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पुणे में दोस्त के साथ घूमने गई 21 साल की युवती से हैवानियत

पुणे महाराष्ट्र के पुणे में 21 साल की युवती से गैंगरेप करने के मामला सामने आया है। तीन आरोपियों ने इस वारदात को अंजाम दिया है। गैंगरेप की यह वारदात गुरुवार देर रात की है जब महिला अपने एक पुरुष मित्र के साथ बाहर घूमने गई थी। पुलिस के अनुसार, पीड़िता और उसका दोस्त कोंढवा इलाके में थे। तभी तीनों बदमाशों ने उन पर हमला कर दिया। उन्होंने युवती के दोस्त की पिटाई की। रात करीब 11 बजे आरोपियों ने युवती के साथ सामूहिक बलात्कार किया। पुलिस ने बताया कि उसने बाद युवती का दोस्त उसे अस्पताल ले गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे उन्हें मामले की सूचना मिली और वे आरोपियों की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए क्राइम ब्रांच की 10 टीमें बनाई गई हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि पीड़िता राज्य के जालगांव की रहने वाली है, जबकि उसका दोस्त गुजरात के सूरत का रहने वाला है।

कुकी-मैतेई के बीच सुलह का यह पहला कदम, 17 महीनों की जातीय संघर्ष के बीच हुआ

इंफाल  मणिपुर में पांच दिनों से बंधक बनाए गए दो मैतेई युवकों को रिहा कर दिया गया है। कुकी आदिवासी ग्रामीण स्वयंसेवकों ने उन्हें बंधक बनाया था। यह रिहाई 11 कुकी कैदियों के बदले में हुई है। इन्हें कुछ महीने पहले जमानत मिल गई थी। कैदियों पर हत्या से लेकर ड्रग तस्करी तक के आरोप थे। सुरक्षा कारणों से उन्हें जेल से बाहर नहीं निकाला जा सका था। यह घटना मणिपुर के कांगपोकपी जिले में हुई। कुकी गुट की कमिटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (CoTU) ने ओइनम थोइथोई सिंह और थोकचोम थोइथोइबा सिंह को रिहा किया। रिहाई सुबह 5 बजे के आसपास गमगीफाई में हुई। असम राइफल्स और CRPF की टीमों की मौजूदगी में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को दोनों युवकों को सौंपा गया। कुकी और मैतेई में सुलह का यह पहला कदम इन दोनों के साथ 27 सितंबर को एक और युवक लापता हो गया था, जो उसी दिन घर लौट आया। CoTU ने कुकी और मैतेई प्रतिनिधियों की तस्वीरें जारी कीं। इनमें वे गले मिल रहे थे और हाथ मिला रहे थे। यह तस्वीरें रिहाई के दौरान की हैं। 17 महीनों से चल रहे जातीय संघर्ष के बीच दोनों पक्षों की ओर से सुलह का यह पहला कदम है। इसी दौरान सुरक्षा बलों ने इंफाल की सजीवा जेल से 11 कुकी कैदियों को उनके गृह जिले कांगपोकपी के एक चर्च तक सुरक्षित पहुंचाया। अधिकारियों ने कहा कि दोनों मेइती युवकों और जमानत पर रिहा कैदियों की रिहाई अलग-अलग मामले हैं, लेकिन CoTU ने इसे अदला-बदली करार दिया। सौहार्दपूर्ण समाधान केंद्र की पहल से संभव संगठन के प्रवक्ता एनजी लून किपजेन ने एक वीडियो बयान में कहा कि सौहार्दपूर्ण समाधान केंद्र की पहल से संभव हुआ। उन्होंने कहा कि दोनों की रिहाई में देरी हमारे ग्रामीण स्वयंसेवकों की ओर से निर्धारित कुछ शर्तों के कारण हुई। उन्होंने कहा कि पहली मांग थी कि इंफाल से सभी (कुकी) जेल कैदियों को चुराचांदपुर जैसे कुकी-ज़ो क्षेत्र में ट्रांसफर किया जाए। दूसरा फाइलेंगमोंग इलाके में एक पुलिस स्टेशन बनाना था। उन्होंने कहा कि अगर CM (एन बीरन सिंह) ने उन दो बंदियों की परवाह की होती, तो वह कार्रवाई करते। हमने केंद्र से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया और अंततः केंद्र सरकार के कहने पर DGP ने सौहार्दपूर्ण समाधान तक पहुँचना संभव बनाया। मैतेई ने जताई चिंताघाटी में सक्रिय कई प्रभावशाली नागरिक समाज समूहों में से एक मैतेई हेरिटेज सोसाइटी ने भी एक बयान जारी कर बंधकों की रिहाई में शामिल केंद्रीय और राज्य बलों, मणिपुर सरकार और अन्य लोगों का आभार व्यक्त किया। लेकिन इसमें कहा गया है कि बंधकों को रिहा करने के लिए एक्सचेंज डील के हिस्से के रूप में कुकी बदमाशों और आतंकवादियों की रिहाई से हम बहुत चिंतित हैं क्योंकि यह एक खतरनाक मिसाल कायम करता है।

हैती में विस्थापन 70 मिलियन से अधिक-संयुक्त राष्ट्र

हैती में 7,00,000 से अधिक लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए: संयुक्त राष्ट्र हैती में अब 7,00,000 लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए, जून के बाद से 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई : संयुक्त राष्ट्र हैती में विस्थापन 70 मिलियन से अधिक-संयुक्त राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र  हैती में अब 7,00,000 से ज्यादा लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं, जो जून के बाद से 22 प्रतिशत की वृद्धि है। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन के नए आंकड़ों का उल्लेख करते हुए दी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने दैनिक ब्रीफिंग में कहा कि विस्थापित हुए लोगों में आधे से अधिक बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि मानवीय मामलों के समन्वय का कार्यालय हाल के महीनों में बढ़ते विस्थापन से बहुत चिंतित है, क्योंकि सामूहिक हिंसा बढ़ने से देश में मानवीय संकट गहरा गया है। डुजारिक ने कहा कि विस्थापितों में से लगभग तीन-चौथाई अन्य प्रांतों में आश्रय चाहते हैं, अकेले ग्रांड सूड क्षेत्र में कुल विस्थापित आबादी का लगभग आधा हिस्सा रहता है। राजधानी पोर्ट-औ-प्रिंस में, जहां सुरक्षा स्थिति अत्यधिक अस्थिर बनी हुई है, विस्थापित लोगों में से एक चौथाई भीड़भाड़ वाली जगहों पर रहते हैं, जहां बुनियादी सेवाओं तक पहुंच बहुत सीमित है।  हैती में स्कूल वर्ष शुरू हुआ और संयुक्त राष्ट्र के मानवतावादी साझेदार राष्ट्रीय स्कूल वापसी अभियान का समर्थन करने के लिए अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। व्याप्त असुरक्षा के कारण पिछले वर्ष लगभग 14 लाख छात्रों और शिक्षकों को शिक्षा में गंभीर व्यवधान का सामना करना पड़ा है। डुजारिक ने कहा कि स्थानीय संगठनों के साथ साझेदारी में, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष विभिन्न प्रकार के समर्थन की पेशकश कर रहा है, जिसमें नकद हस्तांतरण प्रदान करना शामिल है जिससे परिवार स्कूल से संबंधित लागतों को कवर कर सकें, विस्थापित बच्चों को मेजबान स्कूलों में एकीकृत करने में मदद करना, स्कूल किट वितरित करना और स्कूलों को सुनिश्चित करना शामिल है, उनका पुनर्वास किया गया है और उनके पास पर्याप्त आपूर्ति है। उन्होंने कहा कि हालांकि, इन प्रतिक्रिया प्रयासों में बहुत कमी आई है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष हैती में बच्चों को शिक्षा सहायता प्रदान करने के लिए आवश्यक तीन करोड़ अमेरिकी डॉलर का केवल 30 प्रतिशत प्राप्त हुआ है। डुजारिक ने कहा कि कुल मिलाकर, इस वर्ष हैती के लिए मानवीय प्रतिक्रिया योजना केवल 39 प्रतिशत वित्तपोषित है, जिसमें देश के लोगों को जीवन रक्षक सहायता प्रदान करने के लिए आवश्यक 67.4 करोड़ डॉलर में से 26.4 करोड़ डॉलर शामिल है।  

कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का तीसरा संस्करण चार अक्टूबर से छह अक्टूबर तक, PM संबोधित करेंगे

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को यहां कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान में यह जानकारी दी। पीएमओ ने बताया कि सम्मेलन का तीसरा संस्करण चार अक्टूबर से छह अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। यह सम्मेलन हरित बदलाव, भू-आर्थिक विखंडन और विकास के निहितार्थ, और प्रतिरोध क्षमता बनाए रखने के लिए नीतिगत कार्रवाई के सिद्धांतों जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित करेगा। पीएमओ ने कहा कि भारत के साथ ही दुनिया भर के विद्वान भारतीय अर्थव्यवस्था और ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्थाओं के सामने आने वाले कुछ सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। ‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है। कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का आयोजन वित्त मंत्रालय के साथ साझेदारी में आर्थिक विकास संस्थान द्वारा किया जा रहा है।    

लेबनान में तैनात भारतीय शांति सैनिकों की यूएन चीफ ने की तारीफ, बोले- मैं शुक्रगुजार हूं

संयुक्त राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने लेबनान में शांति स्थापना अभियान में सेना भेजने वाले भारत और अन्य देशों की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) के शांति सैनिक अपनी जगह पर बने हुए हैं। हालांकि इजरायल ने इन्हें कहीं और ट्रांसफर करने की मांग की है लेकिन संयुक्त राष्ट्र का ध्वज वहां लहरा रहा है।” यूएन चीफ ने मध्य पूर्व की स्थिति पर सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक में यह बात कही। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा, “मैं, संयुक्त राष्ट्र शांति सेना – यूएनआईएफआईएल – के मिलिट्री और सिविलियन मेंबर्स तथा सैन्य योगदान देने वाले देशों के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता दोहराता हूं।” लगभग 900 भारतीय सैनिक यूएनआईएफआईएल के साथ हैं, जो इजरायल और लेबनान को अलग करने वाली ‘ब्लू लाइन’ पर तैनात है। वे (शांति सैनिक), लेबनान में घुस आई इजरायली सेना और लेबनानी आतंकी ग्रुप हिजबुल्लाह के बीच, तैनात हैं। गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने अपनी दैनिक ब्रीफिंग में कहा कि जमीन पर मौजूद यूएनआईएफआईएल अधिकारियों ने बताया कि गोलीबारी जारी है और पहले से ज्यादा हो रही है। उन्होंने कहा, “वे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही साथ अपनी जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।” दुजारिक ने बताया कि इजरायली सेना ने यूएनआईएफआईएल को ब्लू लाइन के पास कई जगहों से हटने के लिए कहा था लेकिन इसने ऑपरेशनल और राजनीतिक दोनों ही नजरिए से, रुकने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा, “हम वहीं जमे रहेंगे, साथ ही साथ हम अपने रुख और शांति सैनिकों की सुरक्षा का हर घंटे के आधार पर आकलन करेंगे।” इस हफ्ते इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर जमीनी हमला शुरू कर दिया। यहूदी राष्ट्र ने बुधवार लेबनान में अपने आठ सैनिकों की मौत की पुष्टि की। इस बीच लेबनानी अधिकारियों का कहना है कि बेरूत पर बुधवार रात को हुए भारी इजरायली हवाई हमलों में कम से कम छह लोग मारे गए। इससे पहले इजरायल और हमास के समर्थक ईरान ने मंगलवार रात इजरायल पर बड़ा मिसाइल हमला किया। इजरायल के चैनल 13 टीवी समाचार ने बताया कि ईरान की तरफ से कम से कम 200 जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें दागी गईं, जिससे पूरे देश में सायरन बजने लगे और लाखों लोग शेलटर्स की ओर भागे। ‘सैनिक अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं’ गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा है कि जमीन पर मौजूद यूएनआईएफआईएल अधिकारियों ने बताया कि गोलीबारी जारी है और पहले से ज्यादा हो रही है। इस सबके बीच वे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। दुजारिक ने बताया कि इजरायली सेना ने यूएनआईएफआईएल को ब्लू लाइन के पास कई जगहों से हटने के लिए कहा था लेकिन ऑपरेशनल और राजनीतिक नजरिए से इसे नहीं माना गयाा। उन्होंने कहा, ‘हम वहीं जमे रहेंगे और अपने रुख और शांति सैनिकों की सुरक्षा का हर घंटे के आधार पर आकलन करेंगे।’ लेबनान में इजरायल का जमीनी हमला इजरायल ने इस हफ्ते दक्षिणी लेबनान पर जमीनी हमला शुरू किया है। इजरायल ने बुधवार लेबनान में अपने आठ सैनिकों की मौत की भी पुष्टि की। लेबनानी अधिकारियों का कहना है कि बेरूत पर बुधवार रात को हुए भारी इजरायली हवाई हमलों में कम से कम छह लोग मारे गए। इससे पहले इजरायल और हमास के समर्थक ईरान ने मंगलवार रात इजरायल पर बड़ा मिसाइल हमला किया। इजरायल के चैनल 13 टीवी समाचार ने बताया कि ईरान की तरफ से कम से कम 200 जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें दागी गईं। इससे पूरे देश में सायरन बजने लगे और लाखों लोग शेलटर्स की ओर भागे।    

इराक के लोग नसरल्लाह की याद में अपने बच्चों का नाम भी नसरल्लाह ही रख रहे हैं

 दमिश्क हाल ही में लेबनान में एक इजरायली हवाई हमले में हिजबुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह की मौत के बाद, इराक में नवजात बच्चों के नाम “नसरल्लाह” रखने का एक नया चलन देखने को मिला है। इराक के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश भर में लगभग 100 बच्चों का नाम नसरल्लाह रखा गया है। नसरल्लाह पिछले तीन दशकों से आतंकी संगठन हिजबुल्लाह का नेतृत्व कर रहा था। उसे कई लोगों द्वारा इजरायली और पश्चिमी प्रभाव के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता था। उनकी लोकप्रियता इराक में विशेष रूप से देश के अधिकांश शिया समुदाय के बीच मजबूत थी। अब इराक के लोग नसरल्लाह की याद में अपने बच्चों का नाम भी नसरल्लाह ही रख रहे हैं। लोगों का कहना है कि वे ऐसा “प्रतिरोध के शहीद के सम्मान में” कर रहे हैं। नसरल्लाह की हत्या ने इराक में गुस्से की लहर पैदा कर दी, जिसके परिणामस्वरूप बगदाद और अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने इजरायल की कार्रवाई की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया। इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने नसरल्लाह को “धर्म के मार्ग पर एक शहीद” बताया। हिजबुल्लाह नेता की याद में तीन दिन का राजकीय शोक मनाया गया, जिसमें देश भर में श्रद्धांजलियां आयोजित की गईं। नसरल्लाह का इराक से गहरा संबंध है, जो धार्मिक और राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़ा है। उसका जन्म 1960 में साधारण परिवार में हुआ था, और उसने इराक के नजफ शहर में एक शिया सेमिनरी में इस्लाम की पढ़ाई की थी। यहीं पर उसके राजनीतिक विचारों ने आकार लिया। 1982 में इजरायल के लेबनान में आक्रमण के बाद, हिजबुल्लाह का जन्म हुआ और नसरल्लाह इसमें शामिल हुआ। इस समूह की स्थापना ईरान की क्रांतिकारी गार्ड्स के समर्थन से की गई थी, जो प्रारंभ में इजरायली बलों के खिलाफ एक मिलिशिया के रूप में कार्यरत था। 1992 में अपने पूर्ववर्ती और गुरु अब्बास मुसावी की हत्या के बाद नसरल्लाह ने हिजबुल्लाह का नेतृत्व संभाला। अगले तीन दशकों में, उसने इस समूह को एक क्षेत्रीय शक्ति में बदल दिया, जो सीरिया से यमन तक के संघर्षों पर प्रभाव डाल रहा था और गाजा में फलस्तीनियों को प्रशिक्षण दे रहा था। नसरल्लाह के नेतृत्व में, हिजबुल्लाह की शक्ति ने सैन्य और राजनीतिक दोनों स्तरों पर वृद्धि की। इस संगठन ने हमास जैसे समूहों और इराक और यमन में मिलिशियाओं को मिसाइलें और रॉकेट प्रदान किए, जो इजरायल और उसके सहयोगियों के खिलाफ एक व्यापक “प्रतिरोध का धारा” का हिस्सा थे।

लेबनानी विदेश मंत्री का दावा… मरने से पहले युद्धविराम पर सहमत था नसरल्लाह

तेहरान इजरायली हवाई हमले में मारा गया हिजबुल्लाह प्रमुख नसरल्लाह अपनी मौत से पहले इजरायल के साथ युद्धविराम चाहता था। लेबनान के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बौ हबीब ने कहा है कि नसरल्लाह हवाई हमले में मारे जाने के कुछ दिन पहले ही युद्धविराम के लिए मान गए थे। उन्होंने कहा कि अपने युद्धविराम के इस फैसले के बारे में उन्होंने अमेरिकी और फ्रांसीसी प्रतिनिधियों को भी बता दिया था। सीएनएन को दिए अपने इंटरव्यू में हबीब ने कहा कि हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह 21 दिनों के सीजफायर के लिए मान गए थे। लेबनानी संसद के स्पीकर नबीह बेरी ने नसरल्लाह से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने जंग रोकने के लिए अपनी सहमति जताई थी। इसके बाद बेरी ने अमेरिकी और फ्रांसीसी प्रतिनिधियों को यह जानकारी दी थी कि हिजबुल्लाह युद्धविराम के लिए तैयार है। लेबनानी विदेशमंत्री ने यह दावा किया कि हमें यह सूचना मिली थी कि इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू भी सीजफायर के लिए तैयार हैं, लेकिन बाद में उन्होंने अपना मन बदल लिया और हमारी जमीन पर हमला करना जारी रखा। दरअसल, 27 सितंबर को हुए इस हमले के पहले न्यूयॉर्क में बाइडन और मैक्रों की मुलाकात हुई थी, जिसके बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों ने मिलकर 25 सितंबर को 21 दिनों के सीजफायर को लेकर अपना प्लान रखा था। लेकिन नेतन्याहू ने इस प्लान को खारिज कर दिया और पूरी ताकत के साथ लड़ाई जारी रखने का आदेश दिया, विशेषज्ञों के मुताबिक पेजर और अन्य संचार संसाधनों में हुए विस्फोट के बाद हिजबुल्लाह बैकफुट पर था, नेतन्याहू नहीं चाहते थे कि उसे संभलने का कोई भी मौका दिया जाए। हमले के वक्त अपने दहियाह के खुफिया बंकर में था नसरल्लाह हबीब ने बताया कि हमले के वक्त नसरल्लाह दहियाह के दक्षिणी इलाके में एक बंकर में था उसी वक्त वह इजरायली हवाई हमले का शिकार हो गए। इससे पहले जब हिजबुल्लाह ने नसरल्लाह की मौत की पुष्टि की थी तो उनकी तरफ से यह नहीं बताया गया था कि नसरल्लाह की मौत का कारण क्या है। रॉयटर्स के मुताबिक उसके शरीर पर कोई घाव नहीं था, उसके शरीर को देखकर ऐसा लगता है कि विस्फोट की तीव्रता से अंदरूनी चोट की वजह से उसकी मौत हुई। ईरान के सर्वोच्च नेता ने दी थी लेबनान छोड़ने की सलाह रॉयटर्स ने बुधवार को एक रिपोर्ट में बताया था कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने इजरायली हमले में मारे जाने के कुछ दिन पहले ही नसरल्लाह को लेबनान से भाग जाने की चेतावनी दी थी। पेजर हमलों में हिजबुल्लाह के सदस्यों की मौत के बाद खामेनेई ने एक दूत के साथ नसरल्लाह को ईरान आने के लिए कहा था,जिसमें खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया था कि इज़राइल के पास हिजबुल्लाह के भीतर गुर्गे थे और वह उसे मारने की योजना बना रहा था। ईरान के एक अधिकारी ने कहा कि खामेनेई ने दूत के रूप में एक वरिष्ठ ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर, ब्रिगेडियर जनरल अब्बास निलफोरुशान थे, जो बंकर में नसरल्लाह के साथ मारे गए थे।

महिला टी20 विश्व कप: पाकिस्तान ने कम स्कोर वाले मैच में श्रीलंका को 31 रनों से हराया

Women’s T20 World Cup: Pakistan beats Sri Lanka by 31 runs in a low-scoring match भोपाल ! पाकिस्तान ने आईसीसी महिला टी20 विश्व कप में अपने अभियान की शानदार शुरुआत की, क्योंकि उन्होंने गुरुवार को शारजाह में कम स्कोर वाले मैच में एशिया कप विजेता श्रीलंका को 31 रनों से हराया। पाकिस्तान ने आईसीसी महिला टी20 विश्व कप में अपने अभियान की शुरुआत जीत के साथ की, क्योंकि उन्होंने गुरुवार को शारजाह में अपने एशियाई प्रतिद्वंद्वी श्रीलंका को 31 रनों से हराया। कम स्कोर वाले मैच में पहले बल्लेबाजी करने वाली पाकिस्तान की टीम 20 ओवर में 116 रनों पर आउट हो गई। एशिया कप विजेता श्रीलंका के लिए 117 रनों का लक्ष्य आसान लग रहा था, लेकिन पाकिस्तान के गेंदबाजों ने अच्छा प्रदर्शन किया और श्रीलंका को 20 ओवर में 85/9 पर रोक दिया। पाकिस्तान की कप्तान फातिमा सना को 20 गेंदों में 30 रनों की पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, जबकि श्रीलंका की कप्तान चमारी अथापथु ने 3/19 का शानदार स्पेल किया। अथापथु की टीम की साथी सुगंदिका कुमारी और उदेशिका प्रबोधनी। हालांकि, तीनों की गेंदबाजी की कोशिशें बेकार गईं। छोटे स्कोर का बचाव करते हुए, बाएं हाथ की स्पिनर सादिया इकबाल ने चार ओवर में 3/17 के शानदार आंकड़े के साथ पाकिस्तान की अगुआई की, जबकि ओमैमा सोहेल (2/17), नशरा संधू (2/15) और कप्तान सना (2/10) ने दो-दो विकेट लिए। टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी पाकिस्तान की शुरुआत बेहद खराब रही और छठे ओवर में उसने 32 रन पर तीन विकेट गंवा दिए। श्रीलंका मैच में शीर्ष पर था, लेकिन 10वें ओवर में ओमैमा सोहेल (19 गेंदों पर 18 रन) के रूप में अपना चौथा विकेट गिरने के साथ ही पाकिस्तान की स्थिति और खराब हो गई। अपनी पारी के आधे चरण में, पाकिस्तान चार विकेट के नुकसान पर 57 रन के सामान्य स्कोर के साथ मुश्किल में था। बाएं हाथ की स्पिनर सुगंधिका कुमारी ने पाकिस्तान की पारी के शुरुआती दौर में सबसे ज़्यादा विध्वंसक भूमिका निभाई, इस अनुभवी खिलाड़ी ने सलामी बल्लेबाज मुनीबा अली (14 गेंदों पर 11 रन) और गुल फ़िरोज़ा (4 गेंदों पर 2 रन) के विकेट लिए। हालांकि, अंत में पाकिस्तान ने जीत दर्ज की। संक्षिप्त स्कोर: पाकिस्तान: — 20 ओवर में (फ़ातिमा सना 30; चमारी अथापथु 3/18, सुगंधिका कुमारी 3/19, उदेशिका प्रबोधनी 3/20) श्रीलंका: 20 ओवर में 85/9 (नीलक्षी डी सिल्वा 22; सादिया इक़बाल 3/17)।

राधानगर पुलिस ने दुष्कर्म का प्रयास मामले में ग्राम प्रधान के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया

फतेहपुर राधानगर थाने के एक गांव में घर बुलाकर प्रधान ने महिला का मुंह दबाकर दुष्कर्म का प्रयास किया। पीड़िता बोली कि विरोध करने पर प्रधान बोला कि मुझे खुश कर दो, मैं तुम्हारी जिंदगी बना दूंगा। नाजुक अंगों से छेड़खानी कर कपड़े तक फाड़ डाले। पीड़िता किसी तरह लौटकर घर आई तो उसके पति को जान से मारने की धमकी दी। ऐसा आरोप लगाकर पीड़िता ने पुलिस को तहरीर दी। जिस पर राधानगर पुलिस ने ग्राम प्रधान गुलाम मोहम्मद के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। यह है पूरा मामला राधानगर थाने के एक गांव में रहने वाली महिला ने बताया कि उसे समूह का फार्म भर रखा था। बीते 28 सितंबर को सुबह दस बजे तेलियानी ब्लाक से फोन कॉल आई कि पेपर देने ब्लाक आ जाना। कुछ देर में ही प्रधान गुलाम मोहम्मद ने उसके भतीजे के पास मैसेज किया कि अपनी चाची को भेज दो कुछ काम है। भतीजे ने सोचा कि पेपर के संबंध में बुलाया है। वह प्रधान के घर गई तो बाहर दाल समेटने को कहा। फिर उसे पीछे से पकड़कर कमरे में ले गया और मुंह दबाकर दुष्कर्म का प्रयास किया। उधर, ग्राम प्रधान गुलाम मोहम्मद का कहना था कि आरोप मनगढ़ंत व निराधार है। एसओ रमेश पटेल ने बताया कि ग्राम प्रधान पर मुकदमा दर्ज कर ग्राम प्रधान को बुलाया गया है। जांच बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

हमास से इस जंग में इजरायली सेना को बड़ी कामयाबी मिली, हवाई हमले में हमास प्रमुख रावी मुश्तहा समेत तीन ढेर

यरुशलम इजरायल का गाजा पर हमला लगातार जारी है। हमास से इस जंग में इजरायली सेना को बड़ी कामयाबी मिल है। गुरुवार को इजरायली सेना ने बताया कि उसके द्वारा तीन महीने पहले किए गए में हमले में हमास के तीन बड़े नेताओं की मौत हो गई। इजरायली सेना द्वारा तीन महीने पहले किए गए हवाई हमलों के दौरान गाजा में हमास प्रमुख रावी मुश्ताहा और दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों की मौत हो गई। हमास के तीन नेता ढेर इजरायली सेना ने अपने बयान में कहा है कि हमले में उत्तरी गाजा स्थित एक भूमिगत परिसर को निशाना बनाया गया था, जिसमें रावी मुश्ताहा के साथ-साथ कमांडर समेह अल-सिराज और समी औदेह की भी मौत हो गई। रावी हमास का सबसे बड़ा गुर्गा सेना ने अपने बयान में कहा कि मुश्तहा हमास का सबसे बड़ा गुर्गा था और हमास की सेना की तैनाती से संबंधित निर्णयों पर उसका सीधा प्रभाव था। वह हमास के शीर्ष नेता याह्या सिनवार का ‘दाहिना हाथ’ था। 2015 में अमेरिकी विदेश विभाग ने मुश्तहा को ‘वैश्विक आतंकवादी’ घोषित किया था। आंतरिक सुरक्षा एजेंसी का प्रमुख यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस ने मुश्तहा को हमास के गाजा पोलित ब्यूरो का सदस्य बताया जो इसके वित्तीय मामलों की भी देखरेख करता था। ईसीएफआर ने कहा कि सिराज पोलित ब्यूरो का सदस्य था, जबकि ओदेह को आंतरिक सुरक्षा एजेंसी का प्रमुख था। इजरायल का हमास पर कहर बता दें कि हमास ने 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमला किया था, जिसमें 1205 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद इजरायल का गाजा पर हमला लगातार जारी है और अब तक 41788 फिलिस्तीनी मारे गए हैं और 96794 घायल हुए हैं।

धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिका ने उठाई उंगली, भारत ने कहा- अपने गिरेबान में झांकें

नई दिल्ली अमेरिका ने एक बार फिर भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर सवाल उठाया है। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर चिंता जताते हुए परोक्ष तौर पर भारत के खिलाफ उठाये जाने वाले कदमों के बारे में भी बताया गया है। भारत पर दबाव बनाने की रणनीति यह रिपोर्ट विदेश मंत्री एस जयशंकर की वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के बीच हुई द्विपक्षीय आधिकारिक बैठक के कुछ ही घंटे के बाद जारी की गई है। जानकार इस मध्यावधि रिपोर्ट, इसकी भाषा और समय (जब भारतीय विदेश मंत्री अमेरिका में है) को लेकर हाल के महीनों में भारत पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी वहीं भारत ने सख्ती से जबाव देते हुए कहा कि पक्षपाती और राजनीतिक एजेंडा चलाने की बजाय इस संगठन को अमेरिका में मानवाधिकार के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। एक तरफ अमेरिका भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है लेकिन साथ ही रूस पर तेल खरीदने, खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नु की हत्या की कथित साजिश व धार्मिक आजादी जैसे मुद्दे पर दबाव भी बनाने की कोशिश करता रहा है। यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट में नफरती भाषणों, गलत सूचनाओं के प्रसार और सरकारी अधिकारियों की तरफ से धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ उकसाने के मामलों का भी जिक्र है। इसने वर्ष 2024 की यूएससीआईआरएफ की सालाना रिपोर्ट में अमेरिकी विदेश मंत्रालय को भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की खराब स्थिति के संदर्भ में दी गई सिफारिशों का भी जिक्र किया गया है। भारत ने दिया करारा जवाब इसके तहत धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ काम करने वाले भारतीय अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने, अमेरिका सरकार की भारत के साथ होने वाले रक्षा सौदे की नीति में धार्मिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने वाले शर्तों को शामिल करने की बात कही गई है। वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि यूएससीआईआरएफ घटनाओं को तोड़ मरोड़ कर पेश करता है। उसे इस तरह का एजेंडा चलाने की बजाय अमेरिका के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

हरियाणा में लोगों से मजबूत सरकार चुनने की अपील की, प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा की जनता के नाम खास संदेश दिया

नई दिल्ली हरियाणा में चुनावी शोर गुरुवार शाम को समाप्त हो गया है। अब शनिवार, पांच अक्टूबर को मतदान होंगे एवं आठ अक्टूबर को मतों की गणना की जाएगी। प्रचार समाप्त होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा की जनता के नाम खास संदेश दिया, जिसमें उन्होंने लोगों से हरियाणा में मजबूत सरकार चुनने की अपील की। इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा। पीएम मोदी ने गुरुवार शाम को एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘अब से कुछ देर में हरियाणा विधानसभा चुनाव का प्रचार अभियान समाप्त हो जाएगा। बीते कुछ दिनों में मैंने पूरे राज्य की यात्रा की है। मैंने लोगों का जो उत्साह देखा है, उसे देखकर मुझे ये पक्का विश्वास है कि हरियाणा के लोग भाजपा को फिर अपना आशीर्वाद देने वाले हैं। हरियाणा के देशभक्त लोग, कांग्रेस की विभाजनकारी और नकारात्मक राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।’ ‘घोटालों और दंगों के दौर से बाहर लाए’ पीएम ने आगे लिखा, ‘पिछले 10 वर्षों में भाजपा ने हरियाणा के लोगों के जीवन को समृद्ध बनाने के लिए लगातार काम किया है। हमने सभी वर्गों के कल्याण को प्राथमिकता दी है। किसान हों, युवा हों, महिलाएं हों, गांव और शहरों का विकास हो, हमने कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी। हम हरियाणा को कांग्रेस के घोटालों और दंगों वाले दौर से बाहर निकालकर लाए हैं।’ उन्होंने कांग्रेस पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि हरियाणा की जनता-जनार्दन जानती है कि कांग्रेस का मतलब भ्रष्टाचार, जातिवाद, सांप्रदायिकता और भाई-भतीजावाद की गारंटी है। बापू-बेटे की राजनीति का मूल उद्देश्य सिर्फ स्वार्थ है। कांग्रेस यानि दलाल और दामाद का सिंडिकेट। लोग आज हिमाचल से कर्नाटक तक कांग्रेस सरकारों की विफलता भी देख रहे हैं। कांग्रेस की नीतियां, लोगों को तबाह करती हैं, इसलिए हरियाणा के लोग कांग्रेस को बिल्कुल नहीं चाहते हैं। कांग्रेस कभी स्थिर सरकार नहीं दे सकती पीएम मोदी ने लिखा, ‘हरियाणा की जनता यह जानती हैं कि कांग्रेस कभी स्थिर सरकार नहीं दे सकती। हरियाणा के लोग देख रहे हैं कि कैसे कांग्रेस के नेता आपस में लड़ रहे हैं। ये हाल तब है, जब ये विपक्ष में हैं। हरियाणा के लोगों को इस बात से भी चोट पहुंच रही है कि दिल्ली और हरियाणा में बैठे दो खास परिवारों के इशारे पर पूरा हरियाणा अपमानित हो रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस के नेताओं ने आरक्षण खत्म करने का बयान देकर अपने इरादे जता दिए हैं। हरियाणा का पिछड़ा और दलित समुदाय जातिगत हिंसा रोकने में विफल रहने पर पहले से ही कांग्रेस से नाराज चल रहा है। इसलिए लोगों ने कांग्रेस को फिर कड़ी सजा देने का मन बना लिया है। हरियाणा के गली-गली से एक ही आवाज आ रही है- भरोसा दिल से, भाजपा फिर से।’ हरियाणा के मतदाताओं से की अपील हरियाणा के लोगों से अपील करते हुए पीएम ने कहा, ‘आज पूरी दुनिया की नजरें भारत पर हैं। दुनिया, भारत की ओर बहुत आशा और उम्मीद से देख रही है। ऐसे में यह बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि हरियाणा के लोग एक ऐसी सरकार चुनें, जो भारत को मजबूती देने की दिशा में प्रयास करे। कांग्रेस कभी देश को मजबूत नहीं बना सकती। इसलिए मैं हरियाणा के अपने मतदाताओं से ये आग्रह करता हूं कि वे फिर से भाजपा को अपना आशीर्वाद जरूर दें।’

एलन मस्क एक्स पर 200 मिलियन फॉलोअर्स का आंकड़ा छुआ

नई दिल्ली टेक अरबपति एलन मस्क गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 200 मिलियन फॉलोअर्स तक पहुंचने वाले पहले व्यक्ति बन गए। उन्होंने अक्टूबर 2022 में 44 बिलियन डॉलर में इसका अध‍िग्रहण किया था। एक्स के मालिक को 131.9 मिलियन फॉलोअर्स के साथ पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और 113.2 मिलियन फॉलोअर्स के साथ प्रसिद्ध फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो फॉलो करते हैं। लोकप्रिय गायक जस्टिन बीबर 110.3 मिलियन फॉलोअर्स के साथ चौथे स्थान पर हैं और रिहाना 108.4 मिलियन फॉलोअर्स के साथ पांचवें स्थान पर हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में दुनिया में 100 मिलियन का आंकड़ा पार किया है। जिसकी मस्क ने सराहना की थी। अब उनके 102.4 मिलियन फॉलोअर्स हैं। मस्क ने हाल ही में कहा कि एक्स के अब 600 मिलियन से अधिक मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता (एमएयू) और लगभग 300 मिलियन दैनिक सक्रिय उपयोगकर्ता (डीएयू) हैं। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मस्क के अधिकांश फॉलोअर्स नकली हैं और लाखों नए निष्क्रिय अकाउंट्स की वजह से यह संख्या बढ़ गई है। हालांकि, दावे को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। टेस्ला और स्पेस एक्स के मालिक के मुताबिक, एक्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पृथ्वी के लिए एक ग्रुप चैट बन गया है, जिस पर दुनिया भर से सबसे ज्यादा ट्रैफिक आता है। मस्क ने पोस्ट किया था, “एक्स पृथ्वी के लिए ग्रुप चैट है।” टेक अरबपति का लक्ष्य इसे एक “एवरीथिंग ऐप” बनाना है, जहां लोग फिल्में और टीवी शो पोस्ट कर सकें और डिजिटल भुगतान भी कर सकें। मस्क ने यह भी दावा किया कि अमेरिका में एक्स का उपयोग अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इस सप्ताह की शुरुआत में, वैश्विक निवेश फर्म फिडेलिटी ने मस्क द्वारा संचालित एक्स (पूर्व में ट्विटर) में अपनी हिस्सेदारी के मूल्य में 78.7 प्रतिशत की कटौती की। इसका अर्थ है कि एक्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का मूल्य केवल 9.4 बिलियन डॉलर होने की संभावना है।  

पूर्व सीएम बोले थे वाड्रा लैंड डील मामले में दम नहीं, अब उसी के नाम पर बीजेपी मांग रही वोट, हरियाणा में दोगली भाजपा का आरोप

चंडीगढ़ हरियाणा के सबसे चर्चित मामले राबर्ट वाड्रा लैंड डील मामला सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए वोटों वाली दुधारू गायब साबित हो रहा है। इसी मुद्दे को भुनाकर बीजेपी साल 2014 में हरियाणा की सत्ता पर काबिज हुई थी। अपने 10 साल के कार्यकाल में इस मामले में तमाम जांच और अथक प्रयासों के बावजूद जब कुछ नहीं मिला तो रॉबर्ट वाड्रा समेत पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भी क्लीन चिट दे दी। अब जब हरियाणा से विदाई की नौबत आई तो भाजपा फिर वाड्रा लैंड डील मामले को जोरशोर से भुना रही है। ताकि लोगों को भ्रमित करके उनके वोट हथियाए जा सकें। खास बात यह है कि हरियाणा के तत्कालीन सीएम मनोहर लाल खट्टर ने पिछले दिनों राजस्थान की राजधानी जयपुर में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एक सवाल के जवाब में खुद कहा था कि वाड्रा लैंड डील मामले में प्राथमिक रूप से कुछ भी गलत नहीं निकला है। बीजेपी ने इस प्रकरण की न्यायिक जांच इस उद्देश्य से नहीं कराई थी कि किसी को जेल भेजना है। बीजेपी केवल इस मामले का सच जनता के सामने लाना चाहती थी। इससे पहले 5 मई, 2014 को हिसार की जनसभा में तब पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने इस घोटाले को जोरशोर से उठाते हुए यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी को इंगित करते हुए कहा था कि मां-बेटे और दामाद से एक-एक इंच जमीन का हिसाब लिया जाएगा। एक दशक के शासन में भी न तो मोदी इस मामले में कुछ कर पाए और न ही हरियाणा में बीजेपी सरकार। बल्कि हुड्डा और वाड्रा को क्लीनचिट दे दी। राबर्ट वाड्रा से लैंड डील करने वाली डीएलएफ से बीजेपी ने लिया 170 करोड़ का चंदाः वाड्रा लैंड डील मामले की और भी रोचक कहानी यह है कि सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी से लैंड डील करने वाली कंपनी डीएलएफ से बीजेपी ने इलेक्टोरल बॉंड के रूप में 170 करोड़ रुपए का ऑफिशियल चंदा लिया है। जबकि हरियाणा की बीजेपी सरकार के सीएमओ में कार्यरत और तत्कालीन सीएम मनोहर लाल के करीबियों ने बैकडोर मेंं डीएलएफ से मोटे फायदे लिए जो अलग हैं। इसीलिए डीएलएफ और वाड्रा लैंड डील में न्यायिक आयोग के माध्यम से क्लीनचिट दी गई थी। अब इस मामले का असर वायनाड के इलेक्शन में भी पड़ने की संभावना है, जहां कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी प्रत्याशी हैं। मोदी-बीजेपी फिर जोरशोर से उठा रहे वाड्रा लैंड डील मामलाः अगर 2024 के विधानसभा चुनाव के प्रचाार की बात करें तो बीजेपी का प्रचार मुख्य रूप से हरियाणा में वाड्रा लैंड लीड और मिर्चपुर कांड के इर्द-गिर्द ही रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह औऱ तमाम भाजपा नेता दलाल, दामाद आदि का भाषणों में जिक्र करके किसानों को उनकी जमीनें छिनने का भय दिखाकर वोट मांग रहे हैं। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके पुत्र दीपेंद्र हुड्डा को भू माफिया के तौर पर पेश करते हुए वीडियो प्रचारित किए जा रहे हैं। एक वीडियो पर तो कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग में आपत्ति भी दर्ज कराई गई है। इसी तरह के गाने प्रचारित किए जा रहे हैं। यहां तक कि अखबारों में दिए गए विज्ञापनों में भी वाड्रा लैंड डील का जिक्र किया जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर एक दशक से भी पुराने मामलों को चुनाव में भुनाकर बीजेपी मतदाताओं को क्या याद दिलाना चाह रही है। बीजेपी क्यों नहीं दे रही जवाब 10 साल में क्यों कुछ नहीं कियाः हरियाणा के विधानसभा में चुनाव में आम मतदाता यह जानने को उत्सुक है कि हरियाणा और केंद्र में 10 साल तक शासन करने के बावजूद वाड्रा लैंड डील मामले में बीजेपी प्रभावी कार्रवाई करके किसानों को उनकी जमीनें वापस क्यों नहीं दिलवा पाई। मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने वाड्रा लैंड डील मामले में आखिर हुड्डा को क्लीनचिट क्यों दी। साल 2022 तक सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी का बतौर कॉलोनाइजर्स लाइसेंस क्यों प्रभावी रहा। अब इन मुद्दों को चुनाव में उठाना क्या भाजपा की दोगली नीति नहीं है। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए नुकसान को क्या भुला पाएंगे हरियाणा के लोगः विधानसभा चुनाव के दौरान आम जनमानस के बीच यह सवाल भी सुर्खियों में है कि आम तौर पर गैर जाट की राजनीति करने वाली बीजेपी के शासन यानि मनोहर लाल खट्टर सरकार में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हरियाणा में जिस तरह का तांडव हुआ। लोगों की चुन-चुन कर न केवल संपत्तियां जलाई गईं बल्कि महिलाओं से बलात्कार तक हुए। मुरथल कांड को अभी तक लोग भूले नहीं है। उस दौरान क्या भाजपा ने गैर जाट समुदाय के लोगों को पूरी तरह सुरक्षा मुहैया कराई थी। जबकि बीजेपी के मंत्रियों तक ने अपने नुकसान की भरपाई का पूरा मुआवजा सरकार से उठाया था। हुड्डा सरकार में आईएएस अशोक खेमका ने उठाया था वाड्रा लैंड डील मामलाः उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012-13 के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में हरियाणा के चर्चित आईएएस अशोक खेमका ने वाड्रा लैंड डील मामले का खुलासा किया था। उस समय यह मुद्दा देश-विदेश के अखबारों औऱ मीडिया चैनलों की सुर्खियों में छाया रहा था। क्योंकि आईएएस खेमका ने वर्ष 2012 में डीएलएफ और रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी के बीच हुई 3.5 एकड़ जमीन ट्रांसफर करने वाली डील रद्द कर दी थी।

किसान मजदूरों द्वारा अपनी मांगों को लेकर 2 घंटे के लिए रेल चक्का जाम करते रोष धरने दिए, की नारेबाजी

फिरोजपुर   संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक ) और किसान मजदूर मोर्चा द्वारा देशभर में रेल चक्का जाम करने की घोषणा के अनुसार आज जिला फिरोजपुर में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब और सहयोगी जत्थेबंदीयों के किसान मजदूरों द्वारा अपनी मांगों को लेकर 2 घंटे के लिए फिरोजपुर, मक्खू , मल्लांवाला ,तलवंडी भाई ,फिरोजशाह और गुरुहरसहाय में मुकम्मल तौर पर रेल चक्का जाम करते रोष धरने दिए गए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। फिरोजपुर छावनी के रेलवे स्टेशन पर लगाए गए रोष धरने को संबोधन करते हुए किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब के प्रधान सुखविंदर सिंह सभरा ,जिला प्रधान इंद्रजीत सिंह बाठ, सचिव गुरमेल सिंह, नरेंद्र पाल सिंह जताला, सुरजीत सिंह फौजी और बूटा सिंह आदि ने कहा के दिल्ली आंदोलन के दौरान 3 अक्टूबर 2020 को लखीमपुर की घटना में 4 किसानों और एक पत्रकार को एक षड्यंत्र के तहत गाडी के नीचे कुचलकर मार दिया गया था मगर आज तक इस हत्याकांड के दोषियों को सजाएं नहीं दी गई और ना ही दिल्ली आंदोलन के दौरान किसान मजदूर से किए गए वायदों को केंद्र सरकार द्वारा पूरा किया गया है।   उन्होंने कहां के भाजपा नेता अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा टैनी और उसके साथी गुंडो को सख्त से सख्त सजाऐं दी जाऐं और शहीद हुए किसानों तथा पत्रकार के परिवारों को इंसाफ दिया गया तथा आंदोलन की समाप्ति के समय केंद्र सरकार द्वारा किसान मजदूरो से मांगों को लेकर जो वायदे किए गए थे उन्हें पूरा किया जाए। उन्होंने शंभू बॉर्डर तोड़, खनौरी और रतनपुर बॉर्डर पर चल रहे मोर्चा के किसान मजदूरो की एमएसपी का गारंटी कानून, फसली बीमा योजना, प्रदूषण एक्ट से किसानों को बाहर निकलने , चिप वाले प्रीपेड बिजली मीटर लगाने बंद करने, मजदूरों को 700 रुपए दिहाड़ी, नरेगा के तहत 200 दिन काम देने और किसानों का सारा कर्ज खत्म करने आदि मांगों को केंद्र सरकार तुरंत मांगते हुए लागू करें । किसान नेताओं ने जिला फिरोजपुर में डीएपी खाद आवश्यकता के अनुसार किसानों को उपलब्ध करवाने और नकली खाद बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने, किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए परचे रद्द करने ,असला लाइसेंस रद्द करने वाले फरमान वापस लेने आदि की मांग की और कहां के अगर उनकी मांगों को नहीं माना गया तो अधिकारियों, विधायकों और मंत्रियों की गांवों में एंट्री किसानों द्वारा बंद कर दी जाएगी।

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