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अब और महंगी हुई सिगरेट, कंपनियों के शेयरों में भी आई तेजी से गिरावट

 नई दिल्‍ली सिगरेट बनाने वाली कंपनियों ने सिगरेट के दाम में इजाफा करने का ऐलान कर दिया है. ITC लिमिटेड ने कुछ कैटेगरी में सिगरेट की कीमतों में तेज बढोतरी की है. कंपनी ने एक्‍सपाइज बढ़ोतरी के असर को कम करने के लिए सिगरेट के दाम मे इजाफा किया है. सिगरेट की कीमतों में 2 रुपये से लेकर 10 रुपये तकी की बढ़ोतरी हुई है. अलग-अलग कैटेगरी में सिगरेट के दाम में इजाफा हुआ है. Godfrey Phillips India ने Marlboro Compact की कीमत 9.5 रुपये प्रति स्टिक से बढ़ाकर 11.5 रुपये प्रति स्टिक कर दी है. इस बीच, सिगरेट बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में तेजी रही.  अब कितनी महंगी हुईं सिगरेट आईटीसी के 50 फीसदी से ज्‍यादा हिस्‍से वाले सिगरेट में इजाफा देखने को मिल सकता है. इसके साथ ही कंपनी 74mm कैटेगरी में कीमत बढ़ोतरी के साथ ही नए प्रोडक्‍ट्स पेश करने की भी योजना बना रही है. Dual Sensory Filter Technology के साथ 64mm से बड़ी सिगरेट के दाम प्रति स्टिक 1 से 2 रुपये का इजाफा हुआ है.  किंग साइज फिल्‍टर  टिप वाले 74mm कैटेगरी में 7 रुपये तक का इजाफा हुआ है. स्लिम्‍स  64mm कैटेगरी की सिगरेट में 6.21 रुपये एक्साइज बढ़ोतरी के मुकाबले 5 से 10 रुपये कीमतों में इजाफा हुआ है.      1 फरवरी 2026 से लागू हो चुकी है बढ़ोतरी गौरतलब है कि सरकार ने  1 फरवरी 2026 से सिगरेट समेत तंबाकू उत्‍पादों पर एक्‍स्‍ट्रा डयूटी लगा दिया है, जिसके बाद से कंपनियों पर राजस्‍व का दबाव बढ़ा रहा था, लेकिन अब इन कंपनियों ने कीमतों में इजाफा कर दिया है. कंपनियों के पोर्टफोलियो में शामिल सिगरेट के दामों में 2 रुपये लेकर 10 रुपये तक का इजाफा किया गया है .                 शेयरों में आई तेजी  आईटीसी लिमिटेड के शेयरों में मंगलवार को 3 प्रतिशत से ज्‍यादा की तेजी देखी, क्योंकि कंपनी द्वारा सिगरेट की कीमतों में बढ़ोतरी की खबरें आईं. एनएसई पर आईटीसी के शेयर ₹318.45 पर बढ़त के साथ खुले और दिन के दौरान ₹328.05 के उच्चतम स्तर तक पहुंचे, जो 3.18 फीसदी की तेजी थी. हालांकि कारोबार बंद होने तक यह शेयर 2.34% चढ़कर 325.40 रुपये था. इसी के साथ ही गॉडफ्रे फिलिप्‍स का शेयर 2.50 फीसदी चढ़कर 2,065 रुपये पर बंद हुए. 

CEO भाविश अग्रवाल पर अरेस्ट वारंट, OLA की बाइक रिपेयरिंग में हुई गुम

 नई दिल्ली देश की प्रमुख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता कंपनी Ola Electric की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं. अब तक अपने इलेक्ट्रिक स्कूटरों में लग रही आग से जूझ रहे कंपनी के सीईओ और फाउंडर भाविश अग्रवाल के खिलाफ एक और मामला सामने आया है. गोवा की उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग यानी कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन ने ओला इलेक्ट्रिक से जुड़े एक मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए गिरफ्तारी (Arrest Warrant) जारी किया है. यह मामला प्रीतिश चंद्रकांत घाड़ी की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी खरीदी गई इलेक्ट्रिक बाइक मरम्मत के लिए ओला को दी गई थी, लेकिन अब उसका कोई अता पता नहीं है. हैरानी की बात यह है कि बाइक की पूरी कीमत पहले ही ओला को चुका दी गई थी, इसके बावजूद यूजर को न तो बाइक मिली और न ही कोई संतोषजनक जवाब. क्या है पूरा मामला इस मामले में शिकायतकर्ता प्रीतिश चंद्रकांत घाड़ी ने बताया कि उन्होंने ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड से इलेक्ट्रिक बाइक खरीदी थी. कुछ समय बाद बाइक में तकनीकी दिक्कत सामने आने लगी. जिसके बाद उन्होंने बाइक की रिपेयरिंग के लिए उसे ओला को सौंप दिया गया. लंबा समय बीत जाने के बाद भी बाइक न तो ठीक होकर लौटी और न ही कंपनी यह बता पाई कि बाइक फिलहाल कहां है. गोवा की कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन ने 4 फरवरी 2026 को जारी अपने आदेश में कहा कि ओला ने उपभोक्ता से पूरी कीमत वसूलने के बाद बेहद लापरवाह रवैया अपनाया है. आयोग ने माना कि कंपनी का उपभोक्ता के प्रति व्यवहार गैर-जिम्मेदाराना और उदासीन है. इसी वजह से आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक के CEO और फाउंडर भाविश अग्रवाल (Bhavish Aggarwal) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया, ताकि वह बाइक के बारे में स्पष्ट जानकारी दे सकें और यह भी बताएं कि इतनी देर से बाइक की मरम्मत और डिलीवरी क्यों नहीं की गई. पेश न होने पर अरेस्ट वारंट आयोग के आदेश के बावजूद जब भाविश अग्रवाल पेश नहीं हुए, तो आयोग ने सख्त कदम उठाते हुए बेंगलुरु पुलिस को उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया है. आदेश के अनुसार, 1,47,499 रुपये की राशि का जमानती वारंट एक समान जमानत के साथ जारी किया गया है. यह वारंट कोरमंगला, बेंगलुरु स्थित पते पर संबंधित पुलिस थाने के जरिए तामील कराने को कहा गया है. आयोग ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 23 फरवरी 2026 को सुबह 10.30 बजे तय किया है. इस दिन CEO और फाउंडर भाविष अग्रवाल को खुद हाजिर होना होगा. जिसके बाद आयोग उनका स्पष्टीकरण और मौखिक अंतिम दलीलें सुनेगा. यह मामला अब न सिर्फ उपभोक्ता अधिकारों बल्कि बड़ी कंपनियों की जवाबदेही को लेकर भी अहम माना जा रहा है.

इलेक्ट्रिक सेगमेंट में मारुति का धमाका, e Vitara की कीमत और फीचर्स आए सामने

मुंबई  भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के लिए आज बड़ा दिन है. कंपनी ने आज अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार e-Vitara की कीमत का औपचारिक ऐलान कर दिया है. यह पल कंपनी के लिए बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इसी के साथ मारुति सुजुकी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेगमेंट में आधिकारिक तौर पर एंट्री कर ली है. कीमत है इतनी Maruti e-Vitara को पहली बार भारत मोबिलिटी ऑटो एक्सपो 2025 में दिखाया गया था और तब से इसकी कीमत को लेकर बाजार में काफी इंतजार था, जो आज खत्म हो गया है. नई मारुति ई विटारा को बैटरी एज सर्विस (BaaS) रेंटल सब्सक्रिप्शन प्लान के तहत पेश किया गया है. इसके लिए बिना बैटरी के कार की शुरुआती कीमत 10.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तय की गई है. बैटरी के लिए ग्राहकों को अलग से 3.99 रुपये प्रतिकिमी किराया देना होगा.  कैसी है Maruti e Vitara मारुति सुजुकी ने अपनी पहली ईवी को बेहतर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. कंपनी ने e-Vitara को बेहद ही क्लीन और मॉडर्न डिज़ाइन दिया है. इसकी लंबाई 4,275 मिमी, चौड़ाई 1,800 मिमी और ऊंचाई 1,640 मिमी है, जबकि व्हीलबेस 2,700 मिमी का है. यह साइज इसे कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट में न केवल बेहतर प्रजेंस देता बल्कि अंदर बैठने वालों को अच्छा खासा स्पेस देता है. प्रीमियम केबिन और नई टेक्नोलॉजी केबिन के मामले में e-Vitara अब तक की सबसे प्रीमियम मारुति कार मानी जा रही है. इसमें 10.25-इंच का फुली डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और 10.1-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है, जो फ्लोटिंग सेंटर कंसोल पर लगाया गया है. सॉफ्ट-टच मटीरियल, ड्यूल-टोन इंटीरियर और मल्टी-कलर एंबिएंट लाइटिंग के कारण अंदर का माहौल काफी शानदार लगता है. इस SUV में वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, 10-वे पावर एडजस्टेबल ड्राइवर सीट और 40:20:40 स्प्लिट रियर सीट दी गई है, जिसे स्लाइड, रिक्लाइन और फोल्ड किया जा सकता है. फिक्स्ड ग्लास सनरूफ और हार्मन ट्यून साउंड सिस्टम इसकी प्रीमियम पहचान को और मजबूत करते हैं. बैटरी पैक और ड्राइविंग रेंज Maruti e-Vitara में हल्का 3-इन-1 इलेक्ट्रिक ड्राइव सिस्टम दिया गया है, जिसमें मोटर, इन्वर्टर और ट्रांसमिशन एक ही यूनिट में शामिल हैं. इससे वजन कम होता है और परफॉर्मेंस के साथ-साथ रेंज भी बेहतर मिलती है. Maruti e-Vitara दो बैटरी ऑप्शन में आ रही है. इसमें 49kWh और 61kWh बैटरी पैक का विकल्प मिलेगा. दोनों ही वेरिएंट फ्रंट व्हील ड्राइव सेटअप के साथ आएंगे. बड़ा बैटरी पैक सिंगल चार्ज में 543 किलोमीटर (ARAI प्रमाणित रेंज) तक की ड्राइविंग रेंज देगा.  e-Vitara को तीन ट्रिम में पेश किया गया है. बेस वेरिएंट Delta में 49kWh बैटरी मिलेगी. वहीं Zeta और Alpha ट्रिम में 61kWh की बड़ी बैटरी दी जाएगी. ग्लोबल मार्केट में इसका ऑल-व्हील-ड्राइव वर्जन भी उपलब्ध है, जिसमें पीछे एक एकस्ट्रा मोटर लगाई गई है. भारत में AWD वर्जन आएगा या नहीं, इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है.  सेफ्टी के मामले में भी e-Vitara को खास तौर पर तैयार किया गया है. इसके बॉडी स्ट्रक्चर में 50 प्रतिशत से ज्यादा हाई-टेंसाइल स्टील का इस्तेमाल किया गया है और बैटरी की सेफ्टी के लिए अलग से प्रोटेक्शन सिस्टम दिया गया है. इसमें 7 एयरबैग, ऑल-डिस्क ब्रेक, इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और e-Call इमरजेंसी फीचर स्टैंडर्ड मिलते हैं. इसके अलावा लेवल-2 ADAS फीचर्स जैसे अडैप्टिव क्रूज कंट्रोल, लेन-कीप असिस्ट और ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग भी दी गई है. कुल मिलाकर e-Vitara को कंपनी की अब तक की सबसे सुरक्षित और तकनीक से भरपूर कारों में गिना जा रहा है.

यूपीआई के बढ़ते लेनदेन के बीच भी नकदी का रफ्तार जारी, सर्कुलेशन 40 लाख करोड़ रुपए: रिपोर्ट

मुंबई   देश में करेंसी सर्कुलेशन जनवरी 2026 के अंत तक बढ़कर रिकॉर्ड 40 लाख करोड़ रुपए के करीब पहुंच गया है। इसमें सालाना आधार पर 11.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 5.3 प्रतिशत थी। यह जानकारी सोमवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई।  एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में बताया गया कि जनता के पास करेंसी (सीडब्ल्यूपी) की हिस्सेदारी कुल करेंसी सर्कुलेशन में 97.6 प्रतिशत (करीब 39 लाख करोड़ रुपए ) हो गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि देश में यूपीआई के कारण डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ा है और इससे कैश-टू-जीडीपी रेश्यो में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक,”देश में एक महीने में होने वाले यूपीआई लेनदेन की वैल्यू करीब 28 लाख करोड़ रुपए है, जो कि देश के कुल करेंसी स्टॉक का करीब 70 प्रतिशत है, जो कि दिखाता है कि देश में बड़ी संख्या में लोग डिजिटल पेमेंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।” वहीं, देश का कैश-टू-जीडीपी रेश्यो वित्त वर्ष 26 में कम होकर 11 प्रतिशत हो गया है, जो कि वित्त वर्ष 21 में 14.4 प्रतिशत पर था। रिपोर्ट में कहा गया है, “करेंसी और जीडीपी में परिवर्तन की दिशा भले ही एक जैसी हो, लेकिन जीडीपी की वृद्धि को अब नकदी के बजाय यूपीआई के माध्यम से अधिक हो रही है।” सीआरआर में कटौती के कारण चालू वित्त वर्ष में ‘आरबीआई के पास बैंकर्स डिपॉजिट’ में 1.86 लाख करोड़ रुपए की कमी आई, जिसके परिणामस्वरूप रिजर्व मनी की वृद्धि घटकर 5.8 प्रतिशत रह गई। एसबीआई रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2025 के बीच बैंकों में जमा और ऋण लगभग तीन गुना बढ़ गए, जो बैंकिंग प्रणाली के सुदृढ़ीकरण और ऋण मध्यस्थता में सुधार का संकेत है। वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2025 के दौरान जमा राशि 85.3 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपए हो गई और ऋण 67.4 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपए हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों की परिसंपत्ति वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025 तक जीडीपी के 77 प्रतिशत से बढ़कर 94 प्रतिशत हो गई, जो वित्तीय सुदृढ़ीकरण में सुधार को दर्शाती है।

क्या खत्म हुआ चांदी का जलवा? ऑल टाइम हाई से ₹1.80 लाख नीचे, सोना भी कमजोर

नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों क्रैश (Gold-Silver Price Crash) जारी है और हर रोज ये कीमती धातुएं सस्ती हो रही हैं. सोमवार को बड़ी गिरावट के बाद मंगलवार को चांदी का भाव फिसला है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर खुलने के साथ ही Silver Price 4600 रुपये से ज्यादा कम हो गया. वहीं दूसरी कीमती धातु सोना भी फिसल गया. अपने हाई लेवल से अब चांदी 1.80 लाख रुपये से ज्यादा सस्ती (Silver Crash From High) मिल रही है, जबकि सोना 38,000 रुपये से अधिक सस्ता (Gold Cheaper) हो गया है.  क्या फूट गया है चांदी का बुलबुला?  सबसे पहले बात करते हैं चांदी की कीमत में लगातार जारी गिरावट के बारे में, तो महज कुछ ही दिनों में चांदी का बुलबुला फूटा (Silver Bubble Burst) हुआ नजर आ रहा है. इसके इस हिसाब से भी समझ सकते हैं कि बीते 29 जनवरी को सिल्वर प्राइस पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार निकला था और 4,20,048 रुपये के लाइफ टाइम हाई लेवल पर पहुंच गया था. इस हाई लेवल से अब तक चांदी 1,80,157 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो चुकी है.   मंगलवार को खुलते ही धड़ाम Silver सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भी चांदी का भाव एमसीएक्स पर खुलने के साथ ही धड़ाम नजर आया. सोमवार को 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी 2,39,891 रुपये प्रति किलो पर क्लोज हुआ थी और इसके मुकाबले ये ओपन होते ही गिरकर 2,35,206 रुपये पर आ गई. इस हिसाब से देखें, तो झटके में 1 Kg Silver Price 4,685 रुपये तक कम हो गया है.  Gold का भी सिल्वर जैसा हाल  चांदी की कीमत के बाद बात करें, सोने के भाव के बारे में, तो ये कीमती धातु भी लगातार गिरावट देख रही है. हालांकि, बीच-बीच में इसकी कीमत में उछाल भी देखने को मिला है. बहरहाल, मंगलवार को 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाले गोल्ड का वायदा भाव अपने पिछले बंद 1,54,760 रुपये से गिरकर 1,53,550 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर आ गया. यानी MCX Gold Rate 1,210 रुपये कम हो गया.  अपने हाई से कितना सस्ता सोना?  Gold Rate ने भी बीते 29 जनवरी को ही चांदी के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए अपना लाइफ टाइम हाई लेवल छुआ था. रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1,93,096 रुपये के हाई पर पहुंच गया था. इस स्तर पर पहुंचने के बाद क्रैश का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, जिसका असर अब तक देखने को मिल रहा है. सोना अपने हाई से अब तक 38,336 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है. 

सोना जल्द 1 लाख रुपये से नीचे? रूस की चाल ने निवेशकों में मचाई चिंता

इंदौर   भारत में सोने की कीमतों ने वर्ष 2025 में शानदार रिटर्न दिया था. 2026 की शुरुआत में भी तेजी का सिलसिला जारी रहा और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम के शिखर तक पहुंच गया. हालांकि, हाल के सत्रों में इसमें तेज करेक्शन भी देखने को मिला है. पिछले सप्ताह के अंत में MCX पर सोना लगभग ₹1,56,200 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जो अपने उच्चतम स्तर से करीब 13 प्रतिशत नीचे है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही रुझान दिखा. COMEX पर सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से लगभग 10 प्रतिशत नीचे कारोबार करता नजर आया. अब बाजार में यह चर्चा तेज है कि अगर भू राजनीतिक समीकरण बदलते हैं तो सोना 3,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकता है. दरअसल, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोने की तेजी को अब नई चुनौतियां मिल रही हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस अमेरिका के साथ डॉलर आधारित व्यापार समझौते की संभावनाएं तलाश रहा है. यदि ऐसा होता है तो यह BRICS देशों की ‘डीडॉलराइजेशन’ रणनीति के लिए बड़ा झटका हो सकता है. रूस-अमेरिका गठजोड़  अब तक BRICS देशों द्वारा व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम करने और सोने का भंडार बढ़ाने की कोशिशें की जा रही थीं. इसी कारण वैश्विक स्तर पर सोने की मांग मजबूत बनी हुई थी. लेकिन रूस के संभावित रुख में बदलाव से यह धारणा कमजोर पड़ सकती है, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर दिख सकता है. अमेरिकी आर्थिक संकेतक भी बने कारण दरअसल, सोने की कीमतें केवल भू राजनीतिक घटनाओं पर ही निर्भर नहीं करतीं, बल्कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. हाल में अमेरिका में महंगाई के आंकड़े मजबूत आए हैं, जिससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हुई हैं. ऐसे में अगर फेड दरों में कटौती टालता है, तो डॉलर मजबूत रह सकता है. मजबूत डॉलर आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक माना जाता है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना महंगा हो जाता है और मांग घटती है. निवेशकों के लिए क्या है संकेत? मौजूदा परिस्थितियों में कीमती धातुओं के बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में लंबी अवधि के निवेशक घबराएं नहीं, लेकिन अल्पकालिक निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए. यदि रूस-अमेरिका व्यापार में डॉलर की वापसी की खबरें पुख्ता होती हैं और फेड दरों में कटौती नहीं करता, तो सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के नीचे भी आ सकता है. हालांकि अंतिम दिशा वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी. सोना परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है. लेकिन जब वैश्विक जोखिम कम होते हैं और डॉलर मजबूत होता है, तो इसमें मुनाफावसूली बढ़ जाती है. फिलहाल, बाजार इसी दोराहे पर खड़ा है. आने वाले हफ्तों में रूस की आधिकारिक प्रतिक्रिया, अमेरिकी आर्थिक डेटा और वैश्विक बाजार का रुख तय करेगा कि सोना फिर से चमकेगा या कीमतों में और गिरावट देखने को मिलेगी.

सोने-चांदी की बाजार गिरावट जारी, चांदी हुई ₹1.84 लाख सस्ती, आज 8,000 रुपये फिसली

 नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों के क्रैश (Gold-Silver Price Crash) होने का सिलसिला जारी है. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर ओपनिंग के साथ ही दोनों कीमती धातुएं धड़ाम नजर आईं. बीते सप्ताह मामूली उछाल के बाद कारोबार की शुरुआत में ही 1 Kg Silver Price 8,000 रुपये से ज्यादा फिसल गया और अपने हाई से अब तक चांदी के भाव में गिरावट को देखें, तो ये 1.84 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा सस्ती हो चुकी है. वहीं Gold Rate भी चांदी की तरह ही गिर गया है. एक झटके में सोना 1700 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता हो गया.  अब कितना रह गया 1Kg चांदी का भाव?  सोमवार को एमसीएक्स पर कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही 5 मार्च की एक्सपायरी वाली वायदा चांदी पिछले बंद के मुकाबले अचानक 8,857 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई. बता दें कि बीते शुक्रवार को MCX Silver Price 2,44,360 रुपये पर क्लोज हुआ था और इसकी तुलना में ये गिरकर 2,35,503 रुपये के लेवल पर आ गया.  अपने हाई से कितनी सस्ती मिल रही Silver? बात अगर चांदी के हाई लेवल से करें, तो अब चांदी काफी सस्ती हो चुकी है. बता दें कि बीते 29 जनवरी को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी की कीमत रॉकेट सी रफ्तार से भागते हुए पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आंकड़े के पार निकली थी और कारोबार के अंत में 4,20,048 रुपये का लाइफ टाइम हाई रिकॉर्ड बना दिया था. इस स्तर पर पहुंचने के बाद Silver Price Crash होने का सिलसिला शुरू हुआ और एक-दो दिनों को छोड़कर ये तेजी से फिसली है. चांदी फिलहाल अपने हाई लेवल से 1,84,545 रुपये प्रति किलोग्राम तक टूट चुकी है. ये तगड़ी गिरावट चांदी के हाई छूने के बाद महज 17 दिन में देखने को मिली है.  Gold Rate भी अचानक फिसला  चांदी के साथ-साथ गोल्ड रेट भी सोमवार को खुलने के साथ ही बुरी तरह फिसला है. MCX पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाले सोने का भाव बीते शुक्रवार को 1,55,895 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था और इसकी तुलना में ये खुलते ही गिरते हुए 1,54,191 रुपये पर आ गया. इस हिसाब से देखें, तो 10 Gram 24 Karat Gold 1,704 रुपये सस्ता हो गया है.  सोना अपने हाई लेवल से इतना सस्ता  अब सोने के हाई लेवल से अब तक आई गिरावट की बात करें, तो चांदी की तरह ही Gold Rate भी बीते 29 जनवरी को ही अपने लाइफ टाइम हाई लेवल पर पहुंचा था. सोने का वायदा भाव तेज रफ्तार के भागते हुए 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था और यहां से इसमें तेज गिरावट देखने को मिली है. सोमवार की ओपनिंग गिरावट को देखें, तो अब तक Gold Price 38,905 रुपये प्रति 10 ग्राम कम हुआ है. 

IPO के लिए तैयार रहें: इस हफ्ते तीन कंपनियां करेंगी लॉन्च, निवेश की पूरी जानकारी यहां देखें

  नई दिल्ली अगर आप आईपीओ में निवेश (IPO Investment) का प्लान बना रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए खास है. दरअसल, इस हफ्ते तीन कंपनियां अपने आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए ओपन करने जा रही है. इनमें एक मैनबोर्ड, जबकि दो एसएमई आईपीओ शामिल हैं, ये दोनों ही SME IPO  मिलकर प्राइमरी मार्केट से 137 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाने के लिए उतरेंगे. आइए जानते हैं इनके प्राइस बैंड, इश्यू साइज से लेकर लॉट तक के बारे में फुल डिटेल. हफ्ते के पहले दिन ये IPO  सप्ताह के पहले कारोबारी दिन आज 16 फरवरी को ओपन होने वाला आईपीओ एसएमई कैटेगरी का है. फुल-सर्विस गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन कंपनी फ्रैक्टल इंडस्ट्रीज अपना इश्यू (Fractal Industries IPO) ओपन करने वाली है. इसका साइज 49 करोड़ रुपये है और निवेशक इसमें 18 फरवरी तक बोलियां लगा सकेंगे. आईपीओ के तहत कंपनी 22,68,600 शेयर जारी करेगी, जो 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले होंगे.  Myntra, Ajio और Flipkart जैसे प्लेटफॉर्मों को सर्विस देने वाली गारमेंट्स डिजाइन और मैन्युफैक्चर कंपनी ने अपने आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 205-216 रुपये प्रति शेयर तय किया है, जबकि लॉट साइज 600 शेयरों का है और रिटेल इन्वेस्टर्स को कम से कम दो लॉट के लिए बोली लगानी होगी. ऐसे में अपर प्राइस बैंड के हिसाब से किसी भी निवेशक को इस SME IPO में 1200 शेयरों के लिए 2,59,200 रुपये लगाने होंगे. इसकी लिस्टिंग 23 फरवरी को BSE SME में होगी.  ये है हफ्ते का दूसरा आईपीओ अगला आईपीओ 18 फरवरी को सब्सक्रिप्शन के लिए ओपन होने वाला है और इसमें निवेशक 20 फरवरी तक पैसे लगा सकेंगे. ये इश्यू 2018 में स्थापित यशतेज इंडस्ट्रीज (इंडिया) लिमिटेड ला रही है, जो सोयाबीन ऑयल बनाने के बिजनेस से जुड़ी हुई है. कंपनी B2B सेगमेंट में काम करती है, यानी इसके द्वारा तैयार किया गया ऑयल रिफाइनिंग करने वाले ग्राहकों को बेचा जाता है. इसका एसएमई कैटेगरी के Yashhtej Industries (India) IPO का साइज 88.88 करोड़ रुपये है और कंपनी 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले 80,79,600 शेयरों के बोलियां आमंत्रित करेगी.  प्राइस बैंड की बात करें, तो ये 110 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, जबकि लॉट साइज 1200 शेयरों का है. रिटेल निवेशकों को 2 लॉट यानी 2400 शेयरों के लिए बोली लगानी होगी और इसके लिए कुल 2,64,000 रुपये का निवेश करना होगा. इसकी लिस्टिंग भी BSE SME पर होगी और संभावित लिस्टिंग डेट 25 फरवरी है.  तीसरा IPO होगा मैनबोर्ड  अगले हफ्ते ओपन होने वाले तीन आईपीओ में से आखिरी मैनबोर्ड कैटेगरी का इश्यू है. देश में IVF उपचार में काम करने वाली कंपनी गौडियम आईवीएफ एंड वुमन हेल्थ लिमिटेड का इश्यू (Gaudium IVF IPO) 20 फरवरी को ओपन होने जा रहा है और इसमें 24 फरवरी तक पैसे लगाए जा सकेंगे. इससे पहले 18 फरवरी को इसे Anchor Investors के लिए ओपन किया जाएगा. इसके प्राइस बैंक और लॉट साइज का खुलासा फिलहाल नहीं किया गया है.  मौजूदा डिटेल पर गौर करें, तो कंपनी आईपीओ के तहत 5 रुपये की फेस वैल्यू वाले 2,08,86,200 शेयर जारी करेगी. इनमें से 1,13,92,500 शेयर फ्रेश होंगे, जबकि बारी शेयरों को ऑफर फॉर सेल यानी OFS के जरिए बेचा जाएगा. 2015 में स्थापित इस कंपनी के शेयरों की BSE-NSE पर लिस्टिंग 27 फरवरी को होगी. 

सरकार की बड़ी घोषणा: 2025 से पहले रिटायर कर्मचारियों को भी मिलेगा अतिरिक्त लाभ

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद लाखों केंद्रीय पेंशनभोगियों के मन में उपजी चिंताओं पर सरकार ने विराम लगा दिया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 31 दिसंबर, 2025 तक रिटायर होने वाले कर्मचारियों को भी नए वेतन आयोग के लाभों के दायरे में रखा जाएगा। वित्त मंत्रालय ने संसद में किया साफ केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग (8th CPC) के लाभार्थियों को लेकर चल रहे संशय को दूर कर दिया है। वित्त मंत्रालय ने संसद में साफ किया है कि वेतन आयोग की सिफारिशें केवल मौजूदा कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि उन लाखों पेंशनभोगियों के लिए भी होंगी जो 31 दिसंबर, 2025 या उससे पहले सेवानिवृत्त (Retire) हो चुके हैं। लोकसभा में सरकार का स्पष्टीकरण पेंशन नियमों में बदलाव और पुराने बनाम नए पेंशनभोगियों के बीच संभावित भेदभाव की खबरों के बीच वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में स्थिति साफ की। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि 8वें वेतन आयोग को विशेष रूप से केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन (Pay), भत्ते (Allowances) और पेंशन (Pension) पर अपनी सिफारिशें देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।   पेंशनर्स के लिए क्यों था संशय? दरअसल, ‘फाइनेंस एक्ट 2025’ द्वारा मौजूदा पेंशन नियमों के वैधीकरण के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या नए रिवीजन का लाभ केवल उन लोगों को मिलेगा जो 1 जनवरी 2026 के बाद रिटायर होंगे। हालांकि, सरकार के ताजा बयान ने यह साफ कर दिया है कि…     पेंशन में बदलाव केंद्र सरकार द्वारा जारी ‘जनरल ऑर्डर्स’ के माध्यम से किया जाता है।     8th CPC की सिफारिशें स्वीकार होने के बाद, ये आदेश सभी पात्र पेंशनभोगियों पर लागू होंगे।     यह प्रक्रिया सेंट्रल सिविल सर्विसेज़ (पेंशन) रूल्स, 2021 के तहत संचालित होती है।

इंडिगो ने उठाया कदम: 5000 से ज्यादा उड़ानों के रद्द होने के बाद पायलटों की भर्ती शुरू, फ्रेशर्स भी चयनित होंगे

नई दिल्ली  देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो को पिछले साल दिसंबर में पायलट और अन्य क्रू की भारी किल्लत की वजह से 7 दिनों के भीतर 5000 से भी ज्यादा फ्लाइट्स को कैंसिल करना पड़ा था। अब इंडिगो अपने परिचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए 1,000 से अधिक पायलटों की भर्ती करने जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिगो की इस भर्ती में ट्रेनी फर्स्ट ऑफिसर, सीनियर फर्स्ट ऑफिसर और कैप्टन शामिल हैं। अगर इंडिगो इस भर्ती को सफलतापूर्वक पूरा करती है तो यह भारतीय एयरलाइन कंपनी द्वारा की गई अभी तक की सबसे बड़ी भर्तियों में से एक होगी। फ्रेशर भी रखे जाने की प्लानिंग  रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती नोटिस से पता चलता है कि एयरलाइन अपने नेटवर्क के प्रमुख विमान एयरबस ए320 पर बिना अनुभव वाले आवेदकों की भी भर्ती करने के लिए तैयार है। वहीं, एयरलाइन के नए नियमों के तहत पायलट द्वारा रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच की जाने वाली लैंडिंग की संख्या सीमित कर दी गई है, साथ ही साप्ताहिक विश्राम की आवश्यकताएं भी बढ़ा दी गई हैं। पायलटों के भर्ती की तैयारी एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि एयरलाइन अपने विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पायलटों की निरंतर भर्ती के लिए सक्रिय रूप से तैयारी कर रही है। एयरलाइन के इंटरनल ट्रेनिंग सिस्टम पहले से मजबूत है, जिसके तहत प्रति माह लगभग 20-25 फर्स्ट ऑफिसर को कप्तान के पद पर पदोन्नत किया जाता है। एयरलाइन औसतन प्रति माह लगभग चार नए विमान शामिल करती है। दिसंबर में क्यों रद हुई थी उड़ानें? नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की जांच में पाया गया कि एयरलाइन ने नए नियमों के लिए पर्याप्त भर्ती नहीं की और न ही ट्रेनिंग में तेजी लाई, जिससे पायलटों पर बार-बार ट्रांसफर, लंबे वर्किंग डेज और लंबे समय तक खाली उड़ान के कारण प्रेशर बढ़ गया। इंडिगो को 2,422 कप्तानों की आवश्यकता थी, लेकिन एयरलाइन के अनुसार उसके पास केवल 2,357 कप्तान ही थे। जिसकी वजह से रोस्टर पूरी तरह से लागू नहीं हो सका और उड़ानों को रद करना पड़ा।  

Mahindra ने पेश किया Udo थ्री-व्हीलर ऑटो, 3 ड्राइव मोड और रेंज-प्राइस डिटेल्स के साथ

मुंबई  महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी लिमिटेड (MLMML), जो ऑटोमेकर की छोटी कमर्शियल गाड़ी बनाने वाली कंपनी है, उसने भारत में Mahindra UDO नाम का एक इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर लॉन्च किया है. कंपनी का कहना है कि UDO की प्रेरणा हवाई जहाज़ से मिली है और वह इसे ‘ऑटोप्लेन’ के तौर पर देखती है. कंपनी का यह भी कहना है कि Mahindra UDO शब्द का हिंदी में मतलब ‘उड़ना’ है. Mahindra का कहना है कि 1948 से पारंपरिक ऑटो डिज़ाइन में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिसमें ड्राइवरों और यात्रियों के कम्फर्ट का ध्यान नहीं रखा गया है. क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा थ्री-व्हीलर EV मार्केट है, Mahindra UDO के साथ, Mahindra का मकसद ऑटो ड्राइवरों की इज्ज़त बढ़ाना और उनकी प्रोफेशनल इमेज और ओनरशिप एक्सपीरियंस को बदलना है. Mahindra Udo की कीमत और वारंटी Mahindra Udo ऑटो को कंपनी ने 3,84,299 रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उतारा है, लेकिन कुछ समय के लिए, यह इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर 3,58,999 रुपये (एक्स-शोरूम) में बेचा जाएगा. इस पर 1.5 लाख km या 6 साल की वारंटी मिलेगी, जो भी पहले हो. Mahindra का कहना है कि Mahindra Udo इंडस्ट्री की पहली इलेक्ट्रिक ऑटो है, जो 1 लाख km तक फ्री सर्विस के साथ आती है. कंपनी का कहना है कि Udo खरीदने वाले कस्टमर UDAY NXT स्कीम में खुद को एनरोल कर सकते हैं. यह गाड़ी के मालिक को 20 लाख रुपये का एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, फाइनेंशियल काउंसलिंग और भी बहुत कुछ देती है. Mahindra Udo का डिजाइन और इंटीरियर Mahindra ने Udo को सेगमेंट में पहली बार फुल मोनोकोक कंस्ट्रक्शन पर बनाया है, जिससे ऑटो का स्ट्रक्चर और भी बेहतर हो गया है. इसमें हेडलैंप, मिरर और एक बड़ी विंडशील्ड के साथ एक स्लीक, एयरोडायनामिक डिज़ाइन दिया गया है, जो इसे सड़क पर एक ऐसी पहचान देता है, जो इसे दूसरे इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा से अलग बनाती है. Mahindra Udo में एर्गोनॉमिक डिज़ाइन वाली सीटें मिलती हैं, जिनमें ड्राइवर और पैसेंजर के आराम का ध्यान रखा गया है. इसमें ड्राइवर के लिए एक पायलट सीट मिलती है, जो इस सेगमेंट की दूसरी गाड़ियों से लगभग 20 परसेंट मोटी है. इस इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर में लंबी यात्राओं के लिए लाउंज जैसे आराम के लिए काफी हेडरूम और लेगरूम है. इसमें इंडिपेंडेंट रियर सस्पेंशन और डुअल फोर्क फ्रंट सस्पेंशन का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह ऑटो बेहतर राइड क्वालिटी दे पाता है. Mahindra Udo की बैटरी, रेंज और फीचर्स नए Mahindra Udo में IP67 रेटेड 11.7kWh लेज़र-वेल्डेड लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल किया गया है. यह एक परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस (PMS) मोटर को पावर देती है. यह इलेक्ट्रिक मोटर 13.41 bhp का पीक पावर आउटपुट और 52 Nm का पीक टॉर्क आउटपुट देती है. रेंज की बात करें तो इस इलेक्ट्रिक ऑटो की असल रेंज 200 km (265 km ARAI-सर्टिफाइड रेंज) है. इतना ही नहीं, यह इलेक्ट्रिक ऑटो तीन राइड मोड्स के साथ आता है, जिसमें रेंज, राइड और रेस शामिल हैं. इस ऑटो की टॉप स्पीड 55 kmph (रेस मोड में) है. फीचर्स की बात करें तो इस ऑटो में हिल होल्ड असिस्ट और क्रीप फ़ंक्शन मिलते हैं. Mahindra Udo में 12-इंच के ट्यूबलेस टायर लगाए गए हैं.

क्रिप्टो बाजार में हलचल: उछाल के बाद भी Bitcoin कमजोर, क्या खतरे में है इसकी दुनिया?

 नई दिल्‍ली बिटकॉइन की कीमतों में इस हफ्ते भी गिरावट तेज रही, लेकिन शनिवार को इसमें 4 फीसदी की तेजी रही और इसकी कीमत  लगभग 68,864 डॉलर पर आ चुकी है. हालांकि एक्‍सपटर्स को इस तेजी पर कुछ खास भरोसा नहीं हो रहा है.  उनका कहना है कि इस बड़ी गिरावट के बीच यह एक छोटी सी उछाल है और गिरावट अभी भी हावी है.  बिटकॉइन अभी भी अपने  रिकॉर्ड स्‍तर से करीब आधा गिर चुका है. क्रिप्टोकरेंसी अक्टूबर में अपने उच्चतम स्तर से लगभग 44% गिर चुकी है, जो पिछले कई महीनों में हुए करेक्शन के कारण हुआ है. शुक्रवार को बिटकॉइन लगभग $69,180 पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले साल के अंत में आई तेजी के दौरान देखे गए स्तरों से काफी नीचे है. अभी और गिर सकता है बिटकॉइन मिड टर्म को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, नेड डेविस रिसर्च (एनडीआर) के रणनीतिकारों ने चेतावनी दी है कि भारी बिकवाली के बाद भी आगे और गिरावट आ सकती है. इस महीने की शुरुआत में ग्राहकों को जारी एक नोट में, एनडीआर ने कहा कि अगर मौजूदा मंदी एक पूरे बिटकॉइन विंटर में बदल जाती है, तो कीमतें मौजूदा स्तरों से काफी नीचे तक गिर सकती हैं.  55 फीसदी तक टूट सकता है बिटकॉइन नेड डेविस रिसर्च के मुख्य रणनीतिकार पैट त्सचोसिक और विश्लेषक फिलिप मौल्स के अनुसार, गंभीर मंदी की स्थिति में बिटकॉइन की कीमत गिरकर 31,000 डॉलर तक जा सकती है. इस तरह की गिरावट का मतलब मौजूदा कीमतों से लगभग 55% की और गिरावट होगी, जिससे हाल के उच्चतम स्तर के करीब निवेश करने वाले निवेशकों को और अधिक ज्‍यादा नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.  75 फीसदी तक टूट चुका है बिटकॉन एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि बिटकॉइन की ऐतिहासिक गिरावट विश्लेषण पर आधारित है. उन्होंने बताया कि पिछली बड़ी बिकवाली के दौरान, बिटकॉइन में आमतौर पर लगभग 70% से 75% की गिरावट देखी गई है, जब गिरावट लंबे समय तक मंदी के दौर में बदल गई. अगर इतिहास खुद को दोहराता है, तो मौजूदा गिरावट अभी भी जारी रह सकती है. बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के अनुसार, नेड डेविस रिसर्च ने यह भी बताया कि 2011 से लेकर अब तक बिटकॉइन की मंदी के दौर में औसतन लगभग 84% की गिरावट आई है. ये गिरावटें न केवल गहरी थीं, बल्कि लंबी भी रहीं.  औसतन, पिछले बिटकॉइन की मंदी के दौर लगभग 225 दिनों तक चले, जो लंबे समय तक कमजोरी की संभावना को उजागर करते हैं.  

वैश्विक बाजार में भारत की बड़ी एंट्री? EU और US के साथ डील पर पीयूष गोयल का दावा

 नई दिल्‍ली कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के लिए एक बड़ा मार्केट खुलने जा रहा है. उन्‍होंने कहा कि भारत के लिए अमेरिका और यूरोपीय यूनियन मिलकर एक्सपोर्टर्स के लिए लगभग 55-60 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट खोल रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि इन देशों से डील के साथ ही हमने किसानों और 95% से ज्‍यादा खेती की उपज के हितों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा है.  शुक्रवार को एक बिजनेस समिट में बोलते हुए गोयल ने कहा कि AI से नौकरियां जाने के डर को भी खत्‍म किया है. यह इंसानों की जगह नहीं लेगा, सिर्फ काम का तरीका बदल जाएगा और हमें इसके लिए तैयार रहना होगा. उन्‍होंने कई रिफॉर्म और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का भी जिक्र किया.    गोयल ने कहा कि आज देश तेजी से आगे बढ़ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन मोड में रिफॉर्म एक्सप्रेस को आगे बढ़ाया है. भारत ने पिछले कुछ महीनों में न्यूज़ीलैंड, UK, ओमान, EU के साथ FTA डील किया है और अमेरिका के साथ एक अंतरिक ट्रेड एग्रीमेंट को फाइनल किया है. सिर्फ अमेरिका में 20 ट्रिलियन का मार्केट  कुछ दिन पहले ही पीयूष गोयल ने कहा था कि अमेरिका के साथ डील के बाद भारत को एक बड़ा मार्केट मिलने जा रहा है. अब भारत के छोटे-मध्‍यम उद्योग से लेकर एग्री और टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री की अमेरिका में कीफायती दाम पर एंट्री होगी. इस डील से अमेरिका के 20 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट खुल चुका है.  वहीं इससे पहले अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 25 फीसदी दंडात्‍मक टैरिफ को हटाते हुए, रेसिप्रोकल टैरिफ को 18% पर कर दिया. अमेरिकी  राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने इसकी जानकारी दी थी. गौरतलब है कि भारत पर अमेरिका ने रूस तेल खरीदारी को लेकर 25 फीसदी एक्स्‍ट्रा टैरिफ लगा दिया था, जो बढ़कर 50 फीसदी हो गया था. इसके बाद से ही दोनों देशों के साथ डील पर चर्चा चल रही थी और अब इस डील पर मोहर लगने जा रहा है.  27 देशों से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट  अमेरिका से अंतरिक व्‍यापार समझौता से पहले भारत ने यूरोपीय यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया था. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत 27 देशों के समूह यूरोपीय यूनियन और भारत ने दोनों देशों की ज्‍यादातर चीजों पर टैरिफ कम करने पर सहमति जाहिर की है. इन डील्‍स के जरिए 99 फीसदी भारतीय उत्‍पादों पर टैरिफ कम होगा. संवेदनशील चीजों को इस डील से बाहर रखा गया है.

भारत को क्रूड सप्लाई में इस देश ने मारी बाज़ी, रूस-अमेरिका भी नहीं टिक पाए

नई दिल्ली फरवरी के पहले हिस्से में सऊदी अरब ने भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने में रूस को पीछे छोड़ दिया है. कीमतों में कटौती और कम भाड़ा लागत के चलते सऊदी अरब एक बार फिर भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बनकर उभरा है. वैश्विक शिप ट्रैकिंग फर्म केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी के पहले 10 दिनों में सऊदी अरब ने भारत को औसतन 11.3 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) कच्चा तेल भेजा, जबकि रूस की ऑयल सप्लाई 10.9 लाख बीपीडी रही. करीब एक साल बाद सऊदी अरब की सप्लाई फिर 10 लाख बीपीडी के पार पहुंची है. एक महीने में बदल गई पूरी तस्वीर लाइव मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी के आंकड़ों पर नजर डालें तो उस वक्त भारत ने रूस से 11.4 लाख बीपीडी तेल आयात किया था. इसके बाद इराक से 10.3 लाख बीपीडी और सऊदी अरब से करीब 7.74 लाख बीपीडी तेल आया था. हालांकि फरवरी की शुरुआत में ही तस्वीर बदलती दिख रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बदलाव भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ट्रेड डील के फ्रेमवर्क के बाद सामने आया है. अमेरिका ने भारत पर प्रस्तावित रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने और रूसी तेल खरीद को हतोत्साहित करने के लिए लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को हटाने की घोषणा की है. इसके बाद भारत ने रूस पर निर्भरता धीरे-धीरे कम करने के संकेत दिए हैं. 90 फीसदी तेल का आयात करता है भारत भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का करीब 90 प्रतिशत आयात करता है और वह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल खरीदार है. साथ ही भारत चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर भी है, जिसकी रिफाइनिंग क्षमता 258 मिलियन टन प्रति वर्ष है, जो 2030 तक बढ़कर 309 मिलियन टन से ज्यादा होने की उम्मीद है. सऊदी अरब से सप्लाई बढ़ने की एक बड़ी वजह कम ट्रांसपोर्ट लागत भी है. सऊदी अरामको ने प्रति बैरल 30 सेंट का प्रीमियम हटाकर अपने तेल की कीमत को ओमान और दुबई ग्रेड के बराबर कर दिया है. इसके अलावा पश्चिम एशिया से भारत तक तेल पहुंचने में करीब तीन दिन लगते हैं, जबकि अमेरिका से यही समय 45 से 55 दिन तक का होता है. ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि सऊदी अरब के पास अतिरिक्त उत्पादन क्षमता है, जिससे वह जरूरत पड़ने पर तेजी से सप्लाई बढ़ा सकता है. यही वजह है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने पर जोर दे रहा है. फिलहाल रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक दबावों के बीच भारत का झुकाव एक बार फिर सऊदी अरब की ओर बढ़ता दिख रहा है. शुरुआती संकेत यही बताते हैं कि आने वाले महीनों में भारत के तेल आयात मानचित्र में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

आज का गोल्ड-सिल्वर रेट: चांदी में बड़ी गिरावट, सोना भी फिसला—22 और 24 कैरेट की कीमतें जानें

झारखण्ड अगर आप सोना-चांदी खरीदने या गहने बनवाने की सोच रहे हैं, तो पहले ताजा भाव जरूर जान लें। बाजार में इन दिनों सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। ऐसे में सही जानकारी के बिना खरीदारी करना महंगा पड़ सकता है। रांची में सोना-चांदी के दाम में गिरावट रांची ज्वेलरी एसोसिएशन के अनुसार राजधानी रांची में सोने और चांदी की कीमतों में कमी आई है। आज 22 कैरेट सोना 1,44,300 रुपये प्रति 10 ग्राम और 24 कैरेट सोना 1,51,520 रुपये प्रति 10 ग्राम बिक रहा है। चांदी की बात करें तो आज इसका भाव 2,80,000 रुपये प्रति किलो है। जबकि शनिवार को चांदी 3,00,000 रुपये प्रति किलो बिक रही थी। यानी एक ही दिन में चांदी 20,000 रुपये सस्ती हो गई है। सोना भी हुआ सस्ता रांची में 22 और 24 कैरेट सोने की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है।     22 कैरेट सोना कल 1,46,200 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो आज घटकर 1,44,300 रुपये हो गया है। यानी 1,900 रुपये की कमी आई है।     24 कैरेट सोना कल 1,53,510 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो आज 1,51,520 रुपये पर आ गया है। यानी 1,990 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। अन्य शहरों में क्या है हाल? बोकारो     22 कैरेट सोना: 1,46,000 रुपये प्रति 10 ग्राम      24 कैरेट सोना: 1,54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम     चांदी: 2,55,000 रुपये प्रति किलो जमशेदपुर     22 कैरेट सोना: 1,42,200 रुपये प्रति 10 ग्राम     24 कैरेट सोना: 1,55,240 रुपये प्रति 10 ग्राम     चांदी: 2,45,630 रुपये प्रति किलो देवघर     22 कैरेट सोना: 1,43,229 रुपये प्रति 10 ग्राम     24 कैरेट सोना: 1,56,250 रुपये प्रति 10 ग्राम     चांदी: 2,45,630 रुपये प्रति किलो कुल मिलाकर, आज सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए राहत की खबर है। हालांकि बाजार में दाम रोज बदल रहे हैं, इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर जांच लें।  

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