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ऐतिहासिक ईदगाह में ईद की नमाज की अनुमति नहीं, अब्दुल्ला ने कहा नमाज अदा करने से मना किए जाने से बेहद चिंतित

जम्मू जम्मू कश्मीर में अधिकारियों ने शनिवार को पुराने शहर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में ईद की नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी। साथ कश्मीर के मुख्य मौलवी मीरवाइज उमर फारूक को भी नजरबंद कर दिया। अंजुमन औकाफ जामा मस्जिद ने यहां यह जानकारी दी। जामिया मस्जिद मामलों की प्रबंध समिति ने कहा कि अधिकारियों ने एक बार फिर श्रीनगर ईदगाह और साथ ही ऐतिहासिक जामा मस्जिद श्रीनगर में ईद-उल-अजहा की नमाज की अनुमति नहीं दी, मस्जिद के दरवाजे बंद कर दिए और बाहर पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया। परंपरागत रूप से ईद की नमाज ईदगाह में सामूहिक रूप से अदा की जाती है। बंद थे दरवाजे बयान में कहा गया कि आज सुबह फज्र की नमाज भी जामा मस्जिद में नहीं पढ़ी जा सकी क्योंकि दरवाजे बंद थे। साथ ही कहा गया कि मीवाइज को भी नजरबंद कर दिया गया है। हुर्रियत के अध्यक्ष मीरवाइज ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि यह लगातार सातवां साल है जब जामिया मस्जिद में ईद की नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी गई है। वर्ष 2019 से अधिकारियों द्वारा जामा मस्जिद और ईदगाह में ईद की नमाज अदा करने पर रोक लगा दी गई है। मीरवाइज ने कहा, ‘ईद मुबारक। एक बार फिर कश्मीर दुखद वास्तविकता से जूझ रहा है। ईदगाह में ईद की नमाज अदा नहीं करने दी जा रही है। लगातार सातवें साल जामा मस्जिद को बंद कर दिया गया है। मुझे भी मेरे घर पर नज़रबंद कर दिया गया है। क्या बोले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला मीरवाइज ने कहा कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र में मुसलमानों को नमाज अदा न करने के उनके मौलिक अधिकार से वंचित रखा गया है-यहां तक कि दुनिया भर में मनाए जाने वाले उनके सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर पर भी। हम पर शासन करने वालों और लोगों द्वारा चुने गए लोगों के लिए यह कितनी शर्म की बात है, जो हमारे अधिकारों को बार-बार कुचले जाने पर चुप्पी साधे रहते हैं। अधिकारियों ने अंजुमन द्वारा किए गए दावों का जवाब नहीं दिया। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वह जामिया मस्जिद में ईद की नमाज अदा करने से मना किए जाने से बेहद चिंतित हैं। उन्होंने यह निर्णय लेने वालों के अधिकार पर सवाल उठाया। हमें अपनों पर भरोसा करना होगा सीएम अब्दुल्ला ने श्रीनगर में मीडिया से कहाकि मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि ऐसा निर्णय किस आधार पर लिया गया है, लेकिन एक दिन हमें अपने लोगों पर भरोसा करना होगा। ये वही लोग हैं जो 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद सामने आए और अपना गुस्सा जाहिर किया और इस कृत्य की निंदा की, लेकिन आज एक बार फिर ऐतिहासिक जामिया में ईद की नमाज की इजाजत नहीं दी गई। मुझे लगता है कि सरकार को इस पर फिर से विचार करना चाहिए। इस बीच ईद की नमाज पूरी घाटी में अदा की गई और सबसे बड़ी सभा डल झील के किनारे हजरतबल दरगाह में हुई। अधिकारियों ने कहाकि ईद की नमाज पूरी घाटी में शांतिपूर्ण तरीके से अदा की गई।  

डिप्टी CM शिंदे पहुंचे एयरपोर्ट, पायलट ने कह दी ऐसी बात, हर तरफ मची खलबली, हाथ जोड़ते नजर आए मंत्री

जलगांव हाराष्ट्र के जलगांव एयरपोर्ट पर डिप्टी CM एकनाथ शिंदे का विमान टेक्निकल वजहों से करीब दो घंटे देर हो गई. उनका विमान शुक्रवार को दोपहर 3 बजकर 45 बजे पहुंचना था, लेकिन वे शाम 6 बजकर 15 बजे ही जलगांव एयरपोर्ट पर उतर सके. फिर उन्होंने जलगांव से मुक्ताईनगर सड़क के रास्ते से जाना पड़ा, जहां उन्होंने संत मुक्ताई की पालखी यात्रा (धार्मिक जुलूस) में भाग लिया और मंदिर में दर्शन किए. देरी से लौटने पर पायलट ने उड़ान भरने से किया इनकार रात 9 बजकर 15 बजे जब वे वापस जलगांव एयरपोर्ट पहुंचे, तो विमान के पायलट ने विमान उड़ाने से मना कर दिया. पायलट ने ड्यूटी के घंटों का हवाला देते हुए कहा कि मैं उड़ान नहीं भर सकता हूं.  पहले तकनीकी समस्याओं के कारण और बाद में उनके विमान के पायलट ने ड्यूटी घंटे की सीमाओं और खराब हेल्थ का हवाला देकर विमान उड़ाने से इनकार कर दिया.  एकनाथ शिंदे को जलगांव में 3.45 बजे पहुंचना था, मगर तकनीकी कारणों से वे लगभग ढाई घंटे देर से पहुंचे. लैंडिंग के बाद वे सड़क मार्ग से मुक्ताईनगर गए, जहां उन्होंने संत मुक्ताई की पालखी यात्रा (धार्मिक जुलूस) में भाग लिया. उनके साथ मंत्री गिरीश महाजन, गुलाबराव पाटिल और कई प्रशासनिक अधिकारी भी थे. दो बार हुई देरी यात्रा पूरी करने के बाद जब वे रात करीब 9.15 बजे जलगांव एयरपोर्ट लौटे तो फिर से उड़ान में देरी हुई. एकनाथ शिंदे के निजी विमान के पायलट ने उड़ान भरने से इनकार कर दिया. यह कहते हुए कि उनका ड्यूटी आवर खत्म हो चुका है. साथ विमान उड़ाने के लिए नई मंजूरी लेनी होगी. पायलट ने अपनी खराब सेहत का भी हवाला दिया और कहा कि वह अभी उड़ान भरने की स्थिति में नहीं है. पायलट क्यों कर रहा था इनकार वहीं, News18 मराठी के अनुसार, पायलट पहले ही लगातार 12 घंटे उड़ान भर चुका था. वह अपनी स्थिति और तकनीकी नियमों के कारण आगे उड़ान भरने की स्थिति में नहीं था. एकनाथ शिंदे की टीम पायलट को मनाने में लगी थी. स्थिति को सुलझाने के प्रयास में महाजन, पाटिल और अन्य अधिकारी करीब 45 मिनट पायलट को मनाते रहे. इतने देर तक एकनाथ शिंदे एयरपोर्ट पर ही फंसे रहे. महाजन ने एयरलाइन अधिकारियों से आवश्यक अनुमतियों के लिए भी संपर्क किया. कैसे तैयार हुआ पायलट लोकमत टाइम्स के अनुसार, विमान के पायलट की स्थिति की जांच के लिए एक डॉक्टर को भी बुलाया गया. मेडिकल जांच और आवश्यक अनुमतियों के बाद पायलट ने आखिरकार विमान उड़ाने पर अपनी सहमति जताई और तब जाकर विमान मुंबई के लिए रवाना हुआ. वजह सामने आई पत्रकारों से बात करते हुए गिरीश महाजन ने कहा, ‘पायलट को स्वास्थ्य संबंधी चिंता और समय की समस्या थी. कुछ तकनीकी कठिनाइयां भी थीं. हमने एयरलाइन कंपनी से बात की, और उन्होंने अपनी तरह से पायलट को स्थिति समझाई. यह एक मामूली मुद्दा था.’ एकनाथ शिंदे ने दिखाया बड़ा दिल वापसी की उड़ान के दौरान डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की टीम ने एक महिला की मदद की, जिसे किडनी सर्जरी के लिए तुरंत मुंबई जाना था. एनडीटीवी के अनुसार, शीतल पाटिल नामक महिला और उनके पति अपनी फ्लाइट मिस कर चुके थे. जब उनकी स्थिति के बारे में एनकाथ शिंदे की टीम को पता चला तो महाजन ने उस कपल को शिंदे के विमान में सवार होने की व्यवस्था की. मुंबई एयरपोर्ट पर महिला को तुरंत सर्जरी के लिए ट्रांसफर करने के लिए एम्बुलेंस सेवाएं तैयार रखी गई थीं. वहीं, गुलाबराव पाटिल ने कहा कि एकनाथ शिंदे ने आज भी अपने संघर्ष के दिनों को नहीं भुलाया है. उन्होंने आम आदमी के प्रति संवेदनशीलता दिखाई है.

दुनिया के दो सबसे प्रभावशाली शख्सियतों- एलन मस्क और डोनाल्ड ट्रंप के बीच छिड़ी जंग, जाने कैसे शुरू हुई

वाशिंगटन दुनिया के दो सबसे प्रभावशाली शख्सियतों- एलन मस्क और डोनाल्ड ट्रंप के बीच छिड़ी जंग ने न केवल अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। एक तरफ हैं दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति, टेस्ला और स्पेसएक्स जैसी कंपनियों के मालिक एलन मस्क, और दूसरी तरफ हैं अमेरिका के राष्ट्रपति और दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स डोनाल्ड ट्रंप। इन दोनों की दोस्ती कभी सुर्खियों में थी, लेकिन अब यह रिश्ता एक ऐसी लड़ाई में बदल गया है, जो दोनों के लिए गंभीर राजनीतिक और आर्थिक परिणाम ला सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस जंग में सबसे ज्यादा नुकसान किसे होगा? आइए समझते हैं। कैसे शुरू हुई यह जंग? यह विवाद तब शुरू हुआ जब मस्क ने ट्रंप की महत्वाकांक्षी “वन बिग ब्यूटीफुल बिल” की आलोचना की। यह विधेयक टैक्स कटौती, सीमा सुरक्षा बढ़ाने और मेडिकेड व खाद्य सहायता जैसे कार्यक्रमों में कटौती का मिश्रण है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह बिल अगले दस सालों में अमेरिका के राष्ट्रीय कर्ज में 2.4 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी कर सकता है। मस्क ने इसे “घृणित” और “विशाल खर्च वाला बिल” करार देते हुए कहा कि यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेल सकता है। ट्रंप ने इस आलोचना को व्यक्तिगत रूप से लिया और मस्क पर पलटवार करते हुए कहा कि वह “एलन से बहुत निराश” हैं और मस्क का “दिमाग खराब हो गया है।” ट्रंप ने मस्क की कंपनियों के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स रद्द करने की धमकी दी, जिसके जवाब में मस्क ने स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट को बंद करने की बात कही, जो नासा के लिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाता है। हालांकि, मस्क ने बाद में इस धमकी को वापस ले लिया। इसके बाद मस्क ने एक और बड़ा दावा किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया कि ट्रंप का नाम जेफरी एप्सटीन से जुड़े गोपनीय सरकारी दस्तावेजों में है और यही कारण है कि ये दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जा रहे। इस दावे ने विवाद को और हवा दी। मस्क को क्या नुकसान हो सकता है? दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच गहराता विवाद अब मस्क की कंपनियों के भविष्य पर असर डाल सकता है। टेस्ला की सेल्फ-ड्राइविंग कारों की योजना से लेकर स्पेसएक्स के नासा मिशनों और एक्स (ट्विटर) पर विज्ञापन तक, हर क्षेत्र पर खतरे के बादल मंडराते दिख रहे हैं। दरअसल एलन मस्क की कंपनियां- टेस्ला, स्पेसएक्स और एक्स अमेरिकी सरकार के साथ गहराई से जुड़ी हैं। स्पेसएक्स को 2023 में 17 केंद्रीय एजेंसियों से लगभग 3 बिलियन डॉलर के 100 कॉन्ट्रैक्ट्स मिले थे। अगर ट्रंप प्रशासन इन कॉन्ट्रैक्ट्स को रद्द करता है, तो मस्क की कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, मस्क की टेस्ला का शेयर बाजार में पहले से ही उतार-चढ़ाव देखा जा रहा था। गुरुवार को टेस्ला के शेयरों में 14.2% की गिरावट आई, जिससे कंपनी का बाजार मूल्य 152 बिलियन डॉलर कम हो गया। मस्क की निजी संपत्ति में भी एक दिन में 33 बिलियन डॉलर की कमी आई। ट्रंप के सहयोगी स्टीव बैनन ने मस्क के खिलाफ और भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मस्क के अमेरिकी नागरिकता की जांच और उनकी कंपनी स्पेसएक्स को “डिफेंस प्रोडक्शन एक्ट” के तहत जब्त करने की मांग की। हालांकि, यह कानून किसी कंपनी को जब्त करने की अनुमति नहीं देता, लेकिन यह मस्क के लिए खतरे की घंटी हो सकता है। इसके साथ ही, मस्क का X प्लेटफॉर्म भी इस विवाद से प्रभावित हो सकता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह जंग X पर ट्रैफिक बढ़ा सकती है, क्योंकि लोग इस ड्रामे को फॉलो करने के लिए प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। मस्क के खिलाफ ट्रंप का बदला? हालांकि यह सब पूरी तरह ट्रंप की ‘बदले की भावना’ पर निर्भर करता है कि वो इस विवाद को कहां तक ले जाते हैं। टेलीमेट्री इनसाइट्स के ऑटो एनालिस्ट सैम अबु अल-समीद ने व्यंग्य करते हुए कहा, “चूंकि ट्रंप ने कभी अपने विरोधियों से बदला नहीं लिया है, इसलिए शायद इस बार भी वो माफ कर देंगे।” लेकिन बाद में उन्होंने गंभीरता से चेताया कि मस्क की कंपनियां मुश्किल में पड़ सकती हैं क्योंकि वे सरकारी सहायता पर काफी हद तक निर्भर हैं। टेस्ला की रोबोटैक्सी योजना पर संकट टेस्ला की सेल्फ-ड्राइविंग टैक्सियों का टेस्ट एक हफ्ते बाद ऑस्टिन, टेक्सास में होना है। यह टेस्ला के लिए एक बड़ा मौका है क्योंकि कंपनी की इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री कई बाजारों में घट रही है और मस्क को एक बड़ी सफलता की जरूरत है। लेकिन ट्रंप चाहें तो इस योजना में अड़चन डाल सकते हैं। अमेरिका की राष्ट्रीय राजमार्ग परिवहन सुरक्षा प्रशासन (NHTSA) पहले ही टेस्ला की रोबोटैक्सी तकनीक से जुड़े डेटा की मांग कर चुकी है, खासतौर पर कम दृश्यता वाली स्थितियों में उनके प्रदर्शन को लेकर। वहीं, अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) भी टेस्ला कारों की सुरक्षा की जांच कर रहा है, हालांकि जांच की स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है। शेयरों में गिरावट रोबोटैक्सी योजना की घोषणा के बाद टेस्ला के शेयरों में करीब 50% की उछाल आई थी। लेकिन गुरुवार को ट्रंप-मस्क विवाद की खबर आते ही टेस्ला के शेयर 14% गिर गए। शुक्रवार को इनमें 4% की हल्की रिकवरी देखी गई। मॉर्निंगस्टार के विश्लेषक सेठ गोल्डस्टीन ने कहा, “टेस्ला की हालिया तेजी लगभग पूरी तरह रोबोटैक्सी की उम्मीदों पर आधारित थी। ट्रंप से मस्क की लड़ाई इसका नुकसान कर सकती है।” कार्बन क्रेडिट बिजनेस को भी खतरा टेस्ला का एक और अहम लेकिन कम चर्चित कारोबार है – कार्बन क्रेडिट बेचना। कंपनी अन्य कार निर्माताओं को पर्यावरण नियमों के उल्लंघन की भरपाई करने के लिए ये क्रेडिट बेचती है। लेकिन ट्रंप समर्थक रिपब्लिकन सांसदों ने अपने बजट बिल में ऐसा संशोधन किया है जिससे ईंधन मानकों को न मानने पर अब जुर्माना नहीं लगेगा। इससे टेस्ला को बड़ा झटका लग सकता है। हालांकि मस्क इस क्रेडिट कारोबार को महत्वहीन बताते हैं, लेकिन इस साल की पहली तिमाही में कंपनी की क्रेडिट बिक्री $595 मिलियन तक पहुंच गई। बिक्री में गिरावट और खरीदारों की वापसी की उम्मीद ट्रंप के साथ मस्क की नजदीकियों ने … Read more

Corona in India: देशभर में कोरोना के 5700 से अधिक मरीज, चौथी लहर की चर्चा!

नई दिल्ली देश भर में कोरोना के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो केवल 15 दिनों में कोविड के सक्रिय मामलों में 20 गुना वृद्धि देखने को मिली है। देश में सक्रिय कोविड मामलों की संख्या 5,755 हो गई है। वहीं, गत 24 घंटों में चार लोगों की जान गई है। भारत में कोराना वायरस (कोविड-19) के एक्टिव मामलों की संख्या 6,000 के करीब पहुंचने वाला है। देश में पिछले कुछ हफ्तों से संक्रमण में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। भारत में COVID-19 के एक्टिव मामलों की संख्या 5,700 के पार हो गई है। कोरोना वायरस के कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 5,755 हो गई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के 7 जून, 2025 को सुबह 8:00 बजे तक के लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, 24 घंटे के दौरान देश में कोरोना वायरस से चार मौतें हुई हैं। मध्य प्रदेश में नौ महीने की गर्भवती महिला की प्रसव के दौरान दौरे पड़ने के बाद मौत हो गई। बाद में उसे COVID-19 पॉजिटिव पाया गया। महिला को इंट्रापार्टम दौरे पड़ते थे, जिसके लिए उको इंट्यूबेट किया गया। मंत्रालय ने बताया कि 5,484 से अधिक लोग संक्रमित होने के बाद ठीक हो चुके हैं। केरल अभी भी 1,806 मामलों के साथ COVID-19 चार्ट में सबसे ऊपर है। केरल में 24 घंटे में 127 मामले सामने आए हैं। चार मौतें केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में हुई हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान देश में 391 नए मामले दर्ज किए गए हैं। भारत में कोविड-19 ने एक महीने से भी कम समय में मामलों में 200% की वृद्धि देखी है। केरल सबसे अधिक प्रभावित राज्य बना हुआ है। इसके बाद गुजरात, पश्चिम बंगाल और दिल्ली सबसे अधिक प्रभावित हैं। संक्रमित मरीजों की संख्या में वृद्धि के मद्देनजर केंद्र अस्पतालों में कोविड-19 संबंधी तैयारियों की जांच के लिए ‘मॉक ड्रिल’ आयोजित कर रहा है। सभी राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे कोविड-19 के मामले बढ़ने के मद्देनजर ऑक्सीजन, आइसोलेटेड बेड, वेंटीलेटर और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि अधिकतर मरीजों में संक्रमण के हल्के लक्षण हैं। वे घर पर ही इलाज के बाद स्वस्थ हो गए। जनवरी से 59 लोगों की मौत इस साल जनवरी के बाद से देश में कोविड-19 से 59 लोगों के मरने की सूचना है। 22 मई तक देश में एक्टिव मरीजों की संख्या 257 थी। कोविड-19 की मौजूदा स्थिति और तैयारी के उपायों का आकलन करने के लिए आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ, आपात प्रबंधन प्रतिक्रिया (ईएमआर) प्रकोष्ठ, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) और दिल्ली में केंद्र सरकार के अस्पतालों के प्रतिनिधियों तथा सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से प्रतिनिधियों के साथ स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. सुनीता शर्मा की अध्यक्षता में दो जून और तीन जून को कई तकनीकी समीक्षा बैठकें की गईं। आधिकारिक सूत्रों ने चार जून को बताया कि आईडीएसपी के तहत राज्य एवं जिला निगरानी इकाइयां इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारियों (आईएलआई) और गंभीर श्वसन संबंधी बीमारियों (एसएआरआई) की करीब से निगरानी कर रही हैं। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया था, “दिशा निर्देश के अनुसार एसएआरआई के सभी मामलों में और आईएलआई से संबंधित पांच प्रतिशत मामलों में जांच की सिफारिश की गई है और एसएआरआई की पुष्टि वाले नमूनों को आईसीएमआर वीआरडीएल नेटवर्क के माध्यम से संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण के लिए भेजा जा रहा है।” एक्सपर्ट बोले- चिंता की बात नहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस का संक्रमण समय के साथ कमजोर हो रहा है। लेकिन इसके मामलों में कभी-कभार वृद्धि होने की आशंका है जिससे चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। विशेषज्ञों ने देश के विभिन्न भागों में बीमारी के बढ़ते मामलों संबंधी चिंता को लेकर कहा कि ऐसा लगता है कि यह रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी और तापमान में अत्यधिक वृद्धि जैसे उन मौसमी कारकों का परिणाम है। इनके कारण हम वातानुकूलित स्थानों पर रहते हैं। उन्होंने सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहरिया ने पीटीआई से कहा, “कोरोनावायरस के कारण होने वाला संक्रमण हर गुजरते साल के साथ कमजोर हो रहा है। यह (अब) मात्र श्वसन संबंधी एक और बीमारी है तथा फ्लू से कम खतरनाक है। यह अब चिंता का विषय नहीं है।” हरियाणा स्थित अशोका विश्वविद्यालय के ‘त्रिवेदी स्कूल ऑफ बायोसाइंसेज’ में जीव विज्ञान और स्वास्थ्य अनुसंधान के डीन अनुराग अग्रवाल ने कहा, ठइसके सभी उप स्वरूप एक जैसे हैं, जो अत्यधिक संक्रामक लेकिन कमजोर हैं। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधी क्षमता अत्यंत कमजोर है वे गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं लेकिन अधिकतर लोगों, खासकर पहले संक्रमित हो चुके या टीके लगवा चुके लोगों को अधिक खतरा नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने दो साल पहले मई 2023 में कोविड-19 को ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति’ घोषित किया था। स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब इस बीमारी को ‘मौसमी’, ‘स्थानिक’ या ‘एक निश्चित क्षेत्र तक सीमित’ बीमारी के रूप में परिभाषित करते हैं। WHO के पूर्व स्टाफ सदस्य लहरिया ने कहा, “पहले से बीमार लोगों और 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को कोरोनावायरस संक्रमण के दौरान वे सभी मानक सावधानियां बरतनी चाहिए जो वे श्वास संबंधी अन्य संक्रमण के समय बरतते हैं।” भारत के अलावा सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और हांगकांग सहित दक्षिण पूर्व एशिया के कई देशों में कोरोनावारयस संक्रमण के मामले बढ़े हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि चूंकि कोरोनावायरस संक्रमण अब स्थानिक हो गया है। उसके वेरिएंट में लगातार बदलाव हो रहा है। इसलिए संक्रमण के मामलों की संख्या में उतार-चढ़ाव की संभावना है। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए कैसे रखे खुद का ख्याल? मास्क पहनें, हैंड सैनिटाइजर रखें साथ अगर आप ट्रैवल कर रहे हैं तो आपको हर आधे घंटे में हाथों को सैनिटाइज करने की जरूरत है। खासकर कुछ खाने से पहले तो जरूर सैनि‍टाइज करें। इससे वायरस को रोकने में मदद म‍िलेगी। इसके साथ मास्क पहले ताकि संक्रमण से बचे रहें। बंद जगहों पर जाने से बचें कोव‍िड से बचने का सबसे अच्‍छा तरीका है क‍ि आप खुली जगहों पर रहें। अगर आप क‍िसी बंद जगहों पर या पार्टी में जाते हैं तो भी कोव‍िड की चपेट में … Read more

बीच सड़क पर हेलिकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग: केदारनाथ धाम के लिए भरी थी उड़ान, सूझबूझ से बची यात्रियों की जान

रुद्रप्रयाग रुद्रप्रयाग जनपद के बडासू क्षेत्र में केदारनाथ के लिए जा रहा एक हेलिकॉप्टर तकनीकी खराबी के चलते अचानक सड़क पर लैंड हुआ। हेलिकॉप्टर श्रद्धालुओं को लेकर केदारनाथ धाम की ओर जा रहा था, लेकिन रास्ते में आपात स्थिति के कारण पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को बडासू के पास सुरक्षित सड़क पर उतारा। स्थानीय प्रशासन और पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई और यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया। क्रिस्टल एविएशन कंपनी का हेली बताया जा रहा है। हेलिकॉप्टर ने बड़ासु हेलीपैड से केदारनाथ के लिए उड़ान भरी थी और टेकऑफ होते ही इमरजेंसी लैंडिंग सड़क पर करनी पड़ी। हेलिकॉप्टर में पांच यात्री, पायलट और सह पायलट सवार थे। सह पायलट को हल्की चोट की सूचना है। सीईओ यूकाडा सोनिका ने जानकारी दी कि क्रिस्टल एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के हेलिकॉप्टर ने यात्रियों को लेकर सिरसी से उड़ान भरते समय हेलीपैड के अलावा सड़क पर एहतियातन लैंडिंग की।किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। डीजीसीए को सूचित कर दिया गया है बाकी शटर ऑपरेशन तय कार्यक्रम के अनुसार सामान्य चल रहे हैं। यात्रियों में मची अफरा-तफरी, लेकिन कोई घायल नहीं हेलीकॉप्टर के अचानक नीचे उतरने की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों में हलचल मच गई। लेकिन जल्द ही राहत की सांस ली गई जब यह स्पष्ट हुआ कि कोई भी यात्री घायल नहीं हुआ है। हेलीकॉप्टर में कुल सात लोग सवार थे, जिनमें पायलट समेत छह यात्री थे। सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। मौके पर पहुंची प्रशासन और तकनीकी टीम हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और हवाई सुरक्षा संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे। हेलीपैड से तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को बुलाया गया ताकि हेलीकॉप्टर की जांच की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि तकनीकी खराबी की वजह क्या थी। फिलहाल हेलीकॉप्टर को उड़ान के लिए अनुपयुक्त घोषित कर दिया गया है और उसे सड़क मार्ग से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कौन-कौन था हेलिकॉप्टर में? हेलिकॉप्टर में 5 यात्री, 1 पायलट और 1 सह पायलट सवार थे। सभी लोग सुरक्षित हैं, लेकिन सह पायलट को मामूली चोटें आई हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई। सभी यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया। इस घटना की जानकारी डीजीसीए (DGCA) को भी दे दी गई है। क्या बाकी हेलिकॉप्टर सेवाएं चालू हैं? यूकाडा (UCADA) की सीईओ सोनिका ने बताया कि बाकी सभी हेलिकॉप्टर सेवाएं तय समय पर सामान्य रूप से जारी हैं। ये लैंडिंग सिर्फ एहतियात के तौर पर की गई थी ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पिछले माह भी हुआ था हेलिकॉप्टर हादसा पिछले महीने भी केदारनाथ धाम में लैंडिंग के समय हेली एम्बुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हेली एंबुलेंस ऋषिकेश एम्स का था, जोकि ऋषिकेश से केदारनाथ जा रहा था। वहीं बीते आठ मई को ही गंगोत्री धाम जा रहा एक हेलिकॉप्टर गंगनानी के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस घटना में पांच महिलाओं समेत छह लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। गंगनानी का हेलिकॉप्टर हादसा बहुत भयावह था। वहां पर खोज-बचाव अभियान चला रहे अधिकारी कर्मचारियों ने बताया कि घटना में हेलिकॉप्टर के भी दो टुकड़े हो गए थे। वहीं दो शव हेलिकॉप्टर में ही फंस गए थे। उन्हें निकालने के लिए हेली को काटना पड़ा था। वहीं करीब 200 मीटर गहरी खाई में रेस्क्यू अभियान चलाना बहुत मुश्किल था।    

बेंगलुरु भगदड़ मामले में कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ के सचिव और कोषाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

बेंगलुरु IPL 2025 फाइनल जीतने के बाद बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु यानी आरसीबी टीम के जश्न के दौरान 11 लोगों की मौत स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ में हो गई थी। इस मामले में आरसीबी के एक अधिकारी समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अब इसकी आंच कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन यानी केएससीए तक पहुंच गई है। केएससीए के सचिव और कोषाध्यक्ष को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा है। 4 जून को हुए इस भगदड़ कांड के बाद कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ के सचिव ए शंकर और कोषाध्यक्ष ईएस जयराम ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। केएससीए के पदाधिकारियों ने इस दुखद घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शुक्रवार (6 जून) को अपना-अपना पद छोड़ने का ऐलान किया। बता दें कि बेंगलुरु के स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई थी और 50 के करीब लोग घायल हो गए थे। क्रिकबज के मुताबिक, शनिवार को केएसीए की ओर से जारी एक प्रेस नोट में लिखा गया है, “यह सूचित किया जाता है कि पिछले दो दिनों में हुई अप्रत्याशित और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के कारण, जिसमें हमारी भूमिका बहुत सीमित थी, लेकिन नैतिक जिम्मेदारी के कारण, हम यह बताना चाहते हैं कि कल रात हमने कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ के अध्यक्ष को दिनांक 06.06.2025 के एक पत्र के माध्यम से कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ के सचिव और कोषाध्यक्ष के रूप में अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।” इस पत्र पर दोनों के हस्ताक्षर भी थे। दरअसल, आरसीबी ने 18 साल के बाद आईपीएल का खिताब जीता था। ऐसे में फैंस को इमोशन्स सातवें आसमान पर थे। आरसीबी की ओर से इस बात का ऐलान किया गया था कि स्टेडियम में खिलाड़ियों के साथ ट्रॉफी जीतने का जो जश्न होगा, उसमें फैंस की एंट्री फ्री होगी। ये कोई नई बात नहीं थी, लेकिन जिस तरह का फैन बेस टीम का है, उसे देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थी, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ा।

विराट कोहली ने कहा था कि टेस्ट क्रिकेट उनके लिए अभी भी आईपीएल से 5 लेवल ऊपर है, आंद्रे रसेल ने किया कमेंट

नई दिल्ली वेस्टइंडीज के ऑलराउंडर आंद्रे रसेल ने विराट कोहली के उस बयान पर कमेंट किया है, जिसमें उन्होंने रिटायरमेंट के बाद टेस्ट क्रिकेट की बात की थी। आईपीएल 2025 का खिताब जीतने के बाद आरसीबी के इस स्टार बल्लेबाज ने कहा था कि टेस्ट क्रिकेट उनके लिए अभी भी आईपीएल से 5 लेवल ऊपर है। भले ही वह टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट ले चुके हैं। हालांकि, आंद्र रसेल इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। इसके पीछे उन्होंने तर्क भी दिया है और कहा है कि टेस्ट सिर्फ टॉप टेस्ट प्लेइंग नेशन्स के लिए अच्छा है। 2008 से आरसीबी के लिए आईपीएल खेल रहे विराट कोहली ने 2025 में जाकर टीम के लिए पहली ट्रॉफी जीती। इससे पहले वे टेस्ट से रिटायरमेंट ले चुके है। फाइनल जीतने के बाद विराट ने कहा था, “यह पल मेरे करियर के सबसे बेहतरीन पलों में से एक है, लेकिन यह अभी भी टेस्ट क्रिकेट से 5 लेवल नीचे है। मैं टेस्ट क्रिकेट को इतना महत्व देता हूं और मैं टेस्ट क्रिकेट से इतना प्यार करता हूं। इसलिए मैं आने वाले युवाओं से यही आग्रह करूंगा कि वे इस प्रारूप का सम्मान करें।” कोहली के कमेंट पर रिऐक्शन देते हुए आंद्रे रसेल ने बताया कि उनके अनुसार बड़े क्रिकेट खेलने वाले देशों के खिलाड़ी ही टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित होते हैं। 37 वर्षीय ऑलराउंडर ने कई सालों से फ्रेंचाइजी क्रिकेट को तवज्जो दे रहे हैं। इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के दौरान वे लगभग छह महीने के बाद पहली बार वेस्टइंडीज की टीम में नजर आए। द गार्डियन से बात करते हुए आंद्रे रसेल ने कहा, “मुझे लगता है कि जब आप भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड से होते हैं, जहां वे अपने टेस्ट खिलाड़ियों की देखभाल करते हैं, तो यह वेस्टइंडीज से होने से बिल्कुल अलग होता है। उन लोगों को टेस्ट क्रिकेट खेलने और बड़े मंचों पर खेलने के लिए आकर्षक केंद्रीय अनुबंध मिलते हैं, बेशक वे खेलना चाहते हैं, लेकिन वेस्टइंडीज? आप 50 या 100 टेस्ट खेल सकते हैं, और आप जानते हैं कि रिटायर होने के बाद, आपके पास दिखाने के लिए बहुत कुछ नहीं होता है।” रसेल एक अनुभवी क्रिकेटर हैं, लेकिन वेस्टइंडीज के लिए वे अब तक 56 वनडे और 83 टी20 इंटरनेशनल मैच ही खेले हैं। एक टेस्ट उन्होंने 2010 में खेला था। इसके इतर वे 551 टी20 मैच अगल-अलग टी20 लीगों में खेल चुके हैं। रसेल ने कहा, “मुझे मूल रूप से टेस्ट सेट-अप से बाहर कर दिया गया था। उन्होंने मुझे एक सफेद गेंद वाले खिलाड़ी के रूप में देखा और बस यही हुआ। ईमानदारी से? इसका जवाब है- नहीं। मैं टेस्ट क्रिकेट में विश्वास करता हूं, लेकिन आखिरकार, मैं एक प्रोफेशनल हूं। यह मेरी यात्रा का हिस्सा नहीं था। मुझे कोई पछतावा नहीं है, क्योंकि यह मैं नहीं था जिसने अपनी पीठ मोड़ ली।”  

ईरान को यूरेनियम नहीं… न्यूक्लियर डील में सपना दिखाकर तोड़ा!

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने  एक सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया कि ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते के तहत अमेरिका किसी भी स्तर पर यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) की अनुमति नहीं देगा। हालांकि उन्होंने इस टिप्पणी के संबंध में और अधिक जानकारी नहीं दी। यह बयान उस समय आया है जब Axios की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिकी वार्ताकारों ने ईरान को एक ऐसा प्रस्ताव दिया है जिसमें सीमित और निम्न-स्तरीय यूरेनियम संवर्धन की अनुमति दी जाएगी। इस रिपोर्ट पर ईरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। ट्रंप इससे पहले भी बार-बार यह संकेत दे चुके हैं कि ईरान के साथ कोई समझौता अब जल्द हो सकता है, लेकिन अगर वार्ता विफल होती है तो ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना भी बनी हुई है। ट्रंप ने पिछले सप्ताह यह भी कहा था कि उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से कहा है कि इस समय ईरान पर सैन्य हमला “अनुचित” होगा क्योंकि “हम समाधान के बहुत करीब हैं।” नेतन्याहू और इजरायल की सरकार लंबे समय से यह मांग करती रही है कि ईरान को किसी भी स्तर पर यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, भले ही वह ऊर्जा उत्पादन और अन्य शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए क्यों न हो। उधर ईरान ने लगातार यह स्पष्ट किया है कि वह ऐसा कोई भी समझौता स्वीकार नहीं करेगा जिसमें उसे कम-स्तर पर यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं दी जाए। मौजूदा समय में ईरान अत्यधिक स्तर पर यूरेनियम का संवर्धन कर रहा है, जो परमाणु हथियारों के निर्माण के लिए आवश्यक स्तर के बेहद करीब है। परमाणु संवर्धन के अलावा, ईरान की प्रमुख मांग यह भी है कि अमेरिका उसे यह स्पष्ट गारंटी दे कि समझौते के तहत उस पर लगे प्रतिबंध किस तरह और कब हटाए जाएंगे। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोमवार को कहा कि अमेरिका ने अभी तक इस पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी यह खींचतान न केवल पश्चिम एशिया की शांति के लिए एक चुनौती है, बल्कि वैश्विक तेल बाजारों में अस्थिरता और संभावित युद्ध की आशंका भी बढ़ा सकती है। ईरान के बढ़ते यूरेनियम भंडार से जुड़ी रिपोर्ट पर ईरानी विदेश मंत्री ने आईएईए प्रमुख से की बात ईरान के विदेश मंत्री ने रविवार सुबह संयुक्त राष्ट्र (संरा) की परमाणु निगरानी एजेंसी आईएईए के निदेशक से फोन पर बात की। इसके पहले अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान संवर्धित यूरेनियम के अपने भंडार में बढ़ोतरी कर रहा है जो करीब-करीब हथियार बनाने योग्य स्तर का है। ‘टेलीग्राम’ ऐप पर अब्बास अराघची ने लिखा कि उन्होंने वियना स्थित अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी के साथ अपनी बातचीत में ईरान के ‘निरंतर सहयोग’ पर जोर दिया। आईएईए ने फोन कॉल के बारे में पूछे जाने पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया है। आईएईए की गोपनीय रिपोर्ट, जिसे शनिवार को ‘एसोसिएटेड प्रेस’ ने देखा, में सख्त चेतावनी देते हुए कहा गया है कि ईरान अब ऐसी सामग्री का उत्पादन करने वाला परमाणु हथियार से रहित एकमात्र देश है। रिपोर्ट में इसे ‘गंभीर चिंता’ का विषय बताया गया है। अराघची ने ग्रॉसी से बातचीत में इस चीज पर जोर दिया कि ईरान की सभी परमाणु गतिविधियां समझौतों के ढांचे के भीतर हैं और आईएईए द्वारा उनकी निगरानी की जा रही है। आईएईए ने एक अलग रिपोर्ट में कहा कि ईरान के कई स्थानों पर (जिन्हें तेहरान परमाणु स्थल घोषित करने में विफल रहा है) आईएईए निरीक्षकों द्वारा यूरेनियम की मौजूदगी के निशानों का पता लगाए जाने के मामले में उसके (एजेंसी) साथ ईरान का सहयोग ‘संतोषजनक’ नहीं रहा है। अराघची ने ग्रॉसी से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि “कुछ पक्षकार ईरानी लोगों के खिलाफ राजनीतिक एजेंडे के लिए एजेंसी का दुरुपयोग ना करें।” यूरोपीय देश व्यापक रिपोर्ट के आधार पर ईरान के खिलाफ और कदम उठा सकते हैं, जिससे ईरान और पश्चिम के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है। क्या होता है यूरेनियम संवर्धन? यूरेनियम संवर्धन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें प्राकृतिक यूरेनियम में मौजूद यूरेनियम-235 (U-235) आइसोटोप की सांद्रता को बढ़ाया जाता है। प्राकृतिक यूरेनियम में यूरेनियम-235 की मात्रा केवल 0.7% होती है, जबकि बाकी हिस्सा यूरेनियम-238 होता है। यूरेनियम-235 ही वह आइसोटोप है जो परमाणु विखंडन के लिए उपयुक्त है, जिसका उपयोग परमाणु रिएक्टरों में ऊर्जा उत्पादन या परमाणु हथियारों में किया जाता है।

पूर्व नेपाली प्रधानमंत्री पर पतंजलि योगपीठ को कानूनी रूप से अनुमति दी गई जमीन से अधिक भूमि खरीदने देने का आरोप

काठमांडू  नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल भ्रष्टाचार के मामले में फंस गए हैं। उनके ऊपर बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि योगपीठ के लिए लैंड डील के मामले में घोटाले का आरोप लगाया गया है। पूर्व नेपाली प्रधानमंत्री पर 2009 से 2011 के बीच पतंजलि योगपीठ नेपाल कंपनी को कानूनी रूप से अनुमति दी गई जमीन से अधिक भूमि खरीदने देने का आरोप है, और उनसे 18.5 करोड़ नेपाली रुपये हर्जाने की मांग की गई है। माधव कुमार नेपाल और पतंजलि योगपीठ दोनों ने भी आरोपों से इनकार किया है। नेपाल की यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी के नेता माधव कुमार ने नेपाली अखबार कांतिपुर से बातचीत में भ्रष्टाचार के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा, ‘मैंने पतंजलि भूमि सौदे के संबंध में कुछ भी अवैध नहीं किया है और न ही किसी भ्रष्टाचार में लिप्त रहा हूँ, जिससे राज्य को कोई नुकसान हुआ हो।’ माधव कुमार नेपाल पर क्या हैं आरोप? नेपाल की भ्रष्टाचार विरोधी संस्था कमीशन फॉर द इन्वेस्टिगेशन ऑफ एब्यूज ऑफ अथॉरिटी (CIAA) ने आरोप लगाया कि कावरे जिले की जमीन को बाद में दूसरी जमीन के साथ अदला-बदली करने या ज्यादा कीमत पर बेचने की अनुमति दी गई, जिससे राज्य को नुकसान हुआ। आयोग ने गुरुवार 5 जून को काठमांडू की एक विशेष अदालत में आरोप पत्र दायर किया। आयोग ने अदालत से नेपाल को 18.5 करोड़ नेपाली रुपये (लगभग 13.5 लाख डॉलर) का जुर्माना भरने का आदेश देने की मांग की है। पतंजलि ने आरोपों पर दी सफाई माधव कुमार नेपाल को अगर दोषी पाया जाता है तो उन्हें 17 साल तक जेल की सजा हो सकती है। वहीं, मामले में भारत में पतंजलि योगपीठ ने किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया है। पतंजलि के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने बताया कि कंपनी ने उचित प्रक्रिया के तहत निजी तौर पर जमीन खरीदी है। रॉयटर्स को एक संदेश में तिजारा ने कहा, पतंजलि ने कोई सरकारी जमीन नहीं खरीदी है। स्थानीय प्रतिरोध की कार्रवाई और कार्यवाही में हमारा नाम घसीटना अनुचित है। आयोग ने 92 अन्य लोगों पर भी आरोप लगाए हैं, जिनमें कुछ पूर्व मंत्री और अधिकारी शामिल हैं। इनमें से कई की पहले ही मौत हो चुकी है।

इधर जंग के बीच इजराइल ने कर ली बंपर कमाई, मुस्लिम देशों ने खूब दिए ऑर्डर, ये कैसा दोगलापन ?

तेल अवीव  इजरायल के सैन्य निर्यात ने नया रिकॉर्ड बनाया है। यह रिकॉर्ड तब बना है, जब इजरायल एक साथ कई मोर्चों पर युद्ध लड़ रहा है। नई रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल ने 2024 में पहले से कहीं अधिक हथियार अन्य देशों को बेचे हैं। वर्तमान में इजरायल गाजा में युद्ध लड़ रहा है। वहीं, सीरिया, लेबनान, ईरान और यमन में हवाई हमले और स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन चला रहा है। इजरायल पर गाजा में युद्ध समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ रहा है। इसके बावजूद यह देश झुकने को तैयार नहीं है और दुश्मनों से जमकर लोहा ले रहा है। इजरायल का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर यूरेशियन टाइम्स ने बताया कि इजरायल के रक्षा मंत्रालय के नए आंकड़ों के अनुसार, 2024 में इजरायल का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 14.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इसने 2023 में 13 बिलियन अमेरिकी डॉलर के पिछले उच्च स्तर को तोड़ दिया। इजरायल ने हथियारों की बिक्री में साल-दर-साल 13% की अच्छी वृद्धि दर्ज की, जिससे यह स्पष्ट रूप से स्थापित हुआ कि इसके रक्षा निर्यात, गाजा में चल रहे युद्ध और मानवाधिकारों के हनन और यहां तक कि नरसंहार के आरोपों के कारण वैश्विक स्तर पर इसकी बढ़ती आलोचना और अलगाव से अछूते हैं। लगातार चौथे साल बढ़ा इजरायल का निर्यात इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने कहा, “यह अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है और लगातार चौथा वर्ष है जब इजरायल के रक्षा निर्यात के लिए एक नया रिकॉर्ड बनाया गया है।” अपने सबसे लंबे युद्ध के दौरान इजरायल की बढ़ती हथियारों की बिक्री रूस के बिल्कुल विपरीत है, जहां यूक्रेन में युद्ध के दौरान रक्षा निर्यात बिखर गया है। डेटा से पता चलता है कि इजरायल ने कुछ पूर्व रूसी हथियार निर्यात बाजारों में विस्तार किया हो सकता है। रूस के बाजार को इजरायल ने कब्जाया स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने गणना की कि 2019 से 2023 की अवधि में रूसी हथियारों के निर्यात में पिछले पांच साल की अवधि की तुलना में आधे से भी कम कमी आई है। अन्य अनुमानों ने और भी भयावह तस्वीर पेश की है। जेम्सटाउन फाउंडेशन के अनुसार, यूक्रेन के लिए पुनर्निर्देशित संसाधनों, प्रतिबंधों, मुद्रास्फीति और वित्तपोषण संबंधी मुद्दों के कारण 2021 से 2024 तक रूस के हथियारों के निर्यात में 92 प्रतिशत की गिरावट आई है। चूंकि रूस भारत से लेकर अरब देशों तक एशिया में अपने विरासत रक्षा निर्यात बाजारों को खो रहा है, इसलिए इज़राइल ने इस कमी को पूरा करने के लिए कदम बढ़ाया है। इजरायली हथियारों के लिए बाजार आंकड़ों के अनुसार, यूरोप इजरायली हथियारों के निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है, जो इजरायल के रक्षा निर्यात का 54% हिस्सा है। 2023 में, यूरोप में इजरायली हथियारों के निर्यात 35% था। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 2024 में यूरोपीय देशों ने लगभग 8 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के इजरायली सैन्य उत्पाद खरीदे, जबकि 2023 में यह 4.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। इसका प्रमुख कारण रूस-यूक्रेन युद्ध है, क्योंकि यूरोप अपने रक्षा खर्च को बढ़ा रहा है और अपने घटते सैन्य भंडार को फिर से भरने की कोशिश कर रहा है। जर्मनी हुआ इजरायी हथियारों का दीवाना एरो 3 एयर डिफेंस सिस्टम के लिए जर्मनी के साथ इजरायल के ऐतिहासिक सौदे ने इन हथियारों की बिक्री में एक बड़ा हिस्सा दिया। इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने एरो 3 मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए जर्मनी के साथ 3.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का समझौता किया, जो इजरायल के इतिहास में सबसे बड़ा रक्षा सौदा है। विशेष रूप से, यूरोप को इजरायली हथियारों की बिक्री में वृद्धि हुई है, इस तथ्य के बावजूद कि कई यूरोपीय देश गाजा में इजरायल के अभियान की खुलेआम आलोचना कर रहे हैं, जो अब अपने 20वें महीने में है। पिछले साल कई प्रमुख यूरोपीय रक्षा प्रदर्शनियों से इजरायली फर्मों को बाहर रखा गया था। इसके अलावा, कुछ देशों ने पहले से हस्ताक्षरित रक्षा अनुबंधों को भी रोक दिया है। 14.8 बिलियन डॉलर तक बेचे हथियार ‘यूरेशियन टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी नए आंकड़ों के अनुसार साल 2024 में इजरायल का रक्षा निर्यात 14.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था. इसने साल 2023 के 13 बिलियन यूएम डॉलर के रिकॉर्ड को तोड़ा है. बता दें कि इजरायल के हथियार बिक्री में साल दर साल 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने इसको लेकर कहा,’ यह अब तक का सबसे ज्यादा आंकड़ा है और लगातार चौथा साल है जब इजरायल के रक्षा निर्यात के लिए एक नया रिकॉर्ड बनाया गया है.’ रूस को पछाड़ा ‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक रूसी हथियारों के निर्यात में साल 2019-2023 के बीच पिछले 5 साल की अवधि के मुकाबले काफी कमी आई है. ‘जेम्सटाउन फाउंडेशन’ के मुताबिक साल 2021-2024 तक रूस के हथियारों के निर्यात में 92 प्रतिशत की कमी आई है. आंकड़ों के मुताबिक इजरायली हथियार के लिए यूरोप सबसे बड़ा मार्केट है. इसका मुख्य कारण रूस-यूक्रेन युद्ध है, जिसमें यूरोप रक्षा खर्च बढ़ाते हुए सैन्य भंडार को भर रहा है.   यहां इजरायली हथियारों की धूम बता दें कि जर्मनी, मिडिल ईस्ट और भारत इजरायली हथियारों का बड़ा मार्केट बन रहा है. इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने जर्मनी के साथ एरो 3 एयर डिफेंस सिस्टम के लिए 3.8 बिलियन डॉलर की डील की है. इजरायल की हिस्ट्री में यह सबसे बड़ा डिफेंस डील है. एशिया में इजरायली हथियारों के लिए भारत बड़ा मार्केट है. ‘SIPRI’के मुताबिक साल 2020-2024 में यूक्रेन के बाद भारत दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा हथियार खरीदता है. मिडिल ईस्ट में भी इजरायली हथियारों की धूम मची है. बहरीन, मोरक्को, UAE और सूडान को इजरायल ने 1.8 बिलियन डॉलर का हथियार बेचा है.  स्पेन ने इजरायल को दिया झटका इस सप्ताह की शुरुआत में, स्पेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने इजरायल की सरकारी स्वामित्व वाली राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम की एक सहायक कंपनी द्वारा निर्मित एंटी-टैंक मिसाइलों के लिए 325 मिलियन अमेरिकी डॉलर के सौदे को रद्द कर दिया है, जो “इजरायली तकनीक के क्रमिक वियोग” का हिस्सा है। इससे पहले, स्पेन ने एल्बिट सिस्टम के साथ 6.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर के गोला-बारूद सौदे को भी रद्द कर … Read more

आतंकी हमले पर सफाई देने पहुंचे बिलावल भुट्टो बुरी तरह घिरे, अमेरिका ने जैश-ए-मोहम्मद को लेकर पाकिस्तान के सामने रख दी बड़ी मांग

वाशिंगटन  अमेरिका के एक वरिष्ठ सांसद ब्रैड शेरमैन ने गुरुवार को बिलावल भुट्टो के नेतृत्व वाले पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल से कहा कि उनके देश को घृणित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सफाया करने के लिए वह सब करना चाहिए जो वह कर सकता है। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करने के लिए कहा। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने  शेरमैन से मुलाकात की पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने  शेरमैन से मुलाकात की। बाद में अमेरिकी सांसद ने पर पोस्ट में कहा कि उन्होंने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के समक्ष आतंकवाद से लड़ाई के महत्व पर जोर दिया, खासकर जैश-ए-मोहम्मद के संबंध में जिसने 2002 में उनके संसदीय क्षेत्र के डेनियल पर्ल की हत्या की थी। पर्ल का परिवार उनके ही डिस्ट्रिक्ट में रहता है। आतंकी उमर सईद शेख को वाल स्ट्रीट जर्नल के पत्रकार पर्ल के अपहरण एवं हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था। शेरमैन ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सुनाई खरी खरी शेरमैन ने पाकिस्तानी दल से यह भी कहा कि उनके देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दा है। पाकिस्तान में रह रहे ईसाई, हिंदू एवं अहमदिया मुस्लिमों को अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करने और हिंसा, प्रताड़ना, भेदभाव या भेदभावपूर्ण न्याय प्रणाली से डरे बिना लोकतांत्रिक प्रणाली में हिस्सा लेने की आजादी होनी चाहिए। शेरमैन ने पाकिस्तानी डॉक्टर की रिहाई के बारे में कही ये बात शेरमैन ने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल से आग्रह किया कि वे अपनी सरकार को डॉ. शकील अफरीदी को रिहा करने की आवश्यकता के बारे में बताएं, जो ओसामा बिन लादेन को मारने में अमेरिका की मदद करने के लिए जेल में बंद हैं। डॉ. अफरीदी एक पाकिस्तानी डॉक्टर हैं, जिन्होंने लादेन के परिवार के डीएनए नमूने एकत्र करने के लिए खैबर पख्तूनख्वा में पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम चलाने में सीआइए की मदद की थी। डॉ. अफरीदी को 33 वर्ष जेल की सजा सुनाई थी मई, 2011 में एबटाबाद में लादेन के परिसर पर अमेरिकी कार्रवाई के तुरंत बाद डॉ. अफरीदी को पाकिस्तानी अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया था। 2012 में एक पाकिस्तानी अदालत ने डॉ. अफरीदी को 33 वर्ष जेल की सजा सुनाई थी।  

Pakistan का हाल बदहाल… बढ़ रही है गरीबी, World Bank ने किया बड़ा खुलासा

कराची लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहे पाकिस्तान (Pakistan Economic Crisis) में आईएमएफ (IMF) से लेकर तमाम वैश्विक निकायों से मिल रही वित्तीय सहायता के बाद भी हाल बदहाल हैं. लोग गरीबी में घुसते जा रहे हैं और महंगाई के कोहराम के चलते लोगों को खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जूझना पड़ रहा है. इन सबके बीच पाकिस्तान गीदड़भभकियां देते हुए भारत से पंगा लेता रहता है और हर बार उसे मुंह की खानी पड़ती है. Paksitan में लगातार गरीबी बढ़ रही है और ये हम नहीं कह रहे, बल्कि खुद विश्व बैंक (World Bank) की रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है और साथ ही गरीबी बढ़ने का बड़ा कारण भी बताया गया है. खास बात ये है कि ये रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब जून में World Bank द्वारा पाकिस्‍तान के लिए 20 अरब डॉलर का अमाउंट अप्रूव करने की बातें कही जा रही हैं.  पाकिस्तान की करीब आधी आबादी गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रही है। वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान की 45 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन गुजार रही है। वर्ल्ड बैंक के डेटा में यह जानकारी दी गई है। विश्व बैंक ने 2018-19 के सर्वे के अनुसार यह बात कही है। बैंक का कहना है कि गरीबी रेखा से जीवन स्तर ऊपर उठाने के मामले में पाकिस्तान की स्थिति लगातार खराब हो रही है। यही नहीं अति-निर्धनता में जीने वाले पाकिस्तानियों की संख्या बीते कुछ सालों में 4.9 फीसदी से बढ़कर 16.5 पर्सेंट हो गई है। विश्व बैंक ने वैश्विक गरीबी इंडेक्स को अपडेट किया है और उसमें पाकिस्तान की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसकी वजह यह है कि बीते कुछ सालों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में कोई ग्रोथ नहीं है। विश्व बैंक का कहना है कि इंटरनेशनल पॉवर्टी लाइन 3 डॉलर मासिक की कमाई पर आधारित है। पाकिस्तान में ऐसे लोग 45 फीसदी हैं, जिनकी कमाई महीने में तीन डॉलर भी नहीं है। इसके अलावा पाकिस्तान अति निर्धन परिवारों की संख्या में इजाफे की एक और वजह है। वह है इंटरनेशनल पॉवर्टी इंडेक्स में बदलाव होना। पहले इंटरनेशनल पॉवर्टी इंडेक्स का मानक 2.15 डॉलर था, जो अब बढ़कर 3 डॉलर हो गया है। इससे पहले कम आय वाले देशों यानी LIC के लिए प्रति व्यक्ति आय की दर वर्ल्ड बैंक ने 2.15 डॉलर निर्धारित की थी। तब पाकिस्तान के 4.9 फीसदी लोग अति निर्धन माने गए थे। अब यह मानक बढ़कर 3 डॉलर प्रतिदिन हो गया है। इसके साथ ही आंकड़ा भी अब 16.5 पहुंच गया है। बता दें कि पाकिस्तान गरीबी के साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा के मानकों में भी फिसड्डी है। यहां तक कि पाकिस्तान में बीते करीब डेढ़ सालों में पोलियो के ही 81 केस मिल चुके हैं। ऐसा तब है, जब दुनिया के तमाम देश पोलियो मुक्त हो चुके हैं। वहीं अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अब भी पोलियो के केस पाए जाते हैं। मदद के बाद भी नहीं सुधरे PAK के हालात बीते कुछ सालों में सोशल मीडिया पर Pakistan की बदहाली की तमाम तस्वीरें वायरल हुईं और आर्थिक तंगी के बीच लोग आटा-दाल से लेकर गैस-पानी तक के लिए जान की बाजी लगाते हुए नजर आए. ये हाल पाकिस्तान में तब हैं, जब उस पर तरस खाते हुए IMF-World Bank ने बड़ी रकम दी है. लेकिन आतंक का पनाहगार देश आम लोगों के जीवन में बदलाव के बजाय इसे आतंकियों पर लुटाने में लगा है, हाल ही में पहलगाम हमले के बाद भारत से बढ़े तनाव के बीच ये खुलकर सबसे सामने आ गया और आईएमएफ को भी इसका एहसास हुआ. इसके चलते उसने जो 1 अरब डॉलर की अतिरिक्त आर्थिक मदद के साथ पाकिस्तान के लिए बेलआउट को मंजूरी दी थी, उसके तुरंत बाद 11 नई शर्तें लगातार पाकिस्तान को झटका दिया. पाकिस्तान की बदहाल की हाल ये है कि देश पर 131 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज है, जो इसकी जीडीपी (Pakistan GDP) का करीब 42 फीसदी है, तो महंगाई, भुखमरी और बेरोजगारी की मार से जनता कराह रही है.   पाकिस्तान में गरीबी बढ़ने के पीछे GST अब वर्ल्ड बैंक (World Bank) की एक नई रिपोर्ट आई है और इसमें पाकिस्तान में बढ़ती गरीबी के पीछे के कारणों के बारे में बड़ा खुलासा किया गया है. इसमें वैश्विक निकाय ने कहा है कि पाकिस्तान की गरीबी (Pakistan Poverty) बढ़ने के पीछे जनरल सेल्स टैक्स यानी GST अहम रोल निभा रहा है. ‘द इफेक्ट्स ऑफ टैक्सेज एंड ट्रांसफर्स ऑन इनइक्वलिटी एंड पावर्टी इन पाकिस्तान’ शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक ने दावा किया है कि जीएसटी भुगतान पाकिस्तानी परिवारों के प्री-टैक्स एक्सपेंडिचर का 7 फीसदी से ज्यादा है, जो गरीब और कमजोर परिवारों को और गरीब बनाने का काम कर रहा है. Dawn की एक रिपोर्ट में भी वर्ल्ड बैंक की रिसर्च का हवाला देते हुए कहा गया है कि व्यक्तिगत राजकोषीय साधनों के सीमांत योगदान का अनुमान और व्यक्तिगत राजकोषीय साधनों का गरीबी या असमानता पर अतिरिक्त प्रभाव जब अन्य सभी राजकोषीय साधनों को शामिल किया जाता है, तो यह साफ प्रदर्शित करता है कि जनरल सेल्स टैक्स का पाकिस्तान में राष्ट्रीय गरीबी वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान है. PAK Govt के लिए बड़ी सलाह वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तान को इस खतरे से आगाह करने के बाद इससे बचाव का की सलाह भी दी है और सुझाव देते हुए कहा है कि पाकिस्तान सरकार को डॉमेस्टिक रेवेन्यू कलेक्शन और पब्लिक एक्सपेंडिचर में सुधार करना होगा. फिस्कल इक्विटी में सुधार के लिए ये करना जरूरी है. इसके अलावा वैश्विक निकाय ने पाकिस्तान में पब्लिक हेल्थ और एजुकेशन तक पहुंच बढ़ाने के लिए सुधार लागू करने पर भी जोर दिया है, जो देश में गरीबी और असमानता को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. इसके साथ ही World Bank ने पाकिस्तान के टैक्स सिस्टम की कमियों को उजागर करते हुए कहा है कि पाकिस्तान के लिए मुसीबत ये है कि उसने इनडायरेक्ट टैक्सों पर ज्यादा फोकस किया है और सब्सिडी एक्सपेंडिचर से रेवेन्यू अर्जित करने का रास्ता चुना है.  

भारत में अब अधिकांश सेक्टरों में ऑटोमेटिक रूट से 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति: मंत्री पीयूष गोयल

नई दिल्ली वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत में अब 112 देशों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आ रहा है, जबकि 2013-14 में यह आंकड़ा 89 था। इससे देश की ग्लोबल अपील में वृद्धि की जानकारी मिलती है। राष्ट्रीय राजधानी में स्थित वाणिज्य भवन में इन्वेस्टर राउंडटेबल को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सफलता की कहानी न केवल प्रभावशाली आंकड़ों के बारे में है, बल्कि यह दूरदर्शी सुधारों, नीतिगत स्पष्टता और भारत के आर्थिक भविष्य में वैश्विक समुदाय के भरोसे का भी प्रतिबिंब है। निवेशक-अनुकूल नीति व्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अब अधिकांश सेक्टरों में ऑटोमेटिक रूट से 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति है। राउंडटेबल में प्रमुख कंपनियों, औद्योगिक पार्कों और औद्योगिक संघों के पक्षकारों सहित 90 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों के 50 से अधिक औद्योगिक पार्कों का प्रतिनिधित्व किया गया। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने अपने संबोधन में कहा कि एफडीआई भारत के विकास की आधारशिला है और भारत की क्षमता में वैश्विक विश्वास का एक प्रमुख संकेतक है। उन्होंने देश के भीतर पुनर्निवेश बढ़ाने, औद्योगिक पार्क के बुनियादी ढांचे में सुधार करने और नए विस्तार के अवसरों का पता लगाने के लिए निवेशकों से विचार और सुझाव आमंत्रित किए। डीपीआईआईटी के सचिव ने विदेशी निवेश को और अधिक बढ़ाने के लिए लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने प्रमुख निवेशकों से अपने परिचालन को बढ़ाने, स्टार्टअप में निवेश करने और भारत की बढ़ती निवेश गति में योगदान देने पर विचार करने का भी आग्रह किया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभागियों ने सरकार के सक्रिय नीतिगत उपायों और उदार निवेश मानदंडों की सराहना की, जिसने भारत की आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में स्थिति को बढ़ाया है। पक्षकारों ने भूमि एवं श्रम सुधार, कौशल विकास, केंद्र-राज्य नीति समन्वय, विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास में एफडीआई सीमा बढ़ाने और विनिर्माण एवं हरित ऊर्जा में निवेश को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर सुझाव भी साझा किए।

‘बेहतर हो उन्हें कुछ समय तक लड़ने दिया जाए’, ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक विवादास्पद बयान दिया

वॉशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि शायद यह बेहतर होगा कि दोनों देश कुछ समय तक लड़ते रहें। इसी बीच, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अमेरिका से रूस पर दबाव बढ़ाने की अपील की है। व्हाइट हाउस में मर्ज से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा, “उनके बीच गहरी नफरत और बदले की भावना है, ऐसे में निकट भविष्य में युद्धविराम की उम्मीद करना मुश्किल है। वे लगातार लड़ रहे हैं। जैसे खेलों में रेफरी थोड़ी देर तक खिलाड़ियों को भिड़ने देते हैं, वैसे ही कभी-कभी उन्हें थोड़ी देर तक लड़ने देना ठीक होता है।” बता दें कि यह टिप्पणी ट्रंप के उस दावे के बाद एक बड़ा बदलाव है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे सत्ता में आए तो युद्ध जल्दी खत्म कर देंगे। जर्मन चांसलर मर्ज ने ट्रंप से आग्रह किया कि अमेरिका को युद्ध खत्म कराने में निर्णायक भूमिका निभानी चाहिए और रूस पर और दबाव बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अमेरिका इस युद्ध को समाप्त करने की स्थिति में है। हम चाहते हैं कि अमेरिका रूस पर अधिक दबाव डाले।” नए प्रतिबंधों पर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने संकेत दिया कि फिलहाल तुरंत कोई फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो हम दोनों देशों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। क्योंकि एक कहावत है – ताली दो हाथ से बजती है। इसके साथ ही, ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर मैं नहीं होता, तो रूस के साथ बहुत बुरा हो चुका होता, मेरा मतलब है बेहद बुरा। पुतिन आग से खेल रहे हैं।” यह बात ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर लिखी। उन्होंने पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की दोनों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “मैं पुतिन की हरकतों से खुश नहीं हूं। मुझे नहीं पता कि पुतिन को क्या हो गया है।”

फरार कारोबारी मेहुल चोकसी के बैंक अकाउंट्स और इन्वेस्टमेंट्स को फ्रीज किया: सेबी

मुंबई भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 2.1 करोड़ रुपए की वसूली के लिए फरार कारोबारी मेहुल चोकसी के बैंक खातों, म्यूचुअल फंड और शेयरों को कुर्क करने का आदेश दिया है। यह राशि गीतांजलि जेम्स के शेयरों में इंसाइडर ट्रेडिंग नियमों का उल्लंघन करने के लिए उन पर लगाए गए जुर्माने से संबंधित है। गीतांजलि जेम्स के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक रह चुके चोकसी पर अपने सहयोगी राकेश गिरधरलाल गजेरा के साथ अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी (यूपीएसआई) साझा करने का आरोप है। इस जानकारी के आधार पर गजेरा ने दिसंबर 2017 में कंपनी में अपनी पूरी 5.75 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी थी। गजेरा ने यह कदम कंपनी से जुड़ी धोखाधड़ी गतिविधियों का विवरण सार्वजनिक होने से पहले नुकसान से बचने के लिए उठाया था। इसके लिए जनवरी 2022 में सेबी ने चोकसी पर 1.5 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था और पूरे एक साल के लिए ट्रेडिंग से बैन कर दिया था। हालांकि, चोकसी ने इस जुर्माने का भुगतान नहीं किया। इस कारण से सेबी को 15 मई, 2025 को डिमांड नोटिस जारी करना पड़ा, लेकिन 15 दिनों के भीतर जवाब न मिलने के कारण उनकी संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश दिया गया है। चोकसी पर अब कुल बकाया राशि 2.1 करोड़ रुपए है, जिसमें 60 लाख रुपए का ब्याज शामिल है। 4 जून को जारी अपने नोटिस में सेबी ने सभी बैंकों, सीडीएसएल और एनएसडीएल जैसी डिपॉजिटरी और म्यूचुअल फंड हाउस को चोकसी के खाते फ्रीज करने का निर्देश दिया है। सेबी के निर्देश के बाद चोकसी के खातों से पैसों की निकासी नहीं की जा सकती है। हालांकि, क्रेडिट के लिए अभी भी अनुमति है। बाजार नियामक ने बैंकों को उसके नाम पर मौजूद सभी लॉकर जब्त करने का निर्देश भी दिया है। बाजार नियामक ने बताया कि यह कार्रवाई इसलिए जरूरी थी क्योंकि इस बात की प्रबल संभावना है कि चोकसी अपनी संपत्ति को कहीं और ले जाने या छिपाने की कोशिश कर सकता है, जिससे वसूली प्रक्रिया में देरी हो सकती है या उसे रोका जा सकता है। नीरव मोदी का मामा चोकसी 14,000 करोड़ रुपए से अधिक के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी मामले के संबंध में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहा है। घोटाला सामने आने के बाद 2018 की शुरुआत में चोकसी और मोदी दोनों भारत से विदेश भाग गए थे। चोकसी 2018 से एंटीगुआ में रह रहा था, लेकिन इस साल अप्रैल में भारतीय अधिकारियों द्वारा उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध करने के बाद उसे बेल्जियम में गिरफ्तार कर लिया गया। वह कथित तौर पर इलाज के लिए बेल्जियम में था। इस बीच, नीरव मोदी 2019 में स्कॉटलैंड यार्ड द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद ब्रिटेन की जेल में बंद है।

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