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भाजपा विधायक ने कहा- धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति को जो भी मारेगा, उसे मैं व्यक्तिगत तौर पर 11 लाख का इनाम दूंगा

सांगली  सांगली में पिछले दिनों 28 वर्षीय महिला ऋतुजा राजगे ने धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाए जाने पर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर ने भड़काऊ बयान दिया।  महाराष्ट्र के भाजपा विधायक ने भड़काऊ बयान दिया है। सांगली में भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर ने कहा कि धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति को जो भी मारेगा, उसे मैं व्यक्तिगत तौर पर 11 लाख रुपये का इनाम दूंगा। उन्होंने यह बयान सांगली में ससुराल की ओर से ईसाई धर्म अपनाने का दबाव डाले जाने के बाद महिला के आत्महत्या करने के मामले में दिया।  सांगली में पिछले दिनों 28 वर्षीय महिला ऋतुजा राजगे ने आत्महत्या कर ली थी। महिला के परिजनों ने आरोप लगाया था कि उसके ससुराल वाले ईसाई धर्म का पालन करते थे। वह महिला ऋतुजा को अपने साथ चर्च जाने, बाइबल पढ़ने और प्रार्थना करने के लिए मजबूर करते थे। वह मना करती थी, तो उसके साथ मारपीट की जाती थी। इन सबसे परेशान आकर महिला ने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर ने कहा कि जो कोई भी धर्मांतरण का काम करता है और अगर हमारे लोग उस व्यक्ति की हत्या करते हैं तो मैं व्यक्तिगत रूप से उसे 11 लाख रुपये का इनाम दूंगा। उन्होंने अपने बयान में सैराट फिल्म का भी जिक्र किया।    सैराट फिल्म क्या थी सैराट के एक मराठी फिल्म थी। यह फिल्म 2016 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में दिखाया गया था कि गरीब दलित लड़के को एक अमीर ऊंची जाति की लड़की से प्यार हो जाता है दोनों अपने प्यार के लिए पूरी दुनिया से लड़ते हैं लेकिन अंत में इस प्यार की कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। सैराट जातीय भेदभाव, प्यार और हॉरर किलिंग की कहानी थी।  

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश, जी7 शिखर सम्मेलन को बताया सार्थक: पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के कनानास्किस में आयोजित ‘जी7 शिखर सम्मेलन’ का एक वीडियो बुधवार को सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने जी7 सम्मेलन को “सार्थक” बताया और आतंकवाद से खिलाफ सख्त कार्रवाई का आह्वान किया। पीएम मोदी ने वीडियो शेयर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “एक सार्थक जी-7 शिखर सम्मेलन, जिसमें कई मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।” एक मिनट 40 सेकंड के इस वीडियो की शुरुआत कनानास्किस के खूबसूरत नजारे के साथ होती है। वीडियो में पीएम मोदी कनाडा के प्रधानमंत्री के साथ नजर आ रहे हैं। कनाडा के पीएम मार्क कार्नी कहते हैं कि जी7 में आपकी (पीएम मोदी की) मेजबानी करना “मेरे लिए बहुत सम्मान की बात” है। उन्होंने कहा कि भारत (2019 में फ्रांस के) बियारिट्ज से जी7 में शामिल हो रहा है और यह “आपके देश और आपके नेतृत्व के महत्व का प्रमाण” है। इसके बाद वीडियो में पीएम मोदी की आवाज सुनाई देती है। वह कहते हैं, “भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। पिछले दिनों जी20 समिट के अध्यक्ष के रूप में भारत ने विश्व के लिए अनेक ऐसे इनिशिएटिव लिए हैं। जी20 में भारत ने जो मजबूत नींव रखी है, उसको नए स्वरूप में जी7 में उसके एग्जीक्यूशन (कार्यान्वयन) की दिशा में ले जाने का आज एक बहुत बड़ा अवसर है और भारत इस अवसर का उपयोग करने के लिए वैश्विक स्तर पर हमेशा इच्छुक रहा है।” इससे पहले, बुधवार को कनाडा के कनानास्किस में ‘जी7 शिखर सम्मेलन’ के आउटरीच सत्र में हिस्सा लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आतंकवाद का समर्थन और उसे बढ़ावा देने वाले देशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई’ का आह्वान किया। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को मजबूत समर्थन देने के लिए वैश्विक समुदाय का आभार जताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “पहलगाम आतंकी हमला सिर्फ भारत पर नहीं, बल्कि पूरी मानवता पर हमला था।”

दिल्ली में तेज हवाओं और हल्की बारिश के चलते तापमान में गिरावट, येलो अलर्ट भी जारी

नई दिल्ली  देश के कई इलाकों में भीषण गर्मी के बीच अब राहत की बौछारें शुरू हो चुकी हैं। जैसे-जैसे मॉनसून आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे बारिश का दायरा भी फैलता जा रहा है। दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में जहां भारी बारिश हो रही है, वहीं दिल्ली और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में प्री-मॉनसून की फुहारों ने मौसम को सुहाना बना दिया है। राजधानी दिल्ली में तेज हवाओं और हल्की बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, और आज के लिए येलो अलर्ट भी जारी कर दिया गया है। कहां पहुंचा मॉनसून? दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब तक बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दो दिनों में यह मॉनसून गुजरात, राजस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरी अरब सागर तक और विस्तार ले सकता है।  दिल्ली में मौसम का मिजाज बदला राजधानी दिल्ली में प्री-मॉनसून बारिश ने तपती गर्मी से बड़ी राहत दी है। आज शाम या रात के समय गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। अगले तीन दिनों तक रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान और गिर सकता है। इन राज्यों के लिए रेड अलर्ट भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, दो लो प्रेशर एरिया सक्रिय हैं — एक बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों में दूसरा गुजरात क्षेत्र में इन दबावों के असर से पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इन इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। कहां-कहां बरसेंगे बादल? उत्तर प्रदेश: मध्यम से भारी बारिश की संभावना, कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ बौछारें पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, हरियाणा, राजस्थान: हल्की से मध्यम बारिश विदर्भ, मराठवाड़ा, तेलंगाना: छिटपुट हल्की बारिश तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक: गरज के साथ बौछारें कोंकण, गोवा, केरल, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप: लगातार बारिश की स्थिति दक्षिण गुजरात: अगले 24 घंटे में बहुत भारी बारिश की चेतावनी  

केदारनाथ यात्रा में दर्दनाक हादसा: खाई में गिरे यात्रियों में दो की मौत, एक अब भी लापता, यात्रियों के लिए अलर्ट

उत्तराखंड  उत्तराखंड के केदारनाथ यात्रा मार्ग से एक दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पवित्र यात्रा पर निकले श्रद्धालु उस वक्त हादसे का शिकार हो गए जब गौरीकुंड और रामबाड़ा के बीच स्थित जंगल चट्टी में अचानक संतुलन बिगड़ने से कुछ यात्री गहरी खाई में गिर गए। यह घटना बुधवार, 18 जून की सुबह करीब 12 बजे हुई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। हादसे की जगह और स्थिति पोल नंबर 153 के पास जंगल चट्टी के इलाके में यात्रियों का एक समूह हादसे की चपेट में आ गया। जानकारी मिलते ही राहत और बचाव कार्य में जुटी DDRF की टीम और पुलिस फौरन मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।  अब तक की स्थिति 2 यात्रियों की मौके पर मौत हो चुकी है। 3 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें से एक को सुरक्षित निकाल कर प्राथमिक इलाज के लिए गौरीकुंड भेजा गया है। 1 व्यक्ति अब भी लापता है, जिसकी तलाश जारी है। रेस्क्यू टीम खाई के भीतर उतरकर सर्च ऑपरेशन में जुटी है।  कैसे हो रहा रेस्क्यू? रेस्क्यू टीम खाई में उतरकर बेहद कठिन और जोखिम भरे हालात में खोजबीन कर रही है। एक घायल को “कंडी” (पर्वतीय इलाकों में प्रयोग होने वाला स्ट्रेचर) के जरिए बाहर निकाला गया है। फिलहाल इलाके में मौसम सामान्य है, जिससे रेस्क्यू में थोड़ी राहत मिली है। यात्रियों के लिए अलर्ट इस घटना के बाद यात्रा मार्ग पर सुरक्षा को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन की ओर से यात्रियों को खास सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है, खासकर संकरे और फिसलन भरे रास्तों पर। धार्मिक यात्रा बनी हादसे का सबब हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन इस कठिन ट्रेकिंग रूट पर सुरक्षा चूक जानलेवा साबित हो सकती है। फिलहाल प्रशासन की ओर से मृतकों की पहचान की जा रही है और उनके परिवारों से संपर्क साधा जा रहा है।

अमेरिका का किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप इस क्षेत्र में पूर्ण युद्ध का कारण होगा: प्रवक्ता इस्माइल बाघई

ईरान  ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बुधवार को चेतावनी दी कि उनके देश को निशाना बनाकर किए जा रहे इजराइली हमलों में अमेरिकी हस्तक्षेप से ‘‘पूर्ण युद्ध” छिड़ जाएगा। मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने ‘अल जजीरा इंग्लिश’ समाचार चैनल पर प्रसारित एक साक्षात्कार के दौरान ये टिप्पणियां कीं। इस साक्षात्कार का सीधा प्रसारण किया गया। यह ईरान एवं इजराइल के मौजूदा संघर्ष के बीच उनका पहला साक्षात्कार है। बाघई ने कहा, ‘‘अमेरिका का किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप इस क्षेत्र में पूर्ण युद्ध का कारण होगा।” अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरू में ईरान पर इजराइल के हमलों से खुद को दूर रखा था लेकिन बाद में उन्होंने अमेरिका की अधिक भागीदारी का संकेत देते हुए कहा कि वह संघर्ष विराम से ‘‘कहीं अधिक बड़ा” कुछ चाहते हैं। अमेरिका ने इस क्षेत्र में और अधिक युद्धक विमान भी भेजे हैं। हजारों इजराइली विदेश में फंसे हुए हैं। इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में विमानों की आवाजाही को बाधित कर दिया है।  

भारतीय सरकार ने बताया- अब सभी मोबाइल नंबर्स के लिए KYC प्रक्रिया अनिवार्य होगी, चाहे वह प्रीपेड हो या पोस्टपेड

नई दिल्ली  भारतीय सरकार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जिसमें मोबाइल नंबर्स और बिजनेस कॉल्स के लिए KYC (नो योर कस्टमर) फ्लेक्सिबिलिटी को खत्म कर दिया गया है और इसे अनिवार्य बना दिया गया है। यह कदम टेलीकॉम सेक्टर में पारदर्शिता, सुरक्षा, और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। आइए, इस नई पॉलिसी की डिटेल्स और इसके प्रभाव के बारे में। नई गाइडलाइंस सरकार के अनुसार, अब सभी मोबाइल नंबर्स के लिए KYC प्रक्रिया अनिवार्य होगी, चाहे वह प्रीपेड हो या पोस्टपेड। पहले, प्रीपेड यूजर्स के लिए KYC फ्लेक्सिबिलिटी थी, जहां वे बिना पूरी KYC के भी सिम कार्ड प्राप्त कर सकते थे, लेकिन अब यह विकल्प खत्म हो गया है। नई गाइडलाइंस के तहत, यूजर्स को अपनी पहचान और एड्रेस प्रूफ के साथ KYC कंप्लीट करानी होगी। यह प्रक्रिया ऑफलाइन (टेलीकॉम स्टोर्स पर) या ऑनलाइन (टेलीकॉम कंपनियों की वेबसाइट्स या ऐप्स के माध्यम से) दोनों तरीकों से पूरी की जा सकती है। क्यों लिया गया यह फैसला? सरकार का यह फैसला सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। KYC फ्लेक्सिबिलिटी के खत्म होने से अवैध गतिविधियों, जैसे Terror Funding, Money Laundering, और फ्रॉड, पर अंकुश लगेगा। इसके अलावा, यह सुनिश्चित होगा कि सभी मोबाइल नंबर्स रजिस्टर्ड यूजर्स से जुड़े हों, जिससे Emergency Services और Government Schemes तक पहुंचना आसान हो सके। नए रूल्स का प्रभाव नई पॉलिसी का सबसे बड़ा प्रभाव प्रीपेड यूजर्स पर पड़ेगा, जो अब बिना KYC के सिम कार्ड प्राप्त नहीं कर पाएंगे। यह प्रोसेस थोड़ा कम सुविधाजनक है, लेकिन लंबे समय में यह सुरक्षा और विश्वास बढ़ाएगी। पोस्टपेड यूजर्स, जो पहले से ही KYC कंप्लीट करा चुके हैं, पर इसका असर कम होगा। हालांकि, उन्हें भी समय-समय पर KYC अपडेट करानी होगी। कैसे करें KYC? KYC प्रक्रिया पूरी करने के लिए, यूजर्स को निम्नलिखित दस्तावेज़ जमा करने होंगे: – पहचान प्रूफ (जैसे Aadhar Card, PAN Card, Voter ID) – एड्रेस प्रूफ (जैसे Utility Bill, Ration Card, Passport) – एक पासपोर्ट साइज फोटो ये दस्तावेज़ टेलीकॉम स्टोर्स पर जमा किए जा सकते हैं या टेलीकॉम कंपनियों की वेबसाइट्स और ऐप्स के माध्यम से ऑनलाइन सबमिट किए जा सकते हैं। कुछ कंपनियां अब biometric verification भी मांग रही हैं, जो सुरक्षा को और बढ़ाएगा।  

बेगमपेट एयरपोर्ट को मिली बम से उड़ाने की धमकी, मचा हड़कंप, किया हाई अलर्ट, हुआ ऑपरेशन शुरू

हैदराबाद  हैदराबाद के बेगमपेट एयरपोर्ट पर बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एयरपोर्ट प्रशासन को ईमेल के जरिए बम की धमकी मिली। सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने एयरपोर्ट पर हाई अलर्ट ऑपरेशन शुरू कर दिया। बेगमपेट डिवीजन के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) के अनुसार, खतरे की सूचना सुबह ही मिल गई थी। इसके बाद बम निरोधक दस्ते को तैनात किया गया और हवाई अड्डे तथा उसके आसपास के परिसर में गहन जांच की गई। इससे पहले कोच्चि से ओमान की राजधानी मस्कट पहुंचने के वाद दिल्ली आ रहे इंडिगो के विमान में बम की धमकी के बाद मंगलवार को नागापुर में आपातकालीन लैंडिंग करायी गयी। यह विमान मस्कट से कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचा था और वहां से सुबह 9.31 बजे दिल्ली के लिए घरेलू उड़ान के रूप में रवाना हुआ था। कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आधिकारिक ईमेल आईडी पर इंडिगो की उड़ान में बम की धमकी मिली थी। इसके बाद एयरपोर्ट पुलिस कंट्रोल ब्यूरो (बीएपीसी) को बुलाया गया और धमकी को विशिष्ट घोषित किया गया। सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद नागपुर हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करायी गयी। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा जांच पूरी करने के बाद 157 यात्रियों और चालक दल के छह सदस्यों के साथ विमान दिल्ली के लिए रवाना होगा।  

अगर ईरान का दावा सही है तो यह पहली बार है जब इस मिसाइल का मौजूदा संघर्ष में उपयोग किया गया: रिपोर्ट

ईरान  ईरान ने अपनी सबसे खतरनाक मिसाइल ‘फतह-1 को इजरायल पर दागने का दावा किया है। यह एक हाइपरसोनिक मिसाइल है, जिसे ईरान ने ‘इजरायल-स्ट्राइकर की उपाधि दी है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर ईरान का दावा सही है तो यह पहली बार है जब इस मिसाइल का मौजूदा संघर्ष में उपयोग किया गया है। इससे पहले अक्तूबर 2024 में भी इसे यरुशलम पर दागा गया था। विशेषज्ञों का कहना है, फतह-1 मिसाइल का इस्तेमाल या दावा, दोनों ही इस बात का संकेत हैं कि पश्चिम एशिया एक बार फिर एक बड़ी जंग की ओर बढ़ रहा है। वहीं, इजरायल ने अब तक कोई ऐसी मिसाइल सार्वजनिक रूप से पेश नहीं की है जिसे ‘हाइपरसोनिक श्रेणी में रखा जा सके। यानी ऐसी मिसाइल जिसकी गति आवाज की गति से 5 गुना ज्यादा हो और जो उड़ान के दौरान दिशा बदल सके। खासियत रेंज: 1,400 किलोमीटर गति: 6,100 किलोमीटर प्रति घंटा विशेषता: उड़ान के दौरान दिशा बदलने में सक्षम, इंटरसेप्ट करना मुश्किल आयरन डोम के लिए भी चुनौती – फतह-1 इजरायल के आयरन डोम जैसे हवाई रक्षा तंत्रों के लिए बड़ी चुनौती – आयरन डोम के लिए हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकना कठिन कार्य ईरान की पहली हाइपरसोनिक मिसाइल फतह-1 को 2023 में पहली बार सार्वजनिक किया गया था और इसका नाम खुद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने रखा था। इसे ईरान की पहली हाइपरसोनिक मिसाइल माना जाता है, जिसकी रफ्तार, सटीकता और दुश्मन की मिसाइल डिफेंस को चकमा देने की क्षमता इसे बेहद खतरनाक बनाती है। तेल अवीव 400 सेकंड में तेहरान में इस मिसाइल के अनावरण के समय एक विशाल बैनर लगाया गया था, जिस पर हिब्रू में लिखा था, ‘तेल अवीव तक 400 सेकंड में। इसका मतलब है कि फतह-1 इतनी तेज गति से इजरायल तक पहुंच सकता है कि उसे रोकने के लिए इजरायल के पास बहुत कम समय रहेगा। विस्फोटक विशेषज्ञ ट्रेवर बॉल बताते हैं कि यह ईरान की सबसे नई मिसाइलों में से एक है। अगर यह इस्तेमाल की गई और नाकाम रही, तो इजरायल को इसकी क्षमताओं का पूरा अंदाजा हो जाएगा। ईरान इस मिसाइल का इस्तेमाल कर ‘प्रोपेगेंडा कर सकता है, लेकिन जोखिम भी बड़ा है।

कार्नी बोले- G7 में भारत की मौजूदगी सम्मान की बात, Modi वैश्विक नेतृत्व का प्रतिबिंब, 10 साल बाद कनाडा पहुंचे PM मोदी

कनाडा  कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि G7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार व गतिशीलता और भारत की नेतृत्व वाली स्थिति का प्रतिबिंब है। कार्नी ने मंगलवार को कनाडा में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी के साथ द्विपक्षीय चर्चा की। जी7 नेताओं के शिखर सम्मेलन के समापन पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कार्नी ने कहा, “G7 में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति की जहां तक बात है, तो प्रधानमंत्री मोदी ने 2018 से हर जी7 में भाग लिया है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार, भारतीय अर्थव्यवस्था की गतिशीलता, भारतीय प्रौद्योगिकी, G20 और उससे आगे के कई स्थानों पर भारत की नेतृत्व वाली स्थिति का प्रतिबिंब है।” कार्नी ने कहा, “इसलिए जी7 के अध्यक्ष के रूप में, उस संदर्भ में प्रधानमंत्री की मेजबानी करना पूरी तरह से स्वाभाविक, पूरी तरह से सुसंगत है। मुझे पूरी उम्मीद है कि भारत के प्रधानमंत्री, अगले साल जी7 में उपस्थित रहेंगे।” कार्नी ने मोदी के साथ अपनी द्विपक्षीय बैठक को “महत्वपूर्ण” बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता फिर से उच्चायुक्तों की नियुक्ति की दिशा में आगे बढ़ेंगे। कनाडा ने भारत को खालिस्तान समर्थक अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जोड़ने का प्रयास किया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था।   तनाव के बीच पिछले साल भारत ने अपने उच्चायुक्त और पांच अन्य राजनयिकों को वापस बुला लिया था। भारत ने कनाडा के इतने ही राजनयिकों को निष्कासित भी कर दिया था। भारत ने जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व वाली पिछली सरकार पर कनाडा में खालिस्तानी समर्थक तत्वों को गतिविधियां संचालित करने की अनुमति देने का आरोप लगाया था। ट्रूडो के बाद कार्नी कनाडा के प्रधानमंत्री बने। ट्रूडो के जाने के बाद, भारत ने कहा था कि उसे कनाडा के साथ फिर से संबंध बेहतर होने की उम्मीद है।    

इजरायल ने साफ कहा है कि उसका इरादा ईरान में सत्ता परिवर्तन का है, खामेनेई को भी खत्म करने की बात कही

तेहरान अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली ईरान की सत्तारूढ़ व्यवस्था वर्तमान में इजरायल के हवाई हमलों के कारण भारी दबाव में है। इजरायली सेना उच्च पदस्थ अधिकारियों, सुरक्षा तंत्र और सरकारी मीडिया को निशाना बना रही है। ईरान के सबसे बड़े सैन्य अधिकारी पहले ही मारे जा चुके हैं। इजरायल ने साफ कहा है कि उसका इरादा ईरान में सत्ता परिवर्तन का है। यहां तक कि इजरायल ने खामेनेई को भी खत्म करने की बात कही है। ऐसे में सवाल उठता है कि मौजूदा सत्ताधारी लोगों के अलावा, ईरान में विपक्ष कौन है? दशकों से चली आ रही राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों की लहर के बावजूद, ईरान का विपक्ष खंडित और असंगठित नजर आता है। विभिन्न गुटों और वैचारिक मतभेदों के कारण यह विपक्ष देश के भीतर कोई मजबूत संगठित उपस्थिति स्थापित करने में असमर्थ रहा है। आइए ईरान की राजनीतिक व्यवस्था को विस्तार से समझते हैं। ईरान की सत्तारूढ़ व्यवस्था के खिलाफ विरोध का इतिहास लंबा और जटिल रहा है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से, विभिन्न समूहों ने समय-समय पर शासन के खिलाफ आवाज उठाई है। हालांकि, ये समूह एकजुट होने में असफल रहे हैं, जिसके कारण उनका असर सीमित रहा है। विपक्षी समूहों में राजशाही समर्थक, इस्लामी सुधारवादी, धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्रवादी, और जातीय/क्षेत्रीय स्वायत्तता आंदोलन शामिल हैं। इसके अलावा, निर्वासित समूह जैसे मोजाहेदीन-ए-खल्क (MEK) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शाही समर्थक गुट (Monarchists) 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी देश के अंतिम शासक थे। क्रांति के बाद ईरानी राजा को देश छोड़ना पड़ा और 1980 में मिस्र में उनका निधन हो गया। उनके पुत्र रजा पहलवी अब अमेरिका में रहते हैं। वह शांतिपूर्ण असहयोग और जनमत संग्रह के माध्यम से सत्ता परिवर्तन की मांग करते हैं। हालांकि प्रवासी ईरानियों के एक वर्ग में शाही व्यवस्था यानी राजा की वापसी के प्रति झुकाव है, लेकिन ईरान के भीतर इस विचार की लोकप्रियता को लेकर संदेह बना हुआ है। अधिकांश ईरानी आज उस दौर को याद भी नहीं कर सकते क्योंकि वे क्रांति के बाद पैदा हुए हैं। शाही युग की यादें एक ओर जहां आधुनिकता और समृद्धि से जुड़ी हैं, वहीं कई लोग उस समय की असमानता और दमन को भी नहीं भूलते। स्वयं शाही समर्थकों के बीच भी एकजुटता का अभाव देखा जाता है। रजा पहलवी ने हाल के वर्षों में एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र की स्थापना के लिए “महसा चार्टर” जैसे पहलों का समर्थन किया है, जिसमें मसीह अलीनेजाद, नाजनीन बोनियादी, शिरीन एबादी, हामेद इस्माईलियोन, अब्दुल्ला मोहतादी जैसे प्रमुख विपक्षी नेताओं ने हिस्सा लिया। यह चार्टर शांतिपूर्ण तरीके से शासन को उखाड़ फेंकने का एक ढांचा प्रस्तुत करता है। मुजाहिदीन-ए-खल्क (MEK) मुजाहिदीन-ए-खल्क (MEK) कभी शाह शासन और अमेरिका विरोधी लेफ्ट विचारधारा का बड़ा नाम हुआ करता था। परंतु 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान इराक के साथ खड़ा होने के कारण इस संगठन को आज भी देश में गद्दार की नजरों से देखा जाता है- यहां तक कि इस्लामी गणराज्य के विरोधी भी इसे क्षमा करने को तैयार नहीं हैं। 2002 में ईरान के गुप्त यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का खुलासा करने वाला यही समूह था। लेकिन वर्तमान में ईरान के भीतर इसकी सक्रियता न के बराबर है। संगठन के संस्थापक मसूद रजवी बीते दो दशकों से लापता हैं और उनकी पत्नी मरियम रजवी अब इसका नेतृत्व कर रही हैं। हालांकि पश्चिमी देशों में इसका सक्रिय नेटवर्क है, परंतु मानवाधिकार समूह इसे एक “संप्रदाय” की तरह चलाने का आरोप भी लगाते हैं, जिसे संगठन नकारता है। इस्लामी सुधारवादी (Reformists) ईरान के भीतर कुछ विपक्षी समूह इस्लामी गणतंत्र के ढांचे के भीतर सुधार की वकालत करते हैं। इनमें पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद खातामी, हसन रूहानी और अली अकबर हाशमी रफसंजानी जैसे नेताओं के समर्थक शामिल हैं। ये सुधारवादी सख्त इस्लामी नियमों में ढील और अधिक व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मांग करते हैं। हालांकि, ये समूह मौजूदा शासन के खिलाफ पूर्ण विद्रोह के बजाय सिस्टम के भीतर बदलाव पर जोर देते हैं, जिसके कारण इनकी विश्वसनीयता विपक्ष के अन्य कट्टरपंथी गुटों के बीच कम हो जाती है। जातीय अल्पसंख्यक समूह ईरान में कुर्द, अजरबैजानी, अरब और बलोच जैसे जातीय समूह भी विपक्ष का हिस्सा हैं, जो अधिक स्वायत्तता या कुछ मामलों में पूर्ण स्वतंत्रता की मांग करते हैं। ये समूह अक्सर केंद्र सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष में शामिल रहे हैं। हालांकि, इनके बीच वैचारिक और क्षेत्रीय मतभेदों के कारण एकजुटता की कमी है, जिससे ये समूह राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी विपक्ष के रूप में उभरने में असमर्थ रहे हैं। कुर्द और बलूच जैसे सुन्नी मुस्लिम अल्पसंख्यक लंबे समय से शासन व्यवस्था से असंतुष्ट हैं। देश के पश्चिमी हिस्से में कुर्द समूहों ने अक्सर हथियारबंद विद्रोह किया है। वहीं, बलूचिस्तान क्षेत्र में स्थिति और अधिक जटिल है- कुछ समूह जहां केवल धार्मिक स्वतंत्रता की मांग करते हैं, वहीं कुछ चरमपंथी तत्व अल-कायदा जैसे संगठनों से जुड़े हुए हैं।

इजरायल के लॉन्ग-रेंज मिसाइल इंटरसेप्टर्स की आपूर्ति तेजी से खत्म हो रही है, 10 दिनों का ही स्टॉक बाकी

इजरायल ईरान के साथ जारी भीषण मिसाइल युद्ध में इजरायल भले ही ईरान के सैन्य ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाने का दावा कर रहा हो, लेकिन उसकी मिसाइल रक्षात्मक प्रणाली पर जबरदस्त दबाव बन गया है। अमेरिका की खुफिया रिपोर्टों के हवाले से वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) ने बताया कि इजरायल के लॉन्ग-रेंज मिसाइल इंटरसेप्टर्स की आपूर्ति तेजी से खत्म हो रही है, जिससे उसकी रक्षा क्षमताओं की स्थिरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ईरान ने पिछले शुक्रवार से अब तक इजरायल पर करीब 400 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। वहीं, इजरायल के पास लगभग 10–12 दिन का ही इंटरसेप्टर स्टॉक बचा है। यदि हमले इसी गति से जारी रहे तो इजरायल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आपको बता दें कि सिर्फ Arrow सिस्टम का एक इंटरसेप्टर लगभग 25 करोड़ रुपये का पड़ता है। इजरायली अखबार The Marker ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि रातभर के मिसाइल रक्षा पर 1 अरब शेकेल यानी कि 2380 करोड़ रुपये तक खर्च हो रहा है। “ऑपरेशन राइजिंग लायन” की शुरुआत के बाद से इजरायल ने ईरान पर कई हवाई हमले किए। सैन्य, परमाणु और संबंधित ठिकानों को निशाना बनाया गया। WSJ के अनुसार, इजरायल ने ईरान के तीन में से एक मिसाइल लॉन्चर को तबाह कर दिया है। हालांकि, ईरान की 2000 मिसाइलों में से आधे से अधिक अब भी उसके पास मौजूद हैं। उनमें से कई गुप्त भूमिगत ठिकानों में छिपी होने की आशंका है। मुश्किल में इजरायल इजरायल की मल्टी-लेयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम में Iron Dome, David’s Sling, Arrow और अमेरिका से मिली Patriot और THAAD शामिल हैं। ये सभी अब अत्यधिक दबाव में हैं। एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि सिस्टम पहले ही थक चुका है। जल्द ही इजरायल को यह तय करना पड़ सकता है कि कौन सी मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया जाए और किन्हें नहीं। इजरायल पर तेज हो रहे ईरान के हमले शुक्रवार की रात कुछ ईरानी मिसाइलें इजरायली डिफेंस सिस्टम को चकमा देते हुए तेल अवीव में आईडीएफ मुख्यालय के पास गिरीं। रविवार को, एक मिसाइल हमले के चलते हाइफा के पास एक तेल रिफाइनरी बंद करनी पड़ी। मंगलवार सुबह सोशल मीडिया वीडियो में तेल अवीव के उत्तर में खुफिया परिसर के पास कई मिसाइल विस्फोट देखे गए। अब तक इजरायल की सरकार ने 24 लोगों की मौत और 600 से अधिक घायल होने की पुष्टि की है। इजरायल के लिए अब सबसे महंगे और एडवांस्ड डिफेंस शील्ड को बचाए रखने की चुनौती गंभीर होती जा रही है। ऐसे में यदि अमेरिका से जल्द इंटरसेप्टर की आपूर्ति या प्रत्यक्ष सैन्य मदद नहीं मिलती है तो इजरायल की रक्षा प्रणाली अगले कुछ दिनों में चरमरा सकती है।  

चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत से अधिक रहेगी:ICRA

नई दिल्ली चालू वित्त वर्ष (2025-26) के लिए भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत से अधिक रहेगी। यह अनुमान लीडिंग रेटिंग एजेंसी इक्रा का है। एजेंसी ने अपने आउटलुक में कहा कि इसी अवधि के दौरान देश की वास्तविक सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) वृद्धि 6.3 प्रतिशत से अधिक होगी। जहां जीडीपी देश के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को निर्धारित करता है, वहीं जीवीए उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य में से मध्यवर्ती वस्तुओं और सेवाओं की लागत को घटाने पर प्राप्त होता है। महंगाई दर पर क्या है अनुमान रिपोर्ट में कहा गया है कि मुद्रास्फीति के संबंध में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर के 4.2 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान है, जबकि थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) चालू वित्त वर्ष के लिए 2.7 प्रतिशत से अधिक रहेगा। इक्रा ने राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। इक्रा के अनुसार, रबी के नकदी प्रवाह और सामान्य से अधिक जलाशय स्तर की सहायता से ग्रामीण मांग में तेजी बनी रहने की संभावना है। बजट में ऐलान का फायदा रेटिंग एजेंसी ने कहा कि 2025-26 के लिए केंद्रीय बजट में आयकर में बड़ी राहत, दरों में कटौती से ईएमआई (मासिक किस्त) में कमी और खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी से घरेलू खर्च योग्य आय में वृद्धि होने की उम्मीद है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के वस्तु निर्यात में सुस्ती निकट भविष्य में भी जारी रह सकती है। इक्रा के अनुमान के अनुसार, सेवा निर्यात वस्तु निर्यात वृद्धि से आगे निकलने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र का पूंजीगत व्यय 2025-26 में 10.1 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जिससे निवेश गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। आरबीआई का अनुमान चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आरबीआई ने जीडीपी की वृद्धि दर के अनुमान को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2024-25 में 6.5 प्रतिशत दर्ज की गई थी और इसके 2025-26 में भी इतना ही रहने का अनुमान लगाया गया है।

नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान 3000 रुपये में मिलेगा सालभर का FASTag पास

नई दिल्ली केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार 18 जून को बड़ा ऐलान किया है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, “हम 3,000 रुपये की कीमत वाला फास्टैग-आधारित वार्षिक पास पेश कर रहे हैं, जो 15 अगस्त 2025 से प्रभावी होगा. एक्टिवेशन की तारीख से एक वर्ष या 200 यात्राओं तक के लिए वैध – जो भी पहले हो – यह पास विशेष रूप से गैर-व्यावसायिक निजी वाहनों जैसे कार, जीप और वैन के लिए डिज़ाइन किया गया है. लंबे समय से इस बात की चर्चा हो रही थी कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय देश भर में एक नई टोल नीति (Toll Policy) लाने की योजना बना रहा है. जिसके तहत देश भर में टोल प्लाजाओं पर यात्रा को सुलभ बनाने के लिए कई नई सुविधाएं दी जाएंगी. इस बीच केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सभी अटकलों को खत्म करते हुए आज सोशल नेटवर्किंग साइट ‘X’ के जरिए फास्टैग एनुअल पास को जारी करने का ऐलान किया है. तो आइये जानें कब और कैसे ये पास जारी होगा और इसे प्राप्त करने के लिए यूजर्स को क्या करना होगा.   Annual FASTag Pass:  नितिन गडकरी ने आज सोशल मीडिया के जरिए देश भर में वार्षिक फास्टैग पास (Annual FASTag Pass) को जारी करने की घोषणा की है. इस एनुअल पास के लिए यूजर्स को साल भर में केवल एक बार 3,000 रुपये की रकम खर्च करनी होगी. जिसके बाद ये पास यूजर को जारी कर दिया जाएगा. सरकार का कहना है कि, ये पास एक्टिव होने के बाद 1 साल या 200 यात्राओं (इसमें से जो भी पहले आए) तक के लिए वैलिड रहेगा. यानी यदि समय के पहले 200 ट्रिप्स पूरे हो जाते हैं तो यूजर्स को एक बार फिर से पास रिन्यू करना होगा.  15 अगस्त से मिलेगा एनुअल पास: नितिन गडकरी ने अपने पोस्ट में कहा कि, “एक ऐतिहासिक पहल के तहत, आगामी 15 अगस्त 2025 से 3,000 रुपये की कीमत वाला FASTag बेस्ड वार्षिक पास शुरू किया जा है. यह पास एक्टिव होने की तिथि से एक वर्ष तक या 200 यात्राओं तक, जो भी पहले हो, वैलिड रहेगा. ऐसी की महत्वपूर्ण घोषणा एक ऐतिहासिक पहल के तहत, 15 अगस्त 2025 से ₹3,000 की कीमत वाला FASTag आधारित वार्षिक पास शुरू किया जा है. यह पास सक्रिय होने की तिथि से एक वर्ष तक या 200 यात्राओं तक, जो भी पहले हो, वैध रहेगा. यह पास केवल गैर-व्यावसायिक निजी वाहनों (कार, जीप, वैन आदि) के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है और यह देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर निर्बाध यात्रा को संभव बनाएगा. वार्षिक पास के सक्रियण/नवीनीकरण के लिए जल्द ही राजमार्ग यात्रा ऐप और NHAI / MoRTH की वेबसाइट्स पर एक अलग लिंक उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे प्रक्रिया सरल और सुगम होगी. यह नीति 60 किलोमीटर के दायरे में स्थित टोल प्लाज़ाओं को लेकर लंबे समय से चली आ रहें कन्सर्न्स को अधोरेखित करेगी और एक ही सुलभ लेनदेन के माध्यम से टोल भुगतान को सहज बनाएगी. प्रतीक्षा समय घटाकर, भीड़ कम कर और टोल प्लाज़ाओं पर विवाद को समाप्त कर, वार्षिक पास नीति लाखों निजी वाहन चालकों के लिए तेज़, सुगम और बेहतर यात्रा अनुभव के लिए प्रतिबद्ध है. केवल इन वाहनों को जारी होगा पास:  बता दें कि, यह पास केवल गैर-व्यावसायिक निजी वाहनों (कार, जीप, वैन आदि) के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है. यह देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों के लिए लागू होगा. इसमें व्यवसायिक वाहन शामिल नहीं हैं. कैसे मिलेगा एनुअल फास्टैग पास: सरकार इस एनुअल पास को सभी यूजर्स के लिए सुगमता से उपलब्ध कराने के लिए तेजी से काम कर रही है. इस पास को एक्टिव या रिन्यू कराने के लिए जल्द ही राजमार्ग यात्रा ऐप और NHAI / MoRTH की वेबसाइट्स पर एक अलग लिंक उपलब्ध कराया जाएगा. जिसके माध्यम से यूजर्स इस लिंक पर विजिट कर एनुअल पास प्रास्त कर सकेंगे. केंद्रीय मंत्री ने अपने पोस्ट में कहा कि, यह नई नीति 60 किलोमीटर के दायरे में स्थित टोल प्लाज़ाओं को लेकर लंबे समय से चली आ रहें कन्सर्न्स को भी संरेखित करेगी और एक ही सुलभ लेनदेन के माध्यम से टोल भुगतान को सहज बनाएगी. इस वार्षिक फास्टैग पास से कई तरह के लाभ होने की उम्मीद है. इससे यूजर्स को बार-बार फॉस्टैग रिचार्ज करने के झंझट से भी मुक्ति मिलेगी. FASTag Annul Pass पर सरसरी नज़र:     15 अगस्त से होगा शुरू     3,000 रुपये होगी पास की कीमत     1 साल या 200 ट्रिप्स के लिए होगा वैलिड     NHAI / MoRTH की वेबसाइट्स से होगा एक्टिव     केवल प्राइवेट वाहनों के लिए होगा लागू     टोल प्लाजाओं पर वेटिंग होगी कम     टोल प्लाजाओं पर होने वाले विवादों से भी बचा जा सकेगा कम होगा वेटिंग टाइम: FASTag एनुअल पास के जारी होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाओं पर वेटिंग टाइम भी घट जाएगा. इससे भीड़ को कम करने और टोल प्लाज़ाओं पर विवाद को समाप्त करने में भी मदद मिलेगी. वार्षिक पास पॉलिसी लाखों निजी वाहन चालकों के लिए तेज़, सुगम और बेहतर यात्रा अनुभव प्रदान करने में मदद करेगा.   पहले ये शिकायतें मिलती थीं पहले कई लोग शिकायत करते थे कि उनके घर के 60 किलोमीटर के दायरे में अगर टोल प्लाजा है, तो उन्हें बार-बार टोल देना पड़ता है. यहां से बार-बार गुजरना उनकी मजबूरी है अब ये वार्षिक पास इस प्रॉब्लम को हल करेगा. अब हर बार टोल देने की जरूरत नहीं.

बिना शर्त सरेंडर! हम जानते हैं कहां छिपा हैं खामेनेई …अमेरिका ने रवाना किए 30 फाइटर जेट

वाशिंगटन ईरान और इजरायल जंग के बीच भीषण जंग चल रही है. इजरायल की राजधानी तेल अवीव पर ईरान ने हाइपरसोनिक मिसाइलों से हमला कर कहर बरपा दिया है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बुधवार को कहा कि इजरायल पर नवीनतम हमले के दौरान हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था. दोनों देशों के बीच लड़ाई छठे दिन में प्रवेश कर गई है. इधर इजरायल की वायु सेना ने भी कहा है कि उन्होंने तेहरान में फिर से कई क्षेत्रों को निशाना बनाया है.  इजरायली हमले में अबतक ईरान के 585 लोगों की मौत हो चुकी है और 1326 लोग घायल हो चुके हैं. जबकि ईरान के हमले में अबतक 24 इजरायलियों की मौत हो चुकी है. दोनों कट्टर दुश्मनों के बीच एक दूसरे पर हमले की ताजा फेज तब शुरू हुई जब इस युद्ध को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार बयान आ रहे हैं. ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त सरेंडर करने को है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ट्रूथ सोशल पर बड़े-बड़े बोल्ड अक्षरों में लिखा- UNCONDITIONAL SURRENDER. ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के लिए तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि हमें ठीक ठीक पता है कि तथाकथित सुप्रीम लीडर कहा छिपा हुआ है. वह एक आसान टारगेट है लेकिन अभी वह सेफ है. हम उसे अभी नहीं मारने जा रहे हैं, कम से कम अभी तो नहीं मार रहे हैं. लेकिन हम नहीं चाहते हैं कि मिसाइलों से नागरिकों पर हमला किया जाए और अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया जाए. हमारा धैर्य जवाब दे रहा है. इस बीच बीबीसी की ओर से वेरिफाई किए गए उड़ान ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि पिछले तीन दिनों में कम से कम 30 अमेरिकी सैन्य विमानों को अमेरिका के ठिकानों से यूरोप भेजा गया है. ये सभी अमेरिकी सैन्य टैंकर विमान हैं जिनका इस्तेमाल लड़ाकू विमानों और बमवर्षकों को ईंधन भरने के लिए किया जाता है. लेकिन ट्रंप की धमकियों से बेपरवाह ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने एक्स पर ही अमेरिका और इजरायल को करारा जवाब दिया है और टॉप जनरलों और वैज्ञानिकों की मौत के बावजूद जंग में टिके रहने की मंशा जताई है.  अली खामेनेई ने एक्स पर लिखा है कि ने अपने पहले ट्वीट में लिखा है, The battle begins. यानी कि युद्ध अब शुरू हुआ है. खामेनेई ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “हमें आतंकवादी ज़ायोनी शासन को कड़ा जवाब देना चाहिए. हम यहूदियों पर कोई रहम नहीं दिखाएंगे. अली खामेनेई एक तरफ ट्वीट कर रहे थे दूसरी ओर ईरानी सेना इजरायल पर हमले के लिए मिसाइलों की लॉन्चिंग कर रही थी.  ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने सरकारी टेलीविजन पर एक बयान जारी कर दावा किया है कि ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस -3 की 11वीं लहर में एक विध्वसंक हमले को अंजाम दिया गया है और फतह-1 हाइपरसोनिक मिसाइलों से इजरायल पर हमला किया गया है. रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि ईरानी सेना ने इजरायल द्वारा कब्जे वाले क्षेत्रों के आसमान पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है. तेल अवीव पर ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट करते हुए इजरायली मिसाइल डिफेंस सिस्टम (AP) हाइपरसोनिक मिसाइलें ऐसी मिसाइलें हैं जो ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक (मैक 5 या उससे ज्यादा) की गति से उड़ती हैं. ये अत्यधिक तेज, सटीक और चालाकी से लक्ष्य को भेदने में सक्षम होती हैं, जिससे इन्हें रडार और रक्षा प्रणालियों द्वारा पकड़ना मुश्किल होता है. ईरान ने इजरायल के दूसरे ठिकानों पर भी हमला किया है. इजरायल ने कहा है कि एक घंटे से भी कम समय में ईरान से इजरायल की ओर कम से कम 30 मिसाइलें दागी गईं, जिनमें तेल अवीव समेत कई इलाके शामिल थे. इजरायल फायर एंड रेस्क्यू सर्विसेज के अनुसार मिसाइलों के हमले की वजह से तटीय, दक्षिणी और मध्य क्षेत्रों में खुले इलाकों में कई जगह आग लग गई. इससे पहले, मध्य और उत्तरी इजरायल में कई जगहों पर सायरन की आवाजें सुनी गईं.  टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार ईरान ने पहली बमबारी रात 12:40 (स्थानीय समय) बजे शुरू की. इससे पहले ही इजरायल के एक बड़े हिस्से में सायरन बजने शुरू हो गए थे. इस हमले में लगभग 15 प्रोजेक्टाइल शामिल थे. लगभग 10 रॉकेटों की अगली बौछार लगभग 40 मिनट बाद शुरू हुई और इसने मध्य इजरायली समुदायों और वेस्ट बैंक की कई बस्तियों में अलर्ट जारी कर दिया. हमलों से कई मिनट पहले इजरायली रक्षा बलों ने मिसाइल फायर की निवासियों को चेतावनी देते हुए अलर्ट जारी किया और उन्हें आश्रय लेने का निर्देश दिया. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई ने मंगलवार देर रात X पर लिखा- जंग शुरू होती है। हम आतंकी यहूदी शासन को कड़ा जवाब देंगे। उन पर कोई दया नहीं दिखाएंगे। इस ऐलान के बाद ईरान ने इजराइल पर 25 मिसाइलें दागी हैं। ईरान-इजराइल के बीच पिछले 5 दिनों से हिंसक संघर्ष जारी था, अब खामेनेई की पोस्ट को जंग का अधिकारिक ऐलान माना जा रहा है। यानी अब इसे संघर्ष की बजाय जंग कहा जाएगा। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जल्द अमेरिका भी इसमें शामिल हो सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से आने के बाद व्हाइट हाउस में नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ बैठक की। इसके बाद अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में और ज्यादा फाइटर जेट्स भेजने का फैसला किया। ईरान-इजराइल के बीच लड़ाई में अब तक 224 ईरानी मारे जा चुके हैं, जबकि 1,277 घायल हुए हैं। वहीं, इजराइल में अब तक 24 की मौत हुई है, जबकि 600 से ज्यादा घायल हैं। इजरायल का हमला जारी इस बीच इजरायल का भी तेहरान पर जवाबी हमला जारी है. आईडीएफ ने बुधवार को तेहरान के डिस्ट्रिक्ट 18 के निवासियों को क्षेत्र छोड़ने के लिए एक अलर्ट जारी किया, इजरायली सेना ने कहा है कि वह सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर क्षेत्र में कार्रवाई करने जा रहा है. इसके तुरंत बाद सेना ने घोषणा की कि इजरायली वायु सेना ने ईरान की राजधानी में हमलों की एक नई लहर शुरू की है. तेहरान में हमलों के साथ-साथ ईरानी समाचार वेबसाइटों ने राजधानी के पास खोजिर मिसाइल प्रोडक्शन सेंटर और करज शहर में विस्फोटों की सूचना दी. यहां इजरायल ने … Read more

भारत के शुभांशु शुक्ला का मिशन Axiom-4 को 22 जून तक के लिए स्थगित, AI से पड़ेगा नौकरियों पर असर

नई दिल्ली  भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला समेत चार अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) ले जाने वाले मिशन एक्सिओम-4 को 22 जून तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। एक्सिओम स्पेस ने बुधवार को यह घोषणा की। भारत, हंगरी और पोलैंड के यात्रियों को अंतरिक्ष में ले जाने वाला यह मिशन पहले 19 जून को निर्धारित था। मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से आईएसएस भेजा जाना है। एक्सिओम स्पेस ने एक बयान में कहा, “नासा, एक्सिओम स्पेस और स्पेसएक्स अब एक्सिओम मिशन 4 को 22 जून को आईएसएस में भेजने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं।”  Axiom-4 मिशन क्या है? Axiom Mission 4 एक निजी अंतरिक्ष मिशन है, जो Axiom Space, NASA और SpaceX के सहयोग से संचालित हो रहा है. यह मिशन SpaceX की Falcon 9 रॉकेट और Crew Dragon अंतरिक्ष यान के जरिए चार अंतरिक्ष यात्रियों को ISS तक ले जाएगा. इस मिशन में भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला शामिल हैं, जो ISRO की ओर से पायलट की भूमिका निभाएंगे. उनके साथ पोलैंड और हंगरी के अंतरिक्ष यात्री भी होंगे. मिशन की अवधि 14 दिन होगी, जिसमें अंतरिक्ष यात्री ISS पर रहकर वैज्ञानिक प्रयोग, अनुसंधान और जन-जागरूकता गतिविधियां करेंगे. यह मिशन भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, गगनयान के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ISRO को भविष्य के मिशनों के लिए अनुभव प्रदान करेगा. क्यों हुई लॉन्च में देरी? Axiom-4 मिशन की शुरुआत पहले 29 मई 2025 के लिए निर्धारित थी, लेकिन कई तकनीकी और पर्यावरणीय कारणों से इसे कई बार स्थगित करना पड़ा. प्रमुख कारणों में शामिल हैं… क्यों हुई लॉन्च में देरी? Axiom-4 मिशन की शुरुआत पहले 29 मई 2025 के लिए निर्धारित थी, लेकिन कई तकनीकी और पर्यावरणीय कारणों से इसे कई बार स्थगित करना पड़ा. प्रमुख कारणों में शामिल हैं…     Falcon 9 रॉकेट में रिसाव: SpaceX की Falcon 9 रॉकेट में लिक्विड ऑक्सीजन रिसाव की समस्या पाई गई थी, जिसे अब ठीक कर लिया गया है. रॉकेट का वेट ड्रेस रिहर्सल सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है.     Crew Dragon यान की समस्या: Crew Dragon के इलेक्ट्रिकल हार्नेस में खराबी के कारण लॉन्च को स्थगित करना पड़ा.     ISS के Zvezda मॉड्यूल में रिसाव: रूसी Zvezda मॉड्यूल में हवा के रिसाव की समस्या थी, जिसे रूसी कॉस्मोनॉट्स ने ठीक किया. अब दबाव स्थिर है, लेकिन NASA और Roscosmos इसकी और जांच कर रहे हैं.     मौसम की स्थिति: लॉन्च के रास्ते में खराब मौसम ने भी देरी का कारण बना.     चालक दल की तैयारी: अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत और प्रशिक्षण की जांच भी एक महत्वपूर्ण कारक है. सभी अंतरिक्ष यात्री क्वारंटाइन में हैं. पूरी तरह तैयार हैं. इन सभी मुद्दों को हल करने के लिए ISRO, पोलैंड और हंगरी की टीमें Axiom Space, NASA और SpaceX के साथ मिलकर काम कर रही हैं. 22 जून 2025: नई लॉन्च तारीख Axiom Space ने सभी तैयारियों का मूल्यांकन करने के बाद 22 जून 2025 को अगली संभावित लॉन्च तारीख घोषित की है। यह तारीख निम्नलिखित मापदंडों पर आधारित है…     Falcon 9 और Crew Dragon की स्थिति: SpaceX ने रॉकेट और अंतरिक्ष यान की सभी समस्याओं को ठीक कर लिया है.     Zvezda मॉड्यूल की मरम्मत: ISS के रूसी मॉड्यूल में रिसाव को ठीक करने के बाद दबाव स्थिर है.     मौसम की अनुकूलता: लॉन्च कॉरिडोर में मौसम की स्थिति अब अनुकूल होने की उम्मीद है. लॉन्च NASA के कैनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से होगा. लिफ्टऑफ का समय भारतीय समयानुसार दोपहर 2:23 बजे के आसपास का है.     Axiom-4 मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं… पेगी व्हिट्सन (कमांडर): पूर्व NASA अंतरिक्ष यात्री और Axiom Space की मानव अंतरिक्ष उड़ान निदेशक. यह उनका दूसरा निजी अंतरिक्ष मिशन होगा. शुभांशु शुक्ला (पायलट): ISRO के अंतरिक्ष यात्री और भारतीय वायुसेना के पायलट. वह भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री होंगे, जो ISS पर जाएंगे. स्लावोश उज़नांस्की-विस्निव्स्की (मिशन विशेषज्ञ): यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के पोलिश अंतरिक्ष यात्री. यह पोलैंड का दूसरा अंतरिक्ष मिशन है. टिबोर कपु (मिशन विशेषज्ञ): हंगरी के HUNOR कार्यक्रम के तहत चुने गए अंतरिक्ष यात्री. यह हंगरी का दूसरा अंतरिक्ष मिशन है. मिशन के उद्देश्य Axiom-4 मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री कई वैज्ञानिक प्रयोग और गतिविधियां करेंगे… ISRO के प्रयोग: शुभांशु शुक्ला सात प्रयोग करेंगे, जिनमें माइक्रोग्रैविटी में सूक्ष्मजीवों का अध्ययन, मांसपेशियों के पुनर्जनन और अंतरिक्ष में फसलों की वृद्धि शामिल है. पोलैंड और हंगरी के प्रयोग: इन देशों के अंतरिक्ष यात्री भी अपने वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे, जैसे कि माइक्रोग्रैविटी में मानव आवाज और संज्ञानात्मक कार्यों का विश्लेषण. जन-जागरूकता: हंगरी का SUMIMANT प्रोजेक्ट बच्चों और युवाओं में अंतरिक्ष के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा. कुल मिलाकर, इस मिशन में 31 देशों की 60 वैज्ञानिक गतिविधियां शामिल हैं, जो इसे अब तक का सबसे बड़ा Axiom मिशन बनाती हैं. भारत के लिए महत्व Axiom-4 मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक मील का पत्थर है. यह मिशन न केवल ISRO की तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करता है, बल्कि गगनयान मिशन की तैयारियों को भी मजबूत करता है. गगनयान भारत का पहला स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष मिशन होगा, जो 2026 में तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर की कक्षा में ले जाएगा.  शुभांशु शुक्ला का ISS पर अनुभव ISRO को भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station) बनाने में मदद करेगा. यह मिशन भारत की आत्मनिर्भरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी दर्शाता है.

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