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केरल के तिरुवनंतपुरम में विझिनजम इंटरनेशनल सीपोर्ट परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन किया: मोदी

तिरुवनंतपुरम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को केरल के तिरुवनंतपुरम में विझिनजम इंटरनेशनल सीपोर्ट परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन किया। इस दौरान उनके साथ मंच पर केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और कांग्रेस सांसद शशि थरूर भी मौजूद थे। बंदरगाह का उद्घाटन करने के बाद मोदी ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ गठबंधन का एक ‘‘स्तंभ’’ बताया और उन्हें एवं मंच पर मौजूद कांग्रेस सांसद शशि थरूर से कहा कि उद्घाटन समारोह कई लोगों की ‘‘रातों की नींद हराम’’ कर देगा। यह कार्यक्रम बहुतों की नींद हराम देगा- मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी गठबंधन पर चुटकी लेते हुए कहा, “मैं मुख्यमंत्री जी से कहना चाहता हूं, आप INDI गठबंधन के एक मजबूत स्तंभ हैं, शशि थरूर जी भी यहीं बैठे हैं। आज का यह कार्यक्रम बहुतों की नींद हराम देगा।” हालांकि, उनके भाषण का अनुवाद करने वाले व्यक्ति ने इसका ठीक से अनुवाद नहीं किया, जिस पर प्रधानमंत्री को यह कहना पड़ा कि ‘‘संदेश उन तक पहुंच गया है, जिन तक यह संदेश पहुंचाना था’’। इस बंदरगाह परियोजना को अडानी समूह द्वारा विकसित किया गया है, जो अक्सर विपक्षी नेताओं के निशाने पर रहता है। यही वजह रही कि मंच पर शशि थरूर और पिनराई विजयन की उपस्थिति और प्रधानमंत्री मोदी की यह टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई। शशि थरूर तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद हैं। उन्होंने पहले भी मोदी सरकार की कुछ नीतियों की प्रशंसा की है, खासतौर पर रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत की कूटनीतिक स्थिति और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संबंधों को लेकर। हाल ही में भाजपा के नेता और केरल इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी थरूर को “कांग्रेस के कुछ समझदार नेताओं में से एक” बताया था। वह भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे। थरूर ने किया PM का स्वागत इससे पहले दिन में, थरूर ने प्रधानमंत्री मोदी का केरल में स्वागत किया। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में दिल्ली हवाई अड्डे पर हो रही उड़ानों में देरी पर भी तंज कसा और लिखा कि “दुखद हालातों के बावजूद” वह समय पर प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए पहुंच सके। थरूर ने एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ कुछ तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि वे विझिनजम बंदरगाह परियोजना के उद्घाटन को लेकर उत्साहित हैं, जो कि उनकी “शुरुआत से प्रिय परियोजनाओं में से एक” रही है। इस बंदरगाह का निर्माण अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) द्वारा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर किया गया है। यह भारत का पहला गहरे पानी वाला ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है और इसकी कुल अनुमानित लागत 8,867 करोड़ रुपये बताई गई है। दिसंबर 2024 में इसे वाणिज्यिक संचालन की मंजूरी मिली थी। इस बंदरगाह के शुरू होने से भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार में नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह रणनीतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है और इससे देश की विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता में कमी आएगी। देश में विकास का ब्योरा देते हुए मोदी ने कहा कि जहाजों में यात्रा करने वाले लोगों की संख्या के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है और पिछले 10 वर्षों में हमारे बंदरगाहों की क्षमता दोगुनी हो गई है, उनकी दक्षता में सुधार हुआ है और वहां ‘टर्नअराउंड’ समय में 30 प्रतिशत की कमी आई है। ‘टर्नअराउंड’ समय किसी बंदरगाह पर एक जहाज के पहुंचने से लेकर उसके प्रस्थान तक का कुल समय होता है। मोदी ने कहा कि इस बंदरगाह का निर्माण 8,800 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है और निकट भविष्य में इसके ‘ट्रांसशिपमेंट हब’ (माल ढुलाई एवं लदान केंद्र) की क्षमता तीन गुना हो जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘इसे बड़े मालवाहक जहाजों को समायोजित करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है, जो एक महत्वपूर्ण आवश्यकता को पूरा करता है। अब तक, भारत की 75 प्रतिशत ‘ट्रांसशिपमेंट’ गतिविधियां विदेशी बंदरगाहों पर की जाती थीं, जिसके परिणामस्वरूप देश को राजस्व का बड़ा नुकसान होता था।’’प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हालांकि, अब इसमें बदलाव आने वाला है। पहले विदेशों में खर्च किए जाने वाले कोष को अब घरेलू विकास में लगाया जाएगा, जिससे विझिनजम और केरल के लोगों के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा होंगे, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि देश की संपत्ति सीधे अपने नागरिकों को लाभान्वित करे।’’ “वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में इसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी” उन्होंने कहा कि गुजरात के लोगों को यह जानकर निराशा होगी कि अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम ने केरल में इतना बड़ा बंदरगाह बनाया है, जबकि वे पश्चिम भारतीय राज्य से आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के बंदरगाह मंत्री वी. एन. वासवन द्वारा कॉरपोरेट इकाई अदाणी समूह को वामपंथी सरकार का साझेदार बताना देश में हो रहे बदलावों को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने गुलामी से पहले के दौर का भी जिक्र किया और कहा कि भारत हजारों सालों तक समृद्धि के साथ फलता-फूलता रहा।  

पाक स्थानीय प्रशासन ने सीमा के पास रहने वाले लोगों को दो महीने के लिए खाद्यान्न सामग्री का भंडार करने का आह्वान किया

पहलगाम पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान सीमा पर तनाव बना हुआ है। इसी बीच पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में स्थानीय प्रशासन ने सीमा के पास रहने वाले लोगों को दो महीने के लिए खाद्यान्न सामग्री का भंडार करने का आह्वान किया है। स्थानीय प्रशासन का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तानी सेना लगातार पिछले आठ दिनों से सीमा पर सीजफायर का उल्लंघन कर रही है। भारतीय सेना भी इसका मुंहतोड़ जवाब दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के प्रधानमंत्री चौधरी अनवर उल हक ने शुक्रवार को स्थानीय विधानसभा को संबोधित करते हुए कहा कि नियंत्रण रेखा के पास स्थित 13 निर्वाचन क्षेत्रों के लोगों को दो महीने का खाद्यान्न भंडार रखने का निर्देश दिया गया है। चौधरी ने कहा कि इसके अलावा स्थानीय प्रशासन ने इनकी बुनियादी आवश्यताओं को ध्यान में रखते हुए एक राहत कोष भी बनाया है। इसके अलावा नियंत्रण रेखा से लगे इलाकों में सड़कों के रखरखाव के लिए सरकारी और निजी कंपनियों को भी तैनात किया जा रहा है। दोनों देशों के बीच में यह तनाव 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद बढ़ गया था। इस हमले में आतंकवादियों ने 26 हिंदू पर्यटकों को धर्म पूछ कर मौत के घाट उतार दिया था। भारत की तरफ से इस हमले का आरोप पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों पर लगाया। हालांकि पाकिस्तान की तरफ से इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया था। इसके बाद भारत सरकार ने हमले का जवाब देते हुए पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निरस्त कर दिया और भारत में आए पाकिस्तानी नागरिकों को भारत छोड़ने का आदेश दे दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत के साथ अपने समझौतों को रद्द करने की तरफ देखा। पाकिस्तान ने भारत के विमानों के लिए अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया। इसके बदले में भारत ने भी अपने एयरस्पेस को पाकिस्तान के लिए बंद कर दिया। फिलहाल दोनों देशों के बीच में तनाव बना हुआ है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का टैक्स छूट का दर्जा समाप्त कर दिया

  वॉशिंगटन     अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का टैक्स छूट (Tax Exempt) का दर्जा समाप्त कर दिया है. ट्रंप ने शुक्रवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में इसकी घोषणा की. उनका यह कदम हार्वर्ड जैसी प्रतिष्ठित संस्था पर सरकार की कड़ी निगरानी और नीतिगत बदलावों की ओर इशारा कर सकता है. डोनाल्ड ट्रंप ने 2 मई 2025 को ऐलान किया कि उनका प्रशासन हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का टैक्स-छूट (Tax-Exempt) का दर्जा समाप्त करने जा रहा है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘हम हार्वर्ड का टैक्स-छूट दर्जा समाप्त करने जा रहे हैं. वो इसी लायक हैं.’ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया है कि उनका प्रशासन हार्वर्ड विश्वविद्यालय को अनुदान रोक सकता है, जिसने उनके निर्देशों का पालन नहीं किया है।”और ऐसा लगता है कि हम उन्हें अब और अनुदान नहीं देने जा रहे हैं, है न लिंडा?” समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ट्रम्प की टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने अमेरिकी शिक्षा सचिव लिंडा मैकमोहन का हवाला दिया था। उन्होंने कहा, “अनुदान देना हमारे विवेक पर निर्भर है और वे वास्तव में अच्छा व्यवहार नहीं कर रहे हैं। इसलिए यह बहुत बुरा है।” विश्वविद्यालय ने पहले ट्रम्प प्रशासन की मांगों की एक सूची को अस्वीकार कर दिया था जिसका उद्देश्य विविधता पहलों पर अंकुश लगाना और यहूदी-विरोधी भावना से लड़ना था। ट्रम्प ने हार्वर्ड को उदारवादी गड़बड़ बताया इससे पहले, डोनाल्ड ट्रम्प ने हार्वर्ड को “यहूदी विरोधी, अति वामपंथी संस्थान” कहा था, क्योंकि विश्वविद्यालय ने उनके प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा, “यह जगह एक उदारवादी गड़बड़ है”, उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ने “पूरी दुनिया से ऐसे छात्रों को प्रवेश दिया है जो हमारे देश को तोड़ना चाहते हैं।” ट्रम्प प्रशासन का हार्वर्ड पर दावा ट्रम्प प्रशासन ने बार-बार हार्वर्ड विश्वविद्यालय पर अमेरिका के सहयोगी देश इजरायल के खिलाफ परिसर में फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों को लेकर निशाना साधा है। विश्वविद्यालय ने इससे पहले ट्रम्प प्रशासन की मांगों की सूची को अस्वीकार कर दिया था, जिसका उद्देश्य विविधता संबंधी पहलों पर अंकुश लगाना और यहूदी-विरोधी भावना से लड़ना था, तथा इसे मुक्त भाषण और शैक्षणिक स्वतंत्रता पर हमला बताया था। हार्वर्ड के खिलाफ कार्रवाई ट्रम्प प्रशासन ने विश्वविद्यालय के खिलाफ कई कदम उठाए हैं। हार्वर्ड के लिए संघीय निधि में लगभग 9 बिलियन डॉलर की औपचारिक समीक्षा शुरू की गई, विविधता, समानता और समावेशन प्रथाओं पर विश्वविद्यालय प्रतिबंध की मांग की गई, और कुछ फिलिस्तीनी समर्थक समूहों पर कार्रवाई की गई। इसके अतिरिक्त, प्रशासन ने विश्वविद्यालय के विदेशी संबंधों के बारे में और अधिक जानकारी मांगी, इसकी कर-मुक्त स्थिति और विदेशी छात्रों को दाखिला देने की इसकी क्षमता को हटाने का प्रस्ताव रखा। अमेरिकी प्रशासन ने यूनिवर्सिटी के लिए संघीय निधि में 2.3 बिलियन डॉलर की राशि रोक दी। इसके बाद हार्वर्ड ने ट्रम्प प्रशासन पर मुकदमा दायर किया। हार्वर्ड के अतिरिक्त, डोनाल्ड ट्रम्प ने फिलिस्तीन समर्थक विरोध प्रदर्शन, DEI, जलवायु पहल और ट्रांसजेंडर अधिकारों जैसे मुद्दों पर अन्य शैक्षणिक संस्थानों को संघीय वित्त पोषण में कटौती की धमकी दी। हार्वर्ड $1 बिलियन के निजी इक्विटी फंड को बेचने के लिए बातचीत कर रहा है मामले से परिचित एक व्यक्ति के हवाले से रॉयटर्स ने खबर दी है कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय की संस्था एक अरब डॉलर मूल्य के निजी इक्विटी फंड को बेचने के लिए बातचीत कर रही है , क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संस्था को संघीय धन देने पर रोक लगा दी है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल शुरू हुई बिक्री प्रक्रिया का राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा वित्त पोषण में कटौती से कोई संबंध नहीं है।  

नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल-सोनिया गांधी की मुश्किलें बढ़ीं, कोर्ट ने भेजा नोटिस

नई दिल्ली  दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कुछ अन्य लोगों को नोटिस भेजा है। ये नोटिस नेशनल हेराल्ड मामले से जुड़ा है। ED यानी प्रवर्तन निदेशालय ने इन सभी के खिलाफ एक चार्जशीट दाखिल की है। ये मामला मनी लॉन्ड्रिंग का है। कोर्ट ने अगली तारीख 8 मई, 2025 तय की है। आरोपियों को सुनवाई का पूरा हक-कोर्ट नोटिस जारी करते हुए कोर्ट ने कहा है कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और बाकी आरोपियों को चार्जशीट पर सुनवाई का पूरा हक है। कोर्ट ने कहा कि सुनवाई का अधिकार सभी को मिलना चाहिए। कोर्ट ने आगे कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए ये ज़रूरी है कि हर आरोपी को सुना जाए। इसलिए नोटिस जारी करना ज़रूरी था। कोर्ट चाहता है कि सभी आरोपियों को अपनी बात रखने का मौका मिले। इससे ये सुनिश्चित होगा कि मामले की सुनवाई सही तरीके से हो। इससे पहले अदालत ने नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं को अभी नोटिस जारी करने से मना कर दिया था। स्पेशल जज विशाल गोगने ने ईडी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला लिया था। ईडी का कहना है कि नए नियमों के अनुसार, आरोपी को सुने बिना शिकायत पर ध्यान नहीं दिया जा सकता। अदालत इस बात से संतुष्ट नहीं थी कि नोटिस जारी करना जरूरी है। ईडी का कहना है कि कानून बदल गया है। नए कानून के हिसाब से, आरोपी को सुने बिना शिकायत पर ध्यान नहीं दिया जा सकता। ईडी ने अदालत से कहा, ‘हम नहीं चाहते कि यह आदेश लंबा चले, नोटिस जारी किया जाए।’ पहले कोर्ट ने नोटिस जारी करने से कर दिया था मना जज ने 25 अप्रैल को सुनवाई में कहा था कि पहले अदालत को यह देखना होगा कि नोटिस जारी करना जरूरी है या नहीं। जज ने कहा कि अदालत को यह भी देखना होगा कि मामले में कोई कमी तो नहीं है। अदालत ने बताया कि चार्जशीट में कुछ जरूरी कागज गायब हैं। अदालत ने ईडी को उन कागजों को जमा करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि कागजात मिलने के बाद ही वह नोटिस जारी करने पर फैसला करेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने विझिनजम अंतरराष्ट्रीय गहरे पानी के बहुउद्देशीय बंदरगाह का किया उद्घाटन

तिरुवनंतपुरम केरल की जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 8,900 करोड़ रुपये की सौगात दी। इस दौरान उन्होंने हजारों करोड़ की लागत से निर्मित ‘विझिनजाम इंटरनेशनल डीपवाटर मल्टीपर्पज सीपोर्ट’ को राष्ट्र को समर्पित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री पिनराई विजयन भी मौजूद रहे। केरल सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) की ओर से सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत विकसित किया गया है। पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यहां दुनिया के बड़े मालवाहक जहाज आसानी से आ सकेंगे। अभी तक भारत का 75% ट्रांसशिपमेंट देश के बाहर के पोर्ट्स पर होता था, इससे बहुत बड़ा नुकसान होता आया है। ये परिस्थिति अब बदलने जा रही है। अब देश का पैसा देश के काम आएगा। जो पैसा बाहर जाता था, अब वो केरल और विझिनजम के लोगों के लिए नए अवसर लेकर आएगा। इससे पहले उन्होंने कहा कि आज भगवान आदि शंकराचार्य की जयंती है। तीन वर्ष पूर्व सितंबर में मुझे उनके जन्मभूमि क्षेत्र में जाने का सौभाग्य मिला था। केरल से निकलकर देश के अलग-अलग कोनों में मठों की स्थापना करके आदि शंकराचार्य जी ने राष्ट्र की चेतना को जागृत किया। इस पुनीत अवसर पर मैं उन्हें नमन करता हूं। उन्होंने कहा कि गुलामी से पहले हमारे भारत ने हजारों वर्ष की समृद्धि देखी है। एक समय वैश्विक जीडीपी में मेजर शेयर भारत का हुआ करता था। उस दौर में हमें जो चीज दूसरे देशों से अलग बनाती थी, वो थी समुद्री क्षमता, हमारी पोर्ट सिटी की आर्थिक गतिविधि। केरल का इसमें बड़ा योगदान था।

खुले केदारनाथ धाम के कपाट, श्रद्धालुओं की भीड़ में गूंजे ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे

केदारनाथ  उत्तराखंड के पवित्र हिमालयी धाम, केदारनाथ के कपाट आज प्रातः 7 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलने के साथ ही केदारनाथ धाम भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी पत्नी गीता धामी के साथ इस शुभ अवसर पर मंदिर में उपस्थित रहे और बाबा केदार के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की। इस पावन मौके पर हजारों श्रद्धालु केदारनाथ पहुंचे। मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के नारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए मंदिर को विशेष रूप से 108 क्विंटल फूलों से सजाया गया, जिनमें देश-विदेश के 45 प्रकार के फूल शामिल थे। पश्चिम बंगाल के 50 कारीगरों ने सजावट में योगदान दिया। कपाट खुलते ही हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई, जिसने श्रद्धालुओं के उत्साह को चरम पर पहुंचा दिया। पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा तैयारियों का लिया जायजा इससे पहले गुरुवार को में प्रदेश के डीजीपी दीपम सेठ एवं अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) श्री वी. मुरुगेशन ने श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ धाम में जाकर सुरक्षा व्यवस्थाओं और अन्य तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण किया.  पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग अक्षय प्रल्हाद कोंडे ने उन्हें सुरक्षा तैयारियों की जानकारी दी. इस बार केदारनाथ यात्रा में भीड़ नियंत्रण के लिए टोकन व्यवस्था लागू की जा रही है, जो पहले दिन से ही प्रभावी होगी. डीजीपी ने टोकन काउंटरों की संख्या बढ़ाने, पीए सिस्टम से यात्रियों को जानकारी देने और स्क्रीन पर स्लॉट व नंबर प्रदर्शित करने के निर्देश दिए. उन्होंने एटीएस और पैरा मिलिट्री बल की तैनाती को भी सुव्यवस्थित करने की बात कही. इस बार मंदिर में फोन पर है पाबंदी केदारनाथ में यात्रियों के लिये गाइडलाइन्स जारी की गई हैं. केदारनाथ मंदिर परिसर के 30 मीटर के दायरे में मोबाइल के इस्तेमाल की इजाजत नहीं है. रील या फोटो शूट करते पाए जाने पर मोबाइल फोन जब्त कर लिये जाएंगे और 5000 का जुर्माना देना पड़ सकता है हर साल शीतकाल में भारी बर्फबारी के कारण बाबा केदारनाथ के मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. जैसे ही ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है, मंदिर के द्वार पुनः खुलते हैं और बाबा केदार भक्तों को दर्शन देकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं. पंचमुखी डोली यात्रा और व्यवस्थाएं 27 अप्रैल को ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर से बाबा केदार की पंचमुखी डोली यात्रा आरंभ हुई थी, जो विभिन्न पड़ावों से होते हुए 1 मई को केदारनाथ धाम पहुंची। यात्रा के स्वागत और कपाटोत्सव के लिए मंदिर परिसर में व्यापक तैयारियां की गईं, जिनमें साफ-सफाई, दर्शन व्यवस्थाएं और पुजारियों के आवास की सुविधा शामिल रही। चारधाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार ने 50 हेल्थ एटीएम, 70 से अधिक स्वास्थ्य जांच केंद्र और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की है। श्रद्धालुओं के लिए टोकन सिस्टम लागू कपाट खुलने के पहले दिन ही लगभग 15,000 श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचे। सुबह 10:15 बजे तक 10,000 से अधिक लोगों ने दर्शन किए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने टोकन सिस्टम लागू किया है, जिसमें हर घंटे 1,400 लोगों को दर्शन की अनुमति दी जा रही है। संगम पर बनाए गए 10 टोकन काउंटरों से वितरण हो रहा है, जिससे लंबी कतारों की आवश्यकता न पड़े। हालांकि, गौरीकुंड में इस बार अपेक्षाकृत कम भीड़ देखी गई। मुख्यमंत्री का संदेश और सांस्कृतिक आयोजन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “चारधाम यात्रा अक्षय तृतीया से शुरू हो चुकी है और सरकार का प्रयास है कि यह यात्रा हर श्रद्धालु के लिए सुरक्षित और सुगम बने।” उन्होंने कपाट खुलने के उपलक्ष्य में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया और श्रद्धालुओं से संवाद किया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 4 मई को बद्रीनाथ धाम के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम हाल ही में हुए पहलगाम हमले के मद्देनज़र केदारनाथ धाम में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पूरे क्षेत्र में 139 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड भी तैनात हैं। स्थानीय पुलिस, प्रशासन और केंद्रीय सुरक्षा बलों की लगातार निगरानी जारी है। चारधाम यात्रा का उत्साह चरम पर 30 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की विधिवत शुरुआत हो चुकी है। इस वर्ष केदारनाथ धाम में जून से अगस्त के बीच 25 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। अब तक केदारनाथ यात्रा के लिए 7.60 लाख से अधिक ऑनलाइन पंजीकरण हो चुके हैं। धार्मिक महत्व केदारनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और चारधाम तथा पंचकेदार यात्रा का अभिन्न हिस्सा है। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कपाट खुलने के साथ ही मंदिर में रुद्राभिषेक, शिवाष्टक, शिव तांडव स्तोत्र और केदाराष्टक जैसे मंत्रों का जाप हुआ, जिसने श्रद्धालुओं को गहरे आध्यात्मिक अनुभव से भर दिया।  

सुप्रीम कोर्ट बोला – ताजमहल के पांच किमी के भीतर बिना हमारी अनुमति के नहीं काटे जाएंगे पेड़

नई दिल्ली देश के सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के आगरा में ताजमहल के पांच किलोमीटर के हवाई क्षेत्र में बिना अनुमति के पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध लगाने संबंधी अपने 2015 के निर्देश को दोहराया है। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अभय एस ओका और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि ऐतिहासिक स्मारक से 5 किलोमीटर की दूरी से परे टीटीजेड के भीतर के क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई के लिए केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) की पूर्व अनुमति की आवश्यकता होगी और अधिकारी उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों से बंधे होंगे। 8 मई 2015 का मूल आदेश लागू रहेगा- सुप्रीम कोर्ट पीठ ने कहा, ‘ताजमहल के 5 किलोमीटर के भीतर मौजूद क्षेत्रों के संबंध में, 8 मई, 2015 का मूल आदेश लागू रहेगा। ऐसे मामलों में, पेड़ों की कटाई की अनुमति के लिए आवेदन करना होगा, भले ही पेड़ों की संख्या 50 से कम हो। यह अदालत केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति से अनुशंसा मांगेगी और उसके बाद पेड़ों की कटाई पर विचार करेगी।’ इसमें कहा गया है, ‘जब तक पेड़ों को काटने की बहुत आवश्यकता न हो, तब तक प्रभागीय वन अधिकारी को यह शर्त लगानी होगी कि वास्तविक पेड़ों की कटाई तभी की जा सकती है, जब प्रतिपूरक वनरोपण समेत अन्य सभी शर्तों का अनुपालन किया जाए।’ आगरा के एक ट्रस्ट की एक अन्य याचिका खारिज डीएफओ या सीईसी को पहले पेड़ों को काटने की अनुमति देने से पहले निर्धारित शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। पीठ ने कहा, ‘हम यह स्पष्ट करते हैं कि अपवाद केवल तभी लागू होगा, जब पेड़ों को काटने की बहुत आवश्यकता हो, क्योंकि यदि पेड़ों को काटने की कार्रवाई तुरंत नहीं की जाती है, तो मानव जीवन के नुकसान की संभावना हो सकती है।’ अदालत ने मामले में सीईसी से एक रिपोर्ट भी मांगी, जिसमें यह दर्शाया गया हो कि क्या आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसे दो अन्य विश्व धरोहर संरचनाओं की सुरक्षा के लिए कोई अतिरिक्त प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। इस बीच, अदालत ने आगरा में मौजूद एक ट्रस्ट की एक अन्य याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें निजी भूमि पर पेड़ों को काटने के लिए पूर्व अनुमति प्राप्त करने की शर्त में ढील देने की मांग की गई थी। क्या है सुप्रीम कोर्ट का 2015 का आदेश? शीर्ष अदालत ने 8 मई के अपने आदेश में कहा था कि टीटीजेड में बिना अदालत की पूर्व अनुमति के कोई भी पेड़ नहीं काटा जा सकता है, यह उपाय वनों की कटाई को रोकने और क्षेत्र की जैव विविधता की रक्षा करने के उद्देश्य से किया गया था। 11 दिसंबर, 2019 को शीर्ष अदालत ने इस आदेश को संशोधित करते हुए टीटीजेड के भीतर गैर-वन और निजी भूमि पर पेड़ों की कटाई के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता को हटा दिया। क्या है ताज ट्रेपेजियम क्षेत्र? ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड), जो शीर्ष अदालत के समक्ष विषय है, ताज ट्रेपेजियम क्षेत्र लगभग 10,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जो उत्तर प्रदेश के आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस और एटा जिलों के साथ-साथ राजस्थान के भरतपुर जिले में भी फैला हुआ है।  

भारत से डरे पाकिस्तान ने अस्थायी रूप से कराची और लाहौर हवाई क्षेत्र किया बंद

इस्लामाबाद जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से लगातार की जा रही कार्रवाई से पाकिस्तान बौखला गया है। गुरुवार को पाकिस्तान ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए पूरे मई महीने के सभी दिन सीमित समय के लिए कराची और लाहौर के हवाई क्षेत्रों के कुछ हिस्सों को बंद करने की घोषणा की है। सुबह चार से आठ बजे तक बंद रहेगा हवाई क्षेत्र पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और इस्लामाबाद के बीच बढ़े तनाव और नई दिल्ली की तरफे से जवाबी कार्रवाई की आशंका के बीच पाकिस्तान के विमानन अधिकारियों की तरफ से यह घोषणा की गई है। एक स्थानीय समाचार पत्र ने एक आधिकारिक नोटिस का हवाला देते हुए कहा, प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र 1 मई से 31 मई के बीच स्थानीय समयानुसार प्रतिदिन सुबह 4:00 बजे से सुबह 8:00 बजे तक बंद रहेगा। हवाई क्षेत्र बंद होने से नहीं होगी कोई परेशानी- सीएए पाकिस्तानी नागरिक विमानन प्राधिकरण (सीएए) ने कहा कि बंद होने से वाणिज्यिक उड़ान संचालन में कोई खास बाधा नहीं आएगी, क्योंकि प्रतिबंधित घंटों के दौरान विमानों को वैकल्पिक उड़ान मार्गों के माध्यम से भेजा जाएगा। भारत ने कल जारी किया था ‘नोटम’ वहीं एक दिन पहले भारत ने बुधवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए नोटम (नोटिस टू एयरमैन) जारी किया है। नोटम के तहत भारत ने 30 अप्रैल से 23 मई 2025 तक अपने एयरस्पेस को सभी पाकिस्तानी यात्री विमानों और सैन्य विमानों के लिए बंद कर दिया गया है। नोटिस टू एयर मिशन सिस्टम एक तरह की संचार व्यवस्था है, जिसकी मदद से फ्लाइट में मौजूद केबिन क्रू के लोगों के लिए अहम सूचनाएं भेजी जाती हैं। यह बेहद गोपनीय सूचना तंत्र है, जिसमें सेंध लगाना बेहद मुश्किल काम है।

मां ने 15 साल के बेटे के साथ बनाए संबंध, पति ने रंगे हाथ पकड़ा, मामला दर्ज

फ्लोरिडा कलयुग में क्या-क्या नहीं हो रहा है? हाल ही में खबर आई है कि एक पति ने पत्नी को अपने 15 साल के बेटे के साथ यौन संबंध बनाते हुए पकड़ा है. बताया जा रहा है कि शख्स की पत्नी नर्स है, जिसका नाम येट्स है. रिपोर्ट के मुताबिक शाम को येट्स ने अपने दो बच्चों को बिस्तर पर लिटाया और फिर अपने 15 वर्षीय सौतेले बेटे के साथ लिविंग रूम के सोफे पर इस शर्मनाक घटना को अंजाम दिया. इस घटना के बाद महिला का लाइसेंस भी रद्द कर दिया है. फ्लोरिडा मेडिकल डिपार्टमेंट ने एक बयान में कहा,’नर्सों को भरोसे की हालत में रखा जाता है. इसलिए यह जरूरी है कि वे अच्छे फैसले और अच्छे नैतिक के साथ पेश आएं. यह घटना पिछले जुलाई में फ्लोरिडा के ओकाला में हुई थी, जब लड़का अपने पिता से गर्मियों में मिलने गया था. पहले वीडियो गेम खेले और फिल्म देखी डेली स्टार के मुताबिक जब येट्स का पति उनके पास आया तो उसने कथित तौर पर उससे कहा कि उनका बेटा उसकी जवानी की याद दिलाता है. दावा है कि येट्स के जरिए कई हफ्ते तक बहकावे में आने के बाद यह अवैध रिश्ता बना. गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज के मुताबिक उन्होंने पहले वीडियो गेम खेले और फिल्में भी देखी. इस दौरान महिला का पति अपने काम पर था. महिला का पति एक लाइनमैन का काम करता है. फिल्म देखने के दौरान बढ़ी नजदीकियां खबर में बताया गया है कि वो दोनों लगभग 1 बजे 1 हॉरर फिल्म देख रहे थे. इसी दौरान वो धीरे-धीरे अपने सौतेले बेटे की तरफ बढ़ी. महिला ने पुलिस को बताया कि उसने फिल्म देखने के दौरान उसने खुद को ‘कामुक’ महसूस किया और क्योंकि उसने दो सप्ताह से सेक्स नहीं किया था और उसे पीरियड्स भी नहीं हो रहे थे. इस दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और महिला ने 15 वर्षीय बेटे की गर्दन पर किस किया. इसी दौरान महिला ने अपने कपड़े उतारे और फिर यौन संबंद बनाने शुरू कर दिए. इसी दौरान इस सबसे अनजान पति काम से घर लौटा तो उसने अपनी पत्नी को पूरी तरह नग्न अवस्था में अपने 15 वर्षीय बेटे के साथ पाया. पिता को देखकर बेटा घर से भाग गया. सरेआम ललचा रही थी बताया जा रहा है कि यौन संबंध बनाने से पहले महिला ने पहले नाबालिग बेटे के साथ तरह-तरह की गलत हरकतें भी कीं और खुलेआम उसको ललचा भी रही थी. लड़के के पिता के जरिए पुलिस को फोन करने में लापरवाही बरतने के बाद एक चिंतित परिवार के सदस्य ने पुलिस को घटना की सूचना दी. ओकाला न्यूज के मुताबिक येट्स को नवंबर में गिरफ्तार किया गया था. येट्स पर 12 से 16 साल की उम्र के नाबालिग के साथ अश्लील हरकतें या सेक्सुअल अटैक करने का आरोप लगाया गया है.

भारतीय नौसेना पाकिस्तान के ठीक सामने बड़ा युद्धाभ्यास करने जा रही, सता रहा बड़ा डर

मुंबई भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति लगातार बढ़ती चली जा रही है। दोनों देशों की सेनाएं बोर्डर पर लामबंद हो रही हैं और हाई अलर्ट पर हैं। वहीं, LoC पर भी पाकिस्तानी सेना लगातार फायरिंग कर रही है जिसका भारतीय सेना मुंहतोड़ जवाब दे रही है। इस बीत अब भारतीय नौसेना ने भी बड़ा कदम उठाया है। भारतीय नौसेना पाकिस्तान के ठीक सामने बड़ा युद्धाभ्यास कर रही है। नौसेना के इस कदम ने पाकिस्तान को और ज्यादा टेंशन में ला दिया है। 4 दिनों तक युद्धाभ्यास करेगी भारतीय नौसेना भारतीय नौसेना  30 अप्रैल से लेकर तीन मई  तक गुजरात के पास समुद्र में अभ्यास करेगी। इस अभ्यास के दौरान भारतीय नौसेना समुद्री सीमा से 85 नॉटिकल माइल्स पीछे होगी। बता दें कि इसके ठीक सामने पाकिस्तान भी अभ्यास कर रहा है। पाकिस्तान 30 तारीख से लेकर दो मई तक अभ्यास करेगा तो वहीं भारतीय नौसेना 30 अप्रैल से तीन मई तक अभ्यास करेगी। दोनों देशों की नौसेनाओं के आमने-सामने आने से जंग के आसार और बढ़ गए हैं। पाकिस्तान को 1971 वाला डर पाकिस्तान के ठीक सामने भारतीय नौसेना के अभ्यास ने पड़ोसी देश की सरकार को बुरी तरह से डरा दिया है। पाकिस्तान को डर सता रहा है कि भारतीय नौसेना साल 1971 की तरह उसे तबाह न कर दे। बता दें कि साल 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन ट्राइडेंट चलाया था। नौसेना ने इस ऑपरेशन में पाकिस्तान के करांची बंदरगाह को पूरी तरह से तबाह कर दिया था और कई पाकिस्तानी जहाजों को डूबो दिया था। पाकिस्तान को हमले का डर पाकिस्तान को लगातार डर सता रहा है कि भारत कभी भी उस पर हमला शुरू कर सकता है। हाल ही में पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने आधी रात को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के दावा किया था कि 24-36 घंटों में भारत की ओर से सैन्य कार्रवाई शुरू हो सकती है। बता दें कि जम्मू एवं कश्मीर के पहलगाम में बीते 22 अप्रैल को आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है।   5 संकेत जो बताते हैं कि कुछ बड़ा होने वाला है भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव बढ़ गया है। पाकिस्तान की कुछ हरकतों के बाद ये तनाव और भी बढ़ गया है। पाकिस्तान ने जम्मू और कश्मीर में इंटरनेशनल बॉर्डर पर भी फायरिंग शुरू कर दी है। उसने भारत के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर साइबर हमले भी किए थे, जिन्हें नाकाम कर दिया गया। इसके अलावा, पाकिस्तान ने पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में भारी हथियार भी जमा कर लिए हैं। …तो डर गया पाकिस्तान ! सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान में हवाई गतिविधियां कम हो गई हैं। ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तान को डर है कि भारत, पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब दे सकता है। पहलगाम में हुए हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई थी। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत अगले 36 घंटों में सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, उन्होंने इसका कोई सबूत नहीं दिया। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना को पूरी छूट दे दी है कि वे अपनी मर्जी से तय करें कि कैसे, कब और कहां जवाबी कार्रवाई करनी है। एक दिन पहले ही उन्होंने सेना को ये छूट दी थी। इंटरनेशनल बॉर्डर पर भी फायरिंग शुरू अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान ने अब जम्मू के परागवाल में इंटरनेशनल बॉर्डर पर भी फायरिंग शुरू कर दी है। पहले, पाकिस्तानी सेना सिर्फ LoC पर ही फायरिंग करती थी। पहले खबर आई थी कि पाकिस्तान ने अपनी सेना और तोपखाने को भारतीय सीमा के पास भेज दिया है। इनमें लंबी दूरी तक मार करने वाली रॉकेटें भी शामिल हैं। डीजीएमओ ने पाकिस्तान को चेतावनी दी मंगलवार को, डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस, लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष से मिलिट्री हॉटलाइन पर बात की। उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि अगर उसने बिना वजह फायरिंग की, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, भारत के पास भी भारी हथियार हैं और अगर पाकिस्तान ने फायरिंग तेज की, तो भारत भी जवाबी कार्रवाई करेगा। साल भर में 2,500 से ज्यादा गोलीबारी की घटनाएं जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान पहले छोटे हथियारों से फायरिंग करता है और फिर धीरे-धीरे इसे बढ़ाता है। इस साल अब तक 2,651 बार छोटे हथियारों से फायरिंग की घटनाएं हुई हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान ने कम से कम 15 बार सीजफायर समझौते का उल्लंघन किया है। भारत में हाई अलर्ट, सेना सतर्क भारतीय सेना ने पिछले कुछ दिनों में सात आतंकवादियों को मार गिराया है। ये आतंकवादी भारत में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे। सूत्रों के अनुसार, भारतीय सेना ने पाकिस्तान को इस बारे में चेतावनी भी दी है। भारत ने पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के साथ पूंछ में कम से कम दो बैठकें की हैं। इन बैठकों में भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि वे घुसपैठ की कोशिशों में मदद न करें। भारत ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान अपनी तरफ से फायरिंग करके आतंकवादियों को कवर न दे। सीमा पर तनाव चरम पर, पाकिस्तान ने आक्रामक रुख अपनाया पिछले एक हफ्ते में पाकिस्तान ने साइबर हमले भी किए हैं। पाकिस्तान भारत के महत्वपूर्ण सैन्य संस्थानों को हैक करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, भारत ने इन हमलों को नाकाम कर दिया है। फिर भी, पाकिस्तान के साइबर ऑपरेटर लगातार भारतीय सेना से जुड़ी वेबसाइटों को निशाना बना रहे हैं। इनमें आर्मी नर्सिंग कॉलेज, आर्मी पब्लिक स्कूल, आर्मी वेलफेयर हाउसिंग ऑर्गनाइजेशन और आर्मी वेलफेयर प्लेसमेंट ऑर्गनाइजेशन की वेबसाइटें शामिल हैं। खबर है कि पाकिस्तान में हवाई गतिविधियां कम हो गई हैं। पिछले दो दिनों में लड़ाकू विमानों की उड़ानें और हवाई निगरानी प्लेटफार्मों की आवाजाही कम हुई है। ऐसा माना जा रहा है कि यह भारत की तरफ से बढ़ाई गई सतर्कता का नतीजा है। भारत ने अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत किया है। भारत के पास लंबी दूरी की S-400 मिसाइल सिस्टम भी है, जिससे पाकिस्तान सतर्क हो गया है। हाई अलर्टः कुछ बड़ा होने के 5 … Read more

आतंकी सरगना हाफिज सईद को सताने लगा मौत का डर, पाकिस्तानी सेना ने सुरक्षा की 4 गुना

लाहौर पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा है। पाकिस्तान भारत को गीदड़भभकियां दे रहा है। उसे डर है कि भारत उरी के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक की तरह ही कोई बड़ा एक्शन ले सकता है। इसके चलते पाकिस्तान में युद्धाभ्यास से लेकर वायुसेना की गश्ती बढ़ाने की खबरें हैं। इस बीच खबरें हैं कि पाकिस्तान ने आतंक के सरगना लश्कर-ए-तैय्यबा के चीफ हाफिज सईद की सुरक्षा भी बढ़ाई है। रिपोर्ट बताती है कि आईएसआई और पाकिस्तान सरकार ने भारत के सीक्रेट ऑपरेशन के डर से हाफिज सईद की सुरक्षा में इजाफा किया है। सूत्रों के मुताबिक उसे स्पेशल सर्विस ग्रुप के पूर्व कमांडोज की सिक्योरिटी में रखा गया है। इतना ही नहीं, उसे जानबूझकर घनी आबादी वाले इलाके में रखा गया है, जहां मस्जिद और मदरसे सभी हैं। इसके अलावा लाहौर के मोहल्ला जोहर सहित आतंकी चीफ के सभी घरों पर सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है। सिक्योरिटी के लिए लगाए गए हाई लेवल कैमरे हाफिज की सिक्योरिटी के लिए उसकी लोकेशन के एक किलोमीटर के दायरे में इशारा पहचानने वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है, जिससे वहां परिंदा भी पर न मार सके। लश्कर और जमात उद दावा का चीफ अमेरिका और भारत में बड़ी आतंकी हमलों को अंजाम देने में अहम कड़ी रहा है। इसमें मुबंई का 26/11 हमला भी शामिल है। बिश्नोई गैंग ने खाई हाफिज सईद को मारने की कसम ध्यान देने वाली बात यह भी है कि लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट ने बुधवार को पहलगाम में नागरिकों की हत्या का बदला लेने की कसम खाई है। बिश्नोई गैंग ने हाफिज सईद की एक फोटो अटैच करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर धमकी दी जिसमें कहा गया कि पाकिस्तान के इस बेहद कीमती व्यक्ति को निशाना बनाया जाएगा। इलाके में ड्रोन उड़ाने पर बैन सुरक्षा उपायों के तहत पूरे इलाके में ड्रोन उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और 4 किलोमीटर के दायरे में हाई-रिजॉल्यूशन वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. इसके अलावा, सड़कों पर सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ा दी गई है और किसी भी आम नागरिक को सईद के आवास के पास आने की अनुमति नहीं है. बताया जा रहा है कि ड्रोन निगरानी से भी इलाके पर लगातार नजर रखी जा रही है. हमले के पीछे हाफिज सईद का हाथ! जानकारी के मुताबिक, यह सुरक्षा प्रबंध पहलगाम हमले के तुरंत बाद लागू किए गए थे. इस हमले की जिम्मेदारी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) नामक संगठन ने ली थी, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ माना जाता है. भले ही TRF ने औपचारिक रूप से हमले की जिम्मेदारी ली हो, लेकिन भारतीय एजेंसियों का मानना है कि इस हमले की योजना में हाफिज सईद की प्रमुख भूमिका थी. हाफिज सईद पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी हाफिज सईद पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित है, बावजूद इसके वह पाकिस्तान में खुला घूमता रहा है. उसका आवास किसी छिपे ठिकाने में नहीं बल्कि लाहौर जैसे भीड़-भाड़ वाले शहर के केंद्र में है. वर्ष 2021 में सईद के घर के पास हुए कार बम धमाके के बाद से उसकी सुरक्षा बढ़ाई जाती रही है. हाल ही में उसके करीबी सहयोगी अबू क़ताल की हत्या के बाद एक बार फिर सुरक्षा उपायों की समीक्षा की गई और उसे और सख्त किया गया. यह घटनाक्रम भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से तनावपूर्ण कूटनीतिक संबंधों को और जटिल बना सकता है. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सईद को मिली यह अभूतपूर्व सुरक्षा, पाकिस्तान की दोहरी नीति और आतंकवाद के प्रति नरम रुख को उजागर करती है. हाफिज सईद पाकिस्तान सरकार की तथाकथित हिरासत में है। सात आतंकी फंडिग मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद 46 साल की सजा काट रहा है। 7 अप्रैल 2022 के एक आदेश में हाफिज सईद को आतंकवाद के वित्तपोषण के मामले में उसे 31 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। 2019 के कागजों में गिरफ्तार दिखाया गया। सईद पहले से ही 2020 में दिए गए समान आरोपों पर 15 साल सजा काट रहा था। अदालत सजाएं एक साथ चलाने का आदेश दिया लेकिन कहा जाता है कि वह आराम से हाई सिक्योरिटी में लग्जरी लाइफ स्टाइल के मजे ले रहा है। पाकिस्तान में जेल की सजा काट रहा है हाफिज सईद रिपोर्ट के अनुसार, सईद फिलहाल दस्तावेजों में जेल में हैं और उसके घर को उपजेल में बदल दिया गया है। सूत्रों ने अखबार को बताया कि एक किमी के रेडियस में गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरा लगाए गए हैं, जिनकी निगरानी कंट्रोल रूम के जरिए की जा रही है। आतंकवादियों को फंडिंग करने के 7 मामलों में सईद दोषी साबित हुई है। उसे 46 साल की जेल की सजा हुई है कहां है हाफिज सईद खबर है कि बीते तीन सालों में दो दर्जन से ज्यादा बार सार्वजनिक रूप से सामने आ चुका है। उस दौरान वह सुरक्षा घेरे में रहता है, जिसमें SSG के पूर्व कमांडो शामिल होते हैं।

8वें वेतन आयोग के गठन की तैयारियां तेज, 42 अहम पदों पर चयन शुरू, 7वें पे पेनल मुकाबले कम होंगे सदस्य

नई दिल्ली सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन की तैयारियों को गति देते हुए 42 पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (DoE) ने 21 अप्रैल को दो अलग-अलग सर्कुलर जारी किए, जिनमें 40 पदों के लिए भर्ती की बात कही गई है। इनमें सलाहकारों के साथ-साथ सचिवालय के कई पद शामिल हैं। इसके अलावा आयोग के अध्यक्ष और दो अन्य प्रमुख सदस्यों की नियुक्ति भी की जाएगी। 8th Pay Commission: जल्द होगी चेयमैन की घोषणा फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक 8वें वेतन आयोग के लिए चेयरमैन और दो अन्य प्रमुख सदस्यों के नाम करीब-करीब तय हो चुके हैं और जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। नियुक्त किए जाने वाले सदस्यों में दो निदेशक/उप सचिव, तीन अवर सचिव और 37 अन्य कर्मचारी शामिल होंगे। ये सभी सदस्य आयोग की शर्तें (Terms of Reference – ToR) तय होने के बाद प्रारंभिक कार्य करेंगे। 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में होंगे कम सदस्य फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने सूत्रों के अनुसार लिखा कि 8वें वेतन आयोग में पिछली बार की तुलना में कम सदस्य होंगे। उदाहरण के लिए, 7वें वेतन आयोग में कुल 45 सदस्य थे, जिसमें अध्यक्ष, 18 सचिवालय कर्मी, 16 सलाहकार और 7 अन्य कर्मचारी शामिल थे। यह आयोग न्यायमूर्ति अशोक कुमार माथुर की अध्यक्षता में काम कर रहा था। 6वें वेतन आयोग में कुल चार सदस्य और 17 सचिवालय कर्मी थे। वहीं, 5वें वेतन आयोग में केवल तीन सदस्य थे। शुरुआती दौर में पहले वेतन आयोग में 9 सदस्य, दूसरे में 6 और तीसरे व चौथे में 5-5 सदस्य होते थे। 8th Pay Commission: राष्ट्रीय परिषद (JCM) ने तैयारियां तेज कीं इसी बीच, नेशनल काउंसिल (JCM) के स्टाफ साइड ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे जाने वाले ज्ञापन की तैयारी शुरू कर दी है। 22 अप्रैल को आयोजित विस्तारित बैठक में न्यूनतम वेतन, पे स्केल, फिटमेंट फैक्टर, भत्ते, पदोन्नति नीति और पेंशन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। एक ड्राफ्टिंग कमेटी बनाई गई है जिसमें प्रमुख कर्मचारी संघों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सभी संगठनों को 20 मई 2025 तक अपने सुझाव PDF और Word फॉर्मेट में भेजने को कहा गया है। 8वें वेतन आयोग में 7वें वेतन आयोग से कम सदस्य होंगे अगर हम पिछला स्ट्रक्चर को देखें तो 7वें वेतन आयोग में कुल 45 लोग शामिल थे. इसमें अध्यक्ष, सचिवालय में 18 लोग, 16 सलाहकार और 7 अन्य कर्मचारी शामिल थे. इस आयोग की अध्यक्षता जस्टिस अशोक कुमार माथुर कर रहे थे. वहीं, अगर बात करें छठे वेतन आयोग की तो इसमें भी अध्यक्ष समेत चार सदस्य थे, लेकिन सचिवालय में सिर्फ 17 लोग ही काम कर रहे थे. छठे वेतन आयोग की अध्यक्षता जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण कर रहे थे. मजे की बात यह है कि 5वें वेतन आयोग में सदस्यों की संख्या और भी कम थी. इसमें केवल तीन सदस्य शामिल थे. अगर शुरुआती चरण की बात करें तो पहले पे कमीशन में नौ सदस्य थे, दूसरे में छह, जबकि तीसरे और चौथे वेतन आयोग में पांच-पांच सदस्य थे. 8th Pay Commission: 48 लाख कर्मचारियों और 57 लाख पेंशनभोगियों को लाभ की उम्मीद हालांकि सरकार ने अभी तक आयोग के औपचारिक गठन या ToR की घोषणा नहीं की है, लेकिन लगातार जारी हो रहे सर्कुलर और आंतरिक बैठकों से स्पष्ट है कि आयोग के गठन की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। एक बार आयोग सक्रिय हो जाने के बाद यह 48 लाख केंद्र सरकार कर्मचारियों और 57 लाख पेंशनरों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों में सुधार के लिए अहम भूमिका निभाएगा। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच चर्चा इस बीच राष्ट्रीय परिषद (NC-JCM) के कर्मचारी पक्ष ने 22 अप्रैल को अपनी स्थायी समिति की विस्तारित बैठक के बाद 8वें वेतन आयोग को सौंपे जाने वाले व्यापक ज्ञापन की तैयारी शुरू कर दी हैं. इस बैठक में केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से संबंधित कई प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें मिनिमम सैलरी, वेतनमान, फिटमेंट फैक्टर, भत्ते, पदोन्नति नीति और पेंशन लाभ शामिल हैं. ज्ञापन तैयार करने के लिए एक मसौदा समिति का गठन किया गया है. इस समिति में प्रमुख कर्मचारी महासंघों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. ये महासंघ 30 अप्रैल 2025 तक अपने प्रतिनिधियों के नाम भेजेंगे.व्यय विभाग ने सर्कुलर में कहा, “इन पदों पर 8वें वेतन आयोग के गठन की डेट से लेकर कमीशन के बंद होने तक कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी. इसमें यह भी कहा गया है कि रिक्त पदों के लिए आवेदनों की समीक्षा तब तक जारी रहेगी, जब तक सभी पद भर नहीं जाते.” कितने कर्मचारियों को मिलेगा लाभ? हालांकि, सरकार ने अभी तक 8वें वेतन आयोग के औपचारिक गठन या इसके टर्म ऑफ रिफ्रेंस को लेकर कोई की घोषणा नहीं की है, लेकिन लगातार सामने आ रहे सर्कुलर और मीटिंग्स से संकेत मिलता है कि तैयारियां तेजी से चल रही हैं और कमीशन अगले कुछ महीनों में काम करना शुरू कर देगा. एक बार 8वां वेतन आयोग एक्टिव हो जाने के बाद यह लगभग 48 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और 57 लाख से अधिक पेंशनर्स के सैलरी स्ट्रक्चर और सर्विस कंडीशन को रिवाइज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

नए महीने की शुरुआत के साथ ही देश के लिए अच्‍छी खबर आई है. अप्रैल महीने के दौरान GST Collection में शानदार बढ़ोतरी हुई

नई दिल्ली नए महीने की शुरुआत के साथ ही देश के लिए अच्‍छी खबर आई है. अप्रैल महीने के दौरान GST Collection में शानदार बढ़ोतरी हुई है. इस बढ़ोतरी के साथ जीएसटी कलेक्‍शन रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्‍शन साल-दर-साल 12.6 प्रतिशत बढ़कर 2.37 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया. इससे पहले सबसे ज्‍यादा जीएसटी कलेक्शन अप्रैल 2024 में हुआ था, जो 2.10 लाख करोड़ रुपये था. हालांकि अब ये रिकॉर्ड भी टूट चुका है. मार्च 2025 में यह कलेक्‍शन 1.96 लाख करोड़ रुपये था. घरेलू लेनदेन से जीएसटी राजस्व 10.7 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि आयातित वस्तुओं से राजस्व 20.8 प्रतिशत बढ़कर 46,913 करोड़ रुपये हो गया है. जनवरी से मार्च तक कितना रहा जीएसटी कलेक्‍शन सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में यह कलेक्‍शन 1.96 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.9% की ग्रोथ है. फरवरी में जीएसटी कलेक्‍शन 1.83 लाख करोड़ रुपये रहा, जो साल-दर-साल 9.1% की ग्रोथ रही. वहीं जनवरी में भी 1.96 लाख करोड़ रुपये जीएसटी कलेक्‍शन रहा, जो 12.3% की ग्रोथ को दिखाता है. जीएसटी कलेक्‍शन में हर महीने बढ़ोतरी की बड़ी वजह देश में घरेलू मांग की बढ़ोतरी रही है. इन जगहों पर ज्‍यादा हुआ जीएसटी कलेक्‍शन लक्षद्वीप में जीएसटी कलेक्‍शन में 287% की ग्रोथ हुई है. राज्यों में, अरुणाचल प्रदेश ने 66% की ग्रोथ दर्ज की है, जबकि मेघालय और नागालैंड में क्रमशः 50% और 42% की वृद्धि हुई है. हरियाणा, बिहार और गुजरात जैसे बड़े राज्यों ने भी दोहरे अंकों की ग्रोथ दर्ज की है. इसके विपरीत, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा और मिजोरम में गिरावट देखी गई, जिसमें मिजोरम में 28% की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई. कब लागू हुआ था जीएसटी? बता दें, देश में  1 जुलाई 2017 को GST लागू हुआ था. वस्तु एवं सेवा कर (GST) भारत में वस्तुओं और सेवाओं के निर्माण, बिक्री और उपभोग पर अप्रत्यक्ष कर है. जीएसटी के 4 प्रकार हैं, जिसमें सीजीएसटी, एसजीएसटी, यूटीजीएसटी और आईजीएसटी शामिल हैं. कभी-कभी उपकर भी लगाया जाता है. भारत में विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के लिए GST की दरें 4 स्लैब में विभाजित किया गया है, 5% जीएसटी, 12% जीएसटी, 18% जीएसटी और 28% जीएसटी. देश में GST लागू होने के बाद जीएसटी परिषद ने कई बार विभिन्न उत्पादों के लिए जीएसटी दरों में संशोधन किया है.  

‘क्या आप सुरक्षा बलों का मनोबल गिराना चाहते हैं?’ पहलगाम हमले पर जनहित याचिका पर सुनवाई से SC का इनकार

नई दिल्ली पूरे देश में इस समय पहलगाम आतंकी हमले को लेकर आक्रोश है। इस बीच इस हमले की न्यायिक जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। न्यूज एजेंस पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले को फटकार लगाते हुए कहा कि न्यायाधीश आतंकवाद मामलों की जांच के विशेषज्ञ नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका दायर करने वालों को फटकार लगाते हुए सवाल किया कि क्या वे सुरक्षा बलों का मनोबल गिराना चाहते हैं? उन्हें ऐसे मुद्दों को न्यायिक क्षेत्र में नहीं लाने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि इस मुश्किल वक्त में देश का प्रत्येक नागरिक आतंकवाद से लड़ने के लिए एकजुट है।  जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट पहलगाम आतंकवादी हमले की जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर करने वाले वकीलों की कड़ी आलोचना की। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा, “जिम्मेदार बनो। देश के प्रति तुम्हारा कुछ कर्तव्य है। क्या यही तरीका है… प्लीज ऐसा मत करो। कब से कोई रिटायर्ड हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का जज ऐसे मुद्दों की जांच करने के लिए विशेषज्ञ बन गया है? हम कुछ भी नहीं सुन रहे हैं।” जस्टिस सूर्यकांत ने आगे कहा, “यह वह महत्वपूर्ण समय है जब देश का हर नागरिक आतंकवाद से लड़ने के लिए हाथ मिला रहा है। ऐसी कोई प्रार्थना न करें जिससे किसी का मनोबल गिरे। मामले की संवेदनशीलता देखिए।” ‘सुरक्षा बलों का मनोबल गिराना चाहते हैं’ पीठ ने कहा, “इस महत्वपूर्ण समय में देश के हर नागरिक ने आतंकवाद से लड़ने के लिए हाथ मिलाया है. क्या आप इस तरह की जनहित याचिका दायर करके सुरक्षा बलों का मनोबल गिराना चाहते हैं. इस तरह के मुद्दे को न्यायिक क्षेत्र में न लाएं.” याचिकाकर्ता फतेह कुमार साहू और अन्य को जनहित याचिका वापस लेने के लिए कहा गया. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे इस मुद्दे की संवेदनशीलता को समझें और अदालत में ऐसी कोई अपील न करें, जिससे सुरक्षा बलों का मनोबल गिरे. ‘आदेश पारित करने को न कहें’ पीठ ने याचिकाकर्ताओं में से एक से कहा, “आप रिटायर सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच करने के लिए कह रहे हैं. वे जांच के विशेषज्ञ नहीं हैं, बल्कि वे केवल निर्णय दे सकते हैं और किसी मुद्दे पर निर्णय ले सकते हैं. हमें आदेश पारित करने के लिए न कहें. आप जहां जाना चाहते हैं, जाएं. बेहतर होगा कि आप वापस चले जाएं.” जनहित याचिका में केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी. पहलगाम हमले में 26 पर्यटकों की मौत बता दें कि 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने अनंतनाग जिले के पहलगाम के ऊपरी इलाकों में स्थित एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल बैसरन में गोलीबारी की, जिसमें 26 लोग मारे गए. मरने वालों में अधिकतर दूसरे राज्यों से आए पर्यटक थे – इस घटना ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा दिया है. किसने दायर की थी पिटीशन जनहित याचिका कश्मीर के रहने वाले मोहम्मद जुनैद ने दायर की थी। याचिकाकर्ताओं में फतेश कुमार साहू और विकी कुमार का भी नाम है। याचिका में ये भी कहा गया है कि केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार कश्मीर में पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। पहलगाम में आतंकियों ने धर्म पूछकर गोली मारी थी कश्मीर के पहलगाम स्थित बायसरन घाटी में 22 अप्रैल को आतंकी हमला हुआ था। इसमें 26 पर्यटक मारे गए थे। इसमें एक नेपाल का टूरिस्ट भी शामिल था। आतंकियों ने पर्यटकों का धर्म पूछकर गोली मारी थी। हमले की जिम्मेदारी पहले द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, हालांकि बाद में इससे मुकर गया था। पहलगाम हमला मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है। NIA ने मामले में 27 अप्रैल को जम्मू में केस दर्ज किया था। चश्मदीद ने बताया था, 22 अप्रैल को क्या हुआ था… आतंकी हमले में महाराष्ट्र के संतोष जगदाले भी मारे गए थे। जगदाले अपनी पत्नी और बेटी के साथ पहलगाम घूमने गए थे। साथ में एक महिला रिश्तेदार भी थी। आतंकियों ने तीनों महिलाओं को छोड़ दिया। जगदाले की बेटी असावरी ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया था- हम पांच लोगों का ग्रुप था। इसमें मेरे माता-पिता भी शामिल थे। हम पहलगाम के पास बैसरन घाटी में थे, तभी गोलीबारी की आवाज सुनी। देखा कि पुलिस के कपड़े पहने कुछ लोग गोलियां चला रहे हैं। असावरी ने कहा, ‘हम सभी पास के एक टेंट में छिप गए। 6-7 अन्य लोग भी आ गए। हम सभी गोलीबारी से बचने के लिए जमीन पर लेट गए, पहले लगा कि यह आतंकवादियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच कोई मुठभेड़ है। तभी एक आतंकी हमारे टेंट में आ गया। उसने मेरे पिताजी को बाहर आने के लिए कहा। साथ ही पीएम मोदी के लिए कुछ गलत शब्दों का इस्तेमाल किया। फिर उन्होंने मेरे पिता से एक इस्लामी आयत (शायद कलमा) पढ़ने को कहा। जब वे नहीं पढ़ पाए तो उन्हें तीन गोलियां मार दीं, एक सिर पर, एक कान के पीछे और एक पीठ में। मेरे चाचा मेरे बगल में थे। आतंकवादियों ने उन्हें चार से पांच गोलियां मारीं।’

आतंकी खेलना चाहते थे पहलगाम के आरू, एम्यूजमेंट पार्क या बेताब घाटी में खूनी खेल, इस वजह से बैसरन को बनाया निशाना

श्रीनगर पहलगाम आतंकी हमले की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में पता चला है कि हमला करने वाले आतंकियों ने बैसरन से पहले तीन और जगहों पर भी रेकी की थी। बताया गया है कि आतंकियों ने 22 अप्रैल से पहले पहलगाम और आसपास के इलाके की रेकी शुरू की थी। बैसरन, आरु वैली और बेताब वैली संग लोकल एम्यूज़मेंट पार्क की रेकी करने के बाद हमले के लिए बैसरन को चुना गया था। आतंकियों की ओर से सेटेलाइट फोन का इस्तेमाल किए जाने के इनपुट भी जांच में मिले हैं। इसी बीच पूरे कश्मीर में छापेमारी और पूछताछ का तेज सिलसिला चल रहा है। हिरासत में लिए गए करीब 185 लोगों से आतंकियों और मददगारों के गठजोड़ के सुराग तलाशे जा रहे हैं। किन जगहों की रेकी जांच में गिरफ्तार किए गए एक ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) ने बताया कि आतंकी घटना से दो दिन पहले बैसारन घाटी में मौजूद थे। आतंकियों ने 15 अप्रैल को पहलगाम पहुंचकर चार जगहों की रेकी की थी। इनमें बैसरन घाटी, आरु घाटी, स्थानीय एम्यूज़मेंट पार्क और बेताब घाटी शामिल थे। सुरक्षा कड़ी होने की वजह से आतंकी इन जगहों पर हमला नहीं कर पाए। NIA इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। एनआईए को शक है कि लगभग 20 ओवर ग्राउंड वर्कर ने विदेशी आतंकियों की मदद की थी। इनमें से कुछ को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बाकी पर नजर रखी जा रही है। ओवर ग्राउंड वर्कर ने की आतंकियों की मदद जांच में पता चला है कि कम से कम चार ओवर ग्राउंड वर्कर ने आतंकियों को रेकी और जरूरी सामान पहुंचाने में मदद की। हमले से पहले इलाके में तीन सैटेलाइन फोन के इस्तेमाल के सबूत भी मिले हैं। इनमें से दो डिवाइस के सिग्नल को ट्रैस कर लिया गया है। एनआईए और खुफिया एजेंसियां अब तक 2,500 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी हैं। फिलहाल 186 लोगों को आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया है। जम्मू और कश्मीर में कई जगह छापेमारी हमले के बाद जम्मू और कश्मीर में कई जगह छापेमारी की गई। कुपवाड़ा, हंदवाड़ा, अनंतनाग, त्राल, पुलवामा, सोपोर, बारामूला और बांदीपोरा में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अलग-अलग गुट और जमात-ए-इस्लामी जैसे प्रतिबंधित संगठनों के सदस्यों और समर्थकों के घरों की तलाशी ली गई। एनआईए सूत्रों के अनुसार, इन संगठनों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। फिर भी इन्होंने एक ऐसा नेटवर्क बनाया, जिससे पाकिस्तानी आतंकियों को पहलगाम में हमला करने की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में मदद मिली। NIA की जांच में पता चला है कि ऐसे 4 ओवरग्राउंड वर्कर्स ने पहलगाम समेत 4 जगहों की हमले के लिए रेकी की थी। इस रेकी के बाद ही आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में हमला करने का फैसला लिया। सूत्रों का कहना है कि अब तक कुल 20 ओवरग्राउंड वर्कर्स की पहचान हो चुकी है। इनमें से कई लोगों को अरेस्ट भी किया गया है। अब तक इस हमले के बाद से 186 लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनके पूछताछ की जा रही है। दरअसल कश्मीर में लंबे समय से आतंकी संगठनों की यह रणनीति रही है। अब आतंकी संगठनों का कोई खुलकर साथ नहीं देता, लेकिन अपनी नौकरी और धंधे करते हुए ही कई लोग ऐसे पाए जाते हैं, जो आतंकियों का साथ देते हैं। इन्हें ही ओवरग्राउंड वर्कर का नाम दिया गया है। 22 अप्रैल को आतंकियों ने पहलगाम में टूरिस्टों को मारा था। इन आतंकियों ने पुरुषों को ही मारा और उनकी महिलाओं को छोड़ दिया। इन महिलाओं एवं अन्य परिजनों ने ही बताया था कि आतंकियों ने उनसे पहले धर्म पूछा था और फिर कलमा पढ़वाया और खतना तक चेक किया। रिपोर्ट्स के अनुसार 20 लोगों की पैंट उतरवाकर आतंकियों ने देखा था कि उनका खतना हुआ है या नहीं। खतना नहीं पाया तो पुष्टि हुई कि वे मुसलमान नहीं हैं और फिर उनका बेरहमी से कत्ल कर दिया गया। कॉल रिकॉर्ड की जांच इन संगठनों से जुड़े लोगों के कॉल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जांचकर्ताओं को इन समूहों के सदस्यों और पहलगाम हमले में शामिल ओवर ग्राउंड वर्कर के बीच बातचीत के लिंक मिले हैं। इससे पता चलता है कि हमले की साजिश में कई लोग शामिल थे। एनआईए और दूसरी एजेंसियां मिलकर इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं। वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस हमले में और कौन-कौन शामिल था और उनका मकसद क्या था? मामले की जांच अभी जारी इस पूरे मामले की जांच अभी जारी है। एनआईए हर पहलू पर बारीकी से ध्यान दे रही है ताकि दोषियों को सजा मिल सके और भविष्य में ऐसे हमलों को रोका जा सके। सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट पर हैं और इलाके में कड़ी निगरानी रख रही हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को टाला जा सके। लोगों से भी अपील की गई है कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। अगर उन्हें कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। हमले से दो दिन पहले पहुंचा आतंकी दल सूत्रों की मानें तो आतंकियों का दल अपने ओवरग्राउंड वर्क संग 19 अप्रैल को बैसरन पहुंचा था। उन्होंने बैसरन पार्क और आसपास क्षेत्र की रेकी की, लेकिन अपने ओवरग्राउंड वर्कर से इस विषय में कोई बात नहीं की आतंकियों ने हमले से एक दिन पहले अपने ओवरग्राउंड वर्कर से संपर्क किया और उसे 22 अप्रैल की दोपहर को बैसरन पहुंचने के लिए कहा था। ओवरग्राउंड वर्कर बने गाइड सूत्रों के अनुसार, बैसरन नरसंहार के गुनहगारों को पकड़ने के लिए सुरक्षा बल ने अपना तलाशी अभियान जारी रखा हुआ है। सुरक्षा बल ने 20 के करीब ऐसे ओवरग्राउंड वर्करों को चिह्नित किया है, जो हमलावर आतंकियों के साथ संपर्क में रह चुके हैं। इनमें से कुछ जेल में बंद हैं। चार ओवरग्राउंड वर्करों ने पाकिस्तानी आतंकियों के लिए कथित तौर पर गाइड का भी काम किया है। पांच ओवरग्राउंड वर्करों के बारे में कहा जा रहा है कि वह हमले के समय पहलगाम और बैसरन के आसपास … Read more

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