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नेतन्याहू के घर हिजबुल्लाह ने दागे 2 रॉकेट, एक बार फिर हुआ हुआ हमला, अब इजरायल ने दी अंजाम भुगतने की धमकी

इजरायल इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के घर को एक बार फिर हमला झेलना पड़ा। हिजबुल्लाह द्वारा दागे गए दो रॉकेट उनके घर के पास स्थित कैसरिया क्षेत्र में गिरे। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला शुक्रवार को हुआ, जब हिजबुल्लाह ने लेबनान से इजरायल की ओर दो रॉकेट दागे। दोनों रॉकेट नेतन्याहू के घर के बगीचे में गिरे, हालांकि किसी प्रकार के नुकसान की खबर नहीं है। इजरायल की सेना ने घटना के बाद तुरंत इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी और हमले की जांच शुरू कर दी है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में दोनों देशों के बीच सीमा पर कई झड़पें हो चुकी हैं। यह हमले की नई कड़ी है। इजरायल ने इस हमले को गंभीर चेतावनी के रूप में लिया है और हिजबुल्लाह को परिणाम भुगतने की धमकी दी है। हमले के वक्त नेतन्याहू और उनके परिवार के सदस्य घर पर नहीं थे। इससे कोई बड़ी क्षति नहीं हुई। शिन बेत ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि हमले के बाद सुरक्षा बलों ने तत्काल इलाके की घेराबंदी कर दी और जांच शुरू कर दी है। ईरान का संकल्प इससे पहले ईरान के एक शीर्ष सैन्य कमांडर ने बीते गुरुवार को संकल्प लिया कि ईरान निश्चित रूप से अपने क्षेत्र पर हुए हालिया हमले के लिए इजरायल को कुचलने वाला जवाब देगा। यह जानकारी आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए ने दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सेना के मुख्य कमांडर अब्दुलरहीम मौसवी ने पिछले महीने के अंत में ईरान में सैन्य स्थलों पर हुए इजरायली हमले में मारे गए ईरानी वायु सेना के एक सदस्य के परिवार के साथ मुलाकात के दौरान यह टिप्पणी की। उन्हें यह कहते हुए उद्धृत किया गया कि “हम प्रतिक्रिया का समय और तरीका निर्धारित कर रहे हैं और जब आवश्यक होगा, हम कोई हिचकिचाहट नहीं करेंगे। हमारी प्रतिक्रिया निश्चित रूप से कुचलने वाली होगी।” इजरायल रक्षा बलों ने 26 अक्टूबर को घोषणा किया था कि उसने ईरान द्वारा हाल में किए गए हमलों के जवाब में ईरान में लक्ष्य पर सटीक और लक्षित हवाई हमले किए। ईरान के वायु रक्षा मुख्यालय ने दावा किया कि उसने इजरायल के हमले का सफलतापूर्वक मुकाबला किया, जिसके परिणामस्वरूप केवल सीमित क्षति हुई।

खालिस्तानी पन्नू के खिलाफ साजिश के आरोपी की गुहार, आरोपी ने बताया जान पर खतरा, कोर्ट से राहत

नई दिल्ली अमेरिका में खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कोशिश करने के आरोपी विकास यादव ने दिल्ली की कोर्ट में एक आवेदन फाइल कर कहा है कि उन्हें सुनवाई में हाजिर होने से छूट दे दी जाए। उनका कहना है कि उनकी सारी डीटेल बाहर आ गई है इसलिए जान पर खतरा बना हुआ है। कोर्ट ने फिलहाल उन्हें छूट देते हुए 3 फरवरी को हाजिर होने का आदेश दिया है। 18 दिसंबर 23 को विकास यादव को उगाही और किडनैपिंग के मामले में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उससे पहले ही अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने विकास यादव का नाम पन्नू की हत्या में शामिल साजिश करने वाले के तौर पर लिया था। विकास यादव को अप्रैल 2014 में जेल से जमानत पर रिहा किया गया। इसके बाद 18 अक्टूबर को एफबीआई ने उन्हें वॉन्टेड घोषित कर दिया। आरोप लगाया गया था कि भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय ने विकास यादव को नियुक्त किया था जो कि प्रधानमंत्री कार्यालय का ही हिस्सा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि अब विकास यादव भारत सरकार के कर्मचारी नहीं हैं। आरके हांडू की तरफ से कोर्ट में पेश किए गए दो पेज के आवेदन में विकास यादव ने कहा कि उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस ने झूठा मुकदमा दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि उनके फोटोग्राफ, घर का अड्रेस और अन्य तस्वीरें भी अब सार्वजनिक हो गई हैं। ऐसे में उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर खतरा है। उनकी जान पर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जान के खतरे के बीच वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी सुनवाई में हाजिर नहीं हो सकते क्योंकि उनकी लोकेशन को ट्रैक किया जा सकता है। शनिवार को यादव का एप्लिकेशन कोर्ट के सामने लिस्ट किया गया था। कोर्ट ने इस बार सुनवाई में हाजिर होने से छूट देते हुए कहा कि अगली सुनवाई में हाजिर होना होगा। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को होनी है। बता दें कि रोहिणी के रहने वाले एक व्यापारी ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि विकास यादव का लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कनेक्शन है और वह उगाही और किडनैपिंग में शामिल हैं। इसके बाद यादव और उनके सहयोगी अब्दुल्लाह खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली कोर्ट में 13 मार्च को उनके खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई। 22 मार्च को यादव को अंतरिम जमानत मिली और इसके बाद 22 अप्रैल को पूर्ण जमानत मिल गई।

भारत को अपने विकास के मॉडल बनाने की जरूरत है जो वैश्विक उदाहरण बन सकें : मोहन भागवत

नई दिल्ली  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)प्रमुख मोहन भागवत  गुरुग्राम पहुंचे थे। यहां वह ‘विविभा-2024:विकसित भारत के लिए विजन’ के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए। भागवत ने कहा कि विकास के लिए शिक्षा अनिवार्य लेकिन वह भारत-केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को अपने विकास के मॉडल बनाने की जरूरत है जो वैश्विक उदाहरण बन सकें। भारत-केंद्रित हो- मोहन भागवत संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा के बिना विकास संभव नहीं है,लेकिन यह शिक्षा भारत-केंद्रित होनी चाहिए। हमें दुनिया भर से अच्छे विचार लेने चाहिए, लेकिन कभी भी अंधाधुंध अनुयायी नहीं बनना चाहिए। भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित शोध के लिए शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन करना शिक्षकों की जिम्मेदारी है। “भारतीय शिक्षण मंडल- युवा आयाम” की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ और नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी जैसे विशिष्ट वक्ताओं ने देश भर के विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के साथ विकसित भारत को प्राप्त करने के बारे में अपने विचार साझा किए। एस सोमनाथ ने विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा में अगले 25 वर्षों के महत्व पर प्रकाश डाला। ’16वीं शताब्दी तक भारत हर क्षेत्र में आगे था’ मोहन भागवत ने कहा कि पहली शताब्दी से लेकर 16वीं शताब्दी तक भारत हर क्षेत्र में आगे था। हमने बहुत पहले ही बहुत कुछ खोज लिया था। हम बस रुक गए और इसी कारण हमारा पतन शुरू हुआ। उन्होंने खेती का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में पिछले 10,000 सालों से खेती हो रही है, लेकिन जमीन,पानी,हवा के प्रदूषित होने की समस्या कभी नहीं थी। लेकिन जब बाहर से खेती आई, तो 500-600 सालों में ही ये चीजें होने लगीं। भागवत ने कहा, ‘कहीं न कहीं भारत की दृष्टि में कमी थी, जिसके कारण विकास भी एकतरफा हुआ। भारत में विकास समग्र रूप से होना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि आजकल बहस इस बात पर होती है कि विकास किया जाए या पर्यावरण की रक्षा,जैसे हमें एक को चुनना है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में,यह एक या दूसरे को चुनने के बारे में नहीं है,बल्कि दोनों को एक साथ लेकर चलने के बारे में है। भागवत ने आगे कहा कि सिर्फ चार प्रतिशत लोग 80 प्रतिशत संसाधनों पर नियंत्रण करना चाहते हैं। इस तरह का विकास लोगों पर लाठी का इस्तेमाल करके धकेला गया है। भागवत ने कहा कि जो लोग तकनीकी विकास को आगे बढ़ाते हैं,तो आप देख सकते हैं कि वे आबादी का सिर्फ 4 प्रतिशत हैं,लेकिन उन्हें 80 प्रतिशत संसाधनों की जरूरत है और उन संसाधनों को प्राप्त करने के लिए वे कई लोगों पर लाठी का इस्तेमाल करना चाहते हैं।उन्होंने कहा कि इस तरह के विकास के लिए लोगों को वास्तव में कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और जुनून के साथ काम करना पड़ता है,लेकिन उन प्रयासों का फल बहुतों को नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि जुनून को फिर से जगाने के लिए लाठी का इस्तेमाल उनके ही लोगों पर करना चाहिए,ऐसी स्थितियां हर जगह देखने को मिलती हैं।

चीनी मिसाइलों से भारतीय पिनाका का मुकाबला, रेंज 120 किमी. करने का प्लान

नई दिल्ली  भारतीय सेना को जल्द ही नई लंबी दूरी की गाइडेड मिसाइलें मिलने वाली हैं। ये मिसाइलें चीन की मिसाइलों का मुकाबला करने में सक्षम होंगी। चार साल तक चले परीक्षण के बाद अब इन मिसाइलों को मंजूरी दी गई है। गाइडेड पिनाका रॉकेट 75 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार कर सकते हैं। इनमें एक गाइडेंस किट भी लगी है जो उड़ान के दौरान इसे सही दिशा में ले जाती है। 10 नवंबर को अंतिम परीक्षण सफल रहने के बाद अब सेना की सभी तकनीकी जरूरतें पूरी हो गई हैं। और बढ़ेगी पिनाका रॉकेट की मारक क्षमता सूत्रों का कहना है कि अगले फेज में इनकी मारक क्षमता को पहले 120 किलोमीटर और फिर 200 किलोमीटर तक बढ़ाया जाएगा। इस पर काम शुरू हो चुका है। DRDO ने चार कंपनियों के साथ मिलकर यह सिस्टम बनाया है। इनमें तीन निजी क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं। उत्पादन के लिए फैक्ट्रियां भी बन चुकी हैं। यूक्रेन-रूस युद्ध में लंबी दूरी की मिसाइलों की सफलता को देखते हुए, दुनिया भर में इनकी मांग बढ़ रही है। लेकिन इनकी आपूर्ति सीमित है। भारत में हर साल सैकड़ों रॉकेट बनाने की क्षमता है। जरूरत पड़ने पर इसे हजारों तक बढ़ाया जा सकता है। ऐसे बढ़ेगी रॉकेट का रफ्तार सूत्रों के मुताबिक, ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि 37 किलोमीटर की रेंज वाले पुराने पिनाका रॉकेट का उत्पादन पहले से ही हो रहा है। इन्हीं जगहों पर लंबी दूरी वाले रॉकेट भी बनाए जा सकते हैं। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और लार्सन एंड टुब्रो लॉन्चर बनाते हैं। इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड और म्यूनिशन इंडिया लिमिटेड गोला-बारूद बनाते हैं। पिनाका को निर्यात की मंजूरी रक्षा मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है, इसलिए उम्मीद है कि सेना जल्द ही ऑर्डर देगी। गाइडेड पिनाका को निर्यात के लिए भी मंजूरी दे दी गई है और आर्मेनिया ने ऑर्डर दिया है। अन्य मित्र देशों को भी यह सिस्टम बेचने के लिए बातचीत चल रही है। भारतीय रॉकेट को मौजूदा पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर से चलाने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इससे सेना को तैनाती में काफी सुविधा होगी। पाकिस्तान ने हाल ही में अपने फतह- II सिस्टम का परीक्षण किया है। दावा किया जा रहा है कि यह 400 किलोमीटर तक मार कर सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

चीनियों ने जिनपिंग से कहा उन्‍हें सुरक्षा के लिए अब पाकिस्‍तानी सैनिकों पर भरोसा नहीं

इस्‍लामाबाद पाकिस्‍तान और चीन के बीच बलूचों के हमलों को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। बलूच व‍िद्रोही चाइना पाकिस्‍तान आर्थिक कॉरिडोर (CPEC) को बनाने में लगे चीनी इंजीनियरों पर लगातार खूनी हमले कर रहे हैं। यही नहीं चीनी बिजनसमैन को भी पाकिस्‍तान के पंजाब प्रांत के अंदर न‍िशाना बनाया जा रहा है। इससे उनके अंदर दहशत का माहौल है। चीनियों ने साफ तौर पर शी जिनपिंग की सरकार को बोल दिया है कि उन्‍हें सुरक्षा के लिए अब पाकिस्‍तानी सैनिकों पर भरोसा नहीं है। हम चीनी सैनिकों को प्राथमिकता देंगे। इन हमलों की वजह से कई चीनी बिजनसमैन पाकिस्‍तान छोड़ना चाहते हैं और उन्‍हें पाकिस्‍तान के अंदर अपना कोई भविष्‍य नहीं दिख रहा है। इससे राष्‍ट्रपति जिनपिंग अब चीनी सेना को तैनात करने को लेकर भारी दबाव में हैं। चीन अगर पाकिस्‍तान में सेना को तैनात करता है तो इसका पाकिस्‍तान और भारत पर क्‍या असर होगा? आइए समझते हैं चीन सरकार पर यह दबाव तब बढ़ गया है जब पिछले महीने दोनों चीनी इंजीनियरों की बलूचों के हमले में मौत हो गई। चीन ने सीपीईसी परियोजना पर अब तक 62 अरब डॉलर का निवेश किया है। सीपीईसी चीन के बीआरआई के सबसे बड़े प्राजेक्‍ट में से एक है। बीआरआई चीनी राष्‍ट्रपति का ड्रीम प्राजेक्‍ट है और सीपीईसी को इसका मुखौटा करार दिया जाता है। चीन के इस प्राजेक्‍ट का बलूच‍िस्‍तान में कड़ा विरोध हो रहा है और बलूचिस्‍तान लिबरेशन आर्मी ने चीनी लोगों को वापस जाने के लिए अल्‍टीमेटम दे रखा है। चीनियों की सुरक्षा में तैनात हैं 15 हजार पाक‍िस्‍तानी सैनिक चीनी निवेशकों को अब तक पाकिस्‍तानी सेना और चीन की निजी सुरक्षा एजेंसियों से सुरक्षा मिली हुई है। हालांकि बाद में पाकिस्‍तान ने विदेशी सुरक्षा एजेंसियों पर प्रतिबंध लगा दिया। बीआरआई मामलों के विशेषज्ञ अलेसांद्रो अरदुइनो ने फाइनेंशियल टाइम्‍स से कहा कि मैं समझता हूं कि यह मुद्दा अब अहम मोड़ पर पहुंच चुका है और सुरक्षा मुहैया कराने के मुद्दे पर चीन पाकिस्‍तान से और ज्‍यादा डिमांड कर रहा है। पाकिस्‍तान में चीनी सुरक्षा एजेंसियां करेंगी, वह पूरी दुनिया के लिए एक लिटमस टेस्‍ट होगा। इससे पता चलेगा कि चीन अपने नागरिकों की पूरी दुनिया में कैसे सुरक्षा करेगा। पाकिस्‍तानी सेना ने चीनियों की सुरक्षा के लिए करीब 15 हजार जवानों को तैनात किया है, इसके अलावा एक नौसैनिक यूनिट को ग्‍वादर में रखा है जहां चीन नौसैनिक अड्डा बना रहा है। इन सैनिकों की तैनाती का पूरा खर्च चीन के रक्षा मंत्रालय को वहन करना पड़ रहा है। बलूच विद्रोहियों ने ग्‍वादर पोर्ट को भी निशाना बनाने का प्रयास किया था जहां बड़ी संख्‍या में चीनी नागरिक काम करते हैं। बलूच 26 मार्च को पाकिस्‍तानी वायुसेना के पीएनएस सिद्दीक एयरबेस को भी निशाना बना चुके हैं। इन हमलों को रोकने में पाकिस्‍तानी सेना को काफी नुकसान पहुंचा है। पाकिस्‍तानी सेना की दुनिया में उड़ेगी खिल्‍ली चीनियों में खौफ की वजह एक यह है कि हाल ही में पाकिस्‍तानी सुरक्षा गार्ड ने दो चीनी वर्कर्स को गोली मार दी थी जिसमें वे बुरी तरह से घायल हो गए थे। इन सब वजहों से चीन पाकिस्‍तान में अपने सुरक्षाकर्मी तैनात करना चाहता है। चीन के सैनिक तैनात होना पाकिस्‍तान की संप्रभुता का खुला उल्‍लंघन होगा और दुनियाभर में पाकिस्‍तानी सेना की जो खिल्‍ली उड़ेगी, वह अलग से होगी। इसी वजह से पाकिस्‍तानी सेना चाह रही है कि चीन जासूसी और निगरानी करने में मदद करे। वहीं चीन के आर्थिक गुलाम बन चुके पाकिस्‍तान में अगर चीनी सेना आती है तो इसका भारत पर भी असर होगा। चीन की सेना पाकिस्‍तान पहुंची तो भारत को खतरा! यह वजह है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर बनाए हुए है। चीन अगर पाकिस्‍तान में अपनी सेना को तैनात करता है तो वे पीओके में भी आएंगे। पीओके से ही होकर सीपीईसी परियोजना जाती है। भारत इसका कड़ा विरोध करता रहा है। भारत ने साफ कहा है कि पीओके उसका हिस्‍सा है और मानता है कि अगर कोई भी विदेशी मौजूदगी नई दिल्‍ली की संप्रभुता का उल्‍लंघन है। भारत ने बार-बार पड़ोसी देशों श्रीलंका, नेपाल और बांग्‍लादेश को चेतावनी दी है कि वे बीआरआई से पैदा होने वाले खतरे से सजग रहें। बीआरआई आज दुनिया में कर्ज के जाल के रूप में देखा जा रहा है। वहीं अगर चीनी सेना पीओके में मौजूदगी बनाने में कामयाब हो जाती है तो इससे भारत के उत्‍तरी सीमा पर उसका प्रभाव काफी बढ़ जाएगा। इससे दोनों देशों से एक साथ निपटने की भारत की रणनीति और जटिल हो जाएगी।

महाराष्ट्र में मराठा नेताओं को मैं पूरी तरह से समर्थन दूंगा, मुस्लिम आरक्षण लागू करने की मांग भी उठाई: अकबरुद्दीन ओवैसी

मुंबई ‘ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन’ यानि एआईएमआईएम के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने एक चुनावी रैली में मराठा आरक्षण को अपना समर्थन दिया। यहां उन्होंने तेलंगाना की तर्ज पर मुस्लिम आरक्षण लागू करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा,“महाराष्ट्र में मराठा नेताओं को मैं पूरी तरह से समर्थन दूंगा। वो मराठा आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जब भी जरूरत हो, मैं उनका साथ दूंगा। लेकिन एक बात कहूंगा, कि हमारे तेलंगाना में मुसलमानों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण है। महाराष्ट्र में क्यों नहीं है? ऐसा क्यों है? इसका कारण यह है कि हमारा इतिहास मजबूत नहीं है। लोग हमेशा इल्जाम लगाते हैं। ओवैसी ने अपनी पार्टी पर सत्ताधारी पक्ष से अच्छे रिश्ते को लेकर कसे जा रहे तंज पर भी राय रखी। कहा, पहले राज शेखर रेड्डी मुख्यमंत्री थे, फिर चंद्रशेखर राव आ गए और उनकी टीम में हो गए। अब कांग्रेस के रेवंत रेड्डी आए और फिर, अकबर और असद भी उनके साथ हो गए। माफ करना मेरे भाई, मुख्यमंत्री के पास हम नहीं रहते, वो हमारे पास रहते हैं। जो भी मुख्यमंत्री होता है, उसे हमारी जरूरत होती है। अगर वो हमारे पास नहीं रहेगा, तो फिर राज करना मुश्किल हो जाएगा। हमें उनकी जरूरत है, न कि हमें उनकी। यही ताकत है, यही हमारे इतिहास की ताकत है।” उन्होंने आगे कहा, “कोई राम भक्त है तो मैं उसी तरह मोहम्मद और रसूल अल्लाह का चाहने वाला गुलाम हूं। मैं रसूल अल्लाह का आशिक हूं और आज मैं उनके आशिकों के बीच खड़ा हूं। रसूल के इश्क का वास्ता देते हुए, मैं यही अपील करता हूं कि वक्त बर्बाद करने का नहीं है, यह वक्त एक होने, संगठित होने और मुक्त होने का है। हम सबको एक साझा मंच पर इकट्ठा होना है। खुदा की कसम, हमसे मुकाबला तो दूर, कोई हमारी तरफ उंगली भी नहीं उठा सकेगा, बस शर्त यह है कि हम एकजुट हो जाएं।”

बढ़ते प्रदूषण के बीच सरकार ने 5वीं कक्षा तक के स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिए

पंचकूला हरियाणा में बढ़ते प्रदूषण के बीच नायब सरकार ने 5वीं तक के स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है। सरकार ने 5वीं कक्षा तक के स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिए है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी जिला उपायुक्तों को पत्र लिखा गया है। ऑनलाइन चलेंगी कक्षाएं पत्र के अनुसार, सरकार ने निर्णय लिया है कि संबंधित उपायुक्त दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में गंभीर एक्यूआई स्तरों को देखते हुए मौजूदा स्थिति (GRAP के अनुसार) का आकलन करेंगे और छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के हित में स्कूलों (सरकारी और निजी) में कक्षा 5वीं तक के लिए ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें। संबंधित जिलों के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का मूल्यांकन अलग-अलग किया जा सकता है। प्रदेश के शहर स्मॉग की चादर में लिपटे हैं। पांच दिन से लगातार स्मॉग छाया हुआ है। देश के 22 शहरों में दिल्ली की हवा सबसे ज्यादा खराब है। दिल्ली का एक्यूआइ 396 पहुंच गया तो हरियाणा के आठ शहरों का एक्यूआइ ज्यादा खराब श्रेणी में है। प्रदेश में भिवानी सबसे प्रदूिषत रहा। दो दिन पहले भी इस शहर की हवा ज्यादा खराब थी। प्रदेश में स्मॉग तेजी से बढ़ने के साथ ही हादसे भी बढ़ रहे हैं। ज्यादा खराब श्रेणी में तेजी से शहरों की संख्या बढ़ने के बावजूद प्रदूषण को कम करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। हरियाणा के भिवानी के अलावा बहादुरगढ़, सोनीपत, जींद, रोहतक, कैथल, करनाल, गुरुग्राम की हवा ज्यादा खराब श्रेणी में है, जबकि 10 शहरों का एक्यूआइ 200 से 300 के बीच में पहुंच गया है। इन शहरों में स्माग का यलो अलर्ट : कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, रोहतक, सोनीपत, पानीपत, सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, जींद, भिवानी। दिल्ली के स्कूलों में भी चलेंगी ऑनलाइन कक्षाएं वहीं, दूसरी ओर दिल्ली-एनसीआर में भी प्रदूषण से हाल बेहाल है। बढ़ते प्रदूषण पर दिल्ली सरकार ने भी दिल्ली के प्राथमिक विद्यालय बंद रखने और ऑनलाइन मोड में कक्षाएं चलाने का एलान किया है। इस समय उत्तरी इलाकों में जिस प्रकार से एयर पॉल्यूशन बढ़ रहा है। यही कारण है कि सरकारें स्कूलों को बंद रखने का फैसला कर रही हैं। दिल्ली की  मुख्यमंत्री आतिशी ने गुरुवार शाम को एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट में लिखा कि बढ़ते प्रदूषण के स्तर के चलते दिल्ली के सभी प्राथमिक विद्यालय अगले निर्देश तक ऑनलाइन माध्यम से कक्षाएं शुरू करें।

गरीबों एवं मध्यम वर्ग के बीच जोखिम लेने की संस्कृति को पुनर्जीवित किया है जो भारत में बड़े बदलाव ला रही : PM मोदी

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि उनकी सरकार ने अच्छी आर्थिक नीतियों एवं सुशासन के बल पर जनता का आत्म विश्वास बढ़ाया है और गरीबों एवं मध्यम वर्ग के बीच जोखिम लेने की संस्कृति को पुनर्जीवित किया है जो भारत में बड़े बदलाव ला रही है। मोदी ने यहां देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र हिन्दुस्तान टाइम्स के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर यहां आयोजित एक कार्यक्रम में यह भी कहा कि उनकी सरकार ने निवेश से रोज़गार, विकास से गरिमा का जो मंत्र दिया है, उससे लोगों का जीवन आसान हुआ और उनमें सम्मान एवं स्वाभिमान का भाव पैदा हुआ जिसने देश एवं समाज के विकास को भी गति दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने लंबे समय तक भारत की राजनीति और नीतियों को देखा है। उन्हें पहले एक जुमला अक्सर सुनाई देता था- अच्छी आर्थिकी इज बुरी राजनीति। विशेषज्ञ कहे जाने वाले लोग इसे खूब बढ़ावा देते थे। लेकिन इससे पहले की सरकारों को हाथ पर हाथ रख कर बैठे रहने का बहाना मिल जाता था। यह एक तरह से कुशासन को, अक्षमता को छिपाने का माध्यम बन गया था। पहले सरकार इसलिए चलाई जाती थी कि बस अगला चुनाव जीत लिया जाए। चुनाव जीतने के लिए एक वोट बैंक बनाया जाता था और फिर उस वोट बैंक को खुश करने के लिए योजनाएं बनती थी। इस प्रकार की राजनीति ने सबसे बड़ा नुकसान यह किया कि देश में असंतुलित असमानता इसका दायरा बहुत बढ़ता गया। कहने को विकास बोर्ड लग जाता था दिखता नहीं था। असंतुलित अवस्था ने, इस मॉडल ने जनता का सरकारों के प्रति विश्वास तोड़ दिया। उन्होंने कहा, “हम आज इस विश्वास को वापस लाए हैं। हमने सरकार का एक उद्देश्य तय किया है। ये उद्देश्य वोटबैंक वाली जो राजनीति होती है ना उससे हजारों मील दूर है। हमारी सरकार का उद्देश्य एक बड़ा है, विराट है, व्यापक है। हम, जनता का विकास, जनता द्वारा विकास एवं जनता के लिए विकास के मंत्र को लेकर चल रहे हैं। हमारा उद्देश्य नया भारत बनाने का है, भारत को विकसित बनाने का है। और जब हम इस विराट लक्ष्य को लेकर निकल पड़े हैं तो भारत की जनता ने भी हमें अपने विश्वास की पूंजी सौंपी है। आप कल्पना कर सकते हैं सोशल मीडिया के इस जमाने में भ्रामक प्रचार दुष्प्रचार सब कुछ चारों तरफ अपने पैर जमा करके बैठा है। इतने सारे अखबार हैं, इतने सारे चैनल हैं, उस दौर में भारत के नागरिक का विश्वास हम पर है, हमारी सरकार पर है।” उन्होंने कहा कि जब जनता का विश्वास बढ़ता है, आत्मविश्वास बढ़ता है तो देश के विकास पर एक अलग ही प्रभाव दिखता है। पुरानी विकसित सभ्यताओं से लेकर आज के विकसित देशों तक एक चीज हमेशा से आम रही है, ये आम चीज है जोखिम उठाने की संस्कृति। एक समय था जब हमारा देश पूरे विश्व के कारोबार और संस्कृति का हॉटस्पॉट था। हमारे व्यापारी एवं नाविक एक तरफ दक्षिण पूर्वी एशिया के साथ काम कर रहे थे, तो दूसरी ओर अरब, अफ्रीका और रोमन साम्राज्य से भी उनका गहरा नाता जुड़ता था। उस समय के लोगों ने जोखिम लिया और इसलिए भारत के उत्पाद एवं सेवाएं सागर के दूसरे छोर तक पहुंच पाए। आजादी के बाद हमें जोखिम लेने की इस संस्कृति को और आगे बढ़ाना था। लेकिन आजादी के बाद की सरकारों ने तब के नागरिकों को वो हौसला ही नहीं दिया, इसका परिणाम ये हुआ कि कई पीढ़ियां एक कदम आगे बढ़ाने और दो कदम पीछे खींचने में ही गुजर गई। अब बीते 10 सालों में देश में जो परिवर्तन आए हैं उन्होंने भारत के नागरिकों में जोखिम उठाने की संस्कृति को फिर से नई ऊर्जा दी है। उन्होंने कहा, “आज हमारा युवा हर क्षेत्र में जोखिम उठाने लगा है। कभी एक कंपनी शुरू करना जोखिम माना जाता था, 10 साल पहले तक मुश्किल से किसी स्टार्टअप का नाम सुनते थे…आज देश में रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स की संख्या सवा लाख से ज्यादा हो गई है। एक जमाना था कि खेलों में और खेलों को पेशे के रूप में अपनाने में भी जोखिम था, लेकिन आज हमारे छोटे शहरों के नौजवान भी ये जोखिम उठाकर दुनिया में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। स्वसहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं का भी उदाहरण है। आज देश में करीब एक करोड़ लखपति दीदी बनी हैं। ये गांव-गांव में उद्यमी बनकर अपना कुछ बिजनेस चला रही हैं। मुझे कुछ समय पहले एक ग्रामीण महिला से संवाद करने का अवसर आया, उस महिला ने मुझे बताया था कि कैसे उसने एक ट्रैक्टर खरीदा और अपनी कमाई से पूरे परिवार की आय बढ़ा दी। एक महिला ने एक जोखिम लिया और अपने पूरे परिवार का जीवन बदल डाला। जब देश के गरीब और मध्य वर्ग के लोग जोखिम लेना शुरू कर दें तब बदलाव सही मायने में दिखने लगता है। यही हम भारत में आज होते देख रहे हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा, “आज भारत का समाज अभूतपूर्व आकांक्षाओं से भरा हुआ है। इन आकांक्षाओं को हमने अपनी नीतियों का बड़ा आधार बनाया है। हमारी सरकार ने देशवासियों को एक बहुत अनूठा पैकेज दिया है…ये कॉम्बो, निवेश से रोज़गार, विकास से गरिमा का है। हम विकास का ऐसा मॉडल लेकर चल रहे हैं जहां निवेश हो, निवेश से रोज़गार सृजित हो, विकास हो और वो विकास भारत के नागरिकों की गरिमा बढ़ाएं, गरिमा सुनिश्चित करें। अब जैसे देश में शाैचालय बनाने का एक उदाहरण है। मैं छोटी चीजें इसलिए बता रहा हूं कि कभी-कभी हमें लगता है इसका कोई मूल्य ही नहीं है…लेकिन इसकी कितनी बड़ी ताकत होती है, इसका एक उदाहरण है कि हमारे देश में हमने एक मिशन लिया शाैचालय बनाने का, देश की बहुत बड़ी आबादी के लिए ये सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा और गरिमा का भी माध्यम है।” उन्होंने कहा कि इस योजना की जब बात होती है तो अक्सर कहा जाता है कि इतने करोड़ शौचालय बने हैं… ठीक है बन गए होंगे। लेकिन ये जो शौचालय बने हैं ना उनको बनाने में ईटें लगी हैं, लोहा लगा है, सीमेंट लगा है, काम करने वाले लोग हैं। और ये सारा सामान किसी दुकान से … Read more

आयोग के अधिकारियों की ओर से कुछ लोग राहुल गांधी के हेलीकॉप्टर की तलाशी लेते दिख रहे हैं

अमरावती चुनाव आयोग के अधिकारियों ने आंध्र प्रदेश के अमरावती में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बैग की जांच की है। शनिवार को उनके हेलीकॉप्टर की भी तलाशी ली गई। दरअसल, महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार-प्रसार जोरशोर से जारी है। विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के नेता इस तरह की जांच को लेकर ईसी पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इस बीच, आयोग के अधिकारियों की ओर से ताजा निरीक्षण का वीडियो सामने आया है जिसमें कुछ लोग राहुल गांधी के हेलीकॉप्टर की तलाशी लेते दिख रहे हैं। कांग्रेस नेता वहीं पास में खड़े हैं। इस दौरान राहुल पार्टी नेताओं के साथ बातचीत करते देखे गए। इससे पहले, कांग्रेस ने बीते शुक्रवार को निर्वाचन आयोग से झारखंड में राहुल गांधी के हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने से रोकने की शिकायत की थी। साथ ही, चुनाव प्रचार में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई। निर्वाचन आयोग को लिखे पत्र में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के हेलीकॉप्टर को प्रतिबंधों के कारण उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी गई, जिसके कारण उनकी जनसभाओं में या तो देरी हुई या रद्द हो गईं। कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह कांग्रेस को चुनावों में समान अवसर नहीं मिलने दे रही। चुनाव आयोग के ऐक्शन पर विपक्ष ने उठाए सवाल टॉप लीडर्स के बैगों की जांच पर विवाद उस वक्त खड़ा हुआ जब शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे ने एक वीडियो साझा किया। इसमें उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा नेताओं की भी इसी तरह जांच हो सकती है। इसके जवाब में भाजपा नेताओं ने आयोग के कदम का बचाव किया और इसे स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी बताया। बीते दिनों चुनाव आयोग की ओर से अमित शाह, देवेंद्र फडणवीस, अजित पवार और अन्य एनडीए नेताओं के बैगों की जांच हो चुकी है। इस तरह ईसी की कार्रवाई को पूरी तरह से स्वतंत्र बताया जा रहा है।

दोनों मिलकर GSAT-20 कम्युनिकेशन सैटलाइट लॉन्च करने वाले हैं, एलन मस्क के स्पेसएक्स के साथ इसरो की बड़ी डील

वाशिंगटन एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ बड़ी डील की है। दोनों मिलकर GSAT-20 कम्युनिकेशन सैटलाइट लॉन्च करने वाले हैं। अगले सप्ताह स्पेसएक्स के Falcom 9 रॉकेट की लॉन्चिग हो सकती है। पहली बार है जब कि इसरो और स्पेसएक्स आपसी सहयोग से इस तरह की लॉन्चिंग कर रहा है। बता दें कि यह डील इसलिए भी खास है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप एलन मस्क के खास दोस्त हैं। वह हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं। इसके बाद ही इस डील को भी अंतिम रूप मिला है। GSAT-20 सैटलाइट 4700 किलो का है और भारत के रॉकेट के लिए इसे ले जाना काफी मुश्किल है। ऐसे में इस लॉन्चिंग के लिए स्पेसएक्स का सहारा लिया जा रहा है। यह लॉन्चिंग अमेरिका केप कैनावराल से होगी। यह सैटलाइट अगले 14 साल तक काम करता रहेगा। इससे पहले लॉन्चिंग सर्विस के लिए इसरो फ्रांस की कमर्शल लॉन्च कंपनी का सहारा लेता था। भारी सैटलाइट्स की लॉन्चिंग के लिए इसकी जरूरत पड़ती थी। हालांकि कंपनी के पास अब कोई भी ऑपरेशनल रॉकेट नहीं है। यूक्रेन से चल रहे संघर्ष के बीच रूस लॉन्चिंग नहीं कर पा रहा है। ऐसे में स्पेसएक्स फायदा भी उठा रहा है। यह सैटलाइट पूरे भारत में सेवा देगा। रिमोट इलाकों में इंटरनेट के लिए सैटलाइट उपलब्ध रहेगा। इसरो के चेयरमैन राधाकृष्णन दुराइराज ने कहा, इस लॉन्चिंग की लगभग लागत 60 से 70 मिलियन डॉलर है। बता दें कि कम कीमत में लॉन्चिंग के मामले में भारत और स्पेसएक्स की स्पर्धा भी चल रही है। वहीं एलन मस्क यह भी चाहते हैं कि भारत में उनकी स्पेसएक्स स्टारलिंक सैटलाइट सर्विस के इस्तेमाल को भी मंजूरी मिल जाए। अभी सुरक्षा कारणों से भारत में इसे इजाजत नहीं मिली है। भारत ने अंतरिक्षयात्रियों को आईएसएस तक भेजने के लिए भी स्पेसएक्स के साथ डील की है।

ईरान का अमेरिका को संदेश, डोनाल्ड ट्रंप की हत्या का कोई इरादा नहीं, क्या कम होगा तनाव?

ईरान ईरान ने अमेरिका को संदेश भेजा है कि उसका अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या करने का कोई इरादा नहीं है। यह संदेश इस साल अक्टूबर में वॉशिंगटन को भेजा गया था, जब अमेरिका में निवर्तमान जो बाइडन प्रशासन ने सितंबर में कहा था कि वह ट्रंप की हत्या के किसी भी प्रयास को ‘युद्ध की कार्रवाई’ मानेगा, जो उस समय 5 नवंबर के राष्ट्रपति चुनावों के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार थे। अमेरिका को ईरान का संदेश पश्चिमी देश के साथ तनाव कम करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिका ने सैन्य कमांडर मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के लिए तेहरान द्वारा संभावित जवाबी कार्रवाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी, जिन्होंने 2020 में तत्कालीन राष्ट्रपति ट्रम्प के आदेश पर ईरान के मिलिशिया और प्रॉक्सी बलों को निर्देशित किया था। चुनावों में ट्रंप की जीत के बाद से कई पूर्व ईरानी अधिकारी और मीडिया आउटलेट तेहरान से ट्रंप के साथ बातचीत करने और सुलह का प्रयास करने के लिए कह रहे हैं, जबकि ट्रंप ने ईरान पर और दबाव डालने का वादा किया है। अधिकारियों के अनुसार, न्याय विभाग ने दो अभियोग जारी किए हैं जो ट्रंप के खिलाफ ईरान की साजिश से संबंधित थे। अमेरिकियों ने ईरान पर ट्रंप प्रशासन के तहत अन्य हस्तियों की हत्या की साजिश रचने का भी आरोप लगाया है। ईरान ने बाइडन प्रशासन को भेजे अपने संदेश में दोहराया कि सुलेमानी की हत्या एक आपराधिक कृत्य था। हालांकि, संदेश में यह भी कहा गया कि ईरान ट्रंप की हत्या नहीं करना चाहता और अंतरराष्ट्रीय कानूनी तरीकों से सुलेमानी की हत्या का बदला लेना चाहता था। ईरान ने सीरिया पर घातक इजरायली हमलों की निंदा की वहीं, ईरानी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इजरायल द्वारा सीरिया के आवासीय इलाकों में किए गए हालिया घातक हमलों की कड़ी निंदा की। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बघई ने मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में यह टिप्पणी की। एक दिन पहले इजरायली बलों ने दमिश्क के पश्चिम में अल-मजेह में तीन आवासीय इमारतों और होम्स के मध्य प्रांत में सीरियाई-लेबनानी सीमा पर तीन आवासीय इमारतों पर हमला किया, जिसमें कम से कम 15 लोग मारे गए और 16 अन्य घायल हो गए। बाघेई ने कहा कि इजरायल द्वारा सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता के लगातार और प्रमुख उल्लंघनों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अंतर्गत आक्रामकता का विशिष्ट कार्य माना गया है।

इसरो अगले सप्ताह जीसैट-20 की लॉन्चिंग करेगा, इसमें स्पेसएक्स के रॉकेट का इस्तेमाल होगा

नई दिल्ली एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ बड़ी डील की है। दोनों मिलकर GSAT-20 कम्युनिकेशन सैटलाइट लॉन्च करने वाले हैं। अगले सप्ताह स्पेसएक्स के Falcom 9 रॉकेट की लॉन्चिग हो सकती है। पहली बार है जब कि इसरो और स्पेसएक्स आपसी सहयोग से इस तरह की लॉन्चिंग कर रहा है। बता दें कि यह डील इसलिए भी खास है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप एलन मस्क के खास दोस्त हैं। वह हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं। इसके बाद ही इस डील को भी अंतिम रूप मिला है। GSAT-20 सैटलाइट 4700 किलो का है और भारत के रॉकेट के लिए इसे ले जाना काफी मुश्किल है। ऐसे में इस लॉन्चिंग के लिए स्पेसएक्स का सहारा लिया जा रहा है। यह लॉन्चिंग अमेरिका केप कैनावराल से होगी। यह सैटलाइट अगले 14 साल तक काम करता रहेगा। इससे पहले लॉन्चिंग सर्विस के लिए इसरो फ्रांस की कमर्शल लॉन्च कंपनी का सहारा लेता था। भारी सैटलाइट्स की लॉन्चिंग के लिए इसकी जरूरत पड़ती थी। हालांकि कंपनी के पास अब कोई भी ऑपरेशनल रॉकेट नहीं है। यूक्रेन से चल रहे संघर्ष के बीच रूस लॉन्चिंग नहीं कर पा रहा है। ऐसे में स्पेसएक्स फायदा भी उठा रहा है। यह सैटलाइट पूरे भारत में सेवा देगा। रिमोट इलाकों में इंटरनेट के लिए सैटलाइट उपलब्ध रहेगा। इसरो के चेयरमैन राधाकृष्णन दुराइराज ने कहा, इस लॉन्चिंग की लगभग लागत 60 से 70 मिलियन डॉलर है। बता दें कि कम कीमत में लॉन्चिंग के मामले में भारत और स्पेसएक्स की स्पर्धा भी चल रही है। वहीं एलन मस्क यह भी चाहते हैं कि भारत में उनकी स्पेसएक्स स्टारलिंक सैटलाइट सर्विस के इस्तेमाल को भी मंजूरी मिल जाए। अभी सुरक्षा कारणों से भारत में इसे इजाजत नहीं मिली है। भारत ने अंतरिक्षयात्रियों को आईएसएस तक भेजने के लिए भी स्पेसएक्स के साथ डील की है। राष्ट्रपति चुनाव से पहले की डील अंतरिक्ष प्रक्षेपण की दृष्टि और समय बिल्कुल सही है। हालांकि, संयोग से ये डील अमेरिकी चुनाव रिजल्ट से पहले की है। इसलिए वाशिंगटन डीसी या नई दिल्ली के आलोचक ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ का मुद्दा नहीं उठा सकते हैं। यह स्पेसएक्स के साथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के कई वाणिज्यिक जुड़ावों में से पहला है। जबकि कुछ लोग कहते हैं कि इसरो और स्पेसएक्स कम लागत वाले प्रक्षेपणों के लिए प्रतिस्पर्धी हैं। हालांकि ग्लोबल कमर्शियल स्पेस मार्केट में किसी को भी संदेह नहीं है कि स्पेसएक्स बहुत आगे है। यह सभी जानते है कि डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बहुत अच्छा रिश्ता है। दोनों नेता एक दूसरे को ‘अपना दोस्त’ कहते हैं। अमेरिका से क्यों हो रही लॉन्चिंग जीसैट-एन2 को अमेरिका के केप कैनावेरल से प्रक्षेपित किया जाएगा। इसरो की तरफ से निर्मित 4,700 किलोग्राम का यह उपग्रह भारतीय रॉकेटों के लिए बहुत भारी था। इसलिए इसे विदेशी कमर्शियल प्रक्षेपण के लिए भेजा गया। भारत का अपना रॉकेट ‘बाहुबली’ या लॉन्च व्हीकल मार्क-3 अधिकतम 4,000-4,100 किलोग्राम वजन को भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा में ले जा सकता था। इस मिशन की लाइफ 14 साल है। भारत अब तक अपने भारी उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए एरियनस्पेस पर निर्भर था। हालांकि, वर्तमान में उसके पास कोई भी चालू रॉकेट नहीं है। भारत के पास एकमात्र विश्वसनीय विकल्प स्पेसएक्स के साथ जाना था। चीनी रॉकेट भारत के लिए अनुपयुक्त हैं। वहीं, यूक्रेन में संघर्ष के कारण रूस कमर्शियल लॉन्चिंग के लिए अपने रॉकेट की पेशकश करने में सक्षम नहीं है। क्या कह रहा इसरो इसरो की बेंगलुरु स्थित कमर्शियल ब्रांच न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष और एमडी राधाकृष्णन दुरईराज ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि स्पेसएक्स के साथ इस पहली लॉन्चिंग पर हमें अच्छी डील मिली। उन्होंने कहा कि इस स्पेशल सैटेलाइट को लॉन्च करने की कीमत… टेक्निकल अनुकूलता और कमर्शियल डील… मैं कहूंगा कि स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट पर इतने भारी उपग्रह को लॉन्च करना हमारे लिए अच्छा सौदा था।

कोलकाता में दिन दहाड़े तृणमूल कांग्रेस के नेता की हत्या की कोशिश की गई, मिस हो गया फायर

कोलकाता कोलकाता में दिन दहाड़े तृणमूल कांग्रेस के नेता की हत्या की कोशिश की गई। सड़क किनारे बैठे टीएमसी नेता पर बाइकसवार बदमाश ने पिस्तौल तान दी। लेकिन उसकी पिस्तौल लॉक हो गई और वह फायर नहीं कर पाया। ऐसे में उनकी जान बच गई। उन्होंने खुद दौड़कर बदमाशों का पीछा किया और पीछे से शूटर को पकड़कर बाइक से नीचे खींच लिया। यह पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो गई। सुशंता गोष कोलकाता महानगर प ालिका में वॉर्ड 108 से पार्षद हैं. वह अपने घर के सामने ही बैठे थे तभी वहां दो शूटर आ गए। उसने अपनी पिस्तौल निकाली और दो बार शूट करने की कोशिश की। लेकिन बंदूक से गोली चली ही नहीं। इसके बाद घोष ने उन्हें दौड़ाया। पीछे बैठा शूटर बाइक से नीचे आ गया। इसके बाद उसे दौड़ाकर पकड़ा गया और जमकर पिटाई की गई। उससे यह भी उगलवाने की कोशिश की गई कि उसे किसने भेजा था। उसने बताया, मुझे कोई पैसा नहीं दिया गया था। मुझे केवल फोटो भेजी गई थी और हत्या करने की बात कही गई थी। बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस के सूत्रों का कहना है कि शूटर को बिहार से हायर किया गया था। हो सकता है कि स्थानीय स्तर पर किसी दुश्मनी की वजह से ऐसा किया गया हो। पार्षद ने बताया कि उन्हें भी अंदाजा नहीं है कि उन्हें मरवाने की साजिश कौन रच सकता है। वह 12 साल से पार्षद हैं। स्थानीय सांसद माला रॉय और विधायक जावेद खान ने भी बाद में उनसे मुलाकात की।

चुनाव के बीच मुंबई के वाशी चेक नाके से करोड़ों की चांदी जब्त, पुलिस के उड़ गए होश, ट्रक ड्राइवर पुलिस हिरासत में

    मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव करीब है. वहां 20 नवंबर को मतदान होना है. चुनाव के मद्देनजर तमाम जांच एजेंसियां और पुलिस राज्य में होने वाली सभी गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख रही हैं. इसी बीच मुंबई में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ट्रक से 8,476 किलो चांदी बरामद की है, जिसकी कीमत लगभग 80 करोड़ रुपये बताई जा रही है. इतनी बड़ी मात्रा में चांदी को देखकर पुलिस और जांच एजेंसियां सतर्क हो गईं. महाराष्ट्र में चुनाव को लेकर कैश और अवैध संपत्ति को लाने ले जाने पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. जानकारी के अनुसार, मानखुर्द पुलिस वाशी चेक नाके के पास नाकाबंदी किए हुए थी. इस दौरान पुलिस टीम आने जाने वाले वाहनों की चेकिंग कर रही थी. पुलिस के अनुसार, शुक्रवार की देर रात एक संदिग्ध टेंपो वाशी चेक नाके के पास से गुजर रहा था. शक होने पर पुलिस ने वाहन को रोका और उसकी तलाशी ली. तलाशी के दौरान इस ट्रक में बड़ी मात्रा में चांदी मिली, जिसे देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए. इस चांदी का जब वजन कराया गया तो पता चला कि कुल वजन 8,476 किलोग्राम है. इतनी चांदी की बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 80 करोड़ रुपये है. इस मामले के बाद अधिकारियों ने ड्राइवर से पूछताछ की और उसे हिरासत में ले लिया. पुलिस ने मामले की जानकारी तुरंत आयकर विभाग और चुनाव आयोग की टीम को दी. आयकर विभाग के अधिकारी अब इस चांदी के मालिक का पता लगाने की कोशिश में हैं. शुरुआती जांच के बाद संदेह है कि यह चांदी अवैध तरीके से ले जाई जा रही थी और इसे चुनावी माहौल में इस्तेमाल करने के लिए लाया जा रहा था. आयकर विभाग और चुनाव आयोग की टीम ने इस पूरे मामले में जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि क्या चांदी का कोई वैध दस्तावेज मौजूद है. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की अवैध संपत्ति की तस्करी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस घटना के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई. स्थानीय लोगों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है. पुलिस ने बताया कि अगर चांदी के मालिक के दस्तावेज पेश नहीं किए गए, तो इसे जब्त कर लिया जाएगा.  

CM मान का बड़ा ऐलान, नए उम्मीदवारों से की अपील, वे अपना काम मेहनत और ईमानदारी से करें

चंडीगढ़ पंजाब पुलिस में भर्ती हुए नव नियुक्त उम्मीदवारों को मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे। दरअसल, चंडीगढ़ के टैगोर थियेटर में आयोजित समारोह दौरान आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल भी मौजूद थे। इस मौके पर बोलते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पिछले अढ़ाई साल के दौरान पंजाब सरकार ने युवाओं को 48 हजार से ज्यादा नौकरियां दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती बहुत साफ-सुथरी और पारदर्शी तरीके से की गई और उन्होंने नए उम्मीदवारों से भी अपेक्षा की कि वे अपना काम मेहनत और ईमानदारी से करें। मुख्यमंत्री मान ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि पंजाब पुलिस को अपडेट और हाईटेक बनाने के लिए 10 हजार से ज्यादा नई भर्तियां की जाएंगी। पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है, जिसके कारण पुलिस को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए पंजाब पुलिस में और भर्तियां की जाएंगी तांकि पुलिस की ताकत बढ़ाई जा सके। इसके साथ ही उन्होंने नवनियुक्त पुलिस कर्मियों से अपील की कि वे अभी तबादले के लिए आवेदन न करें, क्योंकि ड्यूटी तो ड्यूटी है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश युवाओं को उनके घर के पास ही नौकरी दी जाएं। उन्होंने कहा कि आज सड़क सुरक्षा बल के कारण 8 महीने बाद मरने वालों की संख्या में 45 फीसदी की कमी आई है।  इस टीम के पास प्राथमिक उपचार के पूरे उपकरण मौजूद हैं। यदि कोई दुर्घटना हो जाती है तो फोर्स द्वारा तुरंत व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाया जाता है। इसी तरह अगर कोई गाड़ी सड़क पर खराब हो जाती है तो उसे किनारे खड़ा कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास लोगों की जान-माल की रक्षा के साथ ही उन्हें रोजगार उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री मान ने नए प्रत्याशियों से ईमानदारी से काम करने को कहा। 

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