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सिद्धारमैया ने एक बयान में कहा- सरकार क्रिकेट स्टेडियम को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने पर विचार करेगी

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने 4 जून को बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर मची भगदड़ के बाद कहा है कि सरकार इस स्टेडियम को कहीं और शिफ्ट कर सकती है। सिद्धारमैया ने कहा है कि सरकार इस मामले पर विचार करेगी। इसके साथ ही कर्नाटक के CM ने यह कहकर भी राजनीतिक तूफान मचा दिया है कि इस हादसे के लिए सरकार किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कहा है कि घटना की पूरी जिम्मेदारी कर्नाटक क्रिकेट बोर्ड और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की टीम की है। सिद्धारमैया ने एक बयान में कहा, “सरकार क्रिकेट स्टेडियम को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने पर विचार करेगी। किसी भी सरकार के तहत ऐसी अप्रिय घटना नहीं होनी चाहिए। व्यक्तिगत रूप से, इस घटना ने मुझे और सरकार को आहत किया है। इस मामले में पांच पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। खुफिया विभाग के प्रमुख और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव को भी बदल दिया गया है। मामले को गंभीरता से लिया गया है और उचित कार्रवाई की गई है।” सीएम सिद्धारमैया ने आगे कहा कि राज्य सरकार ने कुछ भी गलत नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार ने दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है और इसलिए सरकार के लिए शर्मिंदगी जैसी कोई बात नहीं है। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर कुंभ में हुए भगदड़ का भी जिक्र दिया। उन्होंने सवाल उठाए कि क्या कुंभ मेले के दौरान लोगों की मौत होने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया था।  

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने चुनाव आयोग को सरकारी पिट्ठू कहकर संबोधित किया

बहादुरगढ़ कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राजस्थान से राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने चुनाव आयोग को सरकारी पिट्ठू कहकर संबोधित किया। उनका कहना है कि देश में निष्पक्ष चुनाव करवाने वाला चुनाव आयोग सरकारी पिठ्ठू बन जाए तो इस देश में प्रजातंत्र अपने आप खतरे में आ जाएगा। रणदीप सुरजेवाला बहादुरगढ़ में एक निजी अस्पताल का उद्घाटन करने पहुंचे थे। यहां उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए आरएसएस और भाजपा पर भी जमकर निशाना साधा। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राजस्थान से राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला का कहना है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट का महज डाटा मांगा है क्योंकि महाराष्ट्र में विधानसभा और लोकसभा चुनाव के 60 से 70 दिन के अंतराल में करीब 50 लाख वोटर बढ़ गए। रोजाना 1 लाख लोगों का वाटर बनना वोटर लिस्ट पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं दिल्ली में इसके खिलाफ केस दर्ज करवाया है और कोर्ट के आदेशों के बावजूद भी महाराष्ट्र सीईओ ने उन्हें वोटर लिस्ट अब तक उपलब्ध नहीं करवाई है। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग को सरकारी पिठ्ठू कहकर संबोधित किया। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को सरकारी पिठ्ठू नहीं बनना चाहिए। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरएसएस पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आरएसएस ने आजादी की जंग में हिस्सा नहीं लिया। जंग ए आजादी में आरएसएस अंग्रेजों के साथ थी। देश के लाखों लोगों का आजादी की जंग में महात्मा गांधी ने नेतृत्व किया था। रणदीप सिंह सुरजेवाला का कहना है कि आरएसएस देश में महात्मा गांधी बनाम गोडसे की विचारधारा फैला रही है। यह विचारधारा देश को बांटने का काम कर रही है रणदीप सिंह सुरजेवाला ने यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल द्वारा पाकिस्तान को एंटी टेररिज्म कमेटी का वाइस चेयरमैन बनाए जाने पर भी निंदा की है। सुरजेवाला का कहना है कि पाकिस्तान आतंकवाद का प्रमुख पोशाक देश है। पाकिस्तान में आतंकियों को मुआवजा तक दिया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आंख और कान खोलने की भी नसीहत दी है। रणदीप सिंह सुरजेवाला ने देश की विदेश नीति को भी निकम्मी करार दिया है।

अक्सर चुनाव आने से पहले कांग्रेस पार्टी और कुछ विपक्षी नेता चुनाव आयोग, इलेक्ट्रिक मशीन पर सवाल उठाने लगते हैं

नई दिल्‍ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘मैच फिक्सिंग’ वाले बयान का भाजपा नेता नलिन कोहली ने जवाब दिया है। उन्‍होंने कहा कि अक्सर चुनाव आने से पहले कांग्रेस पार्टी और कुछ विपक्षी नेता चुनाव प्रक्रिया, चुनाव आयोग, इलेक्ट्रिक मशीन पर सवाल उठाने लगते हैं। यही नेता चुनाव जीतने के बाद कभी भी इस तरह के प्रश्‍न नहीं करते। तेलंगाना में कांग्रेस जीत गई, तो इनको कही कोई कोई दिक्कत नहीं हुई। उन्‍होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि शायद वह इसलिए सवाल उठा रहे हैं। उनको लगता है कि जनता उनके साथ नहीं है। वह अभी से जनता को एक संदेश देना चाहते हैं कि चुनाव में हार मिली तो हमने पहले ही इसके बारे में बता दिया था। यह उनकी ओर से हार स्वीकार करने की बात है। नलिन कोहली ने कांग्रेस पार्टी की आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव से पहले यदि वह जनता के बीच में समय लगाते और अपनी मेहनत और काम को दिखाते तो शायद चुनाव में जनता उनको वोट देती। भाजपा जनता के बीच लगातार जाती है और विकास कार्यों को गिनाती है, जिससे जनता का लगाव भाजपा से बना हुआ है। बता दें कि हाल ही में राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर अपने लेख का लिंक शेयर किया, जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों को मैच फिक्सिंग करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के आने वाले चुनाव में भी ऐसा ही हो सकता है। वहीं, सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे को कांग्रेस पार्टी की ओर से समय और पैसे की बर्बादी बताने पर उन्‍होंने कहा कि एक तरफ कांग्रेस ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के पक्ष में रहने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ वह इस पर सवाल भी उठाती है। ऐसे प्रश्न उठाएंगे जो पाकिस्तान में गूंजेगे और कांग्रेस की प्रतिक्रिया को भारत के खिलाफ अपनी बात रखने के लिए उसका इस्तेमाल करें। यह तब हाल है जब विदेश में अलग-अलग देश में हमारे सांसद गए जिसमें कांग्रेस के भी सांसद थे। अब कांग्रेस अपने सांसदों की भी आलोचना कर रही है, उन पर प्रश्न उठा रही है। नलिन कोहली ने आगे कहा, “एक सांसद ने कहा, ‘क्या देश के हित में काम करना इतना कठिन है।’ अब सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे को कहते हैं कि पैसे फिजूल में खर्च हुए हैं। भारत बात को दुनिया के सामने रखने के लिए देशहित में अगर सर्वदलीय सांसद विदेशों में जाते हैं, लोगों को आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख के बारे में बताते हैं, तो यह देश के पैसे को व्यर्थ करना कैसे हुआ है, इस बात को कांग्रेस पार्टी ही समझा सकती है।”

तेजस्वी यादव ने कहा-चुनाव आयोग जब चुनाव की तिथि घोषित करता है, उससे पहले भाजपा के आईटी सेल को पता होता है

पटना कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के फिर से नवंबर 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर सवाल उठाने पर सियासत गर्म हो गई है। उन्होंने एक लेख के जरिए भाजपा पर आरोप लगाया कि महाराष्ट्र चुनावों में ‘मैच फिक्सिंग’ की गई और अब कुछ ऐसा ही बिहार में दोहराया जाएगा। राहुल गांधी के इस लेख के प्रकाशित होने के बाद चुनाव आयोग ने इसे निराधार बताया। हालांकि राजद राहुल गांधी के साथ खड़ी नजर आ रही है। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने बिल्कुल सही आशंका जताई है। शंका तो लोगों को होती ही है। 2014 से जितनी भी संवैधानिक संस्थाएं हैं, उन्हें हाईजैक कर रखा है। चुनाव आयोग जब चुनाव की तिथि घोषित करता है, उससे पहले भाजपा के आईटी सेल को पता होता है। उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को ईमानदारी से चुनाव कराना चाहिए और अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। जब ये संस्थाएं बर्बाद हो जाएंगी, तो लोगों को न्याय कहां मिलेगा। उन्होंने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव की चर्चा करते हुए कहा कि उस समय तो हमलोग सरकार बना चुके थे। शाम में उन्होंने काउंटिंग को रुकवा दिया और रात के अंधेरे में काउंटिंग को शुरू किया और तीन-तीन बार प्रेस कांफ्रेंस करके अपनी सफाई दी। चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी की सरकार के प्रकोष्ठ की तरह काम कर रहा है, तो सवाल उठाने जायज हैं। इधर, बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावारू के तेजस्वी यादव को महागठबंधन के सीएम फेस नहीं होने, बल्कि उन्हें सिर्फ को-ऑर्डिनेशन कमेटी का चेयरमैन बनाने के बयान पर खुद तेजस्वी यादव ने कहा कि किसी को इसके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है और न ही किसी को चिंता करने की कोई जरूरत है। हम सब लोग सरकार बनाने के लिए नया बिहार बनाएंगे। 

‘मैच फिक्सिंग’ के आरोप पर फडणवीस का जवाब, ताउम्र यही गलती करते रहे, धूल चेहरे पर थी आईना साफ करते रहे

मुंबई राहुल गांधी के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में ‘मैच फिक्सिंग’ के आरोप पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का जवाब आया है। देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहाकि ताउम्र आप यही गलती करते रहे, धूल चेहरे पर थी और आप आईना साफ करते रहे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहाकि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी 2024 के राज्य विधानसभा चुनावों में हार पर आत्मावलोकन करने के बजाय जनादेश को अस्वीकार कर रहे हैं क्योंकि जनता ने उन्हें खारिज कर दिया है। फडणवीस ने इंडियन एक्सप्रेस और मराठी दैनिक समाचार पत्र लोकसत्ता में प्रकाशित अपने लेखों में कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता बिहार सहित आगामी विधानसभा चुनावों में उन्हें मिलने वाली हार के लिए बहाने तैयार कर रहे हैं। राहुल गांधी ने शनिवार को कई अखबारों में प्रकाशित एक लेख और एक्स पर पोस्ट साझा कर आरोप लगाया था। इसमें उन्होंने कहाकि 2024 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लोकतंत्र में धांधली का ब्लूप्रिंट था और यह मैच फिक्सिंग अब बिहार में भी दोहराई जाएगी। राहुल गांधी ने कही थी ऐसी बात सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा कर गांधी ने चुनाव में कथित अनियमितताओं के बारे में चरणबद्ध तरीके से बताया कि कैसे मतदाता सूची में फर्जी मतदाताओं को जोड़ा गया। मतदान प्रतिशत बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया गया। फर्जी मतदान कराया गया और बाद में सबूतों को छिपा दिया गया। निर्वाचन आयोग ने आरोप को खारिज करते हुए कहाकि अनुकूल परिणाम नहीं मिलने के बाद चुनाव निकाय को बदनाम करना पूरी तरह बेतुका काम है। गांधी के दावों के जवाब में फडणवीस ने अपने लेख में कहा कि कांग्रेस नेता लोकतांत्रिक प्रक्रिया और लोगों के जनादेश का लगातार अपमान कर रहे हैं। बहाने बना रहे हैं राहुल भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि लोगों ने राहुल गांधी को खारिज कर दिया है और इसके बदले में वह लोगों और उनके जनादेश को अस्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहाकि एक बार हार स्वीकार कर लेना अधिक विवेकपूर्ण होगा। इस बात पर आत्मचिंतन करने की जरूरत है कि आप कहां गलत हैं, लोगों के साथ आपका जुड़ाव क्यों कम है और आपको इसके बारे में क्या करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता बिहार सहित आगामी विधानसभा चुनावों में उन्हें मिलने वाली हार के लिए अपने बहाने तैयार कर रहे हैं। देश के खिलाफ है यह बात भाजपा, शिवसेना और राकांपा से मिलकर बने महायुति ने 2024 के महाराष्ट्र चुनावों में कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राकांपा (शरदचंद्र पवार) वाले गठबंधन महाविकास आघाडी को हराकर भारी बहुमत से जीत हासिल की थी। फडणवीस ने कहाकि जहां तक ​​महाराष्ट्र चुनाव का सवाल है, यह मूल रूप से महायुति और महा विकास आघाडी के बीच मुकाबला नहीं था। एक और कारक था: भारत जोड़ो अभियान। ‘जोड़ो’ नाम वाले इस अभियान में ‘तोड़ो’ अभियान क्या कर रहा था? उन्होंने दावा किया कि यह न्यायपालिका और निर्वाचन आयोग समेत देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ जनता में गलत धारणाएं पैदा कर रहा था और इस तरह उन्हें देश के खिलाफ लड़ने के लिए उकसा रहा था। राहुल ने वोटरों की बढ़ोत्तरी को बताया था फर्जी फडणवीस ने कहाकि 1950 से लेकर एक नया कानून बनने तक (पूर्ववर्ती) कांग्रेस सरकारों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सीधे नियुक्ति की। उन्होंने कहा कि अब तक 26 आयुक्तों में से 25 को सीधे केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया गया था। उन्होंने कहा कि पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक समिति का गठन किया जिसमें विपक्ष के नेता या (विपक्ष में) सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के नेता शामिल हैं। पिछले साल हुए महाराष्ट्र चुनावों में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि पर गांधी की आपत्ति का जिक्र करते हुए फडणवीस ने कहा कि युवा मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। राहुल गांधी ने मतदाताओं की संख्या में वृद्धि को फर्जी मतदाता बताया था। फडणवीस ने ऐसे दिया जवाब मुख्यमंत्री ने कहाकि 2004 में विधानसभा चुनावों में लोकसभा चुनावों की तुलना में पांच प्रतिशत अधिक मतदान हुआ था, जबकि 2009 में चार प्रतिशत अधिक, 2014 में तीन प्रतिशत अधिक, 2019 में एक प्रतिशत और 2024 में चार प्रतिशत अधिक मतदान हुआ। उन्होंने कहा कि 2024 में कुछ भी नया नहीं हुआ। फडणवीस ने कहाकि मतदान प्रतिशत में अचानक वृद्धि का दावा एक बड़ा मजाक है। क्या राहुल गांधी को यह नहीं पता कि शाम पांच से छह बजे तक भी मतदान का समय है और शाम छह बजे तक बूथ पर कतार में मौजूद सभी लोगों को अपना वोट डालने की अनुमति है? फिर यह बात छिपा क्यों रहे फडणवीस ने कहाकि 2024 के लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में शाम पांच बजे मतदान का आंकड़ा 60.96 प्रतिशत बताया गया था, जिसे अगले दिन अंतिम तौर पर 66.71 प्रतिशत बताया गया यानी वृद्धि 5.75 प्रतिशत थी। उन्होंने कहाकि लेकिन क्या आप इस तथ्य को छिपा रहे हैं क्योंकि आपने वह चुनाव जीता था? मुख्यमंत्री ने कहाकि पहले अंतिम मतदान के आंकड़े देर रात आते थे। अब शाम पांच बजे का आंकड़ा जारी किया जाता है और अंतिम आंकड़ा अगले दिन आता है।  

जनता दल यूनाइटेड के एक पार्षद ने प्रशांत किशोर को घेरा है और एक पीके को लेकर एक बड़ा किया दावा

पटना  बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इस बार बिहार चुनाव कई मायनों में खास है। दरअसल चुनावी रणनीतिकार कहे जाने वाले प्रशांत किशोर ने चुनाव से पहले जनसुराज पार्टी का ऐलान किया था। जनसुराज पार्टी भी बिहार चुनाव में ताल ठोक रही है। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर खुद बिहार में घूम-घूम कर जनता के बीच जा रहे हैं और जदयू, राजद, कांग्रेस तथा बीजेपी पर एक साथ हमला बोल रहे हैं। इस बीच जनता दल (यूनाइटेड) के एक पार्षद ने प्रशांत किशोर को घेरा है और एक पीके को लेकर एक बड़ा दावा कर दिया है। जदयू विधान पार्षद संजय सिंह ने कहा है कि जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर जदयू में आये थे तो अपने लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उपमुख्यमंत्री का पद मांगा था। ये सिर्फ कुर्सी के लिए काम करते हैं ना कि जनता के लिए। नीतीश कुमार ने इनको काफी सम्मान दिया पर, वो उन्हीं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं। ये शुद्ध रूप से व्यापारी हैं। पैसा खपाने के लिए उन्होंने यह पार्टी (जनसुराज पार्टी) बनाया है। संजय सिंह ने रविवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत किशोर पर जमकर प्रहार किया है। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार को नई पहचान दी। बिहार आज देश मे सबसे अधिक तेजी से विकास करने वाला राज्य है। JDU के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने थे प्रशांत किशोर आपको बता दें कि साल 2015 में बिहार में नीतीश कुमार की जीत का श्रेय प्रशांत किशोर को ही दिया जाता है। साल 2018 में प्रशांत किशोर जेडीयू के उपाध्यक्ष बनाए गए थे। हालांकि, साल 2020 में प्रशांत किशोर जदयू से अलग हो गए थे। कहा जाता है कि नागरिकता संसोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर संसद के अंदर जदयू द्वारा नरेंद्र मोदी सरकार का समर्थन किए जाने के बाद प्रशांत किशोर की जदयू के प्रति तल्खी बढ़ गई थी। प्रशांत किशोर ने सवाल उठाया था कि पार्टी की बैठक में नीतीश कुमार ने सीएए और एनआरसी पर आपत्ति जताई थी लेकिन संसद में पार्टी ने इस मुद्दे पर सरकार का समर्थन कैसे कर दिया था। प्रशांत किशोर की बिहार बदलाव यात्रा जारी बहरहाल आपको बता दें कि अभी प्रशांत किशोर जनसुराज पार्टी के लिए ताबड़तोड़ बिहार बदलाव यात्रा कर रहे हैं। इस यात्रा के तहत पीके ने बिहार की हर विधानसभा सीट पर जाकर लोगों से मिलने की बात पहले ही कही थी। रविवार को प्रशांत किशोर बेगूसराय में हैं और अपनी यात्रा के दौरान वो दूसरी सभी राजनीतिक पार्टियों पर जमकर निशाना भी साध रहे हैं।  

मनीश कश्यप ने कहा, ‘मैं मनीष कश्यप अब भाजपा में नहीं हूं, मैं इसकी घोषणा करता हूं

पटना मनीष कश्यप (Manish Kashyap) ने बीजेपी (BJP) से इस्तीफा दे दिया है। बीजेपी से इस्तीफा देने का ऐलान मनीष कश्यप ने अपने फेसबुक पेज पर किया। इसी के साथ मनीष कश्यप ने अपने फेसबुक पर लाइव आकर कई सारी बातें कही हैं। मनीश कश्यप ने कहा, ‘मैं मनीष कश्यप अब भाजपा में नहीं हूं। अब मैं भाजपा का सदस्य नहीं हूं, मैं इसकी घोषणा करता हूं। मैं अपने क्षेत्र चनपटिया में गया था और वहां भ्रमण के दौरान मैंने कई लोगों से मुलाकात की थी। जिसके बाद अब मैं इस निर्णय पर पहुंचा कि मुझे बिहार और बिहारियों के लिए लड़ना है। बिहार से जो पलायन हो रहा है उसको रोकने के लिए लड़ना है। मैं जब पार्टी में था तब भी इस संबंध में लगातार आवाज उठाता रहा हूं। अब मुझे लग रहा है कि मैं पार्टी में रहकर इन सभी चीजों को अच्छे ढंग से नहीं उठा पाऊंगा। हालांकि, इस निर्णय से बहुत सारे लोग खुश भी होंगे और बहुत सारे लोगों दुखी भी होंगे। जो लोग दुखी हैं उनसे मैं हाथ जोड़कर निवेदन करना चाहता हूं कि इस निर्णय के लिए मुझे मजबूर किया गया था। मैंने अपने तन-मन और धन सबकुछ पार्टी के लिए लगा दिया। कुछ लोग कहते हैं कि मनीष कश्यप महत्वकांक्षी है। लेकिन मैं महत्वकांक्षी नहीं हूं। अगर मैं महत्वकांक्षी होता तो 2024 का चुनाव लड़कर उनका खेल बिगाड़ देता।’ बिहार चुनाव पर कही यह बात मनीष कश्यप ने आगे कहा, ‘जो मनीष कश्यप इन लोगों के साथ रहकर खुद की मदद नहीं कर पाया वो दूसरे के लिए क्या कर पाएगा। अब किसी ना किसी प्लेटफॉर्म की तलाश रहेगी। यहां पर रहने का मतलब है कि आप भ्रष्टाचार पर पर्दा डालें। बिहार में इसी साल चुनाव होने हैं। ऐसे कायस लगाए जा रहे थे कि मनीष कश्यप एक बार फिर चनपटिया से अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। बिहार चुनाव में किस्मत आजमाने को लेकर मनीष कश्यप ने कहा, ‘मुझे कहां से चुनाव लड़ना चाहिए और किस पार्टी से चुनाव लड़ना चाहिए या फिर मुझे अकेले लड़ना चाहिए? इसके बारे में आप बताइएगा। मैं स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ आवाज उठाऊंगा।’ मैं मर्यादा नहीं तोड़ूंगा – मनीष कश्यप मनीष कश्यप ने कहा कि मैं किसी के खिलाफ नहीं हूं। मैं उस कुर्सी के खिलााफ हूं जिसपर बैठ कर कुछ लोग बिहार को लूट रहे हैं। आखिर गरीब कहां जाए। मैं अनेकों कहानी आपके सामने लेकर आऊंगा। मैं उन सभी लोगों से हाथ जोड़कर माफी करना चाहता हूं जिन्होंने एक साल एक महीने तक मुझे भारतीय जनता पार्टी का सदस्य रखा। इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया। मैं मर्यादा में रहूंगा और यह मेरा वादा है। मैं कभी भी मर्यादा का सीमा नहीं पार करूंगा। मनीष कश्यप को आप लोगों ने बहुत परेशान किया लेकिन कोई बात नहीं। मैं जितने भी बीजेपी का सदस्य रहा उतने दिन मैंने पार्टी के लिए काम की थी। मनीष कश्यप ने PM मोदी पर भी बोला मनीष कश्यप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा मैं कभी भी पीएम मोदी के खिलाफ एकतरफा नहीं बोलूंगा। ऐसा नहीं है कि मनीष कश्यप पार्टी में नहीं रहा तो अब मर्यादा लांघ कर पीएम मोदी से सवाल करेगा, ऐसा कभी नहीं होगा। मेरे लिए आप कल भी देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी थे और आज भी हैं तथा आगे भी रहेंगे। मुझे चीनी मिल बिहार के लिए चाहिए। आप दीजिए और अगर आप नहीं देंगे तो मैं आप तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास करूंगा। मुझे बिहार में अच्छे अस्पताल चाहिए, आप नहीं देंगे तो आपके कानों तक मैं अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश करूंगा।  

अगर दोनों भाई साथ आ रहे हैं तो… हमें राज ठाकरे के आने से कोई दिक्कत नहीं है: सुप्रिया सुले

मुंबई महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारे में एक बार फिर उद्धव और राज ठाकरे की पार्टियों के बीच अलायंस की खबरें हैं. इस बीच, शरद पवार की बेटी और NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले की प्रतिक्रिया आई है. सुले ने कहा, लोकतंत्र में सभी को अधिकार है कि किसे-किसके साथ जाना है… जितने पार्टनर आएंगे तो अच्छा है महाविकास अघाड़ी के लिए. एक साथ मिलकर महाराष्ट्र के लिए काम करेंगे. ताकत बढ़ेगी. अच्छी बात है कि अगर दोनों भाई साथ आ रहे हैं तो… हमें राज ठाकरे के आने से कोई दिक्कत नहीं है. इससे पहले शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा था, महाराष्ट्र के लोगों के दिल में जो है, वही होगा. हमारे और हमारे शिवसैनिकों के दिल में कोई भ्रम नहीं है. उनके (मनसे) कार्यकर्ताओं में भी कोई भ्रम नहीं है. दरअसल, उद्धव से चचेरे भाई राज ठाकरे की पार्टी के बीच अलायंस की संभावना के बारे में सवाल किया गया था. ठाकरे भाइयों द्वारा हाल में दिए गए बयानों के बाद नगर निगम चुनाव से पहले दोनों के बीच संभावित गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं. उद्धव ने क्या कहा… उद्धव ने कहा, वे एक-दूसरे के संपर्क में हैं. हम संदेश नहीं भेजेंगे. हम सीधे समाचार पहुंचाएंगे. उद्धव ने यह बात तब कही, जब शिंदे सेना के स्थानीय नेता ने यूबीटी सेना जॉइन की. हालांकि, उद्धव ने इस सवाल को टाल दिया कि क्या उनकी पार्टी और मनसे के बीच किसी तरह की गठबंधन वार्ता चल रही है. राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़ने के बाद साल 2006 में नई पार्टी मनसे का गठन किया था. अमित ठाकरे बोले- एक-दूसरे से बात करें… वहीं, राज ठाकरे के बेटे और MNS नेता अमित ठाकरे ने गठबंधन पर कहा था, ठाकरे भाइयों को एक-दूसरे से बात करनी चाहिए. मीडिया में बात करने से गठबंधन नहीं होता. हमारे इस मुद्दे पर बात करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. मुझे दोनों भाइयों के एक साथ आने से कोई दिक्कत नहीं है. अगर वो (उद्धव) चाहें तो फोन कर सकते हैं. मीडिया में बात करने से गठबंधन नहीं होता. उनके पास एक-दूसरे के मोबाइल नंबर हैं. वे एक-दूसरे से बात कर सकते हैं. MNS नेता क्या कह रहे? महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता प्रकाश महाजन ने कहा था कि अगर शिवसेना (यूबीटी) दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर वाकई गंभीर है तो आदित्य ठाकरे को आगे आकर राज ठाकरे से मिलना चाहिए. महाजन का कहना था कि शिवसेना (यूबीटी) में उचित कद के नेता को संभावित गठबंधन पर चर्चा के लिए मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के पास जाना चाहिए. अगर किसी जूनियर नेता को बातचीत के लिए भेजा जाता है तो राज ठाकरे भी किसी जूनियर पदाधिकारी को भेजेंगे. उन्होंने कहा, अगर वाकई गठबंधन होना है तो आदित्य ठाकरे को आगे आकर राज साहब के विचारों को समझना चाहिए. अगर आदित्य ठाकरे बातचीत के लिए जाते हैं तो दोनों पक्ष गंभीरता को समझेंगे. मराठी लोगों में एक साथ आने की भावना है. अलायंस की चर्चाएं कब शुरू हुईं? ठाकरे भाइयों के बीच सुलह की खबरें उस समय तेज हुईं, जब राज ठाकरे ने कहा कि मराठी मानुष (मराठी भाषी लोगों) के हित में एकजुट होना कठिन नहीं है. राज के बयान पर उद्धव ठाकरे ने इस बात पर जोर दिया है कि वो भी छोटी-मोटी लड़ाइयां किनारे रखने के लिए तैयार हैं. बशर्ते, महाराष्ट्र के हितों के खिलाफ काम करने वालों को जगह ना दी जाए. क्या बोले सीएम फडणवीस? अलायंस की खबरों पर बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने शुक्रवार को प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, यह राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे को तय करना है कि उनकी पार्टियों को गठबंधन करना चाहिए या नहीं. हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है. उद्धव ठाकरे की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देना राज ठाकरे का काम है. वे तय करेंगे कि गठबंधन करना है या नहीं. अजित पवार ने भी दिया बयान… एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भी कहा कि गठबंधन पर निर्णय संबंधित पार्टी प्रमुखों का विशेषाधिकार है. राज ठाकरे मनसे के प्रमुख हैं और उद्धव ठाकरे शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख हैं. वे तय करेंगे कि रेल इंजन (मनसे का चुनाव चिह्न) और जलती मशाल (सेना यूबीटी का चुनाव चिह्न) के बीच गठबंधन होगा या नहीं. यह दोनों दलों के नेताओं पर निर्भर है कि वे इस पर फैसला लें. इस मुद्दे पर आप और मेरे बीच चर्चा का क्या मतलब है.  

बिहार चुनाव में एनडीए में सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय!, जेडीयू और बीजेपी करीब-करीब बराबर सीटों पर लड़ेगी

पटना  बिहार चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला तय हो गया है। सूत्रों के मुताबिक विधानसभा की 243 सीटों में जेडीयू और बीजेपी करीब-करीब बराबर सीटों पर लड़ेगी। जिसमें जदयू को 102 से 103 सीटों, और भाजपा को 101 से 102 सीटों देने प सहमति बनी है। वहीं एनडीए के अन्य सहयोगी दल चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) को 25 से 28 सीटें, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) को 6 से 7 और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 से 5 सीटें देने का फॉर्मूला सेट हुआ है। हालांकि इसकी अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन सूत्रों के हवाले से खबर कि एनडीए में सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय हो गया है। जिसमें नीतीश कुमार की जेडीयू और बीजेपी को बराबर सीटें मिलने की उम्मीद है। वहीं चिराग की लोजपा (आर) जिसके बिहार में 5 सांसद भी हैं, उसे 25-28 सीटें मिल सकती हैं, जो एक बड़ा हिस्सा है, वहीं 40 सीटों की दावा करने वाले जीतन मांझी की हम को 6-7 सीटें मिल सकती है। 2020 के चुनाव में भी पार्टी 7 सीटों पर लड़ी थी, और 4 सीटें जीती थी। वहीं उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम को 4-5 सीटें देने पर सहमति बनी है। इस सीट बंटवारे के तहत एनडीए के घटक दलों को साधने की कोशिश की गई है। इसी फॉर्मूले के तहत सीट बंटवारा तय माना जा रहा है लेकिन अभी इसकी अंतिम घोषणा होनी बाकी है। बात अगर 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव की करें तो उस वक्त एनडीए में जेडीयू, बीजेपी, हम और मुकेश सहनी की वीआईपी शामिल थी। तब बीजेपी 110, जेडीयू 115, हम 7, और सहनी की पार्टी 11 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। जिसमें भाजपा सबसे ज्यादा 74 सीटें जीती थी, वहीं जदयू 43, हम 4 और वीआईपी ने भी 4 सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2020 में चिराग की लोजपा (आर) अकेले चुनाव लड़ी थी। वहीं उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी ने थर्ड फ्रंट बनाया था। जिसमें बसपा, ओवैसी की AIMIM शामिल थी। जिसमें कुशवाहा की पार्टी एक भी सीट नहीं जीती थी, लोजपा (आर) को एक सीट मिली थी, वहीं एआईएमआईएम 20 सीटों पर लड़कर 5 सीटें जीती थी। बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटें हैं, और इसी वर्ष अक्तूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव संभावित है  

भोजन हमारी ऊर्जा का स्रोत है, खाद्य सुरक्षा पर ध्यान देकर हम अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं : जेपी नड्डा

नई दिल्ली  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर कहा कि खाद्य सुरक्षा पर ध्यान देना स्वास्थ्य और कल्याण के लिए जरूरी है। हर साल 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है, ताकि असुरक्षित भोजन से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को रोका, पहचाना और नियंत्रित किया जा सके। इस साल का थीम ‘खाद्य सुरक्षा: विज्ञान को अमल में लाना’ है, जो खाद्य जनित बीमारियों को कम करने, लागत बचाने और जिंदगियां बचाने में वैज्ञानिक ज्ञान के महत्व पर जोर देता है। जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर हम स्वच्छ और सुरक्षित भोजन की अहमियत को समझते हैं, जो स्वास्थ्य की रक्षा करता है और खाद्य जनित बीमारियों को रोकता है। भोजन हमारी ऊर्जा का स्रोत है। खाद्य सुरक्षा पर ध्यान देकर हम अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं।” उन्होंने कहा कि इस साल का थीम विज्ञान और तकनीक के जरिए खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने का जश्न मनाता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने भी एक्स पर पोस्ट किया, जिसमें लिखा है, “विज्ञान खाद्य सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। प्रयोगशालाओं से लेकर मानक तय करने तक, विज्ञान हमें सही विकल्प चुनने में मदद करता है। समझदारी से चुनें, सुरक्षित खाएं!” विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या रासायनिक पदार्थों से दूषित भोजन 200 से ज्यादा बीमारियों का कारण बन सकता है। सुरक्षित भोजन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन सलाह देता है कि भोजन को साफ रखें, कच्चे और पके भोजन को अलग करें, अच्छी तरह पकाएं, सुरक्षित तापमान पर रखें और खाना बनाते समय साफ पानी का इस्तेमाल करें। केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के मौके पर पोस्ट किया, जिसमें कहा, “विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर हम सुरक्षित खाद्य आदतों को अपनाने का संकल्प लें। सुरक्षित भोजन सभी की जिम्मेदारी है और यह स्वस्थ, मजबूत और सुरक्षित कल की नींव है।”

जेपी नड्डा ने राहुल को लिया आड़े हाथ, कई चुनाव में हार से दुखी और हताश है, इसलिए आरोप लगा रहे

नई दिल्ली  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राहुल गांधी द्वारा 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को ‘लोकतंत्र में धांधली करने का ब्लूप्रिंट’ करार दिए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए शनिवार को कहा कि कांग्रेस नेता कई चुनाव में हार से दुखी और हताश है और इसलिए विचित्र साजिशें रचने का आरोप लगा रहे हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया कि 2024 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लोकतंत्र में धांधली का ब्लूप्रिंट थे। उन्होंने कहा कि यह मैच फिक्सिंग अब बिहार में भी दोहराई जाएगी और फिर उन जगहों पर भी ऐसा ही किया जाएगा, जहां-जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) हार रही होगी। राहुल ने लिखा, ”मैंने अपने लेख में चरण दर चरण विस्तार से बताया है कि कैसे यह साजिश रची गई : चरण 1: निर्वाचन आयोग की नियुक्ति करने वाली समिति पर कब्जा किया गया। चरण 2: फर्जी मतदाताओं को सूची में जोड़ा गया। चरण 3: मतदान प्रतिशत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए। चरण 4: जहां भाजपा को जिताना था, वहां लक्षित करके फर्जी मतदान कराया गया। चरण 5: सबूतों को छिपा दिया गया।” नड्डा ने पलटवार करते हुए कहा कि गांधी का लेख ‘फर्जी विमर्श गढ़ने का एक ब्लूप्रिंट’है, क्योंकि वह लगातार चुनाव हारने से दुखी और हताश हैं। उन्होंने कहा, ”वह इसे चरण दर चरण इस प्रकार करते हैं। चरण 1: कांग्रेस पार्टी अपनी हरकतों के कारण चुनाव दर चुनाव हारती है। चरण 2: आत्मनिरीक्षण करने के बजाय, वह विचित्र षड्यंत्र रचते हैं और धांधली का रोना रोते हैं। चरण 3: सभी तथ्यों और आंकड़ों की अनदेखी करते हैं। चरण 4: बिना सबूत के साथ संस्थाओं को बदनाम करते हैं।” भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ”चरण 5: तथ्यों की अपेक्षा सुर्खियों की उम्मीद करना। बार-बार पोल खुलने के बावजूद, वह बेशर्मी से झूठ फैलाते रहते हैं। और, वह ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि बिहार में उनकी हार निश्चित है।” नड्डा ने कहा कि लोकतंत्र को नाटक की नहीं, बल्कि सच्चाई की जरूरत है। राहुल गांधी ने जोर दिया कि मैच फिक्स किए गए चुनाव लोकतंत्र के लिए जहर हैं। उन्होंने कहा कि जो पक्ष धोखाधड़ी करता है, वो भले ही जीत जाए, लेकिन इससे लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर होती हैं और जनता का नतीजों से भरोसा उठ जाता है। अपने लेख में गांधी ने आरोप लगाया कि मतदान प्रतिशत को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया गया। उन्होंने लिखा, ”महाराष्ट्र में 2019 के विधानसभा चुनाव में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 8.98 करोड़ थी। पांच साल बाद मई 2024 के लोकसभा चुनाव में यह संख्या बढ़कर 9.29 करोड़ हुई। इसके सिर्फ पांच महीने बाद नवंबर, 2024 के विधानसभा चुनाव तक यह संख्या बढ़कर 9.70 करोड़ हो गई। यानि पांच साल में 31 लाख की मामूली वृद्धि, वहीं सिर्फ पांच महीने में 41 लाख की जबरदस्त बढ़ोतरी।” अपने लेख में उन्होंने लिखा, ”मतदाताओं को संख्या 9.70 करोड़ पहुंचना असामान्य है, क्योंकि सरकार के खुद के आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र के वयस्कों की कुल आबादी 9.54 करोड़ है।” चुनाव के दिन मतदान प्रतिशत में वृद्धि की ओर इशारा करते हुए गांधी ने कहा, ”शाम पांच बजे तक मतदान प्रतिशत 58.22 था। मतदान खत्म होने के बाद भी मतदान प्रतिशत लगातार बढ़ता रहा। अगली सुबह जो आखिरी आंकड़ा आया, वह 66.05 प्रतिशत था।” उन्होंने लिखा, ”यानी मतदान प्रतिशत में 7.83 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई, जो करीब 76 लाख वोट के बराबर है। वोट प्रतिशत में ऐसी बढ़ोतरी महाराष्ट्र के पहले के किसी भी विधानसभा चुनाव से कहीं ज्यादा थी।” उन्होंने राज्य के 85 निर्वाचन क्षेत्रों में केवल 12,000 मतदान केंद्र पर नए मतदाताओं को जोड़ने की ओर भी इशारा किया, जहां आखिरकार भाजपा की जीत हुई। नड्डा ने राहुल गांधी के आरोपों के जवाब में समाचार पोर्टल ‘ऑपइंडिया’ पर प्रकाशित एक लेख साझा किया, जिसमें गांधी के आरोपों का खंडन किया गया है। भाजपा ने राहुल गांधी पर चुनावी प्रक्रिया में लोगों के विश्वास को कम करने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला करने का आरोप लगाया। पार्टी ने दावा किया कि वह आगामी चुनावों में अपनी पार्टी की हार को रोकने के लिए ऐसा कर रहे हैं, क्योंकि वह जनता का समर्थन हासिल नहीं कर सकते। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एक सुनियोजित साजिश के तहत लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला कर रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि उनकी पार्टी आगामी बिहार विधानसभा चुनावों में हारने वाली है।  

पूर्व CM दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह के खिलाफ अब गाज गिरना तय

भोपाल  अपनी ही पार्टी कांग्रेस के खिलाफ लगातार बयानबाजी करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह के खिलाफ अब गाज गिरना तय माना जा रहा है. मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने इसके संकेत दिए हैं. पार्टी की लक्ष्मण रेखा कई बार लांघ चुके लक्ष्मण सिंह को कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी है. बता दें कि लक्ष्मण सिंह ने राहुल गांधी से लेकर उमर अब्दुल्ला पर आपत्तिजनक बयानबाजी की है. लक्ष्मण सिंह के स्पष्टीकरण से पार्टी संतुष्ट नहीं बार-बार पार्टी विरोधी बयान देने के कारण लक्ष्मण सिंह से स्पष्टीकरण मांगा गया. जो सफाई उन्होने दी, उससे पार्टी की अनुशासन समिति संतुष्ट नहीं है. वहीं, राहुल गांधी ने भी मध्यप्रदेश के दौरे पर ये स्पष्ट कर दिया था कि पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सूत्रों के मुताबिक लक्ष्मण सिंह को पार्टी से निकाला जाना तय हो चुका है. इस संबंध में एआईसीसी में औपचारिकता भी पूरी कर ली गई है. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने बयान जारी कर लक्ष्मण सिंह के निष्कासन को लेकर इशारा भी कर दिया है. कांग्रेस प्रदेश प्रभारी दे चुके हैं संकेत स्वदेश शर्मा का कहना है “अनुशासनहीनता के मामले में कांग्रेस में बीजेपी की तरह से दिखावा नहीं है. चाहे छोटा नेता हो या बड़ा, सांसद हो या विधायक सब समान हैं. जो भी अनुशासनहीनता करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होना तय है.” प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी से जब पत्रकारों ने लक्ष्मण सिंह की अनुशासनहीनता को लेकर सवाल किया था तो उन्होंने कहा था “आप इंतजार कीजिए. जल्द सब आपके सामने आएगा.” उन्होंने इशारे में ये पहले ही बता दिया था “पार्टी लक्ष्मण सिंह की अनुशासनहीनता को इस बार बख्शने वाली नहीं है.” इस बार लक्ष्मण सिंह के बयान बनेंगे मुसीबत बता दें कि कुछ दिन पहले लक्ष्मण सिंह ने अपनी ही पार्टी के नेताओं को घेरा था. लक्ष्मण सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सोच समझकर बोलन की सलाह दी थी. उन्होंने राबर्ट वाड्रा पर भी टिप्पणी की. कहा था ठइन दोनों का बचपना जाने कब जाएगा.” इसी तरह से उन्होंने उमर अब्दुल्ला को लेकर विवादित बयान दिया था. पहलगाम में हुई घटना पर सवाल उठाते हुए ये तक कह दिया था “उमर अब्दुल्ला आतंकवादियों से मिले हुए हैं.”

राहुल गांधी ने पांच चरणों में चुनावी धांधली की कथित प्रक्रिया का खुलासा किया, अब बिहार में भी होगी मैच फिक्सिंग

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली का आरोप लगाया है। उन्होंने इसे ‘लोकतंत्र में चोरी का ब्लूप्रिंट’ करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा है। शनिवार को अपने एक लेख और सोशल मीडिया पोस्ट में राहुल गांधी ने दावा किया कि महाराष्ट्र चुनाव में व्यवस्थित तरीके से हेराफेरी की गई, जिसका मॉडल अब बिहार जैसे अन्य राज्यों में लागू किया जा सकता है। राहुल गांधी ने यह आरोप एक विस्तृत लेख के माध्यम से लगाया, जिसे उन्होंने ‘मैच फिक्सिंग महाराष्ट्र’ शीर्षक से मीडिया में प्रकाशित किया और फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी शेयर किया। राहुल गांधी ने अपने लेख में पांच चरणों में चुनावी धांधली की कथित प्रक्रिया का खुलासा किया। राहुल ने लिखा, “चुनाव कैसे चुराया जाए? 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लोकतंत्र में धांधली करने का खाका था।” उन्होंने कहा कि कथित छेड़छाड़ “चुनाव आयोग की नियुक्ति के लिए पैनल में धांधली” से शुरू होती है। राहुल गांधी के आरोपों की 5 मुख्य बातें: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव: राहुल गांधी ने लिखा कि केंद्र सरकार ने 2023 में जो नया कानून लाया, उसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति में निष्पक्षता को समाप्त कर दिया गया। पहले इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश होते थे, लेकिन अब मुख्य न्यायाधीश की जगह एक केंद्रीय मंत्री को रखा गया है, जो केंद्र सरकार की ओर झुकाव को दर्शाता है। राहुल ने लिखा – “अपने आप से पूछिए, कोई क्यों निष्पक्ष निर्णायक को हटाकर अपने करीबी को उस जगह पर लाएगा?” उन्होंने यह भी कहा कि इससे चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता को ठेस पहुंचती है। वोटर लिस्ट में फर्जी मतदाता: मतदाता सूची में फर्जी वोटर जोड़े गए। वोटर टर्नआउट में हेरफेर: मतदान प्रतिशत को असामान्य रूप से बढ़ाया गया। भाजपा के पक्ष में बोगस वोट: उन क्षेत्रों में फर्जी मतदान कराया गया जहां भाजपा कमजोर थी। पारदर्शिता पर रोक: मतदान की वीडियोग्राफी और सीसीटीवी फुटेज तक पहुंच को प्रतिबंधित करने के लिए नियमों में बदलाव किया गया। महाराष्ट्र चुनावों में ‘मैच फिक्सिंग’ का आरोप राहुल ने अपने लेख में लिखा, “महाराष्ट्र का 2024 विधानसभा चुनाव कोई चुनाव नहीं था, बल्कि यह एक सुनियोजित मैच फिक्सिंग थी। यह लोकतंत्र के लिए जहर है और इसका अगला पड़ाव बिहार हो सकता है।” राहुल गांधी ने दावा किया कि बीजेपी ने महाराष्ट्र चुनावों में परिणामों को अपने पक्ष में करने के लिए एक सुनियोजित रणनीति अपनाई। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि गड़बड़ी किस प्रकार से हुई, लेकिन चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव को इसकी जड़ बताया। राहुल गांधी ने विशेष रूप से मतदान के आंकड़ों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शाम 5 बजे तक मतदान प्रतिशत 58.22% था, लेकिन अगली सुबह अंतिम आंकड़ा 66.05% बताया गया। यह 7.83 प्रतिशत अंकों की वृद्धि, यानी 76 लाख अतिरिक्त मतदाताओं के बराबर है, जो कि पहले के विधानसभा चुनावों की तुलना में असामान्य है। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2019 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के बीच पांच साल में 32 लाख नए मतदाता जोड़े गए, जबकि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच केवल पांच महीनों में 39 लाख नए मतदाता जोड़े गए। राहुल ने इसे ‘सांख्यिकीय रूप से असंभव’ बताया और कहा कि यह मतदाता सूची में हेरफेर का सबूत है। कामठी सीट का उदाहरण राहुल गांधी ने अपने दावों को मजबूत करने के लिए कामठी विधानसभा सीट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने कामठी में 1.36 लाख वोट हासिल किए, जबकि भाजपा को 1.19 लाख वोट मिले। लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वोट लगभग समान (1.34 लाख) रहे, जबकि भाजपा के वोट में असामान्य वृद्धि देखी गई। चुनाव आयोग पर सवाल राहुल ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि जब विपक्ष ने मतदान की वीडियोग्राफी और सीसीटीवी फुटेज की मांग की, तो न केवल इसे खारिज कर दिया गया, बल्कि केंद्र सरकार ने, चुनाव आयोग से परामर्श के बाद, 1961 के चुनाव नियमों में संशोधन कर फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तक पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट है कि चुनाव आयोग से समझौता किया गया है। यह केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि जहां भी भाजपा हार रही है, वहां इस तरह की रणनीति अपनाई जा सकती है।”  

माओवादियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन को तत्काल रोककर उनके साथ शांति वार्ता शुरू की जाए और सीजफायर की घोषणा की जाए- महेश कुमार

हैदराबाद 22 मई को माओवादियों के साथ मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ ​​बसवराजू को मार गिराया था। यह नक्सलवाद के खिलाफ बहुत बड़ी सफलता मानी जा रही है। इसके बाद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दोहराया कि 31 मार्च, 2026 तक देश से नक्सलवाद का खात्मा हो जाएगा। हालांकि तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ ने केंद्र सरकार से माओवादियों के साथ शांति वार्ता शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि माओवादी देश के अपने नागरिक हैं, जो गरीबों और सामाजिक अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं। गौड़ ने केंद्र सरकार से अपील की है कि माओवादियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन को तत्काल रोककर उनके साथ शांति वार्ता शुरू की जाए और सीजफायर की घोषणा की जाए। कांग्रेस शासित तेलंगाना के अध्यक्ष का कहना है कि सरकार को माओवादियों का सफाया करने के लिए कठोर कदम नहीं उठाने चाहिए, बल्कि उनसे “कानूनी और संवैधानिक तरीकों” से निपटना चाहिए। “सरकार शांति वार्ता करने में क्यों हिचकिचा रही है?” इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “जीवन का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। जीवन के अधिकार पर अंकुश लगाने का अधिकार किसी को नहीं है। ऑपरेशन कगार के संबंध में क्या हो रहा है? कांग्रेस आतंकवाद का समर्थन नहीं करेगी, चाहे वह नक्सलियों की तरफ से हो या सरकार की तरफ से। कांग्रेस पार्टी का मूल सिद्धांत अहिंसा है। अब, मेरा केंद्र सरकार से अनुरोध है कि वह शांति वार्ता के लिए आगे बढ़े, क्योंकि जो भी व्यक्ति आत्मसमर्पण करने, अपने हथियार डालने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए तैयार है, उसे ऐसा करने का अवसर दिया जाना चाहिए। सरकार शांति वार्ता करने में क्यों हिचकिचा रही है?” उन्होंने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा, “जंगलों के अंदर बहुत से नागरिक हैं, जंगलों के अंदर नागरिक आदिवासी हैं, माओवादियों को काबू करने के लिए हज़ारों सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। क्या होगा अगर हम गोलीबारी या मुठभेड़ में नागरिकों को खो दें?” “नक्सली हमारे अपने नागरिक हैं” कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि जब पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ तो कांग्रेस इसका समर्थन करने वाली पहली पार्टी थी, मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी समेत हमारे नेताओं ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध का समर्थन किया। लेकिन अचानक सरकार ने युद्ध विराम की घोषणा कर दी। हम इस युद्ध विराम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भागीदारी का कड़ा विरोध करते हैं क्योंकि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा था। लेकिन…उन्हें (सरकार को) हमारे अपने नागरिकों के साथ शांति वार्ता करने में समस्या है। नक्सली हमारे अपने नागरिक हैं, हालांकि उन्होंने एक अलग रास्ता और विचारधारा अपना ली है। आखिरकार, वे गरीबों के लिए लड़ रहे हैं। यही कारण है कि हम केंद्र से माओवादियों के साथ शांति वार्ता करने का आग्रह कर रहे हैं।” “कांग्रेस माओवादियों की हिंसक राजनीति के खिलाफ” उन्होंने कहा, “जब कांग्रेस (तत्कालीन अविभाजित) आंध्र प्रदेश में सत्ता में थी, तब हमारे तत्कालीन मुख्यमंत्री मर्री चेन्ना रेड्डी और वाईएस राजशेखर रेड्डी ने नक्सलियों के साथ शांति वार्ता की थी। काफी हद तक ये वार्ता सफल रही। कई नक्सली तब खुले तौर पर मुख्यधारा में शामिल हो गए थे, अपने हथियार डाल दिए थे और अभी शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं।” हालांकि उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस माओवादियों की हिंसक राजनीति के खिलाफ है। उन्होंने कहा, “हम अभी भी उन्हें आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं। मैं उन नक्सलियों द्वारा की गई हत्याओं का समर्थन नहीं कर रहा हूं जो चरमपंथी हैं। मैं खुद नक्सलियों का शिकार हूं क्योंकि मैंने अपनी संपत्ति खो दी और मेरे पिता पर 1989 में नक्सलियों ने जानलेवा हमला किया था। अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। लेकिन जब माओवादी शांति वार्ता का अनुरोध करते हैं, तो हमें इस पर विचार करना चाहिए क्योंकि जीवन को बचाया जाना चाहिए। नक्सलवाद असमानता का प्रोडक्ट था – देश के एक प्रतिशत अमीरों के पास देश की लगभग 40% संपत्ति है और दलितों के पास केवल 3% संपत्ति है।” गौरतलब है कि नक्सलियों और उनकी माओवादी विचारधारा को खत्म करने के लिए भारत सरकार ने ऑपरेशन कगार शुरू किया है। जिसके तहत भारत सरकार नक्सलवाद के खिलाफ अपने अभियानों को और तेज कर दिया है। छत्तीसगढ़ के सुकमा और लातेहार जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के कई ठिकानों को ध्वस्त किया है। ऑपरेशन के तहत कर्रेगुट्टा पहाड़ी क्षेत्र में हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि सरकार नक्सलियों को हथियार छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, साथ ही सख्त कार्रवाई भी जारी रखेगी।

लापरवाही और कुप्रबंधन के आरोपों के बाद कर्नाटक सरकार ने डीसीपी, एसीपी और लोकल इंस्पेक्टर को किया निलंबित

बेंगलुरु बेंगलुरु में आरसीबी के जश्न के दौरान चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर मची भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई थी। लापरवाही और कुप्रबंधन के आरोपों के बाद कर्नाटक सरकार बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर, सेंट्रल डिवीजन के डीसीपी, एसीपी (वेस्ट) और लोकल इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया था। वहीं अब कर्नाटक सरकार ने मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के राजनीतिक सचिव गोविंदराजू को पद से हटा दिया। गोविंदराजू कांग्रेस के एमएलसी हैं और सिद्द रमैया के बेहद करीबी माने जाते हैं। हालांकि उन्हें पद से हटाए जाने की कोई वजह नहीं बताई गई है। गोविंदराजू पर लग रहे आरोप सूत्रों के मुताबिक, गोविंदराजू के दबाव के कारण ही सिद्दरमैया ने बधाई कार्यक्रम की अनुमित दी थी। बताया गया कि गुरुवार शाम को हुई कैबिनेट बैठक में मंत्रियों ने गोविंदराजू के खिलाफ काफी नाराजगी जताई थी। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने गोविंदराजू को ही हादसे का जिम्मेदार ठहराया। कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि गोविंदराजू ने बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर को फोन करके जीत के जश्न को मनाने के लिए परमिशन देने का दबाव बनाया। जब कमिश्नर ने कहा कि दो कार्यक्रम होने से सिक्योरिटी की समस्या पैदा होगी और पुलिस रात भर भीड़ को कंट्रोल करके थकी हुई है। सीएम ने मौखिक रूप से दिया था आदेश     कुमारस्वामी के मुताबिक, इसके बाद गोविंदराजू ने सिद्दरमैया से कमिश्नर की बात कराई और सीएम ने मौखिक रूप से निर्देशों का पालन करने और कार्यक्रमों की परमिशन देने के आदेश दिए। माना जा रहा है कि गोविंदराजू को उनके पद से इसलिए ही हटाया गया है।     वहीं कर्नाटक सरकार ने एडीजीपी इंटेलीजेंस हेमंत निंबालकर का भी ट्रांसफर कर दिया है। आरोप लगाए गए थे कि सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करने में हिचकिचा रही है, क्योंकि उनकी पत्नी कांग्रेस की पूर्व विधायक है।  

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