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गृह मंत्रालय ने कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद सुरक्षा प्राप्त कर रहे 19 पूर्व राज्य मंत्रियों की वापस ली सुरक्षा

नई दिल्ली गृह मंत्रालय (एमएचए) ने दिल्ली पुलिस को 19 पूर्व राज्य मंत्रियों (एमओएस) से सुरक्षा वापस लेने का निर्देश दिया है, जो कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद इसे प्राप्त कर रहे हैं. हालांकि, केंद्र ने यह भी निर्देश दिया है कि भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की सुरक्षा छह महीने के लिए बढ़ा दी जाए. दिल्ली पुलिस ने पूर्व राज्य मंत्रियों और सांसदों की एक सूची के साथ गृह मंत्रालय से संपर्क किया था, जिन्हें अपने कार्यकाल/कार्यकाल पूरा होने के बाद भी सुरक्षा कवर मिला हुआ है. यह पिछले साल दिल्ली पुलिस की सुरक्षा इकाई द्वारा किए गए ऑडिट के बाद किया गया था. अधिकारी ने कहा, “ऑडिट से पता चला है कि कई वरिष्ठ राजनेता अपने कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी सुरक्षा कवर का लाभ उठा रहे थे. कई मामलों में, लंबे समय से सुरक्षा समीक्षा नहीं की गई थी.” ऑडिट के बाद, कई व्यक्तियों के लिए सुरक्षा कवर वापस ले लिया गया. हालांकि, समीक्षा में पाया गया कि कई पूर्व राज्य मंत्रियों को अब पद पर नहीं रहने के बावजूद सुरक्षा मिल रही है. अधिकारी ने बताया कि ऐसे लोगों की सूची गृह मंत्रालय को भेजी गई है. संचार में जिन लोगों के नाम हैं, उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा दी गई है, उनमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय में पूर्व राज्य मंत्री भानु प्रताप सिंह वर्मा, पूर्व पंचायती राज मंत्री बीरेंद्र सिंह, संचार मंत्रालय में पूर्व राज्य मंत्री देवुसिंह जेसिंगभाई चौहान, जनजातीय मामलों के पूर्व राज्य मंत्री जसवंतसिंह सुमनभाई भाभोर और विदेश मामलों के पूर्व राज्य मंत्री राजकुमार रंजन सिंह शामिल हैं. अधिकारी ने बताया कि राज्य मंत्रियों के अलावा गृह मंत्रालय की सूची में कुछ संसद सदस्यों और वरिष्ठ न्यायाधीशों के नाम भी शामिल हैं. हालांकि, कुछ न्यायाधीशों को दी गई सुरक्षा बरकरार रखी गई है. मौजूदा नियमों के तहत, पद या खतरे के आधार पर दी गई सुरक्षा की समीक्षा किसी व्यक्ति के कार्यकाल पूरा होने पर की जाती है. अधिकारी ने कहा, “यह पाया गया कि ये समीक्षाएं लंबे समय से नहीं की गई थीं. मूल्यांकन पूरा करने के बाद, दिल्ली पुलिस ने पिछले साल दिसंबर में गृह मंत्रालय को अपनी सिफारिशें भेजीं. गृह मंत्रालय की ओर से अंतिम निर्णय कुछ सप्ताह पहले आया.” अधिकारी ने आगे कहा कि नियमों के अनुसार, पूर्व राज्य मंत्रियों के आवास पर अभी भी तीन निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) और चार पुलिसकर्मी तैनात हैं. अधिकारी ने कहा, “पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह और राज्य मंत्री अजय भट्ट के नाम भी गृह मंत्रालय को भेजे गए थे, लेकिन उनकी सुरक्षा बरकरार रखी गई है. इसके अलावा, गृह मंत्रालय ने स्मृति ईरानी की सुरक्षा को छह महीने के लिए और बढ़ा दिया है.” किसी भी व्यक्ति को दी जाने वाली सुरक्षा का स्तर खुफिया एजेंसियों, जैसे कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (आर एंड एडब्ल्यू) से प्राप्त इनपुट के आधार पर गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित किया जाता है. कुछ व्यक्ति सरकार में अपने पदों के आधार पर सुरक्षा कवर के हकदार होते हैं.

PM Modi पर टिकी देश भर की निगाहें, आज आज रात 8 बजे…

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  आज रात 8 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। इस दौरान बड़ा ऐलान हो सकता है। पूरे देशवासियों की निगाहें अब इसी पर टिकी हुई है। बता दें कि पहलगाम अटैक के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के बाद 7 मई को मॉक ड्रिल (अभ्यास) आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान अचानक सायरन बज जाएंगे और ब्लैकआउट हो जाएगा। इससे लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने का संदेश दिया जाएगा। इस दौरान अगर आप दफ्तर, स्कूल, बाजार या कहीं बाहर हैं तो सायरन बजने पर सावधान हो जाएं। इस अभ्यास का मकसद लोगों को किसी भी आकस्मिक हवाई हमले या आतंकी हमले की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करना है। आपको बता दें कि पहलगाम अटैक के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के बाद 7 मई को मॉक ड्रिल (अभ्यास) आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान अचानक सायरन बज जाएंगे और ब्लैकआउट हो जाएगा। इससे लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने का संदेश दिया जाएगा। इस दौरान अगर आप दफ्तर, स्कूल, बाजार या कहीं बाहर हैं तो सायरन बजने पर सावधान हो जाएं। इस अभ्यास का मकसद लोगों को किसी भी आकस्मिक हवाई हमले या आतंकी हमले की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करना है।     

मणिपुर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, पर्यटन निदेशक पूजा एलांगबम और थौबल डीसी ए सुभाष सिंह का नाम शामिल

इंफाल पुलिस ने बताया कि प्रतिबंधित पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के एक सदस्य को इम्फाल ईस्ट जिले के सावोमबंग काबुई खुंजाओ से जबरन वसूली में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से दो पिस्तौल, एक हथगोला और एक डेटोनेटर बरामद किया गया है। जातीय हिंसा से ग्रस्त मणिपुर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। इसके तहत राज्य में 13 आईएएस अधिकारियों का तबादला किया गया है, जिनमें पर्यटन निदेशक पूजा एलांगबम और थौबल डीसी ए सुभाष सिंह का नाम शामिल है। एलांगबम को बिष्णुपुर जिले के डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनाती दी गई है। वहीं एल बिक्रम को नया पर्यटन निदेशक बनाया गया है। एल बिक्रम बिष्णुपुर जिले में डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनात थे। ए सुभाष सिंह को गृह विभाग में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है। पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग के संयुक्त सचिव हन्ना काहमेई को थौबल का डिप्टी कमिश्नर, रंजन युमनाम को पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग का अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया है। प्रतिबंधित संगठन के उग्रवादी गिरफ्तार मणिपुर के इंफाल ईस्ट, काकचिंग और थौबल जिलों से विभिन्न प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े 11 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये सभी गिरफ्तारियां सोमवार को की गईं। प्रतिबंधित कांगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी (पीडब्ल्यूजी) के चार सदस्यों को इंफाल ईस्ट जिले के मंत्रिपुखरी फ्रेंच कॉलोनी से गिरफ्तार किया गया है। आम जनता को धमकाने का आरोप पुलिस ने बताया कि वे घाटी क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर हथगोले रखकर आम जनता को धमकाने की घटनाओं में शामिल थे। उनके कब्जे से पुलिस ने दो पिस्तौल, दो मैगजीन और गोला-बारूद बरामद किया है। अधिकारी ने बताया कि एक अलग अभियान में सुरक्षा बलों ने इंफाल ईस्ट जिले के केराओ वांगखेम और उसके आसपास के इलाके से इसी संगठन के तीन अन्य सक्रिय सदस्यों को भी गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से पांच हथियार, गोला-बारूद और एक वायरलेस संचार उपकरण जब्त किया गया। पुलिस ने बताया कि प्रतिबंधित पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के एक सदस्य को इम्फाल ईस्ट जिले के सावोमबंग काबुई खुंजाओ से जबरन वसूली में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से दो पिस्तौल, एक हथगोला और एक डेटोनेटर बरामद किया गया है। प्रतिबंधित केसीपी (अपुनबा) के दो सक्रिय कार्यकर्ताओं को थौबल जिले के वांगजिंग अवांग लेईकाई में एक खाली पड़े घर से गिरफ्तार किया गया। वह भी जबरन वसूली में शामिल थे। मणिपुर में पुलिस का तलाशी अभियान जारी पुलिस ने प्रतिबंधित केसीपी (ताइबंगनबा) के एक सदस्य को काकचिंग जिले से गिरफ्तार किया। दो साल पहले जातीय हिंसा भड़कने के बाद से सुरक्षा बल मणिपुर में तलाशी अभियान चला रहे हैं। मई 2023 से अब तक मैतेई और कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 260 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफ़ा देने के बाद केंद्र ने 13 फ़रवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था।

पाकिस्तान के खिलाफ तैयारी! 48 घंटों के अंदर दूसरी बार पीएम नरेंद्र मोदी से मिले अजित डोभाल, हुई मीटिंग

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने मंगलवार सुबह ही मुलाकात की। उनकी बीते 48 घंटों के अंदर दूसरी बार पीएम नरेंद्र मोदी के साथ मीटिंग हुई है। पाकिस्तान के साथ जिस तरह से फिलहाल तनावपूर्ण स्थिति है, उसे देखते हुए यह अहम मुलाकात है। भारत सरकार ने देश भर में 7 मई को मॉक ड्रिल करने को कहा है। यह ड्रिल हर जिलों में की जाएगी और इस दौरान लोगों को बताया जाएगा कि किसी भी तरह की हमले की स्थिति में क्या जाना चाहिए। कैसे लोग अपनी और बच्चों, महिलाओं एवं बुजुर्गों की जान बचा सकते हैं। 1971 के बाद यह पहला मौका होगा, जब इस तरह से मॉक ड्रिल की जाएगी। माना जा रहा है कि पाकिस्तान की किसी भी हिमाकत को लेकर ऐसी तैयारी कराई जा रही है कि आम नागरिक संकट में बच सकें। अजित डोभाल के अलावा पीएम नरेंद्र मोदी की कई बार डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के अलावा तीनों सेनाओं के प्रमुखों से मुलाकात हो चुकी है। इन मुलाकातों के सिलसिले इतने तेज हैं कि अकसर कयास लगते रहते हैं कि भारत पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठा सकता है। यही नहीं पाकिस्तान के तो डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ समेत कई नेता लगातार अलर्ट मोड में है। ख्वाजा आसिफ ने बार फिर कहा है कि एलओसी पर कभी भी भारत की ओर से हमला किया जा सकता है। यही नहीं पाकिस्तान ने तो अब आईएसआई चीफ आसिम मलिक को ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बना दिया है। दरअसल पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने कूटनीतिक ऐक्शन भी लिया है। ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस समेत कई देशों के राजदूतों को बुलाकर भारत ने बताया है कि पहलगाम आतंकी हमला किसने कराया और उसकी क्य़ा तैयारी है। यही नहीं जब पाकिस्तान ने इस मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाया तो वहां भी उसे तंज झेलने पड़े। किसी भी सदस्य ने पाकिस्तान का साथ नहीं दिया। इसकी बजाय यह और पूछ लिया कि इस हमले में कहीं उसके यहां से ऐक्टिव लश्कर-ए-तैयबा का हाथ तो नहीं है। इस सवाल पर पाकिस्तान बगलें झांकने लगा। बता दें कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत हो गई थी। खूंखार आतंकियों ने 22 अप्रैल को किए इस हमले में कई लोगों का धर्म पूछा था और फिर उन्हें करीब से गोली मार दी। इस हमले के बाद से ही तनाव की स्थिति बनी हुई है। भारत सरकार ने 1960 से चले आ रहे सिंधु जल समझौते को रोक दिया है। यही नहीं करीब 10 पनबिजली परियोजनाओं में तेजी लाई जा रही है। यदि इन्हें पूरा कर लिया गया तो फिर पाकिस्तान को करारा झटका लगेगा और वहां पानी तक की किल्लत हो सकती है।

भारत सरकार ने सिंधु जल समझौते को रोक दिया है, इस फैसले से ही पड़ोसी देश में चिंता की स्थिति, लगेगा झटका

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल समझौते को रोक दिया है। इस फैसले से ही पड़ोसी देश में चिंता की स्थिति है, लेकिन पाकिस्तान की मुसीबतें बढ़ाने के लिए सरकार अब ऐक्टिव भी हो गई है। सिंधु जल समझौते को रोकने का फैसला लेकर भारत सरकार ने डैम और पनबिजली परियोजनाएं बनाने का रास्ता साफ कर दिया है। इस बीच सरकार ने संबंधित मंत्रालयों और विभागों के साथ मीटिंग की है और उन्हें कहा है कि जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में जिन हाइडल प्रोजेक्ट्स की योजना है, उनमें तेजी लाई जाए। इसके अलावा कई ऐसी परियोजनाओं को स्थापित करने पर जोर रहेगा, जिन पर मंथन चल रहा था, लेकिन अब तक कोई काम नहीं हो पाया था। इसके अलावा सरकार ने यह रिपोर्ट भी मांगी है कि ऐसी कौन सी परियोजनाएं हैं, जिन्हें तेजी से पूरा किया जा सकता है। फिलहाल सरकार करीब 10 नए प्रोजेक्ट्स को शॉर्ट लिस्ट किया है और उनका गहन अध्ययन किया जा रहा है। इनमें से 5 को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। यही नहीं करीब दो प्रोजेक्ट्स के लिए जल्दी ही टेंडर भी जारी करने की तैयारी है। झेलम नदी पर बने उरी-1 प्रोजेक्ट का विस्तार किया जा रहा है। इससे किशनगंगा नदी से आने वाले पानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए अगले सप्ताह ही टेंडर जारी हो सकता है। इस प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण मंजूरी दो महीने पहले ही मिली थी और अब इसके काम में तेजी लाई जा रही है। ऐसे ही कुछ और प्रोजेक्ट्स हैं, जिन पर तेजी से काम करने की तैयारी है। ये प्रोजेक्ट्स हैं- सिंध नाला पर न्यू गांदरबल प्रोजेक्ट, चेनाब नदी पर किरठाई-2, रामबन और उधमपुर जिले में भी दो प्रोजेक्ट्स की तैयारी है। इन सभी को मिलाकर कुल 3100 मेगा वॉट बिजली तैयार की जा सकती है। हालांकि इन सभी के लिए राज्य और केंद्र के स्तर पर कई मंजूरियां लेनी होती हैं, लेकिन सरकार का जो रुख है, उसमें कोई अड़चन आती नहीं दिख रही। यही नहीं सरकार ने कई मंत्रालयों और जम्मू-कश्मीर के विभागों को इस संबंध में कह भी दिया है कि तेजी से किसी भी मंजूरी को दिया जाए। कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। कुछ प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं, जहां काम करना कठिन है क्योंकि वे दुर्गम इलाकों में हैं। इसके अलावा सुरक्षा की भी चिंताएं हैं। इस पर भी सरकार ने मीटिंग की है और सभी दिक्कतों को दूर करने की बात कही है।

जस्टिस बीआर गवई ने खुद बताया- सुप्रीम कोर्ट के अगले CJI के पास है इतनी संपत्ति

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के 20 से ज्यादा न्यायाधीश संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक कर चुके हैं। इनमें शीर्ष न्यायालय के अगले CJI यानी मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई का नाम भी शामिल है। उनके पास महाराष्ट्र और नई दिल्ली में कई फ्लैट हैं। इसके अलावा लाखों रुपये बैंक में हैं। वह भारत के 52वें सीजेआई बनने जा रहे हैं। उनके अलावा मौजूदा सीजेआई संजीव खन्ना भी संपत्ति का ब्योरा दे चुके हैं। अगले सीजेआई के पास है कितनी संपत्ति जस्टिस गवई के पास महाराष्ट्र के अमरावती में एक घर, दो कृषि भूमि हैं। वहीं, मुंबई के बांद्रा में एक अपार्टमेंट, नागपुर के कटोल में कृषि भूमि और नई दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी में एक अपार्टमेंट है। निवेश के मामले में जस्टिस गवई के पास पीपीएफ के तहत 6 लाख 59 हजार 692 रुपये, जीपीएफ के तह 35 लाख 86 हजार 736 रुपये, अन्य 31 हजार 315 रुपये हैं। उनके पास 5 लाख 25 हजार 859 रुपये सोने के आभूषण हैं। साथ 61 हजार 320 रुपये कैश, बैंक बैलेंस 19 लाख 63 हजार 584 रुपये और अन्य एडवांस 54 लाख 86 हजार 841 रुपये हैं। दायित्व के तहत मुंबई फ्लैट का सिक्योरिटी डिपॉजिट 7 लाख रुपये, दिल्ली के फ्लैट का एडवांस किराया 17 लाख 32 हजार 500 रुपये है। 52वें सीजेआई जस्टिस गवई को मंगलवार को भारत का अगला CJI नियुक्त किया गया। न्यायमूर्ति गवई 14 मई को सीजेआई का पदभार संभालेंगे। मौजूदा सीजेआई न्यायमूर्ति संजीव खन्ना का कार्यकाल 13 मई को समाप्त हो रहा है। 16 अप्रैल को प्रधान न्यायाधीश खन्ना ने न्यायमूर्ति गवई के नाम की अनुशंसा केंद्र सरकार को की थी। न्यायमूर्ति गवई का कार्यकाल छह महीने का होगा। वह 24 मई 2019 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश बनाए गए थे। 23 नवंबर को 65 वर्ष की आयु होने पर न्यायमूर्ति गवई का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। अमरावती में 24 नवंबर 1960 को जन्मे न्यायमूर्ति गवई को 14 नवंबर 2003 को बंबई उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। वह 12 नवंबर 2005 को उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश बने। न्यायमूर्ति गवई उच्चतम न्यायालय में कई संविधान पीठों का हिस्सा रहे हैं, जिन्होंने महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं। वह पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ का हिस्सा थे, जिसने दिसंबर 2023 में सर्वसम्मति से पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र के फैसले को बरकरार रखा था। वह 16 मार्च 1985 को बार में शामिल हुए थे और नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के स्थायी वकील थे। न्यायमूर्ति गवई को अगस्त 1992 से जुलाई 1993 तक बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त सरकारी अभियोजक नियुक्त किया गया था। उन्हें 17 जनवरी 2000 को नागपुर पीठ के लिए सरकारी वकील नियुक्त किया गया।

पाकिस्तान पूरी तरह से बौखलाया हुआ और दुनिया के अन्य देशों से मदद की गुहार लगा रहा, UNSC में हुई फजीहत

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की सैन्य तैयारियों को देखकर पाकिस्तान को हर पल हमले का खौफ सता रहा है. इसी वजह से पाकिस्तान पूरी तरह से बौखलाया हुआ और दुनिया के अन्य देशों से मदद की गुहार लगा रहा है. पाकिस्तान ने इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में इस मुद्दे पर एक क्लोज डोर मीटिंग बुलाई थी ताकि अपना दुखड़ा रोकर बाकी देशों की सहानुभूति बंटोर सके, लेकिन वहां भी पड़ोसी देश की जमकर फजीहत हो गई है. मीटिंग के बाद खुली PAK की पोल संयुक्त राष्ट्र में इस क्लोज डोर मीटिंग के बाद पाकिस्तान के स्थाई प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने झूठ फैलाते हुए कहा कि इस बैठक से जो हासिल करने का मकसद था वह पूरा हो गया है. उन्होंन यह भी दावा किया कि इस मीटिंग में जम्मू कश्मीर के मुद्दे को सुलझाने पर भी चर्चा हुई है. लेकिन जैसे-जैसे तस्वीर पूरी तरह साफ हुई तो पाकिस्तान की पोल खुलने लगी.   इस क्लोज डोर मीटिंग में पहलगाम हमले को लेकर पाकिस्तान से तीखे सवाल पूछे गए थे. यहां तक कि पहलगाम हमले के पीछे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की भूमिका को लेकर भी पाकिस्तान को फटकार लगाई गई है. क्लोज डोर मीटिंग के दौरान UNSC के सदस्य देशों ने भारत को लेकर पाकिस्तान की ओर से फैलाए जा रहे False Flag नैरेटिव को भी पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसके जरिए पाकिस्तान खुद को विक्टिम दिखाकर भारत पर निशाना साध रहा है. चीन का भी नहीं मिला साथ सबसे हैरानी की बात यह रही कि UNSC के स्थाई सदस्य अमेरिका, फ्रांस, रूस और ब्रिटेन ने पाकिस्तान से तीखे सवाल किए, साथ ही पाकिस्तान के ‘दोस्त’ चीन ने भी उसका साथ नहीं दिया, जिसके भरोसे पड़ोसी मुल्क उछल रहा था. पाकिस्तान UNSC का अस्थाई सदस्य है और इसी हैसियत से उसने क्लोज डोर मीटिंग बुलाने का आग्रह किया था.   सूत्रों के मुताबिक बैठक में सदस्य देशों की ओर से न सिर्फ पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई, बल्कि धर्म पूछकर पर्यटकों को निशाना बनाने का मुद्दा भी उठाया गया. कुछ देशों ने पाकिस्तान की ओर से किए गए मिसाइल टेस्ट और परमाणु हथियारों की धमकी पर भी सवाल उठाए और इसे उकसावे की कार्रवाई बताया है. पाकिस्तान इस मुद्दे पर किसी तीसरे की दखल के अपने पुराने ढर्रे पर चलना चाहता था. लेकिन सदस्यों देशों ने इसे द्विपक्षीय मुद्दा बताते हुए किसी तरह की दखल से इनकार कर दिया. न कोई प्रस्ताव आया, न बयान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इस क्लोज डोर मीटिंग का कुछ भी नतीजा नहीं निकला बल्कि इससे पाकिस्तान की थू-थू जरूर हो गई. इस बैठक के बाद किसी भी देश की ओर से न तो कोई प्रस्ताव लाया गया और न ही किसी ने इस पर कोई बयान दिया है. सिर्फ पाकिस्तान ही है जो दुनिया के सामने झूठ परोसने की विफल कोशिशों में जुटा है. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बीते दिनों दोनों पक्षों से बात कर तनाव कम करने की अपील की थी और इसी के बाद यह क्लोज डोर मीटिंग बुलाई गई थी. दरअसल पाकिस्तान को किसी भी वक्त भारत की ओर से जवाबी हमले के डर सता रहा है. इसी खौफ में सैन्य कार्रवाई से बचने के लिए पाकिस्तान ने  आनन-फानन में UNSC की मीटिंग बुलाने की अपील की थी. उसकी कोशिश थी कि क्लोज डोर मीटिंग के जरिए बाकी देश भारत से संयम बरतने के लिए कहेंगे. पाकिस्तान ने साउथ एशिया में पैदा हो रहे तनाव को कम करने का हवाला देकर यह बैठक बुलाई थी.  

मतदाता सूची अब अपने आप होगी अपडेट, सीधे जन्म-मृत्यु रजिस्टर से मिलेगा डेटा

नई दिल्ली निर्वाचन आयोग वोटर लिस्ट अपडेट करने और चुनावी प्रक्रिया को और सटीक बनाने के लिए नई पहल शुरू कर रहा है. आयोग अब वोटर लिस्ट में सटीक सुधार के लिए सर्वेक्षण के साथ-साथ  स्थानीय निकायों से डेथ सर्टिफिकेट का डेटा भी लेगा.   आयोग ने मतदाता सूचियों की सटीकता में सुधार लाने तथा नागरिकों के लिए मतदान प्रक्रिया को और अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से इस नई पहल को शुरू किया है. ये उपाय भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) के सम्मेलन के दौरान चुनाव आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी की उपस्थिति में हुई चर्चा पर अमल के अनुरूप की हैं. इलेक्ट्रॉनिक रूप से डेटा लेगा आयोग आयोग अब मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 9 और जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (जैसा कि 2023 में संशोधित किया गया है) की धारा 3(5)(बी) के अनुरूप भारत के महापंजीयक से इलेक्ट्रॉनिक रूप से मृत्यु पंजीकरण डेटा प्राप्त करेगा. इससे ये सुनिश्चित होगा कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को पंजीकृत मौतों के बारे में वक्त पर जानकारी मिले. इससे बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) भी फॉर्म 7 के तहत औपचारिक अनुरोध की प्रतीक्षा किए बिना, फील्ड विजिट के माध्यम से जानकारी को फिर से सत्यापित करने में सक्षम होंगे. नाम काटकर अपडेट कर देंगे वोटर लिस्ट चुनाव आयोग ने बताया, वोटर के इलाके के बीएलओ उनके घर जाकर इस बात को सुनिश्चित करेंगे। इसके लिए परिवार के वोटर के डेथ होने के बाद वोटर लिस्ट से नाम कटवाने के लिए जो फार्म नंबर-7 भरना होता था। उसका इंतजार किए बिना बीएलओ वोटर लिस्ट से उसका नाम काटकर वोटर लिस्ट को अपडेट कर सकेंगे। जारी किए जा रहे विशेष आईडी कार्ड चुनाव आयोग का यह कदम इस साल मार्च में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा पैन इंडिया सीईओ कॉन्फ्रेंस में उठाए गए कदमों के अनुरूप है। इसके अलावा चुनाव के दौरान वोटरों को मिलने वाली वोटर इन्फर्मेशन स्लिप को भी और अधिक वोटर फ्रेंडली बनाया जा रहा है। इसके डिजाइन में बदलाव करते हुए पर्ची के टॉप में ही पार्ट नंबर और सीरियल नंबर को बोल्ड अक्षरों में लिखा जाएगा। इसके अलावा वोटरों के घरों में जाने वाले बीएलओ के लिए आयोग की तरफ से वोटरों और उनके परिवार की सुरक्षा की दृष्टि से विशेष आईडी कार्ड जारी किए जा रहे हैं। ताकि वोटरों को यह सुनिश्चित हो सके कि बीएलओ असली सरकारी कर्मचारी है। मतदाता सूचना पर्चियों में होगा बदलाव मतदाता सूचना पर्चियों (VIS) को मतदाताओं के लिए अधिक अनुकूल बनाने के लिए आयोग ने इसके डिजाइन में भी बदलाव करने का फैसला किया है. मतदाता की क्रम संख्या और भाग संख्या अब अधिक प्रमुखता से प्रदर्शित की जाएगी. साथ ही मतदान केंद्र की जानकारी देने वाले फ़ॉन्ट का आकार भी बढ़ाया जाएगा, जिससे मतदाताओं के लिए अपने मतदान केंद्र की पहचान करना आसान हो जाएगा. साथ ही मतदान अधिकारियों के लिए मतदाता सूची में उनके नाम को कुशलतापूर्वक ढूंढना भी आसान हो जाएगा. आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13बी(2) के तहत ईआरओ द्वारा नियुक्त सभी बीएलओ को मानक फोटो पहचान पत्र जारी किए जाएं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मतदाता सत्यापन और पंजीकरण अभियान के दौरान नागरिक बीएलओ को पहचान सकें और उनके साथ विश्वासपूर्वक बातचीत कर सकें. चुनाव संबंधी कर्तव्यों के निष्पादन में मतदाताओं और ईसीआई के बीच पहले इंटरफेस के रूप में, यह महत्वपूर्ण है कि घर-घर जाकर काम करने के दौरान बीएलओ को जनता आसानी से पहचान सके.  

EPFO खाताधारकों को अब प्रोफाइल अपडेट करना, नौकरी बदलने पर पीएफ खाता ट्रांसफर करना हुआ आसान

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्‍य निध‍ि संगठन के खाताधारकों और कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण खबर है । ईपीएफओ ने साल 2025 में कई बड़े और अहम बदलाव किए हैं।इनमें प्रोफाइल अपडेट करना, नौकरी बदलने पर पीएफ खाता ट्रांसफर करना या फिर अधिक पेंशन से जुड़ी नीतियों से जुड़े नियम शामिल है। इनका मकसद कर्मचारियों को कम से कम समय में अधिक से अधिक सुविधा देना, प्रक्रियाओं को डिजिटल करना है ताकी पारदर्शिता बनी रही।इससे करोड़ों खाताधारक लाभान्वित होंगे। आईए जानते है इस साल हुए बड़े बदलावों को विस्तार से…. प्रोफाइल अपडेट करना आसान     ईपीएफ सदस्य अब बिना किसी डॉक्यूमेंट अपलोड किए अपने आधार से जुड़े यूएएन को अपडेट कर सकते हैं। अगर UAN को आधार के साथ लिंक्‍ड किया गया है तो ईपीएफ सदस्य बिना कोई दस्तावेज अपलोड किए अपना नाम, डेट ऑफ बर्थ, जेंडर, राष्ट्रीयता, पिता या माता का नाम, मैरिटल स्‍टेटस जैसी अन्य व्यक्तिगत जानकारियां अपडेट कर सकते हैं।     इसके लिए किसी भी तरह के अन्‍य दस्‍तावेज की आवश्‍यकता नहीं होगी। इससे 6 करोड़ से ज्यादा मेंबर्स को लाभ मिलेगा। हालांकि, यदि ग्राहक का यूएएन 1 अक्तूबर 2017 से पहले का है, तो कुछ चीजों में बदलाव के लिए उन्हें नियोक्ता की मंजूरी की जरूरत हो सकती है। नौकरी बदलते समय पीएफ अकाउंट ट्रांसफर     ईपीएफओ ने नौकरी बदलने पर पीएफ अकाउंट्स को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को आसान बना दिया है। इससे 1 करोड़ 25 लाख से अधिक मेंबर्स को फायदा होगा।     अब तक पीएफ जमा राशि के ट्रांसफर में दो कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) कार्यालय शामिल थे- स्रोत कार्यालय, जहां से पीएफ राशि ट्रांसफर की जाती थी और गंतव्य कार्यालय, जहां आखिरी तौर से राशि जमा की जाती थी लेकिन अब ईपीएफओ ने फॉर्म 13 में बदलाव किया है।     इससे डेस्टिनेशन ऑफिस में ट्रांसफर क्लेम की मंजूरी की जरूरत खत्म हो गई है। ट्रांसफर ऑफिस से ट्रांसफर क्लेम मंजूर होने के बाद पिछले अकाउंट की रकम ऑटोमैटिक डेस्टिनेशन ऑफिस में मेंबर के अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएगी। अब क्लेम सेटलमेंट करना होगा आसान     ईपीएफओ ने ऑनलाइन पैसे निकालने के लिए कुछ नियमों में बदलाव किया है।इसके तहत अब कैंसिल चेक और बैंक अकाउंट के लिए एम्प्लॉयर (वह कंपनी जहां काम करते हैं) से वेरिफिकेशन करवाने की जरूरत नहीं होगी।     दरअसल, EPFO के सदस्यों को PF खातों से ऑनलाइन धनराशि निकालने के लिए आवेदन करते समय, UAN या PF नंबर से जुड़े बैंक खाते की चेक लीफ या पासबुक की सत्यापित फोटो कॉपी अपलोड करनी होती है।     नियोक्ताओं को भी आवेदक के बैंक खाते के विवरण को स्वीकृत करना आवश्यक है लेकिन अब अब EPFO मेंबर्स को अपने बैंक अकाउंट को वेरीफाई करने की जरूरत नहीं होगी।     ऑनलाइन दावा दाखिल करते समय चेक या सत्यापित बैंक पासबुक की तस्वीर अपलोड करने की जरूरत को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। UMANG: UAN नंबर जनरेट व एक्टिव करना आसान     ईपीएफओ ने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) जेनरेट और एक्टिवेट करने के लिए फेस ऑथंटिकेशन टेक्नॉलजी की सुविधा शुरू कर दी है।अब उमंग ऐप इस्तेमाल करके कर्मचारी आधार फेस ऑथेन्टिकेशन टेक्नॉलजी से अपने आप अपना UAN बना सकते हैं।     जिन सदस्यों के पास पहले से ही यूएएन है लेकिन उन्होंने अभी तक इसे सक्रिय नहीं किया है, वे अब आसानी से उमंग ऐप के माध्यम से अपना यूएएन सक्रिय कर सकते हैं। प्लेस्टोर से उमंग ऐप डाउनलोड कर सकते है। जॉइंट डिक्लेरेशन की प्रक्रिया सरल     ईपीएफओ ने 16 जनवरी 2025 को संयुक्त घोषणा (जेडी) की प्रक्रिया के संबंध में नए दिशानिर्देश जारी किए। पहले इस बारे में एसओपी संस्करण 3.0 लागू था, जिसे अब हटा दिया गया है और सदस्यों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है।     जैसे- जिनका यूएएन आधार आधारित है- वे ऑनलाइन जेडी कर सकते हैं। जिनका यूएएन पुराना है लेकिन आधार से सत्यापित है- वे भी ऑनलाइन जेडी कर सकते हैं। जिनके पास यूएएन नहीं है, आधार सत्यापित नहीं है या सदस्य की मृत्यु हो गई है- उनके लिए भौतिक जेडी का प्रावधान है। सीपीपीएस पेंशन भुगतान की नई व्यवस्था     1 जनवरी 2025 से ईपीएफओ ने एक नई व्यवस्था शुरू की है, जिसका नाम है सेंट्रलाइज्ड पेंशन पेमेंट सिस्टम (CPPS)। इसके तहत एनपीसीआई प्लेटफॉर्म के जरिए पेंशन योजना के दायरे में आने वाले पेंशनर्स किसी भी बैंक या उसकी ब्रांच से अपनी पेंशन निकाल सकेंगे।     नए सिस्टम से EPFO के 78 लाख से ज्यादा EPS पेंशन भोगियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्रीय कार्यालयों के बीच पीपीओ ट्रांसफर की जरूरत खत्म हो जाएगी। अगर गलती से कोई क्लेम किसी दूसरे ऑफिस में भेज दिया गया है तो उसे वापस उसी ऑफिस में भेजा जाएगा जहां से क्लेम आया था।

US ने दी भारत को हॉकआई 360 देने की मंजूरी, जानें क्‍यों खास है यह ‘हथियार’, समुद्र में बढ़ेगी चीन की धड़कन

वॉशिंगटन  अमेरिका ने भारत को हॉकआई 360 की बिक्री को मंजूरी दे दी है। इस डील में रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सेंसर, एनालिटिक्स सॉफ्टवेयर, सिस्टम इंटीग्रेशन सपोर्ट और ट्रेनिंग मॉड्यूल शामिल हैं। इसकी कुल कीमत 131 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। इससे भारत को अपनी समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। खासतौर से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में हॉकआई 360 से भारत को रियल-टाइम समुद्री निगरानी करने में आसानी हो जाएगी। ये समुद्री सुरक्षा के लिहाज से भारत के लिए एक अहम डील है। इसकी अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इंडो-पैसिफिक में चीन ने अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर है, जो भारत के लिए चिंता का सबब रहा है। हॉकआई 360 छोटे-छोटे सैटेलाइट्स का एक समूह है। ये सैटेलाइट्स पृथ्वी की निचली कक्षा में घूमते हैं और रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) को ट्रैक करते हुए उनकी जगह बताते हैं। ये सैटेलाइट समूह जहाजों, विमानों, वाहनों और तटीय प्रणालियों (कोस्टल सिस्टम) से आने वाले संचार संकेतों को ट्रैक करते हैं। हॉकआई 360 सैटेलाइट उस जहाज के रेडियो फ्रीक्वेंसी एमिशन को भी पकड़ता है, जिसने अपने ट्रांसपोंडर को बंद कर रखा है। भारत के लिए कैसे होगा मददगार भारत को हॉकआई 360 सिस्टम भारत को बड़े समुद्री क्षेत्रों, खासतौर से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रियल-टाइम निगरानी करने में मदद करेगा। इससे समुद्री अभियानों में जागरूकता और किसी घटना पर प्रतिक्रिया देना आसान होगा। इस सिस्टम की सबसे खास बात ये है कि यह उन जहाजों का भी पता लगा सकता है, जो AIS को बंद कर देते हैं ताकि उन्हें ट्रैक ना किया जा सके। ये सिस्टम मिलने से इंडियन नेवी अवैध मछली पकड़ने और तस्करी जैसी गतिविधियों की पहचान कर सकेगी। इससे नेवी को तेजी से फैसले लेने और समुद्री क्षेत्र पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। इंडियन नेवी को हॉकआई 360 की मदद से अपने एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन में बेहतर जानकारी मिल सकेगी। यह सिस्टम भारत को आपदा राहत और बचाव कार्यों में भी मदद करेगा। इससे संकट संकेतों का पता लगेगा और रेस्क्यू टीमे तेजी से पहुंच सकेंगी। कैसे करता है काम हॉकआई 360 एक बड़े ISR सिस्टम में RF लेयर के रूप में काम करता है। इस सिस्टम में इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (EO), इंफ्रारेड (IR) और सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) जैसी अतिरिक्त लेयर्स भी हैं। हर लेयर खतरों का पता लगाने, उनकी पुष्टि करने और क्लासीफाइड करने में मदद करती है। हॉकआई 360 की क्षमताओं को मल्टी-लेयर्ड सर्विलांस से बढ़ाया जा सकता है। EO इमेजिंग RF-आधारित जहाजों की लोकेशन बताता है। EO सैटेलाइट दिन में हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें लेते हैं। एनालिस्ट्स इन तस्वीरों का इस्तेमाल RF डिटेक्शन को देखने के लिए करते हैं। EO लेयर सबसे अच्छा काम दिन के उजाले में करती है। IR सेंसर जहाजों से निकलने वाली गर्मी का पता लगाते हैं। इंफ्रारेड सेंसर इंजन और एग्जॉस्ट से निकलने वाली गर्मी को पहचानते हैं। इससे रात में छिपकर जाते जहाजों को ट्रैक करने में मदद मिलती है। IR लेयर कम रोशनी में भी काम करती है। SAR इमेजिंग बादलों और अंधेरे में भी देख सकता है। SAR सैटेलाइट्स हर मौसम में रडार-आधारित तस्वीरें लेते हैं। यह लेयर जहाज के आकार, गति और लोकेशन की पुष्टि करती है। SAR रात में या तूफान के दौरान भी महत्वपूर्ण जानकारी देता है। यह सिस्टम तेज और सटीक है, जो हर मौसम और हर समय काम करता है। एनालिस्ट्स RF इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके पूरी स्थिति का जायजा लिया जा सकता है।

ECINET एप से मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेगा समाधान

 नई दिल्ली चुनाव आयोग ऑफ इंडिया (ECI) अब देशभर के करोड़ों मतदाताओं, चुनाव अधिकारियों और राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ा डिजिटल बदलाव करने जा रहा है। आयोग जल्द ही ECINET नाम से एक सिंगल-प्लेटफॉर्म एप लॉन्च करेगा, जो चुनाव संबंधी सभी सेवाओं को एक जगह पर उपलब्ध कराएगा। यह एप चुनाव आयोग की मौजूदा 40 से अधिक मोबाइल और वेब एप्लिकेशनों को एकीकृत कर देगा। ECINET एप को खासतौर पर बेहतर यूज़र इंटरफेस (UI) और सरल यूजर एक्सपीरियंस (UX) के साथ तैयार किया जा रहा है, जिससे मतदाता और अधिकारी बिना किसी झंझट के चुनाव से जुड़ी हर जानकारी तक पहुंच सकें। अब बार-बार अलग-अलग एप्स डाउनलोड करने और पासवर्ड याद रखने की जरूरत नहीं होगी। अब मोबाइल या डेस्कटॉप पर मिलेगी पूरी जानकारी इस आधुनिक प्लेटफॉर्म की कल्पना मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ग्यानेश कुमार ने मार्च 2025 में हुई मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) की बैठक में की थी, जिसमें चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी मौजूद थे। ECINET के जरिए उपयोगकर्ता अब अपने मोबाइल या डेस्कटॉप से ही जरूरी चुनावी जानकारी तक पहुंच पाएंगे। खास बात यह है कि इस ऐप पर अपलोड की जाने वाली सभी जानकारियां केवल अधिकृत चुनाव अधिकारी ही दर्ज करेंगे, जिससे डेटा की सटीकता बनी रहेगी। हालांकि, किसी भी विवाद की स्थिति में स्टैच्युटरी फॉर्म्स में भरी गई जानकारी ही अंतिम मानी जाएगी। ये एप्स होंगे ECINET में शामिल इस नई पहल के तहत चुनाव आयोग Voter Helpline App, Voter Turnout App, cVIGIL, Suvidha 2.0, ESMS, Saksham और KYC App जैसे पॉपुलर एप्स को भी ECINET में मर्ज कर देगा। गौरतलब है कि इन एप्स को अब तक 5.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। 100 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं को होगा फायदा ECINET से न केवल 100 करोड़ से अधिक मतदाताओं को सुविधा होगी, बल्कि देशभर के 10.5 लाख बूथ लेवल अफसर, 15 लाख राजनीतिक एजेंट्स, 45 लाख से ज्यादा पोलिंग अधिकारी, 15,597 असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर, 4,123 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अफसर और 767 जिला चुनाव अधिकारी (DEO) भी इससे जुड़ेंगे। ECINET का डेवलपमेंट अब एडवांस स्टेज में पहुंच चुका है और इसकी कार्यक्षमता, उपयोग में सरलता और साइबर सुरक्षा को लेकर कड़े ट्रायल्स किए जा रहे हैं। इसे 36 राज्यों/UTs के सीईओ, 767 डीईओ और 4,123 ईआरओ की सलाह-मशविरे के बाद विकसित किया जा रहा है। इतना ही नहीं, आयोग ने इसके लिए 9,000 पेजों वाले 76 से ज्यादा दस्तावेजों, नियमों और गाइडलाइंस की समीक्षा की है। पूरी तरह से कानूनी दायरे में होगा ECINET ECINET ऐप के जरिए दी जाने वाली सभी सेवाएं और डेटा चुनाव आयोग द्वारा तय जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951, निर्वाचन नियम 1960, और चुनाव प्रक्रिया नियम 1961 के अंतर्गत ही संचालित होंगे।  

आतंक के खिलाफ जंग में भारत के साथ रूस, पुतिन ने पीएम मोदी को फोन कर आतंकी हमले की कड़ी निंदा की

नई दिल्ली आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में रूस ने भारत का साथ देने की प्रतिबद्धता दोहराई है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया और पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया और भारत के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने निर्दोष लोगों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को पूरा समर्थन देने की बात कही। जायसवाल ने कहा, ‘पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि इस जघन्य हमले के दोषियों और उनके मददगारों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। दोनों नेताओं ने भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री ने विजय दिवस की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रपति पुतिन को शुभकामनाएं दीं और उन्हें इस साल के अंत में भारत में आयोजित होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया।’ विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी की थी खास अपील इससे पहले रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने रविवार को भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर चिंता जताई थी। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी जारी है। इस बीच रूसी विदेश मंत्री ने दोनों देशों से संयम बरतने और किसी भी तरह की बढ़त को रोकने की अपील की थी। पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या की थी 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में दहशतगर्दों ने 26 लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी। जान गंवाने वालों में ज्यादातर पर्यटक थे। यह हमला 2019 के पुलवामा हमले के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है। भारत ने इस हमले के बाद कड़े कदम उठाए हैं। इसमें 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करने का एलान भी शामिल है। यह संधि दोनों देशों के बीच जल बंटवारे को लेकर बनी थी।

कनाडा में एक बार फिर खालिस्तानी समर्थकों की भारत विरोधी करतूत, हिंदुओं खिलाफ उगला जहर

कनाडा कनाडा में एक बार फिर खालिस्तानी समर्थकों की भारत विरोधी करतूत सामने आई है। टोरंटो स्थित माल्टन गुरुद्वारे में रविवार को खालिस्तानी समर्थकों द्वारा एक विवादास्पद परेड का आयोजन किया गया, जिसमें भारत विरोधी और हिंदू विरोधी भावनाओं को प्रदर्शित किया गया। इस परेड में एक बड़े ट्रक पर एक पिंजरा रखा गया था, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के पुतले बंद थे। परेड के दौरान खालिस्तानी समर्थकों ने कनाडा में रह रहे 8 लाख हिंदुओं को भारत वापस भेजने की मांग की। यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने हाल ही में चुनावों में जीत हासिल की है और भारत-कनाडा संबंधों को सुधारने की बात कही है।  हालांकि, इस परेड ने उनके नेतृत्व में खालिस्तानी चरमपंथ से निपटने की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कनाडाई पत्रकार डैनियल बोर्डमैन ने इस परेड का वीडियो साझा करते हुए कहा, “जिहादी हमारे सड़कों पर उन्माद मचा रहे हैं, लेकिन खालिस्तानी उन्हें नफरत फैलाने में कड़ी टक्कर दे रहे हैं।” उन्होंने पूछा कि क्या मार्क कार्नी का कनाडा, जस्टिन ट्रूडो के कनाडा से अलग होगा?  कनाडा में हिंदू समुदाय के नेताओं ने इस परेड की कड़ी निंदा की है। हिंदू कनाडाई फाउंडेशन (HCF) ने कहा कि यह परेड हिंदू विरोधी घृणा का स्पष्ट उदाहरण है और कनाडा में धार्मिक सहिष्णुता के सिद्धांतों के खिलाफ है।  

JK की जेलों पर आतंकवादी हमले का खतरा, बंद हैं कई स्लीपर सेल्स और आतंकी

श्रीनगर हलगाम आतंकवादी हमले की जांच के बीच जम्मू और कश्मीर में फिर आतंकी साजिश का खतरा मंडरा रहा है। खबरें हैं कि केंद्र शासित प्रदेश की जेलों पर हमले की खुफिया जानकारी है। इधर, पुंछ में भी सुरक्षाबलों को आतंकियों का ठिकाना मिला है, जहां से टिफिन में IED बरामद हुए हैं। फिलहाल, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। खास बात है कि इनमें से कुछ जेलों में बड़े आतंकवादी भी सजा काट रहे हैं। 22 अप्रैल को हुए अटैक के बाद से ही सेना अलर्ट मोड पर है और हमलावरों की तलाश जारी है।इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि जम्मू और कश्मीर की जेलों पर संभावित रूप से आतंकी हमला हो सकता है। इसे लेकर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रिपोर्ट में खुफिया इनपुट्स के हवाले से बताया गया है कि आतंकवादी जम्मू में कोट बलवल जेल और श्रीनगर सेंट्रल जेल को निशाना बना सकते हैं।  इन जेलों में बड़े आतंकवादियों से लेकर स्लीपर सेल के सदस्य तक बंद हैं।खास बात है कि ये आतंकवादियों को लॉजिस्टिक मदद से लेकर पनाह तक मुहैया कराते थे। खुफिया जानकारी के आधार पर जेलों की सुरक्षा समीक्षा की जा रही है और किसी भी घटना से बचने के लिए उपाय किए जा रहे हैं। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि DG (CISF) ने हालात की समीक्षा के लिए श्रीनगर में शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों से मुलाकात की थी। साल 2023 में जम्मू और कश्मीर की जेलों को CRPF से लेकर CISF को सौंपा गया था।सेना और जम्मू और कश्मीर पुलिस को साझा ऑपरेशन में पुंछ के सुरनकोट में आतंकियों का ठिकाना मिला है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि तीन IED टिफिन बॉक्स में थे और 2 लोहे की बाल्टियों में थे।आतंकवादी छिपे होने की आशंकाइंडिया टुडे की एक पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, NIA सूत्रों ने पहले दावा किया था कि इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि पहलगाम हमले में शामिल आतंकी दक्षिण कश्मीर में छिपे हुए हैं और सक्रिय हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बात की भरोसेमंद जानकारी है कि क्षेत्र में और भी आतंकवादी छिपे हो सकते हैं। उनका कहना है कि शक जताया जा रहा है कि बैसरन में हुए हमले के दौरान और भी आतंकवादी दूरी पर मौजूद थे और संभावित रूप से आतंकियों को कवर फायर देकर बचाने की कोशिश कर सकते थे।

डर से पाकिस्तान ने खटखटाया संयुक्त राष्ट्र का दरवाजा, UNSC आज करेगा आपात बैठक

संयुक्त राष्ट्र  पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। भारत के डर से पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र का दरवाजा खटखटाया था। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में आपातकालीन बैठक बुलाने की अपील की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया। आज UNSC में भारत और पाकिस्तान के मुद्दे पर बैठक होगी। बंद कमरे में होगी बैठक UNSC के 10 गैर-स्थायी सदस्यों में अभी पाकिस्तान भी शामिल है। ऐसे में पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को लेकर यह बैठक बुलाने की सिफारिश की थी। ग्रीक प्रेसीडेंसी ने आज यानी 5 मई की दोपहर के लिए शेड्यूल की है। दोनों देशों के बीच यह बैठक बंद कमरे में आयोजित की जाएगी। संयुक्त राष्ट्र के गैर-स्थायी सदस्य बता दें कि संयुक्त में राष्ट्र में पांच स्थायी सदस्य – रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस और यूके के अलावा 10 गैर-स्थायी सदस्य होते हैं। गैर-स्थायी सदस्यों का कार्यकाल सिर्फ 2 साल का होता है। वर्तमान में अलजीरिया, डेनमार्क, ग्रीस, गुयाना, पाकिस्तान, पनामा, दक्षिण कोरिया, सीरिया लियोन, स्लोवानिया और सोमालिया का नाम संयुक्त राष्ट्र के गैर-स्थायी सदस्यों में शामिल है। ग्रीक के राजदूत ने दिया बयान संयुक्त राष्ट्र में ग्रीस के स्थायी प्रतिनिधि इवेंजेलोस सेकेरिस ने पहलहाम हमले को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर बयान दिया है। उनका कहना है कि “आतंकवाद चाहे किसी भी रूस में हो, हम उसकी कड़ी निंदा करते हैं। मगर दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को लेकर भी हम चिंतित हैं। भारत ने पाकिस्तान को दिखाया था आईना बता दें कि 1 हफ्ते पहले भारत ने संयुक्त राष्ट्र को चेताया था कि आतंक का गंदा खेल खेलने के बाद पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर झूठा प्रोपेगेंडा फैलाता है और खुद को निर्दोष साबित करने में जुट जाता है। हालांकि पाकिसतान ने इस मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र से आपात बैठक बुलाने की गुहार लगाई। यूएन में पाकिस्तान के राजदूत असीम इफ्तिखार ने कहा कि यूएन जब ठीक समझे वो इस मुद्दे पर बैठक बुला सकता है।

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