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महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने की भगवान शिव की पूजा-अर्चना

जयपुर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास स्थित मां राजराजेश्वरी मंदिर में सपरिवार पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली एवं प्रगति की कामना की। श्री शर्मा ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया तथा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा कर आरती उतारी। इस दौरान मुख्यमंत्री निवास पर नियोजित अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

राजस्थान में शिक्षक पात्रता परीक्षा 27 और 28 फरवरी को

राजस्थान राजस्थान में शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) 27 और 28 फरवरी को आयोजित की जाएगी, जिसमें 14 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल होंगे। परीक्षा के लिए प्रदेशभर में 41 जिला मुख्यालयों पर 1,756 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अनुसार, 27 फरवरी को लेवल-1 और लेवल-2 दोनों की परीक्षा होगी, जबकि 28 फरवरी को केवल लेवल-2 की परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा के लिए लेवल-1 में 3,46,625 उम्मीदवार, लेवल-2 में 9,68,501 उम्मीदवार, और दोनों स्तरों के लिए 1,14,696 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है। REET परीक्षा केवल राजस्थान में आयोजित की जाएगी, लेकिन इसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब और गुजरात के अभ्यर्थी भी शामिल होंगे। परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी की व्यवस्था की गई है। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और प्रवेश प्रक्रिया परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिनमें बायोमेट्रिक उपस्थिति और फेस रिकग्निशन अनिवार्य किया गया है। परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्रों पर दो घंटे पहले पहुंचना अनिवार्य होगा। परीक्षा केंद्र का गेट परीक्षा शुरू होने से एक घंटे पहले बंद कर दिया जाएगा। सुबह 8 से 9 बजे तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसमें कड़ी जांच की जाएगी। प्रवेश पत्र पर लगी फोटो से मिलान नहीं होने पर गहन जांच की जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो। REET प्रमाण पत्र की वैधता REET परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उम्मीदवारों को राजस्थान में शिक्षक भर्ती परीक्षा या दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया में शामिल होना होगा। अंतिम चयन मेरिट लिस्ट और दस्तावेज़ सत्यापन के आधार पर किया जाएगा। परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को आजीवन मान्य REET प्रमाण पत्र दिया जाएगा, जो भविष्य में शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में मान्य रहेगा। इससे अभ्यर्थियों को सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का अवसर मिलेगा। विशेष परिवहन सुविधाएँ परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए राजस्थान सरकार ने विशेष इंतजाम किए हैं। रोडवेज और रेलवे की ओर से विशेष बसों और ट्रेनों का संचालन किया जाएगा, जिससे उम्मीदवारों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। परीक्षा केंद्रों तक आसानी से पहुंचने के लिए विभिन्न जिलों से अतिरिक्त बस सेवाएँ शुरू की गई हैं। रेलवे भी उम्मीदवारों के लिए परीक्षा तिथियों के अनुसार विशेष ट्रेनों का संचालन करेगा। 2021 की REET परीक्षा में पेपर लीक मामला राजस्थान में REET 2022 परीक्षा 23 और 24 जुलाई को आयोजित की गई थी, जिसमें 46,500 तृतीय श्रेणी शिक्षकों की भर्ती के लिए परीक्षा हुई थी। लेकिन इससे पहले 2021 की REET परीक्षा में बड़े स्तर पर पेपर लीक का मामला सामने आया था। 26 सितंबर 2021 को आयोजित परीक्षा के दौरान गंगापुर सिटी में एक संगठित गिरोह के बारे में सूचना मिली थी। पुलिस जांच में सवाई माधोपुर जिले के कांस्टेबल देवेंद्र सिंह के मोबाइल में 33 हल किए हुए पेपर के फोटो मिले थे। इस मामले में यदुवीर, बत्तीलाल मीना, दिलखुश मीना सहित कई आरोपियों के नाम सामने आए थे। जांच के दौरान पेपर लीक के तार जयपुर स्थित शिक्षा संकुल तक जुड़े पाए गए थे, जिसके बाद सरकार ने परीक्षा सुरक्षा के इंतजाम और अधिक कड़े कर दिए हैं।  

छोटी काशी के नाम से विख्यात जयपुर के 5 प्रसिद्ध शिव मंदिर

जयपुर महाशिवरात्रि के अवसर देश और प्रदेश के सभी शिवालयों में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। महाशिवरात्रि को ना तो शिव जी का जन्म हुआ और ना ही विवाह। इसके बावजूद भी इस दिन को भगवान शिव के लिए अहम क्यों माना जाता है। पौराणिक तथ्यों के मुताबिक भगवान शिव का जन्म किसी प्राणी ने नहीं हुआ बल्कि वे स्वयंभू हैं। वे भगवान विष्णु के तेज से प्रकट हुए थे और अनादीकाल से हैं। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। ऐसे में इन दिन को यानी महाशिवरात्रि को भगवान शिव के प्रकटोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जयपुर को देवों की नगरी कहा जाता है क्योंकि यहां मंदिरों की संख्या बहुत ज्यादा है। सवाई जयसिंह ने जब जयपुर की स्थापना की थी। तब उन्होंने शहर के हर चौराहे, तिराहे, गलियों के मुहाने और प्रमुख मार्गों में मंदिरों की स्थापना की थी। शिवरात्रि पर जानते हैं जयपुर के उन पांच शिव मंदिरों के बारे में जहां श्रद्धालुओं का जुड़ाव ज्यादा है। झारखंड महादेव मंदिर जयपुर के पास वैशाली नगर इलाके में प्रेमपुरा गांव हुआ करता था जो अब शहरी सीमा में है। सदियों पहले यहां झाड़ बहुत ज्यादा हुआ करता था। झाड़ियों के अलग अलग झुंड होने की वजह से यहां के मंदिर का नाम झारखंड महादेव मंदिर रखा गया। यह मंदिर सैकड़ों साल पुराना है और दक्षिण भारत की शैली में बना हुआ है। यह जयपुर के सबसे प्रमुख मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर में प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा होती है लेकिन महाशिवरात्रि के मौके पर लाखों भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं। हर बार की तरह इस बार भी सुबह चार बजे से ही मंदिर के बाहर श्रद्धालुों की लंबी कतार लगी है। करीब दो किलोमीटर लंबी भक्तों की कतार लगी है। महिला और पुरुषों के लिए अलग अलग कतार में दर्शन की व्यवस्था की गई है। ताड़केश्वर महादेव मंदिर जयपुर शहर के चौड़ा रास्ता में स्थित ताड़केश्वर महादेव मंदिर हैं जहां का महत्व अपने आप में अलग है। यह मंदिर जयपुर की स्थापना से पहले का है। ऐसा माना जाता है कि यहां के मंदिर में शिव लिंग की स्थापना नहीं की गई बल्कि शिवलिंग स्वयं प्रकट हुए थे। पहले इस मंदिर को ताड़कनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता था और बाद में ताड़केश्वर मंदिर के रूप में जाना जाने लगा। 1727 में जब जयपुर की स्थापना हुई तब वास्तुविद विद्याधर जी ने इस मंदिर की रूपरेखा तैयार की और इसे बड़े मंदिर के रूप में बनाया गया था। हर बार की तरह इस बार भी महाशिवरात्रि के दिन लाखों की संख्या में भक्त भोले बाबा के दर्शन के लिए आ रहे हैं। केदारनाथ शिव मंदिर जयपुर के पास खोह नागोरियान इलाके में स्थित पहाड़ी पर केदारनाथ शिव मंदिर है। यह मंदिर एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। 1102 ईस्वी में चांदा मीणा नाम के एक शासक ने इस मंदिर की स्थापना की थी। इस मंदिर की प्रतिमा को उत्तराखंड के केदारनाथ से लाया गया था। इसी वजह से इस मंदिर का नाम केदारनाथ शिव मंदिर रखा गया। यहां शिव लिंग के साथ माता पार्वती और नंदी की प्रतिमा भी स्थापित हैं। चारों ओर पहाड़ियों के नजारे हैं और एक पहाड़ी की चोटी पर यह मंदिर है। ऐसे में इस शिव मंदिर की भव्यता अपने आप में अनूठी है। सावन के महीने में यहां भक्तों की लंबी कतार लगती है। चूंकि यह मंदिर काफी ऊंचाई पर है। ऐसे में यहां आने वाले भक्तों की संख्या सीमित है। दर्शन आराम से हो रहे हैं। चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर यह मंदिर जयपुर शहर के बनीपार्क में स्थित है। मंदिर की स्थापना करीब 60 साल पहले की गई थी। कहा जाता है कि 60 साल पहले यहां एक गाय के थन से दूध की धारा अचानक बहने लगी थी। लोगों ने इसे भगवान शिव का चमत्कार माना जिसके बाद से इस स्थान पर चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की गई। इस मंदिर में अर्द्धनारीश्वर मूर्ति की पूजा की जाती है। मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंग के स्वरूप को भी विराजमान किया गया है। हर बार की तरह इस महाशिवरात्रि को भी यहां भक्तों का बड़ा मेला लगा है। रोजगारेश्वर महादेव मंदिर जयपुर शहर के परकोटा क्षेत्र में एक शिव मंदिर है जिसका नाम रोजगारेश्वर महादेव मंदिर है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में जाकर सच्चे मन से पूजा अर्चना करने और ध्यान लगाने से बेरोजगारों को रोजगार मिल जाता है। इसी वजह से इस मंदिर का नाम रोजगारेश्वर मंदिर रखा गया। कुछ वर्षों पहले जब जयपुर शहर के परकोटा इलाके में मेट्रो का स्टेशन बनाया जाना था। तब यह मंदिर बीच में आ रहा था। तत्कालीन सरकार ने इस मंदिर को ध्वस्त किया और मेट्रो स्टेशन के निर्माण के बाद उसी जगह पर उसी रूप में मंदिर को फिर से स्थापित किया गया। इस मंदिर में युवाओं की भीड़ सबसे ज्यादा होती है।

नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण मामले में मसूदा और आसपास के इलाकों में बाजार बंद

जयपुर, राजस्थान के ब्यावर जिले के बिजयनगर थाना क्षेत्र में नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण करने और उनका धर्म परिवर्तन करने की कोशिश करने वाले आरोपियों के खिलाफ सख्त सजा की मांग को लेकर मसूदा कस्बे और आसपास के इलाकों में मंगलवार को बाजार बंद रहे। एक पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने इस संबंध में में एक वार्ड पार्षद समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है और तीन नाबालिगों को हिरासत में लिया है। मसूदा पुलिस उपाधीक्षक सज्जन सिंह ने बताया कि ‘घटना के विरोध में मसूदा कस्बे और आसपास के इलाकों में बाजार मंगलवार को बंद है। उन्होंने बताया कि इस मामले में अब तक एक वार्ड पार्षद समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है और तीन नाबालिगों को हिरासत में लिया गया है।’ पुलिस ने बताया कि पांच पीड़ित नाबालिग लड़कियों के परिजनों की ओर से पिछले सप्ताह मिली शिकायतों के आधार पर 10 लोगों के खिलाफ तीन प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन्होंने बताया कि पीड़ित नाबालिग लड़कियों ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि आरोपियों ने सोशल मीडिया के जरिए उनसे संपर्क किया, उन्हें चीनी मोबाइल फोन दिए और उनका यौन शोषण किया। पुलिस ने बताया कि कुछ नाबालिग लड़कियों ने आरोपियों पर धर्म परिवर्तन के लिए ब्लैकमेल करने का भी आरोप लगाया है।  

राजस्थान : विधानसभा में मंत्री की टिप्पणी पर गतिरोध जारी, कांग्रेस ने कार्यवाही का किया बहिष्कार

जयपुर,  राजस्थान विधानसभा में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस नेताओं के बीच गतिरोध मंगलवार को भी जारी है और कांग्रेस के छह निलंबित विधायकों को सदन में प्रवेश नहीं करने दिया गया। निलंबित विधायकों का समर्थन कर रहे कांग्रेस के अन्य विधायक भी विधानसभा में प्रवेश नहीं कर पाए। कांग्रेस विधायक विधानसभा परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी की। इस बीच, कांग्रेस के बहिष्कार के बीच सदन के अंदर प्रश्नकाल की कार्यवाही जारी रही। राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर पिछले शुक्रवार से सदन में गतिरोध जारी है। इस गतिरोध के चलते सदन की कार्यवाही सोमवार को बार-बार बाधित हुई थी।। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मंगलवार को विधानसभा के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में कहा ‘ जिस बात को लेकर गतिरोध हुआ था, मंत्री की वह टिप्पणी आज भी कार्यवाही में मौजूद है और मंत्री एक शब्द नहीं बोल रहे हैं।’’ उन्होंने कहा ‘‘ हमारी मांग आज भी वही है कि मंत्री माफी मांगे… उनके द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री के लिये कहे गये शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए और फिर हमारा निलंबन रद्द कर सदन चले।’’ डोटासरा ने कहा ‘‘ सदन इनको (सरकार को) चलाना है… इनकी आंतरिक कलह है …मुख्यमंत्री की… विधानसभा अध्यक्ष की…, वसुंधरा की…, किरोड़ी मीणा की… उसके चक्कर में पूरे राजस्थान के मुद्दों को नजरअंदाज करना चाहते है।’’ गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने संवाददाताओं से कहा ‘सदन में गतिरोध को समाप्त करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विपक्ष के नेता दिशाहीन हो गए हैं और अनावश्यक मुद्दों पर गतिरोध पैदा कर रहे हैं, उन्हें सदन चलाने में मदद करनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता अपनी अंदरूनी लड़ाई को सदन में लाना चाहते हैं। विपक्षी कांग्रेस ने मंत्री से माफी मांगने और विधायकों का निलंबन रद्द करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। विधानसभा में गतिरोध समाप्त करने के लिए अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के कक्ष में सत्तारूढ़ भाजपा के नेताओं और विपक्षी कांग्रेस नेताओं के बीच कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन मामला सुलझ नहीं सका, क्योंकि निलंबित कांग्रेस विधायक और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयान से अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री संतुष्ट नहीं थे। बाद में विपक्षी कांग्रेस ने दिनभर के लिए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। सदन की कार्यवाही सोमवार को व्यवधान के बीच चार बार स्थगित की गई थी। उल्लेखनीय है कि मंत्री अविनाश गहलोत ने शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास संबंधी प्रश्न का उत्तर देते समय विपक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा था, ‘‘2023-24 के बजट में भी आपने हर बार की तरह अपनी ‘दादी’ इंदिरा गांधी के नाम पर इस योजना का नाम रखा था।’’ इस टिप्पणी के कारण सदन में भारी हंगामा हुआ था, और सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। हंगामे के कारण प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, रामकेश मीणा, अमीन कागजी, जाकिर हुसैन, हाकम अली और संजय कुमार सहित छह कांग्रेस विधायकों को सदन से निलंबित कर दिया गया था। सदन की बैठक स्थगित होने के बाद कांग्रेस विधायकों ने मंत्री से माफी मांगने और निलंबन रद्द करने की मांग करते हुए विधानसभा में धरना शुरू कर दिया था।  

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही IAS बने लड़के की प्रेरणादायक कहानी

राजस्थान राजस्थान के एक छोटे से गांव से उठकर IAS बने एक लड़के की प्रेरणादायक कहानी इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसे यह भी पता नहीं था कि IAS क्या होता है, आज अपनी मेहनत और संघर्ष से IAS अधिकारी बन गया है। यह कहानी लोगों को अपनी मंजिल पाने के लिए प्रेरित कर रही है। तुम कहीं के कलेक्टर हो क्या? यह कहानी एक ऐसे लड़के की है, जिसका नाम हेमंत है। बचपन में उनकी मां मनरेगा में काम करती थीं और रोजाना केवल 60-70 रुपए ही कमाती थीं, जबकि सरकार द्वारा तय मजदूरी 200 रुपए थी। एक दिन हेमंत की मां घर आईं और बेटे के सामने रोते हुए अपनी दुखभरी कहानी सुनाई। मां ने बताया कि उन्होंने पानी लगाने का काम जानबूझकर कर लिया था, जिससे 20 रुपए ज्यादा मिलते, लेकिन फिर भी उन्हें कम ही पैसे मिले। इस पर हेमंत ने ऑफिस जाकर उस कर्मचारी से सवाल किया कि क्यों उनकी मां को कम पैसे दिए जा रहे हैं। कर्मचारी ने ताना मारते हुए कहा, “तू कहीं का कलेक्टर है क्या? यह ताना हेमंत के दिल को चुभ गया। हेमंत को यह बात बहुत बुरी लगी और उन्होंने ठान लिया कि वे IAS अधिकारी बनेंगे। हालांकि, उस समय उन्हें यह भी नहीं पता था कि IAS होता क्या है। एक दिन कॉलेज में रैगिंग के दौरान जब सीनियर ने पूछा कि वे क्या बनना चाहते हैं, तो हेमंत ने बिना सोचे-समझे कह दिया कि IAS बनना है। तब उन्हें यह भी नहीं पता था कि IAS के लिए क्या करना पड़ता है। इसके बाद हेमंत ने अपने भाई से पूछा और IAS के बारे में जानकारी ली। उनके भाई ने उन्हें यूट्यूब पर वीडियो भेजे और समझाया। हेमंत के पास पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे। उनकी मां मजदूर थीं और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। दोस्तों और सीनियर की मदद से उन्होंने कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन खर्चों के कारण स्थिति बहुत कठिन हो गई। फिर भी, हेमंत ने हार नहीं मानी और दिल्ली में अपनी पढ़ाई जारी रखी। उनके दोस्त जोगेंद्र सियाग ने उन्हें आश्रय दिया और निशांत सिंह ने बिना पैसे लिए उन्हें सोशियोलॉजी का एडमिशन दिया। हेमंत ने अपनी कठिनाईयों के बावजूद कड़ी मेहनत की और यूपीएससी के दूसरे प्रयास में 884 रैंक प्राप्त की। इस तरह उनका और उनके परिवार का सपना पूरा हुआ। हेमंत की यह कहानी यह साबित करती है कि अगर कोई ठान ले, तो कोई भी सपना बड़ा नहीं होता। उन्होंने अपने संघर्ष और मेहनत से यह साबित किया कि सच्ची लगन से कुछ भी हासिल किया जा सकता है।

ट्रैफिक जाम की वजह 3 साल के बीमार बच्चे की मौत

राजस्थान राजस्थान के कोटा जिले में सोमवार को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जहां एक 3 साल के बीमार बच्चे की मौत सिर्फ ट्रैफिक जाम की वजह से हो गई। बच्चा सर्दी-जुकाम से पीड़ित था, और उसे अस्पताल ले जाते समय उसके माता-पिता ने पुलिस से जाम खुलवाने की गुहार लगाई, लेकिन लगभग 3 घंटे तक जाम में फंसे रहने के कारण समय पर इलाज न मिलने से बच्चे ने बीच रास्ते में दम तोड़ दिया। घटना कोटा जिले के रामगंजमंडी से कोटा जाने वाले नेशनल हाईवे-52 पर स्थित दरा नाल के पास की है। यह इलाका ट्रैफिक जाम के लिए बदनाम है, जहां आए दिन भारी जाम लगता है। दरा नाल के सिंगल लेन पर जाम लगने से लोग घंटों फंसे रहते हैं। सोमवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब एक बीमार बच्चे को अस्पताल लेकर जा रहे उसके माता-पिता भारी ट्रैफिक जाम में फंस गए। परिवार ने बार-बार पुलिस से जाम खोलने की मदद मांगी, लेकिन करीब तीन घंटे तक जाम में फंसे रहने के कारण बच्चे की स्थिति गंभीर हो गई और उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मृतक बच्चे के पिता पप्पू लाल ने बताया कि उनका बेटा हरिओम सर्दी और बुखार से पीड़ित था। उन्होंने पहले उसे चेचट सरकारी अस्पताल में दिखाया था, लेकिन उसकी हालत गंभीर होने के कारण उसे कोटा रेफर कर दिया गया था। जब वे कोटा के लिए रवाना हुए, तो दरा नाल के पास ट्रैफिक जाम में फंस गए और समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाए, जिससे बच्चे की जान चली गई। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है, क्योंकि उनका कहना है कि पुलिस ने उनकी कोई मदद नहीं की। लोगों का आरोप है कि पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन उन्होंने जाम में फंसी एंबुलेंस या अन्य वाहनों को प्राथमिकता नहीं दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जाम जल्दी खुलवाया जाता, तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। घटना के बाद पुलिस ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। पुलिस का कहना है कि दरा नाल पर भारी ट्रैफिक जाम के दौरान पुलिस का जाप्ता तैनात किया गया था, और एंबुलेंस को प्राथमिकता के साथ जाम से बाहर निकाला जाता है। पुलिस ने बताया कि जाम के कारण हुई इस मौत की जांच की जा रही है और मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।  

जयपुर से खाटू श्याम जी जा रही रोडवेज बस की बस में भीषण आग, लोगों ने कूदकर बचाई जान

सीकर राजस्थान के सीकर जिले से एक बड़ी घटना सामने आई है। जहां जयपुर से खाटू श्याम जी जा रही जयपुर डीपो की रोडवेज बस में अज्ञात कारणों से आग लग गई। बस में कुल 50 यात्री सवार थे, जिन्होंने अपनी जान बचाने के लिए समय रहते बस से कूदकर भाग निकाला। 50 यात्रियों ने कूदकर बचाई जान मिली जानकारी के मुताबिक, घटना रींगस थाना क्षेत्र की है। यहां के राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 52 पर सरगोठ के पास आते ही बस चालक को आग लगने का आभास हुआ और उन्होंने बस को सड़क किनारे स्थित एक होटल के पास खड़ा कर दिया। जैसे ही आग बढ़ी, यात्रियों ने कूदकर अपनी जान बचाई। सूचना मिलते ही रींगस नगर पालिका की दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब 40 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी। क्या कहती है पुलिस? थानाधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि बस में सवार सभी 50 यात्री सुरक्षित हैं। आगजनी के बाद चालक की सूझबूझ से हादसा बड़ा नहीं हुआ। अगर समय रहते आग की जानकारी नहीं मिलती, तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी ऐसे कई हादसे हो चुके हैं। एक दिन पहले ही बिहार के मुजफ्फरपुर में सड़क किनारे खड़ी दो यात्री बसों में अचानक आग लग गई। आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया और दोनों बसें जलकर पूरी तरह खाक हो गईं। हालांकि, इस घटना में कई यात्री घायल नहीं हुआ।  

खाटूश्यामजी मेले से पहले बस में लगी आग से टला बड़ा हादसा, 50 यात्रियों ने कूदकर बचाई जान

सीकर विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी लक्खी मेले से पहले राजस्थान में सीकर-जयपुर नेशनल हाईव पर बड़ा हादसा होते-होते टल गया। अचानक एक राजस्थान रोड़वेज बस में आग लग गई। गनीमत रही की सवारियों से भरी बस के खिड़कियां और दरवाजे खुले थे जिसके चलते आग का गोला बनी एक्सप्रेस श्रेणी की बस में सवार लोगों ने कूदकर जान बचा ली। कहा जा रहा है कि अगर यही बस एसी या वोल्वो श्रेणी की होती तो बस के खिड़कियां और दरवाजा पैक होते और ऐसी स्थिति में खाटूश्यामजी आते भक्तों के साथ बड़ा हादसा हो सकता था। आग की भेंट चढ़ी खाटूश्यामजी से जाती रोड़वेज बस दरअसल, राष्ट्रीय राजमार्ग-52 पर जयपुर सीकर मार्ग पर सीकर जिले के रींगस थाना क्षेत्र के सरगोठ गांव के पास एक रोड़वेज बस भयंकर आग की भेंट चढ़ गई। तकरीबन 50 से अधिक सवारियों से भरी हुई बस जयुपर से खाटूश्यामजी आ रही थी कि अज्ञात कारणों के चलते बस में आग लगनी शुरू हो गई। बस में आग लगने का आभास होते देखकर चालक पुष्पेदसिंह ने जयपुर सीकर मार्ग पर स्थित एक होटल के पास रोका। आग लगातार बढ़ती देखकर सवारियों में अफरा तफरी का माहौल बन आया। किसी ने बस के दरवाजे से उतरकर तो किसी ने बस की खिड़कियों से उतरकर जान बचाई। आग लगने से बस कबाड़ में हो गई तब्दील आग की सूचना पर रींगस नगर पालिका की दमकल मौके पर पहुंची। करीब एक घंटे तक फायर ब्रिगेड की गाड़ी से पानी की बौछारे होती रही। बड़ी मशक्कत से आग पर काबू पाया लेकिन तब तक बस पूरी तरह जलकर कबाड़ में तब्दील हो चुकी थी। क्यों लगी सवारियों में भरी बस में आग रींगस थानाधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि जयपुर डिपो की रोडवेज बस में आग लगने की सूचना मिली। जिस पर पालिका की दमकल गाड़ी को रवाना करने के साथ पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची। बस में करीब 50 यात्री सवार थे जो सकुशल है। प्रांरभिक जानकारी में सामने आया कि जयपुर आगार की रोडवेज बस खाटूश्याम जी जा रही थी जो सरगोठ गांव के समीप पहुंचने पर आग की भेंट चढ़ गई। आग लगने के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। कहा जा रहा है कि चालक पुष्पेद्रसिंह की सूझबूझ से समय रहते आगजनी का पता लगा और सवारियों को सकुशल बस से उतार दिया गया। अन्यथा बड़ा हादसा घटित हो सकता था।

किसानों ने अपनी रबी फसल को बचाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर किया चक्का जाम

राजस्थान राजस्थान में किसानों ने इंदिरा गांधी नहर से अतिरिक्त सिंचाई पानी की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों पर चक्का जाम करने का फैसला किया है। बीकानेर जिले के लूणकरणसर, घड़साना, अनूपगढ़, खाजूवाला और रावला क्षेत्र के किसान अपनी रबी फसल को बचाने के लिए अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रशासन से वार्ता विफल होने के बाद किसानों ने बीकानेर-श्रीगंगानगर राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम करने की घोषणा की है। श्रीगंगानगर और बीकानेर संभाग के किसान इंदिरा गांधी नहर से पर्याप्त पानी न मिलने के कारण परेशान हैं। उनका कहना है कि अगर उन्हें जल्द अतिरिक्त सिंचाई पानी नहीं मिला, तो उनकी फसलें पूरी तरह से सूख जाएंगी। किसानों का आरोप है कि सरकार पानी की आपूर्ति रोक रही है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कई किसान बैंकों और साहूकारों से कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं, और अगर फसल नष्ट हो गई तो उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी। विधायक का समर्थन, लेकिन समाधान नहीं किसानों के समर्थन में अनूपगढ़ विधायक शिमला देवी भी आगे आई हैं। उन्होंने कहा: “मैंने विधानसभा में किसानों की समस्या उठाई, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हम लगातार जल संसाधन मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।” बीबीएमबी से राजस्थान बाहर, किसानों के लिए चिंता का विषय विधायक ने यह भी कहा कि राजस्थान को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में सदस्यता नहीं दी गई है, जबकि यह बोर्ड पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और चंडीगढ़ को पानी की आपूर्ति नियंत्रित करता है। यह राजस्थान के किसानों के लिए न्याय की लड़ाई का मुद्दा बन चुका है। किसानों की स्थिति गंभीर श्रीगंगानगर जिले के किसान सुभाष बिश्नोई ने कहा अगर हमें अतिरिक्त पानी मिल जाए, तो हमारी मेहनत बच सकती है, लेकिन सरकार ने पानी रोक दिया है। हमारी फसलें सूखने की कगार पर हैं। कई खेतों में खड़ी फसलें सूख रही हैं। किसानों ने बैंक और साहूकारों से कर्ज लिया है। अब अगर पानी नहीं मिला, तो उनकी मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद हो जाएंगे। किसानों की चेतावनी, सरकार नहीं सुनेगी तो आंदोलन होगा तेज़ किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन और तेज़ करेंगे। राजमार्गों पर चक्का जाम के बाद वे अन्य बड़े विरोध प्रदर्शन की योजना बना सकते हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार किसानों की इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या राजस्थान के किसान अपनी सूखती फसल को बचाने में सफल हो पाते हैं या नहीं।

कोटा में अमोनिया गैस के रिसाव से स्कूली बच्चे बेहोश, चारों तरफ मची अफरातफरी

कोटा चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (CFCL) की गड़ेपान प्लांट से आज सुबह अमोनिया गैस का रिसाव होने से सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय के कई बच्चे प्रभावित हो गए। जहरीली गैस के संपर्क में आने से बच्चों को सांस लेने में तकलीफ हुई, उल्टियां होने लगीं और कई छात्र बेहोश होकर स्कूल के ग्राउंड में गिर पड़े। छात्रों की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती गैस रिसाव के कारण आधा दर्जन से अधिक छात्रों की हालत बिगड़ गई। कई अभिभावक अपने बच्चों को कोटा जिला अस्पताल लेकर गए, जबकि कुछ बच्चों को CFCL प्लांट के अस्पताल में भर्ती कराया गया। CFCL अस्पताल के डॉक्टर आरके शर्मा के अनुसार, “हॉस्पिटल में 14 बच्चों और एक स्टाफ को लाया गया था। इनमें से 6 बच्चों को गंभीर हालत में कोटा जिला अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि, अब सभी की हालत स्थिर है। सुबह से ही महसूस हो रही थी अजीब गंध, प्रशासन रहा लापरवाह स्थानीय लोगों और स्कूल प्रशासन के अनुसार, सुबह से ही स्कूल में अजीब गंध महसूस हो रही थी, जिससे बच्चों को सिर दर्द और घबराहट की शिकायत हो रही थी। लेकिन सूचना देने के बावजूद किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। जब स्थिति बिगड़ी और बच्चे बेहोश होने लगे, तब स्कूल प्रशासन ने तुरंत छुट्टी घोषित कर दी और राहत कार्य शुरू किया गया। फैक्टरी स्कूल की बाउंड्री से सटी, सुरक्षा पर उठे सवाल गौरतलब है कि CFCL प्लांट का गेट स्कूल से 500 मीटर दूर है, लेकिन फैक्टरी स्कूल की बाउंड्री से सटी हुई है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों ने इस घटना पर नाराजगी जताई है और प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। जांच के आदेश, लेकिन क्या मिलेंगे ठोस नतीजे? घटना की जानकारी मिलते ही अधिकारियों को सूचित किया गया, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार भी सिर्फ जांच के आदेश देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा, या फिर बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।  

झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप कर रहे सात डॉक्टरों ने फाइनल ईयर के दो छात्रों को पीटा

झालावाड़ राजस्थान के झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप कर रहे सात डॉक्टरों पर फाइनल ईयर के दो छात्रों से मारपीट करने का आरोप लगा है। झगड़े में घायल छात्रों का पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराया, जिसमें मारपीट की पुष्टि हुई। इसके बाद सातों डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। ढाबे पर कहासुनी के बाद हुई मारपीट कोतवाली थाना प्रभारी रामकेश मीणा के अनुसार, झालावाड़ के कोटा रोड हाईवे पर स्थित एक ढाबे पर मेडिकल कॉलेज के फाइनल ईयर के छात्र देशराज चौधरी और रोहित जाखड़ चाय पीने गए थे। वहां उनकी एक इंटर्न डॉक्टर से किसी बात पर कहासुनी हो गई। देशराज चौधरी ने डॉक्टर को शांत करने की कोशिश की, लेकिन मामला बिगड़ गया। इसके बाद इंटर्न डॉक्टर ने अपने छह अन्य साथियों को बुला लिया, और सातों ने मिलकर दोनों छात्रों की पिटाई कर दी। झगड़े में दोनों छात्र घायल हो गए। पुलिस ने दर्ज किया मामला पुलिस ने दोनों घायल छात्रों का मेडिकल परीक्षण करवाया और सातों आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ मारपीट का केस दर्ज किया। पुलिस ने मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. दीपक गुप्ता से इंटर्न डॉक्टरों के बयान दर्ज करने की अनुमति मांगी है। डीन डॉ. दीपक गुप्ता ने बताया कि कोतवाली पुलिस की ओर से उन्हें एक आधिकारिक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें मामले की जानकारी दी गई है। उन्होंने इस पत्र को कॉलेज के एकेडमिक हेड को सौंप दिया है।

डंपिंग यार्ड में कचरा बीनने वालों ने जमादार और गार्ड पर लगाए उत्पीड़न के आरोप

अलवर अलवर के आंबेडकर नगर स्थित डंपिंग यार्ड में कचरा बीनकर अपना जीवन यापन करने वाले परिवारों ने नगर निगम कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है। इन लोगों ने नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए यार्ड में तैनात जमादार और गार्ड पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पीड़ितों की शिकायत कचरा बीनने वाले एक श्रमिक, भारत ने बताया कि लगभग 20-30 परिवार वर्षों से नगर निगम के डंपिंग यार्ड में प्लास्टिक, पॉलीथिन और लोहा-लंगड़ इकट्ठा कर बेचने का कार्य कर रहे हैं, जिससे उनका गुजारा चलता है। लेकिन अब जब वे डंपिंग यार्ड में कचरा बीनने जाते हैं, तो वहां तैनात गार्ड और जमादार मुखराम मीणा उन्हें रोकते हैं और पैसे मांगते हैं। मारपीट और धमकियों का आरोप श्रमिकों का आरोप है कि ये गार्ड और जमादार न सिर्फ कचरा बीनने से रोकते हैं, बल्कि पैसे न देने पर मारपीट भी करते हैं। भारत ने बताया कि डंपिंग यार्ड का ठेका इस बार प्रवीण नामक व्यक्ति को दिया गया है, जो कचरा बीनने से नहीं रोकता। लेकिन नगर निगम द्वारा तैनात कर्मचारी लगातार परेशान कर रहे हैं। आजीविका पर संकट श्रमिकों का कहना है कि कचरा बीनना ही उनके जीवनयापन का एकमात्र साधन है। पूरे दिन मेहनत करके वे प्लास्टिक, लोहा और अन्य कबाड़ इकट्ठा कर बेचते हैं, जिससे परिवार का पालन-पोषण होता है। लेकिन अब जब उन्हें कचरा बीनने से रोका जा रहा है, तो उनके लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। न्याय की गुहार इन गरीब परिवारों ने नगर निगम से अपील की है कि जमादार मुखराम मीणा और गार्ड को हटाया जाए और उन्हें कचरा बीनने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे आगे भी विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।  

नरेश मीणा को हाईकोर्ट से लगा झटका, जमानत याचिका खारिज

टोंक टोंक जिले की देवली-उनियारा विधानसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान हुए उपद्रव से जुड़े मामले में निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा को हाईकोर्ट से झटका लगा है। राजस्थान हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के जस्टिस प्रवीर भटनागर की अदालत ने यह आदेश जारी किया। अदालत ने इस मामले में पहले जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब खारिज कर दिया गया है। क्या है मामला? चुनाव प्रचार के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा और एसडीएम के बीच मारपीट हो गई थी, जिसके बाद समरावता क्षेत्र में उपद्रव हुआ। इस घटना को लेकर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए मीणा को गिरफ्तार कर लिया था। अब हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

30 हजार का इनामी बदमाश गिरफ्तार, पुलिस पर चार बार फायर कर हुआ था फरार

चित्तौड़गढ़ मादक पदार्थों की तस्करी और पुलिस पर फायरिंग समेत 10 गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित 30 हजार रुपये के इनामी बदमाश उदयलाल गुर्जर को सदर चित्तौड़गढ़ थाना पुलिस और डीएसटी की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया है। उदयलाल गुर्जर पर तीन मामले मादक पदार्थों की तस्करी के, चार मामले पुलिस पर फायरिंग के तथा अन्य संगीन अपराधों के कुल 10 मामले दर्ज हैं। वह जिले के टॉप-10 वांछित अपराधियों की सूची में शामिल था। उसकी गिरफ्तारी पर उदयपुर रेंज आईजी ने 30 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। उदयलाल लंबे समय से मारवाड़ के तस्करों के संपर्क में रहकर मादक पदार्थों की तस्करी कर रहा था। पुलिस पर फायरिंग कर हुआ था फरार पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी ने बताया कि बिजयपुर थाना समेत कोतवाली निम्बाहेड़ा, कनेरा, मंगलवाड़ और बस्सी में उदयलाल के खिलाफ मादक पदार्थों की तस्करी और पुलिस पर हमले के मामले दर्ज हैं। अप्रैल 2022 में तस्करी के दौरान उसने पुलिस पर फायरिंग कर फरार हो गया था। इसके बाद भी उस पर छह और मामले दर्ज हुए, जिनमें मादक पदार्थों की तस्करी, जानलेवा हमला, अवैध हथियार और धमकी देने के आरोप शामिल हैं। भारी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त उदयलाल कनेरा, मंगलवाड़ और बिजयपुर थाने में दर्ज तीन मामलों में भारी मात्रा में अवैध डोडा चूरा, अफीम और वाहनों की जब्ती के मामलों में भी वांछित था। पहले उसकी गिरफ्तारी पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दिया गया। विशेष टीम ने दबोचा वांछित अपराधी उदयलाल की गिरफ्तारी के लिए सदर थाना प्रभारी निरंजन प्रताप, डीएसटी प्रभारी मुंशी मोहम्मद और साइबर सेल की टीम का गठन किया गया था। टीम ने बिजयपुर थाना क्षेत्र के पेमाखेड़ा निवासी उदयलाल पुत्र रतनलाल गुर्जर को एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में डीएसटी के सुरेंद्र पाल की विशेष भूमिका रही।

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