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पहलगाम आतंकी हमले के खिलाफ भारत के साथ एकजुटता दिखाने के लिए आभार व्यक्त किया: एस जयशंकर

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को मध्य एशियाई देशों की ओर से पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने और भारत के साथ एकजुटता दिखाने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित चौथे भारत-मध्य एशिया संवाद के उद्घाटन सत्र में कहा, “मैं इसकी सराहना करता हूं कि आपके देशों ने भारत के साथ खड़े होकर उस भयावह आतंकी हमले की निंदा की, जो अप्रैल में पहलगाम में हुआ था।” इस संवाद में कजाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मुरात नुर्तलेउ, ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन, तुर्कमेनिस्तान के विदेश मंत्री राशिद मेरेदोव, किर्गिस्तान के विदेश मंत्री जीनबेक कुलुबाएव और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सैदोव ने भाग लिया। जयशंकर ने कहा कि भारत मध्य एशिया के साथ अपनी हजारों साल पुरानी सभ्यतागत और सांस्कृतिक साझेदारी को गहराई से संजोता है। उन्होंने कहा कि व्यापार, विचारों के आदान-प्रदान और लोगों के संपर्क के माध्यम से बने यह संबंध समय के साथ और मजबूत हुए हैं, जो अब साझी आकांक्षाओं और चुनौतियों पर आधारित सहयोग में बदल चुके हैं। उन्होंने बताया कि भारत-मध्य एशिया सहयोग को 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सभी पांच मध्य एशियाई देशों की यात्रा के बाद “क्वांटम बूस्ट” मिला। जयशंकर ने यह भी बताया कि 2022 में भारत और मध्य एशियाई देशों के समकालीन कूटनीतिक संबंधों के 30 वर्ष पूरे हुए। इस दौरान दोनों पक्षों ने कानूनी और संस्थागत ढांचा तैयार किया, जिसने आपसी सहयोग को नई ऊंचाई दी। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत, मध्य एशियाई देशों का एक विश्वसनीय विकास सहयोगी बना हुआ है। उन्होंने बताया कि व्यापार, आर्थिक और निवेश संबंध पिछले एक दशक में उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुए हैं। जयशंकर ने आईटीईसी ट्रेनिंग स्लॉट, आईसीसीआर छात्रवृत्ति और ‘हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स’ के तहत भारतीय अनुदानों का जिक्र किया, जो सामाजिक-आर्थिक विकास में सहयोग दे रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को हुई भारत-मध्य एशिया बिजनेस काउंसिल मीटिंग के बारे में बताया कि इसमें डिजिटल तकनीक, फिनटेक, इंटर-बैंक संबंधों जैसे क्षेत्रों में अड़चनों को दूर करने और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष व्यापार, निवेश, रक्षा, कृषि प्रसंस्करण, वस्त्र, फार्मा, क्षेत्रीय संपर्क, सुरक्षा, शिक्षा, संस्कृति, और नवाचार तकनीकों में आपसी हितों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बता दें कि भारत-मध्य एशिया संवाद की शुरुआत जनवरी 2019 में समरकंद में हुई थी। दूसरा संवाद अक्टूबर 2020 में वर्चुअली आयोजित हुआ था और तीसरा दिसंबर 2021 में नई दिल्ली में हुआ था।

तल्हा सईद ने कर दिया बड़ा दावा- पाक सरकार कभी भी हाफिज सईद को भारत को सौंपने जैसा कोई कदम नहीं उठाएगी

इस्लामाबाद  लश्कर-ए-तैयबा के सरगना और मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को लेकर उसके बेटे तल्हा सईद ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। एक वायरल वीडियो में तल्हा ने कहा है कि उसके पिता पाकिस्तान सरकार की सुरक्षा में पूरी तरह महफूज़ हैं और भारत की जितनी भी कोशिशें हों, पाकिस्तान उन्हें कभी भी भारत को नहीं सौंपेगा। तल्हा का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत लगातार यह मांग करता रहा है कि हाफिज सईद को उसके हवाले किया जाए ताकि 26/11 हमलों के पीड़ितों को न्याय मिल सके। पाकिस्तान के रवैये पर उठे सवाल इस वीडियो में तल्हा सईद साफ कहता है कि पाकिस्तान की सरकार और उसकी खुफिया एजेंसियों को अच्छी तरह पता है कि भारत के आरोप पूरी तरह “झूठे और बेबुनियाद” हैं। उसने यह भी कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके पिता के खिलाफ एक फर्जी नैरेटिव खड़ा किया है और पाकिस्तान की एजेंसियां इस सच को जानती हैं। यही वजह है कि पाकिस्तान सरकार कभी भी हाफिज सईद को भारत को सौंपने जैसा कोई कदम नहीं उठाएगी। तल्हा का यह दावा पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही नीति को ही दोहराता है, जिसे भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय अक्सर ‘दोहरा मापदंड’ करार देता है।   संगठन में बढ़ रही है तल्हा की भूमिका वीडियो में तल्हा ने यह भी स्वीकार किया कि अब वह पहले की तुलना में अधिक सक्रिय हो गया है, क्योंकि उसके पिता का स्वास्थ्य अब पहले जैसा नहीं रहा। बीते कुछ महीनों से तल्हा सईद को पाकिस्तानी मीडिया में धार्मिक और राजनीतिक मंचों पर काफी बार देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकेत है कि लश्कर-ए-तैयबा में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी चल रही है और तल्हा को हाफिज सईद का उत्तराधिकारी बनाने की योजना पर काम हो रहा है।   भारत की कोशिशें और अंतरराष्ट्रीय दबाव भारत वर्ष 2008 के मुंबई हमलों के बाद से ही हाफिज सईद को अपने हवाले करने की मांग करता रहा है। अब तक कई बार भारत ने पाकिस्तान को सबूतों के साथ डोजियर सौंपे हैं, जिनमें सईद की भूमिका स्पष्ट की गई है। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने भी हाफिज को वैश्विक आतंकी घोषित किया हुआ है, बावजूद इसके पाकिस्तान ने उस पर कभी भी निर्णायक कार्रवाई नहीं की। तल्हा सईद के इस बयान से भारत-पाक संबंधों में एक बार फिर से तल्खी बढ़ सकती है और भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को घेरने की कोशिश तेज कर सकता है। FATF की नजर और पाकिस्तान की छवि तल्हा के इस बयान से यह भी उजागर होता है कि पाकिस्तान आतंक के मसले पर दोहरी नीति अपनाता है। एक तरफ वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंक के खिलाफ खड़ा होने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर वह आतंकी संगठनों के सरगनाओं को संरक्षण देता है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) जैसी संस्थाएं पहले भी पाकिस्तान को अपनी ग्रे लिस्ट में रख चुकी हैं और ऐसे बयानों के बाद उस पर फिर से कार्रवाई का दबाव बढ़ सकता है।  

जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य विभाग के फूले हाथ-पाव, दिन-ब-दिन बढ़ते ही जा रहे Covid-19 के केस

जम्मू  जम्मू-कश्मीर में वीरवार को कोरोना के 2 नए मामलों की पुष्टि हुई है। प्रदेश में अब तक 13 कोरोना के नए मामले सामने हैं। इन 13 मामलों में से 7 मामले अभी एक्टिव हैं जिनमें से 5 मामले कश्मीर व 2 मामले जम्मू में एक्टिव हैं। वीरवार को कश्मीर के बड़गाम जिले से 2 नए मामलों की पुष्टि हुई है। बढ़ते मामलों को देखते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार भी जोखिम नहीं उठाना चाहती है। अस्पतालों में लोगों को पहले से जारी कोरोना के दिशा निर्देशों का पालन करने के लिए कहा जा रहा है। कोरोना को लेकर चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग सतर्क हैं। कोरोना के लक्षण आम फ्लू की भांति ही है लेकिन ज्यादा दिन तक बुखार रहने पर तुरंत डाक्टर को दिखाएं और कोरोना का टैस्ट करवाएं। 

कनाडा पीएम ने फोन कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जी-7 शिखर सम्मेलन का दिया न्योता, प्रधानमंत्री होंगे शामिल

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए कनाडा जाएंगे। पीएम मोदी को खुद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने फोन कर न्योता भेजा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संबंध में एक्स पोस्ट में जानकारी दी है। दरअसल, इस बार जी-7 शिखर सम्मेलन का आयोजन कनाडा में हो रहा है। पीएम मोदी ने इसी महीने के अंत में कनाडा के कनानैस्किस में आयोजित होने वाले इस शिखर सम्मेलन में मिले न्योता के लिए कनाडा के पीएम का आभार जताया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा कि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क जे कार्नी से फोन पर बात करके खुशी हुई। हाल ही में हुए चुनाव में उनकी जीत पर उन्हें बधाई दी और इस महीने के अंत में कनानैस्किस में होने वाले जी 7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। पीएम मोदी ने मार्क कार्नी को दी बधाई इसके अलावा पीएम मोदी मोदी ने अपने पोस्ट के माध्यम से कनाडा के नवनिर्वाचित पीएम मार्क कार्नी को बधाई भी दी है। बता दें कि कार्नी के पूर्ववर्ती जस्टिन ट्रूडो की सरकार के दौरान देश में खालिस्तानी अलगाववादियों की गतिविधियों सहित कई मुद्दों पर भारत के कनाडा के साथ संबंध ठंडे पड़ गए थे।

अब यात्री कश्मीर से कन्याकुमारी तक ट्रेन से सफर कर सकेंगे, कटड़ा से श्रीनगर तक वंदेभारत दौड़ गई, बुलेट प्रूफ जैकेट

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के लिए आज ऐतिहासिक दिन है। सालों का सपना आज पूरा हुआ। कटड़ा से श्रीनगर तक वंदेभारत दौड़ गई। अब यात्री कश्मीर से कन्याकुमारी तक ट्रेन से सफर कर सकेंगे। लेकिन लोगों को वंदे भारत में सफर के दौरान सुरक्षा की भी चिंता सता रही होगी। लेकिन इसके लिए आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। वंदे भारत को अभेद किले की तरह सुरक्षित किया गया है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के कमांडो CORAS को उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लाइन पर वंदे भारत ट्रेनों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। उद्घाटन के दौरान कमांडो ट्रेन में मौजूद रहे। अधिकारियों ने कहा कि ट्रेन यात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर वंदे भारत ट्रेन में 15 कमांडो और एक पर्यवेक्षक मौजूद होंगे। इन इकाइयों को कश्मीर घाटी के बडगाम क्षेत्र तथा रियासी जिले के कटड़ा में तैनात होंगी। 7 जून से करें ट्रेन में सफर उच्च जोखिम वाले सुरक्षा अभियानों, खासकर नक्सली उग्रवाद जैसे खतरों वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के बाद यह पहली बार है जब कोरस को जम्मू-कश्मीर में तैनात किया गया है। उद्घाटन के बाद यात्री अब 7 जून से वंदे भारत ट्रेन में सफर का आनंद ले सकेंगे। आईआरसीटीसी के जरिए टिकट बुक कर सकेंगे। सप्ताह में छह दिन चलेगी ट्रेन रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ट्रेनें सप्ताह में छह दिन चलेंगी, जबकि मंगलवार को रखरखाव के लिए आरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि शुरुआत में ट्रेनें श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा और श्रीनगर के बीच चलेंगी, क्योंकि जम्मूतवी स्टेशन वर्तमान में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकास के अधीन है। ये ट्रेनें न केवल तेज हैं, बल्कि कश्मीर की चुनौतीपूर्ण जलवायु के लिए भी तैयार की गई हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में कटरा और श्रीनगर के बीच वंदे भारत ट्रेन सेवा को हरी झंडी दिखाई।

डोनाल्ड ट्रंप ढाई महीने में क्यों लिया यू-टर्न?, PAK को आतंकी पनाहगाह कहा फिर अचानक उसी पर हुए मेरबान

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए नया यात्रा प्रतिबंध लगाया है, जो 19 देशों पर लागू होते हैं। जिन देशों पर ये बैन लगाए गए हैं, उनमें मुख्य रूप से अफ्रीका और पश्चिम एशिया के देश शामिल हैं। इनमें 12 देश ऐसे हैं, जिसके नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इनमें अफगानिस्तान, म्यांमा, चाड, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, इरीट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन शामिल हैं। इसके अलावा सात अन्य देशों से आने वाले नागरिकों पर भी आंशिक पाबंदियां लगाई गई हैं। इनमें बुरुंडी, क्यूबा, ​​लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला शामिल हैं। इस अपडेटेड लिस्ट में देशों को शामिल करते हुए तर्क दिया गया है कि इनसे अमेरिका को सुरक्षा खतरा है लेकिन पाकिस्तान पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पिछले ढाई महीने में यू-टर्न लेते हुए अलग रुख दिखाया है। मार्च तक पाकिस्तान को भी इस लिस्ट में शामिल किए जाने की चर्चा चल रही थी लेकिन अब जब लिस्ट सामने आई है तो उससे पाकिस्तान का नाम गायब है। दिलचस्प यह भी है कि पाकिस्तान के प्रति अमेरिकी रुख में यह नरमी तब आई है, जब भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सबसे खराब और तनावपूर्ण दौर में हैं। बड़ी बात यह है कि अमेरिकी अधिकारियों द्वारा लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकवादी नेटवर्क को पनाह देने का आरोप लगाया जाता रहा है, बावजूद इसके यात्रा प्रतिबंध वाले देशों की लिस्ट से पाकिस्तान का नाम गायब है। पाकिस्तान को इस लिस्ट से बाहर रखने का यह हालिया फैसला डोनाल्ड ट्रम्प के पिछले राष्ट्रपति के कार्यकाल (2017 से 2021 तक) के दौरान उनके कार्यों और बयानों के बिल्कुल विपरीत है, जब उन्होंने इस्लामाबाद द्वारा आतंकवाद के कथित समर्थन पर काफी सख्त रुख अपनाया था। ट्रंप के रुख में अचानक बदलाव क्यों? रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में ट्रंप प्रशासन के एक आंतरिक ज्ञापन ने पुष्टि की थी कि सुरक्षा खतरों के रूप में पाकिस्तान को भी यात्रा प्रतिबंध वाली संशोधित सूची में शामिल करने पर विचार किया गया था लेकिन अब जब अंतिम सूची जारी की गई, तो उससे पाकिस्तान का नाम हटा दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अचानक यह बदलाव तब किया गया है, जब पाकिस्तान और ट्रम्प परिवार से जुड़ी व्यापारिक संस्थाओं के बीच व्यावसायिक और राजनीतिक संबंध गहरे हो रहे हैं। ध्यान देने वाली बात है कि ये वही डोनाल्ड ट्रंप हैं, जिन्होंने 2018 में कहा था कि अल-कायदा नेता ओसामा बिन लादेन को छिपाने में पाकिस्तान की मिलीभगत थी। उन्होंने तब कहा था, “पाकिस्तान में सैन्य अकादमी के ठीक बगल में रहने के कारण, पाकिस्तान में हर कोई जानता था कि लादेन वहीं है।” ट्रंप ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान आतंकवादियों का पनाहगाह है और इस वजह से अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य सहायता में 300 मिलियन डॉलर की कटौती की थी। इसके बाद अमेरिका ने 2019 में कई पाकिस्तानी अधिकारियों और सरकार के प्रतिनिधियों पर वीजा बैन भी लगाया था। ट्रंप परिवार से क्या कनेक्शन? दरअसल, पाकिस्तान के प्रति ट्रंप की नरमी का यह रुख इसलिए सामने आया है क्योंकि पाकिस्तान और वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (WLF) के बीच क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अप्रैल में एक समझौता हुआ है। WLF संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित एक फिनटेक फर्म है और कथित तौर पर WLF ट्रम्प परिवार के सदस्यों से जुड़ा हुआ है, जिसमें एरिक ट्रम्प, डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर और जेरेड कुशनर शामिल हैं। ये लोग सामूहिक रूप से WLF के स्वामित्व में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। अप्रैल में हस्ताक्षरित इस समझौते में पाकिस्तान में ब्लॉकचेन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना और राष्ट्रीय संपत्तियों को टोकन करना शामिल है। अप्रैल में जब इस्लामाबाद में WLF का प्रतिनिधिमंडल यह समझौता करने पहुंचा तो उसमें ट्रंप के पुराने मित्र और मध्य-पूर्व में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बेटे जैचरी विटकॉफ भी शामिल थे। पाक सेना प्रमुख, पीएम और मंत्रियों ने बिछाए थे पलक पवाड़े पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने खुद आगे बढ़कर WLF प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया था। बाद में इस प्रतिनिधिमंडल से खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, उप प्रधानमंत्री इशाक डार और रक्षा और सूचना मंत्रियों सहित शरीफ सरकार की बड़ी हस्तियों ने भी मुलाकात की थी। तभी से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि इन हस्तियों की बैठकों में मौजूदगी से साफ है कि यह कोई साधारण वाणिज्यिक समझौता नहीं था। अब ट्रंप ने पाकिस्तान को उस लिस्ट से बाहर कर उस गठजोड़ का खुलासा खुद कर दिया है।  

पहलगाम आतंकी हमला कश्मीरियों की आय रोकने की पाक की साजिश थी, दंगे भड़काना था उद्देश्य: पीएम मोदी

नई दिल्ली  जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज समेत कई अन्य प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा। कटरा में पीएम मोदी ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमला कश्मीरियों की आय रोकने की पाकिस्तान की साजिश थी, लेकिन भारत आतंकवाद के आगे कभी नहीं झुकेगा। जम्मू-कश्मीर के युवा इस लड़ाई में एकजुट हैं। मोदी ने कहा कि पहलगाम की घटना इंसानियत और कश्मीरियत पर हमला थी, इसका उद्देश्य भारत में दंगे भड़काना था। पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री का जम्मू-कश्मीर का यह पहला दौरा है। 22 अप्रैल को हुए हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई थी। कटरा में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान मानवता, पर्यटन, कश्मीरियों की ‘रोजी-रोटी’ के खिलाफ है और इसलिए उसने पहलगाम में पर्यटकों पर हमला किया। पीएम मोदी ने कहा, ”माता वैष्णो देवी के आशीर्वाद से आज वादी-ए-कश्मीर, भारत के रेल नेटवर्क से जुड़ गई है। चिनाब ब्रिज, दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है। ये ब्रिज, एफिल टॉवर से भी ऊंचा है। अब लोग चिनाब ब्रिज के जरिए कश्मीर देखने तो जाएंगे ही, साथ ही ये ब्रिज भी अपने आप में एक आकर्षक टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनेगा। ये हमारी सरकार का सौभाग्य है कि इस प्रोजेक्ट ने हमारे कार्यकाल में गति पकड़ी और हमने इसे पूरा करके दिखाया। रास्ते में आने जाने की मुश्किलें, मौसम की परेशानी, लगातार पहाड़ों से गिरते पत्थर… ये प्रोजेक्ट पूरा करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन हमारी सरकार ने चुनौती को ही चुनौती देने का रास्ता चुना है।” उन्होंने आगे कहा कि उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लाइन परियोजनाएं, ये सिर्फ नाम नहीं हैं, ये जम्मू कश्मीर के नए सामर्थ्य की पहचान हैं। भारत के नए सामर्थ्य का जयघोष है। थोड़ी देर पहले मुझे चिनाब ब्रिज और अंजी ब्रिज का लोकार्पण करने का अवसर मिला है। आज ही दो नई वंदे भारत ट्रेनें जम्मू कश्मीर को मिली है। जम्मू में नए मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास हुआ है। 46,000 करोड़ रुपये की ये परियोजनाएं जम्मू और कश्मीर के विकास को नई गति देंगे। आज का ये कार्यक्रम भारत की एकता और भारत की इच्छाशक्ति का विराट उत्सव है।” उन्होंने कहा कि चिनाब, अंजी पुल जम्मू-कश्मीर के लिए समृद्धि के प्रवेश द्वार के रूप में काम करेंगे। ‘ऑपरेशन सिंदूर सुनते ही पाक को याद आएगी शर्मनाक हार’ उन्होंने कहा कि सरकार ने पाकिस्तान की गोलाबारी में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए मकानों के मालिकों को दो-दो लाख रुपये और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए मकानों के स्वामियों को एक-एक लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि देने का फैसला किया है। जम्मू-कश्मीर में विकास का जो वातावरण बना था, वह पहलगाम के हमले से रुकने वाला नहीं। पाकिस्तान की साजिश के खिलाफ जम्मू-कश्मीर के लोग उठ खड़े हुए हैं और उन्होंने दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब भी पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर का नाम सुनेगा, उसे अपनी शर्मनाक हार याद आ जाएगी।  

उमर अब्दुल्ला ने कहा- वहीं मेरा डिमोशन हो गया है, मैं एक राज्य का सीएम था और आज केंद्र शासित प्रदेश का मुख्यमंत्री हूं

जम्मू पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कटरा में वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। यह ट्रेन कटरा से श्रीनगर तक जाएगी और पहली बार कश्मीर घाटी शेष भारत से ट्रेन के माध्य से जुड़ सकेगी। वंदे भारत को हरी झंडी दिखाने से पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेल पुल का दौरा किया और वहां तिरंगा फहराया। कटरा से श्रीनगर तक चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस उधमपुर, श्रीनगर और बारामूल रेल लिंक का हिस्सा है। इस उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा उमर अब्दुल्ला, एलजी मनोज सिन्हा और रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव मौजूद रहे। इस दौरान उमर अब्दुल्ला ने एक अहम सवाल उठा दिया और कहा कि मेरा तो डिमोशन हो गया है। उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि बीते 11 सालों में जम्मू-कश्मीर के लिए जो भी रेल प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं, उन सभी की शुरुआत के मौके पर मैं पीएम मोदी के साथ उपस्थित रहा हूं। उन्होंने कहा कि पहला कार्यक्रम अनंतनाग रेलवे स्टेशन के उद्घाटन का था। फिर दूसरा कार्यक्रम बनिहाल टनल के उद्घाटन का हुआ। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मुझे याद है कि 2014 में कटरा रेलवे स्टेशन के उद्घाटन के दौरान भी मैं था। आज मंच पर बैठे सभी 4 लोग उस दिन भी थे। तब मनोज सिन्हा रेल राज्य मंत्री हुआ करते थे। अब उनका प्रमोशन जम्मू-कश्मीर के एलजी के पद पर हो गया है। वहीं मेरा डिमोशन हो गया है। मैं एक राज्य का सीएम था और आज केंद्र शासित प्रदेश का मुख्यमंत्री हूं। इस दौरान उन्होंने इशारों में ही पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग उठा दी। उन्होंने कहा कि चीजें जल्दी ही सामान्य होंगी। ऐसी मुझे उम्मीद है कि पीएम नरेंद्र मोदी जल्दी ही जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देंगे। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह हमारे लिए ऐतिहासिक दिन है और इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के विकास में एक और मील का पत्थर जुड़ गया है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह विकास इसीलिए संभव हो पाया है क्योंकि पीएम नरेंद्र मोदी खुद सक्रिय रहे हैं और कश्मीर के विकास की पल-पल की अपडेट लेते रहे हैं। इस मौके पर उमर अब्दुल्ला ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया। अब्दुल्ला ने कहा कि यदि वाजपेयी जी को यदि याद नहीं किया तो यह भी अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने ही कश्मीर के लिए ट्रेन को राष्ट्रीय महत्व की परियोजना बताया था।  

रेलमार्ग से कैसे जुड़ा जम्मू-कश्मीर, आजादी से पहले का सपना, जाने महाराजा हरि सिंह से क्या कनेक्शन

कटरा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को देश को एक ऐतिहासिक सौगात दी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को शेष भारत से जोड़ने वाला रेलमार्ग राष्ट्र को समर्पित किया। वैसे तो जम्मू -कश्मीर को रेलमार्ग से जोड़ने का सपना तो महाराजा हरि सिंह ने आजादी से पहले देखा था। उन्होंने अंग्रेजों के सहयोग से जम्मू-कश्मीर तक नैरो गेज टॉय ट्रेन चलाने के लिए सर्वेक्षण कराए थे। लेकिन दुरुह भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इस पर आगे बढ़ना संभव नहीं हो पाया। बाद में इस सपने पर साल 1983 में काम शुरू हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जम्मू से ऊधमपुर तक 53 किलोमीटर के रेलमार्ग की आधारशिला रखी थी। उस लाइन पर 1800 करोड़ रुपए की लागत आई थी और 22 साल बाद 2005 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उद्घाटन किया था। अटल सरकार में मिली प्रोजेक्ट को रफ्तार फिर साल 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने कश्मीर घाटी को रेलवे लिंक से जोड़ने के फैसले पर मुहर लगाई थी। 2008-09 में ऊधमपुर श्रीनगर बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) पर काम शुरू हुआ। यह दिसंबर 2024 में पूरा हुआ और जनवरी में रेल संरक्षा आयुक्त ने संगलदान कटरा के करीब 67 किलोमीटर के आखिरी खंड को प्रमाणपत्र प्रदान किया। इस प्रकार से 272 किलोमीटर की जम्मू-कश्मीर रेल लिंक परियोजना का काम पूरा करने में चार दशक से अधिक समय लग गया। इस उद्घाटन के साथ शनिवार सात जून से इन दोनों वंदे भारत ट्रेनों की वाणिज्य की यात्राएं शुरू हो जाएंगी। हर मौसम में होगी आसानी श्रीनगर और श्री वैष्णो देवी कटरा के बीच का सभी शुल्कों सहित किराया चेयर कार श्रेणी में 715 रुपए और एग्जीक्यूटिव क्लास में 1320 रुपए निर्धारित किया गया है। इन दोनों ट्रेनों के चलने से देश के विभिन्न हिस्सों से कटरा पहुंचने वाले पर्यटकों और रेलयात्रियों को कश्मीर पहुंचने में आसानी होगी। उनकी सात घंटे की सड़क मार्ग की यात्रा अब तीन घंटे में पूरी होगी। हर मौसम जम्मू से श्रीनगर और बारामूला तक की यात्रा कुछ घंटे में पूरी हो सकेगी। अभी तक कश्मीर की वादियों में बारामुला से संगलदान के बीच ही लोकल ट्रेनों का परिचालन हो रहा था। कटरा से संगलदान के बीच रेल निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब कटरा और श्रीनगर के बीच शनिवार से नियमित रूप से ट्रेन परिचालन शुरू हो रहा है। विकास में आए तेजी पर्यटकों, व्यापारियों, स्थानीय निवासियों, छात्रों आदि के साथ-साथ माल की कम समय में आवाजाही का सस्ता एवं सुविधाजनक माध्यम उपलब्ध हो गया है। इसी के साथ तीन ओर से शत्रुओं के घिरे दोनों केन्द्रशासित प्रदेशों में सैनिकों की आवाजाही के साथ रक्षा रसद का तीव्र, सुरक्षित एवं सतत प​रिवहन सुनिश्चित हो गया है। जम्मू के अलग रेलमंडल बन जाने से इन विकास परियोजनाओं में और तेजी आएगी।  

मस्क ने अमेरिका के राष्ट्रपति पर लगाया गंभीर आरोप, एपस्टीन की फाइलों में है ट्रंप का नाम

वॉशिंगटन: अमेरिकी सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) के पूर्व प्रमुख एलन मस्क ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करते हुए एलन मस्क ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम एपस्टीन फाइलों में है, इसीलिए उन्हें जारी नहीं किया जा रहा है. मस्क ने लिखा “अब समय आ गया है कि बहुत बड़ा बम गिराया जाए: डोनाल्ड ट्रम्प एपस्टीन फाइलों में हैं. यही असली कारण है कि उन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया है. आपका दिन शुभ हो, डीजेटी!” उन्होंने आगे कहा, “इस पोस्ट को भविष्य के लिए मार्क कर लें. सच्चाई सामने आ जाएगी.” वाकई बड़ा बम गिराने का समय आ गया एलॉन मस्क ने एक्स पर पोस्ट किया, “अब वाकई बड़ा बम गिराने का समय आ गया है, डोनाल्ड ट्रंप का नाम एपस्टीन फाइलों में है.और यही असली वजह है कि उन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया है. आपका दिन शुभ हो, DJT!” कौन है जेफरी एपस्टिन जिसकी चर्चा कर मस्क ने अमेरिका की राजनीति में हलचल ला दी है. अमेरिका जैसे देश में बड़ी हस्तियों का सेक्स स्कैंडल से नाम जुड़ना नई बात नहीं है. बिल क्लिंटन- मोनिसा लेवेंस्की की सनसनीखेज कहानी इसका प्रमाण है. जेफरी एपस्टिन: दौलत और सेक्स क्राइम की काली दुनिया जेफरी एपस्टिन अमेरिका का एक अरबपति फाइनेंसर था. अकूत दौलत के दम पर इस शख्स ने दुनिया के अमीरों के साथ रिश्ते बनाए. एपस्टिन के रिश्तों के इस सर्किल में डोनाल्ड ट्रंप का भी नाम शामिल है. इतनी दौलत के अलावा एपस्टिन ने सेक्स क्राइम की काली दुनिया में भी घुसपैठ की. उस पर सेक्स ट्रैफिकिंग के भी आरोप लगे. 1953 में न्यूयॉर्क में जन्मे एपस्टिन ने बिना कॉलेज डिग्री के बैंकिंग और वित्त क्षेत्र में अपनी फर्म स्थापित की. एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और सेक्स तस्करी के गंभीर आरोप लगे. 2005 में एक 14 वर्षीय लड़की के शोषण की शिकायत के बाद जांच शुरू हुई, जिसमें 36 नाबालिग पीड़िताओं की पहचान हुई. 2008 में उन्हें वेश्यावृत्ति से संबंधित दो आरोपों में दोषी ठहराया गया और 13 महीने की जेल मिली. जैसा कि हमने बताया जेफरी एपस्टिन की हाई-प्रोफाइल हस्तियों जैसे बिल क्लिंटन, डोनाल्ड ट्रंप और प्रिंस एंड्रयू से दोस्ती थी. जेल में रहस्यमयी मौत 2019 में, उन्हें फिर से मानव तस्करी और यौन अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया, लेकिन सुनवाई से पहले उनकी जेल में मृत्यु हो गई, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया, हालांकि इस पर कई साजिश सिद्धांत मौजूद हैं. अमेरिका में जेफरी एपस्टिन को यौन शोषण का आरोपी कहा जाता है. प्राइवेट आईलैंड और लोलिता एक्सप्रेस! जेफरी एपस्टिन अथाह दौलत का स्वामी था. उसने अमेरिका में प्राइवेट आईलैंड खरीद रखे थे. उसकी अपनी जेट थी. इस जेट पर अमेरिका के प्रभावशाली व्यक्ति सवार होकर उसके निजी द्वीप में पहुंचते थे और पार्टियां करते थे. एपस्टीन को यूएस वर्जिन आइलैंड्स में अपने द्वीप, लिटिल सेंट जेम्स पर मशहूर लोगों का मनोरंजन करने के लिए जाना जाता था. वह अक्सर लोगों को अपने निजी जेट से द्वीप पर ले जाता था और वहां यात्रा करने वालों का लिखित रिकॉर्ड छोड़ जाता था. अमेरिका में जेफरी एपस्टिन के इस निजी जेट विमान को पार्टी सर्किल में ‘लोलिता एक्सप्रेस’ कहा जाता था. न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार इस लोलिता एक्सप्रेस में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रम्प ने यात्राएं की है.  एक रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 1993 से 1997 के बीच निजी विमान से कम से कम 7 यात्राएं कीं. ट्रम्प उस समय एकबिजनेस टायकून और रियल एस्टेट डेवलपर थे और उन्हें एपस्टीन के सहयोगी के रूप में जाना जाता था. हालांकि ट्रंप ने इससे इनकार किया था, लेकिन एपस्टीन की साथी और गर्लफ्रेंड गिस्लेन मैक्सवेल के मुकदमे के तहत 2021 में जारी फ्लाइट लॉग से पता चला कि अमेरिकी राष्ट्रपति एपस्टीन के विमान में 7 बार सवार हुए थे. ट्रंप ने 2024 ट्रुथ सोशल पोस्ट में दावा किया, “मैं कभी एपस्टीन के विमान या उसके बेवकूफ़ द्वीप पर नहीं था.” पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिटंन की भी इस जेट पर कई बार तस्वीरें आई है. बता दें कि किसी मामले से संबंधित फाइलों में किसी व्यक्ति का नाम शामिल होने का यह मतलब नहीं है कि उन पर किसी गलत काम का आरोप लगाया गया है. उन्हें भी उतनी ही सुंदर महिलाएं पसंद हैं जितनी मुझे हालांकि ट्रंप ने 6 जुलाई, 2019 को एपस्टीन की गिरफ्तारी के बाद से ही उनसे दूरी बना ली थी, लेकिन 1980 के दशक के अंत से लेकर 2000 के दशक की शुरुआत तक दोनों अच्छे दोस्त थे. हाल ही में एक तस्वीर सामने आई थी जिसमें दोनों को मार-ए-लागो में एक पार्टी में एक-दूसरे से बात करते हुए दिखाया गया था. उन्हें विक्टोरिया सीक्रेट एंजेल्स पार्टी में भी साथ देखा गया था. ट्रंप ने अपने हमेशा की तरह ही जोरदार अंदाज में 2002 में न्यूयॉर्क पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में एपस्टीन की प्रशंसा की थी और उन्हें “शानदार व्यक्ति” कहा था जिन्हें वे 15 सालों से जानते हैं. तब ट्रंप ने जेफरी एपस्टिन के बारे में कहा था, “उनके साथ रहना बहुत मजेदार है. यह भी कहा जाता है कि उन्हें भी उतनी ही सुंदर महिलाएं पसंद हैं जितनी मुझे और उनमें से कई युवा हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है- जेफरी को अपना सोशल लाइफ पसंद है.” ट्रंप के साथ दोस्ती बिगड़ने के बाद मस्क ने इन्हीं मामलों का जिक्र किया है. ये मामले और कानूनी रिकॉर्ड जिन दस्तावेजों में जब्त हैं उन्हें एप्सटीन फाइल्स के नाम से जाना जाता है. इनमें से कुछ फाइलें सार्वजनिक की गई हैं, लेकिन कुछ अभी भी गोपनीय हैं, जिसके कारण कई साजिश सिद्धांत और अटकलें चल रही हैं. मस्क इन्हीं फाइलों को सार्वजनिक करने की बात कर रहे हैं. एलन मस्क का दावा कि डोनाल्ड ट्रम्प का नाम इन फाइलों में है, एक गंभीर लेकिन अपुष्ट बयान है. ट्रंप और एप्सटीन की पुरानी दोस्ती के कुछ सबूत हैं (जैसे, ट्रंप का उनके जेट में यात्रा करना), लेकिन ट्रंप के खिलाफ कोई ठोस आपराधिक सबूत सार्वजनिक नहीं हुआ है जो उन्हें एप्सटीन के अपराधों से सीधा जोड़ सके.   क्या है एपस्टीन मामला     ये सारा मामला … Read more

भारत के साथ अकसर परमाणु जंग की धमकी देने वाला पाकिस्तान गरीबी से लड़ाई में हारता दिख रहा: वर्ल्ड बैंक

नई दिल्ली  भारत के साथ अकसर परमाणु जंग की धमकी देने वाला पाकिस्तान गरीबी से लड़ाई में हारता दिख रहा है। पाकिस्तान की करीब आधी आबादी गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रही है। वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान की 45 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन गुजार रही है। वर्ल्ड बैंक के डेटा में यह जानकारी दी गई है। विश्व बैंक ने 2018-19 के सर्वे के अनुसार यह बात कही है। बैंक का कहना है कि गरीबी रेखा से जीवन स्तर ऊपर उठाने के मामले में पाकिस्तान की स्थिति लगातार खराब हो रही है। यही नहीं अति-निर्धनता में जीने वाले पाकिस्तानियों की संख्या बीते कुछ सालों में 4.9 फीसदी से बढ़कर 16.5 पर्सेंट हो गई है। विश्व बैंक ने वैश्विक गरीबी इंडेक्स को अपडेट किया है और उसमें पाकिस्तान की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसकी वजह यह है कि बीते कुछ सालों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में कोई ग्रोथ नहीं है। विश्व बैंक का कहना है कि इंटरनेशनल पॉवर्टी लाइन 3 डॉलर मासिक की कमाई पर आधारित है। पाकिस्तान में ऐसे लोग 45 फीसदी हैं, जिनकी कमाई महीने में तीन डॉलर भी नहीं है। इसके अलावा पाकिस्तान अति निर्धन परिवारों की संख्या में इजाफे की एक और वजह है। वह है इंटरनेशनल पॉवर्टी इंडेक्स में बदलाव होना। पहले इंटरनेशनल पॉवर्टी इंडेक्स का मानक 2.15 डॉलर था, जो अब बढ़कर 3 डॉलर हो गया है। इससे पहले कम आय वाले देशों यानी LIC के लिए प्रति व्यक्ति आय की दर वर्ल्ड बैंक ने 2.15 डॉलर निर्धारित की थी। तब पाकिस्तान के 4.9 फीसदी लोग अति निर्धन माने गए थे। अब यह मानक बढ़कर 3 डॉलर प्रतिदिन हो गया है। इसके साथ ही आंकड़ा भी अब 16.5 पहुंच गया है। बता दें कि पाकिस्तान गरीबी के साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा के मानकों में भी फिसड्डी है। यहां तक कि पाकिस्तान में बीते करीब डेढ़ सालों में पोलियो के ही 81 केस मिल चुके हैं। ऐसा तब है, जब दुनिया के तमाम देश पोलियो मुक्त हो चुके हैं। वहीं अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अब भी पोलियो के केस पाए जाते हैं।  

पाक को UNSC में अध्यक्ष और आतंकवाद विरोधी का उपाध्यक्ष बनने पर कोई व्यावहारिक परिणाम नहीं निकलने वाला: शशि थरूर

नई दिल्ली  कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में भारत मित्रहीन नहीं है और पाकिस्तान को सुरक्षा परिषद की तालिबान प्रतिबंध समिति का अध्यक्ष बनाया जाना तथा आतंकवाद विरोधी समिति का उपाध्यक्ष बनाए जाने का कोई व्यावहारिक परिणाम नहीं निकलने वाला है। थरूर भारत द्वारा सामना किए जा रहे पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खतरे और आतंकवाद के खिलाफ भारत के मजबूत संकल्प के बारे में प्रमुख वार्ताकारों को जानकारी देने के लिए अमेरिका में एक बहुदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। थरूर ने गुरुवार को यहां भारतीय दूतावास में बातचीत के दौरान कहा, ‘ये सभी समितियां आम सहमति पर काम करती हैं और किसी अध्यक्ष के लिए अकेले दम पर कुछ ऐसा करवा पाना संभव नहीं है जिसका अन्य विरोध करते हैं या किसी विशेष विचारधारा को आगे बढ़ाते हैं जिसका अन्य देश समर्थन नहीं करते हैं।’ पाकिस्तान, 2025-26 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद का एक अस्थायी सदस्य है और वह 2025 के लिए परिषद की तालिबान प्रतिबंध समिति की अध्यक्षता करेगा तथा 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की आतंकवाद विरोधी समिति का उपाध्यक्ष होगा। गुयाना और रूस ‘1988 तालिबान प्रतिबंध समिति’ के उपाध्यक्ष होंगे। अल्जीरिया ‘1373 आतंकवाद-रोधी समिति’ की अध्यक्षता करेगा जबकि फ्रांस और रूस अन्य उपाध्यक्ष होंगे। पाकिस्तान ‘दस्तावेजीकरण और अन्य प्रक्रियात्मक प्रश्नों एवं सामान्य यूएनएससी प्रतिबंध मुद्दों पर अनौपचारिक कार्य समूहों’ का सह-अध्यक्ष भी होगा। भारत ने लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय का इस बात की ओर ध्यान आकृष्ट किया है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित अधिकतर आतंकवादियों और संगठनों को पाकिस्तान में पनाह मिली है। अलकायदा नेता ओसामा बिन लादेन कई वर्षों तक पाकिस्तान के एबटाबाद में छिपा रहा और मई 2011 में अमेरिकी नौसेना के जवानों के एक अभियान में मारा गया। दूतावास में कई ‘थिंक टैंक’ समूहों और युवा पेशेवरों के साथ संसदीय प्रतिनिधिमंडल की बातचीत के दौरान थरूर से पाकिस्तान द्वारा यूएनएससी की दो प्रतिबंध समितियों की अध्यक्षता करने के बारे में जब पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यूएनएससी की छह आतंकवाद निरोधक समितियां हैं। उन्होंने कहा कि परिषद के सदस्य बारी-बारी से ऐसी संस्थाओं की अध्यक्षता करते हैं। उन्होंने कहा, ‘इसलिए जब तक पाकिस्तान सुरक्षा परिषद में है, तब तक इस तरह का ‘विशेषाधिकार’ उसे मिल सकता है… सुरक्षा परिषद में हम बिल्कुल मित्रहीन नहीं हैं, इसलिए हमें पूरा विश्वास है कि इस पद का कोई व्यावहारिक परिणाम नहीं निकलने वाला है।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थायी मिशन इस पर सावधानीपूर्वक नजर रखेगा। बुधवार को दूतावास में प्रेस वार्ता के दौरान पाकिस्तान को दो समितियों का प्रभार दिए जाने के बारे में ‘पीटीआई-भाषा’ के एक सवाल का जवाब देते हुए थरूर ने कहा, ‘एक तो तालिबान समिति है जिसका जिम्मा उन्हें (पाकिस्तान को) मिला है। मुझे नहीं पता कि इस बारे में अफगानों की क्या भावनाएं हैं।’ थरूर ने कहा कि यूएनएससी सदस्यों को हर महीने बारी बारी से परिषद की अध्यक्षता मिलती है। उन्होंने कहा, ‘अन्य लोग बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। हम सुरक्षा परिषद में और इसकी समितियों में बिल्कुल मित्रहीन नहीं हैं।’ प्रतिनिधिमंडल 24 मई को भारत से न्यूयॉर्क पहुंचा। इससे पहले प्रतिनिधिमंडल गुयाना, पनामा, कोलंबिया और ब्राजील की यात्रा कर चुका है और मंगलवार दोपहर को दौरे के अंतिम चरण के लिए वाशिंगटन पहुंचा। थरूर ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय नहीं गया। थरूर के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में सरफराज अहमद (झारखंड मुक्ति मोर्चा), गंटी हरीश मधुर बालयोगी (तेलुगु देशम पार्टी), शशांक मणि त्रिपाठी (भारतीय जनता पार्टी), भुवनेश्वर कलिता (भारतीय जनता पार्टी), मिलिंद देवड़ा (शिवसेना), तेजस्वी सूर्या (भारतीय जनता पार्टी) और अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरनजीत संधू शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की। थरूर ने इस मुलाकात को ‘‘सार्थक’’ बताया। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के नेतृत्व में पाकिस्तान का एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल भी उसी समय अमेरिका पहुंचा, जब थरूर के नेतृत्व में भारत का प्रतिनिधिमंडल अमेरिका पहुंचा था। भुट्टो ने भारत के साथ सैन्य संघर्ष और कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय बनाने के पाकिस्तान के प्रयास के तहत अपने प्रतिनिधिमंडल सहित सुरक्षा परिषद के राजदूतों के साथ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस से मुलाकात की। त्रिपाठी ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के लिए स्थायी सीट को लेकर समर्थन व्यक्त किया।  

स्टारलिंक को India सरकार से मिल गया लाइसेंस, एलन मस्क की भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में एंट्री

 नई दिल्ली  भारत में एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक की एंट्री बहुत जल्द होने जा रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि स्टारलिंक को भारत के दूरसंचार मंत्रालय से एक महत्वपूर्ण लाइसेंस मिल गया है। इस लाइसेंस का मिलना स्टारलिंक के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। बता दें कि स्टारलिंक भारत में तीसरी कंपनी होगी, जिसको दूरसंचार मंत्रालायल द्वारा सैटकॉम लाइसेंस मिला है। इससे पहले जियो और एयरटेल को भी ये लाइसेंस मिल चुका है। इससे पहले गुरुवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया था कि जल्द ही स्टारलिंक सैटकॉम लाइसेंस दिया जा सकता है, इसके लिए प्रक्रिया चल रही है।  एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार से मंजूरी के बाद अब स्टारलिंक भारत में अपने सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस की शुरुआत करने के और करीब पहुंच गया है. अब स्टारलिंक भारत की तीसरी ऐसी कंपनी बन गई है जिसे सैटेलाइट इंटरनेट सेवा देने की अनुमति मिली है. संचार मंत्री ने मंजूरी के बारे में बताया देश के संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह जानकारी दी कि अब स्टारलिंक को भारत में सेवा शुरू करने की अनुमति दे दी गई है. उन्होंने बताया कि इससे पहले भारती एयरटेल की OneWeb और रिलायंस की Jio को भी सरकार की तरफ से लाइसेंस जारी किया गया था. अब स्टारलिंक को भी ये लाइसेंस मिलने से भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं एक नया रूप लेंगी. उन्होंने कहा कि स्टारलिंक की सैटेलाइट कनेक्टिविटी देश की टेलीकॉम सेवाओं में एक महत्वपूर्ण जोड़ है. पहले सिर्फ फिक्स्ड लाइन कनेक्शन होते थे, फिर मोबाइल नेटवर्क आया, फिर ब्रॉडबैंड और अब ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क भी आ गया है. इन सबके साथ-साथ अब सैटेलाइट कनेक्टिविटी भी बेहद जरूरी हो गई है. सिंधिया ने यह भी कहा कि देश के उन इलाकों में जहां परंपरागत टावर या केबल लगाना मुश्किल होता है, वहां तक इंटरनेट पहुंचाना अब सैटेलाइट तकनीक से संभव होगा. इससे दूर-दराज और पहाड़ी क्षेत्रों में भी अच्छी इंटरनेट सेवा मिल सकेगी और डिजिटल इंडिया की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ेगा.. क्या है Starlink? Starlink, एलॉन मस्क की कंपनी SpaceX की एक सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस है. ये लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस है. इसकी मदद से दुनिया के दूर-दराज के इलाकों में हाई स्पीड इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है. पिछले काफी समय से चर्चा है कि स्टारलिंक की सर्विस भारत में लॉन्च होगी. स्टारलिंक 500 से 550 किलोमीटर की ऊंचाई पर बहुत से छोटे सैटेलाइट्स के जरिए काम करती है. ये कोई पहला मौका नहीं जब भारत में स्टारलिंक की चर्चा हो रही हो. कंपनी ने साल 2021 में भारत में प्री-बुकिंग शुरू कर दी थी. हालांकि, भारत सरकार से जरूरी लाइसेंस ना मिलने की वजह से उस वक्त कंपनी को प्री-बुकिंग रोकनी पड़ी थी. जियो और Airtel से करना होगा मुकाबला भारत में इस कंपनी का सीधा मुकाबला रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के OneWeb से होगा. हालांकि, हाल में ही स्टारलिंक ने इस दोनों कंपनियों के साथ साझेदारी का ऐलान किया था. ये ऐलान स्टारलिंक की किट और हार्डवेयर डिस्ट्रिब्यूशन को लेकर है. स्टारलिंक कई देशों में उलपब्ध है और भारत में इसकी सर्विस शुरू होने में अभी वक्त है.   जरूरी लाइसेंस मिलने के बाद भी अभी तक सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की तस्वीर साफ नहीं हुई है. सैटेलाइट स्पेक्ट्रम बंट जाने के बाद ही कोई कंपनी भारत में अपनी सर्विस शुरू कर पाएगी. यहां एक चुनौती स्पेक्ट्रम आवंटन के तरीके पर है. जहां जियो और एयरटेल पारंपरिक तरीके से स्पेक्ट्रम की नीलामी चाहते हैं. वहीं Starlink एडमिनिस्ट्रेटिव तरीके से बंटवारा चाहती है. फायदे और कीमत अब सवाल है कि Starlink या फिर सैटेलाइट इंटरनेट से लोगों को क्या फायदा मिलेगा. रिमोट एरिया में इससे कनेक्टिविटी आसान हो जाएगा. खासकर ऐसी जगहों पर जहां टावर लगाना या फिर ब्रॉडबैंड की सर्विस पहुंचाना मुश्किल है. सैटेलाइट इंटरनेटज की वजह से ऐसे एरिया में भी बेहतर स्पीड मिलेगी. हालांकि, ये सर्विस किस कीमत पर लॉन्च होती है, ये भी एक बड़ा सवाल है. अभी तक के अनुमान के मुताबिक कंपनी की सर्विस महंगी होगी. स्टारलिंक की किट के लिए आपको अच्छी-खासी राशि देनी पड़ सकती है. वहीं मंथली या ऐनुअल प्लान भी रेगुलर ब्रॉडबैंड प्लान के मुकाबले काफी महंगे होंगे.  

जापान का महत्वाकांक्षी मून मिशन फिर फेल, सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान क्रैश हुआ

टोक्यो  जापान का महत्वाकांक्षी मून मिशन को बड़ा झटका लगा है। देश की एक निजी मून लैंडर शुक्रवार 6 जून को चंद्रमा पर लैंडिंग का प्रयास करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जापानी कंपनी आईस्पेस ने लैंडर से संपर्क टूटने के कई घंटे बाद मिशन के फेल होने की पुष्टि की है। कंपनी का यह दूसरा चंद्र अभियान था। जापानी कंपनी के रेजिलिएंस अंतरिक्ष यान को जापान के स्थानीय समयानुसार 6 जून को सुबह 4.17 बजे चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी, लेकिन निर्धारित लैंडिंग से एक मिनट 45 सेकंड पहले लैंडर से संपर्क टूट गया। फ्लाइट कंट्रोलर ने संपर्क स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद मिशन को समाप्त करने की घोषणा की गई। पहले भी नाकाम रही थी लैंडिंग चंद्रमा पर पहली निजी लैंडिंग की कोशिश कर रही ispace के लिए यह बड़ा झटका है। इसके पहले आईस्पेस ने अप्रैल 2023 में पहली बार मून लैंडिंग की कोशिश की थी। उस दौरान भी अंतरिक्ष यान नाकाम रहा था और मिशन को अंततः नाकाम घोषित करना पड़ा था। आईस्पेस के सीईओ और संस्थापक ताकेशी हाकामाडा ने मिशन की नाकामी पर दुख जताया और मिशन में योगदान देने वाले सभी लोगों से माफी मांगी। कंपनी के सीईओ ने मांगी माफी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ताकेशी हाकामाडा ने कहा, ‘हम मिशन 2 को सफल बनाना चाहते थे, लेकिन दुर्भाग्य से हम लैंडिंग करने में विफल रहे।’ हाकामाडा ने कहा, ‘जिन लोगों ने हमारा समर्थन किया है, हम उनसे माफ़ी मांगना चाहते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि आईस्पेस भविष्य की उड़ानों के लिए अपनी विफलताओं से सीखने के लिए प्रतिबद्ध है। स्पेसडॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, रेजिलिएंस के अंतिम क्षणों से टेलीमेट्री पर आधारित प्रारंभिक डेटा से पता चलता है कि लैंडर के लेजर रेंजफाइंडर ने जांच की चंद्र सतह से दूरी मापते समय किसी प्रकार की देरी का अनुभव किया। आईस्पेस के अधिकारियों ने एक अपडेट में बताया कि लैंडर मून लैंडिंग के लिए जरूरी स्पीड तक पहुंचने के लिए पर्याप्त धीमा नहीं हो सका। इन परिस्थितियों के आधार पर वर्तमान में यह माना जाता है कि लैंडर ने चंद्रमा की सतह पर संभवतः हार्ड लैंडिंग की।  

भारत में 24 घंटे में कोरोना-19 से 4 मौतें, सक्रिय मामले बढ़कर 5364 हुए

नईदिल्ली कोरोना वायरस धीरे-धीरे पूरे देश में फैल रहा है। इस वायरस की चपेट में अबतक देश के 5364 से ज्यादा लोग आ चुके हैं। वहीं, मौतें भी 30 से अधिक हो चुकी हैं। इस बीच पानीपत में कोरोना का पहला पॉजिटिव केस सामने आया है और गाजियाबाद में भी कोविड के कुल एक्टिव केस 48 हो चुके हैं। दिल्ली से सटे फरीदाबाद में भी गुरुवार को कोरोना के नए केस मिले हैं। यहां 7 नए मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिसके बाद यहां भी संक्रमितों की संख्या 38 हो गई है। देश में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, पिछले 20 दिन में केसों की संख्या में 58 गुना की बढ़ोतरी हुई है। 16 मई को देशभर में कोविड के 93 एक्टिव केस थे, जिनकी संख्या अब 5364 पहुंच गई है। कोरोना 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैल गया है। बीते 24 घंटे में 500 नए मामले सामने आए हैं। केरल में सबसे ज्यादा 1679 मामले हैं। इसके बाद गुजरात में 615, पश्चिम बंगाल में 596, दिल्ली में 592 और महाराष्ट्र में 548 एक्टिव केस हैं। कोरोना के नए वैरिएंट्स से जनवरी से अब तक 55 मौतें हो चुकी हैं। इनमें से 53 की मौत 15 दिनों में हुई हैं। गुरुवार को दिल्ली में कोविड से दो और मौतें दर्ज की गईं। इनमें एक पांच महीने का बच्चा भी शामिल है। वहीं, केरल में 2, कर्नाटक और पंजाब में 1-1 मौत हुई है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 17 मरीजों ने जान गंवाई है। ओडिशा में गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल कोविड गाइडलाइन के तहत खोले गए हैं। शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने बताया कि जिन बच्चों को सर्दी, खांसी या बुखार जैसे हल्के लक्षण हैं, उन्हें स्कूल में मास्क पहनना अनिवार्य है। गंभीर लक्षण वाले बच्चों को घर पर ही रहकर आइसोलेट होने की सलाह दी गई है। कोरोना को लेकर राज्यों में मॉक ड्रिल हुई केंद्र सरकार गुरुवार को देश भर के राज्यों के चुनिंदा अस्पतालों में मॉक ड्रिल हुई। इस दौरान इन अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई, जरूरी दवाओं की स्थिति और वेंटिलेटर की व्यवस्थाओं को परखा गया। इससे बनी रिपोर्ट में कोरोना की चौथी लहर आने की स्थिति में अस्पतालों की तैयारियों पर रेटिंग दी जाएगी। इससे पहले 2 जून को एक शुरुआती मॉक ड्रिल हुई थी। इसमें हेल्थ सर्विस इन्फ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता के लिए अस्पतालों की रेटिंग दी गई थी। इसमें लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंक, प्रेशर स्विंग एडजॉर्पशन प्लांट और मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम पर फोकस किया गया था। राज्यों से कोरोना अपडेट…     केरल: स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को कोविड-19 और इन्फ्लूएंजा के लक्षणों वाले मरीजों का इलाज करते समय जून 2023 में जारी की गई कोविड गाइडलाइन पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में सभी को मास्क लगाना अनिवार्य है। साथ ही ​​​​​​जुकाम, खांसी और बुखार जैसे लक्षण वाले मरीजों का कोविड टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है।     महाराष्ट्र: राज्य सरकार के मुताबिक राज्य में जनवरी से अब तक मरने वालों की कुल संख्या 17 है। इनमें से 16 अन्य बीमारियों से भी पीड़ित थे। इस साल अब तक 13,707 सैंपल की टेस्टिंग हुई है। इनमें से 1064 कोविड पॉजिटिव आए।     गुजरात: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 508 कोरोना मरीजों में से 18 अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 490 होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे हैं। प्रेस रिलीज में कहा गया है कि आमतौर पर 6 या 8 महीनों में कोविड-19 मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है।     कर्नाटक: गुलबर्गा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने में 25 बेड का कोविड वार्ड बनाया गया है। इनमें से पांच-पांच बेड ICU (वेंटिलेटर समेत), हाई डिपेंडेंसी यूनिट और पांच प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए हैं। बाकी 10 नॉर्मल बेड हैं।     उत्तराखंड: राज्य सरकार ने बुधवार को गाइडलाइन जारी कर जिला प्रशासन से अस्पतालों में ऑक्सीजन तथा जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। इसके अलावा इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियों, सांस की जुड़े गंभीर इंफेक्शन और कोविड मामलों की रिपोर्टिंग करने के भी निर्देश दिए हैं।     सिक्किम: राज्य के स्वास्थ्य मंत्री जीटी धुंगेल ने बताया कि 29 मई से अब तक राज्य में 526 सैंपल की टेस्टिंग की गई। इनमें से 15 लोग पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद सभी अस्पतालों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना, मास्क पहनना और सैनिटाइजर का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।     हिमाचल प्रदेश: राज्य में कोविड का पहला मामला सामने आने बाद बुधवार को अस्पताल में सभी को मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया। सिरमौर जिले के नाहन में 3 जून को पहला केस मिला था। भारत में मिले कोविड-19 के 4 नए वैरिएंट भारत के कई राज्यों में कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी के बीच देश में चार नए वैरिएंट मिले हैं। ICMR के डायरेक्टर डॉ. राजीव बहल ने बताया कि दक्षिण और पश्चिम भारत से जिन वैरिएंट की सीक्वेंसिंग की गई है, वे LF.7, XFG , JN.1 और NB.1.8.1 सीरीज के हैं। बाकी जगहों से नमूने लेकर सीक्वेंसिंग की जा रही है, ताकि नए वैरिएंट की जांच की जा सके। मामले बहुत गंभीर नहीं हैं और लोगों को चिंता नहीं करनी चाहिए, बस सतर्क रहना चाहिए। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने भी इन्हें चिंताजनक नहीं माना है। हालांकि निगरानी में रखे गए वैरिएंट के रूप में कैटेगराइज किया है। चीन सहित एशिया के दूसरे देशों में कोविड के बढ़ते मामलों में यही वैरिएंट दिख रहा है। NB.1.8.1 के A435S, V445H, और T478I जैसे स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन अन्य वैरिएंट की तुलना में तेजी से फैलते हैं। इन पर कोविड के खिलाफ बनी इम्यूनिटी का भी असर नहीं होता। भारत में कोविड का JN.1 वैरिएंट सबसे आम है। टेस्टिंग में आधे से ज्यादा सैंपल में यह वैरिएंट मिलता है। इसके बाद BA.2 (26 प्रतिशत) और ओमिक्रॉन सबलाइनेज (20 प्रतिशत) वैरिएंट के मामले भी मिलते हैं।    

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