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देशभर में मतदाता सूची से चुनाव आयोग हटाएगा डुप्लिकेट नाम

नई दिल्ली चुनाव आयोग देशभर में मतदाता सूची से डुप्लिकेट नाम हटाने के अभियान में जुटा है। इस बीच, मंगलवार को सरकारी सूत्रों ने साफ किया कि मतदाताओं के लिए आधार नंबर देना पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा, और इसमें कानून के तहत कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही ये भी बताया गया कि चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत, मतदाताओं द्वारा चुनाव अधिकारियों को आधार जानकारी देना जरूरी नहीं है, बल्कि यह उनकी मर्जी पर निर्भर करता है। आधार अनिवार्य करने का कोई प्रस्ताव नहीं यह बयान तब आया जब कुछ लोगों ने पूछा कि क्या आधार साझा करना अनिवार्य किया जा सकता है और अगर कोई मतदाता जानकारी नहीं देता तो क्या उसे कारण बताना होगा। इस सवाल के जवाब में सूत्रों का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, और न ही किसी नए नियम को जोड़ने की योजना है। बता दें कि इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच चुनाव आयोग पहले ही कह चुका है कि वह जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिकारियों के साथ समन्वय कर मतदाता सूची को नियमित रूप से अपडेट करेगा। मतदाता सूची और आधार लिंक को लेकर विचार-विमर्श इसके अलावा UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) और चुनाव आयोग के तकनीकी विशेषज्ञों के बीच मतदाता सूची और आधार लिंक करने को लेकर विचार-विमर्श जल्द शुरू होगा। हालांकि, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक मतदाता केवल उसी मतदान केंद्र में वोट डाल सकता है, जहां उसका नाम दर्ज है। मतदाता सूची से डुप्लिकेट नाम हटाने को लेकर चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि देशभर में डुप्लिकेट वोटर लिस्ट की समस्या को तीन महीने में खत्म किया जाए। क्या है मौजूदा कानून, समझिए मौजूदा कानून के अनुसार अगर कोई मतदाता किसी उचित कारण से आधार नंबर नहीं दे पाता, तो उसकी मतदाता सूची से प्रविष्टि नहीं हटाई जा सकती। इस तरह, मतदाता सूची को साफ-सुथरा और सही बनाने की प्रक्रिया तेज की जा रही है, लेकिन आधार साझा करना पूरी तरह स्वैच्छिक बना रहेगा।  

भारत को Sweden से मिला Anti-armour हथियार, पाकिस्तान के लिए बनेगा काल

नई दिल्ली/ स्टॉकहोम  पहलगाम आतंकी हमले के बीच आशंका है कि भारत और पाकिस्तान युद्ध में फंस सकते हैं। इन सबके बीच स्वीडिश कंपनी SAAB ने भारतीय सशस्त्र बलों को AT4 Anti-Armor वीपन सिस्टम की डिलीवरी की घोषणा की है। साब इंडिया ने कहा है कि उसने कामयाबी के साथ भारतीय सुरक्षा बलों को AT4 Anti-Armor सिस्टम सौंप दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में SAAB इंडिया ने कहा है कि “हमें भारतीय सशस्त्र बलों को हमारे AT4 Anti-Armor हथियार प्रणाली की सफल डिलीवरी की घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है। AT4 कम दूरी की लड़ाई के लिए एक भरोसेमंद सिंगल-शॉट समाधान के रूप में भारत के शस्त्रागार में शामिल हो गया है। भारत ने AT4CS AST वैरिएंट खरीदा है, जिसमें इमारतों, दुश्मनों के बंकरों और शहरी लड़ाई में इस्तेमाल किया जाता है।” भारतीय सेना AT4 Anti-Armor से शहरी युद्ध के अलावा पहाड़ी इलाकों में बंकर बनाकर छिपे दुश्मनों पर सिंगल शॉट हमला कर सकती है। इसके अलावा इसे काफी कम स्थान से दागा जा सकता है। कई बार जवानों के पास हथियार चलाने के लिए काफी कम स्थान होता है या फिर इमारतों में छिपकर भी इसे फायर किया जा सकता है। भारत ने खास तौर पर आतंकवाद विरोधी अभियान चलाने के लिए इसे स्वीडिश कंपनी साब से खरीदा है और इस वक्त, जब पाकिस्तान के साथ तनाव बना हुआ है, AT4 Anti-Armor भारतीय सेना की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाएगा। AT4 Anti-Armor सिस्टम की खासियत AT4 Anti-Armor को जवान कंधे पर रखकर फायर कर सकते हैं। ये एक मानव-पोर्टेबल हथियार है, जिसका वजन सिर्फ 7.5 किलो होता है। ये एक ही शॉट के बाद डिस्पोजेबल हो जाते होते हैं। ये एक रिकॉइललेस हथियार है, जिसे एक ही सैनिक ऑपरेट कर सकते हैं। इसकी लंबाई सिर्फ एक मीटर होती है और इससे 300 मीटर की दूरी से दुश्मन पर सटीक हमला किया जा सकता है। एक बार दागने के बाद इसे फेंक दिया जाता है। इसमें प्री लोडेड हीट वारहेड होता है, जो टैंक, बख्तरबंद वाहन, बंकर या दीवार को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे पैदल सेना के लिए डिजाइन किया गया है। यानि एक सैनिक छिपकर आराम से किसी टैंक को उड़ा सकता है। इसका इस्तेमाल काफी आसान होता है और फायर करने के लिए इसे कुछ ही सेकंड्स में तैयार किया जा सकता है। बख्तरबंद गाड़ियों, फोर्टिफाइड पोजिशन्स, और लो-फ्लाईंग हेलीकॉप्टरों के खिलाफ ये काफी असरदार है। भारत के अलावा इसका इस्तेमाल अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन, जर्मनी और फ्रांसीसी सैनिक करते हैं। यूक्रेनी सैनिकों ने इससे रूसी टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को काफी नुकसान पहुंचाया है। रूसी टैंकों को उड़ाने के लिए इसका जमकर इस्तेमाल किया गया है। हालांकि भारत इसका नया ग्राहक है, लेकिन भारतीय सेना लंबे समय से साब द्वारा डिजाइन किए गए कार्ल-गुस्ताफ शोल्डर-फायर हथियार सिस्टम का इस्तेमाल करती आ रही है। इसका उत्पादन भारत में भारत डायनेमिक्स करती है। AT4 में कार्ल-गुस्ताफ वाली सारी खूबियां हैं। AT4-CS एक हल्का, पोर्टेबल, पूरी तरह से डिस्पोजेबल एंटी-टैंक हथियार है जिसे भारतीय सेना और वायुसेना ने 2022 में प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के तहत चुना था। पता चला है कि करीब 2,000 यूनिट का ऑर्डर दिया गया था। इसका वजन करीब 9 किलोग्राम है और इसकी प्रभावी रेंज 200 मीटर है। कार्ल गुस्ताफ़ का इस्तेमाल भारतीय सेना द्वारा 1976 से किया जा रहा है और यह कंधे से दागा जाने वाला मुख्य हथियार रहा है। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, भारतीय सेना कार्ल गुस्ताफ़ के लगभग सात अलग-अलग प्रकारों का इस्तेमाल कर रही है। कार्ल गुस्ताफ़ के गोला-बारूद की रेंज अलग-अलग है, जिसकी अधिकतम रेंज 1,500 मीटर तक है। एंटी-टैंक गोला-बारूद की रेंज 500 मीटर है। कार्ल गुस्ताफ़ के पुराने संस्करण और पुराने गोला-बारूद का निर्माण भारत में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड और अब नए बने रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा किया जाता है।

भारत की ओर से सैन्य कार्रवाई के अंदेशे के बीच पाकिस्तान में खौफ, पाक सेना ने रडार सिस्टम को सियालकोट पर तैनात किया

 नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले को सात दिन हो गए हैं. इस हमले के बाद भारत की ओर से सैन्य कार्रवाई के अंदेशे के बीच पाकिस्तान खौफ में है. ऐसे में पाकिस्तानी सेना भारत के किसी भी तरह के संभावित हमले से बचने के लिए कई कदम उठा रहा है. जानकारी के मुताबिक, इंडियन एयरस्ट्राइक को डिटेक्ट करने के लिए पाकिस्तानी सेना अपने रडार सिस्टम को सियालकोट सेक्टर में फॉरवर्ड लोकेशन पर तैनात कर रही है. फिरोजपुर से सटे हुए इलाकों में भारत की मूवमेंट्स का पता लगाने के लिए पाकिस्तानी फौज इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर को भी फॉरवर्ड लोकेशंस पर तैनात कर रहा है. हाल ही में पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 58 किलोमीटर की दूरी पर चोर कंटोनमेंट में TPS-77 रडार को तैनात किया था. वहीं, पाकिस्तान ने लगातार पांचवें दिन सीजफायर का उल्लंघन किया और एलओसी पर फायरिंग की. पाकिस्तानी सेना ने बिना किसी उकसावे के कुपवाड़ा, बारामूला और अखनूर सेक्टर्स में फायरिंग शुरू की. भारतीय सेना ने पाकिस्तान का मुंहतोड़ जवाब दिया. बता दें कि पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी जबकि 17 घायल हुए थे. यह हमला पहलगाम की बैसारन घाटी में किया गया था, जिसमें आतंकियों ने चुन-चुनकर लोगों को निशाना बनाया गया था. पहलगाम अटैक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCS) ने सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया था. यह पहली बार है जब भारत ने इतनी बड़ी और सख्त कार्रवाई की गई. भारत और पाकिस्तान के बीच तीन बड़ी जंग हो चुकी है लेकिन पहले कभी भी इस संधि को स्थगित नहीं किया गया. कैबिनेट कमेटी की बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया था कि 1960 की सिंधु जल संधि तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दी गई. यह रोक तब तक रहेगी, जब तक पाकिस्तान क्रॉस बॉर्डर टेरेरिज्म को अपना समर्थन देना बंद नहीं करता.  

पाकिस्तानी एयरलाइंस को भारतीय वायुक्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं देने पर भारत सरकार बड़ा फैसला !

 नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर में पहलगाम आतंकी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तनाव चरम पर है. इस बीच दोनों देशों की सरकारों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ कई बड़े कदम उठाए गए हैं. इस बीच भारत सरकार पाकिस्तानी एयरलाइंस के लिए अपने एयरस्पेस को बंद करने पर विचार कर रही है. सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तानी एयरलाइंस को भारतीय वायुक्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं देने पर भारत सरकार विचार कर रही है. इस फैसले के बाद पाकिस्तानी एयरलाइंस को दक्षिणपूर्व एशियाई देशों तक पहुंचने के लिए चीन और श्रीलंका के रास्ते जाना पड़ेगा. इसके साथ ही भारतीय बंदरगाहों पर पाकिस्तानी जहाजों के ठहरने पर भी प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा रहा है. हालांकि, पाकिस्तानी एयरलाइंस भारत की ओर से किसी तरह की कार्रवाई के डर से पहले से ही भारतीय वायुक्षेत्र में प्रवेश करने से बच रहे हैं. इससे पहले पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस बंद कर दिया था. बता दें कि पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी जबकि 17 घायल हुए थे. यह हमला पहलगाम की बैसारन घाटी में किया गया था, जिसमें आतंकियों ने चुन-चुनकर लोगों को निशाना बनाया गया था. पहलगाम अटैक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCS) ने सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया था. यह पहली बार है जब भारत ने इतनी बड़ी और सख्त कार्रवाई की गई. भारत और पाकिस्तान के बीच तीन बड़ी जंग हो चुकी है लेकिन पहले कभी भी इस संधि को स्थगित नहीं किया गया. कैबिनेट कमेटी की बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया था कि 1960 की सिंधु जल संधि तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दी गई. यह रोक तब तक रहेगी, जब तक पाकिस्तान क्रॉस बॉर्डर टेरेरिज्म को अपना समर्थन देना बंद नहीं करता.  

चेन्नई के कई इलाको में महिलाओं की सुरक्षा में तैनात होंगे ‘रेड बटन रोबोटिक सीओपी’, 200 जगहों पर लगाने की व्यवस्था

चेन्नई  महिलाओं और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चेन्नई पुलिस कई नई पहल कर रही है. इसी सिलसिले में अब शहर के विभिन्न इलाकों में ‘रेड बटन रोबोटिक सीओपी’ नामक रोबोटिक पुलिस मशीनें लगाई जा रही है. पुलिस ने कहा है कि इससे महिलाएं किसी भी समय हिम्मत के साथ बाहर निकल सकती हैं. महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा और यौन अपराध की घटनाएं आज के समय में आम बात हो गई है. सिर्फ यौन उत्पीड़न और बलात्कार ही नहीं, बल्कि प्यार से इनकार करने पर हत्या, तेजाब फेंकने जैसे अपराध भी हो रहे हैं. इस वजह से ज्यादातर लड़कियां और उनके माता-पिता डर के साये में रहते हैं. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ऐसी स्थिति में चेन्नई पुलिस ने आपातकालीन पुलिस सहायता के लिए ‘रेड बटन रोबोटिक कॉप’ नामक सुरक्षा रोबोटिक मशीनें लगाने की कवायद शुरू की है. ये उन जगहों पर काम आएंगी जहां महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हैं. उन इलाकों में जहां अपराध की घटनाएं होती हैं. पहले चरण में चेन्नई में 200 जगहों पर इन्हें लगाने की व्यवस्था की गई है. रेड बटन – रोबोटिक कॉप नामक यह पुलिस मशीन कई मीटर की दूरी से 360 डिग्री पर 24 घंटे स्थिति की निगरानी और नियंत्रण कर सकती है. यह न केवल होने वाली घटनाओं का वीडियो रिकॉर्ड करता है, बल्कि आवाजें भी रिकॉर्ड करता है. इसी तरह अगर कोई भी व्यक्ति, चाहे वह महिला ही क्यों न हो, खतरे में है तो उसे बस इस मशीन पर बटन दबाना होगा. इससे इमरजेंसी कॉल अलार्म बजेगा. इससे आस-पास की पुलिस तुरंत इलाके में आ जाएगी. इसके अलावा इस मशीन में खतरे में फंसे लोगों और पुलिस के साथ संवाद करने की सुविधा भी है. इसमें माइक्रोफोन सुविधा और जीपीएस सुविधा सहित अत्याधुनिक सुविधाएं भी हैं. इस मशीन पर लाल बटन दबाने से खतरे में पड़े व्यक्ति या उसकी ओर से कोई दूसरा व्यक्ति तुरंत पुलिस को सूचना भेज देगा. खास बात यह है कि यह तेज आवाज करके अलार्म बजाएगा. इससे आस-पास के लोग भी मदद के लिए आ सकते हैं. इस डिवाइस में ऐसी सुविधाएं हैं जिससे खतरे में फंसे लोग सीधे वीडियो कॉल के जरिए पुलिस कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं. गश्त कर रही पुलिस घटनास्थल पर क्या हो रहा है इस पर नजर रख सकती है. तुरंत जाकर कार्रवाई कर सकती है और कैमरे में रिकॉर्ड की गई फुटेज के आधार पर जांच शुरू कर सकती है. रेड बटन-रोबोटी कॉप डिवाइस में 24 घंटे इंटरनेट की सुविधा होगी. चेन्नई पुलिस आयुक्त के आदेश पर 12 पुलिस जिलों के 4 पुलिस जोन में 50-50 स्थानों पर पुलिस रेड बटन-रोबोटी पुलिस डिवाइस लगाने के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करने के लिए फील्ड सर्वे किया गया है. इसके अनुसार जून से चेन्नई में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, शॉपिंग मॉल, पूजा स्थल, शैक्षणिक संस्थान, कारखाने, आईटी कंपनियां, पार्क, अस्पताल आदि सहित आम लोगों के आने-जाने वाले क्षेत्रों में इन आयरन पुलिसकर्मियों को बड़ी संख्या में तैनात किया जाएगा.  

भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ एक और बड़ी डिजिटल स्ट्राइक, बैन किए ‘प्रोपेगेंडा’ वाले X अकाउंट

नई दिल्ली भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ एक और बड़ी डिजिटल स्ट्राइक कर दी है। सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें फैलाने और भारत विरोधी दुष्प्रचार चलाने वाले पाकिस्तानी पत्रकारों और चैनलों पर भारत ने कड़ी कार्रवाई करते हुए X (पहले ट्विटर) और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर तगड़ा बैन लगाया है। इस फैसले के बाद पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है और वहां सरकार से लेकर मीडिया जगत तक बेचैनी का माहौल बन गया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत का यह डिजिटल पलटवार न सिर्फ सख्त संदेश है, बल्कि यह भी साफ कर रहा है कि अब दुष्प्रचार करने वालों के लिए भारत में कोई जगह नहीं होगी। जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ लगातार सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में भारत ने अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर बड़ा एक्शन लिया है। पाकिस्तान से जुड़े कई पत्रकारों के X अकाउंट भारत में बैन कर दिए गए हैं। फर्जी खबरों पर लगा ताला सूत्रों के मुताबिक, इन पाकिस्तानी पत्रकारों पर भारत विरोधी और भ्रामक खबरें फैलाने का आरोप था। बताया गया है कि ये अकाउंट पाकिस्तान की सेना ISPR और खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े हुए थे। भारत ने फर्जी सूचनाएं और झूठी खबरें फैलाने वाले इन अकाउंट्स को ब्लॉक कर सख्त संदेश दिया है कि अब किसी भी तरह का दुष्प्रचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यूट्यूब पर भी हुई थी बड़ी कार्रवाई यह पहली बार नहीं है जब भारत ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन लिया हो। इससे पहले भारत ने GNN, Geo News, Dawn News और SAMAA TV जैसे बड़े पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल्स को भी भारत में बैन कर दिया था। यह कार्रवाई पाकिस्तान के प्रचार तंत्र को कमजोर करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। भारत का रुख और सख्त होने के संकेत जानकारों का कहना है कि भारत आने वाले दिनों में पाकिस्तान के खिलाफ और भी बड़े फैसले ले सकता है। सोशल मीडिया, यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भारत का साफ संदेश है कि अब कोई भी देश भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करेगा तो उसे मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।  दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग से पाकिस्तानी स्टाफ को एक हफ्ते में भारत छोड़ने के निर्देश दिए गए थे. जानकारी के मुताबिक, रविवार को पाकिस्तानी स्टाफ अटारी वाघा बॉर्डर के जरिये पाकिस्तान लौट गया. करीब 50- 55 का स्टाफ पाकिस्तानी उच्चायोग में था. पाकिस्तान उच्चायोग में डिफेंस नेवल और एयर एडवाइजर्स से जुड़ा स्टाफ वापस पाकिस्तान लौट गए हैं. पाकिस्तान उच्चायोग में तैनात सैन्य स्टाफ के भारत छोड़ने के बाद स्टाफ की संख्या घटकर 30 रह गई है.  दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग से पाकिस्तानी स्टाफ को एक हफ्ते में भारत छोड़ने के निर्देश दिए गए थे. जानकारी के मुताबिक, रविवार को पाकिस्तानी स्टाफ अटारी वाघा बॉर्डर के जरिये पाकिस्तान लौट गया. करीब 50- 55 का स्टाफ पाकिस्तानी उच्चायोग में था. पाकिस्तान उच्चायोग में डिफेंस नेवल और एयर एडवाइजर्स से जुड़ा स्टाफ वापस पाकिस्तान लौट गए हैं. पाकिस्तान उच्चायोग में तैनात सैन्य स्टाफ के भारत छोड़ने के बाद स्टाफ की संख्या घटकर 30 रह गई है. भारत ने जम्मू-कश्मीर पर गलत सूचना और फर्जी खबरें फैलाने के साथ-साथ भारत में आतंकवाद को समर्थन और प्रायोजित करने के लिए पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा एम आसिफ के अकाउंट को ब्लॉक कर दिया है.  भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित जंग को लेकर आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने बड़ा बयान दिया है. अभिनेता ने नेता बने कल्याण ने कहा, ‘अपने देश के लिए हम खून बहा देंगे…’ भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की बढ़ती आशंका के बीच बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि ‘बस अब हमलोग जल्द ही मुजफ्फराबाद में तिरंगा लहराएंगे.’ मुजफ्फराबाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का एक बड़ा शहर है. पहलगाम हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई से घबराए पाकिस्तानी एयर फोर्स ने एक प्रोपेगैंडा वीडियो जारी किया है. पाकिस्तान एयरफोर्स ने चीन से भीख में मिली J-10C और JF-17 ब्लॉक-III लड़ाकू विमानों का वीडियो जारी कर कहा कि PAF की युद्ध क्षमता काफी मजबूत हुई है. पाकिस्तानी एयरफोर्स ने भारत के बॉर्डर पर सैन्य अभ्यास करने का दावा करते हुए कहा कि ये पाकिस्तान के अत्याधुनिक हथियार सुनिश्चित करती हैं कि पाकिस्तान की हवाई रक्षा को कोई चुनौती नहीं दे सकता, जो हमारे विरोधी को एक स्पष्ट संदेश देती है कि देश का आसमान अभेद्य है.  पाकिस्तान में ज्यादातर लोगों का मानना ​​है कि पहले तो कोई हमला नहीं होगा और भारत का हमला ज्यादा से ज्यादा वैसा ही होगा जैसा पुलवामा के बाद हुआ था, उससे ज़्यादा नहीं! यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल है कि हमला कितना बड़ा होगा, लेकिन अगर आप भारतीय मीडिया को देखें तो मोदी के पास हमला न करने का विकल्प नहीं है. दुर्भाग्य से पाकिस्तान में सत्ताधारी वर्ग को लोगों को एकजुट करने की कोई जरूरत महसूस नहीं होती और हमारे मतभेद कम होने की बजाय और बढ़ गए हैं. निजी तौर पर मेरा मानना यह है कि पाकिस्तान को भारत के किसी बड़े हमले के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसकी कभी भी आशंका है! भारत से जंग की बढ़ती आहट के बीच पाकिस्तानी पत्रकार जावेद चौधरी ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तानी सेना ने एक ही रात में 40 लाख रिटायर्ड फौजियों को वापस बुला लिया है.’ पाकिस्तानी पत्रकार के अनुसार पाक सेना पूर्वी सीमा पर तैनात करने के लिए सेवानिवृत्त सैनिकों को वापस बुला रही है.  भारत और पाकिस्तान में जारी तनाव के बीच तुर्की और चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया है. चीन ने जहां पहलगाम आतंकी हमले की ‘निष्पक्ष जांच’ की वकालत की और पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं को समझने पर जोर दिया, तो वहीं तुर्की ने भारत-पाकिस्तान तनाव को कम करने की अपील की और साथ ही पाकिस्तानी नागरिकों को ‘मजबूत समर्थन’ की बात कही.  

दिल्ली में अब नहीं चलेगी प्राइवेट स्कूलों की मनमानी: कैबिनेट ने फीस एक्ट को दी मंजूरी

नई दिल्ली बहुत जल्दी अभिभावकों को स्कूलों के मनमानी तरीके से फीस बढ़ाने के रवैये से निजात मिलेगी। दिल्ली सरकार के कैबिनेट ने फीस बढोतरी के खिलाफ कच्चा मसौदा तैयार किया है। जल्द ही विधानसभा की एक अरजेंट बैठक बुलाकर इसे कानून की शक्ल दी जाएगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी जानकारी दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह जानकारी दी है। 31 जुलाई को फीस तय करके 15 सितम्बर को इसे स्कूल लेबल कमेटी में लाना होगा। निर्णय के हिसाब से फीस न लेने पर लगेगा जुर्माना 30-45 दिन में कमेटी फीस का फैसला करेगी, इसके बाद ये जिला स्तरीय कमेटी और फिर राज्य कमेटी के पास जाएगा। अक्तूबर-नवम्बर तक फीस कितनी होगी, पैरेंट्स को पता चल जाएगा। जो स्कूल कमेटी के निर्णय के हिसाब से फीस नहीं लेगा, उस पर 1-10 लाख तक का जुर्माना लगाया जाएगा। बच्चों की भविष्य, भाजपा की प्राथमिकता शिक्षा मंत्री ने कहा, 1973 के एक्ट में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ कोई प्रावधान नहीं था, पिछली सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया। बच्चों का भविष्य भाजपा सरकार की प्राथमिकता है। किसी बच्चे को फीस नहीं देने पर बाहर बिठाया तो 50 हजार प्रति बच्चे के हिसाब से स्कूल को जुर्माना देना होगा। हमने आज ये कैबिनेट में ये बिल पास किया है। ये जल्द कानून बनेगा और 1 अप्रैल 2025 से लागू माना जाएगा। पैरेंट्स को मिली पावर सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, इस ऐक्ट में पैरेंट्स को इतनी पावर मिली है कि वे अपने बच्चों का भविष्य करने में खुद से निर्णायक भूमिका निभाएंगे। विधानसभा में इसके लिए तत्काल एक बैठक बुलाई जाएगी।  

अहमदाबाद में पहलगाम हमले के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों पर बुलडोजर एक्शन, अवैध निर्माण किए जा रहे ध्वस्त

अहमदाबाद  गुजरात के अहमदाबाद के शाहआलम इलाके के पास चंडोला तालाब क्षेत्र में बांग्लादेशी घुसपैठियों के अवैध निर्माण पर मंगलवार से बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है। गुजरात पुलिस ने सोमवार रात से ही इसकी तैयारियां शुरू कर दी थीं। अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए 50 बुलडोजर और 36 डंपर को लगाया गया है। अहमदाबाद प्रशासन ने सुबह-सुबह अतिक्रमण के खिलाफ शुरू किए अभियान में चंडोला तालाब पर बनी अवैध झोपड़ियां और आलीशान फार्म हाउस को जमींदोज कर दिया है. नगर निगम की इस कार्रवाई के दौरान इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है. वहीं, नगर निगम की इस कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय लोग गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर HC ने सुनवाई करने से इनकार कर याचिका खारिज कर दी है. मंगलवार सुबह इस इलाके के 2000 स्क्वेयर यार्ड में फैले एक आलीशान फार्महाउस ढहाया गया है। पुलिस, क्राइम ब्रांच, एसओजी, साइबर क्राइम और एसआरपी की टीमें इलाके में तैनात हैं। अब यह मामला गुजरात हाईकोर्ट पहुंच गया है। क्षेत्र के निवासियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि कानूनी प्रक्रिया और नियमों का पालन किए बिना ही तोड़फोड़ की जा रही है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि यहां रहने वालों के बांग्लादेशी होने का कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है। बता दें कि अहमदाबाद पुलिस ने बीते दो दिन में शाहआलम इलाके से 890 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इनमें से 143 लोगों की पहचान बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में की गई है। यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू की गई। 2000 गज के फार्महाउस को देख चौंके कमिश्नर कार्रवाई के लिए पहुंचे पुलिस कमिश्नर उस समय हैरान रह गए जब उन्होंने झुग्गियों के बीच 2000 वर्ग गज में फैला आलीशान फार्महाउस देखा। जांच में पता चला कि यह आलीशान फार्महाउस लल्ला बिहारी नाम के शख्स का है। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही लल्ला बिहारी फरार हो गया। इस अवैध फार्महाउस को ध्वस्त कर दिया गया है। गुजरात हाईकोर्ट पहुंचा मामला इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि कोई व्यक्ति अवैध विदेशी है या नहीं, इसका फैसला सिर्फ फॉरेन ट्रिब्यूनल ही कर सकता है। इसके अलावा घर गिराने से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया और पुनर्वास की कोई व्यवस्था भी नहीं की गई। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की है। इस पर आज सुनवाई की संभावना है। क्या बोले पुलिस कमिश्नर? अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि “बंगाल वास एक ऐसा इलाका है, जहां कई अवैध बांग्लादेशी रहते हैं। इनके खिलाफ पहले भी कार्रवाई की गई है। पहले भी तोड़फोड़ की गई है। 3 दिन पहले पुलिस ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया था, जिसमें 180 से ज़्यादा अवैध बांग्लादेशियों की पहचान की गई थी और यह प्रक्रिया जारी है। पुलिस कमिश्नर ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि हमने एक एफआईआर भी दर्ज की है, जिसमें लल्लू बिहारी नाम के एक व्यक्ति और उसके कुछ लोगों के नाम हैं। वह फर्जी रेंट एग्रीमेंट बनाता था, ताकि आधार बनवाया जा सके। उसने यहां एक बड़ा फार्महाउस बनाया था। उसका घर, जो उसने अवैध रूप से बनाया था, उसे ध्वस्त कर दिया गया है और अभी भी तोड़फोड़ की प्रक्रिया चल रही है। सिंह ने कहा कि हमें पता चला है कि कुछ लोगों ने अवैध रूप से पासपोर्ट भी बनवा लिए हैं, इसलिए हमने लल्लू बिहारी और उसके गिरोह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और पुलिस निश्चित रूप से जांच करेगी। ‘दो हजार पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुई कार्रवाई’ डिमोलिशन ड्राइव के बारे में जानकारी देते हुए ज्वाइंट सीपी (क्राइम) शरद सिंघल ने बताया, ‘सियासतनगर बंगाल वास था, जहां अधिकांश बांग्लादेशी रहते थे… एएमसी ने एक सर्वेक्षण किया, जिसमें पाया गया कि अवैध निर्माण किया गया था. ध्वस्तीकरण अभियान चल रहा है. कुल 50 जेसीबी यहां काम कर रही हैं और लगभग 2,000 पुलिसकर्मी यहां तैनात हैं.’ उन्होंने बताया कि साल 2009 में भी यहां कार्रवाई की गई थी, लेकिन बाद में धीरे-धीरे इन लोगों ने तालाब पर मिट्टी डालकर अपने घर बना लिए थे. बीते दिनों अहमदाबाद नगर निगम ने सर्वे किया था, जिसके बाद ये कार्रवाई की जा रही है. बुलडोजर एक्शन पर HC से राहत नहीं वहीं, अहमदाबाद नगर निगम की इस कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय लोग गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. स्थानीय लोगों ने तुरंत सुनवाई की मांग करते हुए नगर निगम की कार्रवाई को चुनौती दी. हालांकि, हाईकोर्ट ने स्थानीय लोगों को राहत ना देते हुए नगर निगम की कार्रवाई पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया और याचिका को खारिज कर दिया. ‘6,500 संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हिरासत में’ पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सहाय ने कहा कि अहमदाबाद और सूरत में बड़े सर्च ऑपरेशन के बाद पूरे राज्य में इसी तरह के अभियान चलाए गए, जिसमें लगभग 6,500 संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को हिरासत में लिया गया और उनकी पहचान सत्यापित की गई. उन्होंने बताया, ‘अहमदाबाद और सूरत में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाए जाने के बाद गुजरात के सभी जिलों और पुलिस आयुक्तालयों को यह कार्य (बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान करने का) करने को कहा गया. मेरे पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हमने करीब 6,500 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की है.’ आईपीएस अधिकारी ने कहा, ‘अभी तक दस्तावेजी सबूतों के आधार पर करीब 450 बांग्लादेशी नागरिकों के यहां (गुजरात में) अवैध रूप से रहने की पुष्टि हो चुकी है. बाकी हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है. हमें लगता है कि हम बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशियों की पहचान स्थापित करने में सफल होंगे.’ उन्होंने कहा कि एक बार बांग्लादेशी नागरिक के रूप में उनकी पहचान स्थापित हो जाने पर, केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के समन्वय से उनके निर्वासन के लिए कदम उठाए जाएंगे. अहमदाबाद और सूरत में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाए जाने के बाद हिरासत में लिए गए 1,000 से ज़्यादा संदिग्ध बांग्लादेशियों से पूछताछ की जा रही है। सहाय ने बताया कि उनके निर्वासन के लिए कदम उठाने से पहले उनकी राष्ट्रीय पहचान स्थापित करने के लिए दस्तावेजी और … Read more

पहलगाम हमले में आतंकियों का पाक कनेक्शन, हाशिम मूसा को कुख्यात आतंकवादी, 12 लोगों के सिर में मारी गोली

श्रीनगर  पहलगाम आतंकी हमले के पीछे दो पाकिस्तानी आतंकियों का हाथ माना जा रहा है। सुरक्षा बल उन्हें पकड़ने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं। ये आतंकी करीब डेढ़ साल पहले पाकिस्तान से जम्मू और कश्मीर में घुसे थे। उन्होंने सांबा-कठुआ क्षेत्र से घुसपैठ की थी। तब से वे कई आतंकी हमलों में शामिल रहे हैं। सेना, राष्ट्रीय राइफल्स और पैरामिलिट्री फोर्स अनंतनाग के ऊपरी इलाकों में आतंकियों को ढूंढ रही हैं। पुलिस तकनीकी साक्ष्य और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी का इस्तेमाल कर रही है। पुलिस ने आतंकियों की पहचान अली भाई उर्फ तल्हा और हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान के रूप में की है। पुलिस ने एक स्थानीय लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य आदिल हुसैन ठोकर का स्केच भी जारी किया है। माना जा रहा है कि ठोकर भी पहलगाम हमले में शामिल था। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी के लिए 20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। आतंकियों की कैसे पहचान कर रही जांच एजेंसी? दरअसल हाशिम मूसा पर पिछले साल 20 अक्टूबर को सोनमर्ग में जेड-मोड़ टनल पर हमला करने का शक है। उस हमले में एक निर्माण इकाई में काम करने वाले सात लोग मारे गए थे। सूत्रों ने बताया कि चश्मदीदों, पर्यटकों और स्थानीय गाइडों की ओर से रिकॉर्ड किए गए वीडियो फुटेज और सुरक्षा बलों के पास घाटी में सक्रिय आतंकियों के बारे में मौजूद जानकारी को मिलाकर तीनों हमलावरों की पहचान की गई। एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि चश्मदीदों को सक्रिय आतंकियों की कई तस्वीरें दिखाई गईं। उन्होंने मूसा को एक तस्वीर से पहचाना। इसके बाद सभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर अन्य हमलावरों की पहचान की गई। हाशिम मूसा की कैसे हुई पहचान? सूत्रों ने बताया कि मूसा की पहचान जिस तस्वीर से हुई, वह मारे गए स्थानीय लश्कर ए तैयबा आतंकी जुनैद अहमद भट के फोन से मिली थी। भट को पिछले दिसंबर में दाचीगम के जंगलों में मार गिराया गया था। जेड-मोड़ टनल हमले को अंजाम देते हुए वह CCTV कैमरे में कैद हुआ था। पुलिस ने उसके शव से एक फोन बरामद किया था। इसमें मूसा सहित अन्य आतंकियों के साथ उसकी तस्वीरें थीं। सूत्रों ने बताया कि अली भाई भी उसी समूह का हिस्सा था। चश्मदीदों के बयानों के आधार पर पुलिस ने ठोकर को हमले में शामिल लश्कर का स्थानीय सदस्य बताया है। आतंकियों का पाक कनेक्शन अनंतनाग के बिजबेहरा का रहने वाला ठोकर 2018 में वाघा बॉर्डर पार करके स्टूडेंट वीजा पर पाकिस्तान गया था। वहां उसने लश्कर ए तैयबा के टेरर ट्रेनिंग कैंप में बकायदा ट्रेनिंग ली। सूत्रों ने बताया कि वह डेढ़ साल पहले दो पाकिस्तानी आतंकियों के साथ वापस आया था। पाकिस्तान जाने से पहले ठोकर कश्मीर में एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता था। इन घटनाओं में होने का शक सूत्रों ने बताया कि आतंकी तब से पूंछ-राजौरी, बारामूला और दक्षिण कश्मीर क्षेत्र में सक्रिय हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या वे 24 अक्टूबर 2024 को बोटापथरी हमले में शामिल थे। उस हमले में तीन आर्मी के जवान और दो पोर्टर मारे गए थे। हालांकि उस हमले की जिम्मेदारी पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट ने ली थी, जो जैश-ए-मोहम्मद का एक हिस्सा है। आतंकियों में मूसा सबसे बड़ा कातिल सूत्रों ने बताया कि मूसा को बहुत स्किल्ड माना जाता है और वह जंगल में रहने का माहिर है। सूत्रों ने यह भी बताया कि वह उन घुसपैठियों में से हो सकता है जिन्होंने पिछले तीन सालों में जम्मू में आतंक मचाया है। उन्होंने सटीक फायरिंग और चुपके से की गई गतिविधियों से 50 से ज्यादा आर्मी के जवानों को मारा है। जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या यही समूह अगस्त 2023 में दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में तीन आर्मी के जवानों की हत्या में शामिल था। 12 लोगों के सिर में मारी गोली सूत्रों ने बताया कि आतंकियों पर पिछले साल मई में जम्मू के पूंछ जिले में हुए हमले में भी शामिल होने का शक है। उस हमले में एयरफोर्स का एक जवान मारा गया था और चार अन्य घायल हो गए थे। उधर, पहलगाम आतंकी हमले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच में यह भी पता चला है कि फायरिंग के दौरान आतंकियों ने अपने साथियों से जल्दी करने को कहा ताकि वे जा सकें। शव की ऑटोप्सी रिपोर्ट से पता चला कि 12 पीड़ितों के सिर में गोली लगी थी।

पहलगाम हमले के बाद देशभर में अलर्ट, दिल्ली में हाईलेवल बैठक

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद देशभर में आक्रोश का महौल है। साथ ही सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी सिलसिले में मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने की। इसमें बीएसएफ, एनएसजी और असम राइफल्स के प्रमुखों के साथ-साथ एसएसबी और सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी। बैठक में शामिल हुए ये अधिकारी बैठक में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के प्रमुख ब्रिघु श्रीनिवासन, असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेरा और एसएसबी की अतिरिक्त महानिदेशक अनुपमा नीलेकर चंद्रा मौजूद थीं। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों का एक्शन वहीं सोमवार को जम्मू और कश्मीर पुलिस ने डोडा जिले में 13 स्थानों पर छापे मारे, ताकि आतंकवादी ठिकानों का पर्दाफाश किया जा सके और आतंक गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही, श्रीनगर पुलिस ने शहर के कई स्थानों पर ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के सहयोगियों के घरों पर व्यापक छापेमारी की। मामले में जारी पुलिस विज्ञप्ति के अनुसार श्रीनगर पुलिस ने 63 व्यक्तियों के घरों की तलाशी ली। इन कारणों से की जा रही छापेमारी मीडिया रिपोर्ट की माने तो यह छापेमारी कानूनी प्रक्रिया के तहत और जम्मू और कश्मीर पुलिस के अधिकारियों की निगरानी में की गई, ताकि हथियार, दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण आदि जमा किए जा सकें और किसी भी संभावित आतंकवादी गतिविधि को रोकने के लिए सबूत जुटाए जा सकें। पहलगाम आतंकी हमला, एज नजर पहलगाम में मंगलवार 22 अप्रैल को आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा कर 26 लोगों की नृशंस हत्या कर दी थी। सेना की वर्दी में आए दहशतगर्दों ने पहलगाम की बायसरन घाटी में पर्यटकों से पहले उनका धर्म पूछा, परिचय पत्र देखे और फिर हिंदू हो कहकर गोली मार दी। 26 मृतकों में ज्यादातर पर्यटक हैं, जबकि दो विदेशी और दो स्थानीय नागरिक शामिल हैं। टीआरएफ ने ली हमले की जिम्मेदारी तीन जुलाई से शुरू होने जा रही श्रीअमरनाथ यात्रा से पहले इस कायराना हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े गुट द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है। फरवरी, 2019 में पुलवामा में हुए हमले के बाद से जम्मू-कश्मीर में यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है। उस हमले में सीआरपीएफ के 47 जवान मारे गए थे। 

भारत ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे 26/11 के मुंबई हमलों से भी खराब करार दिया..

न्यूयॉर्क  भारत ने संयुक्त राष्ट्र में एक खास मौके पर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के मुद्दे को उठाया. घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे 26/11 के मुंबई हमलों से भी खराब करार दिया. संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद पीड़ित संघ नेटवर्क (वोटन) के शुभारंभ के अवसर पर भारत का पक्ष रखते देश की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने कहा, ‘पहलगाम आतंकवादी हमला 2008 में हुए 26/11 मुंबई हमलों के बाद सबसे क्रुर हमला है. उन्होंने कहा कि दशकों से सीमापार आतंकवाद का शिकार होने के कारण भारत इस बात को अच्छी तरह समझता है कि ऐसे कृत्यों का पीड़ितों, उनके परिवारों और समाज पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत, जिसका सीमापार आतंकवाद का सामना करने का इतिहास रहा है, यह समझता है कि ऐसे कृत्य समय के साथ समाज पर गहरा प्रभाव डालते हैं. राजदूत पटेल ने पहलगाम हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा दिखाए गए मजबूत और स्पष्ट समर्थन की भी सराहना की. उन्होंने कहा, ‘जम्मू- कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले के मद्देनजर दुनिया भर के नेताओं और सरकारों द्वारा दिए गए मजबूत, स्पष्ट समर्थन और एकजुटता की गहराई से सराहना करता है और उसे महत्व देता है. यह आतंकवाद के प्रति अंतरराष्ट्रीय समुदाय की शून्य सहिष्णुता का प्रमाण है.’ उन्होंने कहा कि सामूहिक निंदा और एकजुटता इस बढ़ती वैश्विक सहमति को प्रतिबिंबित करती है कि आतंकवाद का सामना दृढ़ संकल्प और एकता के साथ किया जाना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय दायित्वों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए पटेल ने आतंकवाद विरोधी प्रयासों में जवाबदेही के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा, ‘जैसा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अपने बयान में कहा है, आतंकवाद के निंदनीय कृत्यों के अपराधियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए.’ आतंकवाद के परिणामों की सार्वभौमिकता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘आतंकवादी कृत्य आपराधिक और अनुचित हैं, चाहे उनका उद्देश्य कुछ भी हो, वे कहीं भी, कभी भी और किसी के द्वारा भी किए गए हों.’ पटेल ने भारत के इस दृढ़ रुख को दोहराया कि किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद को उचित नहीं ठहराया जा सकता तथा न्याय एवं निवारण के लिए व्यापक जवाबदेही आवश्यक है. पीड़ित-केंद्रित पहलों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, पटेल ने आतंकवाद के पीड़ितों के लिए एसोसिएशन की स्थापना का स्वागत किया. कहा कि यह पीड़ितों की सुनवाई और समर्थन के लिए एक संरचित, सुरक्षित स्थान बनाएगा. वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीतियों के केंद्र में पीड़ितों को रखने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, ‘भारत का मानना ​​है कि आतंकवाद के प्रति वैश्विक प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए वोटान जैसी पहल आवश्यक है. साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ित हमारे सामूहिक प्रयासों के केंद्र में रहें.’

राइट टू एजुकेशन के तहत गुजरात के प्राइवेट स्कूलों में पहले चरण में 86 हजार बच्चों को मिला प्रवेश, प्रक्रिया हुई पूरी

अहमदाबाद गुजरात में शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए राइट टू एजुकेशन (RTE) अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश देने की प्रक्रिया के पहले चरण में 86,274 बच्चों को पहली कक्षा में दाखिला मिला है. यह दाखिले राज्य की कुल 9,741 प्राइवेट स्कूलों में आरक्षित 93,860 सीटों में से हुए हैं. RTE कानून के अनुसार, राज्य की मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को अपनी पहली कक्षा की कुल सीटों में से 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) और वंचित वर्गों (DG) के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं. गुजरात सरकार इस आरक्षण के तहत चयनित बच्चों की पढ़ाई का खर्च वहन करती है. 2.38 लाख से अधिक छात्रों ने किए थे आवेदन इस वर्ष राज्य भर से RTE के तहत 2,38,916 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए थे. दस्तावेजों की जांच के बाद 1,75,685 आवेदन स्वीकृत किए गए.  13,761 आवेदन गलत या अधूरे दस्तावेजों के कारण रद्द कर दिए गए हैं. वहीं, 49,470 आवेदन अभिभावकों ने स्वयं रद्द कर दिए. नियमों के मुताबिक, अभिभावकों को आवेदन के समय अपने घर से 6 किलोमीटर की परिधि में स्थित स्कूलों को ही प्राथमिकता देनी होती है. इसी आधार पर पहले राउंड में सीटों का आवंटन किया गया है. पहले चरण में खाली रहीं 7,586 सीटें पहले चरण में कुल 86,274 बच्चों को प्रवेश मिला, लेकिन 7,586 सीटें अभिभावकों द्वारा पसंद नहीं की जाने के कारण खाली रह गईं. इन खाली सीटों को अगले चरण में भरा जाएगा. प्रवेश की पुष्टि की अंतिम तिथि 8 मई पहले चरण में चयनित बच्चों के अभिभावकों को SMS के माध्यम से जानकारी भेजी गई है. उन्हें 8 मई, गुरुवार तक संबंधित स्कूल में सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर बच्चे का प्रवेश सुनिश्चित करना होगा. पहले राउंड की प्रक्रिया के बाद, बची हुई सीटों के लिए दूसरे चरण की प्रवेश प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी, जिसकी जानकारी RTE गुजरात की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से दी जाएगी. गुजरात के 9,741 निजी स्कूलों में विभिन्न भाषाओं में शिक्षा दी जाती है, जिनमें शामिल हैं:   – गुजराती माध्यम की स्कूलें: 5,725   – अंग्रेजी माध्यम: 3,553   – हिंदी माध्यम: 408   – मराठी: 35   – उड़िया: 13   – उर्दू: 7 इस वर्ष RTE के पहले चरण में जिन बच्चों को प्राथमिकता दी गई, वे निम्नलिखित श्रेणियों से थे:   – सरकारी आंगनवाड़ी में पढ़ने वाले बच्चे (32,267 विद्यार्थी)   – अनाथ एवं संरक्षण की जरूरत वाले बच्चे   – प्रवासी मज़दूरों के बच्चे   – शारीरिक रूप से दिव्यांग बच्चे   – शहीद जवानों के बच्चे   – एकमात्र बेटी वाली संतान   – BPL, SC/ST, SEBC, OBC और सामान्य वर्ग के पात्र बच्चे  

पहलगाम हमले के बाद 48 पर्यटक स्थल किए गए बंद, सुरक्षा एजेंसियों के अलर्ट के बाद सरकार का फैसला

श्रीनगर पहलगाम आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में कई पर्यटक स्थलों को मौजूदा वक्त के लिए बंद कर दिया गया है. जानकारी के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिश पर ये फैसला लिया है. आतंकवादी हमलों की संभावना के बारे में खुफिया चेतावनी के कारण कश्मीर में 87 में से 48 पर्यटक स्थलों को बंद किया है. सूत्रों के मुताबिक, पहलगाम हमले के बाद घाटी में कुछ स्लीपर सेल एक्टिव हो गए हैं, उन्हें गतिविधि शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं. पहलगाम हमले के बाद घाटी में सक्रिय आतंकवादियों के घरों को उड़ाने का बदला लेने के लिए टीआरटी द्वारा कुछ टार्गेटेड हत्याओं के साथ-साथ बड़े हमले को अंजाम देने की कोशिश के बारे में लगातार खुफिया चेतावनी भी मिल रही है. सुरक्षा बलों ने गुलमर्ग, सोनमर्ग और लेक इलाकों सहित कई संवेदनशील पर्यटन स्थलों पर पुलिस के विशेष ऑप्स समूह से एंटी फिदायीन दस्तों को तैनात किया है. घाटी में आतंकी घटना होने के बाद सामान्य तौर पर सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है. हमले से इन सेक्‍टर्स पर होगा गहरा असर! इस हमले का असर कश्‍मीर के सभी सेक्‍टर्स पर पड़ सकता है. खासकर पर्यटन पर ज्‍यादा प्रभाव दिखाई दे सकता है. वहां पर होटल, कंपनी खोलने और फल का व्‍यापार करने का इरादा रखने वाले निवेशकों का विश्‍वास हिल सकता है. इससे सालों की मेहनत के बाद वापस स्थिर हुई कश्‍मीर की आर्थिक प्रगति पटरी से उतर सकती है. इतना ही नहीं, कश्‍मीर के लोगों की इनकम पर भी गहरा असर दिखाई पड़ सकता है. अभी तक मजबूत रही है कश्‍मीर की इकोनॉमी जम्मू और कश्मीर की आर्थिक प्रगति मजबूत रही है. 2024-25 के लिए इसकी रीयल GSDP 7.06% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि नॉमिनल GSDP ₹2.65 लाख करोड़ होने का अनुमान है, जो निरंतर तरक्‍की का संकेत है. 2019 और 2025 के बीच, केंद्र शासित प्रदेश ने 4.89% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की, जबकि प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) वित्त वर्ष 25 में ₹1,54,703 तक पहुंचने की उम्मीद थी, जो साल-दर-साल 10.6% अधिक है. यह शानदार तरक्‍की ऐसे ही नहीं है, बल्कि 2018 में आतंकवादी घटनाओं की संख्या 228 से घटकर 2023 में सिर्फ 46 रह गई थी, जो 99% की गिरावट है. यह अभी तक शांति का ही फायदा था, जिसने निवेश, पर्यटन का ध्‍यान कश्‍मीर की ओर खींचा.  

भारतीय सेना की कार्रवाई से बचने पाकिस्तान ने आतंकवादियों को आर्मी के बंकर में शिफ्ट होने के लिए कहा

श्रीनगर पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकियों को लॉन्च पैड से निकालकर आर्मी शेल्टर्स में शिफ्ट किया जा रहा है. पाकिस्तान की सेना ने आतंकियों से कहा है कि वे या तो आर्मी शेल्टर या फिर बंकरों में चले जाएं. पीओके स्थित सभी लॉन्च पैड को खाली करने को कहा गया है. सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि, पीओके में स्थित लॉन्च पैड से गाइड के जरिए आतंकी जम्मू-कश्मीर की सीमा में दाखिल होते हैं. हाल फिलहाल में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने कुछ लॉन्च पैड की पहचान की थी, जिनमें से इन लॉन्च पैड से आतंकियों को शिफ्ट किया जा रहा है. सूत्रों ने बताया कि केल, सारडी, दुधनियाल, अथमुकम, जुरा, लीपा, पछिबन, फॉरवर्ड कहुटा, कोटली, खुइरत्ता, मंधार, निकैल, चमनकोट और जानकोटे में कुछ लॉन्च पैड हैं, जहां हमेश आतंकी मौजूद होते हैं. एलओसी के पास अपनी सुरक्षा बढ़ा रहे कश्मीरी सीमा पर तनाव के बीच कश्मीर में एलओसी के पास रहने वाले लोग भी अपनी सुरक्षा के इंतजाम करने लगे हैं. मसलन,कुछ वर्षों की सामान्य स्थिति और शांति के बाद, एलओसी के पास रहने वाले लोगों के लिए तनाव और अनिश्चितता फिर से वापस आ गई है. खासतौर से पीओके में भारतीय सैन्य कार्रवाई की चेतावनियों के बाद स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ी है. नियंत्रण रेखा, कुपवाड़ा के केरन, माछिल, तंगधार क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में डर का माहौल है, क्योंकि पहलगाम हमले के बाद गोलीबारी की घटनाएं फिर से आम हो गई हैं. अपनी सुरक्षा के लिए लोग अब बम शेल्टर खोल रहे हैं और उनकी सफाई कर रहे हैं, ताकि हालात बिगड़ने पर लोग अपनी जान बचा सकें. पाकिस्तान की तरफ से किया जा रहा सीजफायर का उल्लंघन पाकिस्तान पिछले कुछ हफ्तों से जम्मू-कश्मीर में सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है, और पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान की ओर से ये उल्लंघन आम हो गए हैं. अप्रैल 2025 तक दर्ज की गई घटनाओं को एलओसी के साथ जम्मू-कश्मीर में कई क्षेत्रों में पाकिस्तान द्वारा उकसावे के रूप में देखा जा रहा है. भारतीय सेना ने प्रत्येक घटना का तेजी से और प्रभावी ढंग से जवाब दिया है, नागरिकों पर इसका कम से कम प्रभाव हुआ है.  

एनसीईआरटी की कक्षा 7वीं की इतिहास की पाठ्यपुस्तक से मुगलों और दिल्ली सल्तनत से संबंधित सभी संदर्भ हटाया

नई दिल्ली नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 7 की सामाजिक विज्ञान की किताब में बड़ा बदलाव किया है. NCERT ने इस किताब में से मुगलों और दिल्ली सल्तनत से जुड़ा पूरा हिस्सा हटा दिया है. इसकी जगह पर ‘पवित्र स्थल’, ‘महाकुंभ’ और ‘सरकारी योजनाओं’ पर जोर दिया गया है. इस बदलाव को न्यू एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCFSE) 2023 के अनुरूप बताया गया है, जिसका मकसद शिक्षा में भारतीय ज्ञान, परंपराओं और स्थानीय सोच को जोड़ना है. क्लास 7 की सामाजिक विज्ञान की किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ (Exploring Society: India and Beyond) है.  रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें अब मौर्य, शुंग, सातवाहन जैसे प्राचीन भारतीय राजवंशों पर फोकस किया गया है. वहीं मुगलों, तुगलकों, खिलजियों, ममलूक और लोधी वंश जैसे मध्यकालीन शासकों का अब कोई जिक्र नहीं है. मुगलों को इतिहास से बाहर करने की कोशिश? प्रोफेसर अली नदीम रिजवी ने इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “देश का माहौल इस तरह से बदल रहा है कि मुगलों को इतिहास से गायब करने की कोशिश की जा रही है. इतिहास चाहे अच्छा हो या बुरा, वह इतिहास होता है और उसे बदला नहीं जा सकता. हां, अगर नए तथ्य सामने आते हैं, तो उन्हें शामिल किया जा सकता है, लेकिन इतिहास से किसी भी महत्वपूर्ण संदर्भ को हटा देना सही नहीं है.” प्रोफेसर रिजवी ने यह भी कहा कि इतिहास का या किसी भी विषय का सिलेबस बार-बार संशोधित किया जा सकता है, लेकिन इतिहास के कुछ पन्नों को गायब करना चिंताजनक है. उनका मानना है कि अगर नई जानकारी मौजूद है, तो उसे पाठ्यपुस्तकों में जोड़ा जा सकता है, लेकिन इतिहास के कुछ हिस्सों को हटाना या नजरअंदाज करना देश के लिए हानिकारक हो सकता है. क्या मुगलों का योगदान मिटाने की कोशिश हो रही है? प्रोफेसर रिजवी ने यह भी कहा कि यह बदलाव देखकर ऐसा लगता है कि मुगलों के योगदान को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को यह पता न चले कि मुगलों ने देश के इतिहास और संस्कृति में क्या योगदान दिया था. उन्होंने आशंका जताई कि यह बदलाव कहीं ना कहीं उस वातावरण का हिस्सा हो सकता है, जिसमें इतिहास को फिर से लिखा जा रहा है और कुछ हिस्सों को जानबूझकर हटा दिया जा रहा है. प्रोफेसर रिजवी ने इस बारे में विस्तार से बताया कि अगर पाठ्यपुस्तकों में भारतीय संस्कृति, सभ्यता या समाज के बारे में बात की जा रही है, तो महाकुंभ, मेक इन इंडिया, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे विषयों को वहां शामिल किया जा सकता है, क्योंकि ये हमारे समाज और संस्कृति का हिस्सा हैं. लेकिन जहां तक इतिहास की बात है, तो इतिहास को सिर्फ इतिहास तक सीमित रखा जाना चाहिए. इतिहास को बदलने की कोशिश करना या उसमें हेरफेर करना, उनके मुताबिक, निंदनीय है. नया पाठ्यक्रम: संस्कृति और इतिहास का सही संतुलन प्रोफेसर रिजवी ने इस संदर्भ में कहा कि यदि किताबें संस्कृति और सभ्यता के बारे में बात करती हैं, तो उन्हें महाकुंभ और अन्य सांस्कृतिक संदर्भों को शामिल करने की आज़ादी होनी चाहिए. लेकिन इतिहास को इतिहास ही रहने देना चाहिए, और उसे बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. उनका कहना था कि मुगलों को ‘इनविजिबल’ करने की जो कोशिश हो रही है, वह भारत के इतिहास को समझने में एक बड़ी बाधा साबित हो सकती है. कौन-से चैप्टर हटाए गए? दिल्ली की NCERT की नई पाठ्यपुस्तकों में कक्षा 7 की किताबों से मुगल और दिल्ली सल्तनत के चैप्टर्स हटा दिए गए हैं. इन बदलावों के तहत नए अध्यायों में भारतीय राजवंश, ‘पवित्र भूगोल’, महाकुंभ और सरकारी योजनाओं पर जोर दिया गया है. NCERT अधिकारियों के मुताबिक, ये पाठ्यपुस्तक का पहला हिस्सा है और दूसरा हिस्सा आने वाले महीनों में जारी किया जाएगा. हालांकि, उन्होंने यह पुष्टि नहीं की कि पहले हटाए गए हिस्से वापस जोड़े जाएंगे या नहीं. कोविड-19 महामारी के दौरान 2022-23 में NCERT ने पहले ही मुगल और दिल्ली सल्तनत पर आधारित हिस्सों को कम कर दिया था, लेकिन अब नई पाठ्यपुस्तक ने इन्हें पूरी तरह हटाने का फैसला किया गया है. ‘Exploring Society: India and Beyond’ नाम के सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में नए अध्याय शामिल हैं जो प्राचीन भारतीय राजवंशों जैसे मगध, मौर्य, शुंग और सातवाहन पर केंद्रित हैं. महाकुंभ का जिक्र नई पाठ्यपुस्तक में ‘पवित्र भूगोल’ नाम के अध्याय भी शामिल हैं जिसमें भारत के पवित्र स्थानों और तीर्थयात्राओं के बारे में विस्तार से बताया गया है. इसमें 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम यात्रा, और शक्ति पीठों का वर्णन किया गया है. महाकुंभ मेला, जो इस साल प्रयागराज में आयोजित हुआ, उसे भी पाठ्यपुस्तक में शामिल किया गया है, जिसमें बताया गया है कि इस में लगभग 660 मिलियन यानी 66 करोड़ लोग शामिल हुए थे. एक नया चैप्टर ‘हाउ दी लैंड बिकम्स सेक्रेड’ (How the Land Becomes Sacred) भी जोड़ा गया है. इसमें बताया गया है कि भारत और दूसरे देशों में कैसे जमीन को पवित्र माना जाता है. इस चैप्टर में इस्लाम, ईसाई, यहूदी, पारसी, हिंदू, बौद्ध और सिख धर्म जैसे धर्मों के लिए भारत और विदेश में पवित्र माने जाने वाले स्थानों और तीर्थस्थलों के बारे में भी बताया गया है. इसके अलावा, चार धाम यात्रा, 12 ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ और पवित्र नदियों के संगम की चर्चा है. साथ ही यह भी बताया गया है कि किस तरह बद्रीनाथ से कन्याकुमारी तक भारत को ‘तीर्थों की भूमि’ माना गया है.

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