उम्मीदवार 30 अक्टूबर तक नामांकन फार्म भर सकेंगे, 31 अक्टूबर को होगी की समीक्षा.
Candidates can fill out the application form until October 30, and the review will take place on October 31.
Candidates can fill out the application form until October 30, and the review will take place on October 31.
इंदौर-3 से कांग्रेस ने पिंटू जोशी (दीपक)को उम्मीदवार बनाया है।इनके पिता स्व.महेश जोशी संजय गांधी के करीबी थे।कमलनाथ और महेश जोशी दोनों युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महा.थे।दिग्विजय सरकार में भी महेश जोशी रसूख़दार मंत्री थे।इनके चचेरे भाई अश्विन जोशी भी 3 बार इस सीट से विधायक रहे है। निवाड़ी से कांग्रेस ने बड़ा दांव चलते हुए भाजपा नेता अमित राय को उम्मीदवार बनाया है अमित राय की माँ निवाड़ी जिपं की अध्यक्ष है।ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस यहां रोशनी यादव पर दांव चल सकती है लेकिन मीरा यादव के सपा से चुनाव लड़ने के बाद कांग्रेस ने रोशनी को टिकट देना उचित नही समझा। कांग्रेस ने ग्वालियर से सुनील शर्मा को उम्मीदवार बनाया था इनका मुकाबला सिंधिया समर्थक मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर से है पिछला उपचुनाव भी ये प्रद्युमन सिंह तोमर के खिलाफ लड़े थे जहां इन्हें काफी मतों से शिकस्त झेलनी पड़ी थी।सुनील क्षेत्र में काफी एक्टिव रहने वाले नेता माने जाते है। खुरई सीट से कांग्रेस पार्टी ने रक्षा राजपूत को अपना उम्मीदवार बनाया है रक्षा पिछले कई वर्षों से खुरई में सक्रिय है उनका मुकाबला प्रदेश के कद्दावर मंत्री भूपेंद्र सिंह से है खुरई भाजपा की बेहद मजबूत सीट मानी जाती है,भूपेंद्र सिंह ने यहां भाजपा की जड़े को गांव-गांव में जमाया है। कांग्रेस पार्टी ने खातेगांव से मप्र की राजनीति के संत कहे जाने वाले स्व कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी को अपना उम्मीदवार बनाया है।दीपक जोशी 2003 से लेकर 2018 तक विधायक रह चुके है।पिछला चुनाव वह हार गए थे।वही खातेगांव से भाजपा ने आशीष शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने सीधी से ज्ञान सिंह को उम्मीदवार बनाया है ज्ञान सिंह वर्तमान में सीधी जिला कांग्रेस के अध्यक्ष है।वह अजय सिंह के बेहद करीबी है वहां भाजपा ने रीति पाठक को उम्मीदवार बनाया है वहीं भाजपा के वर्तमान विधायक केदारनाथ टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके है। कांग्रेस पार्टी ने मुरैना से दिनेश गुर्जर को अपना उम्मीदवार बनाया है।पार्टी ने यहां से अपने वर्तमान विधायक राकेश मावई की टिकट काट कर दिनेश गुर्जर को उम्मीदवार बनाया है है यह सीट गुर्जर बहुल्य है।फिलहाल दिनेश गुर्जर किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। कांग्रेस पार्टी ने भाजपा की परंपरागत सीट रहली से इंजीनियर ज्योति पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया है।ज्योति वर्तमान में जिला पंचायत की सदस्य है कांग्रेस ने यहां ओबीसी कार्ड चला है अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा के इस अभेद किले पर ज्योति सेंध लगाने में कामयाब होती है या नहीं! कांग्रेस पार्टी ने भिंड से चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को अपना उम्मीदवार बनाया है जब से वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए थे तब से वह नेपथ्य में चल रहे थे कांग्रेस पार्टी ने उन्हें एक नया राजनीतिक जीवन दान दिया है अब देखना होगा वह इस अवसर को किस तरह भुनाते हैं। कांग्रेस पार्टी ने रीवा से इंजी.राजेंद्र शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है ये वर्तमान में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष हैं उनकी छवि साफ सुथरी है ये अच्छे उद्यमी भी है।वही यह सीट भाजपा की मजबूत सीटों में एक है यहां इनका मुकाबला मंत्री राजेंद्र शुक्ला से है जो मजबूत स्थित में है। कांग्रेस ने मैहर से धर्मेश घई को उम्मीदवार बनाया है धर्मेश घई मैहर नगर पालिका के अध्यक्ष रह चुके है यह पंजाबी समाज से आते हैं जिनकी संख्या मैहर में बहुत कम है।यह सीट ब्राह्मण-कुर्मी बाहुल्य है इसके बाद भी पार्टी ने इनको उम्मीदवार बनाया है।ये अजय सिंह व प्रवीण कक्कड़ के करीबी है। कांग्रेस ने निधि जैन को सागर से विधानसभा का उम्मीदवार बनाया है निधि हाल ही में सागर नगर निगम का चुनाव लड़ी थी जहां उन्हें शिकायत झेलनी पड़ी थी।इनका मुकाबला इनके पति के सगे बड़े भाई शैलेंद्र जैन से होगा जो वर्तमान में सागर के विधायक व भाजपा के उम्मीदवार हैं। देवतलाव से कांग्रेस ने पद्मेश गौतम को उम्मीदवार बनाया है ये वर्तमान विस अध्यक्ष एवं भाजपा उम्मीदवार गिरीश गौतम के सगे भतीजे हैं।इन्होंने हाल ही में हुए पंचायती चुनाव में विस अध्यक्ष के बेटे राहुल गौतम को जिला पंचायत के चुनाव में करारी शिकायत दी थी,यही इनके टिकट पाने का आधार बना। कांग्रेस पार्टी ने सिरमौर की सामान्य सीट से रामगरीब आदिवासी को टिकट देकर बड़ा दांव चला है।रामगरीब आदिवासी कोल समाज के बड़े नेता है।इनका मुकाबला रीवा राजघराने की युवराज दिव्यराज सिह से होगा।कमलनाथ ने राजा के सामने रंक को मैदान में उतार दिया है।ये वही रामगरीब आदिवासी है जो 2008 में में तत्कालीन मंत्री स्व.रमाकांत तिवारी को त्योंथर से चुनाव हरा दिया था।कमलनाथ इनके मुरीद है।कमलनाथ ने बड़े-बड़े धन्ना सेठों की जगह एक गरीब आदिवासी पर दांव चला है विन्ध्य में कोल मतदाता कई विधानसभा में निर्णायक है कमलनाथ का यह दांव चल गया तो भाजपा को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है! कहते है ना जो दौड़ता है उसका भाग्य भी दौड़ता है! इसका प्रत्यक्ष प्रमाण अभय मिश्रा है उन्हें जैसे ही इस बात की जानकारी मिली कि भाजपा ने उनका टिकट काट दिया है फौरन वह कांग्रेस से टिकट पाने के लिए जुट गए,दिल्ली-भोपाल को एक कर डाला और आखिरकार टिकट पाने में सफल हो गए।आज उनकी जीवटता की चर्चा हर जगह हो रही है।अभय एक लड़ाई तो जीत चुके है लेकिन अभी मुख्य लड़ाई जीतना बाकी है चुनाव में उनके सामने भाजपा के मजबूत उम्मीदवार केपी त्रिपाठी होंगे जिनकी क्षेत्र में अच्छी पकड़ देखी जा रही है गांव-गांव उन्होंने कार्यकर्ताओं की फौज तैयार की है।अभय के प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के अंदर भी खूब है अब देखना होगा वह उनसे किस प्रकार निपटते हैं!रीवा जिले की यह सबसे हॉट सीट है सेमरिया में एक बार अभय और एक बार उनकी पत्नी चुनाव लड़ी है दोनों विजयी हुए है KP त्रिपाठी भी एक बार ही चुनाव लड़े हैं वह भी विजय हुए है लेकिन इस बार सेमरिया की जनता असली विजेता का चयन करेगी!
मुरैना से पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक रुस्तम सिंह के सुपुत्र राकेश रुस्तम सिंह ने थामा बसपा का दामन। सुमावली से कांग्रेस विधायक अजब सिंह कुशवाहा बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए हैं।भाजपा ने यहां से गुर्जर प्रत्याशी को मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने यहां इस बार क्षत्रिय प्रत्याशी पर दांव चला है।
राहुल गांधी ने पहले डोसा बनाने के बारे में पूछा और फिर डोसा बनाया. राहुल को डोसा बनाते देख स्थानीय लोग हैरान रह गए. सांसद ने डोसा बनाने वाले से उसकी आय और आने वाली समस्याओं के बारे में भी पूछा. जगतियाल (तेलंगाना) : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को तेलंगाना के जगतियाल जिले में सड़क किनारे एक भोजनालय में डोसा बनाया. कांग्रेस सांसद ‘विजयभेरी यात्रा’ के तहत करीमनगर से जगतियाल के लिए रवाना हुए. वह रास्ते में नुकापल्ली बस स्टैंड पर रुके और एक भोजनालय में गए, जहां उन्होंने डोसा बना रहे एक व्यक्ति से बातचीत की.उन्होंने डोसा बनाने के बारे में पूछा और फिर डोसा बनाया. राहुल को डोसा बनाते देख स्थानीय लोग हैरान रह गए. सांसद ने डोसा बनाने वाले से उसकी आय और आने वाली समस्याओं के बारे में भी पूछा. राहुल ने डोसा बनाने के बाद सड़क किनारे बैठकर उसे लोगों के साथ खाया भी. राहुल ने अपने हाथ से लोगों को खुद बनाए गए डोसे का स्वाद भी चखाया. इस दौरान लोग काफी खुश दिखे. कांग्रेस नेता ने राहगीरों से बातचीत भी की और बच्चों को चॉकलेट भी बांटी.
कांग्रेस हो या भाजपा, अमरपाटन, नागौद एवं रैगांव विधानसभा सीटों पर युवाओं के ही दम से जीत सम्भव है।इन सीटों पर भाजपा, कांग्रेस पार्टी की तरह अपने युवा चेहरों को मौका देगी या बुजुर्गों पर फिर से दांव लगाएगी। संतोष सिंह तोमर, भोपाल /सतना।मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर आज देर रात कांग्रेस पार्टी ने शेष बचे 88 विधानसभा क्षेत्रों के लिए चुनाव प्रत्याशियों के नाम की घोषणा करते हुए प्रदेश की सभी 230 सीटों पर अपनी स्थिति साफ कर दी। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की ओर से अभी तक शेष बचे विधानसभा क्षेत्रों के लिए नाम सामने नहीं आ पाए हैं। सभी भाजपा की अगली सूची का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कांग्रेस का महिला एवं युवा चेहरों पर फोकस। कांग्रेस पार्टी ने इस बार महिला एवं युवा चेहरों पर ज्यादा फोकस कर रखा है। इसीलिए पार्टी ने इस बार अधिकतर युवा चेहरों और महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारा है। जिसके पीछे पार्टी की मंशा अगली पीढ़ी को तैयार करने की भी दिखाई दे रही है। इसी क्रम में विंध्य क्षेत्र के सतना जिले में कांग्रेस पार्टी ने नागौद विधानसभा क्षेत्र से यूथ कांग्रेस की प्रदेशउपाध्यक्ष डॉ. रश्मी पटैल को मैदान में उतारा है, जबकि चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के वर्तमान विधायक एवं युवा नेता नीलांशु चतुर्वेदी को प्रत्याशी बनाया है। इसके साथ ही रेगांव विधानसभा क्षेत्र से 2020 के उपचुनाव में विजयी रहीं वर्तमान विधायक कल्पना वर्मा को पुनः चुनाव प्रत्याशी घोषित किया है। भाजपा को युवा नेतृत्व की दरकार है। भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक विंध्य क्षेत्र के सतना जिले की सात में से चार विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित किए है। जबकि तीन मुख्य सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा होना बांकी है। भाजपा की ओर से अभी तक घोषित चार नामों में से केवल एक रामपुर बाघेलान सीट पर युवा चेहरे के रूप में विक्रम सिंह ( विक्की ) को चुनाव मैदान में उतारा है। युवा नेता विक्रम सिंह की क्षेत्र के युवा वर्ग में बहुत अच्छी पकड़ बताई जाती है। अब बात करते हैं, बांकी बचे उन तीन विधानसभा क्षेत्रों की जहां भाजपा की ओर अभी तक प्रत्याशियों के नाम की घोषणा नहीं हो सकी है। इसमें से अमरपाटन विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां से भाजपा के वर्तमान विधायक व मध्य प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री रामखेलावन पटैल को पार्टी फिर से चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। मंत्री रामखेलावन का नाम उन पर लगते रहे आरोपों के चलते हमेशा सुर्खियों में रहा है। मंत्री जी पर कभी जातिवादी, अभद्रता तो कभी कार्यकर्ताओं की अनदेखी के आरोपों के चलते क्षेत्रीय लोगों में छवी धूमिल हुई है। जिसका नुकसान इस सीट पर भाजपा को भुगतना पड़ सकता है। जबकि नागौद विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के वर्तमान विधायक व पूर्व मंत्री नागेंद्र सिंह का नाम भाजपा की अगली प्रत्याशी सूची में घोषित हो सकता है। लोगों की मानें तो नागेंद्र सिंह की उम्र करीब 83 वर्ष है, और वृध्दावस्था के चलते विधायक नागेंद्र सिंह अपने क्षेत्र में पहले की तरह सक्रीय नहीं रहते हैं। जिसके कारण क्षेत्र में उनकी पकड़ भी कमजोर हो रही है, जिसका फायदा यहां कांग्रेस उठाती दिख रही है। इसके बाद बात करते हैं बांकी बची रेगांव विधानसभा की जहां से कई युवा महिलाओं व युवा नेताओं ने अपनी दाबेदारी पार्टी नेतृत्व के सामने पेश की है। यहां से प्रतिमा बागरी, रानी बागरी और पुष्पराज बागरी के नाम को पैनल में शामिल किया गया है। युवा चेहरों का विकल्प युवा ही हो सकते हैं। विंध्य क्षेत्र की इन सभी सीटों पर जिस तरह कांग्रेस ने महिला एवं युवा चेहरों पर भरोसा जताया है ठीक उसी तरह भाजपा को भी अब बुजुर्ग और आरोप प्रत्यारोपों से घिरे नेताओं की जगह युवाओं को आगे लाकर अगली पीढ़ी का नेतृत्व तैयार करने की कोशिश करना चाहिए। क्योंकि कांग्रेस के युवा चेहरों का विकल्प भाजपा का युवा नेतृत्व ही बन सकता है। क्योंकि कांग्रेस अपने युवा चेहरों को मैदान में उतारकर चुनांव मैदान में आ गई है। अब भाजपा के अधिकांश कार्यकर्ताओं के साथ ही युवा वर्ग और नव मतदाताओं की नजर केवल अपने युवा चेहरों पर टिकी है,भाजपा भी अगर नए वा युवा चेहरों को अवसर देगी तो परिणाम भाजपा के पक्ष में आने के ज्यादा अवसर होंगे। जिससे आने बाले समय मे भाजपा और अधिक शशक्तता व मजबूती मिलेगी,साथ ही युवाओं में एक नई उम्मीद दिखेगी। युवा चेहरों के दम ही अब नैया पर हो सकती है, क्योंकि लोगों को बुजुर्ग या विवादित छवि वाले नेताओं की अपेक्षा अत्यधिक ऊर्जावान युवा चेहरों पर ज्यादा भरोसा है।
“The Congress has released the second list of candidates in Madhya Pradesh, with 88 candidates’ names.”
संतोष सिंह तोमरभोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर अब तक की वह सबसे बड़ी खबर सामने आई है। जिसका इंतजार प्रदेश के आमजन से लेकर राजनीतिक हलकों में बड़ी बेसब्री से किया जा रहा था। भारतीय जनता पार्टी के बाद अब कांग्रेस पार्टी ने भी देर से ही सही लेकिन आगामी मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। कांग्रेस ने अपनी पहली सूची में 230 में से 144 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है।मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपने 144 उम्मीदवारों की पहली सूची रविवार को सुबह जारी की। इसमें 60 से ज्यादा विधायकों को फिर से मौका दिया है। कांतिलाल भूरिया की जगह उनके बेटे विक्रांत को टिकट दिया है। कटंगी विधायक टामलाल सहारे और गुनौर विधायक शिवदयाल बागरी के टिकट काट गए हैं। इस सूची के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ छिंदवाड़ा से और भूपेश बघेल पाटन से चुनाव लड़ेंगे। जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का सामना करने के लिए बुधनी से विक्रम मस्ताल को मैदान में उतारा गया है। मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह को राघोगढ़ से टिकट दिया गया है, जबकि दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह को चाचौरा सीट से टिकट दिया गया। कांग्रेस ने चुरहट से अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह राहुल को टिकट दिया है। वहीं राजनीति के केंद्र चम्बल अंचल में कांग्रेस के गढ़ लहार से अभी तक अपराजित विधायक एवं नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह को टिकट दिया गया है। जबकी अंचल की ही मेहगांव सीट से उनके भांजे युवा नेता राहुल सिंह भदौरिया को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस पार्टी द्वारा जारी 144 नामों की सूची में ओबीसी वर्ग के 39 प्रत्याशियों के नाम हैं। इसके साथ ही अनुसूचित जाति वर्ग के 22 और अनुसूचित जनजाति के 30 उम्मीदवार के नामों शामिल हैं। पूरे 144 लोगों में से 19 महिलाओं को प्रत्याशी बनाया गया है। जबकि, 6 अल्पसंख्यक वर्ग के नेताओं को टिकट मिला है, इसमें से 5 जैन और 1 मुस्लिम नेता शामिल हैं। जबकि, 65 टिकट 50 साल से कम उम्र के लोगों मिले हैं। यानी, कांग्रेस पार्टी ने इस बार युवा नेताओं पर अधिक भरोसा जताया है। वहीं जानकारी मिली है कि आगामी दो दिनों में कांग्रेस पार्टी अपने बकाया उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर सकती है। कांग्रेस पार्टी ने किस नेता को कहां से दिया टिकटकांग्रेस द्वारा जारी उम्मीदवारों की लिस्ट में किसे कहां से चुनाव मैदान में उम्मीदवारी दी गई है, इस पर एक नजर डालते हैं। कांग्रेस पार्टी ने श्योपुर से बाबू जंडेल, विजयपुर से रामनिवास रावत, सबलगढ़ से बैजनाथ कुशवाह, जौरा से पंकज उपाध्याय, अटेर से हेमंत कटारे, लहार से डॉ. गोविंद सिंह, मेहगांव से राहुल भदौरिया, ग्वालियर ग्रामीण से साहब सिंह गुर्जर, ग्वालियर पूर्व से सतीश सिकरवार, ग्वालियर दक्षिण से प्रवीण पाठक, भितरवार से लाखन सिंह यादव, डबरा- एससी सीट से सुरेश राजे, सेंवढ़ा से घनश्याम सिंह, भांडेर एससी सीट से फूलसिंह बरैया, दतिया से अवधेश नायक, करेरा एससी सीट से परागीलाल जाटव, पोहरी से कैलाश कुशवाह, शिवपुरी से केपी सिंह, पिछोर से शैलेंद्र सिंह, कोलारस से बैजनाथ यादव, बमोरी से ऋषी अग्रवाल, चाचौड़ा से लक्ष्मण सिंह, राघोगढ़ से जयवर्धन सिंह को टिकट दिया है।वहीं अशोकनगर एससी सीट से हरीबाबू राय, चंदेरी से गोपाल सिंह चौहान, मुंगावली से राव यदवेंद्र यादव, सुरखी से नीरज शर्मा, देवरी से हर्ष यादव, नरयावली एससी सीट से सुरेंद्र चौधरी, बंडा से तरवार सिंह लोधी, टीकमगढ़ से यदवेंद्र सिंह, जतारा से किरण अहिरवर, पृथ्वीपुर से नरेंद्र सिंह राठौर, खरगापुर से चंदा सिंह गौर, महाराजपुर से नीरज दीक्षित, चांदला से हरप्रसाद अनुरागी, राजनगर से विक्रम सिंह नाती राजा, छतरपुर से आलोक चतुर्वेदी, बिजावर से चरण सिंह यादव, मलहरा से साध्व राम सिया भारती, पथरिया से राव बृजेंद्र सिंह, जबेरा से प्रताप सिंह लोधी, हटा से प्रदीप खटीक, पवई से मुकेश नायक, गुन्नौर से जीवन लाल सिद्धार्थ, चित्रकूट से नीलांशु चतुर्वेदी, रायगांव से कल्पना वर्मा, सतना से सिद्धार्थ कुशवाह, नागौद से डा रश्मि सिंह पटेल, अमरपाटन से राजेंद्र कुमार सिंह, त्योंथर से रमाशंकर सिंह पटेल, मऊगंज से सुखेंद्र सिंह बन्ना, मनगवां से बबीता साकेत, गुढ़ से कपिध्वज सिंह, चुरहट से अजय सिंह (राहुल भैया) को उम्मीदवार बनाया है।इसके साथ ही, सिंहवाल से कमलेश्वर पटेल, चितरंगी से मनिक सिंह, सिंगरौली से रेनू शाह, जैतपुर से उमा धुर्वे, अनूपपुर से रमेश सिंह, पुष्पराजगढ़ से फुंदेलाल मार्को, बड़वारा से निलेश अवस्थी, बरगी से संजय यादव, जबलपुर पूर्व से लखन घनघोरिया, जबलपुर उत्तर से विनय सक्सेना, जबलपुर पश्चिम से तरुण भनोत, सिहोरा से एकता ठाकुर, शाहपुरा से भूपेंद्र मरावी, डिंडौरी से ओंकार सिंह मरकाम, बिछिया से नारायण सिंह पाटा, बैहर से संजय उईके, लांजी से हिना कांवरे, परसवाड़ा से मधु भगत, बालाघाट से अनुभा मुंजारे, कटंगी से बोध सिंह भगत, बरघाट से अर्जुन सिंह काकोड़िया, सिवनी से आनंद पंजवानी, केवलारी से रजनीश सिंह, लखनादौन से योगेंद्र सिंह बाबा, गोटेगांव से शेखर चौधरी, नरसिंहपुर से लखन सिंह पटेल, तेंदुखेड़ा से संजय शर्मा, छिंदवाड़ा से कमलनाथ, मुल्ताई से सुखदेव पांसे, बैतूल से निलय डागा, घोड़ाडोंगरी से राहुल उईके, भैंसदेही से धर्मु सिंह सिरसाम, टिमरनी से अभिजीत शाह, हरदा से राम किशोर डोंगे, उदयपुरा देवेंद्र पटेल गडरवास, सिलवानी से देवेंद्र पटेल, विदिशा से शशांक भार्गव पर भरोसा जताया है।जबकि बासौदा निशंक जैन, शमशाबाद सिंधु विक्रम सिंह, बैरसिया से जयश्री हरिकिरण, नरेला से मनोज शुक्ला, भोपाल मध्य से आरिफ मसूद, बुधनी से विक्रम मस्ताल, आष्टा से कमल चौहान, सीहोर से शशांक सक्सेना, राजगढ़ से बापू सिंह तंवर, खिलचीपुर से प्रियव्रत सिंह, सुसनैर से भेरू सिंह बापू, आगर से विपिन वानखेड़े, शाजापुर से हुकुम सिंह कराड़ा, कालापीपल से कुणाल चौधरी, सोनकच्छ से सज्जन सिंह वर्मा, हाटपिपलिया से राजवीर सिंह बघेल, मांधाता उत्तम पाल सिंह, पंधाना से रूपाली बारे, भीकनगांव से झूमा सोलंकी, बड़वाह से नरेंद्र पटेल, महेश्वर से विजयलक्ष्मी साधौ, कसरावद से सचिन यादव, खरगोन से रवि जोशी, भगवानपुरा से केदार डावर, राजपुर से बाला बच्चन, बड़वानी से राजन मंडलोई, अलीराजपुर मुकेश पटेल, जोबट से सेना पटेल, झाबुआ से विक्रांत भूरिया, थांदला से वीर सिंह भूरिया, पेटलवाद वाल सिंह मेड़ा, सरदारपुर से प्रताप ग्रेवाल, गंधवानी से उमंग सिंघार, कुक्षी से सुरेंद्र सिंह बघेल हनी, धरमपुरी से पांचीलाल मेड़ा, देपालपुर विशाल पटेल, इंदौर 1 संजय शुक्ला, इंदौर 2 चिंतामणी … Read more
भोपाल. मध्य प्रदेश में उपचुनाव के ही चर्चे हैं। बीजेपी और कांग्रेस ने अपने अपने स्तर पर पूरी तैयारी कर ली है. हर विधानसभा क्षेत्र में बैठकों और प्रचार-प्रसार का दौर जारी है. इस बीच बीजेपी ने हर बूथ पर पन्ना प्रमुख की नियुक्ति कर दी है. इन पन्ना प्रमुखों की जिम्मेदारी मतदाता सूची के हर पन्ने पर नज़र रखने की होगी. वहीं, कांग्रेस भी दावा कर रही है कि उसकी भी बूथ स्तर पर तैयारी पूरी है. 28 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए बीजेपी बूथ स्तर तक रणनीति तैयार कर रही है. इसी के तहत बीजेपी ने खुद को मजबूत करने के लिए 8 हज़ार से ज़्यादा पन्ना प्रभारियों को मुस्तैद कर दिया है. यह पन्ना प्रभारी संबंधित विधानसभा क्षेत्र में वहां के बूथ के लिए तैयारी करेंगे और मतदाताओं पर नजर बनाएंगे. बीजेपी का दावा है कि उसने उपचुनाव के लिए बूथ स्तर तक तैयारी कर ली है. इसके लिए लगातार भोपाल से लेकर संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में बैठकों के दौर जारी हैं. मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा हर बूथ पर पन्ना प्रमुख की नियुक्ति की गई है. बूथ पर आने वाली मतदाता सूची में जितने पन्ने होते हैं. उतने ही बीजेपी के पन्ना प्रमुख हैं. इन पन्ना प्रमुख की मुख्य जिम्मेदारी हर वोटर तक सरकार की उपलब्धियां पहुंचाना और वोटर को अपने पक्ष में करने की होती है. कांग्रेस भी मैदान में तैयार बीजेपी की तरह कांग्रेस का दावा भी है कि उसकी उपचुनाव को लेकर तैयारियां पूरी हैं. संगठन स्तर पर भी उपचुनाव की हर चरण की तैयारी पूरी कर ली गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी ने बताया कि बीजेपी की 15 साल की सरकार और हमारी 15 महीने की सरकार में जमीन आसमान का अंतर है. बूथ स्तर पर जनता के बीच हमारे कार्यकर्ता इस बात को लेकर जा रहे हैं. जिन लोगों ने हमारी सरकार गिराई है, जनता उन्हें उपचुनाव में सबक सिखाएगी. सुरेश पचौरी ने यह भी कहा कि बीजेपी भले ही कितनी तैयारी कर ले, उपचुनाव में जीत कांग्रेस की होगी. जनता सब कुछ समझ चुकी है.
भोपाल। मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा के उप-चुनाव में कांग्रेस ने अपने से अलग हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को घेरने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके लिए उनके पुराने दोस्त और राहुल गांधी के करीबियों को चुनाव प्रचार के मैदान में उतारा जा सकता है। राज्य में होने वाले विधानसभा के उप-चुनाव सियासी तौर पर कांग्रेस के पूर्व नेता और वर्तमान में भाजपा के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए सबसे अहम माने जा रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा तो कमलनाथ की सरकार गिर गई और भाजपा को फिर से सत्ता संभालने का मौका मिला। राज्य में जिन 28 विधानसभा सीटों पर उप-चुनाव होने वाले हैं उनमें से 16 सीटें ग्वालियर-चंबल इलाके से आती हैं और इन क्षेत्रों की हार-जीत सिंधिया के राजनीतिक भविष्य से जुड़ी हुई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ग्वालियर-चंबल इलाके को सिंधिया का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इस इलाके में भारी बढ़त मिली थी। सिंधिया के करीब रहे नेताओं को मैदान में उतार सकती है कांग्रेस कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने सिंधिया को घेरने के लिए युवाओं की टीम चुनाव प्रचार में उतारने का मन बनाया है। इस टीम में राहुल गांधी के करीबियों में शामिल सचिन पायलट, आरपीएन सिंह, जितेंद्र सिंह सहित कई युवा नेताओं को प्रचार में आगे किया जा सकता है। कांग्रेस युवा नेताओं की जरिए सिंधिया को घेरना चाहती है और उसके लिए कभी सिंधिया के करीबी रहे साथी सबसे ज्यादा उपयोग के लायक लग रहे हैं। सिंधिया के दोस्त पायलट करेंगे कांग्रेस का प्रचार सूत्रों के मुताबिक, बीते रोज प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ के दिल्ली दौरे के दौरान भी चुनाव प्रचार की रणनीति पर चर्चा हुई है। राज्य में कई विधानसभा क्षेत्रों में गुर्जर मतदाता है और वे चुनावी नतीजों को भी प्रभावित करते है। लिहाजा कमलनाथ चाहते हैं कि पायलट को उप-चुनाव के प्रचार में उनका उपयोग किया जाए। कमलनाथ पायलट को प्रचार के लिए राज्य में लाकर दूसरे नेताओं के प्रभाव को भी पार्टी के भीतर कम करना चाह रहे हैं। सिंधिया के प्रभाव को पायलट कम कर सकते हैं राजनीतिक विश्लेषक अरविंद मिश्रा का मानना है कि कांग्रेस में सचिन पायलट की पहचान उर्जावान और अपनी बात को बेवाक तरीके से कहने वाले नेता की तो है ही, साथ ही आमजन के बीच भी पायलट को पसंद किया जाता है। सिंधिया के जाने से कांग्रेस को नुकसान हुआ है, उप-चुनाव में सिंधिया के प्रभाव को रोकने में कांग्रेस का नए और चमकदार चेहरे का उपयोग कारगर हो सकता है। कांग्रेस अगर ऐसा करने में सफ ल होती है तो चुनाव और भी रोचक हो जाएंगे। कांग्रेस चार सचिवों की नियुक्ति पहले ही कर चुकी है कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सियासत के नए समीकरण बन रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष कमल नाथ चाहते हैं कि राज्य के उन नेताओं को ही सक्रिय किया जाए जो उनके करीबी हैं, वही दूसरे राज्यों के उन नेताओं को राज्य में प्रचार के लिए भेजा जाए जिनकी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से नजदीकियां हैं। राज्य में आगामी विधानसभा के उपचुनाव में नई कांग्रेस देखने को मिल सकती है। वैसे भी उपचुनाव के लिए पार्टी हाईकमान ने चार सचिवों की पहले ही तैनाती की है और वे कमलनाथ के साथ पार्टी हाईकमान के बीच रहकर चुनावी रणनीति को जमीनी स्तर पर उतारने में लगे हैं।