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राहुल गांधी के खिलाफ जिन भी धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई , वो जमानती अपराध, क्या जाएगी सांसदी

नई दिल्ली संसद में हुए धक्का-मुक्की कांड के बाद बीजेपी ने नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दिल्ली के संसद मार्ग थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। बीजेपी ने हत्या की कोशिश का भी आरोप लगाया है। इसके साथ ही, भारतीय न्याय संहिता की धारा 109, 115 और 117 के तहत केस दर्ज करवाया गया है। दरअसल, गुरुवार सुबह संसद में अमित शाह द्वारा आंबेडकर पर की गई टिप्पणी को लेकर कांग्रेस विरोध प्रदर्शन कर रही थी। बीजेपी सांसद भी प्रदर्शन कर रहे थे, तभी कांग्रेस और बीजेपी सांसद आमने-सामने आ गए और प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत चोटिल हो गए। भाजपा ने राहुल गांधी पर धक्का देने का आरोप लगाया है। संसद में शिकायत दर्ज करवाने के बाद बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि हमने राहुल गांधी के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। उनके द्वारा शारीरिक हमला और उकसाने को लेकर है यह शिकायत हुई है। इसमें विस्तार में बताया है कि आज घटनाक्रम जो हुआ, जहां एनडीए के सांसद शांतिपूर्वक तरीके से कांग्रेस के झूठ के प्रोपेगैंडा को बेनकाब कर रहे थे, उसी समय राहुल गांधी अपने गठबंधन के सांसदों के साथ उस तरफ कूच करते हैं। जब सिक्योरिटी फोर्सेस के लोग कहते हैं कि ये संसद में जाने का रास्ता है तो जिस तरह का राहुल गांधी का रवैया था, उन्होंने गुस्सा दिखाया। इस परिवार को अपने आप को कानून से ऊपर मानने की आदत पड़ गई है। बीजेपी की महिला सांसद ने भी लगाया गंभीर आरोप वहीं, बीजेपी की नगालैंड से महिला सांसद फांनोन कोन्याक ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी बेहद करीब आकर खड़े हो गए, जिससे मैं असहज हो गई थी। हम बेहद शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान राहुल गांधी आए और मेरे ऊपर चिल्लाने लगे। किसी महिला सांसद पर इस तरह चिल्लाना राहुल को शोभा नहीं देता है। मैं बहुत दुखी हूं और सुरक्षा चाहती हूं। राहुल की गिरफ्तारी में हायर अथॉरिटी से लेनी होगी परमिशन अनिल सिंह कहते हैं कि पुलिस इस मामले में सीरियस धाराओं में केस रजिस्टर नहीं करेगी। यह सिंपल मारपीट का मामला बनेगा। इन सब मामले में 7 साल तक की जेल का प्रावधान है। हालांकि, राहुल गांधी को गिरफ्तार करने के मामले में हायर अथॉरिटी से परमिशन लेने की जरूरत है। अगर, ये तय हो जाए कि इससे शांति भंग हो सकती है और दंगे भड़क सकते हैं। ऐसे में पुलिस राहुल को अरेस्ट कर सकती है। केस दर्ज हुआ तो 7 साल तक की हो सकती है जेल एडवोकेट अनिल सिंह श्रीनेत के अनुसार, राहुल पर जो भी केस दर्ज होगा, वो अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अनुसार होगा। पहले इंडियन पीनल कोड की धारा 151 के तहत जो केस दर्ज होता। वह अब BNS के 189(5) के तहत दर्ज होगा। यानी इसके तहत 5 से अधिक लोग गैरकानूनी तरीके से एक जगह जुटते हैं तो यह केस दर्ज होगा। सिंपल चोट लगने पर 115(2) और गंभीर चोट लगने पर 117(2) लगेगा। इन दोनों ही मामलों में 7 साल तक की सजा हो सकती है। प्रदर्शन शाह के खिलाफ, चोट दूसरे सांसद को, ये जमानती अपराध सु्प्रीम कोर्ट में एडवोकेट अलिल कुमार सिंह श्रीनेत के अनुसार, धक्का-मुक्की के मामले में राहुल गांधी के खिलाफ जिन भी धाराओं में एफआईआर दर्ज होगी, वो जमानती अपराध होंगे। दरअसल, राहुल गांधी अमित शाह के बयान को लेकर उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। ऐसे में अगर किसी दूसरे सांसद को चोट लगती है तो यह संज्ञेय यानी जानबूझकर किया गया अपराध नहीं होगा। ऐसे अपराध में उन्हें तुरंत जमानत मिल सकती है। अगर, यही चोट अमित शाह को लगती तो यह माना जाता कि राहुल ने जान-बूझकर यह अपराध किया होगा। तब उन पर गैर जमानती धाराओं में केस दर्ज हो सकता था। सिंपल धाराओं में केस दर्ज तो 1 सााल तक की सजा वहीं, जान से मारने की धमकी या कोशिश पर बीएनएस की धारा 110 के तहत केस दर्ज होगा। इसमें 3 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है। तुम्हारा जो है! वहीं, बीएनएस की धारा 115(2) के तहत सामान्य केस दर्ज हुआ तो 1 साल तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि, ये भी जमानती ही होगा। संसद के सदस्यों को ये मिले हैं विशेषाधिकार, राहुल को भी मिले संसद के सदस्यों को ये विशेषाधिकार मिले हुए हैं। इनमें है-संसद में बोलने की स्वतंत्रता। संसद या उसकी किसी समिति में कुछ कहने या वोट देने पर सदस्य को अदालत में किसी भी कार्यवाही से छूट। संसद से प्रकाशित किसी रिपोर्ट, कागजात या कार्यवाही पर किसी व्यक्ति के खिलाफ अदालत में कोई कार्यवाही नहीं हो सकती। ये भी विशेषाधिकार मिले हुए हैं संसद की कार्यवाही की वैधता को लेकर अदालतों की ओर से कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता है। संसद की कार्यवाही को बनाए रखने के लिए जो अधिकारी या सांसद शक्तियों का प्रयोग करते हैं, वे अदालत के अधिकारक्षेत्र से बाहर होते हैं। संसद की कार्यवाही से संबंधित किसी सत्य रिपोर्ट का समाचार पत्रों में प्रकाशित होने पर उसे किसी न्यायिक कार्यवाही से छूट दी जाती है, जब तक यह साबित न हो कि यह बदनीयती से किया गया है। हालांकि, किसी भी ऐसे मामले में वीडियो सबूत जरूरी होता है।

इजराइल-हमास जंग में अब तक 45000 मौतें, फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताई सच्चाई

गाजा गाजा में चल रहे इजराइल और हमास जंग को लेकर फिलिस्तीन के स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा दावा किया है. फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि गाजा में इजराइल और हमास के बीच जंग में अब तक 45000 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में बमबारी वाले क्षेत्र के अस्पतालों में 50 से अधिक मृतकों को लाया गया. एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से 45,028 लोग मारे गए हैं और 106,962 अन्य घायल हुए हैं. इसके अलावा चेतावनी दी है कि वास्तविक मौत का आंकड़ा और भी ज्यादा हो सकता है क्योंकि हजारों की संख्या में शव उन मलबे के नीचे दबे हुए हैं जहां पर डॉक्टरों की टीम नहीं पहुंच पाई है. अमेरिका लगातार इजरायल को जंग के दौरान मदद मुहैया करा रहा है। इसके खिलाफ आवाज उठाते हुए 5 फिलिस्तीनियों ने उस पर मानवाधिकार के हनन में शामिल होने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। मंगलवार को घोषित किए गए इस मुकदमे में अमेरिका पर केंद्रीय कानून को लागू करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया गया है, जो न्यायेतर हत्याओं और यातना जैसे घोर उल्लंघनों में शामिल विदेशी सेनाओं को पैसा देने पर रोक लगाता है। मुकदमे में क्या लिखा है? मुकदमे में लिखा है, ”7 अक्टूबर, 2023 को गाजा जंग शुरू होने के बाद से इज़रायली मानवाधिकारों के उल्लंघन में तेजी आने के मद्देनजर लीही कानून को लागू करने में अमेरिका की तरफ से जानबूझकर की गई नाकामी चौंकाने वाली है।” मुकदमे में कहा गया है कि अक्टूबर 2023 की शुरुआत से गाजा में इज़रायल की बमबारी और जमीनी कार्रवाइयों में 45,000 से ज्यादा फ़िलिस्तीनी मारे गए हैं। साथ ही संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के प्रमुख अधिकार समूहों ने इज़रायली फौज पर नरसंहार समेत युद्ध अपराध करने का भी आरोप लगाया है। वादी शिक्षिका ने बयां किया दुख इस मामले में अमल गाजा नाम से जानी जाने वाली एक गाजा शिक्षिका वादी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जंग शुरू होने के बाद से उसे सात बार जबरन विस्थापित किया गया है और उसके परिवार के 20 सदस्य इजरायली हमलों में मारे गए हैं। मुकदमे के साथ दिए गए एक बयान में उसने कहा, ”अगर अमेरिका मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन करने वाली इजरायली इकाइयों को सैन्य सहायता देना बंद कर दे, तो मेरी पीड़ा और मेरे परिवार को होने वाला अकल्पनीय नुकसान काफी हद तक कम हो जाएगा।” 45 हजार से ज्यादा लोगों की मौत पिछले 14 महीने से जंग में 45 हजार से अधिक फिलिस्तीनी इजरायली सैन्य कार्रवाई में मारे जा चुके हैं। वहीं, घायलों की तादाद भी एक लाख के ऊपर है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़े के मुताबिक इजरायली हमले में अब तक 45 हजार 25 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जबकि एक लाख 9 हजार 62 घायल हुए हैं। मारे गए और घायलों में सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं और बच्चों की है। स्वास्थ्य मंत्रालय का ये भी कहना है कि गाजा की 23 लाख की आबादी में से करीब 2 फीसदी आबादी को इजरायल मार चुका है, जबकि 4 फीसदी आबादी घायल है। मृतकों में महिलाएं और बच्चे ज्यादा मौत को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जो आंकड़े दिए गए हैं उसमें महिलाओं और पुरुषों की संख्या नहीं बताई गई है, लेकिन इतना जरूर कहा गया है कि मरने वालों में आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे हैं. दूसरी ओर से इजराइली सेना का कहना है कि उसने बिना कोई सबूत दिए 17,000 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया है. यह युद्ध इजराइल और हमास के बीच लड़ाई का अब तक का सबसे बुरे दौर में है, जिसमें मरने वालों की संख्या गाजा की लगभग 2.3 मिलियन की युद्ध-पूर्व आबादी का लगभग 2 फीसदी है. इजराइल मौत के लिए हमास को ठहराता रहा है जिम्मेदार इजराइल का दावा है कि नागरिकों की मौत के लिए हमास जिम्मेदार है क्योंकि यह घनी आबादी वाले गाजा पट्टी में नागरिक क्षेत्रों के भीतर से काम करता है. अधिकार समूहों और फिलिस्तीनियों का कहना है कि इजराइल नागरिकों की मौतों से बचने के लिए पर्याप्त सावधानी बरतने में विफल रहा है. 7 अक्टूबर, 2023 को शुरू हुई थी जंग युद्ध तब शुरू हुआ जब हमास के नेतृत्व वाले आतंकवादियों ने 7 अक्टूबर, 2023 को दक्षिणी इजराइल में हमला किया, जिसमें लगभग 1200 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर नागरिक थे, और अन्य 250 का अपहरण कर लिया. इजराइल ने भारी बमबारी और फिलिस्तीनी क्षेत्र में जमीनी घुसपैठ का जवाब दिया. लगभग 100 बंधक अभी भी गाजा के अंदर हैं, कम से कम एक तिहाई को मृत माना जा रहा है. बाकियों में से अधिकांश को पिछले साल युद्धविराम के दौरान रिहा कर दिया गया था.  

भाजपा ने धक्का-मुक्की कांड के बाद राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई, लगाया हत्या का आरोप

नई दिल्ली संसद में हुए धक्का-मुक्की कांड के बाद बीजेपी ने नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दिल्ली के संसद मार्ग थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। बीजेपी ने हत्या की कोशिश का भी आरोप लगाया है। इसके साथ ही, भारतीय न्याय संहिता की धारा 109, 115 और 117 के तहत केस दर्ज करवाया गया है। दरअसल, गुरुवार सुबह संसद में अमित शाह द्वारा आंबेडकर पर की गई टिप्पणी को लेकर कांग्रेस विरोध प्रदर्शन कर रही थी। बीजेपी सांसद भी प्रदर्शन कर रहे थे, तभी कांग्रेस और बीजेपी सांसद आमने-सामने आ गए और प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत चोटिल हो गए। भाजपा ने राहुल गांधी पर धक्का देने का आरोप लगाया है। संसद में शिकायत दर्ज करवाने के बाद बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि हमने राहुल गांधी के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। उनके द्वारा शारीरिक हमला और उकसाने को लेकर है यह शिकायत हुई है। इसमें विस्तार में बताया है कि आज घटनाक्रम जो हुआ, जहां एनडीए के सांसद शांतिपूर्वक तरीके से कांग्रेस के झूठ के प्रोपेगैंडा को बेनकाब कर रहे थे, उसी समय राहुल गांधी अपने गठबंधन के सांसदों के साथ उस तरफ कूच करते हैं। जब सिक्योरिटी फोर्सेस के लोग कहते हैं कि ये संसद में जाने का रास्ता है तो जिस तरह का राहुल गांधी का रवैया था, उन्होंने गुस्सा दिखाया। इस परिवार को अपने आप को कानून से ऊपर मानने की आदत पड़ गई है। अनुराग ठाकुर ने कहा, ”वह एनडीए के सांसदों के बीच में दल-बल के साथ कूच कर गए और सांसदों को उकसाया। उन्हें पता था कि सांसदों को चोट लग सकती है, उन्होंने यही किया। मुकेश राजपूत को सिर में चोट लगी और प्रताप सारंगी का भी आगे का सिर फट गया है। हमने धारा 109, 115, 117, 125, 131 और 351 के तहत राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। धारा-109 हत्या की कोशिश की है। यह सीधे तौर पर दिखाता है कि राहुल गांधी ने सोचे समझे तरीके से तय रास्ते पर नहीं गए और साथी सांसदों को उकसाया, जिसके कारण गंभीर चोटें दो सांसदों को लगी हैं।” वहीं, शिकायत दर्ज करवाने गईं भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा, “…रवैया न केवल अभद्र है बल्कि आपराधिक भी है और इसीलिए हम सब आज यहां (पुलिस स्टेशन में) आए हैं और शिकायत दर्ज कराई है, जहां यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सुरक्षा बलों ने राहुल गांधी से बार-बार अनुरोध किया कि आपके लिए एक वैकल्पिक रास्ता बनाया गया है जिसके माध्यम से आप बहुत शांतिपूर्ण तरीके से संसद में प्रवेश कर सकते हैं, लेकिन राहुल ने अनुरोध को अस्वीकार कर दिया…पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।”

कनाडा में पुलिस ने सीधे ही कर डाली प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे की मांग, अब नहीं रहा भरोसा

कनाडा कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के खिलाफ विरोध बढ़ता नजर आ रहा है। अब खबर है कि TPA यानी टोरंटो पुलिस एसोसिएशन ने ट्रूडो के इस्तीफे की मांग कर दी है। संगठन ने यह कदम हाल ही में सरकार की तरफ से प्रस्तावित क्रिमिनल कोड में बदलाव के बाद उठाया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब कनाडा की उप प्रधानमंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने इस्तीफा दिया है। TPA के आधिकारिक हैंडल से पोस्ट किया गया, ‘हमारे सदस्यों का जस्टिन ट्रूडो सरकार से भरोसा उठ गया है कि वह अब सही कारणों से सही काम करेगी। अब इस्तीफा देने और जनता की सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों को किसी और को संभालने देने का समय आ गया है।’ इससे पहले एसोसिएशन ने कहा था, ‘यह बहुत ही हास्यापद है। 9 साल तक कुछ न करने के बाद आपने ऐसे समय का चुनाव किया जब आपकी सरकार अराजकता में उतर रही है और प्रस्तावों के जरिए हमें शांत करने की कोशिश की जा रही है। क्या मजाक है।’ साथ ही पोस्ट में पीएम ट्रूडो को टैग भी किया गया है। सरकार के प्रस्ताव दरअसल, कनाडाई सांसद अनिता आनंद की तरफ से कुछ प्रस्ताव पेश किए गए थे। पहला, ‘क्रिमिनल कोड में संशोधन, ताकि बार बार और हिंसक अपराध करने वालों को जिम्मेदार ठहराया जा सके।’ दूसरा, ‘वाहन की चोरी, तोड़फोड़ और जबरन घुसने जैसे हिंसक अपराधों में जमानत के लिए कड़ी शर्तें।’ तीसरा, ‘निर्यात किए जाने वाले माल की जांच का अधिकार CBSA अधिकारियों को देना।’ वित्त मंत्री का इस्तीफा उप प्रधानमंत्री के साथ-साथ वित्त मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के निर्देश के बाद सोमवार को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने की घोषणा की। फ्रीलैंड ने कहा कि प्रधानमंत्री ट्रूडो ने उनसे वित्त मंत्री पद छोड़ने और मंत्रिमंडल में कोई दूसरी भूमिका लेने के लिए कहा था। फ्रीलैंड ने अपने त्यागपत्र में कहा कि ऐसी स्थिति में उन्होंने मंत्रिमंडल छोड़ने का ही ईमानदार और व्यावहारिक रास्ता अपनाना बेहतर समझा। कनाडा में हाल के समय में ट्रूडो सरकार की लोकप्रियता में लगातार गिरावट आई है। ऐसे में ट्रूडो सरकार की सबसे ताकतवर मंत्री फ्रीलैंड के इस्तीफे को तगड़ा झटका माना जा रहा है।

सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष स्टेशन से पृथ्वी वापसी का कार्यक्रम एक बार फिर स्थगित, अब मार्च के बाद लौटेंगी

नई दिल्ली भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से पृथ्वी वापसी का कार्यक्रम एक बार फिर स्थगित हो गया है। अब अगले वर्ष मार्च के बाद पृथ्वी पर लौटेंगी। नासा ने कहा है कि ISS में मौजूदा चालक दल स्वस्थ और सुरक्षित है। नासा ने घोषणा की कि स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यान, जिसे सुनीता विलियम्स को वापस लाने का कार्य सौंपा गया था, अब मार्च के अंत तक पृथ्वी से लॉन्च नहीं होगा। आपको बता दें कि सुनीता ने जून में ISS में कदम रखा था। पहले यह तय हुआ कि उनकी वापसी फरवरी 2025 में होगी, लेकिन यह फिर एकबार टल गया है। बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान में सुरक्षा संबंधी समस्याएं आने के कारण से वह अंतरिक्ष में फंसी हुई हैं। अंतरिक्ष में रहने का शरीर पर कितना असर अंतरिक्ष में लंबी अवधि तक रहना मानव शरीर पर कई प्रभाव डालता है। ऐसा इसलिए क्योंकि मानव शरीर पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण के तहत काम करने के लिए विकसित हुआ है। अंतरिक्ष में रहते हुए हड्डियों की घनत्व में कमी आती है, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। इसके अलावा, शरीर के मांसपेशियां भी घट जाती हैं। वहां वजन का बोझ नहीं होता। दिल, जिगर और आंखों जैसे अन्य अंगों में भी परिवर्तन होते हैं। हालांकि, अधिकांश बदलाव पृथ्वी पर लौटने के बाद और गुरुत्वाकर्षण में पुनः प्रशिक्षण लेने के बाद होते हैं। सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष यात्रा का अनुभव सुनीता विलियम्स एक अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं और यह उनका तीसरा अंतरिक्ष मिशन है। अब तक उन्होंने अपने मिशनों के दौरान कुल 517 दिन से अधिक समय अंतरिक्ष में बिताया है। एक समय था जब उन्होंने सबसे अधिक समय तक अंतरिक्ष वॉक करने का रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने 51 घंटे से अधिक का समय अंतरिक्ष में बिताया था। जून से फंसी हैं सुनीता विलियम्स सुनीता विलियम्स जून में बोइंग स्टारलाइनर के माध्यम से ISS में पहुंचीं। यह मिशन पहले 7 से 10 दिन का निर्धारित किया गया था। लेकिन बोइंग स्टारलाइनर में सुरक्षा संबंधित तकनीकी खराबियों के कारण, उनका मिशन फरवरी 2025 तक बढ़ा दिया गया था। अब नासा ने सुनीता की वापसी के लिए अगले साल मार्च या अप्रैल की तारीख तय की है। नासा और स्पेसएक्स ने आगामी क्रू हैंडओवर के प्रबंधन के लिए कई विकल्पों पर विचार किया, जिसमें दूसरे ड्रैगन अंतरिक्ष यान का उपयोग और मैनिफेस्ट समायोजन शामिल थे। इसके बाद टीम ने निर्णय लिया कि मार्च के अंत में क्रू-10 लॉन्च करना सबसे अच्छा विकल्प है, ताकि नासा की आवश्यकताएं और 2025 के लिए अंतरिक्ष स्टेशन के उद्देश्यों को पूरा किया जा सके। अफवाहों का खंडन कुछ अफवाहें थीं कि सुनीता विलियम्स का वजन घट चुका है और वह अस्वस्थ हैं, लेकिन नासा ने इन अफवाहों का खंडन किया। सुनीता ने खुद बताया कि वह अंतरिक्ष स्टेशन पर विशेष उपकरणों का उपयोग करके वजन प्रशिक्षण कर रही हैं। इसके अलावा एक पूर्व मिशन के दौरान उन्होंने ISS पर अंतरिक्ष मैराथन भी दौड़ी थी। अंतरिक्ष स्टेशन पर क्रिसमस का जश्न अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर इस सप्ताह क्रिसमस का उत्सव मनाया गया, जिसमें नासा के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बटच विलमोर ने एक अनोखा अंदाज अपनाया। क्रिसमस से पहले इन दोनों ने संता का रूप धारण किया और अंतरिक्ष में रहते हुए छुट्टियों के जश्न का आनंद लिया। क्रिसमस के मौके पर ISS पर उपहार भी पहुंचाए गए। सोमवार को स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान के माध्यम से अंतरिक्ष स्टेशन पर उपहार और अन्य आपूर्ति भेजी गईं। इनमें क्रिसमस के तोहफे और त्योहारों से जुड़ी अन्य सामग्री भी शामिल थी, जिससे ISS पर रह रहे अंतरिक्ष यात्री इस विशेष समय का जश्न मना सके।

भाजपा सांसद प्रताप सारंगी संसद में सीढ़ियों से गिरे, बोले- राहुल गांधी ने धक्का दिया

 नई दिल्ली बीजेपी सांसद प्रताप सारंगी संसद में चोटिल हो गए हैं। सारंगी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर धक्का देने का आरोप लगाया है।सारंगी ने कहा कि राहुल गांधी ने एक सांसद को धक्का दिया जो मेरे ऊपर गिर गए जिसके बाद मैं नीचे गिर गया। उन्होंने बताया कि मैं सीढ़ियों के पास खड़ा था जब राहुल गांधी आए और एक सांसद को धक्का दिया। राहुल गांधी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा- मकर द्वार पर भाजपा सांसदों ने मुझे रोका, मुझे सदन के भीतर जाने से रोका गया। मेरे साथ धक्का-मुक्की की और मुझे धमकाया गया। बाबा साहेब अंबेडकर के अपमान को लेकर विवाद जारी है। विपक्षी सांसदों ने संसद के बाहर विरोध मार्च निकाला। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी नीली कपड़े पहनकर पहुंचे। इस घटनाक्रम से जुड़े तमाम अपडेट – केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रह्लाद जोशी राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंच गए हैं. प्रताप सांरगी का हालचाल जानने दोनों अस्पताल पहुंच गए हैं. – संसद परिसर में बीजेपी सांसद से धक्का-मुक्की की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दे दी गई है. – बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर प्रताप सारंगी का हालचाल जाना. अस्पताल से आने के बाद पात्रा ने बताया कि फिलहाल प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत आईसीयू में हैं. दोनों का बहुत खून बह गया है. उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है. – केंद्रीय मंत्री धर्मेंद प्रधान ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी सामंतवादी हैं. सामंतवादी राहुल ने धक्का दिया. ये देश उनकी जागीर नहीं है. ये परिवार करना क्या चाहता है. – केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद परिसर में धक्का मुक्की को लेकर राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मैं राहुल गांधी से सवाल करना चाहता हूं कि ये शारीरिक ताकत का प्रदर्शन करने की जगह नहीं है. अगर सब लोग अपनी ताकत का प्रदर्शन करने लगेंगे तो संसद कैसे चलेगी? पहलवानी दिखाने का क्या मतलब है? ये कराटे या कुंगफू की जगह नहीं है. ये किसी राजा की निजी संपत्ति नहीं है बल्कि लोकतंत्र का मंदिर है. यह स्मार्टनेस दिखाने की जगह नहीं है. संसद कोई कुश्ती का मंच नहीं है. राहुल ने शारीरिक ताकत दिखाई है. ये बॉक्सिंग का अखाड़ा नहीं है. मैं राहुल गांधी का धिक्कार करता हूं. – केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संसद कोई कुश्ती का मंच नहीं है. राहुल गांधी को सांसदों के खिलाफ अपनी ताकत का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए. – सूत्रों के हवाले से खबर है कि प्रताप सारंगी मामले में बीजेपी प्रोटेस्ट के वीडियो खंगाल रही है. धक्के के आरोप को वेरिफाई करने के लिए अगर राहुल द्वारा बीजेपी सांसद को धक्का देने का वीडियो मिलता है तो बीजेपी राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करा सकती है. – केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, प्रह्लाद जोशी और कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल राम मनोहर लोहिया अस्पताल जा रहे हैं. प्रताप सिंह सारंगी का हाल-चाल जानने मंत्री अस्पताल पहुंच रहे हैं. राहुल गांधी ने दी प्रतिक्रिया प्रताप सारंगी के आरोप के बाद राहुल गांधी ने कहा कि कैमरे में सब कैद है. मैं सदन में जाने की कोशिश कर रहा था. बीजेपी के सांसदों ने मुझे धकेला और धमकाया. खड़गे जी को भी धक्का दिया. हमें धक्का-मुक्की से हमें कुछ नहीं होता है. बीजेपी रे सांसद हमें संसद में जाने से नहीं रोक सकते. राहुल ने कहा कि मैं संसद के भीतर जाना चाहता था. संसद में जाना मेरा अधिकार है मुझे रोकने की कोशिश की गई. हमें संसद के भीतर जाने से रोका गया. बीजेपी के सांसद धक्का-मुक्की कर रहे थे. राहुल गांधी ने कहा कि ये संसद का एंट्रेंस हैं. बीजेपी के सांसद मुझे धकेल रहे थे, धमका रहे थे. बीजेपी के सांसदों ने एंट्रेंस रोक दी. वे मुझे लगातार धक्का दे रहे थे और धमका रहे ते. अमित शाह के विरोध में प्रदर्शन कर रही कांग्रेस इस संबंध में आज इंडिया ब्लॉक प्रोटेस्ट मार्च कर रही है. राज्यसभा में बाबा साहेब आंबेडकर पर गृहमंत्री अमित शाह के बयान के विरोध में उनके इस्तीफे और माफी की मांग करते हुए इंडिया ब्लॉक प्रोटेस्ट मार्च कर रही है. यह मार्च संसद में आंबेडकर की प्रतिमा से लेकर मकर द्वार तक किया जा रहा है. इंडिया ब्लॉक के सांसद नीले कपड़े पहनकर आंबेडकर प्रतिमा से चलकर मकर द्वार जाने की कोशिश कर रहे हैं. कांग्रेस का कहना है कि गृहमंत्री अमित शाह ने आंबेडकर का अपमान किया है. उनका अपराध अक्षम्य है. पूरा तंत्र उन्हें बचाने में लगा है. जो गृहमंत्री ने कहा है, हम वही बात कर रहे हैं. उनके शब्दों को तरोड़ा-मरोड़ा नहीं गया है. वे माफी मांगने के बजाए धमका रहे हैं. हम इनकी धमकियों से नहीं डरेंगे. राहुल गांधी ने दी प्रतिक्रिया प्रताप सारंगी के आरोप के बाद राहुल गांधी ने कहा कि हां किया है, ठीक है.. धक्का मुक्की से कुछ होता नहीं है.  मैं संसद के भीतर जाना चाहता था. संसद में जाना मेरा अधिकार है मुझे रोकने की कोशिश की गई. हमें संसद के भीतर जाने से रोका गया. बीजेपी के सांसद धक्का-मुक्की कर रहे थे. बता दें कि इस संबंध में आज इंडिया ब्लॉक प्रोटेस्ट मार्च कर रही है. राज्यसभा में बाबा साहेब आंबेडकर पर गृहमंत्री अमित शाह के बयान के विरोध में उनके इस्तीफे और माफी की मांग करते हुए इंडिया ब्लॉक प्रोटेस्ट मार्च कर रही है. यह मार्च संसद में आंबेडकर की प्रतिमा से लेकर मकर द्वार तक किया जा रहा है. इंडिया ब्लॉक के सांसद नीले कपड़े पहनकर आंबेडकर प्रतिमा से चलकर मकर द्वार जाने की कोशिश कर रहे हैं. कांग्रेस का कहना है कि गृहमंत्री अमित शाह ने आंबेडकर का अपमान किया है. उनका अपराध अक्षम्य है. पूरा तंत्र उन्हें बचाने में लगा है. जो गृहमंत्री ने कहा है, हम वही बात कर रहे हैं. उनके शब्दों को तरोड़ा-मरोड़ा नहीं गया है. वे माफी मांगने के बजाए धमका रहे हैं. हम इनकी धमकियों से नहीं डरेंगे.

कुलगाम में आतंकियों से मुठभेड़, 5 आतंकी ढेर; 2 सुरक्षाकर्मी घायल

 कुलगाम जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के बेहिबाग क्षेत्र स्थित कद्देर गांव में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली। आज (गुरुवार) तड़के सुबह सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच शुरू हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 5 आतंकियों को मार गिराया है, इलाके में फिलहाल तलाशी अभियान जारी है। कई और आतंकवादियों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, इलाके में आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद सुरक्षाबलों की ओर से ऑपरेशन चलाया गया। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम को इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद यह अभियान शुरू किया गया था। सेना के चिनार कॉर्प्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी है। जिसके अनुसार आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में विशेष खुफिया इनपुट के आधार पर भारतीय सेना ने कुलगाम में एक संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया। संदिग्ध गतिविधि देखी गई। आतंकवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग की, जिसके जवाब में सेना की ओर से जवाबी कार्रवाई की गई। बता दें कि हाल ही के दिनों में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच कई मुठभेड़ हुई हैं, जिनमें कई आतंकवादी और उनके कमांडर मारे गए हैं। इस दौरान सुरक्षाबलों के जवान भी घायल हुए हैं। पिछले कुछ वर्षों में कश्मीर घाटी को जम्मू से विभाजित करने वाले पीर पंजाल क्षेत्र में आतंकवाद में उछाल देखा गया है। आतंकी घटनाओं में बढ़ोतरी के बाद तेज कार्रवाई पिछले कुछ समय से जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियां बढ़ने के बाद सुरक्षाबलों ने घाटी में अभियान तेज कर दिया है। इससे पहले 28 अक्टूबर को जम्मू के अखनूर इलाके में सुरक्षाबलों ने 3 आतंकियों को मार गिराया था। तब आतंकियों ने सेना के काफिले पर हमला किया था। सेना ने दी थी कड़ी प्रतिक्रिया अखनूर की घटना के दौरान आतंकियों ने एक एंबुलेंस पर फायरिंग की थी। इसके बाद सेना और पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की और घुसपैठ कर रहे आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया। इस ऑपरेशन में 3 आतंकी मारे गए थे। उनके पास से हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए थे।सुरक्षाबलों का कहना है कि घाटी में अमन-चैन बहाल करने के लिए आतंकियों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

जनवरी 2025 में उत्तराखंड आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला प्रदेश बन जाएगा

देहरादून उत्तराखंड में नए साल पर जनवरी से यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू किए जाने की घोषणा की गई है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उत्तराखंड में जनवरी 2025 से समान नागरिक संहिता लागू हो जाएगी। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस तरह उत्तराखंड आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला प्रदेश बन जाएगा।  सचिवालय में उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) की बैठक के दौरान सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने संकल्प के अनुसार, समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में होमवर्क पूरा कर चुकी है। सीएम धामी ने कहा कि मार्च 2022 में प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ही प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर 7 फरवरी 2024 को राज्य विधानसभा से समान नागरिक संहिता विधेयक 2024 पारित किया गया। इस विधेयक पर महामहिम राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद 12 मार्च 2024 को इसका नोटिफिकेशन जारी किया गया। नियमावली हुई तैयार सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अब समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 अधिनियम की नियमावली भी तैयार कर ली गई है। इस तरह उत्तराखंड अब जनवरी से समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सीएम ने अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए हैं। उन्होंने संहिता के प्रावधान लागू करने के लिए कार्मिकों का समुचित प्रशिक्षण देने के साथ ही सभी तरह की आधारभूत सुविधाएं जुटाने का निर्देश दिया। साथ ही, अधिक से अधिक सेवाओं को ऑनलाइन रखते हुए, जनसामान्य की सुविधा का ख्याल रखने की बात कही है। मोबाइल एप भी किया गया तैयार मुख्यमंत्री ने कहा कि जन सामान्य की सुलभता को देखते हुए समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए एक पोर्टल तथा मोबाइल एप भी तैयार किया गया है। इससे पंजीकरण, अपील आदि की समस्त सुविधाएं ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। सीएम योगी ने कहा कि जनवरी 2025 में उत्तराखंड में राज्य समान नागरिक संहिता लागू हो जाएगी। सीएम ने कहा कि उत्तराखंड का समान नागरिक संहिता कानून, सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की मूल भावना पर चलते हुए समाज को नई दिशा देगा। यह कानून विशेषकर देवभूमि की महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के नए द्वार खोलेगा।

अरब के कई देश पाकिस्तान से आने वाले भिखारियों से परेशान, भिखारियों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति का ऐलान

इस्लामाबाद  पाकिस्तान की सरकार ने 4300 से ज्यादा कथित भिखारियों को नो-फ्लाई लिस्ट में डाल दिया है। पाकिस्तान ने यह कदम सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देशों की चेतावनी के बाद उठाया है। इन देशों ने पाकिस्तान से कहा था कि वो अपने यहां से ऐसे लोगों को ना भेजे, जो धार्मिक यात्रा के वीजा पर आकर भीख मांगते हैं। तीर्थयात्री बनकर सऊदी अरब आए कुछ पाकिस्तानियों को भीख मांगते हुए गिरफ्तार भी किया गया था। इस पर सऊदी अरब ने पाकिस्तान के सामने अपनी चिंता जाहिर की। वहीं यूएई और दूसरे अरब देशों की ओर से भी इस तरह की शिकायत पाकिस्तान को मिली थी। पाक अखबार डॉन के मुताबिक, सऊदी अरब और दूसरे देशों की चेतावनी के बाद पाकिस्तान ने 4300 से ज्यादा ऐसे लोगों को नो-फ्लाई लिस्ट यानी एग्जिट कंट्रोल लिस्ट में डाला है, जिन पर उमरा वीजा पर सऊदी अरब जाकर वहां भीख मांगने का आरोप है। इसके साथ ही पाकिस्तान ने उमरा एक्ट लाने की भी योजना बनाई है, ताकि उमरा यात्रा को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सके। सऊदी हज मंत्रालय ने पाकिस्तान को उमरा वीजा पर सऊदी अरब में प्रवेश करने वाले भिखारियों की बढ़ती संख्या के बारे में चेतावनी दी थी। पाकिस्तान ने सऊदी को दिया भरोसा पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन रजा नकवी ने सऊदी अरब के उप गृह मंत्री नासिर बिन अब्दुलअजीज अल दाउद को ये जानकारी दी है कि उनकी सरकार ने ‘भिखारी माफिया’ के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए कड़े कदम उठाए हैं, जो भीख मांगने के लिए लोगों को सऊदी भेजते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अरब देशों में पकड़े गए 90 प्रतिशत भिखारी पाकिस्तान के हैं। इस समस्या के कारण सऊदी अधिकारियों ने इस्लामाबाद से इस पर तुरंत कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं करने पर असली पाकिस्तानी उमरा और हज यात्रियों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। पिछले साल सितंबर में तीर्थयात्री बनकर गए 16 पाकिस्तानी लोगों को सऊदी अरब में भीख मांगते गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से ही सऊदी सरकार इस मामले में सख्त है। समस्या से निपटने के लिए पाकिस्तान ने उमरा एक्ट लाने की योजना बनाई है। यह कानून उन ट्रैवल एजेंसियों को नियंत्रित करेगा, जो उमरा यात्राओं की सुविधा प्रदान करती हैं। पाकिस्तानी धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने ऐसी एजेंसियों को कानूनी निगरानी में लाने और भिखारियों को धार्मिक तीर्थयात्रा की आड़ में सऊदी अरब जाने से रोकने के लिए यह कानून बनाने का फैसला लिया है।

कैंसर मरीजों के लिए गुड न्यूज: रूस ने दुनिया को दिया बड़ा तोहफा, कैंसर वैक्सीन बनाने का किया दावा, कहा – फ्री में बांटेंगे

मॉस्को रूस ने अभी तक कैंसर के वैक्सीन का नाम तय नहीं किया है। अगर दावा सच है तो पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ी राहत है। कैंसर जैसी बीमारी का नाम सुनते ही लोगों की रूह कांप जाती है। यह एक गंभीर बीमारी है, जो पूरी दुनिया में तेजी से फैल रही है। इस बीच एक बहुत बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। रूस ने दावा किया है कि उसने कैंसर के मरीजों के लिए वैक्सीन बना ली है। यह वैक्सीन साल 2025 की शुरुआत में बाजार में आ जाएगी। इसके साथ ही रूस ने ऐलान किया है कि यह वैक्सीन सभी लोगों को फ्री में दी जाएगी। अगर रूस का यह दावा सच है, तो पूरी दुनिया के लिए यह वैक्सीन किसी संजीवनी से कम नहीं हैं। रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय के रेडियोलॉजी मेडिकल रिसर्च सेंटर के जनरल डायरेक्टर एंड्री काप्रिन (Andrey Kaprin) ने इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि देश ने कैंसर के खिलाफ अपना स्वयं का mRNA वैक्सीन बना लिया है। यह वैक्सीन लोगों को फ्री में दी जाएगी। हालांकि अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आई कि यह वैक्सीन कैंसर के किस इलाज में काम आएगी और यह कितना प्रभावी रहेगी। साल 2025 के शुरुआत में होगी लॉन्च रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐलान किया है उसने कैंसर के खिलाफ एक वैक्सीन बनाई है। इसे साल 2025 की शुरुआत से रूस के कैंसर रोगियों को फ्री में लगाया जाएगा। वहीं, गामांटा नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी के डायरेक्टर एलेग्जेंडर गिंट्सबर्ग का कहना है कि कैंसर वैक्सीन के प्री-क्लिनिकल ट्रायल में पता चला है कि यह कैंसर के विकास और उसके फैलाव को रोकती है। इससे पहले, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि रूसी वैज्ञानिक कैंसर के लिए वैक्सीन बना रहे हैं। जल्द ही यह वैक्सीन कैंसर मरीजों को मुहैया कराई जाएगी। कहा जा रहा है कि अन्य देश भी कुछ इसी तरह की वैक्सीन बनाने में जुट गए हैं। किस कैंसर का इलाज करेगी वैक्सीन? इस वैक्सीन का इस्तेमाल स्पष्ट रूप से कैंसर रोगियों के इलाज के लिए किया जाएगा। रूसी सरकारी वैज्ञानिकों ने इसे लेकर ऐसी टिप्पणी की है कि, प्रत्येक शॉट व्यक्तिगत रोगी के लिए रजिस्टर्ड है, जो पश्चिम में विकसित किए जा रहे कैंसर टीकों के समान है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह वैक्सीन किस कैंसर के इलाज के लिए बनाई गई है, यह कितनी प्रभावी है या रूस इसे कैसे लागू करने की योजना बना रहा है। वैक्सीन का नाम सामने नहीं आया है। 2022 में बढ़े थे कैंसर के मामले दुनिया के बाकी हिस्सों की तरह, रूस में भी कैंसर की दर बढ़ रही है, 2022 में 635,000 से अधिक मामले दर्ज किए जाएंगे। माना जाता है कि कोलन, स्तन और फेफड़ों का कैंसर देश में इस बीमारी का सबसे आम रूप है।उसी तरह पारंपरिक टीके बीमारी को रोकने के लिए वायरस का इस्तेमाल करते हैं, ये कैंसर कोशिकाओं की सतह से हानिरहित प्रोटीन का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें एंटीजन के रूप में जाना जाता है। जब इन एंटीजन को शरीर में पेश किया जाता है, तो इसे उनके खिलाफ एंटीबॉडी डेवलप करने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करना चाहिए। अन्य देश भी अपने स्वयं के व्यक्तिगत कैंसर टीके विकसित करने के लिए काम कर रहे हैं। AI से तेजी से बनेगी पर्सनलाइज्ड वैक्सीन रूस के वैक्सीन विशेषज्ञ गिन्ट्सबर्ग (Gintsburg) ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन बनाने में एक घंटे से कम समय लगेगा। मौजूदा समय में यह प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है। इसकी वजह ये है कि यह वैक्सीन कैसी हो, इसके लिए मैट्रिक्स मैथेड का इस्तेमाल किया जाता है। बता दें कि मैट्रिक्स गणित के कैलकुलेशन करने का एक तरीका है। लेकिन AI और न्यूरल नेटवर्क कंप्यूटिंग की मदद से इसे महज 30 मिनट से 1 घंटे में पूरा किया जा सकेगा।

मेहुल चोकसी मामले में 2,565.90 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं और उन्हें नीलाम किया जाएगा : निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पीड़ितों या सही दावेदारों को 22,280 करोड़ रुपये की संपत्तियां वापस कर दी हैं और आर्थिक अपराधियों के खिलाफ लड़ाई निरंतर जारी रहेगी। सीतारमण ने वर्ष 2024-25 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों के पहले बैच पर लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि भगोड़े विजय माल्या की 14,131.6 करोड़ रुपये की संपत्ति सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वापस कर दी गई है। उन्होंने कहा कि नीरव मोदी मामले में 1,052.58 करोड़ रुपये की संपत्ति सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और निजी बैंकों को वापस कर दी गई है। वित्त मंत्री के जवाब के अनुसार, मेहुल चोकसी मामले में 2,565.90 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं और उन्हें नीलाम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) मामले में, धोखाधड़ी के शिकार वास्तविक निवेशकों को 17.47 करोड़ रुपये की संपत्तियां वापस कर दी गईं। उन्होंने कहा, ‘पीएमएलए के मामले में, ईडी ने प्रमुख मामलों में कम से कम 22,280 करोड़ रुपये की संपत्तियां सफलतापूर्वक वापस हासिल की हैं… हमने किसी को नहीं छोड़ा है, भले ही वे देश छोड़कर भाग गए हों, हम उनके पीछे पड़े हैं। ईडी ने यह पैसा इकट्ठा किया है और बैंकों को वापस दे दिया है।’ सीतारमण ने कहा, ‘इसलिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि हमने आर्थिक अपराध करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ा है। हम उनके पीछे पड़े हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जो पैसा बैंकों में वापस जाना है, वह वापस आ जाए।’ विदेशों में जमा काले धन के संबंध में कुछ सांसदों के सवालों पर वित्त मंत्री ने कहा कि 2015 का काला धन अधिनियम वास्तव में बहुत से करदाताओं पर निवारक प्रभाव डाल रहा है और वे अपनी विदेशी संपत्ति का खुलासा करने के लिए स्वयं आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी संपत्ति का खुलासा करने वाले करदाताओं की संख्या 2021-22 में 60,467 से बढ़कर 2024-25 में दो लाख हो गई है।

कड़कड़डूमा कोर्ट ने दिल्ली दंगों के आरोप में उमर खालिद को 28 दिसंबर से 3 जनवरी तक जमानत की मंजूरी दी

नई दिल्ली जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को दिल्ली दंगों के मामले में अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए सात दिन की अंतरिम जमानत मिल गई है। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने खालिद को 28 दिसंबर से 3 जनवरी तक जमानत की मंजूरी दी है। क्या है मामला? उमर खालिद फिलहाल 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के एक बड़े षड्यंत्र मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज है। खालिद ने पहले भी नियमित जमानत की मांग की थी, जो अदालत ने खारिज कर दी थी। जमानत की शर्तें अंतरिम जमानत के दौरान खालिद को कोर्ट द्वारा निर्धारित सभी नियमों का पालन करना होगा। इस अवधि के बाद उन्हें दोबारा हिरासत में लौटना होगा। पृष्ठभूमि : खालिद, जेएनयू के पूर्व छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। सितंबर 2020 से जेल में बंद उमर पर 2020 दिल्ली दंगों की साजिश रचने का आरोप है। उन्होंने देरी और समानता के आधार पर नियमित जमानत की भी मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

नाव दुर्घटना में करीब 60 लोगों को ले जा रही एक नौका डूब गई, 20 लोग बचाए गए, 7 अब भी लापता

मुंबई महाराष्ट्र के तट पर एक नाव दुर्घटना में करीब 60 लोगों को ले जा रही एक नौका एलीफेंटा जाते समय डूब गई। भारतीय तटरक्षक बल ने अब तक 20 लोगों को बचा लिया है, जिन्हें तटरक्षक जहाज सुभद्रा कुमार चौहान पर सवार किया गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक शव भी बरामद हुआ है, जबकि 5-7 लोग अभी भी लापता हैं। भारतीय तटरक्षक अधिकारी घटनास्थल पर राहत और खोज अभियान चला रहे हैं। मुख्यमंत्री का बयान : नागपुर में महाराष्ट्र विधानसभा के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “मुझे प्रारंभिक जानकारी मिली है कि नाव पर लगभग 30 से 35 लोग सवार थे। 20 लोगों को बचा लिया गया है और कुछ लोग लापता हैं। विस्तृत जानकारी प्राप्त होने पर मैं सदन में बयान दूंगा।” मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि नाव दोपहर करीब 3:15 बजे एलीफेंटा के लिए रवाना हुई थी। नेताओं ने जताई चिंता : शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें उम्मीद है कि सभी को सुरक्षित बचा लिया जाएगा। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, शायद एक जान गई है। हमारी प्रार्थना है कि किसी की जान का नुकसान न हो।” स्थिति पर नजर : अधिकारियों द्वारा अधिक जानकारी जुटाई जा रही है और खोज अभियान जारी है। मुख्यमंत्री ने रेस्क्यू ऑपरेशन के हर पहलू पर निगरानी का आश्वासन दिया है।

Airtel ने सीमा पर गांवों में कनेक्टिविटी पहुंचाई, अब LOC पर तैनात सैनिकों का अपने परिवारों के साथ संपर्क सरल हो जाएगा

जम्मू जम्मू कश्मीर में LOC पर तैनात सैनिकों व लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब LOC पर तैनात सैनिकों का अपने परिवारों के साथ संपर्क सरल हो जाएगा। भारत की अग्रणी टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनियों में से एक भारती एयरटेल (Airtel) ने भारतीय सेना के साथ सांझेदारी करते हुए उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा, बारामूला और बांदीपोरा जिलों में नियंत्रण रेखा (LOC) के पास स्थित गांवों में कनेक्टिविटी पहुंचाई है। कंपनी ने इन इलाकों में 15 मोबाइल टावर लगाए हैं, जिनसे स्थानीय निवासियों को लाभ मिलेगा और एलओसी (LOC) पर तैनात सैनिकों को अपने परिवारों के साथ संपर्क बनाए रखने और ऑपरेशनल समन्वय बेहतर करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री “वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम” के तहत कच्छल, बलबीर, रजदान पास, ताया टॉप, उस्ताद, काठी और चीमा जैसे गांव अब पूरे देश से जुड़ गए हैं। ये गांव केरन, मच्छल, तंगधार, गुरेज और उड़ी घाटी जैसे क्षेत्रों में स्थित हैं। इन क्षेत्रों में एयरटेल एकमात्र निजी टेलीकॉम ऑपरेटर है जो अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है। भारतीय सेना के साथ सहयोग कर एयरटेल ने दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क सेवाओं को मजबूत बनाया है। हाल ही में कंपनी ने आवागमन के लिए कठिन गलवान घाटी और दौलत बेग ओल्डी (BDO) में भी कनेक्टिविटी स्थापित की है, जो भारत की सबसे उत्तरी सैन्य चौकी के रूप में जाना जाता है। यह उपलब्धि देश के सबसे दुर्गम क्षेत्रों में भी विश्वसनीय नेटवर्क सेवा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस सांझेदारी से न केवल स्थानीय निवासियों की जीवनशैली में सुधार होगा, बल्कि सेना की कार्यक्षमता और संचार सुविधा में भी बड़ा बदलाव आएगा।

केंद्रीय मंत्री ने बताया ने बताया-इस साल 2.68 करोड़ घर बनकर तैयार हो चुके, जिनमें से 73 प्रतिशत महिलाओं के नाम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत इस साल 13 दिसंबर तक 2.68 करोड़ घर बनकर तैयार हो चुके हैं, जिनमें से 72.66 लाख घर पूरी तरह महिलाओं के नाम पर हैं और 1.22 करोड़ घर पत्नी और पति के नाम पर हैं। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, पीएमएवाई-जी के तहत महिलाओं के स्वामित्व वाले घरों की कुल संख्या 1.95 करोड़ हो गई है, जो कि पूरे हो चुके घरों का 73 प्रतिशत है। ग्रामीण विकास राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने निचले सदन में एक लिखित जवाब में कहा कि पीएमएवाई-जी दिशा-निर्देश महिलाओं के नाम पर या उनके पति के साथ मिलकर घर को मंजूरी देने का प्रावधान करते हैं। महिलाओं के सशक्तीकरण को सुनिश्चित करने के लिए, एक परामर्श जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि पीएमएवाई-जी के तहत सभी घरों में स्वामित्व के लिए स्वीकृत की गई डिटेल्स (अकेले या संयुक्त स्वामित्व में) में परिवार की महिला सदस्यों के नाम शामिल होने चाहिए। इसी के साथ महिला सदस्य को स्वीकृति पत्रों में सेकंडरी ओनर के रूप में जोड़ा जा सकता है, जहां प्रारंभिक स्वीकृति पहले से ही पुरुष सदस्य के नाम पर दी गई है। केंद्रीय मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में “सभी के लिए आवास” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, ग्रामीण विकास मंत्रालय 1 अप्रैल 2016 से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) लागू की है। इस योजना का उद्देश्य पात्र ग्रामीण परिवारों को सहायता प्रदान करना है, जिसका लक्ष्य मार्च 2029 तक बुनियादी सुविधाओं के साथ 4.95 करोड़ पक्के घरों का निर्माण करना है। केंद्रीय मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 3.33 करोड़ घरों का आवंटन किया गया है, जिनमें से 3.22 करोड़ घरों को मंजूरी दी गई है और 2.68 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके अलावा, पीएमएवाई-जी की महिला लाभार्थी आजीविका और रोजगार के अवसरों के लिए स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी हैं। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि डीएवाई-एनआरएलएम योजना स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को बैंकों से ऋण प्राप्त करने में सहायता करती है। इन एसएचजी के सदस्य अपने व्यवसायों को बढ़ावा देने सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए ऐसे ऋणों का उपयोग करते हैं। इस मिशन की शुरुआत से लेकर अब तक महिलाओं के नेतृत्व वाले एसएचजी को कुल 9.74 लाख करोड़ रुपये के बैंक ऋण वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा, डीएवाई-एनआरएलएम ने देश भर में 10.05 करोड़ ग्रामीण परिवारों को 90.87 लाख एसएचजी में संगठित किया है।  

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