LATEST NEWS

मंच टूटने के बाद एमपी कांग्रेस ने कार्यक्रमों को लेकर जो गाइडलाइन बनाई

भोपाल भोपाल में पिछले महीने यानि 10 मार्च को रंगमहल चौराहे पर किसान कांग्रेस द्वारा आयोजित विधानसभा घेराव के कार्यक्रम का मंच टूट गया था। इस घटना में कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव सिंह, महेन्द्र सिंह चौहान, महेन्द्र जोशी सहित आधा दर्जन नेता गंभीर घायल हुए थे। कांग्रेस ने पार्टी के सभी विधायकों, सांसदों, जिला अध्यक्षों, प्रदेश पदाधिकारियों, जिला प्रभारी, सह प्रभारी, संगठन मंत्रियों और ब्लॉक अध्यक्षों के साथ पूर्व सांसद, पूर्व विधायकों को पार्टी के कार्यक्रमों की मंच व्यवस्था, स्वागत, भाषण, वाहन व्यवस्था और बैकड्रॉप की गाइडलाइन भेजी है। जिला प्रभारियों और सह प्रभारियों पर इसे पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है। दिल्ली से मंजूरी मिली, भोपाल में चर्चा बाकी एमपी कांग्रेस ने कार्यक्रमों को लेकर जो गाइडलाइन बनाई है, उसकी दिल्ली में ऑल इंडिया कांग्रेस कमीटी (एआईसीसी) से सैद्धांतिक सहमति मिल गई है। प्रदेश स्तर पर 20 अप्रैल को होने वाली बैठक में सहमति के बाद इसे जारी कर दिया जाएगा। प्रदेश के जिन नेताओं पदाधिकारियों को यह गाइडलाइन भेजी गई है, उनसे यह कहा गया है कि यदि कोई सुझाव हो तो 19 अप्रैल तक भेज दें ताकि जरूरी सुझावों को शामिल करते हुए इसे फाइनल मंजूरी मिल सके। कार्यक्रमों के पहले की तैयारियां     कार्यक्रमों में महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर की फोटो अनिवार्यतः: रखवाई जाएं। और अतिथियों द्वारा सूत की माला से माल्यार्पण किया जाए।     कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् के गायन से किया जाए।     कार्यक्रम के समापन में जन-गण-मन अनिवार्य रूप से कराया जाए।     मंच संचालक द्वारा सभी को इस संबंध में कार्यक्रम के दौरान इन बातों को बार-बार दोहराया जाए। ताकि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के दौरान अनुशासन का पालन हो। जिला स्तर के कार्यक्रम के लिए प्रोटोकॉल जिला स्तरीय मंच- जिला स्तर के संगठन के ऐसे कार्यक्रम जिसमें बडे़ नेताओं, प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, प्रदेश प्रभारी शामिल हों। उस कार्यक्रम में सिर्फ 12 बाय 12 फीट और 3 फीट ऊंचाई का मंच वक्ताओं के लिए बनाया जाएगा, जिसमें बोलने के लिए बीचों बीच डायस रखी जाएगी। इस मंच पर बैकड्रॉप में 16 बाय 16 फीट का होर्डिंग लगाया जाएगा। यानि मंच पर कोई नेता नहीं बैठेगा। नाम बुलाने पर नेता डायस पर जाकर स्पीच देंगे और नीचे कार्यकर्ताओं के साथ बैठेंगे।

कांग्रेस के पूर्व मंत्री के घर ED की रेड: हाल ही में उन्होंने भाजपा के खिलाफ बयान बाज़ी की थी ,19 ठिकानों पर पहुंची टीम

ED raids at the house of former Congress minister

ED raids at the house of former Congress minister: Recently he had made statements against BJP, the team reached 19 locations जयपुर। राजस्थान में कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे प्रताप सिंह खाचरियावास के 19 ठिकानों पर आज प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम छापा मार रही है। जयपुर में एक और प्रदेश के अन्य 18 ठिकानों पर सुबह करीब 5 बजे टीमें पहुंच गई थीं। यह मामला रियल एस्टेट में निवेश का काम करने वाली PACL में हुए 48 हजार करोड़ के घोटाले से जुड़ा है। ईडी से मिली जानकारी के अनुसार, प्रताप सिंह और उनके परिवार के लोगों के नाम पर PACL में घोटाले का पैसा ट्रांसफर हुआ था। अधिकांश पैसा प्रॉपर्टी और अन्य सेक्टर में लगा दिया गया। उधर, पूर्व मंत्री के घर छापेमारी की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में जयपुर के सिविल लाइंस स्थित आवास पर समर्थक पहुंच गए। समर्थकों ने इस कार्रवाई का विरोध किया। मौके पर भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की जा रही है। पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के जयपुर के सिविल लाइंस स्थित इसी मकान में सुबह से ED की रेड चल रही है। लाखों लोगों के साथ हुई थी PACL में धोखाधड़ी लाखों लोगों के साथ PACL में धोखाधड़ी हुई थी। इसके बाद यह केस सुप्रीम कोर्ट में चला गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी 2016 को सेवानिवृत्त सीजेआई आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। कोर्ट ने कमेटी से कहा था कि पीएसीएल की संपत्तियों को नीलाम करके 6 महीने में लोगों को ब्याज सहित भुगतान करें। सेबी के आकलन के अनुसार, पीएसीएल की 1.86 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति है, जो निवेशकों की जमा राशि की तुलना में 4 गुना है। पीएसीएल कंपनी की योजनाओं को अवैध मानते हुए सेबी ने 22 अगस्त 2014 को कंपनी के कारोबार बंद कर दिए थे। इसके चलते निवेशकों की पूंजी कंपनी के पास जमा रह गई। इसके बाद कंपनी व सेबी के बीच सुप्रीम कोर्ट में केस चला और सेबी जीत गई। राजस्थान में 28 लाख लोगों ने 2850 करोड़ किए थे निवेश17 वर्ष तक राज्य में रियल एस्टेट में निवेश का काम करने वाली पीएसीएल में प्रदेश के 28 लाख लोगों ने करीब 2850 करोड़ और देश के 5.85 करोड़ लोगों ने कुल 49100 करोड़ का निवेश किया था। कंपनी पर बिहार, महाराष्ट्र, एमपी, असम, कर्नाटक, जयपुर ग्रामीण, उदयपुर, आंध्र प्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़ समेत आधे से ज्यादा राज्यों में मुकदमे दर्ज हैं। सबसे पहले जयपुर में इसका खुलासा होने पर एफआईआर दर्ज हुई थी। जानकार सूत्रों की मानें तो इस केस में प्रताप सिंह की भागीदारी करीब 30 करोड़ की बताई जा रही है। ईडी की छापेमारी पूरी होने के बाद ही रिकवरी को लेकर कुछ कहा जा सकता है। खाचरियावास ने कहा- जो इनके खिलाफ बोलता है, ईडी भेज देते हैंप्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा- ईडी केंद्र के अधीन है। इस डबल इंजन की सरकार से ज्यादा उम्मीद नहीं कर सकता। मेरे परिवार के सदस्यों के यहां बेवजह सर्च चल रहा है। हम पूरा सर्च करवाएंगे। ईडी के अफसरों से हम पूरा सहयोग करेंगे। बीजेपी सरकार को मेरे बोलने से इतना दर्द है कि छापे डलवा दिए। मैं पिछले डेढ़ साल से इनके खिलाफ बोल रहा हूं। जो बीजेपी और इनकी सरकार के खिलाफ बोलता है, उसके घर ये ईडी भेज देते हैं। मैं बोल रहा था तो मुझे भी पहले से पता था कि ईडी तो एक दिन पहुंचेगी, यदि पहुंचेगी तो मैं भी तैयार हूं। मेरा नाम प्रताप सिंह खाचरियावास है, मुझे सबका इलाज करना आता हैखाचरियावास ने बीजेपी नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा- बीजेपी के लोगों से कहना चाहूंगा। आप ही सरकार में नहीं रहोगे। सरकारें बदलती रहती हैं। जमाना बदलेगा। आपने यह कार्रवाई शुरू की है, कल बीजेपी वालों के खिलाफ भी हम यही कार्रवाई करेंगे। डरते थोड़े ही हैं। मेरा नाम प्रताप सिंह खाचरिवास है। मुझे सबका इलाज करना आता है।

पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत और सक्रिय बनाने की दिशा में पार्टी ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए

जयपुर  गुजरात में हाल ही में संपन्न हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन (Congress National Adhiveshan) के बाद संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत और सक्रिय बनाने की दिशा में पार्टी ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. राजस्थान इस दिशा में सबसे पहला मॉडल स्टेट बना है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) के निर्देश पर 58 हजार से अधिक मंडल, ब्लॉक, जिला और बूथ पदाधिकारियों का डिजिटल डाटा तैयार कर लिया गया है. कौन पदाधिकारी सक्रिय है, कौन निष्क्रिय, और किस स्तर पर कौन-कौन सी संगठनात्मक गतिविधियां चल रही हैं, इससे पूरी डिटेल ऑनलाइन हो गई है. यह डाटा अब सीधे AICC और प्रदेश नेतृत्व की निगरानी में रहेगा और निष्क्रिय नेताओं की पहचान कर उनके स्थान पर नए ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है. निष्क्रिय नेताओं की उलटी गिनती शुरू इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से पार्टी उन नेताओं की लिस्ट तैयार कर रही है जो वर्षों से पदों पर जमे हैं, लेकिन संगठनात्मक रूप से निष्क्रिय बने हुए हैं. ये वह चेहरे हैं जिन पर अब तक पार्टी के पास निगरानी की कोई सटीक व्यवस्था नहीं थी, लेकिन अब एक क्लिक में पता चलेगा कि किसने कितनी बैठकें अटेंड कीं, कितने कार्यकर्ता जोड़े और संगठन के लिए जमीनी स्तर पर कितना काम किया. ‘परफॉर्मेंस ही प्रमोशन का आधार बनेगा’ राजस्थान कांग्रेस का यह डिजिटलाइजेशन मॉडल अब राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद पूरे देश में लागू किया जा सकता है. अधिवेशन में “संगठन निर्माण” को लेकर जिस विचार को बल दिया गया था, वह अब धरातल पर उतरता नजर आ रहा है. डोटासरा ने कहा, यह कदम केवल डेटा एंट्री नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन की रीब्रांडिंग है, जहां परफॉर्मेंस ही प्रमोशन का आधार बनेगा. एक क्लिक में प्रदेश का संगठनात्मक ब्लूप्रिंट इस डिजिटलीकरण के बाद कार्यकर्ताओं की ट्रैकिंग अब आसान होगी. मंडल, ब्लॉक और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति, सक्रियता और सहभागिता का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है. प्रशिक्षण शिविरों, बैठकों और अभियानों में भागीदारी का डिजिटल विश्लेषण होगा. निष्क्रिय पदाधिकारियों की तत्काल पहचान और रिपोर्टिंग हो सकेगी. एक क्लिक में पूरे प्रदेश का संगठनात्मक ब्लूप्रिंट सामने आ जाएगा. संगठन में व्यापक फेरबदल की तैयारी सूत्रों के मुताबिक, इस डिजिटल डाटा के आधार पर जल्द ही संगठन में व्यापक फेरबदल की तैयारी है. कई वर्षों से पदों पर जमे नेताओं को हटाकर युवाओं, महिलाओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे लाने की योजना बनाई जा रही है. इस पूरी प्रक्रिया का डाटा कांग्रेस की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा और राष्ट्रीय नेतृत्व इसे सीधा देख सकेगा. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संगठन के किसी भी स्तर पर निष्क्रियता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद कांग्रेस की बड़ी सर्जरी, ब्लॉकों में नए पदाधिकारी होंगे नियुक्त

उज्जैन  कांग्रेस में संगठनात्मक स्तर पर जिले में बड़े फेरबदल की तैयारी है। इसमें ब्लॉकों में नए पदाधिकारी नियुक्त करने सहित ग्रामीण जिलाध्यक्ष बदला जा सकता है। संभावना है कि इस बार पार्टी युवा, निर्विवादित और किसी ग्रुप विशेष का न हो, संगठन समर्पित ऐसे नेता को जिले की कमान सौंप सकती है। शहर सहित जिले में कांग्रेस लगातार चुनाव हो रहे हैं। इसमें नगर निगम, विधानसभा और लोकसभा चुनाव भी शामिल है। कोर्ट के आदेश के बाद हाल ही में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में तो कांग्रेस अपना समर्थित प्रत्याशी खड़ा नहीं कर पाई थी। ऐसे में संगठन में फेरबदल की लगातार अटकलें जारी हैं। अब संभावना जताई जा रही है कि गुजरात में पार्टी के बैठक का असर पार्टी में विभिन्न पदों पर सर्जरी के रूप में देखने को मिलेगा। इसमें उज्जैन जिले में भी विभिन्न पदों पर बदलाव की तैयारी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, शहर अध्यक्ष पद पर परिवर्तन नहीं होगा लेकिन जिलाध्यक्ष का चेहरा बदलना लगभग तय है। इसके पीछे अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के साथ ही वर्तमान अध्यक्ष कमल पटेल का कार्यकाल पहले ही पूर्ण होना मुख्य कारण है। कांग्रेस के जिला प्रभारी अमित शर्मा ने बताया कि जिले के संगठनात्मक स्तर पर कई बदलाव होंगे। ऐसे कार्यकर्ता जो लंबे समय से पार्टी के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं, उन्हें नई व महत्वपूर्ण जिमेदारियां दी जाएगी। युवा, उर्जावान लोगों को अवसर दिया जाएगा। शर्मा के अनुसार, नई नियुक्तियों को लेकर प्रक्रिया अंतिम चरण में हैं। अब नए ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति शीघ्र होगी शहर व जिले में नए ब्लॉक स्तर पर भी बदलाव होंगे। लगभग सभी ब्लॉकों में नए अध्यक्ष नियुक्त करने की तैयारी है। अप्रेल अंत या मई की शुरुआत में यह परिवर्तन देखे जा सकते हैं।

‘नर्सिंग शिक्षा की हालत शर्मनाक’, नेता प्रतिपक्ष ने Nursing Scam को लेकर सरकार को फिर घेरा, कहा- 300 से ज्यादा कॉलेज थे, अब सिर्फ 95 बचे

‘The condition of nursing education is shameful’, the Leader of Opposition again cornered the government over the Nursing Scam भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नर्सिंग घोटाले को लेकर सरकार को जमकर घेरा हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की हालत शर्मनाक है! यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार की नाकामी का नतीजा है। एमपी में कभी 300 से ज्यादा नर्सिंग कॉलेज थे, अब सिर्फ 95 बचे हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक बार फिर नर्सिंग घोटाले को लेकर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर लिखा- ‘मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की हालत शर्मनाक है! BJP सरकार की नाकामी का नतीजा – कभी 300 से ज़्यादा नर्सिंग कॉलेज थे, अब सिर्फ़ 95 बचे हैं।’ सिंघार ने आगे कहा कि ‘CBI जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया, सैकड़ों कॉलेज मानकों पर खरे नहीं उतरे और बंद हो गए। घोटाले के बाद छात्रों का भरोसा इतना टूट गया कि 2023-24 में एक भी दाखिला नहीं हुआ – पूरा सेशन शून्य रहा! जो सरकार शिक्षा नीति पर बड़ी-बड़ी बातें करती है, उसी के राज में शिक्षा की ये दुर्दशा क्यों?’ उन्होंने मध्य प्रदेश बीजेपी को टैग करते हुए पूछा कि ‘युवाओं का भविष्य यूं बर्बाद क्यों हो रहा है ?’ https://twitter.com/UmangSinghar/status/1910213082942521781

संगठन के सशक्तीकरण के लिए कांग्रेस अब नई टीम को मैदान में उतार रही, अब जिला इकाइयों के अध्यक्ष बदले जाएंगे

भोपाल  संगठन के सशक्तीकरण के लिए कांग्रेस अब नई टीम को मैदान में उतार रही है। इसके तहत प्रदेश कांग्रेस में परिवर्तन के बाद अब जिला इकाइयों के अध्यक्ष बदले जाएंगे। अगले माह के अंत तक यह प्रक्रिया पूरी होगी। इसमें उन अध्यक्षों के स्थान पर पहले नई नियुक्तियां होंगी, जहां बरसों से एक ही व्यक्ति अध्यक्ष है। इसमें देवास, सतना, उज्जैन, उमरिया शामिल हैं। पार्टी ने तय किया है कि सहमति बनाकर नए लोगों को अवसर दिया जाएगा। आधे से अधिक पदाधिकारी 50 वर्ष से कम आयु के बनाए जाएंगे। कमल नाथ के समय के अधिकांश जिलाध्यक्ष     अधिकतर जिलाध्यक्ष तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ के समय नियुक्त किए गए थे। कांग्रेस ने वर्ष 2025 को संगठन वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इसमें संगठन को मजबूत बनाने के लिए नई टीम बनाई जा रही है।     नए चेहरों को अवसर दिया जा रहा है। चुनाव से लेकर बूथ प्रबंधन तक के लिए अलग-अलग समितियां गठित की गई हैं। अब जिला इकाइयों में आगामी चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए परिवर्तन किया जा रहा है।     पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी नए लोगों को मौका दिया जा रहा है। ऐसा ही मध्य प्रदेश में भी आम सहमति बनाकर किया जाएगा। नई नियुक्तियां इसी को ध्यान में रखकर की जाएंगी। अहमदाबाद में आज से राष्ट्रीय अधिवेशन मंगलवार और बुधवार को गुजरात के अहमदाबाद में होने वाले पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में जिला अध्यक्षों की भूमिका बढ़ाने के प्रस्ताव पर मुहर लग जाएगी। इसके बाद प्रदेश में परिवर्तन किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष कह चुके हैं कि मई अंत तक आवश्यकता के अनुसार जिला अध्यक्ष बदले जाएंगे। जिला हो या फिर ब्लाक इकाई, परिवर्तन का आधार केवल समयावधि नहीं बल्कि संगठन की स्थिति भी बनेगी।

मध्य प्रदेश कांग्रेस में कमजोर प्रदर्शन वाले जिलाध्यक्ष हटाए जाएंगे, अहमदाबाद अधिवेशन पर सबकी नजर

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस में जल्द ही बड़े बदलाव होने वाले हैं। पार्टी 50% से ज्यादा जिला अध्यक्षों को बदलने की तैयारी कर रही है। यह फैसला पिछले चुनावों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन को देखते हुए लिया गया है। नए अध्यक्षों की घोषणा अहमदाबाद में होने वाले कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद होने की संभावना है। इस बदलाव का मकसद पार्टी संगठन को मजबूत करना है ताकि आने वाले चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके। 10 से 12 साल से बने हैं जिलाध्यक्ष पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष ने इस लिस्ट को फाइनल कर लिया है। 8-9 अप्रैल को अहमदाबाद में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद इसकी घोषणा हो सकती है। कई जिलों में अध्यक्ष 10 से 12 साल से पद पर बने हुए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कई जिलों में अध्यक्ष वरिष्ठ नेता कमलनाथ के कार्यकाल में बने थे। अब प्रदेश अध्यक्ष पटवारी अपनी टीम बनाने की तैयारी में हैं। लंबे समय से पद पर बने हैं ये लोग ग्वालियर शहर के अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा, उज्जैन ग्रामीण के अध्यक्ष कमल पटेल और शहडोल के जिला अध्यक्ष सुभाष गुप्ता 2018 से पद पर हैं। सतना के शहर अध्यक्ष मकसूद अहमद लगभग 12 साल से और ग्रामीण अध्यक्ष दिलीप मिश्रा 10 साल से पद पर हैं। नीमच के अध्यक्ष अनिल चौरसिया 7 साल से और विश्वनाथ ओकटे 4 सालों से पद पर हैं। खंडवा, रायसेन जैसे कई जिलों में कई सालों से जिला अध्यक्ष ही नहीं हैं। राहुल गांधी से हुई थी चर्चा 3 अप्रैल को राहुल गांधी के साथ हुई चर्चा में जिला अध्यक्षों ने नियुक्तियों और टिकट की प्रक्रिया में अधिकार मांगे थे। राहुल ने कहा था कि उन्हें पार्षद से लेकर लोकसभा में टिकट प्रक्रिया में शामिल करने का प्रस्ताव बनेगा। साथ ही पार्टी संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी लेनी होगी। इसका मतलब है कि जिला अध्यक्षों को टिकट बंटवारे में भी अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। अहमदाबाद के बाद एमपी में पार्टी को मजबूत करेगी कांग्रेस पीसीसी मीडिया विभाग के चेयरमैन मुकेश नायक ने कहा कि अहमदाबाद के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद कांग्रेस मध्य प्रदेश में संगठन को मजबूत करेगी। इसके बाद प्रदेश में अधिक प्रभावी भूमिका में सरकार के सामने आएगी। उनका कहना है कि पार्टी संगठन को मजबूत करके सरकार को टक्कर देने के लिए तैयार है। नए लोगों को भी मिलेगा मौका बदलाव में उन जिला अध्यक्षों को हटाया जाएगा जो कई सालों से पद पर हैं। साथ ही उन अध्यक्षों को भी हटाया जाएगा जिनके क्षेत्र में कांग्रेस का प्रदर्शन चुनावों में कमजोर रहा है। पार्टी का मानना है कि नए लोगों को मौका देने से संगठन में नई ऊर्जा आएगी। फाइनल हुई लिस्ट पार्टी सूत्रों की मानें तो प्रदेश अध्यक्ष इस लिस्ट को फाइनल कर चुके हैं। अहमदाबाद में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद घोषणा होने की संभावना है। इसका मतलब है कि जल्द ही नए जिला अध्यक्षों के नामों का ऐलान हो सकता है। कई जिलों में अध्यक्ष काफी लंबे समय से पद पर हैं। कोई 10 साल से तो कोई 12 साल से अध्यक्ष बना हुआ है। अब पार्टी नए चेहरों को मौका देना चाहती है।

सुप्रीम कोर्ट में वक्फ विधेयक को चुनौती देगी कांग्रेस, जल्द खटखटाएगी अदालत का दरवाजा

नई दिल्ली वक्फ संशोधन विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी होने लगी है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बाद अब कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि वह संसद में पारित वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 की संवैधानिकता को बहुत जल्द सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। विधेयक को शुक्रवार सुबह संसद ने मंजूरी दी थी। इसे पहले लोकसभा फिर राज्यसभा ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाए DMK इससे पहले वक्फ विधेयक को लेकर स्टालिन ने अदालत का दरवाजा खटखटाने का एलान कर दिया था। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम के स्टालिन ने गुरुवार को कहा था कि उनकी पार्टी इस विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाएगी। लोकसभा से विधेयक पारित होने के विरोध में स्टालिन विधानसभा में काली पट्टी बांधकर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत में बड़ी संख्या में दलों के विरोध के बावजूद कुछ सहयोगियों के इशारे पर रात दो बजे संशोधन को अपनाना संविधान की संरचना पर हमला है। ‘सरकार के सभी हमलों का विरोध करना जारी रखेंगे’ ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में एआईसीसी महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘कांग्रेस बहुत जल्द ही वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 की संवैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।’ उन्होंने कहा, ‘हमें पूरा भरोसा है। हम भारत के संविधान में निहित सिद्धांतों, प्रावधानों और प्रथाओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के सभी हमलों का विरोध करना जारी रखेंगे।’ कांग्रेस ने गिनाए मामले , जिसे सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती जयराम रमेश ने कहा कि सीएए, 2019 को कांग्रेस की ओर से चुनौती दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। आरटीआई अधिनियम, 2005 में 2019 के संशोधनों को लेकर भी कांग्रेस की चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। चुनाव संचालन नियम (2024) में संशोधनों की वैधता को लेकर कांग्रेस की चुनौती पर भी सुनवाई जारी है। ऐसे ही पूजा स्थल अधिनियम, 1991 की मूल भावना को बनाए रखने के लिए कांग्रेस के हस्तक्षेप पर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है। स्टालिन खटखटाएंगे अदालत का दरवाजा लोकसभा में पास हुए वक्फ विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अदालत का दरवाजा खटखटाने का एलान कर दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम के स्टालिन ने गुरुवार को कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाएगी। लोकसभा से विधेयक पारित होने के विरोध में स्टालिन विधानसभा में काली पट्टी बांधकर पहुंचे। इस दारान उन्होंने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में दलों के विरोध के बावजूद कुछ सहयोगियों के इशारे पर रात दो बजे संशोधन को अपनाना संविधान की संरचना पर हमला है। ‘यह धार्मिक सद्भाव को बिगाड़ने वाला काम’ मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि यह धार्मिक सद्भाव को बिगाड़ने वाला काम है। इसे उजागर करने के लिए हम आज विधानसभा की कार्यवाही में काली पट्टी बांधकर भाग ले रहे हैं। स्टालिन ने कहा, ‘मैं आपको सूचित करना चाहूंगा कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की ओर से इस विवादास्पद संशोधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया जाएगा। तमिलनाडु केंद्र सरकार के उस कानून के खिलाफ लड़ेगा, जो वक्फ बोर्ड की आजादी को नष्ट करता है और अल्पसंख्यक मुस्लिम आबादी को खतरे में डालता है।’ ‘विधेयक पारित कराने के तरीका निंदनीय’ उन्होंने बताया कि राज्य विधानसभा ने प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ 27 मार्च को एक प्रस्ताव पारित किया था, क्योंकि यह अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय पर असर डालेगा। यह भारत के धार्मिक सद्भाव को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि यह बेहद निंदनीय है कि वक्फ अधिनियम में संशोधन को लोकसभा में 232 सांसदों के विरोध में वोट देने के बावजूद पारित कर दिया गया। यह कोई सामान्य संख्या नहीं है। यह संख्या बढ़ भी सकती है। केवल 288 सदस्यों ने ही इसके पक्ष में मतदान किया।

एमपी में 900 करोड़ का एंबुलेंस घोटाला! कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह का सनसनीखेज खुलासा, जानें क्या कहा?

Ambulance scam of Rs 900 crore in MP! Sensational disclosure by Congress leader Jaivardhan Singh, know what he said? भोपाल ! कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने मध्य प्रदेश सरकार में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश करने का दावा किया। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह पिछले ढाई साल में दो हजार एंबुलेंस के लिए 900 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है, जो एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। इस मामले को गंभीर बताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ढाई साल में एंबुलेंस के लिए किराये के तौर पर छत्तीसगढ़ की एक निजी कंपनी को जो पैसा दिया है, वह एंबुलेंस की कीमत से तीन गुना ज्यादा है। जयवर्धन सिंह ने कहा कि हर सरकार का दायित्व होता है कि राज्य में चिकित्सा सुविधाओं पर नियंत्रण हो और उसकी गुणवत्ता अच्छी हो। मैंने विधानसभा में एक सवाल पूछा था कि एंबुलेंस के लिए प्रदेश सरकार ने अब तक कितना भुगतान किया है। मुझे जानकारी मिली कि पिछले ढाई साल में छत्तीसगढ़ की एक निजी कंपनी जय अम्बे इमरजेंसी सर्विसेज को 900 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इस कंपनी के पास करीब दो हजार एंबुलेंस हैं और इसका औसत किराया प्रति एंबुलेंस 45 लाख रुपये दिया गया है। एनएचएम के तहत मिलने वाले पैसों का गलत इस्तेमाल उन्होंने कहा कि अगर आप इसकी तुलना करें तो एक पूरी तरह से सुसज्जित एंबुलेंस, जिसमें हर आधुनिक उपकरण जैसे वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की व्यवस्था हो, उसकी अधिकतम कीमत 20 लाख रुपये होती है। लेकिन, यहां सरकार 45 लाख रुपये किराये के रूप में भुगतान कर चुकी है। यह सीधा-साधा भ्रष्टाचार और सरकारी धन का दुरुपयोग है। यह सब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत मिलने वाले केंद्र सरकार के पैसों का गलत इस्तेमाल है। कम से कम 600 से 700 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है। इसमें भाजपा के दलाल, कुछ सरकारी अधिकारी और यह छत्तीसगढ़ी निजी कंपनी शामिल हैं, जिन्होंने सरकारी पैसों का गबन किया है। इस पैसे को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए था, जिससे लाखों बच्चों और गर्भवती महिलाओं की मदद हो सकती थी। कंपनी को जारी किए गए थे 40 नोटिस उन्होंने इस घोटाले के कई उदाहरण भी पेश किए। उन्होंने कहा कि गुना से एक बच्चा भोपाल इलाज के लिए जा रहा था, लेकिन रास्ते में ऑक्सीजन खत्म हो गया और बच्चे की मौत हो गई। ऐसे कई मामले सामने आए हैं। जयवर्धन सिंह ने यह भी बताया कि जय अम्बे कंपनी के खिलाफ 40 से अधिक नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन सरकार ने इसके बावजूद इस कंपनी को पूरा भुगतान किया। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो कांग्रेस विधायक ने बताया कि वह इस मामले में लोकायुक्त और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) में शिकायत करने का निर्णय ले चुके हैं। उन्होंने कहा, “मैंने तय किया है कि मैं इस मामले में लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में शिकायत करूंगा ताकि इस पूरे घोटाले की जांच हो सके। जिन लोगों ने सरकारी पैसों का दुरुपयोग किया है, उन्हें सजा मिलनी चाहिए और इस घोटाले में शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। यह घोटाला एक बड़े खेल का हिस्सा है, जिसे पूरी तरह से उजागर किया जाना चाहिए ताकि सरकारी पैसों का सही उपयोग हो सके और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हो।

माफी नहीं मांगूंगा… BJP विधायक चिंतामणि मालवीय का पार्टी के खिलाफ मोर्चा, कांग्रेस का भी मिल गया साथ

ujjain kumbh land acquisition controversy chintamani malviya उज्जैन ! बीजेपी विधायक चिंतामणि को राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा ने नोटिस भेजा है. इस पर चिंतामणि ने कहा है कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिली है. अगर मिलती भी है तो मैंने कुछ भी ग़लत नहीं कहा है. मैं माफ़ी नहीं मांगूंगा.उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ को लेकर बवाल मचा हुआ है. बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय ने विधानसभा में मुद्दा उठाया और कहा कि उज्जैन के किसान परेशान हैं और डरे हुए है. उनकी ज़मीन जबरदस्ती अधिग्रहण की जा रही है. इस बयान के बाद अब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा ने उन्हें नोटिस जारी किया है. नोटिस में कहा गया है कि आज सार्वजनिक जगह पर बयानबाजी कर पार्टी की छवि धूमिल कर रहे हैं. बीजेपी की ओर से भेजे गए नोटिस में चिंतामणि को 7 दिनों जवाब देने के लिए कहा गया है. मुझे नोटिस नहीं मिलाइस मामले पर आलोट विधायक चिंतामणि मालवीय ने कहा कि मैं बीजेपी का प्रतिबद्ध कार्यकर्ता हूं. मैंने जो कुछ कहा, वो सदन के अंदर का विषय है. मैंने कुछ भी ग़लत नहीं कहा है. मैं माफ़ी नहीं मांगूंगा. पार्टी का नोटिस अभी मुझे प्राप्त नहीं हुआ है. अगर मुझे मिलेगा तो मैं उसके तथ्यानुरूप जवाब से पार्टी को अवगत कराऊंगा. उन्होंने कहा था कि भू-माफियाओं की साजिश की वजह से किसानों को अपनी ही जमीन से बेदखल किया जा रहा है. सालों से यहां भूमि का अधिग्रहण कुछ ही महीनों के लिए होता था, लेकिन स्थाई तौर पर कब्जा सही नहीं है. दूसरे नेताओं को क्यों नहीं जारी किया नोटिस?वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि बीजेपी में कोई आवाज़ उठाता है तो उसकी आवाज़ दबा दी जाती है. किसानों के मुद्दे पर हम उनके साथ है. कांग्रेस पार्टी भी उज्जैन जाकर किसानों के साथ प्रदर्शन में शामिल होगी.नोटिस जारी करना ही थे बीजेपी को तो आख़िर क्यों गोविंद राजपूत ,प्रहलाद पटेल और विश्वास सारंग को नहीं किए. दूसरी तरफ़ बीजेपी इस मामले पर चुप है. सिंहस्थ क्या है?सिंहस्थ उज्जैन मध्य प्रदेश में आयोजित होने वाला महाकुंभ मेला है, जो हर 12 साल में एक बार शिप्रा नदी के तट पर होता है. इसे ‘सिंहस्थ कुंभ महापर्व’ भी कहा जाता है. यह हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें संत, महात्मा, अखाड़े, श्रद्धालु और तीर्थयात्री बड़ी संख्या में शामिल होते हैं.

परिवहन घोटाले को लेकर विपक्ष जाएगा सुप्रीम कोर्ट, नेता प्रतिपक्ष बोले- जद में हैं कई अधिकारी और नेता

opposition will go to supreme court regarding transport scam भोपाल ! मध्य प्रदेश में परिवहन घोटाले को लेकर विपक्ष ने अब सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार इस मामले में लीपापोती कर रही है। कई बड़े अधिकारी और नेता इसकी जद में आ रहे थे, इसी कारण लोकायुक्त डीजी जयदीप प्रसाद का तबादला किया गया। उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार इस घोटाले को दबाने का प्रयास कर रही है। जब बड़े अधिकारी और नेता जांच के दायरे में आने लगे तो लोकायुक्त डीजी को हटा दिया गया। हम इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे और दोषियों को बेनकाब करेंगे। सत्र संचालन पर भी उठाए सवाल विधानसभा सत्र को लेकर भी उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी भी मुद्दे पर सही जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि विधायकों द्वारा उठाए गए मामलों का भी जवाब नहीं दिया गया। हमने मांग की थी कि सदन की कार्यवाही का लाइव प्रसारण होना चाहिए, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया। विश्वास सारंग बोले- बिना जांच पूरी हुए निष्कर्ष न निकालें विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं और विपक्ष को जांच के निष्कर्ष तक रुकना चाहिए। सारंग ने कहा कि हर स्तर पर जांच हो रही है और जांच के आधार पर कार्रवाई भी की जा रही है। विपक्ष को बिना जांच पूरी हुए निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।

कांग्रेस नेत्री ने परशुराम से की Aurangzeb की तुलना, पार्टी के अल्टीमेटम के बाद मांगनी पड़ी माफी

जबलपुर कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले की एक महिला पार्टी नेता को सोशल मीडिया पर हिंदू देवता परशुराम की तुलना मुगल शासक औरंगजेब से करने के आरोप में कारण बताओ नोटिस भेजा है. नोटिस में पार्टी ने रेखा विनोद जैन से 48 घंटे के अंदर जवाब मांगा है. जबलपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ शर्मा की तरफ से जारी नोटिस में कहा गया है, “आपने न केवल भारतीय संविधान का बल्कि कांग्रेस पार्टी के संविधान का भी उल्लंघन किया है, जिससे पार्टी की धर्मनिरपेक्ष छवि धूमिल हुई है.” उन्होंने कहा कि जैन के कृत्य ने कांग्रेस पार्टी की धर्मनिरपेक्ष नीति का उल्लंघन किया है और यह अनुशासनहीनता के दायरे में आता है. ’48 घंटे के अंदर माफी…’ सौरभ शर्मा ने कहा, “आपके द्वारा किए गए कृत्य के आधार पर आपको यह कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है और इसे मिलने के 48 घंटों के अंदर आपको पोस्ट के संबंध में अपने कृत्य के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और अपना जवाब भेजना चाहिए.” नोटिस में आगे चेतावनी दी गई है कि अगर उन्होंने माफी नहीं मांगी या संतोषजनक जवाब नहीं भेजा, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. कांग्रेस लीडर ने पोस्ट में क्या कहा था? कांग्रेस लीडर रेखा विनोद जैन ने पोस्ट में कहा था, “औरंगजेब ने अपने भाई का सिर काटकर अपने पिता को भेंट किया, जबकि परशुराम ने अपनी मां का सिर काटा था. औरंगजेब क्रूर था, कोई भी उसे आदर्श नहीं मानता. मुसलमान भी अपने बच्चों का नाम औरंगजेब नहीं रखते लेकिन हिंदुत्व के अनुयायी परशुराम के मंदिर भी बनाते हैं.” हालांकि, रेखा ने बाद में पोस्ट हटा दी और अपने कृत्य के लिए माफी मांगते हुए कहा कि उनका किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था. रेखा विनोद ने एक अलग पोस्ट में कहा, “जैसे ही यह बात मेरे संज्ञान में आई, मैंने तुरंत उस पोस्ट को वॉल से हटा दिया. इसके साथ ही, मैं आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए सभी से माफी मांगती हूं.” हालांकि, सत्तारूढ़ बीजेपी ने कांग्रेस को घेरने की कोशिश करते हुए कहा कि विपक्षी पार्टी की हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करना आदत बन गई है.  

लोकायुक्त से मिलने पहुंचे कांग्रेसी, सौरभ शर्मा और गोविंद सिंह राजपूत से जुड़े सौंपे दस्तावेज

Congressmen reached to meet Lokayukta, submitted documents related to Saurabh Sharma and Govind Singh Rajput भोपाल ! राजधानी भोपाल में सोमवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार प्रतिनिधिमंडल के साथ मध्य प्रदेश के लोकायुक्त से मिलने पहुंचे. उमंग सिंघार अपने साथ सौरभ शर्मा और उसके साथियों से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ मंत्री गोविंद सिंह राजपूत जो की पूर्व में परिवहन विभाग के मंत्री थे, उनकी कई संपत्तियों की जानकारी व उनकी रजिस्ट्री लेकर लोकायुक्त के पास पहुंचे. जहां उन्होंने लोकायुक्त से निवेदन किया है कि इस पूरे मामले की जांच करवाकर इस पर कार्रवाई की जाए. लोकायुक्त को सौंपे दस्तावेजभोपाल में लोकायुक्त से मिलने के बाद उमंग सिंघार ने बताया कि “हमने परिवहन विभाग के पूरे घोटाले के संपूर्ण दस्तावेज और उन घोटाले के पैसों से खरीदी गई संपत्तियों की जानकारी लोकायुक्त को दे दी है. सौरभ शर्मा जो अभी जेल में बंद है. तीनों जांच एजेंसियां उससे उसकी कार में मिले 52 किलो सोना और 11 करोड़ कैश के बारे में कुछ भी नहीं उगलवा सकी. सौरभ शर्मा के मामले में अभी मध्य प्रदेश विधानसभा में भी चर्चा होना बाकी है. उमंग सिंघार को गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ आरोपलोकायुक्त से मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने बताया कि “किस तरह जनता के पैसों से यह लोग सोना-चांदी खरीद रहे थे. इस पूरे प्रकरण में तीन-तीन जांच एजेंसियों ने जांच करी, लेकिन अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं. इसको लेकर भी हमने लोकायुक्त से बात की है कि इस पूरे मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए. इसके साथ ही पूर्व में परिवहन मंत्री रहे गोविंद सिंह राजपूत और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी हमने लोकायुक्त को विस्तृत दस्तावेज दिए हैं. जिसमें हमने सभी प्रकार के दस्तावेज जैसे कि किस समय कौन सी जमीन गोविंद सिंह राजपूत या उनके परिजनों के नाम पर कहां-कहां खरीदी गई है. इसका विस्तृत उल्लेख किया है लोकायुक्त ने मामले में जांच करवाने के साथ-साथ कार्रवाई का भी आश्वासन दिया है.

लोग स्वास्थ्य पर गंभीर नहीं सरकार :पंकज उपाध्याय 

Government is not serious about people’s health: Pankaj Upadhyay  भोपाल/जौरा। विधायक पंकज उपाध्याय ने सरकार पर गंभीर  आरोप लगाते हो कहा की सरकार जनता के स्वास्थ्य संबंधी गंभीर मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं है विधायक उपाध्याय ने विधानसभा में प्रश्न के माध्यम से सरकार से पूछा कि कैग की रिपोर्ट पर सरकार के द्वारा क्या अमल किया गय जवाब में लोग स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने  जवाब देते हुए उत्तर को घुमा दिया उन्होंने पूरे उत्तर में कैग की रिपोर्ट पर अमल करने का कोई भी उचित उत्तर नहीं दिया विधायक पंकज उपाध्याय ने पूछा कि कैग की 86% अनुशंसाओं पर कोई जवाब क्यों नहीं दिया गया क्या सरकार उनसे असहमत है या सहमत है सहमत है तो क्या कार्रवाई की गई परंतु स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने केवल पद भरने की बातों का आश्वासन दिया विधायक पंकज उपाध्याय ने आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले सभी सत्रों में हमारे द्वारा अस्पतालों में डॉक्टरों की और स्टाफ की कमी को लेकर लगातार बात उठाई गई लेकिन 1 साल बीतने के बाद भी सरकार के द्वारा कोई भी  रिक्त पद नहीं भर गया कैग ने अपनी अनुशंसा में 317  निष्कर्ष के साथ लिखा कि मातृ मृत्यु दर नवजात शिशु मृत्यु दर आदि के लिए निष्ठा पूर्वक कार्य नही किया गया। प्रतिवेदन में नाम मात्र के जो उत्तर शासन ने दिए उसे एक भी उत्तर को केग ने स्वीकार नहीं किया । राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के मानक अनुसार स्वास्थ्य पर राज्य के बजट का 8% होना चाहिए जो इस वर्ष 2025 -26 में मात्र 5.5% प्रतिशत है । विधायक उपाध्याय ने आगे कहा कि शासन को 2017-18 से 2021-22 की स्वास्थ्य अधोसंरचना पर केग की रिपोर्ट , शासन को टिप के लिए , किस दिनांक को प्राप्त हुई तथा उसका उत्तर शासन ने किस दिनांक को दिया । केग की उस रिपोर्ट में कितनी कंडिका और उपकंडिका  में निष्कर्ष पर टीप चाही गई थी । उसमें से कितने निष्कर्ष पर शासन ने सहमति व्यक्त की , कितने निष्कर्ष पर प्रमाण सहित लिखकर असहमति  व्यक्त की और कितने निष्कर्ष का कोई उत्तर ही नहीं दिया । विधायक  ने आगे कहा कि भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक 2012 और 2017 के कितने मापदंडों का हम अक्षरसह पालन करते हैं , और किस किस मापदंडों में हमने राज्य की आवश्यकता अनुसार क्या क्या संशोधन किया हैं । और वह क्यों किया हैं । तथा  बतावे कि प्रदेश के विभिन्न कैटेगरी के चिकित्सा संस्थानों में भरती निरंतर प्रक्रिया है , यह सही है , लेकिन अभी तक राज्य शासन के मानक अनुसार 40 से 60% से अधिक पद खाली क्यों है । क्या प्रदेश में उनके लिए योग्य चिकित्सक और पेरामेडिकल स्टाफ नहीं है , या योग्य चिकित्सक और योग्य पैरामेडिकल स्टाफ , शासकीय संस्थानों में भ्रष्टाचार और लालफिताशाही के कारण नौकरी करना नहीं चाहते हैं । या सरकार भ्रष्टाचारियों को सरंक्षण के लिए नियुक्ति नहीं करना चाहती है । विधायक पंकज उपाध्याय ने आरोप लगाते हुए कहा कि मुरैना जिले के किसी भी अस्पताल में डॉक्टरों की पूर्ति नहीं की गई है जौरा कैलारस में छोटी मोटी बीमारियों पर भी डॉक्टर ना होने के कारण मरीज को मुरैना ग्वालियर रेफर किया जाता है सरकार के उत्तर से ऐसा मत होते हुए विधायक पंकज उपाध्याय ने सदन से बहिर्गमन किया।

एमपी सदन में बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों की अवैध घुसपैठ पर मऊगंज विधायक ने उठाया मुद्दा

Mauganj MLA raised the issue of illegal infiltration of Bangladeshi and Rohingya Muslims in MP House भोपाल। मध्यप्रदेश के मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल ने ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से विधानसभा में बांग्लादेशी रोहिंग्या मुस्लिमों की अवैध घुसपैठ का मामला उठाया है। विधायक ने कहा कि मध्यप्रदेश के मऊगंज जिला समेत सीमावर्ती जिले जो यूपी की सीमाओं से जुड़े हैं अवैध मुस्लिम आब्रजकारियों विशेषकर बांग्लादेशी रोहिंग्या मुस्लिमों को अवैध तरीकों से मूल निवास प्रमाणपत्र और आधारकार्ड जनप्रतिनिधियों जैसे पार्षद और सरपंचों के वेरिफिकेशन पर जारी किये जा रहे हैं। भाजपा विधायक ने चिंता जताते हुए कहा कि एमपी के 10 बड़े जिलों के सीमावर्ती इलाकों में इनकी तादाद बहुत तेजी से बढ़ी है जो भविष्य में प्रदेश के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकते हैं ,घुसपैठ को प्रभावी तरीके से रोकने के लिए सिटीजन शिप अमेंडमेंट एक्ट सीएए और एनआरसी के तहत कार्यवाही शुरु न होने से अवैध मुस्लिमों का बढ़ना सुरक्षा में चूक है। प्रदीप पटेल ने इस गंभीर मामले में सदन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि सरकार हस्तक्षेप कर अवैध घुसपैठ पर रोक लगाए। मऊगंज के विधायक प्रदीप पटेल द्वारा उठाए गए इस मुद्दे के कई महत्वपूर्ण आयाम हैं, जिनका विश्लेषण राजनीतिक, सुरक्षा, कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण से किया जा सकता है।   1. राजनीतिक पहलू यह मुद्दा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक द्वारा उठाया गया है, जो पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू करने के पक्ष में रही है। अवैध घुसपैठ का मुद्दा भाजपा की मुख्य चुनावी रणनीति का हिस्सा भी रहा है, विशेष रूप से पूर्वोत्तर और बंगाल में।   2. सुरक्षा संबंधी चिंताएँ 3. कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियाँ 4. सामाजिक प्रभाव विधायक द्वारा उठाया गया मुद्दा गंभीर है, लेकिन इसे निष्पक्ष जांच और ठोस प्रमाणों के आधार पर ही आगे बढ़ाना चाहिए। घुसपैठ को रोकना आवश्यक है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी भी कानूनी रूप से रह रहे व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन न हो।  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet