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डीआरआई अधिकारियों ने हैदराबाद से मुंबई ड्रग्स लेकर पहुंचे दो लोगों को किया गिरफ्तार, 16 किलो मेथामफेटामाइन जब्त

मुंबई राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) अधिकारियों ने हैदराबाद से मुंबई ड्रग्स लेकर पहुंचे दो लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से करोड़ों रुपये की ड्रग्स जब्त की गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों तस्करों के पास से डीआरआई ने 16 किलो हाई क्वालिटी की मेथामफेटामाइन ड्रग्स जब्त की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 20 करोड़ बताई जा रही है। अब तक कुल पांच ड्रग्स तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। जबकि 1 करोड़ 93 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। बता दें कि पिछले महीने राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने हैदराबाद में राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बैंकॉक से आ रहे दो यात्रियों से ड्रग्स जब्त की थी, जिसकी कीमत सात करोड़ रुपये बताई गई थी। विशिष्ट खुफिया सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए डीआरआई के अधिकारियों ने दो भारतीय यात्रियों से 7.096 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड जब्त कर मादक पदार्थों की तस्करी के प्रयास को विफल कर दिया था। अधिकारियों ने इसकी कीमत सात करोड़ रुपये बताई थी। अधिकारियों ने बैंकॉक से आने पर यात्रियों को रोका। उनके चेक-इन सामान की तलाशी के दौरान अधिकारियों को केलॉग्स कॉर्नफ्लेक्स के पैकेट के अंदर 13 वैक्यूम-पैक पारदर्शी पैकेट मिले। जब फील्ड टेस्ट किट से जांच की गई तो उसमें हाइड्रोपोनिक वीड की मौजूदगी का पता चला था। हाइड्रोपोनिक वीड जब्त करने के बाद यात्रियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।  

किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य का जो वादा किया गया था, वह वादा नहीं निभाया जा रहा, राज्यसभा में उठाया मुद्दा

नई दिल्ली किसानों व उनकी फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का मुद्दा बुधवार को राज्यसभा में उठाया गया। विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा के अन्य सभी कार्यों को स्थगित कर इस मुद्दे पर नियम 267 के तहत चर्चा कराने की मांग की। हालांकि यह मांग स्वीकार नहीं की गई। इसके बाद सभापति ने विपक्ष से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी को इस विषय पर बोलने का अवसर दिया। इस विषय पर बोलते हुए कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि धरती का भगवान अन्नदाता, उसके ऊपर लाठियां चल रही हैं। किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य का जो वादा किया गया था, वह वादा नहीं निभाया जा रहा। कांग्रेस सांसद ने कहा कि किसानों के संबंध में हमारी आवाज को संवैधानिक पदों पर बैठे हुए लोग भी उठा रहे हैं। उन्होंने राज्यसभा के सभापति व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का धन्यवाद करते हुए कहा कि हम आपको धन्यवाद देते हैं कि आपने हमारी आवाज को उठाया है। गौरतलब है कि मंगलवार को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वयं एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से प्रश्न किया था कि आखिरकार किसानों से वार्ता क्यों नहीं हो रही है। मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच पर मौजूद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से कहा था कि कृषि मंत्री जी, हर पल आपके लिए महत्वपूर्ण है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं, और भारत के संविधान के तहत दूसरे सबसे बड़े पद पर विराजमान व्यक्ति के रूप में मैं आपसे आग्रह करता हूं कि कृपया मुझे बताइए, क्या किसान से कोई वादा किया गया था, और वह वादा क्यों नहीं निभाया गया। हम वादा पूरा करने के लिए क्या कर रहे हैं। पिछले साल भी आंदोलन था, इस साल भी आंदोलन है, और समय जा रहा है, लेकिन हम कुछ नहीं कर रहे हैं। बुधवार को राज्यसभा में कांग्रेस सांसद ने सभापति से मांग की कि वे सरकार को निर्देश दें कि किसानों से किए गए वादे पूरे करें। कांग्रेस सांसद ने कहा कि खासतौर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हम सरकार से जवाब चाहते हैं। प्रमोद तिवारी के बोलने के उपरांत कांग्रेस व विपक्ष के कई सांसद अपने स्थान पर खड़े होकर इस मुद्दे पर बोलने की मांग करने लगे। जिस पर सभापति ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। दरअसल बुधवार को विपक्ष द्वारा किसानों के मुद्दे, तमिलनाडु के साइक्लोन और उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा जैसे मामलों पर चर्चा के लिए नोटिस दिए गए थे। विपक्षी सांसदों ने किसानों के मामले पर चर्चा की मांग की। इस पर सभापति ने कहा कि आपको बहुत देर बाद किसानों की याद आई है। सभापति ने कहा कि 5 दिन विभिन्न मुद्दों पर नियम 267 के तहत चर्चा के लिए नोटिस दिए गए जिसके कारण 5 दिन तक राज्यसभा की कार्रवाई नहीं चल सकी, हालांकि इस दौरान एक बार भी किसानों के मुद्दे पर चर्चा के लिए नोटिस नहीं दिया गया और अब मगरमच्छ के आंसू दिखाए जा रहे हैं।  

हमें विश्वास है कि एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होंगे. सीएम, डिप्टी सीएम सिर्फ तकनीकी शब्द हैं: देवेंद्र फडणवीस

मुंबई शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे, भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस, एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया। देवेंद्र फडणवीस कल, 5 दिसंबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। महाराष्ट्र के भावी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “हमने राज्यपाल से मुलाकात की है और राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए समर्थन पत्र सौंपा है। राज्यपाल ने हमें कल शाम 5.30 बजे शपथ समारोह के लिए आमंत्रित किया है। महाराष्ट्र के मनोनीत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “आज हमने राज्यपाल से भेंट की है…और शिवसेना के अध्यक्ष और शिवसेना विधायक दल के नेता के तौर पर एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद के लिए मेरे नाम की सिफारिश करते हुए एक पत्र दिया है…राज्यपाल ने हमें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। शपथ ग्रहण समारोह 5 दिसंबर(कल) शाम 5.30 बजे प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में होगा…हमने महाराष्ट्र की जनता से जो वादे किए हैं उनको पूरा करने के लिए यह सरकार काम करेगी। . हमें विश्वास है कि एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होंगे. सीएम, डिप्टी सीएम सिर्फ तकनीकी शब्द हैं. एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने कहा, “…हम राज्य में सरकार चलाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे। पार्टी से संबंधित गतिविधियों को (भाजपा प्रमुख) चंद्रशेखर बावनकुले और एनसीपी के सुनील तटकरे संभालेंगे। शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा, “मुझे बहुत खुशी है कि हमारी सरकार, महायुति सरकार, हमारी टीम ने ढाई साल में जो काम किया है वह उल्लेखनीय है और इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।

रेल सुविधा के चलते इस साल के अंत तक 1000 अतिरिक्त कोच रेलों में लगाये जाएंगे: रेल मंत्री

नई दिल्ली सरकार ने कहा है कि रेल सुविधा को सबके लिए उपलब्ध कराने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है, जिसके लिए जनरल बोगियों को बढ़ाया जा रहा है और इसके तहत इस साल के अंत तक 1000 अतिरिक्त कोच रेलों में लगाये जाएंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक पूरक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी देते हुए बताया कि कि देश के हर क्षेत्र में लोगों को बेहतर रेल सुविधा मिले, इसलिए सरकार जनरल डिब्बों को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है और इसका मकसद ऐसा कर हर नागरिक तक बेहतर रेल सुविधा उपलब्ध कराना है। श्री वैष्णव ने कहा कि केरल में रेल नेटवर्क को विकसित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और इसके लिए निधि आवंटित की गई है। उन्होंने स्थानीय सांसदों से राज्य सरकार को भूमि उपलब्ध कराने में मदद करने का भी आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि सरकार पैसेंजर ट्रेन में यात्रा के लिए बड़ी सब्सिडी दे रही है और इस क्रम में 56993 करोड़ से ज्यादा की सब्सिडी पैसेंजर ट्रेन में दी गयी है। सरकार का फोकस जनरल कोच बढ़ाने पर है और दिसंबर के आखिर तक 1000 अतिरिक्त जनरल कोच बढ़ाने की योजना है।  

मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा- गरीब से गरीब व्यक्ति को बिजली उपलब्ध कराने के लिए पीएम सौर ऊर्जा योजना बनाई हैं

नई दिल्ली सरकार ने कहा है कि गरीबों और आदिवासी क्षेत्रों के अत्यधिक गरीब लोगों को सौर ऊर्जा जैसी कई योजनाएं उपलब्ध हैं और ऐसे लोगों को प्रधानमंत्री सूर्य मुफ्त बिजली जैसी योजना का लाभ लेना चाहिए। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने लोकसभा में एक पूरक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी देते हए बताया कि सरकार ने गरीब से गरीब व्यक्ति को बिजली उपलब्ध कराने के लिए पीएम सौर ऊर्जा योजना बनाई हैं और इनका निशुल्क लाभ देश के आदिवासी तथा दूसरे क्षेत्र के सभी गरीबों को दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लोगों को पक्के घर दिए जा रहे हैं और उसके तहत हर घर के ऊपर एक किलोवाट अक्षय ऊर्जा पैदा कराने की सुविधा भी दी जा रही हैं। इस योजना से गरीब बिजली पैदा कर सकता है और उसमें जो बिजली बचे, उस ऊर्जा को वह सरकार को बेच कर लाभ कमा सकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आदिवासी क्षेत्र में ग्राम उत्कर्ष अभियोजना चलाई जा रही है। इसके साथ ही सबको बिजली देने की और भी कई योजनाएं हैं जिसका लाभ आदिवासी क्षेत्र के गरीबों को लेना चाहिए। इसके अलावा पीएम सूर्य बिजली मुक्ति योजना भी है, जिसका लाभ आदिवासियों को लेना चाहिए। इस योजना का उपयोग कर गरीब को फ्री में बिजली उपलब्ध हो सकेगी।  

मुख्यमंत्री पौष्टिक अल्पाहार योजना गुजरात में होगी शुरू, सरकारी स्कूलों के 41 लाख छात्रों को रोज़ाना पौष्टिक नाश्ता दिया जाएगा

अहमदाबाद गुजरात सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई और पोषण के बीच संतुलन बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने मुख्यमंत्री पौष्टिक अल्पाहार योजना (मुख्यमंत्री पौष्टिक नाश्ता योजना) शुरू करने की घोषणा की है, जिसके तहत राज्य के सरकारी स्कूलों के 41 लाख छात्रों को रोज़ाना पौष्टिक नाश्ता दिया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा देना है।   मुख्यमंत्री ने योजना का किया ऐलान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने यह घोषणा करते हुए कहा, “यह योजना ‘सुपोषित गुजरात मिशन’ के तहत लॉन्च की जा रही है और इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को पोषक तत्वों से भरपूर नाश्ता उपलब्ध कराना है, ताकि उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर हो सके।” उन्होंने इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘पढ़ाई भी, पोषण भी’ कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इस योजना के अंतर्गत, गुजरात राज्य के 32,277 सरकारी और अनुदान प्राप्त प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 8 तक के सभी छात्रों को स्कूल में पहुंचने से पहले पौष्टिक नाश्ता परोसा जाएगा। योजना के तहत छात्रों को चना चाट, मिक्स बीन्स, सुखड़ी और बाजरा (श्री अन्न) से बने खाद्य पदार्थ दिए जाएंगे, जो उनकी सेहत के लिए फायदेमंद होंगे।   32,277 स्कूलों में होगा लागू गुजरात सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का फायदा राज्य के कुल 32,277 सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों के छात्रों को मिलेगा। इन स्कूलों में बालवाटिका से लेकर कक्षा 8 तक के छात्र शामिल हैं। यह योजना बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के तहत हर छात्र को स्कूल के काम शुरू होने से पहले प्रार्थना के समय नाश्ता मिलेगा, जिससे उन्हें पूरे दिन की पढ़ाई के लिए ऊर्जा मिलेगी। इस नाश्ते में पोषक तत्वों का खास ध्यान रखा गया है, जिससे बच्चों का शारीरिक विकास तेजी से हो सके।   खाद्य पदार्थों का चयन मुख्यमंत्री ने बताया कि नाश्ते के लिए जो खाद्य पदार्थ चुने गए हैं, वे न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि उनके पोषक गुण भी बहुत उच्च हैं। सप्ताह के दौरान छात्रों को सुखड़ी, चना चाट, मिक्स बीन्स और बाजरा (श्री अन्न) से बने खाद्य पदार्थ मिलेंगे। इन खाद्य पदार्थों में कैलोरी और प्रोटीन की अच्छी खासी मात्रा होती है, जो बच्चों के विकास के लिए बेहद जरूरी हैं।   सरकारी खर्च और कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि गुजरात सरकार ने इस योजना के लिए सालाना 617 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। यह राशि योजना के संचालन और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति पर खर्च की जाएगी। इसके अलावा, सरकार ने ‘पीएम पोषण योजना’ के तहत काम करने वाले मानद वेतन धारक कर्मचारियों के वेतन में 50 प्रतिशत वृद्धि करने का भी फैसला लिया है। अब तक प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत काम करने वाले रसोइये सह सहायकों को 2500 रुपये का मानद वेतन मिलता था, जिसे बढ़ाकर 3750 रुपये किया गया है। वहीं, छोटे स्कूलों के लिए अतिरिक्त स्टाफ (हेल्पर) को अब 1500 रुपये का मासिक मानद वेतन मिलेगा। इस कदम से कर्मचारियों को राहत मिलेगी और उनके कार्य में भी उत्साह बढ़ेगा।   रोज़ाना नाश्ता देने वाला गुजरात देश का पहला राज्य गुजरात सरकार ने जो कदम उठाया है, वह देश में अपनी तरह का पहला प्रयास है। राज्य सरकार ने शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित की है। यह योजना न केवल बच्चों के पोषण को सुधारने में मदद करेगी, बल्कि उनकी पढ़ाई में भी सहायक साबित होगी। शिक्षा और पोषण दोनों के संयोजन से राज्य में बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। गुजरात सरकार द्वारा शुरू की गई यह पौष्टिक नाश्ता योजना राज्य के छात्रों के लिए एक बड़ी सौगात साबित होने वाली है। बच्चों को सुबह का पौष्टिक नाश्ता मिलने से उनकी शारीरिक ताकत में वृद्धि होगी और मानसिक विकास में भी मदद मिलेगी। इस योजना से न केवल बच्चों का पोषण सुधरेगा, बल्कि गुजरात शिक्षा के क्षेत्र में भी एक नया उदाहरण पेश करेगा।

डोनाल्ड ट्रंप ने दिया मजाकिया अंदाज में ऑफर, कहा-अगर दिक्कत है तो कनाडा को अमेरिका में मिला दो, 51वां राज्य बना देंगे

वाशिंगटन कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुई मुलाकात एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मुलाकात के दौरान ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में ट्रूडो को कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अगर कनाडा पर टैरिफ का खतरा है, तो वह अमेरिका का 51वां राज्य बन सकता है। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कनाडा पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जिससे कनाडा की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता था। इस मामले पर चर्चा के लिए ट्रूडो ने ट्रंप से मार-ए-लागो (फ्लोरिडा) में मुलाकात की। ट्रूडो का मकसद टैरिफ के इस खतरे को टालना और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत रखना था।   क्या हुआ बातचीत में? ट्रूडो ने ट्रंप से कहा कि 25% टैरिफ लगने से कनाडा की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो सकती है।   ट्रंप ने पलटकर कहा, “कनाडा की अर्थव्यवस्था तब तक जिंदा नहीं रह सकती, जब तक वह अमेरिका को 100 बिलियन डॉलर का नुकसान पहुंचा रहा है।”   ट्रंप ने कनाडा पर आरोप लगाया कि उसने 70 से अधिक देशों के अवैध अप्रवासियों को सीमा पार करने की अनुमति दी है।   उन्होंने यह भी कहा कि ड्रग्स और मानव तस्करी रोकने में कनाडा नाकाम रहा है, जिससे अमेरिकी सीमाएं असुरक्षित हो गई हैं।   ट्रंप ने कहा कि कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापार घाटा 100 बिलियन डॉलर से भी अधिक है।   उन्होंने यह चेतावनी दी कि अगर ये मुद्दे हल नहीं हुए, तो वह राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के पहले दिन से ही कनाडा के सभी उत्पादों पर 25% टैरिफ लागू कर देंगे।   ट्रंप का विवादित सुझाव बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अगर कनाडा इन समस्याओं को हल नहीं कर सकता, तो बेहतर होगा कि वह अमेरिका का हिस्सा बन जाए। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, *”कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बन जाना चाहिए। आप (जस्टिन ट्रूडो) गवर्नर बन सकते हैं।” ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री का पद गवर्नर से बेहतर है, लेकिन यह भी बुरा विकल्प नहीं होगा।     ट्रूडो की प्रतिक्रिया ट्रंप की इस बात पर जस्टिन ट्रूडो और उनके साथ मौजूद अन्य लोग पहले चौंक गए, लेकिन बाद में उन्होंने इसे मजाक मानकर टाल दिया। हालांकि, ट्रूडो ने जोर देकर कहा कि कनाडा की अर्थव्यवस्था पर 25% टैरिफ का असर बहुत गंभीर होगा।   मामले पर लोगों का रिएक्शन ट्रंप का यह बयान भले ही मजाक में दिया गया हो, लेकिन सोशल मीडिया और विशेषज्ञ इसे हल्के में नहीं ले रहे हैं। – कई लोगों ने इसे कनाडा-अमेरिका संबंधों पर ट्रंप की रणनीतिक सोच का संकेत माना है। वहीं, कुछ ने इसे ट्रंप के अप्रत्याशित बयानबाजी का हिस्सा बताया।   यह मुलाकात न सिर्फ टैरिफ और व्यापार घाटे जैसे मुद्दों को उजागर करती है, बल्कि कनाडा-अमेरिका संबंधों की नाजुक स्थिति को भी दिखाती है। ट्रंप की तरफ से दिया गया सुझाव भले ही मजाकिया हो, लेकिन इसके पीछे की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 

फिलिस्तीनी अधिकारों पर समझौता नहीं, भारत ने UNGA में इजराइल के खिलाफ दिया वोट

नई दिल्ली भारत ने फिलिस्तीन के मुद्दे पर अपने पुराने रुख को मजबूत करते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। इस प्रस्ताव में 1967 से कब्जा की गई फिलिस्तीनी जमीन, जिसमें पूर्वी यरुशलम भी शामिल है, से इजराइल को हटने के लिए कहा गया है। यह प्रस्ताव “फिलिस्तीन के सवाल का शांतिपूर्ण समाधान” शीर्षक से पेश किया गया था, जिसे सेनेगल ने प्रस्तावित किया। इसे 157 देशों का समर्थन मिला, जबकि 8 देशों – इजराइल, अमेरिका, माइक्रोनेशिया, नाउरू, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, अर्जेंटीना और हंगरी ने इसका विरोध किया।  कई देशों ने मतदान से दूरी बनाई, जिनमें यूक्रेन, जॉर्जिया और चेकिया शामिल हैं। भारत का समर्थन इस बात को दोहराता है कि वह फिलिस्तीन के लिए “दो राष्ट्र समाधान”  का पक्षधर है। भारत का यह कदम मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने और फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता देने की उसकी प्रतिबद्धता को दिखाता है।   प्रस्ताव की मुख्य बातें 1. इजराइल से तुरंत कब्जा छोड़े जाने की मांग, खासकर पूर्वी यरुशलम से।   2. फिलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय और स्वतंत्र राष्ट्र स्थापित करने के अधिकार को मान्यता।   3. इजराइल से अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के जुलाई 2024 के निर्णय का पालन करने की मांग।   4. गाजा पट्टी में किसी भी जनसांख्यिकीय या क्षेत्रीय बदलाव को खारिज किया गया।   इजराइल-फिलिस्तीन विवाद का इतिहास संयुक्त राष्ट्र लंबे समय से इजराइल से फिलिस्तीनी क्षेत्रों को छोड़ने की मांग करता रहा है। यह विवाद दशकों पुराना है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों के बीच विभाजन का कारण बना हुआ है। हालांकि, अमेरिका जैसे देश इस तरह के प्रस्तावों का विरोध करते रहे हैं और इजराइल का समर्थन करते हैं।   सीरियाई गोलान हाइट्स पर भारत का रुख फिलिस्तीन के समर्थन के साथ, भारत ने सीरियाई गोलान हाइट्स से इजराइल की वापसी की मांग वाले एक अन्य प्रस्ताव का भी समर्थन किया। इसमें 1967 के बाद से इजराइल द्वारा अवैध बस्तियों और अन्य गतिविधियों की आलोचना की गई है। यह प्रस्ताव 97 देशों के समर्थन से पारित हुआ, जबकि 64 देशों ने मतदान से दूरी बनाई। 

देश में हर रेल यात्री को यात्रा टिकट पर हर 100 रुपये की यात्रा सेवा की कीमत 54 रुपये ली जाती है

नई दिल्ली रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि देश में हर रेल यात्री को यात्रा टिकट पर 46 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है। उन्होंने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह भी कहा कि रेल मंत्रालय यात्रियों के लिए सब्सिडी पर हर साल 56,993 करोड़ रुपये की राशि खर्च करता है। उन्होंने ट्रेन में करीब 1 हजार नए डिब्बे जोड़े जाने की भी जानकारी दी है। बुजुर्गों और मान्यताप्राप्त पत्रकारों को पहले मिलने वाली सब्सिडी की बहाली की संभावना के बारे में पूछे जाने पर वैष्णव ने कहा, ‘भारत सरकार की ओर से यात्रियों को कुल सब्सिडी 56,993 करोड़ रुपये की दी जाती है। हर 100 रुपये की यात्रा सेवा की कीमत 54 रुपये ली जाती है। सभी श्रेणियों के यात्रियों को 46 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है।’ वैष्णव ने एक पूरक प्रश्न के उत्तर में यह भी कहा कि जिस तरह से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में सड़कों से पूरे देश को जोड़ा गया था, उसी तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के छोटे और मझोले रेलवे स्टेशनों का विकास किया जा रहा है। दिसंबर के आखिर तक 1000 अतिरिक्त जनरल कोच ट्रेनों में जोड़ी जाएंगे सरकार ने कहा है कि रेल सुविधा को सबके लिए उपलब्ध कराने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है, जिसके लिए जनरल बोगियों को बढ़ाया जा रहा है और इसके तहत इस साल के अंत तक 1000 अतिरिक्त कोच रेलों में लगाए जाएंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक पूरक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी देते हुए बताया कि कि देश के हर क्षेत्र में लोगों को बेहतर रेल सुविधा मिले, इसलिए सरकार जनरल डिब्बों को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है और इसका मकसद ऐसा कर हर नागरिक तक बेहतर रेल सुविधा उपलब्ध कराना है।

पुणे में नशे में धुत एक ऑडी कार सवार ने मोटरसाइकिल सवार को मरी टक्कर, युवक को 3 किमी तक घसीटा

मुंबई महाराष्ट्र में हाई प्रोफाइल हिट एंड रन और रैश ड्राइविंग के बढ़ते मामलों के बीच पुणे से एक और मामला सामने आया है। पुणे के चिंचवड़ में एक ऑडी कार ने मोटरसाइकिल सवार को टक्कर मारने के बाद कथित तौर पर तीन किलोमीटर तक घसीटा। रविवार रात करीब 9 बजे अकुर्दी में हुई इस घटना में बाइक सवार जकेरिया मैथ्यू गंभीर रूप से घायल हैं। आरोपी की पहचान चिंचवाड़ के 23 वर्षीय कमलेश उर्फ अशोक पाटिल के रूप में हुई जो कथित तौर पर चालक की सीट पर था। वहीं हेमंत चंद्रकांत म्हालास्कर उर्फ सोन्या, तालेगांव दाभाडे और प्रथमेश पुष्कल दराडे को गिरफ्तार किया गया है। कार पुष्कल दराडे के भाई की है। सोमवार को मैथ्यू की शिकायत के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक मैथ्यू अपने दोस्त अनिकेत के साथ बाइक चला रहा था तभी कार ने उसकी बाइक को पीछे से टक्कर मार दी। जब मैथ्यू ने ड्राइवर के पास जाकर बात की तो एक गर्मा गर्मी शुरू हो गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने मैथ्यू और उसके दोस्त के साथ बदतमीजी की और हमला शुरू कर दिया। मैथ्यू के मुताबिक स्थिति तब बिगड़ गई जब कमलेश जो दो अन्य आरोपियों और एक अज्ञात महिला सह-यात्री के साथ पहियों के पीछे था, ने कथित तौर पर मैथ्यू को कुचलने की कोशिश की। मैथ्यू ने किसी तरह से कार के बोनट से चिपक कर खुद की जान बचाई। कार मैथ्यू को अकुर्दी रेलवे स्टेशन के संभाजी चौक से तीन किलोमीटर से अधिक दूरी तक घसीटती हुई बिजलीनगर के मंगल मेडिकल के पास ऑडी में बैठी महिला को छोड़ने के लिए रुकी। निगड़ी पुलिस स्टेशन ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109, 115 (2), 352 और 3 (5) के तहत मामला दर्ज किया है। निगड़ी पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर शत्रुघ्न माली ने बताया, ‘पीड़ित की शिकायत के आधार पर हमने सीसीटीवी फुटेज की जांच की। आरोपियों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।” पुलिस ने कहा कि आरोपियों के ब्लड सैंपल जांच के लिए भेज दिया गया है। जांच अधिकारी ने बताया, “शुरुआती जांच से पता चलता है कि उन्होंने शराब का सेवन किया था लेकिन हम पुष्टि के लिए लैब रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

जेल से रिहा हुए शख्स ने कहा- वह अब अपने परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताएंगे और बागवानी करेंगे

कोलकाता पश्चिम बंगाल के मालदा में एक शख्स अपनी सजा काटकर 36 साल बाद रिहा हुआ है। 36 साल जेल में बिताने के बाद रिहा हुए 104 वर्षीय शख्स ने कहा है उसे यकीन था कि वह कभी जेल से निकल पाएंगे। शख्स ने कहा है कि वह अब अपने परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताएंगे और बागवानी करेंगे। रसिकत मंडल नाम के इस शख्स को 1988 में जमीन से जुड़े विवाद के मामले में अपने भाई की हत्या के आरोप में न्यायिक हिरासत की सजा सुनाई गई थी। मंडल के बेटे ने बताया कि उनके पिता को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रिहा किया गया है। बेटे ने कहा, “कुछ सालों के बाद हर कैदी को जेल से रिहा होने का अधिकार है बशर्ते उसने कारावास के दौरान कोई अनुचित कार्य न किया हो। खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार उसकी रिहाई का रास्ता साफ कर दिया।” 36 साल की अवधि के दौरान बीच में रसकित करीब एक साल के लिए जमानत पर रिहा हुए थे। हालांकि जमानत अवधि खत्म होने के बाद वह फिर से जेल चले गए। उन्होंने कई बार सेशंस कोर्ट और हाईकोर्ट में अपनी रिहाई के लिए याचिका दायर की थी लेकिन उसकी अर्जी को खारिज कर दिया गया था। मालदा जिले के मानिकचक के रहने वाले मंडल ने मंगलवार को मालदा सुधार गृह के गेट से बाहर निकलते हुए मीडिया से कहा कि अब वह पूरा समय पौधों की देखभाल करने में लगाएंगे। अपनी उम्र के हिसाब से काफी चुस्त-दुरुस्त दिख रहे मंडल ने कहा, “मुझे याद नहीं कि मैंने कितने साल जेल में बिताए। ऐसा लग रहा था कि यह कभी खत्म ही नहीं होगा। मुझे यह भी याद नहीं कि मुझे यहां कब लाया गया था।” उन्होंने कहा, “अब मैं बाहर आ गया हूं और अब भी मुझ में जुनून है। अपने आंगन के छोटे से बगीचे में पौधों की देखभाल कर सकता हूं। मुझे अपने परिवार और नाती-नातिनों की याद आती थी। मैं उनके साथ रहना चाहता हूं।” उनकी उम्र के बारे में पूछे जाने पर मंडल ने कहा कि उनकी उम्र 108 साल है लेकिन उनके साथ आए उनके बेटे ने बताया कि वह 104 साल के हैं। सुधार गृह के अधिकारियों ने पुष्टि की कि रिकॉर्ड में उनकी उम्र 104 साल है। सुधार गृह विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह राज्य की जेलों में बंद सौ साल से अधिक उम्र के कैदियों के बहुत कम मामलों में से एक है।

डेलावेयर की एक अदालत ने एक बार फिर टेस्ला के सीईओ के 101.4 अरब डॉलर के सैलरी पैकेज को किया खारिज

नई दिल्ली दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क इन दिनों अपनी सैलरी पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। डेलावेयर की एक अदालत ने एक बार फिर टेस्ला के सीईओ के 101.4 अरब डॉलर के सैलरी पैकेज को खारिज कर दिया है। आपको बता दें कि यह पैकेज 2018 में तय हुआ था। टेस्ला के स्टॉक की जबरदस्त बढ़त के चलते इसकी वैल्यू कई गुना बढ़ गई। कोर्ट के फैसले के बाद एलन मस्क को इस पे पैकेज तक पहुंचने से रोक दिया गया है। चांसलर कैथलीन एसजे मैककॉर्मिक ने अपने 103 पन्नों के निर्णय में कहा कि टेस्ला के बोर्ड ने 2018 में यह पैकेज एलन मस्क के प्रभाव में आकर मंजूर किया गया था। उन्होंने टेस्ला की कानूनी टीम के तर्कों को खारिज करते हुए उन्हें त्रुटिपूर्ण और कानून गलत बताया। उन्होंने कहा, “बोर्ड के पास एलन मस्क को उचित वेतन देने के कई विकल्प थे, लेकिन उन्होंने मस्क की शर्तों के आगे झुकने का फैसला किया।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शेयरधारकों के वोट के जरिए किसी न्यायिक निर्णय को पलटा नहीं जा सकता है।अदालत ने शेयरधारक रिचर्ड टॉरनेटा के वकीलों को 345 मिलियन डॉलर का मुआवजा दिया। उन्होंने एलन मस्क के पे पैकेज को चुनौती दी थी। हालांकि उनके वकीलों ने 10 अरब डॉलर की मांग की थी। कोर्ट के फैसले पर क्या बोले एलन मस्क? एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए इस फैसले को पूरी तरह भ्रष्टाचार से लिप्त कहा। उन्होंने दोहराया कि कंपनी के फैसलों पर जजों के बजाय शेयरधारकों का नियंत्रण होना चाहिए। एलन मस्क पहले भी यह दलील दे चुके हैं कि टेस्ला में उनकी बड़ी हिस्सेदारी कंपनी की दिशा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में इसके विस्तार के लिए जरूरी है। टेस्ला की अपील टेस्ला के बोर्ड ने इस फैसले को डेलावेयर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है। अपील की प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं, जिससे अंतिम नतीजे में देर हो सकती है। एलन मस्क की कितनी है सैलरी? 2018 का पे पैकेज मस्क टेस्ला के स्टॉक की कीमत से जुड़ा था। एलन मस्क को 12 हिस्सों में स्टॉक विकल्प मिल सकते थे, जिनमें से हर एक कंपनी के 1% स्टॉक के बराबर था। टेस्ला के मार्केट कैप में 50 अरब डॉलर की वृद्धि, राजस्व में तेजी और EBITDA ग्रोथ के कारण से उनकी सैलरी बढ़ाई गई थी।

डिफेंस शेयरों ने भरी उड़ान, ₹21772 करोड़ के अधिग्रहण प्रस्तावों को मिली मंजूरी

नई दिल्ली  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) ने 21,772 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। मंजूर की गई धनराशि से आधुनिक वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट व हेलीकॉप्टर समेत सशस्त्र बलों के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद की जाएगी। इसके साथ ही टी-72 और टी-90 टैंकों, बीएमपी और सुखोई लड़ाकू विमानों के इंजनों के ओवरहाल के लिए भी मंजूरी दी गई है। इससे इनकी सेवा अवधि में वृद्धि होगी। राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मीटिंग मंगलवार को दी गई इस स्वीकृति के अंतर्गत कुल पांच रक्षा सौदों के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) प्रदान की गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल नेवी के लिए 31 नई वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट की खरीद को मंजूरी मिली है। 120 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट (एफआईसी-1) की खरीद के लिए भी स्वीकृति प्रदान की गई है। इन प्रस्तावों की मंजूरी से डिफेंस कंपनियों के ऑर्डर बुक को मजबूती मिलने की संभावना है। इस वजह से इन कंपनियों के शेयरों में खरीदारी का जोर देखा गया। DAC ने जिन प्रस्तावों को मंजूरी दी है, उनमें वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट्स (WJFACs), इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट्स, रडार वॉर्निंग सिस्टम्स और एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर्स जैसे इक्विपमेंट्स शामिल हैं। इसमें भारतीय नौसेना के लिए 31 नए WJFACs का अधिग्रहण किया जाएगा, जो कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों, गश्त, निगरानी और खोज एवं बचाव (SAR) मिशनों के लिए उपयोगी होंगे। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स ने पहले भी WJFACs की सप्लाई नौसेना को की थी, जिससे कंपनी को एक बार फिर ऑर्डर मिलने की उम्मीद बढ़ी है। इसके अलावा, 120 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट (FIC-1) के अधिग्रहण के लिए मंजूरी भी दी गई है। इन FIC को एयरक्राफ्ट कैरियर्स, डेस्ट्रॉयर्स और सबमरीन जैसे हाई-वैल्यू यूनिट्स की सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया है। DAC ने T-72 और T-90 टैंकों औरसुखोई लड़ाकू विमानों के इंजनों के ओवरहॉल को भी मंजूरी दी है। यह ओवरहॉलिंग उनकी सर्विस लाइफ और कारोबारी क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जाएगा। SU-30 MKI लड़ाकू विमानों की ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट (EWS) का अधिग्रहण भी शुरू किया जाएगा। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स ने भारतीय वायुसेना के लिए पहले भी EWS विकसित किया है, जिससे इस कंपनी को भी लाभ होने की संभावना है। एक्सपर्ट्स की राय ICICI सिक्योरिटीज के अमित दीक्षित का कहना है कि यह मंजूरी घरेलू ऑर्डरिंग में आई सुस्ती के बाद एक पॉजिटिव बदलाव का संकेत है। उनके अनुसार, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स को इन प्रस्तावों से सबसे अधिक लाभ होगा, खासतौर पर SU-30 MKI के लिए EWS से। इसके अलावा, एस्ट्रा माइक्रोवेव को भी इस कदम से लाभ होने की संभावना है। शिपबिल्डिंग से जुड़े प्रस्ताव छोटे जहाजों के लिए हैं, जिन पर प्राइवेट कंपनियों और डिफेंस पीएसयू (DPSUs) की ओर से बोली लगाई जाएगी। ICICI सिक्योरिटीज ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और एस्ट्रा माइक्रोवेव दोनों पर ‘खरीदारी’ की सलाह दी है और इनके लिए क्रमश: 350 रुपये और 935 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। 31 नए वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट (ईडब्ल्यूएस) की खरीद के लिए एओएन प्रदान की गई है। 6 उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) एम (एमआर) की खरीद के लिए भी मंजूरी प्रदान की गई है। डीएसी ने भारतीय नौसेना के लिए 31 नए वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट (एनडब्ल्यूजेएफएसी) की खरीद की आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) प्रदान की है। इन वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट को तट के करीब कम तीव्रता वाले समुद्री संचालन, निगरानी, गश्ती और खोज व बचाव (एसएआर) कार्यों करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 120 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इसके अलावा ये जहाज विशेष रूप से हमारे द्वीप क्षेत्रों में और उसके आसपास समुद्री डकैती रोधी अभियानों में प्रभावी भूमिका निभाएंगे। डीएसी ने जिन 120 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट (एफआईसी-1) की खरीद के लिए एओएन प्रदान किया वे जहाज तटीय रक्षा के लिए विमान वाहक, विध्वंसक और फ्रिगेट्स युद्धपोतों व पनडुब्बियों को एस्कॉर्ट करेंगे। इसके साथ ही ये कई अन्य भूमिकाएं निभाने में सक्षम हैं। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट (ईडब्ल्यूएस) में बाहरी एयरबोर्न सेल्फ प्रोटेक्शन जैमर पॉड्स, अगली पीढ़ी के रडार चेतावनी रिसीवर और सुखोई -30 एमकेआई विमान के लिए संबंधित उपकरण शामिल हैं। यह प्रणाली सुखोई एसयू-30 एमकेआई की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाएगी। 6 एडवांस हल्के हेलीकॉप्टर वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा संरक्षित, दुश्मन के लक्ष्यों के खिलाफ एक मिशन को अंजाम देते समय यह विमान को दुश्मन के रडार और संबंधित हथियार प्रणाली से बचाएगी। डीएसी ने तटीय क्षेत्रों में तटीय सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करने के लिए भारतीय तटरक्षक के लिए 6 उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) एम (एमआर) की खरीद के लिए एओएन प्रदान किया है।

हंगामे के आगे झुके दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून, वापस लिया मार्शल लॉ

सियोल दक्षिण कोरिया में इस समय राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है. मार्शल लॉ लगाने के उनके ऐलान और फिर फैसले से यूटर्न के बाद से उन्हें लोगों के गुस्से का भी सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में उनकी धुर विरोधी डेमोक्रेटिक पार्टी ने ही नहीं सत्तारूढ़ पार्टी के कई सदस्यों ने बगावती सुर अख्तियार किए हैं. कई इस्तीफे हो चुके हैं. खुद राष्ट्रपति पर भी महाभियोग की तलवार लटक रही है. दक्षिण कोरिया की न्यूज एजेंसी योनहाप के मुताबिक, राष्ट्रपति यून सुक योल के चीफ ऑफ स्टाफ सहित कैबिनेट के कई शीर्ष सहयोगियों ने इस्तीफा दे दिया है. कहा जा रहा है कि कैबिनेट के 12 मंत्री इस्तीफा सौंप चुके हैं. कई अन्य शीर्ष नेताओं ने भी इस्तीफे की पेशकश की है. मार्शल लॉ के फैसले का सिर्फ विरोधी ही नहीं बल्कि कैबिनेट के ही कई नेता भी विरोध कर रहे हैं. उनकी पार्टी पीपुल पावर पार्टी के बड़े नेता हान डोंग हून ने इस फैसले को गलत बताते हुए मुख्य विपक्षी नेता ली जे-म्यूंग से हाथ मिला लिए हैं. सड़कों पर राष्ट्रपति के खिलाफ रैलियों निकाली जा रही हैं, जिसमें मांग की जा रही है कि उनके खिलाफ महाभियोग लाया जाए. उन पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लग रहे हैं. राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की मांग राष्ट्रपति का ऐलान और फिर उस फैसले से यूटर्न उन पर भारी पड़ता नजर आ रहा है. कहा जा रहा है कि संसद में राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग लाया जा सकता है. अगर नेशनल असेंबली में दो-तिहाई से ज्यादा सांसद इसके पक्ष में वोट करते हैं तो उनके खिलाफ महाभियोग चलाया जा सकता है. बता दें कि नेशनल असेंबली में राष्ट्रपति की पीपुल पावर पार्टी के 300 में से 108 सांसद हैं. विपक्ष का राष्ट्रपति को अल्टीमेटम दक्षिण कोरिया की विपक्षी पार्टी ने राष्ट्रपति यू को अल्टीमेटम दिया है कि अगर उन्होंने राष्ट्रपति पद से तुरंत इस्तीफा नहीं दिया तो उनके खिलाफ महाभियोग लाया जाएगा. अगर नेशनल असेंबली में दो-तिहाई से ज्यादा सांसद इसके पक्ष में वोट करते हैं तो उनके खिलाफ महाभियोग चलाया जा सकता है. महाभियोग के प्रस्ताव को संवैधानिक कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा. यहां नौ में से कम से कम छह जज अगर इसे मंजूरी दे देते हैं तो आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इस दौरान अंतिम फैसला आने तक राष्ट्रपति को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने की मनाही होगी. इस दौरान प्रधानमंत्री अंतरिम नेता के तौर पर कामकाज देखेंगे. महाभियोग होने के 60 दिनों के भीतर चुनाव कराने होंगे. अमेरिका को दक्षिण कोरिया का माना जाता है. इस समय अमेरिका के लगभग 30,000 सैनिक दक्षिण कोरिया में तैनात हैं. ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिका ने कहा कि हमारी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर है. हम किसी भी स्थिति में मार्शल लॉ का समर्थन नहीं करते.  

बांग्लादेश ने अगरतला में कांसुलर सेवाएं की बंद, अगरतला में बंद की वीजा सर्विस

अगरतला बांग्लादेश और भारत के बीच रिश्ते दिन पर दिन कड़वे होते जा रहे हैं. बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचार को देखते हुए भारत के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले. इस बीच त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में बांग्लादेश सहायक उच्चायोग ने सुरक्षा कारणों से अपनी सभी सेवाएं अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दी है. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, उच्चायोग के ही एक अधिकारी ने सेवाएं बंद करने की जानकारी दी है. बांग्लादेश की ओर से यह कदम उसके देश में हिंदू पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के विरोध के बाद उठाया गया है. कथित तौर पर कुछ लोगों का एक ग्रुप अगरतला स्थिति बांग्लादेश सहायक उच्चायोग में जबरन घुसने की कोशिश की थी. अगले आदेश तक सभी सेवाएं सस्पेंड बांग्लादेश मिशन के प्रथम सचिव एमडी अल अमीन ने कहा कि सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अगरतला स्थिति सहायक उच्चायोग की वीजा समेत सभी सेवाएं अगले आदेश तक के लिए सस्पेंड कर दी गई हैं. उन्होंने कहा कि आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा. अगरतला में बांग्लादेश के सहायक उच्चायोग में कथित तौर पर जबरन घुसने के मामले में पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए केस दर्ज किया है. इसके साथ-साथ घटना में शामिल 7 लोगों को गिरफ्तार भी किया है. इसके बाद भी बांग्लादेश उच्चायोग ने अगरतला में अपनी सेवाओं को सस्पेंड करना का फैसला किया है. त्रिपुरा में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला त्रिपुरा की सीमा बांग्लादेश से लगती है. ऐसे में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर त्रिपुरा में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं. भारत ने अगरतला में बांग्लादेश के सहायक उच्चायोग के परिसर में जबरन घुसने की घटना को बेहद खेदजनक बताया है. पश्चिमी त्रिपुरा जिले के पुलिस अधीक्षक किरण कुमार ने बताया कि काम मे लापरवाही बरतने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. उन्होंने बताया कि तीन उपनिरीक्षकों को निलंबित किया गया है और एक पुलिस उपाधीक्षक को पुलिस मुख्यालय में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है. बांग्लादेश उच्चायोग ने क्या कहा? बांग्लादेश मिशन के प्रथम सचिव एम.डी. अल-अमीन ने कहा, ‘सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अगरतला स्थित बांग्लादेश सहायक उच्चायोग की वीजा समेत सभी सेवाएं अगले आदेश तक निलंबित रहेंगी। यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा।’   त्रिपुरा सीएम ने की घटना की निंदा मुख्यमंत्री माणिक साहा ने घटना की निंदा करते हुए कहा, ‘विरोध रैली के दौरान युवाओं के एक समूह ने अगरतला में बांग्लादेश के सहायक उच्चायोग कार्यालय में घुसने की कोशिश की। मैं घटना की निंदा करता हूं। शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।’   होटल असोसिएशन का बड़ा फैसला इससे संबंधित घटनाक्रम में ऑल त्रिपुरा होटल एंड रेस्टोरेंट ओनर्स असोसिएशन (एटीएचआरओए) ने भी बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में होटल बांग्लादेशी मेहमानों को वहां भारतीय ध्वज के अपमान के कारण अपनी सेवाएं नहीं देंगे। एटीएचआरओए के महासचिव सैकत बंद्योपाध्याय ने कहा कि यह आपातकालीन बैठक में लिया गया है। असोसिएशन के महासचिव ने कहा, ‘हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं और सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। हमारे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया गया है और अल्पसंख्यकों को बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के एक वर्ग के उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। पहले भी ऐसी घटनाएं होती थीं, लेकिन अब यह सीमा पार कर गई है।’   नॉर्थ ईस्ट में लगातार विरोध इस बीच, असम सहित कई पूर्वोत्तर राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी रहा। सनातनी युवा के बैनर तले हजारों लोग अगरतला में एकत्र हुए और दास की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए रैली निकाली। उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों का भी विरोध किया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अखौरा एकीकृत जांच चौकी (आईसीपी) की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई क्योंकि पुलिस ने उन्हें बांग्लादेश मार्च आयोजित करने की अनुमति नहीं दी थी।    

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