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हम सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन सवाल है कि पानी को कहां संग्रहित करेंगे?”: असदुद्दीन ओवैसी

नई दिल्ली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पहलगाम आतंकी हमले पर केंद्र सरकार की सख्त प्रतिक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि अब वक्त है कि पाकिस्तान को ठोस और निर्णायक जवाब दिया जाए। उन्होंने सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले का स्वागत करते हुए इसे साहसिक कदम बताया। साथ ही उन्होंने सरकार से यह सवाल भी पूछा कि अगर हम पाकिस्तान को पानी नहीं देंगे तो उसे कहां स्टोर करेंगे। ओवैसी ने कहा, “पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों को शरण दी जाती है, सरकार को अब किसी संकोच के बिना कार्रवाई करनी चाहिए। हम सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन सवाल है कि पानी को कहां संग्रहित करेंगे?” ओवैसी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून भारत को आत्मरक्षा में वायु और समुद्री नाकेबंदी करने का अधिकार देता है और भारत को हथियारों की बिक्री पर प्रतिबंध जैसे कठोर कदम भी उठाने चाहिए। हालांकि, इस दौरान ओवैसी ने बेसरान घास के मैदान में CRPF की अनुपस्थिति और QRT (त्वरित प्रतिक्रिया दल) के एक घंटे की देरी से पहुंचने पर सवाल उठाए। उन्होंने इस हमले को टारगेटेड और सांप्रदायिक करार दिया। ओवैसी ने कहा, “हमलों के दौरान लोगों से उनका धर्म पूछकर गोली मारी गई। ये सामान्य आतंकवाद नहीं, सांप्रदायिक हिंसा है।” उन्होंने कश्मीरियों और घाटी के छात्रों के खिलाफ झूठा प्रचार बंद करने की अपील की। साथ ही जोर देकर कहा कि आतंकवादियों की कड़ी निंदा जरूरी है, लेकिन निर्दोष लोगों को निशाना बनाना नहीं। बैठक में शामिल रहे नेता जेपी नड्डा, एस जयशंकर, किरण रिजिजू, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने भी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहने का संकल्प लिया। आपको बता दें कि 22 अप्रैल को पहलगाम के लोकप्रिय पर्यटन स्थल में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। हमले की जिम्मेदारी TRF (The Resistance Front) ने ली है, जिसे पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा माना जाता है।

शाह ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे अपने राज्यों में रह रहे सभी पाकिस्तानी नागरिकों की सूची तैयार करें और इसे केंद्र को सौंपें

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को देश भर के सभी मुख्यमंत्रियों से बातचीत की और अपने-अपने राज्यों में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों की तत्काल पहचान करने का निर्देश दिया। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर उठाया गया है। शाह ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे पाकिस्तानी नागरिकों की सूची केंद्र सरकार को भेजें ताकि उनके वीजा तुरंत रद्द किए जा सकें और उन्हें देश से बाहर निकाला जाए। पहलगाम हमले के बाद सख्त कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसारन में हुए आतंकी हमले में 25 भारतीय पर्यटकों और एक नेपाली नागरिक की मौत हो गई थी। यह हमला 2019 के पुलवामा हमले के बाद कश्मीर घाटी में सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराया है और इसके जवाब में कई कठोर कदम उठाए हैं। इनमें 1960 के सिंधु जल समझौते को निलंबित करना, अटारी-वाघा सीमा चौकी को बंद करना, पाकिस्तानी सैन्य सहायकों को नई दिल्ली से निष्कासित करना और सभी पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना शामिल है। वीजा रद्द करने की प्रक्रिया गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, शाह ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे अपने राज्यों में रह रहे सभी पाकिस्तानी नागरिकों की सूची तैयार करें और इसे केंद्र को सौंपें। सरकार ने पहले ही घोषणा की है कि 27 अप्रैल 2025 से पाकिस्तानी नागरिकों के सभी मौजूदा वीजा रद्द कर दिए जाएंगे, जबकि मेडिकल वीजा 29 अप्रैल 2025 तक वैध रहेंगे। इसके अलावा, भारतीय नागरिकों को पाकिस्तान से जल्द से जल्द वापस लौटने की सलाह दी गई है। राज्यों से त्वरित कार्रवाई की मांग शाह ने मुख्यमंत्रियों से अपील की कि वे इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और अपने-अपने राज्यों में कानून-व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखें। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान और उनके वीजा रद्द करने की प्रक्रिया में कोई देरी न हो। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस मामले में राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि यह प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके। पाकिस्तान के साथ राजनयिक तनाव पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंधों को और कम कर दिया है। भारत ने नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के सैन्य सलाहकारों को निष्कासित कर दिया और इस्लामाबाद में अपने उच्चायोग के कर्मचारियों की संख्या को 55 से घटाकर 30 करने का फैसला किया है। जवाब में, पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया और भारत के साथ सभी व्यापारिक गतिविधियों को निलंबित कर दिया। पाकिस्तान ने भारत के सिंधु जल समझौते को निलंबित करने के फैसले को “युद्ध की कार्रवाई” करार दिया है। प्रधानमंत्री मोदी का कड़ा रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहलगाम हमले के बाद कहा कि इस हमले के दोषियों और उनके समर्थकों को “कल्पना से परे सजा” दी जाएगी। उन्होंने बिहार के मधुबनी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “आतंकवादियों और उनके प्रायोजकों को बख्शा नहीं जाएगा।” मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। विपक्ष का समर्थन कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है और केंद्र सरकार के कदमों का समर्थन किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश को एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ना होगा। पार्टी ने 25 अप्रैल 2025 को देश भर में कैंडललाइट मार्च का आयोजन किया ताकि हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी जा सके और आतंकवाद के खिलाफ एकता का संदेश दिया जा सके। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पहलगाम हमले की कई देशों ने निंदा की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि फ्रांस इस दुख की घड़ी में भारत के साथ मजबूती से खड़ा है। अमेरिका ने जम्मू-कश्मीर के लिए “यात्रा न करें” की सलाह जारी की है और भारत के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की है। भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति में कोई ढील नहीं बरतेगी। गृह मंत्री शाह की मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत और पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करने का फैसला इस दिशा में एक बड़ा कदम है। आने वाले दिनों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ सकता है, क्योंकि दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ जवाबी कार्रवाइयों में जुटे हैं।

उमर अब्दुल्ला आतंकियों से मिले , राहुल गांधी और उनके जीजाजी भी सोच-समझकर बात करें: लक्ष्मण सिंह

राघौगढ़  पहलगाम हमले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह ने अपनी ही पार्टी पर करारा हमला किया है। आतंकी हमले से आहत लक्ष्मण सिंह ने गृह नगर राघौगढ़ में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की ओर से निकाले गए कैंडल मार्च के बाद किला तिराहे पर श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आतंकवादियों से मिले हुए हैं। आतंकी हमले से आहत लक्ष्मण सिंह ने गृह नगर राघौगढ़ में कैंडल मार्च के बाद श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगा डाला कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आतंकवादियों से मिले हुए हैं. उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस को नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार से तुरंत समर्थन वापस लेना चाहिए और इस बारे में वह कांग्रेस आलाकमान को लैटर तक लिखेंगे. उन्‍होंने राहुल गांधी और रॉबर्ट वाड्रा को नादान करार देते हुए कहा कि पार्टी को मुझे निकालना है तो निकाल दे. दरअसल, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की ओर से निकाले गए कैंडल मार्च के बाद किला तिराहे पर श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए लक्ष्‍मण सिंह ने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आतंकवादियों से मिले हुए हैं. कांग्रेस को तत्काल नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार से समर्थन वापस लेना चाहिए. इस संबंध में लक्ष्मण सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखने की बात भी कही है. लक्ष्मण सिंह यहीं नहीं रुके. उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा. लक्ष्मण सिंह ने कहा कि राहुल जी के जीजा जी रॉबर्ट वाड्रा कहते हैं कि मुसलमानों को सड़क पर नमाज नहीं पढ़ने देते, इसलिए आतंकवादियों ने हमला किया है. लक्ष्मण सिंह ने वाड्रा और राहुल गांधी को सोच-समझकर बात करने की नसीहत देते हुए कहा कि इन्हीं की नादनियों की वजह से ऐसी घटनाएं होती हैं. लक्ष्मण सिंह ने अपनी बात रखते हुए पुरजोर तरीके से कहा कि वह यह सभी बातें कैमरे पर कह रहे हैं. मेरे लिए देश पहले है. अगर पार्टी को मुझे निकालना है तो निकाल दे. कांग्रेस के नेता 10 बार सोच-समझकर बोलें, नहीं तो चुनाव में उन्हें परिणाम भुगतना पड़ेगा. लक्ष्मण सिंह ने पहलगाम हमले में उमर अब्दुल्ला की भूमिका को संदिग्ध बताया है. उनके मुताबिक केंद्र शासित प्रदेश होने की वजह से मुख्यमंत्री को ही तय करना होता है कि कहां पुलिस तैनात होगी और कहां सेना की तैनाती की जाएगी, लेकिन पहलगाम में जहां हुआ है वहां पुलिस और सेना दोनों ही नहीं थे. उमर अब्दुल्ला आतंकियों का साथ क्यों दे रहे हैं? इस पर बात करते हुए लक्ष्मण सिंह ने कि आतंक प्रभावित राज्यों का ऑडिट नहीं होता है. वहां की सरकारें नरसंहार करने वालों का सहारा ले रही हैं. इसलिए जम्मू-कश्मीर के नेता खरबपति हो चुके हैं. उमर अब्दुल्ला का बयान भी निदंनीय है. उन्होंने कहा था कि टूरिस्ट हवाई जहाज से आए थे और ताबूत में जा रहे हैं.

मोदी की रैली में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ी बात कही, ललन सिंह ने तुड़वाया था भाजपा-जदयू का गठबंधन?

मधुबनी बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर में गुरुवार को आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में मुख्यमंत्री एवं जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने बड़ी बात कह दी। अपने संबोधन के दौरान सीएम नीतीश ने कहा कि बीच में हमारी पार्टी ने गड़बड़ कर दी थी। उन्होंने जदयू के पूर्व अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की ओर इशारा किया। फिर कहा, “यहीं बैठे हुए हैं, इन्हीं से पूछिए। बाद में इनको लगा कि गड़बड़ है उनको (आरजेडी-कांग्रेस) को छोड़ दीजिए, हम कभी उनके साथ नहीं जा सकते हैं।” सीएम ने महागठबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने सब गड़बड़ किया है। लालू एवं तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी का नाम लिए बिना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि ये गड़बड़ करते हैं, इसलिए पहले भी उनके खिलाफ ही लड़े थे। 2005 में बहुत बढ़िया से लड़े थे। नीतीश ने ललन सिंह की ओर इशारा करते हुए कहा कि उस समय ये हमारे साथ ही थे। खूब लड़े थे। पार्टी के अध्यक्ष भी थे। नीतीश ने पहली बार खुले मंच से भाजपा और जदयू के गठबंधन को तोड़ने के लिए किसी नेता को जिम्मेदार ठहराया है। सीएम के संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मंच पर मौजूद थे। नीतीश ने पीएम की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने बिहार के लिए बहुत कुछ किया है। हम लोग अब साथ हैं और आगे भी रहेंगे। बता दें कि नीतीश की पार्टी जदयू ने 2022 में बीजेपी से नाता तोड़ लिया और आरजेडी के साथ मिलकर बिहार में महागठबंधन की सरकार बनाई थी। उस समय सीएम नीतीश ही बने थे और उनके डिप्टी तेजस्वी यादव रहे। 2022 के सत्ता परिवर्तन के दौरान जदयू की कमान ललन सिंह के हाथों में थी। जब नीतीश ने भाजपा का साथ छोड़ा था तब जदयू में ललन सिंह के अलावा बिजेंद्र यादव जैसे सीनियर नेता भी समाजवादी एकता के नाम पर लालू यादव की पार्टी राजद और महागठबंधन के साथ जाने के पैरोकार थे। दिसंबर 2023 में ललन सिंह ने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद नीतीश ने एक बार फिर पार्टी की कमान अपने हातों में ले ली। इसके ठीक एक महीने बाद जनवरी 2024 में जदयू का आरजेडी से नाता टूट गया और नीतीश ने एनडीए में वापसी कर बीजेपी के साथ सरकार का गठन किया।

रॉबर्ट वाड्रा ने कहा- मैं बहुत दुखी महसूस कर रहा हूं और इस आतंकी हमले में मारे गए लोगों के लिए मेरी गहरी संवेदनाएं

नई दिल्ली कांग्रेस की टॉप लीडर सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने पहलगाम आतंकी हमले पर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने इस हमले के जरिए पीएम नरेंद्र मोदी को संदेश दिया है। रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि मैं बहुत दुखी महसूस कर रहा हूं और इस आतंकी हमले में मारे गए लोगों के लिए मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। हमारे देश में हम देखते हैं कि यह सरकार हिंदुत्व की बात करती है, और अल्पसंख्यक असहज और परेशान महसूस करते हैं। अगर आप इस आतंकी हमले का विश्लेषण करें तो समझ आएगा कि अगर वे (आतंकी) लोगों की पहचान देख रहे हैं, तो वे ऐसा क्यों कर रहे हैं? ऐसा इसलिए क्योंकि हमारे देश में हिंदू और मुस्लिम के बीच एक विभाजन रेखा खिंच गई है।’ रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि कुछ संगठनों को लगता है कि हिंदू सभी मुसलमानों के लिए समस्याएं खड़ी कर रहे हैं। पहचान देखकर मारना पीएम नरेंद्र मोदी को एक संदेश है। ऐसा इसलिए क्योंकि मुसलमान खुद को कमजोर महसूस कर रहे हैं। अल्पसंख्यक खुद को कमजोर महसूस कर रहा है। शीर्ष नेतृत्व से ऐसा संदेश आना चाहिए कि हम सभी देश में सुरक्षित महसूस करें और सेकुलरिज्म की भावना रहे। ऐसा हो जाए तो फिर हम इस तरह की घटनाएं नहीं देखेंगे। सोशल मीडिया पर रॉबर्ट वाड्रा के बयान पर कई लोगों ने सवाल उठाए हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना था कि आखिर मीडिया इनकी राय ही क्यों लेता है? इस बीच कांग्रेस के सीनियर नेता और जम्मू-कश्मीर के आखिरी महाराज हरि सिंह के बेटे कर्ण सिंह का भी बयान आया है। कर्म सिंह ने कहा कि यह घटना तो यकीन से भी परे है। उन्होंने कहा कि इस तरह पर्यटकों पर कभी भी कश्मीर में हमला नहीं हुआ। मुझे लगता है कि सीमा पार से यह अलग ही रणनीति बनाई गई है कि आम नागरिकों को टारगेट किया जाए। यह रातोंरात नहीं हुआ होगा। इसकी पहले से प्लानिंग हुई होगी और हमलावर पहले से घाटी में रहे होंगे। इसलिए यह बहुत ही चिंताजनक चीज है। कश्मीर के लोग तो टूरिज्म पर ही निर्भर रहते हैं। यह हमला बेहद बर्बर और दिल तोड़ने वाला है। हमारे पास बहुत सारी एजेंसियां, गंभीरत से घटना की जांच हो: कर्ण सिंह उन्होंने कहा कि इस पूरी घटना की विस्तार से जांच होना चाहिए। हमारे पास बहुत सी एजेंसियां हैं। हमें जांच करानी होगी कि आखिर क्या हो रहा है। यह बेहद गंभीर मामला है। इस घटना के राजनीतिक और सामाजिक तौर पर गंभीर परिणाम होंगे। भारत सरकार को तय करना होगा कि आखिर कौन से ऐक्शन लेने होंगे। ऐसे कई ऐक्शन हो सकते हैं, जिन्हें लिया जाए तो इस तरह की घटनाएं शायद दोहराई न जाएं।

मैं गृह मंत्री से अनुरोध करता हूं कि पाक को आतंकी राष्ट्र घोषित करें और इंटरनेशनल कोर्ट में इस मुद्दे को उठाएं: कपिल सिब्बल

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम के पास बैसारन घाटी में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले की निंदा करते हुए राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने बुधवार को कहा कि इस जघन्य वारदात के लिए जिम्मेदार आतंकियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) में मुकदमा चलाया जाना चाहिए। पाकिस्तान को ‘आतंकी राष्ट्र’ घोषित करे भारत कपिल सिब्बल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पाकिस्तान को ‘आतंकी राष्ट्र’ घोषित करने और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय अदालत में उठाने की अपील की। उन्होंने कहा, “जो भी इसके लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालत में कार्यवाही होनी चाहिए। मैं गृह मंत्री से अनुरोध करता हूं कि पाकिस्तान को आतंकी राष्ट्र घोषित करें और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय में इस मुद्दे को उठाएं।” “पागलपन और सनक की हद” हालांकि, भारत ने अभी तक ‘रोम संविधि’ पर हस्ताक्षर नहीं किया है, जो कि ICC का अधारभूत समझौता है। ऐसे में भारत ICC की कार्यवाहियों में औपचारिक रूप से भाग नहीं ले सकता। हमले को “पागलपन और सनक की हद” बताते हुए सिब्बल ने कहा, “यह एक पागलपन है, लेकिन बहुत ही सुनियोजित पागलपन है। बैसारन घाटी एक ऊंचाई पर स्थित है, जहां कोई गाड़ी नहीं जा सकती। ऐसे में सुरक्षाबलों को पहुंचने में समय लगता है। आतंकियों ने इस स्थान को सोच-समझकर चुना होगा। उनके पास AK-47 जैसे घातक हथियार थे, उन्होंने पुरुषों को अलग कर टारगेट किया। ये सब पहले से प्लान किया गया था।” इलाके में बंद का आह्वान हमले के बाद स्थानीय समुदाय में रोष है और इलाके में बंद का आह्वान किया गया है। पर्यटकों से गुलजार रहने वाला पहलगाम इलाका इस वक्त वीरान नजर आ रहा है। सुरक्षाबलों ने पूरे क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है और सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। कपिल सिब्बल ने यह भी दावा किया कि अगर सरकार पाकिस्तान को आतंकी राष्ट्र घोषित करने का कदम उठाती है, तो विपक्ष उसका समर्थन करेगा। यह हमला न केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, बल्कि घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। कश्मीर के पहलगाम शहर के निकट ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से मशहूर पर्यटन स्थल बैसारन में मंगलवार को हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई। यह पिछले कई वर्षों में कश्मीर में आम नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए सबसे भयावह आतंकवादी हमलों में से एक था।

पहलगाम आतंकी हमले पर भड़कीं कंगना रनौत, कहा- तंकवाद का धर्म होता है और पीड़ितों का भी, दी कड़ी प्रतिक्रिया

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम से मंगलवार को दिल दहला देने वाली खबर आई। यहां आतंकियों ने घाटी घूमने आए पर्यटकों पर गोलियां चलाईं। इस घटना में कई लोगों की जान चली गई। पहलगाम में हुए इस आतंकी हमले से हर कोई हैरान है। आम जनता से लेकर बॉलीवुड सितारों तक सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर हर कोई नाराजगी और संवेदनाएं जता रहा है। अब इस मामले में कंगना रनौत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने अपने इंस्टाग्राम पर हमले की एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा आतंकवाद का धर्म होता है और पीड़ितों का भी। पहलगाम हमले पर कंगना रनौत का पोस्ट कंगना रनौत ने अपने इंस्टाग्राम पर दो पोस्ट शेयर किए। पहली पोस्ट में हमले की तस्वीर है। इस तस्वीर के साथ कंगना ने लिखा- “आतंकवाद का धर्म होता है और पीड़ितों का भी।” कंगना ने दूसरे पोस्ट में पीड़ितों का वीडियो शेयर किया है। इसे शेयर करने के साथ कंगना ने लिखा- “इन लोगों ने आम नागरिकों पर गोलियां बरसाईं जिनके पास खुद को बचाने के लिए कुछ भी नहीं था। इतिहास में हर लड़ाई जंग के मैदान में लड़ी गई है, लेकिन जब से इन नपुंसकों को हथियार मिले हैं ये मासूम लोगों पर गोलियां चला रहे हैं, इन डरपोक लोगों से कैसे लड़ा जाए जो केवल जंग के मैदान के बाहर लड़ना चाहते हैं।” कंगना रनौत का पोस्ट कंगना रनौत के अलावा कई सारे बॉलीवुड और टीवी के सितारों ने इस मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया जताई है। टीवी एक्टर अली गोनी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा- आज पहलगाम में हुए भयानक आतंकी हमले से मैं बहुत दुखी और गुस्से में हूं। निर्दोष लोगों के खिलाफ यह हिंसा इस्लाम की शांति की शिक्षा के विपरीत है। मेरी प्रार्थनाएं पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ हैं। हमें इस तरह की बुराई के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।

सोमनाथन का कहना है कि लैटरल एंट्री सही है और भविष्य में इसकी जरूरत होगी, पहले पीछे हटी थी सरकार

नई दिल्ली बीते साल केंद्र सरकार ने कई विभागों में उच्च अधिकारियों की भर्ती के लिए लैटरल एंट्री का विज्ञापन जारी किया था। लोकसभा चुनाव के कुछ समय बाद ही यह ऐड आया तो विपक्ष ने इसे आरक्षण के खात्मे से जोड़ दिया था। कांग्रेस, सपा, आरजेडी और आम आदमी पार्टी समेत कई दलों का कहना था कि लैटरल एंट्री के नाम पर सरकार वंचित तबकों का आरक्षण खत्म करना चाहती है। इस पर खूब विवाद बढ़ा तो अंत में सरकार ने उस विज्ञापन को ही वापस ले लिया था। वहीं मोदी सरकार में शीर्ष अधिकारी कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन का कहना है कि लैटरल एंट्री सही है और भविष्य में इसकी जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि तमाम योजनाओं को अमल में लाने के लिए ऐसा जरूरी है क्योंकि हर विषय की जानकारी किसी अफसर को नहीं हो सकती। इसलिए विषय विशेषज्ञों को साथ लेना जरूरी होगा। विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में टीवी सोमनाथन ने यह बात कही तो उन्हें अपने बयान की संवेदनशीलता का भी पता था। यही वजह थी कि उन्होंने लगे हाथ यह भी सफाई दी कि यह मेरा यह बयान निजी हैसियत से है। मेरी यह केंद्र सरकार के एक शीर्ष अधिकारी के तौर पर नहीं है। कैबिनेट सचिव ने सिविल सर्विसेज डे के मौके पर कहा कि अधिकारियों को यह देखना चाहिए कि उनके काम से संविधान की मर्यादा बढ़े। प्रशासन में किसी भी तरह का पक्षपात न हो और सरकार की इच्छाशक्ति को उचित नीति के तौर पर लागू किया जाए। इसके अलावा सामाजिक और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन दिया जाए। टीवी सोमनाथन ने कहा कि मेरी निजी राय है कि संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखने में कई बार सिविल सर्विसेज असफल होती हैं। इसकी वजह है कि भारत एक ऐसा टापू है, जो संवैधानिक तो है, लेकिन वहां बहुत सी असंवैधानिक चीजें भी होती हैं। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा करने के दौरान सर्विसेज तटस्थ भाव से काम करती हैं। यहां उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजनीतिक रूप से तटस्थ हों, लेकिन अयोग्य, कम क्षमता वाले अधिकारियों से भी काम सही नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि अब तक का ट्रैक रिकॉर्ड है कि सिविल सर्विसेज कम प्रभावी रही हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एक्सपर्ट्स की जरूरत होती है। ऐसे लोग चाहिए जो प्रतिस्पर्धी माहौल में काम करें और सब्जेक्ट की एक्सपरटाइज रखते हों।

राहुल गांधी को मंत्री सारंग ने कहा आप विदेश में भारत को बदनाम कर रहे हैं ये देशद्रोह की श्रेणी में आता ….

भोपाल  राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर निशाना साधा है , महाराष्ट्र चुनावों में कांग्रेस को मिली हार के बाद से राहुल गांधी और उनकी पार्टी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। इस समय राहुल अमेरिका दौरे पर हैं और उन्होंने एक बार फिर वहां भारत के चुनाव आयोग को निशाने पर लिया। राहुल गांधी को एमपी के मंत्री विश्वास सारंग ने जवाब दिया है सारंग ने कहा आप चुने हुए सांसद है, आप विदेश में भारत को बदनाम कर रहे हैं ये देशद्रोह की श्रेणी में आता है। मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयानों पर पलटवार किया है, बता दें राहुल गांधी ने अमेरिका के बोस्टन में एक बार फिर भारत निर्वाचन आयोग पर उंगली उठाई और भारत की चुनाव प्रक्रिया की बुराई की है वहीं दिग्विजय सिंह ने मस्जिद के सामने से हिंदू जुलूस पर सवाल उठाये हैं और खड़गे ने नेशनल हेराल्ड केस में भाजपा पर निशाना साधा है। बोस्टन में राहुल ने फिर उठाया महाराष्ट्र चुनाव का मुद्दा   नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अमेरिका के बोस्टन शहर के दौरे पर पहुंचे वहां उन्होंने ब्राउन यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स से बात करते हुए महाराष्ट्र चुनाव का मुद्दा उठाया, उन्होंने कहा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जितने युवा थे, उससे ज्यादा वोट डाले गए, ये एक सच्चाई है, हमें शाम 5:30 बजे तक के मतदान के आंकड़े मिले थे, लेकिन 5:30 से 7:30 बजे के बीच, जब वोटिंग बंद हो जानी चाहिए थी, उस समय 65 लाख लोगों ने वोट डाला। चुनाव आयोग पर पक्षपात करने के आरोप लगाए राहुल गांधी ने आगे कहा  ये शारीरिक रूप से मुमकिन ही नहीं है क्योंकि एक व्यक्ति को वोट डालने में करीब 3 मिनट लगते हैं, और यदि इसका हिसाब लगाएं तो मतलब ये है कि रात 2 बजे तक लोग लाइन में लगे रहे और पूरी रात वोटिंग चलती रही, जोकि सच नहीं है ऐसा हुआ ही नहीं, उन्होंने कहा हमारे लिए ये स्पष्ट था कि चुनाव आयोग ने अपनी निष्पक्षता से समझौता कर लिया है, सिस्टम में कुछ बहुत बड़ी गड़बड़ी है, ये बिल्कुल साफ दिख रहा है, हमने यह बात खुलकर कही है और मैंने खुद कई बार यह बात दोहराई है। सारंग ने राहुल गांधी पर किया पलटवार राहुल गांधी के इस बयान पर मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने पलटवार किया है, उन्होंने कहा कि फिर राहुल गांधी का बचपना सामने आया है वे हमेश अंतर राष्ट्रीय मंच पर भारत का अपमान करते हैं वे भूल जाते हैं कि उन्हें यदि वहां बोलने का मौका मिल रहा है तो एक सांसद के तौर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में, आपकी निजी कोई पहचान नहीं है। भारत को विदेश में बदनाम कर रहे हैं शर्म आनी चाहिए सारंग ने कहा  वहां जाकर भारत को बदनाम कर रहे हैं शर्म आनी चाहिए, आप विपक्ष में है सरकार की आलोचना कीजिये लेकिन भारत में कीजिये विदेश की धरती पर भारत को बदनाम करना अपमानित करना देश द्रोह की श्रेणी में आता है, हो सकता है अप मीडिया की सुखियों में आने के लिए ये सब बोलते हैं लेकिन इससे भारत के मान सम्मान कम होता है। सारंग का सवाल , राहुल, प्रियंका, सोनिया संसद कैसे पहुंच गए सारंग ने सवाल किया कि यदि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है तो राहुल गांधी संसद में कैसे पहुंच गए? प्रियंका गांधी कैसे पहुंच गई, सोनिया गांधी कैसे लगातार सांसद चुनी जाती रहीं, कांग्रेस इतनी सीटें कैसे जीते गई? अपनी हार का ठीक किसी और पर फोड़ना बचपना ही है, इसलिए वे इस तरह की बातों को करना बंद करें। गुना एसपी को हटाने की वजह बताई दिग्विजय सिंह ने गुना के एसपी को हटाये जाने के मामले पर दिग्विजय सिंह ने सरकार को निशाने पर लिया और भाजपा पार्षद पर कार्रवाई होने की वजह से एसपी को हटाया गया है उन्होंने कहा कि आरोपी भाजपा पार्षद पहले भी माहौल ख़राब करने की कोशिश कर चुके हैं लेकिन भाजपा ने उन्हें बचा लिया, उन्होंने कहा मैं आज तक यह नहीं समझ पाया इन नफरत फैलाने वालों को मस्जिद के सामने ही नाचने का मन क्यों होता है, यह खोज का विषय है। भारत में हिंदुओं को अपने त्यौहार मनाने की आज़ादी, इसे कोई नहीं रोक सकता दिग्विजय के बयान पर सारंग ने पलटवार करते हुए कहा दिग्विजय सिंह भारत में पाकिस्तान की भाषा ना बोले, क्या हिन्दुओं का जुलूस मस्जिदों के सामने से नहीं निकलेग?  तुष्टिकरण की राजनीति करना, सनातन विरोधी मानसिकता के साथ जीवन जीना मियां दिग्गी की आदत है , इसलिए वे पूरे देश में बदनाम हैं।  उन्होंने कहा भारत में हिंदुओं को अपने त्यौहार मनाने की आज़ादी, इसे कोई नहीं रोक सकता। नेहरू परिवार में पैदा होने से क्या भ्रष्टाचार करने का सर्टिफिकेट मिल गया है? उधर नेशनल हेराल्ड मामले में ED की चार्जशीट में राहुल गांधी और सोनिया गांधी का नाम आने पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इसे भाजपा की बदले की कार्रवाई कह रहे हैं, सारंग ने इस पर प्रहार करते हुए कहा नेहरू परिवार में पैदा होने से क्या भ्रष्टाचार करने का सर्टिफिकेट मिल गया है? मल्लिकार्जुन खड़गे जिस मामले की बात कर रहे हैं वो 2012 में शुरू हुआ, नेशनल हेराल्ड का सच जनता के सामने है।  

कनाथ शिंदे किसान अवतार के लिए सुर्खियों में, खेत में फावड़ा चलाने की तस्वीरें सामने आई

मुंबई  महाराष्ट्र में मनसे चीफ राज ठाकरे और शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे के एक होने की अटकलों से जहां राजनीति गर्म है तो वहीं दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे साथ छोड़कर अलग हुए एकनाथ शिंदे किसान अवतार के लिए सुर्खियों में हैं। तीन दिन के लिए अपने सतारा स्थित अपने दरे गांव पहुंची डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की खेतों में फावड़ा चलाने की तस्वीरें सामने आई हैं। शिंदे ने अपने गांव के खेतों में इस बार विदेशी पौधे को लगाया। शिंदे ने इस एवोकाडो नाम के इस विदेशी पौधे के फायदे भी गिनाए हैं। एवोकाडो, जिसे हिंदी में रूचिरा या मक्खनफल भी कहा जाता है। शिंदे ने किया नया प्रयोग शिवसेना प्रमुख और राज्य के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने रविवार को अपने गांव में सहकर्मियों के साथ मिलकर नए पेड़ लगाए। शिंदे ने पिछले दौरों में स्ट्रॉबेरी, हल्दी, चीकू और बांस के पौधे लगाए थे। इस साल उन्होंने पहली बार एक विदेशी फल एवोकाडो, लगाने का निर्णय लिया। शिंदे ने उन्होंने फावड़े और कुदाल का उपयोग करके स्वयं एक एवोकाडो का पेड़ लगाया। उन्होंने अपने खेत में यह प्रयोग इस आशा के साथ किया है कि यदि यह प्रयोग स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक लाभकारी एवोकाडो फल की खेती में सफल होता है, तो यह स्थानीय किसानों को भी वैकल्पिक फसल के रूप में एवोकाडो की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। नए प्रयोग से नई फसल उगेगी डिप्टी सीएम शिंदे इससे पहले सतारा जिले के महाबलेश्वर तालुका में कोयना नदी के तट को काफी उपजाऊ बता चुके हैं। वह कहते आए हैं कि दरे गांव के आसपास की मिट्टी बहुत अच्छी है। इसमें उगाई जाने वाली कोई भी फसल अच्छी तरह से उगती है। इसलिए उन्हें पूरा विश्वास है कि यहां एवोकाडो की खेती का यह प्रयास अवश्य सफल होगा। यदि ऐसा होता है, तो उनका मानना है कि इस क्षेत्र के किसान, जो स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी जैसे जामुन उगाते हैं, एवोकाडो की खेती के माध्यम से एक और नई नकदी फसल पा सकेंगे। इसीलिए उन्होंने अपने खेतों में इस प्रयोग को सफल बनाने का प्रयास किया है। इस अवसर पर उनके साथ दरे गांव के ग्रामीणजन और शिंदे के सभी साथी उपस्थित थे। एवोकाडो के क्या हैं फायदे? एवोकाडो का तेल त्वचा और बालों के लिए अच्छा होता है। एक बहु-उपयोगी फल है जो कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। यह स्वस्थ वसा, फाइबर, और विटामिन से भरपूर होता है जो हृदय स्वास्थ्य, पाचन, और आंखों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। एवोकाडो में पोटेशियम, मैग्नीशियम, और अन्य महत्वपूर्ण खनिज भी पाए जाते हैं। इतना ही नहीं एवोकाडो में अनसैचुरेटेड फैट होता है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है और हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करता है। इसके अलावा यह फाइबर से भरपूर होता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और कब्ज से राहत दिलाता है।

प्रशांत किशोर ने की तीन प्रमुख मांगें, पूरी नहीं हुई तो सरकार के खिलाफ करेंगे आंदोलन

पटना  जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सोमवार को कहा कि जाति आधारित गणना पर श्वेत पत्र जारी करने सहित उनकी तीन प्रमुख मांगें एक महीने के अंदर पूरी नहीं की गई तो वह बिहार में नीतीश कुमार सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करेंगे। प्रशांत किशोर ने राज्य में जारी भूमि सर्वेक्षण भी ‘‘तुरंत रोकने” की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। पूर्व चुनावी रणनीतिकार ने दलित और महादलित समुदायों के सदस्यों को तीन डिसमिल जमीन मुहैया करने संबंधी वादे को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। पत्रकारों से बात करते हुए किशोर ने कहा, ‘‘अगर राज्य की राजग (NDA) सरकार हमारी तीन मांगें नहीं मानती है तो जन सुराज 11 मई से राज्य के 40,000 राजस्व गांवों में हस्ताक्षर अभियान शुरू करेगा।” उन्होंने कहा, ‘‘11 जुलाई को, हम एक करोड़ लोगों के हस्ताक्षर के साथ सरकार को एक ज्ञापन सौंपेंगे। अगर तब भी हमारी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो हम मानसून सत्र के दौरान विधानसभा का घेराव करेंगे, जो इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आखिरी सत्र होगा।”   किशोर ने कहा, ‘‘हमारी पहली मांग राज्य सरकार द्वारा कराई गई जाति आधारित गणना से संबंधित है। मुख्यमंत्री ने 7 नवंबर 2023 को विधानसभा में पेश जाति आधारित गणना रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर 6,000 रुपये प्रति माह से कम आय वाले 94 लाख परिवारों को 2 लाख रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता देने का वादा किया था। लेकिन एक भी परिवार को यह सहायता नहीं मिली है। हम सरकार से एक महीने के भीतर इस पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग करते हैं।” उन्होंने सवाल किया, ‘‘इस सर्वेक्षण के आधार पर, आरक्षण बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने का वादा किया गया था, उसका क्या हुआ?” किशोर के अनुसार, दूसरी मांग दलित और महादलित परिवारों से जुड़े 50 लाख बेघर/भूमिहीन परिवारों को घर बनाने के लिए तीन डिसमिल जमीन देने के सरकार के वादे से संबंधित है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, केवल 2 लाख परिवारों को भूमि आवंटित की गई है और वह भी केवल कागजों पर है और जमीन का कब्जा नहीं दिया गया है। नीतीश कुमार सरकार ने इस मुद्दे पर दलित और महादलित समुदायों के लोगों को धोखा दिया है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन परिवारों को भूमि पर वास्तविक कब्जा कब मिलेगा।” अपनी तीसरी मांग के तहत किशोर ने राज्य में जारी भूमि सर्वेक्षण को स्थगित करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘हम सरकार से इस प्रक्रिया को तत्काल रोकने का आग्रह करते हैं। भूमि सर्वेक्षण के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। अधिकारी लोगों से पैसे ऐंठ रहे हैं। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने 80 प्रतिशत भूमि का सर्वेक्षण कर लिया है और राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण कर दिया है, जबकि 2013 में प्रक्रिया शुरू होने के बाद से बिहार में केवल 20 प्रतिशत ही सर्वेक्षण हो पाया है। इस धीमी प्रगति के कारण भूमि संबंधी विवादों में वृद्धि हुई है, जिसमें हत्या और हत्या के प्रयास के मामले भी शामिल हैं।”  

तीन बार विधायक रह चुके थोपटे ने अपने समर्थकों के साथ बैठक के बाद छोड़ी कांग्रेस पार्टी, अब उठाएंगे ‘कमल’

मुंबई महाराष्ट्र में कांग्रेस को बहुत बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस नेता और तीन बार के पूर्व विधायक संग्राम थोपटे ने बीजेपी में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। पुणे जिले के भोर निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके थोपटे ने अपने समर्थकों के साथ बैठक के बाद इस निर्णय की घोषणा की। उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है।   संग्राम थोपटे ने स्पष्ट कहा कि यह कदम उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया है। थोपटे ने कहा कि उनके समर्थक लगातार यह महसूस कर रहे थे कि सत्ता में शामिल हुए बिना क्षेत्र के विकास की गति को तेज करना संभव नहीं है। इसी के चलते उन्होंने शनिवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने कांग्रेस पार्टी द्वारा उन्हें नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया।   पूर्व विधायक संग्राम थोपटे ने बताया कि 22 अप्रैल को वे मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रवींद्र चव्हाण की उपस्थिति में बीजेपी में शामिल होंगे। इस दौरान उनके साथ विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी बीजेपी का दामन थामेंगे। कांग्रेस नेतृत्व से नाखुश! मीडियाकर्मियों से बातचीत में थोपटे ने कांग्रेस नेतृत्व पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि वे 2019 से ही पार्टी में खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे थे। उन्होंने कहा, पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई वरिष्ठ नेताओं से समर्थन में रैली करने की अपील की थी, लेकिन कोई उनके निर्वाचन क्षेत्र में नहीं गया। चुनाव हारने के बाद पार्टी के किसी भी नेता ने मुझे एक बार फोन तक नहीं किया। इस बीच, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दावा किया है कि जब महाविकास आघाड़ी (MVA) सरकार सत्ता में थी और नाना पटोले ने विधानसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था, तब पार्टी थोपटे को इस पद के लिए आगे लाना चाहती थी। लेकिन उस समय विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर दबाव बनाकर ऐसा नहीं होने दिया। गौरतलब है कि संग्राम थोपटे का परिवार कांग्रेस पार्टी से दशकों से जुड़ा रहा है। वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनंतराव थोपटे के बेटे हैं, जिन्होंने छह बार भोर से विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया था। लेकिन अब, राजनीति के इस पुराने रिश्ते को तोड़ते हुए संग्राम थोपटे ने बीजेपी की ओर कदम बढ़ा दिया है। आगामी नगर निगम चुनावों को देखते हुए उनका बीजेपी में जाना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

कांग्रेस नेता खरगे ने बक्सर में जनसभा को किया संबोधित, मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने जबरन वक्फ संशोधन कानून बनाया

पटना आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के तेवर इस बार अलग हैं। सात अप्रैल को सांसद राहुल गांधी बिहार आए थे। 11 अप्रैल को पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट आए थे। आज राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बक्सर में जनसभा को संबोधित किया। बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे आज एक दिवसीय बिहार दौरे पर पहुंचे। उन्होंने बक्सर में जनता को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि मैं बिहार के उन सभी लोगों को नमन करता हूं जिनके विचार आज देश-दुनिया में याद किए जाते हैं। महात्मा गांधी ने सत्याग्रह आंदोलन भी बिहार के चंपारण से शुरू किया था। यह आंदोलन आजादी की लड़ाई से जुड़ा था। अब हम ‘जय बापू, जय भीम और जय संविधान रैली’ को लेकर इस महान धरती पर आए हैं और जो कि हमारा सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि मैं अपने आप को भाग्यशाली मानता हूं कि आज गंगा जी के तट पर बसे इस क्षेत्र में आने का अवसर मिला, जो संविधान सभा के प्रोटेम अध्यक्ष सच्चिदानंद सिन्हा जी की भूमि भी है। बिहार की धरती पर महात्मा बुद्ध जी ने तपस्या कर ज्ञान पाया और आज सारी दुनिया बुद्ध जी के शांति संदेश को मानती है। गुरु गोविंद सिंह जी भी इसी धरती पर जन्मे और कई अन्य महापुरुष, समाज सुधारक भी बिहार की धरती से निकले। यहां से कई राजनेता भी आए, जिन्होंने देश के लिए अपना योगदान दिया। कांग्रेस अध्यक्ष ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम नीतीश कुमार की जोड़ी केवल कुर्सी के लिए है। यह जोड़ी बिहार के विकास के लिए नहीं है। सीएम नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि वह एक बार इंडिया गठबंधन की गोद में आते हैं। इसके बाद यहां कुछ दिन गुजारने के बाद लगा कि भाजपा आनेवाली है तो वह इधर से उधर चले जाते हैं। यह देश के लिए सही नहीं। वह गरीब, किसान, अछूत, पिछड़ा और अति पिछड़ा को बर्बाद करने लिए उधर जाते हैं   कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने जबरन वक्फ संशोधन कानून बनाया। जिस कानून को लेकर सालों से झगड़ा नहीं था, अब वहां झगड़ा करना चाहते हैं। आरएसएस और भाजपा गरीबों, पिछड़ों, महिलाओं के दोस्त हो नहीं सकते। मनु स्मृति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षित नहीं करना चाहिए। पवित्र काम में शामिल नहीं करना चाहिए, जबकि बाबा साहेब डॉ भीम राव अम्बेडकर ने इन्हें सम्मान दिया। बक्सर में कार्यक्रम को लेकर बिहार प्रदेश कांग्रेस की ओर से सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है। हालांकि उनके कार्यकम में एक बदलाव हुआ है। खरगे पटना में एक कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे लेकिन, किसी कारण इसमें बदलाव कर दिया गया है। इधर, बिहार दौरे से पहले उन्होंने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। कहा कि कैसे बड़े षडयंत्र के तहत नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी का नाम चार्जशीट में डाल दिया गया है। यह लोग किसी का भी नाम डाल दें हम डरने वाले नहीं है। इसके पहले ही नेशनल हेराल्ड की दिल्ली, लखनऊ और मुंबई की संपत्तियों को अटैच कर दिया गया। इसमें कोई शक नहीं कि यह सब बदले की भावना से किया जा रहा है। हमें लोगों के बीच जाकर उनको अपने पक्ष से अवगत कराना होगा और भाजपा के षडयंत्र को बेनकाब करना होगा। इसके अलावा देश के सामने कई ज्वलंत मुद्दे हैं, जिनको हमें लगातार उठाते रहना है। 

उद्धव और राज ठाकरे की सुलह के सवाल पर एकनाथ शिंदे नाराज हो गए और कहा-सरकार के काम के बारे में बात करें

मुंबई एक दूसरे से अलग हो चुके चचेरे भाइयों उद्धव और राज ठाकरे के बीच सुलह की अटकलों पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नाराज हो गए और संवाददाता से कहा कि वह सरकार के काम के बारे में बात करें। शनिवार को जब शिंदे सतारा जिले में अपने पैतृक गांव दरे में थे, तो टीवी मराठी के एक संवाददाता ने उनसे शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे के बीच सुलह की चर्चा पर प्रतिक्रिया मांगी। शिंदे चिढ़ गए और उन्होंने संवाददाता की बात अनुसनी कर दी। शिवसेना नेता ने कहा, “काम के बारे में बात करें।” राज ठाकरे ने फिल्म निर्माता महेश मांजरेकर को दिए साक्षात्कार में कहा कि उन्हें अविभाजित शिवसेना में उद्धव के साथ काम करने में कोई समस्या नहीं थी। इस बयान के बाद सुलह की अटकलें शुरू हुईं। राज ठाकरे ने कहा कि सवाल यह है कि क्या उद्धव उनके साथ काम करना चाहते हैं। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच संभावित सुलह की अटकलों को हवा देते उनके बयानों से संकेत मिलता है कि वे “मामूली मुद्दों” को नजरअंदाज कर सकते हैं और लगभग दो दशक के कटु मतभेद के बाद हाथ मिला सकते हैं। एक ओर, मनसे प्रमुख ने कहा है कि ‘मराठी मानुष’ के हित में एकजुट होना कठिन नहीं है, तो वहीं पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह छोटी-मोटी लड़ाइयां भूलने के लिए तैयार हैं, बशर्ते कि महाराष्ट्र के हितों के खिलाफ काम करने वालों को तरजीह न दी जाए। उद्धव का इशारा संभवत: हाल ही में राज ठाकरे आवास पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मेजबानी करने की ओर था। अपने चचेरे भाई का नाम लिए बिना उद्धव ठाकरे ने कहा था कि ‘चोरों’ की मदद करने से कुछ हासिल नहीं होने वाला। उनका स्पष्ट इशारा भाजपा और शिंदे नीत शिवसेना की ओर था। साल 2022 में उद्धव ठाकरे को उस समय बड़ा झटका तब लगा था जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना को तोड़कर उनकी सरकार गिरा दी थी। इसके बाद शिंदे ने भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई थी। पिछले वर्ष 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा के लिए हुआ चुनाव शिवसेना (UBT) ने विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी के तहत लड़ा था। पार्टी ने 95 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन 20 सीट पर ही उसे जीत मिली थी। शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे के भतीजे राज ने जनवरी 2006 में पार्टी छोड़ दी थी और अपने फैसले के लिए उद्धव को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद उन्होंने मनसे की स्थापना की जिसने शुरू में उत्तर भारतीयों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। लेकिन 2009 के विधानसभा चुनाव में 13 सीटें जीतने के बाद मनसे सिमटती चली गई। 2024 के विधानसभा चुनाव में उसका खाता भी नहीं खुला। उद्धव और राज में सुलह की खबरों के बीच देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर दोनों साथ आ जाते हैं तो उन्हें भी खुशी ही होगी। उन्होंने कहा कि इस बात में किसी के दुखी होने की कोई बात ही नहीं है। अगर दोनों आपसी कलह को भुलाकर साथ आते हैं तो यह अच्छा ही होगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई फोन करता है तो दूसरा शख्स उत्तर भी देता है। इसमें हमें पड़ने की क्या जरूरत है?

अप्रैल के आखिर तक भाजपा जेपी नड्डा के विकल्प के तौर पर नए नेता के नाम का ऐलान करेगी

नई दिल्ली भाजपा के नए अध्यक्ष का ऐलान कभी भी हो सकता है। चर्चा है कि अप्रैल के आखिर तक भाजपा की ओर से जेपी नड्डा के विकल्प के तौर पर किसी नए नेता के नाम का ऐलान हो सकता है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर का नाम भी अध्यक्ष की रेस में है। इसके अलावा मोदी सरकार में ही मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव के नामों की भी चर्चा जोरों पर है। कहा जा रहा है कि इन तीन नेताओं में से किसी एक को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जा सकती है। अध्यक्ष पर फैसला लेने से पहले आरएसएस की सलाह भी ली जाएगी। वहीं उससे पहले यूपी, बंगाल, आंध्र प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में अध्यक्ष का फैसला भी लिया जाएगा। तभी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा 25 अप्रैल तक यूपी समेत कई राज्यों में अध्यक्षों का ऐलान कर सकती है। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नामांकन दाखिल किया जाएगा और किसी एक नेता का नाम सर्वसम्मति से तय किया जाएगा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मनोहर लाल खट्टर को लेकर सहमति बनने की संभावना अधिक है। इसकी वजह है कि वह पीएम नरेंद्र मोदी के करीबी हैं और उनकी पहली पसंद भी हैं। लंबे समय तक आरएसएस प्रचारक के तौर पर काम करने वाले मनोहर लाल खट्टर को संगठन की अच्छी समझ है। इसके अलावा आरएसएस को भी उनके नाम पर आपत्ति नहीं होगी, जो मानता है उसकी वैचारिक पृष्ठभूमि के नेता के हाथ में ही पार्टी की कमान होनी चाहिए। इसके अलावा धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि मनोहर लाल खट्टर सबसे आगे माने जा रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी और मनोहर लाल खट्टर के दशकों पुराने रिश्ते हैं। ऐसे में संगठन की कमान भी उनके भरोसेमंद व्यक्ति के पास होगी और आरएसएस भी इसे लेकर सहमत होगा। यही नहीं भाजपा में महासचिव के तौर पर भी राज्यों से कई नेताओं को शामिल किया जा सकता है। ये वे नेता होंगे, जो पूर्व मंत्री या सीएम जैसे पदों पर रह चुके हैं, लेकिन इन दिनों उनके पास कोई बड़ा दायित्व नहीं है। वहीं अभी संगठन में काम करने वाले कुछ लोगों को कैबिनेट में भी एंट्री दी जा सकती है। दरअसल एनडीए सरकार में सहयोगी दलों की डिमांड है कि कैबिनेट का विस्तार किया जाए और उनके नेताओं को एंट्री मिले। इस बीच बिहार में चुनाव है और उससे पहले उपेंद्र कुशवाहा को मंत्री पद दिया जा सकता है। वहीं एकनाथ शिंदे की पार्टी को भी मौका मिल सकता है, जो डिप्टी सीएम तो हैं, लेकिन बीच-बीच में उनकी नाराजगी की खबरें आती रहती हैं। चर्चाएं यह भी हैं कि मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का एक साल पूरा होने के मौके पर भी कैबिनेट विस्तार हो सकता है।

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