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इजरायल की ओर से दागी गई मिसाइल लेबनान में स्थित एक मीडिया दफ्तर में जा गिरी, तीन पत्रकार हुए ढेर

 बेरूत लेबनान में इजरायली हमले लगातार जारी हैं। बुधवार को पूरी रात इजरायल पर अटैक करने के बाद गुरुवार की रात को भी उसने कई मिसाइल हमले किए। इनमें से ही एक मिसाइल अटैक में तीन मीडियाकर्मी भी मारे गए हैं। इजरायल की ओर से दागी गई मिसाइल दक्षिणपूर्व लेबनान में स्थित एक मीडिया दफ्तर में जा गिरी। इसमें मीडिया से जुड़े तीन कर्मचारियों की मौत हो गई। बेरूत स्थित अल-मायादीन टीवी की रिपोर्ट के अनुसार उसके दो स्टाफ की शुक्रवार सुबह ही मौत हो गई। वहीं लेबनान में सक्रिय उग्रवादी संगठन हिजबुल्ला से जुड़े अल-मनार टीवी के भी एक पत्रकार के मारे जाने की खबर है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार इजरायल के हमले में विसम कासिम नाम को फोटो पत्रकार एयरस्ट्राइक में मारा गया। इस बीच इजरायल ने सेंट्रल गाजा में भी हमले किए हैं। गाजा के नुसरत रिफ्यूजी कैंप में इजरायली हमले में 18 लोग मारे गए हैं। यह शेल्टर कैंप एक स्कूल में बनाया गया था, जिस पर इजरायल की एक मिसाइल आकर गिरी। यहां सैकड़ों की संख्या में फिलिस्तीन के लोगों ने शरण ले रखी है। इसके बाद एक और हमला इजरायल की ओर से पड़ोस के ही कैंप में किया गया, जिसमें कई लोग घायल हो गए। इजरायल की सेना ने खान यूनिस में भी बमबारी की है। खान यूनिस के अल-मनारा इलाके के एक घर में बम गिराया गया, जिसमें 23 लोगों की मौत हो गई। अल जजीरा ने अपनी एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी है। उत्तरी गाजा के जबालिया में भी हमले हुए हैं, जिनमें 10 इमारतों को नुकसान पहुंचा है। यहां से भी कई लोगों के मारे जाने की खबरें हैं। अब तक 45 हजार के करीब फिलिस्तीनी नागरिक इजरायल के हमलों में मारे जा चुके हैं। यह जंग बीते साल 7 अक्टूबर से शुरू हुई थी, जो अब तक जारी है।

लॉरेंस का भाई अनमोल, 10 लाख का इनाम, गैंग पर NIA का बड़ा एक्शन

मुंबई  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। अनमोल पर बाबा सिद्दीकी की हत्या और सलमान खान के घर पर फायरिंग के मामले में शामिल होने का आरोप है। पुलिस को शक है कि अनमोल ने ही शूटर्स को बाबा सिद्दीकी और उनके बेटे जीन सिद्दीकी की तस्वीरें भेजी थीं। कौन है अनमोल बिश्नोई? अनमोल बिश्नोई लॉरेंस बिश्नोई का भाई है और उस पर NIA के दो मामलों में आरोप हैं। ये दोनों मामले 2022 में दर्ज किए गए थे। मुंबई पुलिस को शक है कि अनमोल ने ही एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या करने वाले तीनों शूटर्स को इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप के जरिए बाबा और उनके बेटे जीशान सिद्दीकी की तस्वीरें भेजी थीं। अनमोल को ट्रैक कर रही एनआईए NIA अनमोल को ट्रैक करने की अपनी कोशिशें तेज कर रही है। अधिकारी लोगों से अनुरोध कर रहे हैं कि अगर उनके पास कोई भी जानकारी है जो अनमोल को पकड़ने में मदद कर सकती है, तो वे आगे आएं। यह घोषणा संगठित अपराध से निपटने और सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ाने के लिए एजेंसी की प्रतिबद्धता को बताती है। अनमोल पर पहले से दर्ज हैं 18 केस इस साल अप्रैल में सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग की घटना के बाद मुंबई पुलिस ने अनमोल बिश्नोई के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था। अनमोल ने सोशल मीडिया पर सलमान खान को धमकी देते हुए लिखा था क यह पहली और आखिरी चेतावनी है। अनमोल पर पहले से ही 18 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

दिल्ली की युवती का शव रोहतक में एक खेत में मिलने से गांव में सनसनी मची

रोहतक करवा चौथ के दिन जब दिल्ली के नांगलोई की रहने वाली 20 साल की सोनी घर से निकली, तो उसके परिवार ने सोचा नहीं था कि यह आखिरी बार होगा, जब वे उसे देख पा रहे हैं. चार दिन बाद सोनी का शव हरियाणा के रोहतक जिले के मदीना गांव के खेतों में दफन मिला है. कई महीनों से चले आ रहे प्रेम संबंधों का अंत इतना दर्दनाक होगा, किसी ने सोचा भी नहीं था. खेत में 4 फीट नीचे दबी मिली लड़की की लाश कहानी है बारहवीं क्लास में पढ़ने वाली सोनी की, जिसके लाश दिल्ली पुलिस को खेत में 4 फीट नीचे दबी मिली. खेत में लाश मिलने से गांव में सनसनी मच गई. खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल गई और ग्रामीण शव को देखने के लिए खेतों की ओर दौड़ पड़े. गला दबा कर की थी हत्या दिल्ली के नांगलोई की रहने वाली 20 साल की सोनी 20 अक्टूबर को यानी करवा चौथ के दिन घर से निकली लेकिन वापस नहीं लौटी. परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस थाना नांगलोई में दर्ज करवाई. पुलिस ने मामला दर्ज कर जब सलीम नाम के एक युवक से पूछताछ की तो उसने कबूल किया कि उसने सोनी की गला दबा कर हत्या कर दी है. साथ ही दो दोस्तों के साथ मिलकर उसने उसे गांव मदीना के खेतों में उसे दफना दिया है. 4 माह की प्रेग्नेंट थी मृत सोनी ये सुनते ही पुलिस ने सलीम और उसके साथी पंकज को गिरफ्तार किया और रोहतक के बहु अकबरपुर थाना पुलिस के साथ खेतो में पहुंची. यहां पुलिस ने देखा कि तीन आरोपियों ने सोनी के शव को तीन चार फीट का गड्ढा खोद कर खेत में दबाया हुआ था. दिल्ली पुलिस ने एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर दो आरोपियों और युवती के परिजनों की मदद से शव को बाहर निकाला. हत्या के पीछे बड़ी बात यह सामने आई युवती सोनी का सलीम के साथ कई महीने से प्रेम चल रहा था. इसी बीच उनके बीच शारीरिक संबंध बने और युवती गर्भवती हो गई. प्राप्त जानकारी के अनुसार युवती तीन- चार महीने की प्रेग्नेंट थी. रोहतक पुलिस ने बताया कि मामले को लेकर दिल्ली पुलिस हमारे पास आई थी. उन्होंने बताया कि एक लड़की की हत्या कर उसका शव यहां मदीना के खेतो में दफनाया गया है. दिल्ली पुलिस ने FSL की टीम और ड्यूटी मेजिस्ट्रेट की निगरानी में शव को बाहर निकाला. दिल्ली पुलिस दो आरोपियों को भी साथ लाई थी. हमने सिर्फ दिल्ली पुलिस की मदद की. दिल्ली पुलिस इस मामले में कार्यवाही कर रही है और शव को रोहतक पीजीआई में पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया गया है.    

जल्द मिलेगी महंगाई से राहत, सरकार साबुत चना और मसूर दाल को कम दाम पर उपलब्ध करवाएगी

नई दिल्ली  भारत में दालों की कीमतों में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसी बीच भारत ब्रांड के तहत सरकार देश में बाजार से 20 से 25 प्रतिशत कम कीमत पर सस्ती दाल उपलब्ध करवा रही है। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने अपने सब्सिडी वाले दाल कार्यक्रम का विस्तार करते हुए साबुत चना और मसूर दाल को कम दाम पर उपलब्ध करवाने की पेशकश रखी है। सरकार की इस पहल के साथ चना, मूंग और मसूर दाल को कीमतों में छूट के साथ खरीदा जा सकेगा। इन दालों की खरीदारी कॉपरेटिव रिटेल नेटवर्क और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से की जा सकेगी। साबुत चना 58 रुपये प्रति किलोग्राम, चना दाल 70 रुपये प्रति किलोग्राम, मूंग दाल 107 रुपये प्रति किलोग्राम, साबुत मूंग दाल 93 रुपये प्रति किलोग्राम और मसूर दाल को 89 रुपये प्रति किलोग्राम कीमत पर खरीदा जा सकेगा। ‘भारत दाल’ के तहत मोबाइल वैन के जरिए बिक्री की जाएगी। ‘भारत दाल’ के दूसरे चरण की शुरुआत को लेकर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, “यह पहल उपभोक्ताओं को किफायती मूल्य पर आवश्यक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि है।” राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ), राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) और केंद्रीय भंडार जैसी सहकारी समितियों और अन्य चैनलों के माध्यम से यह सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। ‘भारत दाल’ पहल के दूसरे चरण के तहत सरकार मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने बफर स्टॉक से दालें बेच रही है। सरकार ने खुदरा हस्तक्षेप के जरिए वितरण के लिए 3 लाख टन चना और 68,000 टन मूंग आवंटित किया है। ‘भारत दाल’ की बिक्री दोबारा शुरू होने के साथ त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं के लिए सप्लाई बढ़ने की भी उम्मीद की जा रही है। इसके अलावा, सस्ती सब्जियों की बिक्री के लिए सरकार ने एनसीसीएफ और नेफेड के माध्यम से मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए रबी फसल से 4.7 लाख टन प्याज खरीदा है। सरकार ने 5 सितंबर से बफर से प्याज का निपटान शुरू किया और अब तक 1.15 लाख टन बेचा जा चुका है। एनसीसीएफ ने 21 राज्यों में 77 केंद्रों और नेफेड ने 16 राज्यों में 43 केंद्रों पर प्याज बेचा है।    

भारत का इंकार के आगे चीन और रूस का समर्थन भी फेल, पाकिस्तान को ब्रिक्स समूह में एंट्री नहीं मिली

नई दिल्ली ब्रिक्स (BRICS) बैठक खत्म होने के साथ ही इस संगठन में शामिल होने की कोशिश में लगे पाकिस्तान का सपना चकनाचूर हो गया है. चीन और रूस के समर्थन के बावजूद पाकिस्तान को ब्रिक्स समूह में एंट्री नहीं मिली है. यहां तक कि पाकिस्तान को ब्रिक्स संगठन के नए पार्टनर देशों की लिस्ट में भी जगह नहीं मिली है. वहीं, तुर्की को पार्टनर देशों में शामिल किया गया है. पाकिस्तान ने पिछले साल ब्रिक्स की सदस्यता के लिए औपचारिक तौर पर आवेदन किया था. चीन ने पाकिस्तान से किया था वादा चीन और रूस ने पाकिस्तान को ब्रिक्स में शामिल करने का समर्थन किया था. ऐसा कहा जा रहा है कि भारत ब्रिक्स में पाकिस्तान की एंट्री को लेकर बहुत ज्यादा संतुष्ट नहीं था. तेजी से बढ़ती इकॉनमी और दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा देश भारत इस समूह का संस्थापक सदस्य है जिसमें शुरू में ब्राजील (B), रूस (R), भारत (I), चीन (C) शामिल था और बाद में इसमें दक्षिण अफ्रीका जुड़ गया जिसके बाद दक्षिण अफ्रीका के नाम से उसके नाम का पहला अक्षर एस लिया गया है जिसके बाद संगठन ब्रिक्स कहलाने लगा. चीन ने पाकिस्तान को ब्रिक्स में शामिल करने का भरोसा दिया था लेकिन पाकिस्तान को ब्रिक्स तो क्या उसके पार्टनर देशों की सूची में भी जगह नहीं मिली. चीन के अलावा रूस ने भी कहा था कि वह ब्रिक्स में पाकिस्तान की सदस्यता का समर्थन करता है. पीएम मोदी ने पाकिस्तान को लेकर रूस-चीन को दिया संदेश? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत ब्रिक्स में अधिक ‘पार्टनर देशों’ का स्वागत करने के लिए तैयार है लेकिन इस संबंध में फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए. 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने इशारों-इशारों में 9 सदस्यीय समूह में पाकिस्तान के प्रवेश के लिए रूस और चीन के समर्थन को लेकर भी अपना संदेश दे दिया. पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स के संस्थापक सदस्यों के विचारों का सम्मान किया जाना चाहिए. रूस और चीन के अलावा ब्रिक्स के दो अन्य संस्थापक देश भारत और ब्राजील हैं. ब्रिक्स की बैठक में पीएम मोदी ने ब्रिक्स सदस्यों से आतंकवाद और आतंकियों को पालन-पोषण करने वाली ताकतों से निपटने पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान भी किया और कहा कि इस मुद्दे पर दोहरे मानदंड की कोई जगह नहीं है. ब्रिक्स में नए सदस्यों को केवल आम सहमति से ही शामिल किया जाता है, इसलिए यह साफ था कि पाकिस्तान की सदस्यता के लिए भारत का विरोध समूह में शामिल होने की उसकी कोशिश को नाकाम कर सकता है, भले ही कुछ अन्य संस्थापक सदस्य इसके पक्ष में हों. जैसा कि उम्मीद थी कि भारत इस समूह में पाकिस्तान को शामिल करने को लेकर राजी नहीं हुआ. अधिकांश पाकिस्तानी नेताओं को उम्मीद थी कि रूस और चीन की मदद से पाकिस्तान ब्रिक्स में प्रवेश पाने में सफल हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका. पाकिस्तान ने दी थी ब्रिक्स से जुड़ने की अर्जी पाकिस्तान ने पिछले साल ब्रिक्स की सदस्यता के लिए औपचारिक तौर पर आवेदन किया था. ब्रिक्स में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के कुछ शीर्ष राजनयिकों ने समर्थन हासिल करने के लिए कई ब्रिक्स देशों का दौरा भी किया था. पाकिस्तान ब्रिक्स में शामिल होकर दुनिया की प्रभावशाली अर्थव्यवस्थाओं के साथ अपना गठजोड़ करना चाहता है. ब्रिक्स में शामिल होने से पाकिस्तान को आर्थिक और कूटनीतिक दोनों तरह से बहुत कुछ हासिल होगा. लेकिन भारत के लिए यह किसी भी लिहाज से फायदेमंद नहीं होता क्योंकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध कम से कम पिछले पांच वर्षों से अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं. पाकिस्तान की तरफ से आतंकवाद से जूझ रहा भारत इस मोर्चे पर उसके साथ कोई संबंध नहीं चाहता है और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए कजान में भारत के रुख ने यह साफ कर दिया. पाकिस्तान ने लगाया था आरोप पिछले साल जून में पाकिस्तानी विदेश विभाग ने कहा था कि चीन में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित वार्ता में उसकी भागीदारी को ‘एक सदस्य’ द्वारा खारिज कर दिया गया था. हालांकि पाकिस्तान ने इस दौरान भारत का नाम नहीं लिया लेकिन उसने यह जरूर कहा था कि ब्रिक्स ब्लॉक को भविष्य में विकासशील दुनिया के हितों पर आधारित फैसले लेने चाहिए. लेकिन इस बार पाकिस्तान को पूरी उम्मीद थी कि भारत के विरोध के बावजूद रूस और चीन के समर्थन से उसके लिए ब्रिक्स के दरवाजे खुलेंगे. ऐसा भी कहा जा रहा था कि भारत भी पाकिस्तान की ब्रिक्स सदस्यता का शायद समर्थन कर सकता है. आपको बता दें कि सितंबर के महीने में जब रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक ने पाकिस्तान की यात्रा की तो उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान ऐलान किया था कि रूस ब्रिक्स सदस्यता के लिए पाकिस्तान के आवेदन का स्वागत करता है. कई विश्लेषकों ने ब्रिक्स में पाकिस्तान की सदस्यता के लिए रूस के समर्थन को भारत-अमेरिका की करीबी के जवाब के तौर पर भी देखा. कैसे बना ब्रिक्स इस गठबंधन की शुरुआत केवल पांच देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के साथ हुई थी लेकिन पिछले साल ब्रिक्स समूह ने चार नए सदस्यों मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को शामिल किया था जिसके बाद इसे ब्रिक्स प्लस के नाम से जाना जाने लगा. कई देश ब्रिक्स में शामिल होना चाहते हैं. पाकिस्तान भी इन देशों में से एक था. एक समूह के रूप में ब्रिक्स आज दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है. कई रिपोर्टों के अनुसार, जीडीपी के हिसाब से ब्रिक्स गुट के देश दुनिया भर की जीडीपी का लगभग 30 प्रतिशत हैं.  

SC ने दहेज हत्या के एक मामले में एक आरोपी को बरी करते हुए कहा- दहेज उत्पीड़न के मामलों में सावधानी बरतें कोर्ट

नई दिल्ली अगर आपसे पूछा जाए कि 2-4 ऐसे कानूनों का नाम बताइए जिसका सबसे ज्यादा दुरुपयोग होता है। जवाब में दहेज उत्पीड़न से जुड़ा कानून शायद ही किसी की लिस्ट में जगह पाने से छूटे। इस कानून को पति के घरवालों और रिश्तेदारों के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। गुनाह किसी का भी हो लेकिन घर के हर बालिग सदस्य को आरोपी बना दिया जाता है। जमानत भी मुश्किल से होती है। कानून के दुरुपयोग को लेकर समय-समय पर अदालतें भी चिंता जताती रहती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में आरोपी को बरी करते हुए अदालतों को सलाह दी है कि वे दहेज उत्पीड़न या दहेज हत्या से जुड़े मामलों सावधानी बरतें। ध्यान रखें कि कोई बेगुनाह परेशान न हो। कानून के दुरुपयोग को लेकर सावधानी बरतने की सलाह सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की अदालतों को दहेज उत्पीड़न के मामलों में सावधानी बरतने को कहा है। अक्सर इन मामलों में पति के रिश्तेदारों को भी फंसा लिया जाता है, जबकि मुख्य आरोपी पति होता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दहेज उत्पीड़न के कई मामलों में आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। ऐसे में अदालतों को ऐसे मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए ताकि निर्दोष परेशान न हों। जस्टिस सीटी रविकुमार और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने दहेज मृत्यु के एक मामले में एक व्यक्ति को बरी करते हुए यह बात कही। दहेज हत्या के मामले में ननदोई भी था आरोपी बेंच ने कहा कि आरोपी ने मृतका की ननद से अक्टूबर 2010 में शादी की थी। दहेज उत्पीड़न का आरोप पहली बार लगने के बाद उसने शादी की थी। सिर्फ इसलिए उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि उसकी पत्नी को दोषी पाया गया था। बेंच ने कहा कि सामान्य और व्यापक आरोप अभियोजन का आधार नहीं हो सकते। अदालतों को ऐसी शिकायतों से निपटने में सावधानी बरतनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने अपने एक पूर्व के फैसले का हवाला देते हुए कहा, ‘कोर्ट ने देखा है कि यह सर्वविदित है कि बड़ी संख्या में शिकायतों में घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। बड़ी संख्या में मामलों में फंसाने की प्रवृत्ति भी दिखाई देती है।’ बेंच ने कहा, ‘हमारा विचार है कि ऐसी परिस्थितियों में, अदालतों को आरोपियों को फंसाए जाने के मामलों की पहचान करने और ऐसे व्यक्तियों द्वारा अपमान और पीड़ा को टालने के लिए सावधान रहना होगा।’ आरोपी की 5 महीने पहले ही हुई थी शादी सर्वोच्च अदालत ने कहा कि आरोपी ने मुख्य आरोपी (पति) की बहन से अक्टूबर 2010 में शादी की और जिस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारण महिला की मृत्यु हुई, वह परिवार का रिश्तेदार बनने के साढ़े पांच महीने के भीतर ही हुई। बेंच ने कहा, ‘यह एक सच्चाई है कि सामान्य, अस्पष्ट आरोपों के बावजूद, अपीलकर्ता के खिलाफ कोई विशेष आरोप नहीं लगाया गया था। इसके अलावा, हमारी सूक्ष्म जांच के बावजूद, हम अभियोजन पक्ष द्वारा अपीलाकर्ता के खिलाफ किसी भी गवाह के माध्यम से कोई विशेष सबूत नहीं पा सके। …अभियोजन पक्ष के किसी भी गवाह ने विशेष रूप से अपीलकर्ता के खिलाफ यह कहते हुए गवाही नहीं दी थी कि उसने कोई क्रूरता की है जो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 498-A के तहत अपराध का मामला बन सके।’ ‘आरोपी एक दोषी का रिश्तेदार है तो इसका मतलब ये नहीं कि वह भी दोषी’ बेंच ने कहा, ‘ऐसा भी कोई मामला नहीं है कि इस प्राथमिकी से पहले अपीलकर्ता के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज कराई गई हो। संक्षेप में, हम पाते हैं कि अपीलकर्ता के खिलाफ यह मानने के लिए कोई सबूत नहीं है कि उसने IPC की धारा 498-A के तहत अपराध किया है। दूसरे आरोपी का पति होने के नाते, जिसे निचली अदालतों ने उक्त अपराध के लिए दोषी पाया था, अपीलकर्ता को उक्त अपराध के तहत दोषी ठहराने का आधार नहीं हो सकता है, क्योंकि रिकॉर्ड पर कोई विशेष सामग्री नहीं है।ट सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सिर्फ इसलिए किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि वह मामले में दोषी पाई गई महिला का रिश्तेदार है। अदालत ने कहा कि दहेज उत्पीड़न के मामलों में सबूतों के आधार पर ही फैसला लिया जाना चाहिए।

हिमाचल प्रदेश के शिमला के राम मंदिर में साई की मूर्ति होने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद भड़क गए

शिमला हिमाचल प्रदेश के शिमला के राम मंदिर में साई की मूर्ति होने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद भड़क गए और उन्होंने यहां पर होने वाले कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। इसके बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सीधे शिमला के जाखू मंदिर पहुंचे और यहां से संदेश जारी किया। बता दें कि शिमला के लोअर बाजार में प्रभु श्रीराम का मंदिर है। यहां पर एक तरफ साई की मूर्ति भी स्थापित की गई है। यहां पर गुरुवार को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पत्रकार वार्ता होनी थी, लेकिन जब उन्हें पता चला कि यहां पर साई की मूर्ति भी रखी गई है तो उन्होंने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। शंकराचार्य ने राम मंदिर में पूजा अर्चना भी करनी थी और उसके बाद वह मीडिया से बातचीत भी करने वाले थे। जानकारी के मुताबिक शंकराचार्य गुरुवार सुबह सबसे पहले शिमला के प्राचीन मंदिर जाखू पहुंचे। यहां उन्होंने गो ध्वज की स्थापना की और इसी दौरान उन्हें राम मंदिर में साई की प्रतिमा न हटाने की जानकारी मिली। जिसके बाद उनके स्टाफ ने जाखू मंदिर से ही एक संदेश दिया। जिसमें उन्होंने कहा कि मन्दिर में साई की मूर्ति होने की वजह से शंकराचार्य राम मंदिर नहीं गए, उन्होंने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया है। मूर्ति हटाने के आश्वासन के बाद गौ ध्वज हुआ स्थापित जाखू मंदिर से शंकराचार्य ने कहा श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी अध्यक्ष ‌राजीव सूद व अन्य पदाधिकारियों के आश्वासन पर कि वह अतिशीघ्र साई की मूर्ति को हटा देंगे। इसी बात पर शंकराचार्य ने एक प्रतिनिधिमंडल को भेज कर एक दूसरा गौ ध्वज भी श्री राम मंदिर में गोपाल मणी व देवेन्द्र पाण्डेय द्वारा स्थापित करवाया। जिस दिन गौ हत्या रुकेगी, उस दिन हमारा सारा कर्ज उतरना शुरू हो जाएगा ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने कहा कि जिस दिन गौ हत्या रूकेगी उस दिन हमारा सारा कर्ज उतरना शुरू हो जाएगा। इसी को लेकर पूरे देश में गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के लिए सरकार से मांग की जा रही है। जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि देश व प्रदेश की सरकारें गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करें। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज गौरक्षकों को ही वोट दें। हिन्दू समाज गौ हत्यारी पार्टियों को वोट देकर गौ हत्या का पाप न लें।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली सरकार फिर से सत्ता में आई तो यह राज्य में तबाही मचा देगी : शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार को झारखंड में झामुमो नीत गठबंधन सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह ‘‘भीषण चक्रवाती तूफान ‘दाना’ से भी ज्यादा घातक है।” उन्होंने आगाह किया कि अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली सरकार फिर से सत्ता में आई तो यह राज्य में तबाही मचा देगी। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधानसभा चुनाव प्रभारी ने झामुमो सरकार के पांच साल के शासन के दौरान ‘‘भ्रष्टाचार, विनाश और लूट” के लिए गठबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि हेमंत सोरेन सरकार ने पहले ही झारखंड को काफी नुकसान पहुंचाया है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने रांची में एक रैली में कहा, ‘‘हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ‘दाना’ से भी ज्यादा घातक है। हालांकि भीषण चक्रवाती तूफान दो दिन बाद गायब हो जाएगा, लेकिन हेमंत सोरेन सरकार अगर दोबारा सत्ता में आई तो तबाही मचाएगी।” उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार को उखाड़ फेंकने का समय आ गया है। झारखंड में दो चरणों में विधानसभा चुनाव 13 नवंबर और 20 नवंबर को होने वाले हैं और मतगणना 23 नवंबर को होगी।

अमेरिका में गुरुद्वारा प्रधान का साहसिक एक्शन ! नगर कीर्तन में आए खालिस्तान समर्थकों को दिया अल्टीमेटम, 5 मिनट में निकाला बाहर

कैलिफ़ोर्निया अमेरिका में खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ एक गुरुद्वारे के प्रधान द्वारा बड़ा ही साहसिक एक्शन सामने आया है जिसकी पूरी दुनिया में खूब सराहना हो रही है। जानकारी के अनुसार अमेरिका के  कैलिफोर्निया  में सैन जोस  स्थित गुरु रामदास जी गुरुद्वारे के प्रधान भूपिंदर सिंह  ढिल्लों ने एक नगर कीर्तन के दौरान खालिस्तान समर्थकों को बाहर निकलने का आदेश दिया। उन्होंने क खालिस्तानी समर्थकों को केवल 5 मिनट का अल्टीमेटम दिया और कहाकि उन्होंने कीर्तन का आनंद उठा लिया इसलिए अब वह समारोह से निकल जाएं। 5 मिनट  के अल्टीमेट  के बाद उन्होंने उन्हें नगर कीर्तन से बाहर निकाल दिया। यह घटना उस समय हुई जब  खालिस्तानी समर्थक  गुरु अर्जन देव जी के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित  धार्मिक समारोह में शामिल होने आए। इस नगर कीर्तन में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल थे, जो अपने धर्म और संस्कृति को उल्लास से मनाने आए थे। जैसे ही खालिस्तानी समर्थक समारोह में पहुंचे  भूपिंदर सिंह ढिल्लों ने उनकी गतिविधियों पर नजर  रखनी  शुरू कर दी। उन्होंने देखा कि खालिस्तानी समर्थक अपने राजनीतिक नारों और बैनरों के साथ इसमें शामिल हो रहे हैं। इस पर, भूपिंदर सिंह ढिल्लों ने एक सभा में उपस्थित सभी  श्रद्धालुओं  को संबोधित करते हुए कहा, “यह समारोह धार्मिक है, और हम यहां भाईचारा और एकता मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। किसी भी प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी के लिए यहाँ कोई जगह नहीं है।” इसके बाद उन्होंने खालिस्तान समर्थकों को 5 मिनट का समय दिया कि वे वहां से चले जाएं। इस अल्टीमेटम के बाद, कुछ खालिस्तानी समर्थक अपने नारों के साथ वहीं खड़े रहे, लेकिन जब समय समाप्त हुआ, तो भूपिंदर सिंह ढिल्लों ने सख्ती से उन्हें वहां से बाहर निकालने की कार्रवाई की। इस क्रम में कई सिख श्रद्धालुओं ने उनका समर्थन किया और यह सुनिश्चित किया कि समारोह शांति से संपन्न हो। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   से लोगों ने भूपिंदऀ सिंह ढिल्लों के इस कदम की सराहना की। कई लोगों ने इसे सिख समुदाय के सामूहिक एकता का प्रतीक माना। भूपिंदर सिंह ने बाद में मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमारा धर्म हमेशा मानवता और भाईचारे की बात करता है। हमें किसी भी तरह की विभाजनकारी विचारधारा को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए।” इस घटना के बाद, विभिन्न सिख संगठनों ने खालिस्तानी विचारधारा के खिलाफ एकजुटता व्यक्त की है, यह सुनिश्चित करने के लिए कि धर्म और संस्कृति की पवित्रता सुरक्षित रहे। 

नेशनल हाईवे पर अज्ञात वाहन की टक्कर से सड़क हादसा, 3 माह के नवजात बच्चे की मौत, मची चीख-पुकार

बंगा बंगा-फगवाड़ा नेशनल हाईवे पर गांव बिसला गेट के पास भयानक हादसा होने की सूचना मिली है। अज्ञात वाहन की टक्कर से सड़क हादसा हो गया। हादसे के दौरान 3 माह के नवजात बच्चे की मौत की खबर है। इसके साथ ही 2 महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं जबकि एक व्यक्ति को मामूली चोटें आईं। घटनास्थल से प्राप्त जानकारी के अनुसार बंगा निवासी विनोद कुमार जाखू पुत्र राम कृष्ण जाखू अपने परिवार के सदस्यों जिनमें उनकी पत्नी अन्नू, मां कमलजीत कौर और बेटा विहान जाखू और अनरिक जाखू अपनी गाड़ी नंबर ( पीबी 32 वी 0086) में सवार होकर होशियारपुर में एक शादी समारोह से अपने घर बंगा लौट रहा था। जैसे ही वे गांव बिसला गेट के पास पहुंचे तो आगे जा रहे एक अज्ञात वाहन को पार करने लगे। इसी दौरान उनकी गाड़ी उक्त वाहन से टकरा गई। हादसा इतना भयानक था कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। इस हादसे में चालक की पत्नी अन्नू व 3 माह का बच्चा अनरीक, मां कमलजीत कौर गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि विनोद कुमार मामूली रूप से घायल हो गया। मौके से गुजर रहे राहगीरों ने घायलों को नजदीकी गुरु नानक मिशन अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने बच्चे की हालत देखकर बंगा के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया। यहां डॉक्टर ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। अन्नू और माता कमलजीत का गुरुनानक मिशन अस्पताल में इलाज चल रहा है। हादसे की सूचना मिलते ही बंगा सदर पुलिस अधिकारी ASI रघवीर सिंह समेत पुलिस पार्टी मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त गाड़ी को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि घटनास्थल के आसपास की इमारतों पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच कर उक्त वाहन को भी जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।

शरद गुट ने 45 उम्मीदवारों का किया ऐलान, बारामती विधानसभा सीट से अजीत पवार के खिलाफ युगेंद्र पवार को मैदान में उतारा

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए एनसीपी (सपा) ने गुरुवार को 45 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की। राकांपा (एसपी) ने पुणे जिले की बारामती विधानसभा सीट से महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के खिलाफ युगेंद्र पवार को मैदान में उतारा। युगेन्द्र अजित पवार के छोटे भाई श्रीनिवास के पुत्र हैं। राकांपा (सपा) की सूची में शामिल अन्य लोगों में इसके राज्य प्रमुख जयंत पाटिल (इस्लामपुर), जितेंद्र अव्हाड (मुंब्रा-कलवा), अनिल देशमुख (काटोल), हर्षवर्द्धन पाटिल (इंदापुर) और दिवंगत आर आर पाटिल के बेटे रोहित पाटिल शामिल हैं जो (तासगांव-कवथेमहांकल) पदार्पण कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में एनसीपी अध्यक्ष अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को पुणे जिले के बारामती संसदीय क्षेत्र में 5,73,979 वोट मिले थे, जबकि वह अपनी भाभी और एनसीपी (सपा) नेता सुप्रिया सुले से हार गई थीं, जिन्हें 7,32,312 वोट मिले थे।

कश्मीर के गुलमर्ग में आतंकी हमला, सेना की गाड़ी को बनाया निशाना, 5 जवान घायल

कश्मीर जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में भारतीय सेना की गाड़ी पर आतंकी हमला हुआ है। हमले में 5 जवान घायल हो गए हैं। सुरक्षा बल मौके पर पहुंच गए हैं। इलाके को सील कर दिया गया है। सेना ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। जम्मू-कश्मीर में पिछले चार दिनों में यह तीसरा बड़ा अटैक है। इससे पहले 20 अक्टूबर को गांदरबल में आतंकी हमले में डॉक्टर समेत 7 लोगों की हत्या कर दी गई थी। गुरुवार सुबह भी गैर प्रवासी मजदूर को आतंकियों ने गोली मारी थी। गुलमर्ग में हुए आतंकी हमले पर सेना के अधिकारियों ने पीटीआई को जानकारी दी कि आतंकवादियों ने बारामूला जिले के बोटापथरी में वाहन पर गोलीबारी की थी। हमले में घायल जवानों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। गुलमर्ग में सेना के वाहन पर आतंकी हमले की घटना से कुछ घंटे पहले पुलवामा में एक संदिग्ध आतंकवादी हमले में एक गैर-स्थानीय मजदूर घायल हो गया था। अधिकारियों ने बताया कि आतंकी गोलीबारी में घायल मजदूर की पहचान उत्तर प्रदेश निवासी शुभम कुमार के रूप में हुई। आज सुबह बटागुंड गांव में आतंकवादियों ने उसे गोली मार दी थी। गोली उसके हाथ पर लगी थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

रोजगार सहायक पीएम आवास की दूसरी किस्त के लिए ले रहा था 5 हजार रुपये की रिस्वत, लोकायुक्त की टीम ने पकड़ा

मंदसौर उज्जैन से आई लोकायुक्त संगठन की टीम ने मंदसौर जिले की सुवासरा तहसील की ग्राम पंचायत अजयपुर के रोजगार सहायक को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा है। रोजगार सहायक ग्रामीण से प्रधानमंत्री आवास की दूसरी किस्त जारी करने के नाम पर 10 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था। गुरुवार को उसे पांच हजार रुपये लेते पकड़ लिया। लोकायुक्त संगठन डीएसपी बसंत कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि ग्राम अजयपुर के राजूलाल अहीरवाल ने 22 अक्टूबर को पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन अनिल कुमार विश्वकर्मा को शिकायत की थी। राजू लाल ने बताया कि ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक राधेश्याम प्रजापत ने प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त जारी करने के लिए 10,000 रुपये की मांग की है।   राजू लाल को 5 हजार देकर भेजा राजू लाल की शिकायत का सत्यापन कराया गया। योजना बनाकर गुरुवार को राजूलाल को 5 हजार रुपये देकर रोजगार सहायक को रुपये देने भेजा। आसपास ही मौजूद डीएसपी बसंत श्रीवास्तव व उनकी टीम निगरानी करती रही। रंगे हाथ ग्राम रोजगार सहायक को पकड़ा गुरुवार को ग्राम पंचायत अजयपुर में राजूलाल अहीरवाल ने ग्राम रोजगार सहायक राधेश्याम प्रजापत को जैसे ही 5000 रुपये की रिश्वत दी, तो टीम ने पकड़ लिया। हाथ धुलाए गए तो वह लाल हो गए। उसके बाद आवश्यक कार्रवाई की गई। टीम में ये रहे मौजूद टीम में आरक्षक विशाल, अनिल, नीरज, लोकेश और रमेश डाबर सहायक ग्रेड 2 भी शामिल थे।

जिनपिंग के साथ वार्ता के बाद PM मोदी बोले- वैश्विक शांति के लिए भारत-चीन संबंधों में स्थिरता महत्वपूर्ण

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और भारत-चीन संबंधों को क्षेत्रीय व वैश्विक शांति तथा स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण करार देते हुए कहा कि आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों का मार्गदर्शन करेंगे। मई 2020 में पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद उत्पन्न होने के बाद दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर पर यह पहली संरचित बैठक थी। बैठक की तस्वीरें ‘एक्स’ पर साझा करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘कजान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। भारत-चीन संबंध हमारे देशों के लोगों के लिए और क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता द्विपक्षीय संबंधों का मार्गदर्शन करेंगे।” यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब एक दिन पहले ही भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपनी सेनाओं द्वारा गश्त करने के समझौते पर सहमति जताई थी। चार साल से चल रहे गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में इसे एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। नवंबर 2022 में, मोदी और शी ने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति द्वारा जी-20 नेताओं के लिए आयोजित रात्रिभोज में एक-दूसरे का अभिवादन किया और संक्षिप्त बातचीत की थी। पिछले वर्ष अगस्त में भी भारतीय प्रधानमंत्री और चीनी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स (ब्राजील-रूस-भारत-चीन-दक्षिण अफ्रीका) शिखर सम्मेलन के दौरान जोहानिसबर्ग में एक संक्षिप्त और अनौपचारिक बातचीत की थी।

अपने सांसदों के इस्तीफे के दबाव बीच ट्रूडो का बड़ा फैसला, कनाडा में भारतीय कामगारों की बढ़ेगी मुसीबत

कनाडा अपनी पार्टी के इस्तीफे के दबाव के बीच ही कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एक बड़ा फैसला लिया है। ट्रूडो ने हाल ही में विदेशी कामगारों की संख्या में कमी लाने की घोषणा की है, जिससे वहां रह रहे अप्रवासी भारतीयों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भारतीयों के लिए यह निर्णय विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि कनाडा में काम पाने के लिए पहले से ही उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था।  बता दें कि कनाडा में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है।  ट्रूडो की अपनी ही लिबरल पार्टी के  सांसदों ने उनके खिलाफ खुलकर बगावत कर दी है और  इस्तीफा देने की मांग की है । यह विवाद खासकर भारत के साथ बढ़ते तनाव के बाद और भी बढ़ गया है। सांसदों ने ट्रूडो को 28 अक्टूबर तक अपना फैसला लेने का समय दिया है, वरना पार्टी के भीतर और अधिक कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।   ट्रूडो ने अपने एक एक्स पोस्ट में बताया कि कनाडा में विदेशी कर्मचारियों की संख्या में कमी लाने के लिए सरकार कंपनियों पर सख्त नियम लागू करने जा रही है। नए नियमों के अनुसार, कंपनियों को पहले यह साबित करना होगा कि उन्होंने कनाडाई नागरिकों को नौकरी देने की कोशिश की थी, इससे पहले कि वे विदेशी कामगारों को नियुक्त कर सकें।इस निर्णय को लेकर कई लोग चिंतित हैं, क्योंकि भारतीय अप्रवासी पहले से ही सीमित प्लेसमेंट और रोजगार के अवसरों का सामना कर रहे हैं। ट्रूडो के इस ऐलान के बाद उनकी स्थिति और भी खराब हो सकती है। इसके अलावा, ट्रूडो की लिबरल सरकार ने 2025 में नए स्थायी निवासियों की संख्या को घटाकर 3,95,000 करने का निर्णय लिया है, जो कि पिछले वर्षों की तुलना में एक महत्वपूर्ण कमी है। इसके साथ ही, अस्थायी प्रवासियों की संख्या भी लगभग 300,000 तक घटाई जाएगी।कनाडा में हाल के वर्षों में आवास की कीमतों में भारी वृद्धि के बाद, अप्रवासियों के लिए आलोचना और बहस की स्थिति उत्पन्न हुई थी। ये सभी बदलाव संकेत देते हैं कि कनाडा में आव्रजन नीति में बदलाव आ रहा है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव भारतीय कामगारों और छात्रों पर पड़ेगा। अप्रवासियों की संख्या में कमी से अपेक्षाकृत अधिक जनसंख्या के मुद्दे पर भी विचार किया जा रहा है, जो कि पिछले कुछ वर्षों में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है।  

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