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जनता के पैसे से बना हुआ कारखाना बीजेपी नहीं बेच सकती :पंकज उपाध्याय

BJP cannot sell a factory built with public money: Pankaj Upadhyay शक्कर कारखाना चलाओ संघर्ष समिति की जन जागरण यात्रा आज लगभग एक दर्जन गाँव में पहुंची। यात्रा आज शक्कर कारखाने की पुस्तेनी जमीन कुर्रोली से प्रारम्भ होकर लाभकरण, बुद्धगडी, टीकटगड़ी,बिलगांव क्वारी, तोरीका, नयागांव, शेखपुर, भटपुरा, और दीपेरा पहुंची। जहाँ सभी लोगों को कारखाने को बचाने एवं पुनः चालू कराने के लिए अपनी बात रखी। तथा सभी ग्राम वासियों ने एक साथ हाथ उठाकर मुरैना में होने वाली आम सभा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आश्वाशन दिया। यात्रा को जौरा विधायक पंकज उपाध्याय,मध्य प्रदेश किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष श्री अशोक तिवारी जी,कारखाने के पूर्व संचालक श्री गयाराम धाकड़ जी, नीकेराम त्यागी जी, डॉ मुरारी लाल अमर जी आदि ने सम्बोधित किया।विधायक पंकज उपाध्याय ने कहा की यह कारखाना हमारे पूर्वजों ने अपने खून पसीने से सींचा है इसे हम कोड़ियों के भाव नहीं बिकने देंगे 1965 में जब कारखाना बन रहा था तब एक शेयर ₹500 का था और एक तोला सोना ₹65 का आता था आज के हिसाब से वह ₹500 7-8 लाख होता है कारखाने को हमें हर हाल में बिकने से बचाना होगा श्राद्ध पच्छ चल रहा 21सितम्बर को अंतिम श्राद्ध है अगर अपने पित्रों को सच्ची श्रद्धांजलि देनी है तो 21तारीख को सब काम छोड़कर इस आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होना है तभी हमारे पित्रों को सच्ची श्रद्धांजलि मिलेगी।मुरैना में होने वाले जन आंदोलन में किसान सभा के अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष किसान नेता राकेश टिकैत साहब,बादल सरोज जी, वृंदा करात जी पूर्व सांसद और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी जी एवं कई अन्य नेता शामिल होंगे।इस यात्रा में सभी समाज के लोग ,छोटे, बड़े, बुजुर्ग माता बहने एवं जनसंगठन कांग्रेस, माकपा, बसपा, आप, सपा, भीम आर्मी, एवं सभी संगठन शामिल है।

मोदी का विपक्ष पर करारा प्रहार कहा – मैं शिव भक्त हूं, जहर निगल लेता हूं: जनता ही मेरी भगवान, आत्मा की आवाज यहां नहीं तो कहां निकलेगी

Modi’s strong attack on the opposition said – I am a Shiv Bhakt, I swallow poison: The public is my God, if not here, then where will the voice of the soul come out पीएम नरेंद्र मोदी ने असम के दरांग में कहा- जब भारत सरकार ने भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिया था, उस दिन कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था- मोदी, नाचने-गाने वालों को भारत रत्न दे रहा है। मैं भगवान शिव का भक्त हूं, सारा जहर निगल लेता हूं, मुझे कितनी भी गालियां दें। लेकिन बेशर्मी के साथ जब किसी और का अपमान होता है, तो मुझसे रहा नहीं जाता है। पीएम बोले- मेरे लिए तो मेरी जनता ही भगवान है। मेरे भगवान के पास जाकर मेरी आत्मा की आवाज वहां नहीं निकलेगी तो कहां निकलेगी, यही मेरे मालिक हैं, पूजनीय हैं, 140 करोड़ देशवासी मेरा रिमोट कंट्रोल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के असम दौरे पर हैं। रविवार को उन्होंने दरांग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जीएनएम स्कूल और बीएससी नर्सिंग कॉलेज का उद्घाटन और शिलान्यास किया। जिसकी लागत 6300 करोड़ है। शनिवार को गुवाहाटी पहुंचे पीएम ने खानापारा में पशु चिकित्सा मैदान में महान गायक भूपेन हजारिका की विशेष श्रद्धांजलि सभा में भी मौजूद रहे।

जनता से 8 साल की देरी का हिसाब कौन देगा? जीएसटी सुधार पर उठे सवाल

How can what was wrong yesterday be right today? What does the Modi government want to hide from the public on the GST controversy? Modi government a GST controversy आखिर 8 साल बाद भी मोदी सरकार माफी क्यों नहीं मांग रही? जनता से क्या छिपाना चाहती है? चिदंबरम ने पूछा – जो कल गलत था, आज सही कैसे?जीएसटी दरों में कमी के बाद भी मोदी सरकार ने जनता से माफी नहीं मांगी। आखिर सरकार क्या छिपाना चाहती है? जानिए 8 साल की देरी, विवाद और सुधार की अधूरी कहानी। यदि टूथपेस्ट, हेयर आयल, मक्खन, शिशु नैपकिन, पेंसिल, नोटबुक, ट्रैक्टर, स्प्रिंकलर आदि पर पांच फीसद जीएसटी आज अच्छा है, तो पिछले आठ वर्षों में यह बुरा क्यों था? लोगों को आठ वर्षों तक अत्यधिक टैक्स क्यों चुकाना पड़ा? आखिरकार केंद्र सरकार को बात समझ में आ गई। तीन सितंबर, 2025 को सरकार ने कई वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरों को तर्कसंगत बना कर कम किया। कर संरचना अब उस अच्छे और सरल कर के करीब है, जिसकी वकालत पिछले आठ वर्षों से कई राजनीतिक दल, व्यवसायी, संस्थान और व्यक्ति (जिनमें मैं भी शामिल हूं) करते रहे हैं। अगस्त, 2016 में जब संसद में संविधान (122वां संशोधन) विधेयक पर बहस हुई थी, तब मैंने राज्यसभा में भाषण दिया था। उसके कुछ अंश इस प्रकार हैं अडिग रुख Modi government a GST controversy‘मुझे खुशी है कि वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि यूपीए सरकार ने ही सबसे पहले आधिकारिक तौर पर जीएसटी लागू करने के अपने इरादे का एलान किया था। 28 फरवरी, 2005 को बजट भाषण के दौरान लोकसभा में इसकी घोषणा की गई थी। ‘महोदय, चार प्रमुख मुद्दे हैं… Modi government a GST controversy‘अब मैं विधेयक के सबसे महत्त्वपूर्ण भाग पर आता हूं… यह कर की दर के बारे में है। मैं अभी मुख्य आर्थिक सलाहकार की रपट के कुछ अंश पढूंगा… कृपया याद रखें कि हम एक अप्रत्यक्ष कर पर विचार कर रहे हैं। अप्रत्यक्ष कर की परिभाषा के अनुसार, यह एक प्रतिगामी कर है। कोई भी अप्रत्यक्ष कर अमीर और गरीब दोनों पर समान रूप से लागू होता है… मुख्य आर्थिक सलाहकार की रपट कहती है: ‘उच्च आय वाले देशों में औसत जीएसटी दर 16.8 फीसद है भारत जैसी उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में यह औसत 14.1 फीसद है।’ इस तरह दुनिया भर में 190 से अधिक देशों में किसी न किसी रूप में जीएसटी लागू है। यह 14.1 फीसद से 16.8 फीसद के बीच है।‘हमें करों को कम रखना होगा। साथ ही, हमें केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के मौजूदा राजस्व की रक्षा करनी होगी। …हम ‘राजस्व तटस्थ दर’ यानी आरएनआर के जरिए यह करते हैं। ‘मुख्य आर्थिक सलाहकार राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और अन्य विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद 15 फीसद से 15.5 फीसद के आरएनआर पर पहुंचे और फिर सुझाव दिया कि मानक दर 18 फीसद होनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी ने 18 फीसद कोई हवा से नहीं निकाला है। यह आपकी रपट से निकला है। ‘…किसी को तो जनता के लिए आवाज उठानी ही होगी। जनता की ओर से, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस दर को मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा अनुशंसित दर पर ही रखें, यानी मानक दर 18 फीसद से अधिक नहीं होनी चाहिए रपट के पैरा 29, 30, 52 और 53 पढ़ें। इसमें स्पष्ट रूप से तर्क दिया गया है… Modi government a GST controversy अठारह फीसद की मानक दर केंद्र और राज्यों के राजस्व की रक्षा करेगी, यह पर्याप्त होगी, मुद्रास्फीति-रोधी होगी, कर चोरी से बचाएगी और भारत के लोगों को स्वीकार्य होगी… यदि आप वस्तुओं और सेवाओं पर 24 फीसद या 26 फीसद कर लगाने जा रहे हैं, तो फिर जीएसटी विधेयक लाने की क्या आवश्यकता है? ‘अंतत: आपको कर विधेयक में एक दर रखनी ही होगी। मैं अपनी पार्टी की ओर से स्पष्ट रूप से मांग करता हूं कि जीएसटी की मानक दर, जो 70 फीसद से अधिक वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होती है, वह अठारह फीसद से अधिक नहीं होनी चाहिए और निम्न एवं अन्य दर अठारह फीसद के आधार पर तय की जा सकती है। आठ वर्ष की पीड़ा Modi government a GST controversyवर्ष 2016 में भी मैंने यही बात कही थी, जो आज कह रहा हूं। मुझे खुशी है कि सरकार इस विचार पर सहमत हो गई कि दरों को युक्तिसंगत और कम किया जाना चाहिए। हालांकि, शुरुआत में सरकार का तर्क था कि अठारह फीसद की सीमा से राजस्व का भारी नुकसान होगा, खासकर राज्य सरकारों को। यह चिंता का एक बड़ा कारण था। आज दो कर दरें पांच फीसद और अठारह फीसद हैं! केंद्र के पास कर राजस्व बढ़ाने के कई तरीके हैं; अगर राज्य सरकारों को राजस्व का नुकसान होता है, तो सही कदम यही होगा कि उन्हें मुआवजा दिया जाए पिछले आठ वर्षों में सरकार ने उपभोक्ताओं से ज्यादा से ज्यादा पैसा वसूलने के लिए कई जीएसटी दरों का इस्तेमाल किया। पहले वर्ष (जुलाई 2017 से मार्च 2018) में सरकार ने लगभग 11 लाख करोड़ रुपए एकत्र किए। वर्ष 2024-25 में लगभग 22 लाख करोड़ रुपए संग्रहित किए गए। उपभोक्ताओं द्वारा अपनी मेहनत से कमाया गया पैसा सरकार ने जीएसटी के माध्यम से छीन लिया- इसे सही मायने में और उपहासपूर्वक गब्बर सिंह टैक्स कहा गया। उच्च जीएसटी दरें कम खपत और बढ़ते घरेलू कर्ज के कारणों में से एक थीं। यह बुनियादी अर्थशास्त्र है कि करों में कमी से खपत को बढ़ावा मिलेगा। यदि टूथपेस्ट, हेयर आयल, मक्खन, शिशु नैपकिन, पेंसिल, नोटबुक, ट्रैक्टर, स्प्रिंकलर आदि पर पांच फीसद जीएसटी आज अच्छा है, तो पिछले आठ वर्षों में यह बुरा क्यों था? लोगों को आठ वर्षों तक अत्यधिक कर क्यों चुकाना पड़ा? अभी बहुत कुछ बाकीदरों में कमी तो बस शुरुआत है। अभी और भी बहुत कुछ करना बाकी है। सरकार को चाहिए कि- राज्यों, उत्पादकों और उपभोक्ताओं को एक ही जीएसटी दर (जरूरत पड़ने पर और छूट के साथ) के लिए तैयार करे; अधिनियमों और नियमों की धाराओं के लिए प्रचलित अस्पष्ट भाषा को खत्म करे; उन्हें सरल भाषा में फिर से लिखे; सरल फार्म और रिटर्न निर्धारित करे, फार्म भरने की आवृत्ति में तर्कसंगत कमी करे; कानून के अनुपालन को सरल बनाए: किसी छोटे व्यापारी या दुकानदार … Read more

जो खून बहना था वह बह गया, पैसे से लोगों की सोच बदलने गए मोदी : कांग्रेस नेता

The blood that was to be shed has been shed, Modi went to change people’s thinking with money: Congress leader नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर को मणिपुर के दौरे पर हैं। यह उनका 2023 की जातीय हिंसा के बाद पहला दौरा है। इस यात्रा को राज्य में शांति और विकास को मजबूत करने के लिए अहम माना जा रहा है। पीएम मोदी ने चुराचांदपुर और इंफाल में कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया। वहीं इस दौरे को लेकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।कांग्रेस बोली-बहुत देर हो चुकी हैCongress leader Udit Raj ने बयान में पीएम मोदी के दौरे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले ही कुकी और मैतेई दोनों समूह पीएम के खिलाफ विरोध जता रहे हैं और अब यह यात्रा ‘हीलिंग टचÓ नहीं मानी जाएगी। Congress leader Udit Raj का कहना है कि एक समय था जब पीएम जाकर बहुत कुछ कर सकते थे, लेकिन अब बहुत खून बह चुका है और सिर्फ 3 घंटे की यात्रा से कुछ नहीं होगा। वह भले ही कुछ परियोजनाओं की घोषणा करें लेकिन पैसों से लोगों की सोच नहीं बदली जा सकती। 2023 में भड़की थी जातीय हिंसाबता दें कि 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा भड़की थी, जिसमें कम से कम 260 लोगों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हुए थे। इसके बाद से ही राज्य में तनाव और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है. पीएम मोदी का यह दौरा लंबे समय से प्रतीक्षित था और इसे जनता और राजनीतिक दल दोनों करीब से देख रहे हैं। चुराचांदपुर और इंफाल ऐसे इलाके हैं, जहां हिंसा का असर सबसे ज्यादा रहा और अब यहां नए विकास कार्यों के जरिए माहौल को सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। दौरे का महत्व और आगे की राहविशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी का यह दौरा मणिपुर में शांति और पुनर्निर्माण के लिए एक बड़ा संदेश है। यह सिर्फ परियोजनाओं का उद्घाटन नहीं बल्कि राज्य के लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश भी है. हालांकि विपक्ष इसे ‘बहुत देर से उठाया गया कदम बता रहा है। अब देखना होगा कि इस यात्रा से क्या सकारात्मक असर होता है और क्या यह मणिपुर में स्थायी शांति और विकास

कांग्रेस का बड़ा सियासी धमाका, बीजेपी-बीएसपी के नेताओं ने जीतू पटवारी कि मौजूदगी में कांग्रेस का दामन थाम

Big political by Congress, BJP-BSP leaders joined Congress in the presence of Jeetu Patwari ग्वालियर। Big political by Congress ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति में नए समीकरण बनने लगे हैं। रविवार को ग्वालियर ग्रामीण से बीजेपी और बीएसपी के कई नेता व कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हुए। इस कदम ने कांग्रेस के संगठन को नई ताकत और सियासी परिदृश्य को नया मोड़ दिया है। ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा की राजनीति ने रविवार को नया मोड़ ले लिया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) से जुड़े कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मौजूदगी में कांग्रेस का दामन थाम लिया। इस मौके पर पटवारी ने कहा – कांग्रेस परिवार में सभी का स्वागत और हृदय से अभिनंदन करता हूं। लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई, हम सब मिलकर लड़ेंगे। ग्वालियर-चंबल: सत्ता की कुंजी वाला क्षेत्र Big political by Congress मध्यप्रदेश की राजनीति में ग्वालियर-चंबल अंचल हमेशा निर्णायक रहा है। यहाँ की दिशा ही कई बार सत्ता की दशा तय करती आई है। बीजेपी और बीएसपी से कांग्रेस में हुआ यह जुड़ाव स्थानीय और राज्य स्तरीय समीकरणों को गहराई से प्रभावित करेगा। लोकतंत्र बनाम सत्ता की राजनीति Big political by Congress पटवारी का वक्तव्य यह स्पष्ट करता है कि कांग्रेस केवल सत्ता की लड़ाई नहीं लड़ रही, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए संघर्षरत है। मौजूदा हालात में जब विपक्ष पर दबाव और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, कांग्रेस ने खुद को लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षक बताने की कोशिश की है। नए कार्यकर्ता, नई ऊर्जा Big political by Congress किसी भी राजनीतिक दल की ताकत उसके कार्यकर्ता होते हैं। बीजेपी और बीएसपी छोड़कर कांग्रेस में आए इन कार्यकर्ताओं से न केवल संगठन को मजबूती मिलेगी बल्कि गांव-गांव में कांग्रेस का जनाधार भी और गहराएगा। यह बदलाव कार्यकर्ताओं की नाराजगी और जनता की नई उम्मीदों दोनों को दर्शाता है। बीजेपी और बीएसपी को झटका Big political by Congress ग्वालियर ग्रामीण में यह घटना बीजेपी और बीएसपी के लिए बड़ा झटका है। यहाँ के जातीय और सामाजिक समीकरण अक्सर चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। कांग्रेस में हुए इस जुड़ाव से विपक्षी दलों का परंपरागत वोट बैंक प्रभावित होना तय माना जा रहा है। जनता की प्राथमिकताएँ बदल रही हैं Big political by Congress महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों से जूझती जनता अब ऐसे नेतृत्व की तलाश में है, जो सच्चे अर्थों में उनकी आवाज बने। कांग्रेस में शामिल हुए नए नेता और कार्यकर्ता इस उम्मीद को मजबूत कर सकते हैं। राजनीतिक संदेश स्पष्ट Big political by Congress यह सदस्यता अभियान केवल दल-बदल की औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है जनता बदलाव चाहती है। ग्वालियर ग्रामीण की यह तस्वीर प्रदेश में नई राजनीति की पृष्ठभूमि तैयार करती दिख रही है। ग्वालियर ग्रामीण का यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए नई ऊर्जा लेकर आया है। वहीं बीजेपी और बीएसपी के लिए यह चेतावनी है कि जनता अब उनके पारंपरिक वादों से आगे बढ़कर लोकतांत्रिक मूल्यों और वास्तविक मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है।कांग्रेस का बढ़ता परिवार प्रदेश की राजनीति में नई करवट का संकेत है—बदलाव अब सिर्फ शुरुआत है, असली लड़ाई आगे है। ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति में हलचल, जब बीजेपी और बीएसपी के कई नेताओं ने कांग्रेस का दामन थामा। जीतू पटवारी ने कहा – लोकतंत्र और संविधान की रक्षा ही अब असली राजनीति है।

जनगणना से पहले कांग्रेस ने फिर आदिवासियों को बनाया मुद्दा, गैर हिंदू बताने का प्रयास

Before the census, Congress again made tribals an issue, tried to declare them non-Hindus भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी समुदाय की अपनी अलग भूमिका और महत्व होने से कांग्रेस और भाजपा के बीच उन्हें लुभाने की जंग नई नहीं है। यह समुदाय जिसके साथ चलता है, सत्ता उसी को मिलती है। पिछले दो दशक से आदिवासी समुदाय भाजपा के साथ है, अलबत्ता 2018 में कांग्रेस की ओर आदिवासी समाज का झुकाव होने से कमल नाथ को सरकार में आने का मौका जरूर मिल गया था। यही वजह है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हो रही जनगणना को लेकर कांग्रेस सक्रिय हो गई है। कांग्रेस ने आदिवासी समुदाय से अपील की है कि जनगणना में धर्म के कालम में वह स्वयं को हिंदू न बताएं। इधर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे हिंदुओं का अपमान बताया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयान ‘गर्व से कहो हम आदिवासी हैं, हिंदू नहीं’ के बाद प्रदेश का सियासी माहौल गरमा गया है। भाजपा के आदिवासी नेताओं ने सिंघार के बयान को आदिवासी विरोधी बताया है। उन्होंने राहुल गांधी के बयानों को आधार बनाकर कहा कि कांग्रेस की संस्कृति ही सनातन धर्म के विरोध की रही है। अब जनगणना के बहाने कांग्रेस हिंदू ही नहीं, बल्कि समाज का बंटवारा करना चाहती है। यह बयान हिंदू समाज के साथ ही आदिवासी समुदाय को भी कमजोर बनाने की साजिश है। 2028 चुनाव को ध्यान में रखकर छेड़ी बहसबता दें कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को किसी एसटी आरक्षित सीट पर जीत नहीं मिली। कांग्रेस ने आदिवासी बनाम हिंदू बहस ही वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर छेड़ी है, ताकि उसे राजनीतिक लाभ मिल सके। उमंग सिंघार का बयान ऐसे समय पर आया है, जब सुप्रीम कोर्ट में लंबित ओबीसी आरक्षण के मामले में कांग्रेस ने सरकार का साथ देकर एक तरह से अपने हथियार डाल दिए हैं। उसने ओबीसी आरक्षण के मामले में सफलता और असफलता का अनुमान लगाए बिना यह कदम उठाकर बड़ा जोखिम ले लिया है। कांग्रेस की कोशिश बन सकती है राजनीतिक जोखिमजनगणना में आदिवासी समुदाय को अलग से पहचान दिलाने की कांग्रेस की यह कोशिश भी राजनीतिक जोखिम बन सकती है। कांग्रेस के पास आदिवासी समुदाय के बीच जाकर बताने के लिए फिलहाल कुछ खास नहीं है, वहीं द्रौपदी मुर्मु को राष्ट्रपति पद तक पहुंचाने का श्रेय भाजपा अपने खाते में रखती है। साथ ही पेसा एक्ट जैसी कवायद भी भाजपा सरकार कर चुकी है। देश के विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के अनुषांगिक संगठन आदिवासी समुदायों के बीच मतांतरण रोकने के साथ उनके कल्याण के लिए कार्यक्रमों को लगातार जारी रखे हुए हैं। संघ की कोशिश आदिवासियों को मुख्य धारा में लाने कीसंघ की कोशिश है कि रामायण और महाभारत काल के तमाम उदाहरण के माध्यम से आदिवासियों को उनके हिंदू होने का बोध कराते हुए मुख्य धारा में लाया जाए। इधर कांग्रेस के बयान इन कोशिशों के लिए चुनौती खड़ी करते हैं। मामला संघ के प्रयासों से जुड़ा है और सीधे सत्ता के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए भाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रही है।

झंडा विवाद से भड़की राजनीति: बैतूल में कांग्रेस का पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन

Politics flared up due to flag controversy: Congress protested against police administration in Betul हरिप्रसाद गोहेआमला ! ज़िला कांग्रेस कमेटी बैतूल के बैनर तले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शनिवार जिला उपाध्यक्ष कांग्रेस छन्नू बेले की अगुवाई में थाना आमला पहुंच जिला पुलिस अधीक्षक बैतूल के नाम थाना प्रभारी आमला को ज्ञापन सौंपा सौंपे ज्ञापन के माध्यम से बताया गया जिला कांग्रेस कमेटी नवागत अध्यक्ष निलय डागा के जुलूस में लगाए जा रहे झंडे लगाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा कांग्रेस कार्यकर्ता के साथ मार पिटाई की गई थी पुलिस प्रशाशन द्वारा शिकायत करने के बाद भी मोनू बड़ोनिया तथा अन्य भाजपा कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज न करते हुए उल्टे जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष निलय डागा एवं अन्य कांग्रेसी कार्यकर्ताओं पर बिना विवेचना किए मामला दर्ज कर दिया है। जिसे लेकर बैतूल जिले के कांग्रेसी कार्यकर्ता एवं आम जन में आक्रोश देख जा रहा है। जिला उपाध्यक्ष कांग्रेस छन्नू बेले ने बताया सत्ताधारी भाजपा द्वारा सत्ता का दुरुपयोग करते हुए कांग्रेसी कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की है की शीघ्र ही कोतवाली थाना बैतूल में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष निलय डागा सहित अन्य कार्यकर्ताओं पर लगाया गया झूठा प्रकरण वापस लिया जाए अन्यथा बाध्य होकर संपूर्ण जिले में आंदोलन करने बाध्य होना पड़ेगा। जिससे होने वाली संभावित क्षति के लिए शासन प्रशासन जवाबदार रहेगा। ज्ञापन सौंपते समय प्रमुख रूप से कांग्रेस नेता छन्नू बेले ,नासीर खान, चन्द्र शेखर सिंह चंदेल,जितेंद्र शर्मा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

Independence day: प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में मना आजादी का जश्न,PCC चीफ बोले- प्रेम,अहिंसा, न्याय हमारी पहचान

Independence day: Independence day celebrated in state Congress office, PCC chief said- love, non-violence, justice are our identity मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में 15 अगस्त के अवसर पर जश्न मनाया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ध्वजारोहण कर प्रदेशवासियों को 79वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होने कहा कि आजादी सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि विचार और मूल्यों की यात्रा है। कांग्रेस की विचारधारा, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और संविधान व मानवता के सिद्धांतों पर आधारित है, देश को एकता, भाईचारा और शांति की दिशा देती रही है। उन्होंने महान नेताओं के बलिदानों को याद करते हुए कहा कि प्रेम, अहिंसा और न्याय की परंपरा गांधीजी से लेकर राहुल गांधी तक कांग्रेस की पहचान रही है। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, संगठन महामंत्री डॉ. संजय कामले, वरिष्ठ नेता मानक अग्रवाल, राजीव सिंह, जेपी धनोपिया, रामेश्वर नीखरा महेंद्र जोशी, महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष विभा पटेल, भोपाल शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, सहित कई वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। विश्व शांति हमारी विचारधाराएमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ध्वजारोहण के बाद पार्टी का सन्देश दिया। उन्होंने कहा, ’78 साल की आजादी की यात्रा में कांग्रेस की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। कांग्रेस राजनैतिक दल के साथ विचारधारा है। वसुधैव कुटुम्बकम, विश्व शांति हमारी विचारधारा है। संविधान और मानवता हमारी विचारधारा है। भारत विश्वगुरु जब हम प्रथम आएंगे तब कांग्रेस की विचारधारा नेतृत्व करेगी।’ देश की आजादी में कांग्रेस ने योगदान दियाउन्होंने आगे कहा, ‘देश की आजादी में तो कांग्रेस ने योगदान दिया ही है, साथ ही एकता और अखंडता में भी योगदान दिया। संविधान, वोट के अधिकार को बचाने की कांग्रेस लड़ाई लड़ेगी। संविधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता बचाने का हमारा संकल्प है। देश में गरीब और गरीब होता जा रहा है। बेरोजगारी, नशा, महिला सुरक्षा, बढ़ती महंगाई देश के लिए चुनोती है। जातिगत जनगणना, गरीबों की पहचान करना हमारा उद्देश्य। बीजेपी की सरकार 27% ओबीसी आरक्षण को रोकने कोर्ट में वकील भेज रही है। पाकिस्तान के खिलाफ देश एकजुट हुआ था, लेकिन निराशा हाथ लगी।

जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश में नकली कृषि उत्पादों से किसानों को हो रहे भारी नुकसान पर चिंता व्यक्त की, सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की

Jeetu Patwari expressed concern over the huge losses being suffered by farmers in Madhya Pradesh due to fake agricultural products, demanded immediate action from the government भोपाल ! मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य में नकली खाद, नकली बीज और नकली कीटनाशकों की बिक्री पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जिससे किसानों को अभूतपूर्व वित्तीय संकट और फसल हानि का सामना करना पड़ रहा है। पटवारी ने आज मोहन सरकार पर किसानों के प्रति उदासीनता और इस गंभीर मुद्दे को रोकने में विफलता का आरोप लगाया। पटवारी ने कहा,मध्य प्रदेश का किसान पहले से ही मौसम की मार और बढ़ती लागत से जूझ रहा है। ऐसे में नकली खाद, बीज और कीटनाशक उसकी कमर तोड़ने का काम कर रहे हैं। बाजार में धड़ल्ले से बिक रहे है अमानक उत्पाद किसानों की मेहनत और पूंजी को बर्बाद कर रहे हैं, जिससे उनकी आय प्रभावित हो रही है और वे कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं।” प्रमुख बिंदु जो पटवारी ने उठाए:व्यापकता और प्रमाण:पिछले कुछ महीनों में, राज्य के विभिन्न जिलों से नकली उत्पादों की बिक्री और उपयोग के कारण किसानों को हुए नुकसान की अनगिनत शिकायतें मिली हैं। मंडला, सिवनी, रायसेन, सीहोर, विदिशा, और हरदा जैसे जिलों में किसानों ने स्पष्ट रूप से बताया है कि नकली बीज बोने के बाद अंकुरण नहीं हुआ, नकली खाद से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हुई, और नकली कीटनाशकों ने कीटों पर कोई असर नहीं दिखाया, जिससे उनकी फसलें तबाह हो गईं। आर्थिक नुकसान का अनुमान:प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, नकली उत्पादों के कारण राज्य के किसानों को अब तक करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है जो छोटे और सीमांत किसानों के लिए विनाशकारी है। सरकार की निष्क्रियता: जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से इस समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। “निरीक्षण, जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। स्वयं केंद्र के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी सरकार को आईना दिखाते हुए नकली खाद ,नकली बीज ,नकली कीटनाशक ,के विषय को उठाया इसके बाबजूद सरकार ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। किसानों का शोषण:नकली उत्पादों की बिक्री न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि किसानों के मनोबल को भी तोड़ रही है। कई किसान अपनी जमीन बेचने या सूदखोरों से कर्ज लेने पर मजबूर हो रहे हैं, जिससे आत्महत्या के मामले बढ़ने का भी खतरा है।पटवारी ने चेतावनी दी,“यदि सरकार ने जल्द ही इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया, तो कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ मिलकर राज्यव्यापी आंदोलन करेगी। हम किसानों को उनके हक से वंचित नहीं होने देंगे।

भिंड में कांग्रेस कार्यालय के लिए भूमि उपलब्ध कराने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

Memorandum submitted to the collector to provide land for Congress office in Bhind भिण्ड। जिला कांग्रेस कमेटी भिण्ड द्वारा नगर निगम सीमा के अंतर्गत कांग्रेस कार्यालय भवन हेतु उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने की मांग को लेकर कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मानसिंह कुशवाह के नेतृत्व में सौंपा गया। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एक पुराना राजनीतिक संगठन है, लेकिन भिण्ड जिले में कार्यालय भवन के अभाव में संगठन के कार्यक्रमों का सुचारू संचालन संभव नहीं हो पा रहा है। कार्यालय के लिए भूमि की अत्यंत आवश्यकता है जिससे भवन निर्माण कर कार्यक्रम संचालित हो सके।ज्ञापन में मांग की गई कि नगर निगम भिण्ड की सीमा के अंतर्गत उपयुक्त भूमि आवंटन की जावे । इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष मानसिंह कुशवाह के अलावा शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राधेश्याम शर्मा,प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव धर्मेंद्र पिंकी भदोरिया, प्रदेश सचिव प्रमोद चौधरी, पूर्व जिला कांग्रेस के अध्यक्ष जय श्री राम बघेल, उपाध्यक्ष वीरेंद्र यादव, सेवादल अध्यक्ष संदीप मिश्रा, महिला कांग्रेस अध्यक्ष रेखा भदोरिया ,नगर अध्यक्ष संतोष त्रिपाठी आदि नेता उपस्थित रहे।

रीवा-मऊगंज में खाद-बीज और बिजली की समस्या से जूझ रहे किसान: सुखेन्द्र सिंह

Farmers are facing problems of fertilizers, seeds and electricity in Rewa-Mauganj: Sukhendra Singh रीवा ! मऊगंज के पूर्व विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव सुखेन्द्र सिंह बन्ना ने कहा कि पूरे मऊगंज एवं रीवा जिले का किसान खाद बीज एवं बिजली की समस्या से जूझ रहा है. पूरा प्रशासनिक अमला खाद बीज की कालाबाजारी को बढ़ावा देकर वसूली में व्यस्त है और जिले का अन्नदाता पूरे भ्रष्ट सिस्टम से त्रस्त है. श्री सिंह ने पत्रकारवार्ता के दौरान उक्त आरोप लगाए.उन्होने कहा कि स्मार्ट मीटर के नाम पर बिजली विभाग की लूट से किसान एवं जनता परेशान हैं. बारिश के शुरुआती दौर में ही पूरे जिले में बाढ़ जैसे हालत निर्मित हुए यह भी गंभीर विषय है. पूरा प्रशासनिक तंत्र केवल खानापूर्ति करने में लगा है जमीन हकीकत में पूरा प्रशासनिक तंत्र फेल है. पूर्व विधायक ने शासन प्रशासन को सख्त लहजे में आगाह करते हुए कहा है कि जल्द खाद बीज बिजली की समस्या का शीघ्र निदान नहीं हुआ तो कांग्रेस पार्टी किसानों एवं आम जनता को न्याय दिलाने के लिए उग्र आंदोलन करेगी.

MP में कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने एक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की, विदिशा बनेगा कांग्रेस की प्रयोगशाला

भोपाल  मध्यप्रदेश कांग्रेस कमजोर क्षेत्रों में विदिशा मॉडल लागू करेगी, जिसके तहत 650 पंचायतों और वार्डों में समितियां वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन और इलेक्शन मैनेजमेंट का काम देखेंगी। यह मॉडल उन क्षेत्रों में लागू होगा जहां कांग्रेस पिछले 20 सालों से सत्ता से बाहर है और संगठन कमजोर है। इस मॉडल में एक्सपर्ट्स कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर काम करेंगे और 30 जून तक वेरिफिकेशन का काम पूरा किया जाएगा। कार्यकर्ताओं के साथ टिफिन मीटिंग करेंगे पटवारी इसके बाद जुलाई में जीतू पटवारी कार्यकर्ताओं के साथ टिफिन मीटिंग करेंगे और फिर भोपाल और नर्मदापुरम में भी यह मॉडल शुरू किया जाएगा। मध्यप्रदेश में कांग्रेस पिछले 20 सालों से सत्ता से बाहर है, सिर्फ 15 महीनों को छोड़कर पार्टी लगातार चुनाव हार रही है। 2020 में हुए दलबदल के बाद कई क्षेत्रों में कांग्रेस का संगठन बेहद नाजुक स्थिति में है। अब कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने के लिए विदिशा मॉडल का सहारा ले रही है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने संगठनात्मक रूप से सबसे कमजोर जिले विदिशा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। पहले जानिए क्या है विदिशा मॉडल पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने संगठनात्मक रूप से सबसे कमजोर जिले विदिशा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए 70 एक्सपर्ट्स को चुनकर विदिशा जिले की पांचों विधानसभा सीटों के हर ग्राम पंचायत और वार्ड में भेजा गया। एक्सपर्ट्स ने पंचायत और वार्ड में सबसे पहले कांग्रेस की कमजोरी की वजहों को लेकर रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद पंचायत और वार्ड समिति के लिए वैचारिक रूप से मजबूत कार्यकर्ताओं के नाम छांटे। बातचीत के बाद पंचायत और वार्ड समिति का गठन किया। इन समितियों के सदस्य अब गांव और वार्ड में कांग्रेस के लिए काम करेंगे। फर्जी वोटर्स की पहचान से लेकर वोटरलिस्ट वेरिफिकेशन और चुनाव की तैयारी में ये समिति काम करेगी। विदिशा जिले में समितियों के गठन के बाद अब इस मॉडल पर प्रदेश के दूसरे जिलों में काम किया जाएगा। समितियों का डेटा ऑनलाइन हुआ दर्ज कांग्रेस ने विदिशा जिले की पंचायत और वार्ड समितियों का गठन करने के बाद ऑनलाइन डेटा अपलोड भी किया है। इसमें समिति के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर सहित तमाम जानकारी ऑनलाइन दर्ज की गई है। अब इन समितियों के वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर आगे संगठन के काम को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित किया जाएगा। वेरिफिकेशन का काम 30 जून तक चलेगा विदिशा जिले की पंचायतों और वार्डों में बनाई गई समितियों के वेरिफिकेशन का काम 30 जून तक चलेगा। इसके लिए पीसीसी में एक कॉल सेंटर बनाया जा रहा है। जहां से सभी समितियों के अध्यक्ष सहित तमाम सदस्यों से टेलीफोनिक बातचीत कर सत्यापन किया जाएगा। टिफिन मीटिंग करेंगे जीतू पटवारी विदिशा जिले में गठित हुई पंचायत और वार्ड समिति के अध्यक्षों के साथ पीसीसी चीफ जीतू पटवारी जुलाई के महीने में टिफिन मीटिंग करेंगे। विधानसभा वार होने वाली टिफिन मीटिंग में सभी कार्यकर्ता अपने-अपने घर से भोजन बनवाकर टिफिन लेकर आएंगे और एक जगह पीसीसी चीफ सभी अध्यक्षों के साथ बैठकर चर्चा करेंगे और भोजन करेंगे। अब भोपाल और नर्मदापुरम में होगा काम शुरू विदिशा जिले के बाद कांग्रेस अब इस मॉडल पर भोपाल और नर्मदापुरम संभाग की उन विधानसभाओं में इसपर काम शुरू करेगी। जहां कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है। कांग्रेस का मानना है कि इन दोनों संभागों में कांग्रेस की स्थिति सुधारने की सबसे ज्यादा जरूरत है। विदिशा से हुई पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत कांग्रेस के संगठन प्रभारी संजय कामले ने बताया- कांग्रेस पार्टी ने बहुत महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट के लिए विदिशा जिले को चुना था। पार्टी में इस बात की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी कि संगठन में किस तरह से संगठन में बदलाव करना चाहिए। कैसे कांग्रेस पार्टी की जमीनी स्तर पर शुरुआत कर सकते हैं। हमारे अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पर जोर दिया। 70 एक्सपर्ट्स को काम पर लगाया इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए 70 एक्सपर्ट्स को चुनकर विदिशा जिले की पांचों विधानसभा सीटों के हर ग्राम पंचायत और वार्ड में भेजा गया। एक्सपर्ट्स ने पंचायत और वार्ड में सबसे पहले कांग्रेस की कमजोरी की वजहों को लेकर रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद पंचायत और वार्ड समिति के लिए वैचारिक रूप से मजबूत कार्यकर्ताओं के नाम छांटे गए। बातचीत के बाद पंचायत और वार्ड समिति का गठन किया गया। इन समितियों के सदस्य अब गांव और वार्ड में कांग्रेस के लिए काम करेंगे। ऑनलाइन डेटा भी किया अपलोड फर्जी वोटर्स की पहचान से लेकर वोटरलिस्ट वेरिफिकेशन और चुनाव की तैयारी में ये समिति काम करेगी। विदिशा जिले में समितियों के गठन के बाद अब इस मॉडल पर प्रदेश के दूसरे जिलों में काम किया जाएगा। कांग्रेस ने विदिशा जिले की पंचायत और वार्ड समितियों का गठन करने के बाद ऑनलाइन डेटा अपलोड भी किया है। इसमें समिति के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर सहित तमाम जानकारी ऑनलाइन दर्ज की गई है। अब इन समितियों के वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर आगे संगठन के काम को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित किया जाएगा।

भोपाल कांग्रेस ने बुलाई बड़ी अहम बैठक, चले लात-घूंसे, जिला अध्यक्ष की दावेदारी को लेकर टकराव

 भोपाल   कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत मंगलवार को कांग्रेसियों में अचानक मारपीट शुरू हो गई। असल में एआईसीसी के पर्यवेक्षक भोपाल आए हुए हैं। वे यहां विधानसभा स्तर पर बैठकें कर जिलाध्यक्ष के दावेदारों से चर्चा कर रहे हैं। मंगलवार की शाम को भी यही कम चल रहा था, इसी बीच कांग्रेसी भिड़ गए। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो खूब वायरल हुआ।  बताया जा रहा कि यह घमासान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और कांग्रेस नेता साजिद अली के समर्थकों के बीच हुआ। दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस घटना ने कांग्रेस की संगठनात्मक एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बैठक में एआईसीसी पर्यवेक्षक यशोमति ठाकुर सहित कई बड़े और स्थानीय नेता मौजूद थे, जो भोपाल जिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा में व्यस्त थे। एक दूसरे पर किया केस घटना के बाद दोनों पक्षों के कार्यकर्ता एमपी नगर थाने पहुंचे और एक-दूसरे के खिलाफ शिकायती आवेदन दिए। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतें दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, यह हंगामा कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और कांग्रेस नेता साजिद अली के समर्थकों के बीच हुआ. दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए, जिसके बाद स्थिति बेकाबू हो गई. मारपीट और गाली-गलौज की इस घटना ने कांग्रेस की संगठनात्मक एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. बैठक में AICC पर्यवेक्षक यशोमति ठाकुर सहित कई वरिष्ठ और स्थानीय नेता मौजूद थे, जो भोपाल जिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा में व्यस्त थे. इस दौरान बाहर हुए इस हंगामे ने पार्टी के लिए शर्मिंदगी की स्थिति पैदा कर दी.  घटना के बाद दोनों पक्षों के कार्यकर्ता एमपी नगर थाने पहुंचे और एक-दूसरे के खिलाफ शिकायती आवेदन दिए. पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतें दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. इस घटना पर बीजेपी ने भी कांग्रेस पर तंज कसा. बीजेपी के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने X पर लिखा, “कांग्रेस की बैठक या कुश्ती प्रतियोगिता? भोपाल में कांग्रेस का संगठन सृजन अब संघर्ष सृजन बन गया है. जिला कांग्रेस की बैठक में आरिफ मसूद और साजिद अली के समर्थकों के बीच बहस नहीं, सीधे मारपीट हुई. आरोप लगा कि साजिद अली ने चुनाव में BJP का समर्थन किया- जवाब मिला, “बैठक में देशभक्तों की जरूरत नहीं.” फिर क्या था — बहस, धक्का-मुक्की और कुर्सियां चलने लगीं! अब समझ आया कि कांग्रेस में मन की बात नहीं, मुक्कों की बात होती है. अगली बैठक में डॉक्टर आएंगे या पुलिस? इंतज़ार कीजिए….”  बता दें कि ‘संगठन सृजन अभियान’ का शुभारंभ लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बीते 3 जून को भोपाल दौरे के दौरान किया था. इस अभियान के तहत कांग्रेस ने 61 पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया है, जो मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में पार्टी की स्थिति का आकलन कर रहे हैं. लेकिन इस तरह की घटनाएं पार्टी की आंतरिक कलह को उजागर कर रही हैं. भाजपा ने कसा तंज सोशल मीडिया पर इस घमासान का वीडियो खूब वायरल हुआ। प्रदेश भाजपा प्रभारी आशीष अग्रवाल ने वीडियो सांझा करते हुए लिखा कि कांग्रेस की बैठक या कुश्ती प्रतियोगिता। भोपाल में कांग्रेस का संगठन सृजन अब संघर्ष सृजन बन गया है। जिला कांग्रेस की बैठक में आरिफ मसूद और साजिद अली के समर्थकों के बीच बहस नहीं, सीधे मारपीट हुई। अगली बैठक में डॉक्टर आएंगे या पुलिस? इंतज़ार कीजिए।

कांग्रेस विधायक भैरो सिंह परिहार का वीडियो वायरल, RSS के साथ अच्छे रिश्तों का किया खुलासा

सुनसेर  कांग्रेस और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ दोनों की विचारधारा एकदम अलग है, लेकिन संघ का प्रभाव इतना व्यापक है कि कांग्रेसी भी इससे अछूते नहीं हैं। वैसे तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी लगातार आरएसएस को निशाने पर लेते रहते हैं, लेकिन अब उनके ही एक सिपाही का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में विधायक कह रहे हैं कि मैं कांग्रेस का विधायक हूं, लेकिन आरएसएस से भी जुड़ा हुआ हूं। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल वीडियो में क्या है सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो आगर-मालवा क्षेत्र का है। भैरो सिंह परिहार यहां की सुनसेर विधानसभा सीट से विधायक हैं। किसी संगठन के प्रोग्राम में शामिल होने के लिए भैरो सिंह पहुंचे थे। इस दौरान जब माइक उनके हाथ में आया तो वो आरएसएस के साथ अपनी नजदीकियां गिनवाने लगे। भैरो सिंह ने कहा कि वैसे तो वो कांग्रेस विधाय हैं, लेकिन आरएसएस से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस के कई पदाधिकारी उनके करीबी हैं और उन्होंने भी संघ के लिए कई काम किए हैं। इस दौरान भैरो सिंह ने हाल ही में हुए एक समझौते की भी याद दिलाई। 2 साल पहले भी करवाया था समझौता सुनसेर विधानसभा सीट से कांग्रेसी विधायक भैरों सिंह ने कहा कि उन्होंने आरएसएस के लिए काम किया है। इस दौरान परिहार ने एक वाक्या याद दिलाया जब गरोठ सीट से विधायक को पुलिस उठा ले गई थी। उन्होंने कहा कि उस समय जब मुख्यमंत्री आए थे तो उन्होंने मिलकर एक समझौता करवाया था। संघ पदाधिकारियों से शिकायत भी कांग्रेस विधायक भैरो सिंह वायरल वीडियो में संघ पदाधिकारियों से शिकायत करते भी सुनाई दे रहे हैं। भैरों सिंह का कहना है कि अगर वो अभी संघ कार्यालय चले जाएं तो मंडल अध्यक्ष कहेगा कि ना जाने ये कौन आ गया है। शिकायत करते हुए भैरों ने संघ के साथ अपनी नजदीकी और संगठन के लिए काम करने के इतिहास को सबके सामने खुलकर रखा। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग इस विषय में चर्चा कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश में पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए कांग्रेस के करीब ढाई सौ ऑब्जर्वर प्रक्रिया में जुटे

भोपाल  मध्य प्रदेश में पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए कांग्रेस के करीब ढाई सौ ऑब्जर्वर प्रक्रिया में जुट गए हैं. कांग्रेस प्रदेश के 55 जिलों में नए जिला और ब्लॉक अध्यक्ष का चयन करेगी. उधर जिले और ब्लॉक अध्यक्ष के लिए कांग्रेस ने उम्र का बंधन खत्म कर दिया है. जिले और ब्लॉक में पार्टी संगठन के लिए योग्य कार्यकर्ता को ही जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. हालांकि पार्टी ने साफ कर दिया है कि 2023 के चुनाव के दौरान बीजेपी छोड़कर कांग्रेस पार्टी में आए नेताओं को संगठन के इस चुनाव में तवज्जो नहीं दी जाएगी. कांग्रेस ने ऐसे बाहरी नेताओं के लिए लॉयटी टेस्ट की समय सीमा 5 साल निर्धारित कर दी है. कांग्रेस में 5 साल पूरे करने वाले आयातित नेता के नाम पर ही विचार किया जाएगा. 5 साल में पूरा होगा लॉयटी टेस्ट विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 3 जून को भोपाल में संगठन सृजन अभियान की शुरूआत की है. इस अभियान के तहत कांग्रेस ने 55 जिलों में 165 ऑब्जर्वर्स तैनात किए हैं. यह ऑब्जर्वर्स सभी जिलों में पहुंच गए हैं. पार्टी में जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष के लिए जमीनी स्तर पर नए नेतृत्व की तलाश शुरू कर दी है. कांग्रेस ने जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष के लिए उम्र का क्राइटेरिया निर्धारित नहीं किया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि “उम्र को लेकर कोई क्राइटेरिया नहीं है. इसमें योग्यता ही पैमाना होगा, जो सबसे योग्य व्यक्ति समन्वय का निकलेगा, जो पार्टी की विचारधारा के प्रति ईमानदार होगा, उसे ही मौका दिया जाएगा. जीतू पटवारी ने कहा कि पिछले 5 साल के दौरान बीजेप से कांग्रेस में आए नेताओं को अभी इसमें जगह नहीं दी जाएगी.    एआईसीसी को जाएगी रिपोर्ट संगठन सृजन के लिए ऑल इंडिया कांग्रेस ने 60 और प्रदेश कांग्रेस ने 180 पर्यवेक्षकों को नियुक्ति दी है. यह सब अब करीबन एक हफ्ते जिलों में रहेंगे और इसके बाद वहां के दौरे करते रहेंगे. इस दौरान स्थानीय कार्यकर्ताओं, प्रबुद्धजनों से चर्चा कर एक पैनल तैयार करेगी. इसमें जिले का जातिगत समीकरण का भी ध्यान रखा जाएगा. पहला चरण 30 जून तक चलेगा. एसआईसीसी से बनाए गए पर्यवेक्षक अपनी रिपोर्ट सीधे एआईसीसी को ही देगी.

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