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‘मेरा भारत किसी मध्यस्थता को नहीं मानता, न पहले, न अब’, जानिए मोदी और ट्रंप की 35 मिनट की बातचीत में क्या-क्या हुआ?

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से साफ शब्दों में कहा है कि भारत किसी भी सूरत में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता। न पहले की, न अब करता है और न ही भविष्य में ऐसा होगा। जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान यह संदेश सीधे तौर पर ट्रंप को फोन पर दिया गया, क्योंकि कार्यक्रम के अनुसार तय आमने-सामने की मुलाकात इजरायल-ईरान संकट के चलते संभव नहीं हो सकी। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि फोन पर यह बातचीत राष्ट्रपति ट्रंप के आग्रह पर हुई, जो लगभग 35 मिनट तक चली। इस दौरान पीएम मोदी ने भारत की नीति स्पष्ट करते हुए कहा कि कश्मीर या पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों में भारत का रुख हमेशा से यही रहा है कि यह द्विपक्षीय मामला है और किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार्य नहीं है। 35 मिनट चली बातचीत प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात G7 समिट के दौरान होनी तय थी लेकिन ट्रंप को जल्दी वापस अमेरिका लौटना पड़ा, जिस कारण यह मुलाकात नहीं हो पाई. इसके बाद, ट्रंप के आग्रह पर आज दोनों लीडर्स की फोन पर बात हुई. यह बातचीत लगभग 35 मिनट चली. 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने फोन पर प्रधानमंत्री मोदी को शोक संवेदना प्रकट की थी और आतंक के खिलाफ समर्थन व्यक्त किया था. उसके बाद से दोनों नेताओं की यह पहली बातचीत थी. ऑपरेशन सिंदूर पर हुई विस्तार से चर्चा प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप से ऑपरेशन सिंदूर के बारे में विस्तार से बात की. पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को स्पष्ट रूप से कहा कि 22 अप्रैल के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने का अपना दृढ़ संकल्प पूरी दुनिया को बता दिया था. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 6-7 मई की रात को भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सिर्फ आतंकी ठिकानों को ही निशाना बनाया था. भारत की कार्रवाई बहुत ही ‘संतुलित, सटीक और तनाव बढ़ाने से बचने वाली’ थी. जेडी वेंस ने किया था पीएम मोदी को फोन विक्रम मिस्री ने बताया, ‘भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि पाकिस्तान की गोली का जवाब भारत गोले से देगा. 9 मई की रात को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया था. उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा था कि पाकिस्तान भारत पर बड़ा हमला कर सकता है. प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें साफ शब्दों में बताया था कि यदि ऐसा होता है, तो भारत पाकिस्तान को उससे भी बड़ा जवाब देगा. 9-10 मई की रात को पाकिस्तान के हमले का भारत ने बहुत सशक्त जवाब दिया और पाकिस्तान की सेना को बहुत नुकसान पहुंचाया.’ ‘सीजफायर या ट्रेड डील पर कभी बात नहीं हुई’ उन्होंने बताया, ‘भारत ने पाकिस्तान के मिलिट्री एयरबेसस को निष्क्रिय कर दिया था. भारत के मुहतोड़ जवाब के कारण पाकिस्तान को भारत से सैन्य कारवाई रोकने का आग्रह करना पड़ा. प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को स्पष्ट रूप से कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कभी भी, किसी भी स्तर पर, भारत-अमेरिका ट्रेड डील या अमेरिका की ओर से भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता जैसे विषयों पर बात नहीं हुई थी. सैन्य कारवाई रोकने की बात सीधे भारत और पाकिस्तान के बीच, दोनों सेनाओं के मौजूदा चैनलों के माध्यम से हुई थी और पाकिस्तान के ही आग्रह पर हुई थी.’ ‘अभी भी जारी है ऑपरेशन सिंदूर’ प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत ने न तो कभी मध्यस्थता स्वीकार की थी, न करता है और न ही कभी करेगा. इस विषय पर भारत में पूर्ण रूप से राजनीतिक एकमत है. राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री की ओर से विस्तार में बताई गई बातों को समझा और आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई के प्रति समर्थन व्यक्त किया. प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत अब आतंकवाद को प्रॉक्सी वॉर नहीं, युद्ध के रूप में ही देखता है और भारत का ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है. पीएम मोदी ने दिया भारत आने का निमंत्रण राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा कि क्या वह कनाडा से वापसी में अमेरिका रुक कर जा सकते हैं. पूर्व-निर्धारित कार्यक्रमों के कारण, प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी असमर्थता व्यक्त की. दोनों लीडर्स ने तब तय किया कि वे निकट भविष्य में मिलने का प्रयास करेंगे. राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष पर भी चर्चा की. रूस-यूक्रेन तनाव पर दोनों ने सहमति जताई कि जल्द से जल्द शांति के लिए, दोनों पक्षों में सीधी बातचीत आवश्यक है और इसके लिए प्रयास करते रहना चाहिए. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के संबंध में दोनों नेताओ ने अपने परिपेक्ष साझा किए. और इस क्षेत्र में QUAD की अहम भूमिका के प्रति समर्थन जताया. QUAD की अगली बैठक के लिए, प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को भारत यात्रा का निमंत्रण दिया. राष्ट्रपति ट्रंप ने निमंत्रण स्वीकार करते हुए कहा कि वे भारत आने के लिए उत्सुक हैं. भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव पर स्थिति की स्पष्ट बातचीत में प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच जो सैन्य तनाव देखा गया, उसमें अमेरिका या किसी अन्य देश की मध्यस्थता नहीं हुई। सीमावर्ती सैन्य कार्रवाई रोकने से जुड़ी जो बातचीत हुई, वह दोनों देशों की सेनाओं के बीच पहले से मौजूद सैन्य चैनलों के ज़रिए हुई थी, और वह भी पाकिस्तान की पहल पर। इस बातचीत में पीएम मोदी ने ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की जानकारी भी राष्ट्रपति ट्रंप को दी। यह वही ऑपरेशन था जिसमें भारत ने सीमापार आतंकवाद को जवाब देने के लिए ठोस सैन्य कार्रवाई की थी। इस मुद्दे पर भी ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी से चर्चा की और पहले की तरह भारत को आतंकवाद के खिलाफ समर्थन का भरोसा दिया। विदेश सचिव ने बताया कि पीएम मोदी ने इस दौरान ट्रंप को भारत आने का निमंत्रण भी दिया। हालांकि यात्रा की तिथि और स्वरूप को लेकर अभी कोई घोषणा नहीं हुई है। यह वार्ता ऐसे समय हुई जब भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर नई चर्चाएं चल रही हैं और दक्षिण एशिया में भारत की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक समीकरण तेज हो रहे हैं। ऐसे में पीएम मोदी की … Read more

ईरान पर इजरायल के घातक हमले से चीन में खलबली, बढ़ते तनाव के बीच चीन ने नागरिकों से इजराइल छोड़ने को कहा

नई दिल्ली ईरान और इजरायल के बीच जारी जंग का असर चीन पर भी पड़ता नजर आ रहा है। खबर है कि ईरान से मिलने वाले सस्ते तेल पर चीन खासा निर्भर है और उसके पास इसका कोई और विकल्प नहीं है। हालांकि, इसे लेकर चीन या ईरान की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। इजरायल ने ऑपरेशन राइजिंग लॉयन के तहत शुक्रवार को ईरान पर एयर स्ट्राइक कर दी थी। तब से ही दोनों देशों में संघर्ष जारी है। न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के डिस्काउंट रेट पर मिलने वाले तेल पर निर्भर होने और दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण चीन उर्जा सुरक्षा संकट का सामना कर रहा है। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि रूसी तेल का एक विकल्प है, लेकिन उसकी सीमित सप्लाई है और सिर्फ करीब 1 डॉलर प्रति बैरल का डिस्काउंट देता है। वहीं, वेनेजुएला का तेल कमजोर गुणवत्ता का माना जाता है। साथ ही इसके चीन तक ट्रांसपोर्ट किए जाने में भी परेशानियां हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा कि ईरान का पतन होता है, तो इससे न सिर्फ ऊर्जा संकट खड़ा हो जाएगा, बल्कि चीन की अर्थव्यवस्था पर भी खतरा मंडराने लगेगा। इसके अलावा ईरान में शासन परिवर्तन होता है, तो संभव है कि ईरान दोबारा डॉलर पर व्यापार करने लगे, जिससे चीन की मुद्रा पर भी असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि अगर ऐसा होता, तो चीन को हर साल 20-30 बिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है, क्योंकि ईरान का तेल एक बार फिर खुले बाजार में पहुंच जाएगा। सूत्रों ने चैनल को बताया है कि मौजूदा शासन का पतन BRI यानी बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव के तहत ईरान और मध्य एशिया में चीन की डील को भी नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि ईरान पर पश्चिमी देशों की पाबंदियां हैं, जिसके चलते चीन के पास मोल भाव करने की शक्तियां हैं और वह ईरानी तेल का बड़ा खरीदार है। सूत्रों ने यह भी कहा है कि इस सुविधा के खत्म होने और डिस्काउंट रेट पर तेल नहीं मिलने का खासा असर टीपॉट रिफाइनरी पर होगा। उन्होंने बताया कि अगर ये डिस्काउंट खत्म होता है, तो ऐसी 40 फीसदी रिफाइनरी बंद हो सकती है, जिसके चलते नौकरियां जाना और ईंधन की कमी जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।

दिल्ली से बाली जा रहा एयर इंडिया का विमान लौटा वापस; जानें क्या है वजह?

नई दिल्ली  इंडोनेशिया के बाली हवाई अड्डे के पास माउंट लेवोटोबी लाकी-लाकी में हुए ज्वालामुखी विस्फोट के कारण एयर इंडिया की फ्लाइट AI2145 को बुधवार सुबह दिल्ली लौटना पड़ा। यह उड़ान दिल्ली से बाली के लिए रवाना हुई थी। लेकिन सुरक्षा कारणों से इसे वापस बुला लिया गया। एयर इंडिया ने अपने बयान में कहा कि यह निर्णय यात्रियों और चालक की सुरक्षा के लिए हुए लिया गया। फ्लाइट दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतर गई। और सभी यात्रियों को विमान से सुरक्षित उतार लिया गया।   ज्वालामुखी विस्फोट का प्रभाव मंगलवार शाम को पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में स्थित माउंट लेवोटोबी लाकी-लाकी में विस्फोट हुआ। जिसके बाद राख का विशाल बादल 10,000 मीटर से अधिक ऊंचाई तक फैल गया। यह राख हवाई यात्रा के लिए खतरा बन सकती थी। इससे विमान के इंजन को खतरा था। इस घटना के कारण न केवल एयर इंडिया, बल्कि वर्जिन ऑस्ट्रेलिया, जेटस्टार, और सिंगापुर की टाइगरएयर जैसी कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द करना पड़ा या उनके रास्ते बदलने पड़े। नवंबर 2024 में इस ज्वालामुखी के विस्फोटों में 9 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया था।   एयर इंडिया की प्रतिक्रिया एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा “18 जून 2025 को फ्लाइट AI2145 को बाली के पास ज्वालामुखी विस्फोट की खबरों के कारण दिल्ली लौटने का निर्देश दिया गया। विमान सुरक्षित रूप से उतरा और सभी यात्री सुरक्षित हैं।” एयरलाइन ने प्रभावित यात्रियों के लिए होटल में ठहरने की व्यवस्था की है और मुफ्त उड़ान को दुबारा से उड़ान भरी जाएगी। साथ ही यात्रियों को हुई असुविधा के लिए एयर इंडिया ने खेद व्यक्त किया और कहा कि वे स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।   बाली हवाई अड्डे पर उड़ान अभी भी प्रभावित है और विशेषज्ञों का कहना है कि ज्वालामुखी की गतिविधि अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकती है। एयर इंडिया और अन्य एयरलाइंस स्थिति सामान्य होने तक बाली के लिए उड़ानें सीमित रख सकती हैं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी उड़ान की स्थिति की जांच करते रहें।

पीएम मोदी ने वैश्विक समुदाय को दोहरे मापदंड छोड़ने की नसीहत दी, किसी भी प्रकार की लापरवाही या तटस्थता अब बर्दाश्त नहीं

नई दिल्ली  जी-7 शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद, व्यापार और विकास जैसे अहम वैश्विक मुद्दों पर दुनिया के प्रमुख नेताओं के साथ बातचीत की। कनाडा के कनानास्किस में आयोजित जी-7 आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति को दोहराया और इस वैश्विक खतरे के खिलाफ एकजुट होकर निर्णायक कार्रवाई की मांग की। “आतंक समर्थक देशों को इसकी कीमत चुकानी होगी” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए हमारी सोच और नीति स्पष्ट होनी चाहिए- यदि कोई देश आतंकवाद का समर्थन करता है, तो उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।” उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कार्रवाई में दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा, “एक ओर हम अपनी पसंद के अनुसार विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध जल्दी से लगा देते हैं, वहीं दूसरी ओर जो देश खुलेआम आतंकवाद का समर्थन करते हैं, उन्हें पुरस्कृत किया जाता है। यह दोहरी नीति बंद होनी चाहिए।” विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने एक्स पर जानकारी देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को दोहराया और पहलगाम में हुए जघन्य आतंकी हमले की निंदा करने के लिए नेताओं का आभार जताया। उन्होंने आतंकवाद को बढ़ावा देने और समर्थन देने वालों के खिलाफ सख्त वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।” पीएम मोदी ने जी-7 मंच से ग्लोबल साउथ के मुद्दे भी उठाए गौरतलब है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। प्रधानमंत्री ने जी-7 नेताओं के साथ अपनी बातचीत को “उत्पादक” बताया और कहा कि चर्चा वैश्विक चुनौतियों और बेहतर भविष्य की आशाओं पर केंद्रित रही। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान ‘ग्लोबल साउथ’ की चिंताओं और प्राथमिकताओं पर ध्यान दिए जाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को वैश्विक मंच पर पहुंचाना अपनी जिम्मेदारी समझता है। ‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों के संदर्भ में किया जाता है। ‘ग्रुप ऑफ सेवन’ (जी-7) दुनिया की सात उन्नत अर्थव्यवस्थाओं – फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, इटली और कनाडा तथा यूरोपीय संघ का एक अनौपचारिक समूह है। इसके सदस्य वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए हर साल जी-7 शिखर सम्मेलन में मिलते हैं। शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी ने कई द्विपक्षीय मुलाकातें भी कीं। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी एल्बानीज के साथ मुलाकात की। इन बैठकों में व्यापारिक सहयोग, निवेश बढ़ाने और वैश्विक आर्थिक साझेदारी मजबूत करने पर चर्चा हुई। इन मुद्दों पर भी बोले पीएम मोदी मोदी ने कहा, ‘‘उपलब्धता, पहुंच, सामर्थ्य, स्वीकार्यता के मूलभूत सिद्धांतों पर आगे बढ़ते हुए भारत ने समावेशी विकास का मार्ग चुना है।’’ जायसवाल ने बताया कि मोदी ने अपने संबोधन में एक स्थायी एवं हरित मार्ग के माध्यम से सभी के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और इस उद्देश्य की दिशा में भारत की वैश्विक पहलों जैसे कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन के बारे में विस्तार से बताया। मोदी ने कहा, ‘‘एआई (कृत्रिम मेधा) अपने आप में एक ऐसी प्रौद्योगिकी है जिसके लिए बहुत ऊर्जा की आवश्यकता है। अगर प्रौद्योगिकी-संचालित समाज की ऊर्जा आवश्यकताओं को स्थायी रूप से पूरा करने का कोई तरीका है तो वह नवीनीकृत ऊर्जा के माध्यम से ही है।’’ उन्होंने कहा कि पिछली सदी में ऊर्जा के लिए प्रतिस्पर्धा थी लेकिन इस सदी में ‘‘हमें प्रौद्योगिकी के लिए सहयोग करना होगा।’’ मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘डीप-फेक’ बड़ी चिंता का विषय है इसलिए एआई की मदद से बनाई गई सामग्री पर स्पष्ट घोषणा अंकित होनी चाहिए कि यह कृत्रिम मेधा की मदद से बनाई गई है। तस्वीर या वीडियो में किसी व्यक्ति के चेहरे या शरीर को डिजिटल रूप से बदलने की प्रौद्योगिकी को ‘डीपफेक’ कहते हैं। ‘मशीन लर्निंग’ और एआई से बने ये वीडियो और तस्वीरें असली जैसी नजर आती हैं और कोई भी व्यक्ति इन्हें देखकर धोखा खा सकता है। कनाडा से सुधरेंगे रिश्ते भारत और कनाडा के बीच कुछ समय से चले आ रहे राजनयिक तनाव को समाप्त करने की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल हुई। दोनों देशों ने नए उच्चायुक्तों की नियुक्ति पर सहमति जताई, जिससे वीजा, वाणिज्य और अन्य सेवाएं सामान्य हो सकेंगी। जी-7 सम्मेलन में पीएम मोदी की भागीदारी भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देखी जा रही है, जहां भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख और विकासशील देशों की आवाज को बुलंद किया।

ग्राहक खाने पीने चीजे भरोसे के साथ खरीदते हैं, वायरल वीडियो में यह भरोसा टूटता हुआ साफ नजर आ रहा

अहमदाबाद  आप सुबह जिस दूध की चाय पीते हैं या फि पूजा में इस्तेमाल करते हैं। अगर आप को पता चले कि उसे किसी पहले ही झूठा किया हुआ है या फिर उसमें थूक मिलाया तो आप पर क्या गुजरेगी? सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो सामने आया है। जिसमें एक शख्स दूध से भरे कई कैन से दूध निकालकर पी रहा है। ऐसा करते वक्त दूध का कु हिस्सा वापस कैन में गिर रहा। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो गुजरात के अहमदाबाद की सुखदेव सिंह चावड़ा मिल्क फैक्ट्री का है। इसके बाद यूजर्स वीडियो में दिख रहे शख्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद अहमदाबाद पुलिस भी एक्शन में आ गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने इस वीडियो की जांच की जा रही है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल सोशल मीडिया पर सामने आया इस वीडियो में जिस व्यक्ति यह करते हुए देखा जा रहा है। उसका नाम सुखदेव सिंह चावड़ा होने की बात कही जा रही है। दावा किया गया है कि ये अहमदाबाद में दूध डेयरी चलाता है। यह सभी कैन के दूध को झूठा कर रहा है और यही झूठा दूध बेचता भी है। अगर यही काम किसी मुस्लिम ने किया होता तो उसपर एफआईआर होकर अबतक जेल हो चुकी होती। एक अन्य पोस्ट में दावा किया है कि वीडियो में दूध को झूठा कर रहा शख्स सुखदेव सिंह चावड़ा (Sukhdev Singh Chavda) की दूध फैक्टरी का एक कर्मचारी है। पुलिस से कड़ी कार्रवाई की मांग सोशल मीडिया पर इस वीडियो के सामने आने के बाद यूजर्स गुजरात पुलिस को कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। क्रांति कुमार नाम के एक यूजर ने लिखा है कि दूध में थूक मिलाते हुए हंसी मजाक कर वीडियो भी बना रहे हैं। सोचिए इस दूध का कितनों लोगों ने चाय पी होगी, बच्चों ने दूध पिया होगा। इस दूध को पूजा पाठ में इस्तेमाल किया गया होगा। खाने पीने चीजों में थूक मिलाकर बेचने वालों को मौत की सज़ा मिलनी चाहिए। क्रांति कुमार ने अपनी पोस्ट में अहमदाबाद पुलिस को टैग भी किया है। कुछ लोग यह भी दावा कर रहे हैं कि फैक्ट्री में तैयार किए गए दूध की वह जांच कर रहा है,हालांकि जांच के इस अजीबोगरीब तरीके ने विवाद खड़ा कर दिया है। सरकारी नौकरी का शौक तुम्हें होगा कुछ यूजर्स ने निजी तौर पर जांच करके सुखदेव सिंह चावड़ा की डिटेल तक साझा कर दी है। एक अन्य वीडियो में सुखदेव सिंह चावड़ा बताया जा रहा शख्स यही कृत्य करते हुए दिख रहा है। इसमें उसने एक वॉयस ओवर डाली है कि सरकारी नौकरी का शौक तुम्हें होगा। मुझे तो अपने बिजनेस को सफल करना है। एक अन्य यूजर्स ने लिखा है कि दूध में थूक, भरोसे की हत्या है। इन लोगों को सिर्फ जेल नहीं मौत की सज़ा मिलनी चाहिए। ध्यान रहे, धर्म नहीं, अपराध बड़ा है। गुजरात पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग है।

भारतीय नौसेना को आज मिलेगा शैलो वाटर क्राफ्ट INS अर्णाला, उथले पानी में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाकर डिएक्टिवेट करेगा

विशाखापत्तनम भारतीय नौसेना 18 जून 2025 को अपने पहले पनडुब्बी रोधी शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) ‘अर्णाला’ को शामिल करेगी. यह समारोह विशाखापत्तनम नौसेना डॉकयार्ड में होगा, जिसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान होंगे. यह युद्धपोत आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है. भारत की समुद्री ताकत को बढ़ाएगा.  ‘अर्णाला’ क्या है? ‘अर्णाला’ भारतीय नौसेना का पहला पनडुब्बी रोधी युद्धपोत है, जो 16 ASW-SWC जहाजों की श्रृंखला का हिस्सा है. इसे कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और L&T शिपबिल्डर्स ने मिलकर बनाया है.     लंबाई: 77 मीटर     वजन: 1,490 टन से ज्यादा     इंजन: डीजल इंजन और वॉटरजेट का अनोखा मिश्रण, जो इसे भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा ऐसा युद्धपोत बनाता है. ये कॉर्वेट श्रेणी का जंगी जहाज है. यह अधिकतम 46 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलेगा.      डिलीवरी: 8 मई 2025 को नौसेना को सौंपा गया.     स्वदेशी सामग्री: 80% से ज्यादा हिस्से भारत में बने हैं. यह जहाज महाराष्ट्र के वसई के पास ऐतिहासिक अर्णाला किले के नाम पर है, जो 1737 में मराठों ने बनाया था. जैसे किला दुश्मनों से रक्षा करता था, वैसे ही ‘अर्णाला’ समुद्र में भारत की रक्षा करेगा. 12,622 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट के तहत 16 युद्धपोत बनाए जाएंगे.  ‘अर्णाला’ की खासियतें ‘अर्णाला’ को तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उनसे लड़ने के लिए बनाया गया है. इसकी खासियतें हैं…     पनडुब्बी रोधी ऑपरेशन: पनडुब्बियों का पता लगाने और नष्ट करने की क्षमता.     खोज और बचाव: समुद्र में फंसे लोगों को बचाने के लिए तैयार.     कम तीव्रता वाले मिशन: छोटे समुद्री खतरों से निपटने में सक्षम.     उन्नत सिस्टम: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), L&T, महिंद्रा डिफेंस, और MEIL जैसे भारतीय कंपनियों के हथियार और सेंसर.     बख्तरबंद ढांचा: मजबूत हल (पतवार), जो समुद्री चुनौतियों को सहन कर सकता है.     हथियार: अत्याधुनिक तोपें और सेंसर, जो पुराने किलों की तोपों की तरह काम करते हैं. इसकी रेंज 3300 किलोमीटर है. इस युद्धपोत पर 7 अधिकारियों समेत 57 नौसैनिक तैनात हो सकते हैं. इसमें एएसडब्लू कॉम्बैट सूइट लगा है, जो दुश्मन के हमलों से टकराने के लिए हथियारों को तैयार करेगा. उनपर नजर रखेगा. इसपर चार तरह के मैनेजमेंट सिस्टम लगे हैं, जो जंग के समय युद्धपोत को सही-सलामत रखने में मदद करेंगे.  इस युद्धपोत पर एक आरबीयू-6000 एंटी सबमरीन रॉकेट लॉन्चर लगा होगा. यह 213 मिलिमीटर की एंटी-सबमरीन रॉकेट सिस्टम है, जो दुश्मन की पनडुब्बियों के ऊपर ताबड़तोड़ रॉकेट फायरिंग करता है. इसके अलावा इस पर 6 हल्के वजन वाले एएसडब्लू टॉरपीडो लगाए जाएंगे. साथ ही एंटी-सबमरीन समुद्री बारूदी सुरंगें रहेंगी.  आईएनएस अरनाला पर 30 मिलिमीटर की एक CRN-91 नेवल गन होगी. यह एक ऑटोमैटिक गन होती है, जो हर मिनट 550 गोलियां दाग सकती है. यानी दुश्मन का जहाज छलनी हो जाएगा. इसकी रेंज 4 किलोमीटर है. इसके अलावा 2 ओएफटी 12.7 मिलिमीटर एम2 स्टेब्लाइज्ड रिमोट कंट्रोल्ड गन लगी होगी. यह भारतीय नौसेना का वाटर जेट प्रोपल्शन पावर्ड सिस्टम से लैस सबसे बड़ा युद्धपोत होगा.   अर्णाला का प्रतीक और डिज़ाइन     डिज़ाइन: नीले रंग की पृष्ठभूमि पर एक ऑगर शेल (घोंघे का खोल), जो मजबूती और सटीकता का प्रतीक है. यह शेल समुद्र की चुनौतियों में जीवित रहने की ताकत दिखाता है.     नाम: नीचे देवनागरी लिपि में ‘अर्णाला’ लिखा है.     नारा: “अर्णवे शौर्यम्” (समुद्र में शौर्य), जो जहाज के साहस और ताकत को दर्शाता है.     ऑगर शेल की तरह ‘अर्णाला’ भी समुद्र में मजबूत, सतर्क और दुश्मनों पर सटीक हमला करने में सक्षम है.  ऐतिहासिक प्रेरणा: अर्णाला किला ‘अर्णाला’ का नाम महाराष्ट्र के अर्णाला किले से लिया गया है. यह किला 1737 में मराठा नेता चिमाजी अप्पा ने बनवाया था.  स्थान: वसई से 13 किमी उत्तर में, वैतरणा नदी के मुहाने पर.  उद्देश्य: उत्तरी कोंकण तट की रक्षा करना. मजबूती: किले ने कई हमलों का सामना किया, जैसे ‘अर्णाला’ जहाज समुद्री खतरों का सामना करेगा. जहाज का बख्तरबंद हल किले की मजबूत दीवारों जैसा है. इसके हथियार और सेंसर पुरानी तोपों की जगह लेते हैं. ‘अर्णाला’ भारतीय नौसेना का पहला पनडुब्बी रोधी युद्धपोत है, जो 18 जून 2025 को विशाखापत्तनम में शामिल होगा. 80% स्वदेशी और 55 MSMEs के योगदान से बना यह जहाज आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है. इसका ऑगर शेल क्रेस्ट और “अर्णवे शौर्यम्” नारा समुद्र में साहस दिखाता है. ‘अर्णाला’ भारत की तटीय रक्षा को मजबूत करेगा और हिंद महासागर में ताकत बढ़ाएगा. भारतीय नौसेना के पास क्या-क्या है मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय नौ सेना के पास कुल 20 पनडुब्बियां हैं। इनमें 2 परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां, एक परमाणु-संचालित अटैकर पनडुब्बी, 17 ट्रेडिशनल डीजल-इलेक्ट्रिक अटैकर पनडुब्बियां हैं। 13 विध्वंसक (Destroyers) जहाज हैं। इनके अलावा 15 फ्रिगेट्स, 18 कॉर्वेट्स, एक उभयचर परिवहन डॉक (INS जलाश्व), 4 टैंक लैंडिंग जहाज, 8 लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी, एक माइन काउंटरमेजर जहाज और 30 गश्ती जहाज हैं। भारतीय नौसेना का लक्ष्य 2035 तक 175 जहाजों की नौसेना बनाना है, जिसमें 50 जहाज वर्तमान में निर्माणाधीन हैं।  

सिंधु जल संधि ​रद्द होने से PAK में गंभीर जल संकट, पाकिस्तान में आएगी आपदा

नई दिल्ली  पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान की ओर जाने वाले सिंधु नदी के पानी के बहाव में कटौती कर दी है। इससे पाकिस्तान के सिंध प्रांत में फसलों की बुआई पर असर पड़ रहा है। पानी की कमी से वहां के किसान परेशान हैं। भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित किया हुआ है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भी इस वक्त किसानों को मिलने वाले सिंधु के जल में पिछले साल के मुकाबले कमी देखी जा रही है। इस समय खरीफ की बुआई का समय है और अगर समय पर यह काम नहीं हो पाया तो फिर खेती पूरी तरह से चौपट होने की आशंका है। पिछले साल के मुकाबले दोनों प्रांतों को मिला कम पानी पाकिस्तान सरकार के इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी (IRSA) की रिपोर्ट के अनुसार इस साल 16 जून को सिंधु नदी से सिंध प्रांत को 1.33 लाख क्यूसेक पानी मिला। पिछले साल इसी दिन 1.6 लाख क्यूसेक पानी मिला था। यानी यह लगभग 17% की कमी है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत को भी इस साल पिछली बार से थोड़ा कम पानी मिला है। इस साल उसे 1.26 लाख क्यूसेक पानी मिला है, जबकि पिछले साल 1.29 लाख क्यूसेक पानी मिला था। यह 2.25% की कमी है।    खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ा असर इंडस वॉटर ट्रीटी के पूर्व आयुक्त और केंद्रीय जल आयोग के पूर्व प्रमुख एके बजाज ने पाकिस्तान में आए इस जल संकट को लेकर बात की.उनका कहना था कि पाकिस्तान में सिंधु नदी से जुड़ी नदियों और जलाशयों में पानी कम बचा है. इससे वहां के किसानों के सामने संकट पैदा हो गया है.पाकिस्तान में इन दिनों खरीफ फसलों की बुवाई चल रही है.ऐसे में पानी के संकट का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी पड़ रहा है. मुश्किल यह है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मॉनसून जून के आखिरी में या जुलाई के पहले हफ्ते तक पहुंचता है. इसका मतलब यह हुआ कि अगले तीन हफ्ते में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पानी का संकट और बड़ा हो सकता है. भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के बाद पाकिस्तान से इंडस रिवर सिस्टम से जुड़ी नदियों के जलस्तर के बारे में जानकारी शेयर करना बंद कर दिया है. ऐसे में जब मॉनसून सीजन के दौरान  इंडस रिवर सिस्टम से जुड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ेगा तो इससे पाकिस्तान में बाढ़ का खतरा और बड़ा हो सकता है. ऐसे में पाकिस्तान को आपदा झेलनी पड़ सकती है. भारत ने स्थगित किया सिंधु जल समझौता भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया था. भारत-पाकिस्तान ने यह संधि 1960 में की थी.इसके तहत सिंधु वाटर सिस्टम की तीन पूर्वी नदियों का पानी भारत इस्तेमाल कर सकता है. वहीं तीन पश्चिमी नदियों के पानी पर पाकिस्तान को अधिकार दिया गया था. पाकिस्तानी नदियों-जलाशयों में खत्म होने लगा पानी रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में सिंधु नदी से जुड़ी नदियों और जलाशयों में कम पानी बचा है। खरीफ की फसलों की बुआई का समय है और ऐसे में पानी की कमी किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। मानसून आने में अभी कम से कम दो हफ्ते बाकी हैं, इसलिए स्थिति और खराब हो सकती है। सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद भारत ने पाकिस्तान को नदियों के जल स्तर की जानकारी देना भी बंद कर दिया है। इससे पाकिस्तान को बाढ़ की तैयारी करने में मुश्किल हो सकती है। अगर भारत में नदियों का जल स्तर बढ़ता है तो पाकिस्तान को बाढ़ से निपटने में परेशानी हो सकती है। 1960 में हुई भारत-पाकिस्तान सिंधु जल संधि क्या है सिंधु जल संधि 1960 में हुई थी। यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच कई तनावों के बावजूद बनी रही। लेकिन, 22 अप्रैल को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने इसे निलंबित कर दिया। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। विश्व बैंक ने इस संधि को कराने में मदद की थी। संधि के अनुसार, भारत को सिंधु नदी की तीन पूर्वी सहायक नदियों – रावी, ब्यास और सतलुज के जल पर पूरा अधिकार है। वहीं, पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों,सिंधु, झेलम और चिनाब से लगभग 135 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी मिलता रहा है। ये सभी नदियां भारत से पाकिस्तान की ओर बहती हैं। पाकिस्तान ने संधि के निलंबन पर आपत्ति जताई है। लेकिन, भारत का कहना है कि ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।’ मतलब, जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक पानी साझा नहीं किया जा सकता।

भारत को मिला ऑयल का विशाल भंडार ! अब बाहर से मंगाएगा नहीं दूसरे देशों का देगा

नई दिल्ली भारत, अंडमान सागर में एक बेहद बड़ी ऑफशोर तेल खोज कर सकता है। इस तेल भंडार में 184,440 करोड़ लीटर कच्चा तेल हो सकता है और यह गुयाना की परिवर्तनकारी खोज को टक्कर दे सकता है। यह बात केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने द न्यू इंडियन के साथ एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कही। अगर यह तेल भंडार मिल जाता है तो यह भारत के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित होगा। पुरी ने कहा कि सरकार के हालिया सुधार और आक्रामक खोज अभियान एक बड़ी खोज के लिए आधार तैयार कर रहे हैं। पुरी के मुताबिक, छोटी खोजों के अलावा, अंडमान क्षेत्र में गुयाना जैसी बड़े पैमाने पर तेल की खोज भारत की अर्थव्यवस्था को 3.7 लाख करोड़ डॉलर से 20 लाख करोड़ डॉलर तक बढ़ाने में मदद कर सकती है। अगर कनफर्म हो गया कि अंडमान सागर में इतना बड़ा तेल भंडार है तो यह खोज भारत के एनर्जी लैंडस्केप को नया आकार दे सकती है। पुरी ने कहा कि कुछ वक्त की बात है, उसके बाद हो सकता है कि हम अंडमान सागर में एक बड़ा गुयाना खोज लें। क्या है गुयाना मॉडल गुयाना के तट पर एक्सॉनमोबिल, हेस कॉरपोरेशन और सीएनओओसी ने 11.6 अरब बैरल से अधिक का विशाल भंडार खोजा था। उस खोज ने गुयाना को तेल भंडार वाले दुनिया के टॉप 20 देशों में शामिल कर दिया, जिससे उस देश की अर्थव्यवस्था में नया बदलाव आया। पुरी का मानना ​​है कि अगर मौजूदा ड्रिलिंग प्रयास सफल होते हैं तो भारत इसी तरह की सफलता की ओर बढ़ सकता है, विशेष रूप से अंडमान क्षेत्र में। हमारी एनर्जी की जरूरतें एक झटके में होंगी पूरी माना जा रहा है कि इसके मिलने के बाद हमारी एनर्जी की जरूरतें एक झटके में पूरी हो जाएंगी। अगर अंडमान में खोज सफल होती है, तो भारत ऑयल इंपोर्ट्स को काफी हद तक कम कर सकता है और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है। होर्मुज का रास्ता बंद होने से महंगे पड़ेंगे तेल व गैस ईरान और इजरायल के बीच युद्ध भारत के लिए भी नुकसानदायक है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि युद्ध के कारण, भारत पर आर्थिक संकट का खतरा बढ़ रहा है। खासकर होर्मुज जलडमरुमध्य को लेकर चिंताएं हैं। अगर यह बंद होता है तो भारत के लिए तेल और गैस का आयात महंगा पड़ेगा। दोनों देशों से व्यापारिक रिश्ते वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का माल निर्यात किया और 44.19 करोड़ डॉलर का आयात किया। वहीं, इजरायल के साथ 2.15 अरब डॉलर का निर्यात और 1.61 अरब डॉलर का आयात किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित है, जो खाड़ी के देशों (इराक, कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात) से समुद्री मार्ग को अरब सागर और उससे आगे तक जोड़ता है। यह जलडमरूमध्य अपने सबसे संकरे बिंदु पर केवल 33 किमी चौड़ा है। यहां प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल और तेल उत्पाद जहाजों पर लादे जाते हैं। सस्ता नहीं है तेल के कुएं खोदना भारत ने कई क्षेत्रों में एक्सप्लोरेशन के लिए ड्रिलिंग को बढ़ाया है, खासकर उन क्षेत्रों में जिन्हें पहले दुर्गम माना जाता था। पुरी ने तेल की खोज के लिए कुएं खोदने की हाई कॉस्ट पर भी बात की। उन्होंने कहा कि इसमें बहुत सारा पैसा लगता है। उन्होंने कहा कि गुयाना में उन्होंने 43 या 44 कुएं खोदे, जिनमें से प्रत्येक की लागत 10 करोड़ डॉलर थी। उन्हें 41वें कुएं में तेल मिला। आगे कहा कि सरकारी कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने इस साल जितने कुएं खोदे हैं, वे 37 साल में सबसे ज्यादा हैं। वित्त वर्ष 2024 में कंपनी ने 541 कुओं की खुदाई की। इसमें 103 एक्सप्लोरेटरी और 438 डेवलपमेंटल कुएं शामिल हैं। इन सब में कंपनी ने ₹37,000 करोड़ का अपना रिकॉर्ड हाई पूंजीगत खर्च भी दर्ज किया। समुद्री इलाके में खुदाई शुरू सरकार ने पिछले कुछ सालों में अनछुए समुद्री बेसिनों में तेल और गैस की खोज के लिए नीतिगत सुधार किए हैं और निवेश बढ़ाया है. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां जैसे ONGC और ऑयल इंडिया लिमिटेड ने अंडमान के गहरे समुद्री इलाके में खुदाई शुरू कर दी है. कारोबारी साल 2024 में ONGC ने 37 सालों में सबसे अधिक 541 कुएं खोदे, जिसमें 103 खोज कुएं और 438 विकास कुएं शामिल थे. कंपनी ने ₹37,000 करोड़ का अधिकतम कैपिटल एक्सपेंडिचर भी रिकॉर्ड किया. भारत की वर्तमान कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात पर निर्भर है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा कमजोर होती है. अंडमान सागर में सफल खोज से आयात पर निर्भरता कम होगी और देश की एनर्जी स्वतंत्रता मजबूत होगी. इसके साथ ही, तेल की घरेलू उपलब्धता बढ़ने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता आएगी और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी. पुरी ने बताया कि गुयाना में तेल खोजने के लिए 43-44 कुएं खोदे गए थे, जिनमें से 41वें कुएं में तेल मिला था. भारत भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही सफलता मिलेगी. अंडमान सागर में तेल की खोज भारत के लिए न केवल एनर्जी सेक्टर में क्रांति लाएगी, बल्कि ग्लोबल तेल बाजार में भी देश की स्थिति मजबूत करेगी. यह खोज भारत को एक प्रमुख तेल उत्पादक देश के रूप में स्थापित कर सकती है और आर्थिक रूप से देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी. तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर है भारत भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत में से 85% को आयात के जरिए पूरा करता है। देश कच्चे तेल के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इंपोर्टर है, इसके आगे केवल अमेरिका और चीन हैं। कच्चे तेल का घरेलू उत्पादन वर्तमान में असम, गुजरात, राजस्थान, मुंबई हाई और कृष्णा-गोदावरी बेसिन में केंद्रित है। विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाकर रखे गए हैं, ओडिशा और राजस्थान में नई साइट्स की योजना बनाई गई है। भारत की तेल आवश्यकता और आयात भारत के लिए यह तेल कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि भारत अपनी कच्चे तेल की … Read more

2023 में 22.6 करोड़ के मुकाबले ये संख्या बढ़कर 2050 तक करीब 50 करोड़ हो जाएगी, सबसे ज्यादा होंगे इस श्रेणी के वाहन

नई दिल्ली  देशभर में वाहनों की संख्या 2050 तक दोगुने से अधिक हो जाएगी। 2023 में 22.6 करोड़ के मुकाबले ये संख्या बढ़कर 2050 तक करीब 50 करोड़ हो जाएगी। यह जानकारी काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) की ओर से जारी नए अध्ययनों की एक शृंखला से सामने आई है। इन अध्ययनों के अनुसार, दोपहिया वाहनों की संख्या सर्वाधिक रहेगी। 2050 तक अपेक्षित जीडीपी और जनसंख्या वृद्धि पर आधारित सामान्य परिस्थिति परिदृश्य के अनुसार, 2050 तक सभी वाहनों का लगभग 70 प्रतिशत यानी 35 करोड़ से अधिक  दोपहिया होंगे। निजी कारों की संख्या भी तीन गुना बढ़ने का अनुमान निजी कारों की संख्या भी लगभग तीन गुना बढ़ने का अनुमान है, जो सदी के मध्य तक नौ करोड़ तक पहुंच जाएगी। सीईईडब्ल्यू के अध्ययन देश की वाहन संख्या, कुल स्वामित्व लागत और परिवहन ईंधन मांग के बारे में अपनी तरह का पहला जिला-स्तरीय अनुमान उपलब्ध कराते हैं। देश की वाहन संख्या में अधिकांश वृद्धि उत्तरी और पश्चिमी राज्यों में केंद्रित रहेगी। अकेले उत्तर प्रदेश में नौ करोड़ से अधिक वाहन होंगे। बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात भी प्रमुख वृद्धि की स्थिति में हैं, जबकि दक्षिणी राज्यों में कम जनसंख्या स्तर के कारण एक ठहराव दिखाई देगा। दिल्ली, बेंगलुरु, ठाणे, पुणे आदि में अधिक होंगे वाहन दिल्ली, बेंगलुरु, ठाणे, पुणे और अहमदाबाद जैसे नगरीय और उपनगरीय क्षेत्र आगे रहेंगे, जहां 2050 में भारत की कुल अनुमानित वाहन संख्या के 10 प्रतिशत वाहन होंगे। अध्ययनों के अनुसार, 2024 में मध्यम और भारी वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन अभी भी डीजल, सीएनजी या एलएनजी से अधिक महंगे हैं। ग्रीन फ्यूल में प्रगति नहीं हुई तो 2040 में अधिक होगी डीजल की मांग उम्मीद है कि 2040 तक एलएनजी बसों और ट्रकों के लिए सबसे सस्ता ईंधन विकल्प बनी रहेगी। इसलिए भारी माल वाहन श्रेणियों में ईवी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे हरित ईंधनों को बड़े पैमाने पर उपयोग में लाने के लिए लक्षित रूप से शोध एवं विकास करने, सहायक बुनियादी ढांचा तैयार करने और लागत घटाने की जरूरत होगी। इलेक्ट्रिफिकेशन, बुनियादी ढांचे और ग्रीन फ्यूल में तत्काल प्रगति नहीं होने पर डीजल 2040 के दशक तक भारत के सड़क परिवहन ईंधन की मांग में प्रमुख रहेगा।उत्सर्जन घटाने और परिवर्तन को रफ्तार देने के लिए, भारत को बस और ट्रक श्रेणियों में इलेक्ट्रिक और एलएनजी वाहनों को तेजी से अपनाने को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिनकी 2050 में परिवहन से जुड़े उत्सर्जन में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। बैटरी निर्माण के लिए शोध और निवेश पर देना होगा ध्यान इसके साथ, लागत घटाने के लिए बैटरी निर्माण के लिए घरेलू शोध एवं विकास में निवेश करने पर भी ध्यान देना होगा। सीईईडब्ल्यू के विशेषज्ञ हेमंत माल्या व डा हिमानी जैन अध्ययन के अनुसार स्वच्छ परिवहन की दिशा में बदलाव को तेज करने के लिए, भारत को अलग-अलग वाहनों से जुड़े आंकड़ों को विशेष रूप से वाहन पोर्टल के माध्यम से – मजबूत करना चाहिए और जिला-स्तरीय सूचना में कमी को दूर करना चाहिए। सार्वजनिक बैंकों और एनबीएफसी के जरिए बैटरी वित्तपोषण माडल जैसे किराए पर या ईएमआई के साथ, ईवी को किफायती बनाना बहुत जरूरी है।

यूपी-महाराष्ट्र और उत्तराखंड समेत 15 ठिकानों पर ईडी की ताबड़तोड़ छापेमारी, 5 दवा कंपनियों पर शिकंजा

देहरादून ड्रग तस्करों के विरुद्ध प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने नशा तस्करों के साथ गठजोड़ पर उत्तराखंड में 05 फार्मा कंपनियों (बायोजेनेटिक ड्रग्स प्रा. लि.), सीबी हेल्थकेयर, सीमिलेक्स फार्माकेम ड्रग्स इंडस्ट्रीज, सोल हेल्थ केयर (आइ) प्रा. लि. और एस्टर फार्मा) के ऋषिकेश, हरिद्वार और काशीपुर के ठिकानों पर जांच की। देर रात तक जारी कार्रवाई में फार्मा कंपनियों में दवा बिक्री, सप्लायर, स्टाक, ट्रांजेक्शन आदि की जांच की जा रही थी। नशा तस्करों और फार्मा कंपनियों के गठजोड़ के विरुद्ध ईडी की यह कार्रवाई उत्तराखंड के साथ ही उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में एक साथ 15 ठिकानों पर की गई। ईडी सूत्रों के अनुसार ईडी ने यह कार्रवाई एसटीएफ की ओर से बीते वर्ष दर्ज एफआइआर के आधार पर की गई। एफआइआर के आधार पर ईडी ने जांच में पाया कि फार्मा कंपनियों के साथ गठजोड़ कर नशा तस्करों ने कई दवाओं की आपूर्ति नशे के रूप में प्रयोग के लिए की है। इसके अलावा दवा निर्माण के लिए कच्चे माल की खरीद का परीक्षण भी किया गया। इस आपराधिक गठजोड़ ने नशा तस्करों ने कई सौ करोड़ों रुपए बनाए हैं। जिसे सीधे तौर पर मनी लांड्रिंग के रूप में माना गया। फार्मा और नशा तस्करों के गठजोड़ पर की जा रही कार्रवाई में ईडी की एंट्री के बाद फार्मा सेक्टर में हड़कंप की स्थिति है। माना जा रहा है कि ईडी बड़े स्तर पर आरोपितों की संपत्ति अटैच कर सकती है। ड्रग पैडलर एलेक्स ने खोले फार्मा कंपनियों के साथ गठजोड़ के राज ईडी सूत्रों के अनुसार नशे में प्रयुक्त की जाने वाली प्रतिबंधित श्रेणी की दवाओं की खेप नशा तस्करों तक पहुंचने के मामले में ड्रग पैडलर एलेक्स पालीवाल की पूर्व में गिरफ्तारी की जा चुकी है। एलेक्स के माध्यम से यह पता चला कि जांच के दायरे में ली गई फार्मा कंपनियों ने प्रतिबंधित श्रेणी की दवाओं का असामान्य उत्पादन किया है। एक दवा तो ऐसी पाई गई, जिसका कुछ ही माह में 20 करोड़ से अधिक टैबलेट का उत्पादन किया गया।

आज एअर इंडिया की कई अंतरराष्ट्रीय उड़ाने रद करनी पड़ी, जिससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा

नई दिल्ली मंगलवार का दिन एअर इंडिया के लिए काफी तनाव भरा रहा। आज एअर इंडिया की कई अंतरराष्ट्रीय उड़ाने रद करनी पड़ी, जिससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, दिल्ली से पेरिस, अहमदाबाद से लंदन के अलावा कई अन्य देशों की तरफ जाने वाली उड़ानों को तकनीकी खामी के कारण रद करना पड़ा है। दिल्ली से पेरिस जाने वाली AI की उड़ान रद मंगलवार को दिल्ली से पेरिस जाने वाली AI 143 की उड़ान को रद करना पड़ा। एअरलाइन कंपनी ने एक बयान में कहा कि अनिवार्य उड़ान-पूर्व जांच में समस्या आने के कारण AI 143 को रद करने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही बुधवार को पेरिस से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली एअर इंडिया की वापसी सेवा AI 142 को भी रद किया गया है। मीडिया के अनुसार, एअर इंडिया ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है। एअरलाइन कंपनी ने कहा कि हमें अपने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद है और हम वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं… हम होटल में आवास उपलब्ध करा रहे हैं और यात्रियों द्वारा विकल्प दिए जाने पर रद्दीकरण या मानार्थ पुनर्निर्धारण पर पूर्ण धन वापसी की पेशकश भी कर रहे हैं। अहमदाबाद – लंदन एअर इंडिया की फ्लाइट भी रद वहीं, अहमदाबाद से लंदन जाने वाला एअर इंडिया का एक और विमान चर्चा में तब आया, जब उड़ान भरने से पहले उसको रद कर दिया गया। मंगलवार को एअर इंडिया की फ्लाइट AI 159, बोइंग 788 को रद कर दिया गया है। यह विमान आज दोपहर 1:10 बजे अहमदाबाद से उड़ान भरने वाला था, मगर अचानक फ्लाइट कैंसिल करने की घोषणा कर दी गई। एअरलाइन कंपनी के अनुसार, अहमदाबाद से लंदन जाने वाली फ्लाइट AI159 को रद किया गया क्योंकि एअरक्राफ्ट मौजूद नहीं थे। एअर स्पेस में पाबंदियों और सुरक्षा चेकिंग के कारण फ्लाइट्स का शेड्यूल बढ़ गया है। ऐसे में अहमदाबाद से दिल्ली जाने के लिए एअरक्राफ्ट मौजूद नहीं था, जिसके कारण उड़ान रद कर दी गई। सैन फ्रांसिस्को-मुंबई उड़ान भी रद वहीं, एअर इंडिया ने अपनी सैन फ्रांसिस्को-मुंबई उड़ान के एक इंजन में तकनीकी खराबी के कारण रद करने का फैसला किया। इस विमान को सीधे मुंबई जाना था, हालांकि एक इंजन में तकनीकी खराबी आने के कारण इसे कोलकाता में निर्धारित ठहराव पर ही समाप्त कर दिया। विमान बोइंग777-200 एलआर समय पर हवाई अड्डे पर सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात पौने एक बजे पहुंचा लेकिन उसके बाएं इंजन में तकनीकी खराबी आने के कारण आगे की उड़ान में देरी हुई। एअर इंडिया ने इन उड़ानों को भी किया रद AI 915 (दिल्ली-दुबई) AI 153 (दिल्ली-वियना) AI 143 (दिल्ली-पेरिस) AI 159 (अहमदाबाद-लंदन) AI 133 (बेंगलुरु-लंदन) AI 170 (लंदन-अमृतसर)  

महाराष्ट्र में बिगड़ा मौसम का मिजाज: महाराष्ट्र के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट: मौसम विभाग

मुंबई  भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने महाराष्ट्र के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। आईएमडी ने रत्नागिरी, पुणे, सतारा, कोल्हापुर और सिंधुदुर्ग जिलों में अगले 24 घंटों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, रत्नागिरी, पुणे, सतारा, कोल्हापुर, सिंधुदुर्ग जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश की संभावना है। पिछले 24 घंटों (17 जून की सुबह तक) में मुंबई उपनगरीय जिले में 83.4 मिमी बारिश हुई है, जबकि ठाणे जिले में 73.7 मिमी, मुंबई शहर में 62.9 मिमी, रायगढ़ में 54.1 मिमी और पालघर जिले में 49.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है। आईएमडी ने बताया कि सोमवार से 17 जून की सुबह तक राज्य में रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई है। ठाणे में 73.7, रायगढ़ में 54.1, रत्नागिरी में 47.7, सिंधुदुर्ग में 12.7, पालघर में 49.7, नासिक में 7.7, धुले में 7.1, नंदुरबार में 4, जलगांव में 6.7, अहिल्यानगर में 1.1, पुणे में 11.9, सोलापुर में 0.9, सतारा में 19.7, सांगली में 6, कोल्हापुर में 17.8, छत्रपति संभाजीनगर में 0.6, जालना में 0.1, बीड में 0.7, लातूर में 0.1, धाराशिव में 1.6, नांदेड़ में 3.6, परभणी में 1.7, हिंगोली में 3.6, बुलढाणा में 3.5, अकोला में 8.7, वाशिम में 8.5, अमरावती में 9.4, यवतमाल में 8.7, वर्धा में 7.6, नागपुर में 0.9, गोंदिया में 0.2, चंद्रपुर में 11.9 और गढ़चिरौली जिले में 5.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं, रत्नागिरी जिले में जगबूड़ी नदी चेतावनी स्तर पर है। जिला प्रशासन ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इसके अलावा, रत्नागिरी में खेड़ तालुका के वलंजवाड़ी में मुंबई-गोवा राजमार्ग पर आई 100 मीटर की दरार के कारण यातायात एक लेन के जरिए हो रहा है। सतारा जिले में पाटन-चिपलून राष्ट्रीय राजमार्ग पर जलभराव के कारण वैकल्पिक मार्ग बंद कर दिया गया है। दोपहिया और चार पहिया वाहनों को कोयनानगर के रास्ते नेरले-मानगांव-मनेरी-चाफर-संगमनगर ढक की ओर मोड़ दिया गया है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार, मुंबई उपनगरीय जिले में एक व्यक्ति की पानी में डूबने से मौत हो गई है और एक अन्य व्यक्ति की मिट्टी के ढेर में दबने से जान चली गई। इसके साथ ही तीन लोग पेड़ गिरने से घायल हुए हैं, जबकि दो लोग स्लैब गिरने से घायल हुए हैं। इसके अलावा, दीवार ढहने से दो लोग घायल हुए हैं। साथ ही, यवतमाल जिले में एक व्यक्ति की डूबने से मौत हुई है और धुले जिले में दीवार ढहने से चार पशुओं की मौत हुई है।

भुवनेश्वर में 20 जून को आयोजित होने वाले बीजेपी के कार्यक्रम की फिलहाल तैयारियां जोरों पर, पीएम मोदी कर सकते हैं शिरकत

भुवनेश्वर  ओडिशा में बीजेपी सरकार का 20 जून को एक साल पूरा होने वाला है। इस मौके पर राज्य में भारतीय जनता पार्टी ने जश्न की तैयारी की है। इसको लेकर 20 जून को जनता मैदान में भव्य कार्यक्रम रखा गया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शिरकत करने वाले हैं। जानकारी की मानें तो पीएम मोदी 20 जून को भुवनेश्वर का दौरा करेंगे और जनता मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। भुवनेश्वर में 20 जून को आयोजित होने वाले बीजेपी के कार्यक्रम की फिलहाल तैयारियां जोरों पर हैं। मंगलवार को राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी के साथ परिवहन, इस्पात और खान मंत्री विभूति भूषण जेना ने कार्यक्रम स्थल पर अंतिम व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने पुष्टि की कि ये स्थल इस मेगा इवेंट के लिए एक लाख से अधिक लोगों की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। समीक्षा के दौरान मीडिया से बात करते हुए मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा, “जनता मैदान प्रधानमंत्री की जनसभा के लिए एक लाख से अधिक लोगों की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। पीएम मोदी दोपहर बाद पहुंचेंगे और रोड शो के बाद कार्यक्रम स्थल तक पहुंचेंगे। इस कार्यक्रम में वीडियो और ग्राफिक्स के जरिए राज्य सरकार की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा।” उन्होंने कहा, “कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित किया जाएगा और उन्हें प्रमाण पत्र दिया जाएगा। प्रधानमंत्री 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी करेंगे। हम पूरे कार्यक्रम के बारे में पीएमओ से अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।” ओडिशा के विकास में पीएम मोदी की गहरी दिलचस्पी की बात करते हुए मंत्री ने कहा, “ये प्रधानमंत्री मोदी की एक साल में ओडिशा की छठी यात्रा होगी, जो संभवतः किसी भी राज्य के लिए सबसे अधिक होगी। ये ओडिशा की प्रगति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हम 20 जून को गर्मजोशी और सम्मान के साथ उनका स्वागत करने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।”

भारत के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल का अश्विनी वैष्णव उद्घाटन किया

नई दिल्ली रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को हरियाणा के मानेसर में मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड प्लांट में देश के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन किया। मारुति सुजुकी के प्लांट में नया गति शक्ति कार्गो टर्मिनल ऑटोमोबाइल परिवहन की लॉजिस्टिक्स दक्षता को काफी हद तक बढ़ाता है। मानेसर प्लांट 10 किलोमीटर के रेल लिंक के माध्यम से पाटली रेलवे स्टेशन से जुड़ा हुआ है, जो हरियाणा रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एचआरआईडीसी) द्वारा विकसित किए जा रहे 121.7 किलोमीटर लंबे हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर का हिस्सा है। इस 10 किलोमीटर के लिंक के निर्माण के लिए 800 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है, जिसमें एचआरआईडीसी ने 684 करोड़ रुपए का योगदान दिया और शेष राशि मारुति सुजुकी द्वारा दी गई। इस गति शक्ति कार्गो टर्मिनल की लोडिंग क्षमता 4.5 लाख ऑटोमोबाइल प्रति वर्ष के साथ भारत में सबसे अधिक है। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में भारतीय रेलवे में बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले भारतीय रेलवे का वार्षिक बजट 24,000 से 25,000 करोड़ रुपए था, जो कि बढ़कर अब 2.5 लाख करोड़ रुपए हो गया है। उन्होंने आगे कहा, “पिछले ढाई वर्षों में जनरल कोचों की संख्या बढ़ाने के लिए एक केंद्रित अभियान शुरू किया गया है। पिछले वर्ष ही 1,200 से अधिक जनरल कोच जोड़े गए हैं।” केंद्रीय मंत्री ने बताया, “वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारतीय रेलवे ने लगभग 720 करोड़ यात्रियों और 1,617 मिलियन टन माल का परिवहन किया। इस आंकड़े ने भारतीय रेलवे को वैश्विक स्तर पर दूसरी सबसे अधिक माल ढुलाई वाली रेल सेवा बनने में मदद की, जिससे 2023-24 एक ऐतिहासिक वर्ष बन गया।” वैष्णव ने कहा कि सोनीपत स्थित रेलवे कोच फैक्ट्री का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह एडवांस रेलवे फैक्ट्री जल्द ही उद्घाटन के लिए तैयार हो जाएगी और हमारी कोच उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।” इस कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राज्य के उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह और मारुति सुजुकी के सीईओ और प्रबंध निदेशक हिसाशी टेकाउची मौजूद थे।

ईरान से किसी प्रकार की बातचीत नहीं कर रहे हैं और फैलाए जा रहे शांति वार्ता के दावों को पूरी तरह बताया फर्जी: डोनाल्ड ट्रंप

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों  और अमेरिकी मीडिया पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर)  पर दो पोस्ट करते हुए कहा कि वे ईरान और इज़राइल के बीच संघर्ष को लेकर किसी भी तरह की शांति वार्ता में शामिल नहीं हैं और इससे जुड़ी खबरें पूरी तरह “फर्जी” हैं। ट्रंप का पहला पोस्ट: “मैक्रों को कुछ भी पता नहीं” ट्रंप ने अपने पहले पोस्ट में लिखा: “पब्लिसिटी पाने की कोशिश कर रहे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गलती से कहा कि मैं G7 समिट (कनाडा) से वापस वॉशिंगटन इसलिए जा रहा हूं ताकि मैं ईरान और इज़राइल के बीच ‘सीज़फायर’ पर काम कर सकूं। यह पूरी तरह गलत है! उन्हें बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं कि मैं क्यों वॉशिंगटन लौट रहा हूं,लेकिन यह सीज़फायर से कहीं बड़ा मामला है।” ट्रंप ने आगे लिखा, “जानबूझकर या अनजाने में, मैक्रों हमेशा गलत साबित होते हैं। देखते रहिए!” दूसरा पोस्ट: “ईरान से कोई संपर्क नहीं किया, सब फेक न्यूज है” 23 मिनट पहले किए गए दूसरे पोस्ट में ट्रंप ने लिखा: “मैंने ईरान से ‘शांति वार्ता’ के लिए किसी भी तरह का कोई संपर्क नहीं किया है, न तो सीधे, न ही किसी रूप में। यह पूरी तरह से गढ़ी हुई, झूठी खबर है! अगर ईरान बात करना चाहता है, तो उसे पता है मुझे कहां और कैसे संपर्क करना है।” “उन्हें पहले ही टेबल पर रखा गया प्रस्ताव मान लेना चाहिए था, इससे बहुत सी ज़िंदगियां बच जातीं!”   ट्रंप के बयान सुर्खियों में ट्रंप के यह बयान ऐसे समय में आए हैं जब  इज़राइल और ईरान के बीच तनाव चरम पर  है। हाल ही में ईरान ने इज़राइली शहरों पर मिसाइलें दागी थीं, वहीं इज़राइल ने तेहरान में कई सैन्य ठिकानों और सरकारी इमारतों को निशाना बनाया है। G7 समिट के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने संकेत दिया था  कि ट्रंप इस संघर्ष को शांत कराने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ट्रंप ने इन दावों को न केवल झूठा बताया, बल्कि कहा कि  उनकी वॉशिंगटन वापसी का कारण “सीज़फायर से भी बड़ा मुद्दा” है हालांकि उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया।ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरान से किसी प्रकार की बातचीत नहीं कर रहे हैं  और मीडिया द्वारा फैलाए जा रहे “शांति वार्ता” के दावों को पूरी तरह फर्जी खबर करार दिया है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि आने वाले समय में ट्रंप किसी बड़े राजनीतिक ऐलान या योजना को सामने ला सकते हैं।

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