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MP में कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने एक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की, विदिशा बनेगा कांग्रेस की प्रयोगशाला

भोपाल  मध्यप्रदेश कांग्रेस कमजोर क्षेत्रों में विदिशा मॉडल लागू करेगी, जिसके तहत 650 पंचायतों और वार्डों में समितियां वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन और इलेक्शन मैनेजमेंट का काम देखेंगी। यह मॉडल उन क्षेत्रों में लागू होगा जहां कांग्रेस पिछले 20 सालों से सत्ता से बाहर है और संगठन कमजोर है। इस मॉडल में एक्सपर्ट्स कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर काम करेंगे और 30 जून तक वेरिफिकेशन का काम पूरा किया जाएगा। कार्यकर्ताओं के साथ टिफिन मीटिंग करेंगे पटवारी इसके बाद जुलाई में जीतू पटवारी कार्यकर्ताओं के साथ टिफिन मीटिंग करेंगे और फिर भोपाल और नर्मदापुरम में भी यह मॉडल शुरू किया जाएगा। मध्यप्रदेश में कांग्रेस पिछले 20 सालों से सत्ता से बाहर है, सिर्फ 15 महीनों को छोड़कर पार्टी लगातार चुनाव हार रही है। 2020 में हुए दलबदल के बाद कई क्षेत्रों में कांग्रेस का संगठन बेहद नाजुक स्थिति में है। अब कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने के लिए विदिशा मॉडल का सहारा ले रही है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने संगठनात्मक रूप से सबसे कमजोर जिले विदिशा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। पहले जानिए क्या है विदिशा मॉडल पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने संगठनात्मक रूप से सबसे कमजोर जिले विदिशा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए 70 एक्सपर्ट्स को चुनकर विदिशा जिले की पांचों विधानसभा सीटों के हर ग्राम पंचायत और वार्ड में भेजा गया। एक्सपर्ट्स ने पंचायत और वार्ड में सबसे पहले कांग्रेस की कमजोरी की वजहों को लेकर रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद पंचायत और वार्ड समिति के लिए वैचारिक रूप से मजबूत कार्यकर्ताओं के नाम छांटे। बातचीत के बाद पंचायत और वार्ड समिति का गठन किया। इन समितियों के सदस्य अब गांव और वार्ड में कांग्रेस के लिए काम करेंगे। फर्जी वोटर्स की पहचान से लेकर वोटरलिस्ट वेरिफिकेशन और चुनाव की तैयारी में ये समिति काम करेगी। विदिशा जिले में समितियों के गठन के बाद अब इस मॉडल पर प्रदेश के दूसरे जिलों में काम किया जाएगा। समितियों का डेटा ऑनलाइन हुआ दर्ज कांग्रेस ने विदिशा जिले की पंचायत और वार्ड समितियों का गठन करने के बाद ऑनलाइन डेटा अपलोड भी किया है। इसमें समिति के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर सहित तमाम जानकारी ऑनलाइन दर्ज की गई है। अब इन समितियों के वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर आगे संगठन के काम को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित किया जाएगा। वेरिफिकेशन का काम 30 जून तक चलेगा विदिशा जिले की पंचायतों और वार्डों में बनाई गई समितियों के वेरिफिकेशन का काम 30 जून तक चलेगा। इसके लिए पीसीसी में एक कॉल सेंटर बनाया जा रहा है। जहां से सभी समितियों के अध्यक्ष सहित तमाम सदस्यों से टेलीफोनिक बातचीत कर सत्यापन किया जाएगा। टिफिन मीटिंग करेंगे जीतू पटवारी विदिशा जिले में गठित हुई पंचायत और वार्ड समिति के अध्यक्षों के साथ पीसीसी चीफ जीतू पटवारी जुलाई के महीने में टिफिन मीटिंग करेंगे। विधानसभा वार होने वाली टिफिन मीटिंग में सभी कार्यकर्ता अपने-अपने घर से भोजन बनवाकर टिफिन लेकर आएंगे और एक जगह पीसीसी चीफ सभी अध्यक्षों के साथ बैठकर चर्चा करेंगे और भोजन करेंगे। अब भोपाल और नर्मदापुरम में होगा काम शुरू विदिशा जिले के बाद कांग्रेस अब इस मॉडल पर भोपाल और नर्मदापुरम संभाग की उन विधानसभाओं में इसपर काम शुरू करेगी। जहां कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है। कांग्रेस का मानना है कि इन दोनों संभागों में कांग्रेस की स्थिति सुधारने की सबसे ज्यादा जरूरत है। विदिशा से हुई पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत कांग्रेस के संगठन प्रभारी संजय कामले ने बताया- कांग्रेस पार्टी ने बहुत महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट के लिए विदिशा जिले को चुना था। पार्टी में इस बात की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी कि संगठन में किस तरह से संगठन में बदलाव करना चाहिए। कैसे कांग्रेस पार्टी की जमीनी स्तर पर शुरुआत कर सकते हैं। हमारे अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पर जोर दिया। 70 एक्सपर्ट्स को काम पर लगाया इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए 70 एक्सपर्ट्स को चुनकर विदिशा जिले की पांचों विधानसभा सीटों के हर ग्राम पंचायत और वार्ड में भेजा गया। एक्सपर्ट्स ने पंचायत और वार्ड में सबसे पहले कांग्रेस की कमजोरी की वजहों को लेकर रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद पंचायत और वार्ड समिति के लिए वैचारिक रूप से मजबूत कार्यकर्ताओं के नाम छांटे गए। बातचीत के बाद पंचायत और वार्ड समिति का गठन किया गया। इन समितियों के सदस्य अब गांव और वार्ड में कांग्रेस के लिए काम करेंगे। ऑनलाइन डेटा भी किया अपलोड फर्जी वोटर्स की पहचान से लेकर वोटरलिस्ट वेरिफिकेशन और चुनाव की तैयारी में ये समिति काम करेगी। विदिशा जिले में समितियों के गठन के बाद अब इस मॉडल पर प्रदेश के दूसरे जिलों में काम किया जाएगा। कांग्रेस ने विदिशा जिले की पंचायत और वार्ड समितियों का गठन करने के बाद ऑनलाइन डेटा अपलोड भी किया है। इसमें समिति के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर सहित तमाम जानकारी ऑनलाइन दर्ज की गई है। अब इन समितियों के वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर आगे संगठन के काम को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित किया जाएगा।

भोपाल कांग्रेस ने बुलाई बड़ी अहम बैठक, चले लात-घूंसे, जिला अध्यक्ष की दावेदारी को लेकर टकराव

 भोपाल   कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत मंगलवार को कांग्रेसियों में अचानक मारपीट शुरू हो गई। असल में एआईसीसी के पर्यवेक्षक भोपाल आए हुए हैं। वे यहां विधानसभा स्तर पर बैठकें कर जिलाध्यक्ष के दावेदारों से चर्चा कर रहे हैं। मंगलवार की शाम को भी यही कम चल रहा था, इसी बीच कांग्रेसी भिड़ गए। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो खूब वायरल हुआ।  बताया जा रहा कि यह घमासान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और कांग्रेस नेता साजिद अली के समर्थकों के बीच हुआ। दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस घटना ने कांग्रेस की संगठनात्मक एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बैठक में एआईसीसी पर्यवेक्षक यशोमति ठाकुर सहित कई बड़े और स्थानीय नेता मौजूद थे, जो भोपाल जिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा में व्यस्त थे। एक दूसरे पर किया केस घटना के बाद दोनों पक्षों के कार्यकर्ता एमपी नगर थाने पहुंचे और एक-दूसरे के खिलाफ शिकायती आवेदन दिए। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतें दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, यह हंगामा कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और कांग्रेस नेता साजिद अली के समर्थकों के बीच हुआ. दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए, जिसके बाद स्थिति बेकाबू हो गई. मारपीट और गाली-गलौज की इस घटना ने कांग्रेस की संगठनात्मक एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. बैठक में AICC पर्यवेक्षक यशोमति ठाकुर सहित कई वरिष्ठ और स्थानीय नेता मौजूद थे, जो भोपाल जिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा में व्यस्त थे. इस दौरान बाहर हुए इस हंगामे ने पार्टी के लिए शर्मिंदगी की स्थिति पैदा कर दी.  घटना के बाद दोनों पक्षों के कार्यकर्ता एमपी नगर थाने पहुंचे और एक-दूसरे के खिलाफ शिकायती आवेदन दिए. पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतें दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. इस घटना पर बीजेपी ने भी कांग्रेस पर तंज कसा. बीजेपी के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने X पर लिखा, “कांग्रेस की बैठक या कुश्ती प्रतियोगिता? भोपाल में कांग्रेस का संगठन सृजन अब संघर्ष सृजन बन गया है. जिला कांग्रेस की बैठक में आरिफ मसूद और साजिद अली के समर्थकों के बीच बहस नहीं, सीधे मारपीट हुई. आरोप लगा कि साजिद अली ने चुनाव में BJP का समर्थन किया- जवाब मिला, “बैठक में देशभक्तों की जरूरत नहीं.” फिर क्या था — बहस, धक्का-मुक्की और कुर्सियां चलने लगीं! अब समझ आया कि कांग्रेस में मन की बात नहीं, मुक्कों की बात होती है. अगली बैठक में डॉक्टर आएंगे या पुलिस? इंतज़ार कीजिए….”  बता दें कि ‘संगठन सृजन अभियान’ का शुभारंभ लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बीते 3 जून को भोपाल दौरे के दौरान किया था. इस अभियान के तहत कांग्रेस ने 61 पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया है, जो मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में पार्टी की स्थिति का आकलन कर रहे हैं. लेकिन इस तरह की घटनाएं पार्टी की आंतरिक कलह को उजागर कर रही हैं. भाजपा ने कसा तंज सोशल मीडिया पर इस घमासान का वीडियो खूब वायरल हुआ। प्रदेश भाजपा प्रभारी आशीष अग्रवाल ने वीडियो सांझा करते हुए लिखा कि कांग्रेस की बैठक या कुश्ती प्रतियोगिता। भोपाल में कांग्रेस का संगठन सृजन अब संघर्ष सृजन बन गया है। जिला कांग्रेस की बैठक में आरिफ मसूद और साजिद अली के समर्थकों के बीच बहस नहीं, सीधे मारपीट हुई। अगली बैठक में डॉक्टर आएंगे या पुलिस? इंतज़ार कीजिए।

कांग्रेस विधायक भैरो सिंह परिहार का वीडियो वायरल, RSS के साथ अच्छे रिश्तों का किया खुलासा

सुनसेर  कांग्रेस और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ दोनों की विचारधारा एकदम अलग है, लेकिन संघ का प्रभाव इतना व्यापक है कि कांग्रेसी भी इससे अछूते नहीं हैं। वैसे तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी लगातार आरएसएस को निशाने पर लेते रहते हैं, लेकिन अब उनके ही एक सिपाही का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में विधायक कह रहे हैं कि मैं कांग्रेस का विधायक हूं, लेकिन आरएसएस से भी जुड़ा हुआ हूं। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल वीडियो में क्या है सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो आगर-मालवा क्षेत्र का है। भैरो सिंह परिहार यहां की सुनसेर विधानसभा सीट से विधायक हैं। किसी संगठन के प्रोग्राम में शामिल होने के लिए भैरो सिंह पहुंचे थे। इस दौरान जब माइक उनके हाथ में आया तो वो आरएसएस के साथ अपनी नजदीकियां गिनवाने लगे। भैरो सिंह ने कहा कि वैसे तो वो कांग्रेस विधाय हैं, लेकिन आरएसएस से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस के कई पदाधिकारी उनके करीबी हैं और उन्होंने भी संघ के लिए कई काम किए हैं। इस दौरान भैरो सिंह ने हाल ही में हुए एक समझौते की भी याद दिलाई। 2 साल पहले भी करवाया था समझौता सुनसेर विधानसभा सीट से कांग्रेसी विधायक भैरों सिंह ने कहा कि उन्होंने आरएसएस के लिए काम किया है। इस दौरान परिहार ने एक वाक्या याद दिलाया जब गरोठ सीट से विधायक को पुलिस उठा ले गई थी। उन्होंने कहा कि उस समय जब मुख्यमंत्री आए थे तो उन्होंने मिलकर एक समझौता करवाया था। संघ पदाधिकारियों से शिकायत भी कांग्रेस विधायक भैरो सिंह वायरल वीडियो में संघ पदाधिकारियों से शिकायत करते भी सुनाई दे रहे हैं। भैरों सिंह का कहना है कि अगर वो अभी संघ कार्यालय चले जाएं तो मंडल अध्यक्ष कहेगा कि ना जाने ये कौन आ गया है। शिकायत करते हुए भैरों ने संघ के साथ अपनी नजदीकी और संगठन के लिए काम करने के इतिहास को सबके सामने खुलकर रखा। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग इस विषय में चर्चा कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश में पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए कांग्रेस के करीब ढाई सौ ऑब्जर्वर प्रक्रिया में जुटे

भोपाल  मध्य प्रदेश में पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए कांग्रेस के करीब ढाई सौ ऑब्जर्वर प्रक्रिया में जुट गए हैं. कांग्रेस प्रदेश के 55 जिलों में नए जिला और ब्लॉक अध्यक्ष का चयन करेगी. उधर जिले और ब्लॉक अध्यक्ष के लिए कांग्रेस ने उम्र का बंधन खत्म कर दिया है. जिले और ब्लॉक में पार्टी संगठन के लिए योग्य कार्यकर्ता को ही जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. हालांकि पार्टी ने साफ कर दिया है कि 2023 के चुनाव के दौरान बीजेपी छोड़कर कांग्रेस पार्टी में आए नेताओं को संगठन के इस चुनाव में तवज्जो नहीं दी जाएगी. कांग्रेस ने ऐसे बाहरी नेताओं के लिए लॉयटी टेस्ट की समय सीमा 5 साल निर्धारित कर दी है. कांग्रेस में 5 साल पूरे करने वाले आयातित नेता के नाम पर ही विचार किया जाएगा. 5 साल में पूरा होगा लॉयटी टेस्ट विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 3 जून को भोपाल में संगठन सृजन अभियान की शुरूआत की है. इस अभियान के तहत कांग्रेस ने 55 जिलों में 165 ऑब्जर्वर्स तैनात किए हैं. यह ऑब्जर्वर्स सभी जिलों में पहुंच गए हैं. पार्टी में जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष के लिए जमीनी स्तर पर नए नेतृत्व की तलाश शुरू कर दी है. कांग्रेस ने जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष के लिए उम्र का क्राइटेरिया निर्धारित नहीं किया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि “उम्र को लेकर कोई क्राइटेरिया नहीं है. इसमें योग्यता ही पैमाना होगा, जो सबसे योग्य व्यक्ति समन्वय का निकलेगा, जो पार्टी की विचारधारा के प्रति ईमानदार होगा, उसे ही मौका दिया जाएगा. जीतू पटवारी ने कहा कि पिछले 5 साल के दौरान बीजेप से कांग्रेस में आए नेताओं को अभी इसमें जगह नहीं दी जाएगी.    एआईसीसी को जाएगी रिपोर्ट संगठन सृजन के लिए ऑल इंडिया कांग्रेस ने 60 और प्रदेश कांग्रेस ने 180 पर्यवेक्षकों को नियुक्ति दी है. यह सब अब करीबन एक हफ्ते जिलों में रहेंगे और इसके बाद वहां के दौरे करते रहेंगे. इस दौरान स्थानीय कार्यकर्ताओं, प्रबुद्धजनों से चर्चा कर एक पैनल तैयार करेगी. इसमें जिले का जातिगत समीकरण का भी ध्यान रखा जाएगा. पहला चरण 30 जून तक चलेगा. एसआईसीसी से बनाए गए पर्यवेक्षक अपनी रिपोर्ट सीधे एआईसीसी को ही देगी.

कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत नए शहर अध्यक्ष के लिए रायशुमारी की जा रही

भोपाल कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत नए शहर अध्यक्ष के लिए रायशुमारी की जा रही है। अमृतसर सांसद गुरमीत सिंह औजला ने तीन दिन शहर में रहकर इसके लिए मंथन किया। इस दौरान कई नाम सामने आए, लेकिन प्रदेश प्रभारी के एक बयान से कई दावेदारों के माथे पर चिंता की लकीर है। नियुक्ति आम सहमति से की जाएगी एक दिन पहले प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी(Harish Chaudhary) और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया विभाग की वर्चुअली मीटिंग ली थी। इसमें चौधरी ने कहा था कि जिला अध्यक्षों की नियुक्ति आम सहमति से की जाएगी, लेकिन 45 वर्ष से अधिक के नेताओं को अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा। कई नेताओं की उम्र 45 वर्ष से अधिक इंदौर में दावेदारी करने वाले कई नेता 45 वर्ष से अधिक की उम्र के हैं। ऐसे में अरविंद बागड़ी, अश्विन जोशी जैसे नेताओं की दावेदारी खटाई में पड़ सकती है। हालांकि चौधरी ने विशेष परिस्थितियों में रियायत देने की बात भी कही है।

गुटबाजी खत्म करो, बदलाव चाहिए तो बताओ – मैं करूंगा’: भोपाल में राहुल गांधी का कांग्रेस नेताओं को सख्त संदेश

Rahul Gandhi’s strong message to Congress leaders in Bhopal भोपाल | लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को भोपाल में कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ की शुरुआत करते हुए पार्टी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया: गुटबाजी अब और नहीं चलेगी, सभी को मिलकर संगठन को मजबूत करना होगा। पार्टी संगठन को मिशन 2028 के तहत नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश के तहत राहुल गांधी ने एक ही दिन में पांच अहम बैठकें कीं। उन्होंने सभी नेताओं से साफ कहा, कोई भी फैसला ऊपर से नहीं थोपा जाएगा। आप मिलकर निर्णय लें, और अगर कोई बदलाव चाहिए, तो बताइए – मैं करूंगा। लेकिन पहले एकजुट हो जाइए। संगठन में नई जान फूंकने की कोशिश राहुल गांधी ने नेताओं को याद दिलाया कि पिछले बीस सालों में कांग्रेस का संगठन मध्य प्रदेश में कमजोर हुआ है और अब समय है इसे फिर से खड़ा करने का। उन्होंने संगठन को मजबूत, पारदर्शी और जनसरोकार से जुड़ा बनाने पर जोर दिया। कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ का लक्ष्य 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले स्थानीय और जिला स्तर पर संगठनात्मक ढांचे को पुनर्गठित करना है। राहुल गांधी ने कहा कि कार्यकर्ताओं की आवाज़ सुनी जाएगी और निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाएंगे, न कि ऊपर से थोपे जाएंगे।

3 जून को एमपी आएंगे Rahul Gandhi, 7 घंटे होगा स्टे, कांग्रेस पदाधिकारियों और विधायकों से करेंगे बात

Rahul Gandhi MP Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दो दिन बाद राहुल गांधी कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान की शुरुआत करेंगे। वे पदाधिकारियों, विधायकों और कार्यकर्ताओं से संवाद कर संगठन को धार देंगे। Rahul Gandhi MP Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के दौरे के दो दिन बाद 3 जून को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) भोपाल आएगे। वे संगठन सृजन अभियान की शुरुआत करेंगे। करीब सात घंटे के दौरे में पार्टी के पदाधिकारियों, विधायकों के अलावा कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करेंगे। उमंग सिंघार ने दी जानकारीविधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में यह जानकारी दी। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस संगठन प्रभारी संजय कामले, मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक भी मौजूद थे।सिंघार ने कहा, राहुल गांधी के मार्गदर्शन में शुरू होने वाला यह अभियान कांग्रेस को जमीनी स्तर पर और सशक्त करेगा। यह पहल युवाओं, किसानों, श्रमिकों और समाज के वंचित वर्गों को कांग्रेस के साथ वापस जोड़ने का माध्यम बनेगी। अभियान के तहत अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों, प्रदेश कार्यकारिणी, राजनीतिक मामलों की समिति और सभी जिला अध्यक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। उद्देश्य संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और स्पष्ट रणनीति तैयार करना है। ये है दौरे का पूरा शेड्यूलसुबह 11 से 12 : प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पॉलीटिकल अफेयर कमेटी की बैठक।दोपहर 12 से 12.30 विधायकों के साथ बैठक।दोपहर 12.30 से 1.30: पर्यवेक्षकों, प्रभारियों के साथ बात करेंगे।दोपहर 1.30 से 2.30: आरक्षित समय।दोपहर 2.30 से 4 : रवींद्र भवन में एआइसीसी डेलीगेट्स, पीसीसी डेलीगेट्स, जिलाध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्षों का अधिवेशन।

MP में जिला अध्यक्षों के चयन के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त, इन पर्यवेक्षकों को एआईसीसी ने दिए निर्देश

भोपाल  कांग्रेस ने जिला अध्यक्षों (MP congress Districts Presidents List) को महत्त्वपूर्ण बनाने के अहमदाबाद अधिवेशन के प्रस्ताव (Ahmedabad Session Proposal) पर काम शुरू हो गया है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के जिला अध्यक्षों के चयन के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। पर्यवेक्षकों की नियुक्ति को मंजूरी देने के साथ ही एआइसीसी (AICC) ने इन्हें तत्काल प्रभाव से अपना काम शुरू करने के लिए कहा है। संगठन सृजन अभियान के तहत 50 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति संगठन सृजन अभियान के तहत मध्यप्रदेश के लिए 50 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। मध्यप्रदेश के लिए सप्तगिरि उलाका, गुरदीप सिंह सप्पल, अखिलेश प्रताप सिंह, डॉ. अजय कुमार, विवेक बंसल, रिपुन बोरा, कृष्णा तीरथ सहित 50 नेताओं को रखा गया है। गुजरात का फार्मूला लागू करने की तैयारी कांग्रेस में अब गुजरात फार्मूला लागू करने की तैयारी है। इसके तहत पर्यवेक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। जिला इकाई गठन में केन्द्रीय और राज्य पर्यवेक्षकों की राय भी मायने रखेगी। इसे पार्टी में नये बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। असल में कांग्रेस में संगठन को और मजबूत किए जाने की कवायद चल रही है। प्रयास है कि सभी कार्यकर्ताओं को मौका मिले, सिर्फ नाम के लिए पदाधिकारी न हो।

कांग्रेस के कद्दावर नेता आनंद शर्मा ने नरेंद्र मोदी सरकार की तारीफ, जानें क्या कहा

नई दिल्ली पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से शशि थरूर लगातार मोदी सरकार के पक्ष में बात कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक पार्टी द्वारा इशारों में समझाने के बाद भी थरूर ने अपनी बात को सार्वजनिक रूप से रखना जारी रखा। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने भी मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की है। शर्मा ने वैश्विक स्तर पर आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की पोल खोलने और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत की राय रखने के लिए सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को विदेश भेजने के फैसले को महत्वपूर्ण पहल बताया है। वहीं कांग्रेस पार्टी ने इसे एक भटकाने वाली योजना के रूप में रेखांकित किया था। कांग्रेस पार्टी द्वारा दिए गए चार नामों में से केवल आनंद शर्मा को ही केंद्र सरकार ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया है। आने वाले दिनों में शर्मा अपनी टीम के साथ मिस्र, कतर और इथियोपिया की यात्रा करेंगे।  बात करते हुए शर्मा ने कहा, “हमारा क्षेत्र दशकों से सीमा पार आतंकवाद से पीड़ित है। ऐसे में इसे लेकर वैश्विक जनमत को संवेदनशील बनाना महत्वपूर्ण है। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई द्वारा पोषित आतंकवादी संगठनों ने भारत का बहुत खून बहाया है। हमने इस आतंकवाद की एक बड़ी कीमत चुकाई है। लेकिन इसके बाद भी हमने अपनी प्रतिक्रियाओं में संयम बरता.. आतंकवाद को लेकर बहुत कम देश ऐसे होते हैं, जो संयमित हो सकते हैं .. लेकिन भारत ने ऐसा किया। पहलगाम के बाद हमने जवाबी कार्रवाई की लेकिन यह एक मापी हुई कार्रवाई थी, जिसे हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया था।” आपको बता दें शशि थरूर के बाद अब आनंद शर्मा ने भी ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की कार्रवाई पर सरकार के प्रति नरम रुख अपनाया है, जबकि कांग्रेस पार्टी इस मामले को लेकर केंद्र पर हमलावर बनी हुई है। बुधवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सर्वदलीय सांसदों को विदेश भेजने के फैसले को केंद्र सरकार द्वारा सवालों से बचने और ध्यान भटकाने का तरीका बताया। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि 1950 के बाद हर अक्टूबर-नवंबर में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र का दौरा करता था लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में इस परंपरा को खत्म कर दिया। अब जबकि वैश्विक स्तर पर वह हताश हैं और उनकी छवि को धक्का लग चुका है तब वह दोबारा से सर्वदलीय सांसदों को विदेशों में भेजने का फैसला ले रहे हैं।

सेना किसी नेता के चरणों में नतमस्तक नहीं होती, बल्कि वह सिर्फ भारत माता के प्रति समर्पित रहती है – कांग्रेस सैनिक प्रकोष्ठ

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के बयान को लेकर कांग्रेस लगातार विरोध दर्ज कर रही है। इसी कड़ी में अब भूतपूर्व सैनिक भी उतर आए हैं। पीसीसी में शनिवार को कांग्रेस सैनिक प्रकोष्ठ ने मंत्री विजय शाह और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के बयानों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय सेना किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति की नहीं, बल्कि संविधान और राष्ट्र की सेवा करती है। सेना किसी नेता के चरणों में नतमस्तक नहीं होती, बल्कि वह सिर्फ भारत माता के प्रति समर्पित रहती है। बतौर पूर्व सैनिक हमें सेना के अपमान ने बहुत आघात पहुंचाया है। अगर नेताओं के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं होगी, तो देशभर के पूर्व सैनिक सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा की तोड़ मरोड़कर बयान पेश करने की दलील गलत है। सरकार ने नहीं की कोई ठोस कार्रवाई मेजर श्याम सुंदर ने कहा कि इस विवादित बयान पर अभी तक सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि जब हमारी सेना देश की रक्षा में जान तक देने को तैयार है, तो फिर उसके सम्मान पर चोट करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? अगर सरकार ने समय पर कार्रवाई की होती, तो सैनिकों का मनोबल बना रहता। लेकिन इस चुप्पी से जवानों में दुख और आक्रोश है। वोट बैंक की राजनीति में अब सेना को खींचा जा रहा मेजर श्याम सुंदर ने कहा कि यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं रहा, बल्कि यह साफ दर्शाता है कि वोट बैंक की राजनीति में अब सेना को भी खींचा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सेना देश के लिए नतमस्तक होती है, न कि किसी पार्टी के लिए। राजनीति में सीमा का ध्यान रखना चाहिए। जो देश के जवान के मनोबल को तोड़ने का काम करेगा, वह देशद्रोही के समान होगा। सैनिकों को पहले दिन से सिखाया जाता है देश सबसे ऊपर समाजवादी पार्टी द्वारा दिए गए बयान पर भी उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि सेना के पहले दिन से ही सैनिकों को सिखाया जाता है कि देश सबसे ऊपर है। ऐसे में कोई भी नेता या दल यदि व्यक्तिगत या सांप्रदायिक टिप्पणी करता है, तो वह भारत के सशस्त्र बलों का अपमान करता है। सरकार को खुल कर देनी चाहिए प्रतिक्रिया उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर कोर्ट ने संज्ञान लिया है, लेकिन यह विषय इतना गंभीर है कि सरकार को भी खुलकर प्रतिक्रिया देनी चाहिए। हमें सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार जरूर है, लेकिन सरकार की चुप्पी बहुत खलती है। यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता और सैनिकों का आक्रोश सड़कों पर दिखेगा।मेजर श्याम सुंदर ने कहा कि ट्रुप्स का धर्म ही अफसर का धर्म होता है। मैं एक ऐसे अफसर को जानता हूं, जो अपने जवानों के रोजा रखने पर स्वयं भी रोजा रखते थे। यही समर्पण हमारी सेना को दुनिया में सबसे अलग बनाता है। हमारी सेना अनुशासन में विश्वास रखती है, और नेतृत्व की भावना उसमें बचपन से ही सिखाई जाती है। अगर करनाल सोफिया कुरैशी का चयन हुआ है, तो वह निश्चित रूप से एक उत्कृष्ट अधिकारी रही होंगी। उनके खिलाफ आपत्तिजनक बयान देना सेना का अपमान है और इससे गलत संदेश फैलता है।

कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को बूथ मैनेजमेंट से लेकर आभासी दुनिया में मज़बूत करेगी, लगेगा स्पेशल ट्रेनिंग कैंप

भोपाल मध्य प्रदेश की सत्ता से करीब 2 दशक से बाहर कांग्रेस पार्टी अब आगामी 2028 विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को नए सिरे से तैयार करने में जुट गयी है. यह तैयारी ज़मीन पर बूथ मैनेजमेंट से लेकर आभासी दुनिया यानि वर्चुअल वर्ल्ड में कांग्रेस को कैसे मज़बूत करना है, उसकी होगी. जिसमें नेताओं और कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गुर सिखाये जायेंगे. सबसे खास बात यह है कि इसका खर्चा नेता और कार्यकर्ता खुद उठाएंगे. इसके लिए AICC ट्रेनिंग डिपार्टमेंट के प्रमुख सचिन राव अपनी टीम के साथ 9 जून से 15 जून तक मध्यप्रदेश में रहेंगे और सर्वोदय मेथोडोलॉजी को अपनाते हुए किसी शांत जगह पर यह ट्रेनिंग कैंप लगाया जायेगा. सबसे बड़ी बात है कि कांग्रेस के सभी विधायकों और जिला अध्यक्षों समेत सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस प्रशिक्षिण शिविर में आना अनिवार्य होगा, जिसके लिए एक निश्चित शुल्क उनसे लिया जायेगा. एमपी कांग्रेस के अभिनव बरोलिया ने बताया कि सर्वोदय कैंप पहले भी आयोजित होते रहे हैं लेकिन अब नए ज़माने की नई तकनीक को भी इस बार शामिल किया जायेगा. प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी चाहते हैं कि कार्यकर्ताओं को बीजेपी के संगठन से मुकाबले के लिए हर मोर्चे पर तैयार करना पड़ेगा इसलिए इस कैंप का आयोजन किया जा रहा है. बीजेपी जिस तरह से सोशल मीडिया में नैरेटिव बनाती है और फेक न्यूज़ फैलाती है उसे कैसे पहचानें और कांग्रेस के खिलाफ होने वाले दुष्प्रचार को कैसे रोका जाये, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस पार्टी का देश की आज़ादी और विकास में क्या योगदान रहा इसे जनता तक पहुंचाने की ट्रेनिंग दी जाएगी. इसके अलावा नेताओं और कार्यकर्ताओं को बताया जायेगा कि वो कैसे प्रवास पर रहें, प्रवास के दौरान लोगों से मिले, कार्यकर्ताओं के घर खाना खाएं या जिस इलाके में प्रवास पर हों वहां के लोगों के साथ समय बिताएं यह सारी बातें इस सर्वोदय कैंप में बताई जाएगी.

कांग्रेस शहर अध्यक्ष के लिए कई नए नाम सामने आने से समीकरण भी बदल रहे, दीपू यादव और चिंटू चौकसे पर चर्चा

इंदौर  एमपी के इंदौर शहर में कांग्रेस के जिला-शहर अध्यक्ष के बदलाव को लेकर चल रही कवायद फिर से तेज हो गई है। माना जा रहा था कि गुजरात अधिवेशन के बाद इंदौर के जिला और शहर कांग्रेस अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। इसके बाद पिछले दिनों भोपाल के अलावा प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली में नामों को लेकर बड़े नेताओं से चर्चा की थी। शहर अध्यक्ष के लिए कई नए नाम सामने आने से समीकरण भी बदल रहे हैं। हटाने की कवायद तेज मालूम हो कि लंबे समय तक शहर अध्यक्ष पद खाली रहने के बाद सुरजीत सिंह चड्ढा को कुर्सी मिली थी। वे कमलनाथ के प्रदेश अध्यक्ष होने के समय बनाए गए थे। विधानसभा की सभी सीटें हारने के बाद चड्ढा और जिला अध्यक्ष सदाशिव यादव को हटाने की कवायद चल रही है। गांधी भवन में कैलाश विजयवर्गीय की आवभगत करने के बाद अध्यक्ष बड़े नेताओं के निशाने पर हैं। चड्ढा को जब अध्यक्ष बनाया था तब अरविंद बागड़ी और अमन बजाज ही दावेदार थे। इन नामों पर चर्चा अब नए समीकरण के तहत नए नाम सामने आए हैं। इनमें दीपू यादव और चिंटू चौकसे का नाम सामने आया है। बताया जाता है कि चिंटू राजी नहीं है। ऐसे में यादव के नाम पर विचार चल रहा है। जिला अध्यक्ष के लिए राधेश्याम पटेल दावेदार है। बताया जा रहा है कि दावेदारों ने अपने नेताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।

करनाल पहुंचे राहुल गांधी: लेफ्टिनेंट के परिवार से की मुलाकात, पहलगाम आतंकी हमले मारे गए थे विनय नरवाल

पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के परिवार से मिलने के लिए कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी आज करनाल पहुंचे। राहुल गांधी दिल्ली स्थित अपने आवास से सुबह करनाल के लिए रवाना हुए थे। उनके आगमन को देखते हुए शहीद के सेक्टर-7 स्थित आवास पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। जानकारी के अनुसार, रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा और हरियाणा यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष दिव्यांशु बुद्धिराजा पहले ही विनय नरवाल के घर पहुंच चुके हैं। राहुल गांधी शहीद की पत्नी हिमांशी नरवाल और उनके परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। बता दें कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में लेफ्टिनेंट विनय नरवाल मारे गए थे। वे अपनी पत्नी हिमांशी के साथ हनीमून के लिए पहलगाम गए थे, जहां आतंकियों ने उनकी हत्या कर दी।

नागरिकता विवाद में राहुल गांधी को राहत: हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, केंद्र पर उठाए सवाल

Relief to Rahul Gandhi in citizenship dispute: High Court dismisses petition, raises questions on Centre लखनऊ। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की नागरिकता को चुनौती देने वाली याचिका को लखनऊ हाईकोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से अस्पष्ट जवाब दिए जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि जब तक केंद्र कोई स्पष्ट स्थिति नहीं रखता, तब तक याचिका को लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को अन्य कानूनी रास्ते अपनाने की स्वतंत्रता दी है। यह मामला पिछले कुछ वर्षों से सुर्खियों में बना हुआ था, जिसमें राहुल गांधी पर ब्रिटेन की एक कंपनी के डायरेक्टर पद पर रहते हुए खुद को “ब्रिटिश नागरिक” बताने का आरोप लगाया गया था। याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर, जो कर्नाटक के निवासी और भाजपा से जुड़े हैं, ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया कि यदि राहुल गांधी ने स्वयं को ब्रिटिश नागरिक बताया है, तो भारतीय नागरिकता कानून 1955 के अनुसार उनकी नागरिकता रद्द की जानी चाहिए और वे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित किए जाएं। हाईकोर्ट की टिप्पणी और केंद्र की भूमिका कोर्ट की खंडपीठ जिसमें न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति राजीव सिंह शामिल थे, ने कहा कि केंद्र सरकार याचिकाकर्ता की शिकायत के निपटारे के लिए कोई समयसीमा नहीं दे पा रही है। ऐसे में याचिका पर विचार जारी रखना व्यर्थ होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले में अन्य वैकल्पिक विधिक उपायों के लिए स्वतंत्र है। इससे पहले 21 अप्रैल को हुई सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है, और इसमें देरी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या राहुल गांधी भारतीय नागरिक हैं या नहीं—और 10 दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। लेकिन 10 दिन की समयसीमा बीतने के बाद भी सरकार की ओर से ठोस जवाब नहीं आया। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सूर्यभान पांडेय ने कोर्ट में केंद्र की ओर से स्थिति रिपोर्ट पेश की थी, जिसे कोर्ट ने अपर्याप्त” बताया था। इसके बाद कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ही मामले की गंभीरता को नहीं समझ रही, तो कोर्ट के पास याचिका खारिज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। याचिकाकर्ता के आरोप क्या थे? याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने दावा किया था कि राहुल गांधी ने वर्ष 2005-2006 में ब्रिटेन की एक कंपनी, ‘BackOps Limited’ में डायरेक्टर के रूप में खुद को “British citizen” बताया था। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के 2022 के एक गोपनीय मेल का भी हवाला दिया और कहा कि राहुल गांधी की नागरिकता संदिग्ध है। याचिका में यह भी कहा गया कि यदि राहुल गांधी वास्तव में ब्रिटिश नागरिक रहे हैं या दोहरी नागरिकता रखते हैं, तो भारतीय कानून के अनुसार उन्हें संसद सदस्य बने रहने और चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं है। भारतीय नागरिकता अधिनियम की धारा 9(2) के तहत याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी की नागरिकता को समाप्त करने की मांग की थी। Read More: मध्यप्रदेश में मंजूरी के 4 दिन बाद तबादला नीति जारी: आधी रात के बाद आदेश; जिनकी परफॉर्मेंस खराब, उनको पहले बदलेंगे पिछली सुनवाइयों का विवरण Rahul Gandhi in citizenship dispute मामले की सुनवाई कई चरणों में हुई। 24 मार्च को कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था, लेकिन सरकार ने आठ सप्ताह का समय मांगा। 19 दिसंबर 2024 को जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने केंद्र सरकार को यूके सरकार से संपर्क कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था। इसके बाद गृह मंत्रालय ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने ब्रिटिश सरकार को पत्र लिखा है और जांच जारी है। राहुल गांधी की ओर से चुप्पी Rahul Gandhi in citizenship dispute इस पूरे मामले के दौरान कोर्ट में राहुल गांधी की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ, जिससे कई सवाल खड़े हुए। हालांकि, कांग्रेस पार्टी या राहुल गांधी की ओर से सार्वजनिक रूप से इस याचिका पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इससे मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक प्रकृति और भी गहरी हो जाती है। क्या आगे की कार्रवाई होगी? हालांकि हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है, लेकिन यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि याचिकाकर्ता अन्य वैधानिक विकल्पों के लिए स्वतंत्र हैं। इसका अर्थ यह है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य मंच पर चुनौती के रूप में फिर से उठाया जा सकता है। राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर उठे सवाल और कोर्ट की टिप्पणी दोनों ही भारतीय राजनीति में संवेदनशील और अहम हैं। हाईकोर्ट ने फिलहाल याचिका खारिज कर एक स्पष्ट संकेत दिया है कि जब तक केंद्र खुद ठोस जानकारी नहीं देता, तब तक न्यायपालिका इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दे सकती। अब देखना होगा कि क्या याचिकाकर्ता इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर जाते हैं या केंद्र सरकार इस पर कोई नई स्थिति स्पष्ट करती है।

सरकार बेच रही गली गली शराब, अवैध दुकानों की भरमार :पंकज उपाध्याय

The government is selling liquor in every street, there are many illegal shops: Pankaj Upadhyay आज जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने सरकार एवं मुरैना प्रशासन पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि जब से शासन ने नए ठेके दिए हैं तब से शराब की बिक्री लगभग चौगुनी हो गई है प्रत्येक गांव के हर नुक्कड़ चौराहे पर एक शराब का ठेला रख दिया गया है गली-गली में शराब बिक रही है जौरा क्षेत्र के कई स्वयंसेवी संस्थाओं स्कूल के बच्चों युवाओं एवं माता बहनों ने बार-बार आकर कहा है कि हमारी गली मोहल्ले में शराब की बिक्री बहुत ज्यादा  बढ़ गई है अवैध दुकानों की अंबार आ गया है ग्राम परसोटा में एक धार्मिक आयोजन में ग्राम वासियों ने पंकज उपाध्याय से शिकायत की की जैन तीर्थ टिकटोली दमदार के मुख्य मार्ग पर शराब ठेकेदारों ने शराब की दुकान खोल रखी है जिससे जैन श्रद्धालु आसपास के महिलाएं बच्चे बहुत परेशान होते हैं शराबी बीच रोड पर शराब पीते हैं शराब की दुकान के सामने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आंगनबाड़ी पंचायत भवन जैसी संस्थाएं हैं तब भी शासन प्रशासन की नजर इस गोरख धंधे पर नहीं पड़ रही विधायक ने चेतावनी देते हुए प्रशासन से कहा कि अगर 8 दिन में अवैध शराब की दुकान एवं धार्मिक स्थलों बस स्टैंड और मुख्य मार्गो से शराब की दुकान नहीं हटाई गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा जिसकी समस्त जवाबदारी शासन प्रशासन की रहेगी

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