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TVS टू-व्हीलर्स की ग्लोबल सफलता, यामाहा से आगे निकलकर हासिल की नंबर-3 की रैंकिंग

मुंबई  भारतीय कंपनियों की वैश्विक रफ्तार भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियां अब सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मजबूती से अपनी पहचान बना रही हैं। इसी कड़ी में TVS Motor Company ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बिक्री के आंकड़ों के आधार पर कंपनी ने जापान की दिग्गज Yamaha Motor Company को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी टू-व्हीलर निर्माता कंपनी का स्थान हासिल कर लिया है। सेल्स के आंकड़ों में TVS की बड़ी छलांग साल 2025 में TVS मोटर ने कुल 54.6 लाख यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जबकि यामाहा की वैश्विक बिक्री करीब 50 लाख यूनिट्स पर सिमट गई। TVS के लिए यह आंकड़ा इसलिए भी खास है क्योंकि 2024 के मुकाबले कंपनी की बिक्री में करीब 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखने को मिली है। वहीं यामाहा की ग्रोथ इस अवधि में बेहद सीमित रही, जिससे रैंकिंग में बड़ा बदलाव हुआ। हीरो और होंडा के बीच TVS की मजबूत मौजूदगी TVS मोटर अब Hero MotoCorp के बाद टॉप-3 में जगह बनाने वाली दूसरी भारतीय कंपनी बन गई है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर सबसे आगे अब भी Honda Motor Company बनी हुई है, जिसने 2025 में 1.64 करोड़ से ज्यादा यूनिट्स की बिक्री की। इस तुलना से साफ है कि होंडा की पकड़ इतनी मजबूत है कि उसे चुनौती देने के लिए बाकी कंपनियों को सामूहिक रूप से भी कड़ी मेहनत करनी होगी। EV सेगमेंट से मिली रफ्तार TVS की तेजी के पीछे उसका व्यापक टू-व्हीलर पोर्टफोलियो और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में मजबूत पकड़ अहम कारण रही है। कंपनी के इलेक्ट्रिक स्कूटर ने बाजार में भरोसा बनाया है, वहीं पारंपरिक सेगमेंट में भी इसके मोटरसाइकिल मॉडल लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। खास तौर पर अपाचे सीरीज ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में बिक्री को मजबूती दी है। स्कूटर सेगमेंट में भी TVS की मौजूदगी लगातार मजबूत होती जा रही है। एक्सपोर्ट मार्केट में बढ़ता प्रभाव TVS मोटर का निर्यात कारोबार भी तेजी से बढ़ा है। अफ्रीकी बाजारों में कंपनी पहले से ही मजबूत स्थिति में है और अब उसका फोकस लैटिन अमेरिका जैसे उभरते बाजारों पर भी बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में अब तक Bajaj Auto की मजबूत पकड़ रही है, लेकिन TVS अपनी स्पोर्ट्स बाइक रेंज के दम पर वहां विस्तार की रणनीति पर काम कर रही है। TVS और यामाहा के लिए आगे की चुनौती आने वाले समय में यामाहा के लिए तीसरा स्थान वापस पाना आसान नहीं होगा। इसके लिए उसे भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे हाई-वॉल्यूम बाजारों में बिक्री बढ़ानी होगी, साथ ही इलेक्ट्रिक सेगमेंट में भी मजबूत उपस्थिति बनानी होगी। दूसरी ओर, TVS की रणनीति घरेलू बाजार को और मजबूत करने के साथ-साथ निर्यात बढ़ाकर अपनी तीसरी पोजिशन को सुरक्षित रखने की है। TVS मोटर की यह उपलब्धि भारतीय ऑटो उद्योग के लिए एक बड़ा संकेत है कि देसी कंपनियां अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़ी हैं। बढ़ती बिक्री, मजबूत EV रणनीति और एक्सपोर्ट पर फोकस ने TVS को दुनिया के टॉप टू-व्हीलर निर्माताओं की कतार में मजबूती से ला खड़ा किया है।

सप्लाई संकट की आशंका के बीच कच्चा तेल 83 डॉलर पार, मिडिल ईस्ट तनाव ने बढ़ाई कीमतें

नई दिल्ली   मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच गुरुवार को कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। सप्लाई पर असर पड़ने के कारण कीमतों में उछाल आया है, क्योंकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को बंद कर दिया है। सुबह के शुरुआती कारोबार में इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर बेंचमार्क क्रूड का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 2.43 प्रतिशत बढ़कर 83.26 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (एनवाईमेक्स) पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 2.63 प्रतिशत बढ़कर 76.63 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक कंटेनर जहाज पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिससे जहाज को नुकसान पहुंचा है। तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारत के आयात बिल पर असर डाल सकती है। यदि कच्चे तेल की कीमत पूरे साल के लिए प्रति बैरल 1 डॉलर बढ़ती है, तो भारत का आयात बिल लगभग 16,000 करोड़ रुपए तक बढ़ सकता है। इस बीच, सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी को लेकर भारत फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में है। देश के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार और 25 दिनों के पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक मौजूद है, जिसमें वह तेल भी शामिल है जो जहाजों के जरिए भारत के बंदरगाहों की ओर आ रहा है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, जिसमें से करीब 50 प्रतिशत तेल मिडिल ईस्ट के देशों से आता है, जो मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचता है। ईरान युद्ध के बाद इस मार्ग से सप्लाई प्रभावित हुई है। हालांकि, भारत ने अफ्रीका, रूस और अमेरिका से तेल आयात बढ़ाकर अपने स्रोतों में विविधता लाई है और रणनीतिक भंडार बनाकर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने खाड़ी देशों के अलावा अन्य देशों से भी तेल आयात बढ़ाया है, जिसके चलते अब बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते नहीं आती। भारत ने 31 मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष में कच्चे तेल के आयात पर 137 अरब डॉलर खर्च किए थे। वहीं चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों (अप्रैल 2025 से जनवरी 2026) के दौरान 206.3 मिलियन टन कच्चे तेल के आयात पर 100.4 अरब डॉलर खर्च किए गए।  

ईरान तनाव के दौरान ChatGPT से यूजर्स असंतुष्ट, अनइंस्टॉलेशन में भारी उछाल

वाशिंगटन अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर हमला कर रहे हैं और ईरान भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है. इस दौरान अमेरिका AI कंपनियां भी चर्चा में हैं. इसमें Anthropic और OpenAI की काफी चर्चा की गई है. इस दौरान OpenAI ने जल्दबाजी में पेंटागन के साथ पार्टनरशिप कर ली लेकिन लोगों ने सोशल मीडिया पर कंपनी की काफी आलोचना की. इसके बाद ओपनएआई के चैटजीपीटी ऐप को लोगों ने अनइंस्टॉल करना शुरू किया, जिसका आंकड़ा 300 परसेंट तक पहुंच गया. इसके बाद OpenAI के सीईओ ने गलती को सुधारा। अमेरिकी AI कंपनी और चैटजीपीटी मेकर OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने माना है कि अमेरिका डिफेंस डिपार्टमेंट के साथ पार्टनरशिप करने में थोड़ा समय लेना चाहिए था. OpenAI ने पेंटागन के साथ शुरुआती डील ऐसे समय कि जब  Anthropic का कॉन्ट्रैक्सट खत्म हुआ. इसके बाद सोशल मीडिया पर ओपनएआई को विरोध का सामना करना पड़ा। ChatGPT ऐप किया अनइंस्टॉल  लोगों ने ओपनएआई का विरोध तो किया, साथ ही उसके ChatGPT ऐप को अनइंस्टॉल करना शुरू किया. सेंसर टावर के मुताबिक, 28 फरवरी को ChatGPT के अनइंस्टॉल दिन-प्रतिदिन के आधार पर 295% तक बढ़ चुके थे. वहीं दूसरी ओर Anthropic के Claude चैटबॉट के डाउनलोड्स की संख्या 51 परसेंट तक बढ़ी. साथ ही Claude अमेरिका में Apple App Store पर नंबर 1 स्थान तक पहुंच गया।  ऑल्टमैन ने किया X पर पोस्ट  सैम ऑल्टमैन ने X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर पोस्ट किया और बताया है कि ओपनएआई ने अब पेंटागन के साथ अपने कॉन्ट्रैक्ट को अपडेट कर दिया है. कंपनी अपने प्रिन्सिपल को क्लीयर कर दिया है।  उन्होंने आगे बताया है कि पेंटागन के साथ जल्दी करने का मकसद था कि अमेरिकी रक्षा विभाग और एआई इंडस्ट्री के बीच तनाव और न बढ़े. Anthropic का पेंटागन के साथ कॉन्ट्रैक्ट इसलिए खत्म हो गया था. ऑल्टमैन ने माना कि पूरी स्थिति अंत में मौकापरस्ती और अव्यवस्थित लगने लगी. ऑल्टमैन ने कहा कि वह इस अनुभव को भविष्य के फैसलों पर ध्यान रखेंगे। कैटी पेरी ने भी जताया विरोध  पॉप स्टार कैटी पेरी ने भी X प्लेटफॉर्म पर Claude के स्क्रीनशॉट के साथ दिल वाले इमोजी के साथ शेयर किया. कैटी पेरी के इस पोस्ट से पता चलता है कि वह पेंटागन की मांगों को ठुकराने वाले Anthropic के फैसले को सपोर्ट कर रही हैं।  ओपनएआई ने क्या बदलाव किए? सैम ऑल्टमैन ने एक इन्टरनल मेमो भी शेयर किया है. मेमो में बताया है कि ओपनएआई के सिस्टम का यूज अमेरिकी नागरिक पर बड़े पैमाने पर  घरेलू निगरानी में नहीं किया जा सकता है. यह प्रतिबंध अमेरिकी संविधान के National Security Act 1947 के चौथे संशोधन और FISA Act 1978 जैसे कानूनों पर बेस्ड है।    

स्टॉक मार्केट में दमदार वापसी, युद्ध तनाव के बीच आई तेजी; ये हैं 3 अहम कारण

मुंबई तीन कारोबारी सत्र के दौरान शेयर बाजार में भारी गिरावट आई थी, लेकिन गुरुवार को शेयर बाजार में शानदार तेजी आई है. सेंसेक्‍स 440 अंक या 0.56 फीसदी चढ़कर 79555 अंक पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 160 अंक या 0.65 फीसदी चढ़कर 24640 पर पहुंच गया. वहीं निफ्टी बैंक में भी 220 अंक चढ़कर कारोबार कर रहा था।  BSE टॉप 30 शेयरों की बात करें तो 16 शेयरों में उछाल है और बाकी 14 शेयरों में गिरावट देखी जा रही है. सबसे ज्‍यादा गिरावट हिंदुस्‍तान यूनिलीवर और आईटी शेयरों में आई है. वहीं रिलायंस 3 फीसदी, एनटीपीसी 2.40 फीसदी और टाटा स्‍टील के शेयर में 2 फीसदी की उछाल है. यह तेजी मिडिल ईस्‍ट में छिड़ी जंग के बीच आया है. ऐसे में कई निवेशक ये कयास लगा रहे हैं कि युद्ध खत्‍म हो सकता है. आइए जानते हैं आज शेयर बाजार में इतनी तेजी क्‍यों आई है।  क्‍यों आई शेयर बाजार में उछाल?      एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार में काफी गिरावट आ चुकी है. पिछले तीन दिनों में निवेशकों की वैल्‍यू में 22 लाख करोड़ रुपये साफ हो चुके हैं. इस कारण निचले लेवल से खरीदरी बढ़ी है. निवेशकों ने अच्‍छे और लार्जकैप शेयरों में ज्‍यादा दांव लगाया है।     एशियाई बाजार में भी तेजी रही है. जापान के शेयर बाजार में 2.50 फीसदी की तेजी आई है. अमेरिकी मार्केट में भी मिला-जुला असर दिखाई दिया है. इसके अलावा साउथ कोरिया के मार्केट में 10 फीसदी से ज्‍यादा की उछाल आई है. इधर, डॉलर की तुलना में रुपया 51 पैसा रिकवर होकर 91.54 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच चुका है।      इंडिया VIX डर का सूचकांक या अस्थिरता सूचकांक लगभग 10 प्रतिशत गिरकर 19.04 के स्तर पर आ गया. वहीं तकनीकी नजरिए से देखें तो जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य बाजार रणनीतिकार आनंद जेम्स का कहना है कि जंग के बीच काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिले, लेकिन गैप भरने के तुरंत बाद समापन के समय हुई भारी गिरावट ने कुछ तेजी को कम कर दिया. हालांकि, 24450 के आसपास बंद होने से सकारात्मक रुझान बना हुआ है. हम 24840 का स्तर देख रहे हैं, लेकिन 24625 को एक बड़ी बाधा मानते हैं. दूसरी ओर, 24370 से नीचे फिसलने पर 24000-23550 के स्तर तक पहुंचने की संभावनाएं फिर से बन सकती हैं. अभी बाजार में गिरावट की संभावना कम है।  इन सेक्‍टर्स में मजबूती सिर्फ एफएमजीसी, आईटी और टेलिकॉम सेक्‍टर्स में गिरावट देखी जा रही है, बाकी के सेक्‍टर्स में शानदार तेजी है. ऑयल एंड गैस सेक्‍टर में 3.30 फीसदी की तेजी है, जबकि निफ्टी फार्मा में 1 फीसदी की तेजी है. इसके बाद ऑटो, बैंक और फाइनेंस सेक्‍टर में भी अच्‍छी तेजी है। 

भारतीय बाजार में लॉन्च हुई नई Mercedes CLA Electric, 792 किमी रेंज और 10 मार्च से बुकिंग शुरू

मुंबई  लग्जरी कार निर्माता कंपनी Mercedes-Benz ने आखिरकार भारत में अपनी बहुप्रतीक्षित Mercedes-Benz CLA इलेक्ट्रिक सेडान को पेश कर दिया है. इसकी बुकिंग 10 मार्च से शुरू होगी, जिसके बाद अप्रैल में इस कार को लॉन्च किया जाएगा. बता दें कि नई Mercedes-Benz CLA, कंपनी के एंट्री-लेवल मॉडल्स की लाइन-अप में ICE A-Class Limousine के साथ-साथ EQA और EQB EVs की जगह लेगी. ऐसा पहली बार है, जब यह नेमप्लेट फुली इलेक्ट्रिक पावरट्रेन के साथ आएगी, क्योंकि साल 2020 की शुरुआत में बंद होने से पहले, यह कम्बशन-पावर्ड थी. फिलहाल कंपनी ने इसकी कीमत का खुलासा नहीं किया है. 2026 Mercedes-Benz CLA Electric की रेंज और स्पेसिफिकेशन नई CLA EV के स्पेसिफिकेशन की बात करें तो इसमें 800-वोल्ट का इलेक्ट्रिकल आर्किटेक्चर इस्तेमाल किया गया है, और इसका बेस 85kWh 250+ वेरिएंट WLTP साइकिल पर 792km की रेंज देने का दावा करता है, जिसे भारतीय बाजार में उतारा जाएगा. इसकी मज़बूत रेंज काफ़ी हद तक CLA इलेक्ट्रिक की 93 प्रतिशत ड्राइवट्रेन एफिशिएंसी की वजह से है, जिसे इसके एयरोडायनामिक डिज़ाइन और ऑप्टिमाइज़्ड एनर्जी कंजम्प्शन से मदद मिलती है. खास बात यह है कि अब इसका ग्राउंड क्लीयरेंस ज़्यादा है, और इसके सस्पेंशन को सड़क की कंडीशन के हिसाब से खास तौर पर ट्यून किया गया है. एक और खास बात यह है कि इसमें दो-स्पीड गियरबॉक्स लगाया गया है, जैसा कि Porsche Taycan जैसे मॉडलों में देखने को मिलता है, जबकि ज़्यादातर EVs में आम तौर पर सिंगल-स्पीड रिडक्शन यूनिट होती है. कार में लगी पीछे वाली इलेक्ट्रिक मोटर 272hp की पावर देती है, जिससे CLA 250+ सिर्फ 6.7 सेकंड में 100kph की स्पीड पकड़ सकती है. वहीं चार्जिंग की बात करें तो, यह सिस्टम 240kW तक की हाई-स्पीड DC फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है, और कंपनी का दावा है कि सही हालात में सिर्फ़ 20 मिनट में इसकी बैटरी 400km की रेंज तक चार्ज हो सकती है. 2026 Mercedes CLA Electric का एक्सटीरियर डिजाइन नई CLA के डिजाइन की बात करें तो इसमें लाइटिंग एलिमेंट्स में Mercedes के तीन पॉइंट वाले स्टार लोगो पर खास ध्यान दिया गया है. स्टार मोटिफ हेडलाइट्स, टेल-लाइट्स और 142 छोटे बैकलिट स्टार्स वाली सील्ड-ऑफ फ्रंट ग्रिल में भी मौजूद है. बंपर के डिज़ाइन पर नजर डालें तो यह साफ़ और एयरो-फोकस्ड है, जो इसकी एफिशिएंसी-फर्स्ट अप्रोच के हिसाब से है, और इसमें छोटे एयर इनलेट भी दिए गए हैं, जो कार के कोनों पर एयरफ्लो को आसानी से गाइड करने में मदद करते हैं. साइड प्रोफ़ाइल की बात करें, तो इस सेडान में फ़्लश डोर हैंडल और 18-इंच के व्हील्स के साथ एक स्लीक, कूपे जैसा सिल्हूट दिया गया है. बड़ी पैनोरमिक ग्लास रूफ गर्म मौसम के लिए सही हीट-प्रोटेक्टिव कोटिंग के साथ आती है. अपने पिछले मॉडल से 30mm लंबी, 25mm चौड़ी और 25mm ऊंची होने के बावजूद, स्मूद सरफेसिंग और बेहतर एयरफ़्लो मैनेजमेंट EV को 0.21 का कम ड्रैग कोएफ़िशिएंट पाने में मदद करते हैं. रियर प्रोफाइल की बात करें तो इसमें पीछे की तरफ, टेल-लाइट्स के बीच एक पूरी चौड़ाई वाली लाइट बार लगाई गई है. इसके उपलब्ध एक्सटीरियर शेड्स के तौर पर क्लियर ब्लू, कॉस्मिक ब्लैक, पोलर व्हाइट, एल्पाइन ग्रे और पेटागोनिया रेड कलर शामिल हैं, जिनमें से आखिरी दो मैन्युफ़ैक्चर ऑप्शन हैं. 2026 Mercedes CLA Electric का इंटीरियर और फीचर्स चूंकि भारतीय बाजार में CLA 250+ वेरिएंट उतारा जाएगा, इसलिए इसमें कंपनी का ट्रिपल-डिस्प्ले सुपरस्क्रीन नहीं दिया जाएगा. इसके बजाय, केबिन में 10.25-इंच का ड्राइवर डिस्प्ले और मर्सिडीज़ के लेटेस्ट MB.OS ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाला 14-इंच का सेंट्रल टचस्क्रीन होगा. वहीं पैसेंजर डिस्प्ले की जगह, LED-बैकलिट स्टार लोगो वाला एक ग्लास पैनल लगाया जाएगा, जो एम्बिएंट लाइटिंग के साथ सिंक होगा. यह कार ओवर-द-एयर सॉफ्टवेयर अपडेट को भी सपोर्ट करेगी. इसके अलावा, इसमें वायरलेस चार्जिंग और छह 100W USB-C फास्ट-चार्जिंग पोर्ट स्टैंडर्ड तौर पर दिए गए हैं, और पीछे की सीटें 40:20:40 के अनुपात में बांटी गई हैं. 2026 Mercedes CLA Electric के सेफ्टी फीचर्स वैसे तो Mercedes CLA इलेक्ट्रिक का Bharat NCAP द्वारा क्रैश-टेस्ट अभी बाकी है, लेकिन इसे 2025 में Euro NCAP द्वारा पूरी 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग दी गई थी. फ्रंट और साइड एयरबैग के अलावा, इसमें एक सेंटर एयरबैग, साथ ही कैमरा- और रडार-बेस्ड लेवल 2 ADAS भी होगा.

PF बैलेंस चेक करना हुआ बेहद आसान: EPFO की नई सुविधा से ऑफिस जाने की झंझट खत्म

नई दिल्ली अगर आप किसी कंपनी में काम करते हैं और यह जानना चाहते हैं कि पिछले कुछ सालों में आपके ईपीएफ अकाउंट में कितनी राशि जमा हुई है, तो अब इसके लिए आपको किसी सीए, एजेंट या साइबर कैफे की मदद लेने की जरूरत नहीं है। कई लोग जानकारी के अभाव में दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं, जिससे धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ जाता है। अब कर्मचारी खुद अपने मोबाइल या कंप्यूटर से सुरक्षित तरीके से पीएफ बैलेंस देख सकते हैं। मिस्ड कॉल से तुरंत मिलेगी जानकारी सबसे आसान तरीका मिस्ड कॉल का है। अगर आपके पास इंटरनेट नहीं है, तब भी आप बैलेंस जान सकते हैं। अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 9966044425 पर मिस्ड कॉल दें। दो रिंग के बाद कॉल अपने आप कट जाएगी और कुछ ही सेकंड में आपके मोबाइल पर एसएमएस के जरिए बैलेंस की जानकारी आ जाएगी। इसके लिए जरूरी है कि आपका यूएएन एक्टिव हो और आधार या पैन से लिंक हो। SMS से भी मिल सकती है डिटेल आप एक मैसेज भेजकर भी अपनी पीएफ डिटेल प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए 7738299899 पर EPFOHO UAN ENG लिखकर भेजें। अगर आप हिंदी में जानकारी चाहते हैं तो EPFOHO UAN HIN लिखें। यह सेवा कई भाषाओं में उपलब्ध है। UMANG ऐप से पासबुक देखें और डाउनलोड करें स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए UMANG ऐप एक सुरक्षित और सरकारी माध्यम है। सबसे पहले UMANG ऐप डाउनलोड करें और रजिस्ट्रेशन पूरा करें। इसके बाद ऐप में EPFO विकल्प खोजें और View Passbook पर क्लिक करें। अपना यूएएन दर्ज करें और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को डालें। इसके बाद आप अपनी पूरी पासबुक देख सकते हैं और उसे पीडीएफ के रूप में डाउनलोड भी कर सकते हैं। EPFO पोर्टल से ऑनलाइन चेक करें बैलेंस अगर आप कंप्यूटर या लैपटॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आधिकारिक वेबसाइट passbook.epfindia.gov.in पर जाकर लॉगिन करें। अपना यूएएन और पासवर्ड दर्ज करें। इसके बाद Member ID चुनें और View Passbook पर क्लिक करें। आपकी पूरी पीएफ डिटेल स्क्रीन पर दिखाई देगी, जिसे आप डाउनलोड भी कर सकते हैं। इन बातों का रखें ध्यान पीएफ बैलेंस देखने के लिए आपका यूएएन एक्टिव होना जरूरी है। साथ ही मोबाइल नंबर ईपीएफओ रिकॉर्ड में दर्ज होना चाहिए और आपके खाते की केवाईसी, जैसे आधार, पैन और बैंक अकाउंट की जानकारी पूरी तरह अपडेट होनी चाहिए। अब कर्मचारी बिना किसी परेशानी और बिना किसी अतिरिक्त खर्च के घर बैठे अपने ईपीएफ खाते की पूरी जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।    

विदेशी कंपनी की नई इलेक्ट्रिक हैचबैक, धांसू फीचर्स के साथ पंच और टियागो ईवी को मिलेगी कड़ी टक्कर

मुंबई  विनफास्ट (Vinfast) इंडियन मार्केट में अपनी पकड़ को मजबूत कर रही है। कंपनी जल्द ही Limo Green इलेक्ट्रिक को मार्केट में लॉन्च करने वाली है। इसके साथ ही कंपनी इलेक्ट्रिक हैचबैक सेगमेंट में भी नया प्रोडक्ट लाने की सोच रही है। इस इलेक्ट्रिक हैचबैक का नाम VF5 है। विनफास्ट की इस इलेक्ट्रिक हैचबैक की टक्कर टाटा टियागो ईवी और पंच ईवी से होगी। कंपनी इस भारत में लॉन्च होने वाली यह ईवी कई देशों में पहले से सेल हो रही है। आइए डीटेल में जानते हैं इसके बारे में। VF5 की लंबाई 3967 मिमी, चौड़ाई 1723 मिमी, ऊंचाई 1579 मिमी और वीलबेस 2514 मिमी है। यह Punch.EV के मुकाबले जरा सी बड़ी है। हालांकि, इसकी चौड़ाई और ऊंचाई थोड़ी कम है। ग्लोबल मार्केट में ऑफर की जा रही VF5 का ग्राउंड क्लीयरेंस 169 मिमी है। भारतीय वर्जन में यह थोड़ा बढ़ सकता है। बूट स्पेस 260 लीटर है, जिसे 900 लीटर तक बढ़ाया जा सकता है। पीछे की सीटों में 60:40 स्प्लिट-फोल्डिंग फंक्शन दिया गया है। VF5 में ब्रैंड का सिग्नेचर फ्रंट फेसिया, फ्लेयर्ड वील आर्च, ब्लैक बॉडी क्लैडिंग, एलईडी लाइटिंग, 17 इंच के वील (वियतनामी वेरिएंट में) और कई सारे फीचर्स मिलते हैं। कुल मिलाकर इसका डिजाइन एसयूवी जैसा लगता है। ग्लोबल मार्केट में उपलब्ध VF5 पांच सीटों वाली कार है। Vinfast के बाकी मॉडल्स की तरह इसका इंटीरियर भी मॉडर्न और मिनिमलिस्टिक डिजाइन वाला है। इसमें सिल्वर एक्सेंट के साथ ऑल-ब्लैक थीम का यूज किया गया है। स्टीयरिंग वील तीन स्पोक वाला है और इसमें कंट्रोल बटन लगे हुए हैं। कार के ग्लोबल मॉडल में PM 2.5 एयर फिल्टर, 7 इंच का डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले, 4 स्पीकर वाला साउंड सिस्टम, लेदरेट सीट्स, कीलेस एंट्री और गो, ऑटो हेडलाइट्स, वॉइस कमांड सपोर्ट और वायरलेस ऐपल कारप्ले और ऐंड्रॉयड ऑटो के साथ 8 इंच का इंफोटेनमेंट यूनिट दिया गया है। हो सकता है कि इसके इंडियन वेरिएंट को कंपनी कुछ बदलावों के साथ लॉन्च करे। 326 किमी तक की रेंज VF5 में दी जा रही बैटरी का साइज अलग-अलग मार्केट्स में अलग-अलग होता है। कुछ रीजन में यह 29.6 kWh की बैटरी के साथ उपलब्ध है, जिसकी NEDC रेंज प्रति चार्ज 268 किमी है। जबकि, बाकी रीजन में इसमें 37.23 kWh की बड़ी बैटरी मिलती है, जिसकी रेंज 326 किमी (NEDC) है। छोटी बैटरी 33 मिनट से भी कम समय में 10 से 70 पर्सेंट तक चार्ज हो जाती है। छोटे बैटरी वाले वर्जन में 93hp/135Nm की इलेक्ट्रिक मोटर लगी है, जबकि दूसरे वर्जन का आउटपुट 134hp/135Nm है। 93hp (70kW) वाला वर्जन 0 से 100 kmph की स्पीड 14 सेकंड में पकड़ लेता है। 136hp वाला वर्जन यही काम 11 सेकंड से भी कम समय में कर पाता है।

ईरान संघर्ष से बाजार में हलचल, सप्लाई डर के बावजूद तेल कीमतों में आई नरमी

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के जरिए आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच पिछले सत्र में 10 प्रतिशत से अधिक की तेज उछाल के बाद मंगलवार को कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ कुछ स्थिरता देखी गई। अमेरिकी कच्चे तेल के वायदा भाव में 1.4 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई और यह 72.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं ब्रेंट क्रूड 1.87 प्रतिशत बढ़कर शुरुआती कारोबार में 79.2 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा। ईरान के जवाबी हमलों से तेल और गैस आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे तेल की कीमतों में तेजी आई और महंगाई को लेकर चिंता गहरा गई। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने सऊदी अरब के तेल और गैस ढांचे को निशाना बनाया और रणनीतिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को लेकर चेतावनी दी। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा घरेलू ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की घोषणा से सोमवार को आई घबराहट कुछ कम हुई। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बताया कि ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और ऊर्जा सचिव क्रिस राइट मंगलवार को बढ़ती ऊर्जा कीमतों से निपटने की योजना की घोषणा करेंगे। हालांकि, वैश्विक तेल आपूर्ति के प्रमुख मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को खतरा बना हुआ है, जिससे कीमतों को समर्थन मिल रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मार्ग अस्थायी रूप से बंद भी होता है तो भारत कुछ समय तक स्थिति संभाल सकता है। लेकिन अगर जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो भारत को आपूर्ति के स्रोतों में और विविधता लानी होगी। बताया जा रहा है कि भारत पहले से ही रूस, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहा है। निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि यदि पश्चिम एशिया में पूर्ण स्तर का संघर्ष होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति लंबे समय तक बाधित होती है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। एक अन्य हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जलडमरूमध्य में व्यवधान की स्थिति में ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकता है और व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार भी जा सकता है। अनुमान के मुताबिक, सीमित संघर्ष की स्थिति में तेल की कीमत में 5 से 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि ईरान के तेल ढांचे को सीधा नुकसान होने पर 10 से 12 डॉलर प्रति बैरल तक का इजाफा संभव है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का वार्षिक आयात बिल करीब 2 अरब डॉलर बढ़ जाता है, जिससे व्यापार संतुलन पर दबाव पड़ता है। दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जबकि भारत के 40 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल आयात इसी मार्ग से आते हैं।

HRA में संशोधन की तैयारी! सिटी कैटेगरी बदलने पर 8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीदें?

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। ये सिफारिशें लागू होने में करीब डेढ़ साल लग जाएंगे। इस वेतन आयोग से कर्मचारियों के संगठन की डिमांड शुरू हो गई है। कर्मचारियों के संगठन को बेसिक सैलरी से लेकर महंगाई भत्ते तक में बड़े बदलाव की उम्मीद है। माना जा रहा है कि यह वेतन आयोग केवल सैलरी बढ़ोतरी तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह ग्रामीण और शहरी कर्मचारियों के बीच के अंतर को भी प्रभावित कर सकता है। HRA (हाउस रेंट अलाउंस) का अंतर आठवां वेतन आयोग HRA (हाउस रेंट अलाउंस) में बड़े संशोधन कर सकता है। खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में किराया, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च अपेक्षाकृत अधिक होते हैं। ऐसे में यदि HRA की दरों में संशोधन होता है तो शहरी कर्मचारियों को बड़ा फायदा मिलेगा। इसके उलट, ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन-यापन की लागत कम होने के कारण वेतन वृद्धि का वास्तविक लाभ बचत के रूप में ज्यादा दिख सकता है। सिटी कैटेगरी पर भी पड़ेगा असर? आठवें वेतन आयोग में शहरों के कैटेगरी को लेकर भी अपडेट आ सकता है। बता दें कि 7वें वेतन आयोग में शहरों को X, Y और Z कैटेगरी में बांटा गया था। अगर 8वां वेतन आयोग इस वर्गीकरण में बदलाव करता है, तो छोटे शहरों और कस्बों के कर्मचारियों को अतिरिक्त फायदा मिल सकता है। ट्रैवल अलाउंस यानी TA में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है। क्या है डिमांड हाल ही में National Council (स्टाफ साइड) की अहम बैठक में 8वें वेतन आयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के केंद्र में वेतन संरचना, पदोन्नति नीति, वार्षिक वेतनवृद्धि और पेंशन सुधार जैसे विषय रहे। 8वें वेतन आयोग द्वारा वेबसाइट पर पूछे गए 18 सवालों के जवाब तय समयसीमा के भीतर भेजने पर सहमति बनी है। अगले 10 से 15 दिनों में सभी कर्मचारी संगठनों की मांगों को समेटते हुए एक साझा ज्ञापन तैयार किया जाएगा, जिसे आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना देसाई को सौंपा जाएगा। पेंशन पर क्या डिमांड? बैठक में फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। संगठनों की मांग है कि कर्मचारियों और लगभग 68 लाख पेंशनरों/पारिवारिक पेंशनरों के लिए समान फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए। प्रतिनिधियों ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की पुरानी मांग दोहराई। कर्मचारी संगठनों ने प्रत्येक कर्मचारी को सेवा अवधि में कम से कम पांच पदोन्नति सुनिश्चित करने की मांग रखी। स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत CGHS से वंचित शहरों में कर्मचारियों को वर्तमान में 1,000 रुपये मासिक भत्ता मिलता है। कर्मचारी संगठनों ने इसे बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह करने की मांग की है। साथ ही इंटरनेट जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए भत्ता शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा गया।  

महंगाई और युद्ध का डबल असर! सोना ₹2 लाख, चांदी ₹3 लाख तक जाने की अटकलें

नई दिल्ली सोने और चांदी की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है। यह लगातार 5वां कारोबारी दिन है जब गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव की वजह से निवेशक सुरक्षित निवेश तलाश रहे हैं। जिसकी वजह से इन धातुओं की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। आज फिर से बड़ा गोल्ड और सिल्वर का रेट COMEX गोल्ड का रेट 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ मंगलवार को 5300 डॉलर को पार कर गया है। वहीं, COMEX सिल्वर की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है। COMEX Silver का रेट आज 91.61 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर पहुंचने में सफल रहा है। बता दें, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज का पहला सेशन आज बंद है। एमसीएक्स का दूसरा सेशन आज शाम को 5 बजे से 11 बजे तक खुला रहेगा। सोमवार को एमसीएक्स में गोल्ड का रेट 2.53 प्रतिशत की उछाल के बाद 166199 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी का रेट गिरावट के साथ सोमवार को 280090 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बंद हुआ था। 2 लाख रुपये के पार जाएगा सोना? एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता की वजह से गोल्ड और सिल्वर की कीमतों तेजी का सिलसिला जारी रहेगा। जियोजीत इन्वेस्टमेंट के कमोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी कहते हैं, “घरेलू बाजार में सोने का भाव अधिकतम 2 लाख रुपये और इंटनरेशनल मार्केट में 6000 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर जा सकता है।” एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी का भाव 100 डॉलर के स्तर तक फिर से पहुंच सकता है। एक्सपर्ट रेनिशा का मानना है कि चांदी का रेट 95 डॉलर (293000) के स्तर पर रेसिस्टेंस महसूस कर रहा है। अगर इस स्तर को यह क्रॉस करने में सफल रहा तो चांदी का रेट 310000 रुपये से 325000 रुपये के स्तर तक पहुंच सकता है। 265000 रुपये का स्तर चांदी का सपोर्ट लेवल है। सिल्वर ईटीएफ में 139% की तेजी जनवरी का महीना सिल्वर ईटीएफ के प्रवाह के लिहाज से काफी ऐतिहासिक रहा है। इस दौरान सिल्वर ईटीएफ का नेट प्रवाह 9500 करोड़ रुपये रहा है। दिसंबर 2025 में यह 4000 करोड़ रुपये रहा था।

सोने और चांदी के दाम में उतार-चढ़ाव, भोपाल, दिल्ली और जयपुर में जानें ताजे रेट

इंदौर  मार्च के महीने में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मंगलवार सुबह चांदी के भाव ₹2,95, 000 प्रति किलो और सोने के दाम ₹1,70,170 प्रति 10 ग्राम दर्ज किए गए हैं। इससे पहले सोमवार शाम (2 मार्च 2026) को 24 कैरेट का भाव ₹1,70,660 और चांदी का दाम ₹3,15,000 (प्रति किग्रा) पर बंद हुआ था। आइए जानते हैं भारतीय सराफा बाजार (व्यापारियों द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार) द्वारा जारी 3 मार्च 2026 का अलग-अलग शहरों का 18, 22 और 24 कैरेट का लेटेस्ट रेट… प्रमुख शहरों का चांदी (Silver Rate Today) का भाव     10 ग्राम: ₹2,950     100 ग्राम: ₹29,500     ₹2,95,000 (प्रति किग्रा): दिल्ली, मुंबई, पुणे, नागपुर, जयपुर, लखनऊ, अहमदाबाद, कोलकाता, भोपाल और इंदौर ।     ₹3,15,000 (प्रति किग्रा): चेन्नई, मदुरै, हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और केरल। (दक्षिण भारत के राज्यों के भाव में मेकिंग चार्ज, डीलर प्रीमियम/स्थानीय शुल्क, परिवहन लागत और मांग के चलते कीमतों में बढ़त बनी है।) 24 कैरेट (24K) सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम में)     मेरठ, जयपुर, दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़: ₹1,70,170     ​इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद: ₹1,70,070     ​मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु: ₹1,70,020     ​चेन्नई, कोयंबटूर: ₹1,70,730 (दक्षिण भारत के कुछ शहरों में स्थानीय प्रीमियम/मेकिंग/डीलर मार्जिन के कारण अंतर) 22 कैरेट (22K) सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम में)     ​मेरठ, जयपुर, दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़: ₹1,56,000     ​इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा: ₹1,55,900     ​मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु: ₹1,55,850     चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै: ₹1,56,500 18 कैरेट (18K) सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम में)     मेरठ, जयपुर, दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़: ₹1,27,670     ​इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद: ₹1,27,570     ​मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु: ₹1,27,520     चेन्नई, कोयंबटूर: ₹1,34,000 18K, 20K, 22K से 24K की शुद्धता कैसे जांचे?     ​24 कैरेट (99.9% शुद्ध) पर 999 लिखा होता है। यह सबसे शुद्ध है, लेकिन इससे गहने नहीं बनते क्योंकि यह बहुत मुलायम होता है। ​     22 कैरेट (91.6% शुद्ध) पर 916 लिखा होता है। गहने बनाने के लिए यह सबसे लोकप्रिय है। इसमें 8.4% तांबा या चांदी या अन्य धातु मिलाई जाती है, ताकि गहने मजबूत रहें।     20 कैरेट सोने पर 833 (83.3% शुद्धता) लिखा होता है। इसमें 16.7% अन्य धातुएँ (जैसे तांबा, चांदी, जस्ता) मिलाई जाती है।     18 कैरेट (75.0% शुद्ध) पर 750 लिखा होता है। अक्सर हीरे या कीमती पत्थरों वाले गहनों में इसका उपयोग होता है।     ​ज्यादातर दुकानदार 18, 20 और 22 कैरेट का ही सोना बेचते हैं। खरीदारी करते समय यह सुनिश्चित करें कि आप जितने कैरेट का पैसा दे रहे हैं, गहने पर वही अंक (जैसे 916 या 750) दर्ज हो। सोना खरीदते हैं तो इन बातों का रखें ज्ञान भारत में सोने-चांदी के मानक भाव इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए जाते हैं। शनिवार, रविवार और केंद्र सरकार द्वारा घोषित छुट्टियों के दिन नए रेट जारी नहीं होते हैं। IBJA के रेट में GST और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होते, इसलिए अलग-अलग शहरों और ज्वेलरी शोरूम्स में अंतिम दाम अलग हो सकते हैं। सोना खरीदते समय BIS हॉलमार्क व HUID (Hallmark Unique Identification) कोड जरूर जांचें। हॉलमार्क के निशान में ​BIS लोगो (भारतीय मानक ब्यूरो का आधिकारिक प्रतीक), ​कैरेट/शुद्धता, HUID नंबर (एक यूनिक अल्फा-न्यूमेरिक कोड) और सेंटर मार्क ( लैब टेस्टिंग निशान) होता है। सोना-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव क्यों?     भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर में उतार-चढ़ाव, वैश्विक मांग।     केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ब्याज दरें, शेयर बाजार का प्रदर्शन।     भारतीय बाजार, स्थानीय कारक, भारत जैसे देशों में आयात शुल्क और अन्य कर, घरेलू दामों पर USD-INR, आयात शुल्क     जीएसटी/टीसीएस, लोकल मेकिंग चार्ज, देश की महंगाई दर और त्योहार और शादियों का सीजन कीमतों पर बड़ा असर डालते हैं।  

OpenAI की मुश्किलें बढ़ी, पेंटागन डील के बाद ChatGPT अकाउंट्स की हो रही बर्खास्तगी, Claude AI को मिल रही सफलता

नई दिल्ली दुनिया के सबसे लोकप्रिय एआई चैटबॉट ChatGPT के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. हाल ही में OpenAI द्वारा अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के साथ हाथ मिलाने की खबर ने आम यूजर्स को नाराज कर दिया है. लोग इस कदर गुस्से में हैं कि सोशल मीडिया पर डिलीट चैटजीपीटी (#DeleteChatGPT) ट्रेंड करने लगा है. आलम यह है कि लोग न सिर्फ अपने अकाउंट डिलीट कर रहे हैं, बल्कि ऐप स्टोर पर इसे वन-स्टार की रेटिंग भी दे रहे हैं |  क्या है पूरा विवाद? यह विवाद तब शुरू हुआ, जब OpenAI कंपनी ने अपने नियमों में बदलाव करते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के साथ हाथ मिला लिया. इससे पहले ChatGPT सैन्य और युद्ध संबंधी कार्यों के लिए इस्तेमाल न होने की बात कह रहा था. अब पेंटागन के साथ समझौते का मतलब है कि OpenAI की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अमेरिकी सेना अपनी रणनीतियों और साइबर सिक्योरिटी के लिए करेगी. यूजर्स का मानना है कि जो एआई ‘मानवता की भलाई’ के लिए बनाया गया था, अब उसका इस्तेमाल युद्ध और सैन्य उद्देश्यों के लिए होना इस सिद्धांत के खिलाफ है. इसी डर और नाराजगी के कारण पिछले कुछ दिनों में ChatGPT को डिलीट करने वालों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है |  क्या है पूरा मामला? Sam Altman ने अपनी पोस्ट में बताया कि OpenAI ने Department of Defense के साथ अपने एग्रीमेंट में कुछ अहम बदलाव किए हैं|   उन्होंने बताया की ऐसा इसलिए क्योंकि यह साफ हो सके कि कंपनी के AI सिस्टम का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों की निगरानी के लिए नहीं किया जाएगा|  उन्होंने साफ लिखा कि कानून के दायरे में रहते हुए AI का इस्तेमाल किया जाएगा और इसे जानबूझकर डोमेस्टिक सर्विलांस के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा|  Altman ने यह भी कहा कि सरकार की तरफ़ से अगर कोई असंवैधानिक आदेश आता है तो वे उसका पालन नहीं करेंगे|  उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया सबसे ऊपर है और सरकार को फैसले लेने चाहिए, न कि कोई निजी कंपनी दुनिया का भविष्य तय करे. लेकिन विवाद यहीं से शुरू हुआ|  गुस्सा क्यों बढ़ा? TechCrunch की रिपोर्ट बताती है कि जैसे ही यह खबर फैली कि OpenAI अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ काम कर रही है, बड़ी संख्या में लोगों ने ChatGPT ऐप हटाना शुरू कर दिया|   सिर्फ एक दिन में अनइंस्टॉल में 295 प्रतिशत की उछाल दर्ज किया गया . सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाया कि क्या AI अब युद्ध मशीन का हिस्सा बनने जा रहा है|  कुछ यूजर्स का कहना है कि AI कंपनियों को सेना से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि अगर AI इतना शक्तिशाली है तो उसे सरकार के साथ जिम्मेदारी से काम करना चाहिए, ताकि गलत हाथों में न जाए|  Anthropic का नाम क्यों आया बीच में? इस पूरे विवाद में एक और AI कंपनी Anthropic का जिक्र हो रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक Anthropic ने रक्षा विभाग के साथ कुछ शर्तों पर असहमति जताई थी और साफ रुख अपनाया था कि उनकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मास सर्विलांस या ऑटोनोमस हथियारों में नहीं होना चाहिए|  इसके बाद OpenAI ने अपनी डील आगे बढ़ाई. इससे यह बहस और तेज हो गई कि आखिर AI कंपनियां किस दिशा में जा रही हैं. क्या वे सरकार के साथ मिलकर सुरक्षा मजबूत कर रही हैं या एक खतरनाक रास्ते की ओर बढ़ रही हैं? Altman ने क्या माना? Sam Altman ने अपनी पोस्ट में यह भी स्वीकार किया कि डील को लेकर कम्युनिकेशन बेहतर हो सकता था. उन्होंने कहा कि यह एक जटिल मुद्दा है और इसे जल्दी में सार्वजनिक करना शायद सही तरीका नहीं था|  उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी अभी कई मामलों में पूरी तरह तैयार नहीं है और सुरक्षा को लेकर बहुत सावधानी जरूरी है|  उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में OpenAI सरकार के साथ मिलकर तकनीकी सुरक्षा उपायों और सेफगार्ड पर काम करेगा ताकि AI का गलत इस्तेमाल न हो|  यह सब अभी क्यों अहम है? दुनिया इस वक्त युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के दौर से गुजर रही है. साइबर हमले, ड्रोन टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिसिस और इंटेलिजेंस में AI का रोल तेजी से बढ़ रहा है|  ऐसे समय में अगर कोई बड़ी AI कंपनी सीधे रक्षा विभाग के साथ काम करती है तो यह सिर्फ टेक्नोलॉजी की खबर नहीं रहती, यह राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता का मुद्दा बन जाती है|  एक तरफ सरकारें कहती हैं कि AI से देश की सुरक्षा मजबूत होगी. दूसरी तरफ नागरिक अधिकार समूह चेतावनी दे रहे हैं कि निगरानी और डेटा कंट्रोल का दायरा खतरनाक रूप ले सकता है|  असली सवाल क्या है? इस पूरे विवाद का केंद्र एक ही है. AI पर कंट्रोल किसका होगा? सरकार का, निजी कंपनी का या जनता की लोकतांत्रिक निगरानी का? Sam Altman का कहना है कि लोकतंत्र को नियंत्रण में रहना चाहिए और AI को लोगों को ताकत देनी चाहिए, उनसे छीननी नहीं चाहिए. लेकिन जनता का एक हिस्सा आश्वस्त नहीं है. अनइनस्टॉल के आंकड़े यही दिखा रहे हैं|  आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा हो सकता है, क्योंकि AI अब सिर्फ चैटबॉट नहीं रहा. यह सुरक्षा, युद्ध, साइबर ऑपरेशन और रणनीतिक फैसलों का हिस्सा बन रहा है. ऐसे में हर डील, हर बयान और हर फैसला वैश्विक बहस का विषय बनेगा. और यही वजह है कि Pentagon और OpenAI की यह डील सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट नहीं, बल्कि AI के भविष्य की दिशा तय करने वाली कहानी बन चुकी है|  Sam Altman ने अपने ट्वीट में क्या-क्या साफ किया? Sam Altman ने अपने लंबे पोस्ट में सबसे पहले यह कहा कि OpenAI और अमेरिकी रक्षा विभाग के बीच जो एग्रीमेंट हुआ है, उसमें खास भाषा जोड़ी गई है ताकि कंपनी के सिद्धांत बिल्कुल साफ रहें|  उन्होंने लिखा कि AI सिस्टम का इस्तेमाल जानबूझकर अमेरिकी नागरिकों की निगरानी के लिए नहीं किया जाएगा. उन्होंने अमेरिकी संविधान, फोर्थ अमेंडमेंट और FISA जैसे कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि सब कुछ कानूनी दायरे में ही होगा|  प्राइवेसी एडवोकेट्स इसे दिखावा मान रहे हैं  Altman ने यह भी साफ किया कि Department of Defense ने यह समझा है कि यह लिमिटेशन … Read more

कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, ईरान संकट के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना

नई दिल्ली क्या पश्चिम एशिया में छिड़ा नया सैन्य टकराव भारतीयों की जेब पर भारी पड़ने वाला है? ईरान पर हुए ताज़ा हमले के बाद होरमुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव चरम पर है और वैश्विक तेल बाज़ार में घबराहट साफ दिख रही है. ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुका है और आशंका है कि हालात बिगड़े तो कीमतें 100 डॉलर के पार जा सकती हैं |  तेल के लिए 85–90 प्रतिशत तक आयात पर निर्भर भारत के लोगों के लिए यह बड़ा प्रश्न है कि क्या यहां पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ सकते हैं? आशंका तो यह भी है कि अगर हालात जल्दी ही ठीक नहीं हुए, तो ऑयल कंपनियां भाव में 12 से 14 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं |  एक अच्छी बात यह भी है कि भारत ने अपने तेल आयात के दूसरे विकल्पों को फिर से टटोलना शुरू कर दिया है, ताकि आम लोगों पर किसी तरह का संकट न आए. भारत में रणनीतिक पेट्रोलियम रिवर्ज का बड़ा भंडार यह आश्वासन देता है कि संभवत: देश में पेट्रोल और डीजल के दाम न बढ़ें |  केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि भारत का पेट्रोलियम रिजर्व 74 दिनों की मांग पूरी कर सकता है. इसमें ISPRL की SPR कैविटी, रिफाइनरी स्टॉक और फ्लोटिंग स्टोरेज शामिल हैं. ISPRL और PIB के डेटा के अनुसार, भारत के पास 5.33 MMT क्रूड ऑयल तीन भूमिगत भंडारों में है. विशाखापट्टनम, मंगलुरु और पदुर. SPR अकेले 9-10 दिन का स्टॉक है, लेकिन सभी तेल कंपनियों का कमर्शियल स्टॉक मिलाकर कुल 70-75 दिन का बफर बनता है. तो कुल मिलाकर, शायद ऐसा संकट नहीं आएगा कि भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम अनियंत्रित हो जाएं. फिर भी, पेट्रोल के दाम कैसे बढ़ते हैं, इस बारे में जान लेना आवश्यक है |  कंपनियों के हाथ में है चाबी भारत में पहले पेट्रोल-डीजल की कीमतें सरकार तय करती थी, लेकिन अब यह पूरी तरह से तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के हाथ में है. जून 2010 में सरकार ने पेट्रोल की कीमतों को और अक्टूबर 2014 में डीजल की कीमतों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त (De-regulate) कर दिया था. इसका मतलब कि सरकार का तेल की कीमतों पर कंट्रोल नहीं है. अब तेल की कीमत हर सुबह 6 बजे बदलती है. 16 जून 2017 से भारत में डायनेमिक फ्यूल प्राइसिंग (Dynamic Fuel Pricing) लागू है. इसके तहत अब कीमतें 15 दिन में नहीं, बल्कि पिछले 15 दिनों के अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के औसत दाम और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर हर रोज सुबह 6 बजे तय की जाती हैं |  1 डॉलर बढ़ने पर आपकी जेब से कितना असर?     अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बैरल में खरीदा जाता है, जबकि भारत में पेट्रोल-डीज़ल लीटर में बिकते हैं.     एक बैरल में लगभग 159 लीटर कच्चा तेल होता है.     जब कीमत 1 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती है, तो इसे 159 लीटर में बांटने पर प्रति लीटर करीब 0.006 डॉलर की बढ़ोतरी होती है.     भारत तेल डॉलर में खरीदता है. अगर डॉलर का भाव 91 रुपये है, तो प्रति लीटर यह बढ़ोतरी लगभग 57 पैसे बैठती है. यानी बाजार की आम धारणा के अनुसार, कच्चे तेल में 1 डॉलर की तेजी से खुदरा कीमतों में करीब 50 से 60 पैसे प्रति लीटर का इजाफा होता है. लेकिन संकट के समय अगर रुपया कमजोर होकर 92 या 93 रुपये तक पहुंच जाए, तो यह असर 65 पैसे या उससे अधिक भी हो सकता है. कच्चे तेल की तेजी और रुपये की गिरावट मिलकर ग्राहकों को दोहरा झटका देती है |  100 डॉलर पर कितना बढ़ेगा बोझ?     90 डॉलर प्रति बैरल: रिटेल कीमतों में करीब 5 से 6 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी संभव है.     100 डॉलर प्रति बैरल: यह बढ़ोतरी 12 से 14 रुपये प्रति लीटर तक जा सकती है.     110 डॉलर प्रति बैरल: पेट्रोल-डीज़ल 18 से 21 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो सकते हैं. ये अनुमान केवल मूल गणित पर आधारित हैं. वास्तविक कीमतों में टैक्स जुड़ने के बाद असर और बढ़ जाता है. पंप पर कीमत कैसे बनती है? जब आप पेट्रोल पंप पर भुगतान करते हैं, तो आप सिर्फ तेल का पैसा नहीं दे रहे होते. भारत में पेट्रोल-डीजल की कुल कीमत का लगभग 40% से 50% हिस्सा सिर्फ टैक्स होता है|      बेस प्राइस: सबसे पहले कच्चे तेल की कीमत में समुद्री ढुलाई और इंश्योरेंस जैसी लागत जुड़ती है (रिफाइनरी ट्रांसफर प्राइस).     केंद्र का टैक्स: इसके ऊपर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) जुड़ती है.     डीलर का मुनाफा: फिर पेट्रोल पंप मालिक का कमीशन शामिल होता है.     राज्य का टैक्स: अंत में राज्य सरकारें अपना टैक्स लगाती हैं. चूंकि यह प्रतिशत में होता है, इसलिए जैसे ही कच्चे तेल का बेस प्राइस बढ़ता है, टैक्स की राशि भी अपने आप बढ़ जाती है. यही कारण है कि हर राज्य में कीमतें अलग-अलग होती हैं. चूंकि पेट्रोल-डीजल फिलहाल GST के दायरे से बाहर हैं, इसलिए इन पर टैक्स का बोझ काफी ज्यादा रहता है. भारत का रिजर्व आएगा काम? स्थिति पूरी तरह निराशाजनक नहीं है. भारत की प्रमुख तेल विपणन कंपनियां कई बार शार्ट टर्म का झटका खुद सहकर अचानक कीमत बढ़ोतरी को टालने की कोशिश करती हैं. इसके अलावा केंद्र सरकार चाहे तो उत्पाद शुल्क में कटौती कर सकती है, जैसा 2022 में किया गया था. भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) भी हैं, जिनका उपयोग आपूर्ति संतुलित रखने के लिए किया जा सकता है | 

फरवरी 2026: कारों की बिक्री में वृद्धि जारी, Tata की 34% और Mahindra की 19% बढ़ी

 मुंबई  फरवरी 2026 के खत्म होते ही पैसेंजर व्हीकल्स निर्माता कंपनियों ने डीलरों को बेहतर बिक्री की जानकारी दी है, जिससे यह पता चलता है कि दुनिया भर में चल रही अनिश्चितताओं के बावजूद सभी सेगमेंट में डिमांड स्थिर है. कंपनियों की बिक्री ग्रोथ को काफी हद तक यूटिलिटी व्हीकल्स के माध्यम से सपोर्ट मिला, जो घरेलू मार्केट में छोटी कार सेगमेंट से बेहतर परफॉर्म कर रही हैं. ज़्यादातर बड़े मैन्युफैक्चरर्स ने साल-दर-साल बढ़त दर्ज की है, जिससे यह पता चलता है कि कस्टमर डिमांड मज़बूत बनी हुई है. इंडस्ट्री एग्जीक्यूटिव्स ने महीने के दौरान हेल्दी रिटेल मोमेंटम और कंट्रोल्ड डीलर इन्वेंट्री लेवल की ओर भी इशारा किया. Maruti Suzuki की बिक्री देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki से मिली जानकारी के अनुसार कंपनी ने फरवरी में घरेलू पैसेंजर व्हीकल्स की 1,61,000 यूनिट्स की होलसेल बिक्री की, जो एक साल पहले की 1,60,791 यूनिट से थोड़ी ज़्यादा है. जहां कॉम्पैक्ट कार सेगमेंट में बिक्री कम दर्ज हुई, वहीं यूटिलिटी गाड़ियों की बिक्री पिछले साल के 65,033 यूनिट से बढ़कर 72,756 यूनिट हो गई. इससे कंपनी का ओवरऑल परफॉर्मेंस बेहतर रहा. बिक्री के बारे में कंपनी ने कहा कि इस महीने कुल बिक्री 2.14 लाख यूनिट रही, जिसमें घरेलू होलसेल बिक्री 1.64 लाख यूनिट और रिटेल बिक्री साल-दर-साल 12 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि डीलर इन्वेंट्री 12 दिन की रही. कंपनी ने बताया कि मिडिल ईस्ट से इसके एक्सपोर्ट का लगभग 12.5 प्रतिशत हिस्सा आता है, और शिपमेंट लगभग 100 देशों में अलग-अलग तरह के होते हैं. Tata Motors की बिक्री इसके अलावा, Tata Motors Passenger Vehicles की बिक्री पर नजर डालें तो कंपनी ने फरवरी 2026 में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 34 प्रतिशत की ज्यादा बिक्री दर्ज की है, जोकि 62,329 यूनिट्स की रही, जो इसके पोर्टफोलियो में निरंतर मांग को दर्शाता है. Mahindra & Mahindra की बिक्री स्वदेशी एसयूवी निर्माता कंपनी Mahindra & Mahindra की बिक्री की बात करें तो कंपनी ने बताया कि घरेलू यूटिलिटी व्हीकल्स की बिक्री में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और कंपनी ने 60,018 यूनिट्स की बिक्री की, जो SUV सेगमेंट में लगातार बढ़ोतरी को दिखाता है. Hyundai, Toyota और Kia की बिक्री Hyundai Motor India ने घरेलू बिक्री में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज करते हुए 52,407 यूनिट्स की बिक्री की. वहीं, Toyota Kirloskar Motor की घरेलू बिक्री 16 प्रतिशत बढ़कर 30,737 यूनिट्स हो गई. इसके अलावा, Kia India की बात करें तो कंपनी ने फरवरी 2026 में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हासिल करते हुए, 27,610 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की है, जबकि बीते साल इस समयावधि में यह बिक्री 25,026 यूनिट्स की थी.

ऑनलाइन शॉपिंग अब होगी सस्ती! Amazon ने फीस घटाई, लाखों लोगों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली Amazon India ने एक बड़ा ऐलान किया है, जिसके बाद कस्टमर और सेलर को दोनों को फायदा होगा. नए फैसले के बाद 300 रुपये से कम कीमत वाले प्रोडक्ट पर 20 परसेंट शिंपिंग चार्ज में कटौती होने जा रही है. ऐमेजॉन के इस फैसले के फायदा सेलर और कस्टमर दोनों को होगा | 16 मार्च से 300-1000 रुपये की कीमत वाले प्रोडक्ट के लिए अपनी जीरो रेफरल फीस स्ट्रक्चर को एक्सपेंड किया गया है. इसमें 1,800 कैटेगरी के प्रोडक्ट्स शामिल हैं | रेफरल फीस क्या होती है? रेफरल फीस, असल में वह कमीशन होता है जिसको अमेरिका बेस्ड कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर सेल होने वाले हर एक आइटम के लिए वसूली करती है. यह प्रोडक्ट की कीमत के 2% से 16.5%  होती है| बीते साल अप्रैल ऐमेजॉन इंडिया ने 300 रुपये से कम कीमत वाले प्रोडक्ट पर लगने वाले सेलर रेफरल फीस को खत्म किया जा चुका है. अब कंपनी इसका दायरा बढ़ाने जा रही है | फीस रिवाइज में 300 रुपये से कम कीमत वाले प्रोडक्ट्स पर ईजी शिप फीस में 20 परसेंट की कटौती शामिल की गई है. ईजी शिप के तहत, सेलर्स अपने परिसर में प्रोडक्ट्स स्टोर करते हैं. वहीं, ऐमेजॉन पिकअप और डिलीवरी को संभालता है. ये सर्विस नए सेलर को काफी पसंद भी आ रही है | बीते साल फ्लिपकार्ट ने भी लिया था फैसला ऐमेजॉन से पहले फ्लिपकार्ट ने पिछले नवंबर 1,000 से कम कीमत वाले प्रोडक्ट्स के लिए जीरो कमीशन मॉडल शुरू किया था. इसके बाद फ्लिपकार्ट ने इसे अपने हाइपर-वैल्यू प्लेटफॉर्म शॉप्सी पर सभी प्रोडक्ट तक एक्सपेंड कर दिया है, फिर चाहें उनकी कीमत कुछ भी हो| मीशो ने 2022 में सबसे पहले जीरो-कमीशन मॉडल लॉन्च किया था वहीं, वैल्यू कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो ने 2022 में सबसे पहले जीरो-कमीशन मॉडल लॉन्च किया था. मीशू के इस मॉडल का उद्देश्य छोटे, मीडिया और बड़े बिजनेस को जोड़ना था. मीशो टियर-2 शहरों और उससे आगे के ग्राहकों पर फोकस करता है|

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