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वक्फ बोर्ड में मेंबर की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, इन शर्तों का करना होगा पालन

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन कानून से संबंधित मामला चल रहा है, जिसमें अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है. यह निर्णय राज्य वक्फ बोर्ड में सदस्यों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है. देशभर में मुस्लिम समुदाय इस कानून का विरोध कर रहा है, और इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है. हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हाई कोर्ट के एक निर्णय को खारिज करते हुए नया आदेश जारी किया है, जिसके अनुसार यदि कोई वकील राज्य बार काउंसिल में किसी पद पर नहीं है, तो वह राज्य वक्फ बोर्ड का सदस्य नहीं बन सकता. सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और राजेश बिंदल की बेंच ने स्पष्ट किया है कि केवल संसद, राज्य विधानसभा या राज्य बार काउंसिल के सक्रिय सदस्य और मुस्लिम व्यक्ति ही वक्फ बोर्ड के सदस्य बन सकते हैं. कोर्ट ने मणिपुर हाईकोर्ट के उस निर्णय को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि बार काउंसिल का सदस्य न रहने पर भी कोई व्यक्ति वक्फ बोर्ड का सदस्य बना रह सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि वक्फ कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बार काउंसिल से बाहर हो जाता है, तो उसकी वक्फ बोर्ड की सदस्यता भी समाप्त मानी जाएगी. जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड का सदस्य बनने के लिए दो आवश्यक शर्तें पूरी करनी अनिवार्य हैं.     व्यक्ति मुस्लिम समुदाय से हो.     संसद, राज्य विधानसभा या बार काउंसिल के सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभाना. सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हाईकोर्ट के उस निर्णय को गलत ठहराया, जिसमें कहा गया था कि कानून में यह स्पष्ट नहीं है कि बार काउंसिल से बाहर होने पर वक्फ बोर्ड की सदस्यता भी समाप्त हो जाएगी. दिल्ली में इस तारीख से 10-15 साल पुराने वाहनों को नहीं मिलेगा फ्यूल, राजधानी में बैन होगी एंट्री, CAQM का आदेश ये है पूरा मामला मणिपुर के मो. फिरोज अहमद खालिद को फरवरी 2023 में मणिपुर वक्फ बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया गया. इससे पहले, वे दिसंबर 2022 में बार काउंसिल के सदस्य चुने गए थे, जहां उन्होंने एक हारने वाले सदस्य की जगह ली थी. प्रारंभ में हाईकोर्ट ने उनकी नियुक्ति को मान्यता दी, लेकिन बाद में डिवीजन बेंच ने इस निर्णय को पलट दिया. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बार काउंसिल से बाहर होने पर वक्फ बोर्ड की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाएगी. भारत में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की संख्या को लेकर विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में भिन्न-भिन्न आंकड़े प्रस्तुत किए जाते हैं. हालांकि, 2022 में भारत सरकार ने जानकारी दी कि देश में 7.8 लाख से अधिक वक्फ की अचल संपत्तियां मौजूद हैं. इनमें सबसे बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश वक्फ के पास है, जहां लगभग दो लाख से अधिक अचल संपत्तियां स्थित हैं. सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता बताते हैं कि 2009 के बाद वक्फ की संपत्तियों में दोगुने का इजाफा हुआ है. अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने दिसंबर 2022 में लोकसभा में जानकारी दी थी जिसके अनुसार वक्फ बोर्ड के पास 8,65,644 अचल संपत्तियां हैं. लगभग 9.4 लाख एकड़ वक्फ की जमीनों की अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ है. भारत में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की संख्या को लेकर मीडिया में विभिन्न आंकड़े प्रस्तुत किए जाते हैं. 2022 में भारत सरकार ने बताया कि देश में 7.8 लाख से अधिक वक्फ की अचल संपत्तियां हैं. इनमें सबसे अधिक संपत्तियां उत्तर प्रदेश वक्फ के पास हैं, जहां लगभग दो लाख से अधिक अचल संपत्तियां स्थित हैं. सुप्रीम कोर्ट में विपक्ष के कई नेताओं ने इस कानून के खिलाफ याचिकाएं दायर की हैं, जिनकी पहली सुनवाई 17 अप्रैल को हुई थी. इस सुनवाई के दौरान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट पेश करते हुए आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक इस कानून के किसी भी विवादास्पद प्रावधान को लागू नहीं किया जाएगा. अगली सुनवाई 5 मई को निर्धारित है. इस बीच, मुस्लिम समुदाय देशभर में इस कानून के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहा है.

दिल्लीवालों को एक बार फिर झेलने पड़ेगे लू के थपेड़े

नई दिल्ली दिल्लीवासियों को एक बार फिर लू के थपेड़े सहने पड़ सकते हैं. मौसम विभाग ने राजधानी में तापमान में वृद्धि और हीट वेव की चेतावनी जारी की है. विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान में फिर से बढ़ोतरी हो सकती है. बुधवार को आसमान साफ रहने और 10 से 20 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने की संभावना जताई गई है. इस दौरान अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. अगले 5 दिन बढ़ेगा तापमान दिल्ली में अगले पांच दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि की संभावना है. बुधवार को तापमान 39-42 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि 24 से 26 अप्रैल के दौरान यह 41-43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. लू की स्थिति के कारण, इस अवधि में दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में तापमान सामान्य से 2-4 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है. मंगलवार को तेज धूप और गर्म हवाओं ने गर्मी को और बढ़ा दिया, हालांकि कुछ समय के लिए चलने वाली सतही हवाओं (10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की गति) ने थोड़ी राहत प्रदान की. गर्मी से राहत की संभावना नहीं मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों में आसमान साफ रहने की उम्मीद है, और अधिकतम तापमान लगभग 41 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है. मंगलवार को दिल्ली में अधिकतम तापमान 39.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 2.2 डिग्री अधिक था, जबकि न्यूनतम तापमान 20.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.8 डिग्री कम है. पिछले 24 घंटों में राजधानी में कोई बारिश नहीं हुई, और गर्मी से राहत की कोई संभावना नहीं दिख रही है. अगले 7 दिन कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार को तेज धूप के साथ मौसम साफ रहेगा. गर्म हवाएं 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं. गुरुवार को तापमान 42 डिग्री तक पहुंचने की संभावना है, जिससे गर्मी बढ़ेगी. शुक्रवार को भी गर्मी का सामना करना पड़ेगा, जबकि शनिवार को हल्की राहत मिल सकती है, जब आसमान में कुछ बादल दिखाई देंगे. रविवार को फिर से गर्मी का अनुभव होगा, और सोमवार को बादल छाए रहने की उम्मीद है. मंगलवार को भी बादलों की मौजूदगी रहेगी, लेकिन गर्मी बनी रह सकती है.  

भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ शुरू किया एक्शन, पाक ने कराची में किया मिसाइल परीक्षण

इस्लामाबाद  पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन शुरू कर दिया है। सिंधु नदी का पानी रोकने सहित पांच पाबंदियां पाकिस्तान पर लगाई गई हैं। इसके बाद पाकिस्तान सरकार में हलचल तेज है। वहीं, डिप्टी पीएम इशाक डार ने भारत ने परमाणु बम वाली धमकी दी है। डार ने कहा है कि भारत की पाबंदियां गैर मुनासिब हैं। पाकिस्तान के पास भी परमाणु हथियार हैं और हम झुकेंगे नहीं। समाचार एजेंसी ने रक्षा सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि पाकिस्तान ने 24-25 अप्रैल को अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र के भीतर कराची तट पर सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण करने के लिए अधिसूचना जारी की है। संबंधित भारतीय एजेंसियां ​​सभी घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रख रही हैं। शिमला एग्रीमेंट से पीछे हट सकता है पाकिस्तान     पाकिस्तान में आज होने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में सेना प्रमुख और विदेश मंत्री भी शामिल रहेंगे। बैठक के बाद विदेश मंत्रालय द्वारा आधिकारिक जानकारी दी जाएगी।     खबर है कि भारत द्वारा लगाई गई पाबंदियों के जवाब में पाकिस्तान भी कुछ फैसले ले सकता है। इसमें 1972 का शिमला एग्रीमेंट भी शामिल है। 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े होने के बाद शिमला एग्रीमेंट हुआ था।     यह समझौता इंदिरा गांधी और जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच हुआ था। शिमला एग्रीमेंट में तय हुआ था कि 17 दिसंबर 1971 को जो स्थिति है, दोनों देश उसे ही एलओसी मान लें। भारत ने डराने की कोशिश की, तो एकजुट रहेगा पाकिस्तान: चौधरी फवाद हुसैन पहलगाम आतंकी हमले को लेकर भारत में बढ़ते आक्रोश के बीच पाकिस्तान के पूर्व मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने कहा कि अगर भारत द्वारा हमला किया गया या धमकी दी गई तो देश अपनी रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़ा होगा। अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के वरिष्ठ नेता हुसैन ने एक्स पर लिखा, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी), पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई), जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई) सहित सभी प्रमुख दल अपने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद एकजुट रहेंगे। पाकिस्तान राजनीतिक रूप से विभाजित है, लेकिन हम एक राष्ट्र के रूप में एकजुट हैं। अगर भारत द्वारा हमला किया गया या धमकी दी गई, तो सभी समूह अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए पाकिस्तानी झंडे के नीचे एकजुट होंगे।

भारत ने बांग्लादेश में ₹5,000 करोड़ के रेल प्रोजेक्ट पर लगाई रोक, भूटान और नेपाल के रास्ते वैकल्पिक रास्तों की तलाश

नई दिल्ली  इस समय पड़ोसी देश बांग्लादेश (Bangladesh) से रिश्ते कुछ सहज नहीं हैं। इसलिए भारत ने वहां चल रहे कुछ रेलवे प्रोजेक्ट (Railway Project) रोक दिए हैं। वहां हो रही राजनीतिक उथल-पुथल और वहां काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भारत को चिंता है। एक खबर के अनुसार, लगभग ₹5,000 करोड़ के रेल प्रोजेक्ट का इस समय काम रुक गया है। कई प्रोजेक्ट पर काम ठप  एक रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम तीन प्रोजेक्ट पर पहले काम चल रहा था, जिसे अब रोक दिया गया है। इसके अलावा, पांच अन्य प्रोजेक्ट के लिए सर्वे का काम भी बंद कर दिया गया है। ये रेलवे प्रोजेक्ट पूर्वोत्तर राज्यों को बांग्लादेश के रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए बहुत जरूरी थे। इनका मकसद सिलिगुड़ी कॉरिडोर पर निर्भरता को कम करना था। सिलिगुड़ी कॉरिडोर एक पतला सा रास्ता है जो पूर्वोत्तर भारत को बाकी भारत से जोड़ता है। कौन कौन से प्रोजेक्ट रुके जिन रेलवे प्रोजेक्ट को रोका गया है, उनमें अखौरा-अगरतला क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक, खुलना-शाहबाजपुर रेल लाइन, खुलना-मोंगला पोर्ट रेल लाइन और ढाका-टोंगी-जयदेबपुर रेल एक्सटेंशन प्रोजेक्ट शामिल हैं। अखौरा-अगरतला क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक प्रोजेक्ट पर भारत बांग्लादेश को लगभग ₹400 करोड़ की मदद दे रहा था। यह 12.24 किलोमीटर लंबा है। इसमें बांग्लादेश में 6.78 किलोमीटर और त्रिपुरा में 5.46 किलोमीटर की दोहरी रेल लाइन बननी थी। खुलना-शाहबाजपुर रेल लाइन, जो अखौरा-अगरतला प्रोजेक्ट का हिस्सा है, असम के लिए कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए बनाई जा रही थी। खुलना-मोंगला पोर्ट रेल लाइन प्रोजेक्ट को रियायती लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत बनाया जा रहा है। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत $388.92 मिलियन (₹3,300 करोड़) है। इसमें बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट और खुलना में मौजूदा रेल नेटवर्क के बीच लगभग 65 किलोमीटर का रेल मार्ग बनाया जाना था। काम बहुत धीरे ‘बिजनेस लाइन’ की रिपोर्ट के अनुसार, ढाका-टोंगी-जयदेबपुर रेलवे एक्सटेंशन प्रोजेक्ट जून 2027 तक पूरा होना था। लेकिन, पिछले साल तक इसका 50% से भी कम काम हो पाया था। मतलब, काम बहुत धीरे चल रहा था। प्रोजेक्ट पर काम क्यों धीमा था, इस बारे अभी तक कुछ खास सामने नहीं आया है। भारत विकल्प देख रहा है अब भारत भूटान और नेपाल के रास्ते वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रहा है ताकि उत्तर तथा पूर्वोत्तर भारत में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा सके। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है, “‘₹3500 – 4000 करोड़ की कनेक्टिविटी योजना भूटान और नेपाल के माध्यम से तलाशी जा रही है, लेकिन भारतीय क्षेत्रों में निर्माण कार्य योजना के अनुसार चल रहा है।” इसके साथ ही, भारत उत्तर प्रदेश और बिहार में सिंगल रेल लाइनों को डबल और जहां डबल रेल लाइन है, वहां चार लाइनें बिछाने की संभावना भी तलाश रहा है।

पुलवामा हमले के बाद घाटी में सबसे घातक हमला, भारत के साथ दृढता के साथ खड़े हैं कई मुस्लिम मुल्क, अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को आतंकवादियों की गोलीबारी में 26 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में ज्यादातर पर्यटक हैं। यह 2019 में पुलवामा हमले के बाद घाटी में सबसे घातक हमला है। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने ली है। अमेरिका, रूस और चीन समेत दुनियाभर के देशों ने इस कायराना हमले की निंदा की है। अरब जगत ने भी कश्मीर में आतंकी हमले की निंदा की है और कहा है कि वह भारत के साथ मजबूती से खड़ा है। कुवैत के क्राउन प्रिंस सबा खालिद अल-हमद अल-सबाह ने बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को “पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाकर किए गए आतंकी हमले में हुई दुखद मौत पर” संवेदना व्यक्त की। बयान में कहा गया कि क्राउन प्रिंस ने पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। कुवैत के अलावा सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने भी पहलगाम हमले पर एक बयान जारी किया है और कहा है कि वह दुख की घड़ी में भारत के साथ खड़ा है। सऊदी अरब भी भारत के साथ सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है, “हम हिंसा, उग्रवाद और नागरिकों को निशाना बनाने के सभी कायराना हरकतों को अस्वीकार करते हैं और भारत के साथ दृढता के साथ खड़े हैं। सऊदी अरब पीड़ित परिवारों और भारत सरकार के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना और सहानुभूति व्यक्त करता है।” बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सऊदी अरब यात्रा में भारत और सऊदी पक्षों ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की है। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि आतंकवाद को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। बयान में कहा गया, “दोनों पक्षों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की कड़ी निंदा की, जिसमें निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। इस संदर्भ में, दोनों पक्षों ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में निंदा की और इस बात पर जोर दिया कि यह मानवता के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है।” बयान में कहा गया, “वे इस बात पर भी सहमत हुए कि किसी भी कारण से किसी भी आतंकवादी कृत्य को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने आतंकवाद को किसी विशेष जाति, धर्म या संस्कृति से जोड़ने के किसी भी प्रयास को भी अस्वीकार कर दिया।” संयुक्त अरब अमीरात ने भी की कड़ी निंदा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मंत्रालय ने भी मंगलवार को एक बयान में हमले की “कड़ी निंदा” की। वहां के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “यूएई इन आपराधिक कृत्यों की कड़ी निंदा करता है और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन में सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करने के उद्देश्य से हिंसा और आतंकवाद के सभी रूपों को स्थायी रूप से अस्वीकार करता है।” यूएई ने भारत सरकार और लोगों तथा इस जघन्य हमले के पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना और सहानुभूति व्यक्त की और सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान दूसरी तरफ, पाकिस्तान अलग सुर अलाप रहा है। पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के करीबी और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि इस हमले से पाकिस्तान का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा, “यह सब उनके ही घर में ही शुरू हुआ है। भारत के खिलाफ कथित राज्यों में क्रांति चल रही है। एक या दो नहीं, बल्कि दर्जनों चल रहे हैं। नगालैंड से कश्मीर, छत्तीसगढ़ में, मणिपुर में ऐसा हो रहा है। इन सभी स्थानों पर भारत सरकार के खिलाफ क्रांति हो रही है।” इससे पहले पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने कुछ दिन पहले कश्मीर को पाकिस्तान की ‘गले की नस’ बताया था, जिस पर नयी दिल्ली की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई थी। जनरल मुनीर ने 15 अप्रैल को इस्लामाबाद में पहले प्रवासी पाकिस्तानी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था, ‘‘हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है, यह हमारी गले की नस थी, यह हमारी गले की नस रहेगी और हम इसे नहीं भूलेंगे। हम अपने कश्मीरी भाइयों को उनके वीरतापूर्ण संघर्ष में अकेला नहीं छोड़ेंगे।’’ अब सहमा पाकिस्तान इस हमले के बाद देश में जहां भारी गुस्सा और रोष है, वहीं केंद्र सरकार आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। आज शाम प्रधानमंत्री मोदी के आवास पर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक हो रही है। माना जा रहा है कि सरकार आतंकियों के खात्मे के लिए कोई बड़ा कदम उठा सकती है। इससे पाकिस्तान सहमा हुआ है। उसने सीमा पर अपनी वायुसेना को अलर्ट कर दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने CCS की मीटिंग से पहले सेना के तीनों प्रमुखों के साथ करीब ढाई घंटे की बैठक की है।

टीआरएफ पाकिस्तान स्थित लश्कर ए तैयबा का मुखौटा आतंकी संगठन है, पहलगाम में हुए आतंकी हमले को भी अंजाम दिया

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच कुलगाम जिले में एनकाउंटर चल रहा है। सेना ने द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के टॉप आतंकी को घेर लिया है। दोनों ओर से गोलीबारी जारी है। टीआरएफ पाकिस्तान स्थित लश्कर ए तैयबा का मुखौटा आतंकी संगठन है। इसी टीआरएफ ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले को भी अंजाम दिया है, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 अन्य घायल हो गए। पहलगाम में कई आतंकियों ने पर्यटकों पर गोलीबारी कर दी थी, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई। आतंकियों ने लोगों से धर्म पूछकर उनकी जान चली। इस हमले के बाद देशभर में काफी गुस्सा देखने को मिल रहा है। भारत ने साफ किया है कि हमले के दोषियों को करारा जवाब दिया जाएगा। वहीं, भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पहलगाम आतंकी हमले के आतंकियों को पकड़ने के लिए बैसरन, पहलगाम, अनंतनाग समेत तमाम इलाकों में तलाशी अभियान शुरू किया है।

भारत ने अफगानिस्तान को 4.8 टन टीके भेजे, स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मदद के लिए भारत का आभार व्यक्त किया

काबुल भारत ने अफगानिस्तान को 4.8 टन टीके दान किए। इन टीकों में रेबीज, टेटनस, हेपेटाइटिस बी और इन्फ्लूएंजा से लड़ने के लिए टीके शामिल हैं। अफगानिस्तान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को, इस मदद के लिए भारत का आभार व्यक्त किया। मंत्रालय के बयान में कहा गया, “अफगानिस्तान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय को रेबीज, टेटनस, हेपेटाइटिस बी और इन्फ्लूएंजा से निपटने में मदद करने के लिए भारत से टीकों की एक महत्वपूर्ण खेप मिली है।” इसमें कहा गया, “सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय के नेतृत्व ने उदार समर्थन के लिए भारत को धन्यवाद दिया और इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जिससे देश भर में हजारों लोगों की जान बच सकती है।” मंत्रालय ने आगे कहा कि टीकों के दान से अफगानिस्तान को मदद मिलेगी, जहां लंबे समय से अस्थिरता और आर्थिक चुनौतियों के कारण जरूरी मेडिकल सप्लाई तक पहुंच सीमित बनी हुई है। जनवरी में, दुबई में विदेश सचिव विक्रम मिस्री की अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मावलवी आमिर खान मुत्तकी के साथ बैठक हुई थी। इस दौरान भारत ने इस्लामी राष्ट्र को मानवीय सहायता जारी रखने का वचन दिया, जिसमें स्वास्थ्य क्षेत्र में भौतिक सहायता और शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए सहायता शामिल थी। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, विदेश सचिव ने अफगान लोगों के साथ भारत की ऐतिहासिक मित्रता और दोनों देशों के बीच मजबूत लोगों के बीच संपर्क को रेखांकित किया। उन्होंने अफगान लोगों की विकास संबंधी जरूरतों को तत्काल पूरा करने के लिए भारत की तत्परता से अवगत कराया। अफगान मंत्री ने बैठक के दौरान अफगानिस्तान के लोगों के साथ संपर्क बनाए रखने और उन्हें समर्थन प्रदान करने के लिए भारतीय नेतृत्व की सराहना की और उन्हें धन्यवाद दिया। इस वर्ष की शुरुआत में विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, “विकास गतिविधियों की मौजूदा जरुरत को देखते हुए, यह फैसला लिया गया कि भारत चल रहे मानवीय सहायता कार्यक्रम के अलावा, निकट भविष्य में विकास परियोजनाओं में शामिल होने पर विचार करेगा।” विदेश मंत्रालय के अनुसार, जनवरी तक भारत ने अफगान लोगों की जरूरतों को तेजी से पूरा करते हुए पिछले कुछ वर्षों में 50,000 मीट्रिक टन गेहूं, 300 टन दवाइयां, 27 टन भूकंप राहत सहायता, 40,000 लीटर कीटनाशक, 100 मिलियन पोलियो खुराक, 1.5 मिलियन कोविड वैक्सीन खुराक, नशा मुक्ति कार्यक्रम के लिए 11,000 यूनिट स्वच्छता किट, 500 यूनिट सर्दियों के कपड़े और 1.2 टन स्टेशनरी किट सहित कई खेपें भेजी हैं।

पाकिस्तान सरकार ने पहलगाम हमले में हुई जानमाल की हानि पर चिंता व्यक्त की, इसकी निंदा करने से परहेज किया

इस्लामाबाद पाकिस्तान सरकार ने पहलगाम हमले में हुई जानमाल की हानि पर चिंता व्यक्त की, लेकिन इसे ‘आतंकवादी कृत्य’ बताने या इसकी निंदा करने से परहेज किया। मंगलवार को हुए आतंकी हमले में कम से कम 26 लोगों की मौत हो गई। यह क्रूर हमला पहलगाम के पास मशहूर पर्यटन स्थल बैसरन घाटी में हुआ। भारी हथियारों से लैस आतंकवादी आसपास के घने जंगलों से निकले और पर्यटकों के एक समूह पर अंधाधुंध गोलीबारी की। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने एक संक्षिप्त बयान जारी कर कहा, “हम अनंतनाग जिले में हुए हमले में पर्यटकों की जान जाने से चिंतित हैं। हम मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।” हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में, सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। सभी संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और घाटी में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा बुधवार को श्रीनगर पुलिस नियंत्रण कक्ष में आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। मृतक पर्यटकों के पार्थिव शरीर को बुधवार सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस नियंत्रण कक्ष लाया गया, जहां शीर्ष नेतृत्व द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पहलगाम आतंकी हमला ऐसे समय में हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के दौरे पर थे। इस दुखद समाचार के वह अपना दौरा बीच रद्द कर भारत लौट आए। दिल्ली पहुंचते ही एयरपोर्ट पर उन्होंने आपात बैठक बुलाई। इस अति महत्वपूर्ण बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव मौजूद थे। प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा से वापसी के तुरंत बाद इस उच्च स्तरीय बैठक में हमले की गंभीरता, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और सुरक्षा रणनीतियों पर विस्तार से मंथन किया गया।मंगलवार को पहलगाम में निहत्थे टूरिस्ट्स पर हुए कायराना हमले की चौतरफा निंदा हो रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कॉल कर हर संभव समर्थन की पेशकश की, जिस पर प्रधानमंत्री मोदी ने आभार जताते हुए कहा कि भारत कायराना हरकत करने वालों को नहीं बख्शेगा और उन्हें न्याय के कठघरे में खड़ा करने को प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी को बुधवार सुबह राष्ट्रपति ट्रंप ने कॉल किया और पहलगाम में आतंकवादी हमले के शिकारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। राष्ट्रपति ट्रंप ने हमले की निंदा की और कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़ा है और हर संभव समर्थन की पेशकश की। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संवेदना संदेश भेजा। उन्होंने इसे एक “निर्दोष नागरिकों के खिलाफ अपराध” बताया और भारत के साथ आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से खड़े रहने की प्रतिबद्धता जताई। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने भी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा- आज भारत में हुए आतंकवादी हमले में अनेक लोग हताहत हुए, ये जानकर बहुत कष्ट हुआ। इटली प्रभावित परिवारों, घायलों, सरकार और सभी भारतीय लोगों के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त करता है। इजरायली दूतावास और फिर इजरायल के विदेश मंत्री गिडोन सार ने इस घटना को बर्बर बताते हुए दुख व्यक्त किया। सार ने हमले में मारे गए लोगों के प्रति दुख व्यक्त करते हुए कहा, “इजरायल आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ है।” वहीं, यूक्रेन के दूतावास ने कहा कि वे पहलगाम आतंकी हमले से बेहद दुखी हैं। हम रोजाना आतंकी हमले का शिकार होते हैं और किसी भी तरह के आतंकवाद की निंदा करते हैं।

आठवले ने कहा- टूरिस्टों को निशाना बनाकर इस प्रकार की घटना पहली बार देखने को मिली है, जो अत्यंत गंभीर और दुखद

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकी हमले पर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान को कठोर संदेश देने की आवश्यकता जताई। उन्होंने इस हमले को दुर्भाग्यपूर्ण और भारत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया। आठवले ने कहा कि टूरिस्टों को निशाना बनाकर इस प्रकार की घटना पहली बार देखने को मिली है, जो अत्यंत गंभीर और दुखद है। रामदास आठवले ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देता आया है। उसने बार-बार घुसपैठियों के जरिए भारत की शांति व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश की है। यह हमला एक बार फिर यह साबित करता है कि पाकिस्तान की नीयत कभी साफ नहीं रही। अब वक्त आ गया है कि पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया जाए, सिर्फ सर्जिकल स्ट्राइक से नहीं, बल्कि निर्णायक युद्ध के जरिए पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए और पीओके वापस लिया जाए। आठवले ने इस घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गंभीरता की सराहना की और कहा कि पीएम मोदी ने अपने सऊदी अरब दौरे को बीच में छोड़कर देश लौटने का निर्णय लिया, जो इस घटना के प्रति उनकी गंभीरता को दर्शाता है। साथ ही उन्होंने बताया कि गृहमंत्री अमित शाह भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और पूरी जांच प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। आठवले ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में शांति का माहौल बना था, लेकिन इस तरह का हमला दर्शाता है कि पाकिस्तान अब भी कश्मीर को अशांत करने की साजिशों से बाज नहीं आ रहा है। इस बार आतंकियों ने पर्यटकों से नाम पूछकर, धर्म के आधार पर हत्या की, जो न केवल मानवता के खिलाफ है, बल्कि भारत की एकता पर भी हमला है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्षी दल इस संवेदनशील मुद्दे पर भी राजनीति कर रहे हैं, जबकि इस समय पूरे देश को एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ खड़ा होना चाहिए। शहीद हुए जवानों और नागरिकों का अपमान करने के बजाय विपक्ष को सरकार का समर्थन करना चाहिए। आठवले ने अंत में कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस घटना पर कड़ा और निर्णायक कदम उठाएंगे और पाकिस्तान को ऐसा जवाब मिलेगा, जिसे वह हमेशा याद रखेगा।

श्रीनगर के लिए एयर इंडिया और इंडिगो ने अतिरिक्त उड़ानें शुरू की हैं ताकि पर्यटकों को राहत मिल सके

श्रीनगर पहलगाम आतंकी हमले के बाद डीजीसीए ने एयरलाइनों को श्रीनगर के लिए उड़ानों की संख्या बढ़ाने और रद्दीकरण शुल्क माफ करने का निर्देश दिया है. स्पाइसजेट ने छूट की अवधि 30 अप्रैल तक बढ़ाई. नागर विमानन मंत्रालय ने किराया स्थिर रखने को कहा है. एयर इंडिया और इंडिगो ने अतिरिक्त उड़ानें शुरू की हैं ताकि पर्यटकों को राहत मिल सके. पहलगाम हमले के बाद विमानन नियामक डीजीसीए ने बुधवार को एयरलाइन कंपनियों से श्रीनगर से उड़ानों की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया है, ताकि पहलगाम आतंकी हमले के बाद पर्यटकों की वापसी आसान हो सके. इसके अलावा, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एयरलाइन कंपनियों से श्रीनगर के लिए उड़ान टिकटों के लिए रद्दीकरण और पुनर्निर्धारण शुल्क माफ करने पर विचार करने को कहा है. पहलगाम के पर्यटक स्थल पर आतंकी हमला दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में एक प्रमुख पर्यटक स्थल पर मंगलवार को आतंकवादियों ने हमला किया. इसमें कम से कम 26 लोग मारे गए और कई घायल हो गए. इनमें अधिकतर पर्यटक थे. डीजीसीए ने जारी की एडवाइजरी डीजीसीए ने एक एडवाजरी जारी कर कहा कि पहलगाम में हुई घटना के बाद अपने घर लौटने वाले पर्यटकों की ओर से डिमांड काफी बढ़ गई है. विमानन नियामक ने कहा, “इस संबंध में एयरलाइन कंपनियों को सलाह दी जाती है कि वे बढ़ती मांग के जवाब में उड़ानों की संख्या बढ़ाने के लिए तुरंत कार्रवाई करें. इसके साथ ही, श्रीनगर से भारत भर के विभिन्न गंतव्यों तक निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करें, ताकि फंसे हुए पर्यटकों को निकालने में सुविधा हो.” पर्यटकों को जरूरी सहायता प्रदान करें एयरलाइंस डीजीसीए ने एयरलाइन कंपनियों से यह भी कहा है कि उन्हें इस कठिन समय में अप्रत्याशित परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना कर रहे पर्यटकों को सभी जरूरी सहायता प्रदान किया जाए. इस बीच, नागर विमानन मंत्रालय ने एयरलाइन कंपनियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि श्रीनगर रूट पर हवाई किराये में कोई उछाल न आए. एयर इंडिया और इंडिगो बुधवार को श्रीनगर से अतिरिक्त उड़ानें संचालित कर रही हैं. स्पाइसजेट ने कैंसेलेशन छूट की डेट बढ़ाई स्पाइसजेट ने कहा, ”पहलगाम में हुए हमले के मद्देनजर हमने श्रीनगर से आने-जाने के लिए यात्रा के लिए पुनर्निर्धारण और रद्दीकरण पर छूट को 30 अप्रैल, 2025 तक बढ़ा दिया है. यह छूट 22 अप्रैल या उससे पहले की गई सभी बुकिंग पर लागू होगी. मौजूदा स्थिति के बीच यात्रियों की असुविधा को कम करने के लिए हम आज श्रीनगर से दिल्ली के लिए एक अतिरिक्त उड़ान भी संचालित कर रहे हैं. हम पीड़ितों, उनके परिवारों और इस कठिन समय में प्रभावित सभी लोगों के साथ दिल से एकजुटता में खड़े हैं.”

पहलगाम आतंकी हमले के बाद टूरिस्ट के लौटने में बढ़ोतरी हुई, 6 घंटे में 3337 तो सिर्फ फ्लाइट से लौटे

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बड़े आतंकी हमले टूरिस्ट का लौटना शुरू हो गया है। जम्मू कश्मीर के श्रीनगर हवाई अड्‌डे से एक दिन पहले 10 हजार लोगों ने आवाजाही की थी। पहलगाम आतंकी हमले के बाद टूरिस्ट के लौटने में बढ़ोतरी हुई है। नागर विमान मंत्री राममोहन नायडू के अनुसार सिर्फ छह घंटे में 3,337 यात्री श्रीनगर हवाई अड्‌डे से अपने गंतव्यों को रवाना हुए हैं। पहलगाम आतंकी हमले में कुल 28 टूरिस्ट की मौत हुई है। इसमें सर्वाधिक पांच लोग महराष्ट्र के हैं। दूरिस्ट के जम्मू-कश्मीर से लौटने पर राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी है। घाटी से मेहमानों को जाता देखना दुखद है। पर्यटकों को इस तरह वापस जाते देख मेरा दिल टूट रहा लेकिन हम यह भी अच्छी तरह समझते हैं कि लोग क्यों जाना चाहते हैं। हम डीजीसीए और नागरिक उड्डयन मंत्रालय अतिरिक्त उड़ानों की व्यवस्था करने के लिए काम कर रहे हैं। टूरिज्म इंडस्ट्री को बड़ा झटका पहलगाम आतंकी हमले के बाद होटल इंडस्ट्री को तगड़ा झटका लगा है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स के नासिर शाह ने बताया कि मंगलवार रात से ही टूरिस्ट होटलों की एडवांस बुकिंग कैंसल करा रहे हैं। होटलों और टूर ऑपरेटरों के पास कैंसल कराने वाले फोन कॉल का तांता लगा है। उन्होंने कहा कि समर सीजन में ऐसे हालात को काफी नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि गुलमर्ग के खैबर में एक रात का किराया 70,000 रुपये और श्रीनगर की फाइव स्टार प्रॉपर्टी में वन नाइट स्टे की कीमत 30,000 रुपये से 50,000 रुपये के बीच है। कैंसल होने से होटल संचालकों का सीधा नुकसान हो रहा है। टूरिस्टों के अचानक लौटने से भी होटल इंडस्ट्री की टेंशन बढ़ गई है। लगातार रद्द हो रही हैं बुकिंग श्रीनगर के एक ट्रैवल ऑपरेटर ऐजाज अली ने कहा कि हम जानते हैं कि कश्मीर में पर्यटक सुरक्षित हैं, लेकिन यहां ऐसी घटना होने के बाद, उनसे यहीं रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती। लगातार बुकिंग रद्द की जा रही है, करीब 80 प्रतिशत बुकिंग रद्द हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अगले एक महीने तक के पैकेज रद्द किये जा रहे हैं। अली ने कहा कि बरसों की मेहनत पर पानी फिर गया। पर्यटकों को कश्मीर फिर से लाने के लिए बहुत कुछ करना होगा।

आतंकवादियों को ऑन द स्पॉट मार दिया जाना चाहिए, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो, जान गंवाने वालों के परिजनों की मांग

पहलगाम जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके अलावा, 17 लोग हमले में घायल हो गए। दहशतगर्दों ने पहलगाम घूमने आए पर्यटकों को धर्म पूछकर गोली बरसाई। इस हमले से देशभर में गुस्सा है और जल्द बदला चाहता है। पीड़ितों के परिजनों ने भी इस नृशंस कृत्य के दोषियों के लिए कठोर सजा की मांग की है। हमले में मारे गए नीरज उधवानी के चाचा भगवान दास ने कहा कि आतंकवादियों को ऑन द स्पॉट मार दिया जाना चाहिए, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो। मीडिया से कहा, “आतंकवादी हमले में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी पत्नी भी वहां थीं, वह सुरक्षित हैं। वे वहां छुट्टियां मनाने गए थे। हम सरकार से मांग करते हैं कि दोषियों को मार दिया जाए… मैं कहता हूं कि आतंकवादी को, चाहे उसका धर्म या जाति कुछ भी हो, मौके पर ही मार दिया जाना चाहिए।” पहलगाम आतंकवादी हमले के पीड़ित अतुल मोने की भाभी राजश्री अकुल ने भी मांग की कि सरकार बिना देरी किए आतंकवादियों को कड़ी सजा दे। आतंकवादियों ने सुशील नथानियल (58) की भी गोली मारकर हत्या कर दी, जो ईस्टर मनाने के लिए अपनी पत्नी, बेटी और बेटे के साथ जम्मू-कश्मीर गए थे। उनके चचेरे भाई संजय कुमरावत ने ‘पीटीआई’ को बताया, ”हमने सुशील नथानिएल की पत्नी और बेटे से फोन पर बात की है। उन्होंने हमें बताया कि आतंकवादियों ने सुशील का नाम पूछा और उसे घुटने टेकने के लिए मजबूर किया, फिर उन्होंने उससे कलमा पढ़ने के लिए कहा। जब सुशील ने कहा कि वह कलमा नहीं पढ़ सकते, तो आतंकवादियों ने उसे गोली मार दी।” उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। कुमरावत ने कहा, “कश्मीर में कायराना हमला कर 26 निर्दोष लोगों की हत्या करने वाले आतंकवादियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि यह पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बने।” राजनाथ सिंह ने उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद बुधवार को जम्मू कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। सूत्रों ने बताया कि करीब ढाई घंटे चली बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. के. सिंह शामिल थे। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और सैन्य अभियान महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई भी बैठक में शामिल हुए।

असम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर देबाशीष भट्टाचार्य की जान बच सकी, क्योंकि वह कलमा पढ़ सकते थे

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 घायल हो गए। आतंकवादियों ने पहलगाम घूमने आए पर्यटकों से उनके धर्म पूछकर गोलियां बरसाईं। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्हें कलमा पढ़ने के लिए भी कहा गया, जिससे उनके धर्म की पहचान हो सके। जिन्होंने कलमा पढ़ा, उन्हें आतंकियों ने छोड़ दिया। इसी तरह असम के एक हिंदू प्रोफेसर को भी आतंकियों ने गोली नहीं मारी, क्योंकि वह कलमा पढ़ सकते थे। इसके चलते असम यूनिवर्सिटी में बंगाली डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर देबाशीष भट्टाचार्य की जान बच सकी। देबाशीष भट्टाचार्य भी उस समय पहलगाम की बेसरन घाटी में अपने परिवार के साथ मौजूद थे, जिस समय आतंकी हमला हुआ। न्यूज 18 से बात करते हुए उन्होंने बताया, ”मैं अपने परिवार के साथ एक पेड़ के नीचे लेटा हुआ था। तभी मैंने सुना कि मेरे आसपास के लोग कलमा पढ़ रहे थे। यह सुनकर मैंने भी पढ़ना शुरू कर दिया। कुछ देर में आतंकी मेरी ओर बढ़ा और मेरे बगल में लेटे व्यक्ति के सिर में गोली मार दी।” उन्होंने आगे बताया, ”इसके बाद आतंकी ने मेरी ओर देखा और पूछा कि क्या कर रहे हो? मैं और तेजी से कलमा पढ़ने लगा। इसके बाद वह किसी वजह से वहां से मुड़कर चला गया।” इसके बाद मौका पाते ही प्रोफेसर ने चुपचाप अपनी पत्नी और बेटे के साथ वहां से छिपकर निकल गए। लगभग दो घंटे तक चलते हुए और घोड़ों के पैरों के निशान को फॉलो करते हुए आखिरकार वह वहां से निकलने और होटल पहुंचने में कामयाब हो सके। भट्टाचार्य ने बताया कि उन्हें अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि वह जिंदा हैं। वहीं, पुणे के एक कारोबारी की बेटी ने भी ऐसा ही दावा किया है कि धर्म पूछने के बाद निशाना बनाया गया। युवती ने दावा किया है कि आतंकवादियों ने पुरुष पर्यटकों से उनका धर्म पूछने के बाद उन्हें निशाना बनाया। अधिकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र के पुणे से आए दो व्यापारी संतोष जगदाले और कौस्तुभ गणबोटे को मंगलवार को हुए हमले में गोलियां मारी गईं, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। पुणे में मानव संसाधन पेशेवर 26 वर्षीय असावरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उनके पिता और चाचा को आतंकवादियों ने बेताब घाटी में स्थित ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ पर गोली मार दी। असावरी ने बताया, ”उन्होंने मेरे पिता से इस्लाम की एक आयत (संभवतः कलमा) सुनाने के लिए कहा। जब वह नहीं सुना पाए तो उन्होंने मेरे पिता पर तीन गोलियां चला दीं। उन्होंने मेरे पिता के सिर पर, कान के पीछे और पीठ में गोली मारी।”

पहलगाम में हुए भयानक आतंकी हमले से बहुत दुखी व स्तब्ध हैं, जिसमें निर्दोष लोगों की जान चली गई: राष्ट्रपति मुइज्जू

माले जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर दुनियाभर में गुस्सा है। रूस, अमेरिका जैसे देशों की निंदा के बाद अब मालदीव ने भी प्रतिक्रिया दी है। मालीदव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने कहा है कि वह पहलगाम में हुए भयानक आतंकी हमले से बहुत दुखी व स्तब्ध हैं, जिसमें निर्दोष लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए हैं। मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू ने एक्स पर पोस्ट किया, ”मालदीव सरकार सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद का मुकाबला करने की अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है। इस कठिन समय में हमारी संवेदनाएं पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ हैं।” इस आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 लोग घायल हैं। मोहम्मद मुइज्जू के अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सहित दुनियाभर के नेताओं ने जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की और भारत के साथ एकजुटता व्यक्त की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत में ट्रंप ने आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की तथा इस जघन्य हमले के दोषियों को न्याय के दायरे में लाने के लिए भारत को पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”उन्होंने (ट्रंप ने) जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हमले में निर्दोष लोगों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त की।” पोस्ट में कहा गया, ”भारत और अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एकजुट हैं।” इससे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा था, ”कश्मीर से बहुत परेशान करने वाली खबर आई है। आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ अमेरिका मजबूती से खड़ा है।”

पहलगाम में 26 पर्यटकों के कत्ल पर पूरे देश में उबाल, पूरा कश्मीर गुस्से में बंद, आतंकियों के खिलाफ बोल रहे इमाम: आजाद

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 पर्यटकों के कत्ल पर पूरे देश में उबाल है। यूपी, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक समेत कई राज्यों के लोगों को आतंकियों ने मजहब पूछकर मार डाला। आतंकियों ने हर उस शख्स को मौत के घाट उतार दिया, जो कलमा नहीं पढ़ पाए और अपना धर्म इस्लाम से अलग बताया। कश्मीर में लंबे समय बाद ऐसा हुआ, जब पर्यटकों पर आतंकवादियों ने इस तरह हमला कर दिया। इससे कश्मीर में टूरिजम इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। इसके अलावा सरकार की ओऱ से बीते एक दशक में जो भरोसा कायम करने की कोशिश हुई है, उसे भी बौखलाए आतंकियों ने कमजोर करने की कोशिश की है। इस बीच पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद ने हमले की निंदा की है तो वहीं यह भी कहा कि कश्मीर अब काफी बदल चुका है। उन्होंने कहा कि अब कश्मीर में लोगों को आतंकवादियों का कोई डर नहीं है। सब लोग खुलकर उनकी निंदा करते हैं। गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘पहले कश्मीर में ऐसी घटनाओं की निंदा किया जाना दुर्लभ बात थी। ऐसा शायद इसलिए होता था क्योंकि कश्मीर के लोगों को उग्रवादियों का डर होता था कि यदि उनके खिलाफ बोले तो जान खतरे में आ जाएगी। लेकिन ऐसा पहली बार मैं देख रहा हूं कि आतंकी हमले से पूरे कश्मीर में लोग सदमे और शोक में है। हर गांव, जिला और शहर में बंद का आयोजन किया गया है। सन्नाटा पसरा है।’ गुलाम नबी आजाद ने कहा कि एक समय तो ऐसा था कि जम्मू-कश्मीर की कुछ मस्जिदों से उग्रवादियों के समर्थन में भाषण दिए जाते थे। उन्हें सहयोग करने की माइक पर अपील की जाती थी। लेकिन पहली बार देख रहा हूं कि मस्जिदों से इमाम आतंकियों के खिलाफ बोल रहे हैं। वे आतंकियों की खुलकर निंदा कर रहे हैं। बता दें कि हमले को लेकर गुलाम नबी आजाद ने दुख जताया है। उन्होंने मंगलवार को ही कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार के दौर में आतंकी घटनाओं पर लगाम कसने में मदद मिली है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के हालात भी काफी बदले हैं। उनका कहना था कि यह हमला देश और जम्मू-कश्मीर के बीच कायम हुए भरोसे को तोड़ने वाला है।

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