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पन्ना में हीरा कारोबार को नया मुकाम, पहली बार संयुक्त नीलामी से कारोबार में बढ़ोतरी की उम्मीद

पन्ना देश की एकमात्र मशीनीकृत हीरा खदान संचालित करने वाली कंपनी की मझगवां स्थित हीरा परियोजना और उथली खदानों से प्राप्त हीरों की नीलामी पहली बार एक साथ पन्ना में होगी। बहुप्रतीक्षित नीलामी 15 से 30 मार्च के बीच नव-निर्मित हीरा कार्यालय परिसर में हो सकती है। देश की एकमात्र मशीनीकृत हीरा खदान राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी- नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) की हीरा खदान देश की एकमात्र मशीनीकृत हीरा खदान है। यहां अत्याधुनिक अयस्क प्रसंस्करण संयंत्र है। संयुक्त नीलामी के लिए नवनिर्मित हीरा कार्यालय के हॉल को तैयार किया जा रहा है। एसी की व्यवस्था पूरी हो चुकी है। फर्नीचर और अन्य आवश्यक काम अंतिम चरण में है। तीन साल बंद रहा उत्पादन 1 जनवरी 2021 को पर्यावरणीय स्वीकृति समाप्त होने सेएमपीके मझगवां हीरा खदान से खनन बंद हो गया था। लगभग तीन वर्ष तक उत्पादन ठप रहा। मार्च 2024 में पुन: खनन शुरू किया गया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद एनएमडीसी को दो खनन पट्टों पर खनन की मंजूरी दी गई है।

मजदूरों के लिए बड़ा सवाल: 6 साल में 1% को ही 100 दिन का काम, कोविड में 10 लाख नाम हटने की बात विधानसभा में उजागर

भोपाल  प्रदेश में मनरेगा के तहत पिछले छह वर्षों में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी पूरे 100 दिन का रोजगार नहीं मिल पाया। यह खुलासा विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में हुआ। जवाब में सामने आया कि बड़ी संख्या में मजदूर पंजीकृत होने के बावजूद सीमित परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला। विधानसभा में दिए गए जवाब के अनुसार वर्ष 2021 में 1 करोड़ 70 लाख से अधिक पंजीकृत मजदूरों में से केवल 1 लाख 23 हजार परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला। वर्ष 2022 में यह संख्या घटकर 63 हजार 898 परिवार, वर्ष 2023 में 40 हजार 588, वर्ष 2024 में 30 हजार 420 और वर्ष 2025 में 32 हजार 560 परिवार रह गई। आंकड़ों के आधार पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि छह वर्षों में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी पूरा रोजगार नहीं मिल सका। 150 दिन रोजगार का प्रावधान भी अधूरा मनरेगा के तहत वनाधिकार पट्टाधारियों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में 24 जिलों में एक भी मजदूर को 150 दिन का रोजगार नहीं मिला। चार जिलों में मात्र एक-एक परिवार को ही 150 दिन काम दिया गया। जानकारी में बताया गया कि सबसे अधिक अलीराजपुर जिले में 112 परिवारों को 150 दिन रोजगार मिला, जबकि छिंदवाड़ा में 28, धार में 21, मंडला में 17 और दमोह में 16 परिवारों को यह लाभ मिला। आदिवासी जिला झाबुआ में 150 दिन रोजगार का आंकड़ा शून्य रहा। मजदूरी की मांग बढ़ी, रोजगार नहीं विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार कोविड काल के बाद से मजदूरी की मांग लगातार बढ़ी, लेकिन रोजगार उपलब्धता उसी अनुपात में नहीं बढ़ सकी। बड़ी संख्या में परिवारों और श्रमिकों ने काम की मांग की, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति पर सवाल खड़े हुए हैं। जॉब कार्डधारी परिवार बढ़े, काम कम मिला प्रदेश में जॉब कार्डधारी परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रति परिवार मिलने वाले कार्य दिवस घटे हैं। विपक्ष ने इसे सरकार की रोजगार नीति की विफलता बताते हुए कहा कि ग्रामीण मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिल पाने के कारण पलायन की स्थिति बन रही है। ऐसे घटता गया 100 दिन रोजगार पाने वालों का आंकड़ा साल पंजीकृत मजदूर 100 दिन रोजगार पाने वाले परिवार 2021 1,70,19,681 1,23,624 2022 1,81,42,207 63,898 2023 1,69,07,207 40,588 2024 1,70,42,207 30,420 2025 1,86,57,080 32,560 150 दिन रोजगार का प्रावधान भी अधूरा मनरेगा के तहत वनाधिकार पट्टाधारियों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन 2025-26 में स्थिति कमजोर रही। जिलावार स्थिति (150 दिन रोजगार): 24 जिलों में — एक भी परिवार को नहीं मिला रोजगार 4 जिलों में — सिर्फ 1 परिवार को मिला रोजगार अलीराजपुर — 112 परिवार छिंदवाड़ा — 28 परिवार धार — 21 परिवार मंडला — 17 परिवार दमोह — 16 परिवार झाबुआ — शून्य विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने स्वीकार किया कि पिछले वर्षों में लाखों परिवारों और श्रमिकों के नाम जॉब कार्ड से हटाए गए, जिनमें सबसे ज्यादा नाम कोविड काल के दौरान काटे गए। कोरोना काल में सबसे ज्यादा नाम हटे विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में 10 लाख 46 हजार 786 परिवारों के 43 लाख 43 हजार 378 श्रमिकों के नाम जॉब कार्ड से हटाए गए। उस समय रोजगार की मांग सबसे अधिक थी, लेकिन बड़ी संख्या में मजदूर योजना से बाहर हो गए। वर्षवार जॉब कार्ड से हटाए गए नाम 2021: 10,46,786 परिवार — 43,43,378 श्रमिक 2022: 1,71,389 परिवार — 7,71,730 श्रमिक 2023: 5,28,579 परिवार — 20,24,552 श्रमिक 2024: 45,516 परिवार — 1,91,183 श्रमिक 2025: 25,684 परिवार — 1,23,524 श्रमिक रोजगार की मांग के बीच बाहर हुए मजदूर आंकड़ों के मुताबिक कोविड के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की मांग लगातार बढ़ी, लेकिन उसी दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम जॉब कार्ड से हटाए जाने से मजदूरों को काम पाने में कठिनाई हुई। विपक्ष का आरोप कांग्रसे ने आरोप लगाया कि जब ग्रामीण मजदूरों को सबसे ज्यादा रोजगार की जरूरत थी, उसी समय नाम काटे जाने से उन्हें काम से वंचित होना पड़ा और पलायन की स्थिति बनी। विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों के बाद मनरेगा के क्रियान्वयन और जॉब कार्ड सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। मजदूरी की मांग भी रही ऊंची वर्ष परिवार श्रमिक 2021-22 61,66,780 1,21,95,233 2022-23 53,13,454 92,99,519 2023-24 46,99,747 76,31,549 2024-25 44,79,776 69,86,086 2025-26 42,64,414 65,47,787  

पॉक्सो मामलों में MP तेज़, दिल्ली में बच्चों के अपराधों की जांच में 4.5 साल का वक्त

भोपाल  मध्य प्रदेश में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज होने वाले गंभीर अपराधों के मामलों में पीड़ितों को न्याय मिलने की रफ्तार देश के कई बड़े राज्यों और महानगरों की तुलना में काफी बेहतर है। राज्यसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश के फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) में इन मामलों के ट्रायल (विचारण) में लगने वाला औसत समय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों के मुकाबले काफी कम है। एमपी में 380 दिन में फैसला, दिल्ली में साढ़े 4 साल विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी 2024 के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में एक पॉक्सो मामले के निपटारे में औसतन 380 दिन का समय लगता है। इसकी तुलना यदि अन्य राज्यों से की जाए, तो तस्वीर काफी चौंकाने वाली है।     दिल्ली: यहां पॉक्सो केस के ट्रायल में औसतन 1639.5 दिन (लगभग 4.5 साल) लग रहे हैं।     गुजरात: यहां न्याय मिलने में औसतन 1292.5 दिन का समय लगता है।     उत्तर प्रदेश: यहां भी ट्रायल में औसतन 861 दिन लगते हैं, जो एमपी से दोगुने से भी अधिक है। देशभर में 2.24 लाख से ज्यादा मामले लंबित मंत्रालय ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पॉक्सो अधिनियम के तहत कुल 2,24,572 मामले लंबित थे। इन मामलों के त्वरित निपटान के लिए वर्तमान में देश भर में 774 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय कार्य कर रहे हैं, जिनमें 398 विशेष तौर पर केवल पॉक्सो (ई-पॉक्सो) कोर्ट हैं। चाइल्ड फ्रेंडली न्याय प्रणाली पर सरकार का फोकस सरकार पीड़ितों को सुविधाजनक माहौल देने के लिए न्यायालय परिसरों के भीतर सुभेद्य साक्षी निक्षेपण केन्द्रों (VWDC) के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। इसके माध्यम से बच्चों के लिए डरावने न्यायिक वातावरण के बजाय एक ‘चाइल्ड फ्रेंडली’ माहौल तैयार किया जा रहा है। इसके लिए अब तक 10,000 से अधिक प्रतिभागियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। कानून व्यवस्था राज्य की जिम्मेदार मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं। इसलिए, कानून व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा और अपराधों की जांच व अभियोजन की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। केंद्र सरकार महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इसके लिए कई कदम उठा रही है। 2.45 मामले अभी भी पेंडिंग न्याय में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार ने फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों और विशेष POCSO अदालतों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। 31 दिसंबर 2025 तक, देश भर में 774 FTSCs और 398 e-POCSO अदालतें काम कर रही हैं। इन अदालतों ने 3.66 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया है, जबकि लगभग 2.45 लाख मामले अभी भी लंबित हैं। 22 राज्यों में 880 फास्ट ट्रैक अदालत इसके अलावा, 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 880 फास्ट-ट्रैक अदालतें भी चल रही हैं। ये अदालतें गंभीर अपराधों, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और लंबी बीमारियों से पीड़ित लोगों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई करती हैं। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि मध्य प्रदेश में इन 880 अदालतों में से एक भी फास्ट-ट्रैक अदालत कार्यरत नहीं है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 373 और महाराष्ट्र में 102 ऐसी अदालतें हैं। मध्य प्रदेश में 67 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतें, जिनमें POCSO अदालतें भी शामिल हैं, कार्यरत हैं। अब ट्रायल को भी समझ लीजिए     ट्रायल का औसत समय: विशेष रूप से उस अवधि को दर्शाता है जो अदालत में ‘ट्रायल’ (विचारण) की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अंतिम फैसले तक लगती है।     ट्रायल की शुरुआत: कानूनी प्रक्रिया में ट्रायल तब शुरू माना जाता है, जब पुलिस अपनी जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल कर देती है और अदालत उस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू करती है।     अवधि की गणना: दस्तावेजों में ‘औसत विचारण समय’ की गणना उन दिनों के आधार पर की गई है जो फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) और अनन्य पॉक्सो (e-POCSO) न्यायालयों में मामले की सुनवाई चलने और फैसला आने के बीच व्यतीत हुए हैं।     केस दर्ज होने से अंतर: आमतौर पर केस दर्ज होने (FIR) और विचारण (Trial) शुरू होने के बीच ‘जांच’ का समय होता है। जो 380 दिन (मध्य प्रदेश के लिए) का आंकड़ा दिया गया है, वह मुख्य रूप से अदालती कार्यवाही (Trial) में लगने वाला समय है।     त्वरित निपटान का लक्ष्य: इन विशेष न्यायालयों का उद्देश्य ही यह है कि विचारण की इस अवधि को कम किया जाए ताकि पीड़ितों को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े। मंत्री बोले- जितना जल्दी न्याय मिलेगा, तभी हम कहेंगे न्याय हुआ पॉक्सो के मामलों के जल्द निपटारे पर मप्र के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा- न्याय जितने जल्दी मिले, तभी हम कह सकते हैं कि न्याय हुआ। अन्यथा जितना देरी होगी उतना अन्याय की दिशा में हम बढे़ेंगे। मप्र के लिए हमें यह संतोष है कि जो शिकायतें हुई उनका जितना जल्दी हो सके न्याय दिलाने का प्रयास किया है।

होटल रूम की गुत्थी: अंदर कौन था, कैसे हुई छात्रा की मौत? जांच में कई चौंकाने वाले मोड़

शिवपुरी फिजिकल थानांतर्गत खिन्नी नाके पर स्थित होटल युवराज में सोमवार को एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला दो दिन बाद भी अबूझ पहेली बना हुआ है। फिलहाल पुलिस भी मामले में कुछ स्पष्ट रूप से बताने को तैयार नहीं है। फिलहाल मर्ग कायम कर मामले की विवेचना की बात कही जा रही है। उल्लेखनीय है कि 16 फरवरी को सेसई निवासी नैनसी पुत्र राजू राठौर उम्र 20 साल सुबह घर से कॉलेज का फार्म भरने जाने की बात कह कर गांव के अंकुश रावत के साथ खिन्नी नाके के पास स्थित होटल युवराज में पहुंची थी। जहां उसकी संदिग्ध हालातों में मौत हो गई। फिलहाल मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के उपरांत ही कुछ बता पाने की बात कह रही है। पुलिस ने अंकुश रावत नाम के जिस युवक को हिरासत में लिया था उसे भी छोड़ दिया है। इस मामले में बुधवार को जब होटल युवराज के स्टाफ से घटना के संबंध में जानकारी जुटाने का प्रयास किया तो स्टाफ ने बताया कि सोमवार को लड़का-लड़की दोनों एक साथ कार में सवार होकर सुबह करीब 11:15 बजे होटल पहुंचे थे। उन्होंने कमरा नंबर 308 बुक किया। लगभग दो घंटे बाद लड़का, लड़की को बेहोशी की हालत में लेकर नीचे आया और बताया कि अचानक इसकी तबीयत खराब हो गई है। होटल स्टाफ के अनुसार लड़के के कहने पर उन्होंने मदद करके लड़की को कार में रखवाया और वह चला गया। स्टाफ की मानें तो उन्हें प्रथम दृष्टया कमरे में फांसी जैसा कुछ नजर नहीं आया। इसके बाद पुलिस ने कमरे को सील कर दिया है। कमरे की चाबी टीआई मेडम के पास है। अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई, लड़का फांसी लगाना बता रहा टीआईइस मामले में फिजिकल थाना प्रभारी टीआई नम्रता भदौरिया का कहना है कि लड़के ने प्रारंभिक पूछताछ में यह बताया कि, लड़की उस पर शादी का दबाव बना रही थी, उसने फिलहाल शादी करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि, वह शादी तो घर वालों की मर्जी से ही करेगा। इसके बाद लड़की ने फांसी लगा ली। हालांकि लड़के की कमरे में मौजूदगी के दौरान लड़की द्वारा फांसी लगा पाने के संबंध में टीआई का कहना है कि लड़के के अनुसार वह जब बाहर चला गया था, तब लड़की ने अपने दुपट्टे से फांसी लगाई, जबकि होटल के स्टाफ की मानें तो लड़का-लड़की जब कमरे में गए उसके बाद कोई भी होटल से बाहर नहीं निकला।

उमरिया स्कूल में छात्राओं के ‘झूमने’ पर अफरा-तफरी, मेडिकल रिपोर्ट सामान्य फिर भी अंधविश्वास हावी

नौरोजाबाद उमरिया जिले के करकेली जनपद अंतर्गत कल्दा गांव मे स्थित शासकीय हाई स्कूल की चार छात्राएं अचानक झूमने लगीं। छात्राओं के झूमने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में विद्यालय में अध्ययनरत कुछ बच्चियों के कथित तौर पर “भूत लगने” की बात सामने आई है, जिसे लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। हालांकि सीएससी पाली के डा पवन कुमार दीपांक का कहना है कि उन्होंने बच्चियों की जांच की है और वे पूरी तरह से सामान्य हैं। उनका कहना है कि उनसे लोग इस मामले को भूत-प्रेत का बता रहे थे पर इस तरह की बातों को मेडिकल साइंस में किसी भी तरह की मान्यता नहीं है। कराई गई झाड़फूंक बताया जा रहा है कि बच्चियों की तबीयत अचानक बिगड़ने और अजीब व्यवहार करने की बात सामने आने के बाद ग्रामीणों ने इसे अंधविश्वास से जोड़ दिया। इसके बाद गांव के पंडा-पुजारी द्वारा झाड़-फूंक की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। तेजी से वायरल हो रहा वीडियो जानकारी के अनुसार बच्चियों को गांव के ही प्रसिद्ध धार्मिक स्थल महोबादादर मंदिर ले जाया गया, जहां कथित रूप से उनका झाड़-फूंक के जरिए उपचार किया जा रहा है। वीडियो आने के बाद दौड़े अधिकारी इस पूरी घटना का वीडियो किसी ग्रामीण द्वारा बनाकर इंटरनेट मीडिया पर अपलोड कर दिया गया, जिसके बाद यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया। यह भी पढ़ें- थाने पहुंची महिला बोली- पहले पति ने बेचा, खरीदने वालों ने जहां सगाई की वहां से भी अपहरण कर लिया शिक्षा विभाग में चर्चा शुरू वीडियो बहुप्रसारित होने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक स्तर पर भी मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। और पाली अनुविभागीय अधिकारी मीनाक्षी इंगले की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि बीईओ सरिता जैन को उन्होंने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी आरएस मरावी का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।  

लोकायुक्त की कार्रवाईः दूसरी किस्त लेते ही पटवारी गिरफ्तार, जांच आगे बढ़ी

मंदसौर मध्यप्रदेश में भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार जारी है। इसके बाद भी भ्रष्टाचार के मामले कम नहीं हो रहे हैं। ताजा मामला प्रदेश के मंदसौर जिले का है जहां पटवारी को रिश्वत लेते लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। समाचार के लिखे जाने तक आरोपी पटवारी के खिलाफ कार्रवाई जारी थी। सुवासरा तहसील का पटवारी हरीश पाटीदार दरअसल मामला मंदसौर जिले के सुवासरा तहसील का है जहा पदस्थ पटवारी हरीश पाटीदार रिश्वत लेते हुए पकड़ाया है। उसने भूमि के नामांतरण के लिए 40 हजार की रिश्वत मांगी थी। इसकी शिकायत पीड़ित ने लोकायुक्त से की थी। उज्जैन लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई शिकायत की पुष्टि के बाद दूसरी किस्त में 30 हजार रुपए लेते हुए लोकायुक्त की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई उज्जैन लोकायुक्त पुलिस ने की है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं तहत कार्रवाई की जा रही है।

87.21 करोड़ लागत के 41 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए दृढ़संकल्पित होकर कार्य कर रहे है। मध्यप्रदेश विधानसभा में 4 लाख 38 हजार करोड़ रुपए से अधिक का ऐतिहासिक बजट प्रस्तुत किया गया है। कृषि कल्याण वर्ष में प्रदेश के किसानों के लिए एक लाख करोड़ से अधिक राशि का प्रावधान किसान हितैषी योजनाओं के लिये किया गया है। प्रदेश सरकार का किसानों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का यह प्रमाण है। उन्होंने कहा गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी कल्याण के साथ हम प्रदेश को प्रगति पथ पर आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में लंबे समय से अग्रणी है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने पशुपालन और दूध उत्पादन बढ़ाने का संकल्प लिया है। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना से प्रदेश में दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को किसान कल्याण वर्ष के उपलक्ष में ग्वालियर जिले में भगवान जगन्नाथ की पुण्य भूमि ग्राम कुलैथ में आयोजित हुए विशाल किसान सम्मेलन में किसान भाईयों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 87 करोड़ 21 लाख रुपए से अधिक लागत के 41 विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमि-पूजन किया। साथ ही कुलैथ क्षेत्र के विकास के लिये बड़ी-बड़ी सौगातों की घोषणा भी की। उन्होंने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देने के लिये लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। किसानों की पट्टों वाली जमीन की अपने खर्चे पर सरकार कराएगी रजिस्ट्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की जमीन के पट्टों की रजिस्ट्री का पूरा खर्च सरकार उठाएगी, इसके लिए बजट में पर्याप्ट धनराशि का प्रावधान किया गया है। इससे किसानों को बैंकों से योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए सरकार द्वारा हर संभव कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश के किसानों को सोलर पंप वितरित कर उन्हें बिजली उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। बुंदेलखंड की केन-बेतवा लिंक परियोजना का लाभ चंबल क्षेत्र के किसानों को भी मिलने वाला है। सिंचाई की सुविधा मिलने से यहां खेतों में फसलें लहलहाएंगी। सुपोषण के लिये सरकार स्कूली बच्चों को नि:शुल्क दूध उपलब्ध कराएगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पहली से 8वीं कक्षा तक के बच्चों के सुपोषण के लिये सरकार नि:शुल्क दूध उपलब्ध कराएगी। इस साल के बजट में यह योजना प्रस्तावित की गई है। साथ ही बजट में लाड़ली बहनों के लिए 23 हजार करोड़ से अधिक राशि आवंटित की गई है। कन्हैया लोकगीतों का लिया आनंद और पुष्पवर्षा कर किया अभिनंदन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण का स्मरण करने से जीवन की अनेक कठिनाइयां खत्म हो जाती हैं। बाबा महाकाल ने सभी के जीवन का समय निश्चित किया है, इसलिए समाज कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीण पारंपरिक लोक गायकों द्वारा प्रस्तुत कन्हैया लोकगीतों का आनंद भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लिया। उन्होंने मनमोहक कन्हैया लोक गीत प्रस्तुत करने वाले लोक गायकों का पुष्प वर्षा कर अभिनंदन और उत्साहवर्धन किया। लोक गायन में भाग लेने वाली सभी 18 टीमों को 5 – 5 हजार रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की। बैलगाड़ी दौड़ में शामिल लोगों का किया उत्साहवर्धन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान सम्मेलन स्थल के समीप स्थानीय किसानों द्वारा आयोजित पारंपरिक बैलगाड़ी दौड़ भी देखी। उन्होंने बैलगाड़ी दौड़ में शामिल हुईं 28 बैलगाड़ियों को प्रोत्साहन स्वरूप 5-5 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही बैलगाड़ी दौड़ में प्रथम और द्वितीय पुरस्कार के लिए क्रमश: 21 व 11 हजार रुपए प्रदान करने की घोषणा भी की। रोड-शो में स्थानीय निवासियों ने पुष्प वर्षा कर किया अभिनंदन ग्वालियर के कुलैथ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव जब हैलीपेड से रथ पर सवार होकर रोड-शो करते हुए आगे बढ़े तो मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में मौजूद जनसमुदाय द्वारा उनका पुष्प वर्षा कर भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी जनता का अभिवादन किया। कुलैथ क्षेत्र के लिये की बड़ी-बड़ी सौगातों की घोषणा भगवान जगन्नाथ की पुण्य भूमि कुलैथ में आयोजित विशाल किसान सम्मेलन में शामिल होने आए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुलैथ क्षेत्र को विकास कार्यों की बड़ी-बड़ी सौगातें देने की घोषणा की। इनमें डंडे वाले बाबा मंदिर तक एक किलोमीटर लम्बी सड़क व ट्रांसफार्मर, भगवान जगन्नाथ मंदिर के दर्शन के लिये आने वाले श्रृद्धालुओं को ठहरने के लिये सामुदायिक भवन, युवाओं के लिये खेल मैदान व कुलैथ क्षेत्र में उद्योग की स्थापना शामिल है। साथ ही ग्राम पंचायत सुसैरा, ब्रह्मपुरा, साईंपुरा व ग्राम पंचायत सोजना के बंजारे का पुरा को आबादी क्षेत्र बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस क्षेत्र की महेश्वरा पत्थर खदान को फिर से चालू कराने के लिये आशवस्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर क्षेत्र के लिये हमेशा सौगातें लेकर आते हैं – सांसद  कुशवाह सांसद  भारत सिंह कुशवाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर क्षेत्र के लिये हमेशा बड़ी-बड़ी सौगातें लेकर आते हैं। उन्होंने आज भी 87 करोड़ से अधिक लागत के विकास कार्यों की सौगातें दी हैं। साथ ही विधानसभा में प्रस्तुत हुए बजट में विकास के लिये लगभग 4 लाख करोड़ से अधिक धनराशि का प्रावधान किया है। सांसद  कुशवाह ने कहा कि खुशी की बात है कि ग्वालियर संसदीय क्षेत्र में पुल-पुलियाओं व सड़कों के निर्माण के लिये भी लगभग 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। उन्होंने इसके लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति क्षेत्रीय जनता की ओर से धन्यवाद व्यक्त किया। हितलाभ वितरण एवं प्रदर्शनी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसान सम्मेलन में सरकार की किसान हितैषी व अन्य योजनाओं के तहत मुख्य मंच से प्रतीक स्वरूप हितलाभ भी वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर लगी कृषि प्रदर्शनी में लगाए गए 16 स्टॉलों का भ्रमण कर विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं द्वारा प्रदर्शित योजनाओं, नवाचारों एवं तकनीकी जानकारी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ फूलों की खेती एवं ड्रिप स्प्रिंकलर का लाइव डेमो प्रस्तुत किया गया। … Read more

रोड सेफ्टी पर फोकस, हादसे रोकने के लिए चल रहे विशेष मैनेजमेंट कोर्स

भोपाल  पुलिस परिवहन शोध संस्थान (पीटीआरआई) द्वारा मध्यप्रदेश में सड़क पर होने वाली वाहन दुर्घटना एवं दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से लगातार सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स हो रहे हैं। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री विवेक शर्मा के निर्देशन पर पीटीआरआई में अतिरिक्‍त पुलिस अधीक्षक से उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स के माध्यम से दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य सड़क उपयोगकर्ताओं को एक सुरक्षित सड़क नेटवर्क उपलब्ध कराने, पदयात्रियों तथा सायकिल, वाहन चालकों को प्राथमिकता और भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्‍या एवं सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्‍या में कमी लाना है । प्रशिक्षण सत्र के शुभारंभ पर उप पुलिस महानिरीक्षक पीटीआरआई श्री टी.के. विद्यार्थी ने सड़क दुर्घटनाओं की भयावहता को प्रशिक्षणार्थियों के सम्मुख रखा। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा को मूलभूत यातायात सेवा में अविभाज्य अंग के रूप में मान्यता देना है। उनके द्वारा यातायात प्रवर्तन को दृष्टिगत रखते हुये ई-इनफोर्समेंट पर जोर दिया गया। साथ ही ओवर स्‍पीडिंग से निदान के लिये इन्‍टरसेप्‍टर व्‍हीकल की उपयोगिता को बढ़ाए जाने का अनुरोध किया गया। वर्तमान में भारत सरकार की योजनाओं राहवीर एवं केशलैस उपचार के साथ गोल्‍डर ऑवर की अवधारणा से प्रशिक्षुओं को अवगत कराया। इस दौरान पीटीआरआई के सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्री अभिजीत कुमार रंजन, श्री राजेश मिश्रा, उपुअ श्री मनोज खत्री एवं प्रशिक्षण टीम के अधिकारी उपस्थित थे। कोर्स के समापन के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को पीटीआरआई द्वारा प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र प्रदाय किया गया।

शौक बना अपराध: पोर्न इंडस्ट्री में नाम कमाने के लिए पति ने किया पत्नी का सेक्स वीडियो वायरल

रीवा पोर्न स्टार बनने की चाहत ने एक पति को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। आरोपी ने अपनी ही पत्नी के साथ सेक्स का पोर्न वीडियो बनाया और उसे वायरल कर दिया। बताया गया आरोपी ने अपनी नवविवाहिता पत्नी के साथ संबंध बनाते हुए वीडियो रिकॉर्ड किया था। इसके बाद इन अश्लील वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड किया था। 13 मिनट की क्लिप देखकर इंटरनेट पर सनसनी मच गई थी। वहीं पीड़िता ने इसकी शिकायत थाने में की थी। जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपी को दबोच लिया है। यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के रीवा जिले का है। जहां दहेज लोभी पति शिवम साहू ने इंसानियत की सारी सीमाएं पार कर दी। उसने अपनी पत्नी को पहले दहेज के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। बात नहीं बनी तो उसने अपनी पत्नी का दिल जीता और भरोसे में लेकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। सेक्स के दौरान के पलों को अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। इसके बाद इस अश्लील क्लिप को फेसबुक, इंस्टाग्राम पर वायरल कर दिया था। पीड़िता ने थाने में शिकायत कर बताई पूरी कहानी सोशल मीडिया पर 13 मिनट का वीडियो वायरल होते ही सनसनी मच गई। जब पीड़िता और उसे घर वालों ने यह वीडियो देखा तो उनके भी पैरों तले जमीन खिस गई। कुछ समझ नहीं आ रहा था। इसके बाद उन्होंने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता के मुताबिक, शादी से पहले ही उसके ससुराल वाले दहेज के लिए दबाव बना रहे थे। परिवार ने असमर्थता जताई थी। जिसके बाद विवाह सम्पन्न हुआ और उसे ससुराल विदा कर दिया गया। ससुराल पहुंचने के बाद पति शिवम साहू दहेज के लिए लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। पीड़िता ने शिकायत में बताया था कि जब शिवम को सफलता नहीं मिली तो उसने बहला फुसला कर संबंध बनाए और निजी पलों का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। इसके कुछ समय बाद एक बार फिर दहेज की मांग की। जब डिमांड पूरी नहीं हुई तो उसने वीडियो को वायरल कर दिया। आरोपी शिवम साहू ट्रक ड्राइवर है। फिलहाल पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

मेडिकल पेशे को शर्मसार करने वाली घटना, इलाज का झांसा देकर महिला से दुष्कर्म

भोपाल ग्वालियर के एक डॉक्टर ने इलाज के बहाने महिला मरीज को भोपाल लाकर उससे दुष्कर्म किया। डॉक्टर सात महीने से महिला के चर्म रोग का इलाज कर रहा था। सुधार न होने पर वह 14 फरवरी को उसे टेस्ट व विशेषज्ञ डॉक्टर से इलाज के लिए भोपाल लेकर पहुंचा। यहां डॉक्टर इलाज के लिए अस्पताल की बजाए होटल लेकर पहुंच गया और दवाई के साथ नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। बाद में बेहोशी का फायदा उठाकर उससे दुष्कर्म किया। मरीज को झांसा देकर होटल ले गया आरोपी डॉक्टर महिला ने तुरंत अपने पति को फोन कर घटना बताई। शिकायत पर एमपी नगर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। एसआइ अर्चना तिवारी ने बताया कि 30 वर्षीय महिला ग्वालियर की रहने वाली है। वहां के ही डॉक्टर अमरीश सेंगर से सात महीने पहले उसने चर्मरोग का इलाज कराना शुरू किया। इस दौरान सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टर अमरीश ने कहा कि आगे के इलाज के लिए हमें भोपाल जाकर विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाना होगा तथा कुछ टेस्ट भी करवाने होंगे। नशीला पदार्थ पिलाकर वारदात को दिया अंजाम 14 फरवरी को डॉक्टर अमरीश और महिला मरीज भोपाल पहुंचे तथा एमपी नगर जोन टू स्थित एक होटल में ठहर गए। महिला को शक हुआ तो उसने अपने पति को फोन कर पति को होटल में जाने की बात बताई। यह सुनने के बाद पति ग्वालियर से भोपाल के लिए निकल गया। इधर रात को डॉक्टर ने नशीला पदार्थ पिलाया और बेहोशी की हालत में उससे दुष्कर्म किया। मंगलवार को महिला और उसके पति ने एमपी नगर थाने में शिकायत की है।

स्टोर रूम में लगी आग से अस्पताल में भगदड़, भोपाल के जेपी हॉस्पिटल में बड़ा हादसा टला

भोपाल।  राजधानी के प्रमुख शासकीय जय प्रकाश (जेपी) अस्पताल में बुधवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब ओपीडी ब्लॉक की पहली मंजिल पर स्थित स्टोर रूम से अचानक आग की लपटें उठने लगीं। दोपहर में हुई इस घटना ने अस्पताल के सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी। प्लास्टिक और सर्जिकल सामान जलने से निकला काला धुआं चंद मिनटों में पूरे परिसर में फैल गया, जिससे ओपीडी में मौजूद डॉक्टर और मरीज जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागे। करीब 45 मिनट तक अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। सुरक्षा गार्ड हरिदेव का अदम्य साहस… ताला तोड़कर बुझाई आग जब आग लगी, तब स्टोर रूम का गेट बंद था और चाबी नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में सुरक्षा गार्ड हरिदेव यादव ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए गेट का ताला तोड़ा और फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से आग बुझाने में जुट गया। एक के बाद एक करीब आठ कंटेनर खाली करने के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस दौरान धुआं फेफड़ों में भरने से हरिदेव की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। दमकल की गाड़ियां सूचना के 30 मिनट बाद पहुंचीं, तब तक गार्ड आग बुझा चुका था। लाखों के स्प्रिंकलर हुए फेल, सिस्टम का नहीं हुआ था हैंडओवर हैरानी की बात यह है कि बीते साल अस्पताल में लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए ऑटोमैटिक वाटर स्प्रिंकलर और फायर डिटेक्शन सिस्टम ने काम ही नहीं किया। जांच में सामने आया कि अस्पताल प्रबंधन ने अब तक फायर सेफ्टी एजेंसी को सिस्टम का हैंडओवर ही नहीं दिया था, जिसके चलते आधुनिक उपकरण केवल दीवार की शोभा बढ़ा रहे थे। जेपी अस्पताल में हुई आगजनी की घटना की प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट की बात सामने आ रही है। अस्पताल में फायर सेफ्टी उपकरणों के हैंडओवर और उनके संचालन में हुई देरी को लेकर सिविल सर्जन से रिपोर्ट तलब की गई है। लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी जिला अस्पतालों को पुनः फायर ऑडिट के निर्देश दिए गए हैं। – डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल  

भोपाल में पारिवारिक विवाद बना हिंसा की वजह, कजलीखेड़ा थाने की पहली FIR में बेटे पर पिता से मारपीट का आरोप

 भोपाल भोपाल के कोलार क्षेत्र को विभाजित कर बनाए गए 38वें थाने ‘कजलीखेड़ा’ में सोमवार रात से कामकाज औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। उद्घाटन के कुछ ही घंटों के भीतर थाने में मारपीट और सड़क दुर्घटना के दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए। कजलीखेड़ा थाने की डायरी में दर्ज होने वाला सबसे पहला अपराध एक पारिवारिक विवाद रहा। टावर के पास रहने वाले 45 वर्षीय जगदीश वाल्मीकि ने अपने बेटे देवा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। विवाद की वजह बेहद मामूली थी, जहां जगदीश ने अपने बेटे को बाहर का खाना खाने से मना किया था। यह बात देवा को इतनी नागवार गुजरी कि उसने अपने पिता की बेरहमी से पिटाई कर दी और उनका सिर दीवार से टकरा दिया। सिर फटने और खून निकलने के बाद पिता ने नवगठित थाने पहुंचकर बेटे के खिलाफ केस दर्ज कराया। दूसरा मामला- तेज रफ्तार कार की टक्कर थाने में दूसरी रिपोर्ट कंप्यूटर ऑपरेटर हर्ष जैन ने दर्ज कराई। सोमवार रात करीब 9:30 बजे कोलार रोड पर उनकी खड़ी कार को एक तेज रफ्तार अज्ञात कार चालक ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में हर्ष की कार का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।  

प्रदेश में उपलब्ध बजट को पांच साल में दोगुना करने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार कर रही है कार्य

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिक्षा को जीवन के अनुभवों से जोड़ते हुए समयानुकूल बनाना आवश्यक है। व्यक्ति को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने में सक्षम शिक्षा व्यवस्था ही देश को समृद्ध और सशक्त बनाएगी। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति इन्हीं उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में सार्थक प्रयास है। शिक्षा व्यवस्था की जटिलता को कम करना भी नीति का उद्देश्य है। प्रसन्नता का विषय है कि मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने में देश में अग्रणी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव “कर्मयोगी बनें” की सर्वोच्च परामर्शदात्री समिति की एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार, अपर मुख्य सचिव  अनुपम राजन उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने के केंद्र नहीं है, राष्ट्र के भविष्य की कार्यशालाएं हैं। भगवद्गीता में कहा गया है कि कर्म को उत्कृष्टता और दक्षता के साथ करना ही योग है। आज जब हम “कर्म योगी शिक्षाविद्” की बात करते हैं, तो हम केवल एक आदर्श नहीं गढ़ रहे, बल्कि एक ऐसे शैक्षणिक वातावरण का निर्माण करना चाहते हैं, जहाँ शिक्षक केवल पाठ न पढ़ाए, बल्कि प्रेरणा दें। संस्थान नियमों के साथ उद्देश्य पूर्ति के लिये संचालित हों। विद्यार्थी केवल नौकरी न खोजें, बल्कि राष्ट्र-निर्माण में भागीदार बनें। हमें शिक्षण को अधिक प्रासंगिक और जीवन सापेक्ष बनाना होगा। अनुसंधान की सामाजिक उपयोगिता पर भी और ध्यान अपेक्षित है। डिग्री और रोजगार के बीच जो दूरी है, उसे हमें खत्म करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है, इसे दृष्टिगत रखते हुए सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कृषि संकाय आरंभ किया गया है। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का लगातार विस्तार हो रहा है। इससे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित उद्योगों में अलग-अलग दक्षता वाले कर्मियों की आवश्यकता है। राज्य सरकार ऐसे क्षेत्रों में उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप वहां के इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक, आईटीआई आदि तकनीकी संस्थाओं में कोर्स आरंभ कर रही है। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और युवा अपनी क्षमता और योग्यता का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। इन्हीं गतिविधियों से कर्मयोगी बनने का स्वप्न साकार होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उपलब्ध बजट को 5 वर्ष में दोगुना करने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार कार्य कर रही है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए चरणबद्ध रूप से पांच लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। हर वर्ष एक क्षेत्र पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। इस क्रम में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सम्बद्ध 16 विभागों के लक्ष्य समग्र रूप से तय किए गए हैं। इससे किसान की आय को दोगुना करने का राज्य सरकार का संकल्प भी पूर्ण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमें सहकर्मी संस्कृति को पुनर्जीवित करना होगा। गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि अपने कर्तव्य का पालन ही श्रेष्ठ है। हमने “अभ्युदय मध्यप्रदेश” का जो संकल्प लिया है, उसमें शिक्षा केंद्रीय भूमिका निभाती है। हम यदि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमें विकसित विश्वविद्यालयों का निर्माण करना होगा। मध्यप्रदेश को मूल्य आधारित, गुणवत्ता संपन्न और रोजगार सक्षम शिक्षा का मॉडल राज्य बनाना हमारा लक्ष्य है। ‘कर्मयोगी बने’ कार्यशाला इसी दिशा में एक गंभीर और प्रतिबद्ध प्रयास है। कार्यशाला में मिशन कर्मयोगी के सदस्य प्रो. आर. बालासुब्रमणियम, जेएनयू नई दिल्ली की कुलपति प्रो. शांति धुलिपुडी पंडित, यूनाइटेड कॉन्शियसनेस के कन्वीयर डॉ. विक्रांत सिंह तोमर, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, एपेक्स एडवाइजरी कमेटी के सदस्य, देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, कुलसचिव और शिक्षाविद उपस्थित थे।  

कटनी में दर्दनाक घटना: सरकारी स्कूल की बाउंड्री वॉल गिरने से मासूम छात्र की मौत

कटनी विजयराघवगढ़ जनपद शिक्षा केंद्र व कैमोर थाना क्षेत्र के तिलक चौक के समीप स्थित बम्हनगवां शासकीय प्राथमिक शाला में दोपहर 12 बजे हुए दर्दनाक हादसे में एक 10 वर्षीय छात्र की मौत हो गई। घटना के बाद लोगों में आक्रोश है। बताया जाता है कि रपटा स्थित एमपीईबी कार्यालय से लगी बस्ती में रहने वाला 10 वर्षीय छात्र राजकुमार बंर्मन रोज की तरह बुधवार को भी स्कूल गया था। दोपहर में स्कूल परिसर के भीतर स्थित शौचालय के समीप की बाउंड्री वॉल एकाएक भरभरा कर गिर पड़ी। मासूम छात्र इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से जख्मी हो गया। हादसे के बाद तत्काल एम्बुलेंस को कॉल किया गया। समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलने से उसे ऑटो में शासकीय चिकित्सालय विजयराघवगढ़ ले जाया गया, पर उपचार शुरू होने से पहले ही छात्र ने दम तोड़ दिया। हादसे को लेकर नागरिकों में भारी आक्रोश है। पिता का भी हो चुका है निधन बताया गया कि हादसे के शिकार छात्र राजकुमार बर्मन के पिता नहीं थे। एक डेढ़ साल पहले ही बीमारी में उनका निधन हो गया था। मां लोगों के घरों में काम करके और शाम को फुल्की चाट बेचकर अपने बच्चे की परवरिश कर रही थी। विजयराघवगढ़ राजा सरयू प्रसाद मेमोरियल हॉस्पिटल में छात्र की मां और बहन का रो-रो कर बुरा हाल है। वही गुस्साए स्वजन व पड़ोस के लोगों में भारी आक्रोश है। मौके पर विजयराघवगढ़ व कैमोर थाने का पुलिस बल, एसडीएम विवेक गुप्ता, एसडीओपी वीरेंद्र धार्वे, जिला शिक्षा अधिकारी राजेश अग्रहरि, तहसीलदार मनीष शुक्ला सहित अन्य अधिकारी मौजूद हैं। स्वजनों को शव का पीएम करने के लिए समझाइश दी जा रही है लेकिन स्वजन मुआवजा राशि को लेकर अड़े हुए हैं।

शहडोल में छात्रा लापता मामला: हॉस्टल से पाइप के सहारे उतरने की बात आई सामने, पुलिस तलाश में जुटी

शहडोल  जिले के एकलव्य आवासीय विद्यालय छात्रावास से कक्षा 11वीं की 16 वर्षीय छात्रा किसी बिना बताए चुपके से रात में कही चली गई है।सुबह हाजिरी के दौरान वार्डन को छात्रा के नहीं होने की जानकारी मिली। जानकारी के अनुसार संबंधित छात्रा के कमरे की अन्य छात्राएं छुट्टी पर थीं और वह रात में कमरे में अकेली सो रही थी। बगल के कमरे में रहने वाली एक छात्रा ने बताया कि रात करीब 10 बजे के बाद उसने छात्रा को छात्रावास परिसर में बने सेप्टिक टैंक के पाइप के सहारे नीचे उतरते देखा था। हालांकि, उसने रात में इस संबंध में किसी को सूचना नहीं दी। सुबह जब छात्रा नहीं मिली तो पूरे हड़कंप मच गया।छात्रावास की वार्डन उमंग भारद्वाज ने लिखित शिकायत सोहागपुर थाना में दर्ज कराया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर लिया है और छात्रा की तलाश की जा रही है। थाना प्रभारी अरुण पांडे के अनुसार प्रकरण दर्ज कर लिया गया है और संभावित स्थानों पर खोजबीन की जा रही है। छात्रावास परिसर और आसपास के क्षेत्रों की भी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू पर जांच की जा रही है। उल्लेख है कि पूर्व में भी छात्रावासों से छात्राओं के भागने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे अभिभावकों में चिंता का माहौल है। पुलिस ने शीघ्र ही छात्रा को सकुशल बरामद करने का भरोसा दिलाया है।

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