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अहिल्या माता और शिवाजी पर सियासत: कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने, नाम परिवर्तन पर टकराव

Politics on Ahilya Mata and Shivaji: Congress-BJP face to face, clash over name change इंदौर में हुई मेयर इन काउंसिल की बैठक में रेसीडेंसी कोठी का नाम बदलकर शिवाजी कोठी (शिवाजी वाटिका) करने का प्रस्ताव पास होने के बाद राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है। कांग्रेस नेता राकेश सिंह यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि यह कदम महाराष्ट्र में आगामी चुनावों के मद्देनजर उठाया गया है, ताकि वहां के वोट बैंक को साधा जा सके। उनका कहना है कि यह देवी अहिल्या बाई होलकर की उपेक्षा है, जिन्होंने इंदौर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। कांग्रेस बोली अहिल्या रेसीडेंसी नाम करना थारेसीडेंसी कोठी, जो लगभग 204 वर्ष पुरानी है और अंग्रेजी शासन के दौरान मालवा-निमाड क्षेत्र में ब्रिटिश सत्ता का केंद्र थी, का नामकरण शिवाजी महाराज के नाम पर किए जाने से कांग्रेस असहमत है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव ने भी सोशल मीडिया पर इस फैसले की आलोचना की और सुझाव दिया कि इसे देवी अहिल्या रेसीडेंसी कोठी नाम दिया जाना चाहिए था। गफ्फूर खां की बजरिया पर नहीं हुआ निर्णयसाथ ही, अन्य नामकरणों की भी बैठक में स्वीकृति दी गई, जिसमें फूटी कोठी ब्रिज का नाम सेवालाल महाराज ब्रिज और भंवरकुआं चौराहे का नाम टंट्या भील चौराहा रखा गया है। इसके अलावा, बीजेपी नेता वरुण पाल ने गफ्फूर खां की बजरिया का नाम बदलकर वीरांगना तुलसाबाई होलकर के नाम पर करने की मांग भी की थी, हालांकि इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। दोनों के अपने तर्कइस नामकरण विवाद से दोनों दलों के बीच राजनीतिक तनाव और बढ़ने की संभावना है, क्योंकि कांग्रेस इसे ऐतिहासिक व्यक्तियों के सम्मान से जोड़कर देख रही है, जबकि बीजेपी इसे अपने राजनीतिक एजेंडे के तहत नामकरण के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

अखिलेश यादव का महाराष्ट्र प्लान: MVA में समाजवादी पार्टी की सीटों की मांग पर स्पष्टता

Akhilesh Yadav’s Maharashtra Plan: Clarity on Samajwadi Party’s demand for seats in MVA समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव मालेगांव और धुले में रैली करने वाले हैं. सपा विधानसभा चुनाव में दो से अधिक सीटें एमवीए से लेने की कोशिश में है. इस समय सपा के दो विधायक हैं. MVA Seat Sharing In Maharashtra: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इन दिनों मिशन महाराष्ट्र में जुटे हैं. उनकी कोशिश महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में रहकर अधिक से अधिक सीटें सपा के पाले में लाने की है. इसी के मद्देनजर अखिलेश यादव आज (शुक्रवार, 18 अक्टूबर) महाराष्ट्र पहुंचे. यहां उन्होंने कहा कि हरियाणा का हारा हुआ चुनाव बीजेपी ने जीत लिया, लेकिन झारखंड और महाराष्ट्र INDIA गठबंधन ही जीतेगा. महाराष्ट्र में हमें महासावधान रहना पड़ेगा. अखिलेश यादव ने महाराष्ट्र में सपा के प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी के साथ बैठक की. इसके बाद उन्होंने कहा, ”महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी से सपा की 12 सीटों की मांग बिलकुल सही है. महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी ज़्यादा से ज़्यादा सीटों पर जीतकर आएगी. हमें उम्मीद है कि जहां सपा जीतेगी, वहां एमवीए सीट देगा. सवाल संख्या का नहीं, जीत का है. अबू आजमी लगातार कोशिश कर रहे हैं. मालेगांव और धुले में भी हमारी दावेदारी है.” अखिलेश यादव दोनों जगह रैली करने वाले हैं. कौन-कौन सी सीटें चाहती है सपा? सपा ने अमरावती के रावेर से भी चुनाव लड़ने में रुचि दिखाई है. अन्य सीटें जो सपा चाहती है वे हैं मानखुर्द शिवाजी नगर, वर्सोवा, और अनुशक्ति नगर (मुंबई उपनगरीय जिला), भायखला (मुंबई शहर), भिवंडी पूर्व और भिवंडी पश्चिम (ठाणे), मालेगांव सेंट्रल (नासिक), औरंगाबाद पूर्व (छत्रपति संभाजी नगर), करंजा (वाशिम) और धुले शहर (धुले जिला). इस समय मानखुर्द शिवाजी नगर से अबू आजमी विधायक हैं. वहीं भिवंडी पूर्व से सपा के रईस शेख विधायक हैं. 2019 में कैसा रहा था सपा का हाल?288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में 20 नवंबर को एक ही चरण में मतदान होगा और परिणाम 23 नवंबर को आएंगे. 2019 में समाजवादी पार्टी ने महाराष्ट्र में सात सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें से दो पर जीत हासिल हुई थी. अन्य पांच सीटों पर सपा उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई. महाराष्ट्र में इंडिया गठबंधन (एमवीए) में कांग्रेस, शरद पवार की पार्टी एनसीपी (एसपी) और उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना-यूबीटी और अन्य छोटी पार्टियां शामिल है. अखिलेश यादव कहते रहे हैं कि पूरी ताकत से इंडिया ब्लॉक के साथ खड़े रहेंगे. एमवीए का मुकाबला यहां महायुति से है. महायुति (एनडीए) में बीजेपी के साथ एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी शामिल है. नाना पटोले ने क्या कहा? एमवीए में शामिल नेताओं का कहना है कि जल्द ही सभी सीटों पर बातचीत पूरी हो जाएगी.महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि एमवीए में 25 से 30 विधानसभा सीट को लेकर है गतिरोध, कांग्रेस आलाकमान फैसला लेगा. सीटों के बंटवारे पर पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह स्पष्ट है कि जब एक से अधिक दल गठबंधन के रूप में एक साथ आते हैं तो सीट बंटवारे को लेकर संघर्ष होगा, लेकिन यह समझना आवश्यक है कि इसे तब तक नहीं खींचा जा सकता जब तक कि यह टूट न जाए. हालांकि, मुझे लगता है कि अभी ऐसा कोई बड़ा मुद्दा नहीं है. हम एक या दो दिन में अपनी सीट बंटवारे की बातचीत पूरी कर लेंगे, ज्यादातर कल तक, क्योंकि यह अंतिम चरण में पहुंच गया है.

एमपी में खाद की कमी पर कांग्रेस का हल्ला, कृषि मंत्री ने यूक्रेन-रूस युद्ध को ठहराया जिम्मेदार

Congress protests over fertilizer shortage in MP, Agriculture Minister blames Ukraine-Russia war भोपाल ! किसानों को खाद उपलब्ध कराने का दावा खोखला साबित हो रहा है. घंटों कतार में लगने के बावजूद पर्याप्त खाद नहीं मिल रही है. बुआई के मौसम में खाद की किल्लत जी का जंजाल बन गयी है. सीहोर जिला मुख्यालय स्थित कृषि उपज मंडी में खाद के लिए किसानों की भीड़ देखी गई. आधार कार्ड की फोटोकॉपी लिये किसान कतारबद्ध नजर आए. किसानों का दर्द है कि सुबह से लाइन में लगने के बावजूद खाद नहीं मिली है. उन्होंने बताया कि खाद के लिए जद्दोजहद करने का अंदेशा था. इसलिए घर से रोटी बांधकर साथ लाए थे. भूख लगने पर पेड़ के नीचे बैठकर खाया है. नाराज किसानों ने सरकार के दावे पर सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि सरकार हर साल ऐलान करती है कि प्रदेश में खाद की समस्या नहीं होने दी जायेगी. लगता है कि अधिकारियों को मुख्यमंत्री के आदेश की परवाह नहीं है. धूप में भूखे प्यास खड़े रहने के बावजूद खाद नहीं मिल रही है. खाद बांटने वाले कर्मचारी-अधिकारियों की डांट भी खाने को किसान मजबूर हैं. खाद की किल्लत पर कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने सफाई दी है. उन्होंने माना कि यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण खाद आने में देरी हो रही है. कृषि मंत्री ने खाद की कमी के पीछे यूक्रेन-रूस युद्ध को कारण बताया. खाद की किल्लत पर कांग्रेस हमलावर प्रदेश में खाद संकट पर विपक्ष लगातार हमलावर है. राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खाद संकट का जिम्मेदार केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री मोहन यादव को ठहराया है. दिग्विजय सिंह ने कहा कि 1993 से लेकर 2003 तक कांग्रेस की सरकार थी. उस दौरान खाद के लिए किसानों को परेशान नहीं होना पड़ा. खाद की कालाबजारी नहीं होने का भी उन्होंने दावा किया. आज खाद की ब्लैकमार्केटिंग और नकली खाद मामले में बीजेपी से जुड़े नेताओं का नाम सामने आ रहा है.

कांग्रेस के लिए बड़ा चैंलेंज है बुधनी उपचुनाव, बुधनी से बीजेपी के ये हैं तगड़े दावेदार

भोपाल मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिह चौहान की बुधनी विधानसभा सीट पर कांग्रेस में भी चार दावेदार सामने आए है। जानकारी के अनुसार बुधनी सीट के लिए कांग्रेस से राजकुमार पटेल, विक्रम मस्ताल, अजय पटेल और महेश राजपूत के नामों का पैनल बना है। वहीं विजयपुर में मुकेश मल्होत्रा का सिंगल नाम है। विजयपुर सीट के लिए कांग्रेस ने नाम दिल्ली भेजा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल ने दो दिनों तक स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ रायशुमारी की है। बीजेपी के ऐलान के बाद कांग्रेस अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर सकती है। बता दें कि बुधनी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की परंपरागत सीट है। उनके सांसद चुने जाने के बाद यह सीट खाली हुई है। इसी तरह विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत के इस्तीफे और बीजेपी में शामिल होने के बाद सीट रिक्त हुई है। दोनों विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। राज्य की दोनों पार्टी बीजेपी और कांग्रेस चुनाव की तैयारी में जुट गई है। भोपाल मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिह चौहान की बुधनी विधानसभा सीट पर कांग्रेस में भी चार दावेदार सामने आए है। जानकारी के अनुसार बुधनी सीट के लिए कांग्रेस से राजकुमार पटेल, विक्रम मस्ताल, अजय पटेल और महेश राजपूत के नामों का पैनल बना है। वहीं विजयपुर में मुकेश मल्होत्रा का सिंगल नाम है। विजयपुर सीट के लिए कांग्रेस ने नाम दिल्ली भेजा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल ने दो दिनों तक स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ रायशुमारी की है। बीजेपी के ऐलान के बाद कांग्रेस अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर सकती है। बता दें कि बुधनी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की परंपरागत सीट है। उनके सांसद चुने जाने के बाद यह सीट खाली हुई है। इसी तरह विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत के इस्तीफे और बीजेपी में शामिल होने के बाद सीट रिक्त हुई है। दोनों विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। राज्य की दोनों पार्टी बीजेपी और कांग्रेस चुनाव की तैयारी में जुट गई है। बुधनी सीट पर कांग्रेस से इन चार नामों का पैनल     राजकुमार पटेल     विक्रम मस्ताल     अजय पटेल     महेश राजपूत जानिए कांग्रेस के दावेदारों के बारे में     राजकुमार पटेल- 1993 से 1998 तक विधायक रहे उसी दौरान शिक्षा राज्यमंत्री रहे। 1998 में बडे़ भाई देवकुमार पटेल को टिकट मिला था।     विक्रम मस्ताल- टीवी सीरियल में भगवान हनुमान का रोल निभा चुके हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में बुधनी से प्रत्याशी रह चुके हैं।     अजय पटेल- युवा कांग्रेस के बुधनी विधानसभा के 10 साल से अध्यक्ष हैं। पिता डॉक्टर हैं। किसान परिवार से आते हैं।     महेश राजपूत- बुधनी के दो बार जनपद अध्यक्ष रहे। 2008 में कांग्रेस से चुनाव लड़ चुके हैं। विजयपुर सीट पर ये सिंगल नाम श्योपुर जिले की विजयपुर सीट पर बीजेपी की तरह कांग्रेस के संभावित दावेदारों में सिंगल नाम है। कांग्रेस के पैनल में 2023 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय लड़े मुकेश मल्होत्रा का सिंगल नाम है। मल्होत्रा 2023 के विधानसभा चुनाव में 44 हजार से ज्यादा वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे थे।

कांग्रेस ने खाद संकट पर घेरा, दिग्विजय सिंह-जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव से मांगे जवाब

Congress surrounded on fertilizer crisis, Digvijay Singh-Jitu Patwari sought answers from CM Mohan Yadav मध्य प्रदेश में में चल रहे खाद संकट को लेकर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने मौजूदा सरकार पर बड़ा हमला बोला है. दोनों नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनसे कुछ सवाल भी किए हैं. मध्य प्रदेश में खाद संकट को लेकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार (17 अक्तूबर) को भोपाल में एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य में चल रहे खाद संकट को लेकर कांग्रेसी नेताओं ने मौजूदा सरकार पर बड़ा हमला बोला और उनसे कुछ सवाल भी किए. उन्होंने कहा, देश में डीएपी (खाद) की किल्लत सरकार की नीतियों के कारण है. वर्तमान में देश में 100 लाख टन डीएपी (खाद) की आवश्यकता है, जिसमें से देश में 4 लाख टन प्रति माह का उत्पादन होता है. इसके लिए कच्चा माल भी आयात करना पड़ता है. आयात में समस्या से 20 फीसदी करीब कम उत्पादन हुआ है, बाकी लगभग 5 लाख टन डीएपी का आयात होता, तब जाकर हमारी आवश्यकता पूरी हो रही है. इस साल देश में अप्रैल से अगस्त तक 16 लाख टन करीब डीएपी आया था, जबकि पिछले साल 32.5 लाख टन का आयात हुआ था, जो 16.5 लाख टन यानी 50 फीसदी कम है. मध्य प्रदेश में डीएपी की 9 लाख टन से ज्यादा की जरूरत है, जिसके एवज में अभी तक मध्य प्रदेश में लगभग 4.5 लाख टन डीएपी आया है, बाकी 5 से 6 लाख टन की कमी है. कांग्रेस नेताओं ने क्या कहा?उन्होंने कहा, अगले 15 दिन मध्य प्रदेश के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. बड़े रकबे में बुवाई एक साथ शुरू होगी. सरकार डीएपी की जगह एनपीके (खाद) डालने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. डीएपी में 18 फीसदी नाइट्रोजन और 46 फीसदी फास्फोरस होता है. यदि डीएपी की जगह एनपीके देते हैं तो 6 लाख टन डीएपी की कमी को पूरा करने के लिए 9 लाख टन एनपीके की जरुरत रहेगी. जबकि अभी तक कुल 3 लाख टन डीएपी आया है, जो पिछले साल से 1 लाख टन कम है. मतलब 350 रैक सिर्फ एनपीके चाहिए. यह इस बात का प्रमाण है कि मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री के जिले मुरैना में 24,500 मीट्रिक टन डीएपी की डिमांड है. इसके मुकाबले किसानों के लिए महज 8,247 मीट्रिक टन डीएपी ही उपलब्ध है. मतलब कृषि मंत्री के क्षेत्र में 33 फीसदी खाद आपूर्ति हुई है. 25 सितम्बर को प्रकाशित खबर के अनुसार जब कृषि मंत्री के क्षेत्र के ये हाल हैं तो बाकी जगह कितनी उपलब्धता हुई होगी इसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है. पहले बात तो आयात 50 फीसदी कम हुआ, दूसरा मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी डिमांड वास्तविक जरूरत से कम भेजी, तीसरा अग्रिम भंडारण पिछले साल की तुलना में इस साल 3.51 लाख मीट्रिक टन डीएपी का कम हुआ. सरकार की एपीसी की संभाग स्तर की पिछली बैठकों, कलेक्टरों के स्टेटमेंट देखिये वो सब कह रहे हैं कि डीएपी की जगह दूसरे उर्वरक डाले तो सरकार बताये कि किसान कौन से उर्वरक डाले और उनकी गुणवत्ता की गारंटी कौन लेगा? किसानों तो डीएपी की ही मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा, पूर्व में खाद की उपलब्धता सहकारी समितियों के माध्यम से कराई जाती थी, जिससे किसानों को उनके गांव में गुणवत्ता युक्त शासकीय दाम पर बिना किसी परेशानी के खाद उपलब्ध होता था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने अपने लोगों को उपकृत करने के लिए खाद की लगभग आधी मात्रा में खुले बाजार में बिक्री की छूट दे रखी है, जिससे किसानों को शहर आकर महंगे दाम में खाद खरीदना पड़ता है. वहीं खुले बाजार में बिक्री से खाद के साथ अन्य सामग्री जैसे अन्य उर्वरक, कीटनाशक दवाई, टॉनिक, बीज, सल्फर, जिंक के अलावा ऐसे उत्पाद जो किसानों की आवश्यकता नहीं है उन्हें भी मजबूरन टैग करके खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है. सरकार खोखले दावे करती है कि किसानो को जीरो ब्याज पर लोन उपलब्ध कराएंगे, लेकिन जब किसानों को साख समितियों से खाद नहीं मिलेगा, नगद ऋण नहीं मिलेगा तो फिर कैसे जीरो ब्याज का फायदा किसानों को मिलेगा. अभी तो उल्टा किसान की जेब से अतिरिक्त पैसा जा रहा है. मध्य प्रदेश में रवि की फसल के लिए 22 लाख टन यूरिया की जरुरत है, जबकि अभी 10.12 लाख मीट्रिक टन यूरिया की उपलब्धता है. जैसे कि अक्टूबर माह में 4.5 लाख टन यूरिया की मांग है, लेकिन 2 लाख 90 हजार टन ही उपलब्ध हो पाया. आगामी माह में भी इस कमी की पूर्ति होना असंभव है, जिसके कारण अगला माह भी किसानों के लिए परेशानी का सबब बनेगा. सरकार द्वारा नेनो यूरिया और नेनो डीएपी का बड़े स्तर पर क्षेत्र में प्रचार-प्रसार दानेदार यूरिया और दानेदार डीएपी के विकल्प के रूप में किया जा रहा है, जबकि नेनो यूरिया और नेनो डीएपी को पिछले साल फसलों पर डालने पर वो प्रभाव नहीं देखा गया जो दानेदार यूरिया और डीएपी का होता है. कांग्रेस ने सरकार से पूछे ये सवाल डीएपी की उपलब्धता के सम्बन्ध में सरकार की क्या योजना है.क्या सरकार अन्य उर्वरकों से डएपी के तत्वों की पूर्ती करना चाहती है. इसके सम्बन्ध में सरकार की क्या कार्य योजना है.क्या अन्य उर्वरकों से पूर्ती हेतु सरकार द्वारा किसानों के बीच में जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया है.सरकार द्वारा अग्रिम भंडारण योजना के अंतर्गत यूरिया डीएपी का अग्रिम भंडारण क्यों नहीं कराया गया. यदि आनन-फानन में सरकार द्वारा उर्वरकों की उपलब्धता की जाती है तो गुणवत्ता की सुनिश्चितत्ता कैसे होगी. अगले 15 दिनों में गेंहू, चना, सरसों, आलू एवं प्याज की लगभग बुवाई हेतु किसान अपनी तैयारियों में लगा हुआ है जिसमे लगभग 90 प्रतिशत यानी लगभग 9 लाख मीट्रिक टन डीएपी की आवश्यकता है. जिसकी समय पर पूर्ती नहीं होने पर फसलों का उत्पादन घटना तय है इसकी जवाबदेही किसकी होगी. मध्य प्रदेश के सभी जिलों में लम्बे समय से एक ही जगह पर जमे हुए जिम्मेदार अधिकारियों के कारण गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया प्रभावित हो चुकी है और नकली और अमानक आदान खाद, बीज, दवाई की बिक्री को बढ़ावा देकर किसानों … Read more

संभल में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रंगदारी मांगने के आरोप में अरेस्ट

 संभल यूपी के संभल जिले में पुलिस ने 5 लाख रुपए की रंगदारी मांगने और धमकी देने के आरोप में कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने कांग्रेस जिला अध्यक्ष को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जिसके बाद अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद उनको जेल भेज दिया. कांग्रेस जिलाध्यक्ष और उनके भाई सहित तीन लोगों पर उनके ही गांव के रहने वाले शख्स ने फैक्ट्री लगाने के नाम 5 लाख रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था, जिसके बाद से कोतवाली पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही थी. दरअसल, सदर कोतवाली इलाके के मोहम्मदपुर टांडा गांव के निवासी देशराज ने चार दिन पहले 11 अक्टूबर को कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर गांव के ही रहने वाले कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष विजय शर्मा, जिलाध्यक्ष के भाई सुभाष शर्मा और सुधीर शर्मा के द्वारा प्लॉट निर्माण करने के नाम पर 5 लाख रुपए की रंगदारी मांगने का आरोप लगाते हुए बीएनएस की धारा 308(5) ,351(3) के तहत मुकदमा दर्ज कराया था.   मुकदमा दर्ज होने के बाद कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने मुकदमे को फर्जी बताते हुए धरना देकर विरोध भी जताया था. उधर, मुकदमा दर्ज होने के बाद संभल कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और चौकी प्रभारी आशीष तोमर मामले की जांच पड़ताल में लगे हुए थे. जिसके बाद सदर कोतवाली प्रभारी और चौकी प्रभारी ने कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय शर्मा को 5 लाख रुपए की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने कांग्रेस जिला अध्यक्ष आरोपी विजय शर्मा को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया, जहां दोनों पक्षों की तरफ से अपनी-अपनी दलीलें पेश की गईं. जिसके बाद सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय शर्मा को जेल भेज दिया. मामले में एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि संभल कोतवाली पुलिस को 11 अक्टूबर को सूचना मिली थी कि कोतवाली इलाके के मोहम्मदपुर टांडा गांव के निवासी देशराज नामक व्यक्ति के पास अपनी जमीन का बैनामा होने के बावजूद विजय शर्मा और उसके साथी देशराज को इंटरलॉकिंग की फैक्ट्री नहीं लगने दे रहे हैं. इस मामले की जांच पड़ताल की गई तो जानकारी मिली कि वास्तव में 5 लाख रुपए की डिमांड की गई थी. इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश करने पर एक आरोपी विजय शर्मा को गिरफ्तार किया गया है और उसके अन्य साथियों की तलाश की जा रही है. इसके खिलाफ पहले से ही एससी एसटी एक्ट, धमकियां देने और मारपीट करने के पांच मुकदमे दर्ज है. कांग्रेस जिला अध्यक्ष पर दर्ज हैं कई मुकदमे संभल कोतवाली पुलिस ने कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष विजय शर्मा को 5 लाख रुपए की रंगदारी मांगने की आरोप में भले ही अब गिरफ्तार किया है लेकिन पुलिस अधिकारियों की माने तो कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय शर्मा के खिलाफ एससी एसटी एक्ट, धमकियां देने और मारपीट करने की पांच मुकदमे पहले से भी दर्ज हैं. जिसमें कई मुकदमों का ट्रायल अभी भी कोर्ट में चल रहा है. वहीं, जिला अध्यक्ष विजय शर्मा का कहना है कि मुकदमा दर्ज करा कर मेरे ऊपर रंगदारी मांगने के जो आरोप लगाए गए हैं वह आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है. पुलिस प्रशासन केवल सरकार की दबाव में ही काम कर रहा है और वैसे भी बीजेपी सरकार में ब्राह्मण समाज की हमेशा से ही अनदेखी होती रही है.  

छतरपुर और खजुराहो में नाबालिगों पर अत्याचार, विपक्ष ने साधा निशाना

Atrocities on minors in Chhatarpur and Khajuraho, opposition targeted भोपाल। मध्य प्रदेश में नाबालिगों पर हो रहे अत्याचार को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधा हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस तरह की हैवानियत पर कब अंकुश लगेगा। आखिर कब आप प्रदेश की चिंता करोगे ? एमपी में ऐसी घटनाएं होने की वजह से लोगों को कानून का जरा भी डर नहीं है। दरअसल, छतरपुर और खजुराहो में नाबालिगों पर अत्याचार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। एक वीडियो में नाबालिग के साथ बेल्ट से मारपीट तो वहीं दूसरे वीडियो में नाबालिग से अपने जूते चटवाए और जमकर पीटा। इसे लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाया हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स (X) पर पोस्ट कर लिखा- MP में इस तरह की हैवानियत पर कब अंकुश लगेगा !!! छतरपुर और खजुराहो में नाबालिगों पर अत्याचार के वीडियो सामने आए हैं। एक आदिवासी नाबालिग के साथ गुंडों ने बेल्ट से मारपीट की! दूसरे नाबालिग से अपने जूते चटवाए और पीटा गया! MP में ऐसी घटनाएं लगातार होने का कारण है कि लोगों को कानून_व्यवस्था का भय नहीं रहा!… ये दो घटनाएं तो इसलिए सामने आई कि इनके वीडियो वायरल हुए। आखिर कब आप प्रदेश की चिंता करोगे? प्रदेश में इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। एक बार फिर इन घटनाओं ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। स्थिति सुधरने की बजाय और बिगड़ती जा रही है। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक नाबालिग हैवानियत का शिकार होते रहेंगे। प्रशासन की नींद कब खुलेगी, हालात कब सुधरेंगे।

कांग्रेस की कृषि यात्रा: जीतू पटवारी का बयान, दिग्विजय की चेतावनी

Congress’s Krishi Yatra: Jitu Patwari’s statement, Digvijay’s warning भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी, दिग्विजय सिंह और सज्जन वर्मा ने आज प्रेस कॉन्फ्रेस में संयुक्त रुप से सरकार पर हमला बोला है। जीतू पटवारी ने कहा कि बार-बार यह बात स्थापित होती जा रही है कि बीजेपी की सरकार शिवराज और मोहन यादव किसान विरोधी है। ऋण माफी योजना बंद की. कांग्रेस पार्टी जो योजना लेकर आई थी उन्हें बंद किया. जो वादा इन्होंने किया था समर्थन मूल्य का वह अब तक पूरा नहीं किया और किसानों को धोखा दिया है. गेहूं और धान का वादा के अनुरूप एमएसपी नहीं दिया। यात्रा में सभी बड़े नेता शामिल होंगे यह राजनीतिक नहीं बल्कि किसानों का विषय है। सबसे बड़े किसान विरोधी शिवराज सिंह चौहान देश में मध्यप्रदेश की दुहाई देकर झूठ बोल रहे हैं. पूरे प्रदेश से किसने की समस्याओं और दुर्गति की खबरें हैडलाइन बन रहीं. मैं हर मंगलवार को शिवराज से समय मानता हूं. अगला मंगलवार पांचवा होगा जब तक वह समय नहीं देंगे हम लगातार उनसे समय मांगेंगे. किसानों की समस्या को लेकर से मांग रहा हूं. कांग्रेस गांव, खेत यात्रा निकालेगी। आग्रह करेंगे सरकार से जो आपने बातें की है वह पूरी करो व्यवस्थाओं को दुरुस्त करो. जल्द तारीख का ऐलान करेंगे. यात्रा में सभी बड़े नेता शामिल होंगे.

शपथ से पहले कश्मीर में पलट गई बाजी ! सरकार के साथ नहीं कांग्रेस

श्रीनगर  विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की जीत के बाद उमर अब्दुल्ला के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने की तैयारियां पूरी हो गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद के सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सुबह 11:30 बजे पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। शपथ समारोह में शामिल होने के लिए I.N.D.I.A. गठबंधन को निमंत्रण भेजा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी श्रीनगर में मुख्यमंत्री पद के लिए नामित उमर अब्दुल्ला के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। इधर शपथ ग्रहण समारोह से पहले जम्मू-कश्मीर के मनोनीत मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की मजार-ए-अनवर पर पुष्पांजलि अर्पित की। जिसमें 10 कैबिनेट मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है. इस आयोजन में कांग्रेस सहित INDIA ब्लॉक के कई दिग्गज शामिल होने वाले हैं. लेकिन आयोजन से पहले ही इस समारोह के रंग में भंग पड़ता दिखाई दे रहा है. दरअसल, पहले कहा जा रहा था कि जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के चीफ तारिक हमीद कर्रा भी इस कैबिनेट में शामिल होकर मंत्री पद की शपथ लेंगे, लेकिन अब कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि आज उनकी पार्टी का कोई भी विधायक मंत्री पद की शपथ नहीं लेगा और पार्टी बाहर से समर्थन करने पर भी विचार कर रही है. जम्मू-कश्मीर के कांग्रेस प्रभारी भरत सिंह सोलंकी का कहना है कि फिलहाल नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के बीच बातचीत चल रही है. चर्चा पूरी होने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा. बात पूरी न हो पाने के कारण आज कोई भी कांग्रेस विधायक शपथ नहीं लेगा. इस बात को लेकर भी चर्चा चल रही है कि कांग्रेस सरकार का हिस्सा रहेगी या फिर उसे बाहर से समर्थन करेगी. कांग्रेस के इस बयान से सियासी गलियारों में हलचल शुरू हो गई है. बता दें कि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था और माना जा रहा था कि कांग्रेस भी इस सरकार का हिस्सा रहेगी. लेकिन आज शपथ ग्रहण से पहले कांग्रेस के ऐलान ने सभी को चौंका दिया है, क्योंकि कांग्रेस विधायक के शपथ न लेने का सीधा मतलब है कि फिलहाल कैबिनेट शेयरिंग को लेकर बात फाइनल नहीं हो सकी है और कांग्रेस के पास बाहर से समर्थन देने का विकल्प भी है ताकि किसी तरह का दबाव भी न रहे. NC-कांग्रेस गठबंधन को 48 सीटें बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन ने जीत हासिल की. 90 सीटों में से नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 और कांग्रेस ने 6 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं, बीजेपी 29 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रही. महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी. ये है जम्मू-कश्मीर का नंबर गेम जम्मू कश्मीर विधानसभा की 90 सीटों के लिए चुनाव हुए थे और उपराज्यपाल की ओर से पांच विधायकों के मनोनयन को भी जोड़ लें तो सदन की स्ट्रेंथ 95 पहुंचती है. 10 फीसदी वाली कैप भी है, ऐसे में मंत्रिमंडल में सदस्यों की कुल संख्या 9.5 यानि अधिकतम 10 ही हो सकती है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के 42 विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं और चुनाव पूर्व गठबंधन में शामिल रही कांग्रेस के छह, सीपीएम के एक विधायक हैं. चुनाव पूर्व गठबंधन से ही 49 विधायक हैं और अब पांच निर्दलीय विधायकों ने भी उमर सरकार के समर्थन का ऐलान कर दिया है. आम आदमी पार्टी भी गिव एंड टेक के फॉर्मूले पर समर्थन ऑफर कर चुकी है.

निर्मला सप्रे का स्पष्टीकरण: विधानसभा अध्यक्ष को लिखित जवाब, कहा- ‘न मैंने कांग्रेस छोड़ी, न बीजेपी जॉइन की

भोपाल। मध्य प्रदेश की विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। निर्मला सप्रे ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखित में जवाब दिया है। निर्मला ने कहा कि न मैंने कांग्रेस छोड़ी है और न बीजेपी ज्वाइन की है। उनके इस बयान से प्रदेश की सियासत में हलचल मच गई है। दरअसल, लोकसभा चुनाव के दौरान निर्मला सप्रे ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की उपस्थिति में बीजेपी में शामिल हुई थी। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने निर्मला सप्रे की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। इसे लेकर उमंग सिंघार ने विधानसभा में आवेदन दिया था। विधानसभा सचिवालय ने नेता प्रतिपक्ष की याचिका पर निर्मला सप्रे को नोटिस जारी किया था। निर्मला सप्रे ने विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस का दो बार जवाब नहीं दिया था। नोटिस का जवाब नहीं देने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने एक सप्ताह का समय दिया था। निर्मला ने 10 अक्टूबर को बंद लिफाफे में उत्तर भेजा। नेता प्रतिपक्ष की याचिका पर निर्मला सप्रे ने जवाब देते हुए कहा था कि मैंने दलबदल नहीं किया है। इस मामले की सुनवाई अब विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर 21 अक्टूबर को कर सकते हैं। स्पीकर कांग्रेस से दलबदल के सबूत पेश करने को कह सकते हैं।

विजयपुर और बुधनी में आचार संहिता लागू, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने की प्रेस कांफ्रेंस

Code of conduct implemented in Vijaypur and Budhni, Chief Electoral Officer held press conference भोपाल। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 02- विजयपुर विधानसभा और सीहोर जिले के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक- 156 बुधनी विधानसभा क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। आज बुधवार को राजधानी भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित मध्य प्रदेश निर्वाचन सदन में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुखवीर सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर चुनाव प्रक्रिया से संबंधित जानकारी दी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया है कि भारत निर्वाचन आयोग ने श्योपुर जिले की 02-विजयपुर विधानसभा और सीहोर जिले की 156- बुदनी विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उप चुनाव के लिए 15 अक्टूबर 2024 को तारीख की घोषणा की गई। उप चुनाव के तारीखों की घोषणा के साथ ही श्योपुर और सीहोर जिले में आदर्श आचार संहिता प्रभावशील हो गई है। आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया जाएगा। उप चुनाव की समय सारणी 18 अक्टूबर को गजट नोटिफिकेशन।25 अक्टूबर – नाम निर्देशन भरने की अंतिम तारीख।28 अक्टूबर – नाम निर्देशन की समीक्षा।30 अक्टूबर – नाम वापसी की अंतिम तारीख।13 नवम्बर – मतदान दिवस।23 नवम्बर – मतगणना दिवस।

हरियाणा में कांग्रेस विधायक दल की बैठक18 अक्टूबर को हो सकती है, इस दौरान नेता प्रतिपक्ष भी बदला जा सकता है

चंडीगढ़ हरियाणा में कांग्रेस विधायक दल की बैठक18 अक्टूबर को हो सकती है। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष भी बदला जा सकता है। इस रेस मे अशोक अरोड़ा,चंद्र मोहन,गीता भुक्कल में से किसी की भी लॉटरी निकल सकती है। एक दशक के लंबे अंतराल के बाद हरियाणा की सत्ता में वापसी का सपना टूट जाने के बाद कांग्रेस हाई कमान भी पार्टी की प्रदेश इकाई में जल्द ही बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में जुट गया है। जल्द होगा हरियाणा इकाई में फेरबदल ! कांग्रेस का 2005 का रिकॉर्ड तोड़ने का दवा करने वाले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष उदयभान और भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व में हुए इस चुनाव में कांग्रेस को केवल  37 सीट ही मिलल पाई है। पार्टी हाई कमान की ओर से भी इस बार एक दशक के बाद हरियाणा की सत्ता में वापसी की पूरी उम्मीद जताई जा रही थी। यहीं कारण है कि टिकट वितरण में भी हाई कमान ने भूपेंद्र हुड्डा और उदयभान की पसंद का अधिक ध्यान रखा था। अब हरियाणा की सत्ता हाथ से जाने के बाद कांग्रेस में प्रदेश स्तर पर कईं प्रकार का बड़ा फेरबदल होने की अटकलें हैं। हुड्डा की बजाए किसी और को मिलेगा नेता प्रतिपक्ष का पद ! राजनीतिक जानकारों और कांग्रेस से जुड़े सूत्रों की माने तो इस बार कांग्रेस पार्टी की ओर से नेता प्रतिपक्ष का पद भूपेंद्र हुड्डा की बजाए किसी अन्य नेता को दिया जा सकता है। ऐसे में राहुल और प्रियंका गांधी की ओर से कांग्रेस के चुने गए विधायकों में उस नेता की पड़ताल भी शुरू कर दी गई है। चर्चा है कि थानेसर सीट से विधानसभा चुनाव जीते अशोक अरोड़ा को कांग्रेस आने वाले दिनों में नेता प्रतिपक्ष बना सकती है। अशोक अरोड़ा के नाम पर हुड्डा परिवार को भी आपत्ति नहीं होगी। बता दें कि अशोक अरोड़ा जब इनेलो छोड़कर कांग्रेस में आए तो उन्होंने भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नेतृत्व स्वीकार किया और आज तक वह कांग्रेस की गुटबाजी में हुड्डा के साथ हैं। पंजाबी चेहरा होने के कारण अशोक अरोड़ा को यह अहमियत दी जा सकती है। अशोक अरोड़ा अतीत में इनेलो के भी प्रदेशाध्यक्ष रहे है और पूरे हरियाणा मे इनकी पकड़ है। इसके अलावा हरियाणा में पूर्व मंत्री और विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने के 10 माह बाद भी जीतू पटवारी अपनी टीम बनाने में कामयाब नहीं

भोपाल मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में बड़ी हार मिलने के बाद कांग्रेस अंदरखाने चलने वाली खींचतान से अब तक नहीं उबर पाई है। यही कारण है कि प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने के 10 माह बाद भी जीतू पटवारी अपनी टीम बनाने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। राज्य में वर्ष 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था और तत्कालीन अध्यक्ष कमलनाथ के स्थान पर प्रदेश अध्यक्ष की कमान जीतू पटवारी को सौंपी गई। नए अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद से ही पार्टी में संभावित प्रदेश कार्यकारिणी के गठन पर सब की नजर है मगर वक्त गुजरता जा रहा है और नियुक्तियां नहीं हो पा रही है। राज्य में कुछ पदाधिकारी और मीडिया विभाग में नियुक्तियां जरूर हुई है मगर अधिकांश पद अब भी खाली हैं। राज्य की कांग्रेस की बात करें तो गुटबाजी और पार्टी एक दूसरे के लंबे अरसे तक पर्याय रहे हैं। एक बार फिर लगभग वही स्थिति बनती जा रही है क्योंकि वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तथा कमलनाथ की सक्रियता लगातार कम होती जा रही है तो वही नए लोगों को कोई मौका नहीं मिल पा रहा है। नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी प्रदेश की कार्यकारिणी के गठन के साथ जिम्मेदारी का इंतजार है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष पटवारी नई कार्यकारिणी का गठन करना चाहते हैं और इसके लिए वे दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से भी कई बार बात कर चुके हैं। वहीं राज्य के पार्टी के वरिष्ठ नेता अपने ज्यादा से ज्यादा समर्थकों को पद दिलाना चाहते हैं जिसके चलते आम सहमति नहीं बन पा रही है। इतना ही नहीं पार्टी को जातीय समीकरण के आधार पर भी प्रतिनिधित्व देने की चुनौती बनी हुई है। पार्टी के एक पदाधिकारी का कहना है कि नियुक्तियां न होने का बड़ा असर संगठन की गतिविधियों पर पड़ रहा है और यही कारण है कि वर्तमान की राज्य सरकार के खिलाफ मुद्दे कई हैं उसके बावजूद पार्टी की ओर से कोई बड़ा आंदोलन खड़ा नहीं किया जा पा रहा है। हर कार्यकर्ता और नेता ‘पद’ यानी जिम्मेदारी चाहता है, मगर ऐसा नहीं हो पा रहा है। जब नेता के पास पद ही नहीं है तो वह सक्रिय क्यों होगा यह बड़ा सवाल है।  

हरियाणा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस अब ईवीएम पर सवाल उठाने लगी, कहा- ’20 सीटों पर हुआ घपला’

नई दिल्ली हरियाणा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस अब ईवीएम पर सवाल उठाने लगी है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि पार्टी ने चुनाव आयोग को 20 सीटों की सूची भेजी है, जहां हाल ही में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में मतगणना के दौरान उम्मीदवारों ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर लिखित और मौखिक शिकायतें की हैं। ईवीएम की बैटरी पर सवाल एएनआई से बात करते हुए खेड़ा ने कहा, हमने चुनाव आयोग को 20 सीटों की सूची भेजी है, जिसके बारे में हमारे उम्मीदवारों ने 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज होने की लिखित और मौखिक शिकायतें की हैं। यह मुद्दा मतगणना के दिन उठाया गया था, यह एक अजीब संयोग है कि जिन मशीनों में 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज दिखाई गई, वे वही मशीनें थीं, जिन पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। 60-70 प्रतिशत बैटरी चार्ज वाली मशीनें वे थीं, जिन पर कांग्रेस जीती। ऐसा क्यों हुआ? आयोग से कार्रवाई करने की मांग कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपा और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आयोग इस मुद्दे का संज्ञान लेगा और उचित निर्देश देगा। पार्टी महासचिव और संचार प्रभारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “9 अक्टूबर को कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग को शिकायतों से भरा ज्ञापन सौंपा था। इसे आगे बढ़ाते हुए आज हमने हरियाणा के 20 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रक्रिया में गंभीर और स्पष्ट अनियमितताओं को उजागर करते हुए एक अद्यतन ज्ञापन दिया है। हमें उम्मीद है कि चुनाव आयोग इसका संज्ञान लेगा और उचित निर्देश जारी करेगा।” इन 20 सीटों के नाम शामिल हरियाणा के जिन 20 विधानसभा क्षेत्रों पर कांग्रेस ने अनियमितताओं का आरोप लगाया है, उनमें नारनौल, करनाल, डबवाली, रेवाड़ी, होडल, कालका, पानीपत सिटी, इंद्री, बड़खल, फरीदाबाद एनआईटी, नलवा, रानिया, पटौदी (एससी), पलवल, बल्लभगढ़, बरवाला, उचाना कलां, घरौंडा, कोसली और बादशाहपुर शामिल हैं। इससे पहले केसी वेणुगोपाल, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, अशोक गहलोत, प्रताप सिंह बाजवा, जयराम रमेश, पवन खेड़ा, अजय माकन और उदय भान सहित कांग्रेस नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों पर अपनी चिंताओं को दूर करने के लिए चुनाव आयोग से मिलने गया था। मशीनें सील करने की मांग कांग्रेस नेताओं की चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए खेड़ा ने कहा था कि मतगणना के दिन कुछ मशीनें 99 प्रतिशत और अन्य सामान्य मशीनें 60-70 प्रतिशत पर थीं। हमने मांग की कि जांच पूरी होने तक उन मशीनों को सील और सुरक्षित रखा जाना चाहिए। हमने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि अगले 48 घंटों में हम बाकी शिकायतें भी उनके सामने पेश करेंगे।

उज्जैन: कांग्रेस के पूर्व पार्षद कलीम खान की गोली मारकर हत्या, घर वालों पर ही हत्या की आशंका

उज्जैन उज्जैन में शुक्रवार सुबह कांग्रेस नेता और पूर्व पार्षद हाजी कलीम खान उर्फ गुड्डू की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्यारे नीलगंगा थाना क्षेत्र की वजीर पार्क कॉलोनी में उनके घर में घुसकर गुड्डू को चार से अधिक गोलियां मारकर फरार हो गए। पत्नी व बेटों पर हत्या का आरोप परिजनों ने हत्या का आरोप गुड्डू की पत्नी और दो बेटों पर लगाया है, और प्रॉपर्टी विवाद को हत्या का मुख्य कारण बताया जा रहा है। नीलगंगा पुलिस के अनुसार, गुड्डू के मामा नसरुद्दीन ने पुलिस को इस वारदात की सूचना दी थी। पुलिस ने गुड्डू की पत्नी नीलोफर, बड़े बेटे दानिश और छोटे बेटे आसिफ को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि गुड्डू ने पिछले 12 सालों से तीनों को प्रॉपर्टी से बेदखल कर रखा था। पहले भी हो चुका था हमला 4 अक्टूबर को गुड्डू पर मॉर्निंग वॉक के दौरान भी हमला हुआ था, जब हमलावरों ने उन पर पिस्टल से फायर किया था। हालांकि, उन्होंने नाले में कूदकर अपनी जान बचाई थी। घटना के बाद गुड्डू ने थाने में आवेदन देकर अपनी हत्या की आशंका जताई थी। वहीं घटना की जानकारी लगते ही मौके पर पहुंचे पुलिस ने हत्या की शंका में उनकी पत्नी और बड़े बेटे मिंटू को हिरासत में लिया है। परिवार के लोगों ने बेटे और पत्नी पर प्रॉपर्टी विवाद में हत्या का आरोप लगाया है क्योंकि उन्होंने बेटे को प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया था। हत्या की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। जाँच के लिए डॉग स्क्वाड भी आ गई थी। वजीर पार्क स्थित गुड्डू के घर के बाहर लोगों की भीड़ जुटी हुई थी। बता दें पूर्व पार्षद पर एक सप्ताह पूर्व 4 अक्टूबर की सुबह मॉर्निंग वाक के दौरान हमला हुआ था। कार से आए हमलावरों ने तीन फायर किए थे। तब गुड्डू ने नाले में कुदकर अपनी जान बचाई थी। इस वारदात से वे इतना भयभीत थे कि घटना के बाद कई दिनों तक घर से बाहर नहीं निकले थे। घटना के छह दिन बाद सब सामान्य लग रहा था तो गुड्डू ने बुधवार शाम भतीजे आरिफ के साथ नीलगंगा थाने पहुंचकर पुलिस को शिकायत कर एफआई आर दर्ज कराई थी।  

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