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1 जनवरी 2025 से बदल जाएंगे 5 नियम जो डालेंगे आपकी जेब पर असर, ध्यान से कर लें नोट

rules changing from 1st jan 2025 new year things that can affect your finances नए साल के आगाज के साथ बेशक तारीख बदल जाएगी पर तारीख के साथ कुछ ऐसी चीजें भी बदलेंगी जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर आपकी जेब को भी प्रभावित करेंगी. 1 जनवरी 2025 से कुछ नए नियम लागू होंगे तो कुछ नए बदलाव होंगे, जिनके बारे में आपको जानना बेहद जरूरी है. फिर चाहे टैक्स से जुड़ा मामला हो, यूपीआई पेमेंट हो, गैस सिलेंडर की कीमतें हों या फिर पीएफ अकाउंट से जुड़ा मामला. इस आर्टिकल में जानें 1 जनवरी 2025 होने वाले ऐसे ही बदलावों के बारे में. लग्जरी वस्तु खरीदने पर देना होगा ज्यादा टैक्स नव वर्ष 2025 में अगर आप कोई लग्जरी चीज खरीदते हैं तो अब आपको इसपर ज्यादा टैक्स देना होगा. दरअसल, बजट में किए गए प्रावधान के मुताबिक लिस्टेड लग्जरी आइटम जिसकी कीमत 10 लाख रु से ज्यागा है तो उसपर टीसीएस (Tax collected at source) का भी भुगतान करना होगा. ये नया नियम 1 जनवरी, 2025 से लागू प्रभावी होगा. वहीं इनकम टैक्स से जुड़े कई नियम नव वर्ष में नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ लागू होंगे. 1 जनवरी 2025 से महंगा पड़ेगा कार खरीदना दिसंबर में जहां कार कंपनियां अपनी कारों में बंपर डिस्काउंट दे रही हैं, तो वहीं 1 जनवरी से ज्यादातर कंपनियों की कीमतें काफी ज्यादा बढ़ने वाली है. इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा. दरअसल, 1 जनवरी, 2025 से हुंडई, महिंद्रा, टाटा, मारुति सुजुकी, मर्सिडीज-बेंज, होंडा, ऑडी आदि जैसी कई कार कंपनियां गाड़ियों की कीमतों को 3 प्रतिशत तक बढ़ाने जा रही हैं. उदाहरण के तौर पर 7 लाख रु की कार खरीदने के लिए नए साल में आपको 7 लाख 21 हजार रु चुकाने होंगे. इसके पीछे की वजह मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में बढ़ोतरी है. ईपीएफओ का राहत देने वाला बदलाव नए साल में जहां कुछ चीजें आपकी जेब पर भारी पड़ेगी तो वहीं कुछ चीजें में राहत भी मिलेगी. इसी में से एक बदलाव ईपीएफओ पेंशन से जुड़ा हुआ है. साल पेंशन धारकों के लिए राहत लेकर आ रहा है. 1 जनवरी, 2025 से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पेंशन निकासी के नियमों को सरल बना दिया है. अब पेंशनभोगी देश के किसी भी बैंक से अपनी पेंशन निकाल सकेंगे. इसके लिए उन्हें किसी अतिरिक्त सत्यापन की आवश्यकता नहीं होगी. यह सुविधा पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत है. यूपीआई 123पे के नियमों में बदलाव नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की पेमेंट तकनीक यूपीआई 123पे की लिमिट 1 जनवरी 2025 से बढ़ा दी जाएगी. पहले इस पेमेंट सर्विस के जरिए अधिकतम 5 हजार रु तक का लेनदेन किया जा सकता था, लेकिन अब यह लिमिट बढ़ाकर 10 हजार रु कर दी गई है. गौरतलब है कि यूपीआई 123पे एक ऐसी सेवा है जिससे कीपैड फोन चलाने वाले यूजर बिना इंटरनेट कनेक्शन के यूपीआई पेमेंट कर सकते हैं. LPG सिलेंडर की कीमतोें में बदलाव हर महीने की पहली तारीख को ऑयल व गैस कंपनियां LPG की कीमतों का रिव्यू करती हैं. इसके बाद इनकी कीमतें घटाई या बढ़ाई जाती है. पिछले कुछ महीनों से घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें स्थिर हैं. हालांकि, 1 जनवरी 2025 को इसमें बदलाव भी किया जा सकता है. बता दें कि मध्यप्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 808 रु 50 पैसे है.

किसान दिवस 2024: अन्नदाता के सम्मान और स्वाभिमान का पर्व

Farmer’s Day 2024: Honoring food providers and Farmer’s Day भोपाल। हर वर्ष 23 दिसंबर को पूरे देश में किसान दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती के उपलक्ष्य में किसानों के योगदान को सम्मानित करने और उनके संघर्षों को याद करने के लिए समर्पित है। चौधरी चरण सिंह ने किसानों के हक और उनकी उन्नति के लिए न सिर्फ महत्वपूर्ण नीतियां बनाई, बल्कि अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा उनके हितों के लिए समर्पित कर दिया। किसान दिवस हमें यह याद दिलाता है कि देश की अर्थव्यवस्था और प्रगति का आधार हमारे अन्नदाता हैं। उनका अथक परिश्रम और त्याग ही हमें रोज भोजन की सुरक्षा प्रदान करता है। खेतों में सूरज की पहली किरण से लेकर देर रात तक उनका श्रम न सिर्फ उनकी जीविका का साधन है, बल्कि यह पूरी मानवता के जीवन का आधार है। चुनौतियों के बावजूद उम्मीद कायम आज के समय में किसानों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन, बेमौसम बारिश, कर्ज़ का बोझ और बाजार में फसल के सही मूल्य का न मिल पाना उनकी स्थिति को और कठिन बना देता है। बावजूद इसके, भारतीय किसान अपनी मेहनत से हर बाधा को पार करते हुए देश की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करता है। समर्पण और समाधान की दिशा में कदम इस किसान दिवस पर हमें न केवल किसानों का आभार व्यक्त करना चाहिए, बल्कि उनके सामने आने वाली समस्याओं के स्थायी समाधान पर भी विचार करना चाहिए। सरकार और समाज दोनों को मिलकर उनकी स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है, जैसे कि नई तकनीकों का प्रसार, सिंचाई सुविधाओं का विकास, कर्ज़ माफी, और बाजार में फसलों के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करना। आइए, इस किसान दिवस पर हम सभी अन्नदाता के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करें और यह संकल्प लें कि हम उनके स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे। किसान खुशहाल होगा, तो देश भी खुशहाल होगा। “जय जवान, जय किसान।”सहारा समाचार टीम भोपाल की ओर से आप सभी को किसान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

क्या है न्यायसंगत गुजारा भत्ता? सुप्रीम कोर्ट ने तय किए नए पैमाने, पति-पत्नी दोनों के लिए राहत

What is equitable alimony? Supreme Court sets new standards, relief for both husband and wife सुप्रीम कोर्ट के नए दिशानिर्देश के अनुसार, गुजारा भत्ता तय करते समय पहले ये देखा जाना चाहिए कि पति-पत्नी दोनों का समाज में क्या स्थान है, उनकी पृष्ठभूमि क्या है, उनके परिवार का क्या रुतबा है. नई दिल्ली ! यह बेहद दुखद है कि बेंगलुरू में 34 साल के अतुल सुभाष ने अपनी पत्नी के साथ तलाक, गुजारा भत्ता और अन्य मामलों को लेकर चल रहे कानूनी विवाद के चलते अपनी जान दे दी. उन्होंने मरने से पहले अपनी पत्नी पर झूठे मुकदमे दर्ज कराने, पैसे ऐंठने और प्रताड़ित करने के आरोप लगाए. अतुल सुभाष ने अपने 24 पेज के सुसाइड नोट और 81 मिनट के वीडियो में आरोप लगाया कि वह पत्नी निकिता सिंघानिया को 40 हजार रुपये महीना गुजारा भत्ता के तौर पर दे रहे थे. फिर भी, पत्नी और उसके परिवार वाले सभी केस खत्म करने के लिए 3 करोड़ रुपये की रकम मांग रहे थे. इतना ही नहीं, बच्चे से मिलने के लिए 30 लाख रुपये की डिमांड की जा रही थी. अतुल सुभाष की आत्महत्या ने यह दिखाया है कि तलाक-गुजारा भत्ता के मामलों में कानूनी प्रक्रिया कितनी मुश्किल और तनावपूर्ण हो सकती है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले में गुजारा भत्ता को लेकर अहम फैसला सुनाया है. यह मामला दुबई के एक बैंकर, उनकी पत्नी और बच्चे के बीच कानूनी विवाद से जुड़ा था. इस मामले में कोर्ट ने गुजारा भत्ता तय करते समय 8 बातों का ध्यान रखने के लिए कहा है. अब भारत की अदालतें गुजारा भत्ता के मामलों में इसी फैसले को आधार मानकर काम करेंगी. पहले जानिए क्या है पूरा विवाद यह मामला दुबई के एक बैंक के सीईओ का है जिनकी साल 1998 में शादी हुई और 2004 में उनका पत्नी से विवाद हो गया. इसके बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई, जिसमें 20 साल तक यह बैंकर पारिवारिक अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक घूमता रहा. 2004 में बैंकर ने क्रूरता के आधार पर पत्नी से तलाक की अर्जी दायर की. इसके बाद पत्नी ने भी गुजारा भत्ता पाने के लिए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत याचिका दायर कर दी. यह केस 20 साल से अदालतों में घूम रहा है. परिवारिक अदालत से शुरू हुआ ये मामला पहले हाईकोर्ट में पहुंचा और फिर सुप्रीम कोर्ट. मुख्य सवाल यही है कि पत्नी को कितना गुजारा भत्ता मिलना चाहिए. फिर सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंचा मामला? 2015 में बैंकर ने सभी अदालती फैसलों का पालन करते हुए खुद से गुजारा भत्ता बढ़ा दिया. हालांकि, जब उनकी पत्नी ने और भी ज्यादा गुजारा भत्ता मांगना शुरू किया, तो उन्होंने विरोध किया. पति को यह मंजूर नहीं था कि यह रकम बार-बार बढ़ती रहे, खासकर जब उसकी अपनी भी आर्थिक स्थिति ठीक न हो और उसे अपने बच्चों की जिम्मेदारी भी निभानी हो. बैंकर के वकीलों के अनुसार, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 26 एक वयस्क बच्चे को गुजारा भत्ता देने की अनुमति नहीं देती है. मगर, पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 26 को चुनौती दी और अदालत से अपने और अपने वयस्क बेटे को स्थायी गुजारा भत्ता देने का समाधान मांगा. पत्नी का कहना था कि इस कानून के हिसाब से बच्चों के बड़े होने पर ज्यादा पैसे मिलने चाहिए. उनके बेटा हाल ही में ग्रेजुएट हुआ है और अभी भी उन पर निर्भर है, इसलिए और उन्हें भी ज्यादा पैसे चाहिए. बैंकर को इस बात पर सबसे ज्यादा एतराज था कि उसकी पत्नी हिन्दू मैरिज एक्ट के सेक्शन 26 का गलत इस्तेमाल करके ज्यादा पैसे मांग रही है. हालांकि वो पहले के फैसलों को मानता रहा था और गुजारा भत्ता बढ़ाने को भी तैयार था. यह पारिवारिक विवाद जब कानून का सवाल बन गया, तो माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले ने केस के सभी तथ्यों को ध्यान से समझा. उन्होंने मौजूदा कानून को भी ध्यान में रखा. सुप्रीम कोर्ट ने रजनेश बनाम नेहा (2021) और उसके बाद के फैसलों में दिए गए सिद्धांतों को दोहराया है. फिर कोर्ट ने कुछ बातें बताईं जिनके आधार पर यह तय किया जा सकता है कि गुजारा भत्ता देना जरूरी है या नहीं और अगर जरूरी है तो कितना. सुप्रीम कोर्ट के नए दिशानिर्देश के अनुसार, गुजारा भत्ता तय करते समय पहले ये देखा जाना चाहिए कि पति-पत्नी दोनों का समाज में क्या स्थान है, उनकी पृष्ठभूमि क्या है, उनके परिवार का क्या रुतबा है, ये सारी बातें शामिल हैं. कई बार सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण भी गुजारा भत्ता की राशि प्रभावित हो सकती है. साथ ही दोनों कितना कमाते हैं और उनकी कितनी संपत्ति है. अगर पति आर्थिक रूप से मजबूत होता है, तो उसे ज्यादा गुजारा भत्ता देने के लिए कहा जा सकता है. अगर पति-पत्नी दोनों कामकाजी हैं और उनकी आय लगभग बराबर है, तो गुजारा भत्ता की राशि कम हो सकती है या फिर शायद किसी को गुजारा भत्ता देने की जरूरत ही नहीं पड़े. लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह सिर्फ एक कारक है. गुजारा भत्ता तय करते समय अदालत बाकी 7 कारकों पर भी विचार करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ता तय करते समय पति-पत्नी के जीवन स्तर को भी एक अहम कारक बताया है. गुजारा भत्ता तय करते समय अदालत यह भी देखेगी कि पति-पत्नी का समाज में क्या रुतबा है और वे कैसा जीवन जीते थे. उनके पास कितने मकान और गाड़ियां हैं, उनकी कीमत क्या है? उनका घर कितना बड़ा है, उसमें कितने एसी और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएं हैं? उनके घर में कितने नौकर-चाकर काम करते हैं? वे कितनी बार छुट्टियां मनाने जाते थे, भारत में या विदेश में? अगर पति-पत्नी अमीर थे और ऐशो-आराम की जिंदगी जीते थे, तो पत्नी को ज्यादा गुजारा भत्ता मिल सकता है ताकि वो भी वैसी ही जिंदगी जी सके. अदालत यह भी देखेगी कि पत्नी की उम्र क्या है, उसने कितनी पढ़ाई की है और क्या वो खुद कमा सकती है. अगर वह बेरोजगार है, तो उसे ज्यादा गुजारा भत्ता मिल सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा … Read more

यह भी आपके अधिकार: शादी वाली फोटो खोने पर फोटोग्राफर पर कर सकते हैं केस, मिलेगा मुआवजा

This is also your right: If you lose your wedding photos, you can file a case against the photographer and get compensation नई दिल्ली। शादी की तस्वीरें और वीडियो बहुत ज्यादा भावनात्मक महत्व रखते हैं। पीढ़ियों तक यादों को संजोकर रखने में इनका अमूल्य योगदान होता है। अब जबकि शादी की फोटोग्राफी के पैकेज लाखों में आने लगे हैं तो इस क्षेत्र में उपभोक्ता अधिकारों को समझना बहुत जरूरी हो गया है। कानूनी उपाय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(7) के तहत फोटोग्राफी सेवाओं को भाड़े पर लेने वाला कोई भी व्यक्ति उपभोक्ता है। धारा 2(11) में उस कमी को परिभाषित किया गया है, जिससे उपभोक्ता को नुकसान होता है। कानून ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह के लेन-देन को मान्यता देता है और शिकायत घटना के दो साल के भीतर उपभोक्ता आयोगों में इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज की जा सकती है। फोटोग्राफी सेवाएं अधिनियम की धारा 2(42) के तहत परिकल्पित “सेवाओं’ की परिभाषा के अंतर्गत आती हैं। अनुबंध संबंधी दायित्व उपभोक्ता मंच फोटोग्राफी सेवाओं में स्पष्ट अनुबंधों के महत्व पर जोर देते हैं। साक्षी कुमार बनाम राणा गुरतेज सिंह (2018) मामले में चंडीगढ़ राज्य आयोग ने कहा कि फोटोग्राफी अनुबंध में भले ही समय इतना मायने ना रखता हो, लेकिन फोटोग्राफरों को उचित समय के भीतर काम पूरा करना चाहिए। अनुबंध में स्पष्ट रूप से डिलीवरेबल्स (फोटो की संख्या, संपादन की जरूरत और डिलीवरी फॉर्मेट) का उल्लेख होना चाहिए। आयोग ने माना कि फोटो का चयन एक व्यक्तिगत मामला है और फोटोग्राफरों से उनके स्तर पर फोटो को शॉर्टलिस्ट करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती, क्योंकि उन्हें आमंत्रित लोगों का शादी वाले परिवार से जुड़ाव के बारे में पता नहीं होता। इस मामले में अगर फोटोग्राफर ने उचित प्रक्रिया का पालन किया और अनुबंध के अनुसार संपादित फोटो वितरित किए तो आयोग ने उनके अधिकारों की भी रक्षा की। डेटा लॉस और बैकअप एक बड़ी चिंता तकनीकी विफलताओं के कारण शादी की तस्वीरों का नुकसान होता है। सत्यम गुरुंग बनाम सैमडेन योल्मो (2024) मामले में जब एक फोटोग्राफर ने दावा किया कि बिजली गिरने से शादी की तस्वीरों वाली हार्ड डिस्क क्षतिग्रस्त हो गई थी तो पश्चिम बंगाल राज्य आयोग ने 10 लाख रुपए का मुआवजा दिया। आयोग ने कहा कि कि पेशेवर फोटोग्राफरों को उपकरण और डेटा बैकअप के लिए उचित सुरक्षा उपाय करने शिकायतकर्ता को तकनीकी विफलताओं के दावों को विशेषज्ञ रिपोर्ट या फोरेंसिक विश्लेषण जैसे साक्ष्यों से साबित करना चाहिए। आयोग ने कहा कि पेशेवर फोटोग्राफर होने के नाते इस तरह के डेटा नुकसान को रोकने के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए थी। ऐसे मामलों में केवल अग्रिम राशि वापस करने से फोटोग्राफरों की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। समय पर डिलीवरी जगदीश चंद्र शर्मा बनाम आर.के. वर्मा (2005) मामले में दिल्ली राज्य आयोग ने एक ऐसे मामले पर विचार किया, जिसमें फोटोग्राफर ने पांच साल तक शादी का एल्बम नहीं दिया था। आयोग ने कहा कि “किसी की बेटी के विवाह समारोह के फोटो एल्बम का भावनात्मक मूल्य होता है और इसकी अहमियत कभी भी खत्म नहीं हो सकती, क्योंकि यह आने वाले समय के लिए यादों को संजोए रखता है।’ फोटोग्राफर को एल्बम देने और लंबित भुगतान जब्त करने का निर्देश दिया गया। इसी तरह, पी. मुरलीकृष्णुडु बनाम वरिकल्ला श्रीनिवास (2016) मामले में जब फोटोग्राफर 85% अग्रिम भुगतान लेने के बावजूद वादा किए गए समय पर एल्बम देने में विफल रहा तो जिला फोरम ने ब्याज सहित राशि वापसी का आदेश दिया। गुणवत्ता मानक फोटोग्राफरों की जिम्मेदारी केवल तस्वीरों की क्वांटिटी से कहीं अधिक है। फोटोग्राफरों को वादा किए गए गुणवत्ता मानकों के अनुसार संपादित तस्वीरें देनी सत्यम गुरुंग मामले में गूगल ड्राइव के माध्यम से असंपादित फोटो साझा करने को पर्याप्त नहीं माना गया। आयोग ने नोट किया कि विवाह फोटोग्राफी अनुबंधों में क्वांटिटी और क्वालिटी दोनों मायने रखता है। अपने अधिकारों की रक्षा स्मृतियों को संजोने के महत्व के मद्देनजर उपभोक्ताओं को विस्तृत लिखित अनुबंध हासिल करना चाहिए, जिसमें डिलीवरेबल्स, समयसीमा और गुणवत्ता मानकों का उल्लेख किया गया हो। अनुबंध में बैकअप प्रक्रियाओं, संपादित फोटो की जरूरतों और तकनीकी विफलताओं के मामले में वैकल्पिक व्यवस्था का भी जिक्र होना चाहिए। उपभोक्ता को सभी कम्युनिकेशन और भुगतानों का रिकॉर्ड रखना चाहिए। उपभोक्ता आयोगों ने विवाह फोटोग्राफी मामलों में लगातार पर्याप्त मुआवजा दिया है। हालांकि मौद्रिक मुआवजा भावनात्मक नुकसान की पूरी तरह से भरपाई नहीं कर सकता, फिर भी यह कीमती यादों को खोने की पीड़ा को कम करने में मदद कर सकता है।

आंबेडकर वाले बयान को लेकर कांग्रेस ने मांगा अमित शाह का इस्तीफा; कहा- देश से मांगे माफी

Congress demands Amit Shah’s resignation over Ambedkar’s statement; Said- apologize to the country नई दिल्ली ! केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मंगलवार को राज्यसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान डॉ. बीआर आंबेडकर को लेकर दिए बयान पर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने शाह पर डॉ. आंबेडकर का अपमान करने का गंभीर आरोप लगाया। साथ ही गृह मंत्री से इस्तीफा देने की मांग की। वहीं, इस मुद्दे के चलते आज संसद में भी हंगामा जारी रहा। क्या है पूरा मामला?दरअसल, संविधान पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में अमित शाह ने कहा था कि ‘अभी एक फैशन हो गया है। आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर। इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता। आंबेडकर का नाम सौ बार लें, लेकिन आंबेडकर के बारे में कांग्रेस पार्टी का भाव क्या है, ये मैं बताता हूं।’ शाह ने कहा था, ‘डॉ. आंबेडकर ने देश की पहली कैबिनेट से इस्तीफा क्यों दे दिया था। उन्होंने अनुसूचित जनजातियों से व्यवहार, अनुच्छेद 370 और देश की विदेश नीति से नाराजगी के चलते इस्तीफा दे दिया था। इस पर बीसी रॉय ने पंडित नेहरू को चिट्ठी लिखी कि आंबेडकर और राजाजी मंत्रिमंडल छोड़ेंगे तो क्या होगा? इसके जवाब में पंडित नेहरू ने लिखा था कि राजाजी के जाने से कुछ असर पड़ेगा, लेकिन आंबेडकर के जाने से कुछ नहीं होगा।’ उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि कांग्रेस के आंबेडकर के बारे में ये विचार रहे हैं। आज आंबेडकर को मानने वाले पर्याप्त संख्या में आ गए हैं इसलिए ये आंबेडकर-आंबेडकर कर रहे हैं। वोटबैंक के लिए कांग्रेस नेता आजकल आंबेडकर का नाम बार-बार लेते हैं। इसके अलावा, विपक्षी दल यह भी मांग कर रहा है कि शाह को सार्वजनिक रूप और संसद में अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए। संसद के बाहर पत्रकारों से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ‘हम आंबेडकर का अपमान करने के लिए गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हैं; उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।’ इसके अलावा, उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी कहा, ‘गृहमंत्री अमित शाह ने जो आज भरे सदन में बाबासाहेब का अपमान किया है, उससे ये फिर एक बार सिद्ध हो गया है कि भाजपा और आरएसएस तिरंगे के खिलाफ थे। उनके पुरखों ने अशोक चक्र का विरोध किया। संघ परिवार के लोग पहले दिन से भारत के संविधान के बजाय मनुस्मृति को लागू करना चाहते थे। मगर बाबासाहेब ने ये नहीं होने दिया, इसलिए उनके प्रति इतनी घृणा है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मोदी सरकार के मंत्रीगण ये कान खोलकर समझ लें कि मेरे जैसे करोड़ों लोगों के लिए बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर जी भगवान से कम नहीं हैं। वे दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक व गरीबों के मसीहा हैं और हमेशा रहेंगे।’ दलितों और बाबा साहेब का सीधा अपमान: डांगीकांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने भी शाह से माफी मांगने को कहा। उन्होंने कहा, ‘राज्यसभा में अमित शाह ने कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर का नाम लेना फैशन बन गया है। यह देश के दलितों और बाबा साहेब का सीधा अपमान है।’ डांगी ने कहा, ‘शाह ने पूरे देश को दिखा दिया है कि भाजपा नेता किस तरह की सोच रखते हैं। वंचित और शोषित वर्ग जिसका अपमान किया गया है, यह वही वर्ग है जो उन्हें 240 से घटाकर 40 कर देगा। कांग्रेस पार्टी की ओर से, मैं मांग करता हूं कि अमित शाह को सार्वजनिक रूप से और सदन में माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने बाबासाहेब के बारे में जो कहा है, उस पर विचार करते हुए वह संवैधानिक पद पर बने रहने का अधिकार खो चुके हैं। उन्हें गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।’ कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि राज्यसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान शाह की टिप्पणी दर्शाती है कि भाजपा और आरएसएस नेताओं के मन में आंबेडकर के लिए ‘काफी नफरत’ है और इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा था कि जो लोग मनुस्मृति में विश्वास करते हैं, वे निश्चित रूप से आंबेडकर के साथ मतभेद रखेंगे। कांग्रेस ने नेहरू की आलोचना पर पीएम मोदी, शाह को लताड़ाजवाहरलाल नेहरू पर संविधान के पहले संशोधन के जरिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का आरोप लगाने के लिए भाजपा पर पलटवार करते हुए कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वे अपने पसंदीदा लक्ष्य पर लगातार हमला करने वाले मास्टर हैं। वह तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने में महारथी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, ‘अनुच्छेद 19(2), 15(4), और 31(b) को प्रथम संशोधन के माध्यम से 18 जून, 1951 को भारत के संविधान में जोड़ा गया था। एक प्रवर समिति ने विधेयक की जांच की थी और उसकी रिपोर्ट वेबसाइट पर उपलब्ध है। अपने डिसेंट नोट के पैरा 2 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने निम्न बातें लिखीं थी।’ उन्होंने कहा, ’19(2) में प्रतिबंध से पहले उचित शब्द का जुड़ना एक बहुत ही अच्छा बदलाव है। यह 19(2) को न्यायसंगत बनाता है और मैं देश में नागरिकों के स्वतंत्रता की रक्षा के लिए इस बदलाव के महत्व को कम नहीं करना चाहता। उचित शब्द वास्तव में, नेहरू ने खुद जोड़ा था। अनुच्छेद 19 (2) सरदार पटेल द्वारा 3 जून, 1950 को नेहरू को लिखे गए एक पत्र का अनुसरण करता है। अनुच्छेद 15(4) तब के मद्रास में चंपकम दोराईराजन मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण को खारिज किए जाने के बाद आया। अनुच्छेद 31(b) सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिहार, यूपी और अन्य राज्यों में जमींदारी उन्मूलन कानूनों को रद्द करने के परिणामस्वरूप आया था।’ उन्होंने आगे कहा, ‘तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने वाले दोनों मास्टर डिस्टोरियन – प्रधानमंत्री और गृह मंत्री – पहले संशोधन की इस पृष्ठभूमि पर चुप रहे क्योंकि उन्हें अपने पसंदीदा लक्ष्य पर हमला करना था। लेकिन इस जोड़ी से सत्य और तथ्य पर पूरी तरह से कायम रहने की उम्मीद करना बेकार है।’

टीएमसी संसद का बड़ा बयान, सिंधिया हैं लेडी किलर, संसद में हंगामा

TMC’s big statement in Parliament, Scindia is a lady killer, uproar in Parliament नई दिल्ली ! टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने लोकसभा में बीजेपी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेडी किलर कहा, इसके बाद सदन में हंगामा हुआ और कार्यवाही स्थगित कर दी गई। भाजपा ने बनर्जी को सस्पेंड करने की मांग की है। दरअसल बनर्जी सदन में डिजास्टर मैनेजमेंट पर अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और सिंधिया ने टोकना शुरू कर दिया। बात कोविड तक पहुंच गई। इसे लेकर दोनों सांसदों में तीखी बहस हुई। उस वक्त पीठासीन अधीकारी ए. राजा ने दोनों को टोकने की कोशिश की लेकिन कल्याण बनर्जी नहीं रूके।सिंधिया ने कहा कि किसके चेहरे पर खलबली है और किसके चेहरे पर मुस्कुराहट है आप खुद समझ सकते है। इस पर कल्याण बनर्जी बोले सिंधिया जी आप बहुत सुंदर दिखते है तो ये नहीं है कि आप सुंदर आदमी है, आप विलेन भी हो सकते है। सिंधिया ने कहा कि आप निजी टिप्पणी कर रहे है। मेरा नाम ज्योतिरादित्य सिंधिया है। अगर मेरे परिवार के बारे में गलत बोलेंगे तो मैं बर्दाश्त नहीं करूंगा। सदन में इन दिनों सासंदों का जमावड़ा लगा हुआ है। सदन की कार्यवाही के दौरान कई प्रस्तावों और मुद्दों पर चर्चा हो रही है। बीते बुधवार को आपदा प्रबंधन ​अधिनियम में संशोधन को लेकर भी चर्चा की गई। इसी दौरान कुछ ऐसा हुआ की भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भड़क गए और तृणमूल के एक सांसद को करारा जबाव दे डाला। दरसअल, सदन की कार्यवाही के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया को तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने लेडी किलर बता दिया। जिसके बाद सदन में हंगामा हो गया। हंगामा इतना बढ़ गया कि सदन की कार्यवाही स्थिगित करनी पड़ी और सांसद कल्याण बनर्जी को महाराज सिंधिया से माफी मांगनी पड़ी। सासंद कल्याण बनर्जी ने सदन में कहा की कोरोना महामारी के दौरान केन्द्र की मोदी सरकार का सहयोग नहीं मिला, तो महाराज सिंधिया ने इसका विरोध कर दिया। इसके बाद सदन में हंगामा हो गया जिसके चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। क्या बोले सांसद बनर्जी लोकसभा की कार्यवाही के दौरान महाराज सिंधिया ने कहा की किसके चेहरे पर मुस्कुराहट है और किसके चेहरे पर खलबली है देख लीजिए। सिंधिया के इतना कहते ही कल्याण बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा कि आप जीतने सुंदर दिखाई देते है, उनते सुंदर आदमी नही है। आप विलेन भी हो सकते है। कल्याण बनर्जी ने इतना कहने के बाद सिंधिया को लेडी किलर कह दिया। बनर्जी के इतना कहते ही महाराज भड़क गए और दोंनो के बीच जमकर बहस शुरू हो गई। क्या बोले महाराज? सांसद कल्याण बजर्नी के इस बयान को लेकर महाराज सिंधिया ने कहा है कि कल्याण बनर्जी ने अपने बयान को लेकर मुझ से माफी मांगी। कोई भी इंसान अपने आत्मसम्मान के साथ समझौता नहीं करेगा। सिंधिया ने आगे कहा की कोई भी हो नीतियों, विचारों पर हमला करे, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर नहीं। अगर कोई करेगा तो उसे जवाब भी मिलेगा। भले ही कल्याण बनर्जी ने माफी मांगी, लेकिन देश की महिलाएंओं पर यह व्यक्तिगत हमला है, जिसके कारण में उनकी माफी स्वीकार नहीं करूंगा। वही महिला सासंदों ने कल्याण बनर्जी के निलंबन की मांग की है।

भाजपा MLA का अनोखा अन्दाज: पत्नी का नामांकन करने ले गये स्कूटर पर बैठा कर

BJP MLA’s unique style: Took his wife to file her nomination on a scooter लुधियाना। लुधियाना में निकाय चुनाव 21 दिसंबर को है। आज नामांकन भरने का आखिरी दिन है। बीती रात आम आदमी पार्टी ने अपने 94 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। वार्ड नंबर 70 से प्रत्याशी की घोषणा होना बाकी है। आज समस्त पार्टियों के उम्मीदवार नामांकन भरने के लिए अलग-अलग सेंटरों पर पहुंच रहे है। MLA गुरप्रीत गोगी पत्नी सुखचैन के साथ आज उनका नामांकन भरवाने स्कूटर पर सवार होकर पहुंचे। अक्सर विधायक गोगी चुनाव में किसी न किसी मुद्दे को लेकर चर्चा में रहते हैं। वहीं शिअद ने बीती रात 25 उम्मीदवारों की घोषणा की थी। अब शिअद के 33 उम्मीदवारों की घोषणा होना बाकी है। कांग्रेस ने अभी तक दो लिस्टें जारी करके कुल 76 उम्मीदवारों का ऐलान किया है। अब कांग्रेस के 19, शिअद के 33 और भाजपा के 2 उम्मीदवारों की सूची जारी होना बाकी है। भाजपा द्वारा बदले उम्मीदवारों की सूची। भाजपा ने 2 वार्डों के बदले उम्मीदवार भाजपा ने 2 वार्डों से उम्मीदवार बदल दिए है। वार्ड नंबर 21 में भाजपा ने पहले इशप्रीत को टिकट दिया था लेकिन अब उसे हटा कर अनीता को उम्मीदवार बनाया है। इसी तरह वार्ड नंबर 33 से लखविंदर कौर को प्रत्याशी घोषित करने के बाद उसका टिकट काट कर कुलदीप कौर को दिया है। समस्त पार्टियों के वर्करों में निकाय चुनाव को लेकर काफी उत्साह है। 400 से अधिक उम्मीदवार आज करेंगे नामांकन नगर निगम चुनाव को लेकर 25 दावेदारों ने नॉमिनेशन किया है। आज बुधवार को नॉमिनेशन का आखिरी दिन है। आज 400 से अधिक दावेदार नामांकन दाखिल करेंगे। आखिरी दिन होने के कारण कई सेंट्ररो में छुटपुट बहसबाजी या झड़प के मामले भी सामने आ सकते हैं, जिस कारण पुलिस ने सेंटरों पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हुए हैं। 9 दिसंबर से शुरु हुआ है नामांकन 9 दिसंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई थी। 11 दिसंबर तक कुल 26 उम्मीदवारों के नामांकन पत्र भरे जा चुके हैं। जबकि कई दावेदारों को जरूरी दस्तावेज कम होने के कारण वापस लौटना पड़ा। वहीं, नगर निगम, गलाडा से एनओसी लेने के लिए दावेदारों की भीड़ लग रही है। भाजपा, कांग्रेस, आप, शिअद और अन्य दावेदारों ने एनओसी लेने के लिए बिल्डिंग ब्रांच, प्रॉपर्टी टैक्स आदि ब्रांचों का रुख किया।

Bharat Darshan : मथुरा श्री कृष्ण जन्मभूमि तक पहुंचाने का संपूर्ण मार्गदर्शन एवं कहा कहां घूमें

Bharat Darshan: Complete guidance to reach the birthplace of Shri Krishna in Mathura and where to visit. भोपाल ! मथुरा उत्तर प्रदेश राज्य के पश्चिमी भाग में स्थित एक ऐतिहासिक और धार्मिक नगर है, जिसे विशेष रूप से हिंदू धर्म में श्री कृष्ण की जन्मभूमि के रूप में पूजा जाता है। यह नगर यमुना नदी के किनारे स्थित है और भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। मथुरा का धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है। मथुरा का इतिहास मथुरा का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है और यह एक महत्वपूर्ण वैदिक नगर था। यह महाभारत काल में भी प्रमुख था और प्राचीन समय में मथुरा का महत्व धार्मिक दृष्टि से बहुत अधिक था। मथुरा को पौराणिक कथाओं में “मथुरापुर” के नाम से भी जाना जाता है। मथुरा का नाम संस्कृत शब्द ‘मात्र’ से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है ‘प्यार’ या ‘स्नेह’, और यह इस स्थान के महत्व को दर्शाता है। श्री कृष्ण और मथुरा श्री कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। उनके जन्म से जुड़ी घटनाओं का वर्णन विशेष रूप से भगवद गीता, भागवतकथा, और महाभारत में मिलता है। कृष्ण का जन्म मथुरा के जेल में हुआ था, और उनकी माता देवकी और पिता वासुदेव थे। मथुरा के कंस के अत्याचारों से बचने के लिए वासुदेव ने कृष्ण को गोकुल में यशोदा के घर भेज दिया था। श्री कृष्ण ने अपने बाल्यकाल में मथुरा और गोकुल में कई लीलाएं की थीं, जो अब भी भक्तों के बीच प्रसिद्घ हैं। कृष्ण का जीवन मुख्य रूप से उनके बाल्यकाल, यवकाल, और द्वारका के शासनकाल पर आधारित है। मथुरा में उनकी कई महत्वपूर्ण लीलाएं, जैसे कि कंस का वध और अपने माता-पिता को कंस के अत्याचार से मुक्त करना, हुईं। मथुरा में भगवान कृष्ण से जुड़ी कई पवित्र जगहें हैं, जैसे कि *जन्मभूमि मंदिर, जहां श्री कृष्ण का जन्म हुआ था, और *कंस किला, जो कंस द्वारा बनवाया गया था। मथुरा के प्रमुख स्थल मथुरा का सांस्कृतिक महत्व मथुरा का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व अत्यधिक है, और यह स्थान भारतीय संस्कृति, संगीत, कला, और साहित्य के प्रमुख केंद्रों में से एक रहा है। यहां की संस्कृति में राधा-कृष्ण की प्रेमकथा की प्रमुखता है, जो विभिन्न कला रूपों में व्यक्त की जाती है, जैसे कि संगीत, नृत्य, चित्रकला और साहित्य। मथुरा में आयोजित होने वाले प्रमुख उत्सवों में जन्माष्टमी, दीपावली, और राधा अष्टमी विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इन अवसरों पर मथुरा में लाखों श्रद्धालु आते हैं और भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं। इस प्रकार मथुरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है, जहां से भगवान श्री कृष्ण की भक्ति और प्रेम की भावना फैलती है।

प्रियंका गांधी ने शपथ ली: राहुल की तरह हाथ में संविधान की कॉपी पकड़ी

Priyanka Gandhi took oath: held a copy of the Constitution in her hand like Rahul. नई दिल्ली । संसद के शीतकालीन सत्र का गुरुवार को तीसरा दिन है। प्रियंका गांधी पहली बार संसद पहुंचीं। उन्होंने लोकसभा में सांसद पद की शपथ ली। इस दौरान हाथ में संविधान की कॉपी ली। प्रियंका के साथ उनकी मां सोनिया और राहुल गांधी भी संसद पहुंचे। प्रियंका वायनाड सीट से उपचुनाव जीती हैं। प्रियंका के साथ नांदेड़ से उपचुनाव जीतने वाले रविंद्र चव्हाण ने भी शपथ ली। लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही अडाणी मुद्दे पर हंगामा होने लगा। राज्यसभा में भी हंगामा हुआ। इसके बाद दोनों सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। राहुल ने बुधवार को संसद के बाहर कहा था कि अडाणी पर अमेरिका में 2 हजार करोड़ की रिश्वत देने का आरोप है। उन्हें जेल में होना चाहिए। मोदी सरकार उन्हें बचा रही है। पहली बार संसद में गांधी परिवार के तीन सदस्य केरल के वायनाड लोकसभा उपचुनाव में प्रियंका गांधी की जीत के बाद लोकसभा में दोबारा कांग्रेस के 99 सांसद हो गए हैं। वायनाड सीट राहुल गांधी ने छोड़ी थी, जबकि नांदेड़ सीट कांग्रेस सांसद बसंतराव चव्हाण के निधन के चलते खाली हुई थी। इन पर हाल ही में उपचुनाव हुए हैं और दोनों ही सीटें कांग्रेस के पास वापस आ गई हैं। यह पहली बार हुआ है कि कांग्रेस पार्टी से जुड़े गांधी परिवार के 3 सदस्य एक साथ संसद के सदस्य होंगे। राहुल गांधी रायबरेली से और प्रियंका गांधी वाड्रा वायनाड से लोकसभा सांसद हैं। जबकि सोनिया गांधी राजस्थान से राज्य सभा सांसद हैं।

औषधीय गुणों से भरपूर अर्जुन के पेड़ से संबंधित विस्तृत जानकारी,एवं फायदे

Detailed information and benefits related to Arjuna tree which is rich in medicinal properties. अर्जुन के पेड़ को औषधीय पेड़ माना जाता हैं क्यूंकि इसे बहुत सी दवाइयों के लिए उपयोगी माना जाता है। यह पेड़ ज्यादातर नदी और नालों के किनारे पाए जाते है। अर्जुन का पेड़ सदाहरित रहता हैं। अर्जुन के पेड़ को अन्य कई नामो से जाना जाता हैं जैसे ,घवल और नदीसर्ज। इस पेड़ की ऊंचाई लगभग 60 -80 फ़ीट ऊँची रहती हैं। अर्जुन का पेड़ ज्यादातर उत्तर प्रदेश ,महाराष्ट्र ,बिहार और अन्य कई राज्यों नदियों के किनारे या सुखी नदियों के तल के पास पाए जाते है। अर्जुन का पेड़ कैसा होता हैं अर्जुन के पेड़ की लम्बाई काफी ऊँची रहती है। अर्जुन का पेड़ बहुत ही शुष्क इलाकों में पाया जाता हैं। अर्जुन के पेड़ को किसी भी मिटटी में उगाया जा सकता है। अर्जुन के पेड़ को अनुनारिष्ट के नाम से भी जाना जाता है। इस पेड़ का उपयोग बहुत सालों से आयुर्वेदिक दवाइयों के लिए किया जा रहा है। अर्जुन के पेड़ का फल कैसा होता हैं अर्जुन के पेड़ का फल शुरुआत हल्के सफ़ेद और पीले रंग का होता हैं ,कुछ समय पश्चात जब फल में बढ़ोत्तरी होती हैं तो ये फल हरे और पीले रंग का दिखाई पड़ता हैं ,साथ ही इसमें से हल्की हल्की सुगंध भी आने लगती है। पकने के बाद ये फल लाल रंग का दिखाई पड़ने लगता है। अर्जुन के पेड़ के पत्ते हैं लाभकारी अर्जुन के पेड़ के पत्ते खाने से ये शरीर में जमा गंदे कॉलेस्ट्रॉल को बाहर निकलता हैं। इसका सेवन सुबह खाली पेट करना चाहिए। इन पत्तों का सेवन करने से ब्लड शुगर नियंत्रित रहता हैं। अर्जुन की छाल से मिलने वाले फायदे अर्जुन की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से खून पतला होता हैं जो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को संतुलित बनाये रखता है। इस छाल के काढ़े का उपयोग दो से तीन महीने लगातार करना चाहिए। इस काढ़े के उपयोग से रक्तश्राव कम होता है। यह ह्रदय के रक्तचाप जैसी गतिविधियों की क्षमता में सुधार लाता है। पाचन किर्या में सहायक अर्जुन का पेड़ पाचन किर्या में सहायक होता हैं। इसकी छाल का चूर्ण बनाकर लेने से ये पाचन तंत्र को संतुलित बनाये रखता है। यह बड़े हुए चर्बी को कम करने में मदद करता हैं ,अर्जुन की छाल का सेवन लिवर जैसी समस्याओं के लिए बेहतर माना जाता है। यह वजन घटाने में भी सहायता प्रदान करती है। सर्दी खांसी में है लाभकारी अर्जुन के पेड़ की छाल का कड़ा बनाकर पीने से या फिर अर्जुन के चूर्ण में शहद मिलाकर खाने से सर्दी और खांसी दोनों में फायदा होता है। अर्जुन के पेड़ का रस औषिधि के रूप में सदियों से किया जा रहा हैं। हड्डियों के जोड़ने में मददगार अर्जुन के पेड़ की छाल का उपयोग टूटी हुई हड्डियों या फिर मांसपेशियों में होने वाले दुखाव के लिए किया जाता हैं। इसमें छाल के चूर्ण को एक गिलास दूध में दो चम्मच चूर्ण मिलाकर पीने से हड्डियां मजबूत होती है। ये हड्डी में होने वाले दर्द से भी आराम दिलाता हैं। अल्सर बीमारी में है फायदेमंद अर्जुन का प्रयोग अल्सर जैसी बीमारी में भी किया जाता हैं। कई बार अल्सर का घाव जल्द ही नहीं भर पाता हैं। या फिर घाव सूखते ही दूसरे घाव निकल आते हैं ,इसमें अर्जुन के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर ,घाव को इससे धोये। ऐसा करने से घाव कम होने लगते हैं,साथ ही अल्सर जैसे रोग को भी नियंत्रित करता है। अर्जुन की छाल से होने वाले नुकसान अर्जुन के पेड़ को बहुत सी बीमारियों के लिए लाभकारी माना जाता हैं ,लेकिन इसके कुछ नुक्सान भी हैं जो शरीर पर गलत प्रभाव डालते है। सीने में जलन होना अर्जुन की छाल का सेवन बहुत से लोगो की सेहत के लिए ठीक नहीं रहता हैं, जिसकी वजह से उन्हें जी मचलना या घबराहट जैसी परेशानियां अक्सर हो जाती है। यदि आप छाल का सेवन कर रहे हैं और आपको ऐसा महसूस होता हैं की सीने में जलन या दर्द हो रहा हैं तो इसका उपयोग करना उसी वक्त छोड़ दे। पेट में दर्द या ऐठन का महसूस होना यदि छाल का उपयोग करने से आपको पेट में दर्द या और कोई परेशानी महसूस होती हैं तो छाल का सेवन करना बंद कर दे। हालाँकि अर्जुन एक आयुर्वेदिक जड़ीबूटी हैं लड़की कुछ लोगों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। एलेर्जी जैसो रोगों को जन्म देता हैं अर्जुन के पेड़ की छाल का घोल बनाकर शरीर पर लगाया जाता हैं, यह त्वचा के लिए बहुत ही लाभकारी माना जाता हैं। लेकिन इसका लेप बहुत से लोगो के शरीर एलेर्जी से जुडी समस्याओं को भी खड़ा कर देता हैं। यदि इस लेप का उपयोग करने के बाद शरीर में खुजली जैसी परेशानिया हो तो इस लेप का उपयोग न करें। आयुर्वेद में अर्जुन के पेड़ को बहुत ही लाभकारी माना गया हैं। अर्जुन के पेड़ में सबसे ज्यादा उपयोग छाल का किया जाता हैं। अर्जुन के पेड़ की छाल में मैग्नीशियम ,पोटेसियम और कैल्शियम पाया जाता है। इस पेड़ की छल का इस्तेमाल बहुत से रोगो में किया जाता हैं ,और ये लाभकारी भी है। अर्जुन के पेड़ की छाल का उपयोग कैंसर सम्बंधित रोगो से निपटने के लिए भी किया जाता है। साथ ही इसके कुछ नुक्सान भी हैं। जो व्यक्ति पहले से किसी भी प्रकार की कोई दवाई ले रहा हैं ,उसे इसका सेवन डॉक्टर से परामर्श लेकर ही करना चाहिए।

अडानी मुद्दे पर चर्चा की विपक्षी मांग, शशि थरूर ने सरकार पर उठाए सवाल

Opposition demands discussion on Adani issue, Shashi Tharoor makes serious allegations against the government नई दिल्ली ! कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि विपक्षी दलों ने अडानी समूह से जुड़े मामलों पर चर्चा की मांग की थी, लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं थी। उन्होंने कहा, “दोनों सदनों के सत्र स्थगित कर दिए गए हैं। देशहित में संसद का सुचारू रूप से चलना बेहद महत्वपूर्ण है और सदन में सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।” थरूर ने विपक्ष की ओर से उठाए गए मुद्दों को दबाने के आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार का कर्तव्य है कि वह संवाद और चर्चा को प्राथमिकता दे। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह संसद के अगले सत्र में इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति दे, ताकि देशहित से जुड़े सवालों के जवाब सामने आ सकें। विपक्षी दल लंबे समय से अडानी समूह के मामलों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को बार-बार खारिज किया है। अब देखना होगा कि संसद का अगला सत्र इस मुद्दे पर कोई ठोस समाधान लेकर आता है या नहीं।

पर्थ टेस्ट-भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 295 रन से हराया: दूसरी पारी में 238 रन पर सिमटी कंगारू टीम

Perth Test-India beats Australia by 295 runs: Kangaroo team all out for 238 runs in second innings जसप्रीत बुमराह ने मैकस्वीनी, लाबुशेन और हेड के विकेट लिए। भारत ने ऑस्ट्रेलिया को बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पहले टेस्ट में 295 रन से हरा दिया है। टीम ने 5 मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है। दूसरा मुकाबला 6 दिसंबर से एडिलेड में खेला जाएगा। पर्थ के ऑप्टस स्टेडियम में सोमवार को मैच के चौथे दिन 534 रन चेज कर रही कंगारू टीम को दूसरी पारी में 238 रन पर ऑलआउट हो गई। इससे पहले भारत ने 6 विकेट पर 487 रन पर दूसरी पारी घोषित कर दी थी। टीम इंडिया ने पहली पारी में 150 रन बनाए थे। जवाब में ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 104 रन पर सिमट गई थी। भारत-ऑस्ट्रेलिया पहले टेस्ट का स्कोरबोर्ड दोनों टीमों की प्लेइंग-11भारत: जसप्रीत बुमराह (कप्तान), यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, देवदत्त पडिक्कल, विराट कोहली, ऋषभ पंत, ध्रुव जुरेल, वॉशिंगटन सुंदर, नीतीश रेड्‌डी, हर्षित राणा और मोहम्मद सिराज।

भारत दर्शन : अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तक पहुंचने का सम्पूर्ण मार्गदर्शन

Bharat Darshan: Complete guide to reach Ayodhya Shri Ram Janmabhoomi Temple भोपाल ! अयोध्या उत्तर प्रदेश में स्थित, भारतीय इतिहास और धार्मिक मान्यताओं का अभिन्न अंग है। यह भगवान श्रीराम की जन्मभूमि के रूप में जानी जाती है, जो पूरे भारत और दुनिया भर के लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, इसकी भव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध, हर भक्त के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है। आइए जानते हैं कि भोपाल सहित मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों से अयोध्या तक कैसे पहुंचा जा सकता है। भोपाल से अयोध्या तक की यात्रा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से अयोध्या पहुंचने के लिए तीन मुख्य साधन उपलब्ध हैं: रेल, सड़क, और हवाई मार्ग। रेल मार्ग: भोपाल से अयोध्या तक ट्रेन यात्रा सबसे लोकप्रिय और किफायती विकल्प है।मुख्य रेलवे स्टेशन: अयोध्या कैंट और फैजाबाद जंक्शन। प्रमुख ट्रेनें: साकेत एक्सप्रेस (भोपाल से फैजाबाद)।गोंडा एक्सप्रेस (भोपाल से अयोध्या के पास)।अन्य ट्रेनें लखनऊ होते हुए उपलब्ध हैं।समय: 12-15 घंटे।किराया: ₹400-₹1500 (स्लीपर से एसी क्लास)। सड़क मार्ग: भोपाल से अयोध्या सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। बसें और निजी वाहन द्वारा यात्रा करना सुविधाजनक है।मार्ग: भोपाल → झांसी → कानपुर → लखनऊ → अयोध्या।समय: 16-18 घंटे।बस किराया: ₹1000-₹2000।निजी वाहन से यात्रा करना चाहें तो यह यात्रा दर्शनीय स्थलों के साथ रोमांचक बन सकती है। हवाई मार्ग: भोपाल से अयोध्या के लिए सीधी उड़ान नहीं है, लेकिन लखनऊ तक फ्लाइट लेकर वहां से अयोध्या पहुंच सकते हैं।हवाई अड्डा: लखनऊ (चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा)।भोपाल से लखनऊ फ्लाइट: 1.5 घंटे।लखनऊ से अयोध्या: टैक्सी/बस द्वारा 140 किमी (2-3 घंटे)।किराया: ₹4000-₹8000। मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों से यात्रा मार्गदर्शन उत्तर प्रदेश:उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर जैसे लखनऊ, वाराणसी, और गोरखपुर से अयोध्या आसानी से पहुंचा जा सकता है।लखनऊ से अयोध्या: 140 किमी। टैक्सी और बसें 2-3 घंटे में पहुंचा देती हैं।वाराणसी से अयोध्या: 200 किमी, ट्रेन/बस द्वारा 4-5 घंटे। राजस्थान:जयपुर, कोटा और उदयपुर से अयोध्या के लिए ट्रेन और बसें उपलब्ध हैं। महाराष्ट्र:मुंबई और पुणे से ट्रेनें और फ्लाइट्स उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़:रायपुर और बिलासपुर से ट्रेन और बसें आसानी से उपलब्ध हैं। गुजरात:अहमदाबाद और सूरत से लखनऊ होकर अयोध्या पहुंचा जा सकता है। अयोध्या में प्रमुख आकर्षण यात्रा के लिए उपयोगी सुझाव अयोध्या एक ऐसा शहर है, जो आध्यात्मिकता, भक्ति, और भारतीय इतिहास का प्रतीक है। भोपाल और आसपास के राज्यों से अयोध्या की यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन के लिहाज से भी अद्वितीय है। चाहे आप रेल, सड़क, या हवाई मार्ग से जाएं, यह तीर्थ यात्रा आपको अनमोल अनुभव प्रदान करेगी। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के दर्शन हर व्यक्ति के जीवन का एक यादगार हिस्सा बन सकते हैं। जय श्री राम!

‘उम्मीदवार की जाति, धर्म और नस्ल देखकर वोट…’, मतदाताओं से क्या बोले नितिन गडकरी?

‘Vote considering the caste, religion and race of the candidate…’, what did Nitin Gadkari say to the voters? केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कांग्रेस ही थी जिसने अपने स्वार्थ के लिए संविधान को तोड़ा-मरोड़ा और अब वह इसका दोष भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर मढ़ रही है. नितिन गडकरी ने काटोल में बीजेपी प्रत्याशी चरणसिंह ठाकुर के लिए एक रैली को संबोधित करते हुए सोमवार (10 नवंबर, 2024) को कहा कि भाजपा न तो डॉ. बी आर आंबेडकर का संविधान बदलेगी और न ही किसी को ऐसा करने देगी. महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 20 नवंबर को होगा और मतगणना 23 नवंबर को होगी. नितिन गडकरी ने कहा, ‘हम न तो बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान बदलेंगे और न ही हमें किसी को ऐसा करने देंगे. संविधान की मूल संरचना को बदला नहीं जा सकता है.’ उन्होंने अपनी बात के समर्थन में ऐतिहासिक केशवानंद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया. नितिन गडकरी ने कहा, ‘संविधान की मुख्य विशेषताएं जैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता के साथ-साथ मौलिक अधिकारों को कोई भी नहीं बदल सकता है. आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी ने संविधान को तोड़-मरोड़ा. देश के इतिहास में कांग्रेस ही थी जिसने संविधान को तोड़ने-मरोड़ने का पाप किया और अब वे हम पर दोष मढ़ रहे हैं.’ छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि महाराज ने लोगों को भगवान राम के राम राज्य के समान शिवशाही दी, जिसके बारे में महात्मा गांधी हमेशा कहते थे कि देश में इसे स्थापित किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘अगर आप राम राज्य स्थापित करना चाहते हैं तो यह नेताओं के हाथ में नहीं बल्कि जनता के हाथ में है. जाति, नस्ल, धर्म और भाषा के आधार पर मतदान न करें. कोई व्यक्ति अपनी जाति से नहीं बल्कि अपने गुणों से बड़ा होता है. छूआछूत और जातिवाद खत्म होना चाहिए.’ नितिन गडकरी ने कहा कि जो नेता अपनी योग्यता के आधार पर नहीं जीत सकते, वे चुनावी लाभ के लिए जाति का इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने कहा, ‘आप भोजन और स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छे व्यक्ति के पास उसकी जाति देखे बगैर जाते हैं. जब तक आप ईमानदार, गैर-भ्रष्ट नेताओं और दल को नहीं चुनते, तब तक आपका भविष्य नहीं बदलेगा.’ उन्होंने कहा कि महायुति सरकार लोगों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लेकर आई है. नितिन गडकरी ने पूछा कि क्या इनमें से कोई भी ऐसी योजना है जिसमें मुस्लिम और दलित आवेदन नहीं कर सकते?

मसाले, दूध, तेल में मिलावट पर कानून का शिकंजा: जानें सजा और प्रावधान

Now you will get 10 years imprisonment for selling adulterated milk and ghee, know what the law says भोपाल। भारत में मिलावटी चीजों की भरमार है.। खासतौर से जब आप खाद्य पदार्थों की बात करते हैं तो उसमें सबसे ज्यादा मिलावट देखने को मिलती है। मसाले, दूध, घी, तेल हर चीज में मिलावट होती है. चलिए आज इस खबर में जानते हैं कि अगर कोई मिलावट खोर खाने की चीजों में मिलावट करता पकड़ा गया तो उसे भारतीय कानून के तहत कितनी सजा होगी। क्या कहता है नियम-कानून भारत में मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा से संबंधित मामलों को देखने के लिए, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 (Food Safety and Standards Act, 2006) बनाया गया है. इसके अलावा इसके तहत बनाए गए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के नियमों का भी पालन किया जाता है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 को भारतीय खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है। इस कानून के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट को प्रतिबंधित किया गया है और अगर कोई व्यक्ति मिलावटी सामान बेचता पाया जाता है, तो उस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होती है। कितनी मिलती है सजा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति मिलावटी खाद्य पदार्थों का उत्पादन, बिक्री या वितरण करते पाया गया तो इसे गंभीर अपराध माना जाता है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना, सजा या दोनों का प्रावधान है. जुर्माने की बात करें तो मिलावटी खाद्य पदार्थों को बनाने और बेचने पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। जबकि, अपराध के गंभीरता को देखते हुए, इस तरह के मामलों में 6 महीने से लेकर 7 साल तक की सजा भी हो सकती है। वहीं अगर मिलावटी खाद्य पदार्थ खाने से किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो मिलावटखोर को आजीवन कारावास या 10 साल तक की सजा हो सकती है। धारा 272 और 273 के तहत भी मिलती है सजा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के अलावा भारतीय दंड संहिता (IPC) में भी मिलावटखोरी से संबंधित अपराधों के लिए दंडात्मक प्रावधान हैं। खासतौर से धोखाधड़ी और आम जनता के जीवन को खतरे में डालने के मामले में है। दरअसल, अगर किसी व्यक्ति द्वारा मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री की जाती है, जिससे किसी जान जाने का खतरा ना हो तो यह धोखाधड़ी के अंतर्गत आता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 272 और 273 के तहत इसमें, मिलावटी खाद्य पदार्थों को बेचने वाले को 6 महीने से लेकर 2 साल तक की सजा हो सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। जबकि, अगर मिलावटी खाद्य पदार्थ से किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर हो जाती है या कोई बीमारी फैल जाती है या किसी के जान पर बन आती है तो यह एक गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में, संबंधित व्यक्ति को 3 से 7 साल तक की सजा हो सकती है और उस पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

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