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राज्यसभा में ऊर्जा संकट पर खड़गे की चिंता

नई दिल्ली राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को एशिया के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र में तेजी से बदल रही भू-राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह हालात केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। साथ ही भारत की वैश्विक छवि और सामर्थ्य पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 55 प्रतिशत जरूरतें पश्चिम एशिया से होने वाले आयात से पूरी करता है। यदि उस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है तो उसका सीधा असर हमारे देश की आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है। खड़गे ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से कहा, “मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे यह मुद्दा उठाने का अवसर दिया।” खड़गे ने कहा कि वह नियम 176 के तहत तहत उभरती चुनौतियों के संदर्भ में भारत की ऊर्जा सुरक्षा के विषय पर अल्पकालिक चर्चा की अनुमति का अनुरोध करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि एशिया के उस क्षेत्र में लाखों भारतीय काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा और आजीविका वहां की स्थिरता पर निर्भर करती है। हाल की घटनाओं में कुछ भारतीय नागरिकों के मारे जाने या लापता होने की खबरें भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि रसोई गैस सिलेंडर के दाम में लगभग 60 रुपये की बढ़ोतरी भी आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। भारत हर साल लगभग 51 बिलियन अमेरिकी डॉलर का तेल आयात करता है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और परिवारों के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए इन अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। इस बीच बाद सभापति द्वारा नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बैठ जाने के लिए कहा गया। सभापति ने खड़गे को बाद में बोलने का अवसर देने की बात कही और कहा कि फिलहाल विदेश मंत्री एस जयशंकर सदन में अपनी बात रखने जा रहे हैं। इस बार विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया। हंगामे के बीच एस जयशंकर ने अपनी बात रखी। लेकिन विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे इसके उपरांत विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया। दरअसल, नेता प्रतिपक्ष और विपक्षी सांसद इस मुद्दे पर सदन में अपनी बात रखना चाहते थे। सभापति ने मल्लिकार्जुन खड़गे को शुरुआत में बोलने का अवसर दिया और इसके बाद उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री द्वारा इस संदर्भ में आधिकारिक जानकारी दे रहे हैं। विदेश मंत्री द्वारा जानकारी दिए जाने के बाद वह खड़गे को बोलने का अवसर देंगे। लेकिन विपक्ष इसके लिए राजी नहीं हुआ और सदन में विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे।

CM पद को लेकर कर्नाटक में हलचल: दिल्ली पहुंचे डी के शिवकुमार, हाईकमान से मुलाकात की अटकलें

बेंगलुरु मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवकुमार के साथ जारी खींचतान के बीच, सिद्धरमैया ने शनिवार को कहा था कि अगर कांग्रेस आलाकमान उन्हें अवसर देता है तो वह दो और बजट पेश कर सकते हैं। सिद्धरमैया ने शुक्रवार को राज्य के वित्त मंत्री के रूप में अपना रिकॉर्ड 17वां बजट पेश किया। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के नई दिल्ली दौरे ने विधानसभा के बजट सत्र के बाद राज्य में संभावित नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को फिर से हवा दे दी है। सरकारी और पार्टी सूत्रों के अनुसार, शिवकुमार रविवार शाम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ कलबुर्गी से राष्ट्रीय राजधानी के लिए रवाना हुए। इससे पहले दिन में, दोनों नेताओं ने जिले के चित्तपुर में 1,069 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की शुरुआत की थी। मीडिया के साथ साझा किए गए शिवकुमार के यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, वह एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नयी दिल्ली गये हैं और सोमवार सुबह बेंगलुरु लौटेंगे। सिद्धारमैया क्या बोले मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवकुमार के साथ जारी खींचतान के बीच, सिद्धरमैया ने शनिवार को कहा था कि अगर कांग्रेस आलाकमान उन्हें अवसर देता है तो वह दो और बजट पेश कर सकते हैं। सिद्धरमैया ने शुक्रवार को राज्य के वित्त मंत्री के रूप में अपना रिकॉर्ड 17वां बजट पेश किया। कहा जा रहा है कि शिवकुमार के समर्थक कुछ विधायक दिल्ली जाकर पार्टी आलाकमान के सामने अपने नेता को विधानसभा के बजट सत्र के बाद मुख्यमंत्री बनाए जाने की इच्छा व्यक्त चुके हैं। यह बजट सत्र 27 मार्च को समाप्त होगा। इस बीच, शिवकुमार 10 मार्च को सभी मंत्रियों, कांग्रेस विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के लिए रात्रिभोज का आयोजन करेंगे, जो कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष के रूप में उनके छह साल पूरे होने का जश्न होगा। पहले भी दे चुके संकेत शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि वह ‘अत्यंत धैर्य’ रखे हुए हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की क्रांति में शामिल होने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उन्हें खुद पर विश्वास है और उम्मीद है। कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के प्रमुख शिवकुमार ने कहा कि उन्हें न तो स्वार्थ के लिए किसी भी तरह की ‘ब्लैकमेलिंग’ में दिलचस्पी है और न ही कांग्रेस के लिए किसी तरह की परेशानी पैदा करने में। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि वह मैदान में उतरकर लड़ने वाले व्यक्ति हैं, लेकिन उनकी लड़ाई कभी भी पार्टी के भीतर नहीं होती। शिवकुमार ने एक सवाल के जवाब में कहा था, ‘आज तक मैंने मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर कभी कुछ नहीं कहा है। हमारे बीच के मुद्दे, मेरे, मुख्यमंत्री और पार्टी आलाकमान तक ही सीमित हैं। मैंने सिर्फ इतना कहा है कि जो फैसला हुआ है उसमें हम शामिल हैं, इसके अलावा मैंने कभी कुछ नहीं कहा।’ उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘कुछ लोग कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री का पद खाली हो जाएगा, दलितों को यह पद मिलना चाहिए, दूसरों को मिलना चाहिए। ये वही लोग हैं जो मुख्यमंत्री का पद खाली करवाना चाहते हैं, चाहते हैं कि यह पद दलितों और अन्य लोगों को दिया जाए। मैंने इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा।’  

Karur Stampede Case: अभिनेता विजय को CBI का समन, जांच एजेंसी मंगलवार को करेगी पूछताछ

नई दिल्ली करूर भगदड़ मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अभिनेता और टीवीके प्रमुख विजय को मंगलवार को फिर से पूछताछ के लिए तलब किया है। इससे पहले उनसे 12 और 19 जनवरी को पूछताछ हो चुकी है। 27 सितंबर 2025 को करूर में उनकी रैली के दौरान हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत और 60 से अधिक लोग घायल हुए थे।   करूर भगदड़ मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अभिनेता और टीवीके प्रमुख विजय को पूछताछ के लिए मंगलवार को फिर से तलब किया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इससे पहले अभिनेता से 12 और 19 जनवरी को एजेंसी के मुख्यालय में पूछताछ की जा चुकी है। जांच के दौरान सीबीआई को कुछ नए तथ्यों और दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी मिली है, जिन पर स्पष्टीकरण लेने के लिए विजय को दोबारा बुलाया गया है। इसी के मद्देनजर उन्हें एक नया नोटिस जारी किया गया है। यह घटनाक्रम तमिलनाडु के करूर में 27 सितंबर 2025 को हुई उस दुखद भगदड़ से जुड़ा है, जिसमें अभिनेता विजय की एक रैली के दौरान 41 लोगों की जान चली गई थी और 60 से अधिक लोग घायल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने संभाली जांच यह मामला मूल रूप से एक विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा संभाला जा रहा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने इसकी कमान अपने हाथों में ले ली। सीबीआई इस मामले से संबंधित सबूतों को एकत्र करने में जुटी हुई है, ताकि घटना के कारणों और जिम्मेदारियों का पता लगाया जा सके। न्यायिक निगरानी और निष्पक्ष जांच पर जोर पिछले साल अक्तूबर में, शीर्ष अदालत ने सीबीआई निदेशक को इस मामले की जांच के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही, पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में एक पर्यवेक्षी समिति का गठन भी किया गया था, जिसका उद्देश्य सीबीआई की जांच की निगरानी करना है। जनता के विश्वास को बहाल करने का प्रयास सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जे के महेश्वरी और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया शामिल थे, ने इस बात पर जोर दिया था कि करूर भगदड़ ने पूरे देश के नागरिकों के मन पर एक गहरी छाप छोड़ी है। अदालत ने कहा था कि इस घटना का नागरिकों के जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ा है और उन परिवारों के मौलिक अधिकारों को लागू करना अत्यंत महत्वपूर्ण है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। पीठ ने यह भी कहा था कि आपराधिक न्याय प्रणाली में जांच प्रक्रिया में आम जनता के विश्वास और भरोसे को बहाल किया जाना चाहिए। 

असम में सीट शेयरिंग ने BJP की मुश्किलें बढ़ाईं, NDA के साथी अब फ्रेंडली फाइट के मूड में

गुवाहाटी असम में 2026 की चुनावी बिसात बिछ चुकी है, लेकिन सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही खेमों के भीतर सीटों के गणित को लेकर तनातनी कम होने का नाम नहीं ले रही है। गठबंधन की राजनीति के इस दौर में सहयोगी दलों की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं ने रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। हालात यह हैं कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में गठबंधन के सहयोगियों के बीच ही ‘मैत्रीपूर्ण मुकाबला’ होने की संभावना प्रबल हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार एक तरफ विकास के दावों के साथ मैदान में है, वहीं दूसरी ओर उसे अपने सहयोगियों असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) को संतुष्ट रखने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। असम गण परिषद (AGP) 2014 से भाजपा की वफादार साथी रही है। इस बार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए दबाव बना रही है। पिछले 2021 के चुनावों में एजीपी ने 29 सीटों पर दांव आजमाया था, जिनमें से 26 पर उसने अकेले चुनाव लड़ा और 3 सीटों पर भाजपा के साथ दोस्ताना मुकाबला किया था। अंततः पार्टी 9 सीटें जीतने में सफल रही थी। इस बार एजीपी के जमीनी कार्यकर्ताओं की मांग है कि पार्टी को अधिक सीटों पर मौका मिलना चाहिए, जिससे भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने संकेत दिया है कि एजीपी के साथ शुरुआती दौर की चर्चा शुरू हो चुकी है और 9 या 10 मार्च तक सीटों का अंतिम खाका तैयार हो सकता है। हालांकि, जब उनसे सहयोगियों की बढ़ती मांगों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी औपचारिक मांग से अवगत नहीं हैं, लेकिन उन्होंने ‘फ्रेंडली फाइट’ की संभावना से इनकार भी नहीं किया। बोडोलैंड का पेच गठबंधन की सबसे पेचीदा स्थिति बोडोलैंड क्षेत्र में देखने को मिल रही है। यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) ने अपनी आक्रामक रणनीति का ऐलान करते हुए 21 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। इनमें से 15 सीटें बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) क्षेत्र की हैं और 6 सीटें उससे बाहर की हैं। सबसे बड़ी बाधा यह है कि बीपीएफ (BPF) और यूपीपीएल (UPPL) के बीच की कड़वाहट खत्म होने का नाम नहीं ले रही। दोनों दलों ने साफ कर दिया है कि वे न तो साथ चुनाव लड़ सकते हैं और न ही किसी सीट-शेयरिंग फॉर्मूले पर सहमत होंगे। यह स्थिति भाजपा के लिए सिरदर्द बन गई है, क्योंकि उसे इन दोनों क्षेत्रीय ताकतों के बीच संतुलन बनाना है। विपक्ष की एकजुटता दूसरी ओर सत्ता से बाहर कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर चार प्रमुख विपक्षी दलों ने हाथ मिलाया है और संयुक्त अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने गठबंधन की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि सभी सहयोगी दल जल्द ही पूरे राज्य में समन्वयित अभियान बैठकें करेंगे। गोगोई ने कहा, “हमारे पास केवल 30 दिन बचे हैं और ये 30 दिन असम के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमें एकजुट होकर जनता के बीच जाना होगा।” विपक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे कितनी जल्दी अपनी सीटों का बंटवारा कर पाते हैं, ताकि प्रचार के आखिरी दिनों में कोई आंतरिक कलह सामने न आए। जैसे-जैसे नामांकन की तारीखें नजदीक आ रही हैं, असम की राजनीति में गठबंधन धर्म और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के बीच का संघर्ष गहराता जा रहा है। जहां भाजपा के लिए अपने सहयोगियों की नाराजगी को दूर करना एक बड़ी परीक्षा है, वहीं विपक्ष के लिए 30 दिनों के भीतर एक साझा और प्रभावी नैरेटिव तैयार करना आसान नहीं होगा।

प्रोटोकॉल विवाद पर ममता का जवाब: ‘बंगाल को बदनाम करने की कोशिश

कोलकाता पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम में हुई अव्यवस्था के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार नहीं है। कोलकाता में पत्रकारों से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी निजी आयोजकों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की थी। इसलिए अगर कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी भी उन्हीं पर आती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को शनिवार को होने वाले राष्ट्रपति के कार्यक्रम की पूरी जानकारी भी नहीं दी गई थी और न ही सरकार को इस आयोजन में शामिल किया गया था। उनके मुताबिक, जब राज्य सरकार को कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी ही नहीं थी, तो उस पर प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप लगाना सही नहीं है। सीएम ममता ने यह भी कहा कि गंदगी, ग्रीन रूम की समस्या और महिलाओं के टॉयलेट की कमी जैसी शिकायतें भी आयोजकों और एएआई की जिम्मेदारी हैं। पीएम मोदी के आरोपों पर पलटवार मुख्यमंत्री ने कोलकाता के केंद्रीय धरना स्थल से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीएमसी सरकार पर राष्ट्रपति का अपमान करने का आरोप लगाया, जबकि वास्तविकता अलग है। उन्होंने प्रधानमंत्री की एक तस्वीर दिखाते हुए कहा कि तस्वीर में प्रधानमंत्री बैठे हैं और राष्ट्रपति खड़ी हैं। सीएम ममता ने कहा कि हम कभी ऐसा नहीं करते। यह भाजपा की संस्कृति है, हम कभी राष्ट्रपति का अपमान नहीं करते। संविधान का पूरा सम्मान करती हैं बंगाल सरकार- ममता ममता बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल सरकार राष्ट्रपति के पद और संविधान का पूरा सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है और राज्य सरकार हमेशा उसकी गरिमा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहती है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। राष्ट्रपति का सम्मान हर सरकारी की जिम्मेदारी- ममता उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस मुद्दे को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं ताकि राज्य सरकार की छवि खराब की जा सके। ममता बनर्जी ने दोहराया कि राज्य सरकार ने राष्ट्रपति के दौरे के दौरान अपनी तरफ से सभी जरूरी सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और संविधान का सम्मान करना हर सरकार और नागरिक की जिम्मेदारी है, और पश्चिम बंगाल सरकार इस जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाती है। लोगों के अधिकार के लिए धरना पर बैठी हूं- ममता ममता बनर्जी ने यह भी बताया कि सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देब ने प्रोटोकॉल का पालन करते हुए राष्ट्रपति का बैगडोगरा हवाई अड्डे पर स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं धरना पर बैठी हूं ताकि लोगों के अधिकार सुरक्षित रहें। मैं इसे कैसे छोड़ सकती हूं? उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और सरकार पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। ममता बनर्जी ने दोहराया कि राज्य सरकार हमेशा राष्ट्रपति और संविधान का सम्मान करती है और कार्यक्रम में किसी भी तरह की अव्यवस्था के लिए इसे जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। क्या है पूरा मामला, समझिए गौरतलब है कि बंगाल की राजनीति में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोपों के मामले में सियासत सातवें आसमान पर पहुंच गई है। इसकी शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति मुर्मू ने शनिवार को दार्जिलिंग में 9वें अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन के आयोजन को लेकर असंतोष व्यक्त किया था और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुपस्थिति पर टिप्पणी की थी। इसके बाद क्या था, भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार पर राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप लगाया और खूब बयानबाजी की। दूसरी ओर जबकि टीएमसी ने प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप को खारिज किया है।

TVK नेता विजय का वादा, आम जनता के लिए सोने और पैसों की गारंटी

तमिलनाडु विजय ने मामल्लापुरम में टीवीके के तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम में कहा कि जब उनकी पार्टी टीवीके सत्ता में आएगी, तो सरकारी कर्मचारियों को छोड़कर 60 वर्ष की आयु तक की सभी महिलाओं को मासिक सहायता प्रदान की जाएगी। अभिनेता-नेता तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के संस्थापक विजय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार शाम को विधानसभा चुनावों से पहले महिलाओं, बच्चों और परिवारों के लिए कई वादों की घोषणा की जिनमें 60 वर्ष से अधिक उम्र की बुजुर्ग महिलाओं के लिए हर महीने 2,500 रुपये, साल में छह एलपीजी सिलेंडर मुफ्त, मैरिज सीर स्कीम के तहत आठ ग्राम सोना और एक सिल्क साड़ी, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करना, शिक्षा सहायता, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में तेज न्याय के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन करना शामिल हैं। व्यापक कल्याण दृष्टिकोण के हिस्से के रूप में विजय ने कहा कि राज्य में जन्मे हर बच्चे को सरकार की ओर से एक सोने की अंगूठी दी जाएगी, जो परिवारों और बच्चों की भलाई के प्रतीक के रूप में होगी। विजय ने मामल्लापुरम में टीवीके के अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समारोह में दिए गए अपने भाषण में महिलाओं को सशक्त बनाने, परिवार कल्याण में सुधार तथा सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से महिलाओं पर केंद्रित प्रमुख वादों की झड़ी लगा दी और वादा किया कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आई तो इन्हें लागू किया जाएगा। उनकी एक प्रमुख घोषणा यह थी कि 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिला परिवार प्रमुखों को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि टीवीके के सत्ता में आने के तुरंत बाद यह स्कीम लागू की जाएगी, जिससे घरों में केंद्रीय भूमिका निभाने वाली बुजुर्ग महिलाओं को आर्थिक सहायता और सम्मान मिलेगा। उन्होंने “अन्नापूर्णी सुपर 6” स्कीम की भी घोषणा की, जिसके तहत हर परिवार को साल में छह एलपीजी सिलेंडर मुफ्त दिए जाएंगे। इस स्कीम का उद्देश्य परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करना और खाना पकाने तथा घरेलू जिम्मेदारियों को संभालने वाली महिलाओं को सहायता प्रदान करना है। शादी के दौरान महिलाओं को सहायता देने के लिए विजय ने “अन्नन सीर”(पारंपरिक उपहार या दहेज सामग्री जो नई दुल्हन को उसके माता-पिता देते हैं) स्कीम की घोषणा की। इस पहल के तहत सरकार हर योग्य महिला की शादी के लिए सोना और एक सिल्क साड़ी प्रदान करेगी। इस स्कीम का उद्देश्य शादियों के दौरान परिवारों पर आर्थिक दबाव कम करना है। विजय ने आगे महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण पर विशेष ध्यान देने वाला एक समर्पित सरकारी विभाग बनाने का वादा किया। यह विभाग कल्याण कार्यक्रमों को मजबूत करने, सुरक्षा उपाय लागू करने और इन समूहों से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए काम करेगा। शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने ‘कामराज शिक्षा आश्वासन स्कीम’ का वादा किया। इस पहल का उद्देश्य कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों को बिना ड्रॉपआउट के शिक्षा पूरी करने की गारंटी देना है। उन्होंने कहा कि परिवारों को बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सरकार हर ऐसे छात्र के माता-पिता या अभिभावक को सालाना 15,000 रुपये देगी, जिसकी पढ़ाई बिना रुकावट पूरी हो। एक अन्य पहल “वेत्री पयानम” (विजय यात्रा) स्कीम के तहत उन्होंने प्रदेश भर में सभी सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा का वादा किया। इस उपाय से महिलाओं की गतिशीलता में सुधार, रोजगार के अवसर बढ़ना और यात्रा व्यय कम होना अपेक्षित है। वर्तमान में द्रमुक सरकार की “विदियाल पयानम” योजना केवल लोकल बसों तक सीमित है, लेकिन इंट्रा-स्टेट या इंटर-स्टेट एक्सप्रेस बसों में नहीं। पूरे राज्य में महिलाओं की सुरक्षा मजबूत करने पर ध्यान देते हुए उन्होंने घोषणा की कि महिलाओं से संबंधित मामलों पर त्वरित कार्रवाई के लिए राज्य भर में 500 विशेष सुरक्षा टीमें गठित की जाएंगी। इसके अलावा, सार्वजनिक परिवहन वाहनों में स्मार्ट पैनिक बटन लगाए जाएंगे, जिससे महिला यात्रियों को आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। महिलाओं के खिलाफ अपराधों में तेज न्याय सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने कहा कि सरकार “अंजलाई अम्मल फास्ट-ट्रैक अदालत” का गठन करेगी। ये अदालतें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों को संभालेंगे, ताकि तेज ट्रायल और समयबद्ध न्याय मिल सके। विजय ने मासिक धर्म स्वच्छता और पहुंच सुधारने के उद्देश्य से एक सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल के तहत राशन दुकानों के माध्यम से महिलाओं को मुफ्त सेनेटरी नैपकिन वितरित करने का भी वादा किया। उन्होंने स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के माध्यम से महिलाओं को उद्यमिता, छोटे व्यवसाय और आर्थिक स्वतंत्रता के लिए 5 लाख रुपये तक ब्याज-मुक्त वित्तीय सहायता देने की घोषणा की। इन कल्याण घोषणाओं की लंबी सूची को टीवीके का एक बड़ा राजनीतिक बयान माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी तमिलनाडु में अपनी पहली प्रमुख चुनावी लड़ाई की तैयारी कर रही है। महिलाओं, परिवारों और शिक्षा पर विशेष फोकस करके विजय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि पार्टी सत्ता में आई तो सामाजिक कल्याण और सशक्तिकरण उसके शासन एजेंडे के मुख्य विषय होंगे।  

MP के इस जिले में BJP का संगठन विस्तार, नई मंडल कार्यकारिणी में 25 पदाधिकारी नियुक्त

सुसनेर भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से सुसनेर मंडल की नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। मंडल अध्यक्ष डॉ. सौरभ जैन ने 25 पदाधिकारियों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपते हुए संगठन को और सक्रिय बनाने का संदेश दिया है। घोषित कार्यकारिणी में कल्याण सिंह, अभय जैन, पीरू सिंह सारखा, जसवंत सिंह पालड़ा, मानसिंह गुराड़ी और कमल भावसार को मंडल उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं लखन सेन और बनास कुंवर कालूसिंह चौहान को मंडल महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंडल मंत्री के रूप में गोपाल सिंह, जितेंद्र सिंह राजपूत, हेमराज जाट, कमलसिंह सेमली, सिद्धू सिंह पटपड़ा और दुर्गाबाई विक्रम चौहान को शामिल किया गया है। दिनेश कानुडिया को कोषाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि ईश्वर सिंह पटेल और गोपाल पाटीदार को सह-कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। संगठन के संचालन के लिए अनिल जैन को कार्यालय मंत्री बनाया गया है। उनके सहयोग के लिए नारायण सिंह कलारिया और मनोज सुमन को सह कार्यालय मंत्री नियुक्त किया गया है। मीडिया और आईटी से जुड़े दायित्वों में दीपक जैन को मीडिया प्रभारी, स्नेहा युगल किशोर परमार को सह मीडिया प्रभारी बनाया गया है। वहीं यशवंत बैरागी को सोशल मीडिया प्रभारी, सिया भावसार को सह सोशल मीडिया प्रभारी तथा कार्तिक शर्मा को आईटी सेल प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंडल अध्यक्ष ने कहा कि नई टीम संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मिलकर कार्य करेगी।

LPG सिलेंडर के बढ़े दाम पर खड़गे का वार, बोले— पर्याप्त तेल-गैस मुहैया कराने में सरकार लाचार

नई दिल्ली.  कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफा होने के बाद केंद्र सरकार का निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पर्याप्त तेल-गैस और उर्वरक मुहैया कराने में लाचार है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “घरेलू एलपीजी सिलेंडर में 60 रुपए का इजाफा और कमर्शियल एलपीजी में 115 रुपए का मुनाफा कमाया। पहले कम अंतर्राष्ट्रीय दामों का लाभ जनता से छीना और अब महंगाई के बोझ से जनता का पसीना निकाला। जंग होने पर ‘सब चंगा सी’ वाली दावेबाज मोदी सरकार, पर्याप्त तेल-गैस और उर्वरक मुहैया कराने में लाचार है।” इससे पहले, कांग्रेस ने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट से पोस्ट किया, “सरकार ने जनता को झटका दिया है। सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम सीधे 60 रुपए बढ़ा दिए हैं। वहीं, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के लिए अब आपको 115 रुपए ज्यादा चुकाने होंगे। पिछले 3 महीने में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम 307 रुपए बढ़ गए हैं। सरकार लगातार जनता पर महंगाई का हंटर चला रही है।” आम आदमी पार्टी ने भी एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने पर सरकार को घेरा। पार्टी ने ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, “सरकार ने जनता को होली गिफ्ट दिया है। देश की जनता बढ़ती महंगाई से पहले ही त्रस्त है और उसके ऊपर से सरकार ने एक और बम फोड़ा है। सरकार ने घरों में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपए और बढ़ा दिए हैं।” बता दें कि तेल कंपनियों ने शनिवार को घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफा किया। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 114.5 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अनुसार, नई दिल्ली में 14.2 किलो के बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपए कर दी गई है, जो पहले 853 रुपए थी। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में एक साल से भी कम समय में यह दूसरी बार बढ़ोतरी हुई है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी प्रति यूनिट 114.5 रुपए की बढ़ोतरी हुई है।

निगम-मंडल नियुक्तियों के संदर्भ में बड़ा बयान: BJP में शामिल काबिल नेताओं को मिल सकता है अहम पद

भोपाल   मध्यप्रदेश में लंबे समय से प्रतीक्षित निगम-मंडल की नियुक्तियों को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संकेत दिया है कि पार्टी की ओर से नाम लगभग तय कर लिए गए हैं और अब केंद्रीय नेतृत्व की मुहर के बाद सूची जल्द जारी की जा सकती है। होली के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में खंडेलवाल ने कहा कि प्रदेश संगठन अपने हिस्से का काम पूरा कर चुका है। अब अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर होना है। उन्होंने बताया कि पार्टी की प्राथमिकता पहले संगठन की सभी नियुक्तियों को पूरा करना है, जिसके बाद निगम-मंडल की सूची जारी की जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि एल्डरमैन की नियुक्तियों के बाद ही निगम-मंडल के पदों की घोषणा की जाएगी। इससे संकेत मिल रहा है कि लंबे समय से इंतजार कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को जल्द जिम्मेदारी मिल सकती है। कांग्रेस से आए नेताओं को भी मिलेगा मौका खंडेलवाल ने यह भी इशारा किया कि कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए योग्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी मौका दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने साफ किया कि हारे हुए नेताओं और पूर्व मंत्रियों को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। पार्टी युवाओं और काबिल कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने पर ज्यादा फोकस करेगी। अप्रैल में होगी पहली प्रदेश कार्यसमिति बैठक प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि नई प्रदेश कार्यकारिणी की पहली कार्यसमिति बैठक अप्रैल में आयोजित की जाएगी। इसके बाद हर तीन महीने में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक नियमित रूप से होगी।अब राजनीतिक गलियारों में नजर इस बात पर टिकी है कि निगम-मंडल की बहुप्रतीक्षित सूची कब जारी होती है और उसमें किन नेताओं को जगह मिलती है।

MP राजनीति में नया मोड़, 40 साल बाद कांग्रेस में युवा नेताओं की एंट्री, BJP में भी नये चेहरों की छाप

भोपाल मध्य प्रदेश की राजनीति में अब नई पीढ़ी का दौर तेजी से दिखाई देने लगा है। लंबे समय तक वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में चलने वाली दोनों प्रमुख पार्टियों—Indian National Congress और Bharatiya Janata Party—में अब युवा नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान के बाद प्रदेश स्तर पर नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है, वहीं भाजपा में भी नए चेहरे प्रभावी होते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस में नई पीढ़ी को नेतृत्व 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए वरिष्ठ नेता Kamal Nath को प्रदेश नेतृत्व से हटाकर युवा नेता Jitu Patwari को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया।साथ ही आदिवासी नेता Umang Singhar को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। अब पटवारी और सिंघार की जोड़ी प्रदेश में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और पार्टी को फिर से खड़ा करने के प्रयास में जुटी हुई है। संगठन सृजन अभियान में उम्र सीमा तय कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान के दौरान पदाधिकारियों के लिए 50 वर्ष से कम उम्र की सीमा तय की। इसके तहत ब्लॉक, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर करीब आधे पदों पर 50 वर्ष से कम उम्र के नेताओं को मौका दिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार किसी भी व्यक्ति को एक पद पर पांच वर्ष से अधिक नहीं रखा जाएगा, ताकि संगठन में लगातार नए नेताओं को अवसर मिलते रहें। पटवारी–सिंघार बने नई रणनीति का चेहरा कांग्रेस की इस रणनीति का असर प्रदेश नेतृत्व में साफ दिखाई देता है। Jitu Patwari और Umang Singhar को लगभग 50 वर्ष की उम्र में ही बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। पार्टी इसे युवा नेतृत्व को आगे लाने की शुरुआत मान रही है। भाजपा में भी उभर रहे नए चेहरे मध्य प्रदेश में Bharatiya Janata Party में भी नेतृत्व परिवर्तन की झलक दिखाई दे रही है। प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में Mohan Yadav और प्रदेश अध्यक्ष के रूप में Hemant Khandelwal को नई पीढ़ी के नेताओं में माना जा रहा है। भाजपा में यह बदलाव अपेक्षाकृत सहज तरीके से स्वीकार किया गया, जबकि कांग्रेस में शुरुआत में कुछ हिचक देखने को मिली थी। भाजपा की पुरानी पीढ़ी का लंबा दौर दरअसल, 1985-90 के दौर में भाजपा के नेतृत्व ने जिन नेताओं को आगे बढ़ाया था, वे लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे। इनमें Shivraj Singh Chouhan, Kailash Vijayvargiya, Narendra Singh Tomar, Prahlad Patel, Narottam Mishra और Jayant Malaiya जैसे नेता शामिल रहे। वर्ष 2023 में करीब तीन दशक बाद भाजपा ने नया चेहरा सामने लाते हुए Mohan Yadav को मुख्यमंत्री बनाया। सियासी संकेत: मध्य प्रदेश में अब राजनीति धीरे-धीरे पुरानी पीढ़ी से नई पीढ़ी की ओर बढ़ती हुई नजर आ रही है। आने वाले वर्षों में दोनों ही दलों में युवा नेतृत्व की भूमिका और अधिक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।  

विदेश नीति को लेकर राहुल गांधी का हमला, कहा- प्रधानमंत्री समझौतावादी रुख अपना रहे

नई दिल्ली लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर विदेश नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की है। राहुल गांधी के आधिकारिक सोशल मीडिया एक्स अकाउंट पर 11 फरवरी को लोकसभा में दिए गए भाषण का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा गया है, “भारत की विदेश नीति हमारे लोगों की सामूहिक इच्छा से उत्पन्न होती है। यह हमारे इतिहास, हमारी भौगोलिक स्थिति और सत्य एवं अहिंसा पर आधारित हमारी आध्यात्मिक विचारधारा में निहित होनी चाहिए। आज हम जो देख रहे हैं, वह नीति नहीं है। यह एक भ्रष्ट व्यक्ति के शोषण का परिणाम है।” राहुल गांधी ने जो वीडियो पोस्ट किया है, उस पर लिखा है, “11 फरवरी 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के खतरे में होने की चेतावनी दी। अमेरिका ही तय करेगा कि हम किससे तेल खरीद सकते हैं और किससे नहीं। चाहे रूस से खरीदना हो या ईरान से, अमेरिका ही फैसला करेगा। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री फैसला नहीं करेंगे।” एक दिन पहले 5 मार्च को भी राहुल गांधी ने कहा था, “विश्व एक अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुका है। आगे भयंकर संकट मंडरा रहा है। भारत की तेल आपूर्ति खतरे में है, क्योंकि हमारे आयात का 40 फीसदी से अधिक हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। एलपीजी और एलएनजी के लिए स्थिति और भी बदतर है। संघर्ष हमारे पड़ोस तक पहुंच गया है, हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत डूब गया है। फिर भी प्रधानमंत्री ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। ऐसे समय में हमें एक स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता है। इसके विपरीत भारत के पास एक ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो समझौतावादी हैं और रणनीतिक स्वायत्तता को त्याग दिया है।” हालांकि पिछले सप्ताह इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 15 प्रतिशत से अधिक उछाल देखा गया था, लेकिन शुक्रवार सुबह तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह यह रही कि अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल को खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट देने का फैसला किया है।

क्या MP के पूर्व CM और दिग्गज नेता छोड़ेंगे राजनीति? सोशल पोस्ट ने सियासी गलियारों में मचाया भूचाल

भोपाल   मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बड़ा एलान किया है। दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर दिग्विजय सिंह ने अपने रिटायरमेंट प्लान को लेकर एक वीडियो पोस्ट किया है।यह पोस्ट काफी खलबली मचा रहा है और दिग्विजय सिंह के प्लान को बता रहा है। दिग्गी ने एक्स पर किए वीडियो पोस्ट से मची हलचल पूर्व सीएम और सांसद दिग्विजय सिंह ने एक्स पर एक वीडियो को साझा करके अपने रिटायरमेंट प्लान को लेकर एलान किया है। दरअसल जो वीडियो पोस्ट दिग्गी ने शेयर किया है वो काफी अलग है और काफी कुछ बयान करता है। दिग्विजय सिंह ने एक्स पर रिटायर्ड बैंक अधिकारी शिबानंद भंजा का एक वीडियो शेयर किया है। इस पर दिग्गी ने लिखा है… My Retirement Plans? May be.  Why not? जय सिया राम। इस वीडियो में काफी गहरा संदेश छिपा है। दरअसल  इसमें शिवानंद भंजा सेवानिवृत्ति के बाद एक गाड़ी खरीदकर भारत भ्रमण के लिए निकल पड़े हैं। इसी को लेकर दिग्विजय सिंह ने लिखा है कि…माई रिटायरमेंट प्लासं ? मे बी.व्हाई नाट? इस वीडियो में  रिटायर्ड बैंक अधिकारी शिबानंद भंजा अपनी पत्नी बसबी भंजा के साथ कार में भारत की सडकों पर अपनी आजादी की कहानी बता रहे हैं। दरअसल शिबानंज भंजा की पत्नी का सपना था कि घर की जगह एक गाड़ी लेंगें और उसमें पूरा घर घूमेंगे। तो इसी वीडियो को शेयर करते हुए शिवानंद भंजा और उसकी पत्नी के सपने को दिग्विजय सिंह ने शेयर किया है। इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि दिग्विजय कुछ अलग करने जा रहे हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल में पूरा होने वाला है। वर्तमान कार्यकाल 10 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद उनके भविष्य को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राज्यसभा का खत्म हो रहा कार्यकाल, दिग्गी पहले ही दे चुके हैं संकेत वैसे भी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल में पूरा होने वाला है, और  दिग्विजय सिंह पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि वे तीसरी बार राज्यसभा जाने के इच्छुक नहीं हैं।, जिसके बाद उनके भविष्य को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्या है दिग्विजय सिंह का अगला प्लान इस तरह के वीडियो को शेयर करके कांग्रेस संगठन और समर्थकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आगे उनकी राजनीतिक भूमिका क्या होगी। राजनीति की समझ रखने वालों का मानना है कि यदि दिग्गी राज्यसभा की दौड़ से खुद को अलग रखते हैं तो यह उनके सार्वजनिक जीवन के नए चरण की शुरुआत हो सकती है , तो वहीं कुछ इसे दिग्गी के सक्रिय राजनीति से संन्यास के संकेत में भी देख रहे हैं। वैसे इस साल 10 अप्रैल के बाद दिग्विजय की अगली पारी क्या और कैसी होगी इस सबकी नजरें टिकी हुई हैं। हालांकि दिग्विजय सिंह ने वैसे तो कोई अधिकारिक तौर पर राजनीति छोड़ने का कोई ऐलान नहीं किया है । लेकिन पहले राज्यसभा नहीं जाने की बात कहकर और फिर इस वीडियो को जारी करके राजनीति भविष्य पर अटकलों और कयासों को हवा जरूर तो दे ही दी है।

प्रियंका चतुर्वेदी को लेकर बढ़ी सियासी हलचल, आदित्य से अनबन की खबरों पर संजय राउत का जवाब

मुंबई शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट की नेता प्रियंका चतुर्वेदी का राज्यसभा से कार्यकाल समाप्त हो गया है और उन्हें दूसरा मौका नहीं मिला है। उनके स्थान पर दिग्गज नेता शरद पवार को उच्च सदन में भेजा जा रहा है और इसे लेकर उद्धव सेना ने भी सहमति जताई। इस बीच चर्चाएं यह भी थीं कि पार्टी के भीतर प्रियंका को भेजने या फिर मौका ना देने को लेकर मतभेद थे। आदित्य ठाकरे चाहते थे कि प्रियंका चतुर्वेदी को फिर से मौका मिले, लेकिन संजय राउत ने शरद पवार को भेजे जाने का वादा किया और अंत में उनकी ही चली। इसे लेकर चर्चाएं यहां तक शुरू हो गईं कि आदित्य ठाकरे के आगे संजय राउत की ही चली और शरद पवार को किया कमिटमेंट पार्टी को मानना पड़ गया। अब इस मामले में संजय राउत ने सफाई भी देने की कोशिश की है। उनका कहना है कि राजनीतिक समीकरण पक्ष में नहीं थे और शरद पवार जैसे सीनियर नेता राज्यसभा जाना चाहते थे। इसलिए प्रियंका चतुर्वेदी का नाम आगे नहीं बढ़ाया गया। यदि समीकरण अनुकूल होते और शरद पवार जैसे नेता का नाम नहीं होता तो निश्चित तौर पर पार्टी की ओर से प्रियंका को ही दोबारा राज्यसभा भेजने पर विचार किया जाता। उन्होंने कहा कि यह बात रही है कि उद्धव सेना में अंदरखाने यह इच्छा प्रबल थी कि प्रियंका चतुर्वेदी को फिर से राज्यसभा में भेजा जाए। लेकिन पार्टी के पास अपने स्तर पर नंबर कम थे और फिर जब शरद पवार जैसे सीनियर नेता ने दावा कर दिया तो प्रियंका चतुर्वेदी के लिए मुकाबले में बने रहना मुश्किल हो गया। संजय राउत ने कहा, ‘पार्टी में यह प्रबल इच्छा थी कि प्रियंका चतुर्वेदी को एक और मौका दिया जाए। लेकिन जरूरी नंबर नहीं थे। यदि शरद पवार खुद मुकाबले में ना आना चाहते और नंबर होते तो उन्हें ही भेजा जाता। उन्हें 100 फीसदी चांस दिया जाता।’ बता दें कि महाराष्ट्र में 7 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से 6 पर एनडीए जीतने की स्थिति में है। एकमात्र सीट विपक्ष जीत सकता है, जिस पर शरद पवार को उतारा गया है। इस एकमात्र सीट पर उद्धव सेना, कांग्रेस और एनसीपी-एसपी तीनों ही दावा कर रहे थे, लेकिन अंत में शरद पवार के नाम पर ही सहमति बनी। भाजपा ने रामदास आठवले और विनोद तावड़े जैसे नेताओं को चांस दिया है। संजय राउत से जब एनडीए उम्मीदवारों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि आठवले के बारे में तो पहले से ही तय लग रहा था। अब विनोद तावड़े को भेजना अहम है। दरअसल विनोद तावड़े बीते कई सालों से संगठन में काम कर रहे हैं। कई राज्यों के प्रभारी रहे हैं। उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति से दूर रखा गया और वह चुपचाप करते रहे। माना जा रहा है कि अब उसका इनाम उन्हें राज्यसभा भेजकर दिया जा रहा है।  

निगम-मंडलों के 36 नामों की सूची तैयार, राजनीतिक नियुक्तियां जल्द, मंत्रिमंडल विस्तार अभी नहीं

भोपाल  प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से जारी इंतजार अब खत्म होने वाला है। सत्ताधारी दल के शीर्ष नेतृत्व ने निगम-मंडलों, प्राधिकरणों और विभिन्न सरकारी संगठनों में नियुक्तियों के लिए करीब तीन दर्जन नामों का प्रस्ताव तैयार किया है। यह सूची हाल ही में दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दी गई है। अंतिम मुहर लगने के बाद औपचारिक घोषणा की जाएगी।  सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित सूची में संगठन और सरकार से जुड़े ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी गई है, जो लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन अब तक किसी महत्वपूर्ण दायित्व से वंचित रहे हैं। सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। चरणबद्ध  होंगी नियुक्तियां बताया जा रहा है कि नियुक्तियां चरणबद्ध तरीके से की जाएंगी। कुछ प्रमुख निगमों और प्राधिकरणों में पहले चरण में नियुक्ति आदेश जारी हो सकते हैं, जबकि शेष पदों पर बाद में निर्णय लिया जाएगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इन नियुक्तियों से संगठन में उत्साह बढ़ेगा और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा मिलेगी। लंबे समय से टल रहा निर्णय बता दें, कि लोकसभा चुनाव के बाद से ही इन नियुक्तियों को लेकर चर्चा चल रही थी। कई बार सूची तैयार होने की बात सामने आई, लेकिन अंतिम निर्णय टलता रहा। अब माना जा रहा है कि इसी माह कभी भी इस संबंध में आधिकारिक रूप से सूची जारी की जा सकती है। भाजपा बचे हुए मोर्चो की कार्यकारिणी, जिला कार्यकारिणी, मंडल पदाधिकारियों, एल्डर मैन समेत अन्य पदों पर नियुक्ति के आदेश जल्द जारी करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आगामी नगरीय निकाय और अन्य चुनावों को देखते हुए संगठनात्मक संतुलन बनाना पार्टी की प्राथमिकता है। ऐसे में इन नियुक्तियों को रणनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। मंत्रिमंडल विस्तार अभी नहीं, प्रदेश कार्यसमिति की बैठक अगले माह उधर, मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें जारी हैं। सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल का विस्तार तय माना जा रहा है, लेकिन यह प्रक्रिया अभी नहीं होगी और इसके लिए करीब दो से तीन महीने का समय लग सकता है। वहीं, मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक अप्रैल में होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि इसके बाद प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हर तीन महीने में नियमित रूप से आयोजित की जा सकती है।

राज्यसभा से दूरी पर आनंद शर्मा का बड़ा बयान, ‘सच बोलो तो राजनीति में जगह नहीं’

हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश में इस बार राज्यसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद आसान और सुखद नजर आ रहा है। भाजपा की ओर से कोई भी उम्मीदवार नहीं उतारे जाने के कारण कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है। इस बार राज्यसभा कैंडिडेट के तौर पर मौका नहीं दिए जाने पर कांग्रेस लीडर आनंद शर्मा की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि पॉलिटिक्स में सेल्फ रिस्पेक्ट बहुत महंगी पड़ती है। सच बोलना अक्सर गुनाह माना जाता है। मैं इस मामले को हाईकमान के पास नहीं ले जाऊंगा। सुप्रीम कमांड ही देगा जवाब यह पूछे जाने पर कि ऐसा लग रहा है कि टिकट नहीं मिलने से निराश हैं। इस पर आनंद शर्मा ने कहा कि मुझे कुछ नहीं पता… मुझे कोई जानकारी नहीं है। आगे एएनआई संवाददाता के यह पूछे जाने पर कि सेंट्रल लीडरशिप ऐसे फैसले ले रही हैं क्योंकि कांग्रेस बैकफुट पर जा रही है? इस पर आनंद शर्मा ने कहा कि इसका जवाब तो सुप्रीम कमांड जिन्होंने फैसला लिया है वही दे सकते हैं और जिनके कहने पर फैसला होता है वह बता सकते हैं। राजनीति में आत्मसम्मन बहुत महंगा, सच बोलना अपराध आनंद शर्मा ने कहा कि मैं इस पर कोई टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हूं। इस बात पर कि हिमाचल प्रदेश में आनंद शर्मा का राजनीतिक सफर 50 साल का रहा है। ऐसे में इस घटनाक्रम को आप किस तरह देखते हैं। इस पर आनंद शर्मा ने कहा कि देखिए निराशा तो नहीं कहूंगा लेकिन एकबार जरूर कहना चाहूंगा कि राजनीति में आत्मसम्मान बहुत महंगी चीज होता है। इसकी कीमत चुकानी पड़ती है और सच बोलना एक अपराध और अभिशाप समझा जाता है। इसके आगे मैं कुछ नहीं कह सकता हूं। हिमाचल प्रदेश को रिप्रेजेंट करना मेरे लिए गर्व की बात आनंद शर्मा ने आगे कहा कि दशकों से हिमाचल प्रदेश और देश को रिप्रेजेंट करना मेरे लिए गर्व की बात रही है। मैं हमेशा हिमाचल प्रदेश के लोगों के साथ रहूंगा। आनंद शर्मा को सच बोलने से कभी नहीं रोका जा सकता है। मैं यह मामला हाईकमान के पास नहीं ले जाऊंगा। मैं इस मुद्दे पर उनके साथ कोई बात नहीं करूंगा। पिछली बार कांग्रेस को लगा था झटका बता दें कि हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा सीट भाजपा की राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी का छह साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हुई है। करीब दो साल पहले हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था। उस समय कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी हार गए थे और भाजपा के हर्ष महाजन राज्यसभा पहुंचे थे। उस चुनाव में कांग्रेस नेताओं की ओर से क्रॉस वोटिंग सामने आई थी। हालांकि इस बार स्थिति अलग है। कांग्रेस के लिए यह चुनाव आसान है। भाजपा ने इस बार अपना कंडिडेट नहीं उतारा है।

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