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हंगामा नहीं थमा तो श्री बिरला ने सदस्यों से कहा- देश की जनता चाहती है कि उनके सवाल यहां पर उठे, नहीं चला प्रश्नकाल

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्षी दलों के सदस्यों ने आज फिर हंगामा और शोरशराबा किया जिसके कारण सदन में प्रश्नकाल बाधित रहा और अध्यक्ष ओम बिरला को सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई विपक्ष के सदस्य अपनी मांगों को लेकर खड़े हो गए और सदन में चर्चा की मांग करने लगे। अध्यक्ष ने सदस्यों की बात अनसुनी कर प्रश्न काल जारी रखा तो विपक्षी दलों के सदस्यों का हंगामा तेज हो होने लगा। प्रश्नकाल में सबसे पहला मुद्दा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का आया जिसमें मंत्री, सदस्य का सवाल और शोर शराबे के कारण सुन नहीं पाए और उन्होंने दोबारा प्रश्न करने का आग्रह किया। हंगामे के बीच सदस्य ने दोबारा सवाल किया जिसका स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेप नड्डा ने लंबा जवाब दिया लेकिन शोर शराबे में कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था। हंगामा नहीं थमा तो श्री बिरला ने सदस्यों से कहा “ देश की जनता चाहती है कि उनके सवाल यहां पर उठे। यह सदन उनकी आशा और आकांक्षा का मंदिर है और उसमें सबको सहयोग करना चाहिए। आज महत्वपूर्ण विषय है। प्रश्नकाल आपका समय है इसलिए आपसे आग्रह है कि प्रश्नकाल चलने दें। देश की जनता माननीय सांसदों के बारे में और अपने मुद्दों को लेकर चिंता कर रही है। सदन सबका है इसलिए सदन चलने दीजिए। आपके जो मुद्दे हैं उन सब पर बोलने का आप सबको मौका दिया जाएगा।”  

अजमेर याचिकाकर्ता हिंदू सेना के प्रमुख ने वाद का आधार एक किताब को बनाया है जो 113 साल पहले प्रकाशित हुई थी

अजमेर अजमेर शरीफ दरगाह के नीचे शिवमंदिर होने का दावा करते हुए अजमेर की एक अदालत में याचिका दायर किए जाने को लेकर नया विवाद छिड़ गया है। अदालत ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया तो इस मुद्दे पर बयानबाजी की बाढ़ आ गई। याचिकाकर्ता हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्ता ने वाद का आधार एक किताब को बनाया है जो 113 साल पहले प्रकाशित हुई थी। इस किताब के लेखक हरबिलास शारदा हैं, जो उस दौर में अजमेर में जानेमाने शख्सियत थे। 3 जून 1867 को अजमेर में जन्मे हरबिलास शारदा बीए की डिग्री ली थी। वह आगे की पढ़ाई के लिए ऑक्सफोर्ड जाना चाहते थे, लेकिन तभी पिता की मौत की वजह से उन्हें अपना विचार बदलना पड़ा। महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों से प्रेरित होकर वह उनकी संस्था से जुड़ गए थे। 21 साल की उम्र में वह अजमेर आर्य समाज के प्रमुख बन गए थे। शुरुआत में वह शिक्षक बने और फिर बाद में न्यायिक सेवा में चले गए। 1892 में वह अजमेर-मेरवाड़ा प्रांत के न्यायिक विभाग में नियुक्त हुए। वह कई अदालतों में जज के रूप में अपनी सेवा देने के बाद वह दो बार विधायक भी बने। 1926 और 1930 में वह अजमेर-मेरवाड़ा सीट से प्रतिनिधि चुने गए थे। 1929 में उन्होंने ही बाल विवाह निषेध अधिनियम पारित कराया था जिसे शारदा ऐक्ट के नाम से भी जाना जाता है। हरबिलास सारदा ने कई किताबें भी लिखीं। इनमें ‘अजमेर: हिस्टोरिकल एंड डिसक्रिप्टिव’ प्रमुख है। 1911 में प्रकाशित हुई इस किताब में उन्होंने ख्वाजा ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के जीवनकाल और उनके दरगाह को लेकर कई अहम बातें लिखी हैं। इसी किताब में हरबिलास सारदा ने कहा है कि दरगाह का निर्माण मंदिर अवशेषों पर किया गया है। अब इस किताब को ही आधार बनाकर कोर्ट में वाद दायर किया गया है। दरगाह में शिव मंदिर होने का दावा करते हुए एक वाद अजमेर की स्थानीय अदालत में दायर किया गया था। अदालत ने बुधवार को वाद को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया और अजमेर दरगाह समिति, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), दिल्ली को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश की एक स्थानीय अदालत ने संभल स्थित जामा मस्जिद का सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था, क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि इस जगह पर पहले मंदिर था। इसके बाद हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई। अजमेर के इस ताजा विवाद के कारण कुछ लोग आशंका जता रहे हैं कि यह शहर भी ‘सांप्रदायिक तनाव’ की ओर बढ़ सकता है।

महाराष्ट्र के गोंदिया में भीषण सड़क हादसा, बाइक को बचाने के चक्कर में बस पलटी, 9 लोगों की मौत

मुंबई महाराष्ट्र के गोंदिया में शुक्रवार को भीषण सड़क हादसा हुआ है. यहां एक बस पलट जाने के कारण 9 लोगों की मौत हो गई है. मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है. घटना की जानकारी मिलने के बाद कार्यवाहक सीएम एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने पीड़ितों को 10 लाख रुपये की तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए परिवहन प्रशासन को आदेश है. गोंदिया कोहमारा राज्य महामार्ग पर ग्राम खजरी के नजदीक बाइक को बचाने के चक्कर में शिवशाही बस का भयानक एक्सीडेंट हो गया. यह महाराष्ट्र सड़क परिवहन निगम (MSRTC) की बस है. बस पलटने से इससे दबकर यात्रियों की मौत हो गई. मिली जानकारी के अनुसार घटना 29 नवंबर को दोपहर 12:00 से 12:30 बजे के बीच हुई है. बाइक को बचाने के चक्कर में पलट गई बस भंडारा से साकोली लखानी होते हुए गोंदिया की ओर जा रही शिवशाही बस (क्रमांक MH 09/EM 1273) के सामने अचानक बाइक आ गई. बाइक चालक को बचाने के चक्कर में ड्राइवर ने कट मारी, जिससे तेज रफ्तार बस पलट गई. हादसे के वक्त बस में 35 से अधिक यात्री सवार थे, जिनमें से नौ लोगों की मौत हो गई है. मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है. घटना में कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. मौके से फरार हुआ ड्राइवर चश्मदीदों के मुताबिक बस ड्राइवर घटनास्थल से फरार हो गया है. राहगीरों की सूचना पर एम्बुलेंस विभाग और पुलिस विभाग के लोग मौके पर पहुंचे. घायल यात्रियों को निकाल कर इलाज के लिए गोंदिया के जिला शासकीय केटीएस अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बस को उठाने के लिए क्रेन की मदद ली जा रही है. पुलिस मामले की जांच में जुट गई है. देवेंद्र फडणवीस ने कलेक्टर को दिया यह निर्देश इस घटना पर देवेंद्र फडणवीस ने ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा, ”यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि गोंदिया जिले में सड़क अर्जुनी के पास एक शिवशाही बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई और कुछ यात्रियों की मृत्यु हो गई.  मैं दिवंगतों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. इस घटना में घायल हुए लोगों का अगर किसी निजी अस्पताल में इलाज कराना भी पड़े तो उन्हें तुरंत ऐसा करने का निर्देश दिया गया है. मैंने गोंदिया के कलेक्टर से भी कहा है कि यदि आवश्यकता हो तो उन्हें नागपुर स्थानांतरित करने की व्यवस्था करें.”

खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने ओडिशा में होने वाले पुलिस कार्यक्रम में बाधा डालने का बनाय प्लान

ओडिशा खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने ओडिशा में होने वाले पुलिस कार्यक्रम में बाधा डालने का प्लान बनाय है। खबर है कि पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) और पुलिस महानिरीक्षकों (आईजीपी) का सालाना अखिल भारतीय सम्मेलन को लेकर धमकी जारी की है। फिलहाल, इसे लेकर पुलिस की तरफ से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पन्नू ने वीडियो में कहा, ‘भुवनेश्वर सिर्फ मंदिर का शहर नहीं है, बल्कि आतंक का भी शहर है जहां CISF, BSF, CRPF, NSG, NIA और IB के 200 आतंकवादी अमित शाह के नेतृत्व में बैठक कर रहे हैं, जिसने शहीद निज्जर को मारने में भूमिका निभाई। हिंसक हिन्दुत्व विचारधारा के प्रभाव में खालिस्तान समर्थक सिखों, कश्मीरी लड़ाकों, नक्सलों और माओवादियों को मारने की साजिश करने वाले डीजीपी की आंतकी कॉन्फ्रेंस में बाधा डालें और रोके।’ आगे कहा, ‘नक्सलों और माओवादियों, कश्मीरी लड़ाकों, मैं अपील करता हूं कि अपने मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के लिए भुवनेश्वर के होटलों और मंदिरों में कवर लें।’ इस सम्मेलन में आंतरिक सुरक्षा, जम्मू-कश्मीर और खालिस्तान समर्थक तत्वों सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल एवं अन्य गणमान्य लोग इस तीन दिवसीय सम्मेलन में शामिल होंगे जहां साइबर अपराध, एआई उपकरणों से उत्पन्न चुनौतियों तथा ड्रोन से पैदा होने वाले खतरों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि डीजीपी और आईजीपी रैंक के लगभग 250 अधिकारी सम्मेलन में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेंगे, जबकि 200 से अधिक अन्य अधिकारी डिजिटल तरीके से हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन उन ठोस उपलब्धियों की पहचान करने तथा उनकी प्रगति की निगरानी करने का अवसर भी प्रदान करता है, जिसे हर वर्ष प्रधानमंत्री के समक्ष भी प्रस्तुत किया जाता है। वर्ष 2013 तक यह वार्षिक सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया जाता था। उसके अगले साल जब, मोदी सरकार के सत्ता में आयी, तब गृह मंत्रालय (एमएचए) और खुफिया ब्यूरो (आईबी) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय राजधानी के बाहर आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

केरल हाईकोर्ट ने हाथियों की परेड से जुड़े आवेदन को किया खारिज

केरल धार्मिक कार्यक्रम के दौरान हाथियों की परेड से जुड़े आवेदन को केरल हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। दरअसल, CDM यानी कोचीन देवसोम बोर्ड ने मंदिर उत्सव के दौरान हाथियों के बीच 3 मीटर की दूरी रखने के आदेश से छूट की मांग की थी। अदालत का कहना है कि जानवरों की भलाई के लिए ये निर्देश जरूरी थे। मामले में जस्टिस एके जयशंकरन नाम्बियार और जस्टिस गोपीनाथ पी की बेंच सुनवाई कर रही थी। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रथाओं को संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए। CDB ने तिरुपुनिथुरा के मंदिर में होने वाले उत्सव के दौरान छूट के लिए अदालत में आवेदन दिया था। बोर्ड की तरफ से पेश हुए एडवोकेट केपी सुधीर ने कहा था 15 हाथियों की परेड उत्सव का अभिन्न अंग है। बार एंड बेंच के अनुसार, जस्टिस नाम्बियार ने कहा, ‘अगर किसी ग्रंथ में हाथी के इस्तेमाल की बात नहीं कही गई है, तो यह जरूरी धार्मिक प्रथा नहीं है। हम यह नहीं कह रहे कि हाथियों को शामिल न करें। लोगों के विश्वास और धार्मिक उत्साह बनाए रखने के लिए हाथियों का मौजूद होना ठीक है, लेकिन आपको यह साबित करना होगा कि हाथियों के बीच 3 मीटर के कम दूरी ठीक होगी।’ बोर्ड का कहना था कि अगर निर्देशों का पालन किया जाता है, तो उत्सव में शामिल होने वाले हाथियों की संख्या सीमित रह जाएगी। ऐसे में लंबे समय से चली आ रही उत्सव की परंपराएं बधित होंगी। इसपर जस्टिस नाम्बियार ने कहा, ‘हम यह मानने से इनकार करते हैं कि हिंदू धर्म इतना कमजोर है कि यह हाथियों की मौजूदगी नहीं होने से ढह जाएगा।’ जस्टिस गोपीनाथ ने कहा, ‘जब तक आप यह नहीं दिखा देते कि हाथियों के बगैर धर्म का अस्तित्व नहीं रहेगा, तब तक जरूरी धार्मिक प्रथा का सवाल ही नहीं उठता है।’ इस मामले में कोर्ट हाथियों के भलाई पर ध्यान लगा रहा है, जो कई बार परेड और उत्सवों के दौरान मुश्किल हालात का सामना करते हैं। 13 नवंबर को बेंच ने क्रूरता को रोकने के लिए अंतरिम दिशानिर्देश जारी किए गए थे। इनमें त्योहारों का रजिस्ट्रेशन और परेड के समय हाथियों के बीच कम से कम 3 मीटर की दूरी की बात कही गई थी।

स्टेशन पर लड़की का रेप मामले में वलसाड में वापी रेलवे स्टेशन पर आरोपी राहुल करमवीर जाट को गिरफ्तार किया

वलसाड गुजरात में 19 वर्षीय युवती से बलात्कार और हत्या के आरोपी राहुल करमवीर जाट की हाल ही में हुई गिरफ्तारी से कुछ बेहद हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं। गुजरात पुलिस के अधिकारियों का दावा है कि पकड़ा गया आरोपी एक सीरियल किलर है, जो मुख्य रूप से एक महीने के भीतर कई राज्यों में ट्रेनों में हुई कम से कम चार और हत्याओं के साथ-साथ अन्य अपराधों में शामिल रहा है। 6 राज्यों की पुलिस के कड़े साझा प्रयास और गुजरात के कई जिलों में लगभग 2,000 सीसीटीवी कैमरे खंगालने के बाद 24 नवंबर को गुजरात के वलसाड में वापी रेलवे स्टेशन पर आरोपी राहुल करमवीर जाट को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि आरोपी खासकर ट्रेनों के विकलांग डिब्बों और महिलाओं के डिब्बों में अकेले यात्रियों को निशाना बनाता था। गुजरात में सीरियल किलर को कैसे पकड़ा गया? हरियाणा का रहने वाले 30 वर्षीय राहुल जाट को 24 नवंबर को कई राज्यों में बड़े पैमाने पर चलाए गए अभियान के बाद पकड़ा गया। वलसाड के पुलिस अधीक्षक करणराज वाघेला ने बताया कि सीरियल किलर को पुलिस ने उस समय पकड़ा, जब वह बांद्रा-भुज ट्रेन में यात्रा कर रहा था। पुलिस को 14 नवंबर को वलसाड जिले के उदवाड़ा रेलवे स्टेशन के पास 19 वर्षीय कॉलेज छात्रा की कथित हत्या और बलात्कार के बाद यह पहली सफलता मिली। 2000 सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए मृतक युवती के शव की फॉरेंसिक जांच में बलात्कार की पुष्टि हुई थी, जिसके तुरंत बाद पुलिस ने कई जांच टीमें बनाईं और 2000 से अधिक सीसीटीवी कैमरा फुटेज खंगालीं। आरोपी को रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों में देखा गया, उसने वही कपड़े पहने हुए थे जो उस क्षेत्र से बरामद किए गए थे, जहां युवती का शव मिला था। पुलिस टीम ने संदिग्ध की पहचान वापी रेलवे स्टेशन पर उसके लंगड़ेपन से की। सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में रेलवे स्टेशन पर राहुल जाट को खौफनाक अपराध करने के बाद कुछ खाते हुए भी देखा गया था। आरोपी की पहचान के बाद गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के पुलिस बलों ने एक जॉइंट ऑपरेशन चलाया। जांच में पता चला कि उसने कई राज्यों में कई हत्याएं की हैं। क्या है राहुल जाट का आपराधिक इतिहास वलसाड एसपी के मुताबिक, आरोपी ने 25 अक्टूबर को सिगरेट को लेकर हुए विवाद के बाद कर्नाटक में बेंगलुरु-मुर्देश्वर ट्रेन में एक साथी यात्री की हत्या कर दी थी। पश्चिम बंगाल में उसने 19 नवंबर को कटिहार एक्सप्रेस में एक 63 वर्षीय व्यक्ति की चाकू से हत्या कर उसे लूट लिया था। गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले, उसने 24 नवंबर को सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर मैंगलोर स्पेशल एक्सप्रेस में एक महिला की हत्या कर दी थी। वाघेला ने कहा, “अक्टूबर 2024 में उसने सोलापुर के पास पुणे-कन्याकुमारी ट्रेन में एक महिला यात्री का यौन उत्पीड़न किया और उसकी हत्या कर दी और इस मामले की जांच चल रही है।” कौन है सीरियल किलर राहुल जाट मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरियाणा में रोहतक जिले के रहने वाले राहुल करमवीर जाट ने 5वीं क्लास में ही पढ़ाई छोड़ दी है। उसने कथित तौर पर कई अपराध कबूल किए हैं। एएनआई के मुताबिक, राहुल एक दिव्यांग व्यक्ति है जो अपनी बीमारी का फायदा उठाकर आरोपी खुलेआम ट्रेनों में यात्रा करता था।

पॉर्नोग्राफी मामले में फिर बढ़ीं शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा की मुश्किलें, घर और दफ्तर में ED की छापेमारी

मुंबई ईडी ने शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा के घर और ऑफिसों पर छापेमारी की है। मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए अश्लील कंटेंट बनाने और इसे बेचने से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में ED ने कपल के घर पर छापेमारी की है। ईडी की जांच 2021 के मुंबई पुलिस मामले पर आधारित है। राज कुंद्रा को इससे पहले जुलाई 2021 में मुंबई क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था। बाद में अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। राज कुंद्रा ने मामले में अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया था। इस साल की शुरुआत में राज कुंद्रा ईडी के जाल में फंस गए थे, जब मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत मुंबई के जुहू में एक फ्लैट, पुणे में एक बंगला और 98 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयरों सहित उनकी संपत्ति जब्त कर ली गई थी। कब शुरू हुई कानूनी परेशानी! दोनों की ये कानूनी परेशानी 2018 में ईडी की शुरू की गई जांच के बाद आई, जब उन्होंने पोंजी स्कीम में शामिल होने के लिए अमित भारद्वाज की जांच शुरू की। जबकि शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा को शुरू में संदिग्धों के तौर पर देखा जा रहा था। राज और शिल्पा दोनों ने अपनी बेगुनाही बरकरार रखते हुए दावा किया कि उन्होंने ईडी की जांच में पूरा सहयोग किया है। राज ने कई सम्मनों में भाग लिया और शिल्पा ने भी सभी पेपर दिखाए। पति-पत्नी ने दी चुनौती बाद में, राज और शिल्पा ने अपनी प्रॉपर्टीज को खाली करने के लिए ईडी के नोटिस को चुनौती दी, जिसमें जुहू में उनका मुंबई का घर और पुणे के पास एक फार्महाउस भी शामिल था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बेदखली आदेश पर रोक लगाकर उन्हें अंतरिम राहत दी थी। कब गिरफ्तार हुए राज कुंद्रा? राज कुंद्रा को जुलाई 2021 में मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था जब चार महिलाओं ने शिकायत की थी कि एक वेब सीरीज में एक्टिंग का काम देने का वादा करने के बाद उन्हें अश्लील कंटेंट शूट करने के लिए मजबूर किया गया था। उन्हें सितंबर में आर्थर जेल से रिहा किया गया था।

नवजोत कौर के PA ने एक शो रूम खरीदने के बहाने यह साजिश रची और उन्हें भरोसे में लेकर रकम हड़प ली

नई दिल्ली कांग्रेस नेता और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) की पत्नी डॉ. नवजोत कौर (Navjot Kaur) के साथ दो करोड़ की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. नवजोत कौन ने अपने निजी सहायक (PA), एक एनआरआई और उनके सहयोगियों पर 2 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं. यह मामला प्राइम लोकेशन पर स्थित शोरूम की खरीद-फरोख्त से जुड़ा है. जानकारी के अनुसार, डॉ. नवजोत कौर ने पुलिस से की गई शिकायत में कहा है कि उनके निजी सहायक ने बताया कि एक एनआरआई अमृतसर के पॉश एरिया रंजीत एवेन्यू क्षेत्र में शोरूम बेचना चाहता है. PA ने बताया कि एनआरआई इस शोरूम को वाजिब दामों पर दे रहा है. इस बात पर विश्वास करते बात फाइनल की. डॉ. कौर ने एनआरआई के खाते में एडवांस के तौर पर राशि ट्रांसफर कर दी. इसके साथ ही उन्होंने अपने PA को एक चेक भी दिया, जिसे एनआरआई को देने के लिए कहा. इसके कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि शोरूम की कोई डील नहीं हुई. दो करोड़ रुपये सही व्यक्ति तक नहीं पहुंचाए गए. आरोप है कि PA, एनआरआई और उनके सहयोगियों ने मिलकर पैसे हड़प लिए. डॉ. कौर की शिकायत पर पुलिस ने यह मामला आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offenses Wing) को भेज दिया है. ईओडब्ल्यू इस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह धोखाधड़ी किस प्रकार से अंजाम दी गई. इस मामले में पुलिस अधिकारी जांच कर रहे हैं. इसी के साथ संबंधित दस्तावेजों और बैंक ट्रांजेक्शन की पड़ताल हो रही है. आरोप है कि इस रकम को एनआरआई और उनके सहयोगियों ने कहीं और इस्तेमाल किया है. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल मामले की छानबीन चल रही है. आरोपियों से पूछताछ की जाएगी.  

बांग्लादेश हाईकोर्ट ने इस्कॉन मंदिर पर प्रतिबंध लगाने से इंकार कर दिया

ढाका बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ लगातार जारी हिंसा के बीच वहां के उच्च न्यायालय ने गुरुवार को इस्कॉन पर बैन लगाने से इनकार कर दिया है। देशद्रोह के मामले में बांग्लादेश इस्कॉन के प्रमुख चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद से ही हिंदू समुदाय के लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों के दौरान ही एक वकील की मौत हो गई, जिसके बाद बांग्लादेश में इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने मांगी थी रिपोर्ट वकीलों ने बुधवार को संगठन से संबंधित कुछ समाचार पत्रों की रिपोर्ट रखने के बाद उच्च न्यायालय से अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण चेतना समाज (इस्कॉन) पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। द डेली स्टार के अनुसार, उच्च न्यायालय ने अटॉर्नी जनरल से इस्कॉन की हालिया गतिविधियों के संबंध में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देने को कहा था। क्यों उठा इस्कॉन का मुद्दा? बता दें बांगलादेश में लगातार हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। इसी के चलते चिन्मय कृष्ण दास शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की वजह से उन्हें देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद मंगलवार को झड़पें हुईं, जिसमें एक असिस्टेंट सरकारी वकील सैफुल इस्लाम की मौत हो गई। हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका ढाका हाईकोर्ट ने बांग्लादेश में इस्कॉन पर बैन लगाने की याचिका को आज खारिज कर दिया है। सरकारी वकील ने इस्कॉन पर बैन लगाने को ज़रूरी बताया, लेकिन हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने सरकार से कही यह बात.. हाईकोर्ट ने न सिर्फ बांग्लादेश में इस्कॉन पर बैन लगाने की याचिका को खारिज किया, बल्कि सरकार से एक बड़ी बात भी कही। हाईकोर्ट ने बांग्लादेश सरकार (अंतरिम) से पूरे देश में रह रहे हिंदुओं के जीवन, संपत्ति की रक्षा के लिए कानून व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा। बताया कि गुरुवार को जब उच्च न्यायालय की कार्यवाही शुरू हुई तो अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने न्यायालय द्वारा मांगी गई जानकारी न्यायमूर्ति फराह महबूब और न्यायमूर्ति देबाशीष रॉय चौधरी की पीठ के समक्ष रखी। अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल अनीक आर हक और डिप्टी अटॉर्नी जनरल असद उद्दीन ने उच्च न्यायालय की पीठ को सूचित किया कि वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की हत्या और इस्कॉन की गतिविधियों के संबंध में तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं और इन मामलों में 33 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने लगाई बांगलादेश सरकार को फटकार अटॉर्नी जनरल की रिपोर्ट पढ़ने के बाद पीठ ने बांगलादेश सरकार को चेतावनी दी। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि सरकार कानून-व्यवस्था की स्थिति और बांग्लादेश के लोगों के जीवन और संपत्ति की रक्षा के बारे में सतर्क रहेगी। भारत ने जताई चिंता, किया सुरक्षा का आग्रह भारत ने मंगलवार को दास की गिरफ्तारी और जमानत से इनकार करने पर गहरी चिंता व्यक्त की और ढाका से हिंदुओं और अन्य सभी अल्पसंख्यक समूहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

पहली बार PM PM के सुरक्षा घेरे में दिखी महिला SPG कमांडर, वायरल हो रही तस्वीर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में कथित तौर पर शामिल एक महिला एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) कमांडो की तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस तस्वीर ने ऑनलाइन बहस को जन्म दे दिया है। जहां कुछ लोगों ने दावा किया कि यह पहली बार है जब किसी महिला कमांडो को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में देखा गया है। वहीं, अन्य ने बताया कि यह महिला कमांडो पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सुरक्षा में भी देखी जा चुकी हैं। तस्वीर शेयर कर रहे भाजपा सांसद कई भाजपा सांसद इस तस्वीर को शेयर कर रहे हैं। मंडी से सांसद कंगना रनौत ने भी इसे अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया है।केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात महिला SPG कमांडो की तस्वीर शेयर करते हुए उनकी बहादुरी और प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने लिखा, “भारत की शान, नारी शक्ति की पहचान! SPG में ड्यूटी पर तैनात हमारी साहसी महिला सुरक्षा अधिकारी देश की सेवा और सुरक्षा में नया मानदंड स्थापित कर रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी शक्ति हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है। यह नया भारत है, जहां महिलाएं आत्मनिर्भरता और ताकत की मिसाल बन रही हैं।” चिक्काबल्लापुरा से भाजपा के लोकसभा सांसद डॉक्टर के सुधाकर ने भी यही तस्वीर शेयर की है। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री की एसपीजी में महिला कमांडो! अग्निवीर से लेकर लड़ाकू पायलट तक, लड़ाकू पदों से लेकर प्रधानमंत्री की एसपीजी में कमांडो तक, सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और महिलाएं आगे बढ़कर नेतृत्व कर रही हैं। महिलाओं को और अधिक शक्ति मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद।” पहले भी देखी जा चुकी हैं महिला SPG कमांडो इसके अलावा, कई अन्य लोगों ने भी सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को शेयर करते हुए दावा किया है कि ऐसा पहली बार है जब पीएम की सुरक्षा में कोई महिला SPG कमांडो तैनात है। ऐसा ही दावा सात साल पहले भी किया गया था जब एक वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में एक महिला कमांडो को देखा गया था। यानी ये साफ है कि महिला SPG कमांडे पहले भी पीएम मोदी के सुरक्षा घेरे में देखी जा चुकी हैं। जानकारी के अनुसार, एसपीजी ने 2013 से महिला कमांडो को अपने दस्ते में शामिल करना शुरू किया था, जिससे महिलाओं को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में भागीदारी का अवसर मिला। कथित तौर पर यह तस्वीर संसद की है, जहां महिला एसपीजी कमांडो तैनात हैं। इन कमांडो को आम तौर पर महिला विजिटर्स की तलाशी लेने के लिए गेट पर तैनात किया जाता है और वे परिसर में प्रवेश करने या बाहर निकलने वाले लोगों की निगरानी करने में भी शामिल होती हैं। इसके अलावा, जब कोई महिला अतिथि प्रधानमंत्री से मिलती है, तो महिला एसपीजी अधिकारी ही सुरक्षा जांच, एस्कॉर्टिंग और प्रधानमंत्री तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होती हैं। हालांकि जो तस्वीर वायरल हो रही है उसमें दिख रही महिला अधिकारी PM मोदी की सुरक्षा में नहीं राष्ट्रपति मुर्मू की सुरक्षा में तैनता थीं। बताया जा रहा है कि यह फोटो 26 नवंबर को उस वक्त की है जब राष्ट्रपति मुर्मू संसद को संबोधित करने जा रही थीं। 2015 से, महिलाओं को एसपीजी की क्लोज प्रोटेक्शन टीम (CPT) में भी शामिल किया गया है। यानी अब पीएम के सबसे करीबी सुरक्षा घेरे में भी महिला कमांडो तैनात होती हैं। प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान, महिला एसपीजी कमांडो सुरक्षा दल का हिस्सा होती हैं। वर्तमान में, एसपीजी में कथित तौर पर करीब 100 महिला कमांडो हैं। पहली बार 2013 में महिला एसपीजी कमांडो को किसी उच्च-स्तरीय हस्ती की सुरक्षा में तैनात किया गया था। उस समय दो महिला कमांडो को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर की सुरक्षा करते देखा गया था। महिला कमांडो की उपस्थिति प्रधानमंत्री की सुरक्षा के प्रति एसपीजी की व्यापक सोच और समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाती है। यह कदम न केवल महिलाओं को समान अवसर प्रदान करता है, बल्कि सुरक्षा क्षेत्र में उनकी बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता करता है। स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप क्या है? स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) भारत का एक बेहद खास और एलीट सुरक्षा बल है, जिसे देश के सर्वोच्च नेतृत्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गठित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री, उनके निकट परिजन, और पूर्व प्रधानमंत्रियों को संभावित खतरों से सुरक्षित रखना है। एसपीजी की स्थापना 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद की गई थी। इसे संसद द्वारा 1988 में पारित एसपीजी अधिनियम के तहत कानूनी मान्यता दी गई। इस अधिनियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार को किसी भी आतंकी, विदेशी या अन्य खतरों से अत्यंत सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाए। एसपीजी के जवान भारतीय पुलिस सेवा (IPS), सशस्त्र बलों, और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) से चुने जाते हैं। चयनित कर्मियों को कठोर ट्रेनिंग और हाई फिजिकल एवं मानसिक फिटनेस के मानदंडों को पूरा करना होता है। एसपीजी कर्मियों को हथियार संचालन, मार्शल आर्ट्स, भीड़ नियंत्रण, ड्राइविंग, और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। एसपीजी अत्याधुनिक हथियारों और संचार तकनीकों से लैस होता है। इसके अलावा, यह टीम बुलेटप्रूफ गाड़ियां, जैमर, और अन्य आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करती है। एसपीजी की कार्यप्रणाली अत्यंत गोपनीय होती है। इसके अभियान और रणनीतियां सार्वजनिक नहीं की जातीं। 2019 में, केंद्र सरकार ने एसपीजी अधिनियम में संशोधन किया, जिसके तहत एसपीजी सुरक्षा अब केवल मौजूदा प्रधानमंत्री और उनके परिवार तक सीमित कर दी गई। पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवार को यह सुरक्षा केवल पांच साल तक दी जाती है, वह भी विशेष परिस्थितियों में। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तस्वीर वायरल होने के बाद लोगों ने इसे लेकर अपनी राय व्यक्त की। कुछ ने इसे “नारी शक्ति” का उदाहरण बताया, तो कुछ ने महिलाओं की भागीदारी को देश के सुरक्षा तंत्र की प्रगतिशीलता का प्रतीक कहा। एसपीजी, जो प्रधानमंत्री और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, देश के सबसे प्रतिष्ठित सुरक्षा दस्तों में से एक मानी जाती है। महिला कमांडो का इसमें योगदान भारत के सुरक्षा तंत्र में महिलाओं की भूमिका को और सशक्त करता है।

ग्राम पंचायत का आरोप है कि इस भूमि पर उनका अधिकार है और वक्फ बोर्ड का दावा गलत, सुप्रीम कोर्ट में करेगी अपील

जालंधर पंजाब के कपूरथला जिले के बुधो पुंदेर गांव की वक्फ बोर्ड जमीन मामले में ग्राम पंचायत ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने का निर्णय लिया है। ग्राम पंचायत का आरोप है कि इस भूमि पर उनका अधिकार है और वक्फ बोर्ड का दावा गलत है। अब ग्राम पंचायत इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। इस मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब उच्च न्यायालय ने वक्फ बोर्ड के दावे को सही ठहराया, जिसमें कहा गया था कि यह भूमि मस्जिद, कब्रिस्तान और टाकिया (मुसलमानों के सामान्य उपयोग के लिए भूमि) के लिए दान की गई थी, और बाद में 1971 में वक्फ बोर्ड को सौंप दी गई थी। न्यायालय ने इस भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया और ग्राम पंचायत की दलीलों को खारिज कर दिया। ग्राम पंचायत के सदस्य रेशम सिंह ने कहा कि इस भूमि पर पिछले 40-50 सालों से गांव के लोग खेती कर रहे हैं और उन्होंने इस भूमि पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि इसे जमींदारों ने वक्फ बोर्ड से छुड़वाया था। रेशम सिंह ने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड की संपत्ति और मस्जिद मुसलमानों की है, लेकिन भूमि पर जो कब्जा है, वह जमींदारों ने जानबूझकर किया हुआ है। इस पर उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत अब इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। ग्राम पंचायत के सरपंच कुलवंत सिंह ने भी इस फैसले पर असहमति जताई है। उन्होंने कहा कि गांव में स्थित मस्जिद और गुरुद्वारा दोनों ही खुले हैं, लेकिन मस्जिद में आज तक कोई व्यक्ति नहीं आया है। वहीं, गुरुद्वारे में संगत दर्शन के लिए आती है। सरपंच ने बताया कि यह भूमि करीब 16 से 17 एकड़ में फैली हुई है, और इस पर पिछले 15-20 सालों से मुकदमा चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह जमीन नगर पंचायत की है और उसी की रहेगी। सरपंच ने बताया कि मस्जिद 1947 से पहले बनी हुई थी, जबकि गुरुद्वारा मस्जिद की जगह पर नहीं, बल्कि उससे अलग एक एकड़ में बनाया गया है। इस मामले में न्यायमूर्ति सुरेश्वर ठाकुर और न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। ग्राम पंचायत ने वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत गठित न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें वक्फ बोर्ड के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। पंचायत ने तर्क दिया था कि पंजाब अधिनियम, 1953 के तहत इस संपत्ति पर उनका अधिकार बनता है, जो वक्फ अधिनियम, 1995 से प्राथमिकता रखता है। हालांकि, न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और माना कि यह मामला भूमि के वर्गीकरण का है, न कि विभिन्न कानूनों की प्राथमिकता का। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आधिकारिक अभिलेखों में इस भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है, और इसे मस्जिद, कब्रिस्तान और टाकिया के रूप में पहचान दी गई है। खंडपीठ ने वक्फ अधिनियम के तहत इस भूमि के स्वामित्व का निर्धारण किया और कहा कि यह भूमि धार्मिक उद्देश्यों के लिए है, न कि निजी इस्तेमाल के लिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि पंजाब अधिनियम, 1953 की संवैधानिक सुरक्षा, वक्फ अधिनियम के प्रावधानों पर प्रभाव नहीं डालती है।  

देश में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की जीत से तेजी से बढ़ेंगे आर्थिक सुधार!

मुंबई हाल के विधानसभा चुनावों में जीत से भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की स्थिति और मजबूत हुई है। इससे स्थिरता के साथ देश में आर्थिक सुधारों में तेजी आएगी। यह जानकारी गुरुवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई। पीएल कैपिटल – प्रभुदास लीलाधर की रिपोर्ट में कहा गया है कि महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में हाल के विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के नतीजों ने सत्तारूढ़ एनडीए की स्थिति को मजबूत किया है। इससे देश में सभी क्षेत्रों में प्रमुख सुधारों की दिशा में नीतिगत निरंतरता में मदद मिलेगी। महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति की भारी जीत के साथ 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पहुंचने की राज्य की महत्वाकांक्षा को एक बड़ा बल मिला है। इस साल अगस्त में 500 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का आंकड़ा पार करने वाला महाराष्ट्र का पहला राज्य था, जो दिखाता है कि राज्य तेजी से आर्थिक प्रगति कर रहा है और एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा में बताया गया कि भारत में आने वाले समय में खाद्य महंगाई दर में गिरावट आएगी। इसके साथ ही अच्छे मानसून, न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ने और इनपुट की पर्याप्त आपूर्ति का फायदा कृषि क्षेत्र को मिल सकता है। मांग की परिस्थितियां मिश्रित बनी हुई हैं। हालांकि, कम बेस और अच्छे मानसून के कारण ग्रामीण मांग में उछाल देखने को मिल रहा है। अब सारी उम्मीदें त्योहारी और शादियों के सीजन में होने वाली मांग में बढ़ोतरी पर टिकी हुई हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में वैश्विक स्तर पर युद्धों में कमी आने की उम्मीद है। कच्चे तेल की कीमत स्थिर रहेंगी और यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत हैं। आगे कहा गया कि सरकार का पूंजीगत खर्च आने वाले समय में बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि दूसरी तिमाही में पूंजीगत खर्च सकारात्मक रहा था।

नर्स को 120 दिन की चाइल्ड केयर लीव देने का आदेश दिया, स्तनपान एक मानव अधिकार है- कर्नाटक उच्च न्यायालय

बेंगलुरु कर्नाटक हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) को अनिता जोसेफ नाम की नर्स को 120 दिन का चाइल्ड केयर लीव (CCL) देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि स्तनपान बच्चों और माताओं के लिए एक मानवाधिकार है। इसे दोनों के लाभ के लिए संरक्षित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। कोर्ट के इस फैसले से पहले CAT ने पहले ही NIMHANS को चाइल्ड केयर लीव देने का निर्देश दिया था, जिसके खिलाफ NIMHANS ने हाईकोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने अपने इस फैसले में कार्यरत माताओं और उनके बच्चों के अधिकारों को मान्यता देने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। कोर्ट ने कही ये बात कोर्ट ने कहा कि बच्चों को स्तनपान कराने और उनके साथ पर्याप्त समय बिताने का अधिकार माताओं को है। NIMHANS ने तर्क दिया कि ICU नर्स को छुट्टी देने से आवश्यक सेवाएं बाधित होंगी। न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि एक नर्स की अनुपस्थिति से अत्यधिक कठिनाई कैसे होगी, यह समझ से परे है। ये है मामला जानकारी के अनुसार, अनिता जोसेफ ICU में नर्स हैं। उसने अपने बच्चे की देखभाल के लिए जनवरी 2023 से मई 2023 तक सीसीएल के लिए आवेदन किया था। NIMHANS ने यह कहते हुए उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया कि ICU नर्स को 120 दिन की छुट्टी देने से आवश्यक सेवाएं बाधित होंगी। जोसेफ ने CAT का दरवाजा खटखटाया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। CAT ने बच्चे के शुरुआती वर्षों में स्तनपान और देखभाल के महत्व को स्वीकार किया। इस फैसले से असंतुष्ट NIMHANS ने ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने दिया इस बात का हवाला हाईकोर्ट ने बाल अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, 1989 का हवाला दिया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बच्चे का सर्वोत्तम हित प्राथमिक विचार होना चाहिए। समाज का दायित्व है कि वह इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए स्तनपान को बढ़ावा दे। कोर्ट ने कहा कि NIMHANS, संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत राज्य का एक साधन होने के नाते, एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करना चाहिए। मातृत्व और बाल देखभाल अवकाश के दावों पर उचित विचार किया जाना चाहिए। हाईखोर्ट ने टिप्पणी की, कैजुअल लीव एक नियमित बात है, जबकि मातृत्व अवकाश एक गंभीर मामला है। इसी तरह, मेडिकल लीव बीमारी की प्रकृति पर निर्भर करती है। चाइल्ड केयर लीव के महत्व को भी कम नहीं आंका जा सकता।

पलूशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई, ग्रैप-4 की पाबंदियां 2 दिसंबर तक लागू रहेंगी

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में पलूशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को फिर सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने कहा कि ग्रैप-4 की पाबंदियां 2 दिसंबर तक लागू रहेंगी और उस दिन सुनवाई में फैसला लिया जाएगा, इसे आगे बढ़ाया जाए या फिर नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई जारी रखने की बात कही है और कहा कि यह गंभीर मसला है। इसलिए हम इस पर सुनवाई करते रहेंगे। यही नहीं बेंच ने पंजाब सरकार को भी फटकार लगाई और कहा कि एक मीडिया रिपोर्ट कहती है कि राज्य के अधिकारी किसानों को कह रहे हैं कि वे शाम को 4 बजे के बाद पराली जलाएं। ऐसा करने से वे सैटेलाइट की नजर में नहीं आएंगे। बेंच ने कहा कि ऐसा करना गलत है और अदालत के आदेश की अवमानना है। अदालत ने कहा कि हमें पलूशन से निपटने के लिए कोई स्थायी समाधान ही निकालना होगा। बेंच ने कहा, ‘पंजाब सरकार अपने अधिकारियों को आदेश दे कि वे किसानों को ऐसी सलाह न दें कि 4 बजे के बाद पराली जलाई जा सकती है। ऐसा करना आदेश का उल्लंघन है। अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे आदेश का पालन करें। इसकी बजाय यदि वे पराली जलाने के लिए किसानों को दिमाग दे रहे हैं तो यह गलत बात है।’ कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई में हम पराली जलाने, ट्रकों की एंट्री और पटाखों पर बैन को लेकर विचार करेंगे। अदालत ने कहा, ‘हमारे पास एक ऐसी मशीनरी होनी चाहिए, जिससे यह डेटा मिल सके कि कौन कब पराली जला रहा है। यह मॉनिटरिंग 24 घंटे की होनी चाहिए। यह एक गंभीर समस्या है और इसी के चलते पलूशन बढ़ता जा रहा है। पंजाब समेत संबंधित राज्य इस पर रोक लगाने में बहुत धीरे ऐक्शन ले रहे हैं।’ अदालत ने एक मीडिया रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें दावा किया गया था कि अफसर सलाह देते हैं कि 4 बजे के बाद किसान पराली जला सकते हैं। इससे वे सैटेलाइट से भी बच सकेंगे। बेंच ने कहा कि ऐसा करना तो अदालत की ही अवमानना है। सरकार तुरंत इस पर ऐक्शन ले।

जम्मू-कश्मीर में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया, अभी तक कश्मीर घाटी में कहीं भी जान-माल के नुकसान नहीं

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में गुरुवार को रिक्टर पैमाने पर 5.8 तीव्रता का भूकंप आया, लेकिन किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप शाम 4.19 बजे दर्ज किया गया। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में 36.49 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 71.27 डिग्री पूर्वी देशांतर पर 165 किलोमीटर की गहराई पर था। उन्होंने बताया कि अभी तक कश्मीर घाटी में कहीं भी जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। 13 नवंबर को भी आया था भूकंप इससे पहले 13 नवंबर को जम्मू कश्मीर में 5.2 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था। हालांकि इस दौरान जान-माल के किसी नुकसान की कोई खबर नहीं थी। अधिकारियों ने बताया था कि भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था और यह सुबह दस बज कर 43 मिनट के आसपास महसूस किया गया था। कश्मीर घाटी में भूकंप के झटके महसूस होने के बाद लोगों में दहशत फैल गई थी और वे घरों से बाहर निकल आए थे। दो दिन पहले भिवंडी में महसू किए गए झटकेमहाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी तालुका में बीते मंगलवार शाम को भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। इससे स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई और वे अपने घरों से बाहर निकल आए। एक सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी कि मुंबई के बाहरी इलाके में स्थित तालुका के किसी भी हिस्से में किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। भिवंडी के तहसीलदार अभिजीत कोल्हे ने बताया कि भूकंप के झटके कुछ सेकंड तक ही रहे और ये तालुका के विभिन्न हिस्सों में महसूस किए गए।

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