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बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र शास्त्री की कथा का आयेाजन ऑस्ट्रेलिया के अलग अलग शहरों में होगा

  ब्रिस्वेन बागेश्वर धाम के महंत और मशहूर कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इस समय ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हैं. यहां उनकी अलग-अलग शहरों में हनुमान जी की कथा का आयोजन होने वाला है. बाबा बागेश्वर के ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर  उनका जोरदार स्वागत किया गया. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सनातन की अलख जगाने ऑस्ट्रेलिया पहुंचे हैं. बाबा बागेश्वर की टीम के अनुसार आस्ट्रेलिया में बागेश्वर सरकार ब्रिस्बेन, सिडनी और मेलबर्न में कथा करने वाले हैं. यहां उनके दिव्य दरबार का आयेाजन भी किया जाएगा. जिसको लेकर तैयारियां भी कर ली गई हैं. बागेश्वर बाबा की एक झलक पाने के लिए आस्ट्रेलिया में भी भारी भीड़ देखने को मिल रही है. यहां लोग कतारों में खड़े होकर अपनी बारी आने के का इंतजार कर रहे हैं. क्या है बाबा बागेश्वर के कार्यक्रम का प्लान? ऑस्ट्रेलिया पहुंच कर बाबा बागेश्वर ने सभी भक्तों को संदेश देते हुए अपने कार्यक्रमों की जानकारी दी है. उन्होंने इंस्टाग्राम पोस्ट पर वीडियो साझा किया. इसमें उन्होंने कहा, ”हम अभी बैठे हैं ऑस्ट्रेलिया की धरती पर. आप सभी के भावपूर्ण आमंत्रण के कारण 10-11 दिन की यात्रा है. सनातन का प्रचार कैसे हो, हम आपको जगाने के लिए यहां आए हैं. सनातन संस्कृति को कैसे आगे बढ़ाएंगे इस पर चर्चा करेंगे. 8 और 9 जुलाई को ब्रिस्बेन में रहूंगा. यहां हनुमंत कथा और जीवन जीने की कला को लेकर चर्चा होगी. बाबा बागेश्वर 11 और 12 जुलाई को मेलबर्न में रहेंगे. तो वहीं 14, 15 और 16 तारीख को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रहेंगे. यूट्यूब चैनल पर कार्यक्रम रहेगा लाइव बाबा बागेश्वर के अनुसार जो भक्त कार्यक्रम में नहीं पहुंच पा रहे हैं. उनके लिए कार्यक्रम बागेश्वर धाम के यूट्यूब चैनल पर लाइव चलाया जाएगा. आपको बाबा बागेश्वर वापस भारत आएंगे. इसी के साथ ही आने वाली गुरू पूर्णिमा पर बागेश्वर धाम में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा.

पीएम मोदी ने कहा, ‘रूस शब्द सुनते ही, हर भारतीय के मन में पहला शब्द आता है- भारत के सुख-दुख का साथी, भारत का भरोसेमंद दोस्त

मास्को  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस यात्रा के दूसरे दिन मास्को में भारतीय समुदाय के सदस्यों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने रूस को भारत के सुख-दुख का साथी बताया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और रूस के रिश्ते हमेशा गर्मजोशी से भरे रहे हैं। पीएम मोदी ने रूसी भाषा में संबोधन के साथ भारतीय समुदाय के सामने अपना भाषण शुरू किया। उन्होंने कहा, ‘मैं अपने साथ हिंदुस्तान की मिट्टी की महक लेकर आया हूं।’ पीएम मोदी ने कहा कि ‘अपने तीसरे कार्यकाल में मैंने प्रण किया था कि अपने तीसरे कार्यकाल में तीन गुनी ताकत से काम करूंगा।’ भारत-रूस की दोस्ती हमेशा प्लस में रूस के साथ रिश्तों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘रूस शब्द सुनते ही, हर भारतीय के मन में पहला शब्द आता है- भारत के सुख-दुख का साथी, भारत का भरोसेमंद दोस्त। रूस में सर्दी के मौसम में तापमान कितना ही माइनस में नीचे क्यों न चला जाए, भारत-रूस की दोस्ती हमेशा प्लस में रही है, गर्मजोशी भरी रही है। ये रिश्ता म्यूचुअल ट्रस्ट और म्यूचुअल रेस्पेक्ट पर बना है।’ पीएम मोदी ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि वैश्विक समृद्धि को नई ऊर्जा देने के लिए भारत और रूस कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। यहां मौजूद आप सभी लोग भारत और रूस के संबंधों को नई ऊंचाई दे रहे हैं। आपने अपनी मेहनत और ईमानदारी से रूस के समाज में अपना योगदान दिया है।’ 10 साल में पुतिन से 17 बार मुलाकात भारत-रूस की दोस्ती के लिए पीएम मोदी ने अपने ‘परम मित्र रूस के राष्ट्रपति पुतिन के नेतृत्व की सराहना’ की। पीएम मोदी ने पुतिन की तारीफ करते हुए कहा, ‘उन्होंने दो दशक से ज्यादा समय तक इस पार्टनरशिप को मज़बूती देने के लिए शानदार काम किया है। बीते 10 सालों में मैं छठी बार रूस आया हूं और इन सालों मैं हम एक दूसरे से 17 बार मिले हैं।’ उन्होंने कहा, ‘ये सारी मुलाकात आपसी विश्वास और सम्मान बढ़ाने वाली रही है। जब हमारे छात्र संघर्ष के बीच फंसे थे, तो राष्ट्रपति पुतिन ने उन्हें वापस भारत पहुंचाने में हमारी मदद की थी। मैं रूस के लोगों का, मेरे मित्र राष्ट्रपति पुतिन का इसके लिए भी फिर से आभार व्यक्त करता हूं।’ संबोधन के दौरान पीएम मोद ने भारत और रूस के संबंधों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के योगदान का जिक्र करते हुए राजकपूर और मिथुन का भी नाम लिया। पीएम मोदी ने राज कपूर पर फिल्माए गए श्री 420 फिल्म के सुपरहिट गीत मेरा जूता है जापानी की लाइनें.. सिर पर लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी सुनाकर भारतीय समुदाय के योगदान को सराहा।

हंदवाड़ा में वाहन खाई में गिरने से एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, गांव में पसरा मातम

हंदवाड़ा उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा के राजवार गांव में एक दुखद सड़क दुर्घटना होने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस हादसे में एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान गुलाम रसूल भट, ताहिर अहमद भट, रिफत आरा और शबनम आरा के रूप में हुई है। इस घटना से पूरे गांव में मातम छा गया। हादसे की जानकारी देते एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना तब हुई जब परिवार के सदस्य पास के नाले से पानी लाने के लिए वाहन में सवार होकर जा रहे थे। इस दौरान वाहन गहरी खाई में गिर गया। इसके तुरंत बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। कार में सवार सभी को पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस बीच स्थानीय लोगों ने बताया कि इलाके में लंबे समय से पानी की समस्या है और मृतक अपने लिए पानी लाने के लिए बाहर गए थे। उन्होंने कहा कि अगर पानी की सुविधा होती तो यह घटना नहीं होती। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया है।

रूसी सेना में फिलहाल 40 भारतीय सेवा दे रहे, जंग लड़ रहे भारतीयों को जल्द डिस्चार्ज करेगा रूस

मॉस्को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय अमेरिका के दो दिवसीय दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की. खबर है कि यूक्रेन जंग के लिए रूस की सेना में शामिल किए गए भारतीयों की अब सुरक्षित वापसी होगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मॉस्को पहुंचने के बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समक्ष यह मुद्दा उठाया था. इसके बाद भारतीय सैनिकों की वापसी पर सहमति बनी है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, रूसी सेना में फिलहाल 30 से 40 भारतीय सेवा दे रहे हैं. इससे पहले कई रिपोर्ट्स में कहा गया था कि ये भारतीय वतन लौटना चाहते हैं लेकिन रूसी सेना छोड़कर स्वदेश वापसी इनके लिए मुमकिन नहीं है. रूसी सेना में भर्ती इन भारतीयों की वतन वापसी के लिए भारत सरकार ने कई तरह के राजनयिक प्रयास किए लेकिन रूस की ओर से किसी तरह का आश्वासन नहीं दिया गया. ऐसे में पीएम मोदी के रूस दौरे के दौरान रूसी सेना में भर्ती इन भारतीयों की सुरक्षित वापसी बड़ी प्राथमिकता थी. बता दें कि रूस और यूक्रेन जंग में दो भारतीयों की मौत हुई थी. इसके बाद भारत ने रूस से वहां की सेना में भर्ती भारतीयों को वापस भेजने की मांग की थी. मोदी को पुतिन ने बताया था परम मित्र दो दिवसीय दौरे पर मॉस्को पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपना ‘परम मित्र’ बताया था. पुतिन ने पीएम मोदी का स्वागत करते हुए कहा था कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, परम मित्र आपका हार्दिक स्वागत है. आपको देखकर मुझे बड़ी खुशी हुई. (हमारे बीच) औपचारिक बातचीत कल होने वाली है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को निमंत्रण भेजा था, जहां दोनों नेता मंगलवार को भारत-रूस के बीच 22वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में बैठक करेंगे. इस द्विपक्षीय बातचीत में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होनी है. इससे पहले आज जब दोनों नेता मिले तो उनकी करीबी दोस्ती भी साफ नजर आई. पुतिन के निमंत्रण पर रूस पहुंचे हैं पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब पांच साल में पहली बार रूस पहुंचे हैं. यह तीसरे कार्यकाल की उनकी दूसरी विदेश यात्रा है. प्रधानमंत्री सोमवार को भारतीय समयानुसार शाम पांच बजे मॉस्को पहुंचे थे. यहां वणुकोवो-II इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री का रूस के प्रथम डिप्टी प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने स्वागत किया था. इस दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच आधिकारिक बातचीत आज होगी. इससे पहले भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर अपना रुख साफ करते हुए कहा था कि मौजूदा स्थिति का हल युद्ध के मैदान में नहीं निकाला जा सकता. यूक्रेन के खिलाफ जंग लड़ रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित घर वापसी पीएम मोदी के प्रमुख एजेंडे में शामिल था.  

विधायक मदन मित्रा का करीबी महिला की बेरहमी से पिटाई का एक और वीडियो वायरल, क्या है सच

कोलकाता पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर में बीते दिनों शादीशुदा महिला की बेरहमी से पिटाई का वीडियो सामने आया था। दबंग ताज्जिमुल हक उर्फ जेसीबी ने एक महिला और पुरुष की सड़क पर पिटाई की थी। बताया गया कि विवाहेतर संबंधों के मामले में अवैध कंगारू कोर्ट ने पिटाई करने का फैसला सुनाया था। ऐसा ही एक और वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि टीएमसी विधायक मदन मित्रा का करीबी  जयंत सिंह एक महिला की कंगारू कोर्ट में पिटाई कर रहा है। यह वीडियो कामरहाटी का बताया गया है। आइए जानते हैं आखिर पूरा मामला क्या है? वीडियो में क्या दिख रहा है? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि दो लोगों ने किसी को टांग रखा है और तीसरा शख्स बेंत से पिटाई कर रहा है। दावा किया गया है कि एक लड़की की पिटाई की जा रही है और यह मदन मित्रा के सहयोगी जयंत सिन्हा की कंगारू कोर्ट है। बीजेपी ने भी इस वीडियो को लेकर ममता सरकार पर हमला किया है। दावा किया गया है कि यह वीडियो अड़ियादह के तलातल क्लब का है। टीएमसी ने क्या कहा? इस वीडियो को लेकर टीएमसी प्रवक्ता रिजू दत्ता ने कहा है कि यह वीडियो काफी पुराना है और इसको लेकर जयंत सिन्हा की गिरफ्तारी भी हुई थी। रिजू दत्ता ने बीजेपी को जवाब देते हुए सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर लिखा, यह मार्च 2021 का पुराना वीडियो है। आरोपी जयंत सिंह के सहयोगी जो पिटाई कर रहे हैं, वे जेल में हैं। वहीं वीडियो में दिखाई दे रहा पीड़िता पुरुष भी हो सकता है। इसकी जांच की जा रही है। हालांकि वीडियों में देखकर क्लियर है कि जिसकी पिटाई की जा रही है वह महिला है। हाल ही में हुई है जयंत सिंह की गिरफ्तारी बीते रविवार को अड़ियादह में ही दो युवकों को निजी झगड़े में बाहुबली जयंत सिंह के दखल के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि जयंत ने अपने साथियों के साथ मिलकर कॉलेज के छात्र और उसकी मां की हॉकी की स्टिक, लाठी और ईंटों पर सड़क पर गिराकर पिटाई की। हालांकि वीडियो में देखा जा रहा कि पिटाई बंद कमरे में हो रही है। ऐसे में लगता है कि वीडियो पुराना ही है। वहीं अड़ियादह में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया था। बुधवार की रात जयंत को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।  

संयुक्त राष्ट् : गाजा के 90% लोग कम से कम एक बार हुए हैं विस्थापित

संयुक्त राष्ट्र  संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि गाजा के 90 प्रतिशत लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं, कुछ लोग तो कई बार विस्थापित हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने सोमवार को कहा कि इजरायली सेना ने रविवार और सोमवार को गाजा में 19 ब्लॉकों में रहने वाले हजारों लोगों को तुरंत खाली करने का निर्देश दिया. सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने बताया, रविवार को कुछ लोगों को पश्चिमी गाजा शहर में खाली करने का आदेश दिया गया था, जबकि सोमवार को डेर अल बलाह शिविर को खाली करने का निर्देश दिया गया. कार्यालय ने कहा कि गाजा में हर 10 में से नौ लोगों के विस्थापित होने का अनुमान है, विस्थापन की नई लहरें मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित कर रही हैं, जो पहले भी कई बार विस्थापित हो चुके हैं, लेकिन फिर से उन्हें भागने के लिए मजबूर होना पड़ा है. उन्हें बार-बार अपना जीवन फिर से शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ता है. गाजा में लोग, खासकर बच्चे, हर दिन पानी इकट्ठा करने के लिए घंटों कतार में खड़े रहते हैं. आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच भी एक बड़ी चुनौती है. उत्तरी गाजा में, आंतरिक रूप से विस्थापित 80,000 लोगों के लिए कोई शिविर नहीं है, इन्हें जून के अंत में यहां आने के लिए मजबूर होना पड़ा. कई लोग ठोस कचरे और मलबे के बीच सोते हुए पाए गए, उनके पास गद्दे या कपड़े भी नहीं थे, और कुछ ने आंशिक रूप से नष्ट हो चुकी संयुक्त राष्ट्र सुविधाओं और आवासीय भवनों में आश्रय लिया था. मानवीय मामलों के संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने कहा कि इजरायली सेना ने इन क्षेत्रों को निकासी क्षेत्र के रूप में नामित किया, जिससे पिछले दो हफ्तों में छोटे बच्चों और बुजुर्गों सहित कई परिवारों को विस्थापन की लहरों से गुजरना पड़ा. यहां मानवीय कार्यों को जारी रखने के लिए ईंधन और दूसरी चीजों की गंभीर कमी हो गई है, साथ ही गर्मी के कारण आपूर्ति (विशेष रूप से भोजन) के खराब होने और संक्रमण का जोखिम भी बढ़ गया है. गाजा में 18 बेकरी में से केवल सात ही चालू हैं, सभी देर अल बलाह में हैं, और पहले से ही आंशिक क्षमता पर काम कर रही छह बेकरी को अब ईंधन की कमी के कारण पूरी तरह से बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा है. कार्यालय ने कहा कि खाना पकाने की गैस और खाद्य आपूर्ति की कमी के चलते सामुदायिक रसोई भी काम करने के लिए संघर्ष कर रही हैं. यहां पका हुआ भोजन मिलना मुश्किल हो गया है. विस्थापित परिवार खाना पकाने के लिए फर्नीचर और कचरे से लकड़ी और प्लास्टिक जलाने पर निर्भर हैं, जिससे स्वास्थ्य जोखिम और पर्यावरणीय खतरे बढ़ रहे हैं. खाना पकाने के लिए, मानवीय एजेंसी ने कहा कि वे गेहूं का आटा और डिब्बाबंद भोजन वितरित कर रहे हैं लेकिन एरेज वेस्ट क्रॉसिंग बंद होने से अब इसमें भी बाधा आ रही है. संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन और संयुक्त राष्ट्र उपग्रह केंद्र द्वारा किए गए एक संयुक्त आकलन में अनुमान लगाया गया है कि गाजा की लगभग 57 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि और उसके एक तिहाई ग्रीनहाउस क्षतिग्रस्त हो गए हैं. स्थानीय बाजार में मांस और मुर्गी जैसे भोजन की भी भारी कमी है, स्थानीय रूप से उत्पादित कुछ सब्जियां ही सस्ती कीमतों पर उपलब्ध हैं.

पुतिन ने भारत की प्रगति में मोदी के योगदान की खुलकर तारीफ की

मॉस्को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार रात नोवो-ओगारियोवो में अपने आधिकारिक आवास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया. दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक बातचीत हुई. पुतिन ने पीएम मोदी को अपने आवास के चारों तरफ घुमाया. इलेक्ट्रिक कार की सवारी की और घोड़ों का अस्तबल भी दिखाया. इस दौरान दोनों नेताओं को हल्के-फुल्के अंदाज में देखा गया. ये बातचीत द्विभाषीय के जरिए हुई. पुतिन ने भारत की प्रगति में मोदी के योगदान की खुलकर तारीफ की. पुतिन ने पीएम मोदी को मॉस्को के बाहर निजी बातचीत के लिए सरकारी आवास बुलाया था. यहां पुतिन ने कहा, ”मैं आपको एक बार फिर प्रधानमंत्री चुने जाने पर बधाई देना चाहता हूं. मुझे नहीं लगता है कि यह कोई आकस्मिक जीत है, बल्कि आपके कई वर्षों के कामों का परिणाम है. आपके अपने विचार हैं. आप बहुत ऊर्जावान व्यक्ति हैं. भारत और भारतीय लोगों के हित में नतीजे देने में सक्षम हैं. रिजल्ट स्पष्ट है.” ‘पूरा जीवन सेवा में समर्पित कर दिया’ सरकारी न्यूज एजेंसी तास के मुताबिक, पुतिन का कहना था कि भारत मजबूती से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने अपना पूरा जीवन अपने लोगों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है और हम इसे महसूस कर सकते हैं. ‘देशवासियों ने मातृभूमि की सेवा का अवसर दिया’ दरअसल, जब दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने चाय पर अनौपचारिक चर्चा की तो मोदी ने भारत में हाल ही संपन्न हुए आम चुनावों का जिक्र किया और कहा, ‘भारत के लोगों ने उन्हें मातृभूमि की सेवा करने का मौका दिया है.’ इस पर पुतिन ने जवाब दिया, ‘आपने अपना पूरा जीवन भारतीय लोगों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है और वे इसे महसूस कर सकते हैं.’ ‘पुतिन ने खुद पीएम मोदी को इलेक्ट्रिक कार में घुमाया’ रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘आपका कहना सही है. मेरा सिर्फ एक ही लक्ष्य है. मेरा देश और मेरे देश के लोग.’ बाद में, राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी ने नोवो-ओगारियोवो में पुतिन के आवास के आसपास सैर की. पुतिन ने मोदी को आवास के चारों ओर घुमाया और उन्हें एक इलेक्ट्रिक कार में घुमाया. अधिकांश समय उन्होंने दुभाषियों के जरिए बात की. हालांकि, जब वे कार छोड़ कर बगीचे की ओर चल रहे थे तो उनके बीच अंग्रेजी में संक्षिप्त बातचीत भी हुई. रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी को अपना घोड़ों का अस्तबल भी दिखाया. यहां दोनों नेताओं ने टहलते हुए अपनी बातचीत जारी रखी. ‘दोस्त का बंधन और मजबूत होगा’ बातचीत के बाद पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट में किया और नोवो-ओगारियोवो में मेजबानी के लिए राष्ट्रपति पुतिन का आभार व्यक्त किया. मोदी ने कहा, कल भी हमें बातचीत का इंतजार है. ये बातचीत निश्चित रूप से भारत और रूस के बीच दोस्ती के बंधन को और मजबूत करने में काफी मददगार साबित होगी. इससे पहले विदेश मंत्रालय ने निजी कार्यक्रम को दो करीबी दोस्तों और भरोसेमंद साझेदारों की मुलाकात बताया था. बैठक की कुछ तस्वीरें साझा करते हुए कहा गया, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने निजी बातचीत के लिए नोवो-ओगारियोवो में अपने आधिकारिक आवास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया. यह दोनों नेताओं के लिए भारत-रूस मित्रता को संजोने और उसका जश्न मनाने का अवसर है. रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के बाद पीएम मोदी की यह पहली मॉस्को यात्रा है. मंगलवार को मोदी-पुतिन के बीच शिखर वार्ता होने जा रही है. इससे पहले सोमवार को पीएम मोदी रूस पहुंचे तो वनुकोवो-द्वितीय एयरपोर्ट पर रूस के पहले उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने स्वागत किया. पीएम मोदी ने कहा, हम भविष्य के क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को गहरा करने के लिए उत्सुक हैं और भारत और रूस के बीच मजबूत संबंधों से हमारे लोगों को बहुत लाभ होगा. प्रधानमंत्री ने कहा, भारत एक शांतिपूर्ण और स्थिर क्षेत्र के लिए सहायक भूमिका निभाना चाहता है.  

आतंकवादीयों ने पहले फेंका ग्रेनेड, फिर 12 मिनट तक अंधाधुंध फायरिंग… शहीद हुए 5 जवान, जानें हुआ क्या?

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के कठुआ में हुए आतंकी हमले में पांच जवान शहीद हुए हैं जबकि पांच जवान घायल हुए हैं. आतंकियों की खोजबीन के लिए सेना का सर्च ऑपरेशन जारी है. इस बीच सूत्रों के हवाले से पता चला है कि आतंकियों ने इस हमले को अंजाम देने से पहले इलाके की रेकी की थी. यह हमला ऐसे समय पर किया गया, जब सुरक्षाबल कठुआ के बडनोटा में तलाशी अभियान चला रहे थे. तभी आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया. सूत्रों का कहना है कि बडनोटा गांव में रोड कनेक्टिविटी सही नहीं है. यहां वाहन दस से पंद्रह किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक की रफ्तार पर वाहन नहीं चला सकते. लोकल गाइड ने आतंकियों को दिया खाना और छिपने में की मदद सूत्रों का कहना है कि कच्ची सड़क होने की वजह से सेना के वाहन धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं. दो से तीन आतंकी और कुछ स्थानीय गाइड पहाड़ियों के ऊपर हैं. आंतकियों ने पहले सेना के वाहनों पर ग्रेनेड फेंके और फिर फायरिंग की. यहां पहले हुए हमलों की तरह ड्राइवर को भी निशाना बनाया गया. सूत्रों का कहना है कि इलाके में रेकी के लिए स्थानीय गाइड ने आतंकियों की मदद की थी. इन गाइडों ने आतंकियों को खाना भी मुहैया कराया था और उन्हें पनाह दी थी. हमले को अंजाम देने के बाद इन स्थानीय गाइड ने आतंकियों को छिपने में भी मदद की थी. हमले में पाकिस्तानी आतंकी थे शामिल सूत्रों का कहना है कि इस हमले में पाकिस्तानी आतंकी शामिल थे. इन आतंकियों के पास अमेरिका में बने M4 कार्बाइन राइफल, एक्सप्लोसिव डिवाइस और अन्य हथियार हैं. ऐसा भी लग रहा है कि आतंकी हमले के बाद बचकल भाग निकलने में कामयाब रहे. हमले में 2-3 आतंकी हो सकते हैं शामिल देर रात तक सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों को कोई सफलता नहीं मिल सकी. सर्च ऑपरेशन जारी है. जंगल के अंदर आतंकी हमले की सटीक जगह का पता लगाया जा चुका है. सूत्रों के मुताबिक हमले में 2 से 3 आतंकी शामिल हो सकते हैं. उम्मीद है कि आतंकियों के साथ उनके स्थानीय समर्थक भी थे, जिन्होंने उन्हें रास्ता बताने में मदद की. आतंकियों का मकसद ज्यादा से ज्यादा जवानों को हताहत करने का था. वह अपने साथ अत्याधुनिक हथियार लेकर आए थे. पैरा कमांडो चला रहे सर्च ऑपरेशन तैनात सेना के पैरा कमांडो (एसपीएल फोर्स) को कठुआ के दूरदराज के माचिन्डी-मल्हार क्षेत्र में हवाई मार्ग से उतारा गया है. उन्हें काउंटर ऑपरेशन में तैनात किया गया है. ताकि उन आतंकवादियों के खिलाफ समय पर प्रभावी काउंटर ऑपरेशन सुनिश्चित किया जा सके. जो आतंकवादी भाग रहे हैं और क्षेत्र से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं. उनपर शिकंजा कसने की तैयारी है. राजौरी में सेना के शिविर पर आतंकी हमला जम्मू कश्मीर के राजौरी में दो दिन पहले ही भारतीय सेना के शिविर पर आतंकवादी हमले का मामला सामने आया था. इस अटैक में आर्मी का एक जवान घायल हो गया था. आतंकवादियों ने सेना के शिविर पर गोलीबारी की थी. इस दौरान सतर्क सुरक्षा चौकी पर तैनात जवान भी ने आतंकवादियों पर गोलीबारी की थी. घटना के वक्त सेना का जवान घायल हो गया था. आतंकवादी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे थे. दूसरी ओर इस हमले के कुछ घंटों बाद ही चिनिगाम गांव में गोलीबारी की एक और घटना हुई थी. सेना को लश्कर ग्रुप के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके बाद सुरक्षा बल उस क्षेत्र में पहुंच गए थे. दोनों तरफ से गोलीबारी हुई थी.  सेना को कुलगाम के इलाके में आतंकियों की मौजूदगी के बारे में खुफिया इनपुट मिला था. इसके बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया. इस दौरान सेना के जवानों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई थी. कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंद्र शर्मा और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है। रविंद्र शर्मा ने कहा कि, यह एक दुखद घटना है कि कठुआ के इलाके में हमारे चार जवान शहीद हो गए और 6 के घायल होने की जानकारी है। इस तरह की स्थिति जम्मू सूबे के हर जिले में है। सरकार आतंकवाद खत्म करने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन डोडा, राजौरी, कठुआ जैसे इलाके भी आतंकवाद से ग्रस्त होते जा रहे हैं। यह एक दुखद घटना है, सरकार को गंभीरता से देखना होगा। चुनाव के बाद अचानक इस तरह की स्थिति बनना चिंता का विषय है। सरकार को कठोर कदम उठाने होंगे और बताना होगा कि इस तरह के गंभीर हालत क्यों हो रहे हैं। इस घटना पर डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के चेयरमैन और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने भी ट्वीट करते हुए कहा, कठुआ में सेना के वाहन पर हुए आतंकी हमले में चार जवानों की शहादत और छह जवानों के घायल होने की खबर बेहद दुखद और निंदनीय है। जम्मू प्रांत में आतंकवाद का बढ़ना बेहद चिंताजनक है। हमारी संवेदनाएं घायल जवानों और उनके परिवारों के साथ हैं। सरकार को आतंकवाद से निपटने और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। फिलहाल इलाके में सुरक्षाबलों की तरफ से सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। बीते दो माह में सेना के वाहन पर यह दूसरा आतंकी हमला है। अधिकारियों ने कहा कि आतंकियों ने सेना की गाड़ी पर ग्रेनेड फेंके और इसके बाद फायरिंग शुरू कर दी। सेना के जवान रूटीन पेट्रोलिंग पर थे। इसी दौरान आतंकियों ने सेना की गाड़ी पर दोपहर करीब 3.30 बजे हमला कर दिया।  

गृह मंत्री ने कहा कि रेणुकास्वामी हत्या मामले में पर्याप्त साक्ष्य जमा करने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा

बेंगलुरु  कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि रेणुकास्वामी हत्या मामले में पर्याप्त साक्ष्य जमा करने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। इस मामले में कन्नड अभिनेता दर्शन थुगुदीपा, उनकी दोस्त पवित्रा गौड़ा और 15 अन्य आरोपी हैं। सभी आरोपी इस समय 18 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार अभिनेता के प्रशंसक रेणुकास्वामी (33) ने पवित्रा को अश्लील संदेश भेजे थे, जिससे दर्शन नाराज हो गए और कथित तौर पर रेणुकास्वामी की हत्या कर दी गई। उसका शव नौ जून को यहां सुमनहल्ली में एक अपार्टमेंट के पास एक बरसाती नाले से मिला था। परमेश्वर ने एक सवाल के जवाब में संवाददाताओं से कहा, ‘‘आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जांच जारी है, सबूत जमा किए जा रहे हैं। इसके बाद आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। क्या केवल मीडिया के कहने की वजह से इसमें तेजी लाई जानी चाहिए?’’ उन्होंने कहा, ‘‘कुछ प्रक्रियाएं होती हैं, पर्याप्त सबूत जमा करने के बाद आरोपपत्र दायर किया जाएगा। मैं पहले ही कह चुका हूं कि इस मामले में किसी को बचाने की जरूरत नहीं है और ऐसा नहीं किया जाएगा।’’ चित्रदुर्ग निवासी राघवेंद्र यहां आर आर नगर में रेणुकास्वामी को यह कहकर लाया था कि दर्शन उससे मिलना चाहते हैं। आठ जून को कथित तौर पर उसे प्रताड़ित किया गया और उसकी हत्या कर दी गयी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार चित्रदुर्ग निवासी रेणुकास्वामी को किसी धारदार हथियार से कई बार चोट पहुंचाई गई और आघात लगने से उसकी मौत हो गई। पुलिस सूत्रों ने कहा कि पवित्रा, जो आरोपी नंबर एक है, रेणुकास्वामी की हत्या का ‘प्रमुख कारण’ थी। उन्होंने दावा किया कि जांच से यह साबित हो गया है कि उसने अन्य आरोपियों को उकसाया, उनके साथ साजिश रची और अपराध में भाग लिया। रेणुकास्वामी हत्याकांड क्या है रिपोर्ट के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर 15 घाव पाए गए हैं। सिर, पेट, छाती और अन्य हिस्सों पर निशान पाए गए हैं। ये भी बताया गया है कि रेणुका स्वामी का सिर बेंगलुरु में एक शेड में खड़े मिनी ट्रक से टकराया था, जिसे अब पुलिस ने जब्त कर लिया है। दर्शन के फैन की मौत सदमे और रक्तस्राव (ब्लीडिंग) से हुई है। इससे पहले कर्नाटक पुलिस अधिकारियों ने भी दावा किया था कि Renuka Swamy को दर्शन और उनके साथियों ने डंडों से पीटा था। फिर कथित तौर पर उन्हें दीवार पर फेंक दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। सूत्रों ने कहा, ‘पवित्रा गौड़ा (दर्शन की को-एक्ट्रेस और गर्लफ्रेंड) ने ही दर्शन को रेणुका स्वामी को सजा देने के लिए उकसाया था। इसी के अनुसार योजना बनाई गई थी।’ 8 जून को हुई थी रेणुका स्वामी का हत्या रेणुका स्वामी 8 जून 2024 को बेंगलुरु के सुमनहल्ली ब्रिज पर मृत पाए गए थे। वे कथित तौर पर चित्रदुर्ग में अपोलो फार्मेसी ब्रांच में काम करते थे। कहा जा रहा है कि वो दर्शन की दोस्त और कन्नड़ एक्ट्रेस पवित्रा गौड़ा को आपत्तिजनक मैसेज भेजते थे। इससे नाराज होकर रेणुका की हत्या कर दी गई और कथित तौर पर उनके शव को दर्शन के सामने बेंगलुरु के कामाक्षीपाल्या में एक नहर में फेंक दिया गया। कथित तौर पर आठ आरोपियों ने रेणुका के हमले के दौरान दर्शन की मौजूदगी का दावा करते हुए उन्हें फंसाया है। डंडा, लोहे की छड़, रस्सी और कार बरामद दर्शन को बेंगलुरु पुलिस ने 11 जून को मैसूर से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसे 6 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। रेणुका स्वामी हत्याकांड से उनके संबंध की जांच की जा रही है। शुक्रवार को पुलिस सूत्रों ने खुलासा किया कि लकड़ी के डंडे और लोहे की छड़ों सहित कई सबूत मिले हैं, जिनसे दर्शन और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर रेणुका पर हमला किया था। इसके अलावा एक रस्सी भी मिली है, जिसका इस्तेमाल रेणुका को बांधने के लिए किया गया था। चित्रदुर्ग से बेंगलुरू तक रेणुका को किडनैप करने के लिए इस्तेमाल की गई कार को भी जब्त कर लिया गया है। एक और कार बरामद की गई है, जिसका इस्तेमाल रेणुका का शव ले जाने के लिए किया गया था। अब तक हुई है 15 गिरफ्तारियां इस मामले में अब तक दर्शन और उनकी करीबी एक्ट्रेस-गर्लफ्रेंड पवित्रा सहित 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हाल ही में दर्शन के को-स्टार प्रदोष और करीबी सहयोगी नागराज को भी गिरफ्तार किया गया था। पुलिस सूत्रों का दावा है कि नागराज दर्शन के सभी कामों को देखता था। वह कथित तौर पर मैसूर में दर्शन के फार्महाउस की भी देखभाल करता था और इस हफ्ते की शुरुआत में पुलिस द्वारा एक्टर को गिरफ्तार किए जाने के बाद से ही फरार था। इस बीच हत्या के मामले में प्रदोष के संबंध के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।      

फ्रांस में राजनीतिक संकट गहराने के साथ ही त्रिशंकु संसद की आशंका बढ़ गई

पेरिस  फ्रांस में हुए संसदीय चुनाव में वामपंथी गठबंधन ने धुर-दक्षिणपंथी दलों को शिकस्त देते हुए सबसे ज्यादा सीटें जीतीं। हालांकि, वह बहुमत हासिल करने में नाकाम रहा, जिससे देश में राजनीतिक संकट गहराने के साथ ही त्रिशंकु संसद की आशंका बढ़ गई है। फ्रांस में राजनीतिक उथल-पुथल से देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है और यूक्रेन में युद्ध, वैश्विक कूटनीति तथा यूरोप की आर्थिक स्थिरता पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है। फ्रांस की संसद का कार्यकाल 2027 में खत्म होना था, लेकिन यूरोपीय संघ में नौ जून को बड़ी हार मिलने के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने समय से पहले संसद भंग कर बड़ा दांव खेला था। उन्होंने कहा था कि एक बार फिर मतदाताओं के बीच जाने से स्थिति ‘स्पष्ट’ होगी। हालांकि, उनका यह दांव लगभग हर पड़ाव पर उल्टा पड़ता दिखा है।  जारी आधिकारिक नतीजों के मुताबिक, संसदीय चुनाव में तीनों प्रमुख गठबंधन में से कोई भी 577 सदस्यीय नेशनल असेंबली में बहुमत के लिए जरूरी 289 सीटों का जादुई आंकड़ा नहीं हासिल कर सका। नतीजों के अनुसार, वामपंथी गठबंधन ‘न्यू पॉपुलर फ्रंट’ 180 से अधिक सीटों पर जीत के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि मैक्रों नीत मध्यमार्गी गठबंधन के खाते में 160 से ज्यादा सीटें गईं और वह दूसरे स्थान पर रहा। वहीं, मरीन ले पेन के नेतृत्व वाली धुर-दक्षिणपंथी पार्टी ‘नेशनल रैली’ और उसके सहयोगी दलों को 140 से अधिक सीटों पर जीत के साथ तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। हालांकि, ‘नेशनल रैली’ का यह प्रदर्शन 2022 के उसके प्रदर्शन से कहीं बेहतर है, जब पार्टी को 89 सीटें हासिल हुई थीं। आधुनिक फ्रांस को अभी तक त्रिशंकु संसद का सामना नहीं करना पड़ा है। प्रधानमंत्री गैब्रियल अटल ने कहा, “हमारा देश एक अभूतपूर्व राजनीतिक स्थिति का सामना कर रहा है। वह अगले कुछ हफ्तों में दुनिया का स्वागत करने की तैयारियों में जुटा है।”  प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा है कि पेरिस ओलंपिक के मद्देनजर वह ‘जब तक जरूरत है’, तब तक पद पर बने रहने के लिए तैयार हैं। वहीं, मैक्रों के राष्ट्रपति कार्यकाल के तीन साल बचे हुए हैं। फ्रांस के न्यू पॉपुलर फ्रंट ने जीता चुनाव  फ्रांस के गृह मंत्रालय ने कहा कि वामपंथी न्यू पॉपुलर फ्रंट गठबंधन ने फ्रांस में संसदीय चुनाव में जीत प्राप्त करते हुए 577 सदस्यीय नेशनल असेंबली में 182 सीटें हासिल की हैं। दूसरे स्थान पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के मध्यमार्गी गठबंधन रही, जिसे 168 सीटें प्राप्त हुई। दक्षिणपंथी नेशनल रैली पार्टी ने संसदीय चुनावों में तीसरा स्थान प्राप्त किया और देश की संसद के निचले सदन में 143 सीटें हासिल कीं। रिपब्लिकन पार्टी ने 45 सीटें प्राप्त की, जबकि बाकी पार्टियों को कुल मिलाकर 39 सीटें प्राप्त हुईं।      

पाकिस्तान डिफॉल्ट होने की दहलीज पर पहुंचने का एक मात्र कारण चीन का कर्ज

वियनतियाने  चीन का एक और पड़ोसी देश कर्ज के भारी-भरकम बोझ से कराह रहा है। नौबत यहां तक आ गई है कि यह देश अब डिफॉल्ट होने जा रहा है। इस देश के डिफॉल्ट होने की दहलीज पर पहुंचने का एक मात्र कारण चीन का कर्ज है। चीन ने इस देश को भारी मात्रा में कर्ज दिया है। अब यह देश चीन के अलावा बाकी दुनिया से लिए गए कर्ज को लौटाने में सक्षम नहीं है और ऋण पुर्नगठन की मांग कर रहा है। हालांकि, चीन ने पहले की तरह अपना पल्ला झाड़ लिया है और कह रहा है कि वह मदद के लिए तैयार है। इससे पहले चीनी कर्ज से श्रीलंका डिफॉल्ट हो चुका है और पाकिस्तान उस दहलीज पर पहुंच कर बार-बार खुद को बचा रहा है। लाओस का कर्ज भुगतान दोगुना हुआ चीनी कर्ज से तबाह होने वाले इस देश का नाम लाओस है। लाओस चीन का पड़ोसी देश है। पिछले साल ही चीन ने लाओस तक रेल लाइन का उद्घाटन किया था। अब लाओस अपने चीन प्रेम की सजा भुगत रहा है। हालांकि, चीन का कहना है कि वह पड़ोसी लाओस को उसके भारी कर्ज के बोझ को कम करने में मदद कर रहा है। इस बीच लाओस ने खुलासा किया है कि उसका बाहरी पुनर्भुगतान लगभग दोगुना हो गया है। ऐसे में वह डिफॉल्ट को रोकने के लिए और अधिक ऋण स्थगन चाहता है। हालांकि, लाओस को कर्ज देने वाली पार्टियां इसके लिए तैयार नहीं हैं। लाओस के कर्ज पर चीन ने क्या कहा चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को सवालों के लिखित जवाब में कहा कि बीजिंग ने लाओस सहित विकासशील देशों के साथ “पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग” किया है, जिसमें आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए मजबूत समर्थन शामिल है। उन्होंने कहा, “साथ ही, वह संबंधित देशों को उनके कर्ज के बोझ को कम करने में मदद करने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है।” लाओस पर चीन का सबसे ज्यादा कर्ज चीन अब तक लाओस का सबसे बड़ा लेनदार है, जो बाहरी सरकारी कर्ज में 10.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का लगभग आधा हिस्सा वहन करता है। पिछले साल के अंत में इस छोटे से देश पर कुल सार्वजनिक और सार्वजनिक रूप से गारंटीकृत कर्ज 13.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो इसके सकल घरेलू उत्पाद का 108 प्रतिशत था। लाओस के कर्ज ने बढ़ाई छोटे देशों की चिंता कम्युनिस्ट शासित लाओस चीन के साथ हाई-स्पीड रेल लाइन शुरू करने के बाद चर्चा में आया है, जिसकी लागत इस चारों ओर से जमीन से घिरे देश को लगभग 6 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। कई लोग इस विकास को बुनियादी ढांचे में वृद्धि की शुरुआत के रूप में देखते हैं जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को सीधे दक्षिण पूर्व एशिया से जोड़ता है। हालांकि, इस विकास बाकी छोटे देशों के लिए ऋण में वृद्धि की चिंताएं बढ़ा दी हैं। विश्व बैंक ने लाओस को दी चेतावनी पिछले साल लाओस का बाहरी ऋण भुगतान 950 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था, जिससे देश को मूलधन और ब्याज भुगतान में 670 मिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना पड़ा। विश्व बैंक ने पहले कहा है कि इस तरह के कदमों से हाल के वर्षों में अस्थायी राहत मिली है। देश के ऋण मुद्दे तब सामने आए हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रशासन विकासशील देशों को चीन के आर्थिक प्रभाव का विस्तार करने के प्रयासों के लिए एक विकल्प प्रदान करना चाहता है। वाशिंगटन ने अक्सर बीजिंग के प्रयासों को “ऋण-जाल कूटनीति” के रूप में पेश किया है क्योंकि श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देश पुनर्भुगतान से जूझ रहे हैं।

असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर, 28 जिलों की 23 लाख की आबादी प्रभावित, कई जिलों का सड़क संपर्क टूटा

ईटानगर अरुणाचल प्रदेश में बारिश के कारण हुए भूस्खलन से कई जिलों का सड़क संपर्क बाधित हो गया है। अधिकारियों ने  यह जानकारी दी। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को शि-योमी जिले में भूस्खलन के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई। राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के कारण अप्रैल से अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। इसने बताया कि लोहित और अंजाव जिलों के मोमपानी क्षेत्र में तेजू-हयुलियांग सड़क बाधित है, जबकि क्रा दादी जिले में दरी-चंबांग से लांगडांग गांव पालिन-ताराक्लेंगडी जाने वाली सड़क भूस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी सियांग जिले के गेयिंग में राष्ट्रीय राजमार्ग-513 भी बाधित हो गया है। इस वर्ष अप्रैल से अब तक अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से 72,900 से अधिक लोग और 257 गांव प्रभावित हुए हैं। बाढ़ और भूस्खलन से सड़कों, पुलों, पुलियाओं, बिजली लाइनों, बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मरों और जल आपूर्ति अवसरंचनाओं को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार अब तक 160 सड़कें, 76 बिजली लाइनें, बिजली के 30 खंभे, तीन ट्रांसफार्मर, नौ पुल, 11 पुलिया और 147 जल आपूर्ति प्रणालियां क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इसमें बताया गया कि इसके अलावा 627 कच्चे और 51 पक्के घर तथा 155 झोपड़ियों को नुकसान पहुंचा है। पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने के कारण राज्य की राजधानी ईटानगर में लोग गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि मरम्मत का काम जारी है, लेकिन इसमें कई दिन लगेंगे। इस सप्ताह लगातार बारिश के कारण आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के कारण कुरुंग कुमेय जिले के अंतर्गत दमिन, पारसी पर्लो और पन्यासांग प्रशासनिक क्षेत्र का संपर्क राज्य के बाकी हिस्सों से कथित तौर पर कट गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दमिन से पारसी पर्लो जाने वाली सड़क भी कई जगह अवरुद्ध हो गई है। ईटानगर को बंदरदेवा से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग-415 पर करसिंगसा खंड के पास भारी भूस्खलन हुआ, जिसके कारण राजधानी ईटानगर प्रशासन को यात्रियों की सुरक्षा के लिए सड़क को बंद करना पड़ा। उपायुक्त श्वेता नागरकोटी मेहता द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद सड़क को बंद करने और यातायात को गुमटो के रास्ते मोड़ने का निर्णय लिया गया है।  असम में बाढ़ के कारण 28 जिलों में करीब 23 लाख लोग प्रभावित असम में बाढ़ की स्थिति भी गंभीर बनी रही और 28 जिलों की लगभग 23 लाख की आबादी इससे प्रभावित हुई। एक आधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई। बुलेटिन के अनुसार, अधिकतर नदियों का जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर है। राज्य में इस वर्ष बाढ़, भूस्खलन और तूफान में 78 लोगों की मौत हुई जबकि इनमें से केवल बाढ़ के कारण 66 लोगों की मौत हुई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का  सिलचर पहुंचने और मणिपुर जाते समय कछार जिले के फुलेर्तल में बाढ़ राहत शिविर का दौरा करने का कार्यक्रम है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि बाढ़ प्रभावित जिलों में सभी राहत शिविरों में पूरी व्यवस्था की गई है और स्थिति सामान्य होने तक आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडार रखा गया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ राहत शिविरों की सुरक्षा और स्वच्छता सरकार की प्राथमिकता है और उनकी टीम वहां रह रहे लोगों के संपर्क में है। वर्तमान में, 28 जिलों में 3,446 गांवों के लगभग 23 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जबकि बाढ़ की दूसरी लहर से 68,432.75 हेक्टेयर फसल भूमि जलमग्न हो गई है। धुबरी में सबसे अधिक 7,54,791 लोग प्रभावित हुए, इसके बाद कछार में 1,77,928 लोग और बारपेटा में 1,34,328 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। कुल 53,689 लोगों ने 269 राहत शिविरों में शरण ली है, जबकि राहत शिविरों में नहीं रह रहे 3,15,520 लोगों को राहत सामग्री प्रदान की गई है। ब्रह्मपुत्र निमती घाट, तेजपुर और धुबरी में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। खोवांग में बुरही दिहिंग, शिवसागर में दिखौ, नंगलमुराघाट में दिसांग, नुमालीगढ़ में धनसिरी, धरमतुल में कोपिली, बारपेटा में बेकी, गोलकगंज में संकोश, बीपी घाट में बराक और करीमगंज में कुशियारा नदियां खतरे से निशान से ऊपर हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और स्थानीय प्रशासन सहित कई एजेंसियां राहत और बचाव कार्य कर रही हैं। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए विभिन्न हिस्सों में 171 नौकाओं को तैनात किया गया है। विभिन्न एजेंसियों ने पिछले 24 घंटे में कुल 70 लोगों और 459 मवेशियों को बचाया। राज्य भर से बाढ़ के कारण सड़कों, पुलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और मत्स्य पालन तालाबों को नुकसान पहुंचने की खबरें मिली हैं।    

नाटो शिखर सम्मेलन आज से वाशिंगटन में शुरू, राष्ट्रपति बाइडन संगठन के नेताओं का स्वागत करेंगे

वाशिंगटन अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडन की मेजबानी में इस सप्ताह आयोजित होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा यूक्रेन के प्रति मजबूत समर्थन प्रदर्शित करने की संभावना है। बाइडन प्रशासन के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में यूक्रेन को सैन्य, राजनीतिक और वित्तीय सहायता देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की जा सकती हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सम्मेलन में यूरोपीय संघ और हिंद-प्रशांत साझेदारों के साथ अमेरिका के सहयोग को और मजबूत करने के लिए एक बैठक भी आयोजित की जाएगी। संगठन सदस्य के रूप में स्वीडन के शामिल होने के बाद यह पहला नाटो शिखर सम्मेलन होगा। स्वीडन मार्च में आधिकारिक रूप से नाटो में शामिल हुआ था। यह ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ का भी प्रतीक होगा। नाटो अब 32 देशों का एक मजबूत सैन्य गठबंधन है। शिखर सम्मेलन से पहले एक वरिष्ठ अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह (नाटो) यूरो-अटलांटिक सुरक्षा के लिए वास्तव में अति आवश्यक रहा है और अमेरिका तथा उसके सहयोगियों की रक्षा करता आया है।’’ अमेरिका की राजधानी में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई बैठक के कुछ ही दिनों के भीतर हो रहा है। अधिकारियों ने कहा, ‘‘सम्मेलन के जरिये पुतिन को एक कड़ा संदेश जाएगा कि अगर उन्हें लगता है कि वह यूक्रेन का समर्थन करने वाले देशों के गठबंधन के सामने अधिक समय तक टिक सकते हैं तो यह उनकी गलतफहमी है।’’ नाम न उजागर करने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, ‘‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अपने साझेदारों के साथ मिलकर हम बाकी देशों को भी एक महत्वपूर्ण संदेश देंगे कि हम एकजुट हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन के लिए साथ खड़े हैं।’’ नाटो शिखर सम्मेलन मंगलवार को वाशिंगटन में शुरू होगा, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडन संगठन के नेताओं का स्वागत करेंगे।  

जमानत में ऐसी कोई शर्त नहीं हो सकती जो पुलिस को आरोपी की आवाजाही पर लगातार नज़र रखने में सक्षम बनाए- कोर्ट

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आरोपियों को जमानत देने के लिए उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के वास्ते गूगल पिन का स्थान संबंधित जांच अधिकारियों से साझा करने की शर्त नहीं रखी जा सकती। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान की पीठ ने नशीले पदार्थो की तस्करी के आरोपी नाइजीरिया के निवासी फ्रैंक विटस की दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ दायर अपील पर यह फैसला सुनाया‌। पीठ ने कहा, “जमानत की शर्त जमानत के मूल उद्देश्य को विफल नहीं कर सकती। ऐसी कोई शर्त नहीं हो सकती जो पुलिस को आरोपी व्यक्तियों की आवाजाही पर लगातार नज़र रखने में सक्षम बनाए”। याचिकाकर्ता विटस ने दिल्ली उच्च न्यायालय की‌ ओर से जमानत के लिए मोबाइल लोकेशन पुलिस से साझा करने की शर्त की व्यवस्था के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि इससे उसके निजात के अधिकार का उल्लंघन होता है। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि जमानत की शर्त के रूप में गूगल पिन स्थान साझा करने की शर्त भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत निजता के अधिकार पर आघात करती है। शीर्ष अदालत ने पहले यह भी कहा था कि जब एक बार किसी अभियुक्त को अदालतों द्वारा निर्धारित शर्तों के साथ जमानत पर रिहा कर दिया जाता है तो उसके ठिकाने को जानना और उसका पता लगाना अनुचित हो सकता है। वजह यह कि इससे उसकी निजता के अधिकार में बाधा आ सकती है। उच्चतम न्यायालय ने तब कहा था, “यह जमानत की शर्त नहीं हो सकती। हम सहमत हैं कि ऐसे दो उदाहरण हैं जहां इस न्यायालय ने ऐसा किया है, लेकिन यह जमानत की शर्त नहीं हो सकती।” नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 2017 में अपने ऐतिहासिक फैसले में सर्वसम्मति से कहा था कि निजता का अधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है। प्रिम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत एक मामले में आरोपी नाइजीरियाई नागरिक को जमानत दी गई थी. मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रिम कोर्ट ने कहा कि गूगल पिन साझा करने की शर्त संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी के निजता अधिकारों का उल्लंघन कर सकती है. याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रिम कोर्ट का रुख किया था. मई 2022 में, हाई कोर्ट ने दो सख्त शर्तें रखी थीं – एक, आरोपी को गूगल मैप पर एक पिन डालना होगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मामले के जांच अधिकारी को उनका स्थान उपलब्ध हो. और, दूसरी शर्त यह थी कि नाइजीरिया के उच्चायोग को यह आश्वासन देना होगा कि आरोपी देश छोड़कर नहीं जाएगा और जब भी आवश्यकता होगी, ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होगा. 29 अप्रैल को, सुप्रिम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा था कि वह इस बात की जांच करेगी कि क्या दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों में से एक शर्त निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है, जिसमें एक आरोपी को जमानत पर रहते हुए जांचकर्ताओं को उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अपने मोबाइल फोन से ‘गूगल पिन डालने’ के लिए कहा गया है. एक ऐतिहासिक फैसले में, नौ जस्टिस की संविधान पीठ ने 24 अगस्त, 2017 को सर्वसम्मति से घोषणा की थी कि निजता का अधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है. हाई कोर्ट ने शर्त पर ध्यान दिया और कहा कि प्रथम दृष्टया यह जमानत पर रिहा आरोपी के निजता के अधिकार का उल्लंघन है.  

पहली ही बारिश में डूबी मुंबई, डूबी सड़कें, घरों में भी घुसा पानी, मौसम विभाग ने जारी किया बड़ा अपडेट

 मुंबई मुंबई में बारिश ने आफत मचाई हुई है. जलभराव की वजह से लोकल ट्रेनें तो कैंसल हुई हीं, कई विमान सेवाओं  भी एडवायजरी जारी कर दी है. इस बीच मौसम विभाग चेता रहा है कि शहर को फिलहाल इससे राहत मिलने वाली नहीं. लेकिन क्या वजह है जो देश की आर्थिक राजधानी कहलाता मुंबई हर बारिश पानी में डूब जाता है, वो भी कुछ घंटों की बारिश में? इसके पीछे अतिक्रमण या शहर की बसाहट कम, बल्कि कुदरती स्ट्रक्चर ज्यादा जिम्मेदार है. दो दशक पहले हुआ था बड़ा नुकसान जुलाई 20025 में मुंबई में तेज बारिश से सबसे बड़ा नुकसान हुआ. 26 जुलाई को चौबीस घंटों के भीतर 9 सौ मिलीमीटर से ज्यादा पानी बरसा. ये वहां पूरी जुलाई की बारिश जितना था. इससे शहर के रास्ते बंद हो गए. बसें, ट्रेनों से लेकर हवाई जहाज थम गए. इस दौरान पानी में फंसने या डूबने से 1094 जानें चली गईं, जबकि लगभग साढ़े 5 सौ करोड़ का नुकसान हुआ. उस मानसून ने शहर की ताकत एक झटके में खींच ली. इसके बाद से लगातार प्लानिंग हो रही है. यहां तक कि महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन ने जापानी कंपनी द जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी के साथ मिलकर अंडरग्राउंड रिवर प्रोजेक्ट पर काम की बात की. इसमें नदियों से जोड़कर ऐसा सिस्टम बनाया जाएगा कि ओवरफ्लो होने पर पानी दूसरी जगह जमा हो जाए और बाद में काम आ सके. क्यों होती रही नदियों पर बात ये शहर केवल अरब सागर से ही घिरा हुआ नहीं, बल्कि यहां चार-चार नदियां भी हैं- मीठी, दहिसर, ओशिवारा और पोयसर. नदियों के अलावा यहां चार क्रीक हैं. ये सब मिलकर लगभग 21 मिलियन की आबादी वाले शहर को मानसून के मौसम में काफी खतरनाक बना देते हैं. मसलन, मीठी नदी की बात करें तो पूरे मुंबई को घेरती इस नदी की ज्यादातर जगहों पर चौड़ाई केवल 10 मीटर है. ऐसे में थोड़ी बारिश में ही पानी ओवरफ्लो का खतरा रहता है. आसपास घनी बसाहट है, जिसपर तुरंत इसका असर होगा. मुंबई की टोपोग्राफी भी अलग समंदर किनारे बसा ये शहर कई जगहों पर काफी नीचे बसा हुआ है, जबकि कई जगहें काफी ऊंचाई पर हैं. बता दें कि मुंबई सात द्वीपों के मिलने से बना हुआ है, ऐसे में उसका आकार देश के ज्यादातर शहरों से काफी अलग, कुछ-कुछ तलेदार प्लेट की तरह है. बारिश शुरू होते ही पानी अपने-आप नीचे की तरफ आकर जमा होने लगता है. ऐसे कुछ इलाके हैं- सायन, अंधेरी सबवे, मिलान सबवे और खार. ये हिस्से कुछ घंटों के पानी से भी डूबने लगते हैं. पानी के निकासी की अलग है व्यवस्था शहर का ड्रेनेज सिस्टम इस तरह का है कि पानी समंदर में खाली होता जाए. लेकिन भारी बारिश के दौरान, जब समुद्र का स्तर बढ़ता है, ड्रेन्स के गेट बंद कर दिए जाते हैं ताकि पानी वापस शहर में लौटकर तबाही न मचा दे. भारी बारिश के दौरान ऊंची लहरें बचेखुचे ड्रेनेज सिस्टम को भी रोक देती हैं. इस सिस्टम के दोबारा काम पर लौटने में पानी घटने के बाद लगभग 6 घंटे लग जाते हैं. इस दौरान पानी भरा ही रहता है. भारत समेत दुनिया के ज्यादातर शहरों में बारिश होने पर आधे से ज्यादा पानी जमीन में समा जाता है. वहीं मुंबई में लगभग 90 प्रतिशत पानी ड्रेन्स के जरिए निकलता है. इससे भी ड्रेनेज पर काफी बोझ रहता है. एक वजह अतिक्रमण भी आर्थिक राजधानी होने की वजह से यहां देश के कोने-कोने से लोग आते रहते हैं. इतने लोगों के रहने के लिए वैसी प्लानिंग नहीं. बड़ी आबादी निचले हिस्सों में बसी हुई है, जो पानी के लिए संवेदनशील हैं. यहां पर पानी के बाहर निकलने या जमीन में जाने की वैसी व्यवस्था नहीं. यही वजह है हल्की बारिश में भी कई इलाकों में पानी भर जाता है. कैसे मिल सकता है छुटकारा पिछले कुछ समय से मुंबई में जापान की मदद से अंडरग्राउंड डिस्चार्ज चैनल की बात हो रही है. ये प्रोजेक्ट जापान ने अपने शहर टोक्यो में भी तैयार किया. असल में टोक्यो में साढ़े 3 करोड़ से ज्यादा आबादी हमेशा बाढ़ के खतरे में जीती आई. जापान के मौसम विभाग की मानें तो ये शहर समुद्र तल से नीचे जा चुका है. अपने लोगों और इंफ्रा को बचाने के लिए जापान ने अंडरग्राउंड चैनल बनाया. बाढ़ का पानी या अतिरिक्त पानी इस चैनल में गिरता है, जहां से पंप के जरिए उसे वहां की ईडो नदी में छोड़ा जाता है. मुंबई को स्पंज सिटी की तरह डेवलप करने की भी बात हो रही है. स्पंज सिटी वो कंसेप्ट है, जिसमें शहर स्पंज की तरह काम करे यानी पानी डलते ही अंदर सूख जाए. इसके तहत शहर को ऐसे डिजाइन किया जाएगा कि पानी तुरंत ही जमीन में चला जाए और ड्रेनेज पर भार न पड़े. इसमें ग्रीन स्पेस बढ़ाया जाएगा.  

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