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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर दीं बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1998 में आज के ही दिन पोखरण-II का सफल परीक्षण किया गया था। इस गौरवशाली अवसर पर देश के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों की वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों का स्मरण करते हुए उन विभूतियों को बारम्बार प्रणाम। उनके संकल्प व समर्पण से हमारा राष्ट्र, प्रौद्योगिकी के विभिन्न आयामों में नित नए अध्याय जोड़ रहा है।  

बुधनी में देश का पहला कृषि केंद्र खुलेगा, जहां पुरुष और महिला कृषकों को हाईटेक ड्रोन खेती के गुण सिखाए जाएंगे

भोपाल केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थान केंद्र से मध्य प्रदेश को बड़ी सौगात मिली है. सीहोर जिले के बुधनी में देश का पहला कृषि केंद्र खुलेगा. जहां पुरुष और महिला कृषकों को हाईटेक ड्रोन खेती के गुण सिखाए जाएंगे. बता दें कि प्रशिक्षण के पहले चरण में 20 सीटें उपलब्ध होंगी. इसके लिए आवेदक को कम से कम 10वीं पास होना आवश्यक है. आवेदन करने के लिए संबंधित विभाग या कार्यालय से संपर्क करना होगा. कृषि केंद्र से प्रशिक्षित किसान नई तकनीकों का प्रयोग कर अपनी आय को और बढ़ा सकते हैं. साथ ही खेती के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकते हैं. क्योंकि आज के समय में किसानों के लिए ड्रोन खेती एक महत्वपूर्ण तकनीक बन चुकी है. जो फसलों की निगरानी, छिड़काव और फसल निरीक्षण में मददगार है. इससे न केवल लागत कम होगी, बल्कि फसल गुणवत्ता भी बेहतर होगी.

प्रेमपुरा घाट की है जहां पर युवक दोस्तों के साथ नहाने गया था, तालाब में डूबने से मेडिकल छात्र की मौत

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में दर्दनाक हादसा हो गया। तालाब में डूबने से मेडिकल के एक छात्र की मौत हो गई है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले को जांच में लिया है। दरअसल घटना प्रेमपुरा घाट की है जहां पर युवक दोस्तों के साथ नहाने गया था। युवक विवेक शर्मा खुशीलाल मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था। छात्र हॉस्टल के अपने दोस्तों के साथ घूमने गया था। दोस्तों के मना करने के बावजूद छात्र विवेक घाट से आगे बढ़ा और फिर डूब गया। 12 घंटे की सर्चिंग के बाद गोताखोरों ने शव को बाहर निकाल लिया है। मृतक विवेक शर्मा भिंड जिले का रहने वाला था।विवेक शर्मा को तैरना आता था लेकिन तालाब में अत्यधिक काई जम जाने की वजह से वह तैर नहीं सका और गहरे पानी में डूब गया। उनकी मौत से जहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हला है वहीं हॉस्टल में भी शोक का माहौल है।

दिग्विजय सिंह बोले- हमें दुख है कि युद्ध विराम की घोषणा होने के बाद पाकिस्तान द्वारा भारत पर मिसाइल दागे गए, जो उचित नहीं

गुना मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि युद्ध विराम की घोषणा के बाद पाकिस्तान का मिसाइल दागना गलत है। इस पर सख्ती से रोक लगना चाहिए। राज्यसभा सदस्य सिंह रविवार सुबह शहर के हड्डी मिल क्षेत्र में भू-माफिया से पीड़ित आदिवासी परिवार से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान वे मीडिया से अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। दिग्विजय ने कहा कि हर समस्या का निदान बातचीत है, जबकि युद्ध तो आखिरी विकल्प होता है। सिंह ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवादियों का गढ़ बन चुका है। वहां की सरकार आतंकवादियों को पैसे का लालच देकर ट्रेनिंग देती है, जिसके बाद उन्हें आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करती है।   युद्ध विराम की घोषणा के बाद भी मिसाइल दागी यह सब बातें अब साफ होकर उजागर हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश देश भी स्वीकार कर चुके हैं कि पाकिस्तान पूरी तरह आतंकियों का गढ़ बन चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें दुख है कि युद्ध विराम की घोषणा होने के बाद पाकिस्तान द्वारा भारत पर मिसाइल दागे गए, जो उचित नहीं है। इस पर सख्ती से रोक लगाई जाना चाहिए। युद्ध के समय विपक्ष के भारत सरकार के साथ खड़े होने के सवाल पर सिंह ने कहा कि जब देश संकट में हो, तो सभी को राजनीति से परे होना चाहिए। हम भारत सरकार और सेना के साथ खड़े हैं और जरूरत में पूरा समर्थन करेंगे।

मध्य प्रदेश में अभी तक 15 लाख ऐसे हितग्राही चिह्नित, 83 लाख का ई-केवायसी बाकी

भोपाल खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत प्रतिमाह दिए जाने वाले निश्शुल्क खाद्यान्न का लाभ केवल पात्र व्यक्तियों को ही मिले, इसके लिए ई-केवायसी करवाया जा रहा है। मध्य प्रदेश में अभी तक 15 लाख ऐसे हितग्राही चिह्नित किए गए हैं, जिनका या तो निधन हो गया है या फिर वे चार माह से खाद्यान्न लेने नहीं आए। इन सभी के नाम पात्रता सूची से हटाए गए हैं। अभी भी 83 लाख हितग्राहियों का ई-केवायसी होना बाकी है। इनमें भी तीन से चार लाख ऐसे हितग्राही हो सकते हैं, जिनका नाम दो जगह दर्ज है, उनका निधन हो चुका है या फिर खाद्यान्न लेने ही नहीं आ रहे हैं। ऐसे हितग्राहियों का नाम सूची से काटकर नए नाम जोड़े जाएंगे।   खाद्य सुरक्षा कानून के प्रविधान के अंतर्गत मध्य प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के 5.46 करोड़ हितग्राही हो सकते हैं। यह संख्या साढ़े पांच करोड़ को पार कर गई थी। जांच कर कुछ नाम छांटे गए फिर भी अपात्रों को राशन मिलने की शिकायतें आ रही थीं। इसे देखते हुए सरकार ने ई-केवायसी की प्रक्रिया प्रारंभ की। इसमें एक-एक हितग्राही की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित बायोमैट्रिक सत्यापन कराया जा रहा है। साढ़ें चार लाख हितग्राही राशन लेने ही नहीं आ रहे इसमें साढ़े चार लाख हितग्राही तो ऐसे पाए गए जो चार माह से राशन लेने के लिए नहीं आ रहे हैं। जबकि, योजना में निश्शुल्क खाद्यान्न देने का प्रविधान है। इसी तरह जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 10 लाख हितग्राही ऐसे हैं, जिनका या तो निधन हो चुका है या फिर कहीं चले गए हैं। ऐसे सभी लोगों के नाम काटे जाने चाहिए थे लेकिन सूची में दर्ज थे। इनके नाम पर खाद्यान्न भी आवंटित हो रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जनवरी से अप्रैल, 2025 के बीच 15 लाख नाम सार्वजनिक वितरण प्रणाली के हितग्राहियों की सूची से हटाए जा चुके हैं। यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है इसलिए संख्या बढ़ भी सकती है।   समग्र के डाटा से हटते हैं नाम विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जब भी किसी हितग्राही परिवार के किसी सदस्य का निधन होता है या फिर विवाह कर लड़की ससुराल चली जाती है तो उसका नाम हटाना होता है। इसकी जानकारी स्थानीय निकायों द्वारा संग्रहित कर समग्र पोर्टल पर दर्ज कराई जाती है। वहां से खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग को प्रतिमाह डाटा मिलता है, जिसके आधार पर नाम हटाए जाते हैं। इंदौर में सर्वाधिक और भिंड में सबसे कम ई-केवायसी प्रदेश में अभी तक 84 प्रतिशत ई-केवायसी का काम हो चुका है। सर्वाधिक 92 प्रतिशत हितग्राहियों का ई-केवायसी इंदौर में हुआ है, जबकि सबसे कम 75 प्रतिशत भिंड जिले का रहा है। बालाघाट में 90, भोपाल 85, उज्जैन 83 जबलपुर 81 प्रतिशत हितग्राहियों का ई-केवायसी किए जा चुका है। टीकमगढ़, शिवपुरी, आलीराजपुर, अशोक नगर जिले में 80 प्रतिशत से कम काम हुआ है। 2.90 लाख टन प्रतिमाह लगता है गेहूं-चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत प्रतिमाह 2.90 लाख टन निश्शुल्क खाद्यान्न दिया जाता है। इसमें 1.74 लाख टन चावल और 1.16 लाख टन गेहूं है। प्रदेश सरकार ने चावल का कोटा कम करके गेहूं का बढ़ाने की मांग की है। गेहूं उपार्जन का काम पूरा हो चुका है इसलिए अब कोटा में परिवर्तन संभव है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा – मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र विभिन्न क्षेत्रों में साथ कार्य करेंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र विभिन्न क्षेत्रों में साथ कार्य करेंगे। दोनों राज्यों की साझा विरासत के संरक्षण में मिलकर कार्य करेंगे। उद्योगों के क्षेत्र और सांस्कृतिक आध्यात्मिक परंपराओं, पर्यटन और बागवानी के क्षेत्र में दोनों राज्यों की परस्पर सहयोग की गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह में “तापी मेगा रिचार्ज परियोजना” से संबंधित एमओयू हस्ताक्षरित होने के पश्चात अन्य क्षेत्रों में मिलकर कार्य करने के बारे में विचार व्यक्त किए। जबलपुर- नागपुर कॉरिडोर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश से फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स तथा कृषि उत्पादन का महाराष्ट्र के विभिन्न बंदरगाहों के माध्यम से काफी निर्यात होता है। महाराष्ट्र के विभिन्न बंदरगाहों में एक डेडिकेटेड निर्यात सुविधा प्रकोष्ठ के गठन की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। जबलपुर से नागपुर के मध्य एक डेडिकेटेड फ्रंट कॉरिडोर बन जाने से मध्य भारत क्षेत्र में माल परिवहन में भाड़ा, समय और लागत की अत्यधिक बचत संभव होगी। आध्यात्मिक पर्यटन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे अनेक तीर्थ दोनों राज्यों और देश के नागरिकों के आस्था केंद्र हैं। मध्यप्रदेश के दोनों ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर और श्री ओंकारेश्वर को महाराष्ट्र के ज्योतिर्लिंग श्री त्र्यंबकेश्वर, श्री भीमाशंकर और श्री घृष्णेश्वर से जोड़कर धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित किया जा सकता है। देवी अहिल्या के योगदान से दोनों राज्यों के युवाओं को कराएंगे अवगत लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर का महाराष्ट्र से संबंध था। बुनकर समाज के हित में महेश्वर सहित मालवा के अन्य स्थानों पर प्रशिक्षण और व्यवसाय उन्नयन के प्रयास किए जा रहे हैं। लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के सांस्कृतिक, धार्मिक और सुशासन क्षेत्र के योगदान से दोनों प्रदेशों के प्रमुख नगरों में लाइट एण्ड साउंड शो, नाटक मंचन के माध्यम से वर्तमान पीढ़ी को अवगत करवाया जा सकता है। आगामी 20 मई को राजवाड़ा इंदौर में कैबिनेट बैठक का आयोजन लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के सम्मान में हो रहा है। साहसी योद्धाओं के स्वर्णिम इतिहास पर दोनों राज्यों को गर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मराठा राजशाही का संबंध मध्यप्रदेश से रहा है। साहसी योद्धा बाजीराव पेशवा सहित होलकर, शिंदे (सिंधिया), तात्या टोपे, रानी लक्ष्मी बाई, अप्पाजी भोंसले से जुड़े इतिहास के गौरवशाली दस्तावेजों के संकलन और डिजिटलाइजेशन के कार्य भी किए जायेंगे। इसी क्रम में मोड़ी लिपि की पांडुलिपियों को संरक्षित करने और उनके प्रकाशन में दोनों राज्य सहभागिता कर सकते हैं। प्रदेश में मोड़ी लिपि के लगभग 21 लाख दस्तावेज संरक्षित किए जा चुके हैं। केला महोत्स और आम महोत्सव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में जहां बुरहानपुर में केला महोत्सव होता है, वहीं महाराष्ट्र के रत्नागिरी में आम महोत्सव का प्रचलन है। इन दोनों महोत्सवों को जोड़कर पर्यटन और उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है।  

अब बिना किसी खून के रिश्ते वाले भी डोनर बन सकते हैं, 130 से अधिक निश्शुल्क बोनमैरो प्रत्यारोपण

इंदौर सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल (एसएसएच) में संचालित बोनमैरो प्रत्यारोपण केंद्र को अब राष्ट्रीय पहचान मिलने जा रही है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज द्वारा संचालित इस केंद्र का जल्द ही इंडियन सोसायटी फार ब्लड एंड मैरो ट्रांसप्लांटेशन (आइएसबीएमटी) में पंजीयन किया जाएगा। इसके बाद यह प्रदेश का पहला ऐसा सरकारी केंद्र बन जाएगा, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त होगी। इससे इंदौर में अब अपनों के अलावा पराए भी मरीज को बोनमैरो दे सकेंगे। राष्ट्रीय स्तर का केंद्र बनने से बड़ी संस्थाओं से मरीजों को आर्थिक सहायता मिलने लगेगी। राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने वाली दात्री संस्था में भी रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। अब बिना किसी खून के रिश्ते वाले भी डोनर बन सकते हैं अधिकारियों ने बताया कि अभी तक इस केंद्र में केवल उन्हीं लोगों से बोनमैरो प्रत्यारोपण किया जा रहा था, जो मरीज के सगे-संबंधी होते हैं, लेकिन नेशनल सोसायटी में रजिस्ट्रेशन के बाद अब अनरिलेटेड डोनर यानी बिना किसी खून के रिश्ते वाले लोग भी डोनर बन सकेंगे। इससे उन मरीजों को लाभ मिलेगा, जिनके परिवार में कोई उपयुक्त डोनर मौजूद नहीं होता। प्रबंधन ने पंजीयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 130 से अधिक निश्शुल्क बोनमैरो प्रत्यारोपण केंद्र में अब तक 130 से ज्यादा मरीजों का बोनमैरो प्रत्यारोपण निश्शुल्क किया जा चुका है। जबकि निजी अस्पतालों में इसी प्रक्रिया पर एक मरीज का खर्च करीब 20 लाख रुपये तक आता है। गरीब और जरूरतमंद मरीजों को यहां इलाज में राहत मिल रही है। यह सुविधा पीएम केयर फंड, मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान निधि, आयुष्मान भारत योजना, सामाजिक संस्थाएं आदि के अंतर्गत मिलने वाले फंड से दी जा रही है।

15 जून तक आ सकता है मानसून, मध्‍य प्रदेश में सामान्य से अधिक होगी बारिश

भोपाल प्रदेश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने तय समय (15 जून) पर प्रदेश में पूर्वी क्षेत्र से दस्तक दे सकता है। प्रवेश करने के पांच दिन में मानसून के पूरे प्रदेश में छा जाने की भी संभावना जताई गई है। मौसम विज्ञानियों ने मध्य प्रदेश में मानसून की वर्षा सामान्य से अधिक होने की भी उम्मीद जताई है। बता दें कि पिछले वर्ष प्रदेश में मानसून छह दिन की देरी से 21 जून को आया था। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने इस बार देश में मानसून का प्रवेश चार दिन पहले अर्थात 27 मई तक होने का अनुमान लगाया है। इस हिसाब से 15 से 18 दिन में मानसून के मप्र में प्रवेश करने के आसार हैं। प्रदेश में मानसून आने की सामान्य तारीख 15 जून है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों से मानसून की प्रदेश में एंट्री 18 जून के बाद ही हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र की वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डा. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि यदि देश में मानसून जल्दी आता है, तो प्रदेश में भी इसके तय समय पर आने की संभावना है। पिछले वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 21 जून को प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र पांर्ढुना, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर जिलों में प्रवेश किया था। इस बार भी इन्हीं जिलों से मानसून के प्रवेश की संभावना बताई जा रही है। सामान्य से बेहतर रहने की उम्मीद प्रदेश में इस बार मानसून के सामान्य से बेहतर रहने की उम्मीद है। अनुमान के मुताबिक, प्रदेश में 104 से 106 प्रतिशत अर्थात औसत 38-39 इंच वर्षा हो सकती है। जबलपुर-शहडोल संभाग में सबसे ज्यादा वर्षा संभावित है। जबकि ग्वालियर, चंबल, इंदौर, उज्जैन और भोपाल संभाग में भी वर्षा का कोटा फुल हो सकता है। बता दें कि प्रदेश की सामान्य वर्षा औसत 37.3 इंच है। पिछले 10 वर्षों में प्रदेश में कब-कब आया मानसून वर्ष- आगमन- विदा हुआ2024- 21 जून- 07 अक्टूबर2023- 24 जून- 09 अक्टूबर2022- 16 जून- 14 अक्टूबर2021- 09 जून- 11 अक्टूबर2020- 14 जून- 21 अक्टूबर2019- 24 जून- 12 अक्टूबर2018- 25 जून- 04 अक्टूबर2017- 22 जून- 11 अक्टूबर2016- 19 जून- 13 अक्टूबर2015- 15 जून- 02 अक्टूबर(मौसम विज्ञान केंद्र के सौजन्य से)

भेल के रिटायर्ड जीएम की पत्नी ने पति को मारने के लिए 10 लाख रुपये की सुपारी दी थी, हत्या मामले में पत्नी, सहेली और सहेली के प्रेमी अरेस्ट

भोपाल पिपलानी क्षेत्र में एक महिला ने सहेली के प्रेमी को दस लाख की सुपारी देकर अपने पति की हत्या करवा दी। पति महिला से अक्सर मारपीट करता था, जिससे वह परेशान रहती थी। उसने करीब तीन महीने पहले पति की हत्या की साजिश रची थी। 18 अप्रैल को सहेली के प्रेमी ने घर पहुंचकर उसका मुंह दबाकर मौत के घाट उतार दिया और सिर के बल टाइल्स पर गिराकर उसका सिर फोड़ दिया। मौत के बाद पत्नी अपने पति के शव को लेकर अस्पताल पहुंची और पुलिस को बाथरूम में गिरने का कारण बताया, जिसके बाद पुलिस ने मामूली मर्ग की कायमी की। 21 दिन बाद जब मृतक की पीएम रिपोर्ट सामने आई तो पुलिस भी हक्की-बक्की रह गई, क्योंकि मृतक की मौत सिर पर चोट लगने से नहीं, बल्कि गला घोंटने से हुई थी। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उन्होंने दो दिन तक वारदात को नहीं कबूला, बाद में सभी साक्ष्य मिल जाने पर वारदात को स्वीकारा। पुलिस ने पत्नी बिट्टी जार्ज, सहेली रेखा और उसके प्रेमी संजय पाठक के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया है।   51 की उम्र में की थी 18 वर्षीय युवती से दूसरी शादी एसआई संतोष रघुवंशी ने बताया कि 65 वर्षीय जार्ज कुरियन मूलत: केरल के रहने वाले थे। वह भेल से जीएम के पद से रिटायर थे और पटेल नगर में रहते थे। 14 वर्ष पहले उन्होंने 51 वर्ष की उम्र में 18 साल की बिट्टी नामक युवती से दूसरी शादी की थी। जबकि उनकी पहली पत्नी केरल में ही रहती थी। बीते कुछ वर्षों से जार्ज कुरियन अपनी पत्नी से मारपीट करता था, जिससे महिला परेशान रहती थी। ऐसे की थी हत्या 18 अप्रैल को बिट्टी जार्ज (32) ने संजय को रेखा के माध्यम से घर बुलवाया। बिट्टी ने जार्ज की आंखों में ड्राप डाला था और वह बेडरूम में सो रहे थे। तभी बिट्टी बाहर आ गई और संजय अंदर घुस गया। उसने जार्ज से मारपीट की और मुंह दबाकर मौत के घाट उतार दिया। बाद में उसे सिर के बल टाइल्स पर गिरा दिया, जिससे उसका सिर फूट गया। तब तीनों ने चादर और तकिये से कमरे का खून साफ किया और उसे अस्पताल पहुंचाकर बाथरूम में गिरने से मौत की झूठी कहानी रची। चार घंटे तक शव को घर में रखे रहे आरोपित: एसआइ रघुवंशी के अनुसार मौत के बाद बिट्टी चार घंटे तक शव को घर में रखे रही। उसने पुलिस से पूछताछ में बताया कि उसकी पति जार्ज अक्सर कहता था कि उसे किसी बाबा का आशीर्वाद प्राप्त है कि जब भी वह मरेगा तो चार घंटे बाद वापस जिंदा हो जाएगा। इसीलिए बिट्टी और उसके साथियों ने चार घंटे तक शव रखकर इतंजार किया कि कहीं वह वापस जिंदा न हो जाए। बाद में उसे अस्पताल भेजा। तीन माह पहले रची साजिश, 18 मार्च को पहला हमला उनके मकान में रेखा सूर्यवंशी नामक महिला बेटे के साथ किराये से रहती है। उसके पति की मौत 2017 में हो गई थी, जबकि बेटा सागर कॉलेज में पढ़ाई करता है। रेखा का प्रेम प्रसंग सीहोर में रहने वाले संजय पाठक से था, जो कि आरटीओ एजेंट है। जार्ज रेखा को भी संजय से बात करने से रोकता था। इस प्रकार दोनों महिलाएं उससे प्रताड़ित थीं। करीब तीन महीने पहले दोनों ने उसकी मौत की साजिश रची। उन्होंने संजय को दस लाख की सुपारी दी, जिसमें करीब ढाई लाख रुपये एडवांस राशि के रूप में भी दिए थे। उन्होंने पहला हमला सीहोर क्षेत्र में जार्ज पर किया था। तब जार्ज किसी काम से रेखा के साथ सीहोर गए थे। तभी संजय ने हमला किया, लेकिन जार्ज किसी तरह बच गए थे। उन्हें आनंद नगर क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था। इस तरह जांच में अंधे कत्ल से पुलिस ने उठाया पर्दा महिला ने बाथरूम में गिरने से मौत का कारण बताया, जबकि पीएम में दम घुटने से मौत की पुष्टि। पत्नी बिट्टी और उसकी सहेली रेखा के बयानों में भिन्नता मिली। 18 मार्च की घटना के समय तीनों का एक ही रूट पर मिलना। आरोपितों के बैंक खातों में हुए लेनदेन की जांच भी पुलिस कर रही है।  

अब बॉम्बे हॉस्पिटल को मिली बम से उड़ाने की धमकी, स्टेडियम को भी उड़ाने की मिली थी धमकी, मामले की जाँच शुरू

इंदौर इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और अस्पताल में सर्चिंग करवाई। इस दौरान वहां कोई भी संदिग्ध सामान या विस्फोटक नहीं मिला। दो दिन पहले भी एमपीसीए को ई-मेल भेजकर होलकर स्टेडियम को उड़ाने की धमकी दी गई है। मेल में लिखा था कि स्लीपर सेल इस घटना को अंजाम देगी। इसके साथ ही भी लिखा था कि ‘अपनी सरकार को समझाओ की वो पाकिस्तान से पंगा नहीं ले।’ इस मेल में यह भी लिखा था अस्पताल भी स्लीपर सेल के निशाने पर हैं।   साइबर सेल कर रही मामले की जांच ई-मेल द्वारा भेजी जा रही इस धमकियों की जांच साइबर सेल कर रही है। यह देखा जा रहा है कि ई-मेल कहां से भेजे गए हैं। जल्द ही उस व्यक्ति को ट्रेस कर लिया जाएगा, जिसने यह हरकत की है।

महाकाल मंदिर में अब सीमित को ही भस्म आरती में शामिल होने की अनुमति प्रदान की जाएगी

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में अब सीमित संख्या में भक्तों को ही भस्म आरती में शामिल होने की अनुमति प्रदान की जाएगी। कितने भक्तों को प्रतिदिन अनुमति दी जाएगी, इसकी संख्या समिति तय करेगी। इसके लिए जल्द ही उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। यह निर्णय गुरुवार को प्रबंध समिति की बैठक में लिया गया है। बता दें, वर्तमान में करीब 1800 भक्तों को प्रतिदिन भस्म आरती दर्शन अनुमति दी जा रही है।   नंदी, गणेश और कार्तिकेय मंडपम में बैठते हैं भक्त महाकाल मंदिर में प्रतिदिन तड़के चार बजे भगवान महाकाल की भस्म आरती की जाती है। मंदिर में स्थान सीमित है, इसलिए मंदिर समिति प्रतिदिन 1800 भक्तों को ही अनुमति देती है। इन दर्शनार्थियों को नंदी, गणेश व कार्तिकेय मंडपम में बैठाकर भस्म आरती के दर्शन कराए जाते हैं। देखने में आ रहा है कि जो दर्शनार्थी गर्भगृह के द्वार की सीध में बैठे होते हैं उन्हें दर्शन हो जाते हैं लेकिन जो आसपास बैठते हैं, उन्हें सुविधा से दर्शन नहीं हो पाते हैं। दर्शनार्थियों की सीमित संख्या होने पर श्रद्धालु ऐसे स्थान पर बैठ पाएंगे, जहां से भस्म आरती के सुविधापूर्वक दर्शन हो सकेंगे। चलायमान व्यवस्था करेंगे प्रभावी प्रबंध समिति ने चलायमान व्यवस्था से अधिक श्रद्धालुओं को भस्म आरती दर्शन कराने का निर्णय लिया है। 11 जुलाई से श्रावण मास की शुरुआत भी होने वाली है, ऐसे में चलायमान व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जाएगा। यह व्यवस्था पूरी तरह निश्शुल्क है और इसके लिए किसी प्रकार की कोई अनुमति भी नहीं लेनी पड़ती है। भक्तों को तड़के चार बजे से ही भगवान महाकाल के दर्शन सुलभ हो जाते हैं।   इन माध्यमों से मिलती है अनुमति ऑनलाइन मंदिर की वेबसाइट पर भक्त आनलाइन दर्शन अनुमति प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए प्रतिव्यक्ति 200 रुपये शुल्क चुकाना होता है। प्रतिदिन 400 भक्तों को आनलाइन अनुमति दी जाती है। ऑफलाइन महाकाल महालोक स्थित बुकिंग काउंटर के माध्यम से प्रतिदिन 300 भक्त आफलाइन अनुमति प्राप्त कर सकते हैं। ऑफलाइन अनुमति निश्शुल्क है। प्रोटोकाल सांसद, मंत्री, विधायक, विभिन्न विभागों के प्रमुखों की अनुशंसा पर करीब 600 लोगों को प्रतिदिन दर्शन अनुमति दी जाती है। प्रोटोकाल दर्शन अनुमति के लिए भी 200 रुपये शुल्क चुकाना होता है। पुजारी, पुरोहित मंदिर समिति प्रतिदिन पुजारी, पुरोहित व उनके प्रतिनिधियों के यजमानों को करीब 500 अनुमति जारी करती है। इसके लिए भी यजमानों को प्रति व्यक्ति 200 रुपये शुल्क चुकाना होता है।

जल गंगा संवर्धन: जल संरक्षण के लिए ग्रामीणों ने लिया संकल्प,जल है प्रकृति का अमूल्य उपहार

जल गंगा संवर्धन भोपाल प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान में दिन-प्रतिदिन पानी के संरक्षण को लेकर जन सामान्य के उत्साह में लगातार वृद्धि हो रही है। नारे लेखन के साथ गांव-गांव में जल संरक्षण की अलख जगाई जा रही है। आने वाले बरसात के मौसम को देखते हुए व्यापक स्तर पर पौध-रोपण के लिये उचित जगह चिन्हित भी तैयारी की जा रही है। अभियान 30 जून तक चलेगा। दीवार लेखन से जल बचाव का दिया जा रहा है संदेश बैतूल जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में आठनेर विकासखंड में नवांकुर संस्थाओं द्वारा चलाया जा रहा जन-जागरूकता अभियान जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। जिले में दीवार लेखन, संगोष्ठियां एवं स्वच्छता गतिविधियों के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण का महत्व समझाया जा रहा है। जन भागीदारी को बढ़ाने के लिये जल प्रहरी गांव-गांव में सक्रिय हैं। जल प्रहरी ने जल चौपाल में बताया कि जल संकट एक गंभीर समस्या है, यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में स्थिति और भयावह हो सकती है। जिले में जल संगोष्ठियों का आयोजन, जल स्रोतों की सफाई एवं नदी-तालाबों की स्वच्छता जैसे कार्य किए जा रहे हैं। ग्राम चिनकी में हुई जल चौपाल नरसिंहपुर जिले में ग्राम चिनकी में जल गंगा संवर्धन अभियान में जल चौपाल का आयोजन किया गया। जल चौपाल में जिला समन्वयक जयनारायण सिंह ने कहा कि जल संरक्षण व संवर्धन के लिए वर्षा जल संग्रह करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिले में जल संरचनाओं का निर्माण व पुरानी जल संरचनाओं की साफ-सफाई और उनके संरक्षण के कार्य किए जा रहे हैं। जिले में जल के महत्व पर संवाद, संगोष्ठी, परिचर्चा, रैली, शपथ, रंगोली प्रतियोगिता सहित अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों में जागरूकता लाई जा रही है। इस कार्य में जिले की नवांकुर संस्था, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति, सामाजिक, धार्मिक, स्वैच्छिक संगठनों, सीएमसीएलडीपी के विद्यार्थियों के साथ आम नागरिक अपनी सहभागिता निभा रहे हैं। जल है प्रकृति का अमूल्य उपहार डिण्डोरी जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान प्रगति पर है। यह अभियान जन-जन के जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान है। अभियान में नये तालाब बनाये जा रहे हैं। साथ ही पुराने तालाबों, बावड़ियों और कुँओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।  नदियों को साफ-स्वच्छ एवं जल एकत्रित करने के लिए भी कार्य किए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाले तालाबों, जल स्रोतों तथा देवालयों में जल संरक्षण के कार्य भी किये जा रहे हैं। यह कार्यक्रम जन प्रतिनिधियों, स्थानीय समुदाय, जनभागीदारी, आमजन और सरकार के संयुक्त प्रयास से संचालित हो रहा है।   ग्राम सुन्हादादर में जल संरक्षण को लेकर नदी के आसपास स्वच्छता कार्य किया गया। इसी प्रकार ग्राम रैतवार महाजन टोला में मेंटर्स धन्नूसिंह तेकाम एव ग्रामीणों के द्वारा जल संरक्षण को लेकर तालाब के अन्दर मे  स्वच्छता अभियान चलाकर श्रमदान किया गया। जल संरक्षण के लिए ग्रामीणों ने लिया संकल्प मंडला जिले में नैनपुर ग्राम पंचायत जहरमऊ के प्राचीन शंकर तालाब में स्वच्छता अभियान चलाया गया। तालाब की सीढ़ियां को साफ करते हुए लगभग 200 तगाड़ी चोई, प्लास्टिक का कचरा निकाला गया। विकासखण्ड समन्वयक संतोष कुमार झारिया द्वारा जल संरक्षण हेतु शपथ दिलाई गई। खाई तालाब में सफाई अभियान बालाघाट जिले में लांजी किले से लगे खाई तालाब में श्रमदान किया गया। अभियान में जलाशयों की सफाई, पौध-रोपण एवं जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। लांजी के किला परिसर से लगे तालाब की सफाई में सफलता के लिए सामूहिक प्रयासों को महत्व दिया जा रहा है। इसी कड़ी में ऐतिहासिक किला परिसर से लगे खाई तालाब पर श्रमदान कर स्वच्छता अभियान चलाकर जेसीबी द्वारा लगभग 2.50 टन कचरा एवं खरपतवार को निकाला गया। सुधारे गए नल कनेक्शनों के लीकेज टीकमगढ़ जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के द्वारा जल जीवन मिशन के तहत जतारा विकासखंड के ग्राम चतुरकारी में एकल जल प्रदाय योजना के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों मे नल कनेक्शनों के लीकेज की मरम्मत कर उन्हें सुधारा गया। अभियान के अंतर्गत यह पहल ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश से की गई है एवं ग्रामीणों को सलाह दी गई है की पानी भरते ही नल की टोटी बंद कर देना चाहिए, जिससे जल बर्बाद होने से रोका जा सके। नहर में की गई साफ-सफाई छतरपुर जिले में जल स्त्रोतों के जीर्णोद्धार एवं मरम्मतीकरण का कार्य किया जा रहा है। उर्मिल वृहद योजना के अंतर्गत मुख्य नहर चैन क्रमांक 50 पर साफ सफाई का कार्य किया जा रहा है। गौरिहार के अंतर्गत लघु तालाब, मनुरिया की नहर में अनावश्यक पेड़-पौधे और झाड़-झाड़ियों की साफ सफाई का कार्य किया गया। साथ ही मध्यम परियोजना बेनीसागर बांध के अंतर्गत नहरों के अंतिम छोर में किलोमीटर स्टोन लगाने का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा ग्राम ढिमरवा में ग्रामीण के सहयोग से स्टॉप डैम के पास नाले में स्वच्छता अभियान चलाया गया। साथ ही बड़ामलहरा में अभियान अंतर्गत तालाब गहरीकरण एवं पिचिंग का कार्य भी किया जा रहा है। मैहर के बाबा तालाब घाट की सफाई की गई मैहर जिले में जन सहभागिता से बाबा तालाब परिसर के घाट की सफाई की गई। साथ ही स्वच्छता का संदेश देते हुए समुदाय को आगे आकर जल स्रोतों की सफाई करने का संकल्प दिलाया गया। सफाई अभियान के दौरान जिला प्रशासन अमले द्वारा जिले के तालाबों और जल स्रोतों पर किये गये अतिक्रमण को हटाने का भी निर्णय लिया गया। कुकड़ेश्वर की बावड़ी में किया गया श्रमदान नीमच जिले के मनासा में प्रेरणादायक पहल करते जल संरक्षण जागरूकता रैली का आयोजन कर कुकड़ेश्वर के चौधरी मोहल्ला वार्ड क्रमांक तीन स्थित प्राचीन बावड़ी में स्वच्छता श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया। जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर, विधायक मनासा अनिरूद्ध माधव मारू, नगर पालिका की उपस्थिति में श्रमदान किया गया।        जन अभियान परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष मोहन नागर ने जल संरक्षण पर मार्गदर्शन देते हुए कहा, कि मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव द्वारा जल स्रोतों के संरक्षण, स्वच्छता और जागरूकता की दृष्टि से शुरू किया गया जल गंगा संवर्धन अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण अभियान है। इस मौके पर संगोष्ठी में बताया गया कि हम सभी गांव में पहाड़ों या उंचे स्थानों पर कंटूर ट्रेंच … Read more

जल गंगा संवर्धन अभियान -इस वर्ष सबसे ज्यादा सीहोर जिले में शुरू हुए 687 से अधिक खेत-तालाब

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बारिश के पानी का संचयन करने और पुराने जल स्त्रोतों को नया जीवन देने के लिए प्रदेश में 90 दिवसीय जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इसमें प्रदेश के सभी जिलों में मनरेगा अंतर्गत खेत-तालाब, कूप रिचार्ज पिट, अमृत सरोवर सहित अन्य निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। सीहोर जिले ने बड़े पैमाने पर खेत-तालाब बनाने की मिसाल पेश की है। इस वर्ष 2025 में 687 से अधिक खेत तालाब प्रारंभ हो चुके हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत सीहोर जिले में लगभग 1670 खेत-तालाब के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 687 पर कार्य प्रारंभ हो गया है। इसी प्रकार 2600 कूप रिचार्ज पिट का निर्माण किया जाना है। निर्धारित लक्ष्य के विरूद्ध जिला प्रशासन द्वारा 2250 कार्यों की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें से 1440 पर कार्य भी प्रारंभ हो गया है। जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत जिलों में चल रहे कार्यों की मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा लगातार मॉनिटरिंग भी की जा रही है। किसानों ने भी दिखाई रुचि, जिला प्रशासन की मेहनत लाई रंग, सिंचाई में होगा फायदा किसान अपने खेतों में अधिक से अधिक खेत-तालाब बनवाए, इसके लिए जिला प्रशासन सीहोर की मेहनत रंग लाई है। खेत-तालाब को बनवाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को जागरूक किया गया। खेत तालाब का महत्व बताया। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीणों ने पानी के महत्व को समझा और खेत-तालाब को बनवाने में रुचि दिखाई। खेत-तालाब बनने से किसानों को सिंचाई के लिए आसानी से पानी मिलेगा। साथ पानी बहने के बजाय जमीन में जाएगा। इससे कुओं और ट्यूबवेल का वॉटर लेवल बढ़ेगा, जिसका फायदा किसानों को होगा। फसलों की सिंचाई के साथ कर सकेंगे मछली पालन सीहोर जिले की जनपद पंचायत इछावर की ग्राम पंचायत हालियाखेड़ी के ग्राम बालापुरा के किसान पीयूष, बापू सिंह, हजारी लाल, रामप्रसाद ने बताया कि पथरीली व बंजर जमीन होने के साथ पानी की सुविधा भी नहीं थी। इस वजह से फसलों की सिंचाई नहीं हो पाती थी। अब गांव में खेत तालाब बन जाने से फसलों की दो से तीन बार सिंचाई कर सकेंगे। साथ ही मत्स्य पालन सहित अन्य कार्य भी कर सकेंगे। किसानों ने गांव में खेत-तालाब बनने से खुशी जताई है। उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत हालियाखेड़ी में अब तक 7 खेत-तालाब बनाए जा चुके हैं और 5 प्रगतिरत है। सिपरी सॉफ्टवेयर बना मददगार जिला प्रशासन सीहोर के अनुसार खेत-तालाब के निर्माण में मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा तैयार कराया गया सिपरी साफ्टवेयर मददगार बना है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्थल चयन करने में आसानी हुई है। सिपरी (Software for Identification and Planning of Rural Infrastructure) सॉफ्टवेयर एक उन्न्त तकनीक का सॉफ्टवेयर है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से जियोमार्फोलॉजी और हाइड्रोलॉजी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके संरचनाओं का सही स्थान तय किया जा सकता है।  

नौ साल बाद प्रदेश में मोहन सरकार पदोन्नति की व्यवस्था शुरू करने की मंशा के साथ नए नियम बनाने में जुटी

भोपाल नौ साल बाद प्रदेश में मोहन सरकार पदोन्नति की व्यवस्था शुरू करने की मंशा के साथ नए नियम बनाने में जुटी है। इसमें जो प्रविधान प्रस्तावित किए जा रहे हैं वे पदोन्नति में आरक्षण नियम 2002 के तरह ही हैं। इसमें एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षण अनुसार पदोन्नति के पद सुरक्षित रहेंगे। शेष अनारक्षित पदों के लिए जो योग्यता सह वरिष्ठता का फार्मूला बनेगा, उसमें आरक्षित वर्ग भी शामिल रहेगा। यही पदोन्नति में आरक्षण नियम-2002 के विरोध का प्रमुख कारण था।    कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार को क्रमोन्नति जैसा फार्मूला निकालना चाहिए जिसमें सबको बराबरी से आगे बढ़ने का अवसर मिले। यही स्थिति अब फिर बनती नजर आ रही है। सामान्य, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष केपीएस तोमर का कहना है कि अभी नए नियम का प्रारूप हमसे साझा नहीं किया गया है। पर जो बात सामने आ रही है, वह इशारा कर रही है कि लगभग पुरानी व्यवस्था ही बहाल करने की तैयारी है। यदि ऐसा होता है तो यह सुप्रीम कोर्ट के एम.नागराज सहित समय-समय पर दिए गए निर्देशों के विपरीत होगा। इसको लेकर हम विभाग के सामने प्रस्तुतीकरण भी दे चुके हैं। एससी-एसटी वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में पदोन्नति में आरक्षण दिया जाता है और अनारक्षित पदों पर उन्हें अनारक्षित मानकर योग्यता सह वरिष्ठता के आधार पर लाभ दिया जाता है तो यह दोहरा लाभ देने और सामान्य वर्ग के कर्मचारियों के हितों की अवहेलना का मामला होगा। वर्ष 2016 तक पुराने नियम से पदोन्नति पाकर आरक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी पहले ही ऊपर आ चुके हैं। यहीं से फिर पदोन्नति की प्रक्रिया आरंभ करने पर निश्चित तौर पर वे ही लाभान्वित होंगे। उच्च पदों पर अनारक्षित वर्ग पहुंच ही नहीं पाएगा। एम. नागराज के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कार्य दक्षता का आकलन करने के निर्देश दिए थे, उसका प्रविधान होना चाहिए और इसके लिए अलग प्रणाली हो। क्रीमीलेयर की तो बात ही नहीं हो रही है, जबकि हरियाणा के पदोन्नति में आरक्षण देने के निर्णय को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट निर्णय सुना चुकी है कि पदोन्नति में आरक्षण देने से पहले क्रीमीलेयर के सिद्धांत का पालन करना अनिवार्य होगा। समयमान का फार्मूला ही बेहतर उधर, मंत्रालयीन अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक का कहना है कि यह बात समझ नहीं आती है कि पदोन्नति के मामले में असंमजस क्यों है। समयमान के साथ उच्च पदनाम देकर आसानी से समाधान हो सकता है। इसमें न किसी वर्ग की नाराजगी होगी और न ही कोर्ट की अवमानना। राज्य प्रशासनिक सेवा, कोष एवं लेखा, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, जनजातीय कार्य सहित अन्य विभाग इसे अपना भी चुके हैं और वहां कोई विवाद भी नहीं है। समयमान वेतनमान के साथ उच्च पदनाम देना ही इस मुद्दे का निर्विवाद और सर्वमान्य हल है। नियम लागू करते ही कैविएट लाएगी सरकार नए पदोन्नति नियम में आरक्षण शब्द ही नहीं रखा जा रहा है। इस नियम को पदोन्नति नियम-2025 कहा जाएगा। इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलती है तो सामान्य प्रशासन विभाग हाई कोर्ट में कैविएट दायर करेगा ताकि यदि कोई इसे चुनौती देता है तो बिना सरकार का पक्ष सुने कोई आदेश न हो। दरअसल, विभाग को अंदेशा है कि नियम लागू होते ही प्रभावित पक्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।  

दिलीप जायसवाल ने कहा- प्रदेश में हाथकरघा एवं हस्तशिल्प के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं

भोपाल कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि प्रदेश में हाथकरघा एवं हस्तशिल्प के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भोपाल, शहडोल, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और इन्दौर में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में हाथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास निगम द्वारा सफलतापूर्वक भाग लिया गया। निगम के मृगनयनी एम्पोरियम, मुम्बई व टी.टी. नगर, भोपाल को विश्व स्तर पर आकर्षित करने के लिये आंतरिक साज-सज्जा की गयी। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि हैण्डलूम दिवस के उपलक्ष्य में प्रदेश के 5 बुनकरों को पुरस्कृत किया गया। हैण्डलूम कपड़ों पर आधारित फैशन-शो का आयोजन कॉलेज की छात्राओं के सहयोग से गौहर महल भोपाल में किया गया। निगम ने बर्मिंघम, इंग्लैंड में 1 से 4 सितम्बर 2024 तक आयोजित ओटोमन फेयर में भी भाग लिया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल लक्ष्य 32 करोड़ रूपये के विरूद्ध 20 करोड़ रूपये की लक्ष्य उपलब्धि प्राप्त हुई, जो विक्रय लक्ष्य का 62.5 प्रतिशत है। वर्ष 2025-26 के लिये निगम की ब्रिकी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 34.71 करोड़ रूपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। एम्पोरियम के माध्यम से प्रदर्शनी, थीम सेल, एक्सपो का आयोजन कर अधिक से अधिक बिक्री कर लक्ष्य की प्राप्ति की जायेगी। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि माह मार्च 2025 में हैरिटेज कलेक्शन प्रदर्शनी का आयोजन गौहर महल भोपाल में किया गया। निगम की वेब साइट का निर्माण एमपीएसईडीसी के माध्यम से किया जा रहा है, जिसका निगम के उत्पादों की बिक्री के लक्ष्य प्राप्ति में अहम योगदान होगा। वर्ष 2024-25 में विशेष रूप से बड़ी प्रदर्शनी जैसे सावन मेला, दीपोत्सव मेला, लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर मेले का आयोजन किया, जिससे प्रदेश के बुनकरों और शिल्पियों को अपना जीवन स्तर बेहतर बनाने तथा अधिक आय प्राप्त करने के अवसर मिले। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2025 के उपलक्ष्य में महिला ग्राहकों को हैण्डलूम सामग्री को आकर्षित करने के लिए 35 प्रतिशत फ्लैट डिस्काउंट समस्त एम्पोरियमों में दिया गया। इस अवसर पर 1 करोड़ 10 लाख रूपये का विक्रय हुआ, जिससे प्रदेश के बुनकरों को भी लाभ हुआ। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग द्वारा प्रस्तावित नवीन उल्लेखनीय कार्य राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि हाथकरघा बुनकरों के बच्चों को प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश दिलाए जाने के लिए विभाग द्वारा तकनीकी शिक्षा विभाग की मेधावी छात्रा योजना में अन्तर्विभागीय लिंक स्थापित करने की कार्रवाई की जा रही है। बुनकरों एवं शिल्पियों को भविष्य में दिए जाने वाले कई प्रकार के लाभ सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान किए जाना प्रस्तावित है। प्रदेश के आदिवासी जिले अनूपपुर में हाथकरघा प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में प्रदेश में बनाए जाने वाले उत्पादों के विक्रय के लिए संत रविदास हस्तशिल्प विकास निगम, भोपाल में लगभग 3 हजार वर्गफीट का स्थान आरक्षित किया जा चुका है। शोरूम की आंतरिक साज-सज्जा, भव्यता के लिये केंद्र शासन को एक प्रस्ताव भेजा गया है, इस राशि के प्राप्त होते ही प्रदेश में अपने प्रकार का एक विशिष्ट एवं उत्कृष्ट शोरूम स्थापित किया जाएगा। ओडीओपी योजना में प्रदेश के 7 जिलों में विशिष्ट उत्पादों का जीआई पंजीकरण कराया जा रहा है और इन उत्पादों को निर्यात किए जाने की कार्यवाही की जा रही है। प्रदेश में सोने और चांदी के उत्पादों की ‘ठेवा कला’ के माध्यम से राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थान प्राप्त करने के लिए विशिष्ट योजना तैयार की जा रही है। लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर की 500वीं जयंती के अवसर पर महेश्वर में महेश्वरी वस्त्रों और साड़ियों का 500 नगों में विशिष्ट संग्रह तैयार कराया जा रहा है, जिसे शीघ्र ही ‘माँ अहिल्या देवी संग्रह’ के नाम से विक्रय केन्द्रों में उपलब्ध कराया जाएगा। शासन के निर्देशानुसार एवं वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विभागीय योजनाओं का आधुनिकीकरण एवं विस्तार किया जा रहा है।  

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