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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सीमा पर तनाव लंबे समय में जारी है लेकिन वे इसे किसी न किसी तरह सुलझा लेंगे

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव हमेशा से रहा है तथा दोनों देश इसे आपस में ‘‘किसी न किसी तरह” सुलझा लेंगे। ट्रंप ने यह टिप्पणी पहलगाम आतंकवादी हमले के मद्देनजर भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बारे में सवाल किए जाने पर की। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। यह पूछे जाने पर क्या वह दोनों देशों के नेताओं से बात करेंगे, ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं भारत के बहुत करीब हूं और मैं पाकिस्तान के बहुत करीब हूं, जैसा कि आप जानते हैं।” उन्होंने रोम के रास्ते में ‘एयर फोर्स वन’ में पत्रकारों से कहा कि कश्मीर में लड़ाई लंबे समय से जारी है और पहलगाम में जो हुआ, वह बहुत बुरा है। ट्रंप ने कहा कि सीमा पर तनाव लंबे समय में जारी है लेकिन ‘‘वे इसे किसी न किसी तरह सुलझा लेंगे। मुझे यकीन है… मैं दोनों नेताओं को जानता हूं। पाकिस्तान और भारत के बीच बहुत तनाव है जो हमेशा से रहा है।” भारत ने बुधवार को पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदमों की घोषणा की, जिनमें पाकिस्तानी उच्चायोग में तैनात सैन्य प्रतिनिधि को अवांछित घोषित करना, 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित करना और आतंकवादी हमले के सीमा पार से जुड़े होने के मद्देनजर अटारी भूमि-पारगमन चौकी को तत्काल प्रभाव से बंद करना शामिल है। इसके जवाब में पाकिस्तान ने बृहस्पतिवार को सभी भारतीय विमानन कंपनियों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद करने का फैसला किया तथा भारत के साथ व्यापार को स्थगित कर दिया।    

अगर भारत ने सिंधु का पानी रोका तो पाकिस्‍तान करेगा परमाणु बम का इस्‍तेमाल!, जुलाई में तबाही के संकेत

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऐसा कदम उठाया है, जिसकी गूंज सिर्फ कश्मीर घाटी में नहीं बल्कि इस्लामाबाद की सत्ता तक सुनाई दी है। भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को लेकर बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए इसे “स्थगित” कर दिया है। यह वही समझौता है, जो 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था और दशकों तक इसे दोनों देशों ने निभाया, चाहे हालात युद्ध जैसे क्यों न रहे हों। भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को निलंबित करने के निर्णय ने पाकिस्तान को हिला कर रख दिया है। पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत ने सिंधु नदी के पानी को रोकने या मोड़ने की कोशिश की, तो पाकिस्तान अपनी पूरी सैन्य शक्ति का इस्तेमाल कर सकता है, जिसमें परमाणु हथियारों का उपयोग भी शामिल हो सकता है। इस कदम को पाकिस्तान ने ‘युद्ध की कार्रवाई’ करार दिया है और चेतावनी दी है कि अगर जल आपूर्ति पर कोई भी खतरा मंडराया, तो इस्लामाबाद तुरंत प्रतिक्रिया देगा। जुलाई से इस संकट का असर दिख सकता है, और यह कदम पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था और पानी की आपूर्ति के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। पाकिस्तान में खाद्य संकट के हालात भी पैदा हो सकते इस फैसले ने पाकिस्तान की चिंता को चरम पर पहुंचा दिया है। सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों से अधिकतर पानी मिलता है। यही पानी पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था की रीढ़ है। भारत के इस फैसले से उसे डर है कि अब उसकी खेतों को सींचने वाली धाराएं सूख सकती हैं। पाकिस्तान का एक बड़ा हिस्सा, खासकर पंजाब और सिंध प्रांत, इन नदियों पर पूरी तरह निर्भर है। यदि भारत जल प्रवाह को सीमित करता है या मोड़ता है, तो पाकिस्तान में खाद्य संकट के हालात भी पैदा हो सकते हैं। पाकिस्तान ने ‘युद्ध की कार्रवाई’ करार दिया भारत के इस फैसले को पाकिस्तान ने ‘युद्ध की कार्रवाई’ करार दिया है। पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने गुरुवार को बयान जारी कर साफ कर दिया कि वह भारत की किसी भी जल-सम्बंधी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा। इस बयान में ‘संपूर्ण युद्ध शक्ति’ और ‘हर विकल्प खुले हैं’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया, जिससे तनाव और अधिक बढ़ गया है। पाकिस्तानी मीडिया और रक्षा विशेषज्ञों ने यहां तक कह दिया कि अगर भारत ने डैम बनाना शुरू किया या जल को रोकने की कोई कोशिश की, तो पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई कर सकता है। कुछ विश्लेषकों ने तो यहां तक चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर परमाणु हथियारों के विकल्प भी खुले रहेंगे। हालात और बदतर हो सकते भारत के इस कदम से पाकिस्तान में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की आशंका भी जताई जा रही है। भारत हर साल मानसून से पहले पाकिस्तान को बाढ़ संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराता रहा है। अगर भारत यह डेटा शेयर करना बंद करता है, तो पाकिस्तान बिना किसी पूर्व चेतावनी के प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ सकता है। तीन साल पहले आई भीषण बाढ़ में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले ही बुरी तरह लड़खड़ा चुकी है। अब यदि भविष्य में बाढ़ की जानकारी समय पर नहीं मिली, तो हालात और बदतर हो सकते हैं। भारत के इस निर्णय को लेकर राजनीतिक गलियारों में यह बात सामने आ रही है कि यह फैसला सिर्फ एक जल समझौते को लेकर नहीं, बल्कि आतंक के खिलाफ भारत की नई नीति का प्रतीक है। पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवादी संगठनों को शरण देने के आरोपों से घिरा रहा है और बार-बार चेतावनी के बावजूद आतंकी हमलों में शामिल रहा है। अब भारत ने सीधे उसकी जीवनरेखा – पानी – को निशाना बना दिया है। भारत एकतरफा इस संधि को रद्द नहीं कर सकता पाकिस्तान के पूर्व सिंधु जल आयुक्त जमात अली शाह ने एक पाकिस्तानी अखबार को दिए बयान में कहा है कि भारत एकतरफा इस संधि को रद्द नहीं कर सकता, क्योंकि यह एक स्थायी समझौता है और इसके लिए दोनों देशों की सहमति आवश्यक है। हालांकि भारतीय अधिकारियों का तर्क है कि भारत ने इसे पूरी तरह रद्द नहीं किया, बल्कि “स्थगित” किया है — यानी जब तक पाकिस्तान अपनी आतंक-समर्थन की नीति नहीं बदलता, तब तक सहयोग की कोई गुंजाइश नहीं है। भारत ने संकेत दिए हैं कि यह स्थगन पश्चिमी नदियों पर चल रही भारत की जल परियोजनाओं को तेज़ी देने के लिए भी रास्ता खोलता है। पाकल दुल, रतले, किरू और सावलकोट जैसे डैम और पनबिजली प्रोजेक्ट्स अब प्राथमिकता के साथ पूरे किए जा सकते हैं, जिससे पाकिस्तान को भविष्य में पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।

भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध किसी भी समय शुरू हो सकता है, रूस का आपात अलर्ट, हालात बेहद नाजुक

नई दिल्ली कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए भीषण आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है। इस स्थिति को देखते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूस के नागरिकों और अधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पुतिन ने अपने नागरिकों से एहतियात बरतने और भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित संघर्ष की स्थिति में सतर्क रहने को कहा है। रूस के विदेश मंत्रालय ने भी मास्को से एक आपात संदेश जारी करते हुए कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध “किसी भी समय” शुरू हो सकता है। मास्को ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है लेकिन साथ ही यह भी चेताया है कि हालात बेहद नाजुक हैं और किसी भी छोटे घटनाक्रम से बड़ा टकराव छिड़ सकता है। रूसी विदेश मंत्रालय ने 25 अप्रैल को अपने नागरिकों को पाकिस्तान की यात्रा से दूर रहने की सख्त सलाह दी है। आमतौर पर रूस इस तरह की चेतावनियां बहुत कम जारी करता है, जिससे इस कदम को सामान्य नहीं माना जा रहा। विश्लेषकों का मानना है कि रूस की खुफिया एजेंसियों को दक्षिण एशिया में किसी बड़े टकराव की आशंका है। रूस के बयान में भारत-पाकिस्तान के बीच “तेज होते तनाव” और “युद्ध जैसी भाषा” का उल्लेख किया गया है। पाकिस्तान स्थित रूसी दूतावास ने भी अपने नागरिकों को स्थिति के सामान्य होने तक पाकिस्तान यात्रा न करने की सलाह दी है। च रूस ने अपने राजनयिकों को भी सतर्क रहने का आदेश दिया है और कहा है कि दक्षिण एशिया में तैनात सभी रूसी मिशन स्थिति पर नजर बनाए रखें। रूसी राष्ट्रपति पुतिन का यह कदम वैश्विक मंच पर भारत के प्रति समर्थन का संकेत माना जा रहा है, जबकि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अलग-थलग पड़ता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति नहीं संभाली गई, तो भारत और पाकिस्तान के बीच सीमित युद्ध या बड़ा सैन्य संघर्ष हो सकता है, जिसके वैश्विक प्रभाव भी होंगे। बता दें कि कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले में 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक की मौत हो गई थी। इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कूटनीतिक कदम उठाए, जिसमें अटारी सीमा पर इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट बंद करना, सार्क वीज़ा छूट योजना (SVES) को पाकिस्तानी नागरिकों के लिए निलंबित करना, और सिंधु जल संधि को रोकने की प्रक्रिया शुरू करना शामिल है।  

ईरान के बंदरगाह पर भीषण धमाका, 400 से अधिक लोग जख्मी

तेहरान ईरान के बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में शनिवार को एक भीषण धमाका और आग लगने की घटना हुई है. इस ब्लास्ट में घायलों की संख्या बढ़कर 406 तक पहुंच गई है. ये जानकारी ईरान की राष्ट्रीय आपातकालीन सेवाओं के प्रवक्ता बाबक यक्तापेरस्त ने दी. हालांकि धमाके के करीब तीन घंटे बाद तक किसी भी मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. वहीं, प्रांतीय आपदा प्रबंधन अधिकारी मेहरदाद हसनजादेह ने बताया कि धमाका काफी भयावह था. विस्फोट में घायल हुए लोगों की संख्या बढ़कर 406 हो गई है. घायलों में से कई लोगों को होर्मोज़गान प्रांत के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. हसनजादेह के मुताबिक ये धमाका राजई बंदरगाह पर कंटेनरों की वजह से हुआ है. राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि अन्य टीमें क्षेत्र को खाली कराने में जुटी हैं. समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक सोशल मीडिया पर घटना के वीडियो वायरल हो रहे हैं. वीडियो में काले धुएं का विशाल गुबार आसमान में उठता हुआ देखा जा सकता है. राजई बंदरगाह मुख्य रूप से कंटेनर ट्रैफिक कंट्रोल करता है. वहां तेल टैंक और पेट्रोकेमिकल इकाइयां भी मौजूद हैं, जिससे आग की भयावहता का खतरा बना हुआ है. निर्यात और ट्रांजिट शिपमेंट पर लगाई रोक ईरानी मीडिया के मुताबिक धमाके के बाद ईरान के सीमा शुल्क प्राधिकरण ने सभी कस्टम कार्यालयों को आदेश दिया है कि वे बंदरगाह के लिए निर्यात और ट्रांजिट शिपमेंट भेजने पर तत्काल रोक लगा दें. ये रोक अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी. हालांकि, जिन ट्रकों ने पहले ही सीमा शुल्क की प्रक्रिया पूरी कर ली थी, उन्हें बंदरगाह क्षेत्र से बाहर निकलने की अनुमति दी गई है. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया इस बीच ईरान की राष्ट्रीय आपातकालीन सेवा के प्रमुख यकतापरस्त ने बताया कि बंदरगाह धमाके में घायल हुए लोगों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. शनिवार को हुए इस भीषण धमाके ने न सिर्फ बंदरगाह की गतिविधियों को ठप कर दिया है, बल्कि क्षेत्रीय व्यापार और सप्लाई चेन पर भी बड़ा असर डाला है. कंटेनरों में हुआ धमाका मेहरदाद हसनजादेह ने कहा कि विस्फोट शहर के राजाई बंदरगाह पर कंटेनरों में हुआ। सोशल मीडिया में आए वीडियो में काले धुएं का एक बड़ा गुबार दिखाई दिया। राजाई बंदरगाह मुख्य रूप से कंटेनर यातायात को संभालता है और इसमें तेल टैंक और अन्य पेट्रोकेमिकल सुविधाएं भी हैं। 2020 में राजाई बंदरगाह को भी साइबर हमले का निशाना बनाया गया था ईरानी अर्थव्यवस्था में है बंदरगाह का बड़ा रोल बता दें कि, ईरान का सबसे व्यस्त और बड़ा बंदरगाह, बंदर अब्बास फारस की खाड़ी के उत्तरी तट पर स्थित है। यह बंदरगाह ईरान का मुख्य व्यापारिक केंद्र है और तेल निर्यात के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां से दुनिया भर में विभिन्न वस्तुओं का निर्यात और आयात किया जाता है। यह ना सिर्फ ईरानी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति में भी इसकी भूमिका बड़ी है। यह भी जानें इस बीच यहां यह भी बता दें कि, ईरान के बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में विस्फोट ऐसे समय पर हुआ है जब ईरान ओमान में अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता का तीसरा दौर आयोजित कर रहा है। इस वार्ता का नेतृत्व अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं। अफवाह फैलाने वालों पर एक्शन की चेतावनी ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने उन खबरों को खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि धमाका बंदर अब्बास में IRGC के नौसैनिक अड्डे के पास हुआ. न्यूज एजेंसी ने कहा कि इस तरह की अफवाहें जनता की भावना भड़काने के इरादे से फैलाई जा रही हैं और अधिकारियों ने अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दी है. घटना स्थल पर महसूस की गई सल्फर जैसी गंध बताया जा रहा है कि पोर्ट पर धमाके से पहले कंटेनर टर्मिनल क्षेत्र में एक छोटी सी आग लगी थी. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग तेजी से फैली और ज्वलनशील पदार्थों की वजह से भीषण विस्फोट हुआ. स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार आग किस वजह से लगी, इसका अभी तक स्पष्ट पता नहीं चला है, लेकिन शुरुआती जानकारी ज्वलनशील वस्तुओं के पास होने की ओर इशारा करती है. घटना स्थल पर सल्फर जैसी तेज गंध महसूस की गई.  

उनका देश इस हमले की किसी भी निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच में पूरा सहयोग देगा: पाक रक्षा मंत्री आसिफ

इस्लामाबाद जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान ने खुद को पाक साफ बताते हुए अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा है कि उनका देश इस हमले की किसी भी निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच में पूरा सहयोग देगा। आसिफ ने कहा , “हम किसी भी अंतर्राष्ट्रीय जांच के लिए तैयार हैं। अगर कोई भी निष्पक्ष जांच एजेंसी चाहे तो पाकिस्तान का पूरा सहयोग मिलेगा।” उन्होंने भारत के उन आरोपों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया है कि हमले में पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों का हाथ है।   आसिफ ने भारत पर आरोप लगाया कि वह इस हमले के बहाने सिंधु जल संधि को निलंबित कर रहा है और इस पूरे घटनाक्रम का घरेलू राजनीति में लाभ उठाना चाहता है। “भारत ने बिना किसी जांच और सबूत के पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है,” उन्होंने कहा।पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंता जताई और कहा, “हम किसी भी तरह का युद्ध नहीं चाहते। अगर हालात बिगड़े तो यह पूरे क्षेत्र के लिए तबाही ला सकता है।”   भारत ने इस हमले के पीछे ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) का हाथ बताया है, जिसे वह पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों का नया चेहरा मानता है। इस पर सफाई देते हुए आसिफ ने कहा, “लश्कर-ए-तैयबा अब निष्क्रिय है। पाकिस्तान में उनका कोई नेटवर्क नहीं है। जो बचे हैं वे या तो नजरबंद हैं या हिरासत में। वे अब किसी भी तरह की आतंकी गतिविधि में शामिल नहीं हैं।” हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों में फिर से तेजी देखी गई है और इसके नेता पाकिस्तान में खुलेआम रह रहे हैं।

26/11 से मेरा कोई लेना-देना नहीं है, अपने बचपन के दोस्त डेविड कोलोमन हेडली को जिम्मेदार ठहराया: राणा

मुंबई मुंबई में 26/11 के भयानक आतंकी हमलों का नाम लेते ही तहव्वुर हुसैन राणा का जिक्र सामने आता है। अब इस मामले में बड़ी खबर सामने आई है। मुंबई क्राइम ब्रांच की पूछताछ में तहव्वुर राणा ने खुद को हमलों से पूरी तरह अलग बताया है। राणा ने कहा कि उसका 26/11 से कोई लेना-देना नहीं है और इसके लिए उसने अपने बचपन के दोस्त डेविड कोलोमन हेडली को जिम्मेदार ठहराया है। सूत्रों के अनुसार, राणा ने पूछताछ के दौरान दावा किया कि हमले की साजिश में उसकी कोई भूमिका नहीं रही। उसका यह बयान जांच एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती बन गया है। केरल में भी गया था तहव्वुर राणा पूछताछ के दौरान तहव्वुर राणा ने यह भी कबूल किया कि वह दिल्ली और मुंबई के अलावा केरल भी गया था। जब अधिकारियों ने वजह पूछी तो राणा ने कहा कि वह अपने जानने वालों से मिलने के लिए केरल गया था। उसने उन जानकारों का नाम और पता भी एजेंसियों को उपलब्ध कराया है। सूत्रों का कहना है कि राणा की दी गई जानकारी की पुष्टि करने के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच की एक टीम जल्द ही केरल रवाना हो सकती है। पूछताछ में बेहद शांत नजर आया राणा एक अधिकारी ने बताया कि तहव्वुर राणा बेहद ट्रेंड अपराधी है। उसकी उम्र भले ही ज्यादा हो गई हो लेकिन वह पूछे गए सवालों का बिना घबराए जवाब देता है और कई बार गुमराह करने की भी कोशिश करता है। इतना ही नहीं, पूछताछ के दौरान जब नमाज का समय होता है तो वह इंटेरोगेटर से कहता है कि उसे 15 मिनट के लिए नमाज अदा करनी है और इस दौरान उसे डिस्टर्ब न किया जाए। राणा का यह रवैया एजेंसियों को उसकी मानसिक मजबूती और प्रशिक्षण का अहसास कराता है। अमेरिका से कैसे भारत लाया गया तहव्वुर राणा 26/11 हमलों के एक प्रमुख आरोपी तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत लाना आसान नहीं था। राणा ने प्रत्यर्पण से बचने के लिए अमेरिका में कई कानूनी प्रयास किए। यहां तक कि उसने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में इमरजेंसी अर्जी भी लगाई थी। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद जब उसकी सभी याचिकाएं खारिज हो गईं तो उसका भारत प्रत्यर्पण संभव हो सका। एनआईए और एनएसजी की टीमों ने मिलकर लॉस एंजेल्स से उसे एक विशेष विमान के जरिए भारत लाया। इस पूरी प्रक्रिया में भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने अमेरिकी एजेंसियों के साथ मिलकर अहम भूमिका निभाई। एनआईए ने राणा के प्रत्यर्पण के लिए कई वर्षों तक अमेरिकी एफबीआई और न्याय विभाग के साथ समन्वय किया था।   26/11 हमले की कहानी जिसने हिला दी थी दुनिया याद दिला दें कि 26 नवंबर 2008 को दस आतंकवादियों ने मुंबई के ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस और नरीमन हाउस जैसे स्थानों पर हमला किया था। इस आतंकी हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। पूरी दुनिया इस हमले से हिल गई थी। भारत की जांच एजेंसियों का आरोप है कि तहव्वुर राणा ने पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर इस हमले की योजना बनाने में मदद की थी।

भारतीय प्रदर्शनकारियों के सामने पाकिस्तानी डिप्लोमैट की घटिया हरकत, अभिनंदन की फोटो और गला रेतने का इशारा…

लंदन पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के खिलाफ लंदन स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर शुक्रवार को भारतीय मूल के सैकड़ों लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने प्रदर्शनकारियों की ओर गला काटने का इशारा करके आग में घी डालने का काम किया. पाकिस्तानी अधिकारी एक हाथ में भारतीय वायुसेना के पायलट अभिनंदन वर्धमान का पोस्टर लिए हुए था और दूसरे हाथ चाय की कप लेकर ​प्रदर्शन कर रहे भारतीयों का मजाक उड़ाने की कोशिश की. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इंटरनेट यूजर्स गला काटने का इशारा करने के लिए पाकिस्तानी अधिकारी की जमकर आलोचना कर रहे हैं. वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कई सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों एवं राजनयिकों में शिष्टाचार की कमी स्पष्ट झलक रही है. उनका कहना है कि ऐसे पद पर बैठे अधिकारियों से सामान्य शिष्टाचार की उम्मीद की जाती है, लेकिन पाकिस्तान के राजनयिक और सैन्य अधिकारी अनपढ़ मालूम पड़ते हैं. बता दें कि 14 फरवरी, 2019 को हुए पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक की थी. भारतीय वायुसेना के युद्धक विमानों ने आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग कैम्प पर बमबारी करके उसे नेस्तनाबूद कर दिया था. इसके अगले दिन पाकिस्तानी एयर फोर्स की ओर से सीमा पर कुछ हिमाकत की गई, जिसका भारतीय वायु सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया. दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच डॉग फाइट छिड़ गई. भारतीय वायु सेना के जांबाज पायलट अभिनंदन वर्धमान ने अपने मिग-21 बाइसन फाइटर जेट से पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमान को चुनौती दी और उसे मार गिराया. इस डॉग फाइट के दौरान अभिनंदन एलओसी क्रॉस करके पाकिस्तानी क्षेत्र में चले गए और उनका विमान क्रैश हो गया. पाकिस्तानी सेना ने अभिनंदन को पकड़ लिया था. लेकिन भारत के डर से दो दिन बाद उन्हें वाघा बॉर्डर के जरिए रिहा कर दिया. पहलगाम आतंकी हमले के बमुश्किल एक हफ्ते बाद पाकिस्तानी अधिकारी के गला काटने के इशारे का वीडियो वायरल हुआ. कई सोशल मीडिया यूजर्स ने वीडियो में दिख रहे सैन्य अधिकारी की पहचान पाकिस्तान उच्चायोग में तैनात तैमूर राहत के रूप में की. भारतीय और यहूदी समुदाय के 500 से अधिक सदस्य लंदन स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर एकत्रित हुए और पहलगाम नरसंहार के खिलाफ आवाज उठाई. पाकिस्तानी हाई कमीशन के सामने मौजूद एक भारतीय-यहूदी प्रदर्शनकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ‘हम भारत का समर्थन करते हैं, क्योंकि हम एक ही दुश्मन का सामना कर रहे हैं: इस्लामी कट्टरपंथ. पहलगाम में जो हुआ, उसने हमें इजरायल पर हमास के हमले की याद दिला दी.’ पहलगाम हमले की दुनिया भर में व्यापक निंदा हुई. जीवित बचे लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आतंकवादियों ने हिंदू पुरुष पर्यटकों को निशाना बनाया और उन्हें गोली मार दी. गला काटने का इशारा करने वाले अधिकारी की निंदा करते हुए दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि वह पहले अपनी गर्दन बचाए. उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ‘पाकिस्तान और क्या कर सकता है? उसके सिर पर प्रलय मंडरा रहा है. फिर भी उसके अधिकारी निर्दोष लोगों का सिर काटने की धमकी दे रहे हैं. जो लोग दूतावास के बाहर धमकी दे रहे थे, उनकी एक-एक करके पहचान की जाएगी. इंग्लैंड में भी उनसे जवाब मांगा जाएगा.’  

पाकिस्तान को दो हिस्सों में बांट दो , PoK को भारत में मिला दो, हम आपके साथ हैं: CM रेड्डी

हैदराबाद पहलगाम आतंकी हमले के खिलाफ हैदराबाद में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के समर्थन में  कैंडल मार्च निकाला गया. इस प्रोटेस्ट में AIMIM सांसद असदुद्दीन औवेसी, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद सहित कई अन्य लीडर्स शामिल हुए है. आतंकी हमले के बाद की स्थिति से निपटने में केंद्र को समर्थन देने की बात करते हुए मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पाकिस्तान और आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देने की गुजारिश की. उन्होंने कहा, “कड़ा एक्शन लिया जाना चाहिए, भले ही इसका मतलब पीओके को भारत में मिलाना हो.” आतंकी हमले के विरोध में कैंडल लाइट रैली का नेतृत्व कर रहे रेवंत रेड्डी ने कहा, “पहलगाम जैसी घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार के द्वारा निर्णायक कार्रवाई किए जाने की जरूरत है.” उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1971 में बांग्लादेश के निर्माण को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तुलना देवी दुर्गा से की थी. ‘समझौते का वक्त नहीं, मुंहतोड़ जवाब…’ सीएम रेड्डी ने कहा, “आप (पीएम मोदी) दुर्गा माता को याद रखें, कार्रवाई करें, चाहे वह पाकिस्तान पर हमला हो या कोई और उपाय. आज पाकिस्तान के खिलाफ कदम उठाए जाने चाहिए. यह समझौता करने का वक्त नहीं है, मुंहतोड़ जवाब दिया जाना चाहिए. आगे बढ़िए, हम आपके साथ खड़े होंगे. 140 करोड़ भारतीय आपके साथ हैं.” रेड्डी ने कहा, “पाकिस्तान को दो हिस्सों में बांट दीजिए, पीओके को भारत में मिला लीजिए. हम आपके साथ खड़े रहेंगे. आप दुर्गा माता के भक्त हो. इंदिरा जी को याद करो.” इंदिरा गांधी की प्रतिमा के सामने बोलते हुए रेड्डी ने यह भी कहा कि तेलंगाना सरकार ने पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की है. ओवैसी सहित कई नेता कैंडल मार्च में शामलि इस मौके पर AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, सीनियर कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, तेलंगाना के मंत्री, पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता मोहम्मद अजहरुद्दीन और अन्य नेता मौजूद थे. तेलंगाना में कांग्रेस सरकार द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘भारत शिखर सम्मेलन’ में हिस्सा लेने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भी मोमबत्ती रैली में भाग लिया. इस बीच, पहलगाम आतंकी हमले के खिलाफ राज्य में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए. असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार की नमाज से पहले एक मस्जिद में काली पट्टियां बांटीं और लोगों से पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में इसे पहनने की गुजारिश की. पार्टी सूत्रों ने बताया कि ओवैसी ने भी काली पट्टियां पहनी थीं और शास्त्रीपुरम की एक मस्जिद में उन्हें बांटा. मुस्लिम युवाओं ने शुक्रवार की नमाज के बाद आतंकी हमले के खिलाफ ऐतिहासिक चारमीनार पर विरोध प्रदर्शन किया. यहां बेगम बाजार के मुसलमानों ने अपनी दुकानें बंद की और एक शांतिपूर्ण रैली में शामिल हुए, जबकि मलकाजगिरी में भी विरोध प्रदर्शन किया गया.  

बिलावल भुट्टो की भारत को धमकी बोला- कहा कि दरिया में या तो हमारा पानी बहेगा या फिर उनका खून बहेगा

कराची जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों की तरफ से किए गए क्रूर हमले में 27 निर्दोष नागरिकों की जान जाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा हो गया है. पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने आक्रामक और भड़काऊ बयान देकर स्थिति को और गंभीर बना दिया. एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए बिलावल भुट्टो ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत को सीधे तौर पर धमकी दी. उन्होंने कहा, “मैं सिंधु नदी के किनारे खड़ा होकर भारत को बताना चाहूंगा कि सिंधु हमारी है और यह हमारी ही रहेगी. या तो हमारा पानी इस नदी से बहेगा या फिर उनका खून इसमें बहेगा.” इस बयान को भारत के खिलाफ खुले तौर पर हिंसा उकसाने वाला माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पहलगाम हमले ने पूरे देश को गम और गुस्से में डुबो दिया है. ‘हमारी फौज हर हमले का जवाब देने को तैयार’ बिलावल ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि उनकी (भारत) आबादी ज़्यादा है, वो ये नहीं तय कर सकते कि पानी किसका है. पाकिस्तान की अवाम बहादुर और ग़ैरतमंद है, हम डटकर मुक़ाबला करेंगे, सरहदों पर हमारी फौज हर हमले का जवाब देने को तैयार है. दरिया पर डाका मंज़ूर नहीं: बिलावल बयान में सिंधु नदी को पूरे पाकिस्तान की सांझी विरासत बताते हुए बिलावल ने देश की जनता से एकजुटता की अपील की और कहा कि हमारा हर पाकिस्तानी सिंधु का पैग़ाम लेकर दुनिया को बताएगा कि दरिया पर डाका मंज़ूर नहीं. दुश्मन की नजरें हमारे पानी पर हैं, पूरे मुल्क को मिलकर इसका जवाब देना होगा. ‘हर मंसूबे का करारा जवाब देंगे’ बिलावल ने चारों प्रांतों की एकता की बात करते हुए कहा कि ये चार सूबे चार भाइयों की तरह हैं. उन्होंने गीदड़भभकी देते हुए कहा कि ये चारों मिलकर भारत के हर मंसूबे का करारा जवाब देंगे. ये बयान ऐसे समय आया है जब भारत ने पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने का कदम उठाया है, जिसे पाकिस्तान ने ‘युद्ध के बराबर’ करार दिया है. भारत ने सिंधु जल समझौता किया सस्पेंड भारत ने 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से बनी सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) को लेकर पुनर्विचार की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर एक ऐतिहासिक समझौता रही है, जिसने दो युद्धों के दौरान भी ज्यो के त्यो बनाए रखा. लेकिन लगातार आतंकी गतिविधियों और पाकिस्तान की असहयोगी भूमिका के कारण अब भारत ने इसे स्थगित करने का फैसला लिया है. बिलावल भुट्टो ने भारत को बताया हमलावर पाकिस्तानी नेता भुट्टो ने दावा किया कि भारत ने “सिंधु पर हमला” किया है.उन्होंने कहा कि भारत की आबादी हमसे ज़्यादा हो सकती है, लेकिन पाकिस्तान के लोग बहादुर हैं. हम सीमाओं पर भी और पाकिस्तान के अंदर भी लड़ेंगे. हमारी आवाज़ भारत को करारा जवाब देगी. इस बयान से यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान की सियासी नेतृत्व आतंकवाद की निंदा करने के बजाय आक्रामक राष्ट्रवाद को हवा दे रहा है, जिससे कूटनीतिक वार्ता की संभावनाएं और कम होती दिख रही हैं. भारत की कूटनीतिक सख्ती पहलगाम में हुए हमले के बाद भारत ने कई ठोस कदम उठाए हैं. इनमें न केवल पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना और वापसी के निर्देश शामिल हैं, बल्कि सिंधु जल संधि को “रोकने की दिशा में कदम” भी इसमें जोड़े गए हैं. भारत इस संधि की समीक्षा विश्व बैंक के साथ नए सिरे से कर रहा है.

घाटी में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई आतंकियों के घर किये ध्वस्त, दो सहयोगी गिरफ्तार

पुलवामा जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सुरक्षा बलों का ऑपरेशन जारी है. पुलवामा में सक्रिय आतंकवादी के घरों को भारतीय सुरक्षा बलों ने ध्वस्त कर दिया है. नई कार्रवाई में घाटी के अंदर सक्रिय आतंकियों के दो और घरों को ध्वस्त कर दिया गया है. जून 2023 से लश्कर के सक्रिय कैडर एहसान अहमद शेख के दो मंजिला घर को सुरक्षा बलों ने आईईडी का उपयोग करके उड़ा दिया है. वह पुलवामा के मुर्रान का रहने वाला है. ऐसी ही एक अन्य कार्रवाई में 2 साल पहले लश्कर में शामिल हुए शाहिद अहमद के घर को शोपियां के चोटीपोरा इलाके में विस्फोट कर उड़ा दिया गया है. पहलगाम हमले के बाद पिछले 48 घंटे में कुल 6 आतंकियों के घरों को ध्वस्त किया जा चुका है. आतंकियों के 5 घर ध्वस्त इसके अलावा, कल रात कुलगाम के क्विमोह में ज़ाकिर गनी के तीसरे घर को सुरक्षा बलों ने ध्वस्त कर दिया, वह 2023 में लश्कर में शामिल हो गया था. पहलगाम आतंकी हमले के बाद से सक्रिय लश्कर कैडर के आतंकियों के कुल 5 घरों को उड़ा दिया गया है. जिसकाभारतीय सेना मुंहतोड़ जवाब दिया। इसी बीच खबर मिली है कि कुलगाम जिले के कैमोह इलाके में सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक, कुलगाम के थोकरपोरा में पुलिस ने दो आतंकी सहयोगियों को गिरफ्तार किया। जवनोपन का कहना है कि, ये लोग हमले में आतंकवादियों के मददगार है। पहलगाम हमले के बाद सेना और पुलिस आतंकियों की कमर तोड़ने में लगी है। कश्मीर में सक्रिय आतंकियों के घरों को ध्वस्त किया जा रहा है। लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी एहसान अहमद शेख का दो मंजिला घर पुलवामा के मुर्रान में IED से उड़ा दिया गया। वह जून 2023 से सक्रिय था। वहीं, शाहिद अहमद का घर शोपियां के चोटीपोरा में विस्फोट से ढहा दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक पांच आतंकियों के घर तोड़े जा चुके हैं। LoC पर तनाव और भारत की जवाबी कार्रवाई 25-26 अप्रैल 2025 की रात को पाकिस्तानी सेना ने LoC पर बिना उकसावे के कई जगहों पर फायरिंग की। यह सीजफायर उल्लंघन 2021 के बाद से कम देखा गया था, लेकिन पहलगाम हमले के बाद तनाव बढ़ गया है। भारतीय सेना ने बयान जारी कर कहा, “हमारे सैनिकों ने छोटे हथियारों से उचित जवाब दिया। भारतीय पक्ष से कोई हताहत नहीं हुआ।” सेना ने संयम बरतते हुए जवाबी कार्रवाई की। गौरतलब है कि, 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसारन मीडो में हुए हमले में 26 लोग मारे गए। शुरुआती जांच में पता चला कि 5-7 आतंकी शामिल थे, जिन्हें पाकिस्तान में ट्रेनिंग दी गई थी। दो स्थानीय आतंकियों ने उनकी मदद की। हमले की जिम्मेदारी रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली, जो लश्कर-ए-तैयबा का हिस्सा है। जांच में पाकिस्तान से लिंक की पुष्टि हुई है।     आदिल गोजरी (बिजबेहरा)     आसिफ शेख (त्राल)     अहसान शेख (पुलवामा)       शाहिद कुट्टे (शोपियां)     जाकिर गनी (कुलगाम)     हारिस अहमद (पुलवामा) शुक्रवार की रात सुरक्षा बलों ने कुलगाम के क्विमोह में जाकिर गनी के घर को उड़ा दिया, वह 2023 में लश्कर में शामिल हुआ था. इसके साथ ही सुरक्षा बलों ने बिजबेहरा में सुरक्षा बलों ने आदिल थोकर के घर को उड़ा दिया. वहीं, त्राल में कल सुरक्षा बलों ने आसिफ शेख के घर को उड़ा दिया. पुलवामा में आतंकी का घर ध्वस्त करने से पहले पहलगाम हमले में शामिल स्थानीय आतंकी आदिल हुसैन थोकर के अनंतनाग जिले के बिजबेहरा के गोरी इलाके में स्थित घर को सुरक्षा बलों ने बम से उड़ा दिया था. आदिल थोकर उर्फ ​​आदिल गुरी के रूप में पहचाने जाने वाले इस आतंकी पर पहलगाम की ​बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुए हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में पाकिस्तानी आतंकवादियों की मदद करने का आरोप है. वहीं, इस हमले में शामिल दूसरे स्थानीय आतंकी आसिफ शेख के त्राल स्थित घर को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बुलडोजर से गिरा दिया. सैन्य सूत्रों ने बताया कि स्टील टिप वाली गोलियों, एके-47 राइफलों और बॉडी कैमरा पहने हुए लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के चार आतंकवादियों के एक समूह ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों के बीच हिंदुओं को निशाना बनाया और उन पर गोलियों की बौछार कर दी. इस आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें से ज्यादातर पर्यटक थे और भारत के अलग-अलग राज्यों से जम्मू-कश्मीर घूमने पहुंचे थे. आतंकवादियों में दो स्थानीय भी शामिल थे. सूत्रों ने बताया कि दोनों स्थानीय आतंकियों की पहचान बिजबेहरा निवासी आदिल हुसैन थोकर और त्राल निवासी आसिफ शेख के रूप में हुई है. टेरर कैंप में ली थी ट्रेनिंग सैन्य सूत्रों के मुताबिक, आदिल ने साल 2018 में अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए वैध तरीके से पाकिस्तान की यात्रा की थी. अपने पाकिस्तान प्रवास के दौरान उसने टेरर कैम्प में ट्रेनिंग ली थी और पिछले साल जम्मू-कश्मीर लौटा था. पहलगाम हमले के कुछ चश्मदीदों ने बताया​ कि कुछ आतंकी आपस में पश्तून भाषा में बातचीत कर रहे थे. सूत्रों ने इस बात पर जोर दिया कि हमले में शामिल सभी आतंकवादी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के हैं. हालांकि द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने भी इस हमले की जिम्मेदारी ली है. उन्होंने कहा कि टीआरएफ लश्कर-ए-तैयबा का एक मुखौटा आतंकी संगठन है, जिसका इस्तेमाल हमले को एक स्वदेशी समूह के काम के रूप में दिखाने के लिए किया गया.  

ईरान के नक्शेकदम पर पाकिस्तान, ISI ने आतंक‍ियों को किया एक्टिवेट, भारत के खिलाफ जंग का ऐलान

इस्लामाबाद  प्रॉक्सी आतंकी संगठनों के जरिए इस्लामिक देश अपने दुश्मनों के खिलाफ जिहाद करते हैं। इजरायल से लेकर भारत तक को जख्म देने के लिए इस मॉडल को अपनाया जा रहा है। ईरान के कई इस्लामिक आतंकी संगठन हैं, जो इजरायल के खिलाफ युद्ध लड़ रहे हैं। पाकिस्तान भी सालों से इसी मॉडल पर काम करता आया है। इस वक्त जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की तरफ से कड़ी कार्रवाई की संभावना है, हिजबुल मुजाहिदीन ने जंग का ऐलान कर दिया है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI के कहने पर इस आतंकी संगठन ने जंग का ऐलान किया है। RESONANT NEWS ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन हिज्ब-उल-मुजाहिदीन (HM) के टॉप आतंकवादी शमशेर खान का वीडियो प्रकाशित किया है। इस वीडियो को इस आतंकी संगठन के सोशल मीडिया अकाउंट से 24 अप्रैल को जारी किया गया है, जिसमें इसने कश्मीर में जिहाद का ऐलान किया है। पाकिस्तान के कई सोशल मीडिया अकाउंट्स से दावा किया गया है कि इस आतंकी संगठन ने भारत के खिलाफ ‘सशस्त्र संघर्ष’ शुरू करने की घोषणा की है। आतंकी संगठन का भारत के खिलाफ जंग का ऐलान पहलगाम आतंकी हमले को लेकर भारत सख्त है। भारतीय प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि आतंकियों को ऐसी सजा दी जाएगी, जिसकी कल्पना भी नहीं की गई होगी। लिहाजा पाकिस्तान को भारत की तरफ से जवाबी कार्रवाई का डर है। लिहाजा पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों के जरिए भारत के खिलाफ जिहाद का ऐलान कर दिया है। जिनमें हिजबुल मुजाहिदीन भी शामिल है। पाकिस्तान की सेना को कारगिल युद्ध के दौरान आतंकवादियों और सेना को एक साथ मिलाकर भारत पर हमला किया था। और एक बार फिर से पाकिस्तान ने यही पैंतरा अपनाया था। इस आतंकी संगठन की तरफ से जारी किया गया ये वीडियो करीब एक मिनट लंबा है। इस वीडियो में शमशेर खान दिख रहा है, जो कश्मीर के पुंछ इलाके का रहने वाला है, लेकिन अब वो पाकिस्तान में रहता है। हालांकि शमशेर खान सैयद सलाहुद्दीन ग्रुप का नेतृत्व करता है, लेकिन अब शमशेर खान को नये तरीके से इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है। इससे पहले पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा (LeT) ने ली थी। जिसके बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहलगाम में नरसंहार की साजिश लश्कर के आतंकवादी सैफुल्लाह कसूरी ने रची थी, जो लश्कर की राजनीतिक शाखा का भी नेतृत्व करता है। RESONANT NEWS ने कई वीडियो पोस्ट करते हुए दावा किया है कि लश्कर के आतंकवादियों को पाकिस्तानी अधिकारी सुरक्षा दे रहे हैं। यानि पाकिस्तान ने आतंकवादियों को एक्टिवेट कर दिया है और आतंकवादियों के जरिए जिहाद करने की घोषणा कर दी है।

राजदूत एजर ने पहलगाम हमले को हमास के नेताओं की POK के दौरे से जोड़ा, दावा जैश ए मोहम्मद के बड़े आतंकियों से मुलाकात की

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर सनसनीखेज खुलासा हुआ है. इजरायल के राजदूत रेउवेन एजर ने इसमें हमास कनेक्शन खोज निकाला है. एजर ने पहलगाम हमले को हमास के कुछ नेताओं की कथित तौर पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का दौरा करने से जोड़ा है. दावा किया गया है कि हमास के नेताओं ने जैश ए मोहम्मद के बड़े आतंकियों से मुलाकात की थी. एजर ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले और इजरायल में पिछले साल सात अक्टूबर 2023 को हुए आतंकी हमले में समानताएं भी बताईं. हमास के हमले में 1400 इजरायली नागरिकों की मौत हुई थी. दोनों जगहों पर पर्यटकों को निशाना बनाया गया. राजदूत ने आगाह किया कि आतंकी समूह एक दूसरे की मदद की रणनीति अपना रहे हैं. एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में एजर ने कहा, आतंकियों के बीच हर स्तर पर सहयोग और समन्वय बढ़ा है. वो हमला करने की सफल रणनीति की नकल कर रहे हैं. खुफिया एजेंसियों को भी इसी तरह मजबूत सहयोग से उनकी साजिशों को नाकाम करना चाहिए. राजदूत ने एजेंसी से कहा, हमें यह स्वीकार करना होगा कि आतंकी समूह एक दूसरे को प्रोत्साहन देने में जुटे हैं. दोनों हमलों में समानताएं हैं. इजरायली राजदूत ने पहलगाम हमले की प्रतिक्रिया को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की, जिसमें उन्होंने आतंकियों को पाताल से भी खोज निकालने और कल्पना से परे भयानक सजा देने की बात कही थी. सिंधु जल संधि और अटारी चेक पोस्ट से आवाजाही रोकने को लेकर राजदूत ने कहा कि वे ऐसे कड़े कदमों से उत्साहित हैं. एजर ने वैश्विक समुदाय से सरकार समर्थित आतंकवाद को बेनकाब करने का आह्वान किया, क्योंकि यह समस्या कुछ आतंकियों से ज्यादा बड़ी है. राजदूत ने कहा, आतंकवाद को बेनकाब करना जरूरी है, क्योंकि आतंकी कई ऐसे देशों में सुरक्षित हैं, जो उन्हें पैसा, खुफिया इनपुट और हथियार तक मुहैया कराते हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. गौरतलब है कि अमेरिका, इजरायल, रूस समेत तमाम बड़े देशों ने पहलगाम हमले की निंदा की है. साथ ही आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को लेकर भारत का समर्थन किया है. पहलगाम के निकट बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 टूरिस्ट मारे गए हैं. आतंकवादियों ने वहां हिन्दुओं से धर्म पूछ पूछकर उन्हें गोलियां मारीं. 

अंतरराष्ट्रीय मार्गों की उड़ानों को को रद करना शुरू कर दिया गया, आगमन में छह घंटे तक का विलंब

नई दिल्ली भारतीय विमानन कंपनियों पर पाकिस्तान द्वारा अपने एयर स्पेस के इस्तेमाल को लेकर लगाए गए प्रतिबंध का असर अब साफ साफ नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मार्गों की उड़ानों को को रद करना शुरू कर दिया गया है। इंडिगो ने प्रतिबंधों और सीमित वैकल्पिक मार्गों के कारण अलमाटी और ताशकंद इंडिगो के वर्तमान विमान बेड़े की परिचालन सीमा से बाहर हैं। अलमाटी के लिए 27 अप्रैल से 7 मई और ताशकंद के लिए 28 अप्रैल से 7 मई तक की उड़ानें रद कर दी गई हैं। इंडिगो प्रवक्ता ने कहा कि हम अपने ग्राहकों से अपेक्षा करते हैं कि वे इस स्थिति को समझेंगे। आगमन में छह घंटे तक का विलंब यूरोप, खाड़ी देशों, मध्य एशिया व अमेरिका से आने वाली उड़ानें अब विलंब की चपेट में आ रही हैं। शुक्रवार को कई उड़ानें तो छह छह घंटे विलंब से पहुंची। एअर इंडिया की न्यूयार्क से नई दिल्ली आ रही उड़ान संख्या एआइ 102 चार घंटे विलंबित रही। शिकागो से नई दिल्ली पहुंची एअर इंडिया की उड़ान संख्या एआइ 126 के आगमन में पांच घंटे का विलंब हुआ। सेन फ्रांसिस्को की फ्लाइट छह घंटे की देरी से दिल्ली पहुंची सेन फ्रांसिस्को से नई दिल्ली आ रही उड़ान के आगमन में छह घंटे का विलंब हुआ। लंदन से एअर इंडिया की जिस उड़ान संख्या एआई 112 आइजीआई एयरपोर्ट पर बृहस्पतिवार देर रात 3.10 बजे लैंडिंग करनी थी, वह सुबह करीब पौने सात बजे पहुंची। पेरिस से आ रही एअर इंडिया की उड़ान संख्या 142 को शुक्रवार सुबह 8.35 बजे लैंडिंग करनी थी, यह करीब 10 बजे पहुंची। फ्रेंकफर्ट की उड़ानों के आगमन में विलंब की स्थिति विएना, एम्सटर्डम, फ्रेंकफर्ट की उड़ानों के आगमन में विलंब की स्थिति रही। दुबई, शारजाह, जेद्दा, अबूधाबी, बहरीन से आ रही उड़ानों में एक से तीन घंटे का विलंब देखने को मिला। उधर अजरबैजान की बात करें तो इसकी राजधानी बाकू से नई दिल्ली की उड़ान के आगमन में साढ़े घंटे का विलंब रहा। इसी तरह जार्जिया की राजधानी तिब्लिसी की उड़ान नई दिल्ली करीब पांच घंटे की देरी से पहुंची। जारी हुई एडवाइजरी विमानन कंपनियों ने भी एडवाइजरी जारी कर यात्रियों व उनके स्वजन को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए एडवाइजरी जारी की। इंडिगो ने कहा कि यदि आपकी उड़ान प्रभावित हो रही है तो आप कस्टमर केयर या हमारी वेबसाइड पर जाकर हरसंभव सहायता पा सकते हैं। इसमें रिबुकिंग या रिफंड जैसे विकल्प मौजूद हैं। एअर इंडिया ने एडवाइजरी में कहा कि उत्तर अमेरिका, यूके, यूरोप व मध्य पूर्व से जुड़ी उड़ानें अब परंपरागत मार्ग के बजाय वैकल्पिक मार्ग अपना रही हैं। इससे यात्रा का समय बढ़ेगा। ऐसे बढ़ गई दूरी बाकू व नई दिल्ली के बीच चलने वाली इंडिगो की उड़ान पहले कैस्पियन सागर, ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान होते हुए भारत में प्रवेश कर पहले राजस्थान फिर हरियाणा होते हुए नई दिल्ली में दाखिल हो जाती थी। अब इसी उड़ान को बाकू से कैस्पियन सागर के बाद ईरान में प्रवेश करना पड़ता है। उत्तर से दक्षिण तक पूरे ईरान को लांघने के बाद विमान सीधा अरब सागर के रास्ते भारतीय सीमा में दाखिल होता है। इसके बाद गुजरात, राजस्थान, हरियाणा होते हुए नई दिल्ली में प्रवेश करता है। यह दूरी पहले के मुकाबले कम से कम 30 प्रतिशत अधिक है।

भारत पाकिस्तान के खिलाफ एक के बाद एक सख्त फैसले ले रहा, सिंधु जल संधि खत्म करने का प्लान तैयार

जम्मू-कश्मीर कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत पाकिस्तान के खिलाफ एक के बाद एक सख्त फैसले ले रहा है. आतंकियों का पनाहगार बन चुके पाकिस्तान को आइना दिखाते हुए भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने की घोषणा की थी. अब सूत्रों की मानें तो भारत सरकार ने पाकिस्तान को सिंधु नदी के पानी के प्रवाह को रोकने का फैसला किया है. इसके लिए सिंधु बेसिन नदियों के किनारे बांधों की क्षमता बढ़ाई जाएगी, जिसमें ज्यादा से ज्यादा पानी रोकने की क्षमता होगी. मोदी सरकार तीन टर्म में अपने फैसले को लागू करने का प्लान बना रही है. जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने आजतक से विशेष बातचीत में सिंधु जल संधि को लेकर भारत सरकार के नए रुख की जानकारी दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि के तहत जो निर्णय किया गया है, उसका पूरी तरह से पालन किया जाएगा, लेकिन अब इसे टर्म यानी तीन चरणों- तुरंत, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म में लागू किया जाएगा. मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत से पाकिस्तान को एक बूंद भी पानी न जाए, इसकी पूरी व्यवस्था की जाएगी. आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से बढ़ाई जाएगी बांधों की क्षमता सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को रोकने की तैयारी शुरू कर दी गई है और इसका असर जल्द ही देखा जा सकेगा. सरकार बांधों की क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करेगी और गाद हटाकर अधिक पानी को संग्रहित किया जाएगा. वर्ल्ड बैंक, जिसने यह संधि कराई थी, को भी भारत सरकार के इस निर्णय की जानकारी दे दी गई है. इस फैसले पर तुरंत अमल शुरू किया जा रहा है. आज इस मुद्दे पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और जलशक्ति मंत्री सीआर. पाटिल के बीच अहम बैठक भी हुई. इसको लेकर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि पाकिस्तान में सिंधु नही का एक बूंद पानी भी नहीं जाने दिया जाएगा. उन्होंने एक्स पर लिखा, “मोदी सरकार द्वारा सिंधु जल संधि पर लिया गया ऐतिहासिक निर्णय पूर्णतः न्यायसंगत और राष्ट्रहित में है.हम ख्याल रखेंगे की पाकिस्तान में सिंधु नदी का एक बूंद पानी भी नहीं जाए.” भारत ने पाकिस्तान को आधिकारिक रूप से दी जानकारी बता दें कि इससे पहले, सरकार ने संधि को निलंबित करने के अपने फैसले को लागू करने के लिए एक औपचारिक अधिसूचना जारी की और गुरुवार को इसे पाकिस्तान को सौंप दिया. अधिसूचना में कहा गया है कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखा जा रहा है, जिससे सिंधु आयुक्तों के बीच बैठकें, डेटा साझा करना और नई परियोजनाओं की अग्रिम सूचना सहित सभी संधि दायित्वों को प्रभावी रूप से निलंबित कर दिया गया है. संधि के अब निलंबित होने के बाद, भारत पाकिस्तान की अनुमति या परामर्श के बिना नदी पर बांध बनाने के लिए स्वतंत्र है. पाकिस्तानी अधिकारियों को संबोधित एक पत्र में, भारत की जल संसाधन सचिव देबाश्री मुखर्जी ने कहा कि जम्मू और कश्मीर को निशाना बनाकर पाकिस्तान द्वारा लगातार सीमा पार आतंकवाद सिंधु जल संधि के तहत भारत के अधिकारों में बाधा डालता है. पत्र में लिखा है, “सद्भावना के साथ संधि का सम्मान करने का दायित्व संधि के लिए मौलिक है. हालांकि, इसके बजाय हमने जो देखा है वह यह है कि पाकिस्तान द्वारा भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर को निशाना बनाकर लगातार सीमा पार आतंकवाद जारी है.” पाकिस्तान ने बताया था युद्ध की कार्रवाई वहीं पाकिस्तान ने गुरुवार को सिंधु जल संधि को भारत द्वारा निलंबित करने के फैसले को खारिज कर दिया और कहा कि संधि के तहत पाकिस्तान के पानी के प्रवाह को रोकने के किसी भी कदम को “युद्ध की कार्रवाई” के रूप में देखा जाएगा. दोनों देशों ने नौ साल की बातचीत के बाद सितंबर 1960 में इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका एकमात्र उद्देश्य सीमा पार की नदियों से संबंधित मुद्दों का प्रबंधन करना था. पाकिस्तान पर बड़ा असर विशेषज्ञों के अनुसार, भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने से पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है, जिससे महत्वपूर्ण जल डेटा साझाकरण बाधित होगा और प्रमुख फसल मौसमों के दौरान प्रवाह कम होगा. विश्व बैंक की मध्यस्थता में, संधि पूर्वी नदियों – सतलुज, ब्यास और रावी को भारत को और पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब को पाकिस्तान को आवंटित करती है. लगभग 135 एमएएफ का औसत वार्षिक प्रवाह बड़े पैमाने पर पाकिस्तान को आवंटित किया गया था.  

अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने पहलगाम हमले की निंदा करते हुए भारत की मदद करने की बात कही

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले पर अमेरिकी सहित ज्यादातर देशों ने चिंता जाहिर की है। दुनिया के ज्यादातर देशों ने इस हमले के बाद भारत के प्रति सहानुभूति जाहिर की।  इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने पहलगाम हमले की निंदा करते हुए भारत की मदद करने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,”हम पहलगाम में 26 हिंदुओं को निशाना बनाकर किए गए भीषण इस्लामी आतंकवादी हमले के खिलाफ भारत के साथ एकजुटता से खड़े हैं। उन्होंने आगे कहा कि मेरी प्रार्थनाएं और गहरी संवेदनाएं उन लोगों के साथ हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के सभी लोगों के साथ हैं। हम आपके साथ हैं और इस जघन्य हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को पकड़ने में आपका समर्थन करते हैं। बता दें कि दुनिया के ज्यादातर देशों ने इस घटना पर चिंता जाहिर की है। कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने पीएम मोदी के साथ फोन पर बातचीत की और हमले पर चिंता जाहिर की। ब्रिटेन ने की हमले की निंदा ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी शुक्रवार को पहलगाम आतंकी हमले पर को ‘वीभत्स’  घटना करार दिया है। स्टारमर ने ब्रिटिश लोगों की ओर से अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और दोनों नेताओं ने संपर्क में रहने पर सहमति जताई। ब्रिटेन के सांसदों ने भी जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की है। ब्रिटेन के सांसद तनमनजीत सिंह धेसी ने उम्मीद जताई कि हमले के पीछे के अपराधियों को जल्द ही न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।

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