इन हमलों को “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया. भारत की यह रणनीति इजरायल की “सर्जिकल स्ट्राइक” और “प्रीसिशन स्ट्राइक” शैली से प्रेरित मानी जा रही है. इजरायल अक्सर फिलिस्तीन, लेबनान या सीरिया में आतंकी ठिकानों पर बिना बड़े पैमाने पर युद्ध छेड़े सटीक हमले करता है. भारत ने भी 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक में इसी तरह की रणनीति अपनाई थी. सड़कों पर पुलिस और आर्मी यह हमला आतंकवादियों के ठिकानों को खत्म करने के लिए किया गया, जिनकी गतिविधियों का पाकिस्तान से जुड़ा हुआ था. मुरीदके में अस्पताल के बाहर खड़ी एंबुलेंस से जाहिर होता है कि हवाई हमले में आतंकी घायल भी हुए हैं. इसके अलावा सडकों पर पुलिस और आर्मी नजर आ रही है. जो वीडियो सामने आए हैं उसमें दिख रहा है कि आतंकवादियों के हेडक्वार्टर भारत की स्ट्राइक में बुरी तरह तबाह हुए हैं. मुजफ्फराबाद में भी बड़ा नुकसान मुजफ्फराबाद में भी भारतीय हमले के बाद बड़ी तबाही देखी गई, जहां आतंक की मस्जिद को नुकसान हुआ है. इस मस्जिद का उपयोग आतंकवादियों द्वारा बैठकें आयोजित करने के लिए किया जाता था. इसके बाद पाकिस्तान द्वारा एलओसी पर लगातार गोलीबारी की जा रही है जिसके बाद पुलिस ने सड़क पर गश्त बढ़ा दी है. भारत ने सिर्फ आतंकी कैंपों को तबाह किया है. आतंक के जिन नौ ठिकानों को वायु सेना ने निशाना बनाया उनमें शामिल हैं – बहावलपुर, मुरीदके, गुलपुर, भिंबर, चाक अमरू, बाग, कोटली, सियालकोट और मुजफ्फराबाद शामिल है. बहावलपुर में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के हेडक्वार्टर और मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के हेडक्वार्टर को निशाना बनाया गया. इजरायली स्टाइल में भारत का वार: समानताएं प्रीसिशन टारगेटिंग: इजरायल अपने खुफिया तंत्र (मोसाद) और ड्रोन-उपग्रह आधारित निगरानी से दुश्मन के ठिकानों को लॉक करता है. भारत ने भी इस हमले में सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन और रियल-टाइम इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया होगा. भारत का स्वदेशी नेट्रा AWACS (Airborne Warning and Control System) और इसरो के RISAT-2BR1 सैटेलाइट इस तरह के ऑपरेशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सुपरसोनिक मिसाइलें: इजरायल की डेलिलाह क्रूज मिसाइल (250 किमी रेंज), SCALP, Hammer और स्पाइक मिसाइलों की तरह, ब्रह्मोस भी कम समय में भारी तबाही मचाने में सक्षम है. सीमित लेकिन प्रभावी हमला: इजरायल अक्सर बड़े युद्ध से बचते हुए, आतंकी ठिकानों पर सीमित हमले करता है. भारत ने भी PoK और पाकिस्तान के अंदर 10-100 किमी तक घुसकर हमले किए, जैसा कि X पोस्ट्स में दावा किया गया. यह रणनीति बड़े पैमाने पर युद्ध को टालते हुए दुश्मन को कमजोर करती है.   पहलगाम में आतंकी हमले में जान गंवाने वाले शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या ने भारत की सेना के एक्शन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मैं अपने पति की मौत का बदला लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देना चाहती हूं।  हमारे पूरे परिवार को पीएम मोदी पर भरोसा उन्होंने कहा कि मैं बहुत छोटी हूं। मैं ज्यादा क्या कह सकती हूं। हमारे पूरे परिवार को पीएम मोदी पर भरोसा था। उन्होंने आज उसी तरह से जवाब देकर विश्वास को कायम रखा है। शुभम को असली श्रद्धांजलि है। वह जहां भी होंगे आज थोड़ी शांति में होंगे। मेरे पति की मौत का बदला लेने के लिए पीएम मोदी को बहुत-बहुत धन्यवाद।  शुभम की पत्नी ने भारतीय सेना का भी धन्यवाद अदा किया शुभम की पत्नी ने भारतीय सेना का भी धन्यवाद अदा किया। उन्होंने कहा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का नाम सुनकर मैं बहुत ज्यादा भावुक थी। शुभम को शांति मिली होगी। शायद अब ऐसा कृत्य किसी के साथ न हो। यह वह बदला है जिसकी हम मांग रहे थे। हम लोगों ने आतंकवाद की एक-एक जगह को टारगेट किया है और उनकी जगह को नष्ट किया है। यह आतंकवाद पर बड़ा हमला है। सरकार ने जो कहा वह करके दिखाया है। हमें सरकार पर पूरा भरोसा था। देश की मांग को पूरा करने के लिए पीएम मोदी को सलाम  शुभम के पिता संजय द्विवेदी ने कहा कि मैं लगातार न्यूज देख रहा हूं। मैं भारतीय सेना को सलाम करता हूं और पीएम मोदी को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने देश की जनता का दर्द सुना। जिस तरह से भारतीय सेना ने पाकिस्तान में पनप रहे आतंकवाद को खत्म किया है, उसके लिए मैं भारतीय सेना को धन्यवाद देता हूं। जबसे हमने यह खबर सुनी है, मेरा पूरा परिवार हल्का महसूस कर रहा है। मैं पीएम मोदी का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं, जिन्होंने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के आकाओं के ठिकानों को नष्ट कर दिया है। हम लोगों को जब से खबर मिली, सारी रात टेलीविजन के सामने बैठे थे। देश को फक्र है। सारे देश की जो मांग थी, उसे पूरा किया गया है।  SEAD (Suppression of Enemy Air Defenses): भारत ने पाकिस्तान के चीनी निर्मित HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय करने के लिए SEAD रणनीति अपनाई. इसमें सुखोई-30 MKI विमानों से Kh-31P एंटी-रेडिएशन मिसाइल और स्वदेशी रुद्रम-1 मिसाइल का इस्तेमाल हुआ. इजरायल भी सीरिया के S-300 सिस्टम को निष्क्रिय करने के लिए ऐसी रणनीति का इस्तेमाल करता है. पाकिस्तान का एयर डिफेंस और उसकी विफलता पाकिस्तान ने अपनी हवाई रक्षा के लिए चीनी HQ-9 सिस्टम पर भरोसा किया, जिसकी रेंज 125-200 किमी है. यह सिस्टम 100 टारगेट्स को ट्रैक कर सकता है. 6 मिसाइलों को एक साथ नष्ट करने की क्षमता रखता है. लेकिन भारत की ब्रह्मोस और रुद्रम मिसाइलों ने इस सिस्टम को ध्वस्त कर दिया. कुछ प्रमुख कारण… तकनीकी अंतर: HQ-9 का रडार भारत के S-400 सिस्टम (400 किमी … Read more

जापान को पीछे छोड़ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा भारत, अब सिर्फ ये देश आगे

नई दिल्ली भारत की जीडीपी 2025 में जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की ओर से जारी किए गए वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अप्रैल 2025 में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत की नॉमिनल जीडीपी बढ़कर 4,187.017 अरब डॉलर हो जाएगी। वहीं, जापान की जीडीपी का आकार 4,186.431 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। भारत मौजूदा समय में दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जीडीपी में अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान, भारत से आगे हैं। आईएमएफ के अनुमानों के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन सकता है। 2027 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर सकती है और इस दौरान जीडीपी का आकार 5,069.47 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। वहीं, 2028 तक भारत की जीडीपी का आकार 5,584.476 अरब डॉलर होगा जबकि इस दौरान जर्मनी की जीडीपी का आकार 5,251.928 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। आईएमएफ के अनुमानों में कहा गया कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका और चीन 2025 के साथ आने वाले करीब एक दशक तक अपनी रैंकिंग बरकरार रख सकते हैं। आईएमएफ ने 2025 के लिए भारत की जीडीपी विकास दर को घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले जनवरी आउटलुक रिपोर्ट में यह आंकड़ा 6.5 प्रतिशत पर था रिपोर्ट में बताया गया कि विकास दर में कमी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ की अनिश्चितताओं के कारण है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बनी हुई है। अगले दो वर्षों में दुनिया की एकमात्र बड़ी अर्थव्यवस्था होगी, जो कि 6 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा, “हमारे अप्रैल 2025 के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक में 2.8 प्रतिशत की कमजोर वैश्विक वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जिसमें 127 देशों की वृद्धि दर में गिरावट शामिल है, जो विश्व जीडीपी का 86 प्रतिशत है।

वुलर झील के किनारे शिकारा मालिक और पर्यटन पर निर्भर परिवार अब आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे

श्रीनगर पहलगाम आतंकी हमले का सबसे बुरा असर कश्मीर के पर्यटन उद्योग पर हुआ है. शिकारा मालिकों और अन्य पर्यटन व्यवसायियों की आजीविका संकट में आ गई है. कश्मीर के सोपोर में स्थित एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की झील वुलर झील हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पर्यटन के लिहाज से सूनी पड़ी है. 22 अप्रैल को पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले ने कश्मीर घाटी के पर्यटन उद्योग को गहरा झटका दिया है. वुलर झील के किनारे शिकारा मालिक और पर्यटन पर निर्भर परिवार अब आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि पर्यटकों की आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है. पर्यटकों से अपील घाटी आएं आजीविका के लिए पर्यटकों पर निर्भर रहने वाले शिकारा मालिक हसन ने कहा, “हम पूरे दिन इंतजार करते हैं, लेकिन कोई नहीं आता. कश्मीर अपने आतिथ्य के लिए जाना जाता है. हम शांति और पर्यटन की बहाली की मांग करते हैं. पहलगाम हमले की हम कड़ी निंदा करते हैं, यह मानवता पर हमला है.” वहीं स्थानीय निवासी मंजूर अहमद, जो पहले प्रतिदिन 1500 रुपये तक कमा लेते थे, अब मुश्किल से 100 रुपये कमा पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम पर्यटकों से अपील करते हैं कि वे घाटी में फिर से आएं और वुलर झील सहित कश्मीर की छिपी प्राकृतिक सुंदरता को देखें. पहलगाम हमले के बाद बर्बाद हुए लोकल? पहलगाम आतंकी हमले के बाद कश्मीर में पर्यटन उद्योग पर गहरा असर पड़ा है. अप्रैल-मई में वुलर झील और अन्य पर्यटन स्थलों पर रोजाना हजारों पर्यटक आते थे, लेकिन हमले के बाद पर्यटकों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. जिससे शिकारा मालिकों, टैक्सी चालकों और होटल मालिकों को भारी नुकसान हुआ है. वहीं होटल, रेस्तरां और स्थानीय हस्तशिल्प व्यवसायों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है. सुरक्षा व्यवस्‍था कड़क, मॉक ड्रिल के निर्देश इस बीच, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) ने श्रीनगर की डल झील में मॉक ड्रिल का आयोजन किया, ताकि आपातकालीन तैयारियों को परखा जा सके.केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 7 मई को देशभर में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का निर्देश दिया है. दूसरी ओर, नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना द्वारा 12 दिनों तक संघर्ष विराम उल्लंघन के बाद, पुंछ जिले में सुरक्षा बलों ने सतर्कता बढ़ा दी है. पुलिस, सीआरपीएफ और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने नाकेबंदी, वाहन जांच और गश्त तेज कर दी है, ताकि सीमा पार से संभावित आतंकी घुसपैठ को रोका जा सके.

OIC ने अब भारत को चेतावनी देने की हिमाकत, कश्मीर को आत्मनिर्णय के अधिकार से वंचित किया जा रहा

न्यूयॉर्क गाजा पट्टी में युद्ध रूकवाने में नाकाम रहने वाले इस्लामिक देशों के संगठन OIC ने अब भारत को चेतावनी देने की हिमाकत की है। OIC ने पाकिस्तान के खिलाफ भारत के लगाए गये आरोपों को “निराधार” बताते हुए कहा है कि इससे दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ रहा है। इसके अलावा OIC ने अपनी हदों को पार करते हुए कहा है कि “कश्मीर को आत्मनिर्णय के अधिकार से वंचित किया जा रहा है, जिसकी गारंटी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों में दी गई है।” OIC का ये लहजा धमकाने वाला है लेकिन इसकी औकात कितनी है, और इसकी बातों का कितना असर होता है, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि ना तो ये गाजा पट्टी में युद्ध को रूकवा पाया है और ना ही इजरायल को गाजा में विनाशक हमला करने से रोक पाया है। TRT वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक न्यूयॉर्क में इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने “दक्षिण एशिया में बिगड़ते सुरक्षा माहौल पर गहरी चिंता” जताई है जिसमें भारत के “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान के खिलाफ निराधार आरोपों” को क्षेत्र में तनाव को बढ़ाने वाला एक प्रमुख फैक्टर बताया गया है। आपको बता दें कि OIC में 57 देश हैं, जिनमें 48 मुस्लिम बहुल देश हैं। 57 सदस्य देशों वाले संगठन OIC ने कहा कि “इस तरह के आरोपों से पहले से ही अस्थिर स्थिति और खराब होने का खतरा है, और “आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ अपनी सैद्धांतिक स्थिति और निंदा को दोहराया, चाहे वह किसी भी व्यक्ति द्वारा और कहीं भी किया गया हो।” कश्मीर पर OIC ने फिर लांघी सीमा रेखा TRT वर्ल्ड की रिपोर्ट मं कहा गया है कि इसके अलावा OIC ने कश्मीर को लेकर फिर से अपनी हदें लांघने की गुस्ताखी की और कहा कि “अनसुलझा विवाद दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा को प्रभावित करने वाला मुख्य मुद्दा बना हुआ है। जम्मू और कश्मीर के लोगों को उनके आत्मनिर्णय के अविभाज्य अधिकार से वंचित किया जा रहा है, जैसा कि प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों में निहित है।” इसके अलावा ओआईसी ने अपने बयान में कहा है कि “OIC, संयुक्त राष्ट्र महासचिव (एंटोनियो गुटेरेस) द्वारा की गई सहायता की पेशकश की सराहना करता है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और प्रभावशाली राज्यों सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आह्वान करता है कि वे स्थिति को कम करने के लिए तत्काल और विश्वसनीय उपाय करें।” आपको बता दें कि पिछले महीने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चरम पर तनाव है। भारत ने एक्शन लेते हुए सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया है और आशंका है कि भारत, पाकिस्तान पर हमला कर सकता है। भारत का मानना है कि आतंकवादी हमले के बीच पाकिस्तान है। जबकि पाकिस्तान ने हमेशा की तरफ आरोपों का खंडन किया है। इसके अलावा दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ कूटनीतिक कदम उठाए हैं, जिसमें एक-दूसरे के नागरिकों के वीजा रद्द करना और राजनयिक कर्मचारियों को वापस बुलाना शामिल है। OIC का डबल स्टैंडर्ड हालांकि OIC के पाकिस्तान को समर्थन करने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन इससे OIC के डबल स्टैंडर्ड का एक बार फिर से खुलासा होता है। OIC ने अपने बयान में कहा है कि “भारत द्वारा पाकिस्तान पर लगाए जा रहे बेबुनियाद आरोप दक्षिण एशिया में तनाव को बढ़ा रहे हैं। हम कश्मीरियों को उनका आत्मनिर्णय का अधिकार दिलाने की मांग दोहराते हैं, जैसा कि UN प्रस्तावों में गारंटी दी गई है।” लेकिन ये वही ओआईसी है जो चीन में उइगर मुस्लिमों के खिलाफ होने वाले अत्याचार को लेकर चुप्पी साधे रखता है। ये वही ओआईसी है, जो अफगानिस्तान में तालिबान के क्रूर इस्लामिक शासन और महिलाओं को घर में बंधक बनानए जाने की नीति को लेकर चुप्पी साधे रखता है। ये वही ओआईसी है जो पाकिस्तान में शिया, अहमदिया और हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति पर कभी कुछ नहीं कहता। लेकिन जब भारत की बात आती है तो यही ओआईसी अचानक से मानवाधिकार का चैंपियन बन जाता है। भारत ने अब ओआईसी को मुंह लगाना बंद कर दिया है। भारत पहले भी ओआईसी से दो टूक शब्दों में कह चुका है कि “कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है” और ऐसे संगठनों को पाकिस्तान के प्रोपेगेंड टूलर का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि OIC एक पक्षपाती मंच है जो आतंकवाद को शह देने वाले देश के साथ खड़ा रहता है। भारत ऐसे बयानों को पूरी तरह खारिज करता रहा है। कई ओआईसी के सदस्य देश इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान का समर्थन करते हैं। जबकि पाकिस्तान ने ओआईसी को अपने प्रोपेगेंडा फैलाने का मंच बना दिया है। लिहाजा ओआईसी का ये समर्थन कोई मायने नहीं रखता है।

दिल्ली में बढ़ गई दिन और रात की गश्त, हर जिले में पांच जगहों पर होगी Mock Drill, तय हुआ समय

पूर्वी दिल्ली कल शाम को दिल्ली के हर जिले में पांच जगहों पर मॉक ड्रिल होगी। युद्ध सायरन बजेगा। इसमें सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स, पुलिस और अन्य विभाग हिस्सा लेंगे। पूर्वी जिले में शाम चार बजे गीता कॉलोनी स्थित स्कोप मीनार, कोंडली मार्केट, आइपी एक्सटेंशन, एनएसयूआइटी में मॉक ड्रिल होगी। बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के मद्देनजर भारत-पाक के बीच बढ़ते तनाव के बीच गृह मंत्रालय के मॉक ड्रिल के निर्देश के बाद दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी डीसीपी को तैयारियों के लिए विस्तृत योजना तैयार करने को कहा है। उन्होंने बताया कि पुलिस उपायुक्तों (डीसीपी) ने राष्ट्रीय राजधानी में गश्त को मजबूत करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं। दिल्ली में बढ़ गई दिन और रात की गश्त एक सूत्र ने बताया, “हमने शहर में दिन और रात की गश्त बढ़ा दी है। हमने हरियाणा और उत्तर प्रदेश से लगती दिल्ली की सीमाओं पर पुलिसकर्मियों के साथ अर्धसैनिक बलों को भी तैनात किया है। शहर में सुरक्षा पहले ही बढ़ा दी गई है। डीसीपी अपने जिलों में व्यवस्थाओं की व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहे हैं। वे सहायक पुलिस आयुक्तों (एसीपी) और स्टेशन हाउस अधिकारियों (एसएचओ) के साथ बैठकें कर रहे हैं।” मॉक ड्रिल क्या होती है? मॉक ड्रिल एक तरह का व्यायाम है जो आपातकालीन स्थिति में किया जाता है। आमतौर पर मॉक ड्रिल प्राकृतिक आपदाओं, आग, आतंकवादी हमलों और अन्य संकटों से बचने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को आने वाले खतरे के बारे में सचेत रखना और जागरूकता बढ़ाना है। मॉक ड्रिल में हवाई हमले की चेतावनी प्रणाली, भारतीय वायु सेना के साथ हॉटलाइन रेडियो संचार लिंक, आम लोगों के लिए रक्षा प्रशिक्षण, क्रैश ब्लैकआउट उपाय जैसे अभ्यास शामिल हैं।

श्रद्धालुओं को वैष्णो देवी यात्रा के दौरान घोड़ा, पिट्ठू तथा पालकी आदि की सेवाएं लगातार उपलब्ध हो रही

कटड़ा वर्तमान में मौसम पूरी तरह से मेहरबान है और श्रद्धालु सुहावने मौसम के बीच लगातार अपनी मां वैष्णो देवी की यात्रा जारी रखे हुए हैं। मंगलवार को दिनभर मौसम सुहावना बना रहा हालांकि दिन में अधिकांश समय मौसम साफ रहा लगातार ठंडी हवाएं चलती रही फिलहाल मां वैष्णो देवी की यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। श्रद्धालुओं को वैष्णो देवी यात्रा के दौरान घोड़ा, पिट्ठू तथा पालकी आदि की सेवाएं लगातार उपलब्ध हो रही हैं दूसरी और भवन मार्ग पर चलने वाली बैटरी कार सेवा के साथ ही मां वैष्णो देवी भवन (Maa Vaishno Devi Bhawan) तथा भैरव घाटी के मध्य चलने वाली रोपवे केवल कार सेवा भी लगातार उपलब्ध हो रही है। कटड़ा के आसपास सुरक्षा के कड़े प्रबंध परंतु मंगलवार को कटड़ा से चलने वाली हेलीकॉप्टर सेवा बीच-बीच में स्थगित रही जिसकी मुख्य वजह श्रद्धालुओं की कमी। श्रद्धालु आधार शिविर कटड़ा में अपना पंजीकरण करवा कर आरएफआईडी यात्रा कार्ड प्राप्त परिवार के साथ लगातार भवन की ओर रवाना होते रहे। श्रद्धालुओं की मां वैष्णो देवी की यात्रा पूरी तरह से सुखमय बनी रहे जिसको लेकर भवन परिसर के साथ ही सभी मार्गों पर यहां तक की आधार शिविर कटड़ा तथा आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। भारत-पाक तनाव के बीच श्रद्धालुओं में कमी पुलिस के साथ ही सुरक्षा बल आदि लगातार चौकसी बरत रहे हैं। भारत तथा पाकिस्तान के बीच बने हालात के मध्य नजर वर्तमान में मां वैष्णो की यात्रा में कमी लगातार जारी है, लेकिन वर्तमान में जो भी श्रद्धालु मां वैष्णो देवी की यात्रा कर रहे हैं उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। श्रद्धालु श्रद्धा के साथ अपनी मां वैष्णो देवी की यात्रा जारी रखे हुए हैं। बिना किसी भय के यात्रा करें श्रद्धालु वहीं, श्राइन बोर्ड के साथ ही होटल उद्योग को संपर्क कर रहे श्रद्धालुओं को भरोसा दिलाया जा रहा है की मां वैष्णो देवी की यात्रा को लेकर किसी भी तरह की परेशानी नहीं है हालात पूरी तरह से सुखद बने हुए हैं लिहाजा वह बिना किसी भय के मां वैष्णो देवी की यात्रा करें। बीते 5 मई को 14319 श्रद्धालुओं ने मां वैष्णो देवी के चरणों में हाजिरी लगाई थी तो वहीं 6 मई यानी कि मंगलवार शाम 5:00 बजे तक करीब 11500 श्रद्धालु अपना पंजीकरण करवा कर मां वैष्णो देवी भवन की ओर रवाना हो चुके थे और लगातार श्रद्धालुओं का आना जारी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आतिशबाजी की स्थिति में शिकायत निवारण बनाना होगा, भंडारण और बिक्री पर भी प्रतिबंध

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पटाखे जलाने के कारण होने वाले वायु प्रदूषण के मामले पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में पटाखों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब एनसीआर में शामिल अन्य राज्यों को एक महीने के भीतर प्रतिबंध लगाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आतिशबाजी की स्थिति में शिकायत निवारण और शिकायत तंत्र बनाना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (ईपीए) की धारा पांच के तहत यह निर्देश जारी किए हैं, ताकि जुर्माना लगाया जा सके और अन्य राज्यों को भी इसका पालन करना चाहिए। जस्टिस अभय एस. ओक की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि हमने दिल्ली तथा एनसीआर में पटाखों के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध के मामले में सुनवाई के दौरान तीन अप्रैल को आदेश जारी कर निर्देश दिए थे। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा आदेश के अनुपालन का हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि पटाखों का निर्माण, भंडारण आदि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। कोर्ट ने कहा कि इस आधार पर हम एनसीआर के क्षेत्रों में राजस्थान, यूपी और हरियाणा को ईपीए की धारा 5 के तहत इसी तरह के निर्देश जारी करने का निर्देश देते हैं और इसे एक महीने के भीतर जारी किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने बीते 3 अप्रैल को दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को सही ठहराया था। अदालत ने कहा था कि जब तक यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं हो जाता कि ग्रीन पटाखों से जीरो प्रदूषण होता है, तब तक प्रतिबंध के पुराने आदेश में बदलाव करने का कोई औचित्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा था कि स्वच्छ वातावरण में जीना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। वायु प्रदूषण के बढ़ते खतरों को देखते हुए पटाखों पर प्रतिबंध लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि हर व्यक्ति एयर प्यूरीफायर नहीं खरीद सकता और सड़कों-गलियों में काम करने वाले लोगों पर प्रदूषण का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग को लेकर भारत में करीब 76 प्रतिशत लोग आश्वस्त

नई दिल्ली भारत में करीब 76 प्रतिशत लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करने को लेकर आश्वस्त हैं। यह आंकड़ा वैश्विक औसत 46 प्रतिशत से काफी अधिक है। यह जानकारी मंगलवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई। 47 देशों के 48,000 लोगों से बातचीत के आधार पर केपीएमजी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में बताया गया कि भारत एआई को अपनाने और उस पर विश्वास में ग्लोबल लीडर है। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत न केवल एआई के बारे में अधिक आशावादी है, बल्कि दैनिक की जिंदगी और कार्यस्थल में इसका उपयोग करने के लिए अधिक तैयार भी है। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि सर्वे में भाग लेने वाले 90 प्रतिशत भारतीय लोगों ने कहा कि एआई ने विभिन्न क्षेत्रों में पहुंच और प्रभावशीलता में सुधार किया है, जिससे यह देश में एक परिवर्तनकारी शक्ति बन गई है। इसके साथ ही 97 प्रतिशत भारतीयों ने बताया कि वह काम में एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं और 67 प्रतिशत ने माना है कि वह एआई के बिना अपने टास्क को पूरा नहीं कर सकते हैं। वहीं, वैश्विक स्तर पर केवल 58 प्रतिशत कर्मचारी ही काम के स्थान पर एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस रिपोर्ट को मेलबर्न बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर निकोल गिलेस्पी और डॉ स्टीव लॉकी ने केपीएमजी के सहयोग से तैयार किया है। केपीएमजी इंडिया के अखिलेश टुटेजा ने कहा कि रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं, “भारत नैतिक और इनोवेटिव एआई उपयोग में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए अच्छी स्थिति में है।” रिपोर्ट में बताया गया कि एडवांस अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत में एआई का प्रशिक्षण और समझ अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वे में भाग लेने वाले लगभग 78 प्रतिशत भारतीयों को एआई का उपयोग करने की अपनी क्षमता पर भरोसा है और 64 प्रतिशत ने किसी न किसी रूप में एआई प्रशिक्षण प्राप्त किया है और 83 प्रतिशत को लगता है कि वे एआई उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकते हैं।

पीएम मोदी ने अपने मित्र एंथनी अल्बानीज से बात की और उन्हें उनकी पार्टी की ऐतिहासिक जीत पर व्यक्तिगत रूप से बधाई दी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज से टेलीफोन पर बातचीत की। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए इसकी जानकारी दी। साथ ही उन्हें ऑस्ट्रेलिया के 32वें प्रधानमंत्री के रूप में ऐतिहासिक पुनर्निर्वाचन पर बधाई दी। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एंथनी अल्बानीज को टैग करते हुए लिखा, ”अपने मित्र एंथनी अल्बानीज से बात की और उन्हें उनकी पार्टी की ऐतिहासिक जीत पर व्यक्तिगत रूप से बधाई दी। हम भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और सहयोग के नए क्षेत्रों की खोज करने के लिए नए जोश के साथ मिलकर काम करने पर सहमत हुए हैं।” इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी (सीएसपी) को मजबूत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि अपने पांच वर्षों में सीएसपी ने विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत सहयोग विकसित होते देखा है। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में भारतीय मूल के प्रवासियों की भूमिका पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और एक स्वतंत्र, खुले, स्थिर, नियम-आधारित और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री अल्बानीज को वार्षिक शिखर सम्मेलन और इस वर्ष के अंत में भारत में आयोजित होने वाले क्वाड शिखर सम्मेलन सहित यहां आने का निमंत्रण दिया। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई। इससे पहले पीएम मोदी ने एंथनी अल्बानीज को ऑस्ट्रेलिया का प्रधानमंत्री निर्वाचित होने पर बधाई दी थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा था, ”एंथनी अल्बानीज ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के रूप में आपकी शानदार जीत और पुनः निर्वाचित होने पर बधाई। यह जोरदार जनादेश आपके नेतृत्व में ऑस्ट्रेलियाई लोगों के स्थायी विश्वास को दर्शाता है। मैं भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए हमारे साझा विजन को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्साहित हूं।”

अमेरिकी संसद के स्पीकर ने कहा- भारत और अमेरिका के बीच जल्द होगी ट्रेड डील, ट्रंप प्रशासन करेगा हर संभव मदद

वाशिंगटन पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत में इस बात की मांग उठाई जा रही है कि पाकिस्तान से इस हमले का बदला लिया जाए। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी और 20 लोग इस आतंकी हमले में घायल हो गए थे। इस वारदात को पाकिस्तानी आतंकियों ने अंजाम दिया था और इसी वजह से ही भारत और पाकिस्तान में तनाव का माहौल बना हुआ है। पाकिस्तान में सेना, सरकार और जनता में इस बात का डर है कि भारत की तरफ से कभी भी हमला किया जा सकता है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान में छिपे आतंकी भी डर के साये में जी रहे हैं। इस हमले पर दुनिया के ज़्यादातर देशों ने भारत के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। हालांकि अब तक रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और इज़रायल  के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू  ही दो ऐसे ग्लोबल लीडर्स हैं जिन्होंने भारत के प्रति इस हमले का जवाब देने के लिए समर्थन जताया है। आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में मामले पर अब अमेरिका की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है।   आतंकवाद के खिलाफ लड़े भारत, ट्रंप प्रशासन करेगा हर संभव मदद अमेरिकी संसद के स्पीकर माइक जॉनसन ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा, “भारत को आतंकवाद के खिलाफ खड़े रहना चाहिए और डटकर लड़ना चाहिए। अमेरिका इस मामले में भारत का पूरी तरह से साथ देने के लिए तैयार है। आतंकवाद से जंग में ट्रंप प्रशासन भारत की हर संभव मदद करेगा। हम इसके लिए भारत को हर संभव संसाधन मुहैया कराएगा। भारत एक साथ जो हुआ उसके प्रति हमारी पूरी संवेदना है और हम भारत के साथ खड़े रहेंगे।” भारत और अमेरिका के बीच जल्द होगी ट्रेड डील अमेरिकी संसद के स्पीकर जॉनसन ने यह बयान देश की राजधानी वॉशिंगटन डीसी की कैपिटल हॉल बिल्डिंग में आयोजित संसदीय ब्रीफिंग के एक कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान दिया। इस कार्यक्रम का आयोजन लोकल समयानुसार सोमवार को हुआ। इस दौरान जॉनसन ने भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर भी बयान देते हुए उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच जल्द ही ट्रेड डील होगी।

शीर्ष नेतृत्व पर गिरी बड़ी गाज, रक्षा मंत्री के आदेश से सदमें में अमेरिकी सेना !

वाशिंगटन अमेरिका के विभागों में कर्मचारियों की कटौती के ट्रंप प्रशासन के कदम को आगे बढ़ाते हुए वहां के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सेना को अपने शीर्ष नेतृत्व के पदों में 20 फीसदी कटौती का निर्देश दिया। इसे लेकर जहां ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इससे कार्यकुशलता बढ़ेगी, दूसरी ओर आलोचकों को चिंता है कि इससे सेना का राजनीतिकरण हो सकता है। हेगसेथ ने ‘नेशनल गार्ड’ को भी अपने शीर्ष नेतृत्व के पदों में 20 फीसदी की कटौती का निर्देश दिया और सेना को अपने बल में ‘जनरल’ और ‘फ्लैग’ अधिकारी के पदों में अतिरिक्त 10 फीसदी की कटौती करने का कहा है जिसमें एक-स्टार या उससे ऊपर के या नौसेना के समकक्ष अधिकारी शामिल हो सकते हैं। यह कटौती, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या हेगसेथ द्वारा जनवरी से अब तक बर्खास्त किए गए ‘ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ’ के प्रमुख जनरल सीक्यू ब्राउन जूनियर समेत छह से अधिक शीर्ष जनरल अधिकारियों के अतिरिक्त है। उन्होंने चार-स्टार अधिकारी के तौर पर सेवा देने वाली दो महिलाओं को भी सेना निकाल दिया था। उस समय हेगसेथ ने कहा था कि यह कटौती ‘‘राष्ट्रपति की इस इच्छा को दिखाता है कि उनके आस-पास काबिल लोग हों जो राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर हमारे दृष्टिकोण को अपनाना चाहते हैं।” सोमवार को कटौती की घोषणा करते हुए एक नोटिस में हेगसेथ ने कहा कि वे ‘‘नेतृत्व को सुव्यवस्थित बनाने के लिए अनावश्यक पदों को खत्म करेंगे।” उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य सेना को ‘‘अनावश्यक नौकरशाही के स्तरों से” मुक्त करना है। अमेरिका की प्रतिनिधि सभा के सदस्य सेठ मौलटन ने कहा कि वह हेगसेथ के इस फैसले को सेना का राजनीतिकरण करने के प्रयास के रूप में देखते हैं।    

हूती विद्रोहियों पर हमले के दौरान खुद Air Force के कमांड सेंटर में थे Netanyahu

तेल अवीव इजरायल ने बेन गुरियन एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों की ओर से किए गए मिसाइल अटैक का बदला ले लिया है. इजरायली एयरफोर्स ने सोमवार शाम को यमन के हूतियों के कब्जे वाले बंदरगाह शहर हुदैदाह पर धड़ाधड़ हवाई हमले किए हैं. इससे पहले ईरान समर्थित विद्रोही गुट हूती ने इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया था, जिसमें कई लोग घायल हुए थे. 20 फाइटर जेट और 50 बम इजरायली सेना के मुताबिक करीब 20 फाइटर जेस्ट ने यमन के कोस्टल इलाके में हूती पोर्ट को निशाना बनाया है, जिसमें हुदैदाह बंदरगाह और एक कंक्रीट फैक्ट्री भी शामिल थी. इजरायली सेना ने करीब दो हजार किलोमीटर की दूरी तय करके जेट विमानों से हूती ठिकानों पर 50 से ज्यादा बम गिराए हैं. सेना ने जेट विमानों के उड़ान भरने की तैयारी करते हुए वीडियो भी जारी की हैं. इस ऑपरेशन में इजरायली एयरफोर्स के ईंधन भरने वाले विमानों और जासूसी विमानों ने भी हिस्सा लिया था. इज़रायली सिक्योरिटी फोर्स का दावा है कि हुदैदाह बंदरगाह का इस्तेमाल हूतियों की ओर से ईरानी हथियारों, सैन्य जरूरतों के सामान और अन्य आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता था. इसी वजह से इजरायल ने बम गिराकर पूरे बंदरगाह को तबाह कर दिया है, ताकि ईरान से हथियारों की सप्लाई बाधित की जा सके. जनवरी के बाद पहला हमला आईडीएफ ने कहा कि बाजिल कंक्रीट फैक्ट्री हूती विद्रोहियों के लिए एक अहम आर्थिक संसाधन के रूप में काम करती है और इसका इस्तेमाल सुरंगों और सैन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए किया जाता है. साथ ही ये हमले हूतियों के शासन और उनकी अर्थव्यवस्था पर एक तगड़ी चोट हैं. सेना ने एक बयान में कहा, ‘यह हमला हूतियों की ओर से इजरायल के खिलाफ बार-बार किए गए हमलों के जवाब में था, जिसमें सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों को इजरायली इलाके और उसके नागरिकों की ओर लॉन्च किया गया था.’ जंग की शुरुआत के बाद से यमन में यह छठा इज़रायली हमला था और जनवरी के बाद से पहला अटैक था. कई महीने पहले अमेरिका ने भी ईरान समर्थित विद्रोहियों के खिलाफ एक बड़ा हवाई हमला किया था. इसके बाद आईडीएफ ने हूतियों के मिसाइल और ड्रोन हमले का जवाब देना बंद कर दिया था. हमले के जरिए इजरायल ने हूतियों के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है और बंदरगाह पर खड़े जहाजों के होने वाले नुकसान को सीमित किया है. कमांड सेंटर में मौजूद रहे नेतन्याहू आईडीएफ का कहना है कि इजरायल के सामने आने वाले हर खतरे के खिलाफ किसी भी दूरी पर सेना अपनी कार्रवाई जारी रखेगी. यमन में जिस वक्त हूतियों पर हमले किए गए, उस दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वायुसेना कमांड सेंटर में मौजूद थे और पूरी कार्रवाई को देख रहे थे. इजरायली रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी फोटो में बताया गया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ रक्षा मंत्री और आईडीएफ चीफ भी तेल अवीव स्थित अंडरग्राउंड हेडक्वार्टर में मौजूद रहकर इस पूरे ऑपरेशन को मॉनिटर कर रहे थे.  

जब चिकन और पास्ता भी बनते हैं गुप्त संकेत, पोप चुनाव की रहस्यमयी प्रक्रिया

रोम जैसे-जैसे 7 मई को वेटिकन में होने वाली पोप चयन प्रक्रिया (पैपल कॉन्क्लेव) नजदीक आ रही है, दुनिया की निगाहें उस रहस्यमयी माहौल पर टिकी हैं जिसमें एक नया धार्मिक नेता चुना जाता है। पोप चुनाव के दौरान कार्डिनलों के खाने-पीने को लेकर जो सख्त नियम बनाए गए हैं, वे 13वीं सदी से चलते आ रहे हैं। पोप ग्रेगरी एक्स ने ये नियम इसलिए बनाए थे ताकि निर्णय प्रक्रिया तेज हो सके और बाहरी दुनिया का कोई प्रभाव न पड़े। शुरुआत में नियम बहुत सख्त थे, तीन दिन बिना निर्णय के बीतने पर सिर्फ एक बार भोजन और आठ दिन बिना निर्णय बीतने पर सिर्फ रोटी और पानी की अनुमति। बाद में पोप क्लेमेंट षष्ठम ने थोड़ी ढील दी और तीन कोर्स का सादा खाना तय किया, सूप, मांस या अंडा, और फल या चीज। भोजन से भी भेजे जा सकते हैं गुप्त संदेश आज भी, कॉन्क्लेव से पहले कार्डिनल रोम के कैफे और रेस्टोरेंट्स में मुलाकात कर गुपचुप बातचीत करते हैं। माना जाता है कि ये मुलाकतें भविष्य के पोप के चुनाव में अहम भूमिका निभाती हैं। इतिहास में कई बार खाने के जरिए गुप्त संदेश भेजने की आशंका भी जताई गई है, जैसे चिकन के भीतर छिपा नोट, पास्ता में फिसलाया गया कोई संकेत, या नैपकिन पर लिखा वोट अपडेट। इस बार नन बनाएंगी बहुत सादा खाना इस बार वेटिकन ने खाना इतना सादा और नियंत्रित कर दिया है कि उसमें कुछ भी छिपाना संभव न हो। इस बार कॉन्क्लेव में नन द्वारा बनाया जाएगा बेहद सादा खाना—उबली सब्जियां, स्पेगेटी और भुने हुए लैम्ब स्क्युवर।   धुएं से मिलेगा दुनिया को संकेत लगभग 180 कार्डिनल इस बार रोम में जमा होंगे, जिनमें से 133 को वोटिंग का अधिकार है। जब तक नया पोप नहीं चुन लिया जाता, वे सिस्टीन चैपल में दुनिया से पूरी तरह कटे रहेंगे और दुनिया को संकेत मिलेगा केवल धुएं से: काले धुएं का मतलब ‘अभी नहीं’ और सफेद धुएं का मतलब ‘नया पोप मिल गया है’।

आज गोधरा ट्रेन अग्निकांड के दोषियों की सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमे दो जजों ने जताई थी आपत्ति

नई दिल्ली गुजरात उच्च न्यायालय ने गोधरा ट्रेन अग्निकांड मामले में अक्टूबर 2017 के फैसले में 31 दोषियों की सजा को बरकरार रखा था और 11 दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने आज गोधरा ट्रेन अग्निकांड के दोषियों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दो जजों की पीठ द्वारा उनकी अपील पर सुनवाई करने पर आपत्ति जताई गई थी। याचिका में कहा गया था कि दो जजों की पीठ उनकी अपील पर सुनवाई नहीं कर सकती क्योंकि यह मामला मौत की सजा से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं के वकील संजय हेगड़े ने जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ को बताया कि लाल किला आतंकी हमले में मोहम्मद आरिफ उर्फ अशरफ को मौत की सजा देने के मामले का उल्लेख किया। उस सुनवाई में कहा गया था कि तीन जजों की पीठ ही मौत की सजा से जुड़े मामलों की सुनवाई कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करने की दी ये दलील हेगड़े ने कहा कि ‘मान लीजिए कि दो जजों की पीठ कुछ आरोपियों को मौत की सजा दे देती है तो फिर इस मामले पर तीन जजों की पीठ को फिर सुनवाई करनी पड़ेगी।’ हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस सबमिशन को खारिज कर दिया और कहा कि तीन जजों की पीठ उन्हीं मामलों पर सुनवाई कर सकती है, जिनमें उच्च न्यायालय ने मौत की पुष्टि कर दी हो। जस्टिस माहेश्वरी ने कहा कि गुजरात उच्च न्यायालय ने इस मामले में 11 दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। इस मामले में सिर्फ ट्रायल कोर्ट ने ही मौत की सजा सुनाई है। ऐसे में इस मामले में दो जजों की पीठ सुनवाई कर सकती है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने सितंबर 2014 को दिए अपने एक फैसले में कहा कि मौत की सजा से जुड़े सभी मामले, जिन पर उच्च न्यायालय फैसला दे चुका हैं, उनकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ही करेगी। गुजरात उच्च न्यायालय ने 11 दोषियों की मौत की सजा उम्रकैद में बदली थी 27 फरवरी, 2002 को गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आग लगने से 59 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद राज्य में दंगे भड़क गए थे। सत्र न्यायालय ने दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी। गुजरात उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2017 के फैसले में 31 दोषियों की सजा को बरकरार रखा था और 11 दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। गुजरात सरकार ने 11 दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने का विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट में अपील की। साथ ही कई दोषियों ने उच्च न्यायालय द्वारा उन्हें दोषी बरकरार रखने के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। 

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