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NCPCR की मांग, मदरसों को राज्यों से मिलने वाला पैसा बंद हो, जाने कारण

नई दिल्ली राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मदरसों को मिलने वाली सरकारी फंडिंग बंद करने और मदरसा बोर्ड को बंद करने की सिफारिश की है। आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और प्रशासकों को निर्देश जारी किया है। यह निर्देश ‘धर्म के संरक्षक या अधिकारों के उत्पीड़क बच्चों के संवैधानिक अधिकार बनाम मदरसे’ शीर्षक वाली रिपोर्ट से जुड़ा है। रिपोर्ट में मदरसों द्वारा बच्चों के शैक्षिक अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभाव और उनकी ऐतिहासिक भूमिका पर चर्चा की गई है। मदरसा बोर्ड को बंद करने की सिफारिश इस रिपोर्ट में 11 अध्याय हैं। यह रिपोर्ट मदरसों की ऐतिहासिक भूमिका और बच्चों के शैक्षिक अधिकारों पर उनके प्रभाव पर चर्चा करती है। NCPCR ने सिफारिश की है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मदरसों को मिलने वाली सरकारी फंडिंग बंद कर दी जाए। मदरसा बोर्ड को भी बंद कर देना चाहिए। आरटीआई एक्ट के महत्व पर जोर NCPCR प्रमुख, प्रियांक कानूनगो ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत समावेशी शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009, इस विश्वास पर आधारित है कि समानता, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र जैसे मूल्यों को प्राप्त करना सभी के लिए समावेशी शिक्षा के प्रावधान के माध्यम से ही संभव है। हालांकि, बच्चों के मौलिक अधिकार और अल्पता समुदायों के अधिकार के बीच एक विरोधाभासी तस्वीर बनाई गई है।’ सभी बच्चों को मिले औपचारिक शिक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि आरटीआई एक्ट के तहत सभी बच्चों को औपचारिक शिक्षा मिले, यह सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य है। एनसीपीसीआर ने इस बात पर जोर दिया कि केवल बोर्ड या यूडाइस कोड होने का मतलब यह नहीं है कि मदरसे आरटीआई एक्ट का पालन करते हैं। ‘सरकारी फंडिंग बंद करनी चाहिए’ एनसीपीसीआर ने सिफारिश की है कि मदरसों और मदरसा बोर्ड को मिलने वाली सरकारी फंडिंग बंद कर दी जाए। उत्तर प्रदेश के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन इन बोर्डों को बंद कर देना चाहिए। आयोग ने यह भी सिफारिश की कि गैर-मुस्लिम बच्चों को मदरसों से निकालकर आरटीआई एक्ट के अनुसार औपचारिक स्कूलों में दाखिला कराया जाए। इसमें यह भी सुझाव दिया गया है कि फिलहाल मदरसों में पढ़ रहे मुस्लिम बच्चों को औपचारिक स्कूलों में दाखिला दिलाया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें निर्धारित शिक्षा और पाठ्यक्रम मिले।

कनाडा में सिंगर एपी ढिल्लों के घर पर फायरिंग करने वाला दूसरा आरोपी फरार

मैनिटोबा. कनाडा में सिंगर एपी ढिल्लों के घर पर फायरिंग करने के एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ढिल्लों के ब्रिटिश कोलंबिया के वैनकूवर स्थित आवास के घर के बाहर फायरिंग की गई थी। वहीं इस घटना की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली थी। पुलिस ने 30 अक्टूबर को एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान कनाडा के ही मैनिटोबा में रहने वाले अबजीत किंगरा के रूप में हुई है। उसपर कुछ वाहनों में आग लगाने का भी आरोप है। वहीं पुलिस का कहना है कि इस मामले में एक अन्य आरोपी की तलाश की जा रही है। जानकारी के मुताबिक अबजीत किंगरा को ओंटारियो से गिरफ्तार किया गया है। दरअसल एपी ढिल्लों के घर पर 1 सितंबर 2024 को फायरिंग की गई थी। इसके बाद सोशल मीडिया पोस्ट करके लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने फायरिंग की जिम्मेदारी ली थी। पोस्ट में कहा गया था, विक्टोरिया आइलैंड वाला घर एपी ढिल्लों का है। ये बड़ी फीलिंग ले रहा है। सलमान खाने को गाने में लेकर आया था। जिस अंडरवर्लड लाइफ की तुम लोग कॉपी कर रहे हो, हम लोग वास्तविकता में जी रहे हैं। औकात में रहो नहीं तो कुत्ते की मौत मरोगे। पुलिस ने 23 साल के विक्रम शर्मा के खिलाफ अरेस्ट वॉरंट जारी किया है। कनाडा का मानना है कि वह भारत में है। कनाडा पुलिस का कहना है कि उसके पास विक्रम की कोई तस्वीर नहीं है। हालांकि कुछ पहचान के निशान जारी किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक वह दक्षिण एशियाई शख्स है और उसकी हाइट 5 फीट 9 इंच के करीब है। वजन करीब 200 पाउंड यानी 90 किलो के आसपास है। उसकी आंखें भूरी हैं और बाल काले हैं। बता दें कि एपी ढिल्लों के घर पर फायरिंग के बाद पास खड़े वाहन में भी आग लगा दी गई थी। पुलिस अधीक्षक टॉड प्रेस्टन ने कहा, जांच के साथ ही मुख्य संदिग्धों की तलाश जारी रहेगी। उन्हें गिरफ्तार जरूर किया जाएगा।

केवल हिंदू कर्मचारी होंगे तिरुमाला में, लड्डू विवाद के बाद TTD के नए अध्यक्ष ने सुना दिया फरमान

नई दिल्ली. तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष बी.आर. नायडू ने गुरुवार को कहा कि भगवान वेंकटेश्वर के निवास तिरुमला में काम करने वाले सभी लोग हिंदू होने चाहिए। टीटीडी अध्यक्ष ने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह आंध्र प्रदेश सरकार से बात करेंगे कि दूसरे धर्मों के कर्मचारियों के संबंध में क्या फैसला लिया जाए, क्या उन्हें अन्य सरकारी विभागों में भेजा जाना चाहिए या वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘तिरुमला में काम करने वाला हर व्यक्ति हिंदू होना चाहिए। यह मेरा पहला प्रयास होगा। इसमें कई मुद्दे हैं। हमें इस पर गौर करना होगा।’ भगवान वेंकटेश्वर के भक्त नायडू ने कहा कि वह टीटीडी बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किए जाने को अपना सौभाग्य मानते हैं। उन्होंने बोर्ड का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी देने के लिए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू को धन्यवाद दिया। बी.आर. नायडू ने आरोप लगाया कि पिछली वाईएसआर कांग्रेस सरकार के दौरान तिरुमला में कई अनियमितताएं हुईं। उन्होंने कहा कि मंदिर की पवित्रता बरकरार रखी जानी चाहिए। बता दें कि तिरुपति मंदिर में लड्डू प्रसाद को लेकर काफी बवाल हुआ था। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया था कि उनकी पूर्ववर्ती जगन मोहन की सरकार में तिरुपति बालाजी के लड्डू प्रसादम में मिलावटी घी का इस्तेमाल किया जाता था। एक लैब की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा था कि इसमें गाय और सुअर की चर्बी का इस्तेमाल किया जाता था। उनके आरोपों के बाद जगन मोहन रेड्डी ने सफाई दी थी कि लड्डू बनाने में शुद्ध घी का ही इस्तेमाल किया जाता था। वहीं यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने नसीहत देते हुए कह कि धर्म और राजनीति को मिश्रित करने की कोई जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जब जांच चल ही रही है तो मीडिया के पास जाने की जरूरत क्या थी।

13 करोड़ भारतीय बेहद गरीब, तमाम दावों के बीच आई विश्व बैंक रिपोर्ट

मुंबई करीब 12.9 करोड़ भारतीय वर्ष 2024 में अत्यधिक गरीबी में जीवन बसर कर रहे हैं। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, इन भारतीयों की प्रतिदिन की आमदनी 181 रुपये (2.15 डॉलर) से भी कम है। वर्ष 1990 में यह संख्या 43.1 करोड़ थी। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा रफ्तार से दुनिया में गरीबी खत्म करने में एक सदी से भी अधिक समय लग सकता है। विश्व बैंक की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च गरीबी मानक के साथ मध्य आय वाले देशों के लिए गरीबी की तय सीमा प्रतिदिन 576 रुपये (6.85 डॉलर) है, लेकिन जनसंख्या वृद्धि के चलते 1990 की तुलना में 2024 में अधिक भारतीय गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं। इससे पहले विश्व बैंक ने कहा था कि भारत में अत्यधिक गरीबी पिछले दो वर्षों में बढ़ने के बाद 2021 में 3.8 करोड़ घटकर 16.74 करोड़ रह गई। भारत का योगदान वैश्विक चरम गरीबी में घटेगा विश्व बैंक के मुताबिक, अगले दशक में वैश्विक अत्यधिक गरीबी में भारत का योगदान काफी कम होने का अनुमान है। यह अनुमान अगले दशक में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि के साथ-साथ ऐतिहासिक विकास दरों पर आधारित है। भारत में 2030 में चरम गरीबी दर शून्य करने पर भी इस अवधि में दुनियाभर में अत्यधिक गरीबी दर 7.31 फीसदी से गिरकर 6.72 फीसदी ही रहेगी जो अभी भी तीन फीसदी के लक्ष्य से काफी ऊपर है। दुनिया में 70 करोड़ लोग अत्यधिक गरीब गरीबी, समृद्धि और पृथ्वी : बहुसंकट से बाहर निकलने के रास्ते नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि आज भी दुनिया की 44 फीसदी आबादी प्रतिदिन 576 रुपये से कम पर जीवनयापन करती है। जनसंख्या वृद्धि के कारण 1990 के बाद से इस गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में कोई खास बदलाव नहीं आया है। 2020-2030 एक खोया हुआ दशक होने वाला है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रगति की मौजूदा रफ्तार के हिसाब से अत्यधिक गरीबी को मिटाने में दशकों लगेंगे और लोगों की प्रतिदिन की कमाई 576 रुपये से ऊपर लाने में एक सदी से अधिक समय लगेगा। वैश्विक आबादी का 8.5 फीसदी या 70 करोड़ लोग आज भी 181 रुपये से कम पर जीवनयापन कर रहे हैं। अनुमान है कि 2030 में 7.3 फीसदी आबादी अत्यधिक गरीबी में रह रही होगी। अफ्रीका में बढ़ेगी गरीबी: रिपोर्ट में कहा गया है कि इन नए डाटासेट को हाल ही में जारी 2022-23 के घरेलू उपभोग और व्यय सर्वेक्षण (एचसीईएस) में शामिल नहीं किया गया था, क्योंकि आवश्यक विश्लेषण समय पर पूरे नहीं किए जा सके। रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष मजबूत हैं जैसे उप-सहारा अफ्रीका और विकासशील देशों में अत्यधिक गरीबी का बढ़ना और 2030 तक अत्यधिक गरीबी के खात्मे का पहुंच से बाहर होना।

केंटकी : अस्पताल में ब्रेन डेड घोषित व्यक्ति की दिल निकालने से पहले ही शरीर में जान आ गई

केंटकी  अमेरिका के एक हॉस्पिटल में चौंकाने वाली घटना घटी है। ब्रेन डेड घोषित किए गए व्यक्ति का दिल निकाला जाना था। डॉक्टर इसकी तैयारी कर रहे थे तभी दिमागी रूप से मृत मरीज के शरीर में जान आ गई। डॉक्टर उसके दिल को निकालकर दूसरे मरीज के शरीर में लगाने वाले थे। घटना केंटकी के बैपटिस्ट हेल्थ रिचमंड हॉस्पिटल की है। मरीज का नाम थॉमस ‘टीजे’ हूवर द्वितीय है। उम्र 36 साल है। थॉमस को 2021 में अस्पताल में ड्रग ओवरडोज के चलते भर्ती कराया गया था। बाद में उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। बता दें कि ब्रेन डेड का मतलब मरीज की ऐसी स्थिति से है जब उसका दिमाग मर जाता है। ब्रेन को काफी नुकसान पहुंचता है और उसका ठीक होना लगभग असंभव होता है। ऐसी स्थिति में भी मृत व्यक्ति में जीवन के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। उसकी त्वचा गर्म रहती है, दिल धड़कता है और वेंटिलेशन के साथ छाती ऊपर-नीचे होती है। अंग दान के लिए दिल ऐसे ही मरीज का लिया जाता है। पूरी तरह मरने के बाद दिल निकालकर किसी और के शरीर में नहीं लगाया जा सकता। इधर-उधर हाथ-पैर मार रहा था मरीज केंटकी ऑर्गन डोनर एफिलिएट्स (KODA) के पूर्व कर्मचारी निकोलेटा मार्टिन ने कहा, “वह मरीज मेज पर इधर-उधर हाथ-पैर मार रहा था। यह हर किसी का सबसे बुरा सपना होता है। सर्जरी के दौरान जिंदा रहना और यह जानना कि कोई आपको चीरकर आपके शरीर के अंग निकाल लेगा। यह भयानक है।” KODA की एक अन्य कार्यकर्ता नताशा मिलर ने बताया कि थॉमस को ICU से ऑपरेटिंग रूम में ले जाते समय भी उसमें जीवन के लक्षण दिखाई दे रहे थे। वह इधर-उधर घूम रहा था। कुछ हद तक लड़खड़ा रहा था। जब हम वहां गए तो उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। वह रो रहा था। थॉमस अब अपनी बहन डोना रोहरर के साथ रह रहा है। उसे याददाश्त, चलने और बात करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा है।

पैदल चलने पर दुबई में कई लोगों पर लगा हजारों का जुर्माना, पढ़िए आखिर गलती क्या थी?

दुबई दुबई एक ऐसा शहर है जो अपनी चकाचौंध, लग्जरी लाइफस्टाइल, ऊंची-ऊंची इमारतों और बेशुमार दौलत के लिए दुनिया भर में मशहूर है. लेकिन इन सबके अलावा, यह शहर अपने सख्त कानूनों के लिए भी जाना जाता है. कई बार इसके कानून इतने सख्त होते हैं कि जब दूसरे देशों के लोग इसके बारे में सुनते हैं, तो वे हैरान रह जाते हैं. ऐसा ही एक मामला दुबई में ट्रैफिक कानून की सख्ती को लेकर सामने आया है. हैरानी की बात यह है कि जहां आमतौर पर लोग गलत ड्राइविंग या ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर चालान और जुर्माने का सामना करते हैं, वहीं दुबई में पैदल चलने वालों पर भी ट्रैफिक नियमों का सख्त पालन करने का दबाव होता है. गल्फ न्यूज के मुताबिक, दुबई पुलिस स्टेशन ने 37 लोगों को खतरनाक तरीके से सड़क पार करने और ट्रैफिक सिग्नल की अनदेखी करने पर जुर्माना लगाया है. उनके ऊपर 400 यूएई दिरहम का जुर्माना लगाया गया है. ध्यान रखें, नहीं तो लगेगा भारी जुर्माना! इस साल की शुरुआत से अब तक, दुबई के ट्रैफिक कानून के तहत, बिना अनुमति वाली जगह से सड़क पार करने या ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने पर 400 यूएई दिरहम का जुर्माना लगता है. दुबई का कानून जे-वॉकिंगपर सख्त है. जयवॉकिंग यानी बिना अनुमति या निर्धारित स्थान के सड़क पार करना. जब कोई शख्स ट्रैफिक सिग्नल या जेबरा क्रॉसिंग की अनदेखी करके सड़क के बीच से या ऐसी जगह से सड़क पार करता है जहां से क्रॉसिंग की अनुमति नहीं है, तो इसे जयवॉकिंग कहा जाता है. पिछले साल के आंकड़े डराने वाले! दुबई पुलिस ने बार-बार चेतावनी दी है कि जयवॉकिंग के घातक नतीजे हो सकते हैं. पिछले साल, जे-वॉकिंग की वजह से आठ लोगों की मौत हो गई और 339 लोग घायल हुए. गल्फ न्यूज के मुताबिक, 2023 में 44,000 से ज्यादा लोगों पर जे-वॉकिंग का जुर्माना लगा है. दुबई पुलिस ने साफ कहा है कि सड़क पार करते समय यातायात नियमों का पालन करना जरूरी है.उन्होंने लोगों से अपील की है कि वो क्रॉसिंग का सही तरीका अपनाएं और सड़क पर गाड़ियां न होने पर ही सड़क पार करें. बता दें, दुबई ट्रैफिक कोर्ट ने अरब ड्राइवर को ट्रैफिक नियम न मानने पर 2000 यूएई दिरहम का जुर्माना लगाया, जबकि एशियाई पैदल चलने वालों पर बिना अनुमति वाली जगह से सड़क पार करने के लिए 400 यूएई दिरहम  का जुर्माना लगाया है.    

पाकिस्तान ने फिर चीन के सामने फैलाया हाथ, मांगा 110 अरब रुपये का नया लोन

इस्लामाबाद कंगाली में डूबे पाकिस्तान एक बार फिर खुद को बचाने के लिए चीन के दरवाजे पर खैरात मांगने पहुंच गया है। पाकिस्तान ने चीन से अतिरिक्त 10 अरब युआन (1.4 अरब डॉलर या 117.70 अरब भारतीय रुपये) का कर्ज देने की गुहार लगाई है। पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट ट्रिब्यून ने अपनी रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने वॉशिंगटन में चीन के वित्त मामलों के उप मंत्री लियानो मिन से मुलाकात की और चीनी पक्ष से मुद्रा विनिमय समझौते के तहत सीमा को बढ़ाकर 40 अरब युआन करने का अनुरोध किया। चीन के कर्ज जाल में फंस रहा पाकिस्तान ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, अगर चीन इस अनुरोध को स्वीकार कर लेता है तो कुल सुविधा लगभग 5.7 अरब डॉलर हो जाएगी। पाकिस्तान पहले ही अपना कर्ज चुकाने के लिए 30 अरब युआन (4.7 अरब डॉलर) की चीनी व्यापार सुविधा का उपयोग कर चुका है। अब वह इस सुविधा को अतिरिक्त 10 अरब युआन (1.4 अरब डॉलर) तक बढ़ाना चाहता है। मौजूदा 4.3 बिलियन डॉलर की सुविधा पाकिस्तानी केंद्रीय बैंक ‘स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान’ के विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा है, जो करीब 11 अरब डॉलर है। पहले भी खैरात मांग चुका है पाकिस्तान यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने इस तरह की मांग की है। नकदी संकट से जूझ रहे देश ने पहले भी कर्ज सीमा बढ़ाने की मांग की है, लेकिन चीन ने इस तरह की अपीलों को खारिज किया है। यहां ध्यान देने की बात है कि पाकिस्तान ने यह नया अनुरोध 4.3 अरब डॉलर की सुविधा को विस्तारित करने के दो सप्ताह बाद किया है। इस विस्तार को चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग की हाल की यात्रा के दौरान औपचारिक रूप दिया गया था, जिसमें पाकिस्तान की कर्ज चुकौती अवधि को 2027 तक बढ़ा दिया गया था। लोन चुकाने के लिए चाहिए लोन पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने नए अनुरोध की पीछे के कारणों को साफ नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट से पता चलता है कि पहले से चले आ रहे कुछ कर्जों की चुकौती को लेकर संकट के चलते देश अतिरिक्त वित्तीय सहायता के लिए मजबूर हुआ है। पाकिस्तान और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने लिए स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान और पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने दिसम्बर 2011 में द्विपक्षीय मुद्रा विनियम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के अनुसार, वित्त वर्ष 2021 में 20 अरब युवान की प्रारंभिक सीमा को तीन वर्षों के लिए 30 अरब युवान तक बढ़ा दिया गया था। नवम्बर 2022 में तत्कालीन वित्त मंत्री इशाक डार ने अन्य कर्जों में देरी के कारण 10 अरब युआन की वृद्धि का अनुरोध किया था।

भारत में 2023 में सड़क हादसों के कारण 1,73,000 लोगों की मौत हुई: रिपोर्ट

नई दिल्ली भारत में सड़क हादसों में होने वाली मौतों का आंकड़ा चिंताजनक है। 2023 में देश में 1,73,000 लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा बैठे। इनमें से लगभग 55% मौतें केवल छह बड़े राज्यों – उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई हैं। राजस्थान में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा इजाफा देखा गया है, जहां 2022 की तुलना में 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 6% की वृद्धि हुई है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस बढ़ते हुए आंकड़े पर चिंता व्यक्त करते हुए शनिवार को अधिकारियों और इंजीनियरों से सड़क दुर्घटनाओं की जांच करने और सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया। सड़क हादसों में बुझ गए हजारों घरों के चिराग आंकड़ों से पता चलता है कि 2023 में इन छह राज्यों में 95,246 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई, जबकि 2022 में यह संख्या 91,936 थी। हालांकि सड़क परिवहन मंत्रालय और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा अभी तक सड़क दुर्घटनाओं और मौतों पर रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की गई है, लेकिन यह ट्रेंड बताता है कि भारत द्वारा अगले छह वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को आधा करने की कोशिश के बावजूद यह समस्या कितनी गंभीर होती जा रही है। पिछले साल देश में कहां हुए सबसे अधिक सड़क हादसे दिल्ली में संयुक्त आयुक्त (यातायात) रह चुके पूर्व आईपीएस अधिकारी सत्येंद्र गर्ग ने बताया कि दुर्घटनाओं की उचित जांच और हस्तक्षेप से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। दिल्ली के यातायात मुद्दों से निपटने के दौरान मुझे इसका एहसास हुआ था। ज़्यादातर दुर्घटनाओं और मौतों को रोका जा सकता है। हादसों की जांच जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अधिकारियों को इस मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है कि बड़े राज्यों में सड़कें और वाहन ज्यादा होने के कारण सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्या भी ज्यादा होगी। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ और ड्राइविंग मैनुअल के लेखक नरेश राघवन का कहना है कि कानूनों को लागू करने के साथ-साथ ड्राइवरों को शिक्षित करने पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। वह कहते हैं कि याद रखें कि केवल पांच या छह नियमों को ही पुलिस यातायात नियमों को लागू कर सकती है। शेष 45 बुनियादी सड़क नियम लोगों/ड्राइवरों को सिखाने होंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को सड़क और पुल निर्माण में उभरते रुझानों और तकनीकों पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले साल सड़क दुर्घटनाओं में हमने 1.73 लाख लोगों की जान गंवाई है और याद रखें कि हर साल मरने वाले लगभग 60% लोग 18-34 वर्ष की आयु वर्ग के होते हैं। सड़क दुर्घटनाओं की सामाजिक-आर्थिक लागत हमारे सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 3% है। कृपया इसे गंभीरता से लें। सड़क सुरक्षा के मुद्दों को संवेदनशीलता से निपटें, दुर्घटनाओं की जांच करें, खतरनाक जगहों को ठीक करें और मुद्दों का समाधान करें। हमने युद्धों में भी इतने लोगों को कभी नहीं खोया।

मोदी सरकार कब जारी कर सकती है PM Kisan Yojana की 19वीं किस्त? यहां जानें किसान

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एक ऐसी योजना है जिसके जरिए करोड़ों किसानों को आर्थिक लाभ मिल रहा है। इस योजना को भारत सरकार चलाती है और देश का किसान इससे लाभान्वित हो रहा है। हर साल इस योजना के लिए करोड़ों रुपये जारी किए जाते हैं। जो किसान इस योजना के लिए पात्र होते हैं उन्हें भारत सरकार की तरफ से सालाना 6 हजार रुपये दिए जाते हैं। योजना के अंतर्गत अब तक कुल 18 किस्त के पैसे जारी हो चुके हैं और अब अगली बारी 19वीं किस्त की है। तो चलिए जानने की कोशिश करते हैं कि ये किस्त कब जारी हो सकती है। आप अगली स्लाइड्स में 19वीं किस्त के बारे में जान सकते हैं… कितनी किस्त आ चुकी है?     पीएम किसान योजना के अंतर्गत अब तक 18 किस्त जारी हो चुकी हैं। बीती 5 अक्तूबर को 18वीं किस्त जारी की गई। इसका लाभ 9.4 करोड़ से अधिक किसान लाभार्थियों को मिला। डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में पैसे भेजे गए। कब जारी हो सकती है 19वीं किस्त?     किस्त के पैस देने के लिए एक नियम है जिसके अंतर्गत लगभग हर 4 महीने के अंतराल पर किस्त जारी की जाती है। ऐसे में अगर देखें तो पिछली किस्त (18वीं किस्त) 5 अक्तूबर 204 को जारी हुई। ऐसे में अगली किस्त (19वीं किस्त) का समय अगले चार महीने यानी जनवरी में जारी हो सकती है। हालांकि, अभी आधिकारिक तौर पर इसको लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। ये काम जरूर करवा लें:-     अगर आप चाहते हैं कि आपको भी योजना के अंतर्गत मिलने वाले किस्त के 2 हजार रुपये मिले तो इसके लिए जरूरी है कि आप ई-केवाईसी करवा लें। जो किसान इस काम को नहीं करवाते हैं वे किस्त के लाभ से वंचित रह सकते हैं। इसलिए लाभ लेने के लिए ये काम जरूर करवा लें। 19वीं किस्त जारी होने की तारीख क्या है?     किस्त का लाभ लेने के लिए दूसरा काम है भू-सत्यापन। इस काम को करवाना भी बेहद जरूरी है। नियमों के तहत जो किसान इस काम को नहीं करवाते या करवाएंगे, वे किस्त के लाभ से वंचित रह जाएंगे     साथ ही अपने आधार कार्ड को अपने बैंक खाते से लिंक जरूर करवा लें क्योंकि अगर आप ये काम नहीं करवाते तो भी आपकी किस्त अटक सकती है।  

ऑपरेशन के तहत कुल 75 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और लगभग 64 किलोग्राम गांजा बरामद किया

नोएडा पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्ध नगर में चलाए गए ऑपरेशन प्रहार-2 में तीनों जोन के अधिकारियों ने कड़ी कार्रवाई करते हुए नशे का व्यापार करने कई वालों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक इस ऑपरेशन के तहत कुल 75 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और लगभग 64 किलोग्राम गांजा, भारी मात्रा में स्मैक की पुड़िया, ई-सिगरेट, 100 पाइप और रोलिंग पेपर बरामद हुए। तीन व्यक्तियों को ऑनलाइन नशे के सामान बेचते हुए भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि नशे से बच्चों और युवा पीढ़ी को बचाने के उद्देश्य से पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देश में ‘ऑपरेशन प्रहार का सेकंड फेज’ चलाकर नशे के खिलाफ सख्त एक्शन लिया गया। इस अभियान में गौतमबुद्ध नगर के तीनों जोन में 700 से अधिक स्थानों, स्कूलों, विश्वविद्यालयों के आस-पास लगभग 100 से अधिक टीम शामिल थीं। पुलिस ने बताया कि कुछ दिनों से लगातार मिल रही सूचनाओं के आधार पर गोपनीय तरीके से छानबीन के बाद टीम लगाई गई थी। नोएडा जोन में डीसीपी रामबदन सिंह के नेतृत्व में हरोला, बरौला, सदरपुर, पर्थला, सर्फाबाद, अट्टा, सेक्टर-62, सेक्टर-12, स्कूल, कॉलेज, मार्केट और मैट्रो स्टेशन के आसपास पुलिस टीम ने चेकिंग अभियान चलाकर कुल 34 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से 26 किलोग्राम गांजा, स्मैक की पुड़िया, ई-सिगरेट और रोलिंग पेपर बरामद किए गए। सेंट्रल नोएडा जोन में डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी के नेतृत्व में छिजारसी, बहलोलपुर, भंगेल, कुलेसरा, रोजा जलालपुर, स्कूल, कॉलेज, मार्केट और मेट्रो स्टेशन के आसपास पुलिस टीम ने चेकिंग अभियान चलाकर कुल 17 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। अभियुक्तों के कब्जे से 13.73 किलोग्राम गांजा, स्मैक की पुड़िया, ई-सिगरेट और रोलिंग पेपर बरामद किए गए। ग्रेटर नोएडा जोन में डीसीपी साद मियां खान के नेतृत्व में नॉलेज पार्क, ऐच्छर, कस्बा कासना, कस्बा विलासपुर, कस्बा रबूपुरा, कस्बा जेवर, कस्बा जारचा, कस्बा दादरी, स्कूल, कॉलेज, मार्केट और मैट्रो स्टेशन के आसपास पुलिस टीम ने अभियान चलाकर 24 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से 24.15 किलोग्राम गांजा, स्मैक की पुड़िया, ई-सिगरेट और रोलिंग पेपर बरामद किए गए।

देशभर में कुल 27 विमानों में बम होने की धमकी मिली, कम नहीं हो रहे मामले, यात्रियों पर असर

पंजाब हाल के दिनों में, भारत में विभिन्न एयरलाइन कंपनियों के विमानों को बम से उड़ाने की धमकियाँ मिल रही हैं। शुरुआत में यह धमकियाँ कुछ ही विमानों तक सीमित थीं, लेकिन अब उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में, 25 अक्टूबर को कुल 27 विमानों को बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिससे यात्रियों में दहशत फैल गई। सुरक्षा एजेंसियाँ इस स्थिति को लेकर सतर्क हैं और सभी धमकियों की गहन जांच की जा रही है। हालांकी सभी धमकियाँ फर्जी पाई गई हैं, फिर भी इन्हें गंभीरता से लिया जा रहा है। यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कई अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। 27 विमानों में बम की धमकी 25 अक्टूबर को देशभर में कुल 27 विमानों में बम होने की धमकी मिली। इस स्थिति के चलते कई विमानों की लैंडिंग कराई गई और कुछ की उड़ान में देरी हुई। जिन विमानों को धमकी मिली उनमें स्पाइसजेट, इंडिगो, एयर इंडिया और विस्तारा जैसी कंपनियों के विमान शामिल थे। यात्रियों पर असर इन धमकियों के कारण यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा है। कई यात्रियों की उड़ानें रद्द हुईं या देरी से हुईं, जिससे उनकी यात्रा योजनाएं प्रभावित हुईं। सुरक्षा एजेंसियाँ इन धमकियों की गंभीरता से जांच कर रही हैं। शुरुआती जांच में ये धमकियाँ फर्जी साबित हो रही हैं, लेकिन फिर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। हालांकि ये धमकियाँ फर्जी हैं, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे एयरलाइंस से लगातार संपर्क में रहें और यात्रा से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की जांच करें। पहले भी आईं थीं धमकियाँ इससे पहले, 22 अक्टूबर को 30 विमानों को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी, जबकि 24 अक्टूबर को यह संख्या बढ़कर 85 विमानों तक पहुँच गई थी। इन विमानों में प्रमुख एयरलाइनों जैसे एयर इंडिया, विस्तारा, इंडिगो, और अकासा के विमान शामिल थे। इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि धमकियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे यात्रियों और एयरलाइंस दोनों में चिंता बढ़ी है। सुरक्षा एजेंसियाँ इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अपने सभी सुरक्षा उपायों को कड़ा कर रही हैं। यात्रियों से आग्रह किया गया है कि वे अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें। इस प्रकार, यह धमकियाँ सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा- अभी 11 सीट पर चर्चा जारी है, हम सबको खुश नहीं कर सकते

इंदापुर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता अजित पवार ने शुक्रवार को कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति के बीच राज्य की 288 विधानसभा सीटों में से 11 सीट पर अभी बातचीत हो रही है। राज्य विधानसभा की 288 सीट पर एक चरण में 20 नवंबर को मतदान कराया जाएगा जबकि 23 नवंबर को परिणाम जारी किए जाएंगे। पवार ने कहा कि उनकी पार्टी को मिली सीट में से 10 प्रतिशत सीट अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के लिए रखी जाएंगी। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कुछ उम्मीदवार के नामों की घोषणा कर दी है। अभी 11 सीट पर चर्चा जारी है। हम सबको खुश नहीं कर सकते।” महाराष्ट्र की बारामती सीट पर अजित पवार का मुकाबला अपने भतीजे और राकांपा (शरदचंद्र पवार) के नेता युगेंद्र पवार से है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, राकांपा और भाजपा सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के घटक दल हैं। अजित पवार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व के साथ चर्चा करने के लिए बृहस्पतिवार को दिल्ली में मौजूद थे। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अब तक 99 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है, जबकि राकांपा ने 45 निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए दो सूचियां जारी की हैं। वहीं, शिवसेना ने अब तक 45 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की है।

झारखंड के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी, पीएम मोदी सहित 40 नेता शामिल

रांची झारखंड के विधानसभा चुनाव के पहले चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी सहित कुल 40 नेता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्टार प्रचारक होंगे। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह की ओर से इस संबंध में भारत के निर्वाचन आयोग को सूचित कर दिया गया है। झारखंड में कुल 81 विधानसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव के पहले फेज में 43 सीटों पर 13 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। इस चरण के प्रचार के लिए पार्टियों और उम्मीदवारों के पास अब 18 दिन का वक्त है। भाजपा की ओर से स्टार प्रचारक घोषित किए गए नेताओं में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा पहले से कैंप कर रहे हैं। पिछले तीन दिनों में इन दोनों नेताओं ने 10-12 सभाएं संबोधित की हैं। पार्टी की ओर से जिन राज्यों के मुख्यमंत्री स्टार प्रचारक के तौर पर राज्य में चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे, उनमें उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव, ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी, हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी और छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय शामिल हैं। केंद्रीय मंत्रियों में धर्मेंद्र प्रधान और अन्नपूर्णा देवी और केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय और संजय सेठ भी स्टार प्रचारक होंगे। पार्टी के बड़े नेताओं में स्मृति ईरानी, उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत वाजपेयी, नागेंद्र नाथ त्रिपाठी, कर्मवीर सिंह, सुवेंदु अधिकारी भी स्टार प्रचारक बनाए गए हैं। भाजपा की झारखंड प्रदेश इकाई के नेताओं में प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व सीएम चंपई सोरेन, पूर्व सांसद कड़िया मुंडा, राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश, सांसद विद्युत वरण महतो, निशिकांत दुबे, ढुल्लू महतो, आदित्य साहु, प्रदीप वर्मा, बालमुकुंद सहाय, पूर्व विधायक सीता सोरेन, पूर्व मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी, मनोज सिंह और घूरन राम भी स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल हैं। राज्य में पहले चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुक्रवार को संपन्न हो गई। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर शाम 5 बजे तक अपडेट की गई सूचना के मुताबिक, पहले फेज के लिए कुल 868 प्रत्याशियों ने नामांकन किया है।

भारतीय मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी बारिश का अलर्ट जारी किया

बंगाल बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘दाना’ का प्रभाव पूरे भारत में देखा जा रहा है। इसके कारण ओडिशा और पश्चिम बंगाल में तूफानी हवाओं के साथ भारी बारिश हो रही है, जिससे इन राज्यों का मौसम बिगड़ गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी बारिश का अलर्ट जारी किया है। यहां तक कि दिल्ली में भी इस तूफान का असर देखने को मिला है, जहां पिछले दो दिनों से ठंडी हवाएं चल रही हैं। उत्तर भारत में ठंड का असर पहले से महसूस हो रहा है, और आने वाले दिनों में इसमें और वृद्धि होने की संभावना है। मौसम विभाग ने एक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के सक्रिय होने की भी संभावना जताई है, जिससे पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी हो सकती है। दिवाली के बाद बढ़ेगा प्रदूषण और ठंड दिल्ली में चक्रवात ‘दाना’ के प्रभाव से सुबह के समय ठंडी हवाएं चल रही हैं। दिन में धूप निकलने से मौसम सामान्य लग रहा है, लेकिन सुबह और रात का तापमान घट रहा है। पंखे बंद होने लगे हैं, और लोगों ने सुबह और रात में हल्की ठंड महसूस करना शुरू कर दिया है। IMD ने 31 अक्टूबर तक दिल्ली के मौसम के इसी तरह बने रहने की संभावना जताई है। दिवाली के बाद, दिल्ली में तापमान गिरने लगेगा और पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी के प्रभाव से ठंड बढ़ सकती है। नवंबर में घनी धुंध का असर मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर के पहले सप्ताह से दिल्ली में धुंध छाने लगेगी और 15 नवंबर के बाद घनी धुंध के साथ हाड़ कंपाने वाली ठंड का अनुभव होगा। इस बार सर्दी सामान्य से अधिक रहने की संभावना है और दिल्ली का न्यूनतम तापमान 15 डिग्री से नीचे जा सकता है। 25 अक्टूबर के बाद सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ के कारण हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी की भी संभावना जताई जा रही है। दिल्ली का तापमान और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पिछले दिन दिल्ली का अधिकतम तापमान 33.83°C और न्यूनतम 25.68°C दर्ज किया गया था। आज सुबह 32.12°C तापमान रहा और दिन में 20.05°C से 34.92°C के बीच रहने की उम्मीद है। वहीं, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) आज 164 दर्ज किया गया है। आने वाले दिनों में दिल्ली में स्मॉग की मोटी चादर बिछने की संभावना है, जिससे हवा में धूल और धुआं बढ़ता रहेगा।  

किसान नेताओं ने घोषणा की कि 29 अक्टूबर को जिलाधीश कार्यालय गुरदासपुर का घेराव किया जाएगा

गुरदासपुर गुरदासपुर के बब्बरी बाइपास चौंक पर किसानों ने आज सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक धरना देकर चार घंटे के लिए नेशनल हाईवे जाम कर दिया। बड़ी संख्या में किसान और मजदूर चौंक पर एकत्र हुए और केन्द्र व पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान नेताओं ने घोषणा की कि 29 अक्टूबर को जिलाधीश कार्यालय गुरदासपुर का घेराव किया जाएगा। अगर फिर भी समस्याएं नहीं सुलझीं, पूरी कीमत देकर धान की खरीदारी शुरू नहीं हुई, तो फिर किसान किसी बड़ी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होंगे।  इस धरने की अध्यक्षता संयुक्त किसान मोर्चा के किसान संगठनों के नेता कश्मीर सिंह तुगलवाल, हरजीत सिंह काहलों, मक्खन सिंह कोहाड़, तरलोक सिंह बहरामपुर, गुरविंदर सिंह जीवनचक्क, जसबीर सिंह कत्तोवाल, सुखदेव सिंह भागोकावां, सतबीर सिंह सुल्तानी, करनैल सिंह शेरपुर, सुरिंदर सिंह डुगरी, बलजिंदर सिंह, सरदूल सिंह बरीला, गगनदीप सिंह,मास्टर करम सिंह, बलदेव सिंह कलेर, मजदूर नेता राज कुमार पंडोरी, विजय सोहल, सुभाष कैरे, पलविंदर सिंह, सुखदेव राज, बहरामपुर कुलविंदर सिंह तिबड़, जगजीत सिंह जज और स्वामी बाऊपुर आदि की तथा सम्बोधन किया।  किसानों की मांग थी कि किसानों का धान कई दिनों से मंडियों में खरीद न करने से खराब हो रही है, 17 फीसदी नमी होने पर भी पूरा रेट नहीं दिया जा रहा है। सरकार  धान की खरीद नहीं कर रही है और शैलर मालिक व अन्य लोग 200-300 रुपये प्रति क्विंटल कम रेट पर धान खरीद रहे हैं। वे नमी का बहाना बनाकर कटौती कर रहे हैं। कई नई जांच मशीनों के परिणाम में भी अंतर है।  किसान मजदूर नेताओं का आरोप लगाया कि केन्द्र की मोदी सरकार चावल मिलों से पिछले साल का चावल नहीं ले रही है और उन्हें करोड़ों का नुकसान हो रहा है। आढ़तियों का कमीशन भी कम कर दिया गया है और मंडी कर्मियों का पारिश्रमिक भी नहीं बढ़ाया गया है, केन्द्र द्वारा लिफटिंग नहीं होने के कारण खरीद नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर, पंजाब सरकार भी केन्द्र की साजिश के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है। किसानों को परेशानी पहुंचाने में पंजाब सरकार भी बराबर की दोषी है। नेताओं ने कहा कि किसान सडक़ जाम कर लोगों को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन उनके पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। पंजाब में सडक़ें अवरुद्ध होने के लिए केन्द्र और पंजाब सरकार दोषी हैं।

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