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विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी, चीन के साथ विवाद सुलझाने को चल रही बड़ी तैयारी

बीजिंग भारत और चीन दोनों ही वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के प्रबंधन के लिए अगले कदमों पर विचार-विमर्श करने को लेकर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता और अन्य बैठकों की तैयारी कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की यह टिप्पणी भारत और चीन के बीच नई दिल्ली में सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्यकारी तंत्र (WMCC) के तहत वार्ता के एक दिन बाद की। डब्ल्यूएमसीसी की गुरुवार को नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल के अनुरूप सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं सौहार्द बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की थी। भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में गतिरोध वाले दो स्थानों से सैनिकों को वापस बुलाए जाने के बाद एक अहम वार्ता तंत्र के तहत बृहस्पतिवार को अपनी पहली कूटनीतिक बातचीत में सीमा विवाद से हासिल हुए निष्कर्षों पर विचार किया ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके। जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में एक सवाल के जवाब में कहा कि विशेष प्रतिनिधियों की बैठक की तैयारियां जारी हैं। उन्होंने कहा, ‘हमने विदेश सचिव स्तर की बैठक के बारे में भी बात की। ये बैठकें होने के बाद हम अगले कदमों पर चर्चा करेंगे।” विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि डब्ल्यूएमसीसी बैठक से संबंधित भारतीय बयान में सैनिकों की वापसी प्रक्रिया के कार्यान्वयन के बारे में बात की गई। उन्होंने कहा, ‘‘यह एक प्रक्रिया है जो पूरी हो चुकी है। और अब यह तनाव कम करने की प्रक्रिया की ओर बढ़ेगी, जिसका उल्लेख (संसद में) विदेश मंत्री के बयान में भी किया गया है।’ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में जायसवाल ने कहा कि भारतीय पक्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ‘जहां भी गश्त की जानी थी, जो भी स्थिति बहाल होनी थी, वह कर दी गई है।’ भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध मई 2020 में शुरू हुआ था और उस वर्ष जून में गलवान घाटी में हुई झड़प के परिणामस्वरूप दोनों पड़ोसियों के बीच संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया था। यह गतिरोध कुछ सप्ताह पहले देपसांग और डेमचोक में सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद समाप्त हुआ था।

भारत ने जारी कर दी अर्जेंट एडवाइजरी, तुरंत सीरिया छोड़ दें, विद्रोहियों ने मचा दिया कत्लेआम

सीरिया सीरिया में विद्रोहियों के कत्लेआम और उथल-पुथल को देखते हुए भारत ने अपने नागरिकों के लिए अर्जेंट एडवाइजरी जारी कर दी है। भारत की तरफ से जारी सला में कहा गया है कि लोगों को सीरिया जाने से बचना चाहिए। इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने सीरिया में रहने वाले भारतीय नागरिकों से कहा है कि वे तुरंत सीरिया छोड़कर निकलने की कोशिश करें। इसके अलावा जो लोग सीरिया नहीं छोड़ पा रहे हैं वे भारतीय दूतावा के संपर्क में रहें। विदेश मंत्रालय ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। हेल्पलाइन नंबर है- +963993385973. इसपर वॉट्सऐप मेसेज भी भेजा जा सकता है। इसके अलावा hoc.damascus@mea.gov.in पर ईमेल के जरिए भी दूतावास से संपर्क किया जा सकता है। सीरिया में इस्लामवादियों के नेतृत्व में विद्रोहियों का नियंत्रण बढ़ने के बीच भारत ने शुक्रवार को कहा था कि वह वहां की स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है। विद्रोहियों ने देश के सबसे बड़े शहर अलेप्पो के अधिकतर भूभाग पर कब्जा करने के बाद गुरुवार को मध्य सीरिया के शहर होम्स को भी काफी हद तक अपने कब्जे में कर लिया है। मंत्रालय ने कहा, “जो लोग जा सकते हैं, उन्हें जल्द से जल्द उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों से सीरिया छोड़ने की सलाह दी जाती है और अन्य लोगों से अनुरोध है कि वे अपनी सुरक्षा के बारे में अत्यधिक सावधानी बरतें तथा अपनी गतिविधियों को न्यूनतम तक सीमित रखें।” गौरतलब है कि इस्लामी आतंकवादी समूह हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) ने हमा के प्रमुख शहर पर कब्जा कर लिया है और वे होम्स शहर की ओर बढ़ रहे हैं। हजारों लोगों को होम्स छोड़कर जाना पड़ा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने उत्तर सीरिया में हाल में लड़ाई तेज होने पर ध्यान दिया है। हम स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं। सीरिया में लगभग 90 भारतीय नागरिक हैं, जिनमें से 14 संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न संगठनों के लिए काम कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “हमारा मिशन हमारे नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार उनसे संपर्क बनाए हुए है।” 

तेलंगाना में कार अनियंत्रित होकर तालाब में गिरने से हादसा, पांच युवकों की मौत, एक घायल

यदाद्री भुवनगिरी तेलंगाना के यदाद्री भुवनगिरी जिले के गांव जलालपुर में शनिवार तड़के एक कार अनियंत्रित होकर तालाब में गिरने से पांच युवकों की मौत हो गई और एक घायल हो गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि दुर्घटना तड़के तब हुयी, जब कार सवार युवक हैदराबाद से भूदान पोचमपल्ली जा रहे थे। तभी उनकी कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने गहरे तालाब में जा गिरी। इसमें पांच युवकों की मौत हो गयी, जबकि एक घायल युवक तैरकर तालाब के बांध तक पहुंचने में सफल रहा। सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और कार को तालाब से बाहर निकाला। उन्होंने घायल युवक को भुवनगिरी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया है। सूत्रों के अनुसार, मृतकों में हर्ष, दिनेश, वामशी, बालू और विनय के हैं। इस घटना से संबंधित मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है।  

तुरंत सीरिया छोड़ दें, भारतीय नागरिकों को अर्जेंट एडवाइजरी की जारी

नई दिल्ली सीरिया में विद्रोहियों के कत्लेआम और उथल-पुथल को देखते हुए शुक्रवार देर रात भारत ने अपने नागरिकों के लिए अर्जेंट एडवाइजरी जारी कर दी है। भारत की तरफ से जारी सला में कहा गया है कि लोगों को सीरिया जाने से बचना चाहिए। इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने सीरिया में रहने वाले भारतीय नागरिकों से कहा है कि वे तुरंत सीरिया छोड़कर निकलने की कोशिश करें। इसके अलावा जो लोग सीरिया नहीं छोड़ पा रहे हैं वे भारतीय दूतावा के संपर्क में रहें। विदेश मंत्रालय ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। हेल्पलाइन नंबर है- +963993385973. इसपर वॉट्सऐप मेसेज भी भेजा जा सकता है। इसके अलावा hoc.damascus@mea.gov.in पर ईमेल के जरिए भी दूतावास से संपर्क किया जा सकता है। सीरिया में इस्लामवादियों के नेतृत्व में विद्रोहियों का नियंत्रण बढ़ने के बीच भारत ने शुक्रवार को कहा था कि वह वहां की स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है। विद्रोहियों ने देश के सबसे बड़े शहर अलेप्पो के अधिकतर भूभाग पर कब्जा करने के बाद गुरुवार को मध्य सीरिया के शहर होम्स को भी काफी हद तक अपने कब्जे में कर लिया है। मंत्रालय ने कहा, “जो लोग जा सकते हैं, उन्हें जल्द से जल्द उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों से सीरिया छोड़ने की सलाह दी जाती है और अन्य लोगों से अनुरोध है कि वे अपनी सुरक्षा के बारे में अत्यधिक सावधानी बरतें तथा अपनी गतिविधियों को न्यूनतम तक सीमित रखें।” गौरतलब है कि इस्लामी आतंकवादी समूह हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) ने हमा के प्रमुख शहर पर कब्जा कर लिया है और वे होम्स शहर की ओर बढ़ रहे हैं। हजारों लोगों को होम्स छोड़कर जाना पड़ा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने उत्तर सीरिया में हाल में लड़ाई तेज होने पर ध्यान दिया है। हम स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं। सीरिया में लगभग 90 भारतीय नागरिक हैं, जिनमें से 14 संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न संगठनों के लिए काम कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “हमारा मिशन हमारे नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार उनसे संपर्क बनाए हुए है।”

धर्मगुरुओं ने मोहम्मद यूनुस से कहा कि हर नागरिक को जमानत का अधिकार है

ढाका  बांग्लादेश में अल्पसंख्यक धार्मिक समूहों के नेताओं ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस से कहा कि हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका पर विचार किया जाना चाहिए। राजद्रोह के आरोपों का सामना कर रहे चिन्मय कृष्ण दास की जमानत की सुनवाई 2 जनवरी को होनी है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों से जुड़ी खबरों ने मोहम्मद यूनुस की सरकार की पोल खोल दी है। मोहम्मद युनूस की सरकार नहीं चाहती की हमलों की खबरें दुनिया के सामने आएं। इसके अलावा वह ऐसा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि जैसे देश में अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं और उन्हें इसके बारे में पता नहीं। मोहम्मद यूनुस ने गुरुवार को अल्पसंख्यकों पर हमलों की सटीक जानकारी लेने और अपराधियों को न्याय के कटघरे में खड़ा करने के लिए धार्मिक नेताओं से सहयोग मांगा। यूनुस ने दावा किया कि वास्तविकता और विदेशी मीडिया में आने वाली खबरों में अंतर है। बांग्लादेश की सरकारी न्यूज एजेंसी BSS के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘हम सटीक जानकारी जानना चाहते हैं और इसे प्राप्त करने के लिए एक प्रक्रिया स्थापित करना चाहते हैं।’ ‘जमानत हर नागरिक का अधिकार’ सेंट मैरी कैथेड्रल के फादर अल्बर्ट रोसारियो ने कहा, ‘जमानत प्राप्त करना हर किसी का अधिकार है।’ प्रसिद्ध बांग्लादेशी लेखक फरहाद मजहर ने भी दास के जमानत के अधिकार पर जोर दिया। बैठक में बांग्लादेश बौद्ध संघ के मुख्य सलाहकार सुकोमल बरुआ ने शांति और एकता के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। रमना हरिचंद मंदिर के सहायक सचिव अविनाश मित्रा ने कहा कि हिंदू समुदाय ने अपनी शिकायतें रखीं और यूनुस ने धैर्यपूर्वक इन्हें सुना। शेख हसीना के भाषणों पर लगी रोक बांग्लादेश की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के किसी भी भाषण को प्रसारित पर प्रतिबंध लगा दिया। पूर्व प्रधानमंत्री हसीना को अगस्त में बांग्लादेश में हुए भारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान सत्ता से बेदखल किया गया था और इसके बाद वह भारत चली गई थीं। हसीना के भाषणों के प्रसारण और प्रकाशन संबंधी मामलों की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधिकरण का यह फैसला पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से न्यूयॉर्क में अपनी अवामी लीग पार्टी के समर्थकों को ‘डिजिटल’ माध्यम से पहली बार सार्वजनिक रूप से संबोधित किए जाने के एक दिन बाद आया है। अपने संबोधन में उन्होंने बांग्लादेश के अंतरिम नेता नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस पर नरसंहार करने और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर बर्फबारी होने की संभावना, ठंड का प्रकोप और बढ़ेगा

जम्मू-कश्मीर हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर बर्फबारी होने की संभावना है, जिससे ठंड का प्रकोप और बढ़ेगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 7 दिसंबर की रात को पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण 8 और 9 दिसंबर को जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी हो सकती है, जबकि निचले इलाकों में हल्की बारिश का अनुमान है। इस बर्फबारी से दोनों राज्यों का तापमान गिर जाएगा और ठिठुरन बढ़ जाएगी।   जम्मू-कश्मीर में माइनस में तापमान हाल ही में हुई बर्फबारी के कारण जम्मू-कश्मीर के ज्यादातर हिस्सों में ठंड बढ़ गई है। श्रीनगर का तापमान -4.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ, जो सीजन की सबसे ठंडी रात रही। शोपियां -5.5 डिग्री सेल्सियस के साथ घाटी का सबसे ठंडा शहर रहा। दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में तापमान -5.3 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। 8-9 दिसंबर को होने वाली बर्फबारी के बाद 10 से 14 दिसंबर तक मौसम शुष्क रहने की संभावना है, हालांकि 15-16 दिसंबर को फिर बर्फबारी और बारिश का अनुमान है।   हिमाचल प्रदेश में बारिश और बर्फबारी की संभावना हिमाचल प्रदेश में 7 दिसंबर के बाद पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिलेगा, जिसके चलते पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी होगी। हालांकि, प्रदेश के मैदानी इलाकों में बारिश नहीं होने से सूखा बना हुआ है। अभी तक हिमाचल के कुछ ऊंचे इलाकों में हल्की बर्फबारी हो चुकी है। रोहतांग, बारालाचा और शिंकुला दर्रे में 2 इंच तक हिमपात हुआ है। आगामी दिनों में लाहौल स्पीति, किन्नौर, कुल्लू, चंबा, मंडी, शिमला, कांगड़ा और मनाली में बर्फबारी की संभावना जताई जा रही है। हिमाचल प्रदेश में मौसम हिमाचल प्रदेश में इस समय मनाली का न्यूनतम तापमान 1.9 डिग्री, शिमला का 9.2 डिग्री और ऊना का 5.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। प्रदेश के 6 जिलों में पिछले 65 दिनों से बारिश नहीं हुई है, और 2016 के बाद पहली बार नवंबर में लाहौल स्पीति को छोड़कर अन्य 11 जिलों में एक भी बूंद बारिश नहीं पड़ी। 6 दिसंबर को हिमाचल में अधिकतम तापमान 16.01 डिग्री सेल्सियस रहा और आने वाले दिनों में 6.11 डिग्री से 19.29 डिग्री तक तापमान रहने का अनुमान है। इस बर्फबारी और बारिश से ठंड बढ़ने की संभावना है, जिससे उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में शीत लहर का असर दिखाई दे सकता है।

भारत में 2014 से लेकर 2024 तक मेडिकल कॉलेजों और MBBS सीटों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी, कॉलेजों की संख्या में 102% और MBBS सीटों में 130% का इजाफा हुआ

नई दिल्ली  भारत में 2014 से लेकर 2024 तक मेडिकल कॉलेजों और MBBS सीटों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेजों की संख्या में 102% और MBBS सीटों में 130% का इजाफा हुआ है। 2014 में जहां देश में केवल 387 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं अब 2024 में यह संख्या बढ़कर 780 हो गई है। इसी तरह, 2014 में जहां MBBS सीटों की संख्या 51,348 थी, अब यह बढ़कर 1,18,137 हो गई है। इन राज्यों में खुले नए मेडिकल कॉलेज कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पहले कोई मेडिकल कॉलेज नहीं थे, जैसे अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, दादरा और नगर हवेली, मिजोरम, नागालैंड और तेलंगाना। इन राज्यों में अब मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं और तेलंगाना में तो 65 कॉलेज तक स्थापित हो चुके हैं। कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बढ़ी मेडिकल सीटें कर्नाटक में 2014 में 46 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 73 हो गए हैं। उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 30 से बढ़कर 86 हो गई है। महाराष्ट्र में भी सीटों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जहां 5,590 सीटों से बढ़कर 11,845 सीटें हो गईं। तेलंगाना और राजस्थान में हुआ बदलाव तेलंगाना, जो पहले मेडिकल कॉलेजों से पूरी तरह से वंचित था, अब वहां 9,040 MBBS सीटें उपलब्ध हैं। राजस्थान में भी 2013-14 में 10 कॉलेजों और 1,750 सीटों से संख्या बढ़कर 43 कॉलेजों और 6,475 सीटों तक पहुंच गई है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में बढ़ोतरी मध्य प्रदेश ने अपने कॉलेजों की संख्या 12 से बढ़ाकर 31 और सीटों की संख्या 1,700 से बढ़ाकर 5,200 कर दी है। छत्तीसगढ़ में कॉलेजों की संख्या पांच से बढ़कर 16 हो गई, और सीटों की संख्या 600 से बढ़कर 2,455 हो गई है। दिल्ली में भी कॉलेजों की संख्या 7 से बढ़कर 10 हो गई और सीटों की संख्या 900 से बढ़कर 1,497 हो गई है। गोवा और चंडीगढ़ में कॉलेजों की संख्या पहले जैसी रही, लेकिन इन दोनों राज्यों में सीटों की संख्या में थोड़ी बढ़ोतरी जरूर हुई है। इस बढ़ोतरी से यह साफ होता है कि सरकार देशभर में मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठा रही है, जिससे अब अधिक छात्र मेडिकल क्षेत्र में अपना करियर बना सकेंगे।  

चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बाचेलेत ‘इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार 2024’ से सम्मानित

नई दिल्ली चिली की पूर्व राष्ट्रपति और मानवाधिकारों की वैश्विक पैरोकार मिशेल बाचेलेत को शांति, निरस्त्रीकरण (हथियारों को कम करने) और विकास के लिए 2024 का ‘इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। यह घोषणा भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश सचिव शिवशंकर मेनन की अध्यक्षता वाली एक अंतर्राष्ट्रीय जूरी द्वारा की गई। बयान में कहा गया, “2024 के लिए शांति, निरस्त्रीकरण और विकास के लिए ‘इंदिरा गांधी पुरस्कार’ महामहिम मिशेल बाचेलेत को दिया जाता है। वे दुनिया भर की महिलाओं और पुरुषों के लिए कठिन परिस्थितियों में शांति, लैंगिक समानता, मानवाधिकार, लोकतंत्र और विकास के लिए लगातार प्रयास करने और चिली के साथ भारत के संबंधों में उनके योगदान के लिए एक उदाहरण और प्रेरणा हैं।” वेरोनिका मिशेल बाचेलेत जेरिया को शांति, असमानता के खिलाफ लड़ने और मानवाधिकारों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। अपने शानदार करियर में, उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। इसमें यूएन महिला की संस्थापक निदेशक, मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त और चिली की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में दो कार्यकाल शामिल है। उन्होंने लगातार लैंगिक असमानता और हाशिए पर पड़े समुदायों के अधिकारों की वकालत की है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अमिट छाप छोड़ी है। 29 सितंबर, 1951 को चिली के सैंटियागो प्रांत के ला सिस्टर्ना में पैदा होने वाली बाचेलेत को जनरल ऑगस्टो पिनोशे की तानाशाही के दौरान महत्वपूर्ण व्यक्तिगत और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 1973 में अपनी गिरफ्तारी, कारावास और यातना के बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और बाद में जर्मनी में निर्वासित जीवन बिताया था। बिना किसी बाधा के, वह चिली के राजनीतिक परिवर्तन में योगदान देने के लिए वापस लौट आईं और 2006 और फिर 2014 में राष्ट्रपति चुनी गईं। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए, बाचेलेत ने शिक्षा और कर संबंधी सुधार किए । उनके कार्यकाल में भारत और चिली के बीच एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर भी हुए, जिससे द्विपक्षीय संबंध बढ़े। राष्ट्रपति पद से परे, मिशेल बाचेलेत ने 2010 से 2013 तक यूएन महिला की पहली निदेशक के रूप में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के वैश्विक प्रयासों का नेतृत्व किया। बाद में, 2018 से 2022 तक मानवाधिकारों के लिए यूएन उच्चायुक्त के रूप में, उन्होंने फिलिस्तीन और अन्य संघर्ष क्षेत्रों में मानवाधिकारों के हनन सहित महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों को मुखर रूप से संबोधित किया। एलजीबीटीक्यू अधिकारों, लोकतंत्र और प्रगतिशील मूल्यों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें दुनिया भर में एक प्रेरणादायक शख्सियत बना दिया है। आलोचनाओं का सामना करने के बावजूद, वह शांति और न्याय के लिए लड़ती रही हैं। बता दें कि ‘इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार’ लैंगिक समानता, लोकतंत्र और विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत-चिली संबंधों को मजबूत करने में बाचेलेत के असाधारण योगदान को मान्यता देता है।

कोर्ट ने किशोरी से दुष्कर्म व हत्या के मामले में दोषी को मौत की सजा सुनाई, 62 दिन में सुनाया फैसला

कोलकाता महानगर से सटे दक्षिण 24 परगना जिले के जयनगर में एक किशोरी से दुष्कर्म व हत्या के मामले में कोर्ट ने मुस्तकिन सरदार नामक दोषी को मौत की सजा सुनाई है। गुरुवार को बारुईपुर के त्वरित अपर जिला न्यायालय के न्यायाधीश सुब्रत चट्टोपाध्याय ने मामले के मुख्य आरोपित मुस्तकिन को दोषी ठहराया था। इसके बाद शुक्रवार को मौत की सजा सुनाई गई। आरजी कर कांड को लेकर जिस समय राज्यभर में आंदोलन चल रहा था उसी दौरान जयनगर की घटना प्रकाश में आई थी। जिसके चलते पहले तो काफी शोर मचा। आरजी कर के आंदोलनकारी जयनगर में पीड़िता के घर भी गए। इतना ही नहीं, धर्मतल्ला में जूनियर डाक्टरों की भूख हड़ताल के सामने पीड़ित नाबालिग की ‘प्रतीकात्मक मूर्ति’ भी रखी गई थी। कोर्ट में आरजी कर मामले की चल रही सुनवाई प्रदर्शनकारियों ने आरजी कर की मृत महिला डॉक्टर के लिए भी न्याय की मांग करते हुए नारे लगाए थे, लेकिन चार महीने बाद भी आरजी कर मामले में न्याय नहीं मिला है। मामले की जांच सीबीआइ कर रही है। वहीं दूसरी पर जयनगर की घटना में मात्र 63 दिनों में सुनवाई पूरी कर कोर्ट ने दोषी को फांसी की सजा सुना दी। जयनगर मामले में दोषी को मौत की सजा सुनाए जाने के ठीक बाद राज्य पुलिस की ओर से एक्स हैंडल पर एक पोस्ट किया गया। जिसमें लिखा है कि जयनगर के लिए न्याय! इसमें यह भी लिखा है, यह फैसला अभूतपूर्व है। बंगाल में इससे पहले कभी भी रेप-मर्डर केस के महज 63 दिनों के अंदर दोषी को फांसी देने का आदेश नहीं दिया गया था। इस मामले की जांच करने का हमारा एक ही उद्देश्य था, पीड़िता और उसके परिवार को जल्द से जल्द न्याय दिलाना। लड़की वापस नहीं आएगी। लेकिन जिस अभूतपूर्व गति से हम उन्हें और उनके परिवार को ‘न्याय’ दे पाए, उससे हमें लंबे समय तक न्यायहीन नहीं रहना पड़ा, यही हमारी सांत्वना है, हमारी उपलब्धि है। कोर्ट के फैसले पर सीएम ममता बनर्जी ने जाहिर की खुशी सीएम ममता बनर्जी ने कोर्ट के फैसले पर खुशी भी जाहिर की। एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, चार अक्टूब को जयनगर में एक नाबालिग लड़की के साथ हुए क्रूर बलात्कार और हत्या के मामले में आरोपी को आज बरुईपुर की POCSO अदालत ने इस जघन्य घटना के मात्र 62 दिनों के भीतर ही मौत की सजा सुनाई है। इस तरह के मामले में मात्र दो महीने के भीतर दोषसिद्धि और मृत्युदंड राज्य के इतिहास में अभूतपूर्व है। मैं इस उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए राज्य पुलिस और अभियोजन प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों को बधाई देता हूँ। सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति शून्य सहिष्णुता रखती है और यह सुनिश्चित करना जारी रखेगी कि न्याय में न तो देरी हो और न ही न्याय से वंचित किया जाए।

सूरत पुलिस ने फर्जी डॉक्टर गिरोह का किया खुलासा, 70 हजार दो, बन जाओ डॉक्टर, 13 लोग हुए गिरफ्तार

सूरत गुजरात के सूरत में एक फर्जी डॉक्टर गिरोह का खुलासा हुआ है, जिसमें 13 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें 10 फर्जी डॉक्टर भी शामिल हैं। यह गिरोह ‘बैचलर ऑफ इलेक्ट्रो-होम्योपैथी मेडिसिन एंड सर्जरी’ (BEMS) डिग्री बेचता था। सूरत पुलिस ने इस गिरोह का पर्दाफाश किया और बताया कि ये लोग महज 70 हजार रुपए में बिना किसी योग्यतानुसार 8वीं पास लोगों को भी डॉक्टर बना रहे थे। कैसे काम करता था गिरोह गिरोह के सदस्य फर्जी डिग्रियां देने के लिए एक फर्जी वेबसाइट चला रहे थे, जिस पर बीईएमएस डिग्री का रजिस्ट्रेशन किया जाता था। आरोपियों ने एक बोर्ड की स्थापना की थी, जिसके तहत पांच लोग इलेक्ट्रो-होम्योपैथी में ट्रेनिंग देने का काम करते थे। शुरुआत में यह गिरोह डिग्रियां देने के लिए एक फर्जी बोर्ड का इस्तेमाल कर रहा था, लेकिन बाद में उन्होंने गुजरात के आयुष मंत्रालय द्वारा जारी की गई डिग्रियां देना शुरू कर दिया। ये लोग दावा करते थे कि उनकी डिग्री राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त है। क्या करता था गिरोह गिरोह के सदस्य 70,000 रुपए में डिग्री बेचते थे और साथ ही ट्रेनिंग भी देते थे। इसके अलावा, वे हर साल रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल फीस और प्रोटेक्शन मनी के नाम पर 1,500 से 5,000 रुपए और वसूलते थे। इन फर्जी डॉक्टरों ने अपने ग्राहकों को यह गारंटी दी थी कि वे बिना किसी समस्या के एलोपैथी, होम्योपैथी और आरोग्य में मेडिकल प्रैक्टिस कर सकते हैं। पुलिस ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया इस मामले में पुलिस ने कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से तीन आरोपी बीईएमएस डिग्रियां बेच रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सूरत के निवासी बीके रावत, रसेश गुजराती और इरफान सैयद के रूप में हुई है। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि किस तरह कुछ लोग सूरत में मेडिकल डिग्री के नाम पर धोखाधड़ी कर रहे थे और अवैध रूप से लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं से खिलवाड़ कर रहे थे।

महाराष्ट्र विधानसभा का तीन दिन का सत्र शुरू होने से पहले कालिदास कोलंबकर बने प्रोटेम स्पीकर

मुंबई महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शुक्रवार को कालिदास कोलंबकर को प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ दिलाई गई। महाराष्ट्र विधानसभा का तीन दिन का सत्र शुरू होने से पहले कोलंबकर को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें मुंबई स्थित राजभवन में शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम ग्रोहे और मुख्य सचिव सुजाता सौनिक मौजूद थे। बता दें कि कोलंबकर प्रोटेम स्पीकर के रूप में 288 नवनिर्वाचित विधायकों को विधानसभा में शपथ दिलाएंगे। इसके साथ ही शनिवार, 7 दिसंबर से शुरू होने वाले 15वीं विधानसभा के तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव भी कराया जाएगा। विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 16 से 21 दिसंबर तक नागपुर में आयोजित होगा। विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव 9 दिसंबर को होगा, इसके बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महायुति सरकार विश्वास मत हासिल करेगी। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री पद की शपथ फडणवीस ने गुरुवार शाम को ली, जबकि महायुति गठबंधन में शामिल शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे और एनसीपी नेता अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह शपथ ग्रहण समारोह दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में आयोजित हुआ। आजाद मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा समेत कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान समेत कई केंद्रीय मंत्री भी समारोह में मौजूद थे। शपथ ग्रहण समारोह में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, सलमान खान, संजय दत्त, रणबीर कपूर, रणवीर सिंह और माधुरी दीक्षित भी पहुंचे थे। दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भी समारोह में शामिल हुए थे।

तलाशी अभियान के दौरान सेना के जवान की हार्ट अटैक से मौत, घटना के बाद से सेना और स्थानीय प्रशासन में शोक की लहर

श्रीनगर श्नीनगर के हरवां क्षेत्र में चल रहे एक सर्च ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना के जवान जसविंदर सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इस घटना के बाद से सेना और स्थानीय प्रशासन में शोक की लहर दौड़ गई है। जवान की असामयिक मौत सेना के लिए एक बड़ी क्षति मानी जा रही है, क्योंकि वह अपनी सेवा में पूरी निष्ठा से कार्य कर रहे थे। सेना के अधिकारी और अन्य जवान इस घटना के बाद दुखी हैं और शव को परिवार को सौंपने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं।   अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा बल शुक्रवार सुबह हरवां क्षेत्र में फकीर गुजरी, दारा में आतंकवादियों के खिलाफ सर्च कर रहे थे, तभी आर्मी जवान जसविंदर सिंह को हार्ट अटैक आया। आर्मी के 34 असम राइफल्स के जवान जसविंदर सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई। आप को बदा दें कि मंगलवार की मुठभेड़ के बाद से सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों का पता लगाने के लिए विशाल जंगल क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चला रखा है।

भूस्खलन प्रभावित लोग राज्य और केंद्र सरकारों की ओर उम्मीद के साथ देख रहे हैं, उन्हें अब बहाने नहीं चाहिए: प्रियंका गांधी

नई दिल्ली कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने शुक्रवार को कहा कि आपदाओं पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और भूस्खलन प्रभावित वायनाड के लोग राज्य और केंद्र सरकारों की ओर उम्मीद के साथ देख रहे हैं तथा उन्हें अब बहाने नहीं चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि वायनाड के लोगों को सम्मान के साथ अपने जीवन को पटरी पर लाने में सक्षम होने के लिए तत्काल मदद की आवश्यकता है। इससे एक दिन पहले ही प्रियंका गांधी ने इस मुद्दे पर केरल के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। वायनाड की सांसद ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘आपदाएं राजनीति का विषय नहीं होनी चाहिए। ऐसी आपदाओं के पीड़ितों के सहयोग के प्रयासों में मानवता और करुणा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।” कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘वायनाड के लोग राज्य और केंद्र सरकारों की ओर आशा से देख रहे हैं, उन्हें बहाने नहीं चाहिए, उन्हें गरिमा के साथ अपने जीवन पटरी पर लाने में सक्षम होने के लिए तत्काल मदद की जरूरत है।” उनका कहना था कि जब सरकार में हर स्तर पर घावों को भरने और जीवन के पुनर्निर्माण के लिए मिलकर काम किया जाता है तो भारत मजबूत होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र और राज्य सरकार को आगे बढ़कर वायनाड के लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। प्रियंका गांधी ने अपने पोस्ट में ‘‘वायनाड में भूस्खलन और बाढ़ के लिए सहायता पर नोट” के स्क्रीनशॉट साझा किए। इस नोट में लिखा है, ‘‘केंद्र सरकार वायनाड के प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशील है और राज्य सरकार को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए सक्रिय रूप से आगे बढ़ी है।” इसमें कहा गया है कि वायनाड में भूस्खलन आपदा के बाद प्रभावित लोगों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए केंद्र के सहयोग की पहली किस्त 145.60 करोड़ रुपये 31 जुलाई, 2024 को और 145.60 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त एक अक्टूबर, 2024 को जारी की गई।

नेपाल पर चीन के बढ़ते कर्ज का बोझ चिंता का विषय बनता जा रहा है, BRI पर जतानी पड़ी सहमति

नेपाल नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने चीन के साथ अपने संबंध मजबूत करने की नीति अपनाते हुए चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) पर अपनी सहमति जताई है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भारत से दूरी बनाते हुए चीन के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक संबंध मजबूत करने की नीति अपनाई है। लेकिन उनके इस कदम से नेपाल पर चीन के बढ़ते कर्ज का बोझ चिंता का विषय बनता जा रहा है। केपी शर्मा ओली इस साल चौथी बार प्रधानमंत्री बने हैं। उन्होंने परंपरा तोड़ते हुए कार्यकाल की शुरुआत के बाद भारत के बजाए चीन का दौरा किया और चीन को खुश करने की कोशिश की। वहीं चीन ने भी नेपाल को स्थल से जुड़ा हुआ देश बताते हुए और वहां के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए समर्थन दे रहा है। बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई बैठक में 9 पुराने समझौतों को दोहराया गया, जिनमें बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) प्रमुख है। इसके तहत नेपाल को चीन के कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि यह सहयोग नेपाल को चीन के कर्ज के जाल में और गहराई तक धकेल सकता है। नेपाल अपने अधिकांश व्यापार और ईंधन आपूर्ति के लिए लंबे समय तक भारत पर निर्भर रहा है, अब चीन पर निर्भरता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। नेपाल का दो-तिहाई व्यापार भारत के साथ होता है, जबकि चीन के साथ केवल 14% व्यापार है। बावजूद इसके, चीन अब नेपाल का सबसे बड़ा कर्जदाता बन गया है। पोखरा में चीन द्वारा निर्मित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा इस बढ़ती निर्भरता का प्रतीक है। लेकिन भारतीय हवाई क्षेत्र का उपयोग न कर पाने जैसी चुनौतियों ने इस परियोजना की उपयोगिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ओली की चीन-समर्थित परियोजनाओं को लेकर विपक्षी दल और गठबंधन सहयोगी आलोचना कर रहे हैं। उनका मानना है कि चीन से कर्ज लेकर शुरू की जा रही परियोजनाएं नेपाल को दीर्घकालिक आर्थिक संकट में डाल सकती हैं। 2016 में भारत द्वारा छह महीने के लिए तेल आपूर्ति रोकने के बाद ओली ने चीन से पेट्रोलियम आयात का समझौता किया था, जिससे भारत पर निर्भरता कम करने का प्रयास शुरू हुआ। लेकिन अब विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या चीन पर बढ़ती निर्भरता नेपाल के लिए भारत से दूरी बनाने का सही विकल्प है। कर्ज की बढ़ती मात्रा और परियोजनाओं के स्थायित्व को लेकर बढ़ती चिंताओं ने ओली की नीति पर गहरी बहस छेड़ दी है। नेपाल का यह झुकाव कूटनीति का एक नया अध्याय तो जरूर है, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभाव नेपाल के आर्थिक और रणनीतिक भविष्य के लिए कितने लाभकारी होंगे, यह समय ही बताएगा।

मनोज जारांगे ने राज्य सरकार से 5 जनवरी तक मराठा आरक्षण का मुद्दा सुलझाने को कहा, दिया अल्टिमेटम

मुंबई मुंबई के आजाद मैदान में भव्य तरीके से महायुति सरकार का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न होने के एक दिन बाद ही मराठा आरक्षण का मुद्दा गरमाने लगा है। मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जारांगे पाटिल ने नई सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए एक महीने का अल्टीमेटम दिया है। मनोज जारांगे ने राज्य सरकार से 5 जनवरी तक मराठा आरक्षण का मुद्दा सुलझाने को कहा है। जारांगे ने कहा कि वह महायुति सरकार के गठन के लिए शुभकामनाएं देते हैं लेकिन अब लोगों की समस्याओं का समाधान करना जरूरी है। मनोज जारांगे ने कहा, “अगर सरकार 5 जनवरी तक मराठा समुदाय की सभी मांगें पूरी नहीं करती है तो मराठा फिर से आंदोलन में खड़े होंगे और सरकार की नाक में दम कर देंगे।” उन्होंने मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी सीएम को बधाई देते हुए कहा कि आइए मराठा आरक्षण के मुद्दे पर अब शुरुआत करें, नाटक बंद करें। साथ ही उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद हम समाज का ख्याल रखने के लिए सामूहिक भूख हड़ताल की तारीख की घोषणा करेंगे, ध्यान रहे, जनता ने आपको चुना है, आप लोगों का दिल जीतने के लिए काम करें। जारंग ने कहा कि अगर फडणवीस मराठा आरक्षण का मुद्दा सुलझा लेंगे तो यह अच्छी बात है। एक दिन पहले 5 दिसंबर को देवेन्द्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री, एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। भव्य शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस मंत्रालय पहुंचे। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की अध्यक्षता में बुधवार को महायुति सरकार की पहली कैबिनेट बैठक हुई। इसके बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कई सवालों के विस्तार से जवाब दिए। मराठा आरक्षण के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह तथ्य पहले ही राज्य विधानसभा में उठाया जा चुका है। पिछली सरकार ने केंद्र को ऐसी रिपोर्ट भेजी थी कि उसे डेटा नहीं मिल रहा था। इस बीच काफी कार्रवाई हुई, हमने कोर्ट में सपोर्टिंग एफिडेविट दिया। फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है। हमने अपना मामला स्पष्ट कर दिया है। देवेंद्र फड़नवीस ने बताया कि पिछली सरकार में हमने ही मराठा समुदाय को न्याय देने की कोशिश की थी और हम मराठा समुदाय को न्याय दिलाकर रहेंगे।

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